Home Blog Page 2705

हिन्दू नाबालिग से जबरन कबूल करवाया इस्लाम, फिर 30 वर्षीय मुस्लिम महिला संग करवाया निकाह: कानपुर की घटना

यूपी के कानपुर में एक हिन्दू नाबालिग लड़के को इस्लाम कबूल करवाकर जबरन निकाह का मामला सामने आया है। घटना कानपुर के काकादेव थाना क्षेत्र के नवीन नगर की है, जहाँ रविवार (22 मई, 2022) को एक परिवार ने अपने 16 वर्षीय बेटे का बहला फुसलाकर मतांतरण कराने और 30 वर्षीय शादीशुदा मुस्लिम महिला से निकाह कराने के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम महिला की पहचान मोहम्मद हनीफ की बेटी सिमरन के रूप में हुई जो एक बच्चे की माँ भी बताई जा रही है। इस मामले में परिवार को तब पता लगा जब निकाह का वीडियो वायरल हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक घटना की जानकारी मिलते ही नाबालिग का परिवार काकादेव थाने पहुँचा लेकिन कहा जा रहा है कि पुलिस ने पहले अनसुना कर दिया। तब परिवार के लोगों ने बजरंगदल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख आशीष त्रिपाठी से संपर्क किया। वहीं मामले की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता भी थाने पहुँच गए। कहा जा रहा है कि बजरंग दल के हंगामे के बाद ही पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।

काकादेव निवासी नाबालिग लड़के के परिवार ने बताया कि उनका 16 वर्षीय बेटा जाजमऊ निवासी दूसरे समुदाय (मुस्लिम) की एक शादीशुदा महिला के संपर्क में था, महिला के एक बच्चा भी है। महिला ने उसे बहाने से बुलाया और घर पर मौलवी बुलवाकर उसे इस्लाम कबूल कराने के बाद उससे निकाह कर लिया। कहा जा रहा है कि बेटे ने जब घर लौटकर इस्लाम धर्म में मतांतरण और निकाह की जानकारी दी तो परिवार के होश उड़ गए।

बता दें कि एडीसीपी बृजेश श्रीवास्तव ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए नाबालिग लड़के की माँ की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। इस बीच पुलिस ने महिला, नाबालिग किशोर और निकाह पढ़ाने वाले मौलाना समेत पाँच लोगों को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल, पुलिस 5 लोगों से पूछताछ में लगी है। वहीं निकाह करवाने वाली महिला की मौसी की भी तलाश की जा रही है।

गौरतलब है कि एडीसीपी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना कर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं बजरंग दल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख ने बताया कि मौलवी का घर पर किशोर को कलमा पढ़ाते हुए वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हुआ है। ऐसे में मौलवी और उसके गिरोह को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘अगले 30 वर्षों तक BJP के इर्दगिर्द ही घूमेगी देश की राजनीति’: ‘नया बिहार’ पर भी बोले PK, कहा – हजार लोग साथ आकर बनाएँगे पार्टी, नेता तय नहीं

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि अगले 20-30 वर्षों तक देश की राजनीति भाजपा के ही इर्दगिर्द घूमेगी, या तो आप पार्टी के साथ हैं या फिर विरोध में। प्रशांत किशोर ने इस दौरान अपने जीवन को लेकर भी बात की और कहा कि वो ‘सफल’ होना चाहते हैं। उनके अनुसार, सफलता की परिभाषा ये है कि आप कितने ज्यादा से ज्यादा लोगों के जीवन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक ब्यूटी कंटेस्ट में प्रतिभागी बदलाव लाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य अभिनय या मॉडलिंग में करियर बनाना ही होता है।

प्रशांत किशोर ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ द्वार आयोजित ‘E. Adda’ में कहा कि भाजपा चुनावी रूप से काफी मजबूत पार्टी हो गई है और भारत में एक बार आप 30% वोट सुरक्षित कर लेते हैं तो आप कई दशकों तक टिकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘जो ऊपर जाता है, उसे नीचे आना ही है’ वाली कहावत मीडियम का लॉन्ग रन में सही हो सकती है, लेकिन जैसे आज़ादी के बाद 40-50 वर्षों तक राजनीति कॉन्ग्रेस के इर्दगिर्द घूमती रही, वैसे ही अगले 20-30 सालों तक भाजपा के साथ होगा।

उन्होंने इतिहास की बात करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद के कुछ दशकों में 1977 के अलावा कोई भी पैन इंडिया पार्टी कॉन्ग्रेस को टक्कर नहीं दे पाई। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता की प्रक्रिया काफी लंबी चलती है। उन्होंने कहा कि सही चीजें नहीं हुईं तो कोई विपक्षी पार्टी या गठबंधन अगले कई वर्षों तक पैन-इंडिया पहुँच के साथ नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि 1984 के बाद से कॉन्ग्रेस कभी अपने दम पर सत्ता नहीं जीत पाई, यूपीए भी गठबंधन सरकार थी।

उन्होंने गिनाया कि कॉन्ग्रेस की चुनावी गिरावट तभी से चालू हो गई थी। उन्होंने कहा कि भारत में 60 करोड़ लोग रोज 100 रुपए से भी कम कमाते हैं, वहाँ विपक्ष को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि विपक्षी एकजुटता या गठबंधन मजबूत हो जाएगा। उन्होंने शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि चेहरा न होने के बावजूद आप नैरेटिव सही कर के चीजों को ठीक कर सकते हैं, एक मुद्दा चुन कर एकाध साल के लिए उस पर अड़े रह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी विपक्ष को पिछले कुछ वर्षों में आम लोगों या कोविड पीड़ितों की आवाज़ उठाते हुए देखा? साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से काम नहीं चलता। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए सही मैसेज होना चाहिए, जिसे एक सही मैसेंजर (चेहरे) द्वारा जनता को पहुँचाया जाए, इसके बाद पार्टी मिशनरी को इसे अभियान में बदलना होता है। इस दौरान उन्होंने अपनी अगली योजना की भी बात की।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में बदलाव के लिए वो जनता के बीच जाकर यात्रा करेंगे और जानेंगे कि क्या-क्या किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजद के काल में सामाजिक न्याय की बात कही जाती है, उसके बाद नीतीश कुमार के काल में आर्थिक विकास की बात कही जाती है – इन 30 वर्षों के बाद भी बिहार देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य है। उन्होंने कहा कि विकास के मानकों पर बिहार सबसे नीचे हैं, लेकिन लालू-नीतीश काल से आगे अग्रणी आने के लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।

हालाँकि, उन्होंने माना कि ये किसी एक व्यक्ति के बाद की बात नहीं। उन्होंने कहा कि बिहार में कई लोग ऐसे हैं जो बदलाव के लिए क्या करना चाहिए, ये जानते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग साथ आकर राजनीतिक पार्टी के गठन की बात करते हैं तो वो भी होगा, लेकिन ये प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा बल्कि जो इसके संस्थापक साथ आएँगे – उनका होगा। उन्होंने खुद को कैटेलिस्ट बताते हुए कहा कि वो बस बदलाव लाने वालों को साथ लाना चाहते हैं, उन्हें नहीं पता कि नेता वो होंगे या कोई और।

उन्होंने बताया कि कहीं उन्होंने अपना चेहरा तक नहीं लगाया है, बल्कि महात्मा गाँधी को रखा है। उन्होंने बताया कि बिहार के 17-18 हजार लोगों तक वो पहुँचे हैं, जिनमें कई शिक्षक, पूर्व अधिकारी और समाजसेवी जैसे लोग हैं। उन्होंने कहा कि सह-संस्थापक के रूप में कितने लोगों को साथ लाया जा सकता है, ये वो सबसे मिल कर तय करेंगे। उन्होंने कहा कि 1000-1200 लोग साथ आकर पार्टी बनाएँगे। उन्होंने ये भी कहा कि राजनीतिक दल या पार्टी गाँधी का प्रयोग सही से नहीं कर रहे हैं।

पाकिस्तान में कराची में छिपा है दाऊद इब्राहिम: हसीना पारकर के बेटे ने ED को मामू का ठिकाना बताया, रिपोर्टों में दावा

भगोड़े आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में ही छिपे होने की फिर से पुष्टि हुई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर के बेटे अलीशाह पारकर ने ED को बताया कि वह अभी पाकिस्तान के कराची में है।

हसीना के बेटे ने बताया कि उसका परिवार और वह दाऊद के संपर्क में नहीं है। हालाँकि दाऊद की बीबी महजबीन त्योहारों के दौरान उसकी पत्नी और बहनों से संपर्क करती है। पारकर ने अपने बयान में कहा, “दाऊद इब्राहिम मेरे मामा हैं और वह 1986 तक दक्षिण मुंबई में डंबरवाला इमारत की चौथी मंजिल पर रहते थे। मैंने विभिन्न सूत्रों और रिश्तेदारों से सुना है कि दाऊद इब्राहिम कराची में है।”

उसने कहा, “मेरे पैदा होने से पहले ही वह वह कराची चले गए थे। न मैं और न ही मेरे परिवार के सदस्य उनके संपर्क में हैं। कभी-कभी, ईद, दीवाली और अन्य उत्सव के अवसरों पर, मेरी मामी महजबीन और मेरे मामा मेरी बीबी आयशा और मेरी बहनों से संपर्क करते हैं।” इस दौरान अलीशाह पारकर ने अपनी अम्मी हसीना पारकर की गतिविधियों का भी खुलासा किया। उसने कहा, “मेरी माँ वाकई में एक गृहिणी थी, लेकिन वह आजीविका के लिए कुछ छोटे-मोटे वित्तीय लेन-देन (Financial Dealings) किया करती थी।”  

अली ने बताया, “वह (हसीना पारकर) अपने स्वामित्व वाली संपत्तियों से किराया लेती थी। जिसे अपने बिजनेस के लिए पैसे की जरूरत होती थी, वह उन लोगों को 3 से 5 लाख रुपए तक की रकम उधार देती थी। इसी से वह लाभ कमाती थी।” 

अलीशाह ने आगे बताया कि उसकी अम्मी रियल एस्टेट में भी निवेश करती थी। उसने दावा किया, “दाऊद इब्राहिम की बहन होने के नाते, मेरी अम्मी हमारे समाज में एक जानी-मानी शख्सियत थीं, वह संपत्ति से जुड़े विवादों को सुलझाती थीं।” बता दें कि हसीना पारकर की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही पारकर ने जाँच एजेंसी को बताया कि दाऊद इब्राहिम 1986 के आसपास भारत छोड़ गया था। दाऊद इब्राहिम संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित वैश्विक आतंकी फाइनेंसर भी है।

इससे पहले राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने डी-गैंग से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा था। ये छापेमारी मुंबई के 20 स्थानों पर हुई थी। NIA ने बोरिवली, सांताक्रूज, बांद्रा, नागपाड़ा, गोरेगाँव, परेल के 20 ठिकानों पर छापे मारे। ये छापे दाऊद और उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दर्ज FIR पर आधारित थी। डी कंपनी संयुक्त राष्ट्र द्वारा बैन आतंकी संगठन है, जिसे दाऊद इब्राहिम द्वारा संचालित किया जाता है। दाऊद 1993 में हुए मुंबई धमाकों का मुख्य आरोपित है, जिसे 2003 में यूएन ने ग्लोबल आतंकी माना था।

पिछले दिनों मुंबई की एक विशेष अदालत ने दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच में महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता नवाब मलिक के डी गैंग से लिंक होने की बात अदालत ने भी मानी थी। नवाब मलिक फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद हैं। कोर्ट ने कहा था कि इस बात के सबूत हैं कि मलिक सीधे तौर पर और जानबूझकर कुर्ला स्थित गोवावाला कंपाउंड पर कब्जा करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश में शामिल थे। उन्होंने D-कंपनी की सदस्य मसलन, हसीना पारकर, सलीम पटेल और सरदार खान के साथ मुनिरा प्लंबर से संबंधित प्रॉपर्टी हड़पने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। 

कुतुब मीनार की खुदाई नहीं होगी, पूजा-पाठ भी नहीं कर सकते: ASI ने कोर्ट को बताया- बिना इजाजत नमाज पढ़ रहे थे मुस्लिम

दिल्ली स्थित कुतुब मीनार के सम्बन्ध में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)’ ने बताया है कि यहाँ किसी भी धर्म के पूजा-पाठ या नमाज की अनुमति नहीं है। हिन्दू पक्ष ने यहाँ पूजा-पाठ के लिए याचिका दायर की थी, जिसका ASI ने अदालत में विरोध किया है। संस्था ने कहा कि इसकी पहचान को बदली नहीं जा सकती। दिल्ली के साकेत कोर्ट में दायर याचिका में यहाँ जैन और हिन्दू समाज को पूजा-पाठ की अनुमति की माँग की गई थी।

ASI से इस सम्बन्ध में न्यायपालिका ने जवाब माँगा था, जिसे अब दायर कर दिया गया है। संस्था ने कहा कि कुतुब मीनार सन् 1914 से ही ‘संरक्षित स्मारकों’ की सूची में आता है और इसके बाद से इसमें कभी पूजा हुई ही नहीं, इसीलिए अब न तो इसकी पहचान बदली जा सकती है और न ही इसमें पूजा-पाठ की अनुमति दी जा सकती है। संस्था ने हिन्दू पक्ष की याचिका को कानूनी तौर पर वैध नहीं बताया। साथ ही कहा कि प्राचीन मंदिरों को तोड़ कर कुतुब मीनार के निर्माण की बातें ऐतिहासिक तथ्यों का मामला है।

ASI ने इसे पुरातात्विक महत्व का स्मारक बताते हुए कहा कि इसके 1958 में आए अधिनियम में कहा गया है कि यहाँ सिर्फ पर्यटन की अनुमति है, पूजा-पाठ की नहीं। ASI ने कहा कि किसी भी धर्म/मजहब के मतावलंबी यहाँ पूजा-पाठ नहीं कर रहे थे। याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि कैसे 27 मंदिरों के अवशेष कुतुब मीनार परिसर में बिखरे पड़े हैं और इसे लेकर इतने साक्ष्य हैं कि कोई नकार नहीं सकता। उन्होंने बताया कि ये साक्ष्य ASI के दस्तावेजों और पुस्तकों से ही लिए गए हैं।

ASI द्वारा प्रकाशित संक्षिप्त इतिहास का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि मुहम्मद गोरी की सेना के कमांडर कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 मंदिरों को ध्वस्त कर के इसी परिसर में ‘कुव्वत-उल-इस्लाम’ के ढाँचे को खड़ा किया। साथ ही बताया कि इसमें भगवान गणेश, विष्णु और यक्ष समेत कई देवी-देवताओं की चित्र एवं प्रतिमाओं सहित कुओं के साथ कमल के फूल, और कलश जैसी आकृतियाँ हैं, जो इसके सनातनी होने के सबूत हैं।

वहीं क़ुतुब मीनार में नमाज की भी अनुमति नहीं मिलेगी। ASI ने कहा है कि ये एक निर्जीव स्मारक (Non Living Monument) है, इसीलिए ऐसे अन्य स्थलों की तरह यहाँ भी पूजा-पाठ, नमाज या किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों की मनाही है। बता दें कि यहाँ मुस्लिमों ने आकर नमाज पढ़नी शुरू कर दी थी और बिना अनुमति कई वर्षों से ऐसा चल रहा था। नमाजियों से जब अनुमति सम्बंधित दस्तावेज दिखाने को कहा गया तो वो कुछ नहीं दिखा पाए, जिसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

इसी तरह फोर्ज्शाह कोटला स्मारक में नमाज पढ़ी जाने लगी थी, जिसके बाद सख्ती बरतते हुए ASI को इस पर रोक लगानी पड़ी थी। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी साफ़ किया है कि कुतुब मीनार की खुदाई की फ़िलहाल कोई योजना नहीं है। 2005-06 में 4 मुस्लिमों ने यहाँ नमाज पढ़नी शुरू की थी, जो संख्या 2010 तक 40 पहुँच गई। ASI ने कहा कि नमाज की अनुमति ही नहीं थी, तो बंद कराए जाने की बात कहाँ से आ गई।

दिल्ली में विस्फोट करवाने वाले ईरानी कर्नल हसन सैयद की अपने ही घर के बाहर हत्या: इजरायल ने 10 साल बाद लिया बदला

10 साल पहले साल 2012 में दिल्ली में हुए कार विस्फोट में एक इजरायल राजनयिक को निशाना बनाया गया था। हमले की साजिश ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कर्नल ‘हसन सैयद खोदयारी’ ने रची थी। अब खबर है कि ईरान की राजधानी तेहरान में घुसकर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने हसन को मौत के घाट उतार दिया है। उसकी मौत की पुष्टि ईरान इंटरनेशनल द्वारा की गई है। अब अंतिम संस्कार मंगलवार (24 मई 2022) को तेहरान में ही किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक कई हाई प्रोफाइल इजरायली राजनयिकों पर हुए हमलों के पीछे यही कर्नल मास्टरमाइंड था। उसने साल 2012 में नई दिल्ली में विस्फोट करवाया था ताकि वो इजरायल राजनियक को खत्म कर सके। इस हमले में राजनयिक की पत्नी चोटिल हुई थीं और उनका ड्राइवर व दो अन्य नागरिक भी हल्का घायल हुए थे।

घटना के बाद थायलैंड में भी इजरायल अधिकारियों को मारने के लिए सिलसिलेवार ढंग से बमबारी हुई थी जिसका इल्जाम खोदयारी पर लगा था। इसके अलावा इजरायल, तुर्की, केन्या, कोलंबिया और सिपरस में हुई इजरायलियों की हत्या और किडनैपिंग में भी हसन को शामिल बताया जाता है।

बता दें कि अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि मोसाद ने ही हसन सैयद को गोली मारी। लेकिन पिछले रिकॉर्ड देखकर यही अंदाजा लग रहा है कि ये काम इजरायल की खुफिया एजेंसी का ही है। ईरान के राष्ट्रपति ने कसम खाई है कि वो खोदयारी की हत्या का बदला लेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हसन को उसके घर के बाहर गोली मारी गई। हमलावर बाइक से आए थे। उन्होंने कर्नल के सीने में 5 गोली मारी। जब तक कोई वहाँ आसपास से पहुँच पाता तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।

इस हत्या के बाद खबर ये भी है कि इजरायल ने अपने दूतावासों को अलर्ट कर दिया है। उन्हें डर है कि ईरान वापसी हमला करेगा। इससे पहले साल 2020 में खुफिया एजेंसी ने ईरान के परमाणु वैज्ञानिक को मौत के घाट उतारा था। उस समय भी ईरान ने कत्ल का सीधा इल्जाम लगाते हुए बदला लेने का ऐलान किया था। मालूम हो कि आईआरजीसी जिसमें हसन कर्नल था उसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी आतंकी संगठन नामित किया था क्योंकि इन्होंने साल 2015 में न्यूक्लियर समझौते से खुद को अलग कर लिया था।

‘1.5 करोड़ बच्चे औरंगजेब के बनवाए सिलेबस पर चल रहे’: मदरसा का महिमामंडन कर रहा था ‘पत्रकार’, NCPCR के मुखिया ने लगाई क्लास

हाल ही में ‘स्वतंत्र पत्रकार’ रणविजय सिंह को ट्विटर पर मदरसों का महिमामंडन करते देखा गया। जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने उसकी खिंचाई की।

रणविजय ने सोमवार (23 मई 2022) को एक ट्वीट में कहा कि मदरसा एक सामान्य स्कूल ही है, इसके अलावा और कुछ नहीं। उसने लिखा, “मदरसा का मतलब विद्यालय/ पाठशाला/ स्कूल होता है। मदरसा में इतिहास, नागरिक शास्त्र, गणित, विज्ञान और उर्दू/अंग्रेजी/हिंदी भी पढ़ाया जाता है। मदरसा से पढ़कर बच्चे IAS भी बनते हैं, आगे भी बनेंगे। अरबी शब्द देखकर कान खड़े मत कीजिए, थोड़ा पढ़िए-पढ़ाइए और पढ़ने दीजिए।”

‘पत्रकार’ के इस ट्वीट पर प्रियंक कानूनगो ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि मदरसा के नाम पर बच्चों को बुनियादी तालीम से वंचित करना उनके बाल अधिकार का हनन है,संविधान के अनुच्छेद 21 ‘क’ की अवहेलना है और वह जो कर रहे हैं वो झूठ का महिमामंडन है।

इसके बाद दोनों के बीच ट्विटर पर बहस छिड़ गई। प्रियंक के ट्वीट का जवाब देते हुए रणविजय ने लिखा, “मदरसा पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष का बयान। इनके बयान के हिसाब से सरकारों पर मुकदमा होना चाहिए, क्योंकि सरकार ही मदरसा चला रही। शौक़ बहराइची कह गए हैं- बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था। हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।”

सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कानूनगो ने स्पष्ट किया कि सरकार बिना मैपिंग वाले मदरसे नहीं चलाती है। उन्होंने आगे कहा, “1.5 करोड़ से ज़्यादा बच्चों का वहाँ रखा गया है, जो औरंगज़ेब के बनवाए पाठ्यक्रम (Syllabus) को मानते हैं। यह अधिकारिक रिपोर्ट का लिंक है। पत्रकार हैं, अध्ययन कर लीजिए। तार्किक बात करेंगे तो ट्रक के पीछे लिखी शायरी याद नहीं करनी पड़ेगी।” इस ट्वीट के साथ उन्होंने इस संबंध में NCPCR द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का लिंक भी शेयर किया है।

हालाँकि यह बहस यहीं पर नहीं रुकी। रणविजय ने लिखा, “मतलब आप मान रहे हैं कि सरकारी मदरसे ठीक हैं। बाकी आपको अध्यक्ष इसीलिए बनाया गया है कि आप बिना मैपिंग वाले मदरसों को मैप में शामिल करें। इन बच्चों के लिए काम करें। आपको करीब 1 साल होने आए, आपने अब तक क्या किया? दो-ढाई साल का कार्यकाल और बचा है, काम पर ध्यान दीजिए। कुछ कीजिए।”

इस पर जवाब देते हुए प्रियंक कानूनगो ने लिखा, “गूगल सर्च ही कर लो पहले 3 साल मैं सदस्य रहा फिर 3 साल अध्यक्ष, फिर दोबारा अध्यक्ष हूँ NCPCR में। मैंने साढ़े चार साल की मेहनत में ये रिपोर्ट तैयार की है जो बताती है कि अनुच्छेद 29,30 व 15(5) में मिली छूट बच्चों के अधिकार का हनन कर रही है। कुतर्क करने के बजाए रिपोर्ट पढ़ लो।”

NCPCR की रिपोर्ट

एनसीपीसीआर की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 15 (5) के तहत छूट से अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को फायदा हुआ है। रिपोर्ट में अल्पसंख्यक स्कूलों डेटा विश्लेषण के साथ-साथ छात्रों, शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के साथ परामर्श को जोड़ा गया है।

इसमें कहा गया कि भारत के संविधान में 86वाँ संशोधन शिक्षा के अधिकार को 6-14 वर्ष के बीच के बच्चों का मौलिक अधिकार बनाता है। अनुच्छेद 15(5) सरकार को सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए नीति बनाने का अधिकार देता है। यह भारत में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में सकारात्मक कार्रवाई को तेज करता है। हालाँकि, इसे आरटीई एक्ट के तहत छूट के साथ अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं किया गया है।

रिपोर्ट का अवलोकन

रिपोर्ट देश में अल्पसंख्यक स्कूली शिक्षा की स्थिति पर विस्तृत आँकड़ों के साथ बनाई गई है। इसके निष्कर्ष इस प्रकार हैं-

  1. ईसाई समुदाय, जो कुल धार्मिक आबादी का 11.54% है, उसकी देश के कुल मजहबी अल्पसंख्यक स्कूलों में हिस्सेदारी 71.96% है।
  2. देश में धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी में 69.18% की हिस्सेदारी का योगदान करने के बावजूद मुस्लिम समुदाय धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में केवल 22.75% का योगदान देता है।
  3. 2006 के बाद से 85.33% अल्पसंख्यक स्कूलों ने अपना अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाण-पत्र हासिल कर लिया है। 2006 में 93वें संशोधन के बाद प्रमाण-पत्र हासिल करने वाले स्कूलों में काफी तेजी से वृद्धि देखी गई।
  4. एक चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब यह पाया गया कि अल्पसंख्यक स्कूलों में 62.50% छात्र गैर-अल्पसंख्यक समुदायों के हैं। आंध्र प्रदेश, झारखंड, पंजाब, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, उत्तराखंड के केंद्र शासित प्रदेशों में यह 70% से अधिक है।

रिपोर्ट में कुछ प्रमुख सिफारिशें शामिल हैं जिन्हें अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा के कारण रखा गया था। इसमें शामिल है;

  1. स्कूल से ‘बाहर के बच्चों’ की पहचान करने के लिए सभी गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों की मैपिंग की सिफारिश करते हुए एनसीपीसीआर ने कहा है कि बड़ी संख्या में बच्चे ऐसे स्कूलों/संस्थानों में पढ़ते हैं जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं। इसकी सिफारिश इसलिए की गई, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा का मौलिक अधिकार मिल सके।
  2. अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में RTE के प्रावधानों का विस्तार करने या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों की आरटीई सुनिश्चित करने के लिए समान प्रभाव से कानून बनाने के लिए उपयुक्त कदमों की आवश्यकता है।

क्या है Quad, क्यों चिढ़ता है चीन: टोक्यो में PM मोदी ने हिंद-प्रशांत महासागर को मुक्त और खुला बनाए रखने का संकल्प दोहराया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मई 2022) को जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित क्वाड समिट (Quad Summit) में हिस्सा लिया। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने जापान के पीएम फुमियो किशिदा को बेहतरीन मेजबानी के लिए बधाई दी। साथ ही कोरोना महामारी के दौरान भारत में स्वास्थ्य प्रबंधों और दुनिया को सहयोग को लेकर भी चर्चा की।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने चीन को साफ और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि टोक्यों में मित्रों के बीच होना सौभाग्य की बात है। भारत हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र को मुक्त, खुला और समावेषी बनाए रखने के लिए संकल्पबद्ध है। भारत सहयोगी देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत कर क्षेत्र में सतत विकास, शांति और संपन्नता का माहौल बनाने में विश्वास रखता है। आज क्वाड की संभावना काफी व्यापक हो गई है। कम समय में ही क्वाड ने अहम जगह बनाई है। इंडो-पैसेफिक क्षेत्र में क्वाड अच्छा काम कर रहा है। सोमवार (23 मई 2022) को अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान और भारत के रिश्तों पर बात की थी। उन्होंने समझाया था कैसे दोनों देश सांस्कृतिक तौर पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

 QUAD क्या है?

QUAD का पूरा नाम क्वाडिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग है। ये चार देशों का एक संगठन है। इसमें भारत के अलावा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। ये चारों देश इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे की सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ अन्य समसामयिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। चारों देश दनिया की आर्थिक शक्तियाँ भी हैं। 

इसकी स्थापना 2004 में हिंद महासागर में सुनामी के बाद भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने आपदा राहत प्रयासों में सहयोग करने के लिए एक अनौपचारिक गठबंधन के तौर पर हुई थी। 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसे औपचारिक रूप दिया। 

फिर 2017 में चीन का खतरा बढ़ने पर चारों देशों ने क्वाड को पुनर्जीवित किया, इसके उद्देश्यों को व्यापक बनाया। इसके तहत एक ऐसे तंत्र का निर्माण किया, जिसका उद्देश्य धीरे-धीरे एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करना है और इसके केंद्र में चीन है।

क्या है QUAD का मकसद?

इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर के बीच पड़ने वाले इलाके में चीन के बढ़ते दबदबे को नियंत्रित करना और बाकी देशों को भी चीन के प्रभुत्व से बचाना है। यही कारण है कि दुनिया के चार कोनों पर स्थित चार देश इसका हिस्सा हैं।

पिछले दो दशकों में चीन ने लगातार कोशिश की है कि एशियाई महाद्वीप में और खासकर समुद्री क्षेत्र में वह अपना दबदबा कायम कर सके। इसी क्रम में उसने पूरे साउथ चाइना सी पर तो दावा ठोंका ही है, कई इलाकों में विवादित क्षेत्रों पर कब्जा भी कर लिया है। यही वजह है कि चीन को नियंत्रित करने के लिए जापान और अमेरिका ने भारत और ऑस्ट्रेलिया को इस गठबंधन में शामिल किया। QUAD संगठन का मकसद है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग किसी भी तरह के राजनीतिक और सैन्य दबाव से मुक्त रहें। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और खुला रखने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी यह संगठन काम करता है।

क्वाड की वजह से चीन की बौखलाहट बढ़ी

क्वाड की वजह से चीन के माथे पर सिलवटें रहती हैं। क्वाड समूह की शुरुआत से ही चीन इसका धुर विरोधी रहा है। चीन को लगता है कि क्वाड में शामिल भारत, अमेरिका और जापान जैसे शक्तिशाली देश उसके खिलाफ मिलकर किसी रणनीतिक साजिश को रच रहे हैं। चीन को ये भी लगता है कि क्वाड समुद्र में चीन के आसपास अपने वर्चस्व को बढ़ाना चाहता है और भविष्य में उसे टारगेट किया जा सकता है। चीन क्वाड को अपने खिलाफ अमेरिका की साजिश के तौर पर देखता है। उसे लगता है कि क्वाड के जरिए अमेरिका उसके अस्तित्व को मिटाना चाहता है।

चीनी कई बार आरोप भी लगाता है कि QUAD उसके हितों को नुकसान पहुँचाने के लिए काम करता है। कई मौकों पर चीन, क्वाड को एशियाई NATO तक कह चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन की सबसे बड़ी चिंता QUAD में भारत के जुड़े होने से है। चीन को डर है कि अगर भारत अन्य महाशक्तियों के साथ गठबंधन बनाता है तो वह भविष्य में उसके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। चीन कई बार क्वाड विरोधी बयान भी दे चका है। 2018 में चीनी विदेश मंत्री ने क्वाड को ‘सुर्खियों में रहने वाला विचार’ बताया था। चीन सीधे तौर पर इसे अपने लिए खतरा मानता है।

‘हिंदू भी बीफ खाते हैं’: बोले कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया- जब मन होगा खाऊँगा, आप सवाल उठाने वाले कौन

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंंत्री व कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने हाल में बीफ को लेकर टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने अभी तक बीफ नहीं खाया है, लेकिन अब अगर उनका मन हुआ तो वह खाएँगे। कॉन्ग्रेस नेता ने यह टिप्पणी तुमकुर की एक जनसभा के दौरान की। साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को दो धर्मों के बीच दरार पैदा करने वाला बताया।

प्रदेश के सीएम रह चुके सिद्धारमैया ने कहा, “मैं हिंदू हूँ। मैंने अभी तक बीफ नहीं खाया है, लेकिन मैं खाना चाहता हूँ और मैं खाऊँगा। तुम होते कौन हो मुझसे सवाल करने वाले? बीफ सिर्फ एक समुदाय के लोग नहीं खाते। इसे हिंदू भी खाते हैं। ईसाई भी खाते हैं। मैने ये बात एक बार विधानसभा में कही थी कि तुम हो कौन मुझे बीफ खाने से रोकने वाले।” सिद्धारमैया ने बीफ को खाने की आदत बताया। वह बोले, “मैं जब चाहूँ बीफ खा सकता हूँ। ये खाने की आदत है और मेरा अधिकार है। क्या केवल मुसलमान ही बीफ खा सकते हैं।”

कर्नाटक में बीफ पर कानून

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता का ये बयान हलाल मीट को लेकर हुए विवाद के कुछ समय बाद ही सामने आया है। प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी ने जनवरी 2021 में कर्नाटक वध रोकथाम और मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2020 को अधिनियमित किया था। कानून के मुताबिक गाय, बैल, भैंस और बैल को खरीदना, बेचना, लाना-ले जाना, वध करना, व्यापार करना अवैध है। जानकारी के मुताबिक जो कोई भी इस कानून का उल्लंघन करता है उसके ऊपर 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है।

बीफ पर राजनीति

बता दें कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता आज भले ही बीफ खाने-खिलाने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन साल 2018 में यही कॉन्ग्रेस और इसके नेता भारतीय जनता पार्टी को बीफ पार्टी बता कर अपनी राजनीति कर चुके हैं। साल 2018 में कॉन्ग्रेस ने भाजपा नेताओं को बीफ मामले पर घेरते हुए कहा था, “बीजेपी नेता मनोहर पार्रिकर, सीएम योगी सब बीफ का आयात करना चाहते हैें, रिजिजू इसे खाना चाहते हैं और संगीत सोम इसे बेचना चाहते हैं।”

पाकिस्तानी सिंगर के दावे को T-series ने बताया फर्जी, लिखा- कानूनी ढंग से हुआ ‘नच पंजाबन’ का इस्तेमाल’ : अबरार अब भी कोर्ट जाने पर अड़े

करण जौहर की आने वाली फिल्म ‘जुगजुग जियो’ इन दिनों विवादों में हैं। हाल में पाकिस्तानी सिंगर अबरार उल हक ने करण जौहर और उनकी प्रोडक्शन कंपनी पर आरोप लगाया था कि इस फिल्म में उनका गाना कॉपी किया गया है। हालाँकि अब T-series ने इस मामले में सफाई दी और बताया कि ये ट्रैक कानूनी तौर पर वह ले चुके हैं।

T-series ने अपने ऑफिशियल अकॉउंट पर बताया, “हमने कानूनी रूप से 1 जनवरी, 2002 को आईट्यून पर जारी ‘नच पंजाबन’ एल्बम के ‘नच पंजाबन’ गाने के अधिकार हासिल कर लिए हैं और ये लॉलीवुड क्लासिक्स के यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध है, जिसका मालिकाना हक और जिसका संचालन मूवी बॉक्स रिकॉर्ड्स द्वारा किया जाता है।” कंपनी ने बयान में लिखा कि वह गाने के रिलीज होने के बाद सभी प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट दे देंगे।

इसके अलावा मूवीबॉक्स ने भी अपने बयान में कहा, “नच पंजान गाने को जुगजुग जियो फिल्म में शामिल करने का आधिकारिक लाइसेंस दिया गया है। Tseries, करण जौहर और धर्मा प्रोडक्शन इस गाने को अपनी फिल्म में इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार है। अबरार अल हक ने जो ट्वीट किया है वो अपमानजनक और पूरी तरह से अस्वीकार करने वाला है।”

बता दें कि जुगजुग जियो फिल्म में नच पंजाबन को कानूनी बताए जाने पर अबरार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैने अपना गाना ‘नच पंजाबन’ किसी भारतीय फिल्म को नहीं बेचा है। हर्जाने का दावा करने के लिए कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूँ। करण जौहर जैसे निर्माताओं को गानों का कॉपी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह मेरा छठा गाना कॉपी किया जा रहा है जिसकी मैं बिल्कुल भी अनुमति नहीं दूँगा।”

म्यूजिक कंपनियों के बयान के बाद पाकिस्तानी गायक अबरार ने लिखा, “गाना ‘नच पंजाबन’ का किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। अगर कोई दावा कर रहा है तो एग्रीमेंट दिखाएँ, मैं लीगल एक्शन लूँगा।”

‘खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग’ के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना बने दिल्ली के नए उप-राज्यपाल, जानें कानपुर यूनिवर्सिटी से ‘राज निवास’ तक का सफर

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली के नए उप-राज्यपाल (Delhi Lieutenant Governor) के रूप में नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन के एक बयान के अनुसार, अनिल बैजल का इस्तीफा स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ​सोमवार (23 मई, 2022) को विनय कुमार सक्सेना (Vinai Kumar Saxena) को दिल्ली का नया एलजी नियुक्त किया है। सक्सेना दिल्ली के 22वें उप-राज्यपाल बने हैं।

वह पदभार ग्रहण करने की तारीख से दिल्ली के उप-राज्यपाल होंगे। इससे पहले वह खादी ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार के चैयरमैन थे। उन्होंने 27 अक्तूबर, 2015 को अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था।

23 मार्च 1958 को जन्मे विनय कुमार सक्सेना कानपुर यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं। उनके बारे में बताया जाता है कि वह कॉरपोरेट के साथ-साथ एनजीओ सेक्टर में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 1984 में राजस्थान में जेके ग्रुप को ज्वॉइन किया और 11 सालों तक यहाँ काम किया। इसके अलावा उन्होंने जल संसाधन विकास के क्षेत्र में, सामाजिक कुप्रथाओं से लड़ने और आपदा प्रबंधन सहायता के क्षेत्र में भी काम किया।

बता दें कि बैजल के इस्तीफे के बाद चर्चा थी कि प्रफुल्ल खोड़ा पटेल, राकेश मेहता, राजीव महर्षि, सुनील अरोड़ा या फिर राकेश अस्थाना में से किसी एक को एलजी बनाया जा सकता है। उप-राज्यपाल पद पर अनिल बैजल का कार्यालय दिल्ली सरकार के साथ काफी विवादों से जुड़ा रहा है। दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने 18 मई को अचानक अपना इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के पीछे की वजह उन्होंने निजी कारण बताए थे। उप-राज्यपाल के तौर पर उनका कार्यकाल के 5 साल 31 दिसंबर, 2021 को पूरा हो गया था।