वाराणसी के ज्ञानवापी में सर्वे खत्म होने के बाद आज इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट कोर्ट को दी जानी थी। हालाँकि सुनवाई के दौरान एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने अपील की कि रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिन का समय दिया जाए। इस बाबत उन्होंने सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया और दो दिन का समय माँगते हुए बताया कि 15 घंटे की वीडियोग्राफी और 1500 फोटोज होने के कारण फाइल नहीं बन पाई है। इसलिए वह रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिन का समय माँगते हैं।
कोर्ट कमिश्नर की अपील पर सुनवाई करते हुए वाराणसी कोर्ट ने जहाँ इस मामले में रिपोर्ट जमा कराने के लिए दो दिन का समय दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष की गुहार पर आज सर्वे से कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को अलग कर दिया गया। अब अजय प्रताप सिंह और विशाल सिंह कोर्ट कमिश्नर किए गए हैं।
बता दें कि अजय मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के पद से हटवाने के लिए मुस्लिम पक्ष काफी समय से कोशिश कर रहा था। हालाँकि पिछली बार उनकी माँग खारिज हो गई थी और कमिश्नर को न हटाने के साथ-साथ सर्वे जारी रखने को भी कहा गया था। लेकिन इस बार अजय मिश्रा को कोर्ट कमिश्नर के तौर पर हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
ज्ञानवापी सर्वे मामला- कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को अलग किया गया। अजय प्रताप सिंह और विशाल सिंह कोर्ट कमिश्नर बने रहेंगे।
— अनंत विजय/ Anant Vijay (@anantvijay) May 17, 2022
मालूम हो कि आज कोर्ट की सुनवाई के दौरान सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक नामक तीन महिलाओं ने नई याचिका दायर की है। इसमें विवादित ढाँचे की उस दीवार को तोड़ कर जाँच कराने का आग्रह है जो नंदी महाराज के सामने है। याचिका में माँग की गई कि सारा मलबा हटा कर शिवलिंग की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई नापी जाए। इसके अलावा आज की सुनवाई में विवादित ढाँचे के अंदर तालाब की मछलियों को निकालकर अलग शिफ्ट करने को कहा गया। साथ ही नमाजियों के वज्जू के लिए इंतजाम हो इसकी अपील की गई।
हिमांत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री के रूप में एक साल पूरा किया। इस मौके पर उन्होंने ‘टाइम्स नाउ’ से बातचीत की। अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे शेयर करते हुए लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद, कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, यूनिफॉर्म सिविल कोड, सीएए, एनआरसी, जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी, ओवैसी समेत कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात की। उन्होंने कहा कि चुनावों में किए वादों को अमल कर रहे हैं और पिछला एक साल बेहतर रहा है।
ज्ञानवापी मामले में उन्होंने कहा कि राम मंदिर मामला था जो सुलझ गया, दूसरे लांबित मामले भी सुलझने चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मंदिर है या नहीं जानना जरूरी है और हर हिंदू को जानने का हक है। उन्होंने कहा, “सर्वे रिपोर्ट आने के बाद चर्चा होना चाहिए। आपस में मामलों को सुलझाना जरूरी है। देश की जनता ने बीजेपी को बहुमत दिया है। कॉन्ग्रेस का नाम सुनकर लोग अब चिढ़ते हैं। कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की सियासत की। “
यह पूछे जाने पर कि क्या बीजेपी का कॉन्ग्रेसीकरण हो रहा है, उन्होंने कहा कि जो लोग जमीन से जुड़े हैं वे कॉन्ग्रेस में नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा, “2031 तक कॉन्ग्रेस में कोई नहीं रहेगा। उसका वजूद खत्म हो जाएगा।” वहीं राहुल गाँधी पर उन्होंने कहा कि वह क्या करेगा क्या नहीं करेगा, कोई नहीं कह सकता है। वह रिसर्च का विषय हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी पर आप यह नहीं कह सकते हैं कि वह जो कहेगा वह वही करेगा।” कॉन्ग्रेस के वन फैमिली वन टिकट पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस चिंतन शिविर से हमारा क्या लेना देना। कॉन्ग्रेस में परिवारवाद है। कॉन्ग्रेस में परिवारवाद खत्म नहीं हो सकता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर उन्होंने कहा कि हिंदू में पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार होता है लेकिन मुस्लिम बेटी को ये अधिकार नहीं है। बकौल सीएम शर्मा, मुस्लिमों में कई शादी करता है और देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम बेटियों के उत्थान के लिए यूसीसी जरूरी है और यह जल्द आना चाहिए। इससे देश में सामाजिक न्याय होगा। एक पुरुष को एक से अधिक महिला से शादी करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। अगर 36 प्रतिशत महिलाओं के पास अधिकार नहीं तो सामाजिक न्याय की बात नहीं कर सकते हैं। सामाजिक न्याय सबके लिए जरूरी है। मुस्लिम समाज में भी जातियाँ हैं। उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जैसे हिंदू में है।
उन्होंने आगे कहा कि एनआरसी, सीएए से आप मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि पर रोक नहीं लगा सकते हैं। इसके लिए आपको शिक्षा, हेल्थ पर ध्यान देना होगा। एनआरसी, सीएए न्याय के लिए है। असम में मुस्लिम बेटियों की शिक्षा पर काम किया। दंगे पर उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार में सांप्रदायिक हिंसा नहीं होती है। हिजाब का मुद्दा कर्नाटक में कॉलेज तक सीमित था। यह कॉलेज का यूनिफॉर्म का मुद्दा था। इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया गया।
जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि उसने भगवान और गोडसे की तुलना की, पीएम मोदी पर ट्वीट की वजह से गिरफ्तारी नहीं हुई। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तार करना हमेशा से होता रहा है। सरमा ने कहा कि वह हमेशा कानून का पालन करते हैं। जिग्नेश की गिरफ्तारी कानून प्रक्रिया के तहत हुई।
राजद्रोह कानून के राजनीतिक इस्तेमाल पर सरमा ने कहा कि देशद्रोहियों के खिलाफ यूएपीए लगाया, राजनीतिक दुर्भावना से देशद्रोह का केस नहीं लगाया। कानून का दुरुपयोग नहीं गलत है। असम में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ देशद्रोह नहीं लगा। उल्फा के खिलाफ लगा।
बीजेपी मुख्यमंत्रियों के बदलने पर उन्होंने कहा कि बीजेपी के किसी भी कार्यकर्ता को पद से लगाव नहीं होना चाहिए। बिप्लब देब त्रिपुरा काम के लिए अच्छा काम किया। अगला सवाल था – बीजेपी असली मुद्दे से लोगों को भटका रहे हैं? उन्होंने कहा कि महँगाई से निकालना सरकार का फर्ज है। पीएम ने राज्यों को तेल के दाम कम करने को कहा। महँगाई का मुद्दा परमानेंट नहीं है।
वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी के औरंगजेब के मजार पर चादर चढाए जाने को बीजेपी द्वारा भड़काऊ कहे जाने की बात पर सरमा ने कहा, “कोई औरंगजेब की मजार पर भी जा सकता है क्या? आज आप औरंगजेब की मजार जाएँगे, कल आप कहेंगे कि आप अल-कायदा के मजार पर जाना चाहते हैं। आप देश के सांसद भी हैं। जिस औरंगजेब ने देश को तबाह कर दिया, उनके मजार में आप क्यों जाते हो? अगर वह आपका पिता है, तो जाइए। मैं आपत्ति नहीं करूँगा, लेकिन यदि नहीं है तो फिर क्यों जाते हो? आप उससे क्या प्रेरणा लोगे? आप शिवाजी महाराज से प्रेरणा लीजिए। आप लाचित बोड़फकन से प्रेरणा लीजिए। औरंगजेब से प्रेरणा लेकर क्या आप देश को औरंगजेब के जमाने में लेकर जाना चाहते हो।”
आगे उन्होंने सड़कों का नाम बदलने को सही ठहराते हुए कहा कि जिसने आपका मंदिर तोड़ा, जिसने आपकी बहन-बेटियों को पकड़कर उसके साथ अत्याचार किया, जिसने आपको धर्म परिवर्तन के के लिए मजबूर किया, क्या उस सबका नाम देश में होना चाहिए? उन्होंने कहा कि ये सब मुद्दे खत्म हो जाएँगे तब नया भारत बन जाएगा। लंबित मुद्दे खत्म होने चाहिए। उसके बाद हिंदू-मुस्लिम मिलकर देश को बनाने में लग जाएँगे।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद नेटिजन्स खूब मजे ले रहे हैं और जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। यहाँ देखिए नेटिन्स द्वारा किए गए कुछ कमेंट्स…
I really avoid commenting on any political figure, but there can’t be any better leader than @himantabiswa !! Every word comes from his heart!! To the point. @BJP4India should feel lucky that Himanta da is holding the fort in east! https://t.co/thBTgAh0vu
काशी की ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे और वहाँ शिवलिंग मिलने के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली के पास स्थित प्रसिद्ध शाही ईदगाह मस्जिद को सील करने की याचिका सिविल कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद की सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ ही वहाँ आने-जाने पर रोक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की माँग की गई है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 1 जुलाई, 2022 की तारीख तय की है।
#UPDATE | Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Masjid dispute: Civil Judge Senior Division, Mathura to next hear on 1st July, the petition filed by Mahendra Pratap Singh to increase security at Shahi Idgah and appoint a security officer.
बता दें कि मथुरा में कुल 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर सिविल कोर्ट में पहले से ही एक मामले पर सुनवाई चल रही है। इस जमीन में से 11 एकड़ भूमि कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पास और बाकी शाही ईदगाह के पास है। श्रीकृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले वादी महेंद्र प्रताप सिंह ने मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में अर्जी लगाते हुए कहा है कि जिस तरह से ज्ञानवापी मस्जिद का मामला सामने आया है, अब कृष्ण जन्म भूमि की जमीन पर बनी ईदगाह के गर्भस्थल को सील किया जाए।
महेंद्र प्रताप सिंह ने अपने इस प्रार्थना पत्र में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के विवाद का जिक्र करते हुए कहा, “ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी में जिस प्रकार से हिंदू शिवलिंग के अवशेष मिले हैं उससे स्थिति स्पष्ट हो गई है कि प्रतिवादीगण वहाँ इसी वजह से शुरू से विरोध करते रहे हैं।”
उन्होंने अपनी याचिका में कहा, “यह स्थिति श्रीकृष्ण जन्मभूमि संपत्ति की है, जो असली गर्भगृह है, वहाँ पर सभी हिंदू धार्मिक अवशेष कमल शेषनाग,ऊँ, स्वास्तिक आदि हिंदू धार्मिक चिह्न व अवशेष हैं। इसमें से कुछ को मिटा दिया गया है और कुछ को प्रतिवादीगण मिटाने के प्रयास में हैं। इस स्थिति में अगर हिंदू अवेशेषों को मिटा दिया गया तो कैरेक्टर ऑफ प्रॉपर्टी बदल जाएगा और वाद का उद्देश्य समाप्त जाएगा।”
गौरतलब है कि कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे के दौरान हिन्दू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी के वजूखाना में शिवलिंग मिली है। शिवलिंग के दावे के बाद हिन्दू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दी और वजूखाना को सील करने की माँग कि जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल वजूखाना को सील करने का आदेश देते हुए। उसे सील करवाकर CRPF के हवाले करवा दिया है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में सुनवाई करते हुए 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा करने के आदेश दिया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने विवादित स्थल का मौका-मुवायना करने की बात भी कही है, जिससे वहाँ की स्थिति स्पष्ट हो सके। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि निर्धारित समय के अंदर कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण का निस्तारण किया जाए।
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदू के नरसंहार पर ‘द कश्मीर फाइल्स’ रिलीज होने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने हाल में इस फिल्म के बैन की माँग उठाई और सवाल किया- ‘क्या इतने गिरे लगते हैं हम कि खून से सने चावल खिलाएँगे’। उन्होंने ये सवाल उन कट्टरपंथी मुसलमानों की नीयत को लेकर पूछा जिन्होंने बीके गंजू की पत्नी को पति के खून से सने चावल खिलाए थे।
फारूक अब्दुल्ला के बयान से साफ है कि वो ये नहीं मानते है कि कोई मुसलमान इतना गिर सकता है कि ऐसी हरकत करे जबकि हकीकत ये है कि कट्टरपंथी अपने शिकार के साथ सोच से भी ज्यादा निर्ममता करते हैं, इसका अंदाजा यजीदी महिला से साथ घटित घटना से चलता है जिसे अपने ही 1 साल के बेटे को पका कर खाने पर मजबूर किया गया था।
#WATCH We met LG Manoj Sinha to raise the issue of the law & order situation in J&K. During the meeting, I told him that the film 'The Kashmir Files' has given birth to hate in the country. Such things (films) should be banned: Dr Farooq Abdullah, National Conference pic.twitter.com/Z1BkoNijRO
साल 2017 में न्यूयॉर्क पोस्ट में इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इसमें इराकी नेता वियान दाखिल के उस बयान का जिक्र था जिसमें उन्होंने यजीदी महिला पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “हमने ISIS की चंगुल से एक महिला को छुड़ाने में सफलता पाई जो तीन दिन तक बिन खाने-पीने के जेल में रखी गई थी। उसने बताया कि एक दिन आतंकी उसके पास मीट और चावल लाए। वो इतनी भूखी थी कि सब खाना गई। लेकिन जैसे ही उसका खाना खत्म हुआ। उसे कहा गया कि हमने तुम्हारे 1 साल के लड़के को पकाया था और वहीं तुमने अभी-अभी खाया है।”
A sex slave captured by ISIS was forced to eat her 1-year-old son with a side of rice, according to a gut-wrenching report. The unnamed Yezidi woman — who was starved for three days in an Iraq basement unwittingly ate the boy after barbaric guards cooked and served him to her1/2 pic.twitter.com/AEbN03TOnQ
ISIS आतंकी मानते थे कि महिला यजीदी धर्म अपना कर शैतान की इबादत करती है। इसलिए उन्होंने उसे बंदी बनाया और उसके लड़के को पका कर खा गए। साथ में महिला को भी खिलाया। महिला नेता ने ये जानकारी भी दी थी कि कैसे ISIS आतंकियों ने एक 10 साल की बच्ची का रेप उसके पिता और बहनों के सामने ही कर दिया था
बता दें कि ये कोई अकेली घटना नहीं है जहाँ इस्लामी कट्टरपंथ का घिनौना चेहरा उजागर हुआ हो। तमाम मामले में जब दूसरे धर्म के लोगों को काफिर बता महिला से लेकर बच्चों तक को टुकड़ों में काटा गया। लेकिन फिर भी फारूक अब्दुल्ला सवाल करते हैं कि क्या इतने गिरे हैं कि खून से सने चावल खिलाएँगे।
इस देश में अपनों के खून से सने चावल हिंदुओं को खिलाने की घटना न केवल कश्मीर में बल्कि बंगाल में भी घटी थी। बंगाल के सेनबाड़ी हत्याकांड के दौरान सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने घरों में आग लगा दी, परिवार के दो भाइयों, प्रणब कुमार सेन और मलय कुमार सेन को परिवार के सदस्यों के सामने काट दिया गया था। बाद में मारे गए भाइयों की माँ को अपने मृत बेटों के खून से सना चावल खाने के लिए मजबूर किया गया था।
कन्नड़ धारावाहिकों ‘गीता’ और ‘दोरेसानी’ में अहम भूमिका निभाने वाली मशहूर अभिनेत्री चेतना राज (Kannada actress Chethana Raj) का निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी कराने के बाद 21 वर्षीय अभिनेत्री का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि सोमवार (16 मई 2022) को चेतना राज को ‘फैट फ्री’ (fat-free plastic surgery) सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे उनकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री ने अपने माता-पिता को भी सर्जरी के बारे में नहीं बताया था। वह 16 मई को सुबह ‘फैट फ्री’ सर्जरी कराने के लिए अपने दोस्तों के साथ अस्पताल गई थीं। शाम को सर्जरी के बाद अचानक उनकी तबियत बिगड़ने लगी, उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे कुछ ही देर बाद ही चेतना की मौत हो गई। डॉक्टर भी काफी कोशिशों के बाद अभिनेत्री को नहीं बचा पाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 वर्षीय एक्ट्रेस के माता-पिता ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वे दावा कर रहे हैं कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनकी बेटी की असमय मौत हो गई। यही नहीं चेतना राज के माता-पिता ने अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ पास के थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल चेतना का शव अभी अस्पताल में ही है। उसे कल (18 मई 2022) सुबह पोस्टमॉर्टम के लिए रमैया अस्पताल भेजा जाएगा।
मालूम हो कि दो साल पहले (2 अक्टूबर, 2020) हिंदी और बांग्ला फिल्मों की एक्ट्रेस मिष्टी मुखर्जी (Mishti Mukherjee) का भी कीटो डाइट की वजह से बेंगलुरु में निधन हो गया था। बताया जाता है कि उस वक्त वह सिर्फ 27 साल की थी और अपना वजन कम करने के लिए कीटो डाइट ले रही थीं, जिससे उनकी किडनी फेल हो गई थी। अभिनेत्री के एक प्रतिनिधि ने उस वक्त बताया था, “कीटो डाइट की वजह से उनकी किडनी फेल हो गई थी, जिससे वह बेहद कम उम्र में ही हमें छोड़कर चली गईं।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रही थीं। मिष्टी ने साल 2012 में फिल्म ‘लाइफ की तो लग गई’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वे साल 2013 में आई फिल्म ‘मैं कृष्णा हूँ’ के एक गाने में रजनीश दुग्गल के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म में जूही चावला लीड रोल में थीं। ऋतिक रोशन और कैटरीना कैफ का स्पेशल अपीयरेंस था। इसके अलावा मिष्टी कुछ आइटम नंबर्स में भी नजर आई थीं। उन्होंने हिंदी बंगाली के अलावा तेलुगू फिल्मों में भी काम किया था।
अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, ट्विटर के एक वरिष्ठ इंजीनियर को यह स्वीकार करते हुए सुना जा सकता है कि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर कैसे वामपंथियों के कब्जे में है और यह दक्षिणपंथी एकाउंट्स पर कैसे शिकंजा कसता है।
वायरल वीडियो में सिरु मुरुगेसन (Siru Murugesan) के नाम से पहचाने जाने वाले इंजीनियर ने इस साल 28 अप्रैल को प्रोजेक्ट वेरिटास के साथ काम करने वाले एक पत्रकार से बात करते हुए कई खुलासे किए थे। वीडियो को पत्रकार टिम पूल ने मंगलवार (17 मई) को ट्विटर पर शेयर किया था।
मुरुगेसन कहते हैं, “ट्विटर फ्री स्पीच में विश्वास नहीं करता है। एलोन फ्री स्पीच में विश्वास करते हैं। वह एक पूँजीवादी है और हम वास्तव में पूँजीवादी के रूप में नहीं बल्कि एक सोशलिस्ट की तरह काम कर रहे थे। जैसे हम सभी अपनी ऐसी-तैसी करा रहे थे।”
Breaking from Project Veritas
Twitter employee confirms bias at Twitter
Seems I was right
Because conservatives tolerate leftist speech and leftist won’t tolerate the right, Twitter opts to censor the right as “balance”@elonmuskpic.twitter.com/zjAYwcIbol
वह आगे कहते हैं, “वैचारिक रूप से, ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि हम वास्तव में वामपंथ को नहीं बल्कि दक्षिणपंथ को सेंसर कर रहे हैं। तो, हर दक्षिणपंथी ऐसा ही होगा। ब्रो, ठीक है, बस इसे टॉलरेट करना होगा। लेकिन वामपंथी ऐसा नहीं होगा, नहीं, मैं इसे बर्दाश्त नहीं करने वाला। मुझे इसे सेंसर करने की आवश्यकता है अन्यथा मैं प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं देने वाला हूँ।”
वहीं ट्विटर इंजीनियर ने यह भी कहा, “तो, यह सही है कि राइट विंग के साथ भेदभाव करता है। यह सच है। पक्षपात होता है। मुझे नहीं पता कि एक मंच पर दो पार्टियाँ कैसे सह-अस्तित्व में रह सकती हैं।” सिरु मुरुगेसन ने बताया कि उनके लेफ्टिस्ट सहकर्मियों को ‘पूँजीवादी’ एलोन मस्क द्वारा ट्विटर अधिग्रहण के विचार से ही नफरत थी।
मुरुगेसन ने कहा कि जब से ट्विटर डील हुई है, तब से कंपनी की संस्कृति में ‘बहुत कुछ बदल गया है। “ओह माय गॉड! मैं कम से कम इसके साथ ठीक हूँ। लेकिन मेरे कुछ सहकर्मी सुपर लेफ्ट जैसे हैं। वे ऐसे हैं कि अगर ऐसा होता है तो यह मेरा आखिरी दिन होगा।”
“हमने इसके खिलाफ विद्रोह करने के लिए हर संभव प्रयास किया। बहुत सारे कर्मचारियों ने इसके खिलाफ विद्रोह किया। लेकिन अंत में, निदेशक मंडल के हस्तक्षेप के बाद मामला थोड़ा ठीक हो गया क्योंकि कोई अपने खिलाफ मुकदमा नहीं छठा था।”
ट्विटर इंजीनियर ने काम के माहौल में लापरवाही पर भी प्रकाश डाला। उसने कबूल किया कि कैसे आखिरी तिमाही में वह हफ्ते में सिर्फ 4 घंटे ही ऑफिस जाता था।
उन्होंने जोर देकर कहा, “अनिवार्य रूप से जैसे हर किसी को वह काम करने को मिलता है जो वे चाहते हैं, कोई भी वास्तव में (ऑपरेटिंग व्यय) की परवाह नहीं करता है, पूंजीपतियों की तरह, वे संख्याओं की परवाह करते हैं या व्यवसाय को और अधिक कुशल बनाने के बारे में परवाह करते हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “लेकिन ट्विटर में, ऐसा लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य ही सब कुछ है, जैसे अगर आप अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं, तो आप कुछ दिनों की छुट्टी ले सकते हैं। लोगों ने महीनों की छुट्टी ली है, और उसके बाद वे वापस आएँगे। लेकिन जैसा आप पसंद करते हैं, किसी भी समय आप अपना सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस दे सकते हैं। और यही वह संस्कृति है और आप जानते हैं कि जितना संभव हो सके बिजनेस चलाएँगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि कैसे ट्विटर के लिए काम करने से उनके अपने राजनीतिक विचारों पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “जैसे मैंने ट्विटर पर काम करना शुरू किया और लेफ्टिस्ट हो गया। मुझे लगता है कि यह वैसा ही माहौल है जैसा वहाँ हैं और आप उसी तरह के हो जाते हैं।”
एलोन मस्क और ‘ट्विटर डील’
बता दें कि एलोन मस्क, पहले से ही ट्विटर के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक थे, उनके पास कंपनी का 9.2% हिस्सा था। उन्होंने पहले कहा था कि उन्हें प्रबंधन में कोई भरोसा नहीं था और उनके तहत ट्विटर की अपनी वास्तविक क्षमता को पूरा करते हुए कार्य नहीं कर सकता था। उन्होंने कंपनी को निजी कंपनी बनाने की बात की ताकि उनका इस पर पूरा नियंत्रण हो सके और ट्विटर को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए निर्देशित कर सकें।
ट्विटर के बोर्ड ने एलोन मस्क द्वारा अधिग्रहण बिड को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की थी। हालाँकि, मस्क की पेशकश की कीमत ट्विटर शेयरधारकों के बहुमत के साथ अंततः ट्विटर बोर्ड को विवश कर देती है।
एलोन मस्क, जो पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन दिग्गज टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ हैं, ने 44 बिलियन डॉलर के सौदे में माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को खरीद लिया था।
हाल ही में, मस्क ने घोषणा की कि सौदे को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर 5% से कम उपयोगकर्ता स्पैम / नकली थे। इससे ट्विटर स्टॉक के मूल्य में अचानक गिरावट आई थी।
हिंदी को राष्ट्रीय भाषा नहीं बताकर विवाद को जन्म देने वाले साउथ के स्टार किच्चा सुदीप की अपकमिंग फिल्म ‘विक्रांत रोणा’ के लिए बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है। यह एक पैन इंडिया फिल्म है जिसे हिन्दी, तेलुगू, मलयालम तमिल और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।
खान फिल्म विक्रांत रोना को हिंदी भाषा में रिलीज करने वाले हैं। सलमान खान ने किच्चा सुदीप की एक्शन ड्रामा 3डी फिल्म के साथ जुड़ने का मेगा ऐलान अपने सोशल मीडिया हैंडल से किया है। साथ ही उन्होंने किच्चा सुदीप की फिल्म के दृश्यों की भी तारीफ की है।
सलमान खान ने लिखा, “मैं अभी तक फिल्म के सीन्स से अभिभूत हूँ भाई किच्चा सुदीप। ‘विक्रांत रोणा’ का हिंदी वर्जन पेश करने को लेकर काफी खुश हूँ। यह भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा 3डी अनुभव होगा।”
सलमान खान के साथ ही किच्चा सुदीप ने भी सोशल मीडिया पर अपनी फिल्म के हिंदी वर्जन को 3डी में पोस्ट किया है। इस वीडियो के साथ अभिनेता ने कैप्शन में लिखा, “विक्रांत रोणा को एसकेएफ के साथ जुड़कर गर्व हो रहा है। ‘सलमान खान फिल्म्स’ के साथ जुड़ने पर गर्व है।”
फिल्म ‘विक्रांत रोणा’ का निर्देशन अनूप भंडारी ने किया है और जैक मंजूनाथ द्वारा उनके प्रोडक्शन शालिनी आर्ट्स के तहत निर्मित किया जा रहा है। यह एक 3डी फिल्म होगी, जिसमें किच्चा सुदीप के साथ जैकलीन फर्नांडीज भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिल्म 28 जुलाई को देश भर में रिलीज हो रही है।
किच्चा सुदीप ने कहा था- हिंदी अब एक राष्ट्रीय भाषा नहीं है
गौरतलब है कि पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान किच्चा सुदीप ने कहा था कि ‘हिंदी अब एक राष्ट्रीय भाषा नहीं है।’ किच्चा सुदीप के इस बयान पर विवाद हो गया था। इसके बाद अजय देवगन ने उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी। अजय देवगन ने कहा था, “अगर हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो अपनी फिल्में हिंदी में क्यों डब करते हो।” इस विवाद ने साउथ बनाम हिंदी इंडस्ट्री की बहस छेड़ दी थी।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम पर जाँच एजेंसी सीबीआई ने बड़ा आरोप लगाया है। सीबीआई का दावा है कि 50 लाख रुपए की घूस लेकर कार्ति ने 250 चीनी नागिरकों को भारत का वीजा दिलाने में मदद की। ये सारे चीनी पंजाब में चल रहे एक प्रोजेक्ट के लिए भारत आए थे। सीबीआई ने अब जानकारी के आधार पर कार्ति के खिलाफ नया केस दर्ज किया है। साथ ही उनके 7 ठिकानों पर छापेमारी की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि सीबीआई को आईएनएक्स मीडिया मामले में लेन-देन की जाँच के दौरान कार्ति द्वारा ली गई घूस का पता चला था। उन्होंने पंजाब में स्थित तलवंडी साबो पावर लिमिटेड नामक उस प्रोजेक्ट के लिए चीनी नागरिकों को वीजा दिलाया था जो एक निजी कंपनी द्वारा चल रहा था।
CBI raids Congress leader Karti Chidambaram, son of former Finance Minister P Chidambaram. Multiple locations including his home and office being raided currently.
प्रोजेक्ट के लिए घूस देकर चीनी मजदूरों का भारत में वीजा लगवाने का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है। ऐसे में आने वाले समय में गृह मंत्रालय के तत्कालीन अधिकारी भी जाँच के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल ये केस कार्ति के खिलाफ दर्ज हुआ है। इस बीच कार्ति ने अपने ट्विटर पर ट्वीट किया और लिखा, “यह (सीबीआई की कार्रवाई) कितनी बार हुई है, मैं गिनती भी भूल गया हूँ। इसका एक रिकॉर्ड होना चाहिए।”
Tamil Nadu | Police presence at Congress leader P Chidambaram’s residence in Chennai as CBI searches multiple locations of his son Karti Chidambaram in connection with an ongoing case pic.twitter.com/LQIv9LdCHX
जानकारी के मुताबिक, सीबीआई कार्ति चिदंबरम के विरुद्ध दर्ज केस मामले में 9 जगहों पर तलाशी ले रही है। इनमें तमिलनाडु में 3, मुंबई में 3, पंजाब में 1, कर्नाटक में 1 और ओडिशा में 1 जगह शामिल हैं। इसके अलावा ऑफिस और घरों पर भी छापेमारी हुई है। कहा जा रहा है कि सीबीआई अधिकारी जब दिल्ली में पी चिदंबरम के घर पहुँचे तो गेट बंद था। ऐसे में वो लोग गेट फांद कर अंदर गए। छापेमारी सुबह 8 बजे से चल रही है।
Massive Chinese Visa Scam emerges. FIR filed against Karti Chidambaram for allegedly taking an illegal gratification of ₹50 lakhs to facilitate visas to Chinese nationals for a project. 250 visas said to have been facilitated. CBI raids ongoing at premises linked to Karti. pic.twitter.com/RvxdoUGMpO
— Priti Gandhi – प्रीति गांधी (@MrsGandhi) May 17, 2022
उल्लेखनीय है कि कार्ति चिदंबरम और उनके पिता पी चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया केस में पहले ही जाँच एजेंसी सीबीआई और ईडी अपने चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। एजेंसियों का दावा है ककि जब पी चिदंबरन वित्त मंत्री थे तब INX मीडिया को विदेशी निवेश हासिल करने की मंजूरी मिली थी। इसके अलावा एयरसेल मैक्सिस डील में भी बेटे और पिता पर चार्जशीट फाइल हुई है। इस वाले मामले में भी उनके ऊपर घूस लेकर विदेशी निवेश की मंजूरी देने का आरोप है। साल 2019 में इन्हीं सब आरोपों के चलते पूर्व वित्त मंत्री 21 अगस्त 2019 को अरेस्ट भी किए गए थे जिसके बाद उन्हें 106 दिन जेल में गुजारने पड़े और 4 दिसंबर को जाकर उन्हें जमानत मिली। इस बीच उनके दिन तिहाड़ में बीते थे।
वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद स्थानीय अदालत ने उस स्थान को सील कर दिया है, लेकिन मुस्लिम पक्ष शांति और सौहार्दता बिगड़ने की बातें करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस DY चंद्रचूड़ और जस्टिस PS नरसिम्हा की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। जस्टिस चंद्रचूड़ जहाँ उस बेंच का हिंसा थे जिसने अयोध्या राम जन्मभूमि का फैसला सुनाया, जबकि जस्टिस नरसिम्हा हिन्दू पक्ष की तरफ से उस मामले में वकील रहते पेश हुए थे।
वहीं अब ‘हिन्दू सेना’ ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और कहा है कि ‘Ancient Monuments’ में गिने जाने वाले 1991 के ‘वर्शिप एक्ट’ के तहत नहीं आते हैं। संगठन ने हस्तक्षेप याचिका के जरिए अपनी बात रखने की अपील की। बता दें कि मुस्लिम पक्ष ने सेवर सर्वे रोकने की माँग की है। बता दें कि ‘वर्शिप एक्ट’ पर खुद सुप्रीम कोर्ट में मामले विचाराधीन हैं, जिनमें इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
इसे हिन्दुओं, बौद्ध, सिख और जैन समुदाय के अधिकारों के विरुद्ध बताया गया है। इससे पहले मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा था, जिसने स्थानीय अदालत के फैसले को रोकने से इनकार कर दिया था। अब उस आदेश के खिलाफ मस्जिद इंतजामिया कमिटी सुप्रीम कोर्ट पहुँची है। मस्जिद कमिटी का कहना है कि 1991 में भी इस पर कोर्ट में केस दायर किया गया था, जिस पर HC ने रोक लगा दी थी पर अब फिर से ये सब किया जा रहा है।
ज्ञानवापी के लिए लड़ाई अब काशी से दिल्ली पहुँच गई है। उधर एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने सर्वे रिपोर्ट जमा कराने के लिए वाराणसी की स्थानीय अदालत से दो दिन की मोहलत मांगी है। विशाल सिंह ने कहा कि रिपोर्ट लगभग तैयार है। हालाँकि, इसे पेश करने में दो दिन और समय लग सकता है। सर्वे और वीडियोग्राफ़ी खत्म हो चुके हैं, अब सिर्फ अदालत में रिपोर्ट देना है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘हिन्दू सेना’ को सुनवाई के वक्त आने के लिए कहा है।
पंजाब के राजपुरा में एक मस्जिद के निर्माण को लेकर तनाव फैल गया है। मामला गुज्जरा मोहल्ले का है। यहाँ पहले गुरु की सराय हुआ करती थी। इसमें हिंदू और सिख आते थे। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले कुछ लोगों ने गुरु की सराय को मस्जिद बना दिया। इसका सिखों और हिंदुओं ने जम कर विरोध किया।
गुरु की सराय की जगह मस्जिद के कारण उपजे हालात को देखते हुए बड़ी तादाद में मौके पर फोर्स की तैनाती करनी पड़ी है। सोमवार (17 मई 2022) को इस मामले की स्थानीय SDM कोर्ट में सुनवाई भी हुई। इस दौरान मस्जिद बना रहे मुस्लिम पक्ष के लोगों के अलावा सिख और हिंदू भी बड़ी तादाद में थे।
सिखों और हिंदुओं के मुताबिक गुरु की सराय गुरुद्वारा है। यहाँ दोनों समाज के लोग सेवा करते थे। स्थानीय सिखों और हिंदुओं ने आरोप लगाया है कि बिना किसी से पूछे यहाँ मस्जिद का रूप दे दिया गया। इस मसले पर पहले भी सिख और हिंदू विरोध जता चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गुरु की सराय में हर दिन नमाज के वक्त मुस्लिम इकट्ठा हो जाते हैं। इनमें राज्य के बाहर के लोग भी शामिल होते हैं। इनका न तो वेरिफिकेशन किया जाता है और न ही रिकॉर्ड रखा जाता है। तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाया जाता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के वक्त कई धर्माचार्य, गोरक्षा दल के लोग भी थे।
सुनवाई के बाद एसडीएम हिमांशु गुप्ता ने कहा कि माहौल को ठीक रखने के लिए फोर्स लगाई गई है। उन्होंने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे पेश करने के लिए सुबूत और दस्तावेज देने के लिए कहा। दोनों पक्षों के बयान भी लिए गए हैं। अब प्रशासन अपने स्तर पर जाँच करवाएगा कि यहाँ पर मस्जिद थी या फिर सराय।
उल्लेखनीय है कि जिस स्थान पर विवाद हो रहा है वह पटियाला के गुजरांवाला मोहल्ले में मौजूद है। विश्व हिन्दू परिषद का दावा है कि गुरु की सराय को मस्जिद का रूप देने के लिए मुस्लिम पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार की अनुमित नहीं ली गई। VHP के इस दावे का गुजरांवाला मोहल्ले के स्थानीय निवासी और सिख समुदाय के कई लोग भी समर्थन कर रहे हैं। इन लोगों ने सराय को मस्जिद का रूप देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।