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गलवान के वीर दीपक सिंह की ‘टीचर’ पत्नी बनीं सेना में लेफ्टिनेंट: पति के जाने के 2 साल बाद पूरा किया अधूरा सपना

गलवान घाटी में वीरगति पाने वाले वीर चक्र से सम्मानित लांस नायक दीपक सिंह की पत्नी रेखा सिंह सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुई हैं। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के रीवा की रहने वाली हैं। सैन्य अधिकारी के तौर पर वो अपने पति के सपनों को पूरा करते हुए महिलाओं को सही राह दिखाना चाहती हैं। 28 मई 2022 से उनकी ट्रेनिंग शुरू होगी। उनकी इस उपलब्धि पर रीवा के DM ने उनसे मिल कर बधाई दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विवाह से पहले रेखा सिरमौर के जवाहर नवोदय विद्यालय सिरमौर में टीचर थीं। शादी के बाद ही उनके पति दीपक उन्हें भी सेना में जाने के लिए प्रेरित किया करते थे। 5 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी फ़ौज के हमले के दौरान दीपक सिंह ने उनका बहादुरी से मुकबला किया था और वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके बलिदान के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने रेखा को शिक्षा विभाग में नियुक्ति भी दी थी।

शिक्षा विभाग में पोस्टिंग के बाद भी रेखा का मन सेना में भर्ती होने के लिए लगा रहा। वो इस दिशा में प्रयास भी करती रहीं। इसी प्रयास के दौरान उन्होंने जिला सैनिक कल्याण संघ में जा कर भर्ती प्रक्रिया आदि की जानकारी ली। रीवा के जिला प्रशासन और सैनिक कल्याण संघ ने उनकी काफी मदद की। ससुराल वालों का भी उन्हें बहुत सहयोग मिला। उनका सेना में भर्ती होने का पहला प्रयास विफल रहा लेकिन दूसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिल ही गई।

15 जुलाई 1989 को रीवा के फरेंदा गाँव में जन्मे दीपक सिंह ने घायल होने के बाद भी 30 सैनिको की जान बचाई थी। उन्हें मरणोपरान्त वीरचक्र दिया गया था। यह सम्मान उनकी पत्नी रेखा सिंह ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से प्राप्त किया था।

दलित नागराजू की हत्या का जश्न मना रहे मुस्लिम कट्टरपंथी, कहा – काफिर के साथ रिश्ता हराम, मुस्लिम लड़कियों से दूर रहो

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित सुरूरनगर में बिल्लिपुरम नागराजू नामक दलित व्यक्ति की उस मुस्लिम लड़की के परिजनों ने बेरहमी से हत्या कर दी, जिससे उसने प्यार और शादी की थी। बिल्लिपुरम नागराजू और अशरीन सुल्ताना ने अपनी मर्जी से एक-दूसरे से शादी की थी। दोनों बालिग़ थे। इस मामले में सुल्ताना के भाई मोहम्मद मोबिन अहमद के अलावा जीजा मोहम्मद मसूद अहमद को भी गिरफ्तार किया गया है।

जीशान मोमिन नामक एक महिला ने इस हत्या को जायज ठहराते हुए ट्विटर पर लिखा, “ये (अशरीन सुल्ताना) अब भी उस हिन्दू लड़के के लिए लड़ रही है और अपने भाई का जीवन भी बर्बाद कर देगी। पहले तो उसने एक काफिर के साथ हराम रिश्ता बनाया, फिर उसने एक गैर-मुस्लिम से शादी कर ली। इस्लाम में इसकी मनाही है और ये पाप भी है। उस हिन्दू लड़के ने उसका धर्मांतरण करा दिया और ये मान भी गई। इस भगवा प्यार के जाल से बच कर रहें।”

जबकि सच्चाई ये है कि नागराजू हर हाल में अपनी बीवी को खुश रखना चाहता था और वो उसकी अम्मी को खुश करने के लिए इस्लाम अपनाने के लिए भी तैयार था। उसने अपनी सोने की चेन बेच कर अपनी बीवी को ईद की शॉपिंग कराई थी। हुसैन अली नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि ‘भगवा लव ट्रैप’ ने एक और मुस्लिम परिवार को बर्बाद कर दिया। उसने पूछा कि ये मुस्लिम लड़कियाँ ‘काफिरों’ को क्यों चुनती है, जो शादी के लिए उस पर जादू कर देते हैं।

हुसैन अली ने इस पूरे मामले के लिए लड़की को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ‘कुफ्र’ को स्वीकार कर के उसने पाप किया है। शैम्स तबरेज कासमी ने भी ‘भगवा लव ट्रैप’ का हैशटैग लगाते हुए लिखा, “हैदराबाद हत्या मामले में सच्चाई ये आई है कि लड़की को पहले हिन्दू बनाया गया, फिर दलित लड़के के साथ आर्य समाज मंदिर में विवाह हुआ। किसी की भी हत्या करना गलत है, लेकिन ये बात झूठ है कि डाली लड़का मुस्लिम बनने को तैयार था। उसने लड़की को हिन्दू बनाया था।”

‘TVH मुस्लिम्स’ नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा कि दोनों की शादी हिन्दू रीति-रिवाज से हुई, लड़का इस्लाम में धर्मांतरण करने को तैयार नहीं था और उसने लड़की को हिन्दू बना दिया। ओमर अब्बासी हयात नामक यूजर ने पूछा कि ये कैसा प्यार है जहाँ लड़का धर्मांतरण करना चाहता था, लेकिन कर लड़की ने लिया। इन मुस्लिमों ने ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को नकारते हुए इसे प्रोपेगंडा करार दिया। एक ने धमकी दी कि मुस्लिम लड़कियों से दूर रहो।

हिन्दू-मुस्लिम अंतर्धार्मिक विवाहों में लड़का हिन्दू हो या लड़की, भुगतना उन्हें ही पड़ता है। ‘लव जिहाद’ के मामलों में लड़की के साथ धोखा किया जाता है और छद्म हिन्दू नाम व पहनावे का राज़ शादी के बाद ही खुलता है। लड़की मुस्लिम बनने को मानी तो ठीक, नहीं तो बोरे या सूटकेस में लाश मिल सकती है। वहीं लड़का हिन्दू और लड़की मुस्लिम हुई तो लड़की के परिजन लड़के की हत्या कर देते हैं। फिर उसका जश्न मनाया जाता है।

महाराष्ट्र: मस्जिदों से लाउडस्पीकर न हटने पर फिर भड़की MNS, पुलिस से कहा- अब की बार थाने के बाहर बजेगी हनुमान चालीसा

महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर को लेकर जारी सियासत के बीच अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने सीधे तौर पर महाराष्ट्र की पुलिस को चैलेंज कर दिया है। मनसे की ओर पुणे के पुलिस कमिश्नर को लिखे गए पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि पुलिस मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारकर सड़क पर रखे अन्यथा अब पुलिस स्टेशन के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा।

पत्र में मौलानाओं से सहमति पत्र भी लेने की बात कही गई है। मनसे की तरफ से जो पत्र जारी किया गया है, उसमें कहा गया है कि वो किसी भी तरह की धार्मिक दरार या उन्माद नहीं फैलाना चाहते हैं, लेकिन लाउडस्पीकर एक सामाजिक मुद्दा बन गया है। मनसे का कहना है कि वो इस मसले पर अडिग बनी रहेगी। यहीं नहीं मनसे ने पत्र के जरिए ये भी दावा किया है कि अकेले पुणे शहर में ही 400-450 के करीब मस्जिदें हैं और उन सभी पर अवैध तरीके से लाउडस्पीकर लगे हुए हैं।

मनसे द्वारा पुणे पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र

मौलवी से बात करे पुलिस

मनसे ने कहा है कि वो अजान का विरोध नहीं करती है, लेकिन लाउडस्पीकर से ऐसा नहीं होना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, इन लाउडस्पीकरों को या तो बंद कर दिया जाना चाहिए या हटा देना चाहिए। इससे आसपास के लोगों को होने वाली तकलीफों से राहत मिलेगी। पार्टी ने पुलिस को सुझाव दिया है कि इस मसले पर उसे मस्जिदों के मौलवियों से बात हमें इसकी एक रिपोर्ट देनी चाहिए और ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे लॉ एंड ऑर्डर में किसी भी तरह की समस्या न आए। पुलिस की रिपोर्ट से ऐसा संदेश जाना चाहिए कि मस्जिदों से लाउडस्पीकरों पर अजान नहीं होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने मनसे की लगातार चेतावनियों के बाद ऐलान किया था कि वो धार्मिक व मजहबी स्थलों से लाउडस्पीकर हटा लेंगे। हालाँकि 3 मई को राज ठाकरे की दी हुई डेडलाइन खत्म होने के बाद भी जब लाउडस्पीकर नहीं उतरे तो उन्होंने 4 मई को एक बयान में हिंदुओं से अपील की थी कि जहाँ भी अजान की आवाज सुनाई दे, वहाँ दोगुनी आवाज में हनुमान चालीसा बजाएँ।

शंघाई में लोगों को भूख से तड़पा रहा चीन, विरोध करने वालों को शी जिनपिंग ने दी धमकी: कहा- बदनाम किया तो करेंगे कार्रवाई

चीन में कोविड-19 को लेकर जारी सख्त लॉकडाउन के कारण वहाँ के लोग भूख-प्यास से तड़प रहे हैं। अपने-अपने घरों में बंद लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसे में चीन की सरकार हर तरफ आलोचना हो रही है। इन आलोचनाओं को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि चीन को बदनाम करने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चीन की जीरो-कोविड पॉलिसी को लेकर शंघाई और देश के अन्य हिस्सों के नागरिकों की खबरें हाल ही में पूरी दुनिया की मीडिया के माध्यम से सामने आई थी। वहाँ के लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। अब जिनपिंग ने कहा कि चीन की जीरो कोविड पॉलिसी पर जो भी सवाल उठाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।

कोविड के नाम पर चीन में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन पर सवाल उठने के बाद गुरुवार (5 मई 2022) को शी जिनपिंग के नेतृत्व में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वोच्च संस्था पोलित ब्यूरो की स्थाई समिति की बैठक की गई। इसी दौरान यह चेतावनी जारी की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि जीरो कोविड नीति का दृढ़ता से पालन होता रहेगा।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि सात सदस्यीय समिति ने कहा कि कोविड की यह नीति पार्टी ने तय की है और यह नीति वैज्ञानिक एवं प्रभावी है। समिति ने यह भी दावा कि वुहान में कोरोना से जंग जीती गई है और अब शंघाई में देश जंग जीतेगा।

बता दें कि शंघाई शहर में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। शंघाई में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 5 अप्रैल से कठोर लॉकडाउन लगाया गया है, जिसके कारण शहर के 2.5 करोड़ लोग अपने घरों में कैद है, लेकिन भोजन खत्म होने के बाद अब ये लोग भूखों मरने लगे हैं। ऐसे में अब शंघाई के लोग लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर बाहर आ रहे हैं, ताकि अगर वो पकड़े जाएँ तो कम से खाना तो मिलेगा।

इसी क्रम में शंघाई में एक व्यक्ति ने कोरोना के नियमों का केवल इसलिए उल्लंघन किया, ताकि वो पुलिस से संपर्क कर सके। उसने पुलिसवालों से कहा कि वो उसे गिरफ्तार कर लें। उसका मानना था कि घर में भूखे मरने की बजाय अगर वो जेल में रहेगा तो उसे वहाँ कुछ खाने को मिल सकता है।

शंघाई में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लॉकडाउन के बीच लोग अपने घर की बालकनी में आकर चिल्ला-चिल्ला कर मदद माँग रहे हैं। एक वीडियो में लोगों को ‘मदद करो, मदद करो हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं’ है कहते हुए सुना जा सकता है। यहीं नहीं भूख की मार से त्रस्त चीनी नागरिक अब पुलिस के डंडे का खौफ छोड़कर बाहर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

चीन के शंघाई में पहले कोविड के मद्देनजर 5 अप्रैल तक लॉकडाउन था, लेकिन बाद में इसे अनिश्चित समय तक बढ़ा दिया। स्थानीय अब बुनियादी जरूरतें न पूरी होने के चलते प्रशासन से नाराज हैं। वीबो साइट पर लिख लिखकर स्थानीय लोग अपना गुस्सा उतार रहे हैं। इनमें से एक ने लिखा, “मतलब ही नहीं है कि तुम कहाँ रहते हो। तुम्हारे पास पैसे हैं या नहीं। तुम्हें चिंता इस बात की होनी चाहिए कि तुम क्या-क्या खा सकते हो और कैसे करके चीजों को खरीद सकते हो।” वहीं दूसरे शख्स ने प्रशासन को लिखा कि क्या आप चाहते हो कि बोशन के लोग भूख से तड़प कर मर जाएँ।

चीनी संवाददाता एलिस सु ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें ड्रोन से लोगों को अपने घर की खिड़की दरवाजे बंद रखने को कहा जा रहा है। सु ने लिखा, “शंघाई के लोग अपनी बालकनियों में गाने गाकर सप्लाई की कमी का विरोध कर रहे हैं। एक ड्रोन दिखता है, जो कहता है कृपया w covid प्रतिबंधों का पालन करें। स्वतंत्रता के लिए अपनी आत्मा की इच्छा को नियंत्रित करें। खिड़की मत खोलो या गाओ मत।”

उदयपुर के हनुमान मंदिर में बिन अनुमति घुसे नाजिम-जाकिर गिरफ्तार, नॉन वेज बनाकर हड्डियाँ परिसर में फेंकते थे : देखें वीडियो

राजस्थान के उदयपुर में एक हिन्दू मंदिर की छत पर 2 मुस्लिम युवकों द्वारा माँसाहार बनाने की खबर है। आरोपितों के नाम ज़ाकिर हुसैन और नाजिम शेख बताए जा रहे हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने माँस खाने के बाद हड्डियों को मंदिर के परिसर में ही फेंक दिया। इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। दोनों आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। घटना शुक्रवार (6 मई 2022) की है।

भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने मंदिर का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मामले पर ध्यान देने की अपील की है। वीडियो में गेट पर ‘जय श्री राम’ लिखे मंदिर के आगे पुलिस बल तैनात दिख रहा है। मंदिर की छत पर सिलेंडर गैस और चूल्हे पर बर्तन रखा दिखाई दे रहा। बर्तन को खोल कर दिखाए जाने पर नॉनवेज जैसा कुछ दिखता है।

इंडिया न्यूज़ की खबर के मुताबिक, “आरोपित लगभग 15 दिनों से मंदिर की छत पर रह रहे थे। इस दौरान वो लगातर नॉनवेज बना कर खा रहे थे। इसकी सूचना स्थानीय लोगों ने पार्षद कुसुम पवार को दी थी। लोगों के साथ पहुँच कर पार्षद ने वो सभी सामान सड़क पर फिंकवा दिए। बाद में मंदिर परिसर को पानी से धुलवाया गया। पकड़े गए दोनों आरोपितों के बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि वो बिहार से सड़क बनाने के लिए बुलाए गए मजदूर हैं। आरोपितों को पहले भी मंदिर परिसर से जाने की चेतावनी दी गई थी लेकिन वो नहीं माने। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारी भी दोनों आरोपितों को नहीं पहचानते। पकड़े गए आरोपित ने छत पर माँस बनाना कबूल किया है।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक केस भूपालपुरा थाने में दर्ज हुआ है। आरोपितों पर धारा 295 के तहत केस दर्ज हुआ है। मंदिर अलीपुर इलाके के सामुदायिक भवन के पास बना है। घटना की जानकारी होने के बाद स्थानीय लोग मंदिर के आगे जमा हो कर विरोध कर रहे थे। मामले में शिकायत पार्षद कुसुम ने दी है। DSP जनरैल सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

पंजाब पुलिस की फजीहत के बाद अमन चोपड़ा के घर पहुँची राजस्थान पुलिस, चिपकाया गिरफ़्तारी वॉरंट: HC का आदेश का उल्लंघन

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार हाथ धो कर ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमन चोपड़ा के पीछे पड़ी हुई है। उनके आवास के बाहर राजस्थान के कम से कम 10 पुलिसकर्मियों ने डेरा डाला हुआ है। हालाँकि, इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस भी वहाँ पर मौजूद है, ताकि कोई अवैध कार्रवाई न की जा सके। लोगों ने इसे सत्ता द्वारा एक पत्रकार को चुप कराने के लिए धमकी और प्रताड़ना का मामला करार दिया है।

इतना ही नहीं, राजस्थान पुलिस उस अपार्टमेंट में भी घुस गई जिसमें अमन चोपड़ा का फ़्लैट है और उसके दरवाजे पर वॉरंट चिपका दिया। ये सब तब हो रहा है, जब राजस्थान उच्च-न्यायालय ने ‘न्यूज़ 18’ के एडिटर अमन चोपड़ा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पुलिस को रोक रखा है। उनके घर के दरवाजे पर गिरफ़्तारी का वॉरंट चिपकाने के बाद राजस्थान पुलिस को यूपी पुलिस थाने लेकर गई। इस दौरान अमन चोपड़ा के घर का ताला बंद था।

इससे पहले राजस्थान पुलिस ने ‘न्यूज़ 18’ के दफ्तर में जाकर भी इस तरह की हरकतें की थीं और बाद में बयान दिया था कि अमन चोपड़ा उन्हें नहीं मिले। उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के अलवर में जिस तरह से मंदिरों पर बुलडोजर चलाया गया और प्रतिमाएँ फेंक दी गईं, उस पर शो करने के कारण कॉन्ग्रेस सरकार उनके पीछे पड़ी है। अलवर में हिन्दू संगठनों ने भी इस कदम के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया है।

अमन चोपड़ा के घर पर राजस्थान पुलिस ने चिपकाया गिरफ़्तारी का वॉरंट

राजस्थान पुलिस की इस करतूत का लोग विरोध कर रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे उच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण और बेशर्मी भरा उल्लंघन करार दिया। अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने कहा कि ये नई संस्कृति बन गई है कि असली दोषियों को पकड़ने की बजाए घटना के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को ही चुप कराओ। विक्रांत ने लिखा कि महाराष्ट्र में अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के बाद भी कॉन्ग्रेस ने कोई सबक नहीं सीखा है।

हाथ में कमंडल, जेब में एक भी पैसा नहीं… सवारी डिब्बे में स्वामी विवेकानंद के साथ बाल गंगाधर तिलक की ऐसे हुई थी मुलाकात

उन्नीसवीं शताब्दी के गहरे अंधकार में अगर कोई मात्र भारत ही नहीं बल्कि पश्चिम को भी भारतीय दर्शन और परम्पराओं की ज्योति से प्रकाशमान करने का दम रखते थे, तो वह हैं स्वामी विवेकानंद। परिस्थितयों ने भले उनको बनाया हो लेकिन वो कभी उनके दास नहीं बने। वह एक सन्देश लेकर आए थे, जो पृथ्वी पर उपस्तिथ हर मनुष्य के लिए विद्यमान है। वह था – “अभय बनो।”

बीसवीं शताब्दी में स्वाधीनता का आंदोलन जब चरम पर था, उस समय विवेकानंद ज्वाला-समान एक नाम थे। ऐसा नाम जो भारत माता को एकमात्र अपना आराध्य मानकर जीवन उनके चरणों में समर्पित करने की प्रेरणा देते थे। भगिनी निवेदिता अपनी पुस्तक “दी मास्टर एज आई सॉ हिम”में लिखती हैं कि उनके लिए भारत के लिए चिंतन करना श्वास लेने जैसा था।

इस लेख में स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रीय चिंतन पर प्रकाश डालने का मैं प्रयास करूँगा।

12 जनवरी 1863 को बंगाल के कलकत्ता में माता भुवनेश्वरी देवी और पिता विश्वनाथ दत्त के घर जन्में नरेंद्रनाथ दत्त जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाने गए, मात्र 39 वर्ष 5 महीने और 24 दिन के जीवन में अगर उन्हीं के शब्दों में कहूँ तो 1500 वर्ष का कार्य कर गए। स्वामी विवेकानंद 25 साल की उम्र में ही परिव्राजक संन्यासी के रूप में भारत भ्रमण पर निकल गए थे।

भारत उस समय पराधीन था। हम पर अंग्रेज़ों का शासन था। अपने लगभग साढ़े चार वर्ष के भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि वर्षों की गुलामी के कारण हर एक भारतीय के अंदर आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, आत्म-गौरव और स्वावलम्बन पूर्णतः समाप्त हो गया है। उन्हें अपना कार्य स्पष्ट हो गया था, वो राजनीति से दूर रह कर हर भारतवासी में आत्मविश्वास जगाने का कार्य करने वाले थे।

स्वामी विवेकानंद ने यह आत्मविश्वास जगाने का, चरित्र-निर्माण का और मनुष्य-निर्माण का कार्य पूरे जीवन भर अनेकों कष्ट, कठिनाइयों को सहते हुए भी किया क्योंकि इसके बिना आत्मविश्वास जागृत नहीं होता और बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं है, जो स्वाधीनता के लिए अत्यावश्यक है।

स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक का संपर्क

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता बाल गंगाधर तिलक जो ”लोकमान्य तिलक” के नाम से भी प्रसिद्ध हैं, वह स्वामी विवेकानंद से प्रभावित थे। इनकी स्वामी विवेकानंद से मुलाकात भी हुई और व्यक्तिगत तौर पर उनसे राष्ट्रीय चिंतन के विषयों पर मार्गदर्शन लेने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था।

बाल गंगाधर तिलक के अनुसार स्वामी विवेकानंद से उनकी पहली भेट बम्बई से पुणे जाते समय यात्री डिब्बे में हुई थी। स्वामी विवेकानंद के पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे और उनके हाथ में बस एक कमंडल था। विश्व धर्म महासभा की सफलता के बाद जब उनके चित्र बाल गंगाधर तिलक ने समाचार पत्रों में देखे तो उनको याद आया कि यह वही संन्यासी हैं, जिन्होंने उनके घर पर कुछ दिन तक निवास किया था। इसके बाद दोनों के बीच पत्र व्यवहार भी हुआ था।

1901 में जब इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस का 17वाँ अधिवेशन हुआ तो उसमें भाग लेने के लिए बाल गंगाधर तिलक कलकत्ता आए थे। इसी दौरान वह बेलुड़ मठ जाकर स्वामी विवेकानंद से मिले थे। तब विवेकानंद ने उन्हें संन्यास लेने और बंगाल आकर उनका कार्यभार सँभालने को भी कहा था। क्योंकि स्वामी विवेकानंद के अनुसार अपने क्षेत्र में कोई व्यक्ति इतना प्रभावशाली नहीं होता, जितना सुदूर क्षेत्रों में। इस मुलाकात के बाद बाल गंगाधर तिलक बेलुड़ मठ आए थे और विवेकानंद से मार्गदर्शन प्राप्त किया था। उनके द्वारा स्थापित समाचार पत्र “केसरी” के संपादक एनसी केलकर भी स्वामी विवेकानंद से मिलने आते थे।

बाल गंगाधर तिलक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने वाले प्रमुख भारतीय क्रांतिकारियों में से एक जो कुशल और निपुण पत्रकार, लेखक, शिक्षक व वक्ता भी थे और लाल-बाल-पाल की तिकड़ी के महत्वपूर्ण सदस्य भी, वह बिपिन चंद्र पाल कहते हैं, ”विवेकानंद का संदेश आधुनिक मानवता का संदेश था… मुझे कहना होगा कि विवेकानंद ने एक बड़े वर्ग की आँखें खोली हैं।”

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे के खिलाफ कोर्ट में मुस्लिम पक्ष: ओवैसी ने कहा- खून-खराबे का रास्ता खोल रही अदालत

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित विवादित ढाँचे ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ (Gyanvapi Mosque) में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी का आज (7 मई 2022) दूसरा दिन है। दोपहर तीन बजे कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा वादियों और प्रतिवादियों के साथ ज्ञानवापी परिसर पहुँचेंगे। हालाँकि, उससे पहले मुस्लिम पक्ष ने अदालत में एक याचिका दायर कर कमिश्नर पर निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही कमिश्नर को बदलने की माँग की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव का कहना है कि कोर्ट ने मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी कराने का आदेश नहीं दिया। वीडियोग्राफी केवल बाहर के चबूतरे की होनी है। बहरहाल मामले पर दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी। इस बीच सर्वे के पहले दिन जिस तरीके से मुस्लमों ने नारेबाजी की थी, उसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया है। प्रशासन ने 1000 पुलिस और पीएसी के जवानों को एक किलोमीटर के दायरे में तैनात कर रखा है।

उल्लेखनीय है कि है कि मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया था कि मस्जिद की दीवारों को अँगुली से कुरेदने की कोशिश की गई थी। अत: कोर्ट कमिश्नर को बदला जाए।

इस मामले पर AIMIM प्रमुख ओवैसी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विवादित ढाँचे के सर्वे पर कहा कि ये फैसला एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोलने वाला है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत द्वारा सुप्रीम कोर्ट की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। इस आदेश से कोर्ट 1980-1990 के दशक की रथ यात्रा के दौरान हुए खून-खराबे और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रही है।”

पहले दिन क्या हुआ

विवादित ढाँचे ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ के सर्वे के पहले दिन काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 से सर्वे टीम के अंदर जाते वक्त जमकर अल्लाहु अकबर नारेबाजी की गई। वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष ने भी हर-हर महादेव के नारे लगाए। बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी लगातार इस सर्वे का विरोध कर रही है। समिति के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा था कि किसी को भी मस्जिद में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी।

क्या है मामला

18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पाँच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने की माँग समेत अन्य माँगों को लेकर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मुकदमा दायर किया था। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए मौके पर स्थिति जानने के लिए वकीलों का एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था। लेकिन विवादित स्थल का निरीक्षण नहीं हो सका था।

वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने 18 अगस्त 2021 के अपने पहले के आदेश को दोहराते हुए 8 अप्रैल 2022 को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त कर सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दी थी। अदालत ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने पहले के आदेश को जारी रखा और 10 मई से पहले ईद के बाद सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की कार्रवाई पर रिपोर्ट माँगी और सुनवाई की तारीख 10 मई भी तय की।

analf*ck69 – अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन के बेटे के लैपटॉप का पासवर्ड… पोर्न इतने गंदे कि मैकेनिक को धोना पड़ा था हाथ

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के बेटे हंटर बायडेन अक्सर अपनी अय्याशी और रंगीनमिजाजी को लेकर विवादों में रहते हैं। विलमिंगटन स्थित एक लैपटॉप दुकान के मालिक जॉन पॉल मैक आइजैक ने एक किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने अप्रैल 2019 की एक रात को हंटर बायडेन से मुलाकात का जिक्र किया है। ‘American Injustice: My Battle to Expose the Truth’ (अमेरिकी अन्याय: सच्चाई को सामने लाने के लिए मेरी लड़ाई) नामक किताब में उन्होंने उस मुलाकात के बारे में बताया है।

उस दिन वो दुकान बंद करने जा रहे थे, तभी उनके दरवाजे पर दस्तक पड़ी। वहाँ नशे में एक व्यक्ति पहुँचा, जिसने तीन मैकबुक लैपटॉप वहाँ रख दिए और फिर बैठ गया। उस व्यक्ति ने कहा कि वो सिगार बार से सीधे जल्दी में यहाँ आ रहा है, क्योंकि उसने सुना है कि 7 बजे दुकान बंद हो जाती है। उसने बताया कि लिक्विड डैमेज के कारण लैपटॉप्स ऑन नहीं हो रहे, लेकिन उन्हें इसका डेटा चाहिए। दुकान के मालिक ने जब उस व्यक्ति का पूरा नाम पूछा, तब जाकर उसे अंदाज़ा हुआ कि सामने कौन है।

आइजैक लिखते हैं कि पहले तो उन्हें लगा कि हंटर बायडेन के भाई बीयू बायडेन का निधन 3-4 वर्षों में हुआ होगा, ऐसे में इन लैपटॉप्स में उनकी यादें होंगी जिन्हें वो सहेज कर रखना चाहते होंगे। आइजैक ने मैक को खोल कर उसे बनाना शुरू किया, लेकिन वो ऑन ही नहीं हो रहा था और डेटा रिकवरी मुश्किल थी। 2015 मॉडल का एक 13 इंच का मैकबुक बूट हो रहा रहा, ऐसे में दुकानदार ने उसे लॉगिन करने की अनुमति माँगी।

हंटर बायडेन ने हँसते हुए कहा, “My Password is Fucked Up” और फिर कहा कि वो बुरा न माने। असल में हंटर बायडेन ने अपने लैपटॉप का पासवर्ड ‘analf–k69’ रखा था। हंटर बायडेन ने इसके बाद लैपटॉप दुकानदार को दे दिया और कहा कि वो इसे बनाने के बाद उन्हें वापस कर दें। उनके मैकबुक में बड़ी संख्या में पोर्नोग्राफी मैटेरियल्स थे। इसमें हंटर बायडेन की एक तस्वीर थी, जिसमें वो एक स्कार्फ और अंडरवियर में दिख रहे थे।

इसके अलावा हंटर बायडेन की एक नंगी सेल्फी भी उस मैकबुक में थी। कई महिलाओं के साथ उसमें उनकी तस्वीरें थीं। इसमें एक फाइल में उनकी आय भी थी, जिसके हिसाब से उन्होंने 2013 में 8.33 लाख डॉलर (6.41) करोड़ रवै, 2014 में 12.47 लाख डॉलर (9.59 करोड़ रुपए) और 2015 में 24.78 लाख डॉलर (19.06 करोड़ रुपए) कमाए थे, जिस पर उन्होंने टैक्स दिए। आइजैक लिखते हैं कि उन्होंने लैपटॉप को बनाने के बाद सोने से पहले अच्छे से हाथ भी धोए।

हिंदू छात्रा का अपहरण करने वाले आरिफ को UP पुलिस ने दबोचा, पुलिस से बोला- धर्मांतरण करवा कर लड़की से किया हूँ निकाह

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फिरोजाबाद (Firozabad) से एक बार फिर एक लड़की को अगवा कर धर्मांतरण करने के बाद निकाह करने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि लड़की बी.कॉम की छात्रा है और आरोपित आरिफ ने छात्रा को अपनी जाल में फँसाकर अगवा कर लिया और फिर धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया। लव जेहाद (Love Jehad) के इस मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद कर लिया है।

मामला जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र का है। इस इलाके की रहने वाली एक हिंदू लड़की कॉलेज में बी.कॉम की पढ़ाई कर रही है। बताया जा रहा है कि 25 अप्रैल 2022 को युवती अपने भाई को लेकर किसी काम से उसके स्कूल गई थी। उसी दौरान आरिफ आया और छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। आरिफ रामगढ़ थाना क्षेत्र के आकाशवाणी रोड का रहने वाला है।

बहन को दूसरे युवक के साथ जाने के बाद भाई ने इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। इसके बाद लड़की के परिजन उसे तलाश करने लगे, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। अंत में छात्रा के पिता ने थाने में जाकर पुलिस को तहरीर दी और आरिफ को नामजद किया। आरोपित के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

प्राथमिकी के आधार पर पुलिस आरिफ को गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश देने लगी, लेकिन वह कहीं हाथ नहीं आया। इसी दौरान गुरुवार (5 मई 2022) को पुलिस को मुखबिर से आरिफ के बारे में जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस ने आरिफ को दखल की पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर छात्रा को भी बरामद कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरिफ से पूछताछ की। पूछताछ में आरिफ ने पुलिस को बताया कि वह छात्रा का धर्मांतरण कराने के बाद उससे निकाह कर चुका है। हालाँकि, धर्म परिवर्तन से संबंंधित उसने किसी तरह का कागजात नहीं दिया।

सीओ (सिटी) हरि मोहन सिंह ने बताया कि डिग्री कॉलेज की छात्रा के गायब होने से छात्रा के परिजन बेहद परेशान थे और उन्होंने एक युवक पर शक जाहिर किया था। इसके आधार पर छात्रा के पिता ने मुकदमा लिखवाया। उसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। छात्रा का मेडिकल कराकर अदालत के सामने पेश किया जा रहा है।