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माफिया मुख्तार अंसारी के वकील की दबंगई, अधिकारियों को धमकाया और जजों को कहे अपशब्द: वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की बाँदा जेल में बंद पूर्व विधायक और पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी (Mafia Mukhtar Ansari) के वकील दरोगा सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे जजों को अपशब्द बोलते हुए नजर आ रहे हैं। अधिवक्ता के खिलाफ पुलिस अधीक्षक सुशील घुले के निर्देश पर सरायलखंसी थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज किया।

वायरल वीडियो किन्नूपुर गाँव का बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि जाँच में सामने आया है कि वायरल वीडियो में किन्नूपुर गाँव में जमीन की पैमाइश करने पहुँची राजस्व विभाग की टीम को वकील दरोगा सिंह ने न केवल धमकाया, बल्कि जजों के लिए अपशब्द कहा

दरअसल, 2 दिन पहले प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और प्रभारी संजय निषाद जिले के आला अधिकारियों के साथ रात्रि प्रवास पर गए थे। गाँव में मंत्री ने बिजली और रास्ते की बदहाल स्थिति देखी। इस दौरान गाँव के निवासियों ने बताया कि इस रास्ते पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। इसके बाद मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि अगली समीक्षा बैठक से पहले यहाँ कि समस्याएँ खत्म हो जानी चाहिए। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम गाँव की पैमाइश करने पहुँची थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद जिले के आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया। इसके बाद वकील के खिलाफ कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी केके गुप्ता ने बताया कि वायरल वीडियो की जाँच में पाया गया है कि दरोगा सिंह ने जज को गाली दी है। दरोगा सिंह के खिलाफ पहले से भी कई मामलों में केस दर्ज हैं।

बता दें कि कानूनगो राजेश सिंह ने प्रकरण को लेकर सरायलखंसी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने वकील दरोगा सिंह के खिलाफ संबंधित मामले में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले ने बताया कि कानूनगो की ​शिकायत पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शाहजेब ने पहले इंटरनेट केबल से गला घोंटा, फिर बोरी में डाल लाश समंदर में फेंकी: सोनम शुक्ला के पिता बोले- भागने को तैयार नहीं होने पर मेरी बेटी की कर दी हत्या

पिछले दिनों मुंबई में एक लड़की की क्षत-विक्षत लाश मिली थी। मृतका की पहचान सोनम शुक्ला के तौर पर हुई थी। NEET की तैयारी कर रही इस 18 वर्षीय छात्रा की हत्या के आरोप में पुलिस ने उसके कथित बॉयफ्रेंड मोहम्मद अंसारी को पकड़ा था। कुछ रिपोर्टों में आरोपित की पहचान 23 साल के शाहजेब के तौर पर भी बताई गई है।

इंडिया टीवी से बातचीत में सोनम के पिता श्रीकांत शुक्ला ने आरोप लगाया है कि लव जिहाद के कारण उनकी बेटी की हत्या की गई। उनका कहना है कि शाहजेब उनकी बेटी को घर से भगाकर ले जाना चाहता था। जब वह इसके लिए राजी नहीं हुई तो उसकी हत्या कर दी गई। सोनम की हत्या 25 अप्रैल को हुई थी और लाश 28 अप्रैल को समंदर के किनारे मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार सोनम का पहले इंटरनेट केबल से गला घोंटकर हत्या की गई। फिर उसकी लाश बोरी में पैक कर समंदर में फेंक दी गई।

सोनम के पिता ने बताया है कि शाहजेब बहत शातिर है। उसकी 26 अप्रैल को टिकट थी। वह उनकी बेटी को लेकर भागने वाला था। उसे लगा था कि वह उनकी बेटी को मना लेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी चरित्रहीन नहीं थी। आस-पड़ोस के लड़के से बात होना कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिन जब लड़का, लड़की को मनाने में कामयाब नहीं हुआ तो दोनों के बीच काफी झगड़ा हुआ। इसके अलावा और क्या हुआ वो तो हमें नहीं पता क्योंकि वह उसके कमरे में हुआ, लेकिन हमारी लड़की बहुत अच्छी थी।”

उन्होंने आगे कहा, “वह हमारी लड़की को लेकर भागने की फिरक में था। इसमें एक नहीं, कई लोग शामिल हैं। जब वह इसमें कामयाब नहीं हुआ तो झगड़ा हुआ। इस दौरान हमारी लड़की ने उसकी ऊँगली में काटा। इसके बाद उसे लगा कि इसे छोड़ दूँगा तो भी हमारा पोल खुलेगा तो उसने अपने आपको बचाने के लिए उसे मारकर बोरी में डाल कर मलाड की खाड़ी में फेंक दिया। जिसका शव वर्सोवा पुलिस को मिली।”

ईद के भाषण में CM ममता ने किन्हें बताया काफिर? दावा: वायरल वीडियो में कहती दिखीं – ‘हम काफिर नहीं हैं, लड़ेंगे और उन्हें ख़त्म कर देंगे’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो भीड़ को संबोधित करती दिख रही हैं। बताया जा रहा है कि ये वीडियो मंगलवार (3 मई, 2022) को ईद के मौके का है। इस दौरान उन्होंने ‘काफिर’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “उन्हें वो करने दो जो वो करना चाहते हैं। हम डरे नहीं हैं। हम डरपोक नहीं हैं। हम ‘काफिर’ नहीं हैं। हमें पता है कि लड़ते कैसे हैं। हम लड़ना जानते हैं। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। उन्हें खत्म कर देंगे।”

ममता बनर्जी का ये वीडियो वायरल हुआ तो लोगों को इस पर विश्वास ही नहीं हुआ। नेटिजन्स ने एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह से पब्लिक में संबोधन पर चिंता व्यक्त की। ममता के इस भाषण के दौरान जो सबसे आकर्षित करने वाली बात रही वो ये थी कि सामान्य तौर पर बांग्ला में बात करने वाली पश्चिम बंगाल की सीएम ने ये भाषण हिंदी में दिया। उनके इस बयान से ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि वो कथित तौर पर हिंदू भाषियों या फिर बंगाली नहीं बोलने वालों को एक मैसेज देना चाहती थीं।

इस पर स्वराज्य पत्रिका के लेखक सतीश विश्वनाथन ने ट्वीट किया, “एक मौजूदा मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंच पर ‘हम काफिर नहीं है’ कहती हैं। सदियों से इस अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल हिंदुओं को अमानवीय बनाने और उनके खिलाफ हिंसा को सही ठहराने के लिए किया जाता रहा है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को नॉर्मलाइज करने के मामले में ओवरटन विंडो में बदल दिया गया है।”

वहीं ट्विटर यूजर Agnijwala ने कहा, ‘हिंदी में भाषण…किसे लुभाने के लिए? फिर भी लगातार गैर-बंगालियों पर हमले किए जाएँगें और उन्हें दूसरे राज्यों से लाए गए गुंडे कहेंगे। हमें @BanglaPokkho द्वारा इसे संशोधित किए जाने का इंतजार है हम काफिर नहीं हैं।”

इसी तरह से ममता के स्पीच पर एक अन्य ट्विटर यूजर मिस्टर सिन्हा ने कहा, “हम काफिर नहीं हैं, हम काफिर नहीं हैं, हम उनके खिलाफ लड़ेंगे, हम उन्हें खत्म कर देंगे” – ममता बनर्जी। जिन लोगों को नहीं पता उनके लिए, ‘काफिर’ कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा हिंदुओं को दी जाने वाली गाली है। इनकी किताब कहती है कि काफिरों को जीने का हक नहीं है।”

शिवानी सहाय नाम की यूजर सवाल करती हैं कि आखिर वो हिंदी में क्यों बोल रही हैं। शिवानी लिखती हैं, “वो बंगाली क्यों नहीं बोल रही हैं? वह क्यों कह रही हैं ‘हम काफिर नहीं है’? उन्हें हमारी ओर से सभी काफिरों की ओर से किसी पुस्तक के लोगों की तरफ से ये कहने की कोई जरूरत नहीं है। हिंसक और कट्टरपंथी क्षेत्रों हिंसक कट्टरपंथी इलाकों में उनका झुकना पश्चिम बंगाल के लिए सही नहीं है।”

इस बीच कुछ लोगों ने ये भी माना कि आखिरकार आखिरकार ममता बनर्जी अपना असली मजहब दिखा रही हैं। भार्गवी ने कहा, “आखिरकार ममता बनर्जी ने अपने असली धर्म को सबके सामने रख ही दिया। भाषण में वह खुदा, अमन आदि की बातें करते हुए कह रही हैं कि ‘हम काफिर नहीं हैं’। और बंगाली हिंदू बीजेपी को कोसने में लगे हैं!”

अधिक बर्मन नाम के यूजर ने कहा, “हम डरते नहीं हैं, हम काफिर नहीं है ? इस तरह से हिंदुओं के खिलाफ नफरत और दुर्व्यवहार को मानवता विरोधीस इस्लामवादी और ब्राम्हण विरोधी फासीवादी ताकतों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है.. बंगाली लोगों? जागो .. तुम लोगों की पसंद को क्या हो गया है। हिंदुओं के खिलाफ इतनी नफरत से बीमार।”

इस मामले में राजनीतिक टिप्पणीकार सुनंदा वशिष्ठ ने कहा, “हम काफिर नहीं हैं- क्या ममता ने सच में ऐसा कहा था? काफिर कौन नहीं है? क्या अब ममता काफिर नहीं हैं?”

वहीं कुछ लोगों ने याद दिलाया कि ममता बनर्जी अक्सर शब्दों का उच्चारण ऐसे करती हैं जिन्हें समझना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में उन्होंने क्या कहा इसे लेकर शत-प्रतिशत निश्चित होना मुश्किल है। ‘कूलफनीशर्ट नाम के यूजर ने कहा, “क्या सही में उन्होंने ऐसा कहा था। वैसे तो उनके शब्दों के उच्चारण की बड़ी समस्या रही है।…हर भाषा में।”

हालाँकि, अभी तक ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है कि ममता बनर्जी ने अपने भाषण में क्या कहा था। लेकिन, ये नहीं भूलना चाहिए कि विवादित बयान देने का उनका एक इतिहास रहा है। वो चुनावों के दौरान अक्सर ‘खेला होबे‘ की नारेबाजी करती थीं। उनके ऐसे इतिहास को देखें तो इस बात पर किसी को भी आश्चर्यचकित होने की आवश्यकता नहीं है कि उन्होंने ‘काफिर‘ शब्द का इस्तेमाल किया हो।

‘ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ है विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार, एक साथ दौड़ सकते हैं 7 घुड़सवार: महाराणा कुंभा ने 15 वर्षों में कराया था निर्माण

चीन की महान दीवार (Great Wall of China) विश्व की सबसे लंबी दीवार है, जो दुर्गम पहाड़ियों के बीच बनाई गई है। इसलिए इसे विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल है, लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह दीवार भारत में स्थित है। राजस्थान के कुंभलगढ़ में बनाए गए इस किले को महान क्षत्रिय राजा महाराणा कुंभा (Rana Kumbha) ने 15वीं शताब्दी में बनवाया था। चित्तौड़गढ़ किले के बाद यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा किला है। इस किले का इतिहास बेहद गौरवशाली है। आइए जानते हैं कुंभलगढ़ किले के बारे में:

कुंभलगढ़ किले का निर्माण

मेवाड़ के महाराणा कुंभा ने साल 1443 से 1458 ईस्वी के बीच लगभग 15 वर्षों में इसे बनवाया था। धरातल से लगभग 3,600 फीट की ऊँचाई पर बसे इस किले के चारों तरफ लगभग 38 किलोमीटर लंबा दीवार का निर्माण कराया गया है। इसकी दीवारें 15 फीट चौड़ी हैं और इस पर एक साथ 7 घुड़सवार चल सकते हैं। किले के अंदर बने कमरों के साथ अलग-अलग खंड हैं और उन्हें अलग-अलग नाम दिए गए हैं। दुर्ग का निर्माण पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के बनवाये थे। इस सिक्के पर दुर्ग और उनका नाम अंकित था।

कहा जाता है कि इस किले के निर्माण के लिए जिस स्थान को चुना गया था, वह मौर्य वंश के सम्राट से जुड़ा है। इस स्थान पर मौर्य शासक सम्राट अशोक के द्वितीय पुत्र द्वारा निर्मित एक किला पहले से ही था, जो कि खंडहर बन गया था। उसी स्थान पर उस समय के प्रसिद्ध वास्तुकार ‘मदन या मंदान’ ने वास्तुशास्त्र के नियमों के तहत इस किले का निर्माण कराया था। महाराणा कुंभा स्वयं भी शिल्पशास्त्र के महान ज्ञाता थे।

इस किले में सैकड़ों बावड़ी, तालाब और कुएँ भी बनवाए गए थे, ताकि जल को संग्रहित किया जा सके और किले की जल की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। कहा जाता है कि किले के तालाबों से आसपास के गाँवों के किसानों को खेती के लिए जल की आपूर्ति भी की जाती थी।

महाराणा कुम्भा से लेकर महाराजा राज सिंह तक पूरा राज परिवार इसी किले में रहता था। महाराणा प्रताप सिंह का जन्म भी इसी इसी किले में हुआ था। उन्होंने मेवाड़ का शासन भी इसी किले से किया था। इतना ही नहीं, पृथ्वीराज चौहान और महाराणा सांगा का बचपन भी इसी किले में बीता था। 

कुंभलगढ़ किले से जुड़ी रोचक कहानी

इस किले से जुड़ी एक बेहद रहस्यमयी कहानी भी प्रचलित है। हालाँकि, कई इतिहासकार इसे किवदंती मानते हैं। कहा जाता है कि साल 1443 में जब महाराणा कुंभा ने इस किले के निर्माण का कार्य शुरू किया तो कई तरह की बाधाएँ सामने आने लगीं। इससे महाराणा काफी चिंतित हो गए।

उसी दौरान एक संत ने महाराणा कुंभा को इस किले के निर्माण से जुड़े रहस्य के बारे में बताया। संत ने कहा कि किले की दीवार का निर्माण तभी आगे बढ़ेगा, जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से बलिदान देगा। महाराणा को चिंतित देख एक अन्य संत अपना बलिदान देने को तैयार हो गए। संत ने कहा कि वे पहाड़ी पर चलते जाएँगे और जहाँ वे रूकेंगे वहीं उनकी बलि चढ़ा दी जाए। कहा जाता है कि लगभग 36 किलोमीटर चलने के बाद संत पहाड़ी पर एक स्थान पर जाकर रूक गए। इसके बाद वहीं उन्होंने अपनी बलि दे दी। इसके बाद दीवार का निर्माण पूरा हुआ।

‘अजेयगढ़’ के नाम से विख्यात कुंभलगढ़ किला

राजस्थान के राजसमंद जिले में पहाड़ियों के बीच बने कुंभलगढ़ को ‘अजेयगढ़’ के नाम से भी जाना जाता है। अजेयगढ़ का अर्थ हुआ, ऐसा गढ़ जिसे जीता ना जा सके। इस किले को जीतना किसी भी शासक के लिए बेहद ही मुश्किल रहा है। इस किले की एक विशेषता यह भी है कि यह भव्य किला वास्तव में कभी युद्ध में नहीं जीता गया था। कहा जाता है कि इस किले की रक्षा गहलोत या सिसोदिया वंश की कुलदेवी बाणमाता स्वयं करती हैं।

कुंभलगढ़ किले में कुल 13 दरवाजे हैं। इसका ‘आरेठ पोल’ नामक दरवाजा केलवाड़े कस्बा के पास बना है। यहाँ पर बेहद सख्त पहरा हुआ करता था। यहाँ से करीब एक मील की दूरी पर ‘हल्ला पोल’ है। वहाँ से थोड़ा और आगे ‘हनुमान पोल’ है। हनुमान पोल के पास ही महाराणा कुंभा द्वारा स्थापित और नागौर से विजित भगवान हनुमान की मूर्ति है। इसके बाद ‘विजय पोल’ दरवाजा आता है। यहीं से प्रारम्भ होकर पहाड़ी की एक चोटी बहुत ऊँचाई तक चली गई है। इस स्थान को ‘कटारगढ़’ कहते हैं। विजय पोल से आगे बढ़ने पर भैरव पोल, नीबू पोल, चौगान पोल, पागड़ा पोल तथा गणेश पोल आते हैं। गणेश पोल के सामने वाली समतल भूमि पर गुम्बदाकार महल तथा देवी का स्थान है।

इतिहासकारों के अनुसार, इस किले को जीतने के लिए कई आक्रमण हुए। पहला आक्रमण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में 1457 में अहमद शाह प्रथम ने किया, लेकिन उसकी कोशिश नाकाम रही। उसके बाद महमूद खिलजी ने 1458 और 1467 में आक्रमण किया, लेकिन दोनों बार उसे हारकर वापस लौटना पड़ा। कहा जाता है कि जब खिलजी किले को जीतने में नाकामयाब रहा तो गहलोत या सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी बाणमाता माता की भव्य प्रतिमा को खंडित कर लौट गया।

इसके बाद गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन ने इस दुर्ग को जीतने की हसरत लेकर आक्रमण किया, लेकिन वह भी असफल रहा। उसके बाद मुगल आक्रांता अकबर ने अपने सेनानायक शाहबाज खाँ को विशाल सेना के साथ दुर्ग पर आक्रमण करने के लिए भेजा। कहा जाता है कि मुगल आक्रमणकारियों ने किले में घुसने के लिए तीन महिलाओं को जान से मारने की धमकी देकर उनसे किले का गुप्त रास्ता जान लिया। हालाँकि गुप्त द्वार जानने के बाद भी वे किले के अंदर नहीं आ पाए। बाद में धोखे से इस इस किले के जलस्रोतों में जहर मिला दिया था।

कुंभलगढ़ दुर्ग के संबंध में मुस्लिम इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा कि यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना हुआ है कि इसे नीचे से देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है। कुंभलगढ़ किले के भीतर भी एक दुर्ग है, जिसे ‘कटारगढ़’ के नाम से भी जाना जाता है। यह गढ़ सात विशाल द्वारा और मजबूत प्राचीरों से सुरक्षित है। इस दुर्ग के भीतर बादल महल और कुंभा महल हैं।

कुंभलगढ़ और पन्नाधाय

कहा जाता है कि इसी कुंभलगढ़ किले में पन्ना धाय नाम की ‘धाय माँ’ (पालने वाली माँ) ने महाराणा प्रताप के पिता राजकुमार उदय सिंह की जान बचाई थी। कहा जाता है कि जब राजपरिवार के बनवीर ने राजकुमार उदय सिंह सिंह की सोते समय हत्या करने का कुचक्र रचा तो इसकी जानकारी पन्ना धाय को हो गई। बाद में उन्होंने राजकुमार उदय सिंह की जगह अपने बेटे चंदन को सुलाकर उसकी बलि दी और राजकुमार उदय सिंह की जान बचाई थी।

बाद में राजकुमार उदय सिंह का पालन-पोषण इसी कुंभलगढ़ में छिपाकर किया गया और आगे चलकर मेवाड़ के महाराणा के रूप में इसी किले में उनका राज्याभिषेक हुआ। 1537 ई. में महाराणा उदय सिंह ने बनवीर को परास्त कर चित्तौड़ पर किया था। महाराणा उदय सिंह ने इसी कुंभलगढ़ से मेवाड़ का शासन किया।

विश्व विख्यात नीलकंठ मंदिर सहित 360 मंदिर

इस भव्य किले के अंदर की मुख्य इमारतें बादल महल, शिव मंदिर, वेदी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और ममदेव मंदिर, पारस नाथ मंदिर, गोलरा जैन मंदिर, माताजी मंदिर, सूर्य मंदिर और पिटल शाह जैन मंदिर सहित लगभग 360 मंदिर हैं। इनमें से 300 जैन मंदिर हैं और 60 हिंदू हैं।

इनमें सबसे प्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर है। नीलकंठ महादेव मंदिर में लगभग 5 फीट की ऊँचाई का एक विशाल शिवलिंग है। महाराणा कुंभा जब भी किसी लड़ाई के लिए जाते थे तो सबसे पहले नीलकंठ मंदिर में दर्शन कर निकलते थे और लड़ाई जीत कर आने पर सबसे पहले विजय को नीलकंठ महादेव को अर्पित करते थे। ऐसा कहा जाता है कि महाराणा कुंभ शरीर में इतने विशाल थे कि वह जब शिवलिंग का ‘अभिषेक’ करते थे तो बैठे-बैठे ही शिवलिंग पर दूध चढ़ाया करते थे।

महाराणा कुंभा ने किले में एक यज्ञ वेदी का भी निर्माण करवाया था। राजपूताना में प्राचीन काल के यज्ञ-स्थानों का यही एक स्मारक शेष रह गया है। दो मंजिला भवन के रूप में इसकी इमारत शेष है। उसके ऊपर एक गुम्बद है और गुम्बद के नीचे वाले हिस्से से धुआँ निकलने का प्रावधान है।

कौन थे महाराणा कुंभा

महाराणा कुंभा गहलोत या सिसोदिया वंश के परम प्रतापी शासक थे, जिन्होंने एक भी युद्ध नहीं हारा था। उनका असली नाम महाराणा कुंभकर्ण था और लोग उन्हें प्यार से महाराणा कुंभा कहते थे। उनके पिता का नाम महाराणा मोकल और दादा का नाम महाराणा लाखा था। वह 1433 से 1468 तक मेवाड़ के महाराणा थे। उनका राज्य रणथंभौर से आज के मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक फैला हुआ था। उनके साम्राज्य में वर्तमान राजस्थान और मध्य प्रदेश का बड़ा भूभाग शामिल था। महाराणा कुंभा ने 35 साल की उम्र तक 84 में से 32 किलों (Forts) का निर्माण करवाया था।

युद्ध के अलावा महाराणा कुंभा को अनेक दुर्ग और मंदिरों का निर्माण कराया था। उनका शासन काल स्थापत्य युग के स्वर्णकाल के नाम से जाना जाता है। चित्तौड़ में स्थित विश्वविख्यात ‘कीर्ति स्तंभ’ की स्थापना महाराणा कुंभा ने करवाई थी। उन्होंने ‘संगीत राज’ जैसी महान रचना की है, जिसे साहित्य का ‘कीर्ति स्तंभ’ माना जाता है। उन्होंने ‘चंडी शतक’ और ‘गीत गोविंद’ आदि ग्रंथों का टीका लिखा था। कुछ इतिहासकारों के मुताबिक, महाराणा कुंभा ने ‘कामसूत्र’ जैसा ही एक ग्रंथ भी लिखा था। इसके साथ ही खजुराहो में जिस तरह की मूर्तियाँ हैं, उसी तरह की मूर्तियाँ उन्होंने अपने राज में भी बनवाया था।  

महाराणा कुंभा के बारे में कहा जाता है कि वे इतने शक्तिशाली शासक थे कि आमेर और हाड़ौती जैसे ताकतवर राजघरानों से भी टैक्स वसूला करते थे। महाराणा कुंभा को एक उदार शासक के रूप में याद किया जाता है। कहा जाता है कि वे अपने राज में जहाँ भी लोगों को प्यासा देखते थे, वहीं कुआँ और तालाब खुदवा दिया करते थे। उनके शासनकाल में बड़ी संख्या में तालाबों और बावड़ियों का निर्माण किया गया था। 

UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल

विश्व की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली की पहाड़ियों में बने इस किले पर से कुंभलगढ़ के रेगिस्तान का नजारा साफ दिखाई पड़ता है। इसके चारों ओर 13 पर्वत शिखर हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। इस किले को साल 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची (UNESCO World Heritage Site) में शामिल किया गया है। इसे ‘भारत की महान दीवार’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे मेवाड़ का किला भी कहा जाता है।

इस किले में ‘कुंभास्वामी’ नाम का विष्णु मंदिर है। मंदिर में क्षत्रिय शैली में अत्यंत कलात्मक और सजीव प्रतिमाएँ स्थापित की गईं हैं। इस मंदिर के प्रांगण में पत्थर की शिलाओं पर महाराणा कुंभा ने प्रशस्ति उत्कीर्ण करवाई थीं।

दावा- एक भी कोविड वैक्सीन की बर्बादी नहीं, हकीकत- 20% टीके हो रहे बेकार: केरल मॉडल की फिर खुली पोल

कोविड वैक्सीनेशन अभियान के दौरान वैक्सीन की एक भी डोज बर्बाद न करने का दावा करके वाहवाही बटोरने वाला केरल राज्य अब वैक्सीन बर्बाद करने के लिए बदनाम हो रहा है। पहले जहाँ खबरें आई थीं कि राज्य में किसी वैक्सीन डोज को नहीं फेंका गया है वहीं अब पता चल रहा है कि केरल में भी 20 फीसद वैक्सीन डोज बेकार हो रही है। ये हाल ज्यादाकर प्राइवेट अस्पतालों में है।

इस संबंध में केरल प्राइवेट अस्पतालों के महासचिव डॉ अनवर एम अली ने बताया, “बहुत मेहनत के बाद भी कुछ अस्पताल फ्री वैक्सीन के लिए लोगों को अपने यहाँ इकट्ठा नहीं कर पाए। इसकी वजह से कुछ वैक्सीन स्टॉक फेंकना पड़ा। अस्पतालों को भी नुकसान हुआ और अब हमने निर्णय लिया है कि हम कोविड वैक्सीन में ज्यादा पैसा नहीं लगाएँगे। अब वैक्सीन की इतनी डिमांड भी नहीं है।”

क्वालिफाइड प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के सचिव डॉ अब्दुल वहाब ने कहा, “वैक्सीन की बर्बादी प्राइवेट अस्पतालों की सच्चाई है। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई बर्बादी न की जाए, लेकिन अब ये काम असंभव लग रहा है। जब लोग आसानी से सरकारी अस्पताल में जाकर उसे लगवा सकते हैं तो कोई क्यों चाहेगा कि वो जाएँ और पैसे देकर वैक्सीन लगवाएँ। या तो सरकार को वैक्सीन वापस खरीद लेनी चाहिए वरना वैक्सीन बनाने वालों को इसे वापस लेना चाहिए। नहीं तो, प्राइवेट अस्पतालों में इसकी बर्बादी चलती रहेगी।”

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब वैक्सीन की माँग बढ़ी तो प्राइवेट अस्पतालों ने बड़ी तादाद में वैक्सीनें खरीदीं। ज्यादातर ने इसे बैंक से 5% के ब्याज पर लिया। 20 लाख रुपए से 1 करोड़ की वैक्सीन खरीदी गई। मगर 2021 में ओनम के बाद लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के लिए जाना बंद कर दिया जिसके कारण प्राइवेट अस्पतालों को नुकसान झेलना पड़ा। सबसे बुरा हाल थ्रिशूर और एर्नाकुलम में हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ज्यादातर अस्पताल में 10 फीसद से 20 फीसद वैक्सीन बर्बाद हुईं, वो भी तब जब सरकार ने एक्पायर होने वाली वैक्सीन को रिप्लेस करने की अपनी कोशिश की। एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की ओर से जारी बयान में इस संबंध में कहा गया कि वैक्सीन बर्बादी का कारण यही है कि अगर सरकार उन एक्सपायर वैक्सीनों को रिप्लेस भी रही है तो हम उसका क्या करें। कोई वैक्सीन लेने वाला ही नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि प्राइवेट अस्पतालों को एक तो कोविशील्ड स्टॉक के एक्सपायर होने से नुकसान हुआ है दूसरा वैक्सीन के दाम गिरने से भी फर्क पड़ा है।

केरल मॉडल के बाद कोविड वैक्सीन पर केरल ने कहा झूठ

बता दें कि जब पूरे देश में कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था, तभी से लिबरल गिरोह ने सोशल मीडिया पर ‘केरल मॉडल’ की तारीफें करनी शुरू कर दी थी। लेकिन बाद में कोरोना के बढ़ते मामलों ने लिबरलों की पोल खोल दी और एक समय ऐसा आया कि आँकड़ों से पता चला कि देश के कुल सक्रिय मामलों में से 60 फीसद सिर्फ केरल के थे। केरल मॉडल की तारीफों के बाद ही वैक्सीन डोज बर्बाद न करने को लेकर केरल की तारीफ हुई थी।

गर्भ में लिंग की जाँच: मुश्किलों में रणवीर सिंह की ‘जयेशभाई जोरदार’, रिलीज से पहले हाई कोर्ट पहुँचा मामला

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की फिल्म ‘जयेशभाई जोरदार’ (Jayeshbhai Jordaar) रिलीज से पहले मुश्किलों में आ गई है। दरअसल, फिल्म के ट्रेलर में प्रसव पूर्व लिंग जाँच के सीन को लेकर यूथ अगेंस्ट क्राइम नाम के एक एनजीओ ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ के समक्ष इस मामले को रखा गया।

लाइव लॉ के मुताबिक, वकील पवन प्रकाश पाठक द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हालाँकि फिल्म कन्या भ्रूण हत्या विषय पर आधारित है और ‘सेव गर्ल चाइल्ड’ पर जोर देती है, लेकिन फिल्म के ट्रेलर में प्रसव पूर्व लिंग जाँच का सीन को दिखाया गया है, जो सही नहीं हैं। गर्भधारण और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के तहत यह गैरकानूनी है। उल्लेखनीय है कि यह एक ऐस अधिनियम है जो कन्या भ्रूण हत्या और भारत में गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए लागू किया गया था। इस अधिनियम के तहत प्रसव पूर्व लिंग जाँच पर प्रतिबंध है।

यहाँ देखें ‘जयेशभाई जोरदार’ फिल्म का ट्रेलर

याचिका में कहा गया है, “अल्ट्रासाउंड क्लिनिक सीन, जहाँ बिना सेंसर के लिंग निर्धारण के लिए अल्ट्रासाउंड की तकनीक का खुले तौर पर विज्ञापन दिखाया गया है। यह पीसी और पीएनडीटी अधिनियम की धारा 3, 3 ए, 3 बी, 4, 6 और 22 के अनुसार प्रतिबंधित है।” धारा 3ए के तहत प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण गैरकानूनी है। धारा 3बी में अल्ट्रासाउंड मशीनों, लैब, क्लीनिकों आदि ​के जरिए बच्चे के लिंग की जाँच प्रतिबंधित है।

बता दें कि यशराज फिल्म्स के बैनर तले बानी ‘जयेशभाई जोरदार’ को मनीष शर्मा ने प्रोड्यूस किया है। दिव्यांग ठक्कर फिल्म के निर्देशक हैं। उन्होंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी लिखी है। ‘जयेशभाई जोरदार’ 13 मई को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फिल्म के रणवीर सिंह के अलावा शालिनी पांडे, बोमन ईरानी और ​​रत्ना पाठक शाह भी मुख्य भूमिका में हैं।

‘जहाँ माइक से अजान वहीं बजाएँगे हनुमान चालीसा’: राज ठाकरे की दो टूक, पूछा- अभी भी 135 मस्जिदों पर लाउडस्पीकर क्यों

महाराष्ट्र में मनसे प्रमुख राज ठाकरे की अपील का असर होता नजर आ रहा है। खबर है कि बुधवार (4 मई, 2022) सुबह मुंबई के एक इलाके में नमाज के दौरान लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा चलाया गया। वहीं हाल ही में राज ठाकरे द्वारा महा आरती करने के ऐलान और उनके द्वारा लिखे गए एक खुले पत्र के बाद इस मामले ने और तूल पकड़ लिया है। अपने बयान में ठाकरे ने आरोप लगाए थे कि स्कूल या अस्पताल के नाम पर हिंदू त्योहारों पर साइलेंस जोन के जरिए पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, लेकिन ऐसी पाबंदियों से मस्जिदों को छूट है।

राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्‍ट्र के गृह मंत्रालय ने बताया है कि मुंबई में 1140 मस्जिदें हैं जहाँ पर 135 लाउडस्‍पीकरों का इस्‍तेमाल आज सुबह 6 बजे तक किया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले खिलाफ उठाए गए इन मस्जिदों के खिलाफ सरकार क्या कदम उठा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्‍ट्र में लाउडस्‍पीकर के मुद्दे पर राज्‍य सरकार को घेरते हुए मनसे चीफ राज ठाकरे ने कहा है कि जब तक समूचे राष्‍ट्र की मस्जिदों से लाउडस्‍पीकर नहीं उतरते हैं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि ये धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक मसला है। यदि सरकार या दूसरा पक्ष उनकी बातों को नहीं मानता है तो वो भी उसको उसकी ही भाषा में जवाब देंगे।

बता दें कि इससे पहले अपने पत्र में राज ठाकरे ने लिखा था, “यदि बुधवार से किसी भी मस्जिद से लाउडस्‍पीकर से आवाज आई तो वो वहाँ पर हनुमान चालिसा का पाठ उसी तरह से करेंगे।” इसको देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने न सिर्फ मस्जिदों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था को चाक-चौबंद कर दिया है बल्कि राज ठाकरे के घर के बाहर भी सुरक्षा व्‍यवस्‍था को सख्त किया गया है।

वहीं कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से भड़के राज ठाकरे ने कहा, “पूरे महाराष्‍ट्र में अलग-अलग जगहों पर पुलिस ने करीब 250 एमएनएस कार्यकर्ताओं को हनुमान चालीसा का लाउडस्‍पीकर से पाठ कराने पर हिरासत में लिया है। पुणे में पुलिस ने एमएनएस के महासचिव अजय शिंदे को भी 6 अन्‍य लोगों के साथ महाआरती करने पर हिरासत में लिया है।”

राज ठाकरे ने कहा, “मैं महाराष्ट्र में शांति चाहता हूँ हिंसा नहीं चाहता हूँ। चार तारीख के बाद अगर लाउडस्पीकर चलाए गए तो हम लोग लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा चलाएँगे। महाराष्ट्र में 1400 से 1500 मस्जिदों में से 135 मस्जिदों के ऊपर सुप्रीम कोर्ट के नियम तोड़कर लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ी गई। मैं महाराष्ट्र की पुलिस और महाराष्ट्र सरकार से पूछ रहा हूँ इन 135 मस्जिदों पर कौन सी कार्रवाई कर रहे हैं। ये एक दिन का आंदोलन नहीं है ये जारी रहेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय डेसिबल के मुताबिक आवाज नहीं होगी तो कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक ये लाउडस्पीकर बंद नहीं होते हैं और मस्जिदों से नहीं उतरते हैं, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। हम लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे।”

इस मामले में पुणे के कमिश्‍नर अमिताभ गुप्‍ता का कहना है कि हालात पूरी तरह से काबू में हैं। अधिकतर मस्जिदों से अजान लाउडस्‍पीकरों से नहीं दी गई और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पूरा पालन किया गया है। शहर में शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए 2500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने राज ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्‍य में कोई भी गैरकानूनी लाउडस्पीकर नहीं चल रहा है। उन्‍होंने आरोप लगाया है कि राज ठाकरे माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरे देश में लाउडस्पीकर को लेकर कानून बना है उसका पालन महाराष्ट्र में भी किया जा रहा है। संजय राउत ने ये भी कहा है कि शिवसेना ही असली हिंदुत्‍व है। उनका कहना है कि बाल ठाकरे और वीर सावरकर ने ही देश को हिंदुत्‍व का पाठ पढ़ाया। राज्‍य में कहीं भी विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा है।

राज ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज

गौरतलब है कि राज ठाकरे की मुश्किलें उस वक्त और बढ़ गईं, जब औरंगाबाद पुलिस ने दो दिन पहले ही मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर संबंधी उनके भड़काऊ भाषण को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। वहीं, महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कहा कि इस मुद्दे पर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित घटनाक्रम में, पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली जिले की एक अदालत ने 14 साल पुराने एक मामले में राज ठाकरे के खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया है, जबकि मुंबई पुलिस ने उन्हें संज्ञेय अपराधों की रोकथाम से संबंधित सीआरपीसी की एक धारा के तहत नोटिस जारी किया है।

जिन्हें दी गई ईद पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, वो ही ड्यूटी से रहे नदारद: पुरानी दिल्ली में 60 पुलिस वाले निलंबित, साजिश की मिली थी सूचना

ईद उल फित्र (Eid) के मौके पर दिल्ली में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कई जवानों को तैनात किया था। इसी क्रम में पुरानी दिल्ली में तैनात जवानों को ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने के कारण मंगलवार (3 मई, 2022) को दिल्ली सशस्त्र पुलिस बटालियन (DAP) के 60 कॉन्स्टेबलों की कंपनी को निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, ईद से पहले पुलिस को इनपुट्स मिले थे कि कुछ असामाजिक तत्व क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जो कि देश की राजधानी में शांति व्यवस्था में खलल डालने की फिराक में हैं। इसी के मद्देनजर किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए DAP (दिल्ली आर्म्ड पुलिस) बटालियन को कई संवेदनशील इलाकों में विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब निरीक्षण किया गया तो दिल्ली आर्म्ड फोर्सेज की तीसरी बटालियन का एक भी जवान ड्यूटी पर नहीं मिला। इसके बाद उत्तरी दिल्ली के डीसीपी ने 3 मई, 2022 को इन सभी को सस्पेंड कर दिया। डीसीपी द्वारा जारी आदेश में लिखा था, “रात 9.15 बजे कंपनी बिना किसी सूचना के चली गई। वे ड्यूटी प्वाइंट पर नहीं थे। तीसरी बटालियन से तैनात कर्मचारियों को अनुपस्थित के रूप में चिह्नित किया गया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है।”

इस कंपनी को विकास पुरी इलाके से पुरानी दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी के लिए डिप्लॉय किया गया था। इन्हें सदर बाजार और लाल किले के आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति की निगरानी करने और ईद-उल-फितर पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने का आदेश दिया गया था।

दिल्ली में मुस्लिमों ने पारंपरिक तरीके से ईद का त्योहार मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद सहित प्रमुख मस्जिदों में आयोजित सामुदायिक प्रार्थनाओं में हिस्सा लिया। ईद की नमाज के बाद दिन भर उत्सव चलते रहे। बड़ी संख्या में लोगों की बाजारों में उमड़ी। लोगों ने इफ्तार पार्टी में भी हिस्सा लिया। वहीं देश के कई हिस्सों में ईद के मौके पर मुस्लिम भीड़ ने जम कर हिंसा की और उत्पात मचाया। राजस्थान के जोधपुर में लगातार दो दिन हिंसा की गई।

नवनीत राणा और रवि राणा को मिली जमानत, मीडिया से बातचीत की मनाही: BMC पहुँची उनके घर- जाँच करेगी फ्लैट अवैध तो नहीं

महाराष्ट्र (Maharashtra) में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा के विवाद (Hanuman Chalisa Row) के बीच मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गईं अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) और उनके विधायक पति रवि राणा (Ravi Rana) को आखिरकार जमानत मिल गई है। इधर राणा दंपत्ति को जमानत मिली और उधर BMC की टीम उनके घर पहुँच गई है।

मुंबई सेशन कोर्ट के स्पेशल जस्टिस आरएम रोकड़े ने 50,000 रुपए के निजी मुचलके के साथ इस शर्त पर जमानत दी है कि जेल से निकलने के बाद वे कोई भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे और न ही इस संबंध में मीडिया से कोई भी बातचीत करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मुंबई पुलिस को सख्त निर्देश दिया है कि नवनीत राणा और रवि राणा को किसी भी तरह का समन जारी करने से 24 घंटे पहले वो उन्हें एक नोटिस जारी करे।

नवनीत राणा की ओर से कोर्ट में उनकी पैरवी करते हुए रिजवान मर्चेंट ने राणा दंपति की गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताया था। मर्चेंट ने दावा किया था कि उन्हें गिरफ्तार करने से पहले पुलिस द्वारा नोटिस जारी किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। साथ ही यह भी दावा किया गया कि IPC की धारा 153A के तहत कोई कारण ही नहीं बनता, क्योंकि सीएम आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात करना किसी भी तरह से एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ उकसाने के प्रयास के रूप में नहीं माना जा सकता है।

बचाव पक्ष के वकील ने राणा दंपति पर दर्ज किए राजद्रोह के केस पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने केवल उनकी भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए ऐसा किया है। हालाँकि, वो अमरावती वापस जा पाएँगे या नहीं, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है।

मुंबई पुलिस ने किया जमानत का विरोध

कोर्ट में मुंबई पुलिस ने राणा दंपति को जमानत दिए जाने का विरोध किया और तर्क दिया कि हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान कर नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा ने महाराष्ट्र की कानून व्यवस्था को चुनौती दी है। पुलिस का कहना था कि अभियुक्तों ने जो भी बातें की, वो स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की उचित सीमा के भीतर नहीं थे। इसलिए उनका कार्य धारा 124 ए के तहत अपराध के दायरे में आता है।

नवनीत राणा की बिगड़ी तबीयत

इस बीच मंगलवार को नवनीत राणा की तबीयत अचानक से बिगड़ गई थी। इसके बाद इलाज के लिए उनें मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि गर्दन में उन्हें स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी है।

बीएमसी की टीम सांसद के मुंबई स्थित घर पर पहुँची

कोर्ट से जमानत मिलते ही बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की टीम सांसद नवनीत राणा के घर पर निरीक्षण करने के लिए पहुँच गई है। इससे पहले BMC ने उनके घर के बाहर नोटिस चिपकाया था। इस नोटिस में कहा गया है कि बुधवार (4 मई) को BMC उनके फ्लैट का निरीक्षण कर यह जाँच करेगी कि उसमें कोई अवैध निर्माण तो नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे की सरकार राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए BMC का इस्तेमाल कर उनके फ्लैट में तोड़फोड़ कर सकती है।

क्या है पूरा मामला

अमरावती से सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ने अपने समर्थकों के साथ मातोश्री (उद्धव ठाकरे का मुंबई स्थित घर) के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ का ऐलान करने के बाद 23 अप्रैल 2022 को खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। दोनों के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ भड़काने और राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था।

इस्लाम छोड़ने पर भीड़ का हमला, हत्या का किया प्रयास: केरल की मजहबी एकेडमी में हुआ था यौन शोषण, परिवार ने भी छोड़ा साथ

केरल के कोल्लम में इस्लाम छोड़ने पर एक 24 वर्षीय व्यक्ति पर इस्लामी कट्टरपंथी की भीड़ ने हमला कर दिया। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में इस्लाम को छोड़ने वाले अस्कर अली (Aksar Ali) ने मुस्लिमों की एक भीड़ के खिलाफ कोल्लम पुलिस में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया है। अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके इस्लाम छोड़ने के बाद भीड़ ने उन पर हमला किया। इसके अलावा इस्लाम छोड़ने की वजह से उन्हें समुदाय के लोगों की तरफ से दी जाने वाली धमकियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

मलप्पुरम के रहने वाले अस्कर अली ने मलप्पुरम की एक प्रमुख मजहबी एकेडमी से 12 साल का हुदावी धार्मिक कार्यक्रम पूरा किया है। रविवार (1 मई, 2022) को, वह ‘साइंटिफिक टेंपर, मानवतावाद और समाज में जाँच और सुधार की भावना’ को बढ़ावा देने वाले संगठन एसेंस ग्लोबल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस्लामी अध्ययन के छात्र के रूप में अपने अनुभव पर एक भाषण देने के लिए कोल्लम गए थे।

अली ने अपनी शिकायत में कहा कि मलप्पुरम में लोगों के एक समूह ने उनका अपहरण करने की कोशिश की, ताकि वह उस कार्यक्रम को संबोधित न कर सकें। अली ने बताया, “वे मुझे कोल्लम समुद्र तट पर ले गए, जहाँ मेरे साथ मारपीट की गई। उन्होंने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए। वे मुझे जबरन एक वाहन में ले गए और मुझे अंदर बंद करने की कोशिश की। जब स्थानीय लोगों ने शोर मचाया, तो पुलिस ने मुझे बचा लिया।”

बाद में, अली को पुलिस ने छोड़ दिया। इसके बाद अली ने पुलिस की मौजूदगी में सभा को संबोधित किया। यहाँ उन्होंने इस्लामी अध्ययन के छात्र के रूप में अपना अनुभव साझा किया। इस दौरान अस्कर अली ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पढ़ाई के दौरान उनका यौन उत्पीड़न किया गया।

अली के अनुसार, इस्लाम छोड़ने का उनका निर्णय उनके परिवार को रास नहीं आया। इस वजह से अली परिवार के साथ नहीं रहना चाहता। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने उसे उसकी इच्छा के अनुसार रहने की अनुमति दी। कोल्लम पुलिस का कहना है कि अली ने अभी तक उनसे सुरक्षा की माँग नहीं की है।