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FCC के बाद प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने भी रद्द किया विवेक अग्निहोत्री का ‘ओपन प्रेस कॉन्फ्रेंस’: ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक ने सबूतों के साथ खोली पोल

‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशन विवेक अग्निहोत्री अपनी फिल्म के खिलाफ अभी लगातार चलाए जा रहे हेट-कैम्पेन को उजागर करने में लगे हैं। इसी बीच मंगलवार (3 मई 2022) को खबर आई कि नई दिल्ली में विदेशी संवाददाता क्लब (Foreign Correspondents Club/FCC) ने विवेक रंजन अग्निहोत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया है। वहीं मंगलवार को ही प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया द्वारा भी उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द करने का मामला सामने आया।

बता दें कि यह एफसीसी का यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 5 मई को दिल्ली में होने वाली थी, जिसमें कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर चर्चा की जानी थी। जहाँ फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब का कहना है कि ‘कुछ शक्तिशाली मीडिया घरानों’ ने इस पीसी पर कड़ी आपत्ति जताई है और उन्हें धमकी भी दी है। जिसके बाद उन्होंने उसी निर्धारित समय पर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में ओपन प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की थी।

वहीं प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के वेन्यू के कैंसिल होने की सूचना देते हुए अपने ट्वीट में लिखा, “प्रेस क्लब ऑफ इंडिया 5 मई को किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा किसी भी कार्यक्रम की सुविधा नहीं दे रहा है। क्लब केवल पहले से बुकिंग के आधार पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति देता है। जिसकी एक नियत प्रक्रिया है, और बुकिंग क्लब के एक सदस्य के माध्यम से होती है।”

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के इस ट्वीट का जवाब देते हुए विवेक रंजन अग्निहोत्री ने लिखा, “बहुत खूब! @PCITweets ने भी रद्द कर दिया। लोकतंत्र के पहरेदार और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मसीहा ने न केवल मुझे अलोकतांत्रिक रूप से प्रतिबंधित किया, बल्कि अभी भी वो झूठ भी बोल रहे हैं।” उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि-

  1. तथ्य संलग्न हैं।
  2. उन्होंने बिना किसी सदस्य के रेकमेंडेशन के हमारी एजेंसी के माध्यम से पहले ही बुकिंग कर ली थी। जिसका रसीद संलग्न है।

उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए आगे बताया, “जब एफसीसी (विदेशी संवाददाता क्लब) के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द किए जाने का मेरा वीडियो वायरल हुआ, तब @PCITweets ने उनके साथ साजिश की और हमारे प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया। ये एंटी-फ्री स्पीच, एंटी-ट्रुथ, एजेंडा संचालित कुलीन क्लब लुटियन दिल्ली में सरकार की विशाल संपत्तियों पर फलते-फूलते हैं। समय आ गया है कि हम इन अहंकारी धोखेबाजों को बेनकाब करें।”

इतना ही नहीं विवेक अग्निहोत्री के आह्वान पर कई शुभचिंतक सामने आए हैं जिन्होंने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के इस कदम का विरोध करते हुए मुँहतोड़ जवाब दिया है।

द न्यू इंडियन के सीनियर एसोसिएट एडिटर प्रमोद कुमार सिंह प्रेस क्लब ोड इंडिया को जवाब देते हुए ट्वीट किया, “उस स्थिति में, 1999 से प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सदस्य के रूप में, मैं विवेक अग्निहोत्री के इस कार्यक्रम के लिए स्लॉट बुक कर रहा हूँ। समय- 5 मई 2022 को शाम 4 बजे। उससे पहले आवश्यक शुल्क जमा कर देंगे। पीसीआई अलग-अलग विचारों के लिए मंच प्रदान करता रहा है और #KashmirFiles के निर्माताओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी कल जब एफसीसी ने विवेक अग्निहोत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द होने की सूचना दी तब अग्निहोत्री ने ट्वीट कर इस पूरे मामले की जानकारी दी थी। ट्विटर पर पोस्ट की गई वीडियो में विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने विदेशी पत्रकारों के एक समूह पर गंभीर आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा, “कल, मेरे साथ एक असामान्य, चौंकाने वाली और बेहद अलोकतांत्रिक बात हुई। विदेशी संवाददाता क्लब के अध्यक्ष ने कल मुझे फोन किया और 5 मई को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के रद्द होने की जानकारी दी। मैं एक हेट-कैम्पेन का शिकार हुआ हूँ। मेरी फ्री स्पीच को, एजेंडा चलाने वाले, सच का विरोध करने वाले कुछ शक्तिशाली मीडिया घरानों ने प्रतिबंधित कर दिया। उन्होंने इस पीसी पर आपत्ति जताई है और धमकी दी है। अब मैं 5 तारीख को शाम 4 बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक ओपन-हाउस पीसी रख रहा हूँ। सभी मीडिया आमंत्रित हैं।”

आज इसे भी प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया द्वारा रद्द कर दिया गया। जिसके बाद मुखर रूप से सबूतों के साथ एक बार फिर द कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री को सामने आना पड़ा। जिसके बाद लोग प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया को उसकी दोहरी मानसिकता और रवैए के लिए लताड़ लगा रहे हैं।

पुलिस का डंडा छीन पुलिस को ही पीटा, नमाजियों ने जेब में भर रखे थे पत्थर, जोधपुर में सुबह से शुरू थी आगजनी, पुलिस पर फेंके चप्पल

राजस्थान के करौली के बाद सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के गृह जिले जोधपुर में भड़की हिंसा के बाद 36 घंटे का कर्फ्यू लगाने और इंटरनेट बंद करने से स्थिति तनावपूर्ण है। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, ईद के मौके पर उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव कर उन पर चप्पलें भी फेंकी थीं। यही नहीं भीड़ ने पुलिस के हाथ से डंडे छीनकर उन्हें मारे, जिससे एक पुलिस अधिकारी के सिर पर ज्यादा चोट आ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उपद्रवियों ने जेब में पत्थर भरकर रखे थे। वे जहाँ से भी निकले…आगजनी और तोड़फोड़ करते गए। ऐसा करके उन्होंने एक चौराहे का तनाव 5 क्षेत्रों में पहुँचा दिया। इस ​तरह पूरे शहर में हिंसा फैल गई।

काम से लौट र​हे मुकुंद का पैर तोड़ा

मंगलवार तड़के 4:30 बजे काम से लौट रहे बोहरों की पोल निवासी मुकुंद बोहरा (18) ने दैनिक भास्कर को बताया कि जालौरी गेट स्थित राजदान मेंशन के पास 8 से 10 युवकों ने उन्हें रोककर उनके साथ मारपीट की और उनके पैर तोड़ दिए। उनका एमजीएच अस्पताल में मंगलवार को ऑपरेशन कराया गया।

दवाई लेने निकले युवक की पीठ में चाकू मारा

बताया जा रहा है कि दादा की दवाई लेने के लिए निकले शख्स को भी उन दंगाइयों ने नहीं बख्शा। घंटाघर में पाल हाउस के पास रहने वाले दीपक परिहार अपने दादा की दवाइयाँ लेने के लिए घर से निकले थे। उन्होंने उपद्रव के चलते मुख्य रास्ते की बजाय भीतरी शहर से जाना उचित समझा। लेकिन तभी सुनारों का बास के पास उन्हें कुछ उपद्रवी दिखे, तो वह उनका वीडियो बनाने लगे। इसको लेकर गुस्साए युवकों ने उनका पीछा किया और पीठ में चाकू घोंप दिया।

दीपक को गंभीर हालत में महात्मा गाँधी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ऑपरेशन करके उसकी पीठ से चाकू निकाला गया। दीपक के पिता विजय सिंह परिहार ने बताया कि हमने सदर कोतवाली थाने में उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। फिलहाल जोधपुर में कर्फ्यू लगाने और इंटरनेट बंद करने से स्थिति तनावपूर्ण है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि दंगाई पुलिस का डंडा छीन कर पुलिस को ही पीट रहे हैं।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

उल्लेखनीय है कि यह घटना ईद के दिन जालौरी गेट में अंजाम दी गई, जहाँ जोधपुर की सबसे बड़ी मस्जिद है। जानकारी के मुताबिक, वहाँ सोमवार (2 मई 2022) देर रात कुछ मुस्लिम युवक चौराहे पर अपना झंडा लगा रहे थे, जब दूसरे पक्ष की ओर से विरोध किया गया तो मारपीट शुरू हो गई, फिर पथराव होने लगे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँच कर स्थिति संभाली और लाठीचार्ज करके दोनों पक्ष के लोगों को खदेड़ा। घटना में 1 दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

जोधपुर मेयर का आरोप

ऑपइंडिया ने इस संबंध में जोधपुर पश्चिम की मेयर वनीता सेठ से भी संपर्क किया था। उन्होंने बताया, “जालौरी गेट पर 11:30-12:00 बजे के करीब मुस्लिम ईद के हिसाब से अपने झंडे लगा रहे थे। इससे पहले परशुराम जयंती थी वहाँ उसके झंडे लगे हुए थे। पुलिस ने आकर कहा कि आज उनका त्योहार है, तो कुछ पत्रकारों ने और वहाँ के लोगों ने खुद से उन (भगवा) झंडों को हटा दिया। सिर्फ एक झंडा रहने दिया गया जो कि स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी के ऊपर था। रात को मुस्लिम लड़के आए तो उन्होंने बिस्सा जी की मूर्ति के ऊपर टेप चिपका दी और अपना इस्लामी झंडा लगाने लगे तब वहाँ दूसरे पक्ष ने मना किया कि बाकी जो करना है करो, लेकिन ये सब क्या कर रहे हो।”

इस पर उन लोगों ने पाकिस्तान के और अल्लाह-हू-अकबर नारे लगाए और सवाल पूछने पर पत्थरबाजी होने लगी। दूसरे पक्ष के लोग भी जुटे लेकिन तभी मुस्लिम बस्ती से 200-300 लोग आ गए। पुलिस ने उन्हें हटाने की बजाय लाठी चार्ज किया जिसमें कई लोग घायल हुए। इसके बाद बैरिकेडिंग की गई।

दक्षिणी दिल्ली में अतिक्रमण पर चलने लगा बुलडोजर: 9 मई को शाहीन बाग और जामिया की बारी, अवैध रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की बढ़ी मुश्किल

CAA-NRC के विरोध के नाम पर राजधानी दिल्ली को अन्य राज्यों से काटने की साजिश स्थल के रूप में महीनों तक इस्तेमाल किए गए शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने के निर्णय लिया गया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान दक्षिणी दिल्ली के कई हिस्सों में बुधवार (4 मई 2022) से शुरू होकर 13 मई तक चलेगा। इस संबंध में दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी को सूचित कर दिया गया है।

दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग, जसोला, सरिता विहार, ओखला, कालिंदी कुंज, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे कई इलाकों में नगर निगम ने यह अभियान शुरू किया है। निगम में स्थायी समिति के उपाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि इस बारे में संबंधित इलाके के डीसीपी को पत्र लिखकर सूचित कर दिया गया है। इस अभियान के तहत सड़कों और सरकारी जमीनों पर बने स्थायी और अस्थायी निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने का काम 9 मई को होगा। वहीं, बुधवार को पहले चरण में एमबी रोड और उसके आसपास का इलाका और करणी सिंह शूटिंग रेंज के क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया जाएगा। 5 मई को कालिंदी कुंज मुख्य मार्ग, कालिंदी कुंज पार्क से जामिया नगर पुलिस स्टेशन तक, 6 मई को श्रीनिवासपुरी प्राइवेट कॉलोनी से ओखला रेलवे स्टेशन गाँधी कैंप तक, 10 मई को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से बौद्ध धर्म मंदिर, गुरुद्वारा रोड में और उसके आसपास के क्षेत्र से अतिक्रमण हटाए जाएँगे। वहीं, 11 मई को लोधी कॉलोनी, मेहरचंद मार्केट, साईं मंदिर एवं उसके आसपास और फिर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, 12 मई को दिनसेन मार्ग, इस्कॉन मंदिर मार्ग और उसके आसपास के क्षेत्र तथा 13 मई खड्डा इलाके से अतिक्रमण हटाने का काम किया जाएगा।

इसके पहले जसोला और सरिता विहार में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाने के निर्णय लिया गया था, लेकिन MCD को पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मुहैया नहीं हो पाने के कारण इसे टाल दिया गया था। SDMC के मेयर मुकेश सूर्यन ने ने बताया था कि कानून-व्यवस्था के लिए पुलिकर्मियों की पहले से ही ड्यूटी लगी होने के कारण पर्याप्त संख्या में पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो पाया था। इस कारण जसोला और सरिता विहार में अभियान रद्द कर दिया गया है। SDMC को भेजे पत्र में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि सरिता विहार थाना क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित की जाने वाली तारीख से कम-से-कम 10 दिन पहले सूचना दी जाए, ताकि इसके लिए पर्याप्त पुलिसकर्मियों की व्यवस्था की जा सके।

जहाँगीरपुरी में बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने के बाद SDMC के मेयर मुकेश ने कहा था कि शाहीन बाग में लोगों ने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण किया हुआ है, जबकि सरिता विहार, कालिंदी कुंज में कॉलोनियों को काटकर अवैध कब्जा किया हुआ है। सुर्यन कहते हैं, “हम दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। दिल्ली में रोहिंग्या व बांग्लादेशियों ने कई जगह पर कब्जा किया हुआ है। हमने इस संबंध में सर्वे किया था। अब उसकी रिपोर्ट आ गई है, जितनी जगह पर अतिक्रमण हुआ है वहाँ कार्रवाई होगी।”

दिल्ली की पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए दक्षिणी दिल्ली के मेयर ने आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “70 सालों में कॉन्ग्रेस और 7 सालों में आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली वालों के लिए कभी कुछ नहीं सोचा। दोनों ही सरकारों ने घुसपैठियों और बांग्लादेशियों को बसाने का काम किया किया, मगर दिल्ली की चिंता कभी नहीं की। दिल्ली वाले पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। मगर AAP सरकार और उनके विधायक पानी पहुँचा रहे है रोहिंग्याओं को। नाइट शेल्टर्स में बस आती है उन्हें खाना देने।”

‘तलाक-ए-सुन्नत’ खत्म कराने सुप्रीम कोर्ट पहुँची मुस्लिम महिला, जानिए कैसे तीन तलाक से है अलग: दिल्ली हाई कोर्ट में एक से अधिक निकाह का मामला

इस्लामी प्रथाओं के कारण मुस्लिम महिलाओं के साथ होती आई नाइंसाफी के खिलाफ अब समुदाय की महिलाओं ने धीरे-धीरे आवाज उठानी शुरू की है। हाल ही की खबरें हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट में बहुविवाह से पहले बीवी की इजाजत और सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-सुन्नत को असंवैधानिक घोषित कराने के लिए याचिका डाली गईं थीं। दिलचस्प बात ये है कि ये याचिकाएँ उसी दौरान चर्चा में आईं जब देश में समान नागिरक संहिता लागू कराने की माँग भी जोरों पर है और केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू किया जा सकता है।

तलाक-ए-सुन्नत को असंवैधानिक कराने की माँग

सुप्रीम कोर्ट में महिला पत्रकार बेनजीर हीना द्वारा जिस ‘तलाक-ए-सुन्नत’ के विरुद्ध याचिका डाली गई है। वो किसी मुस्लिम व्यक्ति को ये अधिकार देता है कि वो अपनी बीवी को बेवजह तलाक दे सके। यह प्रक्रिया एक बार में लागू नहीं होती। इसे रिकवरेबल तलाक भी कहा जाता है। इसमें पुरुष एक महीने में एक बार तलाक कहता है। तीसरे तलाक कहने तक अगर दोनों के संबंध सुधर जाते हैं तो इस रूप में शौहर-बीवी के बीच समझौते की संभावना बनी रहती है। जबकि ट्रिपल तलाक एक बार में ही दिया जाता है। इसीलिए ये तलाक-ए -सुन्नत और ट्रिपल तलाक दो अलग चीजें हैं। 

शिया और सुन्नी दोनों इसे अमल में लाते हैं। जिस महिला ने इसे असंवैधानिक घोषित कराने के लिए न्यायलय का दरवाजा खटखटाया है वो खुद भी तलाक-ए-सुन्नत की पीड़िता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्हें उनके ससुराल वालों ने पहल दहेज न मिलने पर यातनाएँ दीं। बाद में शौहर ने भी तलाक-ए-सुन्नत का नोटिस भेज दिया। उन्होंने ये भी बताया कि कैसे तमाम घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने दिल्ली महिला आयोग से शिकायत की थी और एफआईआर भी दर्ज की थी। मगर उन्हें जवाब मिला कि ये शरीया कानून के अनुसार सही है।

बहुविवाह के खिलाफ मुस्लिम महिला की आपत्ति

इसी तरह इस्लाम में 4 निकाह करने को मान्यता प्राप्त है। कई कट्टर मौलाना इसके लिए मुस्लिम पुरुषों को प्रेरित करते हैं और ऐसे दर्शाया जाता है कि समाज कल्याण के लिए किया जाने वाला कार्य है।ऐसे में रेशमा ने इस प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी याचिका डाली थी और माँग की थी कि बहुविवाह करने से पहले ये अनिवार्य किया जाना चाहिए कि पुरुष अपनी पत्नी से अगले निकाह की इजाजत ले। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित हो कि व्यक्ति नई बीवी के लिए घर और उसकी जरूरतें पूरी करने में सक्षम है या नहीं। उसे अगला निकाह करने से पहले न्यायिक अधिकारी का प्रमाण पत्र अनिवार्य किया जाए जिसमें वो बताए कि वो अपनी सारी बीवियों के साथ समान व्यवहार करेगा। इस्लामी कोड के तहत होने वाली शादियों के पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की माँग भी याचिका में उठाई गई थी।

मुस्लिम महिलाओं के हित में केंद्र ने लिया फैसला

बता दें कि इस्लाम में ट्रिपल तलाक, तलाक-ए-सुन्नत, हलाला, बहुविवाह ऐसी प्रक्रियाएँ जिनके कारण मुस्लिम महिलाओं को लंबे समय से तमाम यातानाओं से गुजरना पड़ा। ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को राहत देने के लिए ट्रिपल तलाक के खिलाफ तो 2019 में कानून बना दिया, जिसमें तलाक देने वाले पुरुषों के खिलाफ दंड का प्रावधान है। मगर कट्टरपंथी मोदी सरकार के इस फैसले को आज भी इस्लाम विरोधी बताते है, जबकि हकीकत में ये रिवायत महिला विरोधी थी और इस पर कार्रवाई भी तभी हुई जब मुस्लिम महिलाओं ने शिकायत की, अपनी आवाज उठाई। आज ट्रिपल तलाक की तरह अन्य कट्टरपंथी प्रथाओं से छुटकारा पाने के लिए मौलानाओं के पास जाने की जगह कोर्ट के पास आना बताता है कि देश में संविधान के अनुसार समान कानून की आवश्यता सबको।

7 साल की बच्ची पर हमला, दवा लेने गए दीपक की पीठ में छुरा घोंपा, व्यापारी को सरिये से पीटा, इंजीनियर की बाइक जलाई: जोधपुर में ईद वाली हिंसा

राजस्थान के जोधपुर में हुई हिंसक घटना ने कई परिवारों को झकझोर कर रख दिया। कई हिंदू परिवार इस हिंसा की चपेट में आए। हिंसा के दौरान घटी दर्दनाक हादसे की कहानियाँ सामने आ रही है। जो बताती है कि किस तरह से हिंसक भीड़ ने बर्बरता से हमला किया और बच्चों तक को नहीं बख्शा। कोई दादा के लिए दवा लेने जा रहा था, कोई पापा को खाना खाने के लिए बुलाने के लिए बाहर निकली थी तो कोई शादी का ऑर्डर पूरा कर घर रहा था, कोई काम पर जा रहा था, इस हिंसक मजहबी भीड़ के शिकार हो गए।

इन्हीं में से एक हैं- दीपक परिहार, जो मजहबी भीड़ की हिंसा के शिकार हुए। ‘नवभारत टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपक घंटाघर के पास के गांछा बाजार के रहने वाले हैं। वह अपने दादा के लिए दवा लेने के लिए घर से निकले थे। हालाँकि उन्होंने लगभग 200 लोगों की भीड़ को उपद्रव मचाते देख वापस घर जाना बेहतर समझा। उन्होंने बाइक को वापस घर की तरफ मोड़ भी लिया, लेकिन फिर भी वो भीड़ का शिकार होने से बच नहीं पाए।

उपद्रवियों ने उन्हें देख लिया और घेर कर उन पर हमला कर दिया। एक उपद्रवी ने दीपक की पीठ में चाकू घोंप दिया और मरने के लिए वहीं पर तड़पता छोड़ दिया। बाद में परिजनों द्वारा अस्पताल में उनका ऑपरेशन कर चाकू निकाला गया। फिलहाल उनकी तबियत में सुधार है। दीपक के पिता विजय सिंह ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

इसी तरह इस हिंसक भीड़ का शिकार एक 7 साल की एक बच्ची भी हुई। हालाँकि पड़ोस के एक दुकानदार ने उसके ऊपर होने वाले वार को अपने ऊपर ले लिया, लेकिन इस घटना से बच्ची सदमे में आ गई है। वह कुछ भी बोल नहीं पा रही है। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 7 साल की माननीया सिंघवी के पिता पवन सिंघवी का घर के बगल में ही एक किराने की दुकान है। दिन के तकरीबन 11 बजे माननीया अपने पापा को खाना खाने के लिए बुलाने आई थी।

इसी दौरान उपद्रवियों की नजर उस पर पड़ गई। लाठी और सरिया लेकर भीड़ ने बच्ची पर हमला कर दिया। इसी बीच सामने के दुकानदार अजय पुरोहित बीच में आ गए और उन्होंने किसी तरह से बच्ची को बगल वाले घर में घुसा दिया। हालाँकि वह भीड़ की बर्बरता से नहीं बच पाे। भीड़ ने उन पर लाठी-डंडों से जमकर पीटा। एक तस्वीर और सामने आई है, जिसमें उपद्रवी पुलिस का डंडा लेकर पुलिस को ही पीटते दिख रहे हैं।

ऐसी ही एक कहानी है- 18 साल के मुकुल बोहरा की। वह शादियों में डीजे-साउंड आदि का ऑर्डर लेते हैं। मंगलवार (3 मई, 2022) सुबह 5 बजे भी वह एक शादी का ऑर्डर पूरा कर घर आ रहे थे। इसी दौरान उपद्रवियों ने उन्हें घेर लिया। वह कुछ समझ पाते इससे पहले ही उन्हें स्कूटी से धक्का देकर नीचे गिरा दिया। फिर उपद्रवियों ने सरिया लेकर मुकुल के ऊपर वार करने लगे। इस दौरान मुकुल के पैर में तीन फ्रैक्चर आए। फिलहाल उनका महात्मा गाँधी अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

उपद्रवियों हिंसा के दौरान आगजनी की घटना को भी अंजाम दिया। इसी में बुरी तरह से झुलस गए अमित पुरी। अमित पेशे से इंजीनियर हैं और आदिनाथ नगर पाल रोड के रहने वाले हैं। अमित के भाई दिनेश पूरी ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को काम पर जाने के दौरान जब अमित कबूतर चौक के पास से गुजर रहे थे तो इसी दौरान अराजत तत्वों ने एक बाइक में आग लगा दी। इतने पर ही वे नहीं रुके।

उन्होंने बाइक के पेट्रोल टैंक में छेद भी कर दिया। फिर क्या था, देखते ही देखते आग चारों तरफ फैल गई और इसकी लपटों में अमित भी आ गए। इस हादसे में अमित के पैर-हाथ और पेट का काफी हिस्सा जल गया। उनका इलाज भी महात्मा गाँधी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ये भी सामने आया है कि दंगाई नमाज के दौरान अपने पॉकेट में पत्थर रखे हुए थे।

राजस्‍थान के जोधपुर में जालौरी गेट और कबूतरों का चौक पर दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प और पत्थरबाजी के बाद पूरे शहर में तनाव का माहौल है। दूसरे दिन भी दंगाइयों की उत्‍पाती भीड़ ने मजहबी नारे लगाते हुए लोगों के घरों में तेजाब की बोतलें फेंकी। वहीं इन दंगाइयों ने एक हिंदू युवक को चाकू घोंप दिया। यही नहीं इन दंगाइयों ने करीब 40 वाहनों में तोड़फोड़ की और शहर के एटीएम बूथ तक को तोड़ डाला। शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू (Curfew) लगाया गया है। मामले में अभी तक 97 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दावा- 100 से ज्यादा लोगों को SC/ST एक्ट में फॅंसा चुका है अलीगढ़ का एक परिवार, पुलिस ने बताया- शिकायत करने वाला खुद भी वांछित

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक व्यक्ति ने एक महिला और उसके पूरे परिवार पर SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। शिकायत में दावा किया गया है कि यह परिवार अब तक 100 से अधिक लोगों को SC/ST एक्ट में फँसा चुका है। वहीं पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता ने यह आरोप अपने ऊपर चल रहे केस में बचाव में लगाए हैं। मामले की जाँच की जा रही है लेकिन उसके दावे को लेकर पर्याप्त सबूत अब तक नहीं मिले हैं।

जिस व्यक्ति ने आरोप लगाया है, उनका नाम मनोज है। वो OBC समुदाय से आते हैं। उन्होंने खुद को भी इस महिला से पीड़ित बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। मनोज अलीगढ़ के क्वार्सी थानाक्षेत्र में आने वाले नगला छीतर गाँव के निवासी हैं। आरोप टप्पल थानाक्षेत्र की रेखा सूर्यवंशी, धर्मेंद्र सूर्यवंशी और उनके अन्य परिजनों पर है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में महिला द्वारा आरोपित किए गए लोगों की संख्या 150 के आसपास बताई गई है। ऐसे केसों की संख्या 15 बताई गई है, लेकिन अपनी शिकायत में मनोज ने 9 मुकदमों का जिक्र किया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता मनोज ने बताया:

“नवंबर 2020 में मैंने जिस परिवार से ब्याज पर पैसे उधार लिए थे, उन्होंने ही पैसे के लेन-देन में ठगी कर मेरे घर को कब्ज़ाने का प्रयास किया। हमें मारने-पीटने तक का प्रयास किया गया। मैंने इसकी शिकायत पुलिस में की पर मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। मकान पर कब्ज़ा करने में सफल न होने पर फरवरी 2022 में विपक्षी द्वारा मेरे और मेरे परिवार पर छेड़खानी और मारपीट के साथ SC/ST एक्ट में केस दर्ज करवा दिया गया।

मनोज ने आगे बताया कि इस केस में शिकायतकर्ता और गवाह सभी एक ही परिवार के हैं। उनके अनुसार इस केस में उनकी माँ और उनके भाई को लगभग 20 दिन जेल काटनी पड़ी। बाकी परिवार मुकदमे से बचने के लिए अभी भी हाईकोर्ट में प्रयास कर रहा है।

शिकायतकर्ता मनोज पर दर्ज FIR की कॉपी

मनोज ने अपनी बात जारी रखते हुए जो बताया, वो हैरतअंगेज है। उनके अनुसार जब उन्होंने आरोप लगाने वाले परिवार के बारे में जाँच-पड़ताल की तो SC/ST एक्ट वाले और भी कई केस इस परिवार से जुड़े मिले। मनोज की मानें तो उन्हें अब तक लगभग 122 लोग ऐसे मिल चुके हैं, जो इस परिवार द्वारा SC/ST एक्ट में आरोपित बनाए गए हैं। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में मनोज ने ऐसे 9 मामलों का जिक्र किया है।

SC/ST एक्ट मामले में मुकदमे करने वाली महिला को लेकर मनोज ने बताया कि एक-एक मामले में दर्जन भर लोग आरोपित किए गए हैं। जिन परिवारों पर ऐसे मुकदमे दर्ज किए गए हैं, वो सभी अब इस परिवार (केस करने वाले) पर कार्रवाई चाहते हैं।

मनोज ने बताया कि आरोप लगाने वाली महिला बहुजन समाज पार्टी से जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ चुकी है। साथ ही उनके परिवार के लोग भाजपा और पुलिस विभाग में भी हैं। इस वजह से पीड़ित लोग (जिन पर आरोप है, SC/ST एक्ट मामले में मुकदमे हैं) बचते फिरते हैं। इनके घरों पर ताले लटक रहे हैं। इनका जो किराने का काम था, वो भी इस वजह से अब ठप्प हो गया है। इन्होंने यह भी बताया कि इनकी जान को भी खतरा है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मनोज ने कहा, “मैंने पुलिस में जो शिकायत दी है, उस पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिले के हर बड़े अधिकारी से मिला हूँ मैं। वहाँ मुझे सिर्फ जाँच करवाने का आश्वासन दिया जाता है। जिस महिला ने मेरे पर केस दर्ज करवाया है, वो अपने एक रिश्तेदार पर भी अपने साथ छेड़छाड़ का केस दर्ज करवा चुकी है।”

शिकायत की कॉपी

मनोज द्वारा दी गई शिकायत में लिखा गया है:

“ये 2011 से ही कमजोर पक्ष के साफ-स्वच्छ छवि के लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। इसके लिए उन पर मुकदमे दर्ज करा कर उन पर दबाव बनाते हैं। बाद में समझौते के नाम पर लाखों रुपए ऐंठे जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति सवर्ण जाति का होता है तो उस पर एससी/एसटी एक्ट लगाकर राज्य सरकार से सहायता धनराशि प्राप्त करते हैं। इसके बाद में आरोपितों से समझौता करके लाखों रुपयों की अवैध ठगी की जाती है।”

मनोज ने खुद ही ऐसे तमाम लोगों से सम्पर्क बनाया, जो उनकी तरह ही कथित तौर पर इस परिवार द्वारा आरोपित बनाए गए हैं। उनका दावा है कि वो सभी इस मामले में फर्जी केस करवाने वालों पर कार्रवाई चाहते हैं।

पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता अपने बचाव में लगा रहा आरोप

इन आरोपों पर अलीगढ़ के DSP श्वेताभ पांडेय ने 30 अप्रैल 2022 को अपनी रिपोर्ट एसएसपी को प्रेषित की। रिपोर्ट में कहा गया, “सब इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार ने इस मामले की जाँच की है। जाँच के दौरान पाया गया कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार पर रेखा देवी ने SC / ST एक्ट, 307 IPC व अन्य धाराओं में 20 फरवरी 2022 को केस दर्ज करवाया था। इसमें शिकायतकर्ता के परिवार के 2 सदस्य 12 मार्च 2022 को जेल भी भेजे गए थे। इसी केस में शिकायतकर्ता खुद भी वांछित है। उसने शिकायत अपने बचाव में दी है। अन्य आरोपों के संदर्भ में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।”

जिस गाने में हनुमान भक्त शाकाहारी ब्राह्मण खिलाता है मुर्गा, उस पर बोले निर्देशक कबीर खान – बीफ बैन पर चर्चा के बीच आया था

फिल्म निर्माता कबीर खान ने 2015 में आई उनकी फिल्म बजरंगी भाईजान को लेकर एक बयान दिया है। इस बयान की काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि इस फिल्म का एक गाना ‘चिकन सॉन्ग (कुक-डू-कू)’, भले ही बच्चों का गीत लगता है, लेकिन असल में यह उस समय के फिल्म का सबसे राजनीतिक गीत है। 

‘बजरंगी भाईजान’ में सलमान खान ने पवन कुमार चतुर्वेदी नाम के एक ब्राह्मण का किरदार निभाया था, जो शुद्ध शाकाहारी था और साथ ही हनुमान जी का एक बड़ा भक्त भी। इसके बावजूद वह मुस्लिम लड़की मुन्नी (हर्षाली मल्होत्रा) को एक ढाबे में चिकन खिलाने के लिए ले जाता है। यहीं पर वह करीना कपूर खान के साथ चिकन सॉन्ग ‘कुक-डू-कू’ गाते हैं और डांस करते हैं। 

बॉलीवुड हंगामा के साथ हाल ही में एक इंटरव्यू में कबीर खान ने फिल्म के इरादे और राजनीति के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “मैंने अक्सर सुना है, और जब मैं यह सुनता हूँ तो मैं बहुत चिंतित हो जाता हूँ कि इंडस्ट्री में लोग कहते हैं कि हम अराजनीतिक हैं। मेरा मानना है कि अगर आप इंसान हैं तो आप गैर राजनीतिक नहीं हो सकते हैं, जिस तरह से हम फिल्मों में कैरेक्टर को दिखाते हैं वह हमारी राजनीति को बता रहा होता है। कभी-कभी खुद को अराजनीतिक कहना सिर्फ और सिर्फ आपके विशेषाधिकार का मजाक उड़ाना है, क्योंकि देश में जो हो रहा है वह आपको प्रभावित नहीं करता है।”

फिल्म में राजनीति को कैसे शामिल किया जा सकता है, इसका एक उदाहरण देते हुए, कबीर खान ने कहा, “चिकन गाना वास्तव में बच्चों का सबसे लोकप्रिय गीत है क्योंकि सलमान और करीना डांस कर रहे हैं। यह फिल्म का सबसे राजनीतिक गीत भी है क्योंकि यह उस वक्त आया था जब बीफ पर प्रतिबंध की बात चल रही थी। यह गाना इस बात को बताता है कि देखिए यह है चौधरी ढाबा जो भारत के लिए एक उपमा की तरह है। यह आधा नॉन वेज है और आधा वेज है। आप तय करें कि आपको क्या खाना है और हम सब एक साथ बैठकर अपना मनपसंद खाना खा सकते हैं। और इस तरह आप राजनीति में शामिल हो जाते हैं।”

बता दें कि फिल्म बजरंगी भाईजान साल 2015 में आई थी। इस फिल्म में सलमान खान, करीना कपूर खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और हर्षाली मल्होत्रा सहित कई कलाकार मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म एक ऐसे हनुमान भक्त हिंदू लड़के पवन की कहानी थी जो एक गूँगी-बहरी मुस्लिम पाकिस्तानी लड़की को अपनी जान पर खेलकर उसके घर पहुँचाकर आता है। बताया जा रहा है कि जल्द ही फिल्म का सीक्वल आएगा और इसका नाम ‘पवन पुत्र भाईजान’ होगा।

‘सड़क पर नमाज को बंद किए बिना नहीं बैठेंगे, लाउडस्पीकर मस्जिद से नीचे जरूर आएँगे’: राज ठाकरे ने बाला साहेब के वीडियो से बताए तेवर

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) की तीन मई की डेडलाइन समाप्त हो गई है। इसके बाद से एहतियातन मनसे प्रमुख के आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी करने और उनकी पार्टी के कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर आ रही है। इस बीच राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक और महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पिता दिवंगत बाल ठाकरे का एक पुराना वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें बाल ठाकरे मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारने की बात कहते दिख रहे हैं।

36 सेकेंड का यह वीडियो मराठी में है। इसमें बाल ठाकरे कह रहे हैं, “महाराष्ट्र में जब हमारी सरकार आएगी सड़क पर होने वाली नमाज को बंद किए बिना हम खामोश नहीं बैठेंगे। धर्म ऐसा होना चाहिए जो राष्ट्र के विकास के आड़े नहीं आए। लोगों को तकलीफ न हो। यदि हमारे हिंदू धर्म की वजह से ऐसा होगा तो हम उस पर भी गौर करेंगे। लेकिन यह लाउडस्पीकर मस्जिद से नीचे जरूर आएँगे।”

उल्लेखनीय है कि राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारने के लिए तीन मई तक का समय दिया था। डेडलाइन समाप्त होने से पहले उन्होंने मंगलवार (3 मई 2022) को एक बयान जारी कर हिंदुओं से अपील की थी कि अजान की आवाज सुनाई पड़ने पर वे दोगुनी आवाज में हनुमान चालीसा बजाएँ। उन्होंने हिंदुओं से यह आह्वान ऐसे वक्त में किया था जब औरंगाबाद में केस दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी को लेकर अटकलें लग रही हैं।

बयान में राज ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा था, “रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत नहीं मिलेगी। हर धर्म के लोगों को उनके त्योहार पर लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत मिलेगी, लेकिन 365 दिन लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत हर रोज लेनी पड़ती है।”

राज ठाकरे ने पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए अल्टीमेटम दिया था, “3 मई तक मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर हटा लिए जाएँ। अगर लाउडस्पीकर नहीं हटाए गए तो वह इससे अपने हिसाब से निपटेंगे और जैसे को तैसा जवाब देते हुए मस्जिदों के आगे हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।” इसके बाद रविवार (1 मई, 2022) को औरंगाबाद की रैली में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार को एक बार फिर अल्टीमेटम देते हुए कहा था, “कल दो मई है, 3 मई को ईद है, इसके बाद 4 मई को हम नहीं सुनेंगे। जहाँ-जहाँ लाउडस्पीकर्स लगे हुए हैं, वहाँ हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा।”

बता दें कि औरंगाबाद रैली में राज ठाकरे द्वारा दिए गए कथित भड़काऊ भाषण के बाद उन पर और उनकी सार्वजनिक रैली के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले मुंबई पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 149 के तहत मनसे नेता नितिन सरदेसाई और बाला नंदगांवकर सहित कम से कम 100 लोगों को नोटिस जारी किया था।

राहुल गाँधी के बचाव में इंडिया टुडे का ‘फैक्टचेक’, पार्टी वीडियो में दिखी महिला को बताया ‘दुल्हन की फ्रेंड’: नेटिजन्स बता रहे चीनी राजदूत होउ यांकी

कॉन्गेस के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के मंगलवार (3 मई 2022) को नेपाल के एक नाइट क्लब में पार्टी करते वीडियो वायरल हुए थे। वायरल वीडियो में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एक महिला के साथ नजर आ रहे हैं। नेटिजन्स का दावा है कि यह महिला नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) हैं।

पार्टी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के बचाव में हाथ-पैर मारने लगी। लगातार ट्वीट कर उनकी तारीफ की जाने लगी। कुछ मीडिया हाउस भी हैं जो कॉन्ग्रेस नेता के बचाव में हाथ-पैर मार रहे हैं। महिला की पहचान उजागर करने के लिए ये संसथान फैक्ट चेक करने पर उतारू हो गए हैं। नीचे देखिए सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पार्टी वीडियो;

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में दिख रही महिला को लेकर किया जा रहा दावा निराधार है। उसका कहना है कि वीडियो में राहुल गाँधी जिस महिला से बात कर रहे हैं, वह चीन की राजदूत नहीं हैं। वह एक नेपाल की महिला हैं जो दुल्हन की फ्रेंड है। कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी अपनी दोस्त सुमनिमा उदास (Sumnima Udas) की शादी में शामिल होने के लिए काठमांडू गए हुए हैं। काठमांडू के जिस लॉर्ड ऑफ ड्रिंक्स पब में कॉन्ग्रेस नेता पार्टी के लिए गए थे, उसके सीईओ राबिन श्रेष्ठ के हवाले से इंडिया टुडे ने बताया है कि उनके साथ दिख रही ​महिला चीनी राजदूत नहीं है। उन्होंने कहा, “वह दुल्हन की फ्रेंड है, जिसे शादी में आमंत्रित किया गया था।”

यही नहीं इंडिया टुडे ने नेपाल के जाने-माने अखबार काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post) के पत्रकार अनिल गिरि से भी संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि की कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला नेपाल की रहने वाली है। उन्होंने कहा, “वह महिला चीनी राजदूत नहीं है, बल्कि दुल्हन पक्ष की ओर से आमंत्रित एक नेपाली महिला है।” हालाँकि इंडिया टुडे ने इस महिला का नाम नहीं बताया है। ऑपइंडिया इन दावों की पुष्टि नहीं करता है।

इंडिया टुडे का फैक्ट चेक सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने भाजपा और राहुल गाँधी को सोशल मीडिया पर घेरने वाले नेटिजन्स पर हमला करना शुरू कर दिया है। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ट्वीट किया, “जिन लोगों ने #MyLeaderRahulGandhi के बारे में बकवास ट्वीट किया है, वे सावधान रहें। हम इस तरह के झूठ स्वीकार नहीं करेंगे। बस, अब बहुत हो गया है।”

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री असलम शेख ने कहा, “निराधार अफवाह जंगल की आग की तरह फैलती है। बीजेपी की फर्जी न्यूज फैक्ट्री लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। इसे रोकना होगा।”

उल्लेखनीय है कि इस संबंध में वर-वधू की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही चीन ने भी इन दावों को खारिज करने वाला कोई बयान जारी नहीं किया है कि वह महिला चीनी राजदूत नहीं है। आप ‘राहुल गाँधी की उस ‘करीबी दोस्त’ जिसकी शादी में शामिल होने के लिए वे नेपाल गए हैं के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

ट्विटर की मुफ्त सेवा कुछ लोगों के लिए होगी समाप्त: एलन मस्क ने ऐलान करके कहा- ‘देने पड़ेंगे पैसे’

ट्विटर के बिकने के बाद इसमें होने वाले बदलावों पर लगातार जानकारियाँ सामने आ रही हैं। ताजा खबर के मुताबिक आने वाले समय में ट्विटर को इस्तेमाल कर पाना कुछ लोगों के लिए मुफ्त नहीं होगा और इसकी कीमत उन्हें ट्विटर को देनी होगी।

एलन मस्क ने 4 मई को किए अपने ट्वीट में जानकारी दी कि ट्विटर कमर्शियल इस्तेमाल और सरकारी उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी कीमत तय करेगा। उनके अलावा कैजुअल यूजर्स के लिए ट्विटर की सेवा बिलकुल फ्री होगी। उन्होंने लिखा, “सामान्य यूजर के लिए ट्विटर हमेशा मुफ्त रहेगा। लेकिन हो सकता है कि इसका कमर्शियल और सरकारी प्रयोग करने वालों को इसकी कीमत देनी पड़े।”

इस ट्वीट के बाद कई लोग एलन मस्क से नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग एलन के फैसले की आलोचना करने वालों की प्रतिक्रिया का मखौल उड़ा रहे हैं। उनका कहना है कि एलन मस्क वामपंथियों के लिए नए ट्रंप बनते जा रहे हैं।

बता दें कि टेस्ला कंपनी के प्रमुख एलन मस्क ट्विटर को खरीदने के बाद इसमें बदलावों की ओर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। पहले उनके ट्विट्स ने ये साफ किया कि कैसे वो ट्विटर की पुरानी पॉलिसी के विरुद्ध हैं जहाँ सही स्टोरी दिखाने पर भी मीडिया संस्थान को ब्लॉक कर दिया जाता था। उसके बाद पता चला कि वो ट्विटर में जल्द ही एडिट बटन जैसे फीचर लाने पर काम कर रहे हैं। इसके बाद खबर आई कि एलन मस्क ट्विटर की मैनेजमेंट टीम से खुश नहीं है, इसलिए उनके आधिकारिक तौर पर मालिक बनने के बाद टीम बदली जाएगी।

एलन मस्क ने कंपनी के सीईओ को बदलने का मन भी बनाया हुआ है। खबरों में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने पराग अग्रवाल की रिप्लेसमेंट भी ढूँढनी शुरू कर दी है। उनके अलावा ट्विटर की लीगल हेड व ट्रंप का अकॉउंट बैन करवाने वाली विजया गड्डे भी कंपनी से निकाली जाएँगी। हाल में उन्हें अपनी टीम के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सिसकते देखा गया था। उन्होंने मस्क के हाथों में कंपनी जाने के बाद इसके भविष्य़ पर चिंता जताई थी।