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राहुल भट के बाद आतंकियों ने पुलिसकर्मी को घर में घुसकर मारी गोली: कश्मीरी पंडित बोले- सुरक्षा दो, वरना नौकरियों से देंगे इस्तीफा

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पुलवामा में आतंकियों ने 15 घंटे के भीतर दूसरी घटना को अंजाम दिया है। गुरुवार (12 मई 2022) दोपहर को कश्मीरी पंडित और राजस्व विभाग के कर्मचारी राहुल भट की हत्या करने के बाद शुक्रवार (13 मई 2022) सुबह दहशतगर्दों ने एक पुलिसकर्मी के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि रियाज अहमद ठोकर अपने घर गुदूरा में मौजूद थे। इस बीच कुछ आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी। इसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

वहीं, चदूरा तहसील कार्यालय के कर्मचारी राहुल भट की आतंकवादियों द्वारा हत्या किए जाने के खिलाफ कश्मीरी पंडितों ने शेखपोरा और बडगाम में विरोध प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कश्मीरी पंडित अमित कहते हैं, “एलजी प्रशासन हमें सुरक्षा मुहैया कराए, नहीं तो हम अपने-अपने पदों से सामूहिक इस्तीफे दे देंगे।”

आतंकवादियों की तलाश में सुरक्षाबलों ने अभियान शुरू कर दिया है। इससे पहले बडगाम में गुरुवार को दफ्तर में घुसकर आतंकियों ने कश्मीरी पंडित राहुल भट की हत्या कर दी थी। कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट किया था, “तहसीलदार कार्यालय चदूरा, बडगाम में आतंकवादियों ने अल्पसंख्यक समुदाय के एक कर्मचारी राहुल भट पर गोलियाँ चलाईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।” हालाँकि, अस्पताल में भर्ती कराने के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में शनिवार (7 मई 2022) को आतंकवादियों ने एक पुलिसकर्मी गुलाम हसन को गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके तुरंत बाद घायल कांस्टेबल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हसनपोरा के बिजबेहरा में 29 जनवरी 2022 को संदिग्ध आतंकवादियों (Terrorist Attack) ने प्रदेश पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल अली मोहम्मद गनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह कुलगाम थाने में तैनात थे। आतंकियों द्वारा हमला किए जाने के बाद गनी को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई थी।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का सर्वे: मुस्लिम पक्ष के पाले में फैसला न देने वाले जज को अपने परिवार की चिंता, बोले- डर का माहौल बनाया जा रहा है

वाराणसी में ज्ञानवापी केस की सुनवाई करने वाले जज ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को ले कर चिंता जताई है। जज के मुताबिक कुछ लोगों द्वारा एक साधारण मुकदमे को असाधारण तरीके से पेश किया जा रहा है। जज का नाम रवि कुमार दिवाकर है। रवि दिवाकर सीनियर डिवीजन के सिविल जज हैं। ओवैसी और कुछ अन्य लोगों ने ज्ञानवापी पर उनके फैसले को गलत बताया था।

अपने और परिवार की सुरक्षा की चिंता को जज ने अपने फैसले में लिखा है। उनके मुताबिक, “इस से पहले शायद ही कभी किसी वकील ने कमीशन की कार्रवाई करने वाले कमिश्नर पर सवाल खड़े किए रहे हों। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इस केस से डर का ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि मुझे मेरे परिवार की और मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता बन गई है। मेरी माँ को लगा कि मैं कमीशन के साथ मौके पर जा रहा हूँ। उन्होंने मेरी सुरक्षा का हवाला देते हुए वहाँ जाने से मना किया। विपक्षी द्वारा ऐसा कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है जो एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को हटाकर किसी और से जाँच करवाने के लिए पर्याप्त हो।”

जज ने पिछली बार सर्वे कार्रवाई पूरी न होने के पीछे जिला प्रशासन द्वारा रूचि न लेना एक बड़ी वजह बताई है। उन्होंने जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों को अहंकारी और घमंडी तक कहा है जो न्यायालय के आदेश का पालन करवाना ठीक नहीं समझते। जज के मुताबिक यहाँ तक कि वो अधिकारी हाईकोर्ट तक के आदेशों की भी अनदेखी करते रहते हैं।

गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी के सर्वे का लगातार विरोध कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (12 मई 2022) को सिविल जज रवि कुमार दिवाकर ने ज्ञानवापी के सर्वे का आदेश जारी किया है। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह तक सर्वे का आदेश दिया है चाहे उसके लिए ताले को खुलवाना पड़ें या उसे तोडना पड़े। इस बार 2 कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं। दूसरे कमिश्नर का नाम विशाल सिंह है। कमीशन को सर्वे की रिपोर्ट अदालत में 17 मई 2022 तक दाखिल करना है।

महाराष्ट्र में ‘शिवाजी मूर्ति’ पर बवाल: दो गुटों में जम कर पत्थरबाजी, गाड़ियों में लगाई गई आग, पुलिसकर्मी समेत कई घायल

महाराष्ट्र के जालना जिले के चंदई गाँव में दो गुटों में पथराव का मामला सामने आया है। जालना एसपी हर्ष पोद्दार ने बताया कि गाँव में बने नए गेट के नाम को लेकर गुरुवार (12 मई 2022) को दो गुटों में विवाद हो गया था। पुलिस ने 20 से 25 लोगों को गिरफ्तार भी किया है, दोनों गुटों की ओर से पथराव में कई गाड़ियों को नुकसान पहुँचा है। हालाँकि, अभी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। बताया जा रहा है कि पथराव के दौरान 5 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे।

जानकारी के मुताबिक, जालना जिले के भोकरदान तहसील के चंदई में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गाँव में दाखिल होने वाले गेट पर लगाई गई थी। जबकि उस गेट का नाम गोपीनाथ मुंडे किया जाना था। गेट के नाम को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद खड़ा हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि दो गुटों एक दूसरे पर पथराव करने लगे। इसके बाद गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायर किया और आँसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान पुलिस ने करीब 20 से 25 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। बता दें कि चंदई में दो गुटों के आपस में भिड़ने की वजह से गाँव में तनाव का माहौल है। इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

बता दें कि अप्रैल माह के बाद से विभिन्न राज्यों से दो गुटों में झड़पों की खबर सामने आ चुकी है। इससे पहले महाराष्ट्र के ही अमरावती जिले के अचलपुर शहर में झंडा हटाने को लेकर दो समुदायों में झड़प हुई थी, जिसके बाद वहाँ कर्फ्यू लगाया गया था। उस समय भी दोनों गुटों ने एक दूसरे पर पथराव किया था और पुलिस को सबको तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे।

खातूनें नहीं खा सकतीं मर्दों के साथ खुले में खाना, रेस्टोरेंट में शौहर के साथ बैठने पर भी प्रतिबंध: तालिबान का नया फरमान

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से वहाँ के हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। 9 महीने बाद भी वहाँ लोगों को गरीबी और भुखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच तालिबान के नए-नए फरमान भी जारी हो रहे हैं। अपने नए फरमान में तालिबान ने अफगान शहर में पुरुषों और महिलाओं के एक साथ बाहर खाने और पार्क में जाने से रोक लगा दी है।

एक अधिकारी ने गुरुवार (12 मई 2022) को बताया, “तालिबान के अधिकारियों ने पश्चिमी अफगान शहर हेरात में पुरुषों और महिलाओं के एक साथ बाहर खाने और पार्क में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।” इससे पहले अफगानिस्तान के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात में तालिबान ने महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं जारी करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही अफगानिस्तान में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं इस तरह का बुर्का पहनने का फरमान जारी किया गया था, जिसमें उनकी आँखे भी ना दिखती हों।

तालिबान के सत्ता में वापिस आने से पहले अफगानिस्तान में पुरुषों और महिलाओं को रेस्टोरेंट में एक साथ खाना खाते देखना आम बात थी। खासकर हेरात शहर में। हेरात में अपनी परंपराओं को बढ़ावा देने और लोगों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने वाले मंत्रालय में तालिबान के एक अधिकारी रियाज़ुल्लाह सीरत ने कहा, “अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि पुरुषों और महिलाओं के रेस्टोरेंट में एक साथ जाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।”

अधिकारी ने एएफपी न्यूज एजेंसी को बताया कि मालिकों को चेतावनी गई है कि ये नियम सभी पर लागू होंगे फिर चाहे वह शौहर और बीवी ही क्यों ना हों। एक अफगान महिला ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि मैनेजर ने उसे और उसके शौहर को बुधवार (11 मई 2022) को हेरात रेस्टोरेंट में अलग बैठने को कहा था। एक रेस्टोरेंट के मैनेजर सफीउल्लाह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें मंत्रालय का आदेश मिला है कि वह महिलाओं और पुरुषों को एक साथ ना बैठने दें।

सफीउल्लाह ने आगे कहा, “हमें ना चाहते हुए भी इस आदेश का पालन करना होगा, लेकिन इससे हमारे बिजनेस प्रभावित हो रहा है।” उन्होंने कहा कि अगर यह प्रतिबंध जारी रहता है तो उन्हें रेस्टोरेंट से कई कर्मचारियों को निकालने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

तालिबान ने अगस्त 2021 में सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने के बाद पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग करने पर प्रतिबंध लगाए हैं। महिलाओं को शिक्षा से वंचित करने के बाद तालिबान ने इस साल मार्च में अफगानिस्तान के पुरुषों के लिए नया फरमान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जो सरकारी कर्मचारी दाढ़ी नहीं रखेगा, उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

गौरतलब है कि तालिबान अफगानिस्तान में अपने 1996 से 2001 के शासन में मानवाधिकारों के हनन के लिए जाना जाता है, लेकिन दूसरी पर सत्ता में आने के बाद उसने वादा किया था कि इस बार वह सख्त रूख नहीं अपनाएगा। हालांकि इसके बाद रूढ़ीवादी सोच वाले तालिबान द्वारा ऐसे फरमान जारी किए जा रहे हैं, जिससे अफगान के नागरिक बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

अंडे बेचने वाले ‘नशेड़ी’ ने मजार के साथ बीच सड़क पर बनाया घर, कुर्ता-टोपी पहन बना खादिम: शिकायत के बाद देहरादून पुलिस ने उठवाया बोरिया बिस्तर

उत्तराखंड के देहरादून में पॉश इलाके में बनी एक मजार पर कुछ लोगों द्वारा बहस किए जाने का वीडियो वायरल हो रहा है। यहाँ पर हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ लोग मजार को अवैध बता रहे हैं। जबकि खादिम पीर बाबा नाम से उस मजार को सम्बोधित करते हुए लोगों से उलझता दिखाई दे रहा है। मौके पर पुलिस बल भी खड़ा दिखाई दे रहा।

विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि इस जगह पर बिजली आदि भी बिना किसी मीटर या आधिकारिक अनुमति के लगाई जा चुकी थी। कुछ देर की बहस के बाद वो खुद ही मजार के आस-पास जमा किया गया अतिक्रमण हटाना शुरू कर देता है। पांचजन्य की रिपोर्ट के मुताबिक यह मजार देहरादून के रिस्पना पुल के पास गली में कैलाश अस्पताल के आगे बनी है। इस पर रहने वाला आरोपित लगभग 9 माह पहले उस गली में अंडे बेचने आया था। जिस जगह वो अंडे का ठेला लगाता था उसी जगह धीरे-धीरे उसने अतिक्रमण शुरू कर दिया।

मज़ार के अंदर खादिम के ठिकाने पर उबले अंडे मिलने का दावा किया गया। आरोपित मूल रूप से संभल जिले के मोहल्ला नवाबफेर, सरायतरीन का रहने वाला है। इस मजार का नाम उसने ‘पीर बाबा की दरगाह’ दिया था। पड़ोसियों के मुताबिक आरोपित अक्सर नशे में रहता था। अंडे बेचने वाले उस व्यक्ति ने धीरे-धीरे अपना हुलिया बदल लिया और वो टोपी और लंबा कुर्ता पहन कर मज़ार के खादिम के तौर पर खुद को दिखाने लगा। इस दौरान वो अपने परिवार को भी वहाँ ले आया।

ऑपइंडिया ने इस मामले में देहरादून के नेहरू नगर थाने के SHO से बात की। उन्होंने बताया, “मजार नहीं हटी है बल्कि मजार पर रहने वाला खादिम हटा है। वो अपने परिवार को वहाँ शिफ्ट कर चुका था। इसी के साथ उसके द्वारा नशा अदि करने की शिकायतें मिल रहीं थी। मजार पुरानी है और वो अपनी ही जगह पर मौजूद है।”

मदद के नाम पर लोगों का पैसा खाने वाली इस्लामिस्ट पत्रकार राणा अय्यूब ने अब गौ तस्करों को लेकर फैलाई फेक न्यूज

वाशिंगटन पोस्ट की कॉलमनिस्ट और कथित पत्रकार राणा अय्यूब ऑपइंडिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल कर गुरुवार (12 मई 2022) को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुई गौ तस्करी की घटना पर एक अलग ही राग अलापना शुरू कर दिया। ऐसा करने के लिए भी उन्होंने पहले फेक न्यूज फैलाई।

गुरुवार (12 मई) को ऑपइंडिया ने इस बात को रिपोर्ट किया कि किस तरह से गौ तस्करी कर ले जा रहे जीशान, सद्दाम और कासिम को मुठभेड़ के बाद गाजियाबाद पुलिस ने पकड़ लिया। हमने ये रिपोर्ट किया था कि ये तीनों आरोपित स्कॉर्पियो में गाय चोरी कर भाग रहे थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पीछा किया तो उनकी गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई। जब इनसे सरेंडर के लिए कहा गया तो इन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसमें एक कॉन्स्टेबल बुरी तरह से घायल हो गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीनों गौ तस्कर घायल हो गए और गाय को उनके चंगुल से बचा लिया गया।

ऑपइंडिया ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर अपने आधिकारिक हैंडल पर इसी खबर को शेयर किया था, जिसका शीर्षक था “गाजियाबाद: मवेशी तस्कर जीशान, सद्दाम और कासिम को पुलिस मुठभेड़ में लगी गोली, चोरी की गई गाय को बचाया गया”

आदतन फेक न्यूज पेडलर राणा अय्यूब ऑपइंडिया के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “जब एक दक्षिणपंथी, प्रोपेगेंडा वेबसाइट भारत की बदसूरत सच्चाई का खुलासा करती है”।

जैसा कि देखा जा सकता है कि ऑपइंडिया ने अपनी हेडलाइन में ‘शॉट’ शब्द का उल्लेख किया है न कि ‘शॉट डेड’। रिपोर्ट में भी हमने पहले पैराग्राफ में ही स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि तीनों गौ तस्कर आरोपितों और पुलिस के बीच हुई ‘मुठभेड़’ में ‘घायल’ हो गए थे।

ऑपइंडिया द्वारा पब्लिश की गई रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

लेकिन ऑपइंडिया को बदनाम करने की जल्दबाजी में वामपंथी पत्रकार ने आर्टिकल को खोले बिना ही हेडलाइन में दिए गए ‘शॉट’ शब्द को ‘शॉट डेड’ समझ लिया।

बस फिर क्या था, लेफ्ट-लिबरल विचारधारा वाले कई अन्य ट्विटर यूजर इस्लामिस्टों को पीड़ित बताने के लिए कूद पड़े। राणा अय्यूब के ट्वीट के जवाब में ट्विटर यूजर @TheJadedQueen ने भारतीय मुस्लिमों के लिए खेद व्यक्त किया। इसके साथ उसने @hrw@amnesty@BorisJohnson@UNHCRUK को टैग करते हुए लिखा कि गायों के लिए हमेशा मुस्लिम पुरुषों को ही मारा जाता है।

फोटो साभार: ट्विटर

इसी तरह से @LivedShahid नाम के यूजर ने भी राणा अय्यूब के ट्वीट पर रिएक्ट करते हुए कहा कि मोदी शासन में पशुओं को बचाने के नाम पर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

फोटो साभार: ट्विटर

एक अन्य ट्विटर यूजर @Introvertguy111 ने लिखा कि अधिकारी हत्यारों और बलात्कारियों के प्रति अधिक संवेदनशील थे। उसने यही मान लिया था कि तस्करों को पुलिस ने मार गिराया है।

फोटो साभार: ट्विटर

आश्चर्य की बात ये है कि ऑपइंडिया को कोसने से पहले किसी ने भी एक बार इस रिपोर्ट को खोलकर पढ़ने की जहमत नहीं हुई। सभी ने राणा अय्यूब के फेक न्यूज को सच मान उसके पीछे चल पड़े। हालाँकि, रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि तस्करों ने एक गाय चुराई थी और पहले पुलिस पर गोली चलाई थी, ड्यूटी पर तैनात एक कॉन्स्टेबल को भी घायल कर दिया।

राणा अयूब पर डोनेशन फ्रॉड का आरोप

गौरतलब है कि राणा अय्यूब वही ‘पत्रकार’ हैं, जो कोरोना में मदद के नाम पर केटो के जरिए क्राउड फंडिंग से धन की उगाही करने और उसे व्यक्तिगत लाभ के लिए खर्च करने के मामले में जाँच के दायरे में हैं। फरवरी 2022 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट का उल्लंघन करने के मामले में अय्यूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क किया था।

आप राणा द्वारा एकत्र किए गए कोविड फंड के दुरुपयोग के आरोपों के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं। अय्यूब एक आदतन फेक न्यूज पेडलर हैं।

’18 साल का वैवाहिक जीवन, 14 बच्चे, 15वें प्रसव के दौरान 37 की उम्र में मुमताज की मौत’: जानिए कब और कैसे बना ताजमहल

देश में ताजमहल (Taj Mahal) के बंद दरवाजों को खोलने को लेकर जारी सियासत और उस पर कोर्ट के फैसले के बीच ताजमहल को लेकर इतिहास क्या कहता है। इस अजूबे को दुनिया प्रेम की निशानी मानती है, लेकिन इसके क्या तथ्य हैं? इसे किसने बनवाया है, इस पर नजर डालते हैं।

शुरुआत मुगल आक्रान्ता शाहजहाँ की बीवी मुमताज उर्फ अर्जुमन बानो बेगम से होती है। 19 साल की उम्र में अर्जुमन बानो बेगम (मुमताज महल) का निकाह 21 साल के शाहजहाँ से 1612 में हुआ था। ये शाहजहाँ का दूसरा निकाह था। मुमताज और शाहजहाँ का वैवाहिक जीवन 18 साल का रहा। इन 18 सालों में शाहजहाँ से मुमताज को 14 बच्चे हुए और 15वें बच्चे के प्रसव के दौरान 1630 में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में मुमताज की मौत हो गई। उस दौरान वो 37 साल की थी।

उसकी मौत के दो साल पहले ही शाहजहाँ को मुगल साम्राज्य की गद्दी मिली थी। बीवी की मौत के बाद करीब सप्ताह भर के लिए तो उसने पूरी सल्तनत के काम को रुकवा दिया। इतिहासकार EVV हैवेल कहते हैं कि मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहाँ ने जबरदस्ती दो सालों तक शोक मनाया। इस दौरान किसी भी तरह के संगीत, त्योहार औऱ यहाँ तक कि गहने पहनने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

बुरहानपुर में ही दफ्न की गई मुमताज

मौत के बाद मुमताज को बुरहानपुर में ही दफ्न कर दिया गया था। माना जाता है कि करीब छह महीने बाद, उसकी कब्र को आगरा लाया गया था। इसको लेकर भी दो तथ्य हैं- पहला ये राजपूत राजा मान सिंह के बेटे राजा जय सिंह की पुस्तैनी जमीन पर उसे तुरंत दफ़न कर वहाँ एक बगीचा बना दिया गया था। दूसरा मुमताज को आगरा लाने के बाद उसे 9 सालों तक एक मस्जिद में दफ़न किया गया। उल्लेखनीय है कि इन दो सालों तक शाहजहाँ न तो किसी से मिला औऱ न ही दरबार में आय़ा। सवाल ये उठता है कि फिर किसने मुमताज के गल चुके शरीर के ढाँचे को कब्र खोदकर उसे आगरा लाने का फरमान सुनाया, ये तथ्य इतिहास में दफन हो गया है। जबकि सत्य तो ये है कि शाहजहाँ के बिना उसे कोई हाथ नहीं लगा सकता था।

अब अगर इस बात को माना जाय कि सच में मुमताज की कब्र को आगरा लाया गया था, तो पहले 9 सालों तक मस्जिद में दफ़न किया गया और 1641 के आसपास ताजमहल के बगीचे में दफनाया गया होगा। मतलब ये कि 10 सालों तक शाहजहाँ, मुमताज की हड्डियों अथवा कंकाल को लेकर ही यहाँ से वहाँ घूमता रहा होगा। मुमताज की कब्र है कहाँ इसको लेकर पुख्ता जानकारी खुद पुरातत्व विभाग के पास ही नहीं है। वो भी कही-सुनी बातों पर यकीन करता है।

किसकी है ताजमहल वाली जमीन

आगरा का ताजमहल जिस जमीन पर शान से खड़ा है, वो वास्तविकता में जयपुर के राजा मान सिंह की है। इस तथ्य को भारतीय इतिहासकार जादूनाथ सरकार समेत यूरोपियन इतिहासकार जॉन मार्शल और EVV हैवेल भी स्वीकार करते हैं। इस पर इस्लामिक इतिहासकार भी सहमत नजर आते हैं।

हाँ, इसे बनवाने में आए कुल खर्च पर इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ स्थानों पर इसका खर्चा 50 लाख तो कहीं 185 लाख रुपए तक बताया गया है। दीवान-ए-अफरीदी में खर्चा 9 करोड़ 17 लाख बताया है जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स में 1853 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 1,750,000 पौंड था।

शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान फ्रांसीसी यात्री जीन बापिस्ट टावरनियर भारत के दौरे पर आया था। अपनी इस यात्रा पर एक किताब भी उसने लिखी थी। जिसका अनुवाद 1889 में प्रकाशित हुआ था। किताब के मुताबिक, वो 1640-41 में पहली बार आगरा आया था। दरअसल, उसका भारत आना-जाना लगा रहता था। जब पेरिस से चलकर अपनी पाँचवी भारत यात्रा पर आया तो वह 1667 में सूरत में था। यह उसकी आखिरी भारत यात्रा थी। उसने अपने संस्मरण के पृष्ठ 110 पर लिखा है, “I witnessed the commencement and accomplishment of this great work (Taj Mahal).” इस आधार पर टावरनियर के अनुसार ताज महल का निर्माण 1640-41 के दौरान शुरू हुआ होगा। जबकि मुमताज की मौत एक दशक पहले 1630 में ही हो चुकी थी।

1667 में जब टावरनियर सूरत में था, एक साल पहले 1666 में शाहजहाँ भी मर चुका था। अपनी मृत्यु से आठ साल पहले तक वह अपने बेटे औरंगजेब की कैद में भी रहा था। ऐसे में 1658 के आसपास से ही परिवार में गद्दी को लेकर आपसी लड़ाई छिड़ चुकी थी। टावरनियर यह भी लिखता है, “ताजमहल को बनाने में 22 साल लगे थे।” अब 1641 से 22 साल 1663 में जाकर पूरे होते है। इस दौरान शाहजहाँ तो आगरा के किले में नजरबन्द था।

ताजमहल का निर्माण कब हुआ इस पर एक और कहानी पढ़ने की मिलती है। एक स्पेनिश धार्मिक यात्री सेबस्टियन मैनरिक 1641 में आगरा में था। उसे किसी ने बताया कि ताजमहल के मुख्य वास्तुकला को इटली के गेरोनिमो वेरोनियो ने तैयार की है। हालाँकि, वह कभी वेरोनियो से नहीं मिला था क्योंकि शाहजहाँ ने उसे 1640 में एक पुर्तगाली के हाथों मरवा दिया था। लाहौर में उसकी कब्र आज भी है। साल 1899 में हेनरी जॉर्ज ने अपनी किताब ‘A Handbook for Visitors to Agra and Its Neighbourhood’ के पेज नंबर 23-24 पर लिखा है, “ताजमहल के पूरा बनने से पहले ही वेरोनियो मर गया था… इस प्रकार 17 सालों तक चले निर्माण के बाद यह इमारत 1648 में जाकर बनी।”

हालाँकि, इस तथ्य को अधिकतर इस्लामिक इतिहासकार मानने से इनकार करते हैं। उनका दावा है कि ताजमहल का ढाँचा शाहजहाँ के करीबी मुस्लिम उस्ताद अहमद लाहौरी ने बनाया था। बावजूद इसके दस्तावेजों के अध्ययन से ये संदेह पैदा होता है कि वास्तव में ताजमहल कब बना, किसने बनाया और कब इसका निर्माण पूरा हुआ?

कहा जाता है कि ताजमहल को 20,000 मजदूरों ने मिलकर बनाया था। पहली बार ये तथ्य ब्रिटिश काल में लाहौर से प्रकाशित एक पुस्तक ‘गाइड टू द ताज एट आगरा’ के पृष्ठ 14 में मिलता है। हेनरी जॉर्ज ने इन मजदूरों की दुर्दशा के बारे में अपनी किताब में लिखा है। किताब के पेज नंबर 27 पर लिखा है, “20,000 मजदूरों ने काम किया लेकिन उन्हें बहुत कम पैसे मिलते थे। उन्हें भत्ते के तौर पर मक्के के दाने दिए जाते थे, जिसकी लालची अधिकारियों द्वारा कटौती होती रहती थी। ये मजदूर बुरी तरह से तनाव में थे और इसी कारण इनकी मौत की संख्या भी काफी बढ़ गई थी। एक कवि ने लिखा है कि इस संकट की घड़ी में भगवान ही हमारा रखवाला है। अच्छा होता कि हम भी मुमताज के साथ ही मर गए होते।”

हेमंत सोरेन की पत्नी ने फर्जीवाड़ा कर खरीदी आदिवासियों की जमीन, डमी कंपनी बना कर खपाया जा रहा कालाधन: पूर्व CM रघुवर दास का बड़ा खुलासा

खनिज पट्टा के मामले में घिरे झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर गुरुवार (12 मई 2022) को निशाना साधते हुए राज्य के पूर्व सीएम और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवरदास ने 2009 के एक केस को लेकर हमला किया है। सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी पर रघुवर दास ने आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीनों को फर्जीवाड़ा करके खरीदने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने झारखंड राज्य के कई जिलों में खुद को उसी संबंधित थाने का निवासी बताते हुए सैकड़ों एकड़ जमीनों को खरीदा। हेमंत सोरेन के मुताबिक, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मु सोरेन ओडिशा राज्य की आदिवासी वर्ग से आती हैं। उन्होंने साल 2009 में राँची के महत्वपूर्ण माने जाने वाले इलाके अरगोड़ा में कल्पना सोरेन ने 13 कट्टा, 14 छटाक और 17 कट्ठा व 8 छटाक आदिवासियों की जमीन को खरीदा था।

मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका

पूर्व सीएम रघुवर दास ने कल्पना सोरेन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके द्वारा 13 कट्ठा 14 छटाक जमीन को लेकर मामले हैं। रघुवर दास कहते हैं कि जिस वक्त इस जमीन को खरीदा गया था तो उस वक्त इसका सरकारी मूल्य 34 लाख 93 हजार रुपए दिखाया गया है, लेकिन इसको बेचने की कीमत केवल 4,16,000 रुपए बताई गई थी। जबकि, दूसरी डीड 17 कट्ठा 8 छटाक को लेकर है। क्रय के क्रम में 5,25,000 रुपए बताया गया है।

बीजेपी नेता ने दावा किया कि इस रेट से ये जाहिर होता है कि विक्रेता को वास्तविक विक्रय मूल्य जो कि 78 लाख 93 हजार रुपए था, उसकी जगह ये केवल 941250 का ही भुगतान किया गया। ऐसे में यह सरकारी नियम के खिलाफ और मनी लॉन्ड्रिंग का केस लगता है।

बीजेपी नेता रघुवरदास ने इस मामले में कहा है कि वो इसको लेकर राज्यपाल से मिलकर बात करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सीएम सोरेन को खुले मंच पर बहस की चुनौती दी है। रघुवरदास ने कल्पना सोरेन के साथ ही उनकी साली सरला मुर्मू पर भी आरोप लगाया है।

सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप

रघुवर दास ने कल्पना सोरेन पर सीएनटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए बताया कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने सीएनटी एक्ट के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने का आदेश भी दिया था। लेकिन 2019 में जब सोरेन सीएम बने तो उन्होंने अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए इस मामले को अपने फेवर में बदल दिया। साल 2020 में लाइवस्टॉक फर्म का भी गठन किया गया था, जिसकी निदेशक कल्पना सोरेन हैं, इसमें उनकी 93 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी हैं। वहीं हेमंत सोरेन की साली सरला मुर्मू 6.6 प्रतिशत की हिस्सेदार हैं।

उक्त कंपनी को ही राँची के इंडस्ट्रियल एरिया में जमीन दी गई थी। इसके अलावा सरला मु्र्मू दो अन्य कंपनियों (शेल कंपनी होने का शक है) की निदेशक हैं। शक है कि इन दो कंपनियों के जरिए काले धन को खपाया जा रहा है।

TMC नेता के बेटे को NIA ने किया गिरफ्तार, BJP नेता अर्जुन सिंह के घर के बाहर बम रखे जाने के मामले में हुई कार्रवाई

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार (12 मई 2022) को बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के जगदल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता के बेटे को गिरफ्तार किया। जिला पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी इस साल मार्च में स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और लोकसभा सदस्य अर्जुन सिंह के आवास के बाहर 45 देसी बम बरामद होने के संबंध में की गई है।

आरोपित नमित सिंह, बैरकपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले जगदल नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 से टीएमसी पार्षद सुनीता सिंह का बेटा है। 2019 में टीएमसी छोड़ने और बीजेपी ज्वाइन करने के बाद बैरकपुर सीट से अर्जुन सिंह ने जीत हासिल की थी। 12 मार्च को अर्जुन सिंह के आवास के पास एक जगह से बम बरामद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने उन पर और उनके परिवार के सदस्यों पर हमला करने की साजिश रची थी।

उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में एनआईए ने जाँच अपने हाथ में ले लिया। इससे पहले तक स्थानीय पुलिस मामले की जाँच कर रही थी। जगदल पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया, “एनआईए की पाँच सदस्यीय टीम ने नमित सिंह से घंटों पूछताछ करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।”

वहीं जगदल से टीएमसी विधायक सोमनाथ श्याम ने आरोप लगाया कि NIA भाजपा सांसद के निर्देश पर काम कर रही है। श्याम ने कहा, “अर्जुन सिंह के कुछ फॉलोवर्स ने स्थानीय पुलिस को दिखाया कि बम कहाँ रखे गए थे। क्या हमें यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुनीता सिंह और उनके बेटे को फँसाने के लिए बम लगाए थे? अर्जुन सिंह ने मीडिया के सामने नमित को संदिग्ध बताया और कहा कि वह एनआईए से मामले की जाँच करने को कहेंगे। हम इसे कोर्ट में लड़ेंगे।”

इधर अर्जुन सिंह ने तर्क दिया कि उन्होंने किसी भी तरह से NIA को प्रभावित नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैंने किसी पर आरोप नहीं लगाया। मैंने सिर्फ इतना कहा कि अगर एनआईए कट्टर आतंकवादियों को पकड़ सकती है तो वह आसानी से बम रखने वाले एक छोटे से अपराध को तो पकड़ ही सकती है। मैं NIA को धन्यवाद देता हूँ।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के घर पर अज्ञात लोगों द्वारा बम से हमला करने का मामला सामना आया था। उत्तर 24 परगना जिले में 7 सितंबर 2021 को अज्ञात बदमाशों ने अर्जुन सिंह के घर के बाहर तीन देसी बमों में धावा बोला। कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर जगदल में भाजपा सांसद के घर पर हमला करने वाले बाइक पर सवार होकर आए थे। घटना सुबह करीब 6.30 बजे हुई। इस मामले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया था कि हमलावर संभवत: तृणमूल कॉन्ग्रेस के थे।

10 साल से बंद है भारत-पाक सीरीज, फिर भी पूर्व PCB चेयरमैन की अकड़ कायम, कहा- हम भारत के पीछे क्यों भागे, वो पाकिस्तान आएँ

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के पूर्व अध्यक्ष एहसान मनी (Ehsan Mani) का विवादित बयान सुर्खियों में है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को लेकर बड़ा दावा किया है। पीसीबी के पूर्व चेयरमैन का कहना है कि बीसीसीआई को बीजेपी (BJP) सरकार चला रही है। बोर्ड का नियंत्रण बीजेपी के पास है। यही वजह है कि पाकिस्तान और भारत की बात क्रिकेट को लेकर नहीं हो पाती है। एहसान मनी ने हाल ही में पीसीबी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है।

क्रिकेट पाकिस्तान के साथ बातचीत में एहसान मनी ने पाकिस्तान सुपर लीग, पाकिस्तान क्रिकेट की वर्तमान स्थिति और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के साथ उनके संबंध सहित विभिन्न विषयों पर बात की। इस दौरान क्रिकेट पाकिस्तान द्वारा लिए गए इंटरव्यू में पूर्व अध्यक्ष से भारत के पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय टूर्नामेंट नहीं खेलने और उनके कार्यकाल के दौरान भारत और पाकिस्तान बोर्ड के बीच संबंधों के बारे में पूछा गया।

एहसान मनी ने क्रिकेट पाकिस्तान को दिए इंटरव्यू में कहा, “भले ही बीसीसीआई के पास सौरव गांगुली हैं, लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि उनके बोर्ड के सचिव कौन हैं? अमित शाह के बेटे जय शाह। बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अरुण धूमल अनुराग ठाकुर के भाई हैं, जो वर्तमान में खेल और युवा मामलों के मंत्री हैं। असली कंट्रोल बीजेपी के पास है और वही बीसीसीआई को निर्देश देती है, इसलिए मैंने उनके साथ समझौता नहीं किया और ना ही बात की।”

भारत बनाम पाकिस्तान सीरीज को लेकर एहसान मनी ने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि जब भारत खेलने के लिए तैयार होगा, तो हम खेलने के लिए तैयार होंगे।” पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एहसान मनी ने यह भी खुलासा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर भारत पाकिस्तान के साथ खेलना चाहता है, तो वे बोर्ड से संपर्क करेंगे।

पूर्व PCB चैयरमैन एहसान ने आगे कहा, “हम हिन्दुस्तान के पीछे क्यों भागे, अगर वो पाकिस्तान के साथ खेलना चाहते हैं, तो यहाँ खुद आएँगे और खेलेंगे।” मालूम हो कि भारत-पाकिस्तान के बीच अंतिम बार द्विपक्षीय सीरीज साल 2012-13 में खेली गई थी। उस वक्त पाकिस्तानी क्रिकेट टीम ने भारत का दौरा किया था, लेकिन उसके बाद से दोनों देशों के बीच कोई सीरीज नहीं खेली गई है। हालाँकि, आईसीसी टूर्नामेंटों में दोनों टीमों का आमना-सामना होता रहा है।