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अमर उजाला के पत्रकार पर पंजाब में जानलेवा हमला, बेसबॉल के बल्ले और लोहे की रॉड से पीटकर किया लहुलुहान, लगे 27 टाँके

पंजाब (Punjab) के जीरकपुर में एक पत्रकार को बेरहमी से पीट-पीटकर अधमरा किए जाने की घटना सामने आई है। ये हिंदी दैनिक अखबार अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार आलोक वर्मा हैं। मंगलवार (3 मई 2022) की रात को अज्ञात हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला किया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आलोक वर्मा अपनी ड्यूटी खत्म कर वापस अपने घर लौट रहे थे, उसी दौरान दो बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने उन पर बेसबॉल के बल्ले और सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इसके बाद बदमाश उनका पर्स और मोबाइल लेकर फरार हो गए। इस हमले में पत्रकार के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टरों को उनके सिर पर 27 टाँके लगाने पड़े हैं।

जब आरोपितों ने उनपर हमला किया तो आलोक वर्मा वहीं जमीन पर गिर गए। वो बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन आरोपित उन्हें लगातार पीटते रहे। उनकी गुहार सुनकर कोई बचाने तक नहीं आया। आलोक वर्मा को अधमरी हालत में जमीन पर पड़ा छोड़ कर हमलावर फरार हो गए। बाद में किसी तरह से घायल अवस्था में वो अपने घर पहुँचे, जहाँ से उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में जीएमसीएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ सुधीर गर्ग ने बताया कि आलोक वर्मा को तड़के 3.45 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उनके सिर पर गंभीर चोटे आई थीं, जिससे काफी खून बह रहा था। हालाँकि, अच्छी बात यह थी कि उन्हें कोई अंदरूनी चोट नहीं आई थी, जिसके कारण उन्हें दोपहर 2.30 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया।

इस घटना के बाद चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने वरिष्ठ पत्रकार पर हमले की निंदा करते हुए पंजाब पुलिस से हमलावरों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की है। इस बीच राज्य के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अमर उजाला के पत्रकार पर हमले की निंदा करते हुए भगवंत मान की अगुआई वाली पंजाब की आप सरकार पर निशाना साधा। कैप्टन ने आरोप लगाया कि पंजाब की सड़कों पर अराजकता फैली हुई है।

उन्होंने ट्वीट किया, “जीरकपुर में @AmarUjalaNews के पत्रकार आलोक वर्मा पर जानलेवा हमला निंदनीय है। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। @AAPpunjab सरकार ने अपनी अथॉरिटी को पूरी तरह से छोड़ दिया है औऱ बुरी तरह से फेल हुई है। पंजाब की सड़कों पर अराजकता फैली हुई है!”

बिहार की राजनीति को बदलने के लिए PK करेंगे 3000km की पदयात्रा: कहा- 30 साल के शासन में भी लालू-नीतीश ने बिहार को गरीब-पिछड़ा बनाए रखा

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके (Prashant Kishor- PK) फिलहाल राजनीतिक दल के गठन के कयासों पर विराम लगा दिया है, लेकिन भविष्य की संभावनाओं के लिए पर्याप्त स्थान छोड़ रखा है। पटना में गुरुवार (5 मई 2022) को उन्होंने कहा कि वह बिहार के लोगों के साथ पहले 3-4 महीने संवाद स्थापित करेंगे और फिर 2 अक्टूबर से पश्चिम चंपारण से पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान वे समाज के विभिन्न तबके के लोगों से मुलाकात स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद पार्टी बनाने पर विचार किया जाएगा।

बता दें कि कॉन्ग्रेस से बात नहीं बनने के बाद कहा जा रहा था कि प्रशांत किशोर जल्द ही एक राजनीतिक दल के गठन का ऐलान कर सकते हैं। हालाँकि, फिलहाल इस संभावना से उन्होंने इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में 17,000 लोगों को चिन्हित किया गया है और वे उनसे मिलकर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी ‘जन सुराज’ यात्रा के तहत वे बिहार में 3,000 किलोमीटर की पदयात्रा 8 महीनों में पूरा करेंगे। इस दौरान वे हर गाँव और शहर को कवर करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति मिलने का इच्छुक होगा, वे उससे मिलेंगे।

इस दौरान प्रशांत किशोर ने लालू यादव और नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में लालू यादव ने 15 सालों तक और नीतीश कुमार ने 15 सालों तक शासन किया, लेकिन दोनों के तीन दशकों के शासन में किसी तरह का बदलाव नहीं आया और बिहार देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य बना रहा। उन्होंने कहा कि जिन रास्तों पर बिहार चल रहा है, उसे बदलाव आने की संभावना नहीं है। अगर बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की सूची में लाना है तो इसके लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत होगी।

बिहार की जातिवादी राजनीति को लेकर उन्होंने कहा कि कई लोगों का मानना है कि बिहार में केवल जाति के आधार पर ही वोट मिलता है। उन्होंने कहा, “मैं जाति नहीं, बल्कि समाज के सभी लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहा हूँ। मैं कोरोना के खत्म होने का इंतजार कर रहा था, ताकि किसी नई योजना पर काम कर सकूँ।”

राजनीतिक दल बनाने को लेकर उन्होंने कहा कि लोगों से संवाद के बाद अगर 4-5 हजार लोग कहते हैं कि किसी राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत है, तब वे इसकी घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक पार्टी बनती है तो यह उन सभी लोगों की पार्टी होगी, जो इस परिकल्पना से जुड़कर इस राजनीतिक संगठन के निर्माण में अपनी भागीदारी देंगे। यह काम अगस्त या सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

दिल्ली में खेल-खेल का झगड़ा पत्थरबाजी में बदला: वेलकम में दलितों पर मुस्लिम भीड़ के हमले का आरोप, दंगे की धाराओं में FIR

दिल्ली के वेलकम में बुधवार (4 मई 2022) रात दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों समुदाय के बीच पत्थरबाजी की खबर है। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। 37 अन्य हिरासत में लिए गए हैं। दंगे की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस उपद्रवियों की पहचान का प्रयास कर रही है।

बताया जा रहा है कि झील पार्क में खेल के दौरान लड़कों में झगड़ा हो गया। बाद में मामला सलट गया। लेकिन आरोप है कि इसके कुछ देर बाद X और Y ब्लॉक में रहने वाले दलितों पर मुस्लिम भीड़ ने कथित तौर पर हमला कर दिया है। बताया जाता है कि दोनों पक्षों में करीब 1 घंटे तक पत्थरबाजी होती रही। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और हालात पर काबू पाया।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के DCP संजय कुमार के मुताबिक, “4 मई को पुलिस को वेलकम के फोटो चौक इलाके में झगड़े की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुँच गई। प्राथमिक जाँच में पाया गया है कि विवाद लड़कों के बीच पार्क में खेलने के दौरान हुए झगड़े के कारण हुआ। कुछ आरोपितों को चिन्हित कर के हिरासत में लिया गया है। इस केस में धारा 108 crpc के तहत केस दर्ज किया गया है। आगे की जाँच व कार्रवाई जारी है।”

DCP के मुताबिक, “मौके पर जमा कई लोगों में समझाने और बीच-बचाव करने में कई लोग शामिल थे। साथ ही भारी पुलिस बल भी वहाँ पहुँच गया था। इसी वजह से लोगों को यह लगा कि कोई बड़ा विवाद हो रहा है। कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। बाकियों की तलाश की जा रही है।” पुलिस का कहना है कि पथराव 8 से 10 मिनट तक हुआ। फिलहाल हालात सामान्य है।

Z न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक शकील नाम के व्यक्ति ने बताया कि किसी ने गाँधी को गाली दी तो किसी ने मोदी को गाली दी। इस बात से विवाद शुरू हुआ था। इस विवाद में कुछ लोगों को हल्की चोटें आई हैं। रिक्शा चलाने वाले कैश्मुद्दीन की बीवी शबनम का कहना है कि उसके शौहर को पुलिस पकड़ कर ले गई है। वहीं मोहम्मद हबीब की बहू ने भी अपने ससुर के पकड़े जाने की बात कही है। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि झगड़ा 2 अलग-अलग समुदायों के बीच हुआ था।

टाइम्स नाउ के मुताबिक पार्क में आपस में कहासुनी होने के बाद भीड़ ने मोहल्ले पर हमला बोल दिया। स्थानीय लोगों ने उन हमलावरों को पहले नहीं देखा था और उनके बाहरी होने का शक जताया जा रहा है। भीड़ ने लगभग एक घंटे तक पत्थरबाजी की। इस दौरान गली में खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुँचा है। फेंके गए पत्थर पार्क और गलियों में बिखरे हुए हैं। मौके पर अभी भी भारी पुलिस बल तैनात है। लोगों की आवाजाही पर रोक नहीं है।

कुणाल कामरा ने PM मोदी के सामने गाने वाले बच्चे की वीडियो से की छेड़छाड़, पिता ने लताड़ा, कहा- ‘मिस्टर कचरा! अपनी गंदी राजनीति से मेरे बेटे को दूर रखो’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के आगमन पर जर्मनी के बर्लिन में देशभक्ति गीत गाने वाले भारतीय मूल के बच्चे का मजाक उड़ाने वाले विवादित गालीबाज स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) एक बार फिर चर्चा में हैं। सात वर्षीय भारतीय मूल के बच्चे के पिता गणेश पाल ने कुणाल कामरा को उनके बेटे के वीडियो का मजाक बनाने पर लताड़ा है।

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस बच्चे की तारीफ की थी, वामपंथी ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा ने उस बच्चे की बुधवार (4 मई 2022) को ट्विटर पर मॉर्फ्ड वीडियो पोस्ट की। सुर्खियों में बने रहने के लिए हर बार की तरह इस बार भी उसने अपनी ओछी मानसिकता का परिचय देते हुए पीएम मोदी पर तंज कसने के लिए मासूम बच्चे का सहारा लिया।

उसने यह नफरत भरा ट्वीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जर्मनी पहुँचने और उनके द्वारा बर्लिन में देशभक्ति हिंदी गीत गाने वाले भारतीय मूल के बच्चे की प्रशंसा करने के बाद किया था।

कामरा ने बच्चे के देशभक्ति गीत ‘भारत हम तेरी आराधना करेंगे, तेरी अर्चना करेंगे, भारत हम तेरी वंदना करेंगे’ का मजाक उड़ाते हुए इसे संपादित किया है। उसके द्वारा पोस्ट किए वीडियो में अनुषा रिज्वी और महमूद फारुखी के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म ‘पिपली लाइव’ का गाना ‘महँगाई डायन खाय जात है’ बज रहा है। लड़के के पिता गणेश पॉल ने कामरा के घटिया ट्वीट के लिए उसे जमकर लताड़ा। यही नहीं उन्होंने कथित कॉमेडियन को उसकी असंवेदनशीलता और गंदी राजनीति करने के लिए मासूम बच्चे का सहारा लेने पर खरी खोटी भी सुनाई। सात साल के बच्चे के पिता ने कहा कि उनका बेटा अपनी मातृभूमि से प्यार करता है। इसलिए उसने यह गाना गाया। हालाँकि, वह अभी बहुत छोटा है, लेकिन कामरा से ज्यादा अपने देश से प्यार करता है।

गणेश पॉल ने ट्वीट किया, “वह मेरा 7 साल का बेटा है, जो अपनी प्यारी मातृभूमि के लिए यह गीत गाना चाहता था। हालाँकि, वह अभी भी बहुत छोटा है, लेकिन अपने देश को आपसे ज्यादा प्यार करता है मिस्टर कामरा या कचरा, आप चाहे जो भी हों, मासूम बच्चे को अपनी गंदी राजनीति से दूर रखें और अपने घटिया जोक्स को बेहतर बनाने पर काम करें।”

यह ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में कॉमेडियन का ढोंग करने वाले प्रोपेगेंडानिस्ट कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने अपने नए YouTube वीडियो ‘बी लाइक’ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ अवमानना चल रहे केस को लेकर कामरा ने कहा था, “प्रिय सुप्रीम कोर्ट! कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा।”

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले कामरा ने कहा था कि उनके मन में शीर्ष न्यायालय से अधिक सम्मान शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट के लिए है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ‘ब्राह्मण बनिया’ का मामला है और यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सोमवार (2 मई 2022) को तीन दिवसीय विदेश दौरे के तहत जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुँचे थे। बर्लिन में भारतीय लोगों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया था। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में भारतीय मूल का एक बच्चा देशभक्ति गीत ‘भारत हम तेरी आराधना करेंगे, तेरी अर्चना करेंगे, भारत हम तेरी वंदना करेंगे’ गाता हुआ नजर आया था। वहीं पीएम मोदी भी बच्चे के साथ गीत गुनगुनाते हुए दिख रहे थे। उन्होंने इस गीत के लिए बच्चे की तारीफ भी की थी।

मेरे चारों ओर खून ही खून था, मैं मरना नहीं चाहती थी: मलाइका अरोड़ा ने बताई उस खौफनाक रात की कहानी, कहा- ये निशान याद दिलाते हैं मेरे साथ क्या हुआ

बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) ऐक्सीडेंट के बाद काम पर वापसी कर चुकी हैं। 2 अप्रैल को वह एक कार हादसे की शिकार हो गई थीं। इस दौरान उन्हें काफी चोटें आई थी। इस एक्सीडेंट को लेकर मलाइका के मन में बैठे दहशत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि भले ही उनके जख्म भर गए हों और वह काम पर लौट आई हों, लेकिन आज भी वह कार में बैठने से डरती हैं। उन्हें लगता है कि कार सुरक्षित नहीं है।

बॉलीवुड टाइम्स को दिए इंटरव्यू के दौरान मलाइका अरोड़ा ने बताया कि इस कार एक्सीडेंट के बाद उनकी जिंदगी में कितना बदलाव आया। उन्होंने यह भी बताया कि बेहोशी की हालत में वह किन दो लोगों का नाम ले रही थीं और ईश्वर से क्या प्रार्थना कर रही थीं। इसके साथ-साथ उन्होंने अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) से अपने रिश्ते पर भी बात की है।

मलाइका अरोड़ा ने खुलासा किया कि एक्सीडेंट में घायल होने के बाद वह बेहोशी की हालत में अपनी माँ और बेटे अरहान के बारे में पूछ रही थी और बार-बार शूटिंग सेट पर जाने के बारे में बड़बड़ा रही थी। मलाइका अरोड़ा ने हादसे की रात की पूरी कहानी बताते हुए कहा, “वह भयानक रात मुझे याद है। मेरे चारों ओर खून ही खून था। मेरा परिवार, अर्जुन कपूर और सभी लोग घबरा गए थे। लगभग एक हफ्ते के बाद आखिरकार मैंने खुद को आईने में देखा। मेरे माथे पर वहीं निशान था, जहाँ मुझे चोट लगी थी। यह मुझे याद दिलाता है कि मेरे साथ क्या हुआ था।”

मलाइका ने आगे कहा, “यह निशान मुझे हमेशा याद दिलाएगा कि उस रात क्या हुआ था। लेकिन यह मुझे जिंदगी जीने से कभी नहीं रोक सकता। हादसे की रात वाला वो पल मुझे ठीक से याद है, जिसमें मैं सिर्फ दो चीजों के लिए प्रार्थना कर रही थी- पहली बात कि मैं उस रात मरना नहीं चाहती थी और दूसरी बात मैं अपनी आँखों की रोशनी नहीं खोना चाहती थी।” अपनी चोट के बारे में बात करते हुए मलाइका ने कहा, “शुरुआत में, मुझे चोट के बारें कोई अंदाजा नहीं था, क्योंकि मैं शॉक्ड और सदमे थी। मुझे कुछ क्लियर नहीं दिख रहा था। मैं बस ये महसूस कर पा रही थी कि मेरे चारों तरफ काँच के टुकड़े बिखरे हैं और कुछ छोटे-छोटे टुकड़े मेरी आँखों में चले गए थे।”

इंटरव्यू के दौरान जब मलाइका से अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर रिलेशनशिप में उसे अगले लेवल तक ले जाने का प्लान होता है। अर्जुन के साथ रिलेशनशिप में वह काफी खुश और पॉजिटिव हैं और यह आत्मविश्वास उन्हें अर्जुन से मिलता है। उन्होंने कहा, “हम वाकई में एक-दूसरे के हैं। हम मैच्योर अवस्था में हैं जहाँ अभी और तलाश के लिए जगह है, लेकिन हम भविष्य को एक साथ देखना चाहते हैं। हम इसके बारे में हँसी-मजाक करते हैं, लेकिन हम बेहद गंभीर भी हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें (अर्जु-मलाइका) एक साथ सभी कार्ड खोलने चाहिए। मैं हमेशा उससे कहती हूँ कि मैं तुम्हारे साथ आगे बढ़ना चाहती हूँ। हम बाकी का पता लगा लेंगे। बाकी चीजें आगे समझ आ जाएँगी लेकिन मुझे पता है कि वह मेरा है।”

बता दें कि मलाइका की कार का 2 अप्रैल को मुंबई-पुणे हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था। जब ये सड़क हादसा हुआ था, तब मलाइका पुणे से लौट रही थीं। गुड़ी पड़वा के अवसर पर ज्यादा ट्रैफिक की वजह से एक्सीडेंट हुआ था।

इस्लाम छोड़ने पर जान के पीछे पड़े रिश्तेदार: केरल के अस्कर अली ने कहा- बातचीत के लिए बुलाकर अपहरण करने की कोशिश की, पुलिस ने जान बचाई

हाल ही में इस्लाम छोड़ने वाले केरल (Kerala) के अस्कर अली (Askar Ali) ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदार अब उन्हें परेशान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 मई को एसेन्स ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करने से पहले उनके रिश्तेदारों ने उनका अपहरण करने की भी कोशिश की।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस को उन्होंने बताया, “पारिवारिक मामलों पर बात करने के बहाने दो रिश्तेदार मेरे पास आए और सुबह मुझे बीच पर ले गए। बाद में वहाँ कार से दो अन्य लोग भी आए। मेरे रिश्तेदारों ने उनकी मदद से मुझे जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश की। एक व्यक्ति ने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया। मैं चिल्लाने लगा। मेरी चीख सुनकर मौके पर पहुँचे लोगों ने पुलिस को फोन कर दिया।”

अस्कर अली फिलहाल अपने दोस्त के यहाँ रह रहे हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसकी वजह से उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस्लाम का विस्तार से अध्ययन करने के बाद इस मजहब को छोड़ दिया। जब मैं (हुदावी) कोर्स कर रहा था तो इस्लाम से संबंधित सामग्री के अलावा अन्य सामग्री को पढ़ने का अवसर काफी कम था। लॉकडाउन के दौरान मुझे अन्य विषयों को पढ़ने को मिला, जिससे मेरी आँखें खुल गईं।” अस्कर ने कहा कि जो लोग धर्म छोड़ते हैं उन्हें उनके परिवार के सदस्य नीच प्राणी के रूप में देखते हैं।

इससे पहले बुधवार (4 मई 2022) को रिपोर्ट में बताया गया कि 24 वर्षीय अस्कर पर इस्लाम छोड़ने पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला कर दिया था। उन्होंने कोल्लम पुलिस में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया है। अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके इस्लाम छोड़ने के बाद भीड़ ने उन पर हमला किया। इसके अलावा इस्लाम छोड़ने की वजह से उन्हें समुदाय के लोगों की तरफ से दी जाने वाली धमकियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

मलप्पुरम के रहने वाले अस्कर अली ने मलप्पुरम की एक प्रमुख मजहबी एकेडमी से 12 साल का हुदावी धार्मिक कार्यक्रम पूरा किया है। वह रविवार (1 मई, 2022) को ‘वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद और समाज में सुधार की भावना’ को बढ़ावा देने वाले संगठन ‘एसेंस ग्लोबल’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस्लामी अध्ययन के छात्र के रूप में अपने अनुभव को साझा करने के लिए कोल्लम गए थे।

अली ने अपनी शिकायत में कहा कि मलप्पुरम में लोगों के एक समूह ने उनका अपहरण करने की कोशिश की, ताकि वह उस कार्यक्रम को संबोधित न कर सकें। अली ने बताया, “वे मुझे कोल्लम समुद्र तट पर ले गए, जहाँ मेरे साथ मारपीट की गई। उन्होंने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए। वे मुझे जबरन एक वाहन में ले गए और मुझे अंदर बंद करने की कोशिश की। जब स्थानीय लोगों ने शोर मचाया तो पुलिस ने मुझे बचा लिया।” बाद में अली को पुलिस ने छोड़ दिया। इसके बाद अली ने पुलिस की मौजूदगी में सभा को संबोधित किया।

इस्लाम में मजहब छोड़ने की सजा मौत

इस्लाम में मजहब छोड़ने पर मौत की सजा है। साल 2014 में आठ मुस्लिम बहुल देशों में एक मुस्लिम द्वारा इस्लाम के त्याग करने की सजा मृत्युदंड थी। जानकारी के मुताबिक, तेरह देशों में इस्लाम छोड़ने पर कई तरह की सजा दी जाती थी। इसके तहत उन्हें जेल में डाल दिया जाता है या जुर्माना लगाया जाता है। इतना ही नहीं, इसके तहत उनके बच्चे की कस्टडी भी छीन ली जाती है। कुछ दशक पहले, अधिकांश शिया और सुन्नी कानूनविदों का मानना ​​था कि इस्लाम छोड़ना अपराध के साथ-साथ पाप भी है।

गले में तख्ती और कान पकड़कर मुजफ्फरनगर थाने पहुँचे गौ-तस्कर नईम और नसीम, हिस्ट्रीशीटर भाइयों ने किया अपराध से तौबा

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के शासन में हिस्ट्रीशीटर और अपराधियों का पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का सिलसिला जारी है। ताजा मामला मुजफ्फरनगर का है, जहाँ दो अपराधी गले में तख्ती डाल, कान पकड़कर पुलिस स्टेशन पहुँचे और आगे से अपराध नहीं करने की बात कही।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने बताया कि दोनों अपराधी गौ तस्करी और गौहत्या के मामलों में भी आरोपित थे। आरोपितों का नाम नईम और नसीम है। नईम (हिस्ट्रीशीटर 26ए) और नसीम (हिस्ट्रीशीटर 27ए) दोनों भाई हैं। इनके पिता का नाम नसीर है। ये दोनों मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बसी कलां गाँव में रहते हैं। वे पहचान पत्र लेकर शाहपुर थाने पहुँचे। दोनों हिस्ट्रीशीटर पर गायों की हत्या का आरोप है। थाना प्रभारी के सामने दोनों ने दोबारा कोई अपराध न करने और आगे अपराध मुक्त शांतिपूर्ण जीवन बिताने की शपथ ली।

नईम शाहपुर थाना क्षेत्र के टॉप टेन अपराधियों में से एक है। इन दोनों के खिलाफ गोहत्या और गैंगस्टर एक्ट के तहत कुल 18 मामले दर्ज हैं। मुठभेड़ के डर से बदमाश गले में तख्तियाँ लटकाए शाहपुर थाने पहुँचे और SHO राधेश्याम यादव के सामने भविष्य में अपराध नहीं करने की शपथ ली। अपराधबोध की बात कहते हुए दोनों भाइयों ने थाना परिसर के अंदर आत्मसमर्पण कर दिया और भविष्य में अपराधों से दूर रहने का वादा किया।

SP (मुजफ्फरनगर-ग्रामीण) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “दो हिस्ट्रीशीटरों ने शाहपुर थाना प्रभारी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें से एक शाहपुर थाने के टॉप टेन अपराधियों में शामिल है। इन दोनों पर गोहत्या का आरोप है। उन्होंने भविष्य में कोई अपराध नहीं करने की बात स्वीकार की। उन दोनों ने स्वीकार किया कि वे नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे।”

योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में भी सरेंडर का सिलसिला जारी

10 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सत्ता में लौटने के 15 दिनों के भीतर कम से कम 50 अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि कई अपराधी अपने वादों की घोषणा करने वाले संदेश के साथ तख्तियाँ लेकर थानों में आए थे। पुलिस कार्रवाई के डर और अवैध संपत्तियों को लेकर चल रहे बुलडोजर ने राज्य में कई अपराधियों को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया है।

देखिए वह सुरंग जिससे भारत में घुसे थे जैश के 2 आत्मघाती हमलावर, सांबा में मिला: 1.5 साल में बॉर्डर पर मिला 5वाँ अंडरग्राउंड टनल

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के बीओपी चक फकीरा क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बुधवार (4 मई 2022) की रात एक भूमिगत सुरंग का पता लगाया। इस सुरंग का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के दो आत्मघाती हमलावरों ने पाकिस्तान से भारत में घुसने के लिए किया था। सीमा सुरक्षा बल के अनुसार हाल ही में इस सुरंग को 2 फीट खोदा गया है। आशंका जताई जा रही है कि यह पाकिस्तान की ओर से लगभग 150 मीटर लंबी है।

सुरंग की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए बीएसएफ जम्मू ने ट्वीट कर कहा है, “आज बीएसएफ जम्मू के सतर्क सैनिकों ने सांबा अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के साथ एक सुरंग का पता लगाकर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया।”

इस सुरंग से 21 रेत के बोरे भी बरामद हुए हैं। इनका इस्तेमाल सुरंग मजबूत करने के लिए किया गया था। बीएसएफ के मुताबिक डेढ़ साल से भी कम समय में पता लगाई गई यह 5वीं सुरंग है।

गौरतलब है कि जम्मू के सुंजवां इलाके में 22 अप्रैल को मुठभेड़ के बाद बीएसएफ ने इस सुरंग का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया था। 22 अप्रैल को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों को ले जा रही एक बस पर भारी हथियारों से लैस आत्मघाती आतंकियों ने हमला किया था। जैश के इन आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया गया था। मुठभेड़ में सीआईएसएफ के एक सहायक उप निरीक्षक भी बलिदान हो गए थे। साथ ही दो पुलिसकर्मियों समेत नौ सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 मीटर की दूरी पर और सीमा की बाड़ से 50 मीटर की दूरी पर एक नई खोदी गई सुरंग का पता पाकिस्तानी चौकी चमन खुर्द (फियाज) के सामने लगाया गया, जो भारत की ओर से 900 मीटर की दूरी पर है।” उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत सीमा चौकी चक फकीरा से लगभग 300 मीटर और अंतिम भारतीय गाँव से 700 मीटर की दूरी पर है।

ससुराल से नहीं आई ईदी तो सोहेल ने बीवी हसीना को लगाई आग, खुद भी झुलसा: भांजे ने बाहर से लगा दी थी कुंडी, दिल्ली की घटना

दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में एक शौहर ने अपनी बीवी को आग लगा दी। वह ईद पर ससुराल से ईदी नहीं आने की वजह से नाराज था। बताया जा रहा है कि आग लगाने के लिए आरोपित ने थिनर का प्रयोग किया है। इस दौरान आरोपित खुद भी आग की चपेट में आ कर झुलस गया है। मियाँ-बीवी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। आरोपित शौहर का नाम सोहेल और पीड़िता बीवी का नाम हसीना है। घटना 1 मई 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों का निकाह 28 अक्तूबर 2021 को हुआ था। दोनों आनंद पर्वत के बस्ती तालीवालान क्षेत्र में रहते हैं। हसीना की चीख सुन कर पड़ोसियों ने आग बुझाई थी। बाद में दोनों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया। पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने शौहर पर केस दर्ज किया है।

पीड़िता के मुताबिक, “निकाह के बाद पहली ईद पर मेरे घर से मेरे शौहर के घर ईदी आई थी। मेरे भाई ने इस बार की ईदी नहीं भेजी और अगली बार भेजने के लिए कहा। इस बार मेरे भाई ने पैसे भेजने को कहा। इसी बात पर मेरे शौहर सोहेल मुझसे झगड़ने लगे। उन्होंने मुझे पीटा और फिर थिनर उड़ेल कर आग लगा दी।” पीड़िता की उम्र 22 वर्ष बताई जा रही है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता का आरोप है कि हमले में उसकी ननद के लड़के ने भी मदद की है। उस पर घटना के दौरान घर कुंडी बाहर से बंद कर देने का आरोप है। इस घटना के चलते हसीना का शरीर 15 प्रतिशत जल चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटना के दिन ही पीड़िता का बयान लेना चाह रहे थे, लेकिन हालत ठीक न होने के चलते उन्हें इंतज़ार करना पड़ा।

जिस संभाजी भिड़े को शरद पवार ने बताया था भीमा कोरेगाँव का विलेन, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला: पुलिस ने बताया- केस से हटा दिया है नाम

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। लिबरल और वामपंथी नेक्सस इसके लिए संभाजी भिड़े को जिम्मेदार बताता रहा है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी उन पर हिंसा का माहौल तैयार करने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन पुणे पुलिस को इस मामले में संभाजी भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बुधवार (4 मई 2022) को महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया है कि हिंसा में संभाजी भिड़े की कोई भूमिका नहीं पाई गई है और उनका नाम मामले से हटा दिया गया है।

भीमा कोरेगाँव हिंसा के एक दिन बाद कथित दलित राजनीतिक कार्यकर्ता अनीता सावले ने हिंदुत्ववादी नेताओं संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई थी। इस हिंसा में एक की जान चली गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। पिंपरी-चिंचवड़ की रहने वाली सावले राजनीतिक संगठन बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी की नेता भी हैं।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एकबोटे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई और इधर पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया। हालाँकि सबूतों के अभाव में पुलिस संभाजी भिड़े को कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई।

इस बीच, मुंबई के एक वकील आदित्य मिश्रा ने एक साल पहले MSHRC के समक्ष एक शिकायत दर्ज की, जिसमें 28 मार्च, 2018 की एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र था। इसमें महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान का जिक्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस के पास भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। .

मिश्रा ने शिकायत में कहा, “क्या कोई XYZ को बिना किसी सबूत के किसी को अफवाहों के आधार पर आरोपित के रूप में फँसा सकता है?” उन्होंने आगे अनुरोध किया कि भिड़े के खिलाफ मामले में पुलिस से स्थिति रिपोर्ट माँगी जाए। मिश्रा ने आयोग से न्याय के हित में कानून के अनुसार आवश्यक निर्देश की माँग करते हुए कहा था, “भिड़े गुरुजी के सिर पर कब तक FIR की तलवार लटकी रहेगी।”

MSHRC ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधिकारियों को तलब कर भिड़े के खिलाफ मामले में स्थिति रिपोर्ट माँगी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान MSHRC के समक्ष एक रिपोर्ट पेश किया गया। इस पर 3 मई, 2022 की तारीख थी और पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अभिनव देशमुख का सिग्नेचर था। रिपोर्ट के मुताबिक भिड़े के खिलाफ अनीता सावले द्वारा दर्ज मामले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए, भिड़े का नाम हटा दिया गया है, जबकि शेष 41 आरोपितों के खिलाफ धारा 307, 143, 147, 148, 149, 295 (ए), 435, 439, 153 (ए), 120 (बी) के तहत चार्जशीट दायर किया गया है।

वकील मिश्रा ने कहा, “पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि भिड़े का नाम मामले से हटा दिया गया है। MSHRC ने पुलिस को शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान को मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मामले की अंतिम सुनवाई 4 जुलाई, 2022 को होगी।”

कौन हैं संभाजी भिड़े?

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है। वे महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। सांगली में उन्हें हर कोई ‘गुरुजी’ के नाम से जानता है। भिड़े ने पुणे विश्वविद्यालय से अटॉमिक साइंस में एमएससी की है। वह पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुके हैं। वे बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं, जो सांगली में आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता रहे हैं। 1980 के दशक में संभाजी भी RSS से जुड़े हुए थे और संगठन के लिए उन्होंने काफी काम भी किया। 1980 के दशक में उन्होंने RSS छोड़ा और ‘शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ नाम का संगठन बनाया। 

इस संगठन की शुरुआत 1984 में हुई। जिस तरह के काम RSS करता है, ठीक वैसा ही काम शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन भी करता है। उनकी संस्था का मुख्य काम शिवाजी महाराज के बारे में लोगों को बताना है। संभाजी ने रायगढ़ किले में छत्रपति शिवाजी के लिए सोने का सिंहासन बनाने का प्रण लिया है, जिसके लिए कम से कम 144 किलो सोने का इस्तेमाल होगा। संभाजी नंगे पैर चलते हैं। साइकल से चलना पसंद करते हैं। 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उनके नाम की तब बहुत चर्चा हुई थी जब प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान उनसे मुलाक़ात की थी और मंच से उन्हें ‘गुरुजी’ कहा था। उन्होंने मंच से कहा था, “भिड़े गुरुजी ने मुझे आमंत्रित नहीं किया, मैं यहाँ उनके आदेश से आया हूँ।”