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अरब सागर में गुजरात ATS ने पकड़ी पाकिस्तानी बोट, ₹280 करोड़ की हेरोइन लदी थी: पंजाब में अफगानिस्तान से आई ₹700 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी गई

अरब सागर में गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) और इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) ने एक पाकिस्तानी बोट पकड़ी है। ‘अल हज’ नामक इस बोट पर 280 करोड़ रुपए की हेरोइन लदी थी। ड्रग्स के साथ नौ लोगों को भी पकड़ा गया है। वहीं पंजाब के अमृतसर में भी अफगानिस्तान से मुलेठी की खेप में छिपाकर लाई गई हेरोइन जब्त की गई है।

पाकिस्तानी बोट अरब सागर की भारतीय सीमा में पकड़ी गई है। आगे की जाँच के लिए बोट को जखाऊ (Jakhau) ले जाया जा रहा है। इंडियन कोस्ट गार्ड के अनुसार पाकिस्तानी बोट ‘अल हज’ रविवार (24 अप्रैल 2022) देर रात भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर गई। जानकारी मिलने के बाद गुजरात एटीएस और इंडिया कोस्ट गार्ड की टीम मौके पर पहुँची। उन्हें देखकर पाकिस्तानी बोट पर सवार क्रू मेंबर नार्कोटिक्स के पैकेट्स को पानी में फेंककर भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।

कोस्ट गार्ड ने बताया है कि पाकिस्तानी बोट को पकड़ने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी। इस दौरान बोट में सवार कुछ तस्करों को चोटें भी आई।

अमृतसर में भी पकड़ी गई है ड्रग्स की बड़ी खेप

अमृतसर में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने अफगानिस्तान से आई लगभग 102 किलोग्राम ड्रग्स की खेप जब्त की है जिसकी अनुमानित कीमत 700 करोड़ रुपए है। यह मामला अटारी बॉर्डर का है। अधिकारियों ने बताया कि NDPS के तहत कार्रवाई की जा रही है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जब सीमा पर सामानों की जाँच के दौरान कुछ लकड़ी के लट्ठों पर ड्यूटी अधिकारी ने धब्बे देखे तो उनको शक हुआ। इसके बाद सीमा शुल्क अधिकारियों ने अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में बैग खोला तो वे भौंचक रह गए।

सीमा शुल्क अधिकारियों ने ने देखा कि कुछ छोटे बेलनाकार लकड़ी के लट्ठे थे। इन्हीं में सुराख कर हेरोइन रखी गई थी। यह अब तक अटारी से दूसरी सबसे बड़ी बरामदगी है। इससे पहले 2019 में 584 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई थी।

‘जेल में हनुमान चालीसा पढ़ें राणा दंपति’: संजय राउत का तंज, सर्वदलीय बैठक में नहीं जाएँगे राज ठाकरे, PM आवास के बाहर बैठना चाहती हैं NCP नेता

महाराष्ट्र में मस्जिदों में लाउडस्पीकर से होने वाले अजान के खिलाफ चल रहे विवाद गहराता ही जा रहा है। राज्य में ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)’ के संस्थापक राज ठाकरे ने ऐलान किया था कि उनके कार्यकर्ता लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे। इसके बाद हिन्दुओं की धर-पकड़ शुरू हो गई। अमरावती से सांसद पूर्व अभिनेत्री नवनीत कौर राणा और उनके पति बडनेरा से विधायक रवि राणा को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निवास ‘मातोश्री’ के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने का निर्णय लिया था।

अब लाउडस्पीकर विवाद को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र की MVA (महा विकास अघाड़ी) सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हालाँकि, राज ठाकरे की तरफ से साफ़ कर दिया गया है कि वो इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। MNS की तरफ से इस बैठक में संदीप देशपांडे, बाला नंदगाँवकर और नितिन सरदेसाई बैठक में उपस्थित रहेंगे। लाउडस्पीकर विवाद के बीच कानून-व्यवस्था की बात करने के लिए ये बैठक राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता दिलीप वलसे ने बुलाई है।

राज ठाकरे ने मुस्लिमों से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का आग्रह करते हुए समझाया था कि मजहब देश और कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा था कि हम दंगे नहीं चाहते, नमाज के खिलाफ भी नहीं हैं, लेकिन देश की सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाने चाहिए। उन्होंने लाउडस्पीकर के जवाब में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की चेतावनी भी दी थी। दबाव में आकर उद्धव ठाकरे की सरकार ने लाउडस्पीकर को लेकर अदालत के आदेश के पालन की बात कही और इसके इस्तेमाल के लिए प्रशासनिक अनुमति को अनिवार्य कर दिया।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस भी हिस्सा नहीं लेंगे। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस बैठक में नहीं रहेंगे। उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। वहीं राणा दंपति को लेकर शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ ने लिखा है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए। जहाँ नवनीत राणा को बाइकुला जेल में रखा गया है, उनके पति रवि राणा नवीं मुंबई के तलोजा जेल में हैं।

शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे राज्य को अस्थिर करने की साजिश बताते हुए तंज कसा कि अब राणा दंपति जेल में ही हनुमान चालीसा पढ़ें। इस कार्रवाई के खिलाफ नवनीत कौर और रवि राणा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में माँग की है कि उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द किए जाएँ। दोनों 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं। राणा दंपति के घर के बाहर उपद्रव करने वाले 16 शिवसेना कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब खार थाने की पुलिस ने उन सभी को छोड़ दिया है।

उधर NCP की नेता फहमीदा हसन खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हनुमान चालीसा और अजान पढ़ने की अनुमति के लिए अमित शाह को पत्र लिखा है। मुंबई उत्तर में पार्टी की जिला कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि वो पीएम आवास के बाहर नमाज, हनुमान चालीसा, नवकार मंत्र, गुरु ग्रन्थ साहिब और नोविनो (ईसाई प्रार्थना) पढ़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अगर हिंदुत्व और जैन धर्म से देश में बेरोजगारी, भूखमरी और महँगाई घटती है तो वो ख़ुशी से ऐसा करेंगी।

गुजरात: सूरत के हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर बने ‘दरगाह’ के आसपास का अवैध ढाँचा गिराया गया

गुजरात के सूरत के चौक बाजार इलाके में हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर एक दरगाह/मजार के आसपास बने अवैध ढाँचे को अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों अधिकारियों को अतिक्रमण के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद इस पर कार्रवाई करते हुए बीते बुधवार (20 अप्रैल 2022) को अवैध ढाँचे को गिरा दिया गया।

ऑपइंडिया ने रविवार (24 अप्रैल) को बताया था कि चौक बाजार में सूरत हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की इमारत में ‘मजार’ के आसपास एक अवैध ढाँचा खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि मकबरा कुछ वर्षों से बना हुआ है, लेकिन आसपास का निर्माण हाल ही में किया गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में नए सीमेंट के काम के साथ नए पत्थरों को देखा जा सकता है। इसमें वीडियो लेने वाले व्यक्ति ने कहा कि दरगाह के चारों ओर निर्माण रातोंरात हुआ था। शख्स ने बताया कि एक दिन पहले तक वहाँ पर यह निर्माण नहीं था। वीडियो में दिख रहे शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ”आज यहाँ कब्जा हुआ है, कल आपके घरों पर कब्जा होगा, तो सोच लीजिए क्या करना है।” उन्होंने बताया कि गैबन शाह वालिद की ‘दरगाह’ बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, जब पुलिस से दरगाह के ब्योरे के लिए संपर्क किया गया तो भूस्वामी की तलाश शुरू हुई। पुलिस ने कहा कि स्वामित्व के रिकॉर्ड से पता चलता है कि जमीन तीन पक्षों की है। एक पक्ष सूरत नगर निगम है, एक पक्ष राज्य सरकार है और एक निजी पार्टी है। निजी मालिक कौन है, इसकी जाँच करने पर सूरत पुलिस के अधिकारी ने कहा कि यह 5-6 ट्रस्टियों वाला एक ट्रस्ट है। पुलिस ने कहा कि वे जमीन के मालिक के बारे में अधिक जानकारी के लिए सर्वेक्षण कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक घनीभाई देसाई, गोरधनभाई चोखावाला, यशवंतभाई शुक्ला, ईश्वरलाल देसाई, चुन्नीभाई भट्ट इसके ट्रस्टी हैं और आंशिक रूप से जमीन के मालिक हैं। मूल रूप से हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की जमीन के तीन अलग-अलग मालिक हैं। इसका एक हिस्सा सूरत नगर निगम के पास है, कुछ हिस्सा गुजरात सरकार के पास है और कुछ हिस्सा ऊपर बताए गए ट्रस्ट के पास है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दरगाह पर राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा किया है या नहीं।

रोहिंग्या को बसाने के लिए NGO को ऋतिक रौशन ने दिए ₹100000? खरगोन, जहाँगीरपुरी में पुनर्वास की तैयारी, कैंपेन से इकट्ठा हुए ₹1 करोड़

हिंदुओं की शोभा यात्रा पर हमले के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में जो बुलडोजर से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई उसके बाद अब सोशल मीडिया पर Miles2Smile फाउंडेशन द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उन लोगों के लिए मदद माँगी जा रही है जिनके घरों-दुकानों पर प्रशासन ने बुलडोजर से कार्रवाई की।

इस कैंपेन के लिंक को तमाम वामपंथियों-कट्टरपंथियों द्वारा शेयर किया जा रहा है और तमाम लोग बढ़-चढ़ कर इसमें दान दे रहे हैं। इसी बीच एक चौंकाने वाला नाम भी डोनर्स की लिस्ट में सामने आया है। ये नाम ऋतिक रौशन का है। अमीना कौसर नाम की भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम महिला ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ऋतिक रौशन ने खरगोन, जहाँगीरपुरी जैसे इलाकों में बुलडोजर चलने से बेघर हुए ‘पीड़ितों’ का जीवन दोबारा से शुरू करवाने के लिए 1,00,000 रुपए की मदद की है।

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अमीना ने लिखा, “आज के समय में जब कोई कलाकार मुस्लिमों के साथ खड़ा नहीं होना चाहता। शुक्रिया आपका कि आपने इस काम के लिए दान दिया और शुरुआत करके दूसरे एक्टर्स के सामने उदाहरण सेट किया।” अपने ट्वीट के साथ अमीना ने कीटो पर शुरू किए गए अभियान का स्क्रीनशॉट साझा किया है जिसके साथ देख सकते हैं कि कैसे उस पर टॉप डोनर्स में ऋतिक रौशन का नाम लिखा आ रहा है और राशि में 1 लाख रुपए लिखा है। इस अभियान से जमा हुई कुल राशि 91लाख 74 हजार रुपए दिखाई गई है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर अमीना का दावा कितना सही और कितना गलत है इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। लेकिन अमीना के ही ट्वीट पर देख सकते हैं कि एक सबा नाम की यूजर ने अमीना से दोबारा पूछा कि क्या वो कन्फर्म हैं ये वहीं ऋतिक रौशन हैं? इस पर अमीना ने दोबारा लिखा कि वो कन्फर्म हैं कि ये बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रौशन ही हैं।

Miles 2 Smile Foundation और रोहिंग्या कनेक्शन

गौरतलब है कि कीटो प्लेटफॉर्म पर शुरू अभियान के शीर्षक पर खरगोन और जहाँगीरपुरी जैसे इलाकों के नाम हैं। अभियान का उद्देश्य उन लोगों के लिए पैसे जुटाना है जिनकी घर या दुकानों पर बुलडोजर चला। Miles2SmileFoundation द्वारा चलाए जा रहे अभियान को लगभग 4 हजार लोगों का समर्थन मिला है और इनके जरिए 1 करोड़ से ज्यादा की धनराशि इकट्ठा कर ली गई है।

इस पूरे अभियान की दिलचस्प बात ये है कि जो संस्था इसे संचालित कर रही है उसका रोहिंग्याओं से खासा लगाव है। इससे पहले उन्होंने देश में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के लिए फंड एकत्रित किया था। इतना ही नहीं इन्होंने हरियाणा के नूँह में लर्निंग सेंटर खोला था और वहीं पर रोहिंग्याओं को छत देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा रोहिंग्या छात्रों को गणित विज्ञान पढ़ाने के साथ कुरान की शिक्षा देने के लिए भी इंतजाम किया गया था।

‘मैं 6 साल का था, 5 साल तक ये चलता रहा’: रिश्तेदार भी करते थे मुनव्वर फारूकी का यौन शोषण, कंगना ने भी बताया अपना अनुभव

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चल रहा एकता कपूर का रिएलिटी शो लॉकअप (LockUpp) इन दिनों चर्चा में है। अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इसे होस्ट कर रही हैं। इस शो के प्रतिभागियों में हिंदूफोबिक कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) भी शामिल है। शो के दौरान फारूकी के कई सीक्रेट सामने आए हैं। मसलन, उसकी खुद की शादी और उसकी अम्मी के साथ घरेलू हिंसा को लेकर। अब फारूकी ने जो कुछ शेयर किया है उससे पता चला है कि बचपन में उसका यौन शोषण भी हुआ था। ऐसा करने वालों में उसके दो रिश्तेदार भी शामिल थे।

इस खुलासे का एक टीज़र वीडियो ऑल्ट बालाजी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। दरअसल शो में अंजलि अरोड़ा, सायशा शिंदे, आदमा फलाह और मुनव्वर फारूकी को खुद को शो से बाहर होने से बचाने के लिए अपना सीक्रेट बताने का मौका दिया गया था। आम तौर पर सबसे पहले जो कंटेस्टेंट बजर बजाता है, उसे अपना सीक्रेट बताने का मौका दिया जाता है, लेकिन इस बार कंगना सीक्रेट शेयर करने के टास्क में नया ट्विस्ट लेकर आईं। सायशा शिंदे ने सबसे पहले बजर बजाया था, लेकिन कंगना ने उन्हें बताया कि इस बार उन्हें अपना कोई सीक्रेट नहीं बताना है, बल्कि उनके दोस्तों में से किसी एक को अपना सीक्रेट बताते हुए उन्हें बचाना होगा।

सबसे पहले सायशा अंजलि अरोड़ा के पास गईं। मगर उन्होंने अपना सीक्रेट शेयर करने से मना कर दिया। अंजलि के बाद आजमा ने भी सायशा के लिए अपना सीक्रेट शेयर करने से मना कर दिया। लेकिन मुनव्वर ने सायशा का साथ देने का फैसला किया और उन्होंने अपना सीक्रेट सबके साथ शेयर किया। मुनव्वर का सीक्रेट यौन शोषण से जुड़ा हुआ था। उनकी बातें सुनकर सभी की आँखें नम हो गईं।

मुनव्वर ने कहा, “जब मैं 6 या 7 साल का था, तब से 11 साल का होने तक मेरा यौन शोषण हो रहा था। इसमें मेरे परिवार के दो रिश्तेदार भी शामिल थे। आपको उस वक्त समझ में नहीं आता है। मुझे भी शुरुआत में बिलकुल समझ में नहीं आया था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। यह लगभग 4-5 सालों तक चलता रहा। जब यह बहुत ज्यादा हो गया तब उनलोगों को इस बात का एहसास हुआ कि उन्हें यह हरकत बंद कर देनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इसे कभी किसी के साथ साझा नहीं किया क्योंकि मुझे उनका सामना करना पड़ता और उन्हें भी परिवार का सामना करना पड़ता। मुझे एक बार लगा कि मेरे पिताजी को इसके बारे में पता चल गया है। उन्होंने मुझे बहुत डाँटा। शायद उन्हें भी मेरी तरह ऐसा ही लगा था कि यह बातें सबके सामने नहीं आनी चाहिए।”

फारूकी के इस अनुभव को शेयर करने के बाद कंगना रनौत ने भी बताया कि वह भी बचपन में इस तरह के अनुभव से गुजर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जब वह बच्ची थी तो एक लड़का उन्हें अनुचित तरीके से छूता था। वह कंगना से 3-4 साल बड़ा था। उस समय वह इस बात को नहीं समझ पाई थीं। वह कहती हैं हर साल बहुत सारे बच्चे इससे गुजरते हैं, लेकिन लोग सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर इसके बारे में बात करने से बचते हैं। लगभग सभी इससे गुजरते हैं, सभी को किसी न किसी समय इस तरह के बुरे अनुभव से गुजरना पड़ता है। कंगना ने सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा करने के लिए मुनव्वर की तारीफ की।

बता दें कि इससे पहले भी मुनव्वर ने अपनी अम्मी के बारे में बताया था। उन्होंने बताया था कि बचपन में उनकी अम्मी ने तेजाब पी लिया था और वे उसके कुछ दिन पहले से कुछ खा नहीं रही थीं। फारूकी ने बताया था कि उनकी माँ अपनी शादी में कभी खुश नहीं थीं। उन्हें पीटा जाता था, लड़ाई होती थी।

राजस्थान में हनुमान प्रतिमा पर चिपका दी 786 लिखी उर्दू की पर्ची, ग्रामीणों की नाराजगी के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

राजस्थान के कोटा के एक मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा पर उर्दू में लिखी पर्ची चिपकाने की घटना सामने आ रही है। इस पर्ची पर 786 भी लिखा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आक्रोश जताया और थाने में तहरीर दे कर कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने भी केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। घटना 24 अप्रैल 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कोटा के ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले गाँव अयाना की है। मंदिर का नाम राधेश्याम वैष्णव मंदिर है। घटना की रात यहाँ पर रात में अज्ञात असामजिक तत्वों ने मंदिर में स्थापित हनुमान मूर्ति पर उर्दू में लिखी पर्ची चिपका दी। सबसे पहले पुजारी ने यह देखा तो उन्होंने बाकी लोगों को इसकी जानकारी दी। बाद में इसकी सूचना पुलिस को दी गई।

घटना से नाराज ग्रामीणों ने आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समय सीमा में गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। पुलिस उर्दू में लिखे शब्दों का अनुवाद करवा रही है। कोटा जिला ग्रामीण SP कविंद्र सिंह सागर ने गाँव वालों की तरफ से शिकायत मिलने की बात स्वीकार की है।

तनाव को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। पुलिस को इस हरकत के पीछे साम्प्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश का शक है। इस बात का भी स्थानीय स्तर पर शक जताया जा रहा है कि किसी ने ऐसा अपनी मुराद पूरी करने के लिए किसी तांत्रिक आदि के कहने पर किया हो। इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद ने भी पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है।

जम्मू-कश्मीर: जवानों पर हमले के लिए आतंकियों को ट्रक में लेकर आया था बिलाल अहमद, गाड़ी में ही बना रखा था गुप्त ठिकाना

जम्मू के सुंजवां में हुए आतंकी हमले की जाँच में नया खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक आतंकी हमले में एक ट्रक ड्राइवर की भी भूमिका है। इस ड्राइवर का नाम बिलाल अहमद बागे है। बिलाल को उसके सहयोगी इश्फाक के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके मिनी ट्रक टाटा 407 को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। 22 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को हुई इस मुठभेड़ में CISF के एक ASI बलिदान हो गए थे और 5 अन्य जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया था।

मारे गए दोनों आंतकी जैश-ए-मोहम्मद से थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रक चालक बिलाल अहमद ही आतंकियों को कश्मीर से जम्मू लेकर आया था। 20 अप्रैल 2022 (बुधवार) को 4 आतंकियों ने इस हमले के लिए सीमा पार की थी। इन सभी को जम्मू आना था, लेकिन बिलाल के ट्रक में जगह कम होने के चलते केवल 2 आतंकी ही जम्मू आ सके थे। आतंकियों को सुरक्षित पहुँचाने के लिए ट्रक में एक गुप्त ठिकाना भी बनाया गया था।

पुलिस अब उन स्थानों की तलाश कर रही जहाँ से आतंकी सीमा में दाखिल हुए थे। साथ ही जाँच दल ये भी जानने का प्रयास कर रहा है कि आतंकियों के अन्य साथी व गोला-बारूद तो कहीं किसी और जगह पर तो नहीं है। पुलिस को दोनों आतंकियों के पास से मोबाइल फोन भी मिले हैं। इसमें मौजूद डाटा और अन्य जानकारियाँ निकलवाई जा रही हैं। मोबाइल में कुछ वीडियो मिलना भी बताया गया है जिसकी जाँच करवाई जा रही है।

इससे पहले न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस हमले का एक वीडियो जारी किया था। इसमें दिख सुंजुवां इलाके से सीआईएसएफ जवानों की बस गुजरते दिख रही है। कुछ देर बाद एक बाइक सवार गुजरता है और फिर धमाकों की आवाज सुनाई देने लगती है।

इस मुठभेड़ में मारे गए दोनों आतंकी बड़ी वारदात की तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने गोला-बारूद से भरी जैकेट पहन रखी थी। इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड आसिफ बताया जा रहा है। उसके भाई का नाम शफीक शेख है। शफीक 2 महीने पहले ही त्राल से सुंजवां आया था। यहाँ पर वो इकबाल नाम के व्यक्ति के घर पर रुका था। इस दौरान उसने अखरोट की फैक्ट्री में काम भी करने लगा था। पुलिस ने मकान मालिक इकबाल को गिरफ्तार कर लिया है। शफीक और उसका भाई आसिफ फरार बताए जा रहे हैं। NIA भी इस हमले की जाँच कर रही है।

फ्रांस ने फिर से उस मैक्रों को चुना राष्ट्रपति, जिनके कार्यकाल में मस्जिद पर लगा था ताला; जो इस्लाम को बनाना चाहते हैं ‘सेकुलर’

फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावों में बहुमत पाकर एक बार फिर इम्मैनुएल मैक्रों की राष्ट्रपति के तौर पर वापसी हुई है। उन्हें चुनावों में 58.2% वोट मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी मरीन ले पेन को 41.8% फीसद वोट मिले। पेन ने नतीजे देखते हुए जहाँ अपनी हार मानी और कहा कि वह फ्रांस के लिए लड़ना जारी रखेंगी। वहीं अन्य देश के नेताओं ने मैक्रों को बहुमत पाता देख उन्हें बधाई देनी शुरू कर दी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मैक्रों को फिर से राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई भेजी। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मैं भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ।” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी मैक्रों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह आगे अपने करीबी और महत्वपूर्ण सहयोगी के साथ काम करने को तैयार हैं।

जानकारी के अनुसार इमैनुएल मैक्रों 20 वर्षों के दौरान दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए फ्रांस के पहले राष्ट्रपति बने हैं। इस बार उन्हें उनकी विपक्षी मरीन ले से बराबर की चुनौती मिली जिन्होंने रेडियो पर ये बयान दिया था कि सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने वाली महिलाओं को जुर्माना देना होगा। ओपिनियन पोल्स में भी पेन के सामने मैक्रों को मामूली बढ़त से आगे दिखाया गया था। अनुमान लगने लगे थे कि ये चुनाव महिला उम्मीदवार के पक्ष में जाएँगे। हालाँकि अंत में मैक्रों ने इस चुनाव में बहुमत से विजय हासिल की।

इस्लामी कट्टरपंथ के विरुद्ध मैक्रों

याद दिला दें कि अभी हाल में फ्रांस ने इस्लाम को अपने ‘सेकुलर’ ढंग में ढालने की घोषणा करते हुए एक निकाय की घोषणा की थी जिसके बाद मुस्लिम उलेमाओं ने कहा था कि इस्लाम को इस तरह ढालने का प्रयास सिर्फ इसलिए है ताकि मैक्रों दक्षिणपंथी लोगों का समर्थन पा सकें। इसके अलावा मैक्रों के राष्ट्रपति रहते हुए फ्रांस ने कट्टरपंथी इस्लाम को पनाह देने और आतंकी हमलों को वैध ठहराने के लिए मस्जिदों पर कार्रवाई करते हुए उनपर ताला लगवाया था।

उन्होंने इस्लामी कट्टरवाद से निपटने के लिए रेडिकल इस्लाम विरोधी कानून को भी पारित किया था। इस बिल में मस्जिदों और मदरसों पर सरकारी निगरानी बढ़ाने और बहु विवाह और जबरन विवाह पर सख्ती का प्रावधान था। ये बिल फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को कमजोर करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की इजाजत देता था। साल 2020 में इस्लाम को कट्टरता और नफरत फैलाने वाला मजहब भी बता चुके हैं जिसकी वजह से उनकी कई जगह आलोचना हुई। उन्होंने देश में इमामों की एंट्री पर भी बैन लगाया था।

कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद फिर बवाल, स्कूल में गैर-ईसाई छात्रों को बाइबल पढ़ने को किया जा रहा मजबूर: हिंदू संगठन का आरोप

कर्नाटक में एक ओर जहाँ मजहबी कट्टरता से निपटने के क्रम में पिछले दिनों हिजाब विवाद हुआ, अब उसी कर्नाटक के एक स्कूल से खबर है कि वहाँ छात्रों को बाइबल लेकर स्कूल में पढ़ने के लिए बुलवाया जा रहा है। हिंदू संगठनों ने दावा किया है कि बेंगलुरु के एक स्कूल में छात्रों के अभिभावकों से ये वादा लिया जा रहा है कि वे अपने बच्चे को बाइबल के साथ स्कूल भेजें। संगठन आरोप लगा रहे हैं कि स्कूल प्रशासन गैर ईसाई छात्रों को भी बाइबल पढ़ने पर मजबूर कर रहा है।

पूरा मामला क्लेरेंस हाई स्कूल का है जहाँ कथिततौर पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से पहले ही अंडरटेकिंग ली जा रही है कि वे अपने बच्चों के बाइबल स्कूल परिसर में ले जाने पर आपत्ति नहीं करेंगे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू जनजागृति समिति के राज्य प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने इस मामले को लेकर दावा किया है कि स्कूल में गैर-ईसाई छात्रों को बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। समूह का कहना है कि स्कूल में गैर-ईसाई छात्र भी हैं लेकिन स्कूल उन्हें भी बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है।

इस विवाद के उठने के बाद स्कूल प्रशासन ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्कूल में वह लोग बाइबल आधारित शिक्षा ही देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में एंट्री के लिए भरी जाने वाले एप्लीकेशन पर क्रमांक संख्या 11 में लिखा है, “आप पुष्टि करते हैं कि आपका बच्चा अपने स्वयं के नैतिक और आध्यात्मिक कल्याण के लिए मॉर्निंग असेंबली स्क्रिप्चर क्लास और क्लबों सहित सभी कक्षाओं में भाग लेगा और बाइबल ले जाने पर आपत्ति नहीं करेगा।”

कर्नाटक का हिजाब विवाद

गौरतलब है कि हाल में कर्नाटक में ही हिजाब को लेकर विवाद उठा था। उस समय कॉलेज की छात्राओं ने जिद्द की थी कि वो हिजाब पहनकर क्लास में बैठना चाहती हैं जबकि प्रशासन का तर्क ये था कि स्कूल में सभी को समानता की शिक्षा दी जाती है। ऐसे में मजहबी पोशाक पहनकर क्लास में बैठना उचित नहीं है। ये मामला हाईकोर्ट में सुना गया जिसके बाद फैसला हुआ कि हर छात्र को ड्रेस कोड का पालन करना होगा।

‘अच्छे नंबरों के लिए यीशु की पूजा करो, हिंदू शैतान होते हैं’ : तमिलनाडु में शिक्षा के नाम पर ईसाइयत का प्रचार, छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

दक्षिण भारत से धर्मांतरण की खबरें आना अब सामान्य हो गई हैं। वहाँ पर सक्रिय कट्टरपंथी संगठन और ईसाई मिशनरियाँ लंबे समय से इस काम को अंजाम देती आई हैं। तमाम लोग इनके शिकार हुए हैं। इन्हीं में से एक तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रंजन (बदला नाम) भी हैं जिनका संपर्क हाल में न्यूज 18 से तब हुआ जब मीडिया संगठन इस धर्मांतरण मामले पर अपनी पड़ताल कर रहा था।

30 साल के रंजन ने बताया कि कैसे उनके स्कूल में उन्हें अच्छे नंबरों के लिए सलाह दी जाती थी कि वह यीशु का अनुसरण करें। रंजन बताते हैं कि उन्हें एक्स्ट्रा क्लास के समय कहा जाता था कि अगर वे अच्छे नंबर चाहते हैं और जीवन में कुछ अच्छा करना चाहते हैं तो उन्हें किसी और ईश्वर को नहीं बल्कि जीसस की आराधना करनी चाहिए। इससे उनके शरीर को न ही कोई परेशानी आएगी और न ही वे जीवन में कभी किसी क्षेत्र में फेल होंगे।

रंजन के पिता ने बताया कि जब उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत उस स्कूल से अपने बच्चे को निकलवाकर अलग एडमिशन दिलाया। वह कहते हैं- “स्कूल कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ हम ये सीखें कि कैसे एक धर्म दूसरे धर्म से अच्छा है। इससे नफरत पैदा होती है। कई और अभिभावकों को ये जानकर गुस्सा आया था। हमने इस संबंध में स्कूल प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन किसी ने गंभीरता से इस पर एक्शन नहीं लिया।”

बता दें कि कुछ दिन पहले कन्याकुमारी के एक स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ने वाली एक लड़की ने प्रशासन को शिकायत की थी कि उनके स्कूल में एक टीचर हैं जो उसे और उसके अन्य सहपाठियों को बाइबल पढ़ने को बोलती हैं और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को शैतान बताती हैं। इस घटना को मीडिया में तूल मिलने के बाद स्कूल टीचर तो नौकरी से सस्पेंड हो गईं मगर ये मुद्दा शांत नहीं हुआ। कुछ माह पहले लावण्या केस और हाल में कन्याकुमारी वाले मामले ने ये सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर राज्य के स्कूलों में ये सब क्या हो रहा है।

न्यूज 18 की ही रिपोर्ट में एक 14 साल की लड़की ने बताया हुआ है कि कैसे उन्हें ये समझाया जाता है कि “हिंदू शैतान हैं। अगर तुम यीशु की प्रार्थना नहीं करोगे तो दुख मिलेगा। अगर जीवन में सफल होना चाहते हो तो बाइबल का उपयोग करो।” लड़की के पिता ने बताया कि वह इस बारे में जानने के बाद कुछ अन्य बच्चों के अभिभावकों के साथ शिकायत करने गए थे। हालाँकि उन्हें वहाँ कहा गया कि वो ऐसा दोबारा नहीं करेंगे।

इस रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा के नाम पर धर्म का प्रचार सिर्फ स्कूलों में सीमित नहीं है। ये ट्यूशन सेंटर में भी चालू रहता है। एक आरती (बदला नाम) नाम की लड़की ने बताया कि उनकी ट्यूशन टीचर ने एक बार उन्हें प्रार्थना में शामिल होने को कहा था, लेकिन उन्होंने इससे मना कर दिया। ऐसे में उन्हें प्रार्थना में शामिल होने पर मजबूर किया गया। ऐसे ही एक लड़का भी था ट्यूशन में जिसे कहा गया था कि अगर वो अच्छे नंबर चाहता है तो प्रार्थना में जरूर शामिल हो।

न्यूज 18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा के नाम पर धर्म को बढ़ावा देने का काम लंबे समय से होता आया है। नगरकोल में स्कूल का संचालन करने वाले थीवा प्रकाश बताते हैं कि लोग ये कहकर आते हैं कि वो सेल फोन के इस्तेमाल, तकनीक के दुरुपयोग आदि पर लेक्चर देंगे पर बातें धीरे-धीरे धार्मिक शिक्षा की ओर चली जाती हैं। ये बताया जाने लगता है कि कैसे एक धर्म अच्छा है और बाकी बुरे। ये पूर्ण रूप से 8-9 साल के बच्चों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश होती है। इसी प्रकार कन्याकुमारी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर उमयोरू भगन कहते हैं कि लालच देकर धर्म परिवर्तन की समस्या क्षेत्र में नई नहीं है। इस दिशा में काम करने वाले भास्कर कहते हैं कि उन्हें धर्मांतरण से जुड़ी दो-तीन शिकायतें तो हर हफ्ते मिलती ही हैं।