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11 साल की दलित बच्ची, 67 साल का पादरी… पैसे देकर दिखाता था गंदी फिल्में, फिर करता था रेप: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक पादरी को गिरफ्तार किया गया है। दलित समुदाय की 11 साल की एक नाबालिग बच्ची के साथ रेप का आरोप है इस पादरी पर। आरोपित पादरी का नाम फादर ऑल विट है। इसकी उम्र लगभग 67 साल है।

बागपत की पुलिस ने बताया है कि पीड़ित परिवार चर्च के पास ही रहता था। पुलिस ने पीड़िता बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवा लिया है। घटना 23 अप्रैल 2022 (शनिवार) की है।

बागपत पुलिस के DSP खेड़का विजय चौधरी के मुताबिक, “बागपत के थाना चाँदीनगर पर 23 अप्रैल को ललियाना गाँव के एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके घर के बगल मौजूद चर्च के पादरी ने उनकी बेटी के साथ गलत काम किया। इस मामले में फ़ौरन ही FIR दर्ज की गई। पीड़िता का मेडिकल करवा दिया गया है। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”

बागपत पुलिस के अनुसार आरोपित पादरी ऑल विट के पिता का नाम सिलवई क्रूश है। वह पीड़िता के ही गाँव ललियाना के सेंट जोसेफ हाईस्कूल में अस्थाई तौर पर रहता है। वह मूल रूप से तमिलनाडु में कन्याकुमारी के नजदीक गाँव फुत्तुर का रहने वाला है। उस पर धारा 376 AB/ 354 B/506 IPC के साथ 5/6 पॉक्सो एक्ट और 3(2)VA SC/ST एक्ट में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस प्रेसनोट

पीड़िता की माँ के मुताबिक, “हम लोग बहुत गरीब हैं। मैं अपने पति के साथ खेतों में काम कर के मजदूरी से परिवार पाल रही हूँ। बच्ची घर पर ही रहती है। मेरी बच्ची को उस फादर ने अंदर बुलाया था। बेटी को पता नहीं था कि वो फादर ऐसा करेगा और वो विश्वास कर के अंदर चली गई। अंदर पादरी ने मेरी बेटी को पैसे दिए। फिर उसने मेरी बेटी को गंदी वीडियो दिखाई। इसके बाद मेरी बेटी के साथ पादरी ने छेड़खानी की।”

पीड़िता की माँ ने आगे बताया, “गाँव के दूसरे लड़कों ने मेरी बेटी के पास इतने पैसे देखे तो उन्होंने हमें बताया। वो उन पैसों से सामान खरीद रही थी। तब मैंने उससे सवाल किया कि पैसे कहाँ से आए। तब जा कर उसने बताया कि पैसे फादर दे रहे हैं मुझे। बेटी ने आगे बताया कि फादर मुझे गंदे वीडियो दिखा कर गलत काम करते हैं।”

हुबली हिंसा: एक और AIMIM नेता चढ़ा कर्नाटक पुलिस के हत्थे, अब तक 138 आरोपित गिरफ्तार

कर्नाटक के हुबली में हुई पिछले दिनों हुई हिंसा के बाद अब राज्य पुलिस ने इस केस में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक और नेता दादापीर बेटगेरी को गिरफ्तार किया है। ये हिंसा पुरानी हुबली पुलिस थाने पर हुई पत्थरबाजी के बाद शुरू हुई थी। पुलिस ने अब तक इस केस में 138 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि इससे पहले शनिवार को हुबली-धारवाड़ नगर निगम पार्षद नजीर अहमद को कर्नाटक पुलिस ने पकड़ा था। वह भी AIMIM पार्टी नेता है जिसके तार 16 अप्रैल 2022 को पुलिस थाने पर हुई पत्थरबाजी से जुड़े मिले हैं। उससे पहले इसी पार्टी के एक और पार्षद हुसैनबी नलवतवाड़ के पति इरफान को पकड़ा गया था। इनके अलावा इस केस की जाँच के दौरान रजा अकादमी का भी नाम सामने आया है। संदेह है कि 16 अप्रैल को जो हिंसा भड़की उसमें इस संगठन की भूमिका हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि 16 अप्रैल 2022 को एक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर 200 इस्लामियों ने पुराने हुबली पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था। साथ ही उसी से लगे अस्पताल और पथराव किया गया था। जिसके बाद पुलिस निरीक्षक जगदीश की शिकायत पर मुस्लिम भीड़ के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पूरे मामले में अब तक 138 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दादापीर और नजीम अहमद के अलावा इस केस में एक और AIMIM नेता का नाम है। ये नाम मौलाना वसीम का है। आरोप है कि वसीम ने पहले हुबली की एक दरगाह पर उन्मादी भाषण दिया और इसके बाद उसने पुलिस स्टेशन के बाहर भी यही किया।

₹5569 करोड़ की राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन, ₹10000 करोड़ के एक्सप्रेसवे का जल्द निर्माण: महाराष्ट्र में नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने रविवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (Aurangabad) में ₹5,569 करोड़ की कीमत के 7 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, “नई राजमार्ग परियोजनाओं से ज़िले का विकास होगा। शहर में यातायात की स्थिति बेहतर होगी और प्रदूषण भी घटेगा। शहर से ग्रामीण इलाकों में आना भी आसान हो जाएगा।”

इसके साथ ही 24 अप्रैल 2022 को उन्होंने घोषणा की है कि औरंगाबाद और पुणे के बीच यात्रा में लगने वाले समय को कम करने के लिए इन दोनों शहरों के बीच 10,000 करोड़ रुपए की लागत से एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। इससे औरंगाबाद से पुणे का सफर सुखद होगा।

इस अवसर पर नितिन गडकरी के साथ, वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड और रेल राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे भी मौजूद थे। फिलहाल औरंगाबाद और पुणे के बीच का सफर तय करने में चार से पाँच घंटे लगते हैं। गडकरी ने औरंगाबाद से पुणे एक्सप्रेस हाईवे को लेकर अहम ऐलान करते हुए कहा:

“औरंगाबाद और पुणे के बीच की दूरी करीब 225 किलोमीटर है। हम इन दोनों शहरों के बीच एक्सप्रेसवे बनाएँगे, जिस पर कोई मोड़ नहीं होगा और वाहन 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकेंगे। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाला समय घट कर सवा घंटा रह जाएगा।”

बता दें कि गडकरी ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-52 पर 3,216 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई 86 किलोमीटर लंबी सड़कें देश को समर्पित की। इस दौरान उन्होंने 2,253 करोड़ रुपए की लागत वाली चार अन्य सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान… और दर्ज हो गया देशद्रोह का केस: राणा दंपति के खिलाफ सरकारी वकील भी नहीं दिखा सके सबूत

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान करने वाली सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा के ऊपर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ है। इससे पहले उन्हें हनुमान चालीसा ऐलान के बाद गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ उन्हें 6 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उनके मामले पर अगली सुनवाई कोर्ट में 29 अप्रैल को की जाएगी।

राणा दंपति पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इल्जाम मढ़ते हुए उनकी गिरफ्तारी हुई और इस केस की एफआईआर सामने आने के बाद पता चला कि राणा दंपति के ऊपर धारा 124-ए के तहत कार्रवाई की गई है, जो कि देशद्रोह की धारा है। इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि दोनों के ऊपर आईपीसी की धाराओं 153 (ए) और 353 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम (पुलिस की निषेधाज्ञा उल्लंघन) की धारा 135 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

सांसद नवनीत राणा के वकील रिजवान मर्चेंट ने इस बाबत मीडिया को जानकारी दी और बताया कि कैसे पब्लिक प्रॉजिक्यूटर प्रदीप घरात ने इस बात पर बहस की कि मामला देशद्रोह की धारा 124ए के तहत आता है। रिजवान मर्चेंट का दावा है कि उन लोगों ने सरकारी वकील से रिमांड आवेदन में से वह हिस्सा दिखाने को कहा था जिससे राणा दंपति पर लगे आरोप साबित हों, लेकिन सबूत दिखाने में वह पूरी तरह असफल रहे।

रिजवान मर्चेंट ने बताया कि रिमांड आवेदन पर सिर्फ यही बात लिखी है कि वो लोग हनुमान चालीसा पढ़ने के लिहाज से मातोश्री पर आने की तैयारी कर रहे थे। राणा दंपति के वकील ने कहा, “हनुमान चालीसा और कुछ नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम और हनुमान का गुणगान है। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर हनुमान चालीसा पढ़ी जानी थी, वह जगह उस शख्स का आवास है जो दावा करते हैं कि उन्हें भगवान राम से प्रेम है, तो हनुमान चालीसा का पाठ किया जाना, उन पर कोई फर्क नहीं डालना चाहिए। राणा दंपति के वकील रिजवान ने कहा, “हनुमान चालीसा का पाठ करना धारा 153 ए के तहत नहीं आता। ये मामला फर्जी है। उन्हें (सरकारी वकील को) मालूम है कि उनके तर्क कितने कमजोर हैं। उन्हें मालूम है कि मामले में बेल मिल सकती है इसलिए उन्होंने दूसरी एफआईआर का मन बनाया है।” बता दें कि इससे पहले रिजवान मर्चेट ने इस पूरे मामले में अवैध करार देते हुए कहा था कि वह जल्द ही बेल के लिए याचिका डालेंगे।

न्याय के लिए बुलडोजर का चलना और उसका विद्युत गति से रुक जाना – दोनो ही तंत्र की विफलता का सूचक

दण्ड: शास्ति प्रजा: सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति।
दण्ड: सुप्तेषु जागर्ति दंडम धर्म विदुर्बुधा: ।। – मनु स्मृति

“वास्तव में दण्ड ही प्रजा पर शासन करता है, दण्ड ही प्रजा की रक्षा करता है, जब प्रजा सोती है, दण्ड ही जागृत रहता है, इसी कारण विद्वान दण्ड को ही राजा का प्रमुख कार्य मानते हैं।”

मनु स्मृति का यह श्लोक मानव सभ्यता के प्रारम्भिक काल में लिखा गया और आज भी उतना ही सामयिक है जितना शताब्दियों पूर्व था। जिस समाज में आम नागरिक अपनी सुरक्षा के प्रति निश्चिंत होता है और स्वयं शस्त्र नहीं धारण करता है, वह समाज सशक्त शासन के लिए जाना जाता है, जहाँ सत्ता प्रजा के सबसे निर्बल व्यक्ति के अस्तित्व एवं अधिकार के लिए कर्मशील हो।

समाज में शासन और शासित का विभाजन इसी मूल सहमति के आधार पर निर्मित होता है और पश्चिम से आयातित सभ्यताओं को छोड़ दें तो एक सुसंस्कृत समाज में प्रत्येक आम नागरिक सैनिक नहीं होता है।

वर्तमान में एक बुलडोज़र न्याय चर्चा में है और उत्तर प्रदेश में माफिया के विरोध में प्रमुखता से उपयोग की गई यह न्याय व्यवस्था जब दंगों के उत्तर में अन्य राज्यों में प्रयुक्त हो रही है तो तुष्टिकरण की नीति का लाभार्थी रहा धार्मिक समुदाय इसके निशाने पर आ रहा है। ऐसे में जब रामनवमी तथा हनुमान जयंती की शोभा यात्राओं पर मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में हुए पथराव और हिंसक आक्रमणों के प्रत्युत्तर में शासन द्वारा इस व्यवस्था को मध्य प्रदेश के खरगौन और दिल्ली के जहाँगीरपुरी में उतारा गया तो राष्ट्रीय पटल पर सर्वोच्च न्यायालय में पहुँचने के साथ प्रस्तुत हुआ।

दिल्ली में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर एक हिंसक भीड़ का आक्रमण हुआ, और इसके पक्ष में बड़ी दलीलें दी गईं। एक तर्क यह था कि शोभा यात्रा की प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। समय के साथ पहले तो यह तथ्यात्मक रूप से ग़लत निकला, क्योंकि हिंदू समुदाय ने इस यात्रा की विधिवत स्थानीय पुलिस से अनुमति ली थी, परंतु स्थानीय थाना मुख्यालय को इसकी सूचना समय पर नहीं दे पाया।

इसके कारण (पुलिस की गफलत) ना सिर्फ़ यात्रा और हिंदू समुदाय पर आरोप लगे, इस हिंसक आक्रमण को न्यायसंगत सिद्ध करने का प्रयास किया गया मानो दिल्ली में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने का उत्तरदायित्व जहाँगीरपुरी के अल्प-संख्यक समुदाय पर हो और प्रत्येक अवैध जुलूस को प्रतिबंधित करने के लिए पुलिस को नहीं जहाँगीरपुरी की मस्जिद के इमाम को संविधान के द्वारा उत्तरदायी बनाया गया हो।

इस हिंसक झड़प के दूसरे दिन जहाँगीरपुरी में बुलडोज़र उतरे, और शरारतपूर्ण रूप से पहले से फैलाए गए शासकीय आदेश को इस प्रकार प्रचारित किया गया मानो अनाधिकृत निर्माण के विरुद्ध हुई यह कार्यवाही हिंदू-विरोधी दंगों के विरोध में हो रही हो। जैसे जैसे सत्य उद्घाटित होता चला गया, यह भी प्रकट होता चला गया कि उत्तर प्रदेश में दंगों और आपराधिक माफिया के विरुद्ध हुई कार्रवाई से इतर दिल्ली में बुलडोज़र कांड एक सुप्त प्रशासनिक व्यवस्था, जिसमें एक कबाड़ और कथित रूप से सट्टे का कारोबारी अंसार पाँच मंज़िला भवन खड़ा कर लेता है, एक दंगे की भूमिका में पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकने के बाद अपनी छवि को बचाने का प्रयास करती है।

जहाँगीरपुरी के बुलडोजर मस्जिद के बाहर की दीवार और मंदिर के बाहर के गेट के साथ कुछ छिटपुट छज्जे और ठेले हटा पाते हैं। कॉन्ग्रेस समर्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं का समूह, प्रशांत भूषण, दुष्यंत दवे और कपिल सिबल के साथ मिल के 10:30 बजे उस न्यायालय में अपना मामला सूचीबद्ध करा पाते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की हिंसा के मामले को समयाभाव के कारण संज्ञान में नहीं ले पाता है।

दस मिनट की सुनवाई में न्यायालय अवैध निर्माण के विरोध में हुई प्रशासनिक कार्यवाही पर रोक लगा देता है। चलता हुआ बुलडोज़र गुप्ता जी और झा जी की दुकानों को रौंद के शांत हो जाता है। प्रशासन को पुनः चार-चार, पाँच-पाँच तलों के भवन दिखने बंद हो जाते हैं। जिन अनाधिकृत क़ब्ज़ाधारकों के घरों तक प्रशासन नहीं पहुँच पाता, उनकी क़ानून को जेब में रखने की छवि और अधिक बल पाती है। अपराध के विरोध में सत्ता के ग़ैर-अनुपातिक कोप का जो भय हज़ारों की संख्या में सड़क पर उतरने वाली भीड़ पर पड़ना चाहिए वो उन छह-सात लोगों जैसे सलीम शेख़, अंसार, गुल्फ़ाम आदि को पुलिस की पकड़ में पहुँचाता है जिनके लिए अदालत और पुलिस के चक्कर सामान्य जीवन के अंग हैं।

शीघ्र ही ज़मानत पा कर दिल्ली में सत्ता में बैठी पार्टी का कार्यकर्ता अंसार दोबारा अपने धंधों में लग जाएगा, अवैध शरणार्थियों की नागरिकता के प्रमाण तैयार कराएगा, क्योंकि वह एक विस्तृत तंत्र का छोटा सा पुर्ज़ा मात्र है। वह उस तंत्र का भाग है, जो चार वर्ष की बच्ची के हत्यारे के भविष्य के प्रति आशावान है, जो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इरफ़ान को हीरा गुजराती की बहन के बलात्कार के आरोप में ज़मानत दे देता है और दिन दहाड़े इरफ़ान एक पीड़ित, दलित भाई की हत्या कर देता है।

लोकतंत्र में राजा एक व्यक्ति नहीं है, एक व्यवस्था है जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और राजनैतिक नेतृत्व आता है। इन तीनों में से एक की भी कमी से प्रशासनिक दंड खोखला हो जाता है। लोकतंत्र के इन तीनों अंगों में मनुष्य ही हैं, जो उस मनुष्य से भिन्न नहीं है जो ठेला खींचता हैं, जो शिक्षा देता है, जो लेख लिखता है, जो घरों की रसोइयों में भोजन की व्यवस्था करता है, बसें चलाता है। वह अपनी सुरक्षा इन लोगों के सुपुर्द विश्वास के आधार पर करता है। जब इन तीनों में से कोई अंग असंतुलित होता है, जनता सशंकित हो जाती है। जब न्यायालय भिन्न मामलों को अलग-अलग दृष्टि से देखता है तो उसमें एक चिंतित कर देने वाली स्वेच्छाचारिता परिलक्षित होती है। जब पुलिस अपने कार्य में सतर्क नहीं होती है, उचित या अनुचित कारणों से, तो न्याय के विचित्र साधन प्रकट होते हैं।

न्याय व्यवस्था के साधन के रूप में बुलडोज़र का चलना और उसका विद्युत गति से रुक जाना, दोनो ही तंत्र की विफलता का सूचक है। ऐसे साधन की आवश्यकता तब ही होती है जब अंसार का पाँच तल्ले का मकान बिना प्रशासन और पुलिस को दिखे खड़ा हो जाता है और उसे इतना दुस्साहसी बना देता है कि वह अन्य धार्मिक उपक्रमों के प्रति असहिष्णु हो उठता है। यदि वह एक मंज़िल के घर में किराए पर होता और अपनी योग्यता के अनुसार वैध मार्गों से जीविकोपार्जन करता तो उसमें प्रशासन को धता बताने का साहस ही ना होता।

सहसा उठाए गए प्रयासों से समाचार पत्र तो भर सकते हैं परंतु एक सहज नैतिक और न्यायिक व्यवस्था के खोखलेपन को ऐसे कदम भर नहीं सकते। न्याय के लिए सबसे हानिकारक विवेकहीनता और स्वेच्छाचारिता है। यदि शोभा यात्रा अवैध भी रही हो तो जिस राष्ट्रीय राजधानी ने वर्षों तक सड़कें रोक कर बैठे अवैध प्रदर्शन असहाय अदालतों और मौन प्रशासन के सामने देखे हों, वह एक दिन की शोभा यात्रा पर न्यायपालिका के बदले हुए तेवर ना समझ सकेगा ना स्वीकार कर सकेगा।

विकास एवं प्रगति की अंतिम रेखा पर खड़े अंतिम व्यक्ति के विश्वास के बिना ना सरकार का कोई अर्थ है ना ही न्यायपालिका का। यह सरकार, न्यायपालिका और प्रशासन के लिए आत्मावलोकन का अवसर है। बुलडोज़र उस बीमार हुए पौधे का सड़ा हुआ फल है जिसकी जड़ें गल चुकी हैं। जड़ों की चिकित्सा के बिना समाज ना सुरक्षित हो सकता है ना ही विकसित। शासित की सुरक्षा के लिए शासक का दंड का निष्पक्ष और सशक्त होना आवश्यक है। इसी मूलभूत समझ पर के सभ्य समाज खड़ा रहता है।

अरस्तू के अनुसार – केवल वह शासन स्थिर है जिसमें न्याय के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति समान है। शासन सतर्क हो तथा भय एवं लोभ के बिना कार्य करे तो ही भारत सुरक्षित होगा। बुलडोज़र न्याय-व्यवस्था के अभावों का विकल्प नहीं है। उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र का उद्देश्य एवं परिणाम दिल्ली में बुलडोज़र के उपयोग से भिन्न है।

मूल लेख को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

दिल्ली का ‘बढ़िया स्कूल’ देखने केरल से आए ऑफिसर लोग: AAP विधायक का दावा फुस्स, वामपंथी सरकार ने निकाली हवा

केरल सरकार (Kerala Government) ने आप विधायक आतिशी मार्लेना (Atishi Marlena) के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केरल के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के स्कूलों का दौरा किया और यहाँ के स्कूली मॉडल को समझा। 23 अप्रैल 2022 (शनिवार) को आतिशी ने एक ट्वीट कर कहा कि केरल के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के कलकाजी स्कूल का दौरा किया और यहाँ के मॉडल को समझकर उसे केरल में लागू करने में रुचि दिखाई। इस दावे को केरल के शिक्षा मंत्री ने गलत बताया है।

साभार – ट्विटर

आतिशी ने अपने ट्वीट में लिखा था, “केरल के अधिकारियों की कालका जी के स्कूल में मेजबानी करना शानदार रहा। वो हमारे शिक्षा मॉडल0 को समझना चाह रहे थे और उसे अपने प्रदेश में लागू करना चाह रहे थे। यह अरविंद केजरीवाल सरकार की विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का तरीका है साझेदारी से विकास।

source – Twitter

ठीक यही ट्वीट आम आदमी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से भी किया गया। इस ट्वीट में लिखा था, “केरल के सम्मानित लोगों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा कर शिक्षा में हुई क्रान्ति देखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि सुविधाएँ इतनी बेहतरीन होंगी। केजरीवाल सरकार की हैपीनेस क्लासेस से इंप्रेस शिक्षाविदों ने इसे केरल में भी लागू करने की इच्छा जताई।”

अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब चुनावों में भी दिल्ली मॉडल की काफी चर्चा की थी। केरल देश का सबसे शिक्षित राज्य है। वहाँ से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर प्रतिनिधिमंडल आना आप पार्टी की सरकार की छवि में चार चाँद लगा रहा था।

केरल के शिक्षा मंत्री ने किया खंडन

आतिशी और उनकी आम आदमी पार्टी सरकार के इन दावों का केरल सरकार ने खंडन किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी ने कहा, “केरल के शिक्षा विभाग ने किसी भी व्यक्ति को ‘दिल्ली मॉडल’ के बारे में जानकारी लेने के लिए नहीं भेजा है। पिछले महीने दिल्ली से कुछ अधिकारी केरल के शिक्षा मॉडल को समझने आए थे। हम ये जानना चाह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी की विधायक द्वारा किन ‘अधिकारियों’ का स्वागत किया गया?”

Source – Twitter

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केरल के जिन अधिकारियों ने दिल्ली के स्कूल का दौरा किया उनमें CBSE स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव विक्टर टीआई, केरल सहोदया कॉम्प्लेक्स संघ के कोषाध्यक्ष एम दिनेश बाबू एवं अन्य लोग शामिल थे।

गुवाहाटी में NDA की प्रचंड जीत: 60 में से 58 पर विजय, BJP ने 52 सीटों पर मारा मोर्चा, कॉन्ग्रेस के हिस्से- 0

असम के गुवाहाटी के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है। वहाँ कुल 60 सीटों पर मतदान हुए थे और 58 सीटें एनडीए के हिस्से आई हैं। इनमें 52 सीट स्पष्ट तौर पर भाजपा के हिस्से आईं जिनमें 3 सीट तो ऐसी थीं जिन्हें बीजेपी ने निर्विरोध जीता। भाजपा की सहयोगी पार्टी असोम गणा परिषद ने भी अपने खाते में 6 सीट जोड़ी जिससे एनडीए का खाता 58 तक पहुँच पाया।

शर्मनाक बात ये है कि 60 सीटों पर हुए इन चुनावों में देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस खाता तक नहीं खोल पाई। उनसे अच्छा प्रदर्शन तो आम आदमी पार्टी ने किया जिन्होंने एक सीट जीत कर गुवाहाटी में अपना खाता खोला। चुनावों के नतीजे स्पष्ट होने के बाद प्रदेश मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी की जनता का शुक्रिया अदा करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा,

“मैं गुवाहाटी के लोगों को जीएमसी चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए नमन करता हूँ। इस विशाल जनादेश के साथ, लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी विकास यात्रा में अपने विश्वास की पुष्टि की है।”

बता दें कि इससे पहले गुवाहाटी नगर निगम के चुनाव 2013 में हुए थे। उस समय कॉन्ग्रेस ने 31 वार्ड में से 19 सीटों को जीता था। भाजपा के हिस्से तब 11 सीट आई थी और 1 सीट को एजीपी ने जीता था। इस बार वार्ड की संख्या को बढ़ा कर 60 कर दिया गया जिसमें से 50 फीसद महिलाओं के लिए आरक्षित थी। इन 60 सीटों पर इस बार कुल 200 लोगों ने अपनी किस्मत आजमाई थी।

9 साल बाद हुए नगर निगम के चुनावों में भाजपा ने अपने 53 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जिनमें से उन्हें 52 पर विजय मिली। वही एजीपी ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 6 पर जीत दर्ज की। इसी तरह कॉन्ग्रेस पार्टी ने 55 सीटों पर चुनाव लड़ा था, मगर उन्हें एक सीट पर भी कामयाबी नहीं मिली। आम आदमी पार्टी ने 39 वार्ड में अपने उम्मीदवारों को लड़ाया था इनमें से एक को जीत मिली है। बता दें कि गुवाहाटी नगर निगम के चुनावों में वार्ड नंबर 5, 6 और 22 ऐसे रहे जिनमें भाजपा को निर्विरोध जीत मिली।

‘सूरत के हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में रातों-रात दरगाह बना कर कब्जा किया जा रहा है’: वीडियो वायरल

गुजरात (Gujarat) का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सूरत के चौकबाजार इलाके में हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर एक दरगाह (Dargah at Heritage building in Surat) दिखाई दे रही है। वीडियो शूट करने वाले शख्स का आरोप है कि यह दरगाह रातों-रात बनी है। एक दिन पहले यह दरगाह इस स्थान पर नहीं थी। वीडियो बनाने वाले शख्स को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, “इस स्थान पर कब्जा कर लिया गया है। यहाँ पर झाड़-फूँक और दिया लगाया गया है। इस पूरी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है।”

दरगाह की ओर इशारा करते हुए वह शख्स कहता है, “कल तक यह चीज यहाँ पर नहीं थी। सार्वजनिक स्थान पर ये चीज बनाई जा रही है। आप लोगों को सोचना है कि ये चीज यहाँ पर रहनी चाहिए या नहीं रहनी चाहिए। ये आप लोगों का निर्णय है।” उसने आम लोगों को चेताया और कहा, “आज यहाँ कब्जा हुआ है। कल आपके घरों पर कब्जा होगा तो आप सोच लीजिए कि आपको क्या करना है। ये गैजन शाह वालिद की दरगाह-वरगाह बनाई गई है। इसका काम अभी भी चल रहा है। अभी भी हमारे पास टाईम है कि समय रहते इसका विरोध किया जाए। अगर बात आगे पहुँच गई तो आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे।”

सूत्रों के अनुसार, जिस जमीन पर दरगाह बनी है, पुलिस उसके मालिक की तलाश कर रही है। जब दरगाह के मामले में पुलिस से संपर्क किया गया तो एक अधिकारी ने बताया कि स्वामित्व के रिकॉर्ड से पता चलता है कि जमीन तीन पक्षों की है। एक पक्ष सूरत नगर निगम है, एक सरकारी जमीन है और एक प्राइवेट पार्टी है। वह प्राइवेट पार्टी कौन है, जिसका जिक्र नहीं किया गया। उसको लेकर सूरत पुलिस ने बताया कि जाँच में पाया गया है कि यह 5-6 ट्रस्टियों वाला एक ट्रस्ट है। पुलिस ने कहा कि वे भूमि के स्वामित्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए शहरों का सर्वेक्षण कर र​हे हैं।

पता चला है कि घनीभाई देसाई, गोरधनभाई चोखावाला, यशवंतभाई शुक्ला, ईश्वरलाल देसाई, चुन्नीभाई भट्ट ट्रस्टी हैं, जो इस जमीन के तीसरे मालिक हैं। कुल मिलाकर हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की जमीन के तीन अलग-अलग मालिक हैं। इसका एक हिस्सा सूरत नगर निगम के पास है, कुछ हिस्सा गुजरात सरकार के पास है और कुछ हिस्सा ऊपर बताए गए ट्रस्ट के पास है। यह पता लगाने के लिए कि दरगाह सरकारी अधिकारियों के क्षेत्र में आती है या नहीं इसके लिए शहर के सर्वेक्षण से उस विशेष क्षेत्र के स्वामित्व को जानना होगा। हालाँकि, उपरोक्त जानकारी से तो ऐसा ही लगता है कि वक्फ ने अभी तक इस दरगाह को लेकर कोई दावा नहीं किया है, जबकि कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि यह दरगाह यहाँ कई वर्षों से है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है।

सूरत नगर निगम निकाय वक्फ संपत्ति है

पिछले साल नवंबर में एसएमसी मुख्यालय मुगलिसरा (SMC headquarters Muglisara) को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था। उस वक्त शरिया कानून का हवाला देते हुए राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा था कि इस इमारत का इस्तेमाल 17वीं शताब्दी में हज यात्रियों द्वारा किया गया था और इसे एक मुस्लिम शासक द्वारा दान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की इस घोषणा, ‘एक बार वक्फ, हमेशा एक वक्फ’ पर भी भरोसा जताया गया था।

इंग्लैंड की महिला सांसद ने दिया Basic Instinct वाला पोज, पैर फैला PM बोरिस जॉनसन को भटकाया? प्रधानमंत्री ने ट्वीट में क्या लिखा

इंग्लैंड में लेबर पार्टी की उपनेता हैं एंजेला रेनर (Angela Rayner)। इन पर वहाँ के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) की पार्टी के नेताओं ने कुछ आरोप लगाया है। आरोप यह है कि एंजेला रेनर ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के सामने अपने दोनों पैर फैलाए, फिर उसे एक-दूसरे के ऊपर क्रॉस करके रखा। कहा गया कि ऐसा इन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान भटकाने के लिए किया।

ब्रिटिश मीडिया में इस खबर को ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स’ वाली चाल या रणनीति के नाम से परोसा जा रहा है। दरअसल ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स (Basic Instinct)’ 1992 में आई एक फिल्म है। इसमें हॉलीवुड अभिनेत्री शेरोन स्टोन (Sharon Stone) है। दोनों पैरों को फैलाना, फिर उसे एक-दूसरे के ऊपर क्रॉस करके रखना – सामने वाले मर्द का ध्यान भटकाने के लिए फेमस यह सीन शेरोन स्टोन ने ही किया था।

हुआ यह कि एंजेला रेनर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को ब्रिटिश संसद में घेरने की कोशिश कर रही थीं। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के सांसदों ने हॉलीवुड अभिनेत्री शेरोन स्टोन की 1992 में आई ‘बेसिक इंस्टिक्ट्स (Basic Instinct)’ फिल्म का हवाला देते हुए रेनर पर निशाना साधा। उन्होंने रेनर की तुलना अभिनेत्री से करते हुए कहा कि वह केवल संसद में बैठे लोगों का ध्यान भटकाना चाहती हैं।

एक अन्य सांसद ने तो यहाँ तक कह दिया, “रेनर यह बात अच्छे से जानती हैं कि वह बोरिस का मुकाबला नहीं कर सकतीं, लेकिन उनके पास अन्य कौशल भी हैं, जिससे वह खुद को साबित करने का प्रयास करती हैं।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की पार्टी का नाम कंजर्वेटिव पार्टी है। इसी कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ नेताओं ने जो आरोप लगाया, उन पर लेबर पार्टी की उपनेता एंजेला रेनर ने कहा – भद्दा सा, गंदा सा आरोप। लिंगभेद और स्त्री जाति से नफरत करने वालों का लगाया गया आरोप।

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) ने भी ट्वीट कर ऐसे आरोपों को गलत बताया।

कौन हैं एंजेला रेनर

एंजेला रेनर (Angela Rayner) 41 वर्ष की हैं। कहा जाता है कि उन्होंने 16 साल की उम्र में गर्भवती होने के कारण स्कूल छोड़ दिया था। रेनर संसद और सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को हटाने की माँग करती रहती हैं।

लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों से घिरे बोरिस जॉनसन को लेकर रेनर ने कहा था, “अगर नई रिपोर्ट सही हैं, तो इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री ने न केवल ऐसी पार्टियों में भाग लिया, बल्कि उनमें से कम से कम एक को आयोजित करने में अहम भूमिका भी निभाई।” रेनर ने जॉनसन पर ब्रिटिश लोगों को जानबूझ कर गुमराह करने का आरोप लगाया था।

राजस्थान के अलवर में प्रशासन ने बिना मौका दिए ढाह दिया घर: 90 साल की बुजुर्ग महिला 7 दिनों से दूसरी मंजिल पर फँसी

राजस्थान के अलवर (Alwar, Rajasthan) स्थित राजगढ़ में मंदिर गिराने के दौरान कई ऐसे घरों एवं दुकानों को भी ढहा दिया गया, जिससे लोगों के परिवार का पेट पलता था। अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें एक घर के आधे हिस्से को तोड़ दिया गया और उसमें रहने वाले लोगों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं दिया गया। इस घर के दूसरे तले पर 90 साल की एक महिला पिछले 7 दिनों दिनों से फँसी हैं।

जिस घर के आधे हिस्से को तोड़ा गया है उसमें घर की सीढ़ियाँ भी टूट गई हैं। ऐसे में घर के दूसरे तले पर फँसी 90 साल की कस्तूरी देवी वहीं फँस कर रह गई हैं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें चलने-फिरने में भी दिक्कत हो रही है। पैरों में सूजन ने उनकी तकलीफ को और बढ़ा दी है। वह बिना सहारे के चल भी नहीं पातीं। ऐसे में वह घर से नीचे उतरने में असमर्थ हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कस्तूरी देवी दूसरी मंजिल पर बिछी एक चारपाई पर लेटी रहती हैं। वह अपनी बेबसी पर और प्रशासन की क्रूरता पर क्रोधपूर्ण लाचार महसूस कर रही हैं। उनकी बेटियों ने बताया कि घर तोड़ने आए प्रशासन के लोगों ने उन्हें घर से बाहर निकलने तक का मौका तक नहीं दिया और घर के अगले हिस्से को ढहा दिया।

वहीं, चने-बिस्किट बेचकर भरण-पोषण करने वाले 50 वर्षीय भागचंद की भी एक दुकान थी। इस दुकान की साइज 10×10 थी। दुकान के ऊपर पर रहने का एक छोटा-सा कमरा था। अब दोनों को ही ढहा दिया गया है। भागचंद का परिवार अब किराए के मकान में रहने को बाध्य है। वहीं, परिवार पालने के लिए ठेला लगाना पड़ रहा है।

वहीं, योगेश गवारिया नाम के एक शख्स ने बताया कि उनका भी मकान और दुकान को ढहा दिया गया है। दुकान का सामान भी बाहर निकालने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके चार बच्चे हैं, जिनमें से एक विकलांग है। ऐसे में परिवार पालना मुश्किल हो रहा है।

जिन लोगों के मकान और दुकान टूटे हैं, उनका कहना है कि मंदिर टूटने पर सभी बोल रहे हैं, लेकिन जो लोग बेघर हो गए उनके लिए कोई नहीं बोल रहा है।