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जिस संभाजी भिड़े को शरद पवार ने बताया था भीमा कोरेगाँव का विलेन, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला: पुलिस ने बताया- केस से हटा दिया है नाम

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। लिबरल और वामपंथी नेक्सस इसके लिए संभाजी भिड़े को जिम्मेदार बताता रहा है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी उन पर हिंसा का माहौल तैयार करने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन पुणे पुलिस को इस मामले में संभाजी भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बुधवार (4 मई 2022) को महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया है कि हिंसा में संभाजी भिड़े की कोई भूमिका नहीं पाई गई है और उनका नाम मामले से हटा दिया गया है।

भीमा कोरेगाँव हिंसा के एक दिन बाद कथित दलित राजनीतिक कार्यकर्ता अनीता सावले ने हिंदुत्ववादी नेताओं संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई थी। इस हिंसा में एक की जान चली गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। पिंपरी-चिंचवड़ की रहने वाली सावले राजनीतिक संगठन बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी की नेता भी हैं।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एकबोटे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई और इधर पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया। हालाँकि सबूतों के अभाव में पुलिस संभाजी भिड़े को कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई।

इस बीच, मुंबई के एक वकील आदित्य मिश्रा ने एक साल पहले MSHRC के समक्ष एक शिकायत दर्ज की, जिसमें 28 मार्च, 2018 की एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र था। इसमें महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान का जिक्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस के पास भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। .

मिश्रा ने शिकायत में कहा, “क्या कोई XYZ को बिना किसी सबूत के किसी को अफवाहों के आधार पर आरोपित के रूप में फँसा सकता है?” उन्होंने आगे अनुरोध किया कि भिड़े के खिलाफ मामले में पुलिस से स्थिति रिपोर्ट माँगी जाए। मिश्रा ने आयोग से न्याय के हित में कानून के अनुसार आवश्यक निर्देश की माँग करते हुए कहा था, “भिड़े गुरुजी के सिर पर कब तक FIR की तलवार लटकी रहेगी।”

MSHRC ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधिकारियों को तलब कर भिड़े के खिलाफ मामले में स्थिति रिपोर्ट माँगी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान MSHRC के समक्ष एक रिपोर्ट पेश किया गया। इस पर 3 मई, 2022 की तारीख थी और पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अभिनव देशमुख का सिग्नेचर था। रिपोर्ट के मुताबिक भिड़े के खिलाफ अनीता सावले द्वारा दर्ज मामले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए, भिड़े का नाम हटा दिया गया है, जबकि शेष 41 आरोपितों के खिलाफ धारा 307, 143, 147, 148, 149, 295 (ए), 435, 439, 153 (ए), 120 (बी) के तहत चार्जशीट दायर किया गया है।

वकील मिश्रा ने कहा, “पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि भिड़े का नाम मामले से हटा दिया गया है। MSHRC ने पुलिस को शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान को मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मामले की अंतिम सुनवाई 4 जुलाई, 2022 को होगी।”

कौन हैं संभाजी भिड़े?

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है। वे महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। सांगली में उन्हें हर कोई ‘गुरुजी’ के नाम से जानता है। भिड़े ने पुणे विश्वविद्यालय से अटॉमिक साइंस में एमएससी की है। वह पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुके हैं। वे बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं, जो सांगली में आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता रहे हैं। 1980 के दशक में संभाजी भी RSS से जुड़े हुए थे और संगठन के लिए उन्होंने काफी काम भी किया। 1980 के दशक में उन्होंने RSS छोड़ा और ‘शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ नाम का संगठन बनाया। 

इस संगठन की शुरुआत 1984 में हुई। जिस तरह के काम RSS करता है, ठीक वैसा ही काम शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन भी करता है। उनकी संस्था का मुख्य काम शिवाजी महाराज के बारे में लोगों को बताना है। संभाजी ने रायगढ़ किले में छत्रपति शिवाजी के लिए सोने का सिंहासन बनाने का प्रण लिया है, जिसके लिए कम से कम 144 किलो सोने का इस्तेमाल होगा। संभाजी नंगे पैर चलते हैं। साइकल से चलना पसंद करते हैं। 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उनके नाम की तब बहुत चर्चा हुई थी जब प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान उनसे मुलाक़ात की थी और मंच से उन्हें ‘गुरुजी’ कहा था। उन्होंने मंच से कहा था, “भिड़े गुरुजी ने मुझे आमंत्रित नहीं किया, मैं यहाँ उनके आदेश से आया हूँ।”

इतालवी फुटबॉलर के साथ रिलेशन में थीं सोनिया (एंटोनियो माइनो), एक अफेयर राजीव गाँधी की एंट्री से पहले भी था? दावों में कितनी हकीकत, कितना फसाना

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का पहला प्यार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी नहीं थे? सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) जो उस समय एंटोनियो माइनो का नाम से जानी जातीं थीं, क्या कई सालों तक इटली के फुलबॉलर फ्रेंको लुइसन (Franco Luison) के साथ रिलेशनशिप में थीं? सालों पहले यह खबर सोशल मीडिया पर उस वक्त चर्चा का विषय बनी थी, जब वर्ष 2004 में इतालवी मैगजीन जेंटे (Gente Magazine) ने दिवंगत फुटबॉलर का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था।

लुइसन ने अपने इंटरव्यू में दावा किया था कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के संपर्क में आने से पहले सोनिया (एंटोनियो माइनो) के साथ वह 4 सालों तक रिलेशनशिप में थे। फुटबॉलर ने अपने उन दिनों (जब वे सोनिया के साथ रिलेशन में थे) को याद करते हुए बताया था, “हम दोनों के परिवार वाले इस रिश्ते से बेहद खुश थे और उसके माता-पिता अक्सर मुझे ट्यूरिन के पास ओरबासानो में अपने घर पर बुलाया करते थे।” 1960 में फ्रेंको और एंटोनियो जेसोलो में समुद्र के किनारे पहली बार मिले थे। उस समय वह केवल 14 वर्ष की थी और फ्रेंको 26 वर्ष के थे। यानी दोनों की उम्र में 12 वर्ष का अंतर था। उन्होंने अपने इंटरव्यू में आगे बताया, “मैं उससे मिलने ओरबासानो जाया करता था। उसके परिवार वालों ने मुझे हमेशा सम्मान दिया।”

चार सालों तक रिश्ते में रहने वाले फुटबॉलर ने इस बात का भी जिक्र किया था कि एंटोनियो को फुटबॉल में कोई दिलचस्पी नहीं थी और ना ही वह कभी फ्रेंको को फुटबॉल खेलते हुए देखने के लिए स्टेडियम गईं। बातचीत में उन्होंने बताया था कि वे दोनों वीकेंड पर अक्सर विसेंज़ा (Vicenza) जाया करते थे। फ्रेंको ने कहा था कि एंटोनियो शादी की जिद कर बैठी थी और मैं अपने करियर को लेकर चिंतित था। इसलिए मैंने उसे थोड़ा इंतजार करने को कहा, लेकिन वह इसके लिए नहीं मानी। इसके बाद एंटोनियो को उसके माता-पिता ने पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेज दिया। फ्रेंको को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।

इंग्लैंड में सोनिया की मुलाकात राजीव गाँधी से हुई। हालाँकि उस दौरान भी वह फ्रेंको के संपर्क में थीं और उन्हें अपनी बात बताती थीं, लेकिन इंटरव्यू से ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने पत्रों में कभी भी राजीव का जिक्र नहीं किया। छुट्टी के दिनों में इटली आने के बाद उन्होंने फ्रेंको को राजीव के बारे में बताया। साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने (राजीव गाँधी) मुझे अपनी माँ इंदिरा गाँधी से मिलने के लिए भारत बुलाया था। फ्रेंको ने कहा कि जब एंटोनियो वापस इटली आई, तो मुझे उसकी बातों से यकीन हो गया था कि अब वह राजीव से ही शादी करेगी।

उन्होंने कहा कि एंटोनियो के इस तरह से छोड़कर चले जाने पर मैं अंदर से टूट गया था। बताया जाता है कि फ्रेंको इसके बाद भी एंटोनियो के परिवार के संपर्क में रहे। राजीव के मिलने के बाद एंटोनियो अपने प्यार को भूल चुकी थीं। वह अब फ्रेंको के पास नहीं आना चा​हती थी। उनके छोड़कर जाने के बाद फ्रेंको ने भी कुछ साल बाद नोरा नाम की महिला से शादी कर ली थी। फ्रेंको की पत्नी नोरा ने कहा था, “मुझे सोनिया से जलन होती थी, क्योंकि उनके सभी दोस्त उनके बारे में बोलते थे। जब मैंने 1964 के अंत में हमारे रिश्ते की शुरुआत की थी, तो मुझे डर था कि एक दिन सोनिया वापस आ जाएगी और मैं फ्रेंको को खो दूँगी!”

अफेयर के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं

ऑपइंडिया ने राजीव गाँधी से मिलने से पहले सोनिया गाँधी और इतालवी फुटबॉलर के बीच कथित अफेयर को लेकर फैक्टचेक किया। इसको लेकर केवल कुछ ही ब्लॉग पोस्ट मिले, जिसमें दावा किया गया है कि यह फ्रेंको द्वारा इतालवी मैगजीन को दिए गए इंटरव्यू का अनुवाद है। इन ब्लॉग में बताया गया है कि सोनिया के राजीव गाँधी से पहले इतालवी फुटबॉलर से प्रेम संबंध थे। हालाँकि, इसके अलावा सोनिया और फुटबॉलर फ्रेंको के अफेयर के बारे में कहीं भी ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह केवल कुछ ब्लॉग पोस्ट थे, जिन्होंने एक दूसरे को कॉपी किया है।

हमें केवल इंटरव्यू से मिलता-जुलता एक रेफरेंस मिला है। वर्ष 2013 में, एक स्वतंत्र पत्रकार, एगिडियो जैम्पिस ने Ilsussidiario.net को एक घटना के बारे में बताया था, जब उन्होंने सोनिया गाँधी (तब एंटोनियो माइनो) को फुटबॉलर के साथ देखा था। जैम्पिस लुसियाना में सोनिया गाँधी के माता-पिता के घर के पास रहते थे। उन्होंने कहा था, “मुझे 1970 के दशक में दिन के समय उनसे हुई मुलाकात याद है, जब वह अपने दोस्त फ्रेंको लुइसन के साथ थीं, जो एक पूर्व विसेंज़ा गोलकीपर थे। मैं उन दोनों की तस्वीर लेना चाहता था, लेकिन वह ऐसा नहीं चाहती थीं। इसलिए मैंने सिर्फ उनकी (फ्रेंको) फोटो खींची, जिन्होंने मुझे अपना ऑटोग्राफ भी दिया। इसके बाद हम सभी चुप हो गए। फिर उन्होंने मुझे बताया कि वह कहाँ पैदा हुई थीं और फिर हमने इस बारे में बात की। हम लगभग एक ही उम्र के थे, हमारे बीच केवल तीन साल का अंतर था।”

यह सच है कि फ्रेंको लुइसन नाम का एक फुटबॉलर था। हालाँकि, रिसर्च के दौरान हमें ना तो कोई ठोस तथ्य मिला और न ही इस स्टोरी का कोई ऑनलाइन संस्करण। वहीं, राजीव गाँधी से मिलने और शादी करने से पहले सोनिया के परिवार को लेकर कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार ने भी कभी खुलकर नहीं बोला है।

ऑपइंडिया ने Hearst publication को एक ईमेल भेजा है, जो कथित रूप से इस इंटरव्यू को प्रकाशित करने वाली Gente मैगजीन का संचालन करती है। अगर उनकी तरफ से हमें इससे जुड़ा कोई भी जवाब प्राप्त होता है, तो हम इस स्टोरी को अपडेट करेंगे। लेकिन अभी तक ऑपइंडिया न तो इन दावों की पुष्टि कर सकता है और न ही इससे इनकार कर सकता है कि राजीव गाँधी से पहले सोनिया गाँधी ने एक इतालवी फुटबॉलर को डेट किया था।

‘कैंपस को राजनीतिक मंच न बनाएँ’: उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राहुल गाँधी के कार्यक्रम को अनुमति देने से हाई कोर्ट का इनकार, कॉन्ग्रेस नेता पर CM की बेटी भी बरसी

उस्मानिया यूनिवर्सिटी में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के कार्यक्रम को अनुमति देने से तेलंगाना हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि यूनिवर्सिटी कैंपस का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी कॉन्ग्रेस नेता को इजाजत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी कविता ने भी राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए उनकी यात्रा का मकसद पूछा है।

हाई कोर्ट ने बुधवार (4 अप्रैल 2022) को राहुल गाँधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को यूनिवर्सिटी काउंसिल के प्रस्ताव का उल्लंघन बताया। मुताबिक राहुल गाँधी का यहाँ 7 मई 2022 (शनिवार) को कायर्क्रम प्रस्तावित था। यूनिवर्सिटी प्रशासन के इनकार के बाद कुछ छात्रों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि राहुल गॉंधी छात्रों से सीधा संवाद करना चाहते हैं। उन्हें इसकी इजाजत दी जानी चाहिए।

लेकिन अदालत ने कहा कि भले इसे सीधा संवाद बताया जा रहा हो, लेकिन इसके पीछे राजनैतिक मंशा से इनकार नहीं किया जा सकता। यूनिवर्सिटी का परिसर राजनैतिक प्लेटफॉर्म की तरह प्रयोग नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालय में राजनैतिक इवेंट करना यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के प्रस्ताव संख्या 6 के नियम 1591 का उल्लंघन है। लिहाजा इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी TRS की विधान पार्षद कविता ने भी राहुल गाँधी के दौरे को राजनैतिक बताया है। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी ने कभी भी तेलंगाना के हित की बात नहीं की। पता नहीं वो यहाँ उस्मानिया यूनिवर्सिटी में क्यों आना चाह रहे? हमने उनसे किसानों के मुद्दे को संसद में उठाने की अपील की थी। लेकिन अब वे राजनीति करने के लिए वारंगल आ रहे हैं।”

गौरतलब है कि उस्मानिया यूनिवर्सिटी ने साल 2017 में कार्यकारी परिषद ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें राजनीति के साथ-साथ गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर कैंपस में रोक लगा दी गई थी। इसके एक साल पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी कैंपस में राजनीतिक और सार्वजनिक बैठकों की अनुमति नहीं देने के आदेश दिए थे। उस

स्टालिन सरकार ने रोकी 500 साल पुरानी शोभा यात्रा तो साधु-संतों ने ‘धर्मद्रोहियों’ को चेताया, कहा- अंग्रेजों ने भी नहीं किया ऐसा, ये हिन्दू विरोधी फैसला

तमिलनाडु के मदुरै में एक बड़ा विवाद छिड़ गया है जब मयिलादुथुराई कलेक्ट्रेट ने ‘पट्टिना प्रवेशम’ के पारंपरिक अनुष्ठान को आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, भक्तों की परंपरा धर्मपुरम अधीनम के द्रष्टा को पालकी में बिठाकर कन्धों पर ले जाने की परंपरा है। दरअसल, शैव मठ के महंत को पालकी में बिठाकर कंधों पर ले जाने की परंपरा पर मयिलादुथुराई कलक्ट्रेट ने मानवाधिकारों का हवाला देकर रोक लगा दी है।

इस निर्णय के खिलाफ मठ के पदाधिकारी और अनुयायियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस आदेश को दरकिनार करके पट्टिना प्रवेशम यात्रा निकालने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि इस बार 22 मई 2022 को यह यात्रा निकलनी है।

मदुरै अधीनम के प्रमुख हरिहर ज्ञानसंबंदा स्वामीगल ने कहा, “धर्मपुरम अधीनम 500 साल पुराना है और पिछले 500 साल से यह (पट्टिना प्रवेशम) चल रहा था। इस साल अचानक ऐसा नहीं हो रहा है, मुझे दुख हो रहा है। यहाँ तक कि अंग्रेजों ने पट्टिना प्रवेशम की अनुमति दी थी।”

वहीं, वैष्णव गुरु मन्नारगुडी श्री सेंडलंगरा जीयर का कहना है, “पट्टिना प्रवेशम एक धार्मिक अनुष्ठान है। इसे रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। यह मठ के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। मैं, मन्नारगुडी जीयर के रूप में इन ‘धर्मद्रोही’ और ‘देशद्रोही’ को उनके हिंदू विरोधी कार्यों के लिए चेतावनी देता हूँ।”

मयिलादुथुराई के राजस्व मंडल अधिकारी जे बालाजी ने प्रतिबंध आदेश जारी किया था और यह भी दावा किया था कि यह प्रथा “मानवाधिकारों का उल्लंघन” है। वहीं अनुवाईयों का कहना है कि 500 साल पुरानी परंपरा को इस तरह बैन करने का अधिकार किसी अधिकारी के पास नहीं है। यहाँ तक कि अंग्रेजों के जमाने में और आजादी के बाद भी किसी मुख्यमंत्री ने इस पर रोक नहीं लगाई थी। यह धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है। वहीं अब इस मामले में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से दखल देने की माँग की गई है।

बता दें कि मदुरै अधीनम को दक्षिण भारत में शैवों का सबसे प्राचीन मठ माना जाता है। ये मठ तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी अम्मन मंदिर के पास स्थित है, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण शिवशक्ति मंदिरों में से एक है। इस मठ में पट्टिना प्रवेशम नाम से एक परंपरा है। इसमें धरमापुरम अधीनम के महंत को पालकी में बिठाकर लोग कंधों पर शोभायात्रा के रूप में ले जाते हैं।

मदुरै अधीनम के श्री हरिहर श्री ज्ञानसंबंदा देसिका स्वामीगल के 293वें महंत ने कहा कि धरमापुरम अधीनम का शैव सम्प्रदाय के लोगों के लिए वही महत्व है जो कैथोलिक ईसाइयों के लिए वेटिकन सिटी का है। मदुरै अधीनम ने कहा कि महंत को पालकी में ले जाना लोगों का अपने गुरु के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वे स्वेच्छा से गुरु को अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। तमिलनाडु सरकार को इस प्राचीन शैव मठ की परंपरा का सम्मान करना चाहिए, ना कि विरोध करते हुए प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।

कहा जा रहा है कि द्रविड़ कड़गम के नेता और वामपंथी इस प्रथा का ये कहकर विरोध कर रहे हैं कि ये मानवाधिकारों के खिलाफ है। द्रविड़ कड़गम के मयिलादुथुराई जिला सचिव के थलपतिराज का कहना है कि इंसानों द्वारा किसी इंसान को पालकी में ले जाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उनके विरोध और उसकी वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति का हवाला देकर मयिलादुथुराई जिले के रेवेन्यू ऑफिसर ने 27 अप्रैल को आदेश जारी करके महंत को पालकी में ले जाने पर रोक लगा दी है। हालाँकि, कार्यक्रम के आयोजन पर पाबंदी नहीं लगाई गई है।

एम्स से छूटते ही बोले लालू यादव – ‘मंदिर में पढ़ो हनुमान चालीसा, इरिटेट क्यों करते हो, देश तोड़ने के लिए हो रहा ये सब’

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता आरजेडी (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने बुधवार (4 मई, 2022) को देश में चल रहे हनुमान चालीसा विवाद (Hanuman Chalisa Row) पर बयान दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जिसे हनुमान चालीसा पढ़ना है तो वो मंदिर में जाके पढ़े। उन्होंने कहा, “कोई क्यों जा रहा है मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने ये तो देश को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। ऐसा करके इरिटेट किया जा रहा है कि वो रिएक्ट करें और दंगा-फसाद हो।”

लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा को लालू प्रसाद यादव ने गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए बहुत ही खराब हो रहा है। इसके साथ ही लालू प्रसाद ने प्रशांत किशोर द्वारा नई पार्टी बनाने के सवाल पर आरजेडी सुप्रीमो ने कहा कि वो (प्रशांत किशोर) पूरा देश घूमे लेकिन वो लौटा दिए गए। अब वहीं पहुँच गए हैं, जहाँ उनका कोई ठिकाना नहीं है।

बेटी मीसा भारती के घर पर रहेंगे लालू प्रसाद

गौरतलब है कि 22 अप्रैल को ही डोरंडा ट्रेजरी मामले में जमानत मिलने के बाद से ही उनकी रिहाई कागजातों के कारण लटक गई थी। बाद में उन्हें 28 अप्रैल को रिहाई का आदेश मिला, लेकिन एम्स के डॉक्टरों से हरी झंडी मिलने का इंतजार था। उन्होंने कहा कि वो अपनी बेटी मीसा भारती के आवास पर रहेंगे। उन्हें डॉक्टरों ने पानी कम पीने और संयम बरतने की सलाह दी है। लालू के मुताबिक, वे डॉक्टरों के कहे अनुसार ही दिनचर्या का पालन करेंगे। दो सप्ताह के बाद उनकी फिर से जाँच होगी। हालाँकि, उससे पहले वो पटना जाएँगे।

मौलाना से सुनिए मोतियों वाला बईदक के बारे में, जिसमें से निकलती है 130 फ़ीट की हूर, कहा- बाल हिलाने से जन्नत में जलते हैं सर्चलाइट

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुस्लिम औरतों को अपने शौहर के जिस्म की आग बुझाने की बात कही जा रही थी। वहीं अब एक और वीडियो सामने आया है जिसमें 130 फ़ीट के हूरों की बात कही जा रही है। वीडियो में एक बैनर भी दिख रहा है जिसपर मौलाना का नाम तारिक जमील लिखा हुआ है। हालाँकि, नाम सही है या नहीं इसका भी कोई दावा हम नहीं करते हैं।

इस वीडियो को नवीन त्रिपाठी ने शेयर करते हुए लिखा है, “वल्लाह… जन्नत की इन्हीं 130 फिट लम्बी 72 हूरों के चक्कर में तो बेचारे जगह-जगह फटते रहते हैं।”

वायरल वीडियो में मौलाना कहता सुनाई दे रहा, “जन्नत में एक नहर है जिसका नाम है बईदक, वह मोतियों से कवर है वह, उसके अंदर मुसकामबर जाफ़रान का हूर बहता है। जब अल्लाह किसी जन्नत की लड़की को बनाने का हुक्म फरमाता है तो अपने नूर की तजल्ली डालता है। पूरी 130 फीट की लड़की निकल कर बाहर आ जाती है। फुल ड्रेस्ड, जन्नत की हूर यह नहीं कि किसी माँ के पेट में अमल होता है। फिर वह नौ महीने के पैदा होती है, फिर वह फीडर लेती है। फिर वह लुढ़कती-ढुढ़कती बड़ी होती है। यह हमारे लिए है।”

वीडियो में आगे जन्नत के हूर क्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया मौलाना ने तसल्ली से समझाई है। वह आगे कहता है, “जन्नत की लड़की सिर्फ सूरज को उंगली दिखा दे तो सूरज नजर नहीं आएगा। क्योंकि जन्नत की हूर का जो साइज है 130 फ़ीट है। सैयद जहिर को तो उठा कर जेब में ही डाल लेगी और यह कहेगा कि केम छो, केम छो… वह कहेगी मुझे तो गुजराती समझ ही नहीं आती अरबी बोलो।”

आगे कहता है, “अल्लाह ताला कहेगा कि चलो मेरे बन्दों को जन्नत का गीत सुनाओ और जन्नत में पहला गाना ही 70 साल का होगा, हूर का चेहरा और 70 बरस तक हिल नहीं सकेगा…. उसके इतने लम्बे बाल कि जब सर हिलाती है तो पूरे जन्नत में सर्च लाइट जल जाती है।”

हालाँकि, थोड़ी सी पड़ताल करने पर यह वीडियो पुराना नजर आ रहा है। यू ट्यूब पर कई जगह यह वीडियो 2020 में ही अपलोड हुआ नजर आ रहा है। जो इसके पहले भी कई बार वायरल हो चुका है। यू ट्यूब पर जो वीडियो है वह करीब तीन मिनट से ज़्यादा का है। जिसे आप नीचे देख सकते हैं।

बता दें कि कुछ दिन पहले भी एक और पुराना वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वक्ता के रूप में मजलिस को सम्बोधित करने वाला कोई और नहीं बल्कि मौलाना जरजिस अंसारी है। जिसके इससे पहले भी कई विवादास्पद वीडियो वायरल हो चुके हैं।

इस वीडियो में मौलाना जरजिस को कहते सुना जा सकता है, “यदि बीवी को बच्चा हो रहा हो और ऊँटनी पर भी बैठी हो तो भी जचगी के वक्त, बच्चे की पैदाइश का वक्त करीब हो, तो भी अल्लाह के नबी ने फ़रमाया है कि उस वक़्त भी यदि तुम्हारा शौहर हमबिस्तरी को बुलाए, तुम्हारा फायदा उठाना चाहे तो उस वक़्त भी अपने शौहर के पास जाना पड़ेगा। इसलिए कि उसके दिल में लगी आग को तेरे अलावा कोई बुझा नहीं सकती।”

मौलाना ने इसी वायरल वीडियो में आगे कहा, “यदि उसके आग को तूने नहीं बुझाया तो तेरा शौहर गलत काम में पड़ सकता है। इधर-उधर जा सकता है, उसके चिलमन में आग लग सकती है। वो गलत राह पर जा सकता है। फ़रमाया कि औरत को इस हाल में भी अपने शौहर के पास आना होगा। और इस पोज़िशन में भी वह अपने शौहर को जिस्म का फायदा उठाने से नहीं रोक सकती। उसके अरमान को पूरा करोगी, उसके मकसद को पूरा करोगी इसमें ना-नू नहीं होना चाहिए।”

हालाँकि, यह वीडियो भी 2021 का बताया जा रहा है, क्योंकि फेसबुक के कई इस्लामिक पेजों पर इसे सितम्बर 2021 में अपलोड किया गया था। यहाँ वो पूरा वीडियो भी देख सकते हैं। जिसका एक हिस्सा एक बार फिर अब 2022 में ईद के मौके पर वायरल हो रहा है।

सचिन वाजे नहीं, ये है मनसुख हिरेन हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड: एंटीलिया केस में NIA का खुलासा, हत्या के लिए दिए गए थे ₹45 लाख

महाराष्ट्र के मुंबई (Mumbai) में मनसुख हिरेन (Mansukh Hiren) की हत्या के मामले में NIA ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) को बताया कि इस खेल का असली मास्टरमाइंड मुंबई पुलिस का पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा (Encounter Specialist Pradeep Sharma) है।

NIA ने अपने हलफनामे में कहा कि शर्मा के पहने पर ही पुलिस अधिकारी सचिन वाजे (Sachin Waze) ने यह साजिश रची और हिरेन को मारकर फेंक दिया। दरअसल, रिलायंस समूह (Reliance Group) के मालिक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के घर ‘एंटीलिया’ के पास से विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो बरामद हुई और बाद में इस गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी में मिला था।

न्यायाधीश एएस चंडूरकर और जीए सनप की खंडपीठ के समक्ष दायर अपने हलफनामे में NIA ने कहा कि हिरेन एंटीलिया विस्फोटक केस का सारा राज जान गया था। इसलिए प्रदीप शर्मा ने उसे रास्ते से हटाने के लिए कहा था। उसने मामले के अन्य आरोपितों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय की इमारत में कई मीटिंग की थी और वहाँ मनसुख हिरेन को मारने की साजिश रची थी। हिरेन की हत्या के बाद इस मामले में गिरफ्तार सचिन वाजे ने प्रदीप शर्मा को 45 लाख रुपए दिए थे, जो कुछ हत्यारों में बाँटे गए थे।

NIA ने प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि उसने आपराधिक साजिश, हत्या और आतंकी कृत्यों के अपराध किए हैं। इस दौरान NIA ने दलील दी कि शर्मा उस गैंग का सक्रिय सदस्य था, जिसने एंटीलिया विस्फोटक केस की साजिश रची थी।

बता दें कि इस मामले में NIA ने प्रदीप शर्मा को 17 जून 2021 को उसके अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया था। सचीन वाजे शर्मा को अपना गुरु मानता था और उसी के आदेश पर वह काम करता था। कहा जाता है कि शर्मा के मोबाइल फोन, लैपटॉप से ही NIA को मनसुख के हत्यारों को पैसे ट्रांसफर करने के सबूत मिले थे।

प्रदीप शर्मा ठाणे के एंटी एक्सटॉर्शन सेल में काम करता था। जब 1990 के दशक में मुंबई से अंडरवर्ल्ड के सफाए के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम बनी, तब इसमें शर्मा को शामिल कर लिया गया था। इसके बाद वह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट नाम से विख्यात हो गया था। बाद में उसने ​शिवसेना के टिकट पर चुनाव भी लड़ा। इस मामले में विनायक शिंदे भी शर्मा का बेहद खास रहा है।

बता दें कि 25 फरवरी 2021 को मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से लदी एक स्कॉर्पियो मिली थी। यह गाड़ी मनसुख हिरेन की थी। शर्मा के कहने पर वाजे ने मनसुख को इस अपराध का जिम्मा लेने का दबाव डाला था, लेकिन मनसुख इसके लिए तैयार नहीं था। बाद में 5 मार्च 2021 को मनसुख की लाश एक छोटी नदी में मिली थी।

बॉयफ्रेंड ने घर में कैद रखा, रोज करता था बलात्कार: अभिनेत्री का खुलासा, कहा – मना करने पर हँसता था, बड़ा और लंबा होने के कारण डर गई

अफ्रीकी देश घाना की मशहूर नॉलीवुड एक्ट्रेस जुलिएट इब्राहिम ने अपने साथ हुए रेप और बर्बरता की कहानी दुनिया के सामने बयाँ की है। एक्ट्रेस ने बताया कि पूर्व में उनका जो ब्वॉयफ्रेंड था वो उनके साथ प्रतिदिन रेप करता था। उसने उन्हें कई दिनों तक अपने घर में कैद कर रखा था, जब तक कि जुलिएट की बहन सोनिया ने उन्हें रेस्क्यू नहीं कर लिया।

चूड जिडोनवो को दिए एक इंटरव्यू में 36 वर्षीय एक्ट्रेस ने खुलासा किया कि उनका पिछला बॉयफ्रेंड उनके साथ रोज रेप करता था और जब एक्ट्रेस इसका विरोध करती तो वो हँसते हुए कहता कि हम दोनों तो आपसी संबंध में जुड़े हैं। फिल्म स्टार ने कहा, “मैंने उससे कहा कि उसने जो किया वह बलात्कार था तो उसने कहा, लेकिन हम रिश्ते में थे।”

एक्ट्रेस ने आगे कहा, “लेकिन क्या मैं तैयार थी, यही सवाल था, क्या मैंने कहा था कि मैं मूड में थी? मैं कहता रही कि नहीं, छोड़ दो, छोड़ दो, लेकिन तुमने मुझे नीचे दबाया और तुम जो करना चाहते थे वो तुमने किया। और तुम मुस्कुराते हुए कह रहे हो कि चिंता मत करो।”

जुलिएट कहती हैं कि इसी कारण वो इस रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थीं। वो कहती हैं कि उसने मुझे कई दिनों तक अपने घर में कैद कर रखा था। वो तो मेरी बहन सोनिया मुझे ढूँढने आई तो मुझे बचाया। एक्ट्रेस ने कहा, “मैं डर गई थी, मैं घबरा गई क्योंकि वह मुझसे बड़ा और लंबा था। उसने कई दिनों तक मेरा रेप किया।”

मैं रो रही थी और वो मुझे चूम रहा था

एक्ट्रेस के मुताबिक, उनका ब्वॉयफ्रेंड जब उनके साथ रेप करता था तो वो रोती रहती थीं, लेकिन फिर भी वो उसे लगातार चूमता रहता था। इसका अर्थ ये है कि वो एक बलात्कारी था और मुझे उसे छोड़ना पड़ा। जुलिए ने अपने एक्स ब्वॉयफ्रेंड के बारे में बताते हुए कहा, “मैं डर गई थी, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, क्योंकि ये आदमी मुझसे कहीं अधिक लंबा था। वो आपको दीवार से ऊपर उठा सकता है। और जरा कल्पना कीजिए कि यह हर दिन था। वह हर दिन कुछ न कुछ करना चाहता था। यही बलात्कार है।”

इसके साथ ही एक्ट्रेस ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएँ अगर इसकी शिकायत करना चाहती हैं तो कीजिए। अगर आपका पति आपको ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहा है जब आप मूड में नहीं हैं तो यह बलात्कार है और मैं इन पुरुषों से कहती हूँ कि आप एक महिला को मजबूर नहीं कर सकते।

रॉबर्ट वाड्रा के बहनोई ने नाइटक्लब पार्टी में राहुल गाँधी के साथ दिखी महिला को लेकर फैलाया झूठ, कहा – वो सरस्वती खत्री हैं

केरल के वायनाड से कॉन्ग्रेस के सांसद और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) काठमांडू के एक नाइट क्लब में पार्टी के दौरान एक लड़की के साथ देखे गए थे, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया था कि वो लड़की चीनी राजदूत होऊ याँकी हैं। लेकिन बाद में ‘इंडिया टुडे’ के फैक्ट चेक के बाद तहसीन पूनावाला (Tehseen Poonawalla) ने उसे नेपाल की फेमस सिंगर सरस्वती खत्री बताते हुए बीजेपी पर नेपाली महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

पूनावाला ने सरस्वती खत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर में एक नेपाली महिला है। वही महिला #RahulGandhi के साथ है। एक नेपाली महिला के लिए बीजेपी ने जिस जातिवादी भाषा का इस्तेमाल किया वह चौंकाने वाला और घृणित था! नेपाली महिला को पुरुषों को हनी ट्रैप करने वाली चीनी राजदूत बताया गया! क्या माननीय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विदेश मंत्री इसके साथ ठीक हैं?”

प्रियंका गाँधी के बहनोई तहसीन पूनावाला के इस ट्वीट की हवा निकालते हुए The Hawk Eye नाम के यूजर ने तर्क दिया, “तहसीन पूनावाला से सरस्वती खत्री बता रहें हैं, उसने एक ही रात में अपने बाल कैसे बढ़ा लिए। पूनावाला गलत पहचान पर शोर-शराबा कर रहे हैं और इसका बचाव कर रहे हैं!! यह किस प्रकार की प्रो-लेवल भक्ति है?” इसके साथ ही यूजर ने ये भी स्पष्ट किया कि जिस तस्वीर को अब ‘LOD लेडी’ के रूप में INC बॉट्स में प्रसारित किया गया है, वह किसी और ने नहीं बल्कि खुद गायिका सरस्वती खत्री ने जारी की है। पीएम मोदी ने उनके गीत ‘वैष्णव जन तो’ के लिए अतीत (2018) में उनकी प्रशंसा की थी।

एक यूजर ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “सचमुच, पूरी कॉन्ग्रेस ब्रिगेड ने सरस्वती खत्री की तस्वीर को ‘बार लेडी’ के रूप में शेयर करना शुरू कर दिया है। वे सब कल तक हाऊ यांकी की ग़लत पहचान का ढोल पीट रहे थे!! क्या सर्कस है?

नेपाल क्यों गए थे राहुल गाँधी

इंडिया टुडे की फैक्ट चेक रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गाँधी नेपाल में अपनी दोस्त सुमनिमा उदास (Sumnima Udas) की शादी में शामिल होने के लिए काठमांडू गए हैं। काठमांडू के लॉर्ड ऑफ ड्रिंक्स पब में कॉन्ग्रेस नेता पार्टी के लिए गए थे। इस बात की पुष्टि खुद सरस्वती खत्री के ट्वीट से भी होती है कि राहुल गाँधी नेपाल में दोस्त की शादी में गए थे। लेकिन उनके साथ वो महिला कौन थी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

गौरतलब है कि 3 मई, 2022 को दो वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी एक पब में एक महिला के साथ देखे गए थे। इसके बाद नेटिजन्स ने ये संभावना जताई कि वो लेडी कोई और नहीं बल्कि चीनी राजदूत होऊ यांकी हैं।

ईद के दौरान ड्यूटी से लौट रहे पुलिसकर्मी सतेंद्र को वसीम और साथियों ने बुरी तरह मारा, दी अभद्र गालियाँ: गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती, तीनों गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor, Uttar Pradesh) में ईद के दिन नमाज पढ़कर लौट रहे तीन युवकों ने एक सिपाही को इतना मारा कि उसकी हालत गंभीर हो गई है। सिपाही सतेंद्र कुमार को मुरादाबाद के कॉसमॉस हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहीं, पुलिस ने मारपीट करने वाले फैजान, मोहम्मद साद और वसीम को गिरफ्तार कर लिया है।

ईद के दिन 3 मई को आरक्षी सतेंद्र कुमार अपनी ड्यूटी खत्म होने के बाद मोटरसाइकिल से बुढ़नपुर से थाना स्योहारा की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान ईकड़ा पुल पर किसी वाहन को बचाते समय सतेंद्र की मोटरसाइकिल अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर गए। इस दौरान उनके चेहरे पर चोट भी आई और वे लहूलुहान हो गए।

पुलिस का कहना है कि इसी दौरान मोहम्मद फैजान (19) पुत्र अब्दुल रहीम, मोहम्मद साद (20) पुत्र मतलूब अहमद और वसीम (21) पुत्र नसीम अहमद वहाँ आए और सतेंद्र के साथ गाली-गलौज करने लगे। इस दौरान तीनों ने पुलिसकर्मी के साथ मारपीट भी की। इसके बाद सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस घायल सतेंद्र को सीएचसी स्योहारा में भर्ती कराया, जहाँ से उन्हें मुरादाबाद रेफर कर दिया गया।

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में पुलिसकर्मी बाइक पकड़ कर खड़ा है और ऐसा लग रहा है जैसे किसी नशे में है। इसी दौरान किसी ने उसे लात मार दी और वह सड़क पर गिर गया। हालाँकि, पुलिस रिकॉर्ड में नशे की बात का जिक्र नहीं किया गया है।

पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपित बिजनौर जिले के थाना नूरपुर के नई बस्ती राजा का ताजपुर के रहने वाले हैं। तीनों के ऊपर IPC की धारा 332, 307, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने SSP बिजनौर IPS धर्मवीर से बात की और उन्होंने कॉन्स्टेबल द्वारा शराब पीने जैसी किसी भी आरोप से इंकार किया है। उन्होंने कॉन्स्टेबल को चोटिल बताया और कहा कि चोट लगने से बड़े-बड़े लोग नहीं खड़े हो पाते। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शराब भी पीया होगा तो किसी को कोई अधिकार नहीं है कि वह कानून अपने हाथ में ले।