Home Blog Page 2786

‘तेज प्रताप यादव ने कमरे में ले जाकर नंगा कर के पीटा, भाई तेजस्वी को भी जम कर दी गालियाँ’: RJD महानगर अध्यक्ष

आए दिन अपनी हरकतों को लेकर चर्चा में बने रहने वाले लालू के लाल तेज प्रताप यादव नए कारणों के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन पर अपनी ही पार्टी के महानगर अध्यक्ष रामराज यादव को कमरे में बंद कर और नंगा कर बुरी तरह से पीटने का आरोप लगा है। रामराज यादव का आरोप है कि वो तेजस्वी यादव के खेमे का समर्थन करते हैं, इसलिए तेज प्रताप यादव ने उन्हें नंगा कर पीटा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जाता है कि ये घटना 22 अप्रैल 2022 को घटी। उस दिन पटना में राबड़ी देवी के आवास में इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। उसी दौरान तेज प्रताप यादव ने उन्हें कमरे में बंद कर पीटा। रामराज के मुताबिक, तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को भी भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं। रामराज ने कहा, “इफ्तार पार्टी के दिन मुझे पार्टी के द्वारा 3 नंबर पंडाल की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन करीब 3 जब मैं 10 नंबर पंडाल पर अपने महानगर के पदाधिकारियों को ड्यूटी पर लगा रहा था तो तेज प्रताप यादव मुझे कमरे में लेकर गए। उसके बाद जो सुलूक मेरे साथ किया गया, उससे आज भी मेरा रोया खड़ा हो जाता है…मुझे धमकी दी गई तो आरजेडी छोड़ दो, अन्यथा 10 दिन में तुम्हें गोली मरवा देंगे।”

रामराज ने आगे कहा, “तेज प्रताप यादव ने एक खास अपराधी से गोली मरवाने की धमकी दी। मैंने उन्हें कहा कि 10 दिन के बजाय मुझे 10 मिनट में मुझे गोली मरवा दीजिए। उसके बाद मुझे कमरे में बंद कर 10 सर्कुलर रोड पर मारा गया। तेज प्रताप ने लालू यादव, तेजस्वी यादव और जगदानंद के बारे में अपशब्द बोला। उन्होंने मुझे बताया कि आरजेडी में होना ही तेरी सबसे बड़ी गलती है।”

आरजेडी नेता ने अपनी व्यथा बताई और पूछा कि आखिर उन्होंने क्या गलती की थी कि उनके माँ-बहन को गाली दी और उन्हें पीटा। आखिर 18 मिनट के अंदर 500 गालियाँ क्यों दी गईं? बहरहाल, रामराज ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

अनिल सम्राट से भी मारपीट

‘हिंदुस्तानी आवामी पार्टी’ के प्रवक्ता दानिश रिजवान के मुताबिक, 22 अप्रैल को तेज प्रताप यादव ने दो नेताओं के साथ मारपीट की थी। उन्होंने भोजपुर से आरजेडी के उम्मीदवार रहे अनिल सम्राट से भी मारपीट की थी।

तेज प्रताप ने आरोपों से किया इनकार

हालाँकि, रामराज के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उनका दावा है कि ये सब जगदानंद सिंह और सुनील सिंह के इशारे पर किया जा रहा है।

‘नीची जाति वाला कहा, गाली बकी, पानी तक न दिया’: नवनीत राणा का महाराष्ट्र पुलिस पर भेदभाव का आरोप, लोकसभा स्पीकर को पत्र

मुंबई में हनुमान चालीसा को लेकर हुए बवाल के बाद गिरफ्तार अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा। पत्र में सांसद ने 23 अप्रैल, 2022 को खार पुलिस स्टेशन में जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।

नवनीत राणा ने यह भी कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई है, क्योंकि वह जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करना चाहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे ने हिंदुत्व के सिद्धांतों को धोखा दिया है।

राणा ने जोर देकर कहा, “मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊँगी और उनके आवास के बाहर हनुमान चालीसा का जाप करूँगी। यह किसी धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था।”

अमरावती सांसद ने कहा कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपने और अपने पति रवि राणा के साथ ‘हनुमान चालीसा’ का जाप करने के लिए आमंत्रित करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी कार्रवाई सीएम के खिलाफ नहीं थी।

यह महसूस करने के बाद कि उनकी कार्रवाई से कानून-व्यवस्था में बाधा पैदा हो सकती है, नवनीत राणा ने अपनी योजना वापस ले ली। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें उनके घर में कैद कर लिया। उन्होंने पुलिस हिरासत में अपने साथ हुए जातिवादी व्यवहार के बारे में बताया।

नवनीत राणा ने चिट्ठी में लिखा, “मुझे 23 तारीख को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। 23 अप्रैल को मुझे पूरी रात पुलिस स्टेशन में ही गुजारनी पड़ी। रात को मैंने कई बार पीने के लिए पानी माँगा, लेकिन रातभर मुझे पानी नहीं दिया गया।” नवनीत ने आगे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति की हूँ, इसलिए वह मुझे उसी ग्लास में पानी नहीं दे सकते, जिसमें वे लोग पीते हैं। मतलब मुझे मेरी जाति की वजह से पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। मैं यह जोर देकर कहना चाहती हूँ कि मेरी जाति की वजह से मुझे बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखा गया।”

उसने दावा किया कि पुलिस ने उसे पानी देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह SC समुदाय से थी। राणा ने कहा, “इसके अलावा, जब मुझे रात में बाथरूम जाना था तो पुलिस कर्मचारियों ने मेरी माँगों पर ध्यान नहीं दिया। कहा गया कि नीची जात वालों को वे (पुलिस स्टाफ) अपना बाथरूम इस्तेमाल नहीं करने देते हैं। मुझे फिर से गंदी भाषा में गाली दी गई।” वह वर्तमान में भायखला महिला जेल में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है।

हनुमान चालीसा विवाद

सांसद नवनीत राणा और उनके पति विधायक रवि राणा को पहले मुंबई पुलिस ने सीएम उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालाँकि बाद में उन्होंने अपनी योजना वापस ले ली थी, लेकिन दोनों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर देशद्रोह का भी आरोप लगाया गया।

‘मस्जिद के सामने नहीं की कोई नारेबाजी, राज्य अपने आँख-कान बंद न करे’: मुंबई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकारा, 3 लोगों को दी जमानत

मुंबई की एक अदालत ने हाल में उन तीन लोगों को जमानत दी जिन्हें कुछ दिन पहले ये आरोप लगा कर पकड़ा गया था कि उन्होंने मस्जिद के बाहर ढोल बजाया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए माना कि अजान के दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं हुई थी इसलिए आरोप लगा कर उन लोगों से पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है।

लाइव लॉ के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसयू बघेले ने कहा, “यह सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए कौन से कदम उठाए जाएँ। राज्य को अपनी आँखें और कान बंद नहीं करने चाहिए, जिससे कोई भी निर्दोष व्यक्ति अपमानित हो। भारत का संविधान कहता है कि आपसी भाईचारे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

पुलिस के अनुसार, “एक समुदाय द्वारा धार्मिक जुलूस का आयोजन किया गया था। आवेदक और अन्य इस धार्मिक जुलूस का हिस्सा थे। उन पर यह आरोप लगाया गया है उन्होंने अन्य समुदाय के लोगों को परेशान करने के लिए जानबूझकर अज़ान के समय मस्जिद के सामने ढोल बजाया। यही नहीं धार्मिक जुलूस निकालने वालों पर दंगा भड़काने और उकसाने का आरोप भी लगाया गया है। राज्य ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए थे और यह पता लगाने को कहा था कि कि क्या यह अपराध पूर्व नियोजित था। इसके लिए उन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।”

अदालत ने कहा, “इन आरोपों को देखते हुए हम कह सकते हैं कि आवेदकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। आवेदकों से पूछताछ करके इस समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला।” अदालत ने यह भी कहा कि एक समुदाय ने दूसरे समुदाय के खिलाफ कोई नारा नहीं लगाया, ऐसे में दो समुदायों के बीच किसी भी प्रकार की कोई नफरत और द्वेष पैदा नहीं हुआ। इन सबको को देखते हुए हमने निर्णय लिया है कि आवेदक अग्रिम जमानत के हकदार हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “राज्य को किसी भी घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि सामंजस्य बन सकें। इसे विवेकपूर्ण तरीके से हल करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि दो समुदायों में धार्मिक आस्था को लेकर किसी भी प्रकार की नफरत पैदा ना हो सके। संविधान में भी आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना सर्वोपरि माना गया है।”

सरकार कर देगी बहुविवाह को अवैध, मुस्लिम पुरुष जल्द करें दूसरा निकाह: जामिया हमदर्द की ट्रांसजेंडर प्रोफेसर डॉ अक्सा शेख

सोशल मीडिया के जरिए समुदाय विशेष के अंदर सरकार और कानून के खिलाफ नफरत भरने का काम इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा सरेआम किया जाता रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण जामिया हमदर्द की प्रोफेसर डॉ अक्सा शेख के ट्वीट हैं। अपने थ्रेड में अक्सा ने समझाया है कि कैसे देश में फैले इस्लामोफोबिया से निपटने का एक मात्र तरीका है कि सिंगल लोग जल्द से जल्द निकाह करें और जिन पुरुषों का निकाह हो गया है वो बहुविवाह करें।

डॉ अक्सा का मानना है कि मुस्लिम पुरुषों को दूसरी शादियाँ कर लेनी चाहिए इससे पहले कि बहुविवाह को सरकार अवैध घोषित कर दे। अपने सिलसिलेवार ट्विट्स में उन्होंने समझाया है कि कैसे आए दिन मुस्लिमों पर हमले हो रहे हैं। इसलिए अंतरधार्मिक विवाह जैसी चीज नहीं करनी चाहिए। हालाँकि, अंत में वह लिखती हैं कि बहुविवाह भारत में अब भी मुस्लिमों के लिए वैध है। मगर ये ज्यादा समय नहीं रहेगा इसलिए मुस्लिम पुरुषों को जल्द से जल्द इसे करना चाहिए।

अपने ट्वीट में अक्सा लिखती हैं, “प्रिय मुस्लिमों। निकाह कर लो। ठीक है, ये आपको थोड़ा विवादित सुनाई पड़ रहा है, लेकिन मुझे ये कहना पड़ रहा है। यही सही समय है। आज चाहे आप गाँव में हों या दिल्ली में, सरकारी नौकरी में हों या दिहाड़ी मजदूर, भारत भर में इस्लामोफोबिया फैल रहा है…कोई अकेला दिन नहीं जाता जब हम पर नए तरीकों से हमले न होते हों। हर घर में बात होती है-इन सबसे कैसे निपटा जाए। समुदाय के तौर पर हमें अपनी सुरक्षा और कल्याण के लिए बहुत उपाय करने की आवश्यता है। मैं इन्हें लिख रही हूँ।”

अपने ट्वीट में वह लिखती हैं, “सबसे पहले करो शादी। हाँ! मैं हर मुस्लिम से कहती हूँ कि अगर वो तैयार हैं तो वो निकाह करें। इससे उनमें जिम्मेदारी, अपनेपन और देखभाल की भावना आएगी। इसके अलावा निकाह बहुत सादे तौर पर करें। इसमें ज्यादा खर्चा न करें। आपको ये जमापूँजी भविष्य के मुश्किल समय में काम आएगी जो कि जल्द ही हमारा भविष्य हो सकती है। ज्यादा घमंडी या चुगलखोर मत बनो और उन मानदंडों को देखो जो मायने रखते हैं, फिर अपने लिए एक व्यक्ति चुनो।

वह लिखती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो ये सारी बातें करेंगी मगर परिस्थिति इतनी विकट है कि मुश्किल राय बनानी पड़ेगी। किसी भी अंतरधार्मिक रिश्तों के चक्कर में न पड़ें। इसे लेकर बहुत बवाल होता है। खासकर तब जब इसमें मुस्लिम आदमी शामिल हों। परिणामस्वरूप अगर आप इसमें जिंदा बचे तो आपको और आपके परिवार को शोषण झेलना होगा। कुछ समय जेल में बीतेगा। इसलिए इस फैसले को लेने से पहले सोचें।

मुस्लिमों को तीन तलाक, दहेज, बहुविवाह पर सलाह

इसके साथ अक्सा मुस्लिमों को सलाह देती हैं कि वह लोग तीन तलाक देने की कोशिश भी न करें। जो लोग इसे वैध नहीं मानते हैं वो उन्हें जेल में डाल सकते हैं। इसी तरह दहेज भी इस्लाम में हराम है। अपना मेहर दें और गैर मुस्लिमों के साथ रिश्ते में न फँसे। कई अकॉउंट हनी ट्रैप में फँसाए जाने के लिए बनते हैं, जिनसे पैसा वसूली, धमकी और शोषण को अंजाम दिया जाता है। हमारे पास कुछ अच्छी चीजें हैं करने को। अक्सा शेख लिखती हैं, “बहुविवाह भारत में मुस्लिमों के लिए अब भी वैध है।  लेकिन ये ज्यादा समय नहीं रहेगा। अगर आप मुस्लिम पुरुष हैं जो अपने बीवी से दूसरी शादी पर बात करें और हो सके तो किसी विधवा, तलाकशुदा या ट्रांसजेंडर महिला से निकाह करें।” 

मेडिकल पढ़ाई से भी डॉ अक्सा को दिक्कत

गौरतलब है कि अक्सा शेख खुद एक ट्रांसवुमन हैं और जामिया हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। अपने पुराने ट्वीट में अक्सा ने मेडिकल पाठ्यक्रम पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि इसमें बहुत ज्यादा एनाटॉमी और बायोकेमेस्ट्री पढ़ाया जाता है। उन्होंने बयान में कहा था कि सेक्सुअल और जेंडर माइनॉरिटी के बारे में टेक्स्टबुक से ज्यादा इंस्टाग्राम पर पढ़ाया जाता है।

असम पुलिस ने अलकायदा के बड़े मॉड्यूल को तबाह किया, अब तक 16 आतंकी गिरफ्तार: CM सरमा ने की सराहना

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार (25 अप्रैल 2022 ) को बांग्लादेश के आतंकवादी समूह अंसार-उल बांग्ला टीम (ABT) के कई मॉड्यूल पर नकेल कसने के लिए असम पुलिस की सराहना की। उन्होंने ट्विटर पर बताया कि असम पुलिस ने अब तक संगठन से कुल 16 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि ABT एक इस्लामी आतंकी संगठन है, जिसका भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) में अल कायदा से संबंध है। हालाँकि यह 2007 में बांग्लादेश में जमातुल मुस्लेमिन के रूप में उभरा, लेकिन समूह ने 2013 में खुद को एबीटी के रूप में पेश किया।

सीएम ने ट्वीट किया, “लंबे समय से चले आ रहे ऑपरेशन में असम पुलिस ने अंसारुल बांग्ला टीम/अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप के कई मॉड्यूल पर कार्रवाई की है। यह एक बड़ी खुफिया सफलता है और असम पुलिस के साहस और समर्पण का एक सच्चा उदाहरण है। अब तक कुल 16 गिरफ्तारियाँ हुई हैं।”

18 अप्रैल को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विश्वास जताते हुए कहा था कि उनके राज्य में जिहादी नेटवर्क समाप्त हो जाएगा। सरमा ने कहा था, “जिहादियों के बारे में जानकारी मिली है और हम इस पर काम कर रहे हैं। हमें केंद्र से खुफिया जानकारी मिल रही है। जिहादी नेटवर्क को खत्म कर दिया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल को असम के बारपेटा जिले में पुलिस ने अल कायदा से जुड़े बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया। सभी छह पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये सभी असम के बारपेटा जिले के निवासी हैं।

बारपेटा में इस तरह की यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। मार्च में, जिले के अधिकारियों ने सैफुल इस्लाम (जिसे मोहम्मद सुमन और हारुन राशिद के नाम से भी जाना जाता है) नामक एक बांग्लादेशी नागरिक और ABT से संबंध रखने वाले चार अन्य लोगों को हिरासत में लिया था।

मार्च में गिरफ्तारी के बाद, मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को स्थानांतरित कर दिया गया था। NIA ने कार्यभार सँभालने के बाद सैफुल इस्लाम और चार अन्य के खिलाफ धारा 120 बी, 121, 121 ए, धारा 17, 18, 18 बी, 19, 20 और पासपोर्ट अधिनियम की धाराएँ, विदेशियों के लिए भारत में अवैध प्रवेश और पासपोर्ट नहीं दिखाने के आरोप के तहत FIR दर्ज की थी।

जाँच के दौरान पता चला कि बांग्लादेशी नागरिक सैफुल इस्लाम ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और बारपेटा में ढकलीपारा मस्जिद में अरबी भाषा के शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, इस्लाम ने बारपेटा को ‘जेहादी’ काम और अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों की अवैध गतिविधियों के बेस के रूप में विकसित करने का लक्ष्य दिखाकर चार अन्य लोगों को ABT मॉड्यूल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। 

एसपी अमिताभ सिन्हा ने कहा, “वे यहाँ लोगों को बहका रहे हैं और कट्टर बना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि उनमें से एक कुख्यात इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हिस्सा था, जिस पर केंद्र सरकार जल्द ही किसी भी समय प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।

72 दिन से दरभंगा से गायब है 14 साल की बच्ची, पीड़ित परिवार की गुहार अनसुनी: पुलिस का गजब लॉजिक, कहा- फोन बंद आ रहे इसलिए खोजने में हो रही देरी

बिहार के दरभंगा जिले से 14 साल की एक बच्ची फरवरी से ही गायब है। पीड़ित परिवार सोशल मीडिया से लेकर हर जगह गुहार लगा रहा है, लेकिन पुलिस के हाथ 72 दिन बाद भी खाली हैं। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में नामजद मामला दर्ज करवाया है। उनका दावा है कि उन्हें आरोपितों की ओर से लगातार धमकी दी जा रही है। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस पर भी एक आरोपित को पकड़कर छोड़ने का आरोप लगाया है। हालाँकि पुलिस ने इस दावे को नकार दिया है।

इस संबंध में 13 फरवरी 2022 को लड़की को अगवा करने की शिकायत दर्ज हुई थी। पीड़ित पक्ष ने 4 लोगों को नामजद किया है।

नाना के घर से अपहरण

जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपित और लड़की दोनों नाबालिग हैं। दोनों मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। पीड़िता घोघरडीहा थाना क्षेत्र की रहने वाली है, जबकि आरोपित फुलपरास थान क्षेत्र से है। पीड़ित पिता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, “मेरी 14 साल की नाबालिग बेटी अपने नाना के घर दरभंगा के घनश्यामपुर थानक्षेत्र में गई थी। यहीं से 13 फरवरी 2022 को उसका अपहरण कौशलेन्द्र कुमार उनके 2 बेटों और पत्नी सावित्री देवी ने कर लिया। उस दिन सभी पुरुष बाहर थे। घर में मेरी बेटी के अलावा 2 महिलाएँ थीं। अचानक ही आरोपित अपनी कार स्विफ्ट डिजायर से आए और मेरी बेटी को जबरन साथ ले गए।” शिकायत पर पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ 366 (A) / 34 IPC के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। पीड़ित पिता का कहना है कि अपहरण से 1 दिन पहले लड़के के पिता उनके घर आए थे और उनकी बेटी की शादी अपने बेटे से कराने की धमकी दी थी।

पीड़ित परिवार को मिल रही हैं धमकियाँ

पीड़ित पिता का आरोप है कि पुलिस ने उनकी बेटी को खोजने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। पीड़िता के भाई ने ऑपइंडिया को बताया, “अपहरण के बाद 19 अप्रैल 2022 (मंगलवार) को सुबह 11.40 और शाम 6 बजे अनजान नम्बरों से मेरे पिता को धमकी भरे फोन आए। इन धमकियों की शिकायत हमने स्थानीय थाने में की है।”

धमकियों की शिकायत कॉपी

फोन बंद आ रहे, इसलिए खोजने में हो रही देरी: पुलिस

इस केस के जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अरुण कुमार झा ने ऑपइंडिया को बताया, “लड़की की तलाश में कई जगह छापेमारी कर चुके हैं। आरोपित और लड़की दोनों के फोन बंद आ रहे हैं इसलिए खोजने में देर लग रही है। आरोपितों के कई रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी पुलिस बल जा चुका है। आरोपित के घर पर सिर्फ कुछ बुजुर्ग मिलते हैं, जिनसे कई बार पूछताछ की जा चुकी है। पीड़ित परिवार को धमकियाँ मिलने पर हमने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करने को कहा था। इस केस में सभी 4 आरोपित फरार हैं। उच्चाधिकारियों से निर्देश हैं कि लड़की के बरामद होने के बाद उसके बयान के आधार पर ही आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई हो। किसी को पकड़ कर छोड़ दिए जाने की बात गलत है।’

महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेसी मंत्री ने हनुमान चालीसा का पाठ करने वालों को बताया ‘नीच, &*ट्टा और हर*मी’, महिला नेता पर भी ओछी टिप्पणी

महाराष्ट्र (Mharashtra) में लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) किए जाने को लेकर राजनीतिक रण लगातार जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस (Congress) के नेता और महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री विजय वडेट्टीवार (Vijay Wadettiwar) ने हनुमान चालीसा का पाठ करने की माँग करने वाले हिंदुओं पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने चंद्रपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सीएम उद्धव ठाकरे से हनुमान चालीसा के पाठ की माँग करने वाले ‘नीच’ और ‘हर*मी’ हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रपुर के बल्लारपुर में पार्टी द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर में मंत्री विजय वडेट्टीवार शामिल होने के लिए आए थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा द्वारा सीएम उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की चुनौती का जिक्र किया। वडेट्टीवार ने कहा, “कुछ लोगों ने सीएम ठाकरे से कहा है कि वो हनुमान चालीसा का पाठ करें नहीं तो मातोश्री के सामने इसका पाठ करेंगे। अरे तेरे बाप का क्या जाता है? तू कौन है रे चोट्टे हर*मी…।”

कॉन्ग्रेस नेता यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “अरे तेरे को जहाँ बोलना है बोल, जहाँ पढ़ना है पढ़, लेकिन को ऐसा करने के लिए कहना गलत है।” वडेट्टीवार ने आगे कहा, “अरे तेरे बाप का नौकर है क्या? ऐसे नीच, नालायक और ह*रामी लोग लोगों को बाँटने के लिए हनुमान चालीसा का इस्तेमाल करने आए हैं। आप सभी को पता है कि हिंदुओं में शादी से पहले हनुमान का आशीर्वाद लेने की परंपरा है। अब ये चोट्टे हमें हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए बताएँगे।”

उनके इस बयान को ट्विटर पर शेयर करते हुए महाराष्ट्र बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष चित्रा वाघ ने पूछा कि क्या हनुमान चालीसा का जाप कैसे देशद्रोही हो सकता है। उन्होंने लिखा, “हम विरोध के लिए किसी के घर जाने का विरोध करते हैं, लेकिन भारत में हनुमान चालीसा का पाठ करना देशद्रोह कैसे हो सकता है? मैं ऐसे मंत्रियों (जैसे वडेट्टीवार) की निंदा करती हूँ जो महिलाओं के बारे में इस तरह की गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित घर ‘मातोश्री’ में हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी देने के बाद उन्हें शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर देशद्रोह के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा 14 दिनों की ज्युडिशियल ट्रायल के दौर से गुजर रहे हैं।

बीवी छोड़ गई, अम्मी तेजाब पीकर मर गई, बचपन में हुआ यौन शोषण… मुनव्वर फारूकी की हिंदूफोबिया को LockUpp से धोने की ये कैसी कोशिश

“ये (मेरी शादी और बच्चा) ऐसी चीज हैं जिनके बारे में सोशल मीडिया पर या ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बात नहीं करना चाहता हूँ। मैं और मेरी बीवी साथ नहीं रहते।मुझे ये चीजें 2 साल से खा रही हैं।”

“जनवरी 2007 का एक दिन था। दादी ने कोने में ले जाकर बताया- तेरी माँ ने जहर पी लिया है। किसी को बताया तो हमें परेशानी हो जाएगी। डॉक्टरों ने बताया था कि माँ ने 8 दिन से कुछ नहीं खाया।”

“जब मैं 6 या 7 साल का था, तब से 11 साल का होने तक मेरा यौन शोषण हो रहा था। इसमें मेरे परिवार के दो रिश्तेदार भी शामिल थे।”

ये सीक्रेट हैं। उस मुनव्वर फारूकी के जो ​अपनी हिंदूफोबिक कॉमेडी के लिए कुख्यात है। फारूकी के ये सीक्रेट ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चल रहे एकता कपूर के रिएलिटी शो लॉकअप (LockUpp) में सामने आए हैं। अभिनेत्री कंगना रनौत इस शो की होस्ट हैं।

फारूकी ने अपने सीक्रेट रिवील करके शो में और शो के बाहर खूब तारीफें पाईं। उसकी छोटी-छोटी क्लिप्स जगह वायरल हो रही है, जिसमें इमोशनल बैकग्राउंड म्यूजिक होता है। इन खुलासों से उसके फैन फॉलोइंग में भी तेजी से इजाफा हुआ है। यह सब तब हो रहा है जब इस शो से पहले तक फारूकी को देशभर मे अपनी हिंदू घृणा के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा था।

आपको याद होगा कि मुनव्वर फारूकी ने भगवान श्रीराम और माता सीता पर अभद्र कॉमेडी करके खुद को एक स्टैंड कॉमेडियन के तौर पर स्थापित किया था। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ भी खासा माहौल बनाया था। हिंदू घृणा से साणे वीडियोज वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों के दवाब में उस पर कार्रवाई हुई। उसे लंबा वक्त जेल में गुजारना पड़ा। इसके बाद से उसका ग्राफ लगातार नीचे जा रहा था। गुजरात हो या गोवा हर जगह उसके शो कैंसिल हो रहे थे

दिलचस्प बात ये है कि जनवरी 2021 में फारूकी की गिरफ्तारी के बाद उसके शो रद्द होने की खबरें दिसंबर तक लगातार आ रही थीं। लेकिन इसके बाद अचानक पता चला कि चूँकि वो साल के सबसे विवादित चेहरों में से एक है तो उसे लॉकअप में लाया जा रहा है। ऐसे में इस शो की टाइमिंग और इन कथित सीक्रेट्स के जरिए फारूकी की हिंदूफोबिया को दबाने की कोशिशों के तौर पर भी देखा जा रहा है।

वैसे बॉलीवुड या भारत के मनोरजंन उद्योग के लिए ऐसा करना नई बात नहीं। हिंदूफोबिया से ग्रसित चेहरा हो या आतंकी उनका महिमामंडन स्क्रीन पर हमेशा से होता आया है। याद करिए कश्मीर फाइल्स से पहले कश्मीर के घटनाक्रम पर बनी किस फिल्म में वह पीड़ा दिखाई गई थी जो कश्मीरी पंडितों ने देखा था। एकाध फिल्मों को छोड़ दें तो ज्यादातर ने आतंकियों को कोमल हृदय का, प्रेम करने वाले व्यक्ति के तौर पर ही पेश किया जिसे बंदूक उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसका असर भी होता है।

इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि फारूकी के कथित सीक्रेट्स सामने आने के बाद कंगना रनौत ने एक एपिसोड में उसे अपना पसंदीदा प्रतिभागी बताया। नहले पर दहला यह था कि फारूकी ने कहा कि उससे मिलने के बाद लोग अपनी राय बदल लेते हैं। एक तरह से उसने यह संदेश देने की कोशिश की कि जो उस पर हिंदूफोबिया का आरोप लगाते हैं दरअसल उसे जानते नहीं हैं। उसके हिंदू घृणा से सने जो वीडियो वायरल हैं, वे झूठे हैं।

इन सबके बीच तथ्य यही है कि अपनी असफल शादी, माँ की सुसाइड और यौन शोषण की बातें कर संवेदनाएँ बटोरने वाला यह वही मुनव्वर फारूकी है जो हिंदू देवी देवताओं को मंचों से गाली देता था और इसे कॉमेडी बताता था।

जिस तरह से लॉकअप से मुनव्वर फारूकी की खबरों को मीडिया प्रसारित किया जा रहा है उससे भी इस शो के निर्माताओं की नीयत पर सवाल उठते हैं। शो में उसके कॉमेडी पंच, खेल स्ट्रैटेजी, सादगी सबको बाकी प्रतिभागियों से हटकर दिखाया जा रहा है। जितना प्रमोशन फारूकी का सोशल मीडिया पर हो रहा है उतना शायद ही सोशल मीडिया पर 1 मिलियन फॉलोवर वाली अंजलि अरोड़ा, या टीवी इंडस्ट्री के मशहूर करणवीर बोहरा जैसे अन्य प्रतिभागियों का नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, वे प्रतिभागी जिनके सीक्रेट्स फारूकी जैसे ही है उनको भी उसकी तरह स्पेस नहीं मिल रहा है।

ऑपइंडिया ने भी मुनव्वर फारूकी के ये कथित सीक्रेट सामने आने के बाद उनकी रिपोर्ट की है, जिससे पाठक इस बात को समझ सकें कि हमारा मनोरजंन उद्योग कैसे हमारी भावनाओं से खेलता है। कैसे एक हिंदूफोबिक व्यक्ति को पीड़ित की तरह पेश करता है। यह संदेश देने की कोशिश करता है कि ये तो ‘बेचारा’ है। दुनिया की तमाम दुश्वारियों को भोग चुका है। ताकि अगली बार जब मुनव्वर फारूकी मंच से आपके अराध्यों का मजाक उड़ाए तो आप उसे ‘बेचारा’ समझ गौर ही नहीं करें।

सोमालिया में पैदाइश-अमेरिका में राजनीति, सगे भाई से ही निकाह: मिलिए इल्हान उमर से, देखिए उनकी भारत घृणा

जैसे भारत में संसद के उच्च सदन को राज्यसभा और निचले सदन को लोकसभा कहते हैं, उसी तरह अमेरिका में उच्च सदन को सीनेट और निचले सदन को प्रतिनिधि सभा या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव कहते हैं। इल्हान उमर (Ilhan Omar) अमेरिकी संसद के निचले सदन की सदस्य हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी से नाता रखती हैं।

अफ्रीकी मूल की यह अमेरिकी महिला सांसद अक्सर भारत विरोध को लेकर चर्चा में रहती हैं। उनके बयानों में भारत के प्रति घृणा और पाकिस्तानपरस्ती साफ दिखती है। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया। हालाँकि, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया।

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। कट्टरपंथी इस्लामी विचार रखती हैं। हालिया पाकिस्तान दौरे में इमरान खान से मिलीं। उनकी जमकर तरीफ की। इमरान ने भी उमर की ‘इस्लामोफोबिया के मुद्दों पर साहसी और सैद्धांतिक रुख’ की सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति सुल्तान महमूद चौधरी और पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर चर्चा की। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने उमर को एजेंडावादी बताते हुई जबर्दस्त फटकार लगाई थी। उन्हें संकीर्ण सोच वाली नेता बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर को मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी संसद में यहाँ तक कह दिया था कि आखिर मोदी सरकार मुस्लिमों के खिलाफ और कितने जुल्म करेगी जिसके बाद बाइडन प्रशासन कुछ कहेगा?

इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।

इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

‘सीता पर थी निषादराज की बुरी नजर, इसीलिए करवाया नदी पार’: सपा जिलाध्यक्ष का बयान, विरोध हुआ तो बोले – गलती से निकल गया

उत्तर प्रदेश के भदोही में समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हैं विकास यादव। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने माता सीता और निषादराज को लेकर विवादित टिप्पणी की है। विरोध होता देख सपा के नेता ने माफी माँगने में भी देर नहीं लगाई। उन्होंने वादा किया कि वो दोबारा से ऐसी हरकत नहीं करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना रविवार ( 24 अप्रैल 2022) की है। उस दौरान विकास यादव कुछ लोगों के साथ गंगा में नाव की सवारी कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया। सपा नेता ने कहा, “निषादराज सीता के चक्कर में पड़ गए थे, उनकी नजर सीता जी पर थी और वो उन्हें ही नदी के पार ले जाना चाहते थे।” उनके इस बयान को किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

सोमवार जब सोशल मीडिया पर वायरल अपने बयान को लेकर हो रहे विरोध को देखा तो विकास यादव ने कहा कि ये शब्द उनसे गलती से निकल गया है। अब भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। उन्होंने ये भी स्पष्टीकरण दिया कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की नहीं थी। यादव ने सफाई पेश करते हुए दावा किया वो खुद भी भगवान को मानते हैं और उनमें आस्था रखते हैं।

सपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज

भले ही विकास यादव ने अपने आपत्तिजनक बयान को लेकर माफी माँग ली हो, लेकिन उनकी मुश्किलें इससे कम नहीं हो जाती हैं। ‘निषादराज पार्टी’ के ज्ञानपुर के विधायक विपुल दुबे ने एसपी डॉ अनिल कुमार को पत्र लिखकर शिकायत की है। विपुल दुबे ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता की मानसिकता दूषित हो गई है। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, मामले में ज्ञानपुर कोतवाली में केस दर्ज किया जा रहा है। मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी।