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UP में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने पर विचार कर रही योगी सरकार, डिप्टी सीएम मौर्य ने कहा- पूरे देश में एक कानून लागू करना जरूरी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की सत्ता में दोबारा वापसी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM yogi Adityanath) की सरकार अब प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने शनिवार (23 अप्रैल 2022) को लखनऊ में समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “यूपी और देश की जनता के लिए यह जरूरी है कि पूरे देश में एक कानून लागू किया जाए। पहले की सरकारों ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इस पर ध्यान नहीं दिया।” उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की माँग करनी चाहिए और उसका स्वागत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में विचार कर रही है। यह भाजपा के प्रमुख वादों में भी एक है।

पाँच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों से पहले भी यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा खूब गरमाया था। भाजपा के मूल एजेंडे में यह मुद्दा शुरू से रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने जब यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कमेटी बनाने की घोषणा की थी तो यह मुद्दा और भी चर्चित हो गया था। अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने कह दी है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को कहा था, “CAA, अनुच्छेद 370, राम मंदिर और तीन तलाक के बाद अब समान नागरिक संहिता की बारी है। भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता कानून लागू किया जाएगा।”

अमित शाह ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व में UCC को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता को सरल शब्दों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया, जो आज भी जारी है।

बांग्लादेशी मियाँ से मुस्लिमों को अलग करेगा असम, पहचान के लिए जारी होंगे ID: CM सरमा ने कहा- चरणों में लागू होंगी सिफारिशें

असमिया मुस्लिमों की पहचान करने के लिए असम की हिमंता बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa sarma) सरकार द्वारा गठित पैनल ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें सिफारिश की गई है कि राज्य में विशेष समूह के रूप में ‘असमिया मुस्लिमों’ की पहचान के लिए एक अधिसूचना पारित की जाए, ताकि बांग्लादेश से अवैध रूप से राज्य में घुसने वाले मुस्लिमों से इन्हें अलग किया जा सके।

इस पैनल का गठन पिछले साल प्रदेश के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने विभिन्न स्थानों से असमिया मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के बीच समूह की सामाजिक-आर्थिक समस्याओं पर चर्चा के लिए एक बैठक के बाद किया था। अब अपनी रिपोर्ट में पैनल की ओर से सिफारिश की गई है कि असम के देशी मुस्लिमों को उनकी विशेष पहचान के लिए आईडी कार्ड या फिर एक सर्टिफिकेट जारी किया जाए। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार इनकी पहचान के साथ ही इनकी जनगणना और देश की संसद व राज्य विधानसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 333 के समान एक कानून पारित करे।

सात उप-समितियों में विभाजित का पैनल

असम सरकार द्वारा गठित पैनल को सात उप-समितियों में विभाजित किया गया था। इनसे राजनीति, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और जनसंख्या को रोकने जैसे मामलों पर सिफारिश करने को कहा गया था। गुरुवार (22 अप्रैल 2022) को जारी इस रिपोर्ट में को बनाने में असमिया मुस्लिम पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, वकीलों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को शामिल किया गया था।

गौरतलब है कि असम के मूल मुस्लिमों को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है, जिनमें गोरिया, मोरिया (ऊपरी असम से) और देसी (निचले असम से) शामिल हैं। इनमें देसी मुस्लिम 13वीं सदी के स्वदेशी समूहों जैसे कोच राजबोंगशी और मेच से इस्लाम में धर्मांतरित हुए लोगों के वंशज हैं, जबकि गोरिया और मोरिया धर्मान्तरण के साथ ही योद्धाओं, शिल्पकारों और अन्य लोगों के वंशज हैं, जो अहोम काल में बाहर से इस क्षेत्र में आए थे। इसमें जुल्हा मुस्लिम जैसे छोटे समूह भी शामिल हैं। खास बात ये है कि ये मुस्लिम जनजाति बंगाली बोलने वाले बांग्लादेशियों से अलग हैं।

बहरहाल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस रिपोर्ट को गुरुवार को स्वीकार कर लिया और उन्होंने कहा कि सभी प्रस्तावों को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। पैनल की रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण को लेकर कई तरह की सिफारिशें की गई हैं। वहीं, जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर असमिया मुस्लिमों को जनसंख्या नियंत्रण नियमों के दायरे में लाने और कम उम्र में लड़कियों के विवाह को रोकने की सिफारिश की गई है।

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अलवर में मंदिर गिराने के 3 किरदार, SDM-EO और कॉन्ग्रेस MLA की भूमिका पर उठे सवाल: महंत प्रकाश दास और ब्रज विकास परिषद ने दर्ज कराई शिकायत

राजस्थान के अलवर जिले (Alwar in Rajasthan) के राजगढ़ में वर्षों पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज करने को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच पुलिस को दो शिकायतें दी गई है। इनमें स्थानीय अधिकारियों और सत्ताधारी दल कॉन्ग्रेस के विधायक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। एक शिकायत महंत प्रकाश दास ने और दूसरी शिकायत ब्रज विकास परिषद के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने दी है।

महंत प्रकाश दास की शिकायत में 2 नाम हैं। इनमें से एक राजगढ़ SDM केशव कुमार मीणा हैं और दूसरे स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा हैं। शिकायत में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और अधिकारियों द्वारा मंदिर परिसर में जूते पहनकर घुसने का आरोप लगाया है। साथ ही मूर्तियों को ड्रिल मशीन और हथौड़े से भी तोड़ने की बात कही गई है।

महंत प्रकाश दास ने एसडीओ और ईओ को किया है आरोपित

दूसरी शिकायत में 3 आरोपित

ब्रज विकास परिषद की शिकायत में तीन नाम हैं। राजगढ़ SDM केशव कुमार मीणा और EO बनवारी लाल मीणा के अलावा इसमें कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक जौहरी लाल मीणा पर भी आरोप लगाया गया है। इसके मुताबिक, “SDM, EO और विधायक ने मिलकर हिन्दू धर्म की आस्थाओं के खिलाफ साजिश रची। इसी साजिश के तहत 17 अप्रैल 2022 (रविवार) को 3 मंदिरो को ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया।”

शिकायत में कहा गया है कि हिंदुओं की आस्था पर बुलडोजर और JCB चलाई गई। मूर्तियों को नाले में फेंक दिया गया। इसे दंगा-फसाद करवाने की साजिश करार दिया गया है। इसमें कहा गया है, “कार्रवाई करने वालों ने जूते चप्पल पहन रखे थे। उन पर विनती कर रहे लोगों की फरियाद का कोई असर नहीं पड़ा।” शिकायत में मंदिर फिर से बनवाने की माँग की गई है।

ब्रज विकास परिषद की ओर से की गई शिकायत की कॉपी

कॉन्ग्रेस विधायक ही मुख्य जिम्मेदार: शिकायतकर्ता

बृज विकास परिषद के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता पंकज गुप्ता ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “मंदिर के पुजारी बेहद डरे हुए थे। कोई शिकायत करने को सामने ही नहीं आ रहा था। ख़ामोशी देख कर हम लोगों ने शिकायत करने का फैसला किया। हमारी शिकायत पर अभी तक FIR कॉपी नहीं दी गई है। अभी तक किसी भी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस घटना के मुख्य जिम्मेदार कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी मीणा हैं। उनका और उनके बेटे का आपराधिक इतिहास बहुत बुरा है।”

भगवान की मूर्ति बचाने की माँग पर SHO ने मारे थप्पड़: मंदिर भूस्वामी

ऑपइंडिया ने तोड़े गए मंदिर के भूस्वामी विजय से बात की। उन्होने बताया, “सिर्फ एक घंटे पहले हमें बताया गया कि अपने भगवान को समेट लो। हम इतने समय में कैसे कर पाते। अचानक ही मशीनों से शिवाला को कई टुकड़ों में तोड़ दिया गया। हमने स्थानीय SHO विनोद सामरिया से ऐसा न करने के लिए कहा तो उन्होंने मेरे पिता को 2 थप्पड़ मार कर जेल में डालने की धमकी दी। हम जैसे-तैसे उन्हें बचा पाए। हमारा मंदिर 200 साल से ज्यादा पुराना था। वह इलाके में ‘बावड़ी वालों का मंदिर’ नाम से प्रसिद्ध है। हमारी माँग है कि देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने वाले अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।”

भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने शनिवार (23 अप्रैल 2022) को प्रभावित इलाके का दौरा कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “कॉन्ग्रेस हम पर मंदिर गिराने का आरोप लगा रही है, जिसे भारत में कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा। भाजपा मंदिरों और संस्कृति की संरक्षक है। मंदिरों से विरोध कॉन्ग्रेस का है। इनके मुखिया राहुल गाँधी बुलडोजर को संविधान के विरुद्ध बताते हैं, लेकिन खुद उनकी पार्टी की सरकार में मंदिरों पर बुलडोजर चलवाया जा रहा है। राजगढ़ में मंदिर तोड़े जाने के मुख्य जिम्मेदार यहाँ के कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक हैं। हमारे प्रयासों का फल है कि मंदिर को फिर से बनाए जाने की बात कही जा रही है।”

‘इतनी बारिश के बाद भी खून के धब्बे रह जाते हैं’: NCERT की किताब से हटी फैज की नज्में, CBSE ने मुगलिया पाठ भी हटाया

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नए शैक्षिक सत्र के लिए घोषित पाठ्यक्रम में हायर सेकेंड्री के सिलेबस से पाकिस्तानी शायर के नज्म, मुगल साम्राज्य का महिमामंडन और इस्लाम के विस्तार से संबंधित पाठों को हटा दिया है। NCERT पुस्तक की कक्षा 10 के समाज विज्ञान के सिलेबस से फैज अहमद फैज (Faiz Ahmed Faiz) की शायरी और 11वीं की इतिहास पुस्तक से इस्लाम की स्थापना, उसके उदय और विस्तार की कहानी को हटा दिया गया है। वहीं, 12वीं की किताब से मुगल साम्राज्य के शासन-प्रशासन वाले अध्याय में बदलाव कर दिया गया है।

CBSE ने सत्र 2022-23 के लिए जारी किए गए सिलेबस में कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक ‘डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स II’ के ‘धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति– सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्ष राज्य’ पाठ से फैज की शायरी को हटा दिया गया है। ये शायरी पेज नंबर 46, 48, 49 पर तस्वीरों के माध्यम से रखे गए थे।

इसमें दो पोस्टर और एक राजनीतिक कार्टून शामिल हैं। पोस्टर में फैज की नज्म का अंश लिया गया था। इनमें से एक नज्म फैज ने तब लिखी थी, जब उन्हें लाहौर की जेल से जंजीरों में बांधकर तांगे से एक दंत चिकित्सक के पास ले जाया जा रहा था।

इसका नाम है, ‘इतनी मुलाकातों के बाद भी हम अजनबी रहते हैं, इतनी बारिश के बाद भी खून के धब्बे रह जाते हैं’। वहीं, दूसरा अंश फैज की साल 1974 में ढाका यात्रा के दौरान लिखी गई कविता से लिया गया है। इसका नाम है, ‘आँसू बहाने के लिए पर्याप्त नहीं है, पीड़ा सहने के लिए, गुप्त रूप से प्यार को पोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं है … आज, जंजीरों में बंधे सार्वजनिक चौक में चलो।’।

वहीं, कक्षा 11वीं की इतिहास की पुस्तक से इस्लाम से संबंधित पाठ को हटा दिया गया है। इस अध्याय में अफ्रीकी-एशियाई क्षेत्रों में इस्लामी साम्राज्य का उदय, वहाँ की अर्थव्यवस्था में योगदान और समाज पर इसके प्रभाव के बारे में बताया गया था।

नए सिलेबस में इसके अलावा भी कई के पाठों को हटाया गया है। कक्षा 10वीं की ‘खाद्य सुरक्षा’ चैप्टर से ‘कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव’ को हटा दिया गया है। वहीं, 11वीं के गणित की पुस्तक से पाँच चैप्टर हटा दिए गए हैं। 12वीं की राजनीति शास्त्र पुस्तक से ‘शीत युद्ध काल और गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ के पाठ को हटा दिया गया है। इसके साथ ही इस क्लास के इतिहास की पुस्तक से ‘मुगल साम्राज्य के शासन-प्रशासन’ में बदलाव किया गया है।

गुटखा पीक से कोलकाता का हावड़ा ब्रिज कमजोर: IAS अफसर ने शाहरुख खान, अजय देवगन और अमिताभ बच्चन से माँगा ‘जवाब’

बॉलीवुड अभिनेताओं द्वारा तंबाकू उत्पादों का प्रचार करने को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया में बहस चल रही है। इस बीच एक आईएएस अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित हावड़ा ब्रिज की गुटखा पीक से सनी तस्वीर ट्वीट की है। ट्वीट के साथ शाहरुख खान, अजय देवगन (Ajay Devgn) और अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को टैग किया है। आईएएस अधिकारी अवनीश शरण ने तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया है, “कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने कहा है कि गुटखे की पीक से 70 साल पुराने पुल की हालत खराब हो रही है। एक तरह से गुटखा-चबाने वाले हावड़ा ब्रिज पर हमला कर रहे हैं।”

मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तंबाकू और गुटखे का विज्ञापन करने वाले सितारों को ट्रोल किया जा रहा है। इसके बाद अक्षय कुमार ने खुद को विमल इलायची के ब्रांड एम्बेस्डर की भूमिका से अलग करने का ऐलान किया था। साथ ही कहा था कि जो भी पैसे इस विज्ञापन से मिले हैं उन्हें दान कर देंगे

अक्षय कुमार ने फैंस से माफी माँगते हुए कहा था, “मैं अपने सभी प्रशंसकों और शुभचिंतकों से माफी माँगना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों में आपकी प्रतिक्रिया ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। हालाँकि मैंने तंबाकू का समर्थन नहीं किया है और न ही आगे करूँगा। मैं विमल इलायची के साथ अपने एसोसिएशन को लेकर आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ। इसलिए पूरी विनम्रता के साथ मैं अपने कदम वापस लेता हूँ। साथ ही मैंने फैसला किया है कि विज्ञापन के लिए ली गई फीस को किसी अच्छे काम के लिए दान कर दूँगा। ब्रांड चाहे तो इस एड को प्रसारित करना जारी रख सकता है जब तक कि उसके कॉन्ट्रैक्ट की लीगल अवधि पूरी नहीं होती। लेकिन मैं वादा करता हूँ भविष्य में पूरी समझदारी के साथ विकल्पों का चयन करूँगा। इसके बदले में मैं हमेशा आपका प्यार और शुभकामनाएँ चाहूँगा।”

दूसरी ओर अजय देवगन ने इसे ‘व्यक्तिगत पसंद’ बताते हूुए एक इंटरव्यू में कहा था कि किसी भी चीज का विज्ञापन करना किसी का भी व्यक्तिगत मामला होता है। हम इतने परिपक्व हैं कि अपने फैसले खुद ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रोडक्ट्स नुकसान पहुँचाने वाले होते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जो नुकसान नहीं पहुँचाते। मैं इलायची का विज्ञापन कर रहा हूँ। अजय के मुताबिक जो चीजें नुकसान पहुँचाने वाली हैं उन्हें बिकना ही नहीं चाहिए।

बता दें कि ‘पुष्पा द राइज’ के लिए दर्शकों से भरपूर प्यार बटोरने वाले दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) ने हाल ही में एक तंबाकू ब्रांड का टीवी प्रचार करने से इनकार कर दिया था। इसके लिए उन्हें तंबाकू कंपनी ने भारी-भरकम फीस ऑफर की थी, लेकिन एक्टर ने एड करने से इनकार करते हुए ये कहा था कि इससे लोगों में गलत संदेश जाएगा।

1994 में गिरफ्तार, 2022 में बरी: 28 साल बाद जेल से निकल फूट-फूट रोए बीरबल भगत, भारतीय न्याय व्यवस्था की इस ‘तस्वीर’ पर क्यों नहीं होती बात

भारत की विभिन्न अदालतों में 4.70 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं। इसका दुष्प्रभाव एक आम आदमी पर कैसे पड़ता है बीरबल भगत इसके ताजा उदाहरण हैं। 28 साल बाद जब भगत को अदालत ने बाइज्जत बरी किया और वे जेल से बाहर निकले तब तक उनकी पूरी जिंदगी ही बदल चुकी थी। माँ-बाप दुनिया छोड़कर जा चुके थे। रिश्तेदार नाता तोड़ चुके थे।

भगत को 21 अप्रैल 2022 को बाइज्जत बरी किया गया। उन्हें बिहार में अपहरण और हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनकी उम्र 28 साल थी। गिरफ्तारी के बाद से वे विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद थे। अब जब अदालत ने उन्हें निर्दोष पाया उनकी पूरी जवानी जेल की सलाखों के भीतर बीत चुकी है।

बाइज्जत बरी होने के बाद बीरबल भगत अदालत में ही फूट-फूटकर रो पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक बीरबल गोपालगंज जेल में बीते 28 साल से बंद थे। उनके मामले में फैसला सुनाते हुए जिला एवं सत्र न्यायधीश पाँच विश्वविभूति गुप्ता की कोर्ट ने पुलिस पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मामले के ट्रायल के दौरान पुलिस न तो कोर्ट में सबूत रख सकी और न ही मामले की छानबीन कर रहे जिम्मेदार लोग ही कोर्ट आ पाए। यहीं नहीं जिस शव के आधार पर बीरबल को आरोपित किया गया था, उसका पोस्टमार्टम करने वाले भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। अभियुक्त के खिलाफ किसी भी तरह का सबूत पेश नहीं कर पाने के कारण उसे अंतत: दोषमुक्त किया गया है। खास बात ये रही कि इस मामले में 28 साल बीत गए, लेकिन पुलिस चार्जशीट दाखिल ही नहीं कर पाई।

क्या है पूरा मामला

इस मामले की शुरुआत जून 1993 से होती है। तब बीरबल भगत की उम्र 28 साल की थी। भोरे थाना क्षेत्र के हरिहरपुर के रहने वाले सूर्यनारायण भगत 11 जून 1993 को बीरबल के साथ बिहार के मुजफ्फरपुर जाने के लिए निकले। लेकिन सूर्यनारायण अपने घर नहीं पहुँचे। वे रास्ते से ही लापता हो गए। बाद में सूर्यनारायण के बेटे सत्यनारायण ने भोरे थाने में बीरबल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिन बाद देवरिया की पुलिस को एक शव मिला, लावारिस मान पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

इस बीच देवरिया पुलिस द्वारा जारी तस्वीरों के आधार पर पहचान हुई कि शव सूर्यनारायण का ही था। इसके बाद 27 जनवरी 1994 को बीरबल को पुलिस ने एक दूसरे केस में गिरफ्तार कर लिया। वहाँ 11 साल तक रहने बाद बीरबल को भोरे पुलिस ने रिमांड पर लिया और गोपालगंज जेल में बंद कर दिया औऱ तब से वे वहीं बंद थे। अब जब वो बरी हुए तो उनकी उम्र 57 साल हो चुकी है। जेल में बंद रहते हुए उनके माता-पिता की भी मौत हो गई और वो उन्हें कंधा तक नहीं दे पाए। 22 अप्रैल 2022 को उन्हें जेल से छोड़ दिया गया। जेल से छूटने के बाद बीरबल ने उन्होंने बाहर आने की आशा ही छोड़ ही दी थी।

भारतीय न्याय व्यवस्था की लेटलतीफी के बीरबल इकलौते पीड़ित नहीं हैं। पर असल सवाल यह है कि रसूखदारों के लिए किसी भी वक्त बैठ जाने के आरोपों से घिरी न्याय व्यवस्था की इस तस्वीर में सुधार के प्रयास कब शुरू होंगे जिसका आम आदमी पीड़ित है।

पाकिस्तान से डिग्री लेकर लौटने पर भारत में नहीं मिलेगी नौकरी, उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला भी नहीं: UGC और AICTE की पड़ोसी देश में पढ़ाई पर दो टूक

पाकिस्तान में शिक्षा हासिल कर लौटने वालों को भारत में नौकरी नहीं मिलेगी। भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में उनका दाखिला भी नहीं होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने नई गाइडलाइन में यह बात कही है। भारतीय छात्रों के लिए जारी परामर्श ने उनसे पाकिस्तान के शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन नहीं लेने को कहा गया है।

यूजीसी ने शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को जारी गाइडलाइन में कहा है, “पाकिस्तान जाकर तकनीकी, शिक्षा उच्च शिक्षा या अन्य किसी भी प्रकार का कोर्स करने वाला भारतीय छात्र भारत में नौकरी और आगे की पढ़ाई के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला नहीं ले सकेंगे।”

यूजीसी और एआईसीटीई ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे व्यक्ति जो पाकिस्तान से आए हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा। पाकिस्तान से आए प्रवासी और उनके बच्चे जिन्हें भारत द्वारा नागरिकता प्रदान की गई है, वह गृह मंत्रालय की मँजूरी के बाद भारत में रोजगार पाने के पात्र होंगे। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार (UGC Chairperson M Jagadesh Kumar) ने कहा, “यूजीसी और एआईसीटीई भारतीय छात्रों के हित में ऐसे सार्वजनिक नोटिस जारी करते हैं, जो देश के बाहर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। हाल के दिनों में हमने देखा है कि कैसे हमारे छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि वे अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए विदेशों में वापस नहीं जा सके।”

एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे के अनुसार, “भारतीय छात्रों को यह सलाह देने की जरूरत है कि उन्हें शिक्षा के लिए किन संस्थानों और देशों में जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय नियमों के अनुरूप यहाँ अपनी डिग्री के साथ आ सकें।” उन्होंने कहा, “माता-पिता को अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह से अपने बच्चों के ऊपर बर्बाद नहीं करनी चाहिए, जिसका भारत में कोई महत्व न हो। हमने यूक्रेन और चीन सहित अन्य देशों में इस तरह के कई मामले देखे हैं। यह सलाह इन मामलों को देखने के बाद दी गई है।”

गौरतलब है कि हर वर्ष जम्मू-कश्मीर के कई छात्र पाकिस्तान के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेते हैं। अभी तक सैकड़ों कश्मीरी छात्र पाकिस्तान के तकनीकी कॉलेजों में एडमिशन ले चुके हैं। यूजीसी और एआईसीटीई ने भारतीय छात्रों के लिए चीन के शिक्षण संस्थानों के संदर्भ में भी इसी प्रकार की एडवाइजरी जारी की थी।

एआईसीटीई का कहना है कि गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ाई करने के बाद हासिल की गई डिग्री भारतीय संस्थानों की डिग्री के बराबर नहीं होती। इस तरह की गैर मान्यता वाले संस्थानों की डिग्री प्राप्त करने के लिए छात्रों को काफी पैसा खर्च करने के बाद भी भारत में नौकरी के अवसर प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं बीते वर्ष भी तकनीकी शिक्षा परिषद के सदस्य सचिव ने इस विषय पर आधिकारिक सूचना जारी की थी कि पाकिस्तानी संस्थानों के इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों में दाखिले से पहले एनओसी प्राप्त करना आवश्यक है।

उत्तराखंड मॉडल पर समान नागरिक संहिता लागू करेगी बीजेपी? UCC पर बोले अमित शाह- अन्य राज्यों में भी ऐसा ही कानून बनाएँगे

देश में समान नागरिक संहिता (Common Civil Code – UCC) पर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि CAA, अनुच्छेद 370, राम मंदिर और तीन तलाक के बाद अब समान नागरिक संहिता की बारी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में समान नागिरक संहिता कानून लागू किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के भोपाल में पार्टी कार्यालय में कोर कमेटी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व में UCC को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।

समाज में जातिवाद को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा है कि कहा कि अब यह देश की सच्चाई है। इसलिए इसका गुणा-गणित करके हर जाति के नेता को पद और महत्व देना होगा। इस दौरान गृहमंत्री शाह ने यह भी कहा कि चुनाव से पहले राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बन जाएँगे, लेकिन इससे कॉन्ग्रेस और नीचे जाएगी।

CM धामी का ऐलान

विधनसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि भाजपा सत्ता में लौटती है तो राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किया जाएगा। सीएम धामी ने कहा था, “शपथग्रहण के ठीक बाद भाजपा की नई सरकार एक समिति का गठन करेगी, जो राज्य में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ का ड्राफ्ट तैयार करेगी।” 

सत्ता में भाजपा के लौटने के बाद सीएम धामी ने अपना वादा पूरा करने की दिशा में आगे भी बढ़े हैं। मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा शपथ लेने के बाद बाद सीएम धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी गठित करने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाकर उसे मंजूरी दे दी है।

सीएम धामी ने कहा था कि राज्य में आने वाले नए UCC के हिसाब से शादी, तलाक, जमीन-संपत्ति और वसीयत को लेकर समान कानून लागू होंगे। सभी वर्गों के लिए समान कानून होंगे। उन्होंने कहा था, “UCC उन लोगों के सपने को साकार करने की तरफ एक कदम होगा, जिन्होंने हमारे संविधान का निर्माण किया। साथ ही ये हमारे संविधान की भावना को और ठोस बनाएगा।”

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता को सरल शब्दों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समुदाय लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

इन्हीं सिविल कानूनों को में से हिंदुओं वाले पर्सनल कानूनों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खत्म किया और मुस्लिमों को इससे अलग रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। वहीं, मुस्लिमों के लिए उनके पर्सनल लॉ को बना रखा, जिसको लेकर विवाद जारी है। इसकी वजह से न्यायालयों में मुस्लिम आरोपितों या अभियोजकों के मामले में कुरान और इस्लामिक रीति-रिवाजों का हवाला सुनवाई के दौरान देना पड़ता है।

इन्हीं कानूनों को सभी धर्मों के लिए एक समान बनाने की जब माँग होती है तो मुस्लिम इसका विरोध करते हैं। मुस्लिमों का कहना है कि उनका कानून कुरान और हदीसों पर आधारित है, इसलिए वे इसकी को मानेंगे और उसमें किसी तरह के बदलाव का विरोध करेंगे। इन कानूनों में मुस्लिमों द्वारा चार शादियाँ करने की छूट सबसे बड़ा विवाद की वजह है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता का खुलकर विरोध करता रहा है।

अनवर और सरवर ने हिंदू लड़की को किया अगवा, निकाह करने का प्रयास-इस्लाम कबूलने का डाला दबाव: यूपी के फतेहपुर की घटना

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से एक हिंदू लड़की को अगवा कर उससे निकाह करने के प्रयास और जबरन धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। आरोपितों की पहचान अनवर और सरवर के तौर पर हुई है। दोनों भाई हैं। इस घटना में इनके परिवार के दो अन्य लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटना गुरुवार (21 अप्रैल 2022) की है।

घटना गाजीपुर थाना क्षेत्र की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता कपड़े खरीदने बाजार गई थी। रास्ते से उसे अनवर और सरवर ने अगवा कर लिया। उसके धर्म परिवर्तन की तैयारी थी। लेकिन इसी बीच पीड़िता के परिवार वाले उसे खोजते हुए उस मजार तक पहुँच गए जहाँ उसे अगवा कर ले जाया गया था। लड़की के परिजनों को देख आरोपित उसे छोड़ कर भाग निकले। इस घटना की जानकारी VHP नेताओं को हुई तो वे थाने पहुँचे और कार्रवाई की माँग की।

ऑपइंडिया को पीड़िता ने बताया, “मैं गुरुवार (21 अप्रैल 2022) को सुबह लगभग 10 बजे घर से बाजार के लिए निकली थी। अचानक ही अनवर और सरवर नाम के 2 भाइयों ने मुझे जबरदस्ती बाइक पर बिठा लिया। मेरे मुँह पर दुपट्टा डाल दिया। मुझे रास्ते भर चुप रहने की धमकी दी। कहा कि तुझे और तेरे परिवार को खत्म कर देंगे। सरवर निकाह कर मुस्लिम बन जाने का दबाव बना रहा था। वे मुझे लगभग 8 किलोमीटर दूर ले गए थे। लेकिन मेरे भाई को आता देख मुझे छोड़कर भाग गए। मुझे बाद में पता चला कि अनवर और सरवर के पीछे उनके अब्बा और उनकी बहन भी थी जो इस घटना में उनका सहयोग कर रहे थे।”

पीड़िता ने आगे बताया, “जब मैंने इस घटना की शिकायत स्थानीय थाने में की तो उन्होंने मेरी कही बातों को दर्ज नहीं किया। मेरे ही आगे मेरी शिकायत के 4 पन्ने थानेदार संगम लाल प्रजापति ने फाड़ दिए। मुझ पर धर्म परिवर्तन के बनाए दबाव को थाने वाले नहीं लिख रहे थे।स्थानीय चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार मौर्या मुझ से ही आरोपितों को पकड़ कर लाने को कह रहे हैं। भला मैं कैसे पकड़ सकती हूँ उन्हें? अभी हमें पता चला है कि अनवर और सरवर के अब्बा लालू को हिरासत में लिया गया है।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. विजय शंकर मिश्र ने बताया, “पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ था। लड़की ने आरोपितों को काफी दबंग किस्म का बताया। हम सभी ने उस परिवार को हिम्मत दी। पहले तो पुलिस ने इस केस में हीलाहवाले की कोशिश की। आरोपितों पर हल्की धाराओं में केस दर्ज करने की तैयारी थी। लेकिन जब हम सभी ने इसका संज्ञान लिया तो मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने अपनी गलती मानी और उचित धाराओं में कार्रवाई का आश्वासन दिया।” ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी के लिए DSP जाफरगंज से सम्पर्क किया। लेकिन उन्होंने खुद को वाराणसी में होने की बात कहते हुए ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया।

शिवसैनिकों से टकराने वाली कौन है ये महाराष्ट्र की ‘मर्दानी’: आज हनुमान चालीसा से रोक रहे, कभी ‘तेजाब फेंकने’ की दी थी धमकी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Maharashtra CM Uddhav Thackeray) के निजी आवास के सामने हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने की घोषणा के बाद निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (MP Navneet Rana) और उनके विधायक पति रवि राणा (MLA Ravi Rana) के आवास के बाहर शिवसेना का कार्यकर्ताओं का उपद्रव शुरू हो गया है। उद्दंड कार्यकर्ताओं ने उनके घर के सामने लगे बैरिकेड को तोड़ दिया और कहा कि वे अमरावती से कचरा साफ करने आए हैं। बता दें कि नवनीत राणा अमरावती (Amaravati) से ही सांसद हैं और उनके पति इसी जिले के बडनेरा से विधायक हैं।

इस पर विधायक रवि राणा का कहना है, “महाराष्ट्र पुलिस हमें घर से बाहर कदम रखने नहीं दे रही है। हमारे आवास पर शिवसेना कार्यकर्ता हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे केवल राजनीतिक लाभ चाहते हैं।” वहीं, नवनीत राणा ने कहा कि उनके घर पर हमला हो रहा है। शिवसैनिक गुंडागर्दी कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन उपद्रवियों को पुलिस रोकने का प्रयास नहीं कर रही है। कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री होंगे।

उधर कार्यकर्ताओं को उकसाते हुए शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि मातोश्री में प्रवेश करने की हिम्मत किसी में नहीं है। यदि किसी ने मातोश्री में घुसपैठ करने की कोशिश की तो शिव सैनिक चुप नहीं रहेंगे और वे आक्रामक हो जाएँगे। इससे पहले उद्धव ठाकरे भी शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को अपने कार्यकर्ताओं से इशारों में कह चुके हैं कि मातोश्री में घुसने की जुर्रत कोई नहीं करेगा।

बता दें कि जनप्रतिनिधि पति-पत्नी ने शनिवार (23 अप्रैल 2022) को मातोश्री के सामने 500 लोगों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को नोटिस दिया है और उनके घर के बाहर डेरा दिया है। वहीं, शिवसेना के कार्यकर्ता भी पहुँचकर हंगामा मचा रहे हैं। इस विवाद के बाद खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने नवनीत राणा को Y कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है।

कौन हैं नवनीत राणा?

नवनीत राणा का असली नाम नवनीत कौर है और रवि राणा के साथ शादी के बाद उन्होंने अपना नाम नवनीत रवि राणा कर लिया है। पिछले एक दशक में रवि राणा और नवनीत कौर राणा महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे शक्तिशाली जोड़ों में से एक के रूप में उभरे हैं। विदर्भ के दोनों निर्दलीय चुनाव जीते हैं। रवि राणा बडनेरा से तीन बार निर्दलीय विधायक चुने गए हैं, जबकि नवनीत राणा अमरावती सीट से सांसद हैं।

नवनीत कौर राणा का जन्म 3 जनवरी 1986 को मुंबई के एक पंजाबी परिवार में हुआ है। उनके पिता सेना के अधिकारी रहे हैं। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें मॉडलिंग का ऑफर मिला और वे 12वीं के आगे नहीं पढ़ पाईं। मॉडलिंग से होते हुए वह फिल्मों की दुनिया में चली गईं। नवनीत कौर राणा तेलुगू फिल्‍मों के अलावा कन्‍नड़, मलयालम और पंजाबी फिल्‍मों में भी काम कर चुकी हैं। नवनीत कौर को पाँच भाषाओं पर गहरी पकड़ है। वह मराठी, पंजाबी, तेलुगू, हिंदी और इंग्लिश बोल सकती हैं।

कहा जाता है कि विधायक रवि राणा और नवनीत कौर की मुलाकात बाबा रामदेव के आश्रम में हुई थी। इसके बाद दोनों ने साल 2011 में एक सामूहिक विवाह समारोह में शादी कर ली था। इस दौरान 3,720 जोड़ों ने सामूहिक विवाह में हिस्‍सा लिया था। इस समारोह में 2443 हिन्दू, 739 बौद्ध, 150 मुस्लिम, 15 क्रिश्चियन और 13 दृष्टिहीन जोड़ों ने शादी की थी। इसके साथ ही यह समारोह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल गया है। इस शादी में तत्‍कालीन मुख्यमंत्री पृथ्‍वीराज चव्हाण और बाबा रामदेव भी मौजूद थे।

शादी के बाद रवि राणा के कहने पर नवनीत राणा ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन शिवसेना के उम्मीदवार से वह हार गईं। इसके बाद वह साल 2019 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं और शिवसेना के दिग्गज नेता आनंदराव अडुसल को 36 हजार से अधिक वोटों से हराकर अमरावती से सांसद चुनी गईं। इन्हें भाजपा समर्थक माना जाता है।

चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी

नवनीत राणा ने बीते दिन लोकसभा में महाराष्ट्र के सनसनीखेज 100 करोड़ रुपये के वसूली कांड का मसला उठाया था और मनसुख हिरेन हत्या को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार पर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने संसद में कहा था कि जिस पुलिस अधिकारी को 16 साल तक निलंबित रखा गया, उसे महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी सरकार आते ही बहाल क्यों कर दिया गया?

नवनीत राणा ने आरोप लगाया था कि उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) को धमकाने की साजिश रचने वाले पुलिस ऑफिसर सचिन वाझे का मुद्दा लोकसभा में उठाने के कारण शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने उन्हें संसद परिसर में धमकी दी थी। बकौल नवनीत राणा, सावंत ने उनसे कहा था, “तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, मैं देखता हूँ। तेरे को भी जेल में डालेंगे।”

नवनीत राणा ने आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी शिवसेना के लेटर हेड और फोन कॉल के माध्यम से उनके चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जा चुकी है। उन्होंने सावंत के बयान को न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान करार दिया। इस मामले में नवनीत राणा ने शिवसेना सांसद संजय राउत और पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल पर शक जताया था।