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महाराष्ट्र में BJP नेता पर जानलेवा हमला, FIR भी दर्ज नहीं: पुलिस के सामने शिवसेना के गुंडों ने की मारने की कोशिश

महाराष्ट्र में भाजपा नेता किरीट सोमैया (Maharashtra BJP Leader Kirit Somaiya) पर शिवसेना (Shiv Sena) कार्यकर्ताओं ने शनिवार (23 अप्रैल 2022) को हमला कर घायल कर दिया है। सोमैया सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) और उनके पति विधायक रवि राणा (Ravi Rana) से मुलाकात करने खार थाना गए थे। इसके बाद उनकी कार पर पथराव कर दिया गया। हमले के बाद सोमैया देर रात बाद बांद्रा पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज पहुँचे, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की।

किरीट सोमैया का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उनकी कार का शीशा टूटा हुआ दिख रहा है और उनके चेहरे से खून की टपक कर रहा है। सोमैया ने ट्वीट कर इस हमले की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, “शिवसेना के गुंडों ने खार थाने पर भारी पथराव किया। मेरी गाड़ी के शीशे टूटे और मैं घायल हो गया हूँ।”

इसके बाद बाद उन्होंने ट्वीट किया, “सीएम उद्धव ठाकरे के गुंडा लोगों को पुलिस ने खार पुलिस स्टेशन पर एकजुट होने दिया। मैं बाहर निकला तब गुंडा लोगों ने पत्थरबाजी की। कार की खिड़की के शीशे मेरी तरफ के टूट गए और मुझे भी पत्थर लगे। पुलिस की निगरानी में ये हमला हुआ।”

सोमैया ने कहा कि यह तीसरी बार उद्धव ठाकरे के गुंडों ने उन्हें मारने की कोशिश की है। सबसे पहले वासिम, फिर पुणे अब पुलिस स्टेशन (खार मुंबई) में। उन्होंने कहा कि खार थाने परिसर में 50 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में शिवसेना के 100 गुंडों ने उन्हें मारने के लिए पथराव किया। उन्होंने पुलिस पर भी सवाल उठाया और कहा कि पुलिस ने उन्हें थाने में जमा होने दिया और एफआईआर भी दर्ज नहीं कर रही है।

इस हमले को लेकर उद्धव ठाकरे की हर तरफ आलोचना हो रही है। भाजपा नेता पर हमले के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मुंबई और महाराष्ट्र में कानून और व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। खार पुलिस स्टेशन के ठीक सामने किरीट सोमैया के कार पर हमला हुआ है, जबकि पुलिस वहाँ मौजूद थी। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है!”

फडणवीस ने कहा, “किरीट सोमैया पर हमले को लेकर मैं आज गृह सचिव और गृहमंत्री से बात करूँगा और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक पत्र भी लिखूँगा।” उन्होंने कहा कि सोमैया ने हमले की संभावना के बारे में खार पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया था और Z+ सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय, पुलिस ने शिवसेना के गुंडों को राज्य सरकार के दबाव में हमला करने की अनुमति दी।

वहीं, पुलिस की लापरवाही को डीसीपी मंजूनाथ शिंगे ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि सोमैया की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और इस मामले की निष्पक्ष जाँच की जाएगी।

उधर हमले के बाद भी किरीट सोमैया ने कहा कि वे फिर नवनीत राणा और रवि राणा से मिलने के लिए जाएँगे। उन्होंने उद्धव ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें रोक कर दिखाएँ। उन्होंने कहा कि जो नवनीत राणा का विरोध कर रहे हैं, वे शिवसैनिक नहीं, गुंडे हैं। इस सरकार का अंत आ गया है।

बता दें कि सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ने सीएम उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के बाहर शनिवार (23 अप्रैल 2022) को हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद शिवसेना के कार्यकर्ता और प्रियंका चतुर्वेदी जैसी बड़ी नेता उनके आवास के सामने पहुँचकर हंगामा कर दिया था। उनके घर में घुसने की कोशिश की और धमकी दी। बाद में पुलिस ने पति-पत्नी को हिरासत में लिया था।

हुबली हिंसा में रजा अकादमी से जुड़े तार, मुस्लिम भीड़ को उकसाकर कराया मंदिर और पुलिस स्टेशन पर हमला: रिपोर्ट

हनुमान जयंती के मौके पर कर्नाटक के हुबली जिले में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के मामले की जाँच में अब रजा अकादमी का नाम सामने आया है। ये एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है, जो कि 2012 में मुंबई के आजाद मैदान पर हुए दंगों के लिए जिम्मेदार है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हुबली पुलिस की जाँच में शहर में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा में रजा अकादमी की भूमिका होने का संदेह जताया गया है। दरअसल, एक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर 200 इस्लामियों ने पुराने हुबली पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था। साथ ही उसी से लगे अस्पताल औऱ पथराव किया गया। मामले में 120 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना वसीम ने पहले हुबली की एक दरगाह पर उन्मादी भाषण दिया और इसके बाद उसने पुलिस स्टेशन के बाहर भी यही किया।

ये आरोपित मौलाना वसीम मोबालिक है, जो एआईएमआईएम का नेता भी हैं। उसी ने पुराने हुबली पुलिस स्टेशन के बाहर हुबली पुलिस आयुक्त की कार के ऊपर भड़काऊ भाषण दिया था। दंगों के बाद फरार चल रहे मौलाना वसीम मोबालिक को पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस की पूछताछ के दौरान कट्टरपंथी इस्लामिक मौलाना को वसीम ने कबूल किया था कि मामले का एक अन्य आरोपित तौफीक मुल्ला रजा अकादमी का सदस्य है। मौलाना वसीम ने यह भी खुलासा किया कि उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और भीड़ को पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ हमले तेज होंगे।

गौरतलब है कि 2012 में मुंबई में हुए आज़ाद मैदान दंगों के लिए रज़ा अकादमी जिम्मेदार थी, जिसमें 40,000 से अधिक मुस्लिमों ने मुंबई की सड़कों पर हिंसा की थी। आजाद मैदान दंगों की सबसे चौंकाने वाली घटना मुस्लिम भीड़ द्वारा अमर जवान ज्योति स्मारक को अपवित्र करने की थी। मौलाना वसीम ने यह भी दावा किया कि उसे पता ही नहीं चला कि ओल्ड हुबली थाने के बाहर इतनी बड़ी मात्रा में पत्थर कैसे आ गए।

मारना चाहती थी भीड़

हुबली हिंसा के मामले में पुलिस निरीक्षक जगदीश की शिकायत पर हुबली थाने पर हमले के मामले में मुस्लिम भीड़ के खिलाफ दो केस दर्ज किए गए थे। जगदीश के मुताबिक, मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने उनके ऊपर हमला कर दिया, जिस कारण उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। उन्हें ओल्ड हुबली थाने के कर्मियों को बचाने के लिए तैनात किया गया था।

उन्होंने कहा, “भीड़ ने हमें घेर लिया था औऱ हम जीप के अंदर बैठ गए। मुस्लिम भीड़ ने हमें हमारा काम करने से रोका और हत्या की भी धमकी दी। ओल्ड हुबली महिला थाने के बाहर भीड़ जमा हो गई थी। हमें उच्च अधिकारियों से वहाँ जाने के आदेश मिले। रात 10.30 बजे हम अरविंद नगर के लिए निकले। 100-150 लोगों की भीड़ ने हमें रोक दिया। भीड़ के पास धारदार हथियार, रॉड और पत्थर थे।”

‘पहले मंदिर तोड़ा, फिर गौशाला पर चलाया बुलडोजर’: अतिक्रमण के नाम पर राजस्थान सरकार की कार्रवाई से 400 से अधिक गाएँ बेआसरा

राजस्थान के अलवर जिले में गहलोत सरकार का बुलडोजर लगातार चल रहा है। लेकिन, अतिक्रमण विरोधी मुहिम के नाम पर पहले मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और अब गौशाला को तोड़ दिया गया है। कठूमर स्थित जिस गौशाला को प्रशासन के बुलडोजर ने उजाड़ दिया, उसमें 400 गौवंश रहते थे। बताया जा रहा है कि गौशाला को ध्वस्त करने से पहले गायों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

गौशाला को ध्वस्त किए जाने की लक्ष्मणगढ़ रेंजर्स जतिन सेन का कहना है कि मैथना के रूधं स्थित वन विभाग की करीब 1400 एकड़ जमीन हैं, जिसमें से 40 एकड़ पर गौशाला बीते एक दशक से चल रही थी। इसके लिए राजगढ़ स्थित वन संरक्षक कोर्ट ने 2020 में इसे खाली कराने का आदेश दिया था। इसके बाद दिसंबर 2021 में गौशाला के संचालक को इसे कहीं औऱ शिफ्ट करने के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन जब नहीं किया गया तो इसे ध्वस्त कर दिया गया। वन विभाग का कहना था कि गौशाला के संचालक ने इसे हटाने के लिए 10 दिन का समय माँगा था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण उसे ये समय नहीं दिया गया।

गौरतलब है कि इस गौशाला का नाम हनुमान गौशाला है, जो कि मैथना में स्थित है। इसके अध्यक्ष हैं तेजीराम शर्मा। वो कहते हैं कि 2012 से गौशाला को चलाया जा रहा है, जहाँ मौजूदा वक्त में 425 गौवंश हैं। शर्मा के मुताबिक, उन्होंने 1 सितंबर 2014 को गो सेवा निदेशालय पशुपालन विभाग जयपुर में गौशाला का रजिस्ट्रेशन करवाया था। दिलचस्प बात ये है कि 2017-18 में इसे सर्वश्रेष्ठ गौशाला का पुरस्कार भी दिया गया था।

इससे पहले तोड़ दिया था मंदिर

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान के अलवर जिले (Alwar in Rajasthan) के राजगढ़ में वर्षों पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया था। 300 साल पुराने मंदिर को जमींदोज करने के लिए जेसीबी मशीन लाई गई थी। इंडिया टीवी के मुताबिक, मंदिर के अंदर रखे शिवलिंग को भी ड्रिल मशीन का उपयोग करके उखाड़ दिया गया था। हिंदू मंदिर के अलावे राजगढ़ के अधिकारियों ने मास्टरप्लान का हवाला देते हुए ‘सड़क चौड़ीकरण’ अभियान में 85 से अधिक हिंदू परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया।

पश्चिम बंगाल हिंसा के बाद भागने को मजबूर हुए थे सैकड़ों बीजेपी नेता-कार्यकर्ता, 303 लोग अभी तक नहीं लौट पाए अपने घर: रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में पिछले साल मई 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हुआ। टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी और उसके समर्थकों पर हमले किए और उनकी हत्याएँ कीं। इसके डर से कई लोग अपनी जान बचाने के लिए प्रदेश छोड़कर चले गए, लेकिन अब सालभर बीतने के बाद भी लोग अपने घरों को नहीं लौटे।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी के गुंडों के डर से पश्चिम बंगाल में अपना घर छोड़कर जाने वाले लोगों को लेकर प्रियंका टिबरेबाल ने पिछले साल कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया है कि हिंसा के कारण बीजेपी के कई कार्यकर्ता और उसके समर्थक डर के कारण अभी तक अपने घर नहीं लौट पाए हैं। टिबरेवाल के द्वारा पेश किए गए एफिडेविट के मुताबिक 303 लोग अभी तक अपने घर नहीं लौट पाए हैं। इसी तरह से इनमें से एक शांतनु सरकार हैं, जो कि सेना में पूर्व क्लर्क थे और उत्तर 24 परगना जिले में कांकिनारा के भाजपा के नेता थे। 2 मई को जैसे ही राज्य में चुनाव के परिणाम घोषित हुए तो टीएमसी के गुंडों ने उनके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया। ऐसे में वो अपनी और अपने परिवार को बचाने के लिए अपना घर छोड़कर चले गए।

सरकार ने टीएमसी के गुंडों के डर के कारण अपने गृह नगर से दूर किराए के दो फ्लैट लेकर वहाँ अपनी पत्नी रीना के साथ रह रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो दिखाया था, जिसमें सीसीटीवी कैमरे को 2 मई 2021 को बदमाशों में तोड़ दिया था। सरकार कहते हैं, “मैं हमेशा से उनका टार्गेट था, क्योंकि मैं उत्तर 24 परगना के पानपुरा में एक शक्तिशाली भाजपा नेता था। 2 मई को जिस क्षण मेरे घर के सीसीटीवी में तोड़फोड़ की गई, मुझे एहसास हुआ कि मेरे लिए अपने घर में रहना असुरक्षित है। मैं चला गया। इसकी कीमत चुकानी पड़ी। मुझे उस घर को बनाने के लिए करीब 30 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे, जिसके लिए स्थानीय पुलिस और एसडीपीओ के पास पारिश्रमिक के लिए दायर किया है। हालाँकि, मुझे अभी तक कुछ भी नहीं मिला है।”

एक बार तो सरकार की पत्नी रीना अपने घर आ रही थी तो उसे स्थानीय गुंडों ने घेर लिया, जिसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से उसे बचाया जा सका। भाजपा नेता ने कहा, “हाई कोर्ट के आदेश के बाद मैं 16 अक्टूबर, 2021 को स्थानीय पुलिस के साथ अपने घर गया था। घर में बुरी तरह से तोड़फोड़ की गई थी। कोर्ट ने घर के बाहर पुलिस की तैनाती के लिए कहा था, लेकिन जब हम बाहर जाते हैं तो क्या होता है? हमें पुलिस की सुरक्षा नहीं मिलती। किसे पता बाजार में कब मुझपे या मेरी पत्नी पर हमला कर दिया जाए। अदालत और प्रशासन को हमें सुरक्षा का आश्वासन देने की जरूरत है।”

303 से अधिक लोग हुए विस्थापित

हाई कोर्ट ने लोगों के विस्थापन के मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। राज्य में चुनाव बाद हिंसा में 303 से अधिक पीड़ितों ने घर छोड़ दिया है। प्रियंका टिबरेवाल इन्हीं लोगों की वकील हैं। प्रियंका के मुताबिक, उन्होंने जो एफिडेविट फाइल किया है, उसमें 303 लोगों के हस्ताक्षर हैं जो डर के कारण अपने घरों को वापस नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि वो ऐसे 150 और लोगों को भी जानती हैं, जो रिजल्ट के बाद अपने घर नहीं जा पाए। टिबरेवाल कहती हैं, “जहाँ तक ​​मेरी जानकारी है, पश्चिम बंगाल में लगभग 1500-2000 लोग ऐसे होंगे जो चुनाव परिणाम के बाद से अपने घरों को वापस नहीं जा पाए हैं।”

यही हाल सरकार के दोस्त सुबोल राजेंद्रपुर का है। वो फिलहाल नाहिहाटी के एक गाँव में रहते हैं। सुबोल पानपुरा में बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। 22 अप्रैल 2021 को जगदल विधानसभा सीट के चुनाव की रात अपनी पत्नी और बेटे के साथ घर छोड़कर भागना पड़ा था। वोटिंग वाले दिन वहाँ बम धमाके भी किए गए। सुबोल ने कहा, “कुल मिलाकर कांकिनारा में मेरे घर से छह लोग कभी हमारे घर नहीं लौटे। मैं, मेरी पत्नी, बेटा, मेरा भाई और उसकी पत्नी और मेरी बहन। हमने डर के कारण घर छोड़ दिया। मेरी माँ और भाई का परिवार अभी भी वहाँ है। स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, क्योंकि मैं अभी भी भाजपा में हूँ। मेरे भाई को धमकी भरे फोन आए। जब ​​वे अपने घरों से बाहर निकले, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। मेरे घर पर बीयर की बोतलें फेंकी गईं। मैं वहाँ कैसे रहूँ? “

सुबोल की पत्नी टुंगा के मुताबिक, हमले के डर के कारण उन्हें अपने लड़के का स्कूल भी बदलना पड़ा। सुबोल ने कहा कि वो दो महीने पहले अपने घर गए थे, लेकिन हेलमेट लगाकर गए थे, ताकि कोई पहचान न सके। बीजेपी नेता ने दावा किया है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं में उसकी पार्टी के कई कार्यकर्ता मारे गए हैं और 4,000 से अधिक घरों में तोड़फोड़ की गई है।

ऑस्कर में थप्पड़ की घटना से पर्सनल लाइफ में परेशान, पत्नी जैडा स्मिथ से तलाक की खबरों के बीच भारत पहुँचे हॉलीवुड एक्टर विल स्मिथ

हॉलीवुड एक्टर विल स्मिथ लगातार चर्चा में हैं। पिछले महीने उन्होंने पत्नी जैडा पिंकेट स्मिथ का मजाक उड़ाने पर ऑस्कर अवॉर्ड के मंच पर अमेरिकी कॉमेडियन क्रिस रॉक को थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद खबरें आईं कि विल स्मिथ की पर्सनल लाइफ में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। जल्द ही वो और उनकी पत्नी जैडा पिंकेट स्मिथ तलाक लेने वाले हैं। हालाँकि, इन्हीं खबरों के बीच विल स्मिथ भारत पहुँचे हैं।

अमेरिकी एक्टर को मुंबई में शनिवार (23 अप्रैल 2022) को स्पॉट किया गया। सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। इससे पहले विल साल 2018 में हरिद्वार आए थे। उनका भारत से काफी जुड़ाव है। उन्होंने साल 2020 में धार्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरू जग्गी वासुदेव से भी मुलाकात की थी। ऐसा कहा जा रहा है कि ऑस्कर में थप्पड़ की घटना और फिर पत्नी जैडा पिंकेट स्मिथ के साथ तनाव को लेकर वह बेहद परेशान हैं। इसलिए वह शांति के लिए भारत की यात्रा पर आए हैं।

मालूम हो कि ऑस्कर अवार्ड्स 2022 के दौरान एक्टर विल स्मिथ ने कॉमेडियन क्रिस रॉक को उनकी बीवी का मजाक उड़ाने पर थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद वह विवादों में घिर गए थे। हालाँकि, अमेरिकी एक्टर विल स्मिथ ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करके क्रिस से माफी भी माँग ली थी। उन्होंने लिखा था कि उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ कि उनकी बीवी जैडा की मेडिकल कंडीशन का मजाक उड़ाया गया। इसलिए उन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया दी। दरअसल, इस कार्यक्रम में क्रिस रॉक डॉक्यूमेंट्री फीचर के लिए जब अवॉर्ड देने आए तो उन्होंने विल की पत्नी के गंजे होने का मजाक उड़ाया। उन्होंने जेडा के बाल देखकर कहा था, “जेडा मैं तुमसे प्यार करता हूँ। G.I Jane 2 फिल्म में तुम्हें देखने के लिए मैं इंतजार नहीं कर सकता।”

हीट मैगजीन (Heat magazine) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्कर में थप्पड़ की घटना ने विल स्मिथ और उनकी पत्नी जैडा पिंकेट स्मिथ के बीच तनाव बढ़ा दिया है। विल स्मिथ और जैडा पिंकेट स्मिथ (Will Smith and Jada Pinkett Smith) एक-दूसरे से मुश्किल से ही बात करते हैं। मैगजीन के अनुसार, कई वर्षों से दोनों के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं, लेकिन थप्पड़ की घटना के बाद से इन दोनों में दूरियाँ और बढ़ गई हैं।

विल स्मिथ और जैडा स्मिथ की पर्सनल लाइफ को लेकर मैगजीन में लिखा गया है, “अगर वे अलग हो जाते, तो विल को अपनी 350 डॉलर मिलियन की संपत्ति का आधा हिस्सा जैडा को देना होगा। कैलिफोर्निया के कानून के तहत वह आधे की हकदार होंगी। यह एंजेलीना और ब्रैड पिट से भी महँगा तलाक साबित होगा।” जैडा पिंकेट स्मिथ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी कुछ ऐसा लिखा है, जिसको लेकर दोनों की तलाक की खबरें सुर्खियों में हैं। उन्होंने शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को लिखा, “मैं किसी के जाने का दर्द महसूस नहीं करना चाहती।”

बता दें कि विल स्मिथ अमेरिकी कलाकार हैं। 90 के दशक से इंडस्ट्री में सक्रिय रहने वाले स्मिथ की पहचान एक रैपर और फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर भी होती हैं। साल 2019 में आई अलादिन फिल्म में उन्होंने जिन्न का किरदार निभाया था। इसके अलावा वह हाल में किंग रिचर्ड नाम की फिल्म में नजर आए थे। उन्होंने मैन इन ब्लैक और आफ्टर अर्थ जैसी फिल्मों में भी अच्छी एक्टिंग से लोगों का दिल जीता है। 

‘दंगा होने दे, हम तैयार हैं’, भेल की रेहड़ी लगाने वाले नीलेश को ग्राहक अकील सुन्नाभाई ने दी धमकी: महाराष्ट्र के श्रीरामपुर की घटना

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले से चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ भेल बेच रहे एक रेहड़ी वाले से मुस्लिम ग्राहक ने भेल लिया और पिर उससे रद्दी कागज माँगा। लेकिन, जब कागज नहीं मिला तो उसने उसे धमकी दी कि दंगा होने दे, हम तैयार हैं।

यह मामला बुधवार (20 अप्रैल 2022) का है। रात के करीब 10 बज रहे थे तो श्रीरामपुर के गोंधवानी रोड पर नितिन शिवाजी लम्बोले नाम के एक भेल विक्रेता अपना स्टॉल चला रहे थे। उस दौरान आरोपित सुन्नाभाई ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी दी। मामले में कार्रवाई करते हुए अकील सुन्नाभाई के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

देशदूत की रिपोर्ट के मुताबिक, अकील सुन्नाभाई के खिलाफ श्रीरामपुर नगर थाने में केस दर्ज किया गया है। इस शिकायत में श्रीरामपुर में झिरंग बस्ती के पास गोंधवानी रोड के रहने वाले नितिन शिवाजी लम्बोले ने पुलिस को बताया है कि आरोपित सुन्नाभाई अपनी बीवी के लिए भेल खरीदने के लिए हमारे स्टाल पर आय़ा था। उस दिन लम्बोले का बड़ा भाई नीलेश लम्बोले भेल की रेहड़ी पर था। आरोप है कि भेल खरीदने के बाद अकील सुन्नाभाई ने नीलेश से 2 किलो रद्दी कागज भी माँगा। लेकिन, जब नीलेश ने कहा कि ये उसके पास नहीं है तो नाराज आरोपित अकील सुन्नाभाई ने लम्बोले को गाली देते हुए कहा कि होने दे दंगा, हम तैयार हैं।

पुलिस अधिकारी ने किया दौरा

इस मामले में नितिन लम्बोले द्वारा श्रीरामपुर शहरी थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस निरीक्षक मच्छिंद्र खाड़े ने घटनास्थल का दौरान किया। पुलिस ने इस केस में श्रीरामपुर के वार्ड नंबर 2 के अंतर्गत गुलशन चौक निवासी 55 वर्षीय आरोपित अकील सुन्नाभाई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 504, 506 के तहत असंज्ञेय केस दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि इस घटना की टाइमिंग बड़ी अहम है। क्योंकि देश के कई हिस्सों में हाल ही में हिंदू धार्मिक जुलूसों के दौरान पथराव की घटनाओं के बाद संप्रदायिक हिंस्सा हुई। देश की राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई अन्य स्थानों पर रामनवमी और हनुमान जयंती के जुलूसों में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हमले किए। खास बात ये रही कि पथराव की इन घटनाओं के बाद कुछ मुस्लिम नेता ऐसे ही रहे, जो इसे सही ठहराते नजर आए।

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पर बवाल के बीच नवनीत और उनके पति रवि राणा गिरफ्तार, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप

महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री में हनुमान चालीसा पाठ पढ़ने को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहाँ मुंबई के खार इलाके में अमरावती सांसद नवनीत राणा के आवास के बाहर सैकड़ों शिवसैनिकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। नवनीत और उनके पति रवि राणा को मुंबई पुलिस खार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके ऊपर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है। इस दौरान राणा ने देवेंद्र फडणवीस से मदद की गुहार लगाई है।

बता दें कि इससे पहले नवनीत राणा ने कहा, “मुझे लगता है कि मेरा उद्देश्य स्पष्ट तरीके से पूरा हो गया। हम मातोश्री तक नहीं पहुँच पाए, लेकिन जो हनुमान चालीसा हम करने वाले थे, वो कई भक्त वहाँ मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं। कहीं ने कहीं ये सिद्ध होता है कि हमारी आवाज वहाँ तक पहुँची है।’

दरअसल, राणा दंपत्ति ने सुबह 9 बजे हनुमान चालीसा पाठ का समय निर्धारित किया था, लेकिन दोपहर तक शिवसेना के कार्यकर्ताओं और पुलिस ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने की घोषणा के बाद अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (MP Navneet Rana) और उनके विधायक पति रवि राणा (MLA Ravi Rana) के घर पर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने जमकर उपद्रव किया।

नवनीत राणा और उनके पति ने कहा कि इस दौरान शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनके घर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी पर उनके घर के बाहर हंगामे में शामिल रहीं। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर वे घर से बाहर आते हैं तो कोल्हापुरी मिर्ची से उनका स्वागत किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने राणा दंपत्ति को हनुमान चालीसा के लिए बाहर जाने से रोक दिया। उन्हें घर से बाहर ही नहीं निकलने दिया।

सांसद नवनीत राणा ने कहा कि उन्हें रोकने के लिए सीएम उद्धव ठाकरे ने उनके घर गुंडे भेजे। शिवसेना तो खत्म होने की बात कहते हुए नवनीत राणा ने कहा कि असली शिव सैनिक तो बाला साहब के साथ चले गए हैं, अब गुंडों की शिवसेना रह गई है। मुख्यमंत्री का सिर्फ यही काम रह गया है कि किस पर क्या कार्रवाई करवानी है, किसे जेल भेजना है और किसे तड़ीपार करना है। 

रामनवमी शोभा यात्रा पर पत्थर किधर फेंकने हैं, छत पर खड़ा होकर बता रहा था फिरोज: खरगोन में दंगाइयों को इशारे करते ‘पनवाड़ी’ का Video देखिए

मध्य प्रदेश के खरगोन में 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी शोभा यात्रा पर हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने फिरोज उर्फ सेजू को गिरफ्तार किया है। वैसे तो फिरोज पान की दुकान चलाता है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हमले वाले दिन अपने छत से खड़े होकर दंगाइयों को पत्थर फेंकने के निर्देश दे रहा था। फिरोज इधर से इशारे करता, उधर छत पर जमा दंगाई पत्थर की बारिश शुरू कर देते।

फिरोज का वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें वह छत पर खड़ा होकर पत्थर फेंकने की जगह बताता दिख रहा है। पुलिस के अनुसार फिरोज ‘आदतन अपराधी’ है। उस पर आधे दर्जन केस पहले से दर्ज हैं। खरगोन दंगों के मामले में उसे 22 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिरोज खरगोन में ही पान की दुकान चलाता है। दंगे के दौरान वह अपनी छत पर खड़ा होकर दंगाइयों को पत्थर फेंकने की जगह बता रहा था। घटना के बाद से वो फरार हो गया था। पुलिस ने उसे इंदौर से खोज निकाला है। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है।

फिरोज की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए SP रोहित काशवानी ने बताया, “जिसके घर से पत्थर मारे जा रहे थे उसको गिरफ्तार किया गया है। इससे पूर्व भी इसका आपराधिक इतिहास रहा है। उस पर 5-6 केस पहले से दर्ज हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।” वहीं पुलिस अधिकारी अंकित जयसवाल ने बताया कि फिरोज पहले से ही बलवा, मारपीट, पथराव, तोड़फोड़ और छेड़छाड़ जैसे आधे दर्जन केसों में नामजद है।

इससे पहले खरगोन हिंसा में चार और नाम सामने आए थे। ये हैं- मोहसिन उर्फ नाटी, नवाज शेख, वसीम उर्फ मोहसिन और इरफान उर्फ इलियास खान हैं। वसीम पर एसपी सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने का आरोप है। बता दें कि उपद्रव के दौरान संजय नगर के त्रिवेणी चौक में पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की सूचना मिलने के बाद एसपी सिद्धार्थ पुलिस बल के भारी भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे। पथराव, तलवार और पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे। इसी बीच सिर पर सफेद कपड़ा बाँधकर इरफान खान नंगी तलवार लेकर हिंदुओं की तरफ दौड़ा। एसपी ने 12-15 पुलिसवालों के साथ उसे पकड़ने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया, लेकिन वह छूटकर फिर से भागने लगा। फिर एसपी ने जैसे ही उसे दौड़कर पकड़ने की कोशिश की, वसीम ने पीछे से उनके पैर पर गोली मार दी। गोली एसपी के बाएँ पैर में लगी थी।

10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने इस पर पथराव किया था। इस दौरान 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा के दौरान छह पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हो गए। हमले के बाद शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

‘हम नहीं पहुँच पाए, लेकिन भक्तों ने मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया’: सांसद नवनीत राणा बोलीं- हमें रोका गया, लेकिन मकसद पूरा हुआ

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Maharashtra CM Uddhav Thackeray) के निजी आवास मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने की घोषणा के बाद अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (MP Navneet Rana) और उनके विधायक पति रवि राणा (MLA Ravi Rana) के घर पर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने जमकर उपद्रव किया।

नवनीत राणा और उनके पति ने कहा कि इस दौरान शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनके घर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी पर उनके घर के बाहर हंगामे में शामिल रहीं। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर वे घर से बाहर आते हैं तो कोल्हापुरी मिर्ची से उनका स्वागत किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने राणा दंपत्ति को हनुमान चालीसा के लिए बाहर जाने से रोक दिया। उन्हें घर से बाहर ही नहीं निकलने दिया।

वहीं, दिन भर की घटनाक्रम के बाद नवनीत राणा ने कहा, “हमारा उद्देश्य पूरा हो गया। हालाँकि मैं और रवि राणा सीएम उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ तक नहीं पहुँच सके, जहाँ हमें हनुमान चालीसा का पाठ करना था। लेकिन, उनके आवास के बाहर भक्तों द्वारा पाठ किया गया था।” दरअसल, राणा दंपत्ति ने सुबह 9 बजे हनुमान चालीसा पाठ का समय निर्धारित किया था, लेकिन दोपहर तक शिवसेना के कार्यकर्ताओं और पुलिस ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया।

सांसद नवनीत राणा ने कहा कि उन्हें रोकने के लिए सीएम उद्धव ठाकरे ने उनके घर गुंडे भेजे। शिवसेना तो खत्म होने की बात कहते हुए नवनीत राणा ने कहा कि असली शिव सैनिक तो बाला साहब के साथ चले गए हैं, अब गुंडों की शिवसेना रह गई है। मुख्यमंत्री का सिर्फ यही काम रह गया है कि किस पर क्या कार्रवाई करवानी है, किसे जेल भेजना है और किसे तड़ीपार करना है। 

इसके पहले अमरावती के बडनेरा विधानसभा से विधायक रवि राणा ने कहा था, “महाराष्ट्र पुलिस हमें घर से बाहर कदम रखने नहीं दे रही है। हमारे आवास पर शिवसेना कार्यकर्ता हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे केवल राजनीतिक लाभ चाहते हैं।” वहीं, नवनीत राणा ने कहा कि उनके घर पर हमला हो रहा है। शिवसैनिक गुंडागर्दी कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन उपद्रवियों को पुलिस रोकने का प्रयास नहीं कर रही है। कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री होंगे।

कार्यकर्ताओं को उकसाते हुए शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा था कि मातोश्री में प्रवेश करने की हिम्मत किसी में नहीं है। यदि किसी ने मातोश्री में घुसपैठ करने की कोशिश की तो शिव सैनिक चुप नहीं रहेंगे और वे आक्रामक हो जाएँगे। इससे पहले उद्धव ठाकरे भी शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को अपने कार्यकर्ताओं से इशारों में कह चुके हैं कि मातोश्री में घुसने की जुर्रत कोई नहीं करेगा।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए कॉन्ग्रेस ने किया 200 मंदिरों को तोड़ने का दावा, पकड़ा गया झूठ

भाजपा को घेरने के लिए अक्सर झूठ और फेक खबरों का सहारा लेने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर अपनी किरकिरी करा ली है। दरअसल, कॉन्ग्रेस (Congress) ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें ​उसने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) बनाने के लिए एक शिवलिंग सहित करीब 200 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था।

वाराणसी कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा, “खबरों की मानें तो काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए करीब 200 मंदिर/शिवलिंग तोड़ने पड़े थे। एक भारत माता मंदिर था, जो लगभग 5000 साल पुराना था। मकान तोड़े गए उसमें से मंदिर निकले। बात बनारस की है। बनारस को वाराणसी भी कहते हैं। मोदी जी वाराणसी के सांसद हैं।”

फोटो साभार: ट्विटर

कॉन्ग्रेस का दावा निकला झूठा

हालाँकि, पीएम मोदी और भाजपा पर हमला करने की हड़बड़ी में कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। भाजपा और पीएम मोदी पर लगाए गए आरोप और मंदिर विध्वंस का यह वीडियो पूरी तरह से गलत है। बिना पुष्टि किए कॉन्ग्रेस पार्टी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसका वाराणसी से कोई लेना-देना नहीं है। यह सब वह दुष्प्रचार और लोगों में बीजेपी के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए कर रही है। आपको बता दें कि यह वीडियो तमिलनाडु का है। पिछले साल जुलाई में तमिलनाडु में कोयंबटूर नगर निगम के अधिकारियों ने यह मंदिर तोड़ा था।

कोयंबटूर नगर निकाय के अधिकारियों ने मुथनानकुलम बाँध (Muthanankulam bund) को बनाने के लिए सात मंदिरों को तोड़ा था। अधिकारियों की मौजूदगी में अर्थमूवर्स ने अम्मान कोविल, बन्नारी अम्मन कोविल, अंगला परमेश्वरी, करुप्पारायण कोविल, मुनीस्वरन कोविल और कुछ अन्य मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था।

सात मंदिरों में से एक मंदिर 100 साल पुराना था। इसके विध्वंस पर सोशल मीडिया यूजर्स में भारी आक्रोश देखने को मिला था। नेटिज़न्स ने एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार पर तमिलनाडु में सदियों पुराने हिंदू मंदिरों पर हमला करने का आरोप लगाया था। खैर, तमिलनाडु में अपनी सहयोगी Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) पार्टी की निंदा करने की बजाय कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया पर भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने में व्यस्त है। लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी किरकिरी होने के बाद कॉन्ग्रेस ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है।