Home Blog Page 2793

मर्दाना लिंग वाली कोई महिला बाथरूम में घुस कर तुम्हारे सामने सूसू करे तो भी चुप रहो लड़कियाँ: इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी में पोस्टर, बवाल

इंग्लैंड (England) की प्लेमाउथ यूनिवर्सिटी (Plymouth University) में महिला और पुरुष शौचालयों के बाहर विवादित पोस्टर चिपकाए गए हैं, जिसको लेकर बवाल हो रहा है। यूनिवर्सिटी में महिलाओं की सुर​क्षा को नजरअंदाज करते हुए उन्हें चेतावनी दी गई है कि अगर मर्दाना लिंग वाली कोई महिला बाथरूम में घुस कर सामने सूसू करे तो लड़कियाँ बिल्कुल चुप रहें। यूनिवर्सिटी के चारों ओर दीवारों पर पुरुष और महिलाओं के शौचालयों के बाहर गुलाबी, नीले और सफेद रंग के चेतावनी भरे पोस्टर चिपकाए गए हैं। डेली मेल के मुताबिक, इसको लेकर यूनिवर्सिटी की आलोचना की जा रही है। आलोचकों ने इस कदम को ‘Repellent Gaslighting’ करार दिया है और सवाल किया कि इसके बजाय तीसरा शौचालय क्यों नहीं बनाया जा सका।

पोस्टर में लिखा है, “यहाँ आपका स्वागत है। क्या आपको लगता है कि कोई व्यक्ति ‘गलत’ बाथरूम का इस्तेमाल कर रहा है? कृपया करके उन्हें ये नहीं बताएँ कि वो गलत कर रहे हैं। उन्हें घूरें नहीं और ना ही उन्हें अपमानित करें। इसकी बजाय कृपया उनकी निजता का सम्मान करें।”

पोस्टर में आगे लिखा है, “तुम्हारे सामने जब वो सूसू करे तो भी चुप रहे लड़कियाँ और वहाँ से हट जाएँ। क्योंकि, वे उन शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें वे सुरक्षित महसूस करती हैं। उन्हें असहज महसूस न कराएँ, बल्कि उन्हें प्राइवेसी दें। ट्रांस, नॉन-बाइनरी छात्रों को यहाँ आने का पूरा अधिकार है।”

फोटो साभार: ट्विटर

WomenAreWomen ने इस मामले को लेकर ट्विटर पर लिखा, “ध्यान दें कि इसमें स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि महिला छात्रों का स्वागत है। Repellent gaslighting। यह एक कुकत्य है, जिसे जानबूझकर युवा महिलाओं को उनकी सीमा और उनके कानूनी अधिकारों से बाहर कर रहा है।” ट्रेसी हिल ने कहा, “निश्चित रूप से वे तीसरी जगह बना सकते हैं? लेकिन जो कदम इन्होंने उठाया है, उससे महिलाओं में भय का माहौल पैदा होगा। यहाँ उनके साथ कुछ भी हो सकता है। शौचालय में मर्दाना लिंग वाला भेजकर उन्हें असहज महसूस न कराएँ?”

उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों को भी इसके लिए आगे आना होगा और तीसरे यूनिसेक्स स्पेस की माँग करनी होगी। वहीं, प्लेमाउथ विश्वविद्यालय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है और वह सभी के साथ समान व्यवहार करता है। यूनिवर्सिटी की एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारे परिसर को खास तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि हमारे कर्मचारी, छात्र और विजिटर यहाँ खुद को सहज और सुरक्षित महसूस कर सकें, जहाँ उन्हें single-sex और gender neutral सुविधाएँ मिल रही हैं। इससे हमारा पूरा विश्वविद्यालय और इससे जुड़े लोग खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस कर रहे हैं।”

हेमंत सोरेन और उनके परिजनों की सम्पत्तियों की जाँच करेगी ED: झारखंड हाईकोर्ट ने दिया आदेश, सत्ता के दम पर खुद को लाभ पहुँचाने का मामला

झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के साथ उनके खास लोगों की सम्पत्ति की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता शिव शंकर वर्मा हैं। अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद तय की गई है। सोरेन और उनके करीबियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन लोगों की सम्पत्तियाँ ED द्वारा जाँच कराए जाने के हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं उनमें हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन, रवि केजरीवाल, अमित अग्रवाल, रमेश केजरीवाल, राजीव अग्रवाल, निधि अग्रवाल, प्रेमनाथ माली, रंजन साहू, विवेकानंद राउत समेत कुल 13 लोग शामिल हैं। जाँच में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज भी शामिल होगी जो 300 से अधिक कंपनियों के क्रेडिंशयल जाँचेंगी। यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डा. रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने दिया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जाँच के दायरे में आने वाली 28 कंपनियों में हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरन का पैसा लगा हुआ है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इस शेल कंपनियों ने इस मामले में बड़ी भूमिका निभाई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ED यह जाँच करेगी कि इन कंपनियों ने पैसों का किस रूप में निवेश कर के कैसे फायदा कमाया है। इसी केस में बसंत सोरेन के महाराष्ट्र निवासी संबंधी सुरेश नागर की भूमिका की जाँच होगी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से पहले ही हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में बताई जा रही थी। चुनाव आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिख कर ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ पर जवाब माँगा है। मुख्यमंत्री सोरेन पर अपने पद का दुरूपयोग करते हुए खुद को ही खदान आवंटित करने का आरोप याचिकाकर्ता शिव शंकर वर्मा ने लगाया है। खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा में 0.88 एकड़ वर्ग क्षेत्र में फैला है।

कभी लड़की का कंकाल, कभी ‘मुस्लिम का शव’… 2 साल से BHU के लापता शिव कुमार की अब ‘मौत’, पिता ने सुनाई पुलिस की हर (झूठी) कहानी

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU: Banaras Hindu University) के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी 2 साल से लापता थे। अब उत्तर प्रदेश की पुलिस ने बताया है कि वो जीवित नहीं हैं। इलाहबाद हाईकोर्ट में गुरुवार (21 अप्रैल 2022) को शपथ पत्र देकर 2 साल से लापता शिव कुमार त्रिवेदी (Shiv Kumar Trivedi) के जीवित न होने की जानकारी दी गई।

UP पुलिस के शपथ पत्र में शिव कुमार त्रिवेदी को मानसिक बीमार बताया गया। साथ ही उनकी मौत तालाब में डूबने से बताई गई। BSc के छात्र शिव कुमार के पिता 2 साल से अपने लापता बेटे की जानकारी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की बेंच ने केस की जाँच कर रहे CBCID के विवेचना अधिकारी को DNA रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा है। यह सुनवाई शिव कुमार त्रिवेदी (Shiv Kumar Trivedi) के पिता की याचिका पर की जा रही है।

मृतक छात्र शिव कुमार त्रिवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के गाँव बड़गढ़ी खुर्द, पन्ना जिला के निवासी थी। पुलिस ने बताया, “शिव कुमार की मृत्यु 15 फरवरी 2020 को हुई थी। उनका पोस्टमॉर्टम 18 फरवरी 2020 को करवाया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं मिला और मौत की वजह डूबना बताई गई। मृतक के पिता के DNA मिलान से शव की पहचान हुई। इस केस की जाँच CBCID कर रही है।”

पीड़ित पिता की आपबीती

ऑपइंडिया ने मृतक छात्र शिव कुमार के पिता प्रदीप कुमार से बात की। उन्होंने बताया, “घटना 13-14 फरवरी की है। उसी के 2 दिन पहले मेरा बेटा गाँव से ट्रेन पकड़ कर वाराणसी गया था। उसने फोन कर के बताया कि मेरी तबियत ठीक नहीं है। मैंने उसे ट्रेन में लगी ठंडी की वजह से बुखार आना बताया। इसके बाद अगले दिन मेरे बेटे ने फोन पर काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन करने जाने की जानकारी दी। उसके बाद से मेरे बेटे से सम्पर्क नहीं हो पाया।”

प्रदीप कुमार ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि बेटे की जानकारी लेने के लिए इसके बाद वो वाराणसी गए। वहाँ कई थानों में उन्हें दौड़ाया गया। अपने बेटे की खोजबीन के दौरान उन्हें एक ऐसा लड़का मिला, जिसने फोन कर के पुलिस को बुलाया था और उनके बेटे (शिव कुमार त्रिवेदी) को डायल 112 को सौंपने की जानकारी दी।

मृतक छात्र के पिता प्रदीप कुमार बताते हैं कि उस लड़के द्वारा दी गई जानकारी को डायल 112 के सिपाहियों ने SSP प्रभाकर चौधरी के सामने स्वीकारा था। डायल 112 के सिपाहियों ने यह भी स्वीकारा था कि शिव कुमार त्रिवेदी को वो लोग अपने साथ ले गए थे और बाद में लंका थाने के तत्कालीन SHO भारत भूषण ने उसे कस्टडी में लिया था। पूरा वाकया सुनने के बाद SSP ने प्रदीप कुमार के बेटे शिव कुमार त्रिवेदी को खोजने के निर्देश पुलिस को दिए थे।

पुलिस पर हड़काने, झूठा साबित करने, लालच देने का आरोप

ऑपइंडिया से मृतक शिव कुमार त्रिवेदी (Shiv Kumar Trivedi) के पिता ने कहा, “मुझे SHO भारत भूषण द्वारा पहले हड़काया गया। फिर पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी गई। फिर वो मेरे घर तक आए और बेटों की पढ़ाई के लिए गिरवी रखे गए खेत को छुड़वाने का लालच दिया। उनका मकसद था कि मैं केस वापस ले लूँ और जाँच बंद करवा दूँ। मैं उनसे जब अपने बेटे के थाने से निकलने के सबूत माँगता था, तब वो नाराज हो जाते थे। आख़िरकार मुझे गुमराह किया जाने लगा।”

गुमराह वाली बात को आगे बढ़ाते हुए प्रदीप कुमार ने बताया कि वाराणसी कैंट थानाक्षेत्र में मिले एक कंकाल के पास उनके बेटे के कपड़े दिखाए गए। जबकि बाद में वो कंकाल लड़की का निकला। अत्यंत दर्द के साथ उन्होंने यह भी बताया कि उनके ही बेटे के लापता केस में उन्हीं को फँसाया जाने लगा। बेटे के वाराणसी से लापता होने और उसके बाद खुद के बाप के साथ मंदिर जाने वाली कहानी पर प्रदीप कुमार ने कहा:

“मुझे ही फँसाने के लिए मोहित यादव नाम का इंस्पेक्टर झाँसी के एक मंदिर गए। वहाँ से एक बयान ले आए कि लापता होने के बाद शिव कुमार मेरे साथ मंदिर पर आया था, लेकिन बाद में वो बात भी झूठी साबित हुई।”

प्रदीप कुमार को उनके बेटे शिव कुमार त्रिवेदी की लाश लेने के लिए भी कम संघर्ष नहीं करना पड़ा। उस लाश को लेकर भी पुलिस भ्रम फैला रही थी। प्रदीप कुमार बताते हैं कि राम नगर क्षेत्र के एक तालाब में एक लाश मिली थी। शुरू में वहाँ के SHO ने उसे मुस्लिम की लाश बता कर गले में ताबीज आदि मिलने का झूठ बोला, इनको वहाँ से हटा दिया गया था। हालाँकि बाद में वही लाश शिव कुमार की निकली।

‘मानसिक बीमार नहीं था शिव कुमार त्रिवेदी’

मृतक के पिता ने आगे बताया, “मेरा बेटा हाईस्कूल और इंटर फर्स्ट डिवीजन में पास है। वो कानपुर में कोचिंग भी कर चुका और 1 साल हैदराबाद के पास एक शहर में पढ़ाई की। मेरा बेटा मानसिक बीमार नहीं था। पुलिस ने बेटे के कस्टडी से खुद ही थाने से चले जाने का बहाना बनाया पर उसकी CCTV रिकॉर्डिंग माँगने पर गाली दी जाती थी।”

CCTV को लेकर प्रदीप कुमार ने बहुत ही तार्किक सवाल दागते हुए कहा कि CCTV खराब कैसे हो सकती है… अगर उसी शहर में कुछ दिन के बाद प्रधानमंत्री दौरा करने वाले हों तो। डूबने को लेकर भी उनके तर्क में दम है क्योंकि वो पूछते हैं कि अगर उनके बेटे को डूबना ही होता तो रास्ते में गंगा नदी पड़ी थी। उसके बजाय वो तालाब में क्यों डूबेगा?

6 महीने तक कोई जाँच या कार्रवाई नहीं: पीड़ित के वकील

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी पीड़ित पिता के वकील सौरभ तिवारी से भी ली। उन्होंने बताया, “दिन रात अपने बेटे को तलाशते एक पिता को 2 साल बाद बताया जाता है कि उनका बेटा दुनिया में नहीं है। जबकि उसी जिले के एक अन्य थानाक्षेत्र में उसी लड़के का पोस्टमॉर्टम तक करवाया जा चुका था।”

वकील सौरभ तिवारी के अनुसार पुलिस ने इस मामले में काफी लीपापोती का प्रयास किया है। उन्होंने पूछा कि देश भर में खोजने का दावा करने वाली पुलिस क्या अपने बगल वाले थाने में मिली लाश की जानकारी नहीं जुटा पाई होगी?

शिव कुमार त्रिवेदी (Shiv Kumar Trivedi) के पिता प्रदीप कुमार के वकील के अनुसार इस केस में लापरवाही करने वाले 5 पुलिसकर्मियों को पूर्व SSP वाराणसी IPS अमित पाठक सस्पेंड कर चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी 2020 में दर्ज गुमशुदगी के केस में पहली जाँच लंका थाने के विवेचक ने लगभग 6 माह बाद 12 अगस्त 2020 को शुरू की थी। उनके अनुसार जुलाई 2022 में कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है।

मस्जिद के आगे लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा, नोटिस भेज पुलिस ने कहा- ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’: पुजारी ने आरोपों को नकारा

UP के जालौन जिले में अज़ान के दौरान हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) बजाने के आरोप में एक मंदिर के पुजारी पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस की कार्रवाई से नाराज पुजारी ने अनशन किया। बाद में पुलिसकर्मियों के कहने पर उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। वहीं, पुलिस ने 21 अप्रैल 2022 (गुरुवार) को पुजारी पर बिना अनुमति के लाऊडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाने का आरोप लगाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला स्टेशन रोड का है। यहाँ पर एक मस्जिद के आगे मंदिर है जिसमें मंगलवार (19 अप्रैल) को हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। पुजारी मत्स्येंद्र गोस्वामी का आरोप है, “मैंने लाऊडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया। पुलिस के आरोप झूठे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट को किसी ने मेरी झूठी शिकायत दी है। बिना किसी जाँच के ही मुझ पर शांति भंग की कार्रवाई की गई है।”

पुलिस ने कहा कि पुजारी के खिलाफ शांति भंग करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 107/116 के तहत नोटिस दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानपुर क्षेत्र) भानु भास्कर ने कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है या माहौल खराब करता है तो पुलिस कार्रवाई करेगी।

जालौन पुलिस के इंस्पेक्टर कोतवाली शिव कुमार राठौड़ के मुताबिक पुजारी मत्स्येंद्र गोस्वामी जालौन के तुलसी नगर मोहल्ले के निवासी हैं। शिकायत है कि उन्होंने घटना के दिन मस्जिद के आगे हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसी के चलते उन पर शांति भंग की कार्रवाई हुई है। पुलिस कार्रवाई से नाराज मत्स्येंद्र गोस्वामी ने जालौन के ही गांधी चबूतरा (मंच) पर आमरण अनशन शुरू कर दिया। हालाँकि बाद में पुलिस के समझाने पर उन्होंने अपने अनशन को खत्म कर दिया।

इससे पहले गोस्वामी ने जालौन जिले के मुख्यालय उरई के बजरिया इलाके में मीट बेचने वाली दुकानों को कथित तौर पर बंद कर दिया था। बता दें कि गोस्वामी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हाल ही में संपन्न उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में नामांकन भरा था, लेकिन उनका कागजात खारिज हो गया था। कहा जाता है कि उन्होंने जालौन जिले के माधोगढ़ विधानसभा क्षेत्र भाजपा का टिकट माँगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था।

अरविंद केजरीवाल को अपने ट्वीट से ‘चोट पहुँचाने’ के लिए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ SIT का गठन: पंजाब की AAP सरकार ने किया खुलासा

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली सरकार ने खुलासा किया है कि भाजपा (BJP) नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा द्वारा दिए गए ‘भड़काऊ’ बयानों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (Special Investigation Team) का गठन किया गया था।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका के संबंध में अदालत द्वारा जारी नोटिस पर पंजाब पुलिस ने बुधवार (20 अप्रैल 2022) को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया। AAP के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खुलासा किया है कि AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भाजपा नेता द्वारा दिए गए ‘भड़काऊ’ बयानों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया था।

बता दें कि 6 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बग्गा के खिलाफ जाँच पर रोक लगा दी थी और पंजाब पुलिस को नोटिस जारी किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब सरकार ने कहा था कि बग्गा के खिलाफ FIR केवल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने वाले उनके एक बयान पर दर्ज नहीं की गई थी, बल्कि ऐसे कई ट्विट्स को लेकर दर्ज की गई थी, जो कथित तौर पर उत्तेजक, झूठे, भड़काऊ, सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी और नुकसान पहुँचाने वाले थे।

पंजाब सरकार ने यह भी दावा किया कि बग्गा के खिलाफ FIR इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि उन्होंने इस तरह का बयान देकर सुनियोजित अपराधों को अंजाम देने की कोशिश की। AAP के नेतृत्व वाली सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह भी कहा कि उन्हें तेजिंदर पाल बग्गा द्वारा की गई और अधिक आपत्तिजनक टिप्पणियाँ मिली है।

पंजाब सरकार के वकील ने यह भी तर्क दिया कि बग्गा के खिलाफ मुस्लिम बहुल मलेरकोटला जिले और सनेता में कश्मीरी हिंदुओं का समर्थन करने वाले पोस्टर पोस्ट करने के लिए दो और शिकायतें दर्ज की गई थीं, इस पोस्टर पर लिखा था, “हिंदू, जिनका खून उबला नहीं है, वह खून नहीं है।” पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि पोस्टर 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार के जवाब में थे। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि इस तरह के पोस्टर विभाजनकारी थे और क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते थे।

बता दें कि याचिका में बग्गा ने भड़काऊ बयान देने, आपराधिक धमकी देने और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में एक अप्रैल को मोहाली पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की माँग की थी। जस्टिस एचएस सिद्धू की अदालत में बग्गा की ओर से वरिष्ठ वकील आरएस राय और चेतन मित्तल ने याचिका दायर की थी।

तजिंदर पाल बग्गा के खिलाफ शिकायत दर्ज

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को, भारतीय जनता पार्टी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने एक बयान में कहा कि जब वह लखनऊ में थे, पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली में उनके घर पहुँची। भाजपा नेता ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस दिल्ली पुलिस को उनके राज्य में आने की सूचना देने में विफल रही, जो कानून के खिलाफ है। बग्गा ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनके खिलाफ 100 FIR दर्ज करने की चुनौती देते हुए कहा था कि वह तब तक नहीं रुकेंगे जब तक केजरीवाल कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ अपने बयान के लिए माफी नहीं माँगते।

पंजाब पुलिस ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मोहाली में दर्ज शिकायत के आधार पर बग्गा के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। यह शिकायत आम आदमी पार्टी के लोकसभा प्रभारी और प्रवक्ता डॉ सनी सिंह अहलूवालिया ने दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में, अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि बग्गा और अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने 30 मार्च को एक बयान दिया जिसमें उन्होंने अपने फॉलोवर्स को हिंसा करने, बल प्रयोग करने और दिल्ली के सीएम केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं को चोट पहुँचाने के लिए उकसाया।

‘प्रेमी ने घर बुलाया, उसके मम्मी-पापा ने मेरा कलावा काट दिया’: गुजरात में लड़कियों को फँसा ईसाई में धर्मांतरण, परिवार पर FIR, सभी गिरफ्तार

गुजरात के तापी (Tapi, Gujarat) जिले में रहने वाले एक ईसाई परिवार (Christian Family) के खिलाफ हिंदू लड़कियों ने जबरन धर्मांतरण का मामला दर्ज कराया है। जिले के व्यारा थाने में गुरुवार (21 अप्रैल 2022) को अंबिका नगर क्षेत्र में रहने वाले वसावा परिवार के पाँच सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायतकर्ता मानसीबेन दिलीपभाई गामित ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि वसावा परिवार के पाँच सदस्यों ने उसे और एक अन्य लड़की को जबरन ईसाई धर्म में कन्वर्ट किया।

शिकायतकर्ता को आरोपित ईसाई लड़के से प्यार हो गया था

अपनी शिकायत में मानसीबेन गामित ने कहा, “जब मैं तालुका स्कूल व्यारा में पढ़ती थी, तब योहान राकेशभाई वसावा भी वहाँ पढ़ रहा था। योहान के साथ मेरा अफेयर था। हम एक-दूसरे से फोन पर बात करते थे। योहान मेरे भाई का दोस्त भी था, इसलिए वह कभी-कभी हमारे घर भी आता था। योहान के माता-पिता को हमारे प्रेम संबंधों के बारे में पता था। मैं भी उसके घर जाती थी और उसका परिवार ईसाई धर्म का पालन करता है।”

‘हमने तुम दोनों का शुद्धिकरण करने के लिए बुलाया’

मानसीबेन ने आगे कहा, “20 अप्रैल 2022 को सुबह करीब आठ बजे योहान ने मुझे फोन किया और कहा कि उसके पिता ने मुझे उसके घर पर बुलाया है। जब मैं योहान के घर गई तो उनके माता-पिता राकेशभाई वसावा और रेखाबेन वसावा के अलावा उसके दो भाई रसिन वसावा और याकूब वसावा पहले से ही वहाँ मौजूद थे। उसके पिता ने मेरे हाथों में बँधे पवित्र कलावा को काट दिया और उसकी माता ने मेरे माथे और पैरों पर तेल लगाया। योहान ने अपने पिता के कहने पर मेरा मोबाइल फोन लेकर स्विच ऑफ कर दिया। उसी समय मित्तल धीरूभाई चौधरी वहाँ पहुँची। वह योहान के भाई रसिन वसावा की गर्लफ्रेंड थी। योहान के पिता राकेशभाई वसावा ने उसके पैर और माथे पर भी तेल लगाया और कहा कि तुम लोग अपवित्र थे। हमने तुम दोनों का शुद्धिकरण करने के लिए अपने घर पर बुलाया था। उसने हमसे कहा कि हमें चार दिन उसके घर पर ही रहना चाहिए।”

‘जीसस ने मेरे अकाउंट में एक लाख रुपए डाल दिए’

मानसीबेन गामित ने अपनी शिकायत में आगे कहा, “योहान के पिता ने मुझे बताया कि यीशु ने उनके और उनकी पत्नी के खाते में एक लाख रुपए डाल दिए हैं और उन्हें पुराने फोन, पुरानी कार को छोड़ने और नई कार खरीदने के लिए कहा है। इसके बाद उन्होंने मोमबत्तियाँ जलाईं और कुछ ईसाई रीति-रिवाज पूरे किए। फिर 21 अप्रैल 2022 को धर्म परिवर्तन की रस्में हुईं, जो शाम 5 बजे तक चलीं। उसके बाद हमारे फोन को ऑन किया गया। मैंने फोन करके अपने माता-पिता को पूरी बात बताई, जिसके बाद वे मौके वहाँ पहुँचे और मुझे वापस घर ले आए।”

मानसीबेन के शब्दों में, “योहान राकेशभाई वसावा, राकेशभाई कठूदियाभाई वसावा, रेखाबेन राकेशभाई वसावा, रसिन राकेशभाई वसावा और याकूब राकेशभाई वसावा सभी अंबिका नगर व्यारा के निवासी हैं। इन्होंने मुझे एक साजिश के तहत फँसाया और अपने घर पर बुलाया। उन्होंने मेरे बालों को बाँध दिया और मेरा मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिया। मेरी इच्छा के विरुद्ध मुझे जबरन ईसाई बना दिया, ताकि मुझसे शादी कर सकें।”

बता दें कि पुलिस ने पाँचों आरोपितों को गुरुवार (21 अप्रैल 2022) देर रात गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4 और भारतीय दंड संहिता अधिनियम की धारा 342, 417 और 120 बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

christian-family-booked-for-forcibly-converting-hindu-girls-in-gujarat

‘मैं सच्चा रामभक्त, हिंदू होने पर गर्व’: गुजरात कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने भाजपा की तारीफ की, कहा था- पार्टी में मेरी हालत नसबंदी वाले दूल्हे जैसी

विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात (Gujarat Assembly Election) कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल (State Congress Executive president Hardik Patel) का पार्टी से मोहभंग भाजपा (BJP) की ओर झुकाव दिख रहा है। कॉन्ग्रेस में खुद को ‘नसबंदी वाला दूल्हा’ बताने वाले हार्दिक पटेल ने कहा है कि वे सच्चा रामभक्त हैं और उन्हें हिंदू होने पर गर्व है।

हार्दिक पटेल ने राम मंदिर निर्माण और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर भाजपा की सराहना की। अपने पिता की बरसी पर 4,000 भगवद्गीता बाँटने की घोषणा करते हुए हार्दिक ने कहा कि वे सच्चा रामभक्त हैं और उन्हें हिंदू होने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भाजपा ने अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर निर्माण का अपना वादा पूरा किया है, जिससे वे काफी प्रभावित हैं।

हालाँकि, इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कहने का मतलब यह नहीं है कि भाजपा में शामिल होने का उनका कोई इरादा नहीं है, लेकिन सभी विकल्प खुले रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बस वे अपने विरोधी को कमजोर नहीं मानते हैं तथा उसकी नीतियों का विरोध करने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा गुजरात में बेहद मजबूत है।

हार्दिक ने कहा कि कॉन्ग्रेस में उन्हें काम करने नहीं दिया जा रहा है, उन्हें रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके सभी राजनीतिक विकल्प खुले हैं। गुजरात की जनता के हित में जो भी फैसला करना पड़ेगा, वह करेंगे। भाजपा की तारीफ करते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि भाजपा में मेहनत करने वालों को मौका दिया जाता है, लेकिन कॉन्ग्रेस युवाओं को मौका नहीं देती।

अपने हिंदूवादी रूख को दिखाते हुए हार्दिक ने कहा कि वे अपने पिता भरतभाई पटेल की पहली बरसी पर 28 अप्रैल को अपने गाँव वीरमगाम में सुंदरकांड का पाठ कराएँगे। इसके साथ ही वे 4,000 भगवद्गीता बाँटेंगे और लोगों को भोजन कराएँगे। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में हार्दिक के पिता का देहांत हो गया था और उस वक्त कॉन्ग्रेस का कोई बड़ा नेता उनसे मिलने नहीं आया था।

कॉन्ग्रेस से नाराजगी पर हार्दिक ने कहा कि वे पार्टी से नाराज नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्‍व ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने अपनी बात केसी वेणुगोपाल के सामने रख दी है। हार्दिक ने कहा क‍ि राजस्‍थान में सचिन पायलट ने अच्‍छा काम किया, लेकिन उनके साथ भेदभाव हुआ। वही हाल गुजरात में भी होने जा रहा।

नसबंदी वाला दूल्हा

इससे पहले पहले हार्दिक ने कॉन्ग्रेस से अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर की थी। उन्होंने 13 अप्रैल 2022 को कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्हें गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी (PCC) की बैठक में भाग लेने के लिए नहीं बुलाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय में उन्हें शामिल नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा, “इस पद का क्या मतलब है? गुजरात कॉन्ग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष का मतलब शादी के बाद दूल्हे की नसबंदी करवाने के बराबर है।”

केरल में RSS कार्यकर्ता की हत्या के मामले में बिलाल, रिसवान सहित PFI-SDPI के 4 गुंडे गिरफ्तार, बाकियों की तलाश में पुलिस

केरल के पलक्कड़ जिले में पिछले हफ्ते 16 अप्रैल, 2022 को हुए आरएसएस के एक कार्यकर्ता की हत्या के आरोप में पुलिस ने गुरुवार (21 अप्रैल, 2022) को पीएफआई-एसडीपीआई के चार गुंडों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) विजय सखारे ने बताया कि गिरफ्तार किए गए चारों लोग घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन 16 अप्रैल को आरएसएस कार्यकर्ता एसके श्रीनिवासन पर हुए हमले में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। साथ ही, उन्होंने पुष्टि की कि चारों पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसकी राजनीतिक शाखा- सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यकर्ता हैं।

केरल के पलक्कड़ में पिछले हफ्ते आरएसएस के प्रचारक ए श्रीनिवासन की हत्या के मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान 22 वर्षीय मुहम्मद बिलाल, मुहम्मद रिसवान (20 वर्ष), ए रियासुदीन (35) और सहद, (22) के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चारों आरोपितों ने पूछताछ के बाद अपनी भूमिका का खुलासा किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सखारे ने कहा, “हम इस घटना में शामिल 14-15 लोगों के बारे में जानते हैं और जाँच आगे बढ़ने पर इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है, और गिरफ्तारियाँ भी ज्यादा होंगी।”

बता दें कि पुलिस ने मंगलवार को आरएसएस के तीन कार्यकर्ताओं रमेश, अरुमुघन और सरवनन को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कहा, “तीनों आरएसएस कार्यकर्ता संजीत के दोस्त थे, जिसकी पिछले साल नवंबर में यहाँ हत्या कर दी गई थी। उसका मानना है कि 15 अप्रैल को पीएफआई के सुबैर (43) की हत्या संजीत की मौत का बदला लेने के लिए की गई थी और हत्या की योजना उसके करीबी दोस्त रमेश ने बनाई थी, जो पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से एक है।”

गौरतलब है कि आरएसएस के पूर्व जिला कार्यकर्ता और पदाधिकारी श्रीनिवासन पर 16 अप्रैल को पलक्कड़ में उनकी मोटरसाइकिल की दुकान पर छह लोगों के समूह ने हमला किया था। इससे महज 24 घंटे पहले शुक्रवार को दोपहर के जुमे की नमाज पढ़कर अपने अब्बू के साथ घर लौट रहे सुबैर की जिले के इलापुल्ली में हत्या कर दी गई थी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मुख्य साजिशकर्ता उमर खालिद को जमानत से इनकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- इसके बयान भड़काऊ और आपत्तिजनक

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riots) के मामले में यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) की अमरावती में दी गई स्पीच को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने भड़काऊ और आपत्तिजनक माना है। साल 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता खालिद की जमानत याचिका को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा, “क्या ये कहना कि जब आपके पूर्वज अंग्रेजों की दलाली कर रहे थे, गलत नहीं है? अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर ऐसे भड़काऊ बयान नहीं दिए जा सकते। लोकतंत्र में इसकी इजाजत नहीं है।” पीठ ने पूछा, “क्या आपको नहीं लगता कि इस्तेमाल किए गए ये भाव लोगों भड़काने वाला है? यह पहली बार नहीं है जब आपने अपने भाषण में ऐसा कहा है। आपने यह कम से कम पाँच बार कहा। यह लगभग ऐसा है जैसे कि भारत की आजादी की लड़ाई केवल एक समुदाय ने लड़ी थी।” पीठ ने सवाल उठाया कि क्या गाँधी जी या शहीद भगत सिंह जी ने कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने खालिद के भाषण का एक हिस्सा अदालत के समक्ष पढ़ा। इसके बाद उमर खालिद के वकील त्रिदीप पेस से कोर्ट ने कहा कि बयान को देखकर हैरत नहीं है कि क्यों पुलिस ने इसमें FIR दर्ज की है। पेस के तर्क पर कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत ने पूछा कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अप्रिय भाषण देने तक है। जो भारतीय दंड संहिता के 153A और 153B के तहत दंडनीय अपराध है।

पीठ ने जब पूछा कि खालिद पर क्या आरोप हैं। इसके जवाब में त्रिदीप पेस ने दलील दी कि खालिद पर साजिश का आरोप लगाया गया है, लेकिन वह उस वक्त शहर में मौजूद नहीं था। हालाँकि, पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत कह सकती है कि खालिद द्वारा दिया गया भाषण स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

बता दें कि उमर खालिद के खिलाफ 25 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास में हिंसा से जुड़ा है। दूसरी एफआईआर (FIR No. 101/2020) के तहत बीते साल 1 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार किया गया था। बीते साल दंगों के एक मामले में ही जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित को जमानत देते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट एडिशनल जज विनोद यादव ने कहा था, “उमर खालिद को सिर्फ इसलिए अनंतकाल तक जेल में कैद कर के नहीं रखा जा सकता क्योंकि इस मामले में अभी दंगाई भीड़ में शामिल और लोगों को चिह्नित किया जाना है और कई अन्य गिरफ्तारियाँ भी होनी हैं।”

उन्होंने 20 हजार रुपए के निजी मुचलके और हर सुनवाई पर हाजिर होने की शर्त पर खालिद को जमानत दे दी। जेल से रिहाई पर अपना नंबर खजूरी खास थाने के एसएचओ को मुहैया कराने को कहा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मोबाइल दुरुस्त हो और उसमें ‘आरोग्य सेतु’ एप डाउनलोड किया गया हो।

‘अंबेडकर के पोस्टर में मेरी फोटो क्यों नहीं छापी?’ – नरूद्दीन मुल्ला ने एक शख्स को हथौड़े से पीट-पीट कर मार डाला, पुणे पुलिस ने 2 को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे (Pune, Maharashtra) में एक मामूली बात पर मारपीट की घटना सामने आई है। अवसर था भीमराव अंबेडकर जयंती (Bhim Rao Ambedkar Jayanti) का। दरअसल 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर लगाए गए होर्डिंग्स पर अपनी तस्वीर न छपने से नाराज दो लोगों ने एक शख्स को हथौड़े से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। घायल व्यक्ति की गुरुवार (21 अप्रैल 2022) को मौत हो गई।

मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मृतक की पहचान बिबवेवाड़ी के अपर इंदिरा नगर निवासी गंगाराम शिवाजी काले के रूप में की है। उन्होंने बताया कि गंगाराम के दोस्त पंडित कांतेनवारु (30) ने बिब्वेवाड़ी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपितों की पहचान कटराज इलाके के रहने वाले नरूद्दीन मुल्ला (26) और रवि जरपुला (38) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि 19 अप्रैल की रात करीब नौ बजे पंडित अपने दोस्त काले के साथ बिबवेवाड़ी के ज़ाम्ब्रे वास्ती में बात कर रहा था, तभी नरूद्दीन और रवि ने कथित तौर पर उन पर लोहे के हथौड़े से हमला कर दिया।

हमलावरों ने काले के सिर पर हथौड़े से कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। काले और उसके दोस्त पंडित को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरुवार को काले ने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुँची।

पुलिस ने शुरू में हत्या के प्रयास के आरोप में नरूद्दीन और रवि के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था, लेकिन काले की मृत्यु के बाद हत्या के आरोप लगाए गए हैं। हमलावरों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया।

गौरतलब है कि एक अन्य घटना में महाराष्ट्र के नांदेड़ में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्म दिवस के मौके पर डीजे के सामने डांस करने को लेकर हुए विवाद में एक युवक की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। वहीं, दूसरा युवक बुरी तरह घायल हो गया था। घटना नांदेड़ के बलीरामपुर की है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया था।