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व्यभिचार के एक्का-दुक्का मामले को पत्नी की बदचलनी नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने CrPC के तहत गुजारा भत्ता रोकने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी के गुजारा भत्ता के हक को विस्तार देते हुए कहा कि क्रूरता और व्यभिचार के कुछ कृत्यों से पत्नी को गुजारा भत्ता के अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बार-बार बदलचनी जैसे कृत्य करती है, फिर भी उसे गुजारा भत्ता पाने से कानूनी छूट मिल सकती है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि पति से अलग रहते हुए अलग पत्नी ने एक-दो बार व्यभिचार किया है तो उसे नजरअंदाज किया जा सकता है और उसे गुजारा भत्ता का हकदार माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि भरण-पोषण के कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक सक्षम व्यक्ति की पत्नी, बच्चे और माता-पिता निराश्रित ना हों।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जहाँ तक पत्नी के व्यभिचार की बात है, पति ने इसे अभी तक साबित नहीं किया है। पत्नी व्यभिचार में लिप्त है, इसे साबित करने के बाद ही CrPC की धारा 125(4) के तहत उसका भरण-पोषण रोका जा सकता है। लेकिन, एक-दो बार की घटना को व्यभिचार नहीं माना जा सकता है।

Cr.PC की धारा 125(4) में कहा गया है कि यदि कोई पत्नी व्यभिचार में संलिप्त रहती है, बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने पति के साथ रहने से इनकार करती है या आपसी सहमति से दोनों अलग रहते रहते तो पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी।

जस्टिस चंद्रधारी सिंह उस एक मामले में सुनवाई कर रहे थे, जिसमें निचली अदालत ने अपनी पत्नी को हर महीना 15,000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश पति को दिया था। इसके बाद पति ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पति ने हाईकोर्ट में दलील दी कि क्रूरता, व्यभिचार और पत्नी से अलग रहने के आधार पर गुजारा भत्ता देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

क्रूरता के मामले में अदालत ने कहा कि क्रूरता और उत्पीड़न गुजारा भत्ता रोकने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में क्रूरता के आधार पर तलाक दिया गया है, उनमें भी अदालतों ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।

इस मामले में दोनों की शादी साल 2000 में हुई थी और दोनों के बीच कई विवादों के कारण सिविल और आपराधिक मुकदमें दर्ज कराए गए थे।

जो बर्बाद हुए तूफान में, उनके नाम पर पश्चिम बंगाल में घोटाला: ₹2000 करोड़ में हेरफेर, CAG ने कहा – ‘हाई रिस्क फ्रॉड’

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के ऊपर घोटाले का आरोप लगा है। घोटाला बहुत बड़ा। 2000 करोड़ रुपयों में हेरफेर। घोटाला भी उन पैसों का, जो अम्फान तूफ़ान से प्रभावित हुए गरीबों-पीड़ितों के घर बनवाने के लिए थे। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG: Comptroller and Auditor General, कैग) ने तो इसे ‘हाई रिस्क फ्रॉड’ कहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इसकी जाँच करवाए जाने की माँग भी की गई है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक यह रुपए मई 2020 से जनवरी 2021 के बीच बाँटे गए थे। कैग ने अपनी रिपोर्ट गृहमंत्रालय को भेजी है। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि राहत वितरण के ऑडिट में पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए सहयोग नहीं किया।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की इसी रिपोर्ट में लाभार्थियों का चयन अनुचित रूप से करने और पैसे को भी सही से न बाँटने का आरोप लगाया गया है। इस रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों की जाँच के बाद जवाबदेही तय करने की सिफारिश भी की गई है।

CAG के मुताबिक लाभार्थियों के चयन में धाँधली की गई है। लगभग 1500 केस ऐसे भी पाए गए, जिसमें मौके पर जाँच करने वाली टीम को कोई नुकसान नहीं मिला जबकि उन्हें 94 लाख रुपए का भुगतान किया गया। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक भुगतान में भी धांधली संभव है। गौरतलब है कि CAG ने यह ऑडिट कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर की है। यह ऑडिट फरवरी 2021 से सितम्बर 2021 तक की गई है।

अम्फान तूफ़ान से बंगाल के साथ उड़ीसा और कुछ अन्य तटवर्ती क्षेत्र भी प्रभावित हुए थे। 190 किलोमीटर की रफ्तार से चली हवाओं के कारण लगभाग 72 लोगों के मारे जाने की खबर आई थी। चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हटिया द्वीप के बीच जमीन से टकराया था।

‘भतीजा एंड कंपनी खा गई पैसा’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी साल अम्फान तूफ़ान की सहायता राशि में किए गए घोटाले को लेकर ममता सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी थी, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों को कुछ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया था कि भतीजा एंड कंपनी ये पैसा खा गई

ममता सरकार पर और भी घोटाले के आरोप

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर इससे पहले भी सरकारी धन के दुरूपयोग के आरोप लगे थे। नवम्बर 2021 में भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर 1200 करोड़ रुपए के आवंटन में हेराफेरी का आरोप लगा कर CAG से इसकी जाँच करने की माँग की थी। उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख कर अवगत करवाने एलान किया था। सुवेंदु के मुताबिक तमाम क्लबों के लिए बाँटे गए 1200 करोड़ रुपए में अधिकतर पैसा तृणमूल कॉन्ग्रेस और उस से जुड़े नेताओं को दिया गया था।

पंजाब के CM भगवंत मान शराब पीकर माथा टेकने गए दमदमा साहिब गुरुद्वारा: ‘माफी माँगो मुख्यमंत्री’ की माँग तेज

आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (AAP Leader & Punjab CM Bhagwant Mann) के नशे में के अक्सर आरोप लगते रहते हैं। अब उन पर शराब के नशे में गुरुद्वारा में माथा टेकने का आरोप लगा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी की माँग की है।

अकाली दल (Akali Dal) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मान ने जालंधऱ में अंबेडकर जयंती पर आयोजित एक समारोह में शामिल होने से पहले तलवंडी साबो गुरुद्वरा तख्त श्री दमदमा साहिब में नशे की हालत में ही माथा टेका था।

उन्होंने कहा कि जब भगवंत मान माथा टेकने आए तो उन्होंने शराब पी रखी थी और वह नशे में थे। उन्होंने मर्यादा का ख्याल नहीं रखा। वे अब मुख्यमंत्री हैं और दुनिया उन्हें देख रही है। बादल ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के खिलाफ 6 महीने तक बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन सिख मर्यादा और गुरुद्वारे की बेअदबी उनसे बर्दाश्त नहीं हुई।

वहीं, SGPC के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शराब के नशे में एक पवित्र स्थान का दौरा किया और सिख ‘रेहत मर्यादा’ (आचार संहिता) का उल्लंघन किया।भगवंत मान के कदाचार से पता चलता है कि उन्होंने गुरुघर को उचित सम्मान नहीं दिया और संवैधानिक पद की प्रतिष्ठा को भी कम किया है। विर्क ने कहा कि सीएम मान को सिख समुदाय से माफी माँगनी चाहिए।

इस मामले में कॉन्ग्रेस और भाजपा ने भी मुख्यमंत्री मान को कठघरे में खड़ा किया है। दोनों पार्टियों ने कहा कि कार्यक्रमों के दौरान सीएम की बॉडी लैंग्वेज से पता चलता है कि वे शराब के नशे में थे। उनका मेडिकल टेस्ट कराया जाना चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी ने विपक्षी दलों पर सीएम की छवि खराब करने का आरोप लगाया है।

ओवैसी की पार्टी का था नेता, अब बीवी के साथ बनेगा हिन्दू: वायरल वीडियो में बोला – ‘ये सब समाजवादी के गुंडे, हमें CM योगी पर पूरा भरोसा’

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मुस्लिम दम्पति ने हिन्दू बनने का एलान किया है। एलान करने वाले ओवैसी की पार्टी AIMIM का पूर्व जिलाध्यक्ष हैं। इन्होंने खुद को अपने परिवार से प्रताड़ित बताया है। मुसलमान से हिंदू बनने की घोषणा करने वाली महिला का नाम समीना परवीन और उनके शौहर का नाम मोहम्मद रूबेद साबिर है। घोषणा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल हुए वीडियो में महिला ने कहा, “हमारी कोई भी मदद नहीं कर रहा। तो फिर हमें धर्म परिवर्तन ही करना पड़ेगा और हम करेंगे भी। मेरी जिंदगी बिलकुल खराब हो चुकी है। मेरी शादी के बाद से मेरे ससुराल वालों ने मुझे बहुत ज्यादा परेशान किया। एकलौता लड़का बता कर अच्छा खासा दहेज माँगा गया। निकाह के बाद भी मेरे अब्बा से पैसे की माँग की जाती रही। मेरे अब्बा के पास पैसे खत्म हो गए तो अब कहाँ से दें। फिर हमें धमकाया जाने लगा और झूठे मुकदमे लादने शुरू कर दिए गए। मेरे जेवर गिरवी हो गए। मैं हर बड़े मुस्लिम को बिठा चुकी हूँ। हर किसी के पास जा चुकी हूँ पर हमें जवाब मिलता है कि अगर तुम्हारा साथ देंगे तो हम भी झूठे केस में फँसा दिए जाएँगे। मेरी मदद करने वालों को भी यही धमकी दी जाती है। ऐसा समाज और मज़हब किस काम का?”

इसी वीडियो में महिला का शौहर बताए जा रहे मोहम्मद रूबेद साबिर ने कहा, “हम हिन्दू होना चाहते हैं। हमें मुख्यमंत्री योगी पर पूरा भरोसा है। ये सब (विपक्षी) समाजवादी के गुंडे हैं। मोहम्मद परवेज भी समाजवादी का बहुत पुराना गुंडा है। हमारे अब्बा भी समाजवादी पार्टी की विचारधारा से जुड़े हुए हैं। इसीलिए वो हम पर इतना जुल्म और ज्यादती कर रहे हैं।”

पीड़ित दम्पति ने खुद के परिवार द्वारा प्रताड़ना की जानकारी और हिन्दू बनने के एलान के साथ मुरादाबाद के SSP को शिकायती पत्र भी लिखा है। पत्र के मुताबिक मामला मुरादाबाद के कटघर थानाक्षेत्र के लाजपत नगर का है। शिकायत में पीड़िता ने अपनी ही ससुराल के मोहम्मद परवेज़, शाहिद रज़ा, साबिर हुसैन और अपनी ननदों को अपनी प्रताड़ना का दोषी बताया है।

साबिर हुसैन पीड़िता के ससुर हैं, जिनकी बीवी का इंतकाल हो चुका है। पुलिस को दी गई शिकायत में अपने घर का बिजली-पानी का कनेक्शन काटने, घर पर जबरन कब्ज़े के प्रयास, अपने और मायके पक्ष के ऊपर फर्जी मुकदमे लादने के साथ अपनी और अपने शौहर की जिंदगी खराब करने की धमकी देने आदि का आरोप लगाया है।

पुलिस को दी गई शिकायत

पुलिस ने बताया पारिवारिक विवाद

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का संज्ञान लेते हुए मुरादाबाद पुलिस ने इसको पारिवारिक विवाद बताया है। जिले के SP सिटी ने बताया, “समीना परवीन और उनके ससुर साबिर हुसैन में काफी लम्बे समय से पारिवारिक विवाद सम्पत्ति के बँटवारे को लेकर चल रहा है। समीना अपने पति रूबेद के साथ उसी मकान के निचले हिस्से में रहतीं हैं, जिसके ऊपरी हिस्से में उनके ससुर साबिर हुसैन रहते हैं। उस मकान का बिजली बिल लम्बे समय तक जमा नहीं हुआ था, जिसके चलते कनेक्शन काटा गया था। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। इससे पहले भी इनके बीच कई मुकदमे लिखे गए हैं।

पुलिस ने आगे बताया, “साबिर हुसैन अपनी सम्पत्ति का 5 हिस्सों में बँटवारा करना चाह रहे हैं, जिसमें 3 हिस्सा उनकी बेटियों का, 1 हिस्सा बेटे और 1 हिस्सा खुद का है। जबकि उनका बेटा रूबेद जमीन का सिर्फ अपने और अपने अब्बा के हिस्से में बँटवारा चाहता है। इसी के चलते एक दूसरे पर दोनों पक्ष आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। इनका मामला अदालत में भी चल रहा है। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने पर बुला कर समझौते का भी प्रयास किया पर दोनों के बीच अभी भी विवाद बना हुआ है। इसी के चलते रूबेद की पत्नी ने सोशल मीडिया पर धर्म परिवर्तन करने का वीडियो बना कर ट्वीट किया है, जिसका जवाब दिया गया है। पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई की जा रही है।”

‘पूरी जिंदगी सिर्फ आराम किया है मेरे बेटे ने’

अपने बेटे और बहू का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रूबेद के अब्बा साबिर हुसैन मीडिया के सामने आए। उन्होने कहा, “मेरा बेटा मेरी पूरी जमीन खुद लेना चाहता है। मैं अपने जमीन का एक हिस्सा उसे दूँ या न दूँ, ये मेरी मर्जी है। वो कभी काम नहीं किया, सिर्फ आराम किया है। मुझ पर बलात्कार का भी आरोप लगा चुके हैं वो। हम नहीं बल्कि वही हमारे साथ ज्यादती कर रहा है।”

अंबेडकर जयंती पर अल्लाह-हू-अकबर/इस्लाम जिंदाबाद के नारे, महिलाओं से छेड़खानी… राज ठाकरे को PFI की चेतावनी

महाराष्ट्र के संगमनेर (Sangamner, Maharashtra) में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर निकाले गए जुलूस में कुछ दंगाई युवकों ने हंगामा कर दिया और इस्लाम जिंदाबाद और अल्लाह-हू-अकबर के भड़काऊ नारे लगाए। इस दौरान भीड़ द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ करने की भी बात कही जा रही है। वहीं, मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) द्वारा लाउडस्पीकर पर नमाज को लेकर दिए गए बयान पर कट्टर इस्लामिक संगठन PFI ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुस्लिमों को छोड़ोगे तो वे छोड़ेंगे नहीं।

दरअसल, बाबासाहेब की जयंती पर 14 अप्रैल को अहमदनगर जिले के संगमनेर में जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान 100-120 मुस्लिमों की भीड़ ने हाथ में धार्मिक झंडे लेकर आपत्तिजनक नारे शुरू कर दिए। जुलूस में अफरा-तफरी का माहौल पैदा करते हुए दंगाई ने ना सिर्फ इस्लाम जिंदाबाद और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए, बल्कि महिलाओं से छेड़छाड़ भी की। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में 100-120 दंगाइयों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उन लोगों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने, दंगा भड़काने, मारपीट करने और महिलाओं से छेड़छाड़ करने के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति रोकथाम अधिनियम (अत्याचार) (SC-ST Act) के तहत मामले दर्ज कर लिया है। इस मामले में अब तक दंगाइयों को गिरफ्तार भी किया गया है।

राज ठाकरे को PFI ने दी चेतावनी

इधर कट्टर इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे को लाउडस्पीकर पर नमाज का विरोध करने पर चेतावनी दी है। ठाणे ग्रामीण के मुस्लिम बहुल इलाके मुंब्रा में जुमे की नमाज के बाद संगठन के स्थानीय अध्यक्ष अब्दुल मतीन शेखानी ने यह धमकी दी।

शेखानी ने कहा कि अगर लाउडस्पीकर पर किसी ने हाथ लगाया तो PFI सबसे पहले खड़ी नजर आएगी। उन्होंने धमकाने वाले अंदाज में कहा, “हमें छेड़ेगो तो हम छोड़ेंगे नही।” लोगों को उकसाते हुए उन्होंने कहा कि देश में मुस्लिमों के साथ बहुत जुल्म हो रहा है।

शेखानी ने कहा, “हमारा एक दूसरा नारा भी है कि हमको छेड़ो मत। हमको छेड़ोगे तो हम छोड़ेंगे नहीं, ये याद रखना। एक भी मदरसा, एक भी मस्जिद, एक भी लाउडस्पीकर पर आपने हाथ लगाने की कोशिश की तो सबसे आगे PFI नजर आएगी।”

मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने शेखानी के खिलाफ बिना अनुमति सभा करने और भड़काऊ भाषण देने के मामले में केस दर्ज कर लिया है। शेखानी ने जिस सभा का आयोजन किया था, उसके लिए उन्होंने अनुमति नहीं ली थी। पुलिस ने IPC की धारा 188 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37 (3) और 135 के तहत केस दर्ज किया गया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले राज ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रैली को संबोधित करते हुए मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की माँग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर इस मुद्दे पर राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो हम मस्जिदों के सामने लाउडस्पीकर लगाकर फुल वॉल्युम में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। 

बता दें कि रामनवमी में देश के कई राज्यों में हिंसा की घटनाएँ सामने आई थी। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में दंगाइयों ने भगवान राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया और इलाके के हिंदुओं के घरों में आग लगा दी। इस दौरान दंगाई भीड़ ने घरों में लूट-पाट को भी अंजाम दिया।

बजरंगबली की हुई थी 3 शादी, एक खास मंदिर में पत्नी के साथ हैं विराजमान: हनुमान जयंती पर जानें पौराणिक कथा

बाल हनुमान का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न के योग में हुआ था – मतलब हनुमान जयंती। मंगलमूर्ति हनुमान जी एक बाल ब्रह्मचारी और रामभक्त के रूप में पूजे जाते हैं, यह आप सभी को पता होगा। पर क्या वे अविवाहित थे? अगर नहीं तो उनकी पत्नी कौन थीं? हनुमान जयंती पर आज हम जानेंगे इसी रोचक जानकारी को और इसके पीछे के तर्क को।

आज पूरे विश्व में बजरंगबली के भक्त हनुमान जयंती मना रहे हैं। यह हर वर्ष चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है। इस बार चैत्र पूर्णिमा या हनुमान जयंती आज 16 अप्रैल 2022 को है। दिन शनिवार होने के कारण ये और भी खास हो गई है।

जिन पौराणिक कथाओं पर हम बात करने जा रहे हैं, वो आपको हैरत में डाल सकते हैं! जैसे एक तरफ जहाँ भगवान हनुमान बाल ब्रह्मचारी हैं, वहीं उनके 3 विवाह भी हुए थे। लेकिन इन तीनों की परिस्थितियाँ और काल बेहद रोचक रहे हैं। चौंक गए हैं तो धीरज धरिए, पूरी जानकारी नीचे है।

विवाहित बजरंगबली की पुष्टि आंध्र प्रदेश के उस मंदिर से भी होती है, जहाँ भगवान हनुमान की उनकी पत्नी सुर्वचला के साथ एक मंदिर है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो बजरंगबली के विवाह का प्रतीक भी माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि कई जोड़े अपने वैवाहिक जीवन के सुखमय होने की कामना लिए यहाँ दर्शन को आते हैं।

चलिए आज हम बताते हैं कि बाल ब्रह्मचारी रहे भगवान हनुमान के तीन-तीन विवाह क्यों और कैसे हुए? पौराणिक ग्रंथों में कई जगहों पर उनके विवाह का वर्णन किया गया है।

सूर्य पुत्री सुर्वचला से विवाह

पहली पौराणिक कथा के अनुसार, पराशर संहिता में भगवान सूर्य की पुत्री सुर्वचला और हनुमान जी के विवाह का प्रसंग है। रुद्रावतार भगवान हनुमान ने सूर्य देवता को अपना गुरु बनाया था और उन्होंने सूर्य देव से 9 विद्याओं में पारंगत होने का निश्चय किया था। सूर्यदेव चाहते थे कि वो हनुमान को 9 विद्याओं का ज्ञान दें। इनमें से 5 विद्याएँ तो हनुमान जी ने सीख ली थीं। बाकी की 4 विद्याओं के लिए उनका विवाहित होना अनिवार्य था।

ऐसी स्थिति को देखते हुए सूर्यदेव ने अपनी पुत्री का विवाह हनुमान जी के साथ संपन्न करा दिया। लेकिन विवाह के बाद सुर्वचला सदा के लिए तपस्या में लीन हो गईं। इसके साथ ही हनुमान जी भी अपनी बाकी चार विद्याओं के ज्ञान को प्राप्त करने में लग गए। इस प्रकार विवाहित होने के बाद भी भगवान हनुमान का ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।

सूर्यदेव ने हनुमान जी का ब्रह्मचर्य टूटने नहीं दिया

सूर्यदेव ने हनुमान जी को बताया था कि विवाह के बाद सुर्वचला फिर से तपस्या में लीन हो जाएगी और ऐसा हुआ भी। हनुमान जी भी अपनी बाकी चार विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने में लग गए।

सुर्वचला का जन्म किसी गर्भ से नहीं हुआ था, इसलिए कहते हैं कि उनसे शादी करने के बाद भी हनुमान जी के ब्रह्मचर्य में कोई बाधा नहीं आई और विशेष परिस्थितियों में विवाहित होने के कारण हनुमान जी ब्रह्मचारी ही कहलाए।

रावण पुत्री अनंगकुसुमा से विवाह

पउमचरित के एक प्रसंग अनुसार रावण और वरूण देव के बीच युद्ध के समय वरूण देव की ओर से वानरराज हनुमान रावण से लड़े और उसके सभी पुत्रों को बंधक बना लिया। ऐसी मान्यता है कि युद्ध में हार के बाद रावण ने अपनी पुत्री अनंगकुसुमा का विवाह हनुमान जी से कर दिया था।

इस प्रसंग का उल्लेख पउम चरित शास्त्र में मिलता है। इस प्रसंग में सीता-हरण के संदर्भ में एक घटना का जिक्र है, अनंगकुसुमा के मूर्च्छित होने की बात है। हुआ यूँ कि जब खर-दूषण वध का समाचार लेकर राक्षस-दूत हनुमान की सभा में पहुँचा तो अंत:पुर में शोक छा गया और अनंगकुसुमा मूर्च्छित हो गईं। अनंगकुसुमा इसलिए मूर्च्छित हो गईं क्योंकि यह दुःखद समाचार उनके परिजनों की मृत्यु का था।

वरुण देव की पुत्री सत्यवती से विवाह

रावण और वरुण देव के बीच हुए युद्ध में हनुमान जी ने ही प्रतिनिधि के तौर पर लड़कर वरुण देव को अंतिम विजय दिलाई थी। इससे प्रसन्न होकर वरूण देव ने हनुमान जी का विवाह पुत्री सत्यवती से कर दिया था।

शास्त्रों में भले ही बजरंगबली के इन विवाहों का उल्लेख है, लेकिन ये तीनों विवाह विशेष परिस्थितियों में ही हुए थे। वहीं यह भी कहा जाता है कि भगवान हनुमान ने कभी भी अपनी पत्नियों के साथ वैवाहिक संबंधों का निर्वाह नहीं किया। अतः वह आजीवन ब्रह्मचारी ही रहे।

तेलंगाना में है गृहस्थ हनुमान जी का मंदिर

तेलंगाना के खम्मम जिले में भगवान हनुमान का एक खास मंदिर है। यहाँ गृहस्थ रूप में पत्नी सुर्वचला संग हनुमान जी की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में बजरंगबली का उनकी पत्नी के साथ दर्शन मात्र से ही वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं, दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।

‘अगर भारत को छेड़ा तो किसी को नहीं छोड़ेंगे’: अमेरिका की धरती पर राजनाथ सिंह की दो टूक, बोले- टॉप-3 इकोनॉमी बनने से कोई नहीं रोक सकता

अमेरिका (America) में 2+2 मीटिंग के लिए गए भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने सैन फ्रांसिस्को स्थित वाणिज्य दूतावास से चीन को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने चीन के साथ गतिरोध में भारतीय सैनिकों द्वारा दिखाई गई बहादुरी के बारे में बताया है। उन्होंने इशारों में कहा कि अगर भारत को नुकसान हुआ तो भारत किसी को भी नहीं छोड़ेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं खुले तौर पर यह नहीं कह सकता कि उन्होंने (भारतीय सैनिकों ने) क्या किया और हमने (सरकार ने) क्या फैसले लिए। लेकिन मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि (चीन को) एक संदेश गया है कि अगर भारत को नुकसान हुआ तो भारत किसी को नहीं बख्शेगा।”

उल्लेखनीय है कि साल 2020 मई के महीने में लद्दाख में पैंगोंग झील के क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। 15 जून, 2020 को दोनों सैनिकों के गलवान घाटी में भिड़ंत में 20 भारतीय जवान बलिदान हो गए थे। कई चीनी सैनिक भी मारे गए थे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की इमेज बदली है और देश का मान बढ़ा है। अगले कुछ सालों में दुनिया की कोई भी ताकत भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था बनने से नहीं रोक सकती है।

इशारों में रक्षा मंत्री ने रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के ऐतराज पर उसे आइना दिखाया। इशारों में उन्होंने कहा कि किसी एक देश के साथ उसके संबंध दूसरे की कीमत पर नहीं हो सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “अगर भारत के एक देश के साथ अच्छे संबंध हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी अन्य देश के साथ उसके संबंध खराब हो जाएँगे। भारत ने इस तरह की कूटनीति कभी नहीं अपनाई है। भारत इसे कभी नहीं अपनाएगा। हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जीरो-सम गेम में विश्वास नहीं करते हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों में यकीन करता है, जो दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ हो। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन संकट के बीच भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जिसका अमेरिका विरोध कर रहा है।

राजस्थान के अजमेर में इसरार और सोहेल ने कुत्ते को स्कूटी से बाँधकर घसीटा, हुई दर्दनाक मौत: शिकायत के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया

समाज में हर तरह के लिए लोग होते हैं, लेकिन जब बेजुबान प्राणियों पर कोई बर्बरता की हदें पार करता है तो समाज उसके क्रूर स्वभाव को बर्दाश्त नहीं करता। राजस्थान के अजमेर (Ajmer, Rajsthan) में ऐसे ही क्रूर स्वभाव वाले कुछ लोगों का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में तीन युवक एक निरीह कुत्ते को स्कूटी से बाँधकर घसीट रहे हैं। शिकायत के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वीडियो में दिख रहा है कि एक स्कूटर पर तीन युवक बैठे हुए हैं और एक कुत्ते को तार के सहारे स्कूटी से बाँधकर पूरे गाँव में घसीट रहे हैं। वहीं, इस बर्बरता को देखकर लोग हँस रहे हैं और कोई व्यक्ति उन्हें रोकने की कोशिश नहीं कर रहा। इस तरह घसीटे जाने के बाद कुत्ते की दर्दनाक मौत हो गई। वीडियो में सुना जा सकता है कि कोई कह रहा है- इसरार ने कुत्ते को मारा है।

इस वीडियो को जब एक एनजीओ चलाने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की अधिकारी सुरभि त्रिपाठी ने देखा तो स्कूटी के नंबर के आधार पर इसकी शिकायत अजमेर के SP से की। सुरभि द्वारा भेजे गए ईमेल के आधार पर अजमेर के गेगल थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया।

गेगल थाना अधिकारी नंदू सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो गुड्डा गाँव का है। इस मामले में इसरार अली, कालू और स्कूटी मालिक सोहेल उर्फ शाहिल खान के पशु क्रूरता अधिनियम और शांति भंग करने को लेकर FIR की गई और बाद में तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इससे पहले नवंबर 2019 में उदयपुर में एक कार ड्राइवर ने एक कुत्ते को घसीटकर मार डाला था। उसने कुत्ते के पिछले पैर को रस्सी के सहारे कार से बाँधकर कई किलोमीटर तक खींचता ले गया था। इस घटना को सुखेर थाने में मामला दर्ज कराया गया था। 

पत्नी को मिल पाए माँ बनने का सुख, इसलिए जेल में बंद पति को मिली 15 दिन की पैरोल: जोधपुर HC का फैसला

राजस्थान की जोधपुर हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को केवल इसलिए 15 दिन की पैरौल पर घर जाने की इजाजत दे दी कि वो अपनी पत्नी को गर्भवती कर उसे माँ बना सके। कैदी की पत्नी ने इसके लिए संतान के अधिकार का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मामले की सुनवाई जोधपुर हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस फरजंद अली की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि पति के जेल में होने के कारण पत्नी कि यौन और भावनात्मक जरूरतें प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने सनातन धर्म के सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद सहित हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया और यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए 34 साल के कैदी नंदलाल को 15 दिन की पैरोल देने का आदेश दिया ताकि वो अपनी पत्नी रेखा को माँ बना सके। कोर्ट ने हिंदू धर्म के 16 संस्कारों का हवाला दिया और कहा कि बच्चे के लिए गर्भधारण करना महिला का अधिकार है।

अदालत ने अपने फैसले के दौरान कहा, “वंश के संरक्षण के उद्देश्य से संतान होने को धार्मिक दर्शन, भारतीय संस्कृति और विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मान्यता दी गई है।” इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि संतान के अधिकार को दाम्पत्य द्वारा पूरा किया जाता है। कोर्ट के मुताबिक, पैरोल का उद्देश्य अपराधी को उसकी रिहाई के बाद शांति से समाज की मुख्यधारा में फिर से प्रवेश करने देना है।

अदालत ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि महिला के पति ने अपराध किया है, लेकिन उसकी वजह से महिला को संतान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे में अगर कैदी को इनकार किया जाता है तो इससे उसकी पत्नी के अधिकारों का हनन होता है। उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा काट रहे नंदलाल अजमेर जेल में बंद हैं। उन्हें 2021 में 20 दिन की पैरोल दी गई थी।

चार पुरुषार्थों का जिक्र

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान मनुष्य के लिए नियत चार पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति को धर्म, अर्थ और मोक्ष अकेले पाना है, लेकिन ‘काम’ के लिए वो अपनी पत्नी पर निर्भर है।

कोर्ट ने डी भुवन मोहन पटनायक बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, “दोषियों को मौलिक अधिकारों के संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है, जो उनके पास अन्यथा केवल उनकी दोषसिद्धि के कारण है।”

कश्मीर में BJP समर्थक सरपंच की हत्या, आतंकियों ने मारी गोली: दो दिन पहले एक हिंदू ड्राइवर को बनाया था निशाना

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में एक बार फिर आतंकियों ने टारगेट किलिंग को अंजाम देना शुरू कर दिया है। घाटी में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या करने के बाद आतंकियों ने शुक्रवार (15 अप्रैल 2022) को एक सरपंच की गोली मार कर हत्या कर दी। कश्मीर के बारामूला में जिस सरपंच को गाली मारकर हत्या की गई है, उनका नाम मंजूर अहमद बांगरू है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बांगरू शुक्रवार की शाम को कहीं जाने के लिए अपने घर से निकले थे। उसी दौरान पहले से ही घात लगाए आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया। हमला करने के बाद आतंकी वहाँ से फरार हो गए। जब लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी तो मौके पर पहुँचे और बांगरू को खून से लथपथ देखकर पुलिस को सूचना दी।

सरपंच बांगरू के पिता का नाम मोहम्मद सादिक है और गोसूबग पट्टन के रहने वाले थे। बांगरू के भाजपा से जुड़े होने की खबर फैली थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि भाजपा से उनका कोई संबंध नहीं था। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें भाजपा समर्थक बताया जा रहा है।

घटना को लेकर स्थानीय पुलिस ने बताया कि बारामूला जिले के पट्टन के गोशबुग इलाके में आतंकियों ने निर्दलीय सरपंच मंजूर अहमद पर फायरिंग की। इस फायरिंग में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हत्या के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरे इलाके की घेराबंदी करके आतंकियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हत्या की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है।

इससे पहले बुधवार (13 अप्रैल 2022) की शाम को आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के काकरान के पोम्बे कमप्रीम इलाके में सतीश सिंह राजपूत नाम के एक व्यक्ति को गोली मार दी थी। गोली लगने के बाद घायल सतीश सिंह को अस्पताल मे भर्ती कराया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक सतीश पेशे ड्राइवर थे।

उसी दिन आतंकियों ने कुलगाम में पोस्टर चिपकाया था, जिसमें बाहरी व्यक्तियों को कश्मीर छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। लश्कर-ए-इस्लाम नाम के आतंकी संगठन ने अपने पोस्टर में पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों को धमकी दी थी। साथ ही पोस्टर में लिखा था कि गैर-कश्मीरी और हिन्दुस्तान के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए लोग तुरंत घाटी छोड़ दें।