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‘मैं 6 साल का था, 5 साल तक ये चलता रहा’: रिश्तेदार भी करते थे मुनव्वर फारूकी का यौन शोषण, कंगना ने भी बताया अपना अनुभव

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चल रहा एकता कपूर का रिएलिटी शो लॉकअप (LockUpp) इन दिनों चर्चा में है। अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इसे होस्ट कर रही हैं। इस शो के प्रतिभागियों में हिंदूफोबिक कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) भी शामिल है। शो के दौरान फारूकी के कई सीक्रेट सामने आए हैं। मसलन, उसकी खुद की शादी और उसकी अम्मी के साथ घरेलू हिंसा को लेकर। अब फारूकी ने जो कुछ शेयर किया है उससे पता चला है कि बचपन में उसका यौन शोषण भी हुआ था। ऐसा करने वालों में उसके दो रिश्तेदार भी शामिल थे।

इस खुलासे का एक टीज़र वीडियो ऑल्ट बालाजी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। दरअसल शो में अंजलि अरोड़ा, सायशा शिंदे, आदमा फलाह और मुनव्वर फारूकी को खुद को शो से बाहर होने से बचाने के लिए अपना सीक्रेट बताने का मौका दिया गया था। आम तौर पर सबसे पहले जो कंटेस्टेंट बजर बजाता है, उसे अपना सीक्रेट बताने का मौका दिया जाता है, लेकिन इस बार कंगना सीक्रेट शेयर करने के टास्क में नया ट्विस्ट लेकर आईं। सायशा शिंदे ने सबसे पहले बजर बजाया था, लेकिन कंगना ने उन्हें बताया कि इस बार उन्हें अपना कोई सीक्रेट नहीं बताना है, बल्कि उनके दोस्तों में से किसी एक को अपना सीक्रेट बताते हुए उन्हें बचाना होगा।

सबसे पहले सायशा अंजलि अरोड़ा के पास गईं। मगर उन्होंने अपना सीक्रेट शेयर करने से मना कर दिया। अंजलि के बाद आजमा ने भी सायशा के लिए अपना सीक्रेट शेयर करने से मना कर दिया। लेकिन मुनव्वर ने सायशा का साथ देने का फैसला किया और उन्होंने अपना सीक्रेट सबके साथ शेयर किया। मुनव्वर का सीक्रेट यौन शोषण से जुड़ा हुआ था। उनकी बातें सुनकर सभी की आँखें नम हो गईं।

मुनव्वर ने कहा, “जब मैं 6 या 7 साल का था, तब से 11 साल का होने तक मेरा यौन शोषण हो रहा था। इसमें मेरे परिवार के दो रिश्तेदार भी शामिल थे। आपको उस वक्त समझ में नहीं आता है। मुझे भी शुरुआत में बिलकुल समझ में नहीं आया था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। यह लगभग 4-5 सालों तक चलता रहा। जब यह बहुत ज्यादा हो गया तब उनलोगों को इस बात का एहसास हुआ कि उन्हें यह हरकत बंद कर देनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इसे कभी किसी के साथ साझा नहीं किया क्योंकि मुझे उनका सामना करना पड़ता और उन्हें भी परिवार का सामना करना पड़ता। मुझे एक बार लगा कि मेरे पिताजी को इसके बारे में पता चल गया है। उन्होंने मुझे बहुत डाँटा। शायद उन्हें भी मेरी तरह ऐसा ही लगा था कि यह बातें सबके सामने नहीं आनी चाहिए।”

फारूकी के इस अनुभव को शेयर करने के बाद कंगना रनौत ने भी बताया कि वह भी बचपन में इस तरह के अनुभव से गुजर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जब वह बच्ची थी तो एक लड़का उन्हें अनुचित तरीके से छूता था। वह कंगना से 3-4 साल बड़ा था। उस समय वह इस बात को नहीं समझ पाई थीं। वह कहती हैं हर साल बहुत सारे बच्चे इससे गुजरते हैं, लेकिन लोग सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर इसके बारे में बात करने से बचते हैं। लगभग सभी इससे गुजरते हैं, सभी को किसी न किसी समय इस तरह के बुरे अनुभव से गुजरना पड़ता है। कंगना ने सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा करने के लिए मुनव्वर की तारीफ की।

बता दें कि इससे पहले भी मुनव्वर ने अपनी अम्मी के बारे में बताया था। उन्होंने बताया था कि बचपन में उनकी अम्मी ने तेजाब पी लिया था और वे उसके कुछ दिन पहले से कुछ खा नहीं रही थीं। फारूकी ने बताया था कि उनकी माँ अपनी शादी में कभी खुश नहीं थीं। उन्हें पीटा जाता था, लड़ाई होती थी।

राजस्थान में हनुमान प्रतिमा पर चिपका दी 786 लिखी उर्दू की पर्ची, ग्रामीणों की नाराजगी के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

राजस्थान के कोटा के एक मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा पर उर्दू में लिखी पर्ची चिपकाने की घटना सामने आ रही है। इस पर्ची पर 786 भी लिखा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आक्रोश जताया और थाने में तहरीर दे कर कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने भी केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। घटना 24 अप्रैल 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कोटा के ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले गाँव अयाना की है। मंदिर का नाम राधेश्याम वैष्णव मंदिर है। घटना की रात यहाँ पर रात में अज्ञात असामजिक तत्वों ने मंदिर में स्थापित हनुमान मूर्ति पर उर्दू में लिखी पर्ची चिपका दी। सबसे पहले पुजारी ने यह देखा तो उन्होंने बाकी लोगों को इसकी जानकारी दी। बाद में इसकी सूचना पुलिस को दी गई।

घटना से नाराज ग्रामीणों ने आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समय सीमा में गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। पुलिस उर्दू में लिखे शब्दों का अनुवाद करवा रही है। कोटा जिला ग्रामीण SP कविंद्र सिंह सागर ने गाँव वालों की तरफ से शिकायत मिलने की बात स्वीकार की है।

तनाव को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। पुलिस को इस हरकत के पीछे साम्प्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश का शक है। इस बात का भी स्थानीय स्तर पर शक जताया जा रहा है कि किसी ने ऐसा अपनी मुराद पूरी करने के लिए किसी तांत्रिक आदि के कहने पर किया हो। इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद ने भी पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है।

जम्मू-कश्मीर: जवानों पर हमले के लिए आतंकियों को ट्रक में लेकर आया था बिलाल अहमद, गाड़ी में ही बना रखा था गुप्त ठिकाना

जम्मू के सुंजवां में हुए आतंकी हमले की जाँच में नया खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक आतंकी हमले में एक ट्रक ड्राइवर की भी भूमिका है। इस ड्राइवर का नाम बिलाल अहमद बागे है। बिलाल को उसके सहयोगी इश्फाक के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके मिनी ट्रक टाटा 407 को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। 22 अप्रैल 2022 (शुक्रवार) को हुई इस मुठभेड़ में CISF के एक ASI बलिदान हो गए थे और 5 अन्य जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया था।

मारे गए दोनों आंतकी जैश-ए-मोहम्मद से थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रक चालक बिलाल अहमद ही आतंकियों को कश्मीर से जम्मू लेकर आया था। 20 अप्रैल 2022 (बुधवार) को 4 आतंकियों ने इस हमले के लिए सीमा पार की थी। इन सभी को जम्मू आना था, लेकिन बिलाल के ट्रक में जगह कम होने के चलते केवल 2 आतंकी ही जम्मू आ सके थे। आतंकियों को सुरक्षित पहुँचाने के लिए ट्रक में एक गुप्त ठिकाना भी बनाया गया था।

पुलिस अब उन स्थानों की तलाश कर रही जहाँ से आतंकी सीमा में दाखिल हुए थे। साथ ही जाँच दल ये भी जानने का प्रयास कर रहा है कि आतंकियों के अन्य साथी व गोला-बारूद तो कहीं किसी और जगह पर तो नहीं है। पुलिस को दोनों आतंकियों के पास से मोबाइल फोन भी मिले हैं। इसमें मौजूद डाटा और अन्य जानकारियाँ निकलवाई जा रही हैं। मोबाइल में कुछ वीडियो मिलना भी बताया गया है जिसकी जाँच करवाई जा रही है।

इससे पहले न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस हमले का एक वीडियो जारी किया था। इसमें दिख सुंजुवां इलाके से सीआईएसएफ जवानों की बस गुजरते दिख रही है। कुछ देर बाद एक बाइक सवार गुजरता है और फिर धमाकों की आवाज सुनाई देने लगती है।

इस मुठभेड़ में मारे गए दोनों आतंकी बड़ी वारदात की तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने गोला-बारूद से भरी जैकेट पहन रखी थी। इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड आसिफ बताया जा रहा है। उसके भाई का नाम शफीक शेख है। शफीक 2 महीने पहले ही त्राल से सुंजवां आया था। यहाँ पर वो इकबाल नाम के व्यक्ति के घर पर रुका था। इस दौरान उसने अखरोट की फैक्ट्री में काम भी करने लगा था। पुलिस ने मकान मालिक इकबाल को गिरफ्तार कर लिया है। शफीक और उसका भाई आसिफ फरार बताए जा रहे हैं। NIA भी इस हमले की जाँच कर रही है।

फ्रांस ने फिर से उस मैक्रों को चुना राष्ट्रपति, जिनके कार्यकाल में मस्जिद पर लगा था ताला; जो इस्लाम को बनाना चाहते हैं ‘सेकुलर’

फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावों में बहुमत पाकर एक बार फिर इम्मैनुएल मैक्रों की राष्ट्रपति के तौर पर वापसी हुई है। उन्हें चुनावों में 58.2% वोट मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी मरीन ले पेन को 41.8% फीसद वोट मिले। पेन ने नतीजे देखते हुए जहाँ अपनी हार मानी और कहा कि वह फ्रांस के लिए लड़ना जारी रखेंगी। वहीं अन्य देश के नेताओं ने मैक्रों को बहुमत पाता देख उन्हें बधाई देनी शुरू कर दी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मैक्रों को फिर से राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई भेजी। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मैं भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ।” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी मैक्रों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह आगे अपने करीबी और महत्वपूर्ण सहयोगी के साथ काम करने को तैयार हैं।

जानकारी के अनुसार इमैनुएल मैक्रों 20 वर्षों के दौरान दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए फ्रांस के पहले राष्ट्रपति बने हैं। इस बार उन्हें उनकी विपक्षी मरीन ले से बराबर की चुनौती मिली जिन्होंने रेडियो पर ये बयान दिया था कि सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने वाली महिलाओं को जुर्माना देना होगा। ओपिनियन पोल्स में भी पेन के सामने मैक्रों को मामूली बढ़त से आगे दिखाया गया था। अनुमान लगने लगे थे कि ये चुनाव महिला उम्मीदवार के पक्ष में जाएँगे। हालाँकि अंत में मैक्रों ने इस चुनाव में बहुमत से विजय हासिल की।

इस्लामी कट्टरपंथ के विरुद्ध मैक्रों

याद दिला दें कि अभी हाल में फ्रांस ने इस्लाम को अपने ‘सेकुलर’ ढंग में ढालने की घोषणा करते हुए एक निकाय की घोषणा की थी जिसके बाद मुस्लिम उलेमाओं ने कहा था कि इस्लाम को इस तरह ढालने का प्रयास सिर्फ इसलिए है ताकि मैक्रों दक्षिणपंथी लोगों का समर्थन पा सकें। इसके अलावा मैक्रों के राष्ट्रपति रहते हुए फ्रांस ने कट्टरपंथी इस्लाम को पनाह देने और आतंकी हमलों को वैध ठहराने के लिए मस्जिदों पर कार्रवाई करते हुए उनपर ताला लगवाया था।

उन्होंने इस्लामी कट्टरवाद से निपटने के लिए रेडिकल इस्लाम विरोधी कानून को भी पारित किया था। इस बिल में मस्जिदों और मदरसों पर सरकारी निगरानी बढ़ाने और बहु विवाह और जबरन विवाह पर सख्ती का प्रावधान था। ये बिल फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को कमजोर करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की इजाजत देता था। साल 2020 में इस्लाम को कट्टरता और नफरत फैलाने वाला मजहब भी बता चुके हैं जिसकी वजह से उनकी कई जगह आलोचना हुई। उन्होंने देश में इमामों की एंट्री पर भी बैन लगाया था।

कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद फिर बवाल, स्कूल में गैर-ईसाई छात्रों को बाइबल पढ़ने को किया जा रहा मजबूर: हिंदू संगठन का आरोप

कर्नाटक में एक ओर जहाँ मजहबी कट्टरता से निपटने के क्रम में पिछले दिनों हिजाब विवाद हुआ, अब उसी कर्नाटक के एक स्कूल से खबर है कि वहाँ छात्रों को बाइबल लेकर स्कूल में पढ़ने के लिए बुलवाया जा रहा है। हिंदू संगठनों ने दावा किया है कि बेंगलुरु के एक स्कूल में छात्रों के अभिभावकों से ये वादा लिया जा रहा है कि वे अपने बच्चे को बाइबल के साथ स्कूल भेजें। संगठन आरोप लगा रहे हैं कि स्कूल प्रशासन गैर ईसाई छात्रों को भी बाइबल पढ़ने पर मजबूर कर रहा है।

पूरा मामला क्लेरेंस हाई स्कूल का है जहाँ कथिततौर पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से पहले ही अंडरटेकिंग ली जा रही है कि वे अपने बच्चों के बाइबल स्कूल परिसर में ले जाने पर आपत्ति नहीं करेंगे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू जनजागृति समिति के राज्य प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने इस मामले को लेकर दावा किया है कि स्कूल में गैर-ईसाई छात्रों को बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। समूह का कहना है कि स्कूल में गैर-ईसाई छात्र भी हैं लेकिन स्कूल उन्हें भी बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है।

इस विवाद के उठने के बाद स्कूल प्रशासन ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्कूल में वह लोग बाइबल आधारित शिक्षा ही देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल में एंट्री के लिए भरी जाने वाले एप्लीकेशन पर क्रमांक संख्या 11 में लिखा है, “आप पुष्टि करते हैं कि आपका बच्चा अपने स्वयं के नैतिक और आध्यात्मिक कल्याण के लिए मॉर्निंग असेंबली स्क्रिप्चर क्लास और क्लबों सहित सभी कक्षाओं में भाग लेगा और बाइबल ले जाने पर आपत्ति नहीं करेगा।”

कर्नाटक का हिजाब विवाद

गौरतलब है कि हाल में कर्नाटक में ही हिजाब को लेकर विवाद उठा था। उस समय कॉलेज की छात्राओं ने जिद्द की थी कि वो हिजाब पहनकर क्लास में बैठना चाहती हैं जबकि प्रशासन का तर्क ये था कि स्कूल में सभी को समानता की शिक्षा दी जाती है। ऐसे में मजहबी पोशाक पहनकर क्लास में बैठना उचित नहीं है। ये मामला हाईकोर्ट में सुना गया जिसके बाद फैसला हुआ कि हर छात्र को ड्रेस कोड का पालन करना होगा।

‘अच्छे नंबरों के लिए यीशु की पूजा करो, हिंदू शैतान होते हैं’ : तमिलनाडु में शिक्षा के नाम पर ईसाइयत का प्रचार, छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

दक्षिण भारत से धर्मांतरण की खबरें आना अब सामान्य हो गई हैं। वहाँ पर सक्रिय कट्टरपंथी संगठन और ईसाई मिशनरियाँ लंबे समय से इस काम को अंजाम देती आई हैं। तमाम लोग इनके शिकार हुए हैं। इन्हीं में से एक तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रंजन (बदला नाम) भी हैं जिनका संपर्क हाल में न्यूज 18 से तब हुआ जब मीडिया संगठन इस धर्मांतरण मामले पर अपनी पड़ताल कर रहा था।

30 साल के रंजन ने बताया कि कैसे उनके स्कूल में उन्हें अच्छे नंबरों के लिए सलाह दी जाती थी कि वह यीशु का अनुसरण करें। रंजन बताते हैं कि उन्हें एक्स्ट्रा क्लास के समय कहा जाता था कि अगर वे अच्छे नंबर चाहते हैं और जीवन में कुछ अच्छा करना चाहते हैं तो उन्हें किसी और ईश्वर को नहीं बल्कि जीसस की आराधना करनी चाहिए। इससे उनके शरीर को न ही कोई परेशानी आएगी और न ही वे जीवन में कभी किसी क्षेत्र में फेल होंगे।

रंजन के पिता ने बताया कि जब उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत उस स्कूल से अपने बच्चे को निकलवाकर अलग एडमिशन दिलाया। वह कहते हैं- “स्कूल कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ हम ये सीखें कि कैसे एक धर्म दूसरे धर्म से अच्छा है। इससे नफरत पैदा होती है। कई और अभिभावकों को ये जानकर गुस्सा आया था। हमने इस संबंध में स्कूल प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन किसी ने गंभीरता से इस पर एक्शन नहीं लिया।”

बता दें कि कुछ दिन पहले कन्याकुमारी के एक स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ने वाली एक लड़की ने प्रशासन को शिकायत की थी कि उनके स्कूल में एक टीचर हैं जो उसे और उसके अन्य सहपाठियों को बाइबल पढ़ने को बोलती हैं और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को शैतान बताती हैं। इस घटना को मीडिया में तूल मिलने के बाद स्कूल टीचर तो नौकरी से सस्पेंड हो गईं मगर ये मुद्दा शांत नहीं हुआ। कुछ माह पहले लावण्या केस और हाल में कन्याकुमारी वाले मामले ने ये सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर राज्य के स्कूलों में ये सब क्या हो रहा है।

न्यूज 18 की ही रिपोर्ट में एक 14 साल की लड़की ने बताया हुआ है कि कैसे उन्हें ये समझाया जाता है कि “हिंदू शैतान हैं। अगर तुम यीशु की प्रार्थना नहीं करोगे तो दुख मिलेगा। अगर जीवन में सफल होना चाहते हो तो बाइबल का उपयोग करो।” लड़की के पिता ने बताया कि वह इस बारे में जानने के बाद कुछ अन्य बच्चों के अभिभावकों के साथ शिकायत करने गए थे। हालाँकि उन्हें वहाँ कहा गया कि वो ऐसा दोबारा नहीं करेंगे।

इस रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा के नाम पर धर्म का प्रचार सिर्फ स्कूलों में सीमित नहीं है। ये ट्यूशन सेंटर में भी चालू रहता है। एक आरती (बदला नाम) नाम की लड़की ने बताया कि उनकी ट्यूशन टीचर ने एक बार उन्हें प्रार्थना में शामिल होने को कहा था, लेकिन उन्होंने इससे मना कर दिया। ऐसे में उन्हें प्रार्थना में शामिल होने पर मजबूर किया गया। ऐसे ही एक लड़का भी था ट्यूशन में जिसे कहा गया था कि अगर वो अच्छे नंबर चाहता है तो प्रार्थना में जरूर शामिल हो।

न्यूज 18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा के नाम पर धर्म को बढ़ावा देने का काम लंबे समय से होता आया है। नगरकोल में स्कूल का संचालन करने वाले थीवा प्रकाश बताते हैं कि लोग ये कहकर आते हैं कि वो सेल फोन के इस्तेमाल, तकनीक के दुरुपयोग आदि पर लेक्चर देंगे पर बातें धीरे-धीरे धार्मिक शिक्षा की ओर चली जाती हैं। ये बताया जाने लगता है कि कैसे एक धर्म अच्छा है और बाकी बुरे। ये पूर्ण रूप से 8-9 साल के बच्चों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश होती है। इसी प्रकार कन्याकुमारी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर उमयोरू भगन कहते हैं कि लालच देकर धर्म परिवर्तन की समस्या क्षेत्र में नई नहीं है। इस दिशा में काम करने वाले भास्कर कहते हैं कि उन्हें धर्मांतरण से जुड़ी दो-तीन शिकायतें तो हर हफ्ते मिलती ही हैं।

11 साल की दलित बच्ची, 67 साल का पादरी… पैसे देकर दिखाता था गंदी फिल्में, फिर करता था रेप: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक पादरी को गिरफ्तार किया गया है। दलित समुदाय की 11 साल की एक नाबालिग बच्ची के साथ रेप का आरोप है इस पादरी पर। आरोपित पादरी का नाम फादर ऑल विट है। इसकी उम्र लगभग 67 साल है।

बागपत की पुलिस ने बताया है कि पीड़ित परिवार चर्च के पास ही रहता था। पुलिस ने पीड़िता बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवा लिया है। घटना 23 अप्रैल 2022 (शनिवार) की है।

बागपत पुलिस के DSP खेड़का विजय चौधरी के मुताबिक, “बागपत के थाना चाँदीनगर पर 23 अप्रैल को ललियाना गाँव के एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके घर के बगल मौजूद चर्च के पादरी ने उनकी बेटी के साथ गलत काम किया। इस मामले में फ़ौरन ही FIR दर्ज की गई। पीड़िता का मेडिकल करवा दिया गया है। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”

बागपत पुलिस के अनुसार आरोपित पादरी ऑल विट के पिता का नाम सिलवई क्रूश है। वह पीड़िता के ही गाँव ललियाना के सेंट जोसेफ हाईस्कूल में अस्थाई तौर पर रहता है। वह मूल रूप से तमिलनाडु में कन्याकुमारी के नजदीक गाँव फुत्तुर का रहने वाला है। उस पर धारा 376 AB/ 354 B/506 IPC के साथ 5/6 पॉक्सो एक्ट और 3(2)VA SC/ST एक्ट में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस प्रेसनोट

पीड़िता की माँ के मुताबिक, “हम लोग बहुत गरीब हैं। मैं अपने पति के साथ खेतों में काम कर के मजदूरी से परिवार पाल रही हूँ। बच्ची घर पर ही रहती है। मेरी बच्ची को उस फादर ने अंदर बुलाया था। बेटी को पता नहीं था कि वो फादर ऐसा करेगा और वो विश्वास कर के अंदर चली गई। अंदर पादरी ने मेरी बेटी को पैसे दिए। फिर उसने मेरी बेटी को गंदी वीडियो दिखाई। इसके बाद मेरी बेटी के साथ पादरी ने छेड़खानी की।”

पीड़िता की माँ ने आगे बताया, “गाँव के दूसरे लड़कों ने मेरी बेटी के पास इतने पैसे देखे तो उन्होंने हमें बताया। वो उन पैसों से सामान खरीद रही थी। तब मैंने उससे सवाल किया कि पैसे कहाँ से आए। तब जा कर उसने बताया कि पैसे फादर दे रहे हैं मुझे। बेटी ने आगे बताया कि फादर मुझे गंदे वीडियो दिखा कर गलत काम करते हैं।”

हुबली हिंसा: एक और AIMIM नेता चढ़ा कर्नाटक पुलिस के हत्थे, अब तक 138 आरोपित गिरफ्तार

कर्नाटक के हुबली में हुई पिछले दिनों हुई हिंसा के बाद अब राज्य पुलिस ने इस केस में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक और नेता दादापीर बेटगेरी को गिरफ्तार किया है। ये हिंसा पुरानी हुबली पुलिस थाने पर हुई पत्थरबाजी के बाद शुरू हुई थी। पुलिस ने अब तक इस केस में 138 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि इससे पहले शनिवार को हुबली-धारवाड़ नगर निगम पार्षद नजीर अहमद को कर्नाटक पुलिस ने पकड़ा था। वह भी AIMIM पार्टी नेता है जिसके तार 16 अप्रैल 2022 को पुलिस थाने पर हुई पत्थरबाजी से जुड़े मिले हैं। उससे पहले इसी पार्टी के एक और पार्षद हुसैनबी नलवतवाड़ के पति इरफान को पकड़ा गया था। इनके अलावा इस केस की जाँच के दौरान रजा अकादमी का भी नाम सामने आया है। संदेह है कि 16 अप्रैल को जो हिंसा भड़की उसमें इस संगठन की भूमिका हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि 16 अप्रैल 2022 को एक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर 200 इस्लामियों ने पुराने हुबली पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था। साथ ही उसी से लगे अस्पताल और पथराव किया गया था। जिसके बाद पुलिस निरीक्षक जगदीश की शिकायत पर मुस्लिम भीड़ के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पूरे मामले में अब तक 138 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दादापीर और नजीम अहमद के अलावा इस केस में एक और AIMIM नेता का नाम है। ये नाम मौलाना वसीम का है। आरोप है कि वसीम ने पहले हुबली की एक दरगाह पर उन्मादी भाषण दिया और इसके बाद उसने पुलिस स्टेशन के बाहर भी यही किया।

₹5569 करोड़ की राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन, ₹10000 करोड़ के एक्सप्रेसवे का जल्द निर्माण: महाराष्ट्र में नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने रविवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (Aurangabad) में ₹5,569 करोड़ की कीमत के 7 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, “नई राजमार्ग परियोजनाओं से ज़िले का विकास होगा। शहर में यातायात की स्थिति बेहतर होगी और प्रदूषण भी घटेगा। शहर से ग्रामीण इलाकों में आना भी आसान हो जाएगा।”

इसके साथ ही 24 अप्रैल 2022 को उन्होंने घोषणा की है कि औरंगाबाद और पुणे के बीच यात्रा में लगने वाले समय को कम करने के लिए इन दोनों शहरों के बीच 10,000 करोड़ रुपए की लागत से एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। इससे औरंगाबाद से पुणे का सफर सुखद होगा।

इस अवसर पर नितिन गडकरी के साथ, वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड और रेल राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे भी मौजूद थे। फिलहाल औरंगाबाद और पुणे के बीच का सफर तय करने में चार से पाँच घंटे लगते हैं। गडकरी ने औरंगाबाद से पुणे एक्सप्रेस हाईवे को लेकर अहम ऐलान करते हुए कहा:

“औरंगाबाद और पुणे के बीच की दूरी करीब 225 किलोमीटर है। हम इन दोनों शहरों के बीच एक्सप्रेसवे बनाएँगे, जिस पर कोई मोड़ नहीं होगा और वाहन 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकेंगे। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाला समय घट कर सवा घंटा रह जाएगा।”

बता दें कि गडकरी ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-52 पर 3,216 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई 86 किलोमीटर लंबी सड़कें देश को समर्पित की। इस दौरान उन्होंने 2,253 करोड़ रुपए की लागत वाली चार अन्य सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान… और दर्ज हो गया देशद्रोह का केस: राणा दंपति के खिलाफ सरकारी वकील भी नहीं दिखा सके सबूत

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान करने वाली सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा के ऊपर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ है। इससे पहले उन्हें हनुमान चालीसा ऐलान के बाद गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ उन्हें 6 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उनके मामले पर अगली सुनवाई कोर्ट में 29 अप्रैल को की जाएगी।

राणा दंपति पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इल्जाम मढ़ते हुए उनकी गिरफ्तारी हुई और इस केस की एफआईआर सामने आने के बाद पता चला कि राणा दंपति के ऊपर धारा 124-ए के तहत कार्रवाई की गई है, जो कि देशद्रोह की धारा है। इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि दोनों के ऊपर आईपीसी की धाराओं 153 (ए) और 353 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम (पुलिस की निषेधाज्ञा उल्लंघन) की धारा 135 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

सांसद नवनीत राणा के वकील रिजवान मर्चेंट ने इस बाबत मीडिया को जानकारी दी और बताया कि कैसे पब्लिक प्रॉजिक्यूटर प्रदीप घरात ने इस बात पर बहस की कि मामला देशद्रोह की धारा 124ए के तहत आता है। रिजवान मर्चेंट का दावा है कि उन लोगों ने सरकारी वकील से रिमांड आवेदन में से वह हिस्सा दिखाने को कहा था जिससे राणा दंपति पर लगे आरोप साबित हों, लेकिन सबूत दिखाने में वह पूरी तरह असफल रहे।

रिजवान मर्चेंट ने बताया कि रिमांड आवेदन पर सिर्फ यही बात लिखी है कि वो लोग हनुमान चालीसा पढ़ने के लिहाज से मातोश्री पर आने की तैयारी कर रहे थे। राणा दंपति के वकील ने कहा, “हनुमान चालीसा और कुछ नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम और हनुमान का गुणगान है। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर हनुमान चालीसा पढ़ी जानी थी, वह जगह उस शख्स का आवास है जो दावा करते हैं कि उन्हें भगवान राम से प्रेम है, तो हनुमान चालीसा का पाठ किया जाना, उन पर कोई फर्क नहीं डालना चाहिए। राणा दंपति के वकील रिजवान ने कहा, “हनुमान चालीसा का पाठ करना धारा 153 ए के तहत नहीं आता। ये मामला फर्जी है। उन्हें (सरकारी वकील को) मालूम है कि उनके तर्क कितने कमजोर हैं। उन्हें मालूम है कि मामले में बेल मिल सकती है इसलिए उन्होंने दूसरी एफआईआर का मन बनाया है।” बता दें कि इससे पहले रिजवान मर्चेट ने इस पूरे मामले में अवैध करार देते हुए कहा था कि वह जल्द ही बेल के लिए याचिका डालेंगे।