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नहीं हटेंगी कुतुब मीनार मस्जिद के पास रखीं भगवान गणेश की मूर्तियाँ: कोर्ट ने लगाई रोक, याचिका में माँगा गया पूजा का अधिकार

कुतुब मीनार में मस्जिद के प्रवेश द्वार पर रखी भगवान गणेश की मूर्तियों को हटाने के विवाद पर साकेत कोर्ट ने ASI को निर्देश दिए हैं कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में रखी हुई भगवान गणेश की मूर्तियों को वहाँ से न हटाया जाए। वहीं इस मामले में पहले से ही पूजा अर्चना के अधिकार को लेकर याचिकाकर्ता ने अपनी नई अर्जी में कहा है कि भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर नेशनल मॉन्युमेंट ऑथिरिटी (NMA) के दिए सुझाव के मुताबिक नेशनल म्यूजियम या किसी दूसरी जगह विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि उन्हें इसी परिसर में हीं पूरे सम्मान के उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए।

बता दें कि एनएमए ने पिछले महीने पुरातत्व विभाग को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि भगवान गणेश की दो मूर्तियों- ‘उल्टा गणेश’ और ‘पिंजड़े में गणेश’ को राष्ट्रीय संग्रहालय में ‘सम्मानजनक’ स्थान दिया जाना चाहिए, जहाँ ऐसी प्राचीन वस्तुएँ रखी जाती हैं।

वहीं साकेत कोर्ट ने अब ये आदेश दिया है.दरअसल मस्जिद परिसर के अंदर हिंदू देवताओं की पुर्नस्थापना और पूजा अर्चना के अधिकार को लेकर याचिका दायर करने वालों ने नई अर्जी दाखिल कर कोर्ट से माँग की थी कि मस्जिद परिसर से गणेश जी की मूर्तियों को नहीं हटाया जाना चाहिए। जिस पर कोर्ट ने उन्हें वहाँ से न हटाने का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, क़ुतुब मीनार के कुव्वत इस्लाम मस्जिद में तीर्थकर ऋषभदेव, भगवान विष्णु, गणेश जी, शिव-गौरी, सूर्य देवता समेत कई हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियाँ आज भी मौजूद हैं। इनमे से ज़्यादातर मूर्तियाँ परिसर में खंडित अवस्था मेंपड़ी हैं। वहीं मस्जिद के बाहर लगे ASI के बोर्ड पर भी साफ लिखा है कि ये मस्जिद 27 हिंदू जैन मंदिरों को तोड़कर उनके अवशेषो से बनाई गई हैं। इसको लेकर दिल्ली के साकेत कोर्ट में याचिक दायर हुई थी।

याचिकाकर्ता ने मस्जिद परिसर में मौजूद मूर्तियों को ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए वहाँ हिंदू देवताओं की पुनर्स्थापना और पूजा-अर्चना का अधिकार दिए जाने की माँग की थी। बता दें कि जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान विष्णु को इस मामले में याचिकाकर्ता बनाया गया था।

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ अभी मस्जिद परिसर के अंदर मौजूद देवी देवताओं के पूजा अर्चना के अधिकार की माँग वाली याचिका अभी कोर्ट में पेंडिंग ही है। वहीं NMA के चेयरमैन तरुण विजय ने संस्कृति मंत्रालय को लिखे पत्र में वहाँ मौजूद गणेश जी की मुर्तियो को हटाने की माँग की थी। 25 मार्च को लिखे पत्र में उन्होंने कहा था, “ये बहुत शर्मनाक बात है कि मस्जिद परिसर के अन्दर भगवान गणेश जी की मूर्तियाँ बेहद अपमानजनक स्थिति में रखी गई हैं। एक मूर्ति ऐसी जगह है, जहाँ लोगो के पैर लगते है, वहीं दूसरी जाली में बंद है, उन्हें वहाँ से हटाकर नेशनल म्यूजियम जैसी दूसरी जगह रखा जा सकता है।”

कुतुब मीनार परिसर में हैं भगवान गणेश की दो मूर्तियाँ

बता दें कि क़ुतुब मीनार परिसर में मौजूद इन दोनों मूर्तियों को ‘उल्टा गणेश’ और ‘पिंजरे में गणेश’ कहा जाता है। ये 12वीं शताब्दी के स्मारक परिसर में स्थित हैं, जिसे 1993 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल माना गया था। ‘उल्टा गणेश’ (सिर नीचे पैर ऊपर) परिसर में कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद की दक्षिण-मुखी दीवार का हिस्सा है। दूसरी मूर्ति लोहे के पिंजरे में बंद है जो जमीन से काफी करीब है और उसी मस्जिद का हिस्सा है।

अम्मी ने किया ब्रेनवॉश, बेटा शोेेएब नाबालिग हिंदू लड़की को भगा ले गया: पीड़ित पिता ने धर्मांतरण की जताई आशंका, यूपी पुलिस जाँच में जुटी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर (Fatehpur, UP) से एक बार फिर लव जिहाद का मामला सामने आया है। जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र में मोहम्मद शोएब नाम का लड़का अपने साथियों के साथ आया और लड़की को उसके घर से अपहृत करके ले भागा। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

वहीं, अपहृत लड़की के पिता ने खागा कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़ित परिवार के बगल में ही मोहम्मद शोएब का परिवार का रहता है। उसके परिवार का पीड़ित परिवार के घर आना-जाना लगा रहता था। नौ अप्रैल की रात को मोहम्मद शोएब उर्फ शीबू उसका अपहरण कर अपने साथ ले गया। मौर्य परिवार की पीड़िता के परिजनों का कहना है कि शीबू लंबे समय से उसकी बेटी के पीछे पड़ा था। उसे अपने प्रेमजाल में फँसाकर उसे ले भागा।

लड़की के पिता का कहना है कि हो सकता है उसकी 16 साल की नाबालिग बेटी का धर्म परिवर्तन भी करा दिया गया हो। पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में लड़की के पिता ने आरोपित शोएब, भाई सुहैल, सलमान, कल्लू और उसकी अम्मी नूरजहाँ को मुख्य आरोपित बनाया है। इन लोगों के विरुद्ध अपनी नाबालिग लड़की का अपहरण करने और साजिश रचने सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

आरोपितों में नूरजहाँ नाम की एक महिला भी है। इस महिला पर आरोप है कि उसने इस नाबालिग हिन्दू लड़की को बहला-फुसला कर उसका ब्रेनवॉश किया है। इस मामले में डीएसपी का कहना है कि किशोरी की तलाश की जा रही है।

लव जिहाद के बढ़ते मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad- VHP) ने चेतावनी दी है। विहिप का कहना है कि फतेहपुर में लव जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। विहिप ने कहा कि पुलिस ऐसे मामलों में अन्य समुदाय के युवकों पर केस दर्ज करती है, लेकिन रैकेट चलाने वाले आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है।

बंगाल मॉनिटर छिपकली से महाराष्ट्र में गैंगरेप, वीडियो भी बनाया: 4 आरोपित गिरफ्तार, CCTV फुटेज से खुला राज़

महाराष्ट्र से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। राज्य के गोठाणे गाँव के पास सह्यादारी टाइगर रिजर्व में एक बंगाल मॉनिटर छिपकली (गोह) से कथित रूप से बलात्कार करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपित शिकारी हैं। उन्होंने गोठाणे के गाभा इलाके में सह्यादरी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में कथित तौर पर प्रवेश किया और घिनौना अपराध किया।

आरोपितों की पहचान संदीप तुकरम, पवार मंगेश, जनार्दन कामटेकर और अक्षय सुनील के रूप में हुई है। महाराष्ट्र वन विभाग ने आरोपित के मोबाइल फोन की जाँच की, जिसके बाद इस घटना के बारे में पता चला। दरअसल अधिकारियों को आरोपित को फोन में एक रिकॉर्डिंग मिली, जिसमें वे लोग मॉनिटर छिपकली के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार कर रहे थे।

दरअसल सांगली फॉरेस्ट रिजर्व में तैनात वन अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपितों का पता लगाया, जिसमें उन्हें जंगल में घूमते हुए देखा जा सकता है। घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि तीन आरोपी कोंकण से कोल्हापुर के चंदोली गाँव में शिकार के लिए आए थे।अधिकारियों के मुताबिक आरोपितों को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

बता दें कि बंगाल मॉनिटर छिपकली वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एक आरक्षित प्रजाति है। यदि मामले में आरोपित दोषी पाए जाते हैं तो आरोपित को सात साल की कैद हो सकती है।

क्या होता है मॉनिटर लिजर्ड

उल्लेखनीय है कि विषखोपड़ा एक प्रकार की बड़ी छिपकली है। जिसे विषखोपड़ा, गोहेरा, गोयरा, घ्योरा, गोह, बिचपड़ी आदि नामों से जाना जाता है। विशेषज्ञ इसे मानिटर लिजर्ड कहते हैं। इस प्रकार की छिपकलियों की यूँ तो 70 के लगभग प्रजातियाँ दुनिया भर में पाई जाती है, लेकिन हमारे देश में इनकी चार प्रजातियाँ मिलती हैं। ये हैं बंगाल मानीटर लिजर्ड, येलो मानीटर लिजर्ड, वाटर मानीटर लिजर्ड और डिजर्ट मानीटर लिजर्ड। इनमें से बंगाल मानीटर लिजर्ड सबसे ज्यादा दिखता है। आमतौर पर लोग विषखोपड़ा या गोह को बेहद जहरीला मानते हैं।

ED ने नवाब मलिक की करोड़ों की संपत्ति जब्त की, दाऊद की बहन से जुड़ा है मामला: कम्पाउंड, 147 एकड़ जमीन और 5 फ्लैट शामिल

महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार के मंत्री और NCP नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने बुधवार (13 अप्रै,ल 2022) को कहा है कि उसने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पार्कर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में नवाब मलिक और उनके परिवार की कई संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।

एजेंसी द्वारा मलिक की जिन सपत्तियों पर कार्रवाई की गई है, उसमें गोवा वाला कंपाउंड संपत्ति, मुंबई के कुर्ला में एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, उस्मानाबाद में 147.794 एकड़ एग्रीकल्चर लैंड, कुर्ला में तीन फ्लैट और बांद्रा में दो आवासीय फ्लैट शामिल हैं। इन सभी संपत्तियों का मालिकाना हक सॉलिडस इंवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर के पास है। इन दोनों ही कंपनियों का संचालन नवाब मलिक और उनके परिवार के लोगों द्वारा किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय 2005 में मलिक को उनके भरोसेमंद सहयोगी सलीम पटेल के बेची गई गोवावाला परिसर मामले की जाँच कर रहा है। ईडी का आरोप है कि जमीन का असली मालिक मुनीरा प्लम्बर है और जमीन को हसीना पार्कर और पटेल ने जबरन हड़प लिया था।

इस बीच बुधवार (13 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट ने नवाब मलिक (62) की तत्काल रिहाई की माँग वाली याचिका को सुनवाई के लिए लिस्टेड करने के लिए सहमत हो गया है।

जेल में बंद हैं एनसीपी नेता

गौरतलब है कि एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक को ‘मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और दाऊद से कनेक्शन’ मामले में 8 घंटे तक पूछताछ करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने मलिक से कथिततौर पर उनसे 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के दोषियों में से एक से कुछ संपत्ति खरीदने के संबंध में पूछताछ की थी। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। बहरहाल वो फिलहाल जेल में बंद हैं।

20 की टीम, 11 मैदान में… मुमताज खान को ही मीडिया ने क्यों बनाया स्टार: वर्ल्ड कप की रिपोर्टिंग, प्रोपेगेंडा हिंदू-मुस्लिम का

साल 2013 में कास्य पदक तक का सफर तय कर चुकी भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम कल इतिहास रचते-रचते रह गई। इंग्लैंड को बराबर की टक्कर देने के बावजूद शूट आउट में किस्मत ने टीम का साथ नहीं दिया… टीम के चेहरे पर इस हार का दुख साफ देखा जा रहा था और उनकी ये उदासी उनका मैच देखने वाले तमाम भारतीयों को भी दुखी कर रही थी। मगर, ऐसा नहीं है कि इस टीम ने साउथ अफ्रीका दौरे में इंग्लैंड से हार कर हर किसी को निराश ही कर दिया। इनके पहले के मैचों पर यदि गौर करें तो पता चलेगा कि कितनी तैयारी से इस बार भारतीय महिला जूनियर टीम मैदान में उतरी थी। लगातार चार मैचों में इस टीम को जीत हासिल हुई। सबसे पहले वेल्स के खिलाफ टीम ने 5-1 से अपनी बढ़त बनाई, फिर दूसरे मैच में जर्मनी को 2-1  से हराया, तीसरी बार मलेशिया को 4-0 से शिकस्त दी और फिर साउथ कोरिया से भी 3-0 से जीतकर सेमिफाइनल्स में एंट्री ली।

कुल मिलाकर भले ही इंग्लैंड से हारने के बाद भारतीय महिला जूनियर टीम चौथे पायदान पर रह गई हो और मेडल हाथ नहीं आया। लेकिन भारतीयों के दिल में एक उम्मीद उन्होंने फिर जगा दी है कि महिला हॉकी का भविष्य ऐसी खिलाड़ियों के हाथ में है तो दमदार ही होगा। कैप्टेन सलीमा टेटे के नेतृत्व में खेली इस टीम ने अपने हर मैच में दर्शकों को चौंकाया। हर मैच के बाद जिन खिलाड़ियों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा वो नाम कप्तान सलीमा टेटे, गोलकीपर बीचू देवी और खिलाड़ी मुमताज खान हैं। वेल्स के खिलाफ पहले मैच में खुद सलीमा टेटे प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं थी, फिर अगले मैच में बीचू देवी को प्लेयर ऑफ द मैच बनाया गया और तीसरे मैच में मुमताज खान ने धड़ाधड़ गोल करके भारत को सेमिफाइनल्स में पहुँचाया।

हाल फिलहाल की मीडिया रिपोर्ट्स में आप इन मैचों से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से पढ़ सकते हैं। इनके अलावा अगर आप महिला जूनियर हॉकी टीम से जुड़ा पढ़ना चाहेंगे तो आपके सामने आएगी मुमताज खान की कहानी। वहीं मुमताज जिनके बारे में ऊपर आपको बताया कि कैसे उन्होंने लगातार गोल करके भारत को सेमिफाइनल्स में पहुँचाया। मीडिया में मुमताज के संघर्षों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बताया गया कि 19 साल की लखनऊ की लड़की जिनके माता-पिता सब्जी बेचते हैं वो कैसे एक सितारा बनकर हॉकी में उभरी हैं। जाहिर है मुमताज का जैसा प्रदर्शन था उनकी सफर की कहानी और उनके माता-पिता के संघर्षों की कहानी मीडिया में आना बहुत जरूरी थी ताकि अन्य लड़कियों को भी इससे हिम्मत मिले और वो भी आगे बढ़ सकें। 

मीडिया ने मुमताज खान को बनाया स्टार

हालाँकि, इस बीच ये हैरान करने वाली बात है कि भारतीय मीडिया जिसने मुमताज को इतनी गहराई से कवर किया। उनके लिए इस टीम की अन्य खिलाड़ियों की कहानी पर 100 शब्द लिखने जरूरी नहीं समझे। जबकि हकीकत में उस टीम में पहुँचकर साउथ अफ्रीका में भारत को सेमिफाइनल्स तक ले जाने वाली हर खिलाड़ी के अपने अपने संघर्ष रहे हैं। अपनी-अपनी कहानी रही है। मीडिया के इस पक्षपाती रवैये से आँख मूँदने के लिए हम मान सकते हैं कि शायद मुमताज खान का आखिरी समय में गोल, भारतीय टीम का सेमिफाइनल्स में पहुँचना, प्लेयर ऑफ द मैच, वो महत्वपूर्ण कारण हैं जिनकी वजह से उनकी कहानी एकदम मीडिया में छा गईं। लेकिन उसी जगह सलीमा टेटे और बीचू देवी भी तो हैं जिनकी वजह से टीम उस मैच तक पहुँची जहाँ से मुमताज गोल करके सेमिफाइनल्स में टीम को पहुँचा सकीं। आप सर्च करके देखिए आपको इनसे जुड़ी पुरानी कहानी जरूर पढ़ने को मिलेंगी लेकिन उनके संघर्षों पर चर्चा शायद ही कहीं हाल-फिलहाल में प्रकाशित हुई दिखाई दे। स्क्रॉल की एक रिपोर्ट में इन सबकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बात है।

मीडिया द्वारा अन्य महिला खिलाड़ियों को इस प्रकार नजरअंदाज किए जाने के पीछे कारण क्या है? क्या टीम की बाकी सारी सदस्य ऐसे बैकग्राउंड से आती हैं जिन्हें उस जगह तक पहुँचने में कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी? या उनके संघर्ष की कहानी इतनी मार्मिक नहीं है कि लोग उससे जुड़ पाएँ? या फिर उनकी कहानी मीडिया में परोसी जाने के लिए फिट नहीं बैठती?

हकीकत में हर खिलाड़ी के संघर्ष की अपनी एक कहानी होती है। जो जाने-अंजाने न जाने कितने अन्य लोगों को प्रभावित करती है। जैसे मुमताज एक सब्जी बेचने वाले माता-पिता की बेटी हैं। जब उनकी कहानी दुनिया ने जानी तो कहीं न कहीं सब्जी बेचने वालों ने इसे खुद से कनेक्ट किया होगा या हो सकता है उनके बच्चों ने। 

इसी तरह टीम (20 सदस्य वाली टीम, 11 मैदान के लिए) की हर खिलाड़ी की अपनी पृष्ठभूमि है, जिसकी चर्चा यदि मुमताज की तरह ही हो तो शायद उस वर्ग को भी जुड़ा हुआ महसूस हो जो उनके जैसे बैकग्राउंड से है या वैसे ही संघर्ष का सामना कर रहे हैं।

जूनियर हॉकी टीम की कुछ अन्य खिलाड़ी जो संघर्ष करके पहुँची इस मुकाम तक

उदाहरण के लिए संगीता कुमारी। टीम में फॉरवर्ड पोजिशन पर दिखीं। पर संगीता का सफर इतना आसान नहीं था। वे झारखंड के सिमडेगा से आती हैं। 7 साल की आयु में उन्होंने ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी और उनके माता पिता की आय का स्रोत कृषि ही थी। इसके बूते संगीता की जरूरतें पूरी करना नामुमकिन था। वह हॉकी नहीं दिला सकते थे इसलिए उन्होंने संगीता को बाँस से बनी हॉकी दी जिसे उन्होंने खुद बनाया था।

ब्यूटी डुंगडुंग भी संगीता की तरह सिमडेगा से हैं। उन्होंने भी हॉकी खेलना 5 साल की उम्र से शुरू किया हालाँकि परिवार की हालात ऐसी नहीं थी कि वो उनके हर टूर्नामेंट के लिए पैसे जुटा पाएँ। इसके बाद जीवन किशोरी टोपो- ओडिशा के राजगंपुर से आती हैं। जीवन की कहानी है कि कैसे उन्हें उनके घर से ही हॉकी प्लेयर बनने का सपना देखा लेकिन जब वो उस मुकाम को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने चलीं तो 2020 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। स्थिति ऐसी आ पड़ी कि वो अपने हॉकी को छोड़ने तक का मन बना चुकीं थीं लेकिन फिर भी अपनी माँ के कहने पर इसे फॉलो किया और आज वो भी इस टीम का हिस्सा हैं जिसमें मुमताज शामिल हैं। 

इसी क्रम में अगला नाम बलजीत कौर का भी है। बलजीत कौर एक संयुक्त परिवार में पली बढ़ी लड़की हैं। वो अब भी याद करती हैं कि उन्होंने भले ही 11 साल में हॉकी खेलना शुरू किया लेकिन उन्हें आगे बढ़ने में मदद तब हुई जब एक डीएसपी ने उन्हें हॉकी स्टिक लाकर उन्हें सपोर्ट किया। उनके माता-पिता के पास भी इतने पैसे नहीं थे कि उन्हें हॉकी दिला सकें। उनके पापा मैकेनिक और माँ हाउस वाइफ हैं।

फिर सलीमा टेटे, जो इस बार टीम की कप्तान बनकर मैदान में उतरीं। वह सिमडेगा की रहने वाली हैं और घर में 5 बहन-1 भाई हैं। उनके माता-पिता की भी कोई बड़ी पृष्ठभूमि नहीं है। उनके माता-पिता भी छोटे किसान थे और उसी के जरिए उन्होंने ओलंपिक से लेकर वर्ल्ड कप तक का सफ तय किया है।

20 साल की अक्षता अब्बासो की भी यही कहानी है। महाराष्ट्र के पश्चिमी इलाके से आने वाली अक्षता हॉकी हमेशा से खेलना चाहती थीं लेकिन उनके माता-पिता किसानी करते थे  और उनके पास अपनी हॉकी स्टिक तक खरीदने के पैसे नहीं थे। अगला नाम खुशबू का है, जो टीम में गोल कीपर के तौर पर खेलती हैं। उनके पिता एक ऑटो रिक्शा चलाते हैं और माँ हाउसवाइफ हैं। उनके अंदर भी खेलने का जज्बा कम उम्र में जगा था। शुरू में वो क्रिकेट बैडमिंटन खेलती थीं और फिर वो हॉकी खेलने लगीं। 

ये चंद नाम है जो इस बार महिला जूनियर हॉकी टीम का हिस्सा थीं और इनके संघर्ष की कहानियाँ भी वैसी ही हैं जैसे कि मुमताज के संघर्ष की कहानी। आप खुद सोचिए क्या जिस खुशबू के पिता ऑटोरिक्शा चलाते हैं उसकी चर्चा क्या उन लड़कियों के लिए प्रेरणादायक नहीं है जिनके खुद के पिता भी ऑटोरिक्शा चालक हैं, लेकिन वो आगे बढ़ने का सपना देखती हैं। या जिनके पिता किसानी में उनके लिए इस खिलाड़ियों की कहानी प्रेरणादायक नहीं है!

मुमताज की कहानी क्यों जरूरी थी आना

सबके अपने स्ट्रगल होते हैं। एक की कहानी ऊपर करके, दूसरे खिलाड़ी की कहानी दबा जाना मीडिया का ही रूप है। इसी स्ट्रगल के जरिए लोग उस शख्स की सफलता की कहानी को आँकते हैं। मुमताज की कहानी तो मीडिया में आना जरूरी थी ही। क्योंकि उनका जुड़ाव एक ऐसे समुदाय से है जिससे आने वाली कुछ लड़कियाँ हिजाब की लड़ाई लड़ने को अपना विकास मानती हैं। ऐसे मुमताज एक प्रेरणा हैं जिन्होंने उन बेड़ियों को तोड़कर आगे बढ़ने को चुना। लेकिन उन्हीं की तरह और भी खिलाड़ी हैं। और ये बात सिर्फ महिला जूनियर हॉकी टीम की खिलाड़ियों से जुड़ी नहीं है। 2017 में हमने खुद देखा कि जब फोगाट बहनों की कहानी पर्दे पर आई तो कितनी लड़कियों ने अपनी रुचि कुश्ती में दिखाई। कितने लोगों की वह सोच बदली जो ये मानती थी कि लड़की की कम उम्र में शादी ही उसकी भलाई की बात है। इसी तरह मैरी कॉम पर फिल्म बनी तो लोग उनकी कहानी से वाकिफ हो पाए।

मुमताज के साथ अन्य खिलाड़ियों की ओर ध्यान दिलाने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाकर भारत को रिप्रेजेंट करना अपने आप में एक उपलब्धि है। ऐसे में सिर्फ मीडिया की एक तरफा झुकाव से…अन्य लड़कियों की कहानियाँ नहीं छिपनी चाहिए। हर खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी जानी और पढ़ी जानी चाहिए ताकि उसी पृष्ठभूमि से आने वाले किसी और बच्चे को प्रेरणा मिले और वह भी विपरीत परिस्थिति के बावजूद ऐसे मुकाम पर पहुँचे जहाँ उसके साथ, उसके परिवार, उसके समुदाय, उसके देश के लोगों को भी उस पर गर्व हो।

कई भाजपा नेताओं समेत हिरासत में लिए गए BJYM अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या, ‘न्याय यात्रा’ के लिए पहुँचे हैं राजस्थान: करौली में हुई थी हिन्दू विरोधी हिंसा

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या को राजस्थान पुलिस ने बुधवार (13 अप्रैल, 2022) को हिरासत में ले लिया। दरअसल, वह राज्य में 2 अप्रैल को हुई हिंदू विरोधी हिंसा के खिलाफ भाजपा की ‘न्याय यात्रा’ में भाग लेने के लिए करौली जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, तेजस्वी सूर्या, भाजपा राजस्थान के प्रमुख सतीश पूनिया और कई अन्य नेताओं को राजस्थान पुलिस ने दौसा सीमा पर हिरासत में लिया और उन्हें करौली जाने से रोक दिया गया।

तेजस्वी सूर्या ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “हम किसी भी कीमत पर करौली जाएँगे। हम वहाँ शांति से जाएँगे। अगर वे हमें गिरफ्तार करते हैं, तो उन्हें करने दें।” दरअसल भाजपा ने करौली में इसे ‘न्याय यात्रा’ का नाम देकर विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।

सूर्या ने आगे कहा, “अभी हम जहाँ पर हैं, वहाँ पर धारा 144 नहीं लगी है। करौली जाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। यह तानाशाही सरकार हमारे अधिकार छीन रही है, इसलिए हम विरोध कर रहे हैं। इससे पहले सूर्या ने ट्वीट करते हुए कहा था, “करौली दंगे राजस्थान में स्पष्ट अराजकता का संकेत देते हैं। रामनवमी शोभा यात्रा को जानबूझकर बाधित करने का प्रयास और कॉन्ग्रेस सरकार की हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई न करने का इरादा निंदनीय है।”

गौरतलब है कि राजस्थान के करौली जिले के फूटा कोट इलाके में शनिवार (2 अप्रैल, 2022) को हिन्दू नव वर्ष (नव संवत्सर) के उपलक्ष्य में मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रही एक बाइक रैली पर पथराव के बाद एक दुकान और एक बाइक को आग के हवाले कर दिया गया जिससे इलाके में तनाव पैदा हो गया। बताया गया कि हिंदू नव वर्ष पर निकाली गई बाइक रैली पर मुस्लिम समुदाय द्वारा सुनियोजित तरीके से पथराव किया गया। मुस्लिमों ने हमलों से ठीक पहले अपनी दुकानें बंद कर दी थी।

नाम- शबा, काम- रामनवमी जुलूस पर पत्थर फेंकना: देखिए छत से पत्थरबाजी करती MP की लड़की का Video

रामनवमी के मौके पर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में मुस्लिमों ने हिंदुओं द्वारा निकाले गए जुलूस पर पत्थरबाजी की। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम लड़की को घर की छत से जुलूस पर पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है। जिस घर से लड़की रामनवमी के जुलूस पर पत्थर बरसा रही थी, फिलहाल, उस पर प्रशासन का बुल्डोजर चल गया है।

सेधवा इलाके में प्रशासन ने तीन घरों पर बुलडोजर से कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि पत्थरबाजी करने वाली युवती मदनी चौक की रहने वाली है। उसकी पहचान शबा के रूप में हुई है, जो कि अपने घर से पत्थर फेंक रही थी। इसके अलावा भी शिवराज सरकार का बुलडोजर नासिर, असगर और बाबर के घरों पर चला है।

गौरतलब है कि रविवार (10 अप्रैल 2022) को रामनवमी के मौके पर हिंदू समुदाय की ओर से शोभायात्रा निकाला गया था। ये लोग बड़गाँव से आ रहे थे। इस दौरान जैसे ही ये जुलूस मदनी चौक के पास पहुँचा तो वहाँ के मुस्लिमों ने डीजे बजाने पर ऐतराज जताते हुए इसे बंद करने को कहा। इसी के बाद दोनों पक्षों में जमकर विवाद और पत्थरबाजी हुई। इस घटना में शहर के थाना प्रभारी बलदेव सिंह मुजाल्दा समेत 5 से अधिक लोग घायल हो गए। बाद में हालात को बिगड़ता देख कलेक्टर और एसपी भी मौके पर पहुँचे। तब जाकर हालात को काबू में लाया जा सका।

50 से अधिक पर केस

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पुलिस की ओर से 11 एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें 50 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इनमें से 10-12 लोगों को राउंडअप भी किया गया है। मामले में जिले के एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने कड़े शब्दों में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की नीति स्पष्ट है ऐसे आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ ही जो अवैध संपत्तियाँ उन लोगों ने अर्जित की है, उनके अवैध कारोबारों पर चोट पहुँचानी है। जहाँ से पत्थर आएँगे, उन सभी घरों को जमींदोज किया जाएगा। सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खरगोन में भी ऐसा ही हुआ

बता दें कि रामनवमी के ही दिन इसी तरह से मुस्लिमों ने डीजे बजाने पर पहले आपत्ति जताई और उसके बाद हिंदुओं द्वारा रामनवमी पर निकाली जा रही शोभायात्रा पर हमले कर दिए। मुस्लिम भीड़ ने शीतला माता के मंदिर में घुस कर भी तोड़फोड़ मचाई थी। साथ पत्थरबाजी के साथ ही कई गाड़ियों और घरों में आग लगा दी गई थी।

‘गीता बुरी है, बाइबिल पढ़ो’: कन्याकुमारी में ईसाई टीचर हिंदू विद्यार्थियों को ईसा की प्रार्थना के लिए करता था मजबूर, मना करने पर देता था दंड, हुआ निलंबित

तमिलनाडु के कन्याकुमारी (Kanyakumari, Tamil Nadu) में सरकारी हाईस्कूल की एक हिंदू छात्रा ने बुधवार (13 अप्रैल 2022) को देवी-देवताओं (Hindu God) के खिलाफ भद्दी टिप्पणी करने को लेकर अपने ईसाई शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। कन्नट्टुविलई इलाके के स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उसे ईसाई प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया। छात्रा और उसके माता-पिता ने शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में कन्याकुमारी जिला प्रशासन ने आरोपित ईसाई शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को जाँच करने का निर्देश दिया है।

यह मामला तब सामने आया, जब छठी कक्षा की छात्रा के माता-पिता ने वीडियो जारी कर शिक्षक की करतूतों के बारे में बताया। वीडियो में लड़की ने कहा कि शिक्षक ने छात्रों से ईसाई प्रार्थना करने के लिए कहा और हिंदू देवताओं के साथ दुर्व्यवहार किया। दर्ज शिकायत के अनुसार लड़की ने कहा, “उन्होंने हमें बाइबल पढ़ने के लिए कहा। हमने कहा कि हम हिंदू हैं। हम भगवदगीता पढ़ते हैं। इस उन्होंने कहा कि भगवदगीता बुरी है और बाइबल में अच्छी चीजें हैं, इसलिए हमें बाइबल पढ़नी चाहिए।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुए लड़की के इस वीडियो में आगे कहा गया है कि स्कूल में सिलाई सिखाने वाले ईसाई शिक्षक छात्रों को दोपहर के भोजन से पहले घुटने टेककर और हाथ जोड़कर ईसाई प्रार्थना करने के लिए कहते थे। वह सिलाई कक्षा में धागे के साथ एक क्रॉस भी खींचती थी और छात्रों को ईसाई धर्म में विश्वास करने के लिए कहती थी। लड़की के अनुसार, हिंदू छात्रों ने ईसाई प्रार्थना पढ़ने से इनकार कर दिया, तब शिक्षक ने उन्हें जबरदस्ती बुलाया और उन्हें स्कूल परिसर के भीतर घुटने टेकने का आदेश दिया।

पूछताछ के दौरान लड़की ने पुलिस को बताया कि शिक्षक ने एक शैतान (हिंदू) और एक ईसाई से जुड़ी एक कहानी के बारे में बताई थी। उसने कहा, “शैतान और एक ईसाई बाइक पर सवार थे। वे एक दुर्घटना में मर गए। पास में कुछ लोग बाइबल पढ़ रहे थे और मरे हुए लोग फिर से जीवित हो गए।”

यह पहली घटना नहीं है जिसमें हिंदू छात्रों को दूसरे धर्म में धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया है। इससे पहले जनवरी में तमिलनाडु के तंजावुर स्थित थिरुकट्टुपाली के सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा लावण्या ने ईसाई धर्म नहीं अपनाने पर स्कूल अधिकारियों द्वारा लगातार प्रताड़ित होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि स्कूल ने उसे धमकी दी थी कि अगर वह स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है तो उसे ईसाई धर्म अपनाना होगा।

इसके साथ ही 6 जनवरी को एक हिंदू लड़की ने एक वीडियो जारी कर शिकायत की कि ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल में गणित के एक शिक्षक ने छात्रों को एक समस्या हल करने में विफल रहने के लिए अल्लाह के नाम पर प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया था और साथ इसे किसी से नहीं बताने के लिए कहा था। वीडियो में दिख रही लड़की ने कहा था कि उसके शिक्षक ने हिंदू छात्रों को अपने हाथों का एक कटोरा बनाने और अल्लाह के नाम पर प्रार्थना करने के लिए कहा था, जो एक ‘बेहतर भगवान’ है।

मौजूदा मामले में सरकारी स्कूल कन्याकुमारी जिले के कन्नट्टुविलई इलाके में स्थित है, जहाँ आसपास के इलाकों के 300 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।

‘पहले डंडे से पीटा और फिर उतरवाई पगड़ी’: अमेरिका में 10 दिन में दूसरी बार सिखों पर किया गया बेरहमी से हमला

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में सिखों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। दस दिन के अंदर दूसरी बार सिख पर हमले किए गए हैं। न्यूयॉर्क के क्वींस के बाद बुधवार (13 अप्रैल 2022) को क्वींस के ही रिचमंड हिल में दो सिखों पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। सिखों को पहले बेरहमी से डंडों से पीटा गया और फिर उनकी पगड़ी को उतार दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले 72 साल के बुजुर्ग सिख निर्मल सिंह को निशाना बनाया गया था। उस घटना के बाद अब फिर से दो अन्य को बदमाशों ने पीटने के बाद लूट लिया। न्यूयॉर्क पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। इस बीच ‘सिख नागरिक अधिकार संगठन’ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आया है। संगठन पीड़ितों को ईलाज की सुविधाएँ मुहैया करा रहा है।

बता दें कि वृद्ध सिख निर्मल सिंह पर हमले के बाद सिख संगठनों द्वारा हमले में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग करते हुए न्यूयॉर्क में एकजुटता रैली आयोजित करने के करीब 24 घंटे बाद हमले हुए हैं। इस बीच न्यूयॉर्क पुलिस विभाग हेट क्राइम टास्क फोर्स के मुताबिक, निर्मल सिंह पर हमले करने वाले दो लोगों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं दूसरे की तलाश की जा रही है। मामले में अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल की मेंबर जोआन एरियोला ने क्यूएनएस को बताया, “हम सिख समुदाय और किसी भी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाए जाने से बचाने के लिए हर संभव कोशिशें कर रहे हैं।”

एरियोला के मुताबिक, NYPD लगातार इस चीज के लिए काम कर रहा है कि वो सुरक्षित रहें। न्यूयॉर्क किसी भी तरह की नफरत को बर्दाश्त नहीं करेगा।

मेट्रो के हमले के बाद सिखों को बनाया निशाना

गौरतलब है कि सिख समुदाय अमेरिका में अल्पसंख्यक हैं। सिखों पर ये हमले ब्रुकलिन शहर के सनसेट पार्क में मेट्रो स्टेशन के अंदर किए गए धमाके के बाद किए गए। इस हमले में करीब 20 लोग घायल हुए थे। घायलों में 6 की हालत गंभीर बनी हुई है। बता दें कि आरोपित मेट्रो में घुसा और उसने मास्क लगा लिए। इसके बाद स्टेशन में धुआँ से भरने के बाद उसने लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। यह घटना मंगलवार को 36वें सनसेट स्ट्रीट मेट्रो स्टेशन पर स्थानीय समयानुसार करीब 8:30 पर हुई थी।

सोनम कपूर के घर से ₹2.4 करोड़ के गहने-कैश की चोरी: पति के साथ पकड़ी गई नर्स, कभी हिरोइन के ससुर से हुई थी ₹27 करोड़ की ठगी

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर के दिल्ली वाले घर यानी ससुराल से कैश और ज्वेलरी चोरी करने के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस मामले में सोनम के घर में काम करने वाली एक नर्स को उसके पति के साथ गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने फरवरी में अमृता शेरगिल मार्ग स्थित अभिनेत्री के घर से कथित तौर पर 2.4 करोड़ रुपए की नकदी और आभूषण चोरी किए थे।

पुलिस ने बताया कि सोनम कपूर की सास की देखभाल नर्स अपर्णा रूथ विल्सन करती थी। उसका पति नरेश कुमार सागर, शकरपुर में एक निजी फर्म में अकाउंटेंट है। पुलिस के मुताबिक चोरी 11 फरवरी को हुई थी और 12 दिन बाद 23 फरवरी को तुगलक रोड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई थी। यह FIR सोनम कपूर और उनके पति आनंद आहूजा के मैनेजर ने दर्ज करवाई थी। इस घर में 20 लोग काम करते हैं। सोनम के घर से नकदी और जेवर चोरी के आरोप में पति-पत्नी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार (12 अप्रैल 2022) रात छापेमारी में गिरफ्तार किया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, “दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ ब्रांच की एक टीम के साथ मंगलवार रात सरिता विहार में छापेमारी की। उन्होंने गुनाह कबूल कर लिया, जिसके बाद विल्सन और उसके पति को पकड़ लिया गया। दोनों की उम्र 31 साल है।” हालाँकि सूत्रों के मुताबिक अभी तक चोरी के जेवरात और नकदी बरामद नहीं हो पाई है। मामले में आगे की जाँच जारी है और पुलिस अमृता शेरगिल मार्ग स्थित सोनम कपूर के घर पर काम करने वाले ज्यादातर लोगों से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। उन्होंने कहा कि तुगलक रोड पुलिस स्टेशन ने मामले को जाँच के लिए नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया था। अपराध शाखा भी इस मामले की जाँच कर रही है।

पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार चोरी के बारे में सबसे पहले सोनम कपूर के पति आनंद आहूजा की दादी सरला आहूजा को पता चला। 11 फरवरी को जब सरला आहूजा ने अपनी अलमारी चेक की तो पाया कि गहने और नकदी गायब हैं। 23 फरवरी को उन्होंने चोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया। सरला आहूजा ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने आखिरी बार 2 साल पहले गहनों को चेक किया था। दी गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने मामले में संदिग्ध की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेजों की जाँचकी। रिपोर्ट के मुताबिक, सोनम के ससुर हरीश आहूजा अपनी पत्नी प्रिया आहूजा और माँ सरला आहूजा के साथ दिल्ली के अमृता शेरगिल मार्ग स्थित स्थित आवास में रहते हैं।

इससे पहले सोनम कपूर के ससुर साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। ठगों ने रिबेट ऑफ स्टेट एंड सेंट्रल टैक्सेस एंड लेवीज (RoSCTL) लाइसेंस के जरिए इस ठगी को अंजाम देते हुए उनसे 27 करोड़ रुपए से अधिक ठग लिए थे। इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया था।