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‘ये हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं, देश के लिए कैंसर हैं बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए’: बोले BJP नेता कपिल मिश्रा- ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता कपिल मिश्रा ने गुरुवार (21 अप्रैल 2022) को बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये लोग बिल्कुल ‘कैंसर’ की तरह हैं और समाज को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए मिश्रा ने सभी राजनीतिक दलों से राजनीति से ऊपर उठने और समस्या का समाधान खोजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा हिंदुओं या मुस्लिमों का नहीं है, बल्कि यह देश और हमारी आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा का है।

मिश्रा ने कहा, “बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या का मामला हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं है। ये बात है हिंदुस्तान की। जहाँ भी ये हैं, समाज को कैंसर की तरह खत्म कर रहे हैं। ये बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या अपराध बढ़ा रहे हैं। चेन स्नैचिंग, लूट, हत्या, बच्चों का अपहरण, नशे का कारोबार, ये सब बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या करते हैं। आज इनकी बस्ती में हनुमान जन्मोत्सव पर हमला हो गया। पुलिसकर्मियों पर गोली चल गई। कहाँ से आ रही है इन घुसपैठियों में इतनी हिम्मत?”

आगे उन्होंने कहा, “इनको बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बड़े-बड़े वकील इनके साथ खड़े हैं। ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। दिल्ली की सुरक्षा के लिए खतरा है। हमारे बच्चों के लिए खतरा हैं ये घुसपैठिए। मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक पार्टियों को राजनीति से ऊपर उठकर इस घुसपैठ के मुद्दे पर एक होना चाहिए। इसको हिंदू-मुसलमान का मुद्दा मत बनाइए। ‘मुसलमान खतरे में है’, ‘मुसलमान पर हमला हो रहा है’ जैसे बयान न दें, ये घुसपैठिए हैं, ये कैंसर हैं। इसका समाधान सारे दिल्ली वालों को मिलकर करना होगा। देश के लोगों को एक होना होगा। ये हमारे-आपके बच्चों की सुरक्षा का मामला है। ये हिंदुस्तान की सुरक्षा का मामला है।”

जहाँगीरपुरी हिंसा

हनुमान जन्मोत्सव पर जहाँगीरपुरी से शोभा यात्रा निकाली जा रही थी। शोभा यात्रा इलाके में स्थित मस्जिद के सामने पहुँची तो जुलूस पर पथराव किया गया और गोलियाँ चलाई गईं। हमले में पुलिसकर्मी और श्रद्धालु घायल हो गए। पुलिस ने मामले में कई गिरफ्तारियाँ भी की हैं। बुधवार (20 अप्रैल 2022) को उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इलाके में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। हालाँकि, इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। दुष्यंत दवे और कपिल सिब्बल ने कोर्ट में अतिक्रमण विरोधी अभियान रोकने की पैरवी की।

बुजुर्ग संतों, पुजारियों के हित में आगे आई यूपी सरकार, सीएम योगी ने दिया पुरोहित कल्याण बोर्ड गठित करने का आदेश

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार बुजुर्ग संतों, पुजारियों व पुरोहितों के हित में बड़ा कदम उठाया है। CM योगी ने निर्णय लिया है कि बुजुर्ग संतों, पुजारियों एवं पुरोहितों के कल्याण के लिए एक बोर्ड का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड संतों-पुजारियों के कल्याण संबंधी कार्य देखेगा। उन्होंने बुधवार (20 अप्रैल, 2022) को मंत्रिपरिषद के समक्ष धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रस्तुतिकरण के दौरान यह निर्देश दिया। बता दें कि इसकी घोषणा भाजपा ने लोक कल्याण संकल्प पत्र 2022 में भी की थी।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में 21वीं सदी में भारत में सांस्कृतिक नवजागरण हो रहा है। प्रदेश की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित, संवर्धित एवं लोकप्रिय बनाते हुए राज्य को सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में प्रतिष्ठित करने का हमारा प्रयास है।”

वहीं यूपी दिवस की तर्ज पर जिला, गाँव व नगर स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन का भी उन्होंने निर्देश दिया। इसी प्रकार ईको एंड रूरल टूरिज्म और सभी 75 जिलों में पर्यटन एवं संस्कृति परिषद का गठन करने की बात भी उन्होंने कही।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीएम योगी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि आगामी 100 दिनों के भीतर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत ऑनलाइन एकीकृत मंदिर सूचना प्रणाली का विकास किया जाना चाहिए। जिसमें मंदिरों का विवरण, इतिहास, रूट मैप की जानकारी हो।

साथ ही CM योगी ने कहा कि भाषाओं के संरक्षण के लिए एकेडमी की स्थापना की जाए। गोरखपुर, प्रयागराज, मथुरा और वाराणसी में भजन स्थल बनाए जाएँ। वहीं उन्होंने प्रदेश में चिन्हित 12 परिपथ के विकास के कार्यों को प्रतिबद्धता के साथ पूरा कराए जाने की बात कही।

उन्होंने कहा, “रामायण परिपथ, बुद्धिष्ट परिपथ, आध्यत्मिक परिपथ, शक्तिपीठ परिपथ, कृष्ण/ब्रज परिपथ, बुंदेलखंड परिपथ, महाभारत परिपथ, सूफी परिपथ, क्राफ्ट परिपथ, स्वतंत्रता संग्राम परिपथ, जैन परिपथ एवं वाइल्ड लाइफ एंड इको टूरिज्म परिपथ उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान देंगे।” साथ ही उन्होंने अयोध्या में जन्मभूमि पथ और भक्ति पथ के निर्माण का भी आदेश दिया।

नाबालिग से रेप करने वाले को केमिकल से ‘नपुंसक’ बनाएगा पेरू, बिल लाने की तैयारी

दक्षिण अमेरिकी देश पेरू (Peru) में बढ़ रहे बलात्कार (Rape) के मामलों पर लगाम लगाने के लिए वहाँ की सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। पेरू सरकार नाबालिगों से रेप के दोषियों का रासायनिक बंध्याकरण (Chemical Castration) करने के लिए एक विधेयक पेश करने जा रही है। बुधवार (20 अप्रैल 2022) को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 3 साल की नाबालिग बच्ची से बलात्कार के बाद यह फैसला लिया गया है।

इस मामले को लेकर देश के न्याय मंत्री फेलिक्स चेरो ने कहा, “हम मानते हैं कि यह उपाय बलात्कार करने वालों के लिए एक अतिरिक्त दंड होगा।” मंत्री के मुताबिक, सरकार को इस बात की उम्मीद है कि देश में नाबालिगों से रेप करने के आरोप में जेल की सजा काटने के बाद इसके अंत में इनका रासायनिक बंध्याकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इसी महीने की शुरुआत में 48 साल के एक शख्स को 3 साल की दुधमुँही बच्ची से रेप करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बच्ची की सर्जरी भी करनी पड़ी थी।

सामाजिक रूढ़िवादी पूर्व स्कूली शिक्षक एवं राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि नाबालिगों का बलात्कार करने वाले लोगों को बेहद कठोर दंड की जरूरत है। कैस्टिलो ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था, “हमें उम्मीद है कि कॉन्ग्रेस बिल का समर्थन करेगी।” कानून बनने के लिए इस बिल को पेरू की कॉन्ग्रेस से होकर गुजरना होगा।

पेरू के स्वास्थ्य मंत्री जॉर्ज लोपेज समेत महिला अधिकार संगठनों ने रासायनिक बंध्याकरण प्रस्ताव की आलोचना की है। महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन फ्लोरा ट्रिस्टन ने कहा, “हमें खेद है कि कार्यकारिणी यौन हिंसा को नहीं समझती है। हमें कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करने, देखभाल में सुधार करने और ऐसे मामलों के रोकथाम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी देश के राजनेताओं ने ऐसे उपायों पर चर्चा की थी। साल 2018 में कॉन्ग्रेस ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ हिंसा करने वालों का रासायनिंक बंध्याकरण करने पर जोर दिया था। हालाँकि, इसे लागू नहीं किया जा सका।

मोहसिन, नवाज, वसीम और इरफान, खरगोन दंगों के 4 विलेन: एक तलवार लेकर दौड़ा-दूसरे ने SP को मारी गोली, रामनवमी जुलूस पर हुआ था हमला

मध्य प्रदेश के खरगोन (Khargone, Madhya Pradesh) में 10 अप्रैल को रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला करने वाले दंगाइयों के नाम व चेहरे सामने आ रहे हैं। इस मामले में चार आरोपितों के नाम सामने आए हैं। इन पर दंगा भड़काने का आरोप है। इन दंगाइयों के नाम मोहसिन उर्फ नाटी, नवाज शेख, वसीम उर्फ मोहसिन और इरफान उर्फ इलियास खान हैं। वसीम पर एसपी सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने का आरोप है।

बता दें कि उपद्रव के दौरान संजय नगर के त्रिवेणी चौक में पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की सूचना मिलने के बाद एसपी सिद्धार्थ पुलिस बल के भारी भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे। पथराव, तलवार और पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे। इसी बीच सिर पर सफेद कपड़ा बाँधकर इरफान खान नंगी तलवार लेकर हिंदुओं की तरफ दौड़ा। एसपी ने 12-15 पुलिसवालों के साथ उसे पकड़ने की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया, लेकिन वह छूटकर फिर से भागने लगा। फिर एसपी ने जैसे ही उसे दौड़कर पकड़ने की कोशिश की, वसीम ने पीछे से उनके पैर पर गोली मार दी। गोली एसपी के बाएँ पैर में लगी थी। एसपी ने बताया कि उन्हें लगा कि किसी ने पत्थर मारा है, लेकिन उनके गनमैन को समझ आ गया था कि गोली लगी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, एसपी चौधरी पर हुए हमले के मामले में उनके गनमैन आरक्षक गिलदार पुत्र रायसिंह द्वारा दर्ज करवाई गई रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपित वसीम उर्फ मोहसिन (पुत्र जानू निवासी मुबा वाली गली संजय नगर खरगोन) और इरफान खान (निवासी संजय नगर) के नामों का खुलासा किया गया है। इनके बारे में पुलिस पता लगा रही है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।

वहीं, दो अन्य आरोपितों नवाज और मोहसिन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रभारी एसपी रोहित काशवानी ने इन आरोपितों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये दोनों आदतन अपराधी है और पूर्व में भी कुछ केस में इनके शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें से मोहसिन के खिलाफ 10 और नवाज के खिलाफ 8 अपराध दर्ज हैं। आरोप है कि दंगों के दौरान दोनों आरोपित अन्य उपद्रवियों के संपर्क में थे और उन्हें भड़का रहे थे।

10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के दौरान कुछ लोगों ने इस पर पथराव किया था। इस दौरान 30 से ज्यादा दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई और मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा के दौरान छह पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हो गए। हमले के बाद शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अचानक नहीं घटी। यह पूर्व नियोजित हमला था। उपद्रवियों ने पहले से ही छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा कर रखे थे।

पंचायत चुनाव के नामांकन में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, मुखिया प्रत्याशी मोहम्मद शाकिर समेत तीन को झारखण्ड पुलिस ने उठाया, वीडियो वायरल

झारखंड के गिरिडीह जिले में एक मुखिया प्रत्याशी के लिए नामांकन के दौरान निकाले गए जुलूस में देश विरोधी नारे लगाने मामला सामने आया है। मुखिया पद के प्रत्याशी मोहम्मद शाकिर के नामांकन जुलूस में बुधवार को समर्थकों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला बुधवार (20 अप्रैल, 2022) दोपहर का है, जब मुखिया प्रत्याशी मोहम्मद शाकिर अपने समर्थकों के साथ एक गाड़ी पर सवार होकर नामांकन करने पहुँचे थे। जहाँ उनके समर्थकों की भीड़ नीचे उतर कर उनके समर्थन में पहले नारेबाजी करती रही। फिर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। समर्थकों की नारेबाजी के दौरान सबसे हैरानी की बात यह रही कि मुखिया प्रत्याशी शाकिर ने भी नारेबाजी कर रहे समर्थकों को नहीं रोका।

हालाँकि, वीडियो वायरल होने के बाद, झारखंड पुलिस ने प्रत्याशी मोहम्मद शाकिर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह ने मुखिया प्रत्याशी समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

गिरिडीह एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, “एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें गांडेय प्रखंड के तहत पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के जुलूस के दौरान पाकिस्तान समर्थक नारा (पाकिस्तान जिंदाबाद) लगाया गया था। घटना कल की है।”

उन्होंने कहा, “मुखिया प्रत्याशी मोहम्मद शाकिर के समर्थक प्रखंड कार्यालय गेट के पास उनके समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच पाकिस्तान समर्थक नारे लगे। गिरिडीह पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर शाकिर और उनके दो समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं उस वायरल वीडियो के संबंध में प्राथमिकी में कुल 10 लोगों को नामजद किया गया है जिसमें पाकिस्तान समर्थक नारा लगाया गया था। मामले में आगे की जाँच की जा रही है।”

गौरतलब है कि जैसे ही देश विरोधी नारेबाजी का वीडियो देर शाम को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस नारेबाजी की जानकारी एसपी अमित रेणू के संज्ञान में आई और उसके तुरंत बाद एसडीपीओ को मामले में जाँच का आदेश दिया गया।

जहाँगीरपुरी में बुलडोजर पर रोक के बावजूद हिंदुओं ने मंदिर के गेट को हटाया, मस्जिद के अवैध निर्माण को कर दिया गया था ध्वस्त

दिल्ली के जहाँगीरपुरी (Jahangirpuri, Delhi) में नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच इलाके के हिंदुओं ने वहाँ स्थित एक मंदिर के गेट को स्वेच्छा से हटा दिया है। दरअसल, गेट कानूनी रूप से मान्य सीमा के बाहर था। इसके बाद हिंदुओं ने खुद ही गेट को काटकर हटा दिया।

एनडीएमसी के अधिकारियों द्वारा जहाँगीरपुरी के सी ब्लॉक में अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई के एक दिन बाद हिंदू भक्तों ने ये कार्रवाई की। हिंदुओं ने मंदिर के फाटक को मुस्लिम बहुल इलाके में सुरक्षा को ध्यान रखते हुए लगाया था।

बुधवार (20 अप्रैल 2022) को एनडीएमसी ने भारी संख्या में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में जहाँगीरपुरी इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया था। बुलडोजर से अवैध ढाँचों, दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को ढहा दिया गया। हालाँकि, जल्द ही कुछ घंटों की कार्रवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए इस अभियान को रोक दिया।

मस्जिद के अवैध निर्माण को ढहाया

जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती पर हिंसा के दौरान वहाँ की जिस मस्जिद से शोभा यात्रा पर पत्थर फेंके गए थे, उस मस्जिद के अवैध हिस्से को अतिक्रमण हटाने के दौरान ढहा दिया गया। मस्जिद के गेट को करीब 10 फीट तक निर्माण करा लिया गया था। मस्जिद के गेट के साथ-साथ अवैध तरीके से सड़क पर बनाई गई एक मजार को भी ध्वस्त कर दिया गया।

इलाके के कुछ हिस्सों में सड़क पर अतिक्रमण कर घरों का निर्माण कराया गया था। इससे 30 फीट की चौड़ी सड़क 10 फीट की संकरी गली बनकर रह गई थी, लेकिन जब बुलडोजर चला तो सभी को ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किए कई दुकानों को भी तोड़ दिया गया।

जहाँगीरपुरी के मुस्लिम बहुल इस इलाके में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के मौके पर शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने शोभा यात्रा पर पत्थरों, बोतलों से हमला किया था। अब तक इस मामले में दो दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुस्लिमों को कट्टर बनाओ, भारत में इस्लामी शासन लाओ: PFI का क्या है एजेंडा-कैसे कर रहा काम, रिपोर्ट में दावा- एजेंसियों ने सरकार को सब कुछ बताया

पिछले दिनों खबर आई थी कि केंद्र की मोदी सरकार विवादास्पद संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अब एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न खुफिया एवं जाँच एजेंसियों ने इस संगठन की गतिविधियों का ब्यौरा सरकार को दिया है। इसमें कट्टरपंथी संगठन के एजेंडे और काम करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस इस्लामी संगठन को लेकर एक रिपोर्ट मार्च में सरकार के साथ एजेंसियों ने साझा की है। इसमें बताया गया है कि PFI का एक छिपा हुआ एजेंडा है। उसका मकसद भारत में इस्लामी शासन स्थापित करना है। वह मुस्लिमों को कट्टरपंथी बना रहा है। साथ है ऐसे मामले जो मुस्लिमों एवं अन्य समुदायों से जुड़े हों उनको सांप्रदायिक रंग देता है।

विभिन्न खुफिया और जाँच एजेंसियों ने 2017 से 2022 तक विभिन्न राज्यों और एजेंसियों द्वारा दायर की गई खुफिया रिपोर्टों, अदालती फैसलों, पीएफआई के खिलाफ राज्य के निष्कर्षों और डोजियर का विश्लेषण करने के बाद कई रिपोर्ट तैयार की हैं जो हाल ही में भारत सरकार को भेजी गई हैं। हाल ही में प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट को 11 भागों में बाँटा गया है, जिसमें PFI की विचारधारा, लीडरशिप, वैश्विक आतंकी संगठनों के साथ संबंध, कट्टरपंथी गतिविधि, संगठन, फंडिंग और इसके कैडरों के खिलाफ अदालती आदेश शामिल हैं।

News18 ने दस्तावेजों के हवाले से कहा है कि सरकार को बताया गया है कि PFI का कट्टर सांप्रदायिक और राष्ट्र विरोधी एजेंडा है। संगठन के हिंसक/कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होने के कई मामले सामने आए हैं। PFI कार्यकर्ता हिंदुवादियों की हत्या और उन पर हमलों में शामिल रहे हैं। एक जाँच एजेंसी ने बताया कि इस संगठन की विचारधारा का लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद की अवधारणाओं को कमजोर करने वाला है। एजेंसियों का कहना है कि PFI की राजनीतिक शाखा का तौर पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) काम कर रही है। उसने चुनाव लड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवाया है। इसके अलावा PFI द्वारा नियंत्रित कई अन्य ईकाई हैं जो धर्मांतरण, फंड कलेक्शन आदि में सक्रिय हैं।

एक खुफिया एजेंसी ने पीएफआई की गतिविधि के बारे में विवरण देते हुए बताया है , “कुछ PFI कार्यकर्ता ISIS/ISKP जैसे आतंकवादी समूहों में शामिल होने के लिए जाने जाते हैं। संगठन ‘जकात’ के नाम पर प्रवासी मुस्लिमों से फंड लेता है और इसका इस्तेमाल मस्जिदों के निर्माण, मदरसों को चलाने और अन्य कट्टरपंथी एवं आपराधिक गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है।”

इसके अलावा एजेंसी ने सितंबर 2021 में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान के दौरान असम के दरांग जिले में हिंसा भड़काने में संगठन की भूमिका के साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध और उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में इसकी संभावित भूमिका का भी जिक्र किया है। इसके अलावा दस्तावेज में PFI द्वारा की गई आपराधिक गतिविधियों या हत्याओं के लगभग 30 उदाहरण दिए गए हैं, जिसमें पिछले साल नवंबर में RSS कार्यकर्ता संजीत की हत्या और पिछले साल दिसंबर में केरल में BJP कार्यकर्ता रंजीत श्रीनिवासन की हत्या भी शामिल है।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई थी कि केंद्र सरकार जल्द ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है। बताया गया था कि प्रतिबंध की तैयारी पूरी कर ली गई है और जल्द ही इसको लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है। हालाँकि उसके बाद 18 अप्रैल 2022 को गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि इस इस्लामी संगठन प्रतिबंध लगाने के बैठक किए जाने की मीडिया रिपोर्ट सही नहीं है। मंत्रालय ने इस तरह की किसी भी बैठक से इनकार किया था।

जहाँगीरपुरी में बुलडोजर पर जारी रहेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पूरे देश के लिए नहीं दे सकते आदेश, बचाव में उतरी कॉन्ग्रेस

दिल्‍ली के जहाँगीरपुरी से अतिक्रमण हटाने के नगर निगम की कार्रवाई पर गुरुवार (21 अप्रैल, 2022) को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अगली सुनवाई अब दो हफ्ते बाद फिर की जाएगी। मामले में कोर्ट ने एनडीएमसी और दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि MCD की कार्रवाई पर रोक की स्थिति बरकरार रहेगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जहाँगीरपुरी मामले में ऑपरेशन बुलडोजर के खिलाफ दायर याचिका पर दुष्यंत दवे और कपिल सिब्बल ने पैरवी की। वहीं MCD की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे। पैरवी जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की बेंच के सामने की गई।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिमोलेशन पर पूरे देश में रोक का आदेश नहीं दे सकते क्योंकि अवैध निर्माण बुलडोजर से ही गिराए जाते हैं और पूरे देश में ऐसी कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। अर्थात सुप्रीम कोर्ट का आदेश फिलहाल सिर्फ जहाँगीरपुरी में चल रही कार्रवाई को लेकर है। इस फैसले का उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में हो रही ऐसी कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बता दें कि सुनवाई के दौरान वरिष्‍ठ वकील दुष्‍यंत दवे ने जब कहा कि जहाँगीरपुरी मामले से कई संवैधानिक और राष्‍ट्रीय महत्‍व के सवाल खड़े हो गए हैं तो कोर्ट ने फटकार लगा दी। जज ने कहा कि आप केस पर बात कीजिए। कोर्ट ने पूछा कि एक इलाके के बारे में मामले का राष्‍ट्रीय महत्‍व क्‍या है? दवे ने कहा कि बुलडोजर राज्‍य की नीति का एक जरिया बन गया है। उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली में एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। इसपर सॉलिसिटर जनरल एसजी मेहता ने कहा कि दवे तथ्‍यों पर बहस करें जिसका जवाब वे देंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी अपना पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा, “अतिक्रमण अपने आप में दिक्कत है पर सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि मुस्लिम समुदाय से इसे जोड़ दिया गया है। देश के कई हिस्सों में ऐसा हो रहा है। मुस्लिम समुदाय के घरों को ढहाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के मंत्री का बयान देखिए। उन्होंने कैसे इसे जस्टिफाई किया है। जो लोग पहले से ही जेल में बंद है, उनके घरों को भी तोड़ दिया गया।”

बता दें कि सिब्बल ने इसके साथ ही यह माँग की है कि पूरे देश में जो बुलडोजर एक्शन हो रहा है कोर्ट उस पर तुरंत रोक लगाए लेकिन कोर्ट ने उनकी यह बात नकार दी।

गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम ने बुधवार (20 अप्रैल, 2022) को अवैध निर्माण के खिलाफ जहाँगीरपुरी में बुलडोजर उतार दिया था। तोड़फोड़ शुरू होने के कुछ ही देर बाद सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी। वहीं जहाँगीरपुरी में बुलडोजर चलाने को लेकर कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा सियासत भी तेज हो गई है।

कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “मैं आप सबसे कहना चाहता हूं कि कृपया इस प्रक्रिया को धर्म के चश्मे से ना देखें। ये सिर्फ गरीब के पेट पर लात मारी गई है। ये इसलिए हुआ है क्योंकि हमारे देश में बेरोज़गारी-महंगाई से सबसे ज्यादा पीड़ित गरीब हैं, उनका ध्यान भटकाने और उन्हें धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिश हुई है।”

बता दें कि यह याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दाखिल की है और याचिका में दिल्ली के अलावा कई राज्यों में हुई कार्रवाई का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील दुष्यंत दवे यह केस लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में हनुमान जन्मोत्सव के दिन ज़बरदस्त हिंसा और दंगा हुआ था। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने मामले में सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की है और हिंसा के 25 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

गाँव में सड़क-पानी माँगने पर कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक ने युवक को जड़ा थप्पड़, जेल भेजवाने की दी धमकी: कहा- गुस्से में हाथ उठ गया

जन प्रतिनिधि जनता का सेवक होता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह लोगों की समस्याओं को दूर करे, लेकिन कर्नाटक में इसका उल्टा हुआ। कर्नाटक (Karnataka) के पावागड़ा से कॉन्ग्रेस विधायक वेंकटरमणप्पा (Pavagada Congress MLA Venkataramanappa) से अपनी गाँव के लिए बुनियादी सुविधाओं की माँग करना एक युवक को महँगा पड़ गया। सड़क, पानी और बिजली की माँग करने पर विधायक ने युवक को तहसील कार्यालय के सामने सरेआम थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही ही नहीं, विधायक ने युवक को जेल में बंद कराने की धमकी भी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना बुधवार (20 अप्रैल 2022) की है। तुमकुर जिले के नागेनहल्ली गाँव का रहने वाला युवक नरसिम्हा मूर्ति तहसील कार्यालय में खराब सड़क और पानी की समस्या की शिकायत लेकर पहुँचा था। उसने अपने गाँव में बुनियादी सुविधाएँ देने का अनुरोध किया। तहसील कार्यालय से बाहर निकलने के बाद वह स्थानीय विधायक वेंकटरमणप्पा से मिला और उनसे भी अपने गाँव की सड़कें बनवाने और पानी की व्यवस्था करवाने का अनुरोध किया। कॉन्ग्रेस विधायक को यह माँग नागवार गुजरी और उन्होंने युवक को थप्पड़ जड़ दिया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक विधायक से बात कर रहा होता है। इसी दौरान विधायक ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ मारने के बाद कॉन्ग्रेस के विधायक ने उसे जेल में बंद कराने की धमकी दी। घटना के बाद विधायक की जमकर आलोचना हो रही है।

कॉन्ग्रेस विधायक की इस हरकत पर कर्नाटक बीजेपी ने तंज कसा है। भाजपा का कहना है कि कॉन्ग्रेस लोगों की समस्याओं का इसी तरह से समाधान करती है।

विधायक बोले- गुस्सा आ गया था

बहरहाल, वीडियो वायरल होने के बाद चौतरफा आलोचना के बीच कॉन्ग्रेस विधायक वेंकटरमणप्पा ने सफाई देते हुए युवक पर ही अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगा दिया। विधायक का कहना है कि इसी कारण से उन्हें गुस्सा आ गया और हाथ उठ गया। जब उनसे सड़कों के हालात को लेकर पूछा गया तो उन्होंने सवाल किया कि क्या सभी सड़के ठीक हैं? क्या सभी को रातों-रात ठीक कर पाना संभव है? उन्होंने ये भी कहा कि करीब 4 करोड़ रुपए का अनुदान स्वीकृत हुआ है और अगले सप्ताह से सड़कों की मरम्मत शुरू कर दी जाएगी।

खतरे में झारखंड के CM हेमंत सोरेन की कुर्सी, चुनाव आयोग ने ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ पर माँगा जवाब: खुद को ही खदान आवंटित करने का आरोप

खनन पट्टा मामले में झारखंड (Jharkhand) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राँची हाईकोर्ट के बाद अब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस मामले में नाराजगी दिखाई है। इस मामले में चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखा है। आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि दस्तावेजों के ‘प्रमाणीकरण’ कर मुख्य सचिव बताएँ कि सोरेन ने राँची के अंगारा ब्लॉक में खनन पट्टा लेने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया।

आयोग से पत्र मिलने के बाद राज्य के अधिकारी इन आरोपों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसके बाद वे आयोग को पत्र का सौंपे देंगे। बता दें कि सोरेन के पास खनन विभाग भी है और उन पर आरोप है कि उन्होंने पत्थर खनन का का खुद को अलॉट किया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास (Raghuvar Das) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने फरवरी में राज्यपाल से मुलाकात कर सीएम को हटाने की माँग करते हुए इससे संबंधित दस्तावेज सौंपे थे।

राज्यपाल ने इन दस्तावेजों को चुनाव आयोग को भेजकर उसकी राय माँगी थी। इस आयोग ने इन दस्तावेजों को मुख्य सचिव को भेज दिया और कहा कि वे बताएँ सीएम पर आरोप से संबंधित ये दस्तावेज सही हैं या नहीं। अधिकारियों से जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग द्वारा यह फैसला करेगा कि मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया लीज ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ के दायरे में आता है या नहीं। इसी आधार पर वह राज्यपाल को अपनी राय देगा। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9A में ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ के दायरे में आने वाले सदन के सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है।

रघुवर दास ने सौंपे गए दस्तावेजों के आधार पर अपनी शिकायत में कहा था कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने नाम पर पत्थर खदान लीज पर ले लिया। राँची जिले के अनगड़ा प्रखंड में 0.88 एकड़ क्षेत्रफल पर यह खनन पट्टा पाँच वर्षों के लिए ले लिया है।

हाईकोर्ट ने की थी टिप्पणी

शिवशंकर शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर सोरेन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री हैं। उनके पास खनन विभाग भी है। ऐसे में उन्होंने खुद ही पर्यावरण क्लीयरेंस के आवेदन दिया और क्लीयरेंस लेकर खुद ही खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन है

क्या है मामला?

मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर खदान का पट्टा लिया। यह खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में स्थित है। भाजपा ने आरोप लगाया था कि इस पट्टे की स्वीकृति के लिए सोरेन 2008 से ही प्रयास कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पत्रांक संख्या 615/M, दिनांक 16-06-2021 के जरिए पट्टा की स्वीकृति का आशय का पत्र (LOI) विभाग द्वारा जारी कर दिया है। यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। स्टेट लेबल इंवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 14-18 सितम्बर 2021 को अपनी 90वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की अनुशंसा भी कर दी।