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कुतुब मीनार था ‘विष्णु स्तम्भ’, 27 हिंदू-जैन मंदिर तोड़कर बना स्मारक: VHP ने उठाई पुनर्निर्माण की माँग

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल सहित संगठन के अन्य नेताओं ने सरकार से माँग की है कि वह कुतुब मीनार परिसर में 27 प्राचीन मंदिरों का पुनर्निर्माण करे। इसके साथ ही वहाँ हिंदू अनुष्ठानों को फिर से शुरू करने की इजाजत दें।

विहिप नेता ने यह माँग शनिवार (9 अप्रैल 2022) को कुतुब मीनार परिसर का दौरा करने के बाद की। उन्होंने बताया, “हमने स्मारक के प्रमुख हिस्सों का दौरा किया, जहाँ हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों की हालत देखने लायक भी नहीं थी। कुतुब मीनार को 27 मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद प्राप्त सामग्री से बनाया गया था।”

विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने हिंदुओं की पीड़ा को व्यक्त करते हुए रविवार (10 अप्रैल 2022) को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “कुतुब मीनार वास्तव में ‘विष्णु स्तम्भ’ था। कुतुब मीनार का निर्माण 27 हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर प्राप्त सामग्री से किया गया था। हिंदू समुदाय को तंग करने के लिए सुपरइम्पोज्ड स्ट्रक्चर (Superimposed Structure) बनाया गया था।”

विहिप प्रवक्ता से पहले पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय भी कुतुब मीनार परिसर में एक जगह भगवान गणेश की उल्टी प्रतिमा और एक जगह उनकी प्रतिमा को पिंजरे में बंद कर हिंदू भावनाओं को अपमानित करने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक को पत्र लिख कर इन प्रतिमाओं को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखवाने की माँग भी की है।

हावड़ा में रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला और पत्थरबाजी, बाँकुरा में मस्जिद के सामने से गुजरी जुलूस तो 17 गिरफ्तार किए गए

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमले के कुछ वीडियोज सामने आए हैं। हालाँकि, ये सब किन लोगों ने किया है – इस सम्बन्ध में कुछ खास पता नहीं चल सका है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हावड़ा के फ़ाजिर बाजार में ‘समुदाय विशेष’ के लोगों ने ये हमला किया है। वीडियो में भगदड़ मचते हुए देखा जा सकता है। साथ ही कई दुकानों और गाड़ियों में आग लगाने की खबर भी बताई जा रही है।

साथ ही कहा जा रहा है कि न सिर्फ उग्र भीड़ ने कई लोगों के घर में जबरन घुस कर तोड़फोड़ मचाई, बल्कि हावड़ा पुलिस पर भी पत्थरबाजी की। कई घरों पर हमला किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालाँकि, अभी ठीक से इन खबरों की पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि ज्यादा विवरण सामने नहीं आए हैं। दरअसल, हावड़ा के दक्षिणी इलाके में ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ की तरफ से शांतिपूर्ण ढंग से ये रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली जा रही थी।

इसी दौरान शोभा यात्रा पर हिंसक हमला कर दिया गया, जिसमें कई लोग घायल भी हुए हैं। रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी भी की है। वीडियो में घायल हिन्दू युवकों को देखा जा सकता है। फ़िलहाल बड़ी संख्या में पुलिस बलों को वहाँ तैनात कर दिया गया है। इसी तरह पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा में रामनवमी के दौरान हंगामे का आरोप लगा कर पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि मस्जिद होने की वजह से जुलूस को दूसरा रास्ता दिया गया था, लेकिन फिर भी वो उसी रास्ते से गए।

इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रविवार (10 अप्रैल, 2022) को ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं। गुजरात के हिम्मतनगर (साबरकांठा) जिले में रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले की खबर है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान वाहनों को भी निशाना बनाया गया है। मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस पर भीड़ ने हमला कर दिया। साथ ही जम कर आगजनी भी की गई। 

हिंदुओं की बहनों से रेप, मंदिर में अटैक या नरसंहार – मुस्लिमों पर ‘सिस्टम’ सॉफ्ट… हिंदू ‘अपराधी’ पर चलता है हथौड़ा

सीन-1

“उम्र – 19 साल। जाति – मुसलमान। नाम – नदीम खान…
…कम उम्र के लड़कों द्वारा बिना सोचे-समझे आवेश में आकर उत्तेजित होकर धर्म/समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी”

यह सब कुछ राजस्थान पुलिस का लिखा हुआ है। बिकानेर पुलिस के ट्विटर हैंडल पर। एसपी योगेश यादव की फोटो भी लगी हुई है।

मामला है हिंदुओं की बहनों का बलात्कार करने से लेकर हिंदुओं को चुन-चुन कर मार डालने का। मामला है जहाँ नदीम हिंदुओं की बहनों के साथ रेप होने और हिंदुओं की हत्या की बात करता है और सबनम खिलखिला कर हँसती (Nadeem Sabnam viral video on rape of Hindus and murder) रहती है। राजस्थान पुलिस को लेकिन यह “कम उम्र के लड़कों द्वारा बिना सोचे-समझे” वाली बात लगती है।

सीन-2

गोरखनाथ मंदिर। अपराधी – अहमद मुर्तजा अब्बासी। 2 सुरक्षाकर्मी घायल। हथियार – धारदार। पढ़ाई – IIT बॉम्बे से। हमला करते समय चिल्लाता है – अल्लाह-हू-अकबर। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लेकिन बताते हैं कि मानसिक समस्या से ग्रसित है, ध्यान देने की जरूरत।

अहमद मुर्तजा अब्बासी (Ahmad Murtaza Abbasi Gorakhnath Temple attacker) के पास से जिहादी दस्तावेज मिलता है। उसका इलाज करने वाले डॉक्टर बताते हैं कि वो मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं है। वह इतना शातिर है कि आतंकियों से कोडवर्ड में बात करता है। सिर्फ जिहादियों के लिए एक ऐप बना रहा होता है। अखिलेश यादव को लेकिन सहानुभूति हो जाती है… उन घायल पुलिस वालों से नहीं, जो लोकतंत्र में बनाए नियमों के तहत कभी उनकी रक्षा किए होंगे। खैर सहानुभूति तो “लड़कों से गलती हो जाती है” कह कर मुलायम भी दिखा चुके हैं राजनीति में।

सीन-3

जगह – मोबाइल ऐप। अपराध – मुस्लिम महिलाओं की फोटो और नीलामी। नाम – सुल्ली डील ऐप (Sulli Deals app) और बुल्ली बाई ऐप (Bulli Bai App)। देश भर में हिंदू-घृणा का माहौल। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म। नेता सवाल-जवाब करते हैं।

पुलिस इधर अपना काम करती है। ‘सुल्ली डील’ वाला मुख्य साजिशकर्ता ओंकारेश्वर ठाकुर (25 साल, BCA का छात्र) गिरफ्तार होता है। 20 साल का लड़का नीरज बिश्नोई ‘बुल्ली बाई’ मामले में गिरफ्तार किया जाता है। शिवसेना वाली सांसद प्रियंका चतुर्वेदी इस मामले में अखिलेश यादव की तरह कूदती हैं – फर्क सिर्फ इतना होता है कि वो पीड़ित लड़कियों की ओर से बोल रही होती हैं। “कम उम्र के लड़के” बोल कर नीरज बिश्नोई की तरफदारी नहीं करती हैं… और न ही “लड़कों से गलती हो जाती है” कह कर अपना मुलायम पक्ष दिखाती हैं।

सीन-4

आतंकी ओसामा किसका बाप था? आतंकी बुरहान का बाप कौन है? यह सब कुछ याद है? मीडिया के कारनामे… कैसे गढ़ी जाती है कहानियाँ! अब एक कदम आगे चलते हैं। 2022 में आते हैं। कहानियाँ जो अभी गढ़ी जा रही हैं, उसको देखते हैं।

गोरखनाथ मंदिर पर मुर्तजा के अटैक को लेकर The Quint की रिपोर्टिंग

मुर्तजा, एक IITian आतंकवादी – मीडिया प्रोपेगेंडा

ऊपर जो फोटो है, वो मीडिया की कहानी बताती है। निष्पक्ष मीडिया की। कलम की ताकत क्या होती है, फोटो से समझिए। लेखक ठान ले तो उदाहरण देकर कैसे दुर्योधन को सुयोधन बनाया जाता है, भारत भूषण अग्रवाल की लिखी एकांकी भी लगभग सभी ने पढ़ी ही होगी।

फोटो देख कर हालाँकि The Quint के बारे में अपनी राय मत बनाइए। यह तो एक उदाहरण मात्र है… वो भी पिद्दी भर औकात के साथ। लगभग पूरी मीडिया जमात ही ऐसी है। नाम देख कर (इस्लामी, दलित या कुछ और… बहुत सारे पैमाने हैं इनके) ये तय करते हैं कि कहानी कैसे बेची जाए। ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ करके राष्ट्रपति भवन में पद्म सम्मान कैसे लिया जाए!

नदीम-सबनम, वायरल वीडियो और राजस्थान पुलिस

अब लौटते हैं ऊपर के सीन पर। राजस्थान से पुलिस वालों को हमने देखा। उन पुलिस वालों में UPSC की परीक्षा पास किए IPS ऑफिसर और उसके तर्क (“19 साल का लड़का… कम उम्र के लड़के”) को भी देखा। शायद इस IPS ऑफिसर ने नागरिक शास्त्र की किताब नहीं पढ़ी होगी, जिसमें लिखने वाले लिखते हैं कि 18 साल के नागरिक वोट कर सकते हैं, प्रधानमंत्री चुन सकते हैं।

निष्पक्ष पत्रकारों की तरह पुलिस से भी निष्पक्ष होने की उम्मीद की जाती है। बीकानेर पुलिस पूरी तरह फेल रही है इस मामले में। “अपराधी का नाम फलां, उम्र ये, पता फलां जगह, अपराध ये-ये किया, धारा ये-ये लगाई जा रही” – मूलतः पुलिस रिपोर्ट में ये बातें दिखती हैं। इसके उलट इस रिपोर्ट में मनोविज्ञान का ज्ञान बाँटा गया है। यह काम नेताओं का है, संसद में तर्क-वितर्क करना। बीकानेर पुलिस ने नेताओं वाला काम किया है।

क्या आप ऐसे पुलिस वालों से सवाल कर सकते हैं? 99.99% जनता नहीं करना चाहेगी। फर्जी केस, धमकी, कोर्ट-कचहरी… वजह आप सभी जानते हैं। यह आरोप इस IPS ऑफिसर पर नहीं है, बल्कि सामान्य पुलिसिया छवि यही है देश में।

अहमद मुर्तजा अब्बासी और अखिलेश यादव

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बार के चुनाव के बाद भी पूर्व ही रह गए। अहमद मुर्तजा अब्बासी और उसके अब्बा से सहानुभूति 2027 के चुनावों के लिए अभी से एक प्रयास भर है। आँकड़े बताते हैं कि मुस्लिम-वोट समीकरण को साधते हुए इस बार अखिलेश उतने सफल तो नहीं रहे। जीत जरूर ज्यादा सीटों पर हुई है लेकिन सत्ता दूर है।

व्यक्ति या पार्टी विशेष से घृणा की राजनीति चलेगी नहीं, यह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समझना होगा। कारण यह है कि वोट आखिर में जनता ही देती है। ये जनता 1-2 बार मूर्ख बन सकती है, बार-बार तो काठ की हाँडी भी नहीं चढ़ती।

सोशल मीडिया के दौर में वीडियो वायरल होता है, जनता देखती है। जनता समझती है कि केरल में पैदाइश, मुंबई में पढ़ाई… ऐसे में अहमद मुर्तजा अब्बासी अगर मानसिक रूप से विक्षिप्त होता तो कहीं से चल कर गोरखनाथ मंदिर ही आकर क्यों रूकता? किसी मस्जिद-गुरुद्वारे या रेलवे स्टेशन पर क्यों नहीं? विक्षिप्त होता तो CAA-NRC और हिजाब-बुरके जैसे समसामयिक विषयों पर बोल कैसे पाता? पहले नेता जनता की नब्ज पकड़ते थे, अब जनता नेताओं को पहचानने लगी है।

नदीम की जगह नीरज… पुलिस-नेता-मीडिया सब सख्त

भूल जाइए सुल्ली डील और बुल्ली बाई ऐप को। हिंदू नाम वाले आरोपितों या अपराधियों के लिए (मतलब उनके पक्ष में) आपने मीडिया में प्राइम टाइम होते देखा है कभी? कभी कैंडल लाइट मार्च होते? जानी-मानी यूनिवर्सिटी में हिंदू अपराधी के नाम पर आजादी के नारे लगते सुना है कभी? याद कीजिए… नहीं कर पाएँगे, क्योंकि ऐसा कभी हुआ ही नहीं है… होता ही नहीं है। आतंकियों के लिए हालाँकि कोर्ट रात में भी खुलते हैं।

आरोप किसी पुलिस, मीडिया, सरकार, नेता आदि-इत्यादि पर है ही नहीं। आरोप है सिस्टम पर। 1947 से अब तक का जो सिस्टम देश में बना है, उसमें बहुसंख्यक हिंदुओं के लिए “सॉफ्ट कॉर्नर” या मानवीय पहलू जैसी चेतनाओं का निर्माण नहीं होने दिया गया। वरना और क्या वजह होती कि कश्मीरी पंडितों या कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर विमर्श के बीच “मुस्लिम भी मारे गए, मारे गए मुस्लिमों की संख्या इतनी है” जैसी बेतुकी बातें घुसाई जाए।

जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर सबसे पहला दावा अल्पसंख्यकों (खासकर मुस्लिमों का) का है, तो निश्चित ही उनका आशय सिर्फ बिजली-सड़क-पानी-शिक्षा-खनिज से नहीं रहा होगा… पूरे सिस्टम पर, देश की सोच पर, तंत्र की मानसिकता पर… पहला दावा अल्पसंख्यकों का है – निश्चित ही वो तब ऐसा सोच कर बोले होंगे। अफसोस इस पहले दावे की मानसिकता के साथ देश और सिस्टम अभी भी चल रहा है, सरकारी तंत्र में बैठे लोग चला रहा हैं।

राम नवमी की पूजा में वामपंथियों ने डाला विघ्न, नॉन वेज को बनाया मुद्दा: JNU में फिर हिंसा, सामने आई वीडियो

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से वामपंथी और एबीवीपी के सदस्यों में झड़प की खबर सामने आई है। ये घटना राम नवमी के अवसर पर घटी। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र राम नवमी की पूजा करने से लोगों को रोक रहे थे। वहीं वामपंथियों ने कहा कि एबीवीपी वालों ने उन्हें नॉन वेज खाने से रोका।

सोशल मीडिया पर इस झड़प की वीडियो सामने आई है। कई छात्रों के सिर और हाथ से खून बहता दिख रहा है। यहाँ दोनों ही गुट अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं।

वामपंथियों ने डाला पूजा में विघ्न: ABVP का आरोप

एबीवीपी के छात्रों ने आरोप लगाया है कि कावेरी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने राम नवमी के दिन पूजा का आयोजन किया था जिसकी सूचना तीन दिन पहले ही पोस्टर लगाकर दी गई थी। बावजूद इसके वामपंथियों द्वारा पूजा के दौरान विघ्न डालने का काम हुआ। जिसके चलते जो पूजा 3:30 पर शुरू होनी थी वो 5 बजे हुई।

एबीवीपी का आरोप है कि नॉन-वेज को मुद्दा बनाना वामपंथियों की साजिश थी। वह लोग हॉस्टल में राम नवमी मना रहे थे और उसी समय इफ्तार का कार्यक्रम भी यूनिवर्सिटी में चल रहा था। हालाँकि, ये वामपंथियों से बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने नॉन वेज को मुद्दा बनाकर माहौल बिगाड़ दिया।

छात्रों को नॉन वेज खाने से रोका- जेएनयू हिंसा पर वामपंथी दल का पक्ष

बता दें कि जेएनयू में हुई हिंसा पर वामपंथी छात्र अपना पक्ष रख रहे हैं। JNU स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आयशी ने एबीवीपी पर इल्जाम लगाते हुए दावा किया कि एबीवीपी ने पहले कावेरी हॉस्टल में नॉन वेज प्रतिबंधित करने का प्रयास किया, मगर जब बाकी छात्र इसके विरोध में खड़े हुए तो ‘संघी गुंडों’ ने हिंसा भड़का दी और छात्रों को गंभीर चोटे आई। उन्होंने अपने दावे के साथ कई तस्वीरें शेयर की हैं जिसमें छात्रों के सिर से खून निकल रहा है। आयशी ने दावा किया कि एबीवीपी ने मेस कर्मचारियों पर भी हमला किया।

इस बीच एबीवीपी ने भी एक वीडियो शेयर की है जिसमें उनके कार्यकर्ता के हाथ से खून बह रहा है। एबीवीपी जेएनयू का कहना है, “वामपंथियों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं और सामान्य छात्रों पर हमला किया जिसमें एबीवीपी सदस्य रवि राज गंभीर रूप से घायल हो गए।”

मध्य प्रदेश में रामनवमी की शोभा यात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला, ट्रांसफर्मरों और गाड़ियों को किया आग के हवाले: DJ पर थी आपत्ति

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस पर भीड़ ने हमला कर दिया। साथ ही जम कर आगजनी भी की गई। वहाँ भारी मात्रा में पुलिस बल को तैनात किया गया है। आगजनी और तोड़फोड़ के दौरान हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। खरगोन के तालाब चौक और तवड़ी इलाके में ये घटना हुई, जहाँ से गुजर रहे रामनवमी के जुलूस पर भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। आगजनी के साथ-साथ कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

DIG तिलक सिंह और SP सिद्धार्थ चौधरी, कलेक्टर अनुग्रहा पी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी हिंसा की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। तनावपूर्ण हालात को बिगड़ने से बचाने के लिए प्रशासन ने वहाँ कर्फ्यू लगा दिया है। असल में मुस्लिम भीड़ को रामनवमी जुलूस में बज रहे डीजे से आपत्ति थी और इसीलिए उन्होंने पत्थरबाजी की। तालाब चौक और गौशाला मार्ग पर उपद्रव किया गया।

इतना ही नहीं, मुस्लिम भीड़ ने शीतला माता के मंदिर में घुस कर भी तोड़फोड़ मचाई। शहर के 4-5 क्षेत्रों में हिंसा की सूचना के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल को यहाँ लगाया गया है। तालाब चौक, गौशाला मार्ग, मोतीपुरा, स्टेडियम के पीछे और टॉवर क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया गया है। टीआई बनवारी मंडलोई भी इस घटना में घायल हुए हैं। शहर में भगदड़ की स्थिति बनी हुई है। पुलिस के जवानों की कमी के कारण पड़ोसी जिलों से पुलिस बल बुलाए गए हैं।

सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियोज भी सामने आए हैं, जिनमें घरों में आग जलते हुए देखा जा सकता है। आधा दर्जन पुलिसकर्मियों के अलावा कई आम लोग भी इस घटना में घायल हुए हैं। हर साल रामनवमी के मौके पर तालाब क्षेत्र से शोभा यात्रा निकाले जाने की परंपरा रही है। इस साल भी बड़ी तैयारी के साथ दोपहर 3 बजे ये शुरू हुआ। मुख्य झाँकी को दांगी मोहल्ले में ही खड़ा कर के रामनवमी की शोभा यात्रा को रोकना पड़ा। फायर फाइटर का कांच तोड़ दिया गया। बिजली ट्रांसफर्मरों को आग के हवाले किया गया।

‘अखिलेश को हमारे कपड़ों से बदबू आती है’ : आजम खान के समर्थकों ने खोला सपा अध्यक्ष के ख़िलाफ़ मोर्चा, नई पार्टी की भी अटकलें

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के समर्थकों ने मोर्चा खोला है। उनकी नाराजगी रविवार को पार्टी कार्यालय में एक बैठक के दौरान देखने को मिली जहाँ खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खान शामू भड़के नजर आए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी का पूरा साथ दिया लेकिन अब अखिलेश यादव मुस्लिमों का ही साथ नहीं दे रहे हैं। 

अली ने इस बैठक में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आजम खान दो साल से भी ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं। मगर अखिलेश यादव केवल एक ही बार उनसे मिलने गए। उन्होंने आजम खान को नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाने पर भी अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने शिकायत की, “अखिलेश यादव को हमारे कपड़ों से बू आती है। एक बार आजम खान रिहा हो जाएँ तो उनसे फैसला लेने को कहेंगे”

विधानसभा चुनावों में सपा द्वारा 100 सीट का आँकड़ा पार किए जाने पर फसाहत ने कहा, “चुनाव में पूरे प्रदेश में मुसलमानों ने सपा को एकतरफा वोट दिया, इससे ही सपा सवा सौ सीटों पर पहुँची। अब अखिलेश यादव मुसलमानों का साथ नहीं दे रहे हैं। उन्हें उनसे बदबू आती है।”

बता दें कि फसाहत अली का ये बयान आने के बाद पार्टी में फूट पड़ने जैसी बातें कही जा रही हैं। ऐसा दावा है कि जब से आजम जेल गए हैं तब से उनकी आवाज हमेशा फसाहत ने ही उठाई है। दैनिक जागरण की खबर में तो सूत्रों के हवाले से यहाँ तक कहा गया है कि आजम के समर्थक एक नई पार्टी खड़ी करने की बातें कर रहे हैं। उनके हिसाब से आजम को अधिकतर मुकदमों में बेल मिल गई है। ऐसे में वो जल्द ही बाहर आ जाएँगे। फिर उनसे निर्णय लेने को कहा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि फसाहत से पहले आजम खान के जेल जाने के बाद अखिलेश के रवैये पर इमरान प्रतापगढ़ी ने सवाल खड़ा किया था। हालाँकि तब अखिलेश आजम खान के घर चले गए थे। मगर, अब आजम खान के चाहने वालों का कहना है कि इन चुनावों में उनका ख्याल नहीं रखा गया। बदायूँ में आबिद रजा को लेकर आजम समर्थक जीत पक्की मानते थे लेकिन उनकी जगह मुंबई के बिल्डर को टिकट मिलना इस खेमे को खल गया।

‘हिन्दू-मुस्लिम घृणा मत फैलाओ’: रामनवमी की शुभकामना देने पर अनुज रावत और ऋषभ पंत बने निशाना, नाराज़ हुए कट्टरपंथी मुस्लिम

आज पूरे भारत में रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी रामनवमी त्योहार की धूम है। हिंदू धर्म में आस्‍था रखने वाले ट्विटर पर एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे हैं। लेकिन बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) और क्रिकेटर अनुज रावत (Anuj Rawat) रविवार (10 अप्रैल, 2022) को ट्विटर पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देने के बाद से ट्रोल्स के निशाने पर आ गए हैं।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि मुझे अक्षय के रामनवमी पर शुभकामनाएँ देने से कोई भी ऐतराज नहीं है, लेकिन शाहरुख खान अगर अल्लाह हु अकबर पर ट्वीट कर देते तो। इन सबके अलावा क्रिकेटर ऋषभ पंत को भी कट्टरवादी मुस्लिमों ने रामनवमी की शुभकामना देने पर निशाना बनाया।

इसके अलावा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाड़ी अनुज रावत को मोइन शेख नाम के शख्स ने लिखा, “भाई क्रिकेट पर ध्यान दे। हिंदू मुस्लिम हेट मत फैला।” ये लिखने के बाद शेख ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन उससे पहले ही वरुण कुमार राणा नाम के यूजर ने उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले लिया था। वरुण कुमार ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “यह 75 वर्षों से नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता का परिणाम है।”

बता दें कि अक्षय कुमार की फिल्म ‘रामसेतु’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। फिल्म में अक्षय पुरातत्वविद की भूमिका निभा रहे हैं। इसमें उनके साथ जैकलीन फर्नांडीज और नुसरत भरूचा मुख्य किरदार में नजर आएँगी। इस फिल्म को अभिषेक शर्मा ने लिखा और डायरेक्ट किया है।

‘कश्मीर समस्या के समाधान के बिना भारत के साथ शांति संभव नहीं’: PM की कुर्सी पर बैठने से पहले अपना रंग दिखाने लगे शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से इमरान खान (Imran khan) को बेदखल करने के बाद प्रधानमंत्री पद सबसे सशक्त उम्मीदवार शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने कुर्सी पर बैठने से पहले ही कश्मीर (Kashmir) का राग अलापना शुरू कर दिया है। रविवार को शहबाज ने कहा कि जब तक कश्मीर का मामला हल नहीं हो सकता, तब तक शांति नहीं आ सकती।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की राजनीति में घरेलू और विदेश का सबसे बड़ा मुद्दा भारत ही होता है और इसके केंद्र में कश्मीर होता है। इमरान खान सहित लगभग सभी प्रधानमंत्री कश्मीर को मुद्दा बताते रहे हैं, लेकिन उसके कब्जे वाले कश्मीर पर चुप्पी साध लेते हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर कश्मीर पर बात होगी तो सिर्फ पाक के कब्जे वाले कश्मीर पर होगी।

प्रधानमंत्री पद के नामांकन भरने के बाद शहबाज शरीफ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत के साथ वह शांति चाहते हैं, लेकिन कश्मीर समस्या के समाधान के बिना शांति नहीं आ सकती। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय सद्भाव बनाने की है। उन्होंने अपने बड़े भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर दर्ज केसों को लेकर कहा कि उन सभी केसों को कानूनी दायरों के तहत निपटाया जाएगा।

बता दें कि रविवार को विपक्षी दलों की ओर से शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। वहीं, इमरान खान की पार्टी की ओर पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पर्चा भरा है। शहबाज और कुरैशी के पर्चे को नेशनल एसेंबली द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

दरअसल, शहबाज खान के पर्चे भरने को लेकर PTI नेता और एडवोकेट बाबर अवान ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि शहबाज पर कई केस दर्ज हैं। ऐसे में संविधान की धारा 233 तीन स्थानों पर ऐसे व्यक्ति का नामांकन पत्र स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्ति देता है। उन्होंने एसेंबली के सचिव से शहबाज के नामांकन पत्र को खारिज करने की अपील की है। हालाँकि, एसेंबली के सचिव ने इसे स्वीकार कर लिया है।

इधर इमरान खान के एक ट्वीट कर कहा है कि 1947 में पाकिस्तान एक स्वतंत्र राज्य बना, लेकिन सत्ता परिवर्तन की एक विदेशी साजिश के खिलाफ आज से एक और स्वतंत्रता संग्राम फिर से शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता हमेशा से संप्रभुता और लोकतंत्र की रक्षा करती आई है और आगे भी करेगी।

गौरतलब है कि तीन साल सात महीने और 23 दिनों के बाद इमरान खान रविवार तड़के पाकिस्तान के नेशनल असेंबली सत्र में अविश्वास प्रस्ताव हार गए। नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए नेशनल असेंबली 11 अप्रैल को मतदान करेगी। वहीं, इमरान खान की पार्टी PTI के नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दी है।

उत्तराखंड के रुद्रनाथ मंदिर में तोड़फोड़, पुजारी का घर भी क्षतिग्रस्त किया: आसपास मिली बीयर की बोतलें, PM मोदी से गुहार

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पौराणिक रुद्रनाथ मंदिर में तोड़फोड़ की खबर है। बताया जा रहा है कि इस तोड़फोड़ में मंदिर प्रांगण के साथ आसपास के भवन भी क्षतिग्रस्त किए गए हैं। इस घटना के चलते पुरोहितों और हिन्दू समाज में काफी नाराजगी है। अभी तक इस घटना से जुड़े किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। घटना 9 अप्रैल, 2022 (शनिवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बात की जानकारी मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने दी है। उन्होंने बताया कि मंदिर गोपेश्वर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर है। सर्दियों में इस मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस दौरान मंदिर में आने-जाने वालों की संख्या न के बराबर होती है। जब कपाट खोलने की तैयारी करने कुछ लोग मंदिर में गए तो उन्हें इस तोड़-फोड़ की जानकारी हुई।”

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस बात की जानकारी मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने दी है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के रुद्रनाथ क्षेत्र में जाने की सूचना पर केदारनाथ वन प्रभाग ने अपना गश्ती दल भेजा था। जब वो वहाँ पहुँचा तो न सिर्फ मंदिर परिसर बल्कि पुजारी के साथ-साथ आसपास के अन्य रिहाइशी घरों के दरवाजों में हुई तोड़फोड़ की जानकारी हुई। इस घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है।

नुकसान की भरपाई संभव, पर आस्था की कैसे ?

बदलता गोपेश्वर नाम के फेसबुक पेज पर मंदिर के महंत हरीश भट्ट ने बताया, “हमलावरों ने गर्भगृह तक नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है। ये हमारी ही नहीं बल्कि पूरे हिन्दू समाज की भावनाओं का अपमान है। ये पहला नहीं बल्कि चौथा मामला है जब मंदिर के साथ इस प्रकार की हरकत हुई है। नुकसान की भरपाई हो सकती है लेकिन आस्थाओं के अपमान की नहीं। हिमालय में जो कुछ भी हो रहा है वो धर्म ही नहीं बल्कि देश के लिए गलत संकेत हैं। जो हरकत हुई है वो किसी जानवर नहीं बल्कि किसी इंसान की हरकत लग रही जिसकी जाँच होनी चाहिए।”

पहले हुई घटनाओं की जाँच ठंडे बस्ते में

महंत हरीश भट्ट ने आगे बताया, “यह प्रशासनिक निकम्मापन है। ऐसी हरकत करने वाले की सोच लूट आदि नहीं बल्कि हमारी भावनाओं के अपमान की मंशा है। हमने DM और SP के साथ वन विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायत की है। हम चाहते हैं कि हमारी बात प्रधानमंत्री मोदी तक पहुँचे। इस से पहले की घटनाओं में भी सिर्फ जाँचे की गई हैं। मैंने कई बार कैमरे लगाने की माँग की फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ।”

आज मंदिर के पास बीयर और शैम्पेन की बोलतें मिलती हैं

महंत हरीश भट्ट के मुताबिक, “पहले रुद्रनाथ में हर चीज के नियम हुआ करते थे। लेकिन अब वो जगह पिकनिक स्पॉट बना दी गई है। कपाट बंद थे फिर भी वहाँ बीयर और शैम्पेन की बोतलें मिल रही हैं। अब वहाँ गोवा कल्चर आ गया है। बच्चे तक अब वहाँ शराब पी कर जा रहे हैं। सभी हिन्दू धर्माचार्यों को इस बारे में बोलना चाहिए।”

मंदिर पर महापंचायत का एलान

इस घटना से आक्रोशित समाज ने मंदिर पर महपंचायत का एलान किया है। यह महापंचायत 11 अप्रैल (सोमवार) को सुबह 10 बजे रखी गई है। एक पंचायत का एलान करने वाले पत्र में मंदिर के साथ हुई घटना को धार्मिक आस्थाओं का अपमान बताया गया है। इस घटना को प्रशासन की लापरवाही बताते हुए आने वाले समय में कोई ठोस नीति बनाने की भी घोषणा इस पत्र में है।

‘जिन अधिकारियों ने गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी करने वालों को बचाया, उन्हें पंजाब सरकार ने दिए बड़े पद’: AAP विधायक का खुलासा

पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह को लेकर खबर है कि कल उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था जिसमें उन्होंने अपने पार्टी के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। IPS होने के बावजूद राजनीति में आकर अपनी अच्छी जगह बनाने वाले कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपने पोस्ट में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को दी गई नई जिम्मेदारी पर आपत्ति जताई थी। इन अधिकारियों के नाम प्रबोध कुमार और अरुण पाल सिंह है। बताया जा रहा है कि अभी हाल में प्रबोध कुमार को इंटेलिजेंस चीफ और अरुण पाल को अमृतसर का पुलिस आयुक्त नियुक्त गया था जिसके बाद कुंवर प्रताप का पोस्ट आया, लेकिन कुछ घंटों बाद इसे हटा भी दिया गया।

अब सोशल मीडिया पर कुंवर प्रताप सिंह के नाम वाले अकॉउंट से साझा पोस्ट शेयर हो रहा है। मीडिया खबरों के अनुसार, इसी पोस्ट को कुंवर प्रताप सिंह ने शेयर किया था। इस पोस्ट में कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपने इस्तीफे वाले दिन से लेकर बात शुरू की और दो राजनीतिक परिवारों का जिक्र किया जिन्हें उनके इस्तीफे से दिक्कत थी। इसके बाद उन्होंने एक पुराने बेअदबी के मामले को लेकर दो अधिकारियों की नियुक्ति पर आपत्ति जाहिर की।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित पोस्ट के अंश

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि आम आदमी पार्टी से पंजाब की जनता को बहुत उम्मीदें थी कि वो बरगाड़ी बहिबल कोतकापुर मामले में जनता को न्याय दिलाएगी। इसलिए उन्होंने पार्टी स्तर पर दोबारा से दो पुलिस अधिकारियों की नियुक्तियों पर विचार करने को कहा है जो बेअदबी के मामले के मामले में एसआईटी टीम का हिस्सा थे, पर राजनीतिक परिवारों को समर्थन देते थे।

अपने पोस्ट में उन्होंने बताया कि इन्हीं दो अधिकारियों के चलते बरगाड़ी-बहिबल-कोतकापुर मामले में न्याय नहीं मिल पाया था। साझा पोस्ट बताता है कि बेअदबी मामले की जाँच में जो एसआईटी गठित हुई थी उसमें वो तीसरे नंबर पर थे। जिन दो अधिकारियों ने राजनीतिक परिवारों का बचाव किया उनमें से पहले वाले को इंटेलिजेंस चीफ बनाया गया है और दूसरे को अमृतसर जैसे पावन शहर का पुलिस कमिशनर नियुक्त किया गया।

इस पोस्ट में कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपील की हुई थी कि पार्टी इन दोनों अधिकारियों की नियुक्ति पर विचार करे। पोस्ट के मुताबिक AAP विधायक ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी पत्र लिखा था ताकि बरगाड़ी मामले में न्याय हो सके। हालाँकि अब, आप विधायक के सोशल मीडिया से ये पोस्ट डिलीट हो चुका है।

बरगाड़ी बहिबल कोतकापुर बेअदबी मामला और गोलीकांड

बता दें कि आम आदमी पार्टी विधायक ने जिस बेअदबी केस की चर्चा अपने पोस्ट में की वो साल 2015 का है। उस समय 1 जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारे साहिब से पावन ग्रंथ की चोरी हुई थी। 25 सितंबर 2015 को गुरुद्वारे के बाहर आपत्तिजनक व पुलिस प्रशासन को चुनौती देने वाले पोस्टर लगे थे। 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारे के बाहर पावन ग्रंथ की बेअदबी की गई थी। 14 अक्टूबर को बहिबल कलां में पुलिस की फायरिंग में दो लोगों की मौत और 100 के घायल होने की खबर आई थी। इसके बाद 15 अक्टूबर को इस मामले में पहली एसआईटी गठित हुई थी जिसने दो भाइयों को पकड़ा लेकिन उन लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया।

घटना के करीब एक माह बाद इस मामले की जाँच सीबीआई ने ली और 30 जून 2016 को जस्टिस जोरा सिंह ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। फिर कैप्टेन अमरिंदर सिंह सरकार में इस मामले की जाँच फिर शुरू हुई और जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन हुआ। कैप्टेन सरकार डेढ़ साल बीते ही कोटकपूरा मुख्य चौक पर फायरिंग करने के मामले में अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर हुई। 16 अगस्त को जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट सीएम को दी और 10 सितंबर को दोबारा एडीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन हुआ। ये एसआईटी बेअदबी का विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग के दोनों मामलों की जाँच में थी। लेकिन पिछले साल अप्रैल में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एसआईटी द्वारा की गई जाँच को रद्द करने का आदेश दे दिया था।