Home Blog Page 2834

‘तेरे भाई ने सारा पैसा चुरा लिया, सैलरी देने के लिए नहीं बचा’: अशनीर ग्रोवर की बहन आशिमा से भिड़े ‘भारत पे’ के सीईओ सुहैल समीर

फिनटेक यूनिकॉर्न कंपनी (BharatPe) के को-फाउंडर औऱ एमडी रहे अशनीर ग्रोवर की कंपनी से छुट्टी होने के बाद भी कंपनी का अंदरूनी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला भारत पे के सीईओ सुहैल समीर (Suhail Sameer) से जुड़ा है, जहाँ उन्होंने अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grower) की बहन से कहा कि तेरे भाई ने पैसा चुरा लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना लिंक्डइन पर सुहैल समीर और अशनीर ग्रोवर के बीच खूब तू-तू, मैं-मैं हुई। दरअसल, इस मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक पोस्ट से होती है। खुद को भारत पे की आईटी का एसोसिएट बताने वाले करन सरकी नाम के शख्स ने पोस्ट किया।

सरकी ने सुहैल समीर, शाश्वत नकरानी, भारत पे, अशनीर ग्रोवर और युधिष्ठिर सिंह को टैग करते हुए लिखा, “प्रिय सुहैल और शाश्वत सर, अभी तक हमें मार्च के महीने की सैलरी तक नहीं मिली है, जबकि हमने कई बार ई-मेल और ऑफिस जाकर इस बारे में बात की। भारत पे के कई सारे स्टाफ, एडमिन स्टाफ को आपने बिना कोई कारण बताए टर्मिनेट कर दिया है और उन्हें उनकी सैलरी तक नहीं दी है। कंपनी की शुरुआत से हम भारत पे के साथ है, लेकिन आपकी इंटर्नल पॉलिटिक्स के चलते हम कहीं के नहीं रहे। हम गरीब लोग हैं, हमें अपना घर चलाना है। हमारे छोटे-छोटे बच्चे, जिन्हें हमें पालना है। कंपनी के लिए हमने अपना खुद का पैसा खर्च किया। दिसंबर से रिइम्बर्समेंट बिल का पेमेंट नहीं हुआ है। हम जैसे कर्मचारी सैलरी और नौकरी के लिए लड़ रहे हैं औऱ ऑफिस का पूरा स्टाफ गोवा में मजे ले रहा है। आप कैसे लीडर हैं।”

साभार: लिंक्डइन

सरकी के पोस्ट पर अशनीर ग्रोवर ने कमेंट करते हुए लिखा, “दोस्तों कृपया इसे देखें। किसी भी चीज़ से पहले उनके वेतन का भुगतान करना होगा।” इस बीच मामले में कूदते हुए अशनीर ग्रोवर की बहन आशिमा ग्रोवर ने भारत पे प्रबंधन को ‘बेशर्म फोक्स’ करार दिया।

इसके जबाव में सुहैल समीर ने कूदते हुए आशिमा से कहा, “आशिमा बहन तेरे भाई ने तो सारा पैसा चुरा लिया। सैलरी देने के लिए बहुत कम पैसा बचा है।”

साभार: लिंक्डइन

इस पर पलटवार करते हुए आशिमा ने तंज कसा कि आपके पास बोनस, इंक्रीमेंट, पार्टी और पेड मीडिया के लिए तो पैसा बचा ही होगा। आप समझ सकते हैं कि सुहैल वहाँ कैसा वर्क कल्चर बना रहे हैं।

कंपनी से निकाले गए थे अशनीर

गौरतलब है कि भारत पे ने पिछले महीने आर्थिक गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए ग्रोवर को कंपनी में सभी पदों से हटा दिया था। ग्रोवर कई मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं।

‘बुर्के में होने से मर्दों का मन नहीं मचलता, नहीं तो लोग बुरी नजर से देखेंगे’: सपा MP ने शफीकुर्रहमान बर्क ने किया अलकायदा की तरह हिजाब का समर्थन

कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद के लिए बीजेपी और सरकार को जिम्मेदार बताते हुए उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने जहर उगला है। बर्क ने हिजाब को इस्लाम का अभिन्न अंग करार दिया और तर्क दिया कि जब लड़कियाँ हिजाब में रहती हैं तो उनका जिस्म ढंका रहता है और इससे मर्दों का मन नहीं मचलता। हिजाब पहनने से रेप की घटनाओं में कमी आएगी।

रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में सपा के मुस्लिम सांसद ने हिजाब को लेकर अलकायदा प्रमुख के बयान पर कहा, “ये तो अलकायदा वाले जानें, मुझे इससे मतलब नहीं है। हिजाब इस्लाम में जरूरी है और ये एक मजहबी मामला है। कोई सरकारी मसला नहीं है। इस पर सरकार या फिर कर्नाटक के लोगों ने जो भी किया है वो गलत है। इस्लाम कहता है कि जब एक लड़की जवान हो जाए तो वो पर्दे में रहनी चाहिए। अगर वो स्कूल या कॉलेज में हिजाब पहनकर जाती है तो उसमें क्या बुराई है। इस्लाम में हिजाब जरूरी है।”

हिजाब विवाद सरकार की साजिश है। इस तरह के मजहबी मुद्दों पर दखल देना सरकार का काम नहीं है। सपा सांसद ने आगे कहा, “मैं हिजाब के पक्ष में हूँ। इस्लाम कहता है कि लड़की को हिजाब में रहना चाहिए। अगर लड़की पर्दे में नहीं रहेगी तो उससे खतरा पैदा होता है। पर्दे में होगी तो उसके जिस्म का हिस्सा ढंका रहेगा। अन्यथा खुले हुए में लोग उसे बुरी नजर से देखेंगे। इससे हालात बिगड़ेंगे।”

बर्क ने यूरोपीय सभ्यता औऱ भारतीय सभ्यता की तुलना करते हुए कहा कि आज भी यहाँ महिलाएँ पर्दे में रहती हैं, जबकि यूरोप में तो सबकुछ खुला रहता है। सपा सांसद का दावा है कि अगर महिलाएँ पर्दे में रहेंगी तो इससे उनके खिलाफ होने वाले अत्याचार में कमी आएगी। हिजाब में रहने से बलात्कार, छेड़छाड़ जैसी घटनाओं में कमी आएगी।

बाबर अली की हत्या का किया था समर्थन

इससे पहले शफीकुर्रहमान बर्क ने कुशीनर में बाबर अली की हत्या किए जाने का समर्थन किया था। बर्क ने कुतर्क दिया था कि भाजपा का समर्थन करना बाबर की गलती थी, उस पर बीजेपी की जीत का जश्न मनाना बड़ी गलती थी।

कुतुब मीनार से ‘उल्टा गणेश’ और ‘पिंजड़े में गणेश’ को राष्ट्रीय संग्रहालय में मिले जगह, NMA ने लिखा पत्र, कहा- परिसर में मस्जिद के बाहर पड़ी हैं मूर्तियाँ

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) ने दिल्ली में बने कुतुब मीनार परिसर से भगवान गणेश की दो मूर्तियाँ हटाने के लिए भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा है। प्राधिकरण की ओर से कहा गया है कि ये मूर्तियाँ जिस जगह पर रखी गई हैं, वह ‘अपमानजनक’ है। इनको राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाना चाहिए। 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी खबर के मुताबिक एनएमए ने पिछले महीने पुरातत्व विभाग को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि गणेश की दो मूर्तियों- ‘उल्टा गणेश’ और ‘पिंजड़े में गणेश’ को राष्ट्रीय संग्रहालय में ‘सम्मानजनक’ स्थान दिया जाना चाहिए, जहाँ ऐसी प्राचीन वस्तुएँ रखी जाती हैं।

बता दें कि एनएमए और एएसआई दोनों केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करते हैं। एनएमए की स्थापना साल 2011 में स्मारकों और स्थलों और इसके आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए की गई थी। इस समय NMA के अध्यक्ष बीजेपी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है कि एएसआई को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार साइट का दौरा किया और मुझे लगता है कि जहाँ मूर्तियों की स्थापना की गई है, वह जगह अपमानजनक है। मस्जिद में आने वालों लोगों के पैरों के पास ही यह मूर्तियाँ हैं।”

तरुण विजय ने आगे कहा, “आजादी के बाद हमने इंडिया गेट से ब्रिटिश राजाओं और रानियों की मूर्तियों को हटा दिया था और उपनिवेशवाद के निशान मिटाने के लिए सड़कों के नाम बदल दिए थे। अब हमें उस सांस्कृतिक नरसंहार को पलटने के लिए काम करना चाहिए, जो मुगल शासकों ने हिंदुओं पर किया था।”

कुतुब मीनार परिसर में हैं भगवान गणेश की दो मूर्तियाँ 

इन दोनों मूर्तियों को ‘उल्टा गणेश’ और ‘पिंजरे में गणेश’ कहा जाता है। ये 12वीं शताब्दी के स्मारक परिसर में स्थित हैं, जिसे 1993 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल माना गया था। ‘उल्टा गणेश’ (सिर नीचे पैर ऊपर) परिसर में कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद की दक्षिण-मुखी दीवार का हिस्सा है। दूसरी मूर्ति लोहे के पिंजरे में बंद है जो जमीन से काफी करीब है और उसी मस्जिद का हिस्सा है।

तरुण विजय के मुताबिक, ये मूर्तियाँ राजा अनंगपाल तोमर द्वारा बनवाए गए जैन तीर्थंकरों, दशावतार, नवग्रहों के अलावा, 27 जैन और हिंदू मंदिरों को तोड़ने के बाद लाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इन मूर्तियों को रखा गया है वह भारत के लिए अवमानना ​​​​का प्रतीक हैं और इसमें सुधार की ज़रूरत है।

उन्होंने एक ट्वीट में सवाल किया कि उन 27 मंदिरों का क्या हुआ और हिंदुओं को अपमानित करने के लिए गणेश मूर्ति को उल्टा क्यों रखा गया, इस बारे में विवरण के साथ गणेश की मूर्तियों को परिसर में उचित सम्मान के साथ रखा जाना चाहिए। विजय ने आगे कहा कि तीर्थंकर, यमुना, दशावतार, कृष्ण का जन्म और नवग्रह की मूर्तियाँ कभी आगंतुकों को नहीं दिखाई गईं।

पंजाब के बहाने केंद्र और राज्यों के बीच खाई पैदा कर रहे केजरीवाल: चुनावी वादों को पूरा करने में नाकामी देख ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ने की तैयारी

‘हाँ मैं अराजक हूँ’, साल 2014 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM arvind Kejriwal) ने कहा था। यह उनका सिर्फ कथन ही नहीं, समय-समय पर उनके कार्यों से भी इसकी झलक मिलती है। चाहे दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को ठुल्ला कहना हो या गणतंत्र दिवस की परेड से कुछ दिन पहले अपने विधायकों सहित दिल्ली की सड़कों पर धरना देना और वहाँ सरकारी फाइलों को ले जाकर काम करने का दिखावा करना, ये कुछ ऐसे काम हैं, जिनसे उन्होंने उन्होंने न सिर्फ अपने कथन को सत्य साबित करने की कोशिश की, बल्कि मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को कम किया।

पंजाब चुनाव जीतने के बाद तो उन्होंने भारतीय राजनीतिक परंपरा को चुनौती दे दी। मुख्यमंत्री कार्यालय से देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तस्वीर हटा दी। यहाँ तक कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सामने आई मुख्यमंत्री कार्यालय की तस्वीर में महात्मा गाँधी की तस्वीर भी गायब रही। हालाँकि, उन्होंने भगत सिंह और बाबा भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगाई, लेकिन यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में स्थापित मानकों के ठीक उल्टा था।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि जहाँ संंवैधानिक रास्ता खुले हों, वहाँ असंवैधानिक रास्ता अपनाना अराजकता है। इस रास्ते को जितनी जल्दी छोड़ दी जाए, उतना बेहतर है। जब केजरीवाल ने कहा था कि हाँ ‘मैं देश का सबसे बड़ा अराजकतावादी हूँ’ तो लोगों ने उनकी राजनीतिक अपरिक्वता समझकर नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उनके ऊपर लगे उस लेवल को हटने में बाधा का काम किया है।

खालिस्तान का परोक्ष समर्थन, दिल्ली के शाहीन बाग के अराजक एवं देशद्रोही तत्वों को समर्थन से लेकर कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन का मजाक, ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिसने मुख्यमंत्री केजरीवाल की मंशा और उनकी नीति पर सवाल खड़े किए। कोरोना काल में जब देश और दुनिया में अपने-अपने लोगों को सहारा देने की कोशिश की जा रही थी, तब उनके नेता श्रमिकों को उकसा कर सड़कों पर ला रहे थे और उन्हें दिल्ली से बाहर का रास्ता दिखाकर मौत के मुँह में झोंक रहे थे। उस दौरान प्रवासी मजदूरों भूखे और लाचार थे, लेकिन सरकार अपने विज्ञापन पर करोड़ों रुपए फूँक रही थी।

सीएम केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली के हर नागरिक के जीवन की रक्षा करना मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कर्तव्य है। दिल्ली में उन्होंने मुफ्त बिजली और पानी की जो सब्जबाग दिखाकर मुख्यमंत्री बने, उसी की घोषणा वह अन्य राज्यों में करके जनता को ठगने की कोशिश जारी है। चाहे पंजाब हो, गुजरात हो या उत्तराखंड उन्होंने हर जगह वहाँ के हालात और उसकी वित्तीय स्थिति को जाने बिना मुफ्त का पॉलीपप थमाने का काम किया। यह आर्थिक अराजकता का एक बड़ा उदाहरण है।

पंजाब में ‘आप’ के लोक-लुभावने वादे

पंजाब चुनावों से पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने वहाँ के लोगों को हर महीने 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की थी। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि जब पंजाब में उनकी पार्टी की सरकार बनेगी तो ‘सबसे पहली कलम से जो काम होगा, वह बिजली फ्री देने का काम होगा’। उन्होंने राज्य की हर महिला को 1,000 रुपए प्रतिमाह देने की बात कही थी। अब जब सरकार बन गई तो वह अपने केंद्र से पैसे की माँग करके इसका सारा दोष केंद्र पर डालने की कोशिश कर रहे हैं।

चुनावों से पहले आम आदमी को पता था कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। पंजाब पर 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है, फिर भी उन्होंने लोगों से लोक-लुभावने वादे किए। चुनाव पूर्व अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अपने वादों को पूरा करने के लिए उन्हें पता है कि पैसा कहाँ से आएगा और इसका प्रशासनिक ढाँचा कैसा होगा, इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा था कि पंजाब का 1.70 लाख करोड़ रुपए का बजट है और इसमें से भ्रष्टाचार खत्म कर वह 34 हजार करोड़ रुपए बचाएँगे। रेत की चोरी बंद करके 20 हजार करोड़ रुपए आ जाएँगे। इससे वे राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएँगे।

पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के कुछ दिन बाद ही भगवंत मान(Bhagwant Mann) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पास पहुँचे और उनसे 50,000 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष के दो किस्तों की माँग की। उनका कहना था कि राज्य की वित्तीय स्थिति को सँभालने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से यह पैकेज की माँग की। इस माँग को अरविंद केजरीवाल पंजाब का पैसा बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

सीएम केजरीवाल का दावा

आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल से 7 अप्रैल को शेयर किए एक वीडियो में मुख्यमंत्री केजरीवाल एक निजी चैनल के पत्रकार से कह रहे हैं कि केंद्र सरकार के पास जो पैसा है, वह पब्लिक का पैसा है और भगवंत मान उसी पैसे को लेने के लिए गए थे। केजरीवाल का कहना है कि पंजाब के पब्लिक का पैसा केंद्र के पास पड़ा हुआ है।

राजनीति में आने से पहले अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी रहे हैं। उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि केंद्र के आय के स्रोत क्या हैं और उसके खर्चे क्या हैं। राज्यों को किस आधार पर राशि का आवंटन होता है। ऐसा नहीं है कि उन्हें वित्त आयोग जैसी संस्थाओं और उसके कामों के बारे में नहीं पता होगा। इसके बावजूद, वह संवैधानिक व्यवस्था को दरकिनार कर माँगी गई राशि को पंजाब का पैसा बता रहे हैं।

कहाँ से आता है केंद्र के पास पैसा

केंद्र के आय में आयकर (Income Tax), कॉरपोरेट टैक्स, उधारी और GST की प्रमुख हिस्सेदारी होती है। केंद्र अपनी आय का 21 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स, 20 प्रतिशत उधारी, 16 प्रतिशत आयकर और 19 प्रतिशत जीएसटी से प्राप्त करता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार को गैर-कर आय से 9 प्रतिशत, कस्टम से 4 प्रतिशत, एक्साइज ड्यूटी से 8 प्रतिशत और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों से 3 प्रतिशत की आय होती है।

जहाँ तक खर्च की बात है तो केंद्र सरकार पर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, रक्षा, आधारभूत संरचना पर खर्च करना पड़ता है। केंद्र अपनी आय का सबसे अधिक हिस्सा 23 प्रतिशत राज्यों को देता है। 18 प्रतिशत कर्ज का ब्याज चुकाने और 13 प्रतिशत केंद्रीय योजनाओं तथा 9 प्रतिशत उज्ज्वला, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर खर्च करता है। वहीं, सब्सिडी पर 8 प्रतिशत, रक्षा पर 9 प्रतिशत और पेंशन पर 5 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार खर्च करती है।

राज्यों में पैसे का बँटवारा

जीएसटी प्रणाली के तहत राज्य SGST लेते हैं, जबकि केंद्र CGST लेता है। दोनों ही कर योग्य वस्तु पर लागू जीएसटी का 50% है। इसका मतलब है कि राज्य पहले से ही ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं पर 50% टैक्स खुद ही वसूल कर लेते हैं। इसके अलावा, आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स जैसे अन्य करों के साथ केंद्रीय जीएसटी का एक हिस्सा राज्यों को भी दिया जाता है। ऐसे में राज्यों को राजस्व में अपना हिस्सा माँगने के लिए केंद्र के पास जाने की जरूरत नहीं है। वह पहले से ही वित्त आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्र द्वारा आवंटित किया जाता है। केंद्रीय बजट 2022-23 में पंजाब को केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए विभिन्न करों से ₹14,756.86 करोड़ आवंटित किए जा चुके हैं।

जब केंद्र सरकार अपनी आय का 23 प्रतिशत हिस्सा राज्यों के साथ साझा कर देती है, ऐसे में अपनी लोक-लुभावनों वादों को पूरा करने के लिए केंद्र को दोषी ठहराना सीएम अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का राजनैतिक स्टंट से अधिक कुछ नहीं है। अरविंद केजरीवाल ने इस कदम से यह भी साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार को कम करके अपनी लोक-लुभावन योजनाओं के खर्चों का पोषण उनका महज खोखला दावा था। पहले से ही खस्ताहाल राज्य में अगर मुफ्त वाली घोषणाएँ लागू कर दी जाती हैं तो यह राज्य के लिए आत्मघाती साबित होगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के हिस्से की पूरी राशि माँग करके संघीय व्यवस्था को चुनौती देने का काम कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हाल ही में भारत के विचार को चुनौती देते हुए कहा था कि भारत कोई राष्ट्र नहीं, बल्कि ‘राज्यों का संघ’ मात्र है। इस तरह की मानसिकता राज्य को स्वतंत्र इकाई के रूप में पेश कर देश को विभाजित करने का खेल खेलने जैसा है। पंजाब वैसे भी अलगाववाद जैसे खतरों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच की दूरी को बढ़ाने का काम करेगा।

चीन में कोरोना का कहर, शंघाई के 2 करोड़ से अधिक लोग घरों में कैद, ड्रोन और रोबोटिक कुते से लोगों पर रखी जा रही नजर

कोरोना के मामले में दुनियाभर में बदनाम रहा चीन इसकी मार से त्रस्त है। हालात ये हैं कि शंघाई शहर में कोरोना के कारण अनिश्चितकालीन लॉकडाउन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के सबसे बड़े शहर में केवल गुरुवार को 20,000 नए संक्रमित पाए गए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोगों के पास खाने की कमी होने लगी है।

शंघाई में बुधवार (6 अप्रैल 2022) को प्रशासन की तरफ से अनिवार्य टेस्टिंग शुरू की गई। लॉकडाउन के 20 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन इनमें ढील दिए जाने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। लोगों की आवाज को कुचलने के लिए कुख्यात चीन लोगों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल टॉय का इस्तेमाल कर रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसी कई सारी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इनमें देखा जा सकता है कि घोषणाएँ करने के लिए चीन ने रोबोटिक कुत्तों को सड़कों पर उतार दिया है। इसके जरिए लोगों को घरों में रहने के लिए कहा जा रहा है। इसके अलावा ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।

द इकोनॉमिस्ट के लिए काम करने वाली सीनियर चीनी संवाददाता एलिस सु ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें ड्रोन को घोषणाएँ करते देखा जा सकता है। ड्रोन से लोगों को अपने घर की खिड़की दरवाजे बंद रखने को कहा जा रहा है। सु ने लिखा, “शंघाई के लोग अपनी बालकनियों में गाने गाकर सप्लाई की कमी का विरोध कर रहे हैं। एक ड्रोन दिखता है, जो कहता है कृपया w covid प्रतिबंधों का पालन करें। स्वतंत्रता के लिए अपनी आत्मा की इच्छा को नियंत्रित करें। खिड़की मत खोलो या गाओ मत।”

सु ने चाइनीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो से जुड़े एक अकाउंट के सोर्स को भी जोड़ा। यूजर ने वीडियो के टेक्स्ट के साथ पोस्ट किया, जिसका अनुवाद है, “बालकनी पर ग्रुप में गाओ मत। सोंगजियांग जिउटिंग होमलैंड के निवासियों ने कई बार गाया। सीधे ड्रोन आया और कहा कि कृपया आत्मा की स्वतंत्रता की इच्छा को नियंत्रित करें।” (Google से इसका अनुवाद किया गया)

वीबो का स्क्रीनशॉट

इसी तरह का एक और वीडियो द वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क के सह-संस्थापक एरिक फ्रिगी-डिंग ने भी शेयर किया। इसमें देखा जा सकता है कि एक रोबोटिक कुत्ता, जिसकी पीठ पर मेगाफोन लगा हुआ है। ये रोबोटिक कुत्ता शंघाई की सड़कों पर घूम रहा है। एरिक के मुताबिक, मेगाफोन के जरिए स्वास्थ्य संबंधी घोषणाएँ की जा रही हैं।

रोबोटिक कुत्ते का एक और वीडियो फ्रीलांस जर्नलिस्ट जेम्स जैक्सन ने शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा, “रोबोटिक कुत्ता घोषणा करता है कि किसी को भी घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। ड्रोन इधर-उधर उड़ते रहते हैं और जैसे ही वो आपको देखता है तो वो आपके पास आता है और तुरंत अंदर जाने के लिए कहता है।”

शंघाई की आधिकारिक जनसंख्या 26 मिलियन (करीब 2 करोड़ 60 लाख) है। कोरोना के कारण ये शहर पूरी तरह से थम गया है। शहर की बड़ी आबादी खाने के लिए जूझ रही है। एरिक ने 30 मार्च को एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें लोग किराने के सामान के लिए लड़ते देखे। इस पर चीन का कहना है कि उसने शुरू में कोरोना को कंट्रोल कर लिया था, लेकिन इसके नए संस्करण के कारण वो जूझ रहा है।

एक अप्रैल के एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि डिलीवरी ट्रकों का संचालन करने वाले ट्रक ड्राइवरों को कथित तौर पर पुलिस के टेप से उसे सील कर दिया। एड्रिक ने लिखा, “खाने, सोने या यहाँ तक ​​कि बाथरूम जाने तक के लिए ट्रक से बाहर नहीं निकलना।” ऐसा डिलीवरी को समय पर सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

ई जस्टिन नाम के ट्विटर यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एक छोटे से कुत्ते का मालिक उसे रस्सी के सहारे खिड़की से रस्सी के सहारे बिल्डिंस से नीचे उतारता है औऱ फिर लंबे रस्सी के पट्टे से ही उसे वापस खींचा।

शंघाई लॉकडाउन के प्रभाव

चीन का शंघाई शहर एक आर्थिक केंद्र है। यहाँ टेस्ला समेत कई सारी वैश्विक कंपनियाँ हैं, जो चुनौतियों का सामना कर रही हैं। शंघाई में टेस्ला की गिगाफैक्ट्री प्लांट है। ये सबसे बड़ी प्रोडक्शन वाली संयत्र है, जो कि एक सप्ताह से बंद है।

पुतिन की 2 बेटियाँ, एक रॉक एन रोल डांसर-दूसरी जेनेटिक्स रिसर्चर: अमेरिका ने दोनों पर लगाया बैन

रूस और यूक्रेन के बीच अभी भी जंग जारी है। युद्ध के 43वें दिन अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोनों बेटियों पर बैन लगा दिया है। दुनियाभर में इस प्रतिबंध को लेकर चर्चा जोरो पर है। कभी भी सार्वजनिक रूप से सबके सामने नहीं आने वाली पुतिन की बेटियों की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, पुतिन ने अपनी संपत्तियों को परिवार के सदस्यों के नाम पर छिपाकर रखा है। उनकी बेटियों पर बैन से पुतिन की निजी संपत्ति पर असर पड़ेगा।

इस कदम के तहत रूस के शीर्ष सार्वजनिक और नि​जी बैंकों स्बरबैंक (Sberbank) और अल्फा बैंक (Alfa-Bank) को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से दूर करने के साथ ही अमेरिकी नागरिकों को इन संस्थानों के साथ व्यापार करने से रोका गया है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी का यह भी कहना है कि पुतिन के पास काफी संपत्ति है, जिसे उन्होंने अपने परिवार वालों के पास छिपाया है। यही कारण है कि हम उनके परिवार को टारगेट कर रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि पुतिन की बेटियाँ अपने पिता का धन छिपाने में उनकी मदद कर रही हैं।

पुतिन की छोटी बेटी के पास 15,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन की दो बेटियाँ हैं, जो रूस के राष्ट्रपति भवन से जुड़कर काम कर रही हैं। इनके नाम मारिया और कतेरिना हैं। छोटी बेटी 35 वर्षीय कतेरीना तिखोनोवा का जन्म 1986 में ड्रेसडेन में हुआ था, जब पुतिन केजीबी स्पाई के रूप में काम कर रहे थे। दोनों ही पब्लिक लाइफ में कभी नजर नहीं आती हैं। तिखोनोवा (Katerina Tikhonova), जो अपनी नानी का सरनेम इस्तेमाल करती है, उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी और मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी से फिजिक्स और मैथ में मास्टर डिग्री हासिल की है। पढ़ाई के साथ-साथ, तिखोनोवा को जापानी संस्कृति और एक्रोबेटिक रॉक’एन’रोल डांसिंग (Acrobatic rock’n’roll dancing) का शौक है, जो बूगी-वूगी का एक एथलेटिक रूप है। 2013 में वह और उनके डांस पार्टनर स्विट्जरलैंड विश्व चैंपियनशिप में 5वें स्थान पर रहे।

मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी, जहाँ वह काम करती हैं, उसकी वेबसाइट पर उनकी और उनके डांस पार्टनर की स्विट्जरलैंड विश्व चैंपियनशिप में डांस करते हुए कुछ तस्वीरें भी हैं, जिससे पहली बार 2015 में यह पता चला कि वह तिखोनोवा पुतिन की बेटी हैं। तिखोनोवा ने पुतिन के करीबी विश्वासपात्र और रशियन बैंक के सह-मालिक निकोलाई शामलोवी के छोटे बेटे क्रिल शामलोवी से शादी की थी, जिसे अमेरिकी सरकार ने क्रेमलिन का शीर्ष अधिकारियों का निजी बैंक बताया है।

क्रिल को 2002 में विदेशी आर्थिक गतिविधियों का मुख्य कानूनी सलाहकार नियुक्त किया गया था। उस वक्त वह सिर्फ 20 वर्ष के थे। कतेरिना शुरुआती दौर में पुतिन के चुनावी भाषण भी लिखती थीं। 2018 के चुनाव में कतेरिना ने पुतिन के इलेक्शन कैंपेन की जिम्मेदारी भी संभाली थी। पुतिन ने अपनी छोटी बेटी के बारे में एक प्रोग्राम में बताया था कि उन्होंने साउथ एशिया पर रिसर्च की है। व्हाइट हाउस के मुताबिक कतेरीना के पास भारतीय मुद्रा में करीब 15,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है और उनके पति शामलोवी रशियन बैंक में शेयर होल्डर भी हैं।

मारिया अपने काम की रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति पुतिन को देती हैं

वहीं, व्लादिमीर पुतिन की बड़ी बेटी डॉ. मारिया वोरन्तसोवा (Putin’s elder daughter, Maria Vorontsova) वर्तमान में क्रेमलिन यानी रूसी राष्ट्रपति भवन में काम करती हैं। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर वे रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय में नेशनल मेडिकल रिसर्च सेंटर फॉर एंडोक्रोनोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रमुख रिसर्चर हैं। 36 साल की मारिया का पिछले महीने ही तलाक हुआ है। वे रूसी कोरोना वैक्सीन लगवाने को लेकर भी सुर्खियों में रह चुकी हैं। मारिया ने मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की है। वे रूस के जेनेटिक रिसर्च प्रोग्राम का नेतृत्व भी करती हैं, जिस पर रूसी सरकार अरबों डॉलर का खर्च करती है। मारिया इस काम की रिपोर्ट सीधे राष्ट्रपति पुतिन को देती हैं।

गौरतलब है कि व्लादिमीर पुतिन ने 1983 में ल्यूडमिला से शादी की थी। मारिया और कतेरीना दोनों पुतिन और ल्यूडमिला की बेटियाँ हैं। पुतिन और ल्यूडमिला के बीच 2013 में तलाक हो गया था, जिसके बाद पुतिन ने अभी तक कोई शादी नहीं की।

जिन पर लगा था गायों को गोली मारने का आरोप, वे बेटी के साथ AAP में शामिल; केजरीवाल ने खुद किया वेलकम

हरियाणा के पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा सरवारा ने गुरुवार (7 अप्रैल 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) की सदस्यता ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दोनों का पार्टी में स्वागत किया। कभी कॉन्ग्रेस में रहे सिंह ने कुछ समय पहले हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया था। अब इसका विलय आप में कर दिया गया है। सिंह नवंबर 2020 में तब चर्चा में आए थे, जब उन पर गोहत्या का मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि अब इस मामले में उन्हें क्लीनचिट मिल चुकी है।

सिंह और उनकी बेटी के पार्टी में शामिल होने के लेकर केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, “चित्रा जी, निर्मल जी एवं हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के सभी कार्यकर्ताओं का आम आदमी पार्टी परिवार में स्वागत है। हरियाणा और देश की तरक्की के लिए हम सब मिलकर मेहनत करेंगे।” इस मौके पर आप सांसद सुशील कुमार गुप्ता और हाल ही में AAP में शामिल होने वाले हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि निर्मल सिंह पर 2020 में गाय को गोली मारने का आरोप लगा था। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के बेहट थाने में गोहत्या का मामला दर्ज किया गया था। FIR यूपी के गाँव बरथा कोरसी निवासी माम हुसैन ने दर्ज कराई थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए सहारनपुर के SSP आकाश तोमर ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (FR) लगा दी थी। तत्कालीन पुलिसकर्मियों द्वारा जाँच के बाद इस केस में निर्मल सिंह को दोषी नहीं पाया गया था।

दरअसल जिस जगह यह घटना हुई थी वहाँ पर पूर्व मंत्री निर्मल सिंह का घोड़ों का फार्म है। इस फार्म को लेकर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। पत्रकार सचिन गुप्ता ने 2020 में इस घटना के बाद ट्वीट करते हुए इस फार्म को विवादित बताया था। सिंह चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने ​हरियाणा की नागल सीट से 1982, 1991, 1996 और 2005 में जीत दर्ज की थी।

MA की परीक्षा दे रहे कॉन्ग्रेस विधायक नकल के मामले में पकड़े गए, पास से बरामद हुआ मोबाइल: गुजरात का मामला

गुजरात (Gujrat) के आणंद से चौकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ कॉन्ग्रेस (Congress) के एक विधायक को MA की परीक्षा देते वक्त नकल करने के मामले में पकड़ा गया। उनके पास से मोबाइल बरामद किया गया। ये कॉन्ग्रेसी विधायक हैं इंद्रजीत सिंह परमार। दरअसल, सरदार पटेल विश्वविद्यालय की ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएट परीक्षाएँ सोमवार 4 अप्रैल 2022 से शुरू हुई हैं।

इसी क्रम में महुधा से कॉन्ग्रेस विधायक इंद्रजीत सिंह परमार भी 5 अप्रैल 2022 को आणंद के एक परीक्षा केंद्र पर एमए की परीक्षा देने के लिए आए थे। इस बीच वो परीक्षा केंद्र में मोबाइल के साथ पकड़े गए।

GSTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरदार पटेल विश्वविद्यालय के स्नातक स्तर के चौथे और छठे सेमेस्टर के साथ-साथ स्नातकोत्तर स्तर के तीसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएँ सोमवार से शुरू हो गई हैं। इसी के तहत विभिन्न कॉलेजों को एग्जाम सेंटर दिए गए थे। आणंद शहर में नए बस अड्डे के पास स्थित पटेल कॉलेज को भी परीक्षा सेंटर बनाया गया था, जहाँ मंगलवार की सुबह महुधा विधानसभा से कॉन्ग्रेस के विधायक इंद्रजीत सिंह परमार एमए की परीक्षा देने के लिए आए थे।

मंगलवार को नकल के दो मामले मिले थे। इनमें से पहला आणंद में पीएम पटेल कॉलेज और विद्यानगर में बीजेवीएम कॉलेज है।

नकल से विधायक का इनकार

महुधा से कॉन्ग्रेस के विधायक इंद्रजीत सिंह परमार ने नकल की बात से साफ इनकार किया है। जब इस मामले में अधिक जानकारी के लिए फोन पर उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि 5 अप्रैल को परीक्षा केंद्र पर देर से पहुँचे थे और जल्दबाजी के कारण वो अपना मोबाइल फोन जेब में ही भूल गए। उन्होंने ये भी कहा कि जब परीक्षा हॉल में निरीक्षक ने यह देखा तो उस समय तुरंत मोबाइल बाहर रख दिया गया और उनके खिलाफ कोई नक़ल का मामला नहीं था।

कुलपति ने जानकारी से किया इनकार

इस बीच सरदार पटेल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति निरंजन पटेल ने कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के किसी भी मामले की जानकारी से इनकार किया है। उनका कहना था कि संबंधित लोगों के खिलाफ एक्शन परीक्षा विभाग लेगा।

‘मदरसों में राष्ट्रवाद पढ़ाया जाए, आतंकवाद नहीं’: UP के मंत्री ने बताया- वक्फ की जिन जमीनों पर कब्जा, उन पर चलेगा बुलडोजर

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री धर्मपाल सिंह ने पिछले हफ्ते कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर माफियाओं ने कब्जा कर रखा है। अब सरकार अतिक्रमण किए गए वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाएगी। उन्होंने 2 अप्रैल को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में कहा कि सरकार भूमि को मुक्त कराएगी और फिर उसका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए करेगी।

सिंह ने उत्तर प्रदेश के मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा मदरसों में राष्ट्रवाद को प्रेरित करने वाली शिक्षा दी जाएगी। केवल उन्हीं मदरसों के संचालन की अनुमति दी जाएगी जो आतंकवादियों की कहानियों का महिमामंडन करना बंद कर दें। सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मदरसों में राष्ट्रवाद पढ़ाया जाना चाहिए न कि आतंकवाद। यूपी सरकार 2.0 व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देगी।” 

सिंह ने कहा, “मदरसा भारत की शिक्षा प्रणाली का एक अंग हैं। इसकी पहली वजह यह है कि मुस्लिम आबादी अनुपातिक रूप से शिक्षा में पिछड़ी रही है। पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष विषयों का अभाव है। जिसकी वजह से स्नातक करने के बाद रोजगार पाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

धर्मपाल सिंह ने यह भी कहा कि राज्य में मदरसा का सिलेबस केंद्र की नई शिक्षा नीति पर आधारित होगा। बरेली की आँवला सीट से पिछला विधानसभा चुनाव जीतने वाले सिंह ने कहा कि मदरसा शिक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा और छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

इस दौरान धर्मपाल सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने गायों की रक्षा के लिए राज्य भर की प्रत्येक नगर पालिकाओं में गौशालाएँ बनाने की योजना बनाई है। प्रदेश की हर नगर पालिका में एक बड़ा गौशाला बनाया जाएगा। शेल्टर में गायें खुले में नहीं घूमेंगी। उच्च दुग्ध उत्पादन वाली बेहतर नस्ल की गायों को भी गौशालाओं में रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि गौशालाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध किया जाएगा ताकि उनके मैनेजमेंट के लिए बाहरी आर्थिक मदद की जरूरत न पड़े। उन्होंने कहा, “गौशालाओं को गाय के दूध और गाय के गोबर और अन्य संबंधित उत्पादों की बिक्री से अर्जित आय के माध्यम से मेटेंन किया जाएगा।” धर्मपाल सिंह ने बरेली की आँवला सीट से पिछला विधानसभा चुनाव जीता था। अल्पसंख्यक मामलों के विभाग के साथ सिंह के पास उत्तर प्रदेश का पशुपालन विभाग भी है।

गौरतलब है कि इससे पहले, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के राजनीतिक सचिव और विधायक सांसद रेणुकाचार्य ने भी कहा था कि वह मुख्यमंत्री से मदरसों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह करेंगे क्योंकि वे राष्ट्र विरोधी तत्व पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा था, “मदरसे युवा लोगों को भड़काऊ चीजें सिखाते हैं और वे भविष्य में राष्ट्र विरोधी तत्व बन जाते हैं। इसलिए हमें ऐसे संस्थानों की जरूरत नहीं है। मुस्लिम छात्रों को नियमित स्कूलों में पढ़ने दें क्योंकि वे भी भारतीयों के बच्चे हैं वरना मदरसों को नियमित पाठ्यक्रम पढ़ाना होगा।”

करौली में क्या हुआ था? जानिए उस माँ से जिसकी बेटी को आग की लपटों के बीच से निकाल लाए नेत्रेश शर्मा: कहा- हर जगह से लपटें उठ रही थी, हमारा दम घुट रहा था

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 को मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं के जुलूस पर हमले के बाद एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। इसमें एक पुलिस कॉन्स्टेबल आग की लपटों के बीच एक बच्ची को अपने सीने से लगाए दौड़ लगा रहे थे। उनके पीछे-पीछे एक महिला भी जान बचाते हुए भागती नजर आई थी। तस्वीर में दिखने वाले कॉन्स्टेबल का नाम नेत्रेश शर्मा (Netresh Sharma) है। हिंसा के बीच उन्होंने चार लोगों की जान बचाई थी। अब उस बच्ची की माँ भी सामने आई है, जो वायरल तस्वीर में नेत्रेश शर्मा की गोदी में दिख रही है।

इस बच्ची की माँ विनिता ने न्यूज18 को बताया, “वह अपनी बेटी पीहू, देवरानी वैशाली और उसकी भाभी बबीता के साथ बाजार में शॉपिंग करने गई थी। एकाएक सभी दुकानें बंद हो गई। थोड़ी देर बाद माहौल बिगड़ता देखकर वे पास के एक घर के अंदर जा रहे लोगों के साथ उस घर में चले गए। कुछ देर बाद ही दुकानों के शटर पर पत्थर फेंकने की आवाज आने लग गई। करीब 15 मिनट बाद आग की लपटें, चारों तरफ धुएँ के गुब्बार उठने लगे, जिससे घर के अंदर हमारा दम घुटने लगा। मैं भी अन्य लोगों की तरह घर की छत पर जाना चाहती थी, लेकिन अपनी सो रही बेटी को जगाना नहीं चाहती थी। मैं अपनी बेटी के बारे में सोच सोचकर बहुत डरी हुई थी। मैंने रोते हुए अपने पति हरिओम को फोन किया तो वे भी चिंता में पड़ गए और कहा कि मैं जल्द वहाँ आ रहा हूँ। लेकिन मैं पति की जान खतरे में नहीं डालना चाहती थी। इसलिए मैंने उन्हें अपनी लोकेशन नहीं भेजी। इसी दौरान माइक से आवाज आई कि कोई भी घरों में हो तो बाहर आ जाएँ।”

बच्ची की माँ ने बताया, “यह अनाउसमेंट पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह इंदोलिया कर रहे थे। कुछ पुलिसकर्मी घरों में फँसे लोगों को निकाल रहे थे तो कुछ पुलिसकर्मी आग बुझा रहे थे। सभी जगह आग की लपटें उठ रही थी। तभी पुलिस अधीक्षक ने दो कॉन्स्टेबल को हमें वहाँ से निकालने के निर्देश दिए। एक कॉन्स्टेबल ने मेरी देवरानी और उसकी भाभी को वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं दूसरे कॉन्स्टेबल ने मेरी बेटी को सीने से लगाकर मुझे पीछे आने की कहकर हिंसा वाली जगह से निकालकर लाया। उन्होंने मेरी बेटी को आग वाले स्थान से लगभग 20 मीटर दूर ले जाकर उतारा। यह देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए।” विनिता ने कहा कि जब तक पुलिस में ऐसे अधिकारी और जाबांज सिपाही हैं तब तक हम सुरक्षित हैं।

इससे पहले नेत्रेश शर्मा ने टाइम्स नाउ नवभारत को बताया था कि 2 अप्रैल को वह इलाका आग की लपटों से घिरा हुआ था। दो दुकानें जिसमें आग लगी हुई थी, उसी के बीच मौजूद एक घर से कुछ महिलाओं की चिल्लाने की आवाज आई। मैं उस ओर भागा तो वहाँ मैंने देखा कि एक महिला के पास मासूम बच्चा है, जिसे उन्होंने सीने से लगा रखा था और सुरक्षित जगह पर जाना चाहती थीं। शर्मा ने आगे बताया कि उसके बाद वे उन्होंने महिला की गोद से बच्ची को लिया और फिर उसे सीने से लगाकर तेजी से बाहर निकल गए। इस दौरान उन्होंने वहाँ मौजूद अन्य महिलाओं को भी अपने पीछे चलने के लिए कहा और फिर उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुँचाया।

गौरतलब है कि करौली में हिंदू नव वर्ष के जुलूस पर 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हमला हुआ था। इसके बाद दुकानों में आगजनी की गई। इस पूरे घटनाक्रम में पुष्पेंद्र नाम का एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसके शरीर पर चाकू से हमले के निशान थे। उपद्रवियों को काबू करते हुए पुलिस के 4 जवान भी घायल हुए थे।