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‘दिल्ली जल बोर्ड के मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान पर रोज 2 घंटे छुट्टी’: किरकिरी के बाद केजरीवाल सरकार का यू-टर्न, वापस लिया आदेश

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने रमजान के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) के मुस्लिम कर्मचारियों को हर दिन दो घंटे की शॉर्ट लीव की मंजूरी सोमवार (4 अप्रैल, 2022) को दी थी जिसे सोशल मीडिया पर हुई किरकिरी के बाद यूटर्न लेते हुए आज वापस ले लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दौरान शॉर्ट लीव देने का फैसला किया था, इसके लिए बकायदा जल बोर्ड की तरफ से आधिकारिक आदेश भी जारी किया गया था। आदेशानुसार रमजान के दौरान हर दिन ये शॉर्ट लीव करीब दो घंटे तक की हो सकती थी, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर होती किरकिरी के कारण दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 24 घंटे से भी कम समय के अंदर मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को आदेश वापस ले लिया गया है।

जल बोर्ड के असिस्टेंट कमिश्नर वीरेंद्र सिंह की ओर से 04 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया था, “सक्षम प्राधिकारी संबंधित डीडीओ/नियंत्रक अधिकारी द्वारा मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दिनों में यानी 03 अप्रैल से 2 मई 2022 तक या ईद उल फितर की तारीख तक हर दिन लगभग दो घंटे शॉर्ट लीव की अनुमति देने की मंजूरी दे दी है।”

हालाँकि, यह भी कहा जा रहा है कि इस आदेश में यह भी साफ कर दिया गया था कि यह शॉर्ट लीव इस शर्त के अधीन होगी कि वे शेष कार्यालय समय के दौरान अपना कार्य पूरा करेंगे ताकि कार्यालय का कार्य प्रभावित न हो।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस भी है मुस्लिमों पर मेहरबान

गौरतलब है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भी रमजान के महीने में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने निर्देश जारी कर कहा है कि रमजान के पूरे महीने में किसी भी मुस्लिम बहुल इलाके में बिजली कटौती नहीं होगी। बता दें कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को जोधपुर डिस्कॉम के नाम से भी जाना जाता है।

जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी एक पत्र भी ट्विटर पर वायरल हो रहा है। इस पत्र पर 1 अप्रैल की तारीख है। ट्विटर यूजर @8PMnoCM ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी पत्र की कॉपी सोशल मीडिया पर शेयर की है।

देश विरोधी एजेंडा फैलाने वाले 22 YouTube चैनलों को मोदी सरकार ने किया ब्लॉक, 4 पाकिस्तानी: 260 करोड़ बार देखे गए थे

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में 22 YouTube चैनलों और कुछ सोशल मीडिया हैंडल को ब्लॉक कर दिया है। मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 के तहत पहली बार YouTube समाचार चैनलों को ब्लॉक करने का निर्णय लिया है। बैन किए गए YouTube चैनलों ने दर्शकों को गुमराह करने के लिए टीवी समाचार चैनलों के लोगो और झूठे थंबनेल का इस्तेमाल किया था।

प्रेस सूचना ब्यूरो ने आज 22 Youtube चैनल, 1 फेसबुक अकाउंट, 3 ट्विटर अकाउंट और 1 वेबसाइट को ब्लॉक करने के संबंध में एक नोटिस जारी किया, जो लगातार भारत के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने में लगे हुए थे। इन चैनलों की व्यूवरशिप 260 करोड़ थी। मंत्रालय के अनुसार, ये यूट्यूब चैनल भारत के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर रहे थे और अन्य देशों के साथ चल रहे युद्ध में भारत के भाग लेने की फेक खबरें चला रहे थे। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों से संबंधित दुष्प्रचार करने वाले इन चैनलों की रिपोर्टों को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जा रहा था।

मोदी सरकार द्वारा आईटी नियम, 2021 के तहत 18 भारतीय YouTube चैनल ब्लॉक किए गए हैं, जिनमें 4 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल भी हैं। इन YouTube चैनलों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए किया जा रहा था, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों और जम्मू-कश्मीर को लेकर फर्जी खबरें दिखाई जा रही थीं। ब्लॉक किए गए सोशल मीडिया अकाउंट्स को पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “यह देखा गया है कि इन भारतीय YouTube चैनलों द्वारा यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध में भारत की भूमिका को लेकर भ्रामक खबरें दिखाई गईं। इससे भारत की विदेश नीति प्रभावित हो सकती है।”

चैनलों ने दर्शकों को गुमराह करने के लिए टीवी समाचार चैनलों के लोगो और झूठे थंबनेल का इस्तेमाल किया

मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय यूट्यूब चैनल्स अधिक से अधिक लोगों को गुमराह करने के लिए कुछ टीवी न्यूज चैनलों के टेम्प्लेट और लोगो समेत न्यूज एंकरों की तस्वीरों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। केंद्र सरकार ने जिन चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की है, उनमें एआरपी न्यूज, एओपी न्यूज, एलडीसी न्यूज, सरकारी बाबू, एसएस जोन हिंदी, ऑनलाइन खबर, और न्यूज 23 हिंदी शामिल हैं। इसके अलावा गुलाम नबी मदनी, दुनिया मेरी आगी और हकीकत टीवी नाम के पाकिस्तानी ट्विटर अकाउंट भी शामिल हैं।

सरकार ने कहा, “भारत सरकार एक प्रामाणिक, भरोसेमंद और सुरक्षित ऑनलाइन समाचार मीडिया वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत की संप्रभुता और अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।”

ED ने जब्त की AAP नेता सत्येन्द्र जैन की करोड़ों की संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला: केजरीवाल सरकार में संभाल रहे हैं 8 मंत्रालय

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (5 अप्रैल, 2022) को मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) की जाँच के सिलसिले में दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) के परिवार और कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क किया। जैन अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य, बिजली, गृह, पीडब्ल्यूडी, उद्योग, शहरी विकास, बाढ़, सिंचाई और पानी मंत्री हैं। ईडी ने 2018 में शकूर बस्ती के आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक से मामले के सिलसिले में पूछताछ भी की थी।

यह कार्रवाई AAP मंत्री सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में की गई थी। कानून प्रवर्तन एजेंसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस बारे में जानकारी साझा की।

कुर्क की गई 4.81 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियाँ अकिंचन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडो मेटल इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रयास इंफोसोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेजे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, वैभव जैन की पत्नी स्वाति जैन, अजीत प्रसाद जैन की पत्नी सुशीला जैन और सुनील जैन की पत्नी इंदु जैन की हैं।

गौरतलब है कि 25 अगस्त, 2017 को सीबीआई ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में सत्येंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज की थी। ED ने इस FIR के आधार पर AAP नेता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। इसमें यह आरोप लगाया गया था कि जैन चार कंपनियों से मिली रकम के सोर्स के बारे में नहीं बता पाए। वह इन कंपनियों में शेयरहोल्डर थे।

जैन ने कथित तौर पर दिल्ली में कई फर्जी कंपनियाँ (Shell Companies) बनाई या खरीदी थीं। साथ ही कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटर के माध्यम से 54 फर्जी कंपनियाँ बनाई। इन कंपनियों के माध्यम से करीब 16.39 करोड़ रुपए का काला धन जुटाया गया था। सत्येंद्र जैन के पास प्रयास, इंडो और अकिंचन नाम की कंपनियों में बड़ी संख्या में शेयर थे। हालाँकि, रिपोर्ट के मुताबिक केजरीवाल की सरकार में मंत्री बनने के बाद 2015 में उनके सभी शेयर उनकी पत्नी को ट्रांसफर कर दिए गए थे।

इसके अलावा महाराष्ट्र में प्रवर्तन निदेशालय ने ₹1034 करोड़ के भूमि घोटाले मामले में एक्शन लेते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत की संपत्ति पर कार्रवाई की है ईडी ने पात्रा चॉल घोटाला केस में एक्शन लेते हुए राउत की अलीबाग में 8 संपत्ति और दादर में 1 फ्लैट को कुर्क किया। जाँच एजेंसी का मानना है कि ये संपत्ति संजय राउत ने मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों से खरीदी थी। उनके साथ इस केस में उनके करीबियों पर भी कार्रवाई हुई है।

विक्षिप्त नहीं है गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाला मुर्तजा अब्बासी, इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया

गोरखपुर मंदिर पर हुए हमले की जाँच के साथ नए-नए खुलासे हो रहे हैं। मंदिर के बाहर पुलिस के जवानों पर हमला करने वाले आरोपित मुर्तजा अब्बासी को लेकर डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं है।

गोरखपुर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. जेएसपी सिंह ने बताया कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद जब आरोपित को मेडिकल जाँच के लिए लाया गया तो वह ठीक से बातें कर रहा था। वह आराम से डॉक्टरों और पुलिस के सवालों का जवाब दे रहा था और उसने कोई हिंसक व्यवहार नहीं किया, जो कि डॉक्टरों को विश्वास दिलाता है कि वह मानसिक रूप से अस्थिर नहीं है।

दरअसल, मंदिर पर हमले के बाद ही आरोपित हमलावर मुर्तजा अब्बासी के अब्बू ने कहा था कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। कहा ये भी जा रहा है कि मुर्तजा की बीवी ने भी उसे छोड़ दिया और ऐसे में वो डिप्रेशन में चला गया था। उसके अब्बू का कहना था कि कई रातों से वो सो नहीं पाया।

बता दें कि डॉक्टरों ने अपनी जाँच में पाया है है कि आरोपित अब्बासी मुर्तजा मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं है। वह सुरक्षा एजेंसियों को लगातार गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

मामले की जाँच कर रही यूपी एटीएस की टीम अब्बासी मुर्तजा के बैकग्राउंड की जानने के लिए मुंबई पहुँच गई है। वहीं एक दूसरी टीम आईआईटी बॉम्बे भी जाँच के लिए जाने की बात कही जा रही है। अहमद मुर्तजा अब्बासी ने साल 2010 में बी. टेक में दाखिला लिया था और साल 2015 में उसे ग्रेजुएशन की डिग्री मिली थी।

अभी तक की जाँच में सामने आया है कि अब्बासी मुर्तजा अकेला गोरखपुर नहीं पहुँचा था। उसके साथ दो और लोग भी मौजूद थे। जो मुर्तुजा को हमले के बाद छोड़कर फरार हो गए। यूपी पुलिस दोनों साथियों की तलाश कर रही है।

इससे पहले मुर्तुजा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ था वह जाकिर नाइक और ISIS के वीडियोज देखता था। साथ ही लोन वुल्फ अटैक की फिराक में भी था। मुर्तजा के पास से एक पेन ड्राइव मिली है जिसमें भड़काऊ वीडियो बरामद हुए हैं। मुर्तजा के लैपटॉप से सीरिया से जुड़ा वीडियो और साहित्य भी मिला है। एजेंसियाँ यह जानकारी जुटा रही हैं कि इसके पास सिर्फ वीडियो हैं या वाकई इसके तार ISIS या किसी दूसरे आतंकी संगठन से जुड़े हैं।

गौरतलब है कि हमलावर मुर्तुजा अब्बासी जबरन मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपित ने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाकर जबरन मंदिर परिसर में घुसने की कोशिश की। वह गेट के पास एक पीएसी पोस्ट पर गया और उसने पुलिस पर हमला करने की कोशिश की। हमले में दो पीएसी कांस्टेबल घायल हुए थे।

₹1034 करोड़ का भूमि घोटाला, संजय राउत के 1 फ्लैट-8प्लॉट ED ने किए जब्त: शिवसेना सांसद ने कहा- मैं चुप रहने वालों में से नहीं

महाराष्ट्र में प्रवर्तन निदेशालय ने ₹1034 करोड़ के भूमि घोटाले मामले में एक्शन लेते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत की संपत्ति पर कार्रवाई की है। ईडी ने पात्रा चॉल घोटाला केस में एक्शन लेते हुए राउत की अलीबाग में 8 संपत्ति और दादर में 1 फ्लैट को कुर्क किया। जाँच एजेंसी का मानना है कि ये संपत्ति संजय राउत ने मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों से खरीदी थी। उनके साथ इस केस में उनके करीबियों पर भी कार्रवाई हुई है।

पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्लॉट और फ्लैट जब्त करने के लिए प्रोविजनल जारी किया गया। ये केस 1,034 करोड़ रुपए के जमीन घोटाले से जुड़ा है जिसका संबंध चॉल के पुन: विकास से संबंधित है।

राउत ने इस कार्रवाई के बाद प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना नेता ने कहा, “मैं वो नहीं हूँ जो डर जाऊँ। मेरी संपत्ति जब्त कर लो। मुझे गोली मार दो। जेल भेज दो। संजय राउत, बालासाहेब ठाकरे का चेला है। एक शिवसैनिक है। वो लड़ेगा और सबका पर्दाफाश करेगा। मैं चुप रहने वालों में से नहीं हूँ। उन्हें फुदकने दो। नाच लेने दो जितना नाचना है।”

मीडिया से बात में राउत ने कहा कि जो अलीबाग में संपत्ति है वो उन्होंने अपने मेहनत के पैसे से 2009 में खरीदी थी। ये सब बदले की भावना से हो रहा। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा अध्यक्ष को पहले ही बता चुके थे कि महाराष्ट्र में सरकार गिराने के लिए उनके ऊपर दबाव आ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घर में आकर कहा गया था कि अगर वो सरकार नहीं गिरवाते तो उन्हें केंद्रीय जाँच एजेंसी का सामना करना पड़ेगा। 

बता दें कि आज शिवसेना नेता के ऊपर हुई जाँच एजेंसी की कार्रवाई के बाद संजय राउत ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने अत्यमेव जयते लिखा था। ईडी की इस कार्रवाई से पहले महाराष्ट्र के बिजनेसमैन प्रवीण राउत को भी जाँच एजेंसी ने फरवरी में गिरफ्तार किया था और फिर चार्जशीट दी थी। संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत पर भी पीएमसी बैंक फ्रॉड केस में कार्रवाई हो ही है। कथिततौर पर उनके संबंध प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी से थे।

‘उमर खालिद 2 साल से जेल में, उसकी गर्लफ्रेंड हो गई गर्भवती’ – छापने वाले पर केस करेगी बनोज्योत्सना लाहिरी

सोशल मीडिया पर एक खबर शेयर की जा रही है कि CAA विरोधी दंगों में संलिप्तता के आरोपों में पिछले 2 सालों से जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की ‘गर्लफ्रेंड’ बनोज्योत्सना लाहिरी गर्भवती हैं। इस खबर में ये भी लिखा हुआ है कि बनोज्योत्सना लाहिरी उदास हैं, क्योंकि उनका होने वाला बच्चा अपने पिता उमर खालिद को नहीं देख पाएगा। साथ ही उमर खालिद और बनोज्योत्सना लाहिरी की तस्वीर भी बनी हुई है।

अब बनोज्योत्सना लाहिरी ने इस तरह की ख़बरों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्विटर पर ऐसी एक खबर को कोट करते हुए लिखा, “प्रिय दिल्ली पुलिस, ये महिला (बृस्ति सेनगुप्ता, जिन्होंने ये खबर ट्वीट की थी) जानबूझ कर मेरे खिलाफ भ्रामक सूचनाएँ फैला रही हैं। मेरे चरित्र का हनन किया जा रहा है, बदनाम किया जा रहा है। ये मानहानि और निशाना बना कर प्रताड़ना के बराबर हुआ। मैंने इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।”

साथ ही बनोज्योत्सना लाहिरी ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वो इस शिकायत को दर्ज कर लें। बृस्ति सेनगुप्ता ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए पूछा था कि ये किस किस्म का घटियापन है? वहीं महिमा नाम की एक अन्य यूजर ने भी एक ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है कि उमर खालिद की गर्भवती गर्लफ्रेंड काफी उदास हैं, क्योंकि उनका होना वाला बच्चा 2 वर्षों से जेल में बंद अपने अब्बा को नहीं देख पाएगा। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि ये कैसे सम्भव हुआ?

मार्च 2022 में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। उसके वकील ने दावा किया था कि उमर खालिद के खिलाफ सभी आरोप ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘न्यूज़ 18’ जैसे खबरिया चैनलों के वीडियो क्लिप्स पर आधारित हैं, जिसने उन बयानों को गलत तरीके से पेश किया है। महाराष्ट्र के अमरावती में फरवरी 2020 में उमर खालिद ने वो भाषण दिया था। उमर खालिद के वकील का दावा है कि उनके मुवक्किल ने उस दिन शांति और भाईचारा की बात की थी, जिसे CNN-News18 ने नहीं दिखाया।

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में बिजली भी हुई मजहबी: मुस्लिम बहुल इलाकों में रमजान के दौरान 24 घंटे पावर सप्लाई के निर्देश

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने रमजान के पाक महीने में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने निर्देश जारी कर कहा है कि रमजान के पूरे महीने में किसी भी मुस्लिम बहुल इलाके में बिजली कटौती नहीं होगी। बता दें कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को जोधपुर डिस्कॉम के नाम से भी जाना जाता है।

जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी पत्र ट्विटर पर वायरल हो रहा है। इस पत्र पर 1 अप्रैल की तारीख है। ट्विटर यूजर @8PMnoCM ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा जारी पत्र की कॉपी सोशल मीडिया पर शेयर की है।

जोधपुर बिजली विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि रमजान का महीना 4 अप्रैल से शुरू हो रहा है। रोजा रखने वाले लोगों को गर्मी के मौसम से कोई परेशानी न हो, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि जोधपुर, पाली, सिरोही, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के सभी मुस्लिम बहुल इलाकों में रमजान के पूरे महीने बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति हो।

ऑपइंडिया ने पत्र की प्रामाणिकता के बारे में पता करने के लिए जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से संपर्क किया। जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक के PA केजी अग्रवाल ने पुष्टि की कि जोधपुर, जयपुर और अजमेर डिस्कॉम के MD ने अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले सभी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में निर्बाध बिजली की आपूर्ति करने के लिए आदेश जारी किया है।

अग्रवाल ने आगे कहा कि यह आदेश कॉन्ग्रेस विधायक जाहिदा खान द्वारा सदन में पेश किए गए प्रस्ताव के जवाब में जारी किया गया है। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने सभी तीन डिस्कॉम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य के किसी भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र में रमजान के पूरे महीने के दौरान बिजली की कटौती न हो।

इसको लेकर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। पूनावाला (Shehzad Poonawala) ने सर्कुलर की तस्वीर ट्वीट करते हुए मामले पर कहा, “वाह! करौली में मुख्य आरोपी को बेशर्मी से बचाने और कॉन्ग्रेस पार्षद मतलूब अहमद की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं करने के बाद अब गहलोत सरकार की ओर से तुष्टिकरण का एक और काम किया जा रहा। रमजान के दौरान मुस्लिम इलाकों में बिजली कटौती नहीं! नवरात्रि में हिंदुओं के लिए ऐसा कोई आदेश?? ऐसा भेदभाव क्यों???”

राजस्थान कॉन्ग्रेस नेता जाहिदा खान

जाहिदा खान राजस्थान विधानसभा की सदस्य और राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री हैं। वह राजस्थान के कमान से दो बार विधायक के रूप में चुनी गईं- एक बार 2008 में और फिर 2018 में। वह राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव और राज्य मंत्री के पदों पर भी रह चुकी हैं। अक्टूबर 2011 मेंउन्हें अखिल भारतीय महिला कॉन्ग्रेस की महासचिव भी नामित किया गया था।

पिछले साल फरवरी में जाहिदा खान के खिलाफ जोधपुर में एक स्थानीय व्यक्ति को कथित तौर पर धमकाने और मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 31 जनवरी 2021 को जब वह हरियाणा सीमा के पास किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए जा रहा थे तो विधायक के हथियारबंद गुंडों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों और राहगीरों ने उन्हें बचाया। हालाँकि, जाहिदा खान ने आरोपों का खंडन करते हुए इसे ‘निराधार और राजनीति से प्रेरित’ बताया था।

जाहिदा खान वही कॉन्ग्रेस नेता हैं, जिनके खिलाफ राजस्थान के भरतपुर जिले के कमान क्षेत्र में विवादास्पद भाषण का एक वीडियो वायरल होने के बाद 2019 में चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालाँकि खान ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

वहीं जाहिदा खान के पति जलीश खान कुख्यात भरतपुर सामूहिक बलात्कार मामले में मुख्य आरोपित थे। इस मामले में एक दलित लड़की के साथ कुछ लोगों ने लगभग 15 दिनों तक बलात्कार किया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट जाहिदा खान ने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने पति पर लगे रेप के आरोपों से इनकार किया था। बलात्कार पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि मामला वापस नहीं लेने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही थी। उसे कथित तौर पर मामले को ‘रफा-दफा’ करने के लिए 1 करोड़ रुपए की पेशकश की गई थी।

जब इंदिरा गाँधी की बहू की मैगजीन में छपी सेक्स स्कैंडल की फोटो: सास-बहू की वो साजिश जिसके शिकार बने दलित जगजीवन राम

स्वतंत्रता सेनानी और दिग्गज नेता बाबू जगजीवन राम का आज 115वाँ जन्मदिन है। जगजीवन राम, जिन्हें अक्सर बाबूजी भी कहा जाता है, एक दलित प्रतीक थे जिन्होंने वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।

जगजीवन राम का राजनीतिक जीवन का कार्यकाल लगभग 50 वर्षों का रहा। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। बाबू जगजीवन राम 1977 से 1979 के बीच उपप्रधानमंत्री भी रहे। जगजीवन राम के पहले दलित प्रधानमंत्री बनने की भी अफवाह थी। हालाँकि, एक ऐसी घटना घटी जिसके बाद उनका नाम हटा दिया गया।

यह घटना राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई थी, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के एक 21 वर्षीय छात्रा के साथ आपत्तिजनक स्थिति में जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम की अंतरंग तस्वीरें एक पत्रिका में छाई हुई थीं। सूर्या के नाम से जानी जाने वाली पत्रिका ने उनके 46 वर्षीय बेटे सुरेश राम और सुषमा चौधरी नामक एक कॉलेज की छात्रा की नग्न तस्वीरों को दो पेज में जगह दी थी।

जब 1977 के जनता पार्टी के आंदोलन में इंदिरा गाँधी की हार हुई, तो जगजीवन राम को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जाता था। दुर्भाग्य से, जगजीवन राम को अपने बेटे से जुड़े सेक्स स्कैंडल के कारण प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर होना पड़ा।

हालाँकि, असली त्रासदी एक पत्रिका में प्रकाशित तस्वीरों से कहीं अधिक है। इंदिरा गाँधी की बहू मेनका गाँधी उस पत्रिका की संपादक थीं जिसमें ये तस्वीरें प्रकाशित हुई थीं। यह भारत का पहला सबसे बड़ा राजनीतिक सेक्स स्कैंडल माना जाता है।

कहा जाता है कि बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक जीवन के इतने महत्वपूर्ण पड़ाव पर सामने आया उनके बेटे का सेक्स स्कैंडल उनके राजनीतिक करियर को पटरी से उतारने की साजिश से कम नहीं था। जगजीवन राम ने कॉन्ग्रेस के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने 30 साल के कार्यकाल से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी थी और जबकि एक सक्षम प्रशासक और अनुभवी राजनेता के रूप में उनकी राजनीतिक हलके में जबरदस्त छाप थी। इसके बाद वह इंदिरा गाँधी की राह से हटते हुए जनता दल-सेक्युलर में शामिल हो गए। लेकिन उनके बेटे के इस सेक्स स्कैंडल ने उनके राजनीतिक करियर को हासिए पर ला खड़ा किया। जिसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।

गौरतलब है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता मीरा कुमार बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं। वह पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष थीं, जिन्होंने 2009 से 2014 तक देश की सेवा की। उन्हें 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का उम्मीदवार भी बनाया गया, लेकिन वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार राम नाथ कोविंद से हार गईं।

अल्लाहु अकबर का नारा, अकेला हमलावर, धारदार हथियार… क्या गोरखनाथ मंदिर पर हुआ लोन वुल्फ अटैक: जाने इसके बारे में सब कुछ

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में 3 अप्रैल 2022 को ‘अल्लाहु अकबर’ के नारों के साथ हमले को अंजाम देने वाले मुर्तजा अब्बासी के लिंक वैश्विक आतंकी संगठन ISIS से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उससे पता चलता है कि वह यूट्यूब पर जिहाद से जुड़े वीडियो देखता था। लोन वुल्फ अटैक के भी वीडियो देखता था। जाकिर नाइक से प्रभावित था। यूपी पुलिस ने भी इस हमले के पीछे बड़ी साजिश का अंदेशा जताते हुए आतंकी एंगल से जाँच की बात कही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गोरखनाथ मंदिर पर हुआ हमला लोन वुल्फ अटैक (Lone wolf attack) था?

क्या होता है लोन वुल्फ अटैक

लोन वुल्फ अटैक आतंकवाद फैलाने का नया जरिया बन गया है। लोन वुल्फ अटैक में दहशत फैलाने के लिए किसी बड़ी योजना या साधनों की जरूरत नहीं पड़ती। दुनिया भर में लोन वुल्फ अटैक में सैंकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे हमलों में आतंकी आमतौर पर चाकू, ग्रेनेड और छोटे धारदार हथियारों का इस्‍तेमाल करते हैं। अकेला आतंकी ही ऐसे हमलों को अंजाम देता है। मकसद अकेले ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुँचाना होता है। लोन वुल्फ हमलावर इंटरनेट के जरिए आतंकी संगठनों के साथ जुड़े होते हैं और उनके उकसावे पर हमले को अंजाम देते हैं।

लोन वुल्फ हमलों में तेजी

इंडियन एक्सप्रेस ने इस साल जनवरी में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त आँकड़ों से पता चलता है कि आतंकवादी कश्मीर में सुरक्षा बलों के खिलाफ तेजी से लोन वुल्फ हमलों का सहारा ले रहे हैं। आतंकियों ने 2020 में सुरक्षा बलों पर 1 आईईडी हमला किया, वहीं 2021 में 8 ऐसे हमले किए। ऐसे हमलों को अकेला आतंकी ही अंजाम देता है, जिससे वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को मार सके। अकेले आतंकी की साजिश का पता लगाना भी काफी मुश्किल होता है।

1988 में पहला लोन वुल्फ अटैक

यूरोप और अमेरिका में 90 के दशक की शुरुआत में लोन वुल्फ अटैक के मामले दर्ज होने शुरू हो गए थे। पहला ऐसा आतंकी हमला 15 नवंबर 1988 को दुनिया के सामने आया था। साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया में हुए इस हमले को ब्ररेंड स्ट्रेडॉम ने अंजाम दिया था। उसने अचानक ही स्ट्रीडोम स्क्वायर पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए थे। 14 दिसंबर 2012 को कनेक्टिकट के न्यूटाउन में 20 वर्षीय आतंकी ने फायरिंग कर 26 लोगों को मार दिया था और 20 लोग घायल हो गए थे। बाद में उसने (आतंकी) खुद को भी गोली मार ली थी। वहीं 12 जून 2016 को ओरलैंडो के एक नाइटक्लब में 29 वर्षीय अमेरिकी नागरिक उमर मतीन ने फायरिंग कर करीब 50 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले में 53 घायल भी हो गए थे।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, अब भारत समेत पूरे दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में लोन वुल्फ हमलों का खतरा बढ़ गया है। इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि लोन वुल्फ आतंकी घटनाओं के बारे में जानकारी हासिल करना मुश्किल होता है। हमलावर अकेला होता है। आमतौर पर ऐसे हमलावर स्थानीय नागरिक होते हैं। सोशल मीडिया के जरिए इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आतंकी संगठनों के संपर्क में आते हैं। इन पर एजेंसियों का शक नहीं जाता। ऐसे हमलावर आतंकी सोच और मजहबी उन्माद को चुपचाप पालते रहते हैं और मौका मिलते ही आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं।

दिल्ली में लोन वुल्फ अटैक की साजिश

अगस्त 2020 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन ISIS के अबू यूसुफ खान को गिरफ्तार किया था। वह लोन वुल्फ अटैक की फिराक में था और उसके निशाने पर कई बड़ी हस्तियाँ थीं। अबू बाइक पर विस्फोटक लेकर दिल्ली में आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश में था। पुलिस ने उसके पास से 15 किलो IED और कुकर बम बरामद किया था। ये भी पता चला था कि वह ‘इस्लामिक स्टेट इन खोरासन प्रोविंस (ISKP)’ के संपर्क में था और अफगानिस्तान के आतंकियों की मदद से भारत में हमला करने वाला था। वो कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों से भी संपर्क में था।

दशहरे पर होना था लोन वुल्फ अटैक

11 अक्टूबर 2021 ​को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रमेश पार्क से इलाके से मोहम्मद अशरफ उर्फ अली नाम के एक पाकिस्तानी आतंकी को गिरफ्तार किया था। वह पिछले एक दशक से अधिक समय से फर्जी पहचान पत्र पर देश में रहा था। अली आतंकियों के स्लीपर सेल के रूप में देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश में था। वह बांग्लादेश के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था और भारत आकर उसने यहाँ का पासपोर्ट भी बनवा लिया ​था। जाँच में पता चला कि अली पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के लगातार संपर्क में था और वह दशहरे के दौरान दिल्ली में ‘लोन वुल्फ अटैक’ की साजिश रच रहा था।

कर्नाटक में दंगे भड़काने के लिए हर्षा की हत्या: NIA की FIR से खुलासा, बुर्के पर आग लगाने की इस्लामी कट्टरपंथियों ने रची थी साजिश

कर्नाटक में पिछले दिनों बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की जो हत्या की गई थी उस केस में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने नया खुलासा किया है। NIA ने बताया है कि हिजाब विवाद के बीच में हर्षा की हत्या सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के लिहाज से की गई थी।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट में NIA सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 2 मार्च को जब जाँच अधिकारी हर्षा हत्याकांड की जाँच के लिए शिवमोगा पहुँचे तो उन्हें पता चला कि ये हत्या एक साजिश के तहत की गई थी। उनका मकसद सांप्रदायिक हिंसा को जन्म देना था। बुर्का विवाद के बीच राज्य में दंगे भड़काना था।

इस बात का जिक्र NIA ने अपनी एफआईआर में भी किया है। इसमें बताया गया कि हर्षा की हत्या से राज्य में खौफ पैदा करने की कोशिश की गई थी। आरोपितों की मंशा जानलेवा हथियारों का प्रयोग करके लोगों को डराने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की थी।

बता दें कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की पड़ताल से पहले कर्नाटक के गृहमंत्री ने भी इस केस में कम्युल एजेंडे का जिक्र किया था। वहीं भाजपा विधायक सीटी रवि ने बयान दिया था कि हर्षा को किसी निजी कारण से नहीं मारा गया।

उन्होंने कहा था, “मुझे नहीं लगता कि यह किसी दुश्मनी के चलते किया गया फैसला है। इसके पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका है। किसने उन्हें वित्तीय सहायता दी, किसने ये साजिश रची, किसने उन्हें उकसाया, किसने उन्हें समर्थन दिया, इन सबकी कोर्ट में जाँच होनी चाहिए।”

उन्होंने NIA को केस देने के संबंध में बताया कि ये मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को इसीलिए दिया गया है ताकि हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या को रोका जा सके। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस हत्या की निंदा करते हुए कर्नाटक में फैल रहे कट्टरपंथ को निशाना बनाया था। उन्होंने पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठनों का उदाहरण देकर कहा था कि ये लोग केरल का आतंकी मॉडल कर्नाटक में लाना चाहते हैं।

हर्षा हत्याकांड

गौरतलब है कि कर्नाटक के शिवमोगा जिले 26 साल के बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की 20 फरवरी 2022 को चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी जिसके कारण कट्टरपंथियों ने उन्हें मौत के घाट उतारा था।

घटना में शामिल 6 आरोपित कुछ दिन में गिरफ्तार हो गए थे और बाद में कुल 10 आरोपितों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराएँ लगाई थी। 10 की पहचान- रिहान शरीफ, मोहम्मद कासिफ, आसिफ उल्लाह खान, अब्दुल अफान, सैयद फारूक, अब्दुल कंधार जिलान, रौशन, फराज पाशा, सैयाद नदीम, जफर सादिक के तौर पर हुई थी। इन सबके नाम NIA ने अपनी एफआईआर में भी लिखे हैं।