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आर्थिक संकट से उबले श्रीलंकाई, राष्ट्रपति आवास के बाहर हिंसक प्रदर्शन: राजधानी कोलंबो के कई इलाकों में कर्फ्यू

आजादी के बाद के सबसे भयानक आर्थिक संकट (Economic Crisis) से गुजर रहे श्रीलंका (Sri Lanka) में अब लोगों का गुस्सा फूटने लगा है। गुरुवार (31 मार्च 2022) देर रात सैकड़ों लोगों की भीड़ ने राष्‍ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे (President Gotabaya Rajapaksa) के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पोस्‍टर लहराते हुए नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान उनका पुलिस के साथ टकराव भी हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्‍पेशल टास्‍क फोर्स बुलानी पड़ी।

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। जैसे ही पुलिस ने उन्हें खदेड़ने की कोशिश की, स्थिति बिगड़ गई। भीड़ ने पुलिस पर बोतलें और पत्‍थर फेंके। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज के साथ वाटर केनन का इस्‍तेमाल करना पड़ा। इस दौरान नाराज लोगों ने पुलिस की बस और जीप को भी आग के हवाले कर दिया। विरोध-प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद पत्रकारों सहित कम से कम दस लोग घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कोलंबो के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। पुलिस महानिरीक्षक ने कहा, “कोलंबो नॉर्थ, कोलंबो साउथ, कोलंबो सेंट्रल और नुगेगोडा पुलिस डिवीजन में तत्काल प्रभाव से अगली सूचना तक पुलिस कर्फ्यू लगा दिया गया है।”

उल्लेखनीय है कि पड़ोसी देश श्रीलंका में हाहाकार मचा हुआ है। अस्पतालों में दवाएँ खत्म होने से डॉक्टर्स ने मरीजों का ऑपरेशन रोक दिया है। पेट्रोल पंप पर दो-दो किलोमीटर लंबी लाइनें लग रहीं। खाने की चीजें इतनी महँगी हो गईं कि लोग भूखे सोने को मजबूर हैं।

रिपोर्टों के अनुसार एक कप चाय की कीमत 100 रुपए हो गई है। दूध की कीमत 2,000 रुपए पर पहुँच गई है। मिर्च 700 रुपए किलोग्राम बिक रही है। एक किलो आलू के लिए 200 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। फ्यूल की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई शहरों में 13 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। परीक्षा के लिए पेपर-इंक नहीं हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चीनी की कीमत 290 रुपए किलो तो चावल की कीमत 500 रुपए किलो हो चुकी है। एक पैकेट ब्रेड की कीमत 150 रुपए हो चुकी है। दूध का पाउडर 1,975 रुपए किलो, तो एलपीजी सिलेंडर का दाम 4,119 रुपए है। इसी तरह पेट्रोल 303 रुपए लीटर और डीजल 176 रुपए लीटर बिक रहा है। सभी वस्तुओं की कीमतें श्रीलंकाई रुपए में है। डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपए की कीमत 46 फीसदी तक गिर गई है। एक मार्च को 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 295 श्रीलंकाई रुपए हो चुकी थी।

RDX के साथ पकड़े गए आतंकियों के परिजन और रिश्तेदार गायब, हिंदुवादी नेताओं की कर चुके हैं हत्या: जयपुर में बम प्लांट कर सरगना को भेजना था Video

राजस्थान पुलिस की ATS और SOG विंग ने बुधवार (30 मार्च 2022) को चित्तौड़गढ़ जिले से 12 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनके नाम जुबेर, सैफुल्लाह और अल्तमस हैं। ये अल सुफा नाम के आतंकी संगठन से जुड़े हैं। इनसे हुई पूछताछ के बाद मध्य प्रदेश की रतलाम पुलिस ने लगभग 25 अन्य लोगों को हिरासत में लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जुबेर, सैफुल्लाह और अल्तमस की गिरफ्तारी के बाद इनके परिजन और रिश्तेदार अपने घरों पर ताला लगा गायब हैं। तीनों के घर रतलाम में हैं। सैफुल्लाह उर्फ़ सरफुद्दीन शेरानीपुर, जुबेर आनंद नगर और अल्तमस ऑफिसर कॉलोनी का रहने वाला है। इन तीनों आतंकियों के 2 अन्य सहयोगियों को राजस्थान ATS ने हिरासत में ले लिया है।

तीनों आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद इनके नेटवर्क पर राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस मिल कर छापेमारी कर रही है। इस नेटवर्क के कई संदिग्धों के हवाई जहाज से भी भागने का अंदेशा है, जिसके चलते भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है। इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में उज्जैन, इंदौर, मंदसौर और नीमच जिलों में छापेमारी की जा रही है। इस मामले में NIA भी सक्रिय हो गई है। बताया जा रहा है कि NIA के अधिकारी जयपुर पहुँचने वाले हैं।

सैफुल्लाह, अल्तमस और जुबेर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तीनों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला है। तीनों आतंकी इससे पहले हिंदुवादी नेताओं की हत्या में शामिल रह चुके हैं। रतलाम में वर्ष 2017 में तरुण सांखला की हत्या में जुबेर और अल्तमस शामिल थे। सैफुल्लाह उर्फ़ सरफुद्दीन साल 2014 में हुई कपिल की हत्या में आरोपित है।

जिस कार में विस्फोटक मिला वह इमरान अंसारी के नाम से रजिस्टर्ड है। इमरान भी रतलाम का ही रहने वाला है। जयपुर में बम प्लांट कर आतंकियों को उसका वीडियो बनाना था और उसे अपने आका को व्हाट्सएप पर भेजना था। गिरफ्तारी के दिन पुलिस ने चेकप्वाइंट पर रोका तो आतंकियों ने अपनी कार की स्पीड बढ़ा दी। आखिरकार पुलिस ने कार के आगे बैरियर अड़ा दिया। पकड़े जाने के बाद पुलिस को रिश्वत की भी पेशकश की। कोर्ट ने तीनों आरोपितों को 8 दिन के रिमांड पर भेज दिया है। आगे की जाँच ATS कर रही है।

आतंकी संगठन अल सुफा लगभग 50 चरमपंथियों का समूह है। यह अक्सर स्लीपर सेल की भूमिका में रहता है और युवाओं को आतंकवाद के लिए बरगलाता है। साल 2014 में इस संगठन के लोगों ने रतलाम के महू रोड बस स्टैंड पर बजरंग दल के नेता कपिल राठौड़ और उनकी होटल पर काम करने वाले पुखराज की हत्या कर दी थी। सितम्बर 2017 में इसी से जुड़े लोगों ने रतलाम में ही तरुण सांखला की गोली मार कर हत्या कर दी थी।

सत्ता के लिए इमरान खान ने दिखाया भारत का डर, कहा- जो राहिल शरीफ PM पद के दावेदार हैं उन्हें प्रधानमंत्री मोदी बता चुके हैं दहशतगर्द

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) में सियासी हालत पूरी तरह से बिगड़े हुए हैं और विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद उनकी सरकार पर संकट छा गया है। इस बीच पीएम इमरान खान (Imran Khan) ने गुरुवार (31 मार्च 2021) को पाकिस्तान की जनता को संबोधित किया। इस दौरान इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का डर भी लोगों को दिखाया। उन्होंने कहा कि न तो वे एंटी इंडियन हैं और न ही एंटी अमेरिकन। उन्होंने कहा कि ना वे किसी के सामने झुकेंगे और न ही अपनी कौम को झुकने देंगे।

पाक पीएम ने दावा किया कि वो इंसाफ, खुद्दारी के लिए राजनीति में आए थे। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम कौम अल्लाह के अलावा किसी और के सामने नहीं झुकती। मुस्लिम कौम किसी की भी गुलामी नहीं करेगी। इमरान खान ने कहा, “मैं आजादी के बाद पैदा हुए देश की पहली पीढ़ी से हूँ। पाकिस्तान मुझसे केवल 5 साल बड़ा है।” पाक पीएम अपने आपको खुशनसीब मानते कहा कि अल्लाह ने उन्हें दौलत, शोहरत सब कुछ दिया है।

उन्होंने कहा, “जब मैं पीएम बना था तो मैंने ये फैसला किया था कि हमारी कौम की फॉरेन पॉलिसी आजाद होगी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता है कि हम किसी से दुश्मनी नहीं करेंगे। मैं वो पाकिस्तानी व्यक्ति हूँ, जिसे हिंदुस्तान के सबसे ज्यादा लोग जानते हैं।” इसके साथ ही इमरान ने इंग्लैंड को अपना दूसरा घर बताया। इमरान खान ने कहा कि जब ड्रोन हमले हुए और इसके खिलाफ धरने दिए तो उन्हें ‘तालिबान खान’ तक कहा गया। उस वक्त पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने अमेरिका की नाराजगी के डर से कुछ नहीं कहा।

इमरान खान ने यह भी आरोप लगाया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ रहे राहिल शरीफ को दहशतगर्द कहा था, जबकि नवाज शरीफ पीएम मोदी से छिप-छिप कर मिलते थे। इमरान खान ने कहा, “मैं क्रिकेटर रहा हूँ। मैंने आखिरी गेंद तक संघर्ष करना सीखा है और आखिरी वक्त तक संघर्ष करूँगा।”

पुर्तगालियों द्वारा नष्ट किए हिंदू मंदिरों और धरोहरों का पुनर्निर्माण कराएगी गोवा सरकार: CM सावंत ने बजट में किया ₹20 करोड़ का प्रावधान

गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही प्रमोद सावंत (Goa CM Pramod Sawant) एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने सनातन संस्कृति के प्रतीक मंदिरों के पुनरुद्धार पर ध्यान देते हुए पुर्तगालियों के समय में नष्ट किए गए हिंदू मंदिरों और विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया है।

अपने बजट भाषण में सीएम सावंत ने कहा, “हमारे पूजा स्थल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। गोवा में कई स्थानों पर, हम कई मंदिरों को जीर्ण और उपेक्षित देख रहे हैं। पुर्तगाली शासन के दौरान इन सांस्कृतिक केंद्रों को नष्ट करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कोशिशें की गई थीं। पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए हमने इन मंदिरों और स्थलों के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।”

बता दें कि यह राज्य सरकार द्वारा अपनी तरह का किया गया पहला बजट प्रावधान है। पिछले साल मंगेशी पर्यटन परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा था कि पुर्तगाली शासन के दौरान नष्ट किए गए मंदिरों को फिर से पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

दिसंबर 2021 में उन्होंने कहा था, “वरना के महालसा नारायणी मंदिर की तरह पुर्तगालियों द्वारा अपने शासन के दौरान नष्ट किए गए सभी मंदिरों को बहाल करने की जरूरत है और इसकी प्रक्रिया गोवा की मुक्ति के 60वें वर्ष के अवसर पर शुरू होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा था, “मैं आपसे हिंदू संस्कृति और मंदिर संस्कृति को संरक्षित करने और इसे बहाल करने में मदद करने के लिए शक्ति माँग रहा हूँ।”

तीन मुफ्त सिलेंडर देने का वादा किया पूरा

सीएम प्रमोद सावंत ने प्रदेश की जनता को साल में तीन मुफ्त गैस सिलेंडर देने का भी वादा पूरा किया है। उन्होंने राज्य के बजट 2022-23 में सालाना एलपीजी सिलेंडर के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

कैबिनेट में फैसला हुआ है कि जल्द ही इस फैसले को लागू किया जाएगा।

‘वो सभी मुस्लिमों को आतंकी बनने के लिए उकसाता है’: केंद्र सरकार ने जाकिर नाइक के इस्लामी संगठन IRF को किया 5 साल के लिए बैन

कट्टरपंथी इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के खिलाफ भारत सरकार ने शिकंजा कस दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार 30 मार्च 2022 को नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRA) को अवैध घोषित करते हुए पाँच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। विवादित उपदेशक पर अपने उपदेशों के जरिए लोगों को चरमपंथी और आतंकी बनाने का आरोप है।

इस संगठन के संस्थापक जाकिर नाइक ही हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मसले को लेकर 15 नवंबर 2021 को ही एक अधिसूचना जारी की थी। हाल में ट्रिब्यूनल ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत केंद्र सरकार के रूख को सुना और इस मामले में 9 मार्च 2022 को अपना फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने जाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को बैन करने के लिए अधिसूचना जारी की।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, “आईआरएफ के संस्थापक जाकिर नाइक आतंकियों की तारीफ करते हैं औऱ ऐलान करते हैं कि हर मुस्लिम को आतंकी होना चाहिए। उनके भाषण आपत्तिजनक हैं। आत्मघाती बम विस्फोटों को सही ठहराने, हिंदू धर्म, हिंदू देवी देवताओं समेत दूसरे धर्मों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करके जबरन इस्लामिक धर्मान्तरण को बढ़ावा दे रहा है।”

केंद्र की अधिसूचना में आगे कहा गया है, “जाकिर नाइक भारत और विदेशों में मुस्लिम युवाओं और आतंकवादियों को आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए उकसाता रहा है। गुजरात, कर्नाटक, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र और ओडिशा में आईआरएफ, इसके सदस्यों और सहानुभूति रखने वालों की अवैध गतिविधियाँ देखने को मिली हैं।”

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, “ये गतिविधियाँ आईआरएफ और उसके लोगों द्वारा समुदाय में जानबूझकर नफरत का स्थायीकरण प्रतीकात्मक हमले का एक रूप है। उपरोक्त मैटीरियल से पता चलता है कि यह आईआरएफ को अवैध संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त है।”

गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ट्रिब्यूनल में पेश हुए और दलीलें पेश कीं। उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि ऐसे कई सारे सबूत हैं, जिनमें जाकिर नाइक वीडियो के जरिए अपनी मजहबी तकरीरों व विभिन्न सोशल मीडिया साइटों के जरिए अपने फॉलोवर्स को भड़काता है।

दलीलों को सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, “ट्रिब्यूनल संतुष्ट है कि आईआरएफ पर उक्त प्रतिबंध लगाने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं क्योंकि इसकी गैरकानूनी गतिविधियाँ कई तरीकों से चल रही हैं और ये भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता, सुरक्षा और कारणों के लिए हानिकारक हैं इससे भारत के खिलाफ असंतोष बढ़ाया जा रहा है।”

इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने 15 नवंबर 2021 की अधिसूचना की पुष्टि की। ट्रिब्यूनल का मानना है कि रिकॉर्ड पर रखे गए सबूत जाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैरकानूनी साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

जाकिर नाइक के इस्लामी उपदेशों के हिंसक रिजल्ट

जाकिर नाइक के जहरीले भाषणों का लोगों पर बहुत ही बुरा असर हो रहा है। 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक विस्फोट हुआ था, जिसमें शामिल आतंकियों ने ये माना था कि वो जाकिर नाइक के उपदेशों से प्रभावित थे। इसी तरह से 2019 में मलेशिया में इस्लामिक उपदेशक ने मलेशिया में हिंदुओं और चीनी मलेशियाई लोगों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी की थी, जिसके बाद उसके भाषणों पर रोक लगा दी गई थी। उससे घंटों की पूछताछ भी हुई थी। गौरतलब है कि जाकिर नाइक मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भारत में वॉन्टेड है। उसके पीस टीवी को भारत सरकार पहले ही ऑफ एयर कर चुकी है।

‘पहाड़न है, घंटे के हिसाब से देती है…’ को लेकर यूट्यूबर भुवन बाम पर NCW ने दिए FIR के आदेश, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और MEIT लेंगे एक्शन

कॉमेडी के नाम पर द्विअर्थी संवाद करने वाले यूट्यूबर भुवन बाम की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पहाड़ी महिलाओं पर भुवन द्वारा की गई टिप्पणी पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है और इस मामले में कार्रवाई को लेकर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी है। इसके साथ ही केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस संबंध में गुरुवार (31 मार्च 2022) को ट्वीट कर कहा, “NCWIndia ने इसका संज्ञान लिया है। अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में सख्त कार्रवाई करने के लिए लिखा है। NCW ने महिलाओं की गरिमा के उल्लंघन के लिए YouTube चैनल के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव को भी लिखा है।”

बता दें कि भुवन बाम का वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया और इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। पहाड़ी पांडा चैनल के आशीष नौटियाल ने इस क्लिप को साझा करते हुए महिला आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा से सवाल किया है कि क्या वो इस तरह महिला विरोधी टिप्पणी करने वाले भुवन बाम के ख़िलाफ़ कार्रवाई के निर्देश दे सकती हैं।

भुवन बाम का विवादित वीडियो

25 मार्च 2022 को ‘बीबी की वाइन्स’ नाम के अपने यूट्यूब चैनल पर भुवन बाम ने एक वीडियो अपलोड किया था। ‘ऑटोमैटिक गाड़ी’ वाले टाइटल के साथ अपलोड किए गए इस वीडियो में भुवन बाम को पिता के कैरेक्टर में गाड़ी के नाम पर द्विअर्थी बातें करते सुना जा सकता है। वे कहते हैं- “दो लाख का बजट है मेरा। कोई मॉडल बढ़िया बताइए।” इसके बाद सामने से सवाल-जवाब होते हैं और पहाड़न शब्द आता है और फिर वीडियो में ‘कितना देती है’… ‘पीछे से भी ले सकते हैं’ … ‘जिगोलो’ जैसे शब्द यूज करते सुना जा सकता है।

बुधवार (30 मार्च) तक इस वीडियो को 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है। वहीं, इसे 1.9 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं। भुवन बाम का चैनल भी भारत के जाने माने यूट्यूब चैनल्स में से एक है। उनके खुद 25.3 मिलियन सब्सक्राइबर हैं। हालिया वीडियो उनकी 7 मिनट 15 सेकेंड की है। इसमें पहाड़न महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी को 5 मिनट 39 सेकेंड के बाद सुन सकते हैं। यही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है।

निकाह में निदा खान को देख लगाए गए थे बीजेपी छोड़ने के नारे, कहा- पुलिस नहीं आती तो हो जाती लिंचिंग, शौहर शिरान रजा समेत 6 लोगों पर FIR

तीन तलाक की लड़ाई लड़ने वाली आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान को एक बार फिर से विरोध का सामना करना पड़ा है। इस बार शादी समारोह में पहुँची निदा को देखकर भाजपा छोड़ने के नारे लगाए गए। मैरिज होम से बाहर करने का मामला सुर्खियों में आया है। पुलिस को दी तहरीर में निदा ने खुद और परिवार पर जानलेवा हमले का आरोप भी लगाया है।

निदा खान आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी चलाती हैं। पिछले दिनों निदा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की तो अब उनके विरोधी गुस्से में हैं। निदा खान ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि वो अपने मामा की बेटी की शादी में 26 मार्च को पीलीभीत रोड स्थित एक मैरिज होम पहुँची थीं। वहाँ कुछ लोगों ने भाजपा छोड़ने का दबाव बनाया और नारे लगाने लगे। शादी में परिवार के सदस्य भी पहुँचे थे। 

भाजपा नेत्री निदा खान ने कहा, “एक पारिवारिक शादी के दौरान, मेरे रिश्तेदारों ने मुझे बीजेपी छोड़ने के लिए मजबूर किया। मैं भीड़ से घिरी हुई थी और मुझे मामूली चोटें आईं। उन्होंने कहा कि बरेली का कोई भी मुस्लिम बीजेपी का समर्थन नहीं करता है क्योंकि यह गैर-मुस्लिम पार्टी है लेकिन तुमने इसके लिए प्रचार किया है जो गैर-मुस्लिम है। मैंने FIR दर्ज कराई है।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “मामू के बेटे की शादी में गई थी, जहाँ मुझे BJP से तौबा करने के लिए कहा गया। 3 तलाक को लेकर भी मेरी लड़ाई चली है। उन्होंने (मेरे पति ने) कोर्ट में तेज़ाब फेंकने तक की धमकी दी है। अगर शादी में पुलिस समय पर नहीं आती तो वह लोग लिंचिंग जैसी घटना कर सकते थे।”

बरेली के SSP रोहित सिंह साजवान ने मामले पर जानकारी देते हुए बताया, “शिकायतकर्ता ने एक विशेष पार्टी में शामिल होने के कारण रिश्तेदारों द्वारा उसे सामाजिक बहिष्कार की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई। 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जाँच की जा रही है।”

कौन है निदा खान

निदा खान का 2015 में निकाह शीरान रजा खां से हुआ था। लेकिन साल भर पहले ही दोनों का तलाक हो गया। वह विवादित मौलाना तौकीर रजा की बहू हैं, जिसने विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। निदा खान ने उन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उन्होंने तौकीर रजा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिसने अपने ही खानदान की बहू का सम्मान नहीं किया वो कॉन्ग्रेस के ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कैम्पेन का समर्थन करने का दिखावा कर रहे हैं। निदा खान ने दो टूक कहा कि महिलाओं को सम्मान तो मोदी सरकार में मिला है।

उन्होंने बताया कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और पढ़ाई से रोका गया था। इस मामले में निदा ने ससुराल वालों पर मुकदमा भी किया था। निदा को इस्लाम से खारिज करने का फतवा भी दिया गया था। निदा खान ने तीन तलाक मामले में लंबी लड़ाई लड़ी। निदा खान का कहना है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ज्वाइन की तो विरोध शुरू हो गया। उनके चुनावी प्रचार से जुड़ी एक वीडियो सोशल मीडिया पर एडिट करके धार्मिक भावनाओं का गलत इस्तेमाल किया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। 

तौकीर रजा खान के खानदान की बहू निदा तीन तलाक को लेकर अपना डर बयाँ करते हुए कहा था, “जब भी मेरा पति बाहर जाता था तो मैं इस बात से डरी रहती थी कि मेरा पति घर लौटेगा तो मैं उसके निकाह में रहूँगी या नहीं। इसके खिलाफ लड़ाई में भाजपा सरकार ने साथ दिया, महिलाओं को सुरक्षा दी। तौकीर रजा महिलाओं को इस्तेमाल का सामान समझते आए हैं और आज भी वही कर रहे हैं। अगर आज हम जिंदा है तो वो केवल भाजपा की ही देन है।”

देशसेवा कर रहे बेदाग छवि के रतन टाटा को मिले भारत रत्न: दिल्ली HC ने याचिका खारिज कर कहा- ये मेरा काम नहीं, सरकार से कहिए

टाटा समूह (TATA Group) के पूर्व चेयरमैन एवं उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) को ‘भारत रत्न’ से सम्मान सम्मानित करने की माँग वाली याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने गुरुवार (31 मार्च 2022) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या वो इसके लिए फैसला लेगा?

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की पीठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को भारत रत्न (देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान) देने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने का काम अदालत का नहीं है। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा, “यह किस तरह की याचिका है? क्या यह अदालत (सरकार को भारत रत्न देने का) निर्देश देने के लिए है?”

इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से ‘कम से कम अनुरोध’ करने का आग्रह किया। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश सांघी ने कहा, “जाइए और सरकार से इसके लिए अनुरोध कीजिए। अदालत के एक्शन लेने का सवाल ही कहाँ है? अगर आप चाहते हैं तो सरकार से अनुरोध कीजिए। हम कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं।” कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले में वह कुछ नहीं कर सकता। अदालत के इस रुख को देखकर याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली।

बेदाग है रतन टाटा का जीवन

उद्योगपति रतन टाटा को भारत रत्न देने की माँग को लेकर याचिका राकेश नाम के व्यक्ति ने दायर की थी। राकेश खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं। उनका कहना है कि रतन टाटा ‘भारत रत्न’ के हकदार हैं, क्योंकि वो देश की सेवा कर रहे हैं और उनका जीवन बेदाग है। याचिका में कोरोना के दौरान रतन टाटा के योगदान का भी उल्लेख किया गया है।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 3 राज्यों में AFSPA का दायरा घटा, जानें क्या है ये कानून और कहाँ-कहाँ किया गया है इसे लागू

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दशकों बाद पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड, असम और मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार (31 मार्च 2022) को सिलसिलेवार तीन ट्वीट कर यह जानकारी दी। गृहमंत्री ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अहम फैसला लिया गया है। भारत सरकार ने दशकों बाद नागालैंड, असम और मणिपुर राज्य में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत अशांत क्षेत्रों का दायरा कम करने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने लिखा, “अफस्पा (AFSPA) के इलाकों में सरकार के शांति लाने के लिए किए जा रहे प्रयास मददगार रहे हैं। इन इलाकों में उग्रवाद पर भी नियंत्रण बढ़ा है। कई समझौतों के कारण सुरक्षा के हालात और विकास ने भी कानून हटाने में मदद की।” इसके बाद वह (अमित शाह) अपने अंतिम ट्वीट में पीएम मोदी को धन्यवाद करते हुए लिखते हैं, “पीएम मोदी की प्रतिबद्धता के कारण हमारा पूर्वोत्तर क्षेत्र, जो दशकों से उपेक्षित था, अब शांति, समृद्धि और अभूतपूर्व विकास के एक नए युग का गवाह बन रहा है। मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूर्वोत्तर के लोगों को बधाई देता हूँ।”

क्या है अफस्पा

सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को केवल अशांत क्षेत्रों में ही लागू किया जाता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो यहाँ भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया था। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है। आसान शब्दों में अफस्पा कानून को ऐसे समझे। यह किसी भी राज्य या किसी भी क्षेत्र में तभी लागू किया जाता है, जब राज्य या केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ अर्थात डिस्टर्बड एरिया एक्ट (Disturbed Area Act) घोषित कर देती है। इस कानून के लागू होने के बाद ही वहाँ सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं। कानून के लगते ही सेना या सशस्त्र बल को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है।

अंग्रेजों के जमाने में लागू कानून को नेहरू की सरकार ने भी जारी रखा

इस एक्ट को सबसे पहले अंग्रेजों के जमाने में लागू किया गया था। उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य बलों को विशेष अधिकार दिए थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने भी इस कानून को जारी रखने का फैसला लिया। फिर वर्ष 1958 में एक अध्यादेश के जरिए AFSPA को लाया गया और तीन महीने बाद ही अध्यादेश को संसद की स्वीकृति मिल गई। इसके बाद 11 सितंबर 1958 को AFSPA एक कानून के रूप में लागू हो गया।

कानून को लागू करने के पीछे का तर्क

इस कानून को लागू करने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि इसे उन इलाकों में लागू किया जाता है, जिनमें उग्रवादी गतिविधियाँ होती रहती हैं। भारत और म्यांमार की सीमा के दोनों तरफ कई अलगाववादी विद्रोही संगठनों के ठिकाने हैं। नागालैंड के अलावा मणिपुर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सक्रिय है, जो सेना पर हमले करती रहती है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी अलगाववादी संगठन सक्रिय है। इन संगठनों से निपटने और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को अफस्पा के तहत विशेष अधिकार दिए गए।

इन राज्यों में लागू है AFSPA कानून

AFSPA को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में लागू किया गया था। लेकिन, समय-समय पर परिस्थितियों को देखते हुए हटा भी दिया जाता है। मणिपुर में अफस्फा के खिलाफ इरोम चानू शर्मिला ने 16 साल तक अनशन किया था। नवंबर 2000 में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के सामने एक बस स्टैंड के पास दस लोगों को सैन्य बलों ने गोली मार दी थी। इस घटना का विरोध करते हुए उस वक्त 29 वर्षीय इरोम ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, जो 16 साल तक चली। अगस्त 2016 में उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करके राजनीति में आने का फैसला किया और चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले थे। बताया जाता है कि उन्हें सिर्फ 90 वोट मिले थे, जबकि 143 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था।

बंगाल में मोबाइल के लालच में अपने बॉयफ्रेंड अली के सामने नाबालिग बहन को परोसा, रेप कर प्राइवेट पार्ट में रॉड डाला, हालत नाजुक

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के उत्तरी 24 परगना जिले के बसीरहाट क्षेत्र में 11 साल की एक नाबालिग छात्रा के साथ रेप की खबर है। इस मामले में पीड़िता की बुआ और शहर अली सदर नाम के आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों ने छात्रा के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दिया था। आरोपित पर पॉक्सो एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस को बच्ची बेहोशी की हालत में एक पार्क के पास मिली थी, जहाँ से उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। छात्रा अपने घर से गुरुवार (24 मार्च) को लापता हुई थी।

इस घटना में यूथ अगेंस्ट रेप नाम के हैंडल द्वारा दावा किया जा रहा है कि आरोपित शहर अली सदर गिरफ्तार दूसरी आरोपिता का बॉयफ्रेंड है। उसने पीड़िता के साथ रात बिताने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड को एक मोबाईल गिफ्ट देने का वादा किया था। इसी फोन के लालच में आरोपिता ने ममेरी बहन लगने वाली इस बच्ची को आरोपित के पास छोड़ दिया था। पीड़िता निहालपुर की रहने वाली थी, जो अपनी बुआ के घर मटिया आई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक लापता होने के अगले दिन बच्ची मटिया के एक पार्क में मिली थी। पुलिस ने प्रथम दृष्टया रेप होने की बात स्वीकार किया था। बच्ची को बशीरहाट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहाँ से उसे कोलकता के आरजी कर अस्पताल रेफर कर दिया गया। मामले में शनिवार (26 मार्च) को गिरफ्तार दोनों आरोपितों को बशीरहाट की एक अदालत ने 6 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना पर एक महिला वकील ने हाईकोर्ट में PIL दाखिल की है। PIL में इस घटना की तुलना दिसम्बर 2012 में हुए दिल्ली के निर्भया गैंगरेप से किया गया। महिला वकील ने हाईकोर्ट को बताया, “पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड तक डाली गई है। उसके आंतरिक अंगों को काफी नुकसान पहुँचा है। पुलिस नाबालिग बच्ची से किसी डॉक्टर या अन्य कार्यकर्ता को मिलने भी नहीं दे रही है।” महिला वकील द्वारा इस मामले की जाँच CBI या हाईकोर्ट की निगरानी में किसी विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा कराए जाने की माँग की।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भरद्वाज की बेंच ने एडवोकेट जनरल एस एन मुखर्जी को इस केस में जाँच की स्थिति से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में राज्य सरकार को केस डायरी और मेडिकल रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत होने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 अप्रैल (सोमवार) को तय की गई है।

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया, “बच्ची की हालत पर मेडिकल बोर्ड द्वारा गठित 5 डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। बच्ची की हालत स्थिर है। साथ ही उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। राज्य पुलिस बल इस मामले के निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है। हमें बच्ची के स्वास्थ्य का मेडिकल बुलेटिन जारी करने में कोई आपत्ति नहीं है।”

भाजपा ने नुसरत जहाँ की ख़ामोशी पर उठाए सवाल

भाजपा ने पीड़ित बच्ची के लिए न्याय की माँग की है। रविवार (27 मार्च) को भाजपा की इंग्लिश बाजार के विधायक श्रीरूपा मित्रा ने एक प्रतिनिधि मंडल के साथ पीड़ित बच्ची के परिवार से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होने बताया, “पीड़िता को स्त्रीरोग विभाग में रखा गया है। सिक्युरिटी गार्डों ने हमें देख कर अस्पताल के दरवाजे बंद करने शुरू कर दिए। हमें बताया गया कि हम बच्ची से नहीं मिल सकते। इस मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहाँ क्यों चुप हैं जबकि पीड़िता बच्ची भी अल्पसंख्यक समुदाय की है।”