Home Blog Page 2856

कश्मीरी पंडितों ने ‘फूल’ को साबित किया फूल ताकि केजरीवाल को याद आए अपनी भूल, फिर भी दिल्ली के CM ने नहीं सुधारी ‘भूल’

बीते 32 वर्षों से अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे कश्मीरी पंडितों में से कुछ जब बुधवार (30 मार्च, 2022) को मध्य दिल्ली के सिविल लाइंस के 6, फ्लैगस्टाफ़ मार्ग स्थित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के पास पहुँचे तो उन्हें काफी पहले ही रोक दिया गया। विरोध प्रदर्शन की अनुमति के बावजूद उन्हें सीएम आवास के आसपास भी नहीं फटकने दिया, जबकि वो काफी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे।

हमने वहाँ पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती देखी, जिन्होंने बैरिकेट्स लगा कर सीएम आवास की तरफ जाने वाले रास्ते को रोक रखा था और कश्मीरी पंडितों को आगे नहीं जाने दे रहे थे। दिल्ली पुलिस के जवान भी कह रहे थे कि क्या कर सकते हैं, हमारी मजबूरी है। मजबूरी इसीलिए, क्योंकि ऊपर से ऐसा ही आदेश था। दिल्ली विधानसभा में जिस तरह ‘The Kashmir Files’ और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर ठहाके लगे, उससे ये कश्मीरी पंडित नाराज़ थे।

वो AAP सुप्रीमो को फूल देना चाहते थे। ये अपने साथ पुष्प के गुच्छे लाए थे। अब भला किसी को फूल भेंट करने से अच्छा गेस्चर क्या दिखाया जा सकता है? लेकिन, पुलिस ने उन्हें मना कर दिया। कश्मीरी पंडितों ने अंत में कहा कि उनमें से किसी एक को मुख्यमंत्री को फूल सौंपने के लिए अंदर जाने की अनुमति दी जाए, तो इस पर भी उनकी बात नहीं मानी गई। कश्मीरी पंडित समाज की महिलाएँ पूछ रही थीं कि ये फूल नहीं, बम है क्या जो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है?

कश्मीरी पंडित समाज की महिलाओं ने हाथ से पुष्प गुच्छ को हिला-हिला कर पुलिसकर्मियों को दिखाया कि ये फूल ही है, उसके भीतर कोई खतरनाक चीज नहीं है। ये एक भावुक कर देने वाला दृश्य था। जिन्हें 32 वर्ष पहले उनके अपने ही घर और प्रदेश से भगा दिया गया, हत्याएँ और बलात्कार की कई घटनाएँ हुईं, फिर उनके नरसंहार पर ठहाके लगाए गए – उन्हीं कश्मीरी पंडितों को साबित करना पड़ रहा था कि उनके हाथ में फूल है, बम नहीं।

खैर, अंत में प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडितों ने दरख्वास्त की कि कम से कम उनका मान रख लिया जाए और कोई अधिकारी सीएम आवास की तरफ से आकर उनसे ये फूल ले लें। लेकिन, हमारे सामने पुलिसकर्मियों ने किसी से बात की और फिर कहा कि इसकी भी अनुमति नहीं है। हमने उन पुलिसकर्मियों से पूछा कि आप ही इनसे ये पुष्पगुच्छ लेकर सीएम को क्यों नहीं दे देते, इस पर उन्होंने कहा कि इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि उन्हें फिर इन फूलों पर वहीं रखना पड़ेगा।

अंत में विरोध प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडितों ने उन फूलों को वहाँ रखे गए बैरिकेड्स पर ही लगा दिया। एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी ठीक रहें, वो इसकी प्रार्थना करती हैं। इन महिलाओं ने अरविंद केजरीवाल को ‘Get Well Soon’ कहते हुए दिखाया कि पुलिस वालों ने इन फूलों को वेरिफाई किया है और इसमें सब ठीक है। इसके बाद उन्होंने बैरिकेड्स पर फूल लगाते हुए कहा – हमारी शुभकामनाएँ हैं कि अरविंद केजरीवाल जल्द स्वस्थ हो जाएँ, दिमाग से भी स्वस्थ हो जाएँ।

उन्होंने कहा, “ये जो हमारा नरसंहार हुआ है, बच्चों तक, ये कोई मजाक या प्रोपेगंडा नहीं है। कॉमेडी भी नहीं है, जिस पर आपके सदन में ठहाके लगा कर हँसे गए। हम एक जीती-जागती व्यथा हैं जो 32 वर्षों से झेल रहे हैं। हम इस नरसंहार के सर्वाइवर्स हैं। ‘The Kashmir Files’ एक माध्यम है, उस व्यथा को दुनिया तक पहुँचाने के लिए। आपने सरेआम नरसंहार के पीड़ितों का मजाक उड़ाया है। हम सब उस नरसंहार के लिए न्याय चाहते हैं।”

कुसुम पंडिता नाम की कश्मीरी पंडित महिला ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “अभी हाल ही में केजरीवाल साहब ने जो कश्मीरी पंडितों का मजाक उड़ाया है, हम उसी के लिए यहाँ पर इकट्ठा हुए हैं। हमें उनसे यह उम्मीद नहीं थी कि केजरीवाल साहब ऐसा मजाक उड़ाएँगे। उनको ये समझना चाहिए कि हम पिछले 32 सालों से जिस दर्द से गुजर रहे हैं, हम अपना घर छोड़कर आए हैं, तो उनको ये सब नहीं करना चाहिए था। हमलोग सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि वह हमारे पूरे समाज से एक बार माफी माँगें।”

लंदन जाने से रोके जाने पर प्रोपेंगेंडा पत्रकार राणा अय्यूब पहुँचीं दिल्ली HC, कहा- जल्दी कीजिए मुझे विदेश जाना है, ‘चंदा घोटाले’ में गिरी है गाज

वामपंथी और कट्टर इस्लामी गिरोह की कथित पत्रकार और वाशिंगटन पोस्ट के कॉल्मनिस्ट राणा अय्यूब ने जाँच एजेंसियों द्वारा लंदन जाने से रोके जाने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। अय्यूब ने कोर्ट से उन्हें देश से बाहर जाने देने की इजाजत माँगी है। इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने 29 मार्च को उन्हें लंदन जाने से रोक दिया था।

देश से बाहर जाने पर लगाई गई जाँच एजेंसियों की रोक के खिलाफ कथित पत्रकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच के समक्ष समक्ष याचिका दायर की। अय्यूब ने मामले को जल्द से जल्द लिस्टेड करने की माँग करते हुए कहा कि उसे कल ही विदेश जाना है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर इसे सुबह 11 बजे से पहले फाइल किया गया तो कल लिस्टेड हो जाएगा।

गौरतलब है कि 29 मार्च 2022 को राणा अय्यूब ने उन्हें एयरपोर्ट पर रोके जाने का खुलासा खुद ही ट्विटर के जरिए किया। प्रोपेगेंडा पत्रकार ने ट्वीट किया था, “आज मुझे मुंबई में लंदन जाने से रोक दिया गया। जब मैं International Journalism Festival में भारतीय लोकतंत्र और पत्रकारों को डराने-धमकाने पर अपना भाषण देने के लिए लंदन के लिए अपनी फ्लाइट पकड़ने वाली थी। मैंने इसके बारे में कुछ हफ्ते पहले ही सार्वजनिक रूप से कहा था, फिर भी मुझे रोके जाने के बाद ईडी का समन मेरे इनबॉक्स में आ गया।” राणा के ट्वीट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि राणा अय्यूब को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर के कारण देश छोड़ने से रोक दिया गया था।

दरअसल, लोगों की मदद के नाम पर धन की उगाही और उस पैसे की गड़बड़ी करने के मामले में प्रोपेगेंडा पत्रकार राना अय्यूब (Rana Ayyub) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत फरवरी 2022 में बड़ी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने अय्यूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क कर लिया था। ईडी ने कहा था कि राना अय्यूब ने एक साजिश के तहत आम जनता को धोखा दिया है।

ईडी को पता चला था कि कोरोना में मदद के नाम पर राणा अय्यूब ने हजारों डॉलर एकत्र किए थे और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के नाम व्यक्तिगत बैंक अकाउंट्स में जमा कर दिया।

IIM अहमदाबाद के ‘Logo’ से संस्कृत हटाने की तैयारी: विरोध में उतरे 45 प्रोफेसर, कहा- ये हमारी पहचान, बदलाव भारतीयता पर हमला

गुजरात के अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के लोगो को बदला जा रहा है, जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। IIMA द्वारा सिदी सैय्यद मस्जिद की जाली और संस्कृत के पद्य ‘विद्याविनियोगदिविकासः’ (ज्ञान के प्रसार से विकास) से प्रेरित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के लोगो बदलने के खिलाफ संस्थान के ही प्रोफेसर खड़े हो गए हैं। करीब 45 प्रोफेसरों ने इसको लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को पत्र लिखा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में IIMA के डायरेक्टर एरोल डिसूजा ने मीडिया के किसी भी तरह के सवालों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।

एक पत्र की कॉपी ऑपइंडिया को मिली है, जिसमें संस्थान के मेंबर ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि उन्हें लोगों बदलने की प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया। फैकल्टी को इस बात की चिंता सता रही है कि संस्थान का नया लोगो आईआईएम की विरासत और उसके उद्देश्य की पहचान से मेल नहीं खाता है। इस पत्र में प्रोफेसरों ने लिखा, “इसके अलावा दो लोगो का प्रस्ताव किया गया, जिसमें से पहले में संस्कृत मोटो है और दूसरे में नहीं। हमें बताया गया है कि इन लोगो में से एक अंतरराष्ट्रीय माँगों के हिसाब से है और दूसरा घरेलू उद्देश्यों के लिए है। यह फैसला तर्कों से परे है।”

संस्थान के प्रोफेसरों का कहना है कि आईआईएम का मूल लोगो जाली और संस्कृत कविता उसे और उसके भारतीय लोकाचार को परिभाषित करती है। प्रोफेसरों ने तल्ख लहजे में कहा है, “यह हमारे लिए हमारी भारतीयता का प्रतीक है, विद्या के साथ हमारा जुड़ाव ही संस्थान से हमारा जुड़ाव है। देश के ‘विकास’, उद्योग समाज, छात्रों और मैनेजमेंट डिसीप्लीन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। ये हमारा दर्शन और मिशन का वक्तव्य है। इसमें किसी भी तरह का बदलाव हमारी पहचान पर हमला है।”

कई लोगों ने ब्रांड वैल्यू को घटाया: पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया

मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के पूर्व डायरेक्टर बकुल ढोलकिया ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए इस तरह के फैसलों को संस्थान की संस्कृति और मौलिक उल्लंघन बताया है। उन्होंने बोर्ड के उन प्रस्तावों पर विचार करने के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया, जो कि एकेडमिक काउंसिल से आया ही नहीं। ढोलकिया ने इस मसले पर सरकार द्वारा हस्तक्षेप करने की बात की और कहा कि इस फैसले से संस्थान की दशकों पुरानी संस्कृति नष्ट हो रही है।

बहरहाल, संस्थान के इस फैसले का विरोध भी किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से ऑपइंडिया को पता चला है कि इस विशेष समूह द्वारा कुछ ऐसे फैसले और नियुक्तियाँ की गई हैं, जो कि सही नहीं रहे हैं। इसी संस्थान के एक पूर्व छात्र ने ऑपइंडिया को बताया, “आधुनिक दिखने के लिए एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने भी अपना लोगो बदल दिया था। टेक्निकली इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन सही सलाह ली जानी चाहिए थी। अगर बेनीफिसियरीज की जानकारी के बिना ही गुप्त तरीके से लोगो को रजिस्टर किया गया है, तो ये इस कदम के पीछे के मकसद को संदिग्ध बनाता है।”

छात्र ने आगे कहा, “और हाँ, संस्कृत होनी चाहिए। ये तो शैक्षणिक संस्थान का लोगो है।” उन्होंने ये भी कहा कि अगर देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान से इस तरह से लोगो में से संस्कृत को हटाया जाता है तो दूसरे संस्थान भी ऐसा ही कर सकते हैं। पहले से ही हम में से कई भारतीय अपनी विरासत को अहमियत नहीं देते हैं औऱ ऐसा करके आधुनिक दिखने की कोशिश में हम अपने अतीत को एक हिस्से को खत्म कर रहे हैं।

‘नन के साथ बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने किया था रेप, गवाही और सबूतों से होती है पुष्टि’: हाई कोर्ट में पीड़िता और केरल सरकार

केरल के बहुचर्चित नन रेप केस (Nun Rape Case) में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी किए जाने के फैसले को पीड़िता नन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने भी इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील की है। पीड़िता ने बुधवार (30 मार्च 2022) को केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की। लोअर कोर्ट ने मामले में अपील दायर करने की समय सीमा फैसले की तारीख से 90 दिनों की तय की थी।

राज्य सरकार ने अपील में कहा है कि पीड़िता द्वारा दिए गए सबूत, कई गवाहों के बयानों और सबूतों से पुष्टि होती है कि नन के साथ बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने अप्राकृतिक अपराध और बलात्कार किया था। केरल सरकार ने यह भी कहा कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए सबूतों की जाँच किए बिना, ट्रायल जज ने अपने पूर्व निर्धारित सोच के आधार पर फैसला दिया। राज्य सरकार ने अपनी अपील में तर्क दिया है कि सबूतों पर गलत तरीके से विचार कर पीड़िता को बदनाम करने का हर संभव प्रयास किया गया।

याचिका में कहा गया है, “अभियोजन के साक्ष्य को सही परिप्रेक्ष्य में देखे बिना, ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों को गलत समझा और आरोपित को बलात्कार सहित अन्य आरोपों से अनुचित रूप से बरी कर दिया।” अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 5 मई 2014 से 23 सितंबर 2016 तक सेंट फ्रांसिस मिशन होम के गेस्ट रूम में पीड़िता के साथ 13 बार बलात्कार किया गया था। केरल सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि जब एक नन के कौमार्य (virginity) का उल्लंघन होता है, तो उसे जो सामाजिक कलंक झेलना पड़ता है, वह एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक होता है। उसे अपनी ननशिप हमेशा के लिए छोड़नी पड़ती है। उसे बहिष्कृत कर दिया जाता है।

गौरतलब है कि नन ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2014 से 2016 के दौरान 57 वर्षीय मुलक्कल ने उसके साथ कई बार रेप किया। तब मुलक्कल रोमन कैथोलिक चर्च के जलंधर डियोसेस के बिशप थे। लेकिन इसी साल 14 जनवरी को अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत प्रथम, कोट्टायम ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल को इस मामले में बरी कर दिया था। अदालत ने यह फैसला देते हुए कहा था कि आरोपित के खिलाफ अभियोजन पक्ष साक्ष्य मुहैया कराने में असफल रहा।

‘बैसाखी मेला हुआ तो होंगे हिंदू-सिख दंगे’: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कपल को ‘खालसा एड’ के नेता ने दी धमकी, देखें वीडियो

संदिग्ध संस्था खालसा एड (Khalsa Aid के दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई समन्वयक (Coordinator) गुरिंदरजीत सिंह जस्सर ने एक हिंदू-सिख जोड़े को 2 अप्रैल को ‘वैसाखी मेला’ आयोजित करने को लेकर धमकी दी है। द आस्ट्रेलिया टुडे की​ रिपोर्ट के मुताबि​क, पिछले सात दिनों से एडिलेड में रहने वाला यह हिंदू-सिख कपल नरक से भी बदतर जिंदगी जी रहा है। बुधवार (30 मार्च 2022) को बताया गया कि यह कपल ‘दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के पंजाबी ऑस्ट्रेलियाई संघ’ (Punjabi Aussie Association of South Australia) नामक एक संगठन चलाता है। किसान आंदोलन का समर्थन करने वाले कपल का कहना है कि “हम इन धमकियों से बेहद परेशान हैं। हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, हमने डर की वजह से कुछ दिनों से ठीक से खाना भी नहीं खाया है।”

उन्होंने आरोप लगाया है कि उन लोगों ने हमें जान से मारने, उनके व्यवसाय को नुकसान पहुँचाने और सिख समुदाय से बहिष्कार करने की धमकी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हरमीत कौर और उनके पति राजेश ठाकुर पिछले कई सालों से दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की राजधानी एडिलेड में वैसाखी मेले का आयोजन कर रहे हैं, लेकिन इस साल वह चरमपंथी समूहों के निशाने पर हैं।

राजेश ठाकुर ने द ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया, “खालसा एड के प्रमुख जस्सर ने कथित तौर पर कपल को फोन पर मेले का नाम बदलने की धमकी दी थी।” उन्होंने बताया, “जस्सर ने उन्हें फोन पर कहा था कि वैसाखी हमारा (सिखों) त्योहार है। जब मैंने उससे मेले का नाम बदलने से इनकार कर दिया तब वह (जस्सर) फोन पर ही आगबबूला हो गया और उन पर गलत तरीके से त्योहार मनाने का आरोप लगाया।”

“युवा पीढ़ी का यौन शोषण करने का आरोप”

ठाकुर ने बताया कि जस्सर ने उनसे कहा, “तुस्सी मेले विच गिद्दा-भांगड़ा पा के लचरता-कंजर खाना फेलाते हो।” उन्होंने आगे बताया कि गुरिंदर जीत सिंह (Gurinder Jit Singh Jassar) ने मुझ पर आरोप लगाया है कि हम युवा पीढ़ी को गिद्दा-भांगड़ा करने की अनुमति देकर उनका यौन शोषण कर रहे हैं।” ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि जस्सर ने उन्हें मेले का नाम बदलने का लिए पैसों का लालच भी दिया। एक लाइव वीडियो में जस्सर ने कहा कि उन्होंने एक और त्योहार का नाम बदल दिया है। हालाँकि, दूसरे आयोजक से संपर्क करने के बावजूद (वह कथित तौर पर ठाकुर की ओर इशारा कर रहे थे), नाम नहीं बदला गया। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सिखों का एक समूह मेले के दिन आयोजन स्थल पर पहुँचेगा और शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा, “अगर वे हमें वहाँ मिलते हैं, तो हम खुद को रोक नहीं पाएँगे।”

वहीं, जब एक स्थानीय मीडिया चैनल राब्ता रेडियो ने कपल के पक्ष में इस मुद्दे को उठाया, तो उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल कर निशाना बनाया गया। राब्ता रेडियो के संपादक रॉबी बेनीपाल ने कहा कि उनके संगठन को सार्वजनिक रूप से कपल का समर्थन करने के लिए टारगेट किया गया था। उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले एक भारतीय कार्यक्रम में उन्होंने मुझे घेर लिया और मुझसे बदतमीजी से सवाल किया कि मैंने वैसाखी मेले की आयोजक हरमीत कौर को मंच क्यों दिया।”

कपल के दोस्तों को भी खालसा एड संगठन ने धमकी दी

न केवल हिंदू-सिख कपल बल्कि उनके दोस्तों को भी इस खालसा एड संगठन द्वारा परेशान किया गया और धमकी दी गई। कौर ने आरोप लगाया कि एक इंटरनेशनल स्टूडेंट ने अपने एक दोस्त को फोन किया और धमकी दी कि अगर उन्होंने कौर के मेले को देखा तो वे उसके टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। उसने अपने दोस्त से कहा, “हम 300-400 लोग होंगे, मेलबर्न से कुछ लोग तुम्हारे यहाँ आ रहे हैं। हमारा संगठन माइक और स्पीकर भी ला रहा है, हम मंच पर कब्जा कर लेंगे और जो कोई भी हमें रोकने की कोशिश करेगा उसे पता चल जाएगा कि हम कौन हैं।”

कपल ने ऑस्ट्रेलिया की पुलिस से मदद की गुहार लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कर संगठन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। उन्होंने शिकायत में कहा था कि जस्सर का संगठन उन पर कभी भी हमला कर सकता है। उन्होंने मेले में उपस्थित लोगों की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा की व्यवस्था करने को भी कहा है।

“मेला आयोजित किया तो हिंदू-सिख दंगे होंगे”

ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि 22 मार्च को, उन्हें गुरशिमिंदर सिंह मिंटू बराड़ (Gurshiminder Singh Mintu Brar) का फोन भी आया था, जिसने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने मेला आयोजित किया तो हिंदू-सिख दंगे होंगे। उन्होंने कहा, “मिंटू बराड़ ने मुझे बताया कि वह एडिलेड के सभी तीन गुरुद्वारों और कुछ मेलबर्न सिख जत्थे के संपर्क में हैं, जो वैसाखी मेले में आने को तैयार हैं।” द ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, एडिलेड में तीन में से दो गुरुद्वारों ने बराड़ के साथ किसी भी प्रकार का संपर्क होने से इनकार किया है।

भारत में वैसाखी उत्सव में हर कोई नृत्य करता है: ऑस्ट्रेलियाई सिख नेता

वहीं, ऑस्ट्रेलियाई सिख नेता इस जोड़े के समर्थन में आए हैं। सिख नेता और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की सिख सोसायटी के सदस्य अमरीक सिंह थांडी (Amrik Singh Thandi) ने कहा कि कोई भी वैसाखी को अपना त्योहार होने का दावा नहीं कर सकता है। यह हर धर्म का है। एलेनबी गार्डन गुरुद्वारा के अध्यक्ष महावीर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि भारत में वैसाखी उत्सव में हर कोई नृत्य करता है और ऑस्ट्रेलिया में किसी को भी इससे कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। जबकि दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने एक बयान में कहा, “दक्षिण ऑस्ट्रेलिया पुलिस आगामी वैसाखी मेला उत्सव से अवगत है। अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों की तरह, SAPOL आयोजकों के साथ काम करता है। इस दौरान पुलिस भी मौजूद होती है।”

‘सैफ का हर दशक में बच्चा होता है… मैंने कह दिया है 60वें बरस में ऐसा नहीं हो’: करीना कपूर खान ने फिर से अब्बा बनने पर शौहर को चेताया

करीना कपूर खान (Kareena Kapoor khan) उन बॉलीवुड अभिनेत्रियों में शामिल हैं जो अपनी पसर्नल लाइफ भी मीडिया में खूब डिस्कस करती हैं। इसी कड़ी में उन्होंने शौहर सैफ अली खान (Saif Ali Khan) को फिर से बच्चा नहीं करने की चेतावनी दी है। इस कपल के पहले से ही दो बच्चे तैमूर और जहाँगीर हैं। वहीं सैफ के पूर्व पत्नी अमृता सिंह से भी दो बच्चे सारा और इब्राहिम हैं।

वोग इंडिया से बातचीत में करीना ने कहा कि उम्र के हर दशक में सैफ ने बच्चा किया है। 60 साल की उम्र में ऐसा नहीं करने की मैंने उसे हिदायत दी है। उल्लेखनीय है कि सैफ ने पहली शादी अपने से 12 साल बड़ी अमृता सिंह के साथ की थी, जबकि करीना उनसे 12 साल छोटी हैं। दोनों की शादी 2012 में हुई थी। करीना ने 2016 में तैमूर को 21 फरवरी 2021 को अपने दूसरे बेटे जहाँगीर को जन्म दिया था। सैफ की सबसे बड़ी बेटी सारा और सबसे छोटे बेटे जहाँगीर के बीच 25 साल का अंतर है।

वोग से बात करते हुए, करीना ने कहा, “सैफ का हर दशक में बच्चा होता है। 20वें दशक, 30वें, 40वें और अब 50वें दशक में भी उनका एक बच्चा हुआ है। मैंने उनसे कहा है कि अब 60वें बरस में ऐसा नहीं हो। मुझे लगता है कि सैफ जैसे दिमाग वाला व्यक्ति ही चार बच्चों का पिता हो सकता है जो हर मामले में काफी यूनिक है। वह चारों को अपना समय देते हैं। जेह (जहाँगीर) के होने के बाद हम इसे बैलेंस करने का प्रयास कर रहे हैं। हमने एक समझौता किया है कि जब वह फिल्म की शूटिंग करेंगे, तो मैं उस वक्त बच्चों के साथ रहूँगी।” उन्होंने आगे कहा, “सैफ और तैमूर दोस्त की तरह रहते हैं। अगर घर में लोग हैं, तो वह उनका हिस्सा बनना चाहता है। वह एक मिनी सैफ भी है, जो रॉक स्टार बनना चाहता है। वह कहता है कि अब्बा मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं।”

बता दें कि करीना कपूर जल्द ही आमिर खान के साथ लाल सिंह चड्ढा फिल्म में नजर आएँगी। सुजॉय घोष के साथ वह एक सीरीज में भी काम करेंगी, जो ‘द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स’ पर आधारित है और हंसल मेहता के साथ भी एक अन्य प्रोजेक्ट है। सैफ की बात करें तो वह आदिपुरुष और विक्रम वेधा फिल्म में लीड रोल में नजर आएँगे।

कर्नाटक: परीक्षा के दौरान छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति देने वाले 7 शिक्षक निलंबित, 40 मुस्लिम छात्राओं ने छोड़ा एग्जाम

कर्नाटक (Karnataka) के गडग जिले में सात शिक्षकों को SSLC परीक्षा में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब (Hijab/Burqa) पहनने की अनुमति देने के कारण निलंबित कर दिया गया है। इन शिक्षकों के खिलाफ जाँच के आदेश भी दिए गए हैं। परीक्षा गडग के सीएस पाटिल बॉयज हाई स्कूल और सीएस पाटिल गर्ल्स हाई स्कूल में आयोजित की गई थीं। जिन शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है उनमें एसयू होक्कलड, एसएम पत्तर, एसजी गोडके, एसएस गुजामगड़ी और वीएन किवूदार, केबी भजंत्री और बीएस होनागुडी शामिल हैं।

हिजाब पहनकर परीक्षा दे रही छात्राओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अध्यापकों पर कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार (28 मार्च 2022) को जब कुछ मुस्लिम छात्राएँ हिजाब पहनकर परीक्षा हॉल में पहुँचीं तो न तो शिक्षकों ने और न ही सुपरवाइजर ने उन्हें इसे उतारने के लिए कहा। आधे घंटे से अधिक समय तक उन्होंने हिजाब पहनकर परीक्षा दी। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद DDPI जीएम बसवलिंगप्पा को इस घटना के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने छात्राओं को हिजाब पहनकर परीक्षा लिखने की अनुमति देने के लिए शिक्षकों को निलंबित करने का आदेश जारी किया। यह निलंबन मंगलवार (29 मार्च 2022) से प्रभावी हुआ है।

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे सीएस पाटिल हाई स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, “परीक्षा हॉल 4 और 8 में कुछ छात्राएँ हिजाब पहनकर प्रवेश करती हैं। हमने प्रिंसिपल को सूचना दी तो कुछ लोगों ने वीडियो और फोटो खींच लिए। हमने तुरंत उनसे हिजाब हटाने के लिए कहा और उन्होंने ऐसा किया।”

वहीं प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार ने उच्च न्यायालय के अधिनियम, नियम और फैसले के अनुसार निर्देश दिया था। कहा गया था कि हर सरकारी कर्मचारी को नियम का पालन करना होगा। यदि इसका पालन नहीं किया जाता है तो निश्चित रूप से कुछ कार्रवाई करनी होगी और नोटिस दिया जाएगा। हमें उनसे जानकारी लेनी चाहिए और उसके बाद अंतिम कार्रवाई तय की जानी चाहिए। लेकिन, स्पष्ट रूप से उन्होंने सरकार के निर्देशों का पालन नहीं किया है इसलिए यह (कार्रवाई) की गई है।”

कुछ दक्षिणपंथी संगठनों का कहना है कि सरकारी आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर उनके आला अधिकारियों से संपर्क करने के बाद शिक्षकों को निलंबित किया। श्रीराम सेना की जेवरगी तालुका इकाई के अध्यक्ष निंगनगौड़ा मालिपाटिल ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा, “परीक्षा हॉल के अंदर हिजाब पहने छात्रों के वीडियो थे। हमने इस मामले को ब्ल़ॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) के समक्ष उठाया और शिक्षक के निलंबन की माँग की।”

इधर उडुपी जिले की 40 मुस्लिम छात्राओं ने मंगलवार (29 मार्च 2022) को पहली प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा छोड़ दी। छात्राओं का कहना था कि हिजाब विवाद को लेकर हाल में आए उच्च न्यायालय के उस आदेश से वे आहत हैं, जिसमें स्कूल में हिजाब पहनकर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। परीक्षा छोड़ने वाली छात्राओं में कुंडापुर की 24 लड़कियाँ, बिंदूर की 14 और उडुपी सरकारी कन्या पीयू कॉलेज की दो लड़कियाँ शामिल हैं।

ये छात्राएँ कक्षा में हिजाब पहनने को लेकर कानूनी लड़ाई में शामिल थीं। इन लड़कियों ने पहले प्रैक्टिकल एग्जाम भी छोड़ दिए थे। इसी तरह आरएन शेट्टी पीयू कॉलेज में 28 मुस्लिम छात्राओं में से 13 परीक्षा में उपस्थित हुईं। हालाँकि कुछ छात्राएँ हिजाब पहनकर परीक्षा केंद्र पहुँचीं, लेकिन उन्हें प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली। उडुपी के भंडारकर कॉलेज की एक छात्रा ने परीक्षा नहीं दिया। वहीं, नवुंदा सरकारी पीयू कॉलेज की आठ में से छह छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बता दें कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य प्रथा नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में इस पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

‘मेरे पिता को 12 गोली मारी, लाश देखने की हिम्मत नहीं हुई’: कश्मीरी पंडित ने केजरीवाल से पूछा- क्या ये झूठी कहानी, प्रदर्शन में ठहाके लगातीं राखी बिड़ला के भी पोस्टर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर कश्मीरी पंडितों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बारे में हम आपको बता चुके हैं। इसका सबसे मुख्य कारण था विधानसभा में सीएम द्वारा नब्बे के दशक में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को टैक्स फ्री करने से इनकार करते हुए उनके और उनके विधायकों द्वारा इस पर ठहाके लगाना। यहाँ हम आपको उस विरोध प्रदर्शन के अन्य पहलुओं के बारे में भी बताएँगे।

इस विरोध प्रदर्शन को ‘India 4 Kashmir’ के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद संस्था ने बयान भी जारी किया है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार का मजाक बनाने का आरोप लगाया है। संगठन ने बुधवार (30 मार्च, 2022) को हुए विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताते हुए कहा कि ‘I4K’ सीएम केजरीवाल के इस बयान की कड़ी निंदा करती है। ये संगठन कश्मीर में हिन्दुओं को उनकी खोई जमीन वापस दिलाने और साथ ही उन्हें सम्मान के साथ वहाँ बसाने के लिए अभियान चलाता है।

संगठन ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में उसके कार्यकर्ताओं के अलावा सिविल सोसाइटी के कई लोग और कश्मीरी पंडित समाज के लोग भी शामिल थे। संगठन ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जैसे पूर्ण रूप से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का मजाक बनाया, उस पर प्रदर्शनकारियों ने आपत्ति जताई। बयान में ये भी कहा गया है कि उनके द्वारा इस नरसंहार को झूठा बताना कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए एक शॉक की तरह आया है और इस नरसंहार के पीड़ितों और सर्वाइवर्स का ये खुला अपमान है।

कश्मीरी पंडितों ने AAP विधायक राखी बिड़ला की सदन में ठहाके का भी पोस्टर के जरिए किया विरोध

अपने बयान में ‘I4K’ ने कहा, “ये विरोध प्रदर्शन कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के पीड़ितों और बचे हुए लोगों के साथ समर्थन दिखाने का एक शांतिपूर्ण माध्यम था। ऐसे लोग, जिन्हें 1990 के बाद इस्लामी आतंकवाद ने बेघर कर दिया। आईपी कॉलेज से लेकर फ्लैगस्टाफ़ रोड तक प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर-बैनरों के साथ नारेबाजी करते हुए मार्च किया। अरविंद केजरीवाल के लिए गुलाब के फूल लाए गए थे और उनके लिए ‘Get Well Soon (जल्दी ठीक हो जाओ)’ के हस्तलिखित नोट्स भी छोड़े गए।”

‘I4K’ के नेशनल कोऑर्डिनेटर रोहित कचरू ने अरविंद केजरीवाल के बयान से दुःखी होकर कहा, “नरसंहार को नकारने का अर्थ हुआ कि आप इसे सक्रिय कर रहे हैं। ये एक अंतरराष्ट्रीय अपराध है और उससे भी ज्यादा ये अरविंद केजरीवाल ने इस नरसंहार को अंजाम देने वालों का साथ देते हुए पूरी ‘The Kashmir Files’ फिल्म को झूठा बता दिया। हम लोकतंत्र के मंदिर में इस तरह का बयान दिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।”

साथ ही उन्होंने कहा कि जिस दिन ये बयान दिया गया, वो दिल्ली विधानसभा के इतिहास का ‘काला दिन’ था। संगठन के जम्मू-कश्मीर कोऑर्डिनेटर विकास रैना ने बताया कि उनके पिता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उन्हें 12 गोलियाँ लगी थीं। उन्होंने याद किया कि वो अपने पिता के पार्थिव शरीर को भी देखना की हिम्मत नहीं कर पाए थे, जिन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। विकास रैना ने पूछा कि क्या ये एक ‘झूठी कहानी’ है?

बता दें कि ‘कश्मीरी पंडितों का कसाई’ कहे जाने वाले बिट्टा कराटे के खिलाफ मामला अदालत में खुलवाने के लिए विकास रैना ने ही याचिका डाली है। कश्मीर में मारे गए हिन्दुओं को न्याय दिलाने के लिए वो आगे रहते हैं और कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में भाग लेने जयपुर से दिल्ली आईं ‘I4K’ की राजस्थान कोऑर्डिनेटर पूर्णिमा कौर ने भावुक होकर कहा कि एक माँ होने के नाते वो अरविंद केजरीवाल के इस बयान और उनकी हँसी से खासी आहत हैं।

उन्होंने कहा कि ये नरसंहार एक गंभीर मुद्दा है और इस पर इस तरह की हरकतें शोभा नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आ रही है। ‘I4K’ ने स्पष्ट किया कि नरसंहार को नकारने का अर्थ है नरसंहार करना और संगठन हमेशा सच की आवाज़ उठाता रहेगा। साथ ही चेताया कि नरसंहार को नकारने के बाद इसे फिर दोहराया जाता है। साथ ही भारत सरकार से गुहार लगाई कि वो इसे नरसंहार का दर्जा देते हुए एक बिल संसद में पास करे।

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग ‘कुछ काटे गए कुछ जलाए गए, अपने घर से भगाए गए’ और ‘गिरिजा/टपलू जी पर हँसने वालों, शर्म करो-शर्म करो’ जैसे नारे भी लगा रहे थे। साथ ही ‘जिस कश्मीर को खून से सिंचा, वो कश्मीर हमारा है’ जैसे नारे भी लगे। साक्षी मट्टू ने कहा कि ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक संगठन का नहीं है, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय और सिविल सोसाइटी के लोग इकट्ठे हुए हैं। विरोध प्रदर्शन में लोगों ने राखी बिड़ला की तस्वीर भी लगाई हुई थी, जो सदन में अरविंद केजरीवाल के पीछे बैठ कर ठहाके लगा रही थीं।

‘जब 2 थे तो न डरे, आज 302 हैं फिर क्यों डरे’: MCD पर विपक्ष को अमित शाह ने खूब सुनाया, बिल पर लोकसभा की मुहर-दिल्ली में घटेंगे पार्षद

दिल्ली नगर निगम एकीकरण बिल (MCD Aamendment Bill) बुधवार (30 मार्च 2022) को लोकसभा में पारित हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल को सदन के पटल पर रखा। बिल में दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक कर पार्षदों की संख्या 250 तक सीमित करने का प्रस्ताव है। फिलहाल दिल्ली में पार्षदों की संख्या 272 है। बिल पर चर्चा के दौरान शाह ने बताया कि किन कारणों से यह बिल लाने की जरूरत पड़ी। साथ ही विपक्ष के चुनाव से भागने के आरोपों का भी जवाब दिया।

बिल पर चर्चा के दौरान शाह ने कहा, “दिल्ली सरकार एमसीडी के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसके चलते सारे नगर निगम अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए खुद को पर्याप्त संसाधनों से लैस नहीं कर पाते हैं। मैं जो बिल लेकर आया हूँ, उससे दिल्ली नगर निगम को एक किया जाएगा। एक निगम दिल्ली का ध्यान रखेगी और दिल्ली के पार्षदों की संख्या 272 से सीमित कर ज्यादा से ज्यादा 250 किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले ये बँटवारा राजनीतिक उद्देश्य से किया गया था। तीनों निगमों के दस साल चलने के बाद नीतियों के बारे में एकरूपता नहीं है। नीतियों को निर्धारित करने की ताकत अलग-अलग निगमों के पास है। कार्मिकों के बीच भी असंतोष नजर आता है। तब सोच-समझकर बँटवारा नहीं किया गया था, जो लोग चुनकर आते हैं, उन्हें निगम चलाने में परेशानी होती है।”

बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर चुनाव से भागने का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि डीलिमिटेशन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और चुनाव कब होंगे। इसके जवाब में गृहमंत्री शाह ने कहा कि हम चुनाव से नहीं डर रहे हैं, बल्कि चुनाव से वह लोग डर रहे हैं जो अभी तुरंत चुनाव कराने की माँग कर रहे हैं। इन लोगों को लगता है कि अभी आनन-फानन में चुनाव जीत जाएँगे, लेकिन 6 महीने बाद चुनाव हुए तो जीतना मुश्किल है। बीजेपी के शुरुआती दिनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हम तो दो थे तब भी नहीं डरते थे, अब तो 302 हैं फिर क्यों डरें।”

अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, “विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्या कर सत्ता हथियाना हमारी संस्कृति नहीं है। हम अपनी विचारधारा, अपने नेता की लोकप्रियता व सरकार की उपलब्धियों के आधार पर हर जगह चुनाव लड़कर जीतना चाहते हैं। परिवार के आधार पर पार्टी चलाने वालों को लोकतंत्र पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के अन्य नेता लगातार इस मुद्दे पर हमलावर रहे हैं कि एमसीडी चुनाव में हार के डर से भाजपा चुनाव टालने का प्रयास कर रही है। इसके जवाब में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमें चुनाव से कोई डर नहीं है। यूपी चुनाव में आम आदमी पार्टी 349 सीटों पर चुनाव लड़ी और सभी पर उसकी जमानत जब्त हो गई। उत्तराखंड चुनाव में 70 में से 68 सीटों पर आम आदमी पार्टी की जमानत जब्त हुई। वहीं गोवा में 39 में से 35 सीटों पर आम आदमी पार्टी की जमानत जब्त हुई है।

इन चुनावों में कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वह 575 सीटों पर चुनाव लड़ी और 475 पर जमानत जब्त हो गई। वहीं बीजेपी 5 में से 4 राज्य में चुनाव जीती है। शाह ने बताया कि अनुच्छेद-239AA 3B संसद को दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र या इसके किसी भी भाग के बारे में उससे संबंधित किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार देती है।

‘ईशु की शरण में सबको आना होगा’: टॉकिज- श्री वेंकटेश्वरा, फिल्म- राजामौली की RRR, प्रचार- ईसाइयत का; हिन्दू संगठनों ने थिएटर घेरा

छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित श्री वेंकटेश्वरा टॉकिज पर हिंदू संगठनों ने ईसाई धर्मान्तरण के प्रचार का आरोप लगाया है। आरोप है कि SS राजामौली की फिल्म ‘RRR’ के प्रदर्शन के दौरान इंटरवल में ईसाइयत के प्रचार वाला विज्ञापन चलाया जा रहा था। विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसकी जानकारी मिलने पर थिएटर का घेराव किया। सिनेमा हॉल के मैनेजर द्वारा लिखित माफी माँगने के बाद मामला शांत हुआ। घटना बुधवार (30 मार्च 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्री वेंकटेश्वरा टॉकिज में फिल्म आरआरआर चल रही है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि फिल्म में इंटरवल होने के बाद 5 मिनट का एक विज्ञापन दिखाया जाता है। इसमें कहा जाता है कि ‘ईशु की शरण में एक न एक दिन सबको आना होगा’। इसी के विरोध में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया।

हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता के मुताबिक, “टॉकिज में ईसाई मत का प्रचार किया जा रहा था। हमने चेतावनी दी है कि अगर दुबारा ईसाई मिशनरियों का प्रचार किया गया तो टॉकिज बंद करवा दिया जाएगा। टॉकिज प्रबंधन ने हमसे माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि अगर दुबारा ऐसा होता है तो जो कार्रवाई करिएगा वो हमें स्वीकार होगा।”

बताया जा रहा है कि विरोध-प्रदर्शन की सूचना पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी। इस के चलते टॉकिज की सुरक्षा में भारी पुलिस बल तैनात था। भिलाई सिटी के सीएसपी राकेश जोशी के मुताबिक, “टॉकिज के मैनेजमेंट ने लिखित रूप से माफ़ी माँग ली है और दुबारा यह विज्ञापन न चलाने पर सहमति जताई है। इस पूरे मामले का अब पटाक्षेप हो चुका है।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे बजरंग दल के जिला संयोजक रवि निगम से बात की। उन्होंने बताया, “टॉकिज के मालिक मूल रूप से दक्षिण भारत के रहने वाले हैं। वे कई साल पहले यहाँ आ कर स्थायी तौर पर बस गए थे। हमने उनसे फिल्म के बीच में इस तरह का एड चलाने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि यह मुंबई से ही फिल्म की रील में लगकर आया था।”