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अब ग्वालियर में रेप आरोपित के घर पर चला ‘मामा का बुलडोजर’, चॉकलेट के बहाने 11 साल की बच्ची से किया था दुष्कर्म

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) सरकार भी अब यूपी (UP) की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) की राह पर चल पड़ी है। प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तहत ग्वालियर में बलात्कार के आरोपित के घर पर बुलडोजर चलवा दिया गया है। 

शहर के बहोड़ापुर इलाके के सुभाष नगर में दुष्कर्म के आरोपित के अवैध मकान को तोड़ने के लिए जिला प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर पहुँची। इधर प्रशासन की कार्रवाई की सूचना के बाद आरोपित के परिवार की महिलाओं ने घर से निकल कर सड़क पर हंगामा किया। महिलाओं के हंगामे के बाद मौके पर भारी पुलिस बल पहुँच गया, उसके बाद आगे की कार्रवाई की गई।

बता दें कि शहर के बहोड़ापुर इलाके के सुभाष नगर में दुष्कर्म के आरोपित चतुर्भुज राठौर ने अवैध मकान बनाया हुआ था। इसी को लेकर एसडीएम प्रदीप सिंह तोमर के नेतृत्व में आज (31 मार्च 2022) प्रशासन की टीम उसके अवैध मकान को तोड़ने के लिए वहाँ पहुँच गई। आरोपित के परिजन सड़क पर उतरकर हंगामा करने लगे। इसके बाद हंगामा कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया और उसके बाद दुष्कर्म के आरोपित के अवैध मकान को तोड़ने के लिए बुलडोजर चलाया गया।

ट्विटर पर ग्वालियर कलेक्टर ने वीडियो भी शेयर किया गया है, जिसमें आरोपित के घर बुलडोजर चलते हुए देखा जा सकता है। ट्वीट के साथ ही बताया गया कि ग्वालियर शहर के सुभाष नगर बहोड़ा में 65 वर्षीय शख्स ने 11 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया था और इस मामले में वह जेल में है।

बता दें कि 24 मार्च को चतुर्भुज ने चॉकलेट दिलाने के बहाने 11 साल की एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद प्रशासन को सूचना मिली थी कि इस आरोपी ने अवैध मकान का निर्माण किया है। उसके बाद बुधवार को जिला प्रशासन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँची।

पूरे घटनाक्रम पर सीएम शिवराज चौहान ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक ट्वीट में अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा, “मध्य प्रदेश की धरती पर गुंडे, बदमाशों और माफियाओं के लिए कोई जगह नहीं है। प्रदेश छोड़ दो या सुधर जाओ, कोई और रास्ता नहीं है। नहीं सुधरे तो बुलडोजर चलेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार (22 मार्च, 2022) को शहडोल में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन द्वारा सामूहिक दुष्कृत्य के मुख्य आरोपित अब्दुल शादाब उस्मानी के घर पर बुलडोजर चलवा कर उसके अवैध मकान को ध्वस्त कर दिया गया था।

दोस्त अर्जुन के प्यार में पड़ रवि बना ‘रिया’, अब शादी के बाद किन्नरों को सौंप देना चाहता है पति: अमृतसर का मामला

पंजाब (Punjab) के अमृतसर जिले से हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आय़ा है, जहाँ एक लड़के प्यार में पागल दूसरे लड़के रवि ने अपना लिंग बदलवाकर लड़की (ट्रांसजेंडर) बन गया। उसने अपना नाम भी रिया जट्टी रख लिया। लेकिन जिसके लिए लिए उसने अपना जेंडर चेंज कराया, वही उसे अपनाने से इनकार कर रहा है। वो उसे किन्नरों को सौंपना चाहता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना अमृतसर की है और रवि से रिया बना शख्स भी उसी जिले का ही है। जबकि, जिसके लिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया वो जालंधर के जंडियाला का है। हुआ कुछ यूँ कि 3 साल पहले तक रवि (रिया) जालंधर में नौकरी करता था। वहीं पर कंपनी में उसकी मुलाकात जंडियाला के रहने वाले अर्जुन से हुई। धीरे-धीरे दोनों में अच्छी दोस्ती भी हो गई। समय बीता और ये जानते हुए भी कि दोनों समान लिंग वाले हैं, फिर भी दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों समलैंगिक रिश्ते में आ गए।

फिर एक दिन उन दोनों को लगा कि अगर समलैंगिक रिश्ते में दोनों रहते हैं तो समाज के ताने उन्हें न सुनने पड़े। इससे बचने के लिए रवि ने 8 महीने पहले अपना जेंडर चेंज करवा लिया और पुरुष से लड़की बन गया। उसका नाम पड़ा रिया जट्टी। दोनों ने शादी भी कर ली। अर्जुन के परिवार ने रिया को अपनाया भी। हालाँकि, वक्त बीता औऱ अब अर्जुन उसे अपने साथ नहीं रखना चाहता। रिया का आरोप है कि अर्जुन उसे किन्नरों के पास छोड़ना चाहता है।

पुलिस में की शिकायत

पति की वेवफाई से नाराज होकर रवि उर्फ रिया ने पुलिस की चौखट पर दस्तक दी। उसने कैंटोनमेंट थाने में शिकायत की है। रिया का आरोप है कि अर्जुन की जिंदगी में कोई और लड़की आ गई है, जिससे वो उस पर ध्यान ही नहीं देता। थाने के इंस्पेक्टर जसबीर सिंह का कहना है कि उन्हें शिकायत मिली है। वो इस मामले की छानबीन कर रहे हैं। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

UAE में भी रिलीज होगी द कश्मीर फाइल्स: बोले विवेक अग्निहोत्री- जो बता रहे इस्लामोफोबिक, उनको मिल गया जवाब; अनुपम खेर ने लिखा- हर हर महादेव

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को आवाज देने वाली निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) बॉक्‍स ऑफिस पर भी जबरदस्‍त प्रदर्शन कर रही है। फिल्म को दुनिया भर से सराहना भी मिल रही है। इस बीच यूएई और सिंगापुर में इस फिल्म को रिलीज किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। साथ ही यूएई में इस फिल्म की रिलीज को उन लोगों को जवाब बताया है जो फिल्म को इस्लामोफोबिक बता रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत में, कुछ लोग इसे इस्लामोफोबिक कह रहे हैं। लेकिन एक इस्लामिक देश ने 4 हफ्ते की जाँच के बाद इसे बिना किसी कट के 15+ दर्शकों को देखने की मंजूरी दी है, जबकि भारत में यह 18+ के लिए है। 7 अप्रैल (गुरुवार) को यह फिल्म रिलीज हो रही है। अब अगला नंबर सिंगापुर का है।”

यूएई और सिंगापुर में ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को सेंसर की मंजूरी मिलने के बाद फिल्म से जुड़े कलाकार भी काफी खुश हैं। अभिनेता अनुपम खेर ने फिल्म के यूएई और सिंगापुर में रिलीज होने पर खुशी जताते हुए ट्वीट किया, “हर हर महादेव। यूएई में ‘द कश्मीर फाइल्स’ 7 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है।”

मालूम हो कि यह फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर हुए नरसंहार की वास्तविक घटनाओं को दिखाती है। पाकिस्तान के समर्थन से इस्लामी आतंकवादियों ने घाटी में सांप्रदायिक अभियान चलाया था। कश्मीरी पंडितों को मारा गया। प्रताड़ित किया गया और उन्हें उनकी ही जमीन से भागने को मजबूर किया गया। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे लाखों कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में सालों तक तंबू में रहे।

बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को कई राज्यों में टैक्स फ्री कर दिया गया है। फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी, भाषा सुंबली और चिन्मय मांडलेकर सहित कई कलाकार हैं। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक फिल्म की सराहना कर चुके हैं। हालाँकि कट्टरपंथी-वामपंथी समूह इस फिल्म से नाराज हैं। एनडीटीवी ने तो इस फिल्म की रिलीज से पहले इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता दिया था। लेकिन विरोध के बाद उसे अपनी रिपोर्ट से प्रोपेगेंडा शब्द हटाना पड़ा था।

‘शराब पीने वाला हिंदुस्तानी नहीं, महापापी है’: बिहार के शराबबंदी कानून में ढील के बाद बोले CM नीतीश कुमार

बिहार विधानसभा ने बुधवार (30 मार्च 2022) को निषेध एवं उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह कानून का रूप लेगा और तुरंत प्रभावी हो जाएगा। इस दौरान बिहार में बार-बार जहरीली शराब की घटनाओं पर आलोचना झेल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराब पीने वालों को ‘महापापी’ बताया और कहा कि जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों को राहत देने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा, “लोग यह जानकर भी शराब का सेवन कर रहे हैं कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अगर कोई राष्ट्रपिता बापू की भावना को नहीं मानता है तो वह हिंदुस्तानी नहीं है। वो भारतीय तो है ही नहीं। काबिल भी नहीं है, वो महाअयोग्य और महापापी है।”

बता दें कि 2016 के मूल कानून में बदलाव के बाद अब शराब पीते हुए पकड़े जाने पर जुर्माना देकर छोड़ने का प्रावधान किया गया है। अगर कोई शराब या मादक द्रव्य के प्रभाव में पाया जाता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर नजदीकी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। व्यवस्था यह रहेगी कि अवकाश या अधिकारी के स्थानांतरण की स्थिति में भी विशेष न्यायालय कार्यरत रहे। राज्य सरकार की ओर से तय जुर्माना की रकम जमा करने पर अभियुक्त को छोड़ दिया जाएगा। तत्काल जुर्माने की रकम जमा न करने की हालत में एक महीने की साधारण कैद का प्रावधान किया गया है।

संशोधन में साफ कहा गया है कि यह जरूरी नहीं है कि शराब या मादक द्रव्यों के सेवन के हरेक मामले में अभियुक्त को तुरंत जमानत मिल ही जाएगी। जुर्माने की रकम अदा कर छूट जाना किसी अभियुक्त का अधिकार नहीं होगा। अंतिम निर्णय कार्यपालक मजिस्ट्रेट करेंगे।

गौरतलब है कि हाल में बिहार के जनता दल यूनाइटेड विधायक (JDU MLA) गोपाल मंडल ने विवादित बयान देते हुुए कहा था कि शराब पीकर लोग अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या कम होगी। पिछले दिनों बिहार में जहरीली शराब से छपरा, नालंदा समेत कई जिलों में लोगों की मौत हो चुकी है। हाल में नालंदा में हुई घटना से आठ लोगों की मौत के बाद हड़कंप मच गया था।

बता दें कि बिहार में शराब बिक्री पर पाबंदी है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में नकली शराब यहाँ बिक रही है। यह शराब पीने से बहुत से लोगों की मौत भी हो रही है। करीब दो महीने पहले समस्तीपुर, बेतिया और गोपालगंज में जहरीली शराब से करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी।

15 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर नालंदा के छोटी पहाड़ी गाँव में शराब पीने से 13 लोगों की मौत हो गई। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर बक्सर में भी जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हुई है। यही नहीं राज्य में पिछले साल जहरीली शराब से करीब 66 लोगों की मौत हुई थी।

कार में मिला 12 किलो विस्फोटक, जयपुर में होना था सीरियल बम ब्लास्ट: मध्य प्रदेश के अल सुफा से जुड़े 3 आतंकवादी गिरफ्तार

राजस्थान (Rajasthan) ATS और SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने चित्तौड़गढ़ जिले से 12 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 3 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम जुबेर, सैफुल्लाह और अल्तमस हैं। इन आतंकियों के संगठन का नाम अल सुफा है। ये सभी एक कार में सवार थे, जहाँ इन्हें नाकाबंदी के दौरान पकड़ा गया है। इन तीनों से मिली जानकारी के बाद 5 अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। घटना 30 मार्च (बुधवार) की है।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा की तरफ जा रही एक संदिग्ध MP-43-CA-7091 नंबर की कार पुलिस ने रोक कर तलाशी ली। उस बोलेरो कार से दो थैलियों में कुल लगभग 12 किलोग्राम विस्फोटक, तीन बैटरी और 3 आरपेट घड़ी, तार और 3 कनेक्टर, 6 बल्ब और तार बरामद हुए हैं। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने तीनों आरोपितों पर विस्फोटक अधिनियम, UAPA आदि धाराओं में केस दर्ज करके पूछताछ शुरू कर दी है। अब तक इस केस में 5 अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

गिरफ्तार आतंकियों से मध्य प्रदेश ATS भी पूछताछ कर रही है। राजस्थान ATS ने इस मामले से NIA को भी अवगत करवाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकियों से बरामद विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट से भी 4 गुना ज्यादा खतरनाक है। इस नेटवर्क के अन्य आतंकियों की तलाश में पुलिस राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर रही है।

राजस्थान के DGP ने अभी जाँच जारी होने की बात कह कर ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों आतंकी जयपुर में 3 अलग-अलग जगहों पर सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देना चाह रहे थे। इनसे बरामद विस्फोटक से ये बम बना कर दूसरी गैंग को देना चाहते थे। बरामद विस्फोटक आरडीएक्स बताया जा रहा है।

आतंकी संगठन अल सुफा

आतंकी संगठन अल सुफा लगभग 50 चरमपंथियों का समूह है। यह अक्सर स्लीपर सेल की भूमिका में रहता है और युवाओं को आतंकवाद के लिए बरगलाता है। साल 2014 में इस संगठन के लोगों ने रतलाम के महू रोड बस स्टैंड पर बजरंग दल के नेता कपिल राठौड़ और उनकी होटल पर काम करने वाले पुखराज की हत्या कर दी थी। सितम्बर 2017 में इसी से जुड़े लोगों ने रतलाम में ही तरुण सांखला की गोली मार कर हत्या कर दी थी।

सुसाइड करने वाली डॉक्टर पर FIR में जिसकी मुख्य भूमिका, उसने पहले भी दी थी धमकी: डॉ. अर्चना के पति ने मीडिया की कारस्तानी भी बताई

राजस्थान के दौसा में डॉक्टर अर्चना शर्मा की आत्महत्या मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने DG को निष्पक्ष जाँच के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें यह सुनिश्चित करने भी कहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ फिर न हो। मुख्यमंत्री के आदेश पर दौसा के SP को हटा दिया गया है। स्थानीय थानेदार को सस्पेंड किया गया है। इस क्षेत्र के DSP को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।

मामले की जाँच जयपुर के डिविजनल कमिश्नर दिनेश कुमार यादव को सौंपी गई है। सुसाइड करने वाली महिला डॉक्टर के पति डॉक्टर सुनीत उपाध्याय की तहरीर पर एक स्थानीय नेता शिव शंकर बाल्या जोशी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इलाज के दौरान प्रसूता की मौत के बाद डॉक्टर अर्चना शर्मा पर हुई एफआईआर में जोशी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। डॉक्टर सुनीत उपाध्याय ने अपनी शिकायत में बताया है कि जोशी पहले भी कई बार हॉस्पिटल में आकर धमकी दे चुका था। उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आदेश (साभार – ट्विटर)

शिकायत में डॉक्टर उपाध्याय ने राजस्थान पत्रिका पर एकपक्षीय रिपोर्टिंग का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि राजस्थान पत्रिका की प्रकाशित रिपोर्ट में उनका पक्ष नहीं लिया गया। कहा है कि मीडिया वाले भी ऐसे मामलों में दलाली करते हैं। उन्होंने पत्रिका के रिपोर्टर महेश के खिलाफ भी पूर्व में पुलिस से शिकायत किए जाने और कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही है। डॉक्टर उपाध्याय ने उनके अस्पताल के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को ‘लाश पर राजनीति करने वाले गिद्ध’ कहा है।

क्या है पूरा मामला

राजस्थान के दौसा जिले में महिला डॉक्टर अर्चना शर्मा ने मंगलवार (29 मार्च 2022) को अपने घर में ही फाँसी लगा ली थी। ऐसा उन्होंने खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए किया था। उनके ऊपर लालसोट थाने में हत्या की धारा (302) में FIR दर्ज हुई थी। ऐसा एक महिला की प्रसव के दौरान हुई मौत से हुए हंगामे के बाद हुआ था। इस मामले में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। ऑडियो में एक व्यक्ति खुद को दलित नेता बताते हुए मृतक मरीज के परिजनों को उकसाते हुए रुपए के लेन-देन और मुआवजे की बात कह रहा। हालाँकि, ऑपइंडिया इस इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

NRI पड़ोसी के पास हैं सलमान खान के खिलाफ सबूत, कोर्ट ने बताया: कहा था- फार्म हाउस में कई फिल्म स्टार्स की लाशें दफन

बॉलीवुड (Bollywood) एक्टर सलमान खान (Salman Khan) ने अपने पड़ोसी केतन कक्कड़ (ketan Kakkad) के साथ विवाद के बाद उनके खिलाफ मानहानि का केस किया था। अब मुंबई की सत्र अदालत (Mumbai Civil Court) ने एक्टर को झटका देते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पनवेल फॉर्म हाउस में केतन कक्कड़ ने जो भी आरोप लगाए थे, वो सही हैं। ऐसे सबूत हैं जो कि सलमान के खिलाफ अवैध अतिक्रमण और फॉरेस्ट एक्ट के उल्लंघन के दावों को साबित करते हैं।

मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायधीश एएच लड्ढा ने की। जज ने 50 पन्ने के अपने आदेश में केतन कक्कड़ के सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने की सलमान खान की माँग को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि कक्कड़ ने ऐसे दस्तावेजों को पेश करते हुए पुष्टि की थी कि सलमान ने उन्हें अपनी जमीन पर आने से रोक दिया था। कोर्ट ने तर्क दिया, “प्रतिवादी (कक्कड़) ने तर्क दिया कि वो वादी (खान) द्वारा किए गए अवैध कार्यों में एक व्हिसिलब्लोअर हैं और उसी के समर्थन में डॉक्यूमेंटेड कंटेंट बनाने के बाद उचित सावधानी के साथ जनहित में ये आरोप लगाए हैं। इसलिए प्रारंभिक चरण में मुझे लगता है कि प्रतिवादी की दलील वादी के प्रथम दृष्टया मामले की तुलना में अधिक संभावित है।”

कोर्ट ने इसी को आधार बनाकर अपना अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “चूँकि वादी (खान) यह समझाने में विफल रहा है कि यह उससे कैसे संबंधित है और प्रतिवादी (कक्कड़) ने उचित दलील दी, जो प्रथम दृष्टया साक्ष्यों द्वारा समर्थित है, इसलिए मैं निषेधाज्ञा देने के लिए इच्छुक नहीं हूँ।”

क्या है मामला

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पनवेल में सलमान खान का फॉर्म हाउस है। इसी के बगल में कक्कड़ का भी एक प्लॉट है। उनका आरोप है कि प्लॉट तक जाने के रास्ते को अभिनेता ने ब्लॉक कर दिया है।

हाल ही में सलमान खान के वकील प्रदीप गाँधी ने अदालत को बताते हुए कहा था कि केतन ने सलमान पर आरोप लगाया है कि सलमान ‘डी गैंग के फ्रंट मैन’ हैं। सलमान के धर्म पर टिप्पणी की। उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं का करीबी बताया। यह भी दावा किया कि सलमान बच्चों की तस्करी में शामिल हैं और उनके फार्म हाउस में कई फिल्म स्टार्स की लाशें दफन हैं। इसके साथ ही सलमान के वकील ने सभी आरोपों को खारिज किया था।

Mumbai civil court dismisses bollywood actor Salman Khan defamation petition against Ketan Kakkar

Axis का हुआ भारत में सिटी बैंक का धंधा, पर काम करता रहेगा आपका क्रेडिट और डेबिट कार्ड: ₹121216800000 में डील

एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने एक बड़ा करार करते हुए सिटी बैंक (Citi bank) के भारतीय कारोबार को खरीद लिया है। इसमें सिटी ग्रुप के क्रेडिट कार्ड, वेल्थ मैनेजमेंट, लोन और रिटेल बैंकिंग से जुड़ा कारोबार शामिल है। यह पूरा सौदा 1.6 अरब डॉलर (₹1,21,21,68,00,000.00) में हुआ है। सिटी ग्रुप ने बुधवार (30 मार्च 2022) को इस सौदे की आधिकारिक घोषणा की। एक्सिस बैंक द्वारा रिटेल कारोबार को टेकओवर करने के बाद सिटी इंडिया (citi india) अपने कस्टमर को एक मैसेज भेज रहा है।

मैसेज में लिखा गया है, “डियर कस्टमर, हम पर अपना विश्वास जताने के लिए धन्यवाद। हमने पिछले साल आपको सिटी बैंक की वैश्विक रणनीति से अवगत कराया था। आज, हम आपको इसके बारे में अपडेट दे रहे हैं कि सिटी बैं​क ने एक्सिस बैंक के साथ एक बड़ा करार किया है, जिसके तहत एक्सिस बैंक ने सिटी इंडिया (citi india) के रिटेल कारोबार को टेकओवर कर लिया है। एक्सिस बैंक ने जो कारोबार खरीदा है, उसमें सिटी ग्रुप के क्रेडिट कार्ड, वेल्थ मैनेजमेंट, लोन और रिटेल बैंकिंग से जुड़ा कारोबार शामिल है।”

बैंक की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आपका क्रेडिट कार्ड और एटीएम कार्ड चलता रहेगा। इस सौदे के बाद सिटी ग्रुप भारत के इंस्टीट्यूशन क्लाइंट के साथ अपनी सेवाओं को जारी रखेगा। सिटी बैंक के कर्मचारियों को एक्सिस बैंक में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने लिखा, “हम आपको एक बार फिर भरोसा दिलाते हैं कि आपके पास मौजूद सिटी बैंक के क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड, जमा, निवेश, लोन में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं होगा। हमारे कॉल सेंटर, एटीएम, रिलेशनशिप टीम, ब्रांच, सिटी बैंक ऑनलाइन पोर्टल और सिटी मोबाइल एप्लिकेशन सहित सभी उपभोक्ता बैंकिंग संचालन (Consumer Banking Operations) पहले की तरह ही काम करते रहेंगे।”

बैंक ने अपने बयान में आगे लिखा, “हम एक्सिस बैंक के साथ जुड़कर बहुत खुश हैं। यह देश में प्राइवेट सेक्टर में एक बड़ा बैंक है और सभी क्लाइंट सेगमेंट में व्यवसायों को संचालित करता है। एक्सिस बैंक भारत में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें विश्वास है कि यह आपको एक ग्राहक के रूप में बेहतर सुविधाएँ देगा। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि अगली सूचना के साथ आपको बैंक से जुड़े नियमों के परिवर्तन के बारे में विधिवत रूप से सूचित किया जाएगा। सिटी बैंक पर विश्वास जताने के एक बार फिर से आपका धन्यवाद। हम आपके साथ नई शुरुआत करने के लिए काफी उत्सुक हैं।”

बता दें कि पिछले साल अप्रैल में सिटीग्रुप ने कहा था कि वह भारत सहित 13 देशों में कंज्यूमर कारोबार से बाहर निकल जाएगा। भारत के अलावा यह बैंक ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, चीन, इंडोनेशिया, कोरिया, मलेशिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम में रिटेल कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया था। सिटी बैंक सिंगापुर, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात और लंदन में चार फंड केंद्रों पर केंद्रित है।

फ्री इलाज चाहिए तो बन जाओ ईसाई: मिशनरी हॉस्पिटल में 3 साल के बीमार बच्चे को लेकर पहुँचे हिंदू परिवार को दी लालच

तमिलनाडु (Tamilnadu) के वेल्लोर स्थित एक अस्पताल में मुफ्त इलाज करवाने का लालच देकर ईसाई धर्म (Christianity) अपनाने के लिए कहा गया। कर्नाटक (Karnataka) का एक हिंदू परिवार यहाँ अपने 3 साल के बच्चे के इलाज के लिए गया था। बताया गया कि यहाँ पर बच्चे का मुफ्त इलाज के बदले में मिशनरी ने उन्हें ईसाई धर्म अपनाने और चर्च में प्रार्थना करने के लिए कहा।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय ढाबा (होटल) कर्मचारी और कर्नाटक के बसवाना बागेवाड़ी के निवासी इराना नागुर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह अपने तीन साल के बेटे के इलाज के लिए काफी परेशान थे। इराना पहले ही अपने बेटे के इलाज के लिए 3 लाख रुपए से अधिक खर्च कर चुके थे।

जानकारी के मुताबिक, इस गरीब पिता ने बच्चे के बेहतर इलाज के लिए पूरे दक्षिण भारत की यात्रा की और अंत में वह तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित एक अस्पताल में पहुँचे। इस अस्पताल का संचालन ईसाई मिशनरी करती है। जब वे वहाँ पर पहुँचे तो मिशनरी ने उनके बेटे का मुफ्त इलाज करने के बदले कुछ शर्तें रख दीं। मिशनरी ने इराना को ईसाई धर्म अपनाने और कम से कम दो महीने के लिए चर्च में प्रार्थना करने के लिए कहा। इससे उनको अस्पताल में मुफ्त इलाज मिल सकेगा।

मीडिया से बात करते हुए इराना ने बताया कि वह थक गए थे, क्योंकि उन्हें अपने बेटे के इलाज के लिए कहीं से भी कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही थी। उन्होंने कहा कि वह हर महीने 12,000 रुपए कमाते हैं, लेकिन उन्हें अपनी कमाई का लगभग आधा हिस्सा अपने बीमार बेटे के इलाज पर खर्च करना पड़ता है।

इराना ने बताया कि जब वे वेल्लोर के अस्पताल गए तो उन्होंने उनके बेटे की बोन मैरो सर्जरी (bone marrow surgery) के लिए 10 लाख रुपए सहित हर तरह की व्यवस्था करने का वादा किया। मगर, इसके लिए शर्त यह थी कि उन्हें हर दिन चर्च में जाकर प्रार्थना करनी होगी। 

इराना ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “ईसाई धर्म में धर्मांतरण के बारे में भी बातचीत हुई। मैं यीशु को स्वीकार करने के लिए दृढ़ था, क्योंकि अस्पताल के अधिकारियों ने मेरे बेटे के सभी चिकित्सा खर्चों का जिम्मा लेने का वादा किया था।” बता दें कि इराना का एक बेटा और 2 बेटियाँ हैं। 

हालाँकि, कर्नाटक के बीजापुर जिले में BLDE एसोसिएशन ने थैलेसीमिया से पीड़ित उनके तीन साल के बेटे का इलाज के लिए इराना की मदद करने के लिए आगे आया है। संस्था ने इराना और उनके परिवार को उनके बेटे का मुफ्त इलाज कराकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने से रोका। परिवार ने अब ईसाई धर्म अपनाने की योजना छोड़ दी है।

हिंदुओं का नरसंहार हो या पाकिस्तान का एजेंडा: कश्मीर की मीडिया में इस्लामी आतंक की खेती पुरानी, पत्रकार भी बनते रहे हैं आतंकी

‘कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ फिल्म के कारण कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और उनके पलायन का मुद्दा एक बार फिर सुलग उठा है। फिल्म ने इसके कई पहलुओं को सामने रखा है, जिससे भारत के लोग अब तक लगभग अनजान थे। कश्मीर का पूरा सिस्टम हिंदुओं के खिलाफ खड़ा था और वहाँ के हिंदू बेबस और लाचार थे। हिंदुओं के खिलाफ और आतंकियों के समर्थन में कश्मीर के राजनेता से लेकर मीडिया और राज्य के सरकारी कर्मचारी तक शामिल थे।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म किया, तब नकाब में ढँके ये चेहरे एक-एक करके खुलकर सामने आने लगे। केंद्र सरकार ने आतंकियों के मददागारों, उन्हें फंडिंग करने वालों, उन्हें आश्रय देने वालों, उन तक गोपनीय सूचनाएँ पहुँचाने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जुलाई 2021 में केंद्र के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने 11 सरकारी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। ये लोग आतंकियों को न सिर्फ गोपनीय सूचनाएँ उपलब्ध कराते थे, बल्कि उन्हें हर तरह से मदद भी देेते थे।

इसी तरह बुधवार (30 मार्च 2022) को भी सरकार ने 5 सरकारी कर्मचारियों को आतंकियों को मदद करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया। सितंबर 2021 में आतंकियों के साथ मिलकर काम करने के आरोपित 6 सरकारी कर्मचारियों पर राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

राज्य में नवंबर 1986 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नेशनल कॉन्ग्रेस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरियों के नाम पर मुस्लिमों को उकसाने का काम शुरू कर दिया था। परिणाम ये हुआ कि पूरा तंत्र पाकिस्तान का मोहरा और आतंकियों का मददगार बन गया। इन सबसे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कश्मीर के अखबारों ने।

कश्मीर के उर्दू अखबारों ने इन नरसंहारों और पलायन में कश्मीरी नेताओं के बाद आतंकियों की सबसे ज्यादा मदद की थी। राज्य की मीडिया आतंकी संगठनों के मुखपत्र के रूप में काम करते थे। आतंकी जो काम करते उसको सही साबित करना, उनके आतंकी वारदातों को व्हाइटवॉश करना और आतंकियों के प्रति हमदर्दी के लिए घाटी में माहौल बनाना उनका प्रमुख काम था।

1990 के दशक में आतंकी अपनी गोलियों से लोगों में दहशत पैदा करते थे और मीडिया अपनी खबरों के जरिए। 19 जनवरी 1990 की काली रात से पहले घाटी के दो प्रमुख उर्दू अखबार ‘आफताब’ और ‘अल सफा’ ने अपनी खबरों में कश्मीरी हिंदुओं को घाटी छोड़ने का ऐलान करते हुए चेतावनी जारी की थी। उसने आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के उस बयान को प्रमुखता से छापा था, जिसमें कश्मीरी हिंदुओं को घाटी नहीं छोड़ने पर चेतावनी दी गई थी।

ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ उसी दौर की बता थी। ये आज भी जारी है। बुधवार (30 मार्च 2022) को श्रीनगर में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में मारा गया आतंकी रईस अहमद भट कभी पत्रकार हुआ करता था। वह ‘वैली न्यूज सर्विस’ नाम से एक वेबसाइट चलाता था और वह इसका एडिटर इन चीफ रहा था। पुलिस ने उसका प्रेस कार्ड भी जारी किया है।

17 मार्च 2022 को ‘द कश्मीर वाला’ (The Kahsmir walla ) नाम के एक कश्मीरी वेबसाइट के मुख्य संपादक फहद शाह (Fahad Shah) के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन में कंटेंट पोस्ट करने के मामले में कार्रवाई की गई थी। शाह अपने पोर्टल पर राष्ट्र विरोधी कंटेंट पोस्ट करता था औऱ पत्थरबाजों को पीड़ित के तौर पर पेश करता था।

शाह अपने पोर्टल के जरिए लगातार सेलेक्टिव स्टोरीज को ही पब्लिश करता था, जो बीते दो साल में पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई और अलगाववादी तत्वों के अनुरूप था। इन स्टोरी में कश्मीर घाटी में इस्लामिक हिंसा को जायज साबित करने की कोशिशें की जाती थीं।

इसी तरह 8 जनवरी को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक कथित पत्रकार सज़्ज़ाद अहमद डार को आतंकी की मौत के बाद संबंधित वीडियो को पोस्ट करके लोगों को भड़काने के आरोप में बांदीपोरा से गिरफ्तार किया था। सज़्ज़ाद अहमद ऑनलाइन पोर्टल ‘द कश्मीर वाला (The Kashmir Walla)’ के लिए काम करता था।

जिस वीडियो को सज्जाद गुल ने पोस्ट किया, उसमें महिलाओं का एक समूह भारत विरोधी नारे लगा रहा था। इसमें पाकिस्तान और आतंकी ज़ाकिर मूसा का समर्थन भी किया जा रहा है। यह वीडियो तब बनाया गया था तब लश्कर ए तैयबा का आतंकी सलीम पैरी को सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था।

गिरफ्तार सज्जाद गुल अहमद डार उर्फ़ सज्जाद गुल, जिस ‘द कश्मीर वाला’ के लिए काम करता था वो संस्थान पहले से ही विवादों में रहा है। इसके एडिटर-इन-चीफ का नाम फहद शाह है। फहद शाह और एक अन्य रिपोर्टर यशराज शर्मा पर पहले भी केस दर्ज हो चुका है। इन्होंने 26 जनवरी को शोपियाँ के एक धार्मिक स्कूल में सेना द्वारा जबरन गणतंत्र दिवस मनाने की झूठी खबर प्रकाशित की थी। यशराज शर्मा इस बार भी आतंकियों के साथ खड़े सज्जाद गुल का समर्थक रहा है।

अप्रैल 2020 में भी भी गौहर गिलानी नाम के एक पत्रकार के खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था। गिलानी सोशल मीडिया के माध्यम से गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पोस्ट और लेख लिखता था और आतंकवादियों का महिमामंडन करता था। इसके अलावा भी वह कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त था।

इससे पहले, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मसरत ज़ाहरा और पीरज़ादा आशिक नाम के दो पत्रकारों पर भी कार्रवाई की थी। ये पत्रकार सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाते और देश विरोधी पोस्ट करते थे। पीरज़ादा आशिक ने शोपियाँ मुठभेड़ के बारे में कथित तौर पर झूठी खबर प्रकाशित की थी।

इसी तरह जुलाई 2019 में कश्मीर घाटी में आतंकी फंडिंग के मामले में ‘कश्मीर रीडर’ नाम के एक स्थानीय अखबार के संपादक हयात भट्ट उर्फ हाजी हयात से NIA ने कई घंटों तक पूछताछ की थी। भट ने साल 2012 में ‘कश्मीर रीडर’ अखबार की शुरुआत की थी और इससे पूर्व वो हेल्पलाइन ऐडवर्टाइजिंग एजेंसी चलाता था, जिसे किसी दूसरे देश से फंडिंग मिलती थी। वह लश्कर-ए-तैयबा से उसका बेहद करीबी संबंध था। हयात अपने अखबार में जिहादी विचारधारा वाले पत्रकारों को नौकरी देता था और आतंकियों को महिमांडित करवाने वाले लेख लिखवाता था।

कश्मीर घाटी में ऐसे अनगिनत पत्रकार हैं तो आतंकियों के स्लीपर सेल के रूप में काम करते हैं। आतंकियों और पत्थरबाजों को शोषित तथा सुरक्षाबलों को उत्पीड़क के रूप में दिखाकर सहानुभूति हासिल करना और अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने वाले गैंग को सहायता पहुँचाना इनका प्रमुख उद्देश्य है। इन्हें न सिर्फ आतंकियों से मदद मिलती है, बल्कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना और वहाँ की बदनाम आईएसआई भी इनकी खूब मदद करती है।

हालाँकि, केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा शासन के आगमन के बाद इनके चेहरों पर से नकाब उतरने लगे हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई भी तेज हो गई है, फिर भी ये कथित पत्रकार इस्लामिक जेहाद में अपनी योगदान देने के लिए सीधे तौर पर आतंकी हमलों में भी शामिल होने लगे हैं। बुधवार को मारा गया रईस अहमद भट इसका उदाहरण है।