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‘द कश्मीर फाइल्स में डायरेक्टर ने सिर्फ लेक्चर दिया है’: फिल्म देख छत्तीसगढ़ के CM भूपेश बघेल ने कश्मीरी पंडितों के जख्मों पर रगड़ा नमक

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) फिल्म देखने के बाद भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने फिल्म को आधा सच बताते हुए सरकार पर धारा 370 हटा कर राजनीति करने का आरोप लगाया है। बघेल ने फिल्म को 2024 की तैयारी बताते हुए बच्चों के मन पर बुरा असर डालने वाली स्टोरी बताया है। मुख्यमंत्री बघेल ने यह बयान 17 मार्च, 2022 (गुरुवार) को दिया है।

फिल्म देख कर लौटने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा, “इस देश में अब सेंसर बोर्ड का भी कोई महत्त्व नहीं रह गया। सरकार द्वारा धारा 370 हटा कर सिर्फ राजनीति की गई है। कश्मीरी पंडितों को रोकने या उनके पुनर्वास के लिए कुछ भी नहीं किया गया। पंडितों को बचाने के लिए सेना भेजे जाने पर एक पूर्व प्रधानमंत्री लोकसभा का घेराव करते हैं।” यद्दपि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री का नाम नहीं बताया।

फिल्म के बारे में बोलते हुए बघेल ने कहा, “फिल्म के मध्य से डायरेक्टर ने लेक्चर भर दिया है। इसमें समस्याएँ ही बताई गई हैं। समाधान के नाम पर कुछ भी नहीं है। इस फिल्म में हिंसा दिखाई गई है। मेरा मन इस फिल्म को देख कर बोझिल हो गया। बच्चों पर इस फिल्म का गलत असर पड़ेगा। फिल्म के डायरेक्टर ने मुझसे इसे छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की अपील की है लेकिन उन्होंने इसे प्रधानमंत्री से पूरे देश में टैक्स फ्री करने को क्यों नहीं कहा?”

मुख्यमंत्री बघेल के मुताबिक, “कश्मीर में सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि मस्जिद भी तोड़ी गई है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी हत्याएँ हुई हैं। आतंकवाद का कोई भी धर्म नहीं होता। धर्म की आड़ में हिंसा की राजनीति की जाती है। फिल्म का संदेश एकतरफा है। फिल्म के माध्यम से जो संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है उसमें सफलता नहीं मिलने वाली। अगर इस फिल्म के बहाने 2024 की तैयारी की जा रही है तो ये देश को बहुत गलत दिशा में ले जाने की तैयारी है।”

‘अल्पसंख्यक विभाग का मुखिया सिर्फ मुस्लिम ही क्यों?’: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कर्नाटक सरकार को देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) को प्रदेश अल्पसंख्यक विकास निगम (SMDC) में सिर्फ मुस्लिम समुदाय के ही व्यक्ति को शामिल करने पर नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जस्टिस विनीत शरण और अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने यह नोटिस ईसाई समुदाय के अनिल एंटोनी द्वारा दाखिल याचिका पर जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक सरकार को जवाब देने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया है। नोटिस 17 मार्च (गुरुवार) को जारी हुई है।

ANI के मुताबिक, नोटिस कर्नाटक सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण हज और वक्फ विभाग, कर्नाटक प्रदेश अल्पसंख्यक कॉरपोरेशन के चेयरमैन और अल्पसंख्यक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर को जारी की गई है। 18 जनवरी 2021 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनिल एंटोनी की इसी मामले में दायर की गई याचिका ख़ारिज कर दी थी। एंटोनी ने हाईकोर्ट के उसी आदेश को चुनौती दी थी।

अनिल एंटोनी की तरफ से अधिवक्ता जीएस मणि ने बहस की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया, “याचिकाकर्ता अल्पसंख्यक समुदाय के हर वर्ग को कर्नाटक प्रदेश अल्पसंख्यक कॉरपोरेशन के चेयरमैन पद पर नियुक्त करने की माँग करता है। साल 1986 से अब तक इस पद पर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के IAS अधिकारी की ही नियुक्ति होती रही है। इसमें ईसाई, सिख, पारसी, बौद्ध और जैन समुदाय के लिए बराबरी की हिस्सेदारी होनी चाहिए।”

याचिका में आगे कहा गया, “उच्च न्यायालय सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी आदि समुदायों के साथ कर्नाटक अल्पसंख्यक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर विचार नहीं कर पाया।” इससे एंटोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कर्नाटक अल्पसंख्यक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरपर्सन पद के लिए ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी आदि समुदायों से भी नियुक्ति की माँग की थी। सभी वर्गों की भागीदारी के लिए एंटोनी ने नियुक्त चेयरपर्सन को निश्चित समय अंतराल में बदलते रहने की भी माँग की थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया था।

अंडरवियर हटाए बिना भी लिंग का स्पर्श बलात्कार: मेघालय हाई कोर्ट का अहम फैसला

नाबालिग से रेप के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मेघालय हाई कोर्ट ने कहा है कि पीड़िता की योनि, उसके मूत्रमार्ग या फिर उसकी अंडरवियर पर ही क्यों न पुरुष के अंग को स्पर्श करा जाए वो बलात्कार ही माना जाएगा। ये अपराध आईपीसी की धारा 375 (बी) के तहत रेप है।

10 साल की पीड़िता के साथ रेप के मामले की सुनवाई मेघालय हाई कोर्ट के मुख्य जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की खंडपीठ ने की। सोमवार (14 मार्च 2022) को हाई कोर्ट ने 23 सितंबर 2006 यानि कि 16 साल पुराने रेप के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर यह मान भी लिया जाय कि आरोपित ने चड्डी पहने हुए पर ही पीड़िता की योनि या फिर उसके मूत्रमार्ग में जबरन अपने लिंग प्रवेश कराने की कोशिश की तो भी यह 375 (बी) के तहत रेप ही होगा।

कोर्ट ने कहा, “23 सितंबर 2006 की घटना के मामले मामले 30 सितंबर 2006 को शिकायत दर्ज कराई गई थी। जब एक सप्ताह के बाद 1 अक्टूबर 2006 को उसका मेडिकल टेस्ट किया गया तो उसकी योनि कोमल औऱ लाल पाई गई थी और उसका हाइमन (कौमार्य झिल्ली) टूट गया था। लड़की की जाँच करने वाले डॉक्टर का भी कहना था कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है और उसको मानसिक आघात लगा है। पीड़िता ने भी कहा था कि आरोपित ने उसकी चड्डी को नीचे खींचा था।”

निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार

मेघालय हाई कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2018 को सुनाए गए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें निचली अदालत ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा और 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया था। यहीं नहीं जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा का फैसला सुनाया था।

लेकिन बाद में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए रेप के दोषी ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर कहा कि अगर पीड़िता के चड्डी को नहीं हटाया गया तो रैप कैसे हो सकता है।

आसमान में दिखा धुँआ, ब्रह्मोस मिसाइल के नाम पर दहशत में पाकिस्तानी: सोशल मीडिया पर लोग लगा रहे अटकलें, देखें वीडियो

पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY News ने दावा किया है कि देश के जमशोरो में आसमान से कुछ अज्ञात चीजें गिरी हैं। स्थानीय लोगों ने भी किसी चीज के गिरने की पुष्टि की है। उन लोगों ने किसी तरह के धमाका न होने की बात भी कही है। फिलहाल पुलिस इसकी जाँच में जुटी है। जाँच के बाद ही बताया जा सकेगा कि यह क्या चीज थी।

इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि पाकिस्तान ने पिछले दिनों भारत की तरफ से छूटे ब्रह्मोस मिसाइल के जवाब में एक मिसाइल का परीक्षण किया। मगर पाकिस्तानी मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुँचने में विफल रही और नीचे गिर गई।

एक यूजर ने लिखा, “पूरे पाकिस्तान में हाहाकार मचा रहा है ब्रह्मोस।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “तो पाक रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार पाक सशस्त्र बलों ने घनी आबादी वाले क्षेत्र में मिसाइल का परीक्षण किया।”

एक सोशल मीडिया यूजर लिखते हैं कि मियाँ चन्नू का भूत अब भी पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र को सता रहा है।

भारत से गलती से चली पाकिस्तान पर मिसाइल

बता दें कि 9 मार्च 2022 को नियमित रखरखाव के दौरान टेक्निकल फॉल्ट के कारण भारत का सुपसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल फायर हो गया था। ये पाकिस्तान के मियाँ चन्नू शहर में जाकर गिरा। हालाँकि, इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस घटना को भारत के रक्षा मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए बेहद खेदजनक बताया था। इसके लिए हाई लेवल कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश भी दिया गया है।

वन नाइट स्टैंड की बात से पलटे प्रियंका गाँधी के ननदोई तहसीन पूनावाला, कहा- यह Lock Upp के लिए स्टंट था

राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला (Tehseen Poonawalla) ने बिजनेसमैन की पत्नी के साथ रात गुजारने वाली बात से यूटर्न ले लिया है। उन्होंने इसे रियलिटी शो के लिए स्टंट बताया। पूनावाला ने पिछले दिनों कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के रियलिटी शो ‘लॉक-अप‘ (Lock Upp) में खुलासा किया था कि उन्हें देश के एक बड़े बिजनेसमैन ने अपनी पत्नी के साथ एक रात बिताने के लिए कहा था। हालाँकि अब वह अपनी बातों से मुकर गए हैं।

तहसीन ने बताया कि यह प्रक्रिया का एक हिस्सा था। शो शुरू होने से पहले, प्रतिभागियों को निर्माताओं के साथ कुछ सीक्रेट शेयर करने के लिए कहा गया था, जिसका इस्तेमाल शो में जरूरत पड़ने पर किया जाना था। रियलिटी शो के प्रतिभागी का कहना है कि उनके इस खुलासे को गलत समझा गया और ऐसे पेश किया गया, जैसे उन्होंने हाल की किसी घटना को सीधे तौर पर कबूल किया हो।

तहसीन ने आगे बताया, “यह सीक्रेट सदियों पुराना है और आज के समय में इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। यह 20 साल पहले की बात है और यह मेरे लिए केवल एक रियलिटी शो स्टंट था। मैंने एक सीक्रेट का खुलासा किया क्योंकि यह मजेदार था। रियलिटी शो के फॉर्मेट का हिस्सा था और आखिर में यह एक गेम है।”

उन्होंने सायशा शिंदे के साथ अपनी दोस्ती को भी काफी अहम बताया है। बता दें कि तहसीन ने यह खुलासा सायशा को बचाने के लिए ही किया था। दरअसल कम वोट्स मिलने की वजह से तहसीन को कंगना ने उनकी जेल से बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने तहसीन को यह भी कहा कि शो से जाते-जाते वह अगर चाहें तो किसी एक कंटेस्टेंट को शो से बाहर होने से बचा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक कीमत चुकानी होगी। 

वह कीमत यह थी कि तहसीन को अपना सीक्रेट दुनिया के सामने बताना होगा और बदले में वह किसी एक कंटेस्टेंट को बचा सकते हैं। तहसीन ने यह शर्त मानते हुए सायशा को बचाया। तहसीन ने कहा कि उन्हें देश के एक बड़े बिजनेसमैन ने उनकी पत्नी के साथ एक रात बिताने के लिए कहा था और इसके साथ उनकी कुछ शर्तें और फैंटसी भी थी। इस काम के लिए देश के उस सबसे बड़े बिजनेसमैन ने पूरा नाइटक्लब शनिवार और रविवार के लिए बुक किया था।

तहसीन ने बताया कि जब वह उनकी पत्नी (बिजनेसमैन की) के साथ वक्त गुजार रहे थे, तब वह बिजनेसमैन ये सब देख रहे थे। उनकी यह शर्त ही थी कि वह तहसीन को अपनी पत्नी के साथ वक्त बिताते हुए देखेंगे। तहसीन ने कहा कि वह इस बात को मान गए थे और उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है। गौरतलब है कि तहसीन की शादी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा की बहन से हुआ है।

PUBG खेलत-खेलते UP की शादीशुदा महिला को साथी खिलाड़ी से हुआ प्यार, रात में घर-बार छोड़ प्रेमी के पास पहुँच गई बिहार

उत्तर प्रदेश के महराजगंज (Maharajganj, Uttar Pradesh) जिले में एक शादीशुदा महिला को ऑनलाइन PUBG खेलते हुए प्यार हो गया। उसने अपने प्रेमी से मिलने के लिए घर छोड़ दिया और बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur, Bihar) पहुँच गई। घटना 3 मार्च की है। पुलिस ने महिला को तलाश कर उसके घर वालों को सौंप दिया है।

पुलिस के मुताबिक, महिला महराजगंज के बढ़ारा बरईपार गाँव की है। यहाँ 4 मार्च 2022 को सुष्मिता सरकार नाम की महिला के पति ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना श्यामदेउरवा में दर्ज करवाई। पुलिस ने सर्विलांस से महिला का पता लगाया तो लोकेशन बिहार के मुजफ्फरपुर में मिली। सुष्मिता को बरामद कर लिया गया और उनके घर वालों को सौंप दिया गया।

पूछताछ में सुष्मिता सरकार ने बताया कि वह PUBG खेलने की आदी है। उसे इस खेल के दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला एक लड़का साथी खिलाडी के रूप में मिला। कुछ दिन बाद सुष्मिता उससे प्रेम करने लगी। ऑनलाइन खेल नजदीकी खिलाड़ियों को तलाशने के लिए लोकेशन दिखाते हैं। इसी के चलते वह 3 मार्च को घर से अपने प्रेमी से मिलने निकल पड़ी। सुष्मिता और मुजफ्फरपुर निवासी लड़के में अक्सर बात भी हुआ करती थी। सुष्मिता के पति मूल रूप से बंगाल के रहने वाले हैं, जो काफी लम्बे समय से महराजगंज में रह रहे हैं।

PUBG खेल

PUBG एक ऑनलाइन गेम एप्लिकेशन है, जो दक्षिण कोरिया के एक संस्थान द्वारा डेवलप किया गया है। इसके दुनिया भर में लाखों सब्सक्राइबर हैं। कुछ देशों ने युवाओं में लत के चलते इसे बैन कर रखा है। सितम्बर 2020 में भारत सरकार ने IT एक्ट की धारा 69-A के तहत 118 चीनी एप को बैन कर दिया था, जिसमें PUBG भी शामिल था। तब यह चीन की फ्रेंचाइजी के तहत संचालित था। बाद में PUBG भारत में दुबारा एंड्रॉइड और iOS एप पर एक गेमिंग कम्पनी क्राफ्टन के माध्यम से शुरू हुआ। इससे पहले भी साल 2019 में कर्नाटक में PUBG खेलने से मना करने पर एक 21 वर्षीय छात्र ने अपने पिता की हत्या कर दी थी। पाकिस्तान की भी सरकार ने जुलाई 2020 में इस एप को बैन कर दिया था, क्योंकि 2 युवाओं ने इसे खेले जाने पर रोकने के चलते आत्महत्या कर ली थी।

पाकिस्तानी एजेंडा, भारत विरोधी कंटेट और पत्थरबाज मासूम: ‘द कश्मीर वाला’ के एडिटर फहद शाह पर PSA के तहत कार्रवाई, पुलिस ने बताई करतूत

जम्मू-कश्मीर की वेबसाइट ‘द कश्मीर वाला’ (The Kahsmir walla ) के मुख्य संपादक फहद शाह (Fahad Shah) के देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और आईएसआई के समर्थन में कंटेंट पोस्ट करने के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जन सुरक्षा अधिनियम (Public safety act) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के डोजियर में बताया गया है कि शाह अपने पोर्टल पर राष्ट्र विरोधी पोस्ट करता था औऱ पत्थरबाजों को पीड़ित के तौर पर पेश करता था।

श्रीनगर के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए गए डोजियर में पुलिस ने बताया है कि फहद शाह अपने पोर्टल पर राष्ट्र की सुरक्षा को चुनौती देने वाली खबरें पोस्ट करता था। पत्रकारिता के एथिक्स का उल्लंघन कर शाह को एंटी इंडिया कंटेंट के जरिए देश की संप्रभुता को चुनौती देने का काम करते हुए पाया गया है।

डोजियर में पुलवामा, शोपयाँ औऱ श्रीनगर में आरोपित के खिलाफ दर्ज किए गए केस की जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि शाह अपने पोर्टल के जरिए लगातार सेलेक्टिव स्टोरीज को ही पब्लिश करता था, जो बीते दो साल में पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई और अलगाववादी तत्वों के अनुरूप था। इसमें घाटी में इस्लामिक हिंसा को जायज साबित करने की कोशिशें की जाती थीं।

पुलिस का कहना है कि आरोपित के खिलाफ कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की गई, लेकिन कई बार जेल से बाहर आने के बाद भी उसने खुद को नहीं बदला। पुलिस ने यह भी कहा कि पत्रकार अपनी गैरकानूनी गतिविधियों से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को ‘गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है और गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।’ पुलिस ने बताया कि सामान्य कानूनों से अब इस आरोपित को रोक पाना कठिन है।

गौरतलब है कि पहली बार फहद शाह को पुलवामा की पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर 4 फरवरी 2022 को गिरफ्तार किया था। आरोपित को दो बार जमानत मिलने के बाद बीते सोमवार (14 फरवरी 2022) को पुलिस ने उसके खिलाफ पीएसए एक्ट के तहत कार्रवाई की।

होली से पहले अलीगढ़ में मस्जिदें ढंकी गईं, लखनऊ में जुमे की नमाज का वक्त बदला

साम्प्रदायिक रूप से अतिसंवेदनशील माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh, Uttar Pradesh) में प्रशासन ने होली को देखते हुए 2 मस्जिदों को कपड़े से ढंक दिया है। प्रशासन के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि एक साथ पड़ रही होली और शब–ए–बारात में कोई साम्प्रदायिक तनाव न फैले। वहीं, लखनऊ में 22 मस्जिदों ने होली के कारण अपने जुमे की नमाज के समय को बदल दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन मस्जिदों को कपड़े से ढंका गया है, उनके नाम शीशे वाली मस्जिद और बाबरी मंडी की मस्जिद है। अलीगढ़ के एसपी सिटी कुलदीप सिंह के मुताबिक, “ऐसा कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि कोई शरारती तत्व मस्जिद पर रंग न डाल पाए। होली और शब-ए-बारात साथ पड़ने के चलते पुलिस अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। होलिका दहन में कोई साम्प्रदायिक तनाव न फैले इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल मिश्रित आबादी वाले इलाकों में तैनात किया गया है। पुलिस द्वारा ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी।”

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि ऐसा पिछले 5 सालों से होता आ रहा है। यह कदम मस्जिद को गंदगी और रंगों से बचाने के लिए उठाया जाता है। इसमें मस्जिद को कपड़े और पन्नी से ढंका जाता है।

गौरतलब है कि 10 मार्च 2020 को भी अलीगढ़ के अति संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहे की हलवाईयाँ मस्जिद को शामियाने से ढंक दिया गया था। तब भी पुलिस ने इसे मस्जिद पर रंग न गिरने के लिए उठाया गया कदम बताया था। उस समय CAA-NRC में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती थी।

लखनऊ में जुमे की नमाज का समय बदला

वहीं, होली, शब-ए-बारात और जुमा एक ही दिन पड़ने के कारण 22 मस्जिदों ने नमाज के समय में बदलाव कर दिया है। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के सुन्नी मौलवी और लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने मुस्लिमों से होली के दिन दूसरी मस्जिदों में जाने के बजाए अपने-अपने इलाके की मस्जिदों में नमाज अता करने को भी कहा। साथ ही 5 बजे होली खेलने का वक्त समाप्त होने के बाद ही मस्जिदों और अपने लोगों की कब्रों पर जाएँ।

नमाज का समय बदलने वाले मस्जिदों में जामा मस्जिद ईदगाह, मस्जिद ऐशबाग, अकबरी गेट पर एक मीनारा मस्जिद, मस्जिद शाहमीना शाह और मस्जिद चौक प्रमुख हैं। इन 22 मस्जिदों में जुमे की नमाज का दोपहर 1.30 बजे के बाद कर दिया है। वहीं, ईदगाह स्थित जामा मस्जिद में नमाज दो बजे पढ़ी जाएगी। बता दें कि जुमे की दिन ‘खुतबा’ के साथ नमाज दोपहर 12.30 बजे के बाद की जाती है। अब यह 1:30 बजे के बाद की जाएगी।

नीना कोहली की रेप के बाद हत्या तो मीरा को जबरन बनाया मुस्लिम: पाकिस्तानी कोर्ट भी अपहरण कर्ताओं के साथ, नाबालिग राबिया भील को उसके शौहर को सौंपा

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की हालत कितनी ख़राब है यह वहाँ लगभग हर रोज नाबालिग हिन्दू लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम कबूल करवाकर किसी अधेड़ से निकाह के मामलों से जाना जा सकता है। हाल ही में आरती, बिंदिया, राबिया भील के उठाए जाने और जबरन निकाह के बाद नीना कोहली की रेप के बाद हत्या कर दी गई है तो वहीं मीरा भट का अपहरण करके मुस्लिम बना दिया गया है।

वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने ट्वीट करके लिखा, “एक के बाद एक कितनी मासूम बच्चियों की बलि दी जाएगी, इससे पहले कि हमारा राज्य उनकी सुरक्षा के लिए कुछ ठोस कदम उठाए? टंडो युसूफ थाना क्षेत्र में 12 साल की एक और हिंदू लड़की नीना कोहली के साथ रेप के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई है।”

वहीं वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान ने ही यह भी जानकारी दी कि कुछ दिनों पहले, सिंध के मीरपुरखास में 14 साल की नाबालिग हिंदू लड़की मीरा भट का अपहरण करने के बाद, जबरन इस्लाम कबूल करवाकर निकाह करवा दिया गया। उन्होंने प्रमाण के रूप में एक वीडियो भी साझा किया है। वीडियो में हिन्दू लड़की मीरा खुद ही दावा कर रही है कि उसने अपना धर्म बदल लिया है।

हालाँकि, पाकिस्तान में इस तरह का वीडियो बयान नया नहीं है। पहले भी ऐसे कई वीडियो सामने आते रहे हैं और वहीं मामला रफा-दफा हो जाता है। पाकिस्तान का कानून इस बात की भी पड़ताल नहीं करता कि यह वीडियो दबाव डालकर जबरन बनवाया गया है। और ऐसे एक वीडियो से अपहरण से लेकर जबरन इस्लामीकरण, रेप और निकाह सहित प्रताड़ना के सभी मामले ख़ारिज हो जाते हैं।

हाल ही में 13 साल की एक हिंदू नाबालिग लड़की राबिया भील जिसका कुछ दिन पहले अपहरण कर लिया गया था, और इस्लाम कबूल करवाकर एक अधेड़ मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करवा दी गई है। परिवार ने थाने में अपहरण और रेप का मामला दर्ज करवाया था। धरना-प्रदर्शन के साथ माँ की बिलखते हुए वीडियो भी सामने आई थी। लेकिन जब राबिया भील को अदालत में पेश किया गया तो उसके साथ भी वही हुआ जो पाकिस्तान में होता आया है।

पाकिस्तानी अदालत में निकाह के बाद राबिया भील का रटा-रटाया और जो उसके अपहरणकर्ता परिवार ने बताया वो बयान दर्ज किया गया, और जज ने नाबालिग होने के बावजूद उसे आश्रय गृह भेजने के बजाय उसके नए नवेले अपहरणकर्ता शौहर के साथ भेज दिया।

बता दें कि पिछले 8 मार्च को ही वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने राबिया भील की माँ का रोते हुए वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि यह है पाकिस्तान में महिलाओं/लड़कियों की स्थिति, खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों की, सिंध के घोटकी से 13 साल की हिंदू लड़की राबिया भील का अपहरण करके जबरन धर्म परिवर्तन करवा दिया गया है। साथ ही हैस टैग दिया था #WomenAreNotYourProperty

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के सिंध से ही जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दो और नाबालिग हिंदू लड़कियों को उठा लिया गया था। सिंध के खैरपुर से आरती मेघवार (14वर्ष ) तो दूसरी ओर बिंदिया नामक किसी लड़की को उठा लिया गया था। वहीं अब नई तस्वीरों में बिंदिया अब फातिमा बन चुकी है। उसका उसके अपहरणकर्ता शौहर के साथ एक तस्वीर भी सामने आई है।

वहीं पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से हिन्दू बच्चों के बेचे जाने की खबर सामने आई थी। जहाँ जानवरों की तरह बच्चे-बच्चियों को बेचा जा रहा है। यह जानकारी भी वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी के ट्विटर हैंडल ने दी थी। इन मामलों में पाकिस्तान पुलिस की मिलीभगत भी बताई जा रही है।

मस्जिदों से मजहबी नारे, औरतों का रेप और दरिया में तैरती लाशें: जो कश्मीर में भोगा उसे बताते अब भी रो पड़ते हैं हिंदू

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री (Vivek Ranjan Agnihotri) ने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) के जरिए कश्मीरी पंडितों (Stories Of Kashmiri Pandits) के करीब 30 साल पुराने उन जख्मों और मनहूस पलों को दुनिया के सामने रखा है, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उनके साथ बर्बरता की थी। रातों-रात लाखों हिंदुओं को घाटी छोड़कर जाने के लिए विवश होना पड़ा। हिंदू महिलाओं का रेप और उनकी हत्या 1990 में आम बात हो गई थी।

इस फिल्म के बाद पीड़ित लोग एक-एक कर आगे आ रहे हैं और अपने साथ हुए जुल्मों की कहानियाँ दुनिया के सामने रख रहे हैं। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में कुछ और कश्मीरी पंडितों ने अपने दर्द और बेबसी को बयाँ किया है।

कश्मीरी पंडित शीतल कौल, विजय कुमार टिक्कू और फूलां रैना ने बयाँ किए अपने दर्द
कश्मीरी पंडित (बाएँ से) शीतल कौल, विजय कुमार टिक्कू और फूलां रैना (साभार: दैनिक भास्कर)

पहली घटना

पहली शीतल कौल की है, जो एक कश्मीरी पंडित हैं। भास्कर से बात करते हुए शीतल कौल की आँखों से बार-बार आँसू बहने लगते हैं और वो उसे पोंछकर कहती हैं कि कश्मीर के सोपोर में 19 जनवरी 1990 तक उनका भी दो मंजिला मकान था। सेब के कई बागान, गाएँ, बकरियाँ सब कुछ था। शीतल कहती हैं कि उनका जन्म वहीं हुआ, वहीं पर पलीं-बढ़ीं। हिंदुओं के त्योहारों में मुस्लिम पड़ोसी भी शामिल होते थे।

अचानक एक दिन सब कुछ बदल गया। मस्जिदों ने मजहबी नारे गूँजे और हिंदू लड़कियों के घर से निकलने पर रोक लग गई। इन नफरती घोषणाओं में यह कहा गया कि हम कश्मीर को पाकिस्तान बनाएँगे। हिंदू पुरुषों के बिना, हिंदू महिलाओं के साथ। एक-एक कर लड़कियाँ हिंदू घरों से गायब होने लगीं। अगले दिन उनकी लाशें मिलती थीं, दरिया में फूलकर तैरते हुए। ऐसा लगता था कि मानों चढ़ावे का फूल तैर रहा हो। शीतल फिलहाल दिल्ली के रोहिणी सेक्टर के मंगोलपुर कलां में एक किराए के घर में रहती हैं।

दूसरी घटना

इसी तरह से दूसरे कश्मीरी पंडित विजय कुमार टिक्कू बताते हैं कि 19 जनवरी की रात कश्मीरी पंडितों पर जुल्म शुरू हुए। भाई-बहन घर छोड़कर जा चुके थे। जनवरी की सर्द रात में हिंदुओं को घर से खींचकर सड़क पर बैठा दिया गया। धमकी दी गई भाग जाओ वरना मारे जाओगे। वो कश्मीरी में चीख रहे थे, धर्म बदलो, भाग जाओ या फिर मारे जाओ, लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़ दो। हमारी औरतों के गैंगरेप कर आरी से उनके शरीर को काटा गया।

तीसरी घटना

70 साल की फूलां रैना ने कंपकपाती आवाज में बताती हैं कि कैसे कश्मीरी पंडितों और औरतों के साथ बर्बरता की गई। वो कहती हैं कि अब बूढ़ी हो गई हैं और अब वहाँ जा भी नहीं सकती हैं।