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निहंग सिखों के वेश में बदमाशों ने भगवान शिव की प्रतिमा पर बरछे से किया हमला, क्षतिग्रस्त कर दी मूर्ति: CCTV में कैद हुई घटना

पंजाब के अमृतसर से भगवान शिव की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना 7 मार्च 2022 की है, जहाँ हरमंदिर साहिब के पास ही जागरण चल रहा था और वहाँ पर निहंग सिखों के वेश में पहुँचे हमलावरों ने भगवान शिव की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया। बदमाशों की यह करतूत सीसीटीवी में कैद हो गई।

इस घटना को लेकर केस दर्ज कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हरमंदिर साहिब के पास कठेरिया बाजार है। यहीं पर जागरण के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। 7 मार्च को सुबह 5:30 बजे का वक्त था, जागरण खत्म ही हुआ था कि निहंगों के रूप में पहुँचे असमाजाकि तत्वों ने बरछा (लांस) से भगवान शिव की मूर्ति पर हमला किया। ये आरोपित निहंग सिखों के रुप में मंच के पीछे सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए। बदगमाशों ने पहले शिव की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया और फिर मंच पर चले गए।

कुछ ही देर में और बदमाश आते हैं, इनमें से एक ने मूर्त पर बरछे से हमला किया। इस घटना को लेकर शिवसेना के नेता सुधीर सूरी बताते हैं कि जब बदमाश सेटअप में आए तो उन्होंने आयोजकों के साथ बदसलूकी की और गालियाँ दीं।

हिंदू संगठनों ने कार्रवाई की माँग की

इस घटना के बाद अखिल भारतीय हिंदू एकता मंच सामने आया है। हिंदू संगठन ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। संगठन के अध्यक्ष विक्रम गंडोत्रा ​​​​ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर सात दिनों के अंदर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो वो हॉल गेट के बाहर धरना देंगे।

एक वीडियो जारी कर गंडोत्रा ​​​​ने कहा, “बदमाश निहंग सिखों के भेश में आए थे। हालाँकि, वे कौन थे जाँच के बाद इसका खुलासा हो पाएगा। यह बहुत ही निंदनीय घटना है। भगवान एक ही हैं, लेकिन अपने स्वार्थ के कारण बदमाश इस तरह की घटनाएँ कर रहे हैं।” हिंदू नेता ने आगे कहा कि कानून केवल हिंदुओं के लिए बनाया गया है, तो दूसरा पक्ष कथित बेअदबी को लेकर उस व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर देता है। उन्होंने प्रशासन से एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने की माँग की है।

सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस

इस घटना के बाद इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह ने हिंदुस्तान तहलका न्यूज चैनल को बताया, “पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर रही है। बदमाशों ने निहंगों का भेष धारण कर मूर्ति को नुकसान पहुँचाया है। मामले की जाँच की जा रही है और जल्द ही दोषियों को पकड़ लिया जाएगा।”

अलीगढ़ के कॉलेज में बुर्का पहनकर आईं मुस्लिम छात्राएँ: छात्राओं को गेट से लौटाया गया, छात्र ने भगवा पहन कर किया था विरोध

कर्नाटक से शुरू हुआ बुर्का-हिजाब विवाद (Karnataka Burqa-Hijab Controversy) पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh, Uttar Pradesh) स्थित श्री वार्ष्णेय डिग्री कॉलेज में हिजाब पहनकर आईं कुछ छात्राओं को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

कॉलेज ने शनिवार (12 मार्च) को छात्राओं को निर्देश दिया कि वे कक्षा में शामिल होने के दौरान अपना चेहरा न ढँकें। इस दौरान हिजाब पहनकर आईं मुस्लिम छात्राओं को कॉलेज में नहीं घुसने दिया गया और वे घर लौट गईं।

B.Sc अंतिम वर्ष में पढ़ने वाली एक छात्रा ने कहा कि वह कॉलेज में घुसने के दौरान बुर्का पहना था, जिसे कॉलेज प्रशासन ने उतरवा दिया। उसके बाद उससे अपना हिजाब हटाने के लिए भी कहा गया। छात्रा का कहना है कि वह बिना हिजाब के कहीं जाने को तैयार नहीं है।

दरअसल, शुक्रवार (11 मार्च) को एक छात्रा हिजाब में क्लासरूम में आई थी। इसको देखकर एक छात्र भगवा पहनकर एक छात्र कक्षा में आ गया। हिजाब को लेकर दोनों के बीच काफी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद यह मामला कॉलेज के प्रॉक्टर के पास पहुँच गया। इसके बाद अगले दिन कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड को लेकर सख्ती दिखाई।

कॉलेज के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक रिमाइंडर है कि कॉलेज का ड्रेस कोड है और इसका सभी को पालन करना होगा। कॉलेज के प्रॉक्टर अनिल वार्ष्णेय ने कहा कि प्रॉस्पेक्टस में ड्रेस कोड का उल्लेख किया गया है। विद्यार्थियों को कॉलेज के नियमों का पालन करना होगा और ड्रेस कोड को अब और गंभीरता से लागू किया जाएगा।

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद देश के कई राज्यों में फैल गया है। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं।

‘मुकुल वासनिक को बनाओ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष’: गाँधी परिवार के खिलाफ हुआ G-23, केरल-उत्तराखंड में पार्टी के भीतर बगावत

पाँच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की करारी हार के बाद एक बार फिर पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर सार्वजनिक तौर पर बहस होना शुरू हो गई हैं। खबरें हैं की नए अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से माँग करने वाले कॉन्ग्रेस नेताओं के जी-23 ग्रुप ने मुकुल वासनिक का नाम सुझाया था, मगर उनके सुझाव पर गौर नहीं किया गया।

इस ग्रुप में बता दें आनंद शर्मा, गुलाब नबी आजाद, कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शामिल हैं। समाचार एजेंसी के अनुसार इन सबने मिलकर मुकुल वासनिक का नाम नए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए दिया था, मगर उसे नही माना गया। 

सूत्रों से आई इस खबर के अनुसार नेताओं की माँग है कि नया नेतृत्व बिलकुल ऐसे पार्टी लीड करे जैसे सोनिया गाँधी ने साल 2000 के समय में किया था। अभी भले ही सोनिया गाँधी अंतरिम अध्यक्ष हैं लेकिन केसी वेणुगोपाल, अजय माकन और रणदीप सुरजेवाला इसे वर्चुअली चलाते हैं। सूत्रों ने कहा, “राहुल गाँधी अध्यक्ष नहीं हैं। लेकिन वह पीछे से इसे ऑपरेट करते हैं और निर्णय लेते हैं। वह खुलकर बात नहीं करते। हम सब पार्टी के शुभचिंतक हैं न कि दुश्मन।”

यहाँ ये बात मालूम हो कि जी-23 समूह अगस्त 2020 से ही सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर पार्टी के एक सक्रिय अध्यक्ष की माँग उठा रहे थे। मगर, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने इस पर सुनवाई नहीं की और अध्यक्ष चुनने की तारीख आगे-आगे बढ़ती गई। लेकिन, अब 2022 में लगातार पाँचों राज्यों में मिली हार को देखते हुए ये समूह फिर से अपनी माँगें रख रहा है। कल इस संबंध में इस समूह ने अपनी बैठक की थी, जिसमें कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे तमाम नेता शामिल हुए थे।

पार्टी नेतृत्व करने वाले नेताओं से नाराज हैं कॉन्ग्रेसी

उल्लेखनीय है कि समय के साथ कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की माँग तेजी से सामने आ रही है। हाल में केरल के कन्नूर जिले में पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल के इस्तीफे की माँग भी उठीं और इस संबंध में पोस्टर लगे भी देखे गए। हैरान करने वाली बात ये है कि कॉन्ग्रेस नेता से इस्तीफा माँगने वाले पोस्टर उनके करीबी संजीव जोसेफ के कार्यालय में दिखाई दिए। इसके अलावा ये पोस्टर अन्य जगहों पर भी देखने को मिले।

इसी प्रकार कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत को भी चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने पार्टी की हार का पूरा ठीकरा हरीश रावत के सिर फोड़ा है। उनके अलावा रावत के विरोधी प्रीतम सिंह ने भी उत्तराखंड में पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की है।

देखने नहीं… फेस करने की फिल्म है The Kashmir Files: दिल के तार न झनझनाए तो नर्व नहीं अपना नैरेटिव चेक करिए

इस देश ने सदियों से दो गुटों की झड़प देखी थी। दो सम्प्रदायों में तनाव होता था। लड़ाई के समय देश के सामने प्रोजेक्शन में भी ‘फेयर एनफ़’ वाली सुचिएशन थी। गंगा-जमुना, सेवई-खीर सब चलता था। धीरे-धीरे एक वर्ग विक्टिम की तरह हमारे सामने पेश और प्लेस होता चला गया। फिर भी सहिष्णु देश सब देखता रहा। सौहार्द्र का मामला जो था।

लेकिन नहीं… धीरे-धीरे दूसरे वर्ग को विलेन बताना शुरू किया गया। तब तक भी सहिष्णु “कहने दो सानूं की” एटीट्यूड से सहता रहा। मोहरे प्लेसमेंट की राजनीति करने वाले इको सिस्टम ने सोचा ‘ऐसे कैसे?’ इतने पर भी नहीं थमे और अब बारी थी खुलकर तिलकधाकरियों को असहिष्णु या इनटोलरेंट बताने की। जब वो झाग वो सफेदी दो वर्ग कह-कह कर नहीं आए तो साफ-साफ कोई हिंदू-मुस्लिम क्यूँ ना कहे। इकोसिस्टम सर पर सवार होता चला गया। लेकिन फिर ये इस देश का गदर मूमेंट था… अशरफ अली… हिंदुस्तान जिंदाबाद था, ज़िदाबाद है और ज़िदाबाद रहेगा।

मॉन्यूमेंट से डॉक्यूमेंट तक इस देश के सामने जो भी पेश किया गया, सेलेक्टिव या नेरेटिव सैट करता एजेंडा था। कश्मीर फाइल्स उसी नैरेटिव को तोड़ती अपना सच पेश करती एक फिल्म है।
इसे आप रेट भी नहीं कर सकते, इसे रेटिंग नहीं काउंटिंग की दरकार है।

  • कितने कश्मीरी पंडितों पर ज्यादती हुई?
  • कितने कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई, कितनों के साथ बलात्कार हुआ?
  • कितने कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा?
  • कितने वर्षों से वो न्याय की तलाश में हैं?
  • कितने वर्षों से वो अपनी पीड़ा दिल में दबाए बैठे हैं?

यू नीड नॉट टू रेट दिस मूवी… वेन दे आर नॉट कांउटिंग ऑन योर ऑपिनियन। इफ यू हेव एनफ़ करेज जस्ट फेस इट।

कश्मीर फाइल्स देखने की नहीं, फेस करने की फिल्म है। इतने गंभीर सच को बिना गुरूदत्त बने समय के हिसाब से दिखा पाना, समझा पाना मुझे लगता है निर्देशक इसमें सफल रहे।

फिल्मों में मिर्च-मसाला होता है। कश्मीर फाइल्स में सिर्फ मिर्च ही मिर्च है। उसकी कड़वाहट समझनी होगी। फिल्म का ही एक डायलॉग है – “टूटे हुए लोग बताते नहीं है ,उन्हें सुनना पड़ता है।” इतने वर्षों से आपको कोई बता ही तो नहीं रहा था, इसलिए ये कहानी आप सुनने को तैयार नहीं थे।

रलिव गलिव या चलिव बस यही जड़ है इस त्रासदी की और पंडित पुष्कर नाथ जी के पड़ोसी का इशारा उस वक्त कश्मीरी पीड़ितों के लिए आपके दर्द का मूल चरित्र।

एएनयू को भी खूब दिखाया और हम देखेगें भी खूब बजाया। दर्शन कुमार ने भी मौजूदा वक्त के कन्फ्यूज़ लेकिन कूल डूड टाइप के युवा की भूमिका अच्छी निभाई, जो कई बार ‘इंटेलक्चुअल’ के बीच में रहने के लिए अपनी संस्कृति के अस्तित्व को भी संदेह के घेरे में रख देता है।

एक कश्मीरी पंडित परिवार की ये कहानी नुमाइंदगी कर रही है उन तमाम कश्मीरी पंडितों की, जिनकी कहानी में पंडित सुनते ही वर्षों से इस देश का नैरेटिव सेट करने वालों को एलीट क्लास की बू आने लगती थी या पीड़ित के विक्टिम होने में उन्हें अपने एजेंडे के लिए कोई माइलेज या कमीशन नहीं दिखता।

फिल्म आपको फिरन, शिकारा, डल झील, हाउसबोट, चिनार के पेड़, चरार शरीफ से अलग… जब राजा ललित और कश्यप ऋषि के कश्मीर से परिचय कराती है तो रेटिंग की कृपा वहीं से आनी रूक जाएगी। भला हो वो तो भारत देश का इतिहास इतना पुराना, इतना पुख्ता, इतना समृद्ध और इतना ठोस और प्रामाणिक है कि आप चाहकर भी इसे वॉट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान नहीं कह सकते।

फिल्म के तमाम पैमानों पर देखें तो पेड़ के इर्द-गिर्द गानों का स्कोप नहीं था। पेड़ों पर भी सच्चाइयाँ लटकी थीं। संगीत ऐसा जो दिल के तार झनझना देगा और ऐसा ना हो तो अपनी नर्व नहीं नैरेटिव चेक करिएगा।

डायलॉग के हिसाब से आँके तो कुछ डायलॉग सुने-सुने से लगेंगे क्योंकि हमारी संस्कृति पर प्रहार करने वालों के संवाद भी लिमिटेड होते हैं। बाकी तो आपकी सच सुनने की बर्दाश्त क्षमता पर है।

पल्लवी जोशी के अलावा फिल्म में किसी ने एक्टिंग की ही नहीं क्यूँकि वो एक सच को जी रहे थे। पल्लवी जोशी को एक्टिंग करनी पड़ी ताकि आप भविष्य में कभी एजेंडे की ऐसी फाटक रहित रेलवे क्रॉसिंग को देखें तो आसानी से पहचान लें। राष्ट्रवादी जैसे जात-बाहर जैसे काइंड ऑफ तमगे से सुशोभित पल्लवी जोशी की एनएनयू के प्रोफेसर के तौर पुष्करनाथ की भूमिका में अनुपम खेर और उनके दोस्तों की भूमिका में मिथुन चक्रवर्ती प्रकाश बेलावड़ी, पुनीत इस्सर, अतुल श्रीवास्तव और बाकी किरदारों की कहानी कहने और जीने की अदायगी उम्दा रही।

जिस तरह बंकिम चंद चटर्जी और अलमा इकबाल में एक वर्ग अलमा इकबाल छांट लेता है। रफी और किशोर में रफ़ी साहब को चुन लेता है। केके मेनन और नवाजुद्दीन सिद्दकी में नवाज़ के टैलेंट पर मर मिटता है… वैसे ही सेलेक्टिव फैक्ट्स प्रेमी ये वर्ग गोधरा गायब करके गुजरात तो बताएगा लेकिन कभी आपको 1990 का सच नहीं दिखाएगा-बताएगा। निर्देशक इस साहस के लिए बधाई के पात्र हैं। लानते तो ख़ैर उनके हिस्से आनी ही हैं।

फिल्म का एक डायलॉग है – “कश्मीरी पंडितों का सच इतना सच है कि सच नहीं लगता।”

फिल्म का आखिरी सीन है – लाइन में खड़े कश्मीरी पंडित महिलाओं, बच्चों और आदमियों को गोली मारी जा रही है। हॉल में हमने कमजोर हृदय के लोगों को आँख बंद करके झाँकते हुए मुँह में दुपट्टा रख कर ये सीन सुनते हुए देखा।

आँखे मूँद तो लीं लेकिन गोलियाँ चलती रहीं, लोग मरते रहे। बिल्कुल अपने सच यानी 1990 के कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की तरह। आप इससे आँखें मूँद भी लीजिए, नकार दीजिए तो भी ये हुआ तो था ही।

जेल की हवा खा सकते हैं अधिकारियों की गाड़ियाँ चेक करने वाले सपाई: मतगणना से पहले मचाया था उत्पात, अब होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के आगरा में मतगणना स्थल (Counting Center) के बाहर अधिकारियों की गाड़ियों की तलाशी लेने व इस दौरान अभद्रता और हंगामा करने के मामले में FIR दर्ज की गई है। आगरा में मतगणना से पहले मंडी समिति में हंगामा करने और अधिकारियों की गाड़ियों को चेक करने के मामले में रालोद के जिलाध्यक्ष और सपा के दो पूर्व जिलाध्यक्ष सहित 25 नामजद और 60 अज्ञात के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में SSP ने आरोपितों के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट लेकर गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। इससे आरोपितों को जेल भेजा जा सकता है।

बता दें कि मतगणना से पहले बुधवार (9 मार्च 2022) रात को मंडी समिति के बाहर सपा और रालोद के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया था। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों को पहले अंदर जाने से रोका और फिर उनकी चेकिंग की थी। सपा कार्यकर्ताओं ने एडीएम, एसएसपी की गाड़ी भी रोक ली थी। इस मामले में एसआई देवेंद्र सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। 

ये धाराएँ लगाई गईं

मुकदमे में बलवा, सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, गाली गलौज और धमकी देने के साथ-साथ लोक व्यवस्था भंग करने की धारा लगी है। हंगामे के दौरान वीडियो भी बनाया था। इसके आधार पर मुकदमे में 25 नामजद 50-60 अज्ञात आरोपित बनाए गए। एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने विवेचक को नामजद आरोपितों के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट लेकर गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। इससे पहले वाराणसी में EVM की गाड़ी रोक कर हँगामा करने वाले समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं समेत 300 आरोपितों पर केस दर्ज किया गया था। 

ये हैं नामजद

मुकदमे में रालोद के जिलाध्यक्ष नरेंद्र बघेल, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राम सहाय यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष रामगोपाल बघेल, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के रिजवान खान, राष्ट्रीय सचिव रवि यादव, प्रधान प्रतिनिधि राहुल घोष के अलावा राजकुमार, सुनील, कुंवर रवि यादव, राजा श्रीवास्तव, सुलेखा श्रीवास्तव, रजनी, जूही प्रकाश, संजू यादव, रामकुमार, सुनील यादव, विवेक यादव, लाखन सिंह, कुलदीप वाल्मीकि,  प्रिंस, सुरेश दिवाकर, मुरली यादव, शैलू यादव, पूर्व पार्षद राजपाल यादव और 60 अज्ञात आरोपित हैं। इन पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 332, 353, 323, 504, 506, 341, 188 और 7CLA में केस दर्ज किया गया है। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।

अखिलेश यादव ने दिया था EVM सुरक्षा का निर्देश

दरअसल, ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि ईवीएम की सुरक्षा के लिए मतगणना स्थल के आसपास रहकर सुरक्षा करें। पार्टी सुप्रीमो के आदेश पर आगरा में भी सपा के तमाम कार्यकर्ता मंडी गेट पर जुटे। यहाँ पर सपा के नेताओं ने मतगणना स्थल की तरफ जाने वाली और उधर से आने वाली सभी गाड़ियों की चेकिंग की थी। यहाँ तक कि सुलभ शौचालय, वाटर टैंक के साथ ही अधिकारियों की गाड़ियों की डिकी, बोनट और सीट तक को उठवाकर देखा गया। यही नहीं, मंडी समिति में तैनात कर्मचारियों के लिए भोजन ले जा रहे वाहनों की भी गहनता से जाँच की गई। इस दौरान काफी देर हँगामा भी हुआ था। अब मामले में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

‘ये काफी मजेदार है’: मुग्धा गोडसे के साथ KISS पर बोलीं श्रुति सेठ, जीशान अयूब के साथ वेब सीरीज

टीवी एक्ट्रेस श्रुति सेठ (Shruti Seth) अपनी आगामी वेब सीरीजी ‘ब्लडी ब्रदर्स’ (Bloody Brothers) को लेकर खासी चर्चा में हैं। फिल्म में वो अभिनेत्री मुग्धा गोडसे (Mugdha Godse) को ‘किस’ करती दिखाई दे रही हैं। इस सीन को लेकर चर्चाओं के बीच श्रुति ने एक इंटरव्यू को फनी करार किया। एक्ट्रेस का कहना है कि इससे पहले उन्होंने इस तरह का कोई सीन नहीं किया था। इसलिए यह काफी मजेदार था।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में श्रुति ने कहा कि एक कलाकार के लिए उसकी परफॉर्मेंस हमेशा परेशानी को मात देता है। उन्होंने ये भी बताया कि ये वेब सीरीज ब्रिटिश मिस्ट्री थ्रिलर (गिल्ट) का इंडियन वर्जन है। ब्लडी ब्रदर्स में जयदीप अहलावत और जीशान अय्यूब मुख्य भूमिका में हैं। उल्लेखनीय है कि इसी महीने की शुरुआत में इस वेब सीरीज का ट्रेलर रिलीज हुआ था, जिसमें श्रुति सेठ और मुग्धा गोडसे एक दूसरे को किस करती दिख रही हैं। इस दौरान श्रुति ने काला कपड़ा पहना हुआ था, तो मुग्धा ने शर्ट के नीचे सफेद रंग का टैंक टॉप पहना था।

अपनी किसिंग सीन को लेकर श्रुति सेठ कहती हैं, “इससे पहले हम दोनों ने पहले ऐसा कभी नहीं किया था। यह काफी मजेदार था। लेकिन शाद अली (निर्देशक) ने हमें इसे काफी आसानी से करवाया। एक्टर्स के लिए उनका प्रदर्शन परेशानियों को कम करता है। आखिरकार हमने इस पूरे सीन को बड़े ही स्वाभाविक तरीके से कर लिया।”

इस तरह के सीन के लिए दर्शकों के डायनमिक होने के सवाल पर एक्ट्रेस ने कहा, “जहाँ तक ​​दर्शकों की बात है तो मुझे लगता है कि हमें उनके इसे देखने और अपना फैसला देने के लिए इंतजार करना होगा।”

गौरतलब है कि ब्लडी ब्रदर्स वेब सीरीज दो भाइयों की कहानी है। इसमें जयदीप अहलावत ने जग्गी और जीशान अय्यूब ने दलजीत का रोल प्ले किया है। इसके अलावा सीरीज में तीश कौशिक, टीना देसाई, जितेंद्र जोशी, माया अलग और यूरी सूरी भी शामिल हैं। बीबीसी स्टूडियोज इंडिया के सहयोग से एप्लॉज एंटरटेनमेंट ने इसका निर्माण किया है। यह फिल्म 18 मार्च, 2022 को ZEE5 पर रिलीज होगी।

शत्रुघ्न सिन्हा को बाबुल सुप्रियो वाली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाएगी TMC, ‘भाजपा के बंदर’ को दिया विधायकी का टिकट

पश्चिम बंगाल की एक लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा को TMC का प्रत्याशी बनाया है। अब शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से तृणमूल कॉन्ग्रेस के टिकट पर उम्मीदवार होंगे। यह सीट बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बाबुल सुप्रियो और शत्रुघ्न सिन्हा, दोनों ही भाजपा छोड़ कर तृणमूल कॉन्ग्रेस में गए हैं। वहीं बाबुल सुप्रियो अब बालीगंज विधानसभा सीट के उपचुनाव में TMC के प्रत्याशी होंगे। इसकी घोषणा खुद ममता बनर्जी ने ट्वीट के जरिए 13 मार्च (रविवार) को दी है।

अपने ट्वीट में ममता बनर्जी ने लिखा, “टीएमसी द्वारा ख़ुशी से ये घोषणा की जाती है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से लोकसभा उपचुनाव में हमारे प्रत्याशी होंगे। जबकि प्रसिद्ध गायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, बालीगंज से विधानसभा उपचुनाव में हमारे उम्मीदवार होंगे। जय हिंद, जय बांग्ला, जय माँ- माटी- मानुष।”

गौरतलब है कि मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके सांसद बाबुल सुप्रियो 18 सितंबर, 2021 तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में शामिल हो गए थे। उस से पहले जुलाई 2021 में उन्होंने राजनीति को अलविदा कहते हुए आगे का जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित बताया था। तब उन्होंने किसी भी पार्टी में शामिल न होने की बात कही थी। बाबुल सुप्रियो को तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘बीजेपी का बंदर‘ तक कह चुकी है।

इरफ़ान कुरैशी ने खुद को ब्राह्मण बता कर हिन्दू युवती को फाँसा, ट्रेन में हुई थी मुलाकात: जबरन निकाह, धर्मांतरण और रेप, 6 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश में लव जिहाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक पर नाम बदलकर युवती के साथ जबरन शादी और शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही अपहरण, बलात्कार सहित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपित ने अपनी पहचान छिपा हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाया था। आरोपित की पहचान इरफान कुरैशी के रूप में हुई है। 

अपनी असल पहचान छुपाकर युवती को फँसाया

मामला मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर का है, जहाँ एक युवती गाडरवारा थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुँची। युवती ने बताया कि मुस्लिम युवक इरफान कुरैशी ने अपना नाम राहुल दुबे बताकर पहले उसे प्रेम जाल में फँसाया और जबरन धर्म परिवर्तन कर उससे निकाह किया। युवती ने बताया कि आरोपित युवक इरफान कुरैशी मंडला का रहने वाला है। युवती और इरफान की मुलाकात ट्रेन में हुई थी। जहाँ आरोपित ने अपना नाम राहुल दुबे बताया था। मुलाकात के बाद 6 महीने तक फोन पर लगातार बातें हुईं। इसके बाद दोनों ने भाग कर शादी करने की योजना बनाई। 

कार में मिले पहचान पत्र से खुली पोल

2 मार्च को जब इरफान उसे ले जाने के लिए कार से आया तो युवती को इसमें इरफान का परिचय पत्र मिला। इसे देखते ही उसे सारा माजरा समझ में आ गया कि उसके साथ धोखा हुआ है। उसने इसका विरोध किया और भागने की कोशिश की, लेकिन इरफान ने उसका अपहरण कर लिया। वो उसे अपने जीजा के घर ले गया। यहाँ पर एक दिन रुकने के बाद वह उसे अपने घर मंडला ले गया। मंडला में युवक ने उसका धर्म परिवर्तन कराया और एक मौलवी के जरिए उससे निकाह कर लिया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 8 मार्च को युवती को मंडला से बरामद किया।

पुलिस ने कई धाराओं में किया मामला दर्ज

इसके बाद पुलिस ने पीड़ितता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक इरफान कुरैशी, सुल्ताना कुरैशी , रायना कुरैशी, सोहराब आलम इमरान और अब्दुल नदीम को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों में दो महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा  366, 368, 376, 504, 34 एवं प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

‘पॉकेटमारी करती है’: ममता बनर्जी की आलोचक अभिनेत्री को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया, गोवा में TMC की हार पर ली थी चुटकी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुखर आलोचक और बॉलीवुड एवं बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री रूपा दत्ता (Rupa Dutta) को कोलकाता में बिधाननगर उत्तर थाना की पुलिस ने पॉकेटमारी के आरोप में शनिवार (12 मार्च) को किया है। पुलिस का आरोप है कि रूपा कोलकाता पुस्तक मेले (Kolkata Book Fair) में पॉकेटमारी कर रही थी और कूड़ेदान में चोरी के बैग को फेंकते हुए गश्त कर रहे पुलिस अधिकारियों ने देखा था।

पुलिस का दावा है कि जब रूपा की तलाशी ली गई तो उनके पर्स में 75,000 रुपए मिले और इस रुपए को लेकर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। उसके बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बिधाननगर उत्तर थाना लेकर आई और उनके साथ कड़ाई से पूछताछ की।

पुलिस का कहना है कि रूपा ने चोरी के इल्जाम को स्वीकार करते हुए कहा कि वह मेलों, बड़े-बड़े आयोजनों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया करती हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि उनके पास से जो डायरी बरामद हुई है, उसमें कितना पैसा कब कहाँ से लिया था उसका हिसाब लिखा है। पुलिस ने अभिनेत्री को किसी बड़े गैंग की हिस्सा होने का संदेह जाहिर किया है। हालाँकि, रूपा का कोई बयान मीडिया में अभी तक सामने नहीं आया है।

बता दें कि रूपा दत्ता बांग्ला फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं और हिंदी की प्रसिद्ध टीवी सीरियल माता वैष्णो देवी में वैष्णो देवी की भूमिका निभाई है। इसके अलावा भी उन्होंने कई टीवी सीरियलों में अदाकारी की है। उनके ट्विटर हैंडल के प्रोफाइल में लिखा गया है, “SANATANI – Mata Vaishnodevi (in Jai Maa Vaishnodevi Serial) Actor – A Daughter – Philosopher- Founder of Soul foundation- Instagram- rupa_dutta- Black Belt.”

रूपा दत्ता कॉन्ग्रेस, शिवसेना और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) तथा ममता बनर्जी की आलोचक हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समर्थन में प्रचार करने गई ममता बनर्जी का एक मीम वीडियो 11 मार्च को शेयर किया था।

गोवा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कॉन्ग्रेस की करारी हार को लेकर भी उन्होंने ट्विटर पर कटाक्ष किया था। गोवा में TMC को एक सीट भी नहीं मिलने पर उन्होंने ट्वीट किया था, TaTa , Bye Bye, Allah Hafiz , Khuda Hafiz Khela Sesh….”

पाँच राज्यों के विधानसभा के नतीजे आने के अगले दिन उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, “अंग्रेजों द्वारा स्थापित! इटालियन पप्पू द्वारा पतन किया गया! हम ‘ओम शांति’ लिख रहे हैं, लेकिन एक ईसाई पार्टी एक ईसाई विदाई की हकदार है।”

रूपा दत्ता ने फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर भी सवाल खड़ा किया था। उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा था, “रिया चक्रबर्ती सिर्फ सुशांत की ही गर्लफ्रेंड नहीं थी, बल्कि आदित्य ठाकरे की भी गर्लफ्रेंड है। इसीलिए मुंबई पुलिस आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए रिया को बचाना चाहती है। आदित्य ठाकरे भी इन्वोल्व है सुशांत हत्या में।”

फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप पर जब कई अभिनेत्रियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, उसी दौरान अभिनेत्री पायल घोष ने भी उन पर सवाल खड़ा किया था। उस वक्त भी रूपा ने पायल का समर्थन किया था। उन्होंने ट्वीट किया था, “अनुराग कश्यप के नज़रों में किसी भी औरत का कोई इज्ज़त नहीं है।जो मुझे उसे जानने के बाद पता चला।इसीलिए पायेल घोष का इल्ज़ाम बिलकुल सही है।अनुराग कश्यप को कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए।और यह ड्रग भी लेता है।अपने आर्टिस्ट को भी सप्लाई करता है NCB जाँच करे कृपा।”

रूपा दत्ता करणी सेना की पश्चिम बंगाल की अध्यक्ष रही हैं। हालाँकि, उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर यह जानकारी अब उपलब्ध नहीं है। वह सोल फाउंडेशन नाम से एक संस्था चलाते हुए कई सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं और देश राजनैतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखती हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट को भी अक्सर रिट्वीट करती हैं।

‘भारतीय सेना ने किया 11250 महिलाओं का रेप, 22942 हुईं विधवा’: यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी दुनिया भर में फैला रही फेक न्यूज़

भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने के काम में जुटी अलगाववादी नेता यासीन मलिक की पाकिस्तानी बीवी मुशेल हुसैन मलिक की हकीकत एक बार फिर सामने आई है। नई दिल्ली के एक फैक्ट चेकिंग संस्थान ने खुलासा किया है कि कैसे यासीन मलिक की बीवी हर स्तर पर भारत और यहाँ के प्रशासन को नीचा दिखाने का प्रयास करती हैं और भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़तीं।

डिजिटल फॉरेंसिक, रिसर्च एंड एनालेटिक्स सेंटर के अनुसार, पाकिस्तान के कई नामी हस्तियों के अकॉउंट से भारत के तंत्र को बदनाम करने का प्रयास हो रहा है। इन सभी अकॉउंट्स से सिर्फ इस मामले पर ही बात होती है कि भारतीय अल्पसंख्यकों यानी कि मुसलमानों के ऊपर भारत में अत्याचार होते हैं और इस तरह ये सारे अकॉउंट न केवल पाकिस्तान मुस्लिमों को भारत के खिलाफ़ भड़काते हैं बल्कि भारत के मुस्लिमों को भी भारत के ख़िलाफ़ करने का प्रयास करते हैं।

मुशैल हुसैन मलिक

80 हजार फॉलोवर्स वाली यासीन मलिक की बीवी तो अपने अकॉउंट से सिर्फ ये विश्वास दिलाने की कोशिशों में हैं कि भारत में मुस्लिमों का नरसंहार हो रहा है। उनका उत्पीड़न हो रहा है। उन्हें यहाँ सताया जा रहा है। उनकी औरतों की इज्जत लूटी जा रही है।

वह अपने आपको टि्वटर अकाउंट पर प्राउड वाइफ ऑफ यासीन मलिक कहती हैं और कश्मीरी अलगाववादियों को हीरो बताती हैं। इतना ही नहीं, मुशेल अपने शौहर व अन्य अलगाववादियों की बेल के लिए भी ट्वीट्स में आवाज उठाती हैं। वह कश्मीर की महिलाओं की तस्वीरों का प्रयोग करके दिखाती हैं कि भारतीय सेना उनके ऊपर कितने अत्याचार कर रही है जबकि हकीकत ये है कि इन तस्वीरों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है जैसा कि मुशेल अपने ट्वीट में दावा करती हैं।

मुशेल के वीमन्स डे पर किए गए ट्वीट

साझा किए गए ट्वीट्स में वह कश्मीरी मुसलमानों के उत्पीड़न के लिए लगातार भारत को दोषी ठहराती हैं और अपनी शिकायतें यूएन से जुड़े संगठनों को टैग करती रहती हैं। उनका मकसद है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम किया जाए। एक ट्वीट में उन्होंने दावा किया हुआ है कि 1989 से लेकर अब तक कश्मीर में भारतीय सेना ने 11, 250 औरतों का रेप किया है जबकि 22 हजार से ज्यादा औरतें सेना के कारण विधवा हो गई हैं।

यासीन मलिक और उनकी पत्नी मुशेल हुसैन मलिक

बता दें कि अलगाववादी नेता व जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का अध्यक्ष रहा यासीन मलिक पर 2017 में टेरर फंडिंग का आरोप है। इसी मामले में उसकी गिरफ्तारी हो रखी है। इसके अलावा उसके ऊपर पूर्व मुख्यमंत्री और बाद में गृहमंत्री मुफ्ती सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण और वायुसेना कर्मियों की हत्या के आरोप में केस दर्ज हैं।

साल 2019 में जब यासीन दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था तब भी उसकी बीवी मुशेल मलिक ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में मशाल मलिक ने एक कविता भी पढ़ी थी। कविता में ‘भारत द्वारा कश्मीर में किए जा रहे अत्याचार की चर्चा’ थी। ये वही मुशेल मलिक हैं, जिन्होंने अपने पति यासीन मलिक के जेल जाने के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुला कर रोने-धोने का नाटक किया था।