Home Blog Page 2967

MP फंड से मिले ₹25 करोड़, खर्च ₹26.6 करोड़: जिस ‘ब्याज’ पर भगवंत मान ने ठोकी खुद की पीठ उसका देना होता है हिसाब

पंजाब के विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election-2022) को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच 16 फरवरी 2022 को न्यूज चैनल आज तक के ‘पंजाब पंचायत‘ पर अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और भगवंत मान (Bhagwant mann) ने अपनी जीत का दावा किया। इसी क्रम में भगवंत मान ने इस बात का भी दावा किया कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत 25 करोड़ रुपए की निधि दी गई थी, लेकिन 2014-2019 के बीच उन्होंने कुल 26.6 करोड़ रुपए का हिसाब दिया। मान के मुताबिक, ये जो 1.1 करोड़ रुपए हैं ये उन्हें पाँच साल में बैंकों के द्वारा ब्याज मिले हैं। बाकी बचा फंड पिछले सांसद ने जो छोड़ दिया था वो है।

दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक रैली के दौरान भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा था कि आखिर मान ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया है? इसके जवाब में मान ने कहा, “सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत मुझे 2014-2019 के दौरान 25 करोड़ रुपए का फंड मिला। मैंने 26.61 करोड़ रुपए का हिसाब दिया।” भगवंत मान ने अधिक फंड के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जब भी किसी तरह का चुनाव होता था तो वो आचार संहिता के कारण एमपीलैड फंड का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे, जिस पर बैंक की तरफ से ब्याज दिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि पाँच साल में उन्हें बैंकों के जरिए 1.01 करोड़ रुपए की ब्याज मिली है। मान कहते हैं कि इन 26 करोड़ में से 60 लाख रुपए पिछले सांसद ने छोड़ दिया था। मैंने कहा कि अगर 25 करोड़ रुपए जनता के हैं, तो उसका हित भी जनता का है।

2014-2019 के बीच सांसद के तौर पर भगवंत मान का रिकॉर्ड

MPLADS की बेवसाइट्स के मुताबिक, 2014-2019 के दौरान भगवंत मान को 2.5 करोड़ रुपए की 10 किस्तों में कुल 25 करोड़ रुपए की राशि दी गई थी।

साभार: MPLADS.gov.in

उस वक्त ब्याज समेत मिलाकर कुल 25.84 करोड़ रुपए का फंड उपलब्ध था। इसमें से से आप सांसद ने 24.87 करोड़ रुपए का फंड अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यो के लिए मंजूर किया था। इसमें से 24.53 करोड़ रुपयों (96.11%) का इस्तेमाल प्रोजेक्ट्स में किया गया, लेकिन 16वीं लोकसभा में उनका कार्यकाल पूरा होने तक मान के पास कुल 1.31 करोड़ रुपए का फंड ऐसा था, जिसका उपयोग ही नहीं किया गया था।

साभार: MPLADS.gov.in

डैशबोर्ड के आँकड़ों को देखने पर पता चलता है कि मान ने 2,103 कार्यों के विकास की सिफारिश की थी, जिनमें से केवल 1,759 पूरे हो पाए थे। वहीं परियोजनाओं पर उनके द्वारा किए गए खर्च को देखें तो उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर (73.67%) पर सबसे ज्यादा और सबसे कम कृषि (0.64%) खर्च किया था।

साभार: MPLADS.gov.in

भगवंत मान का ब्याज का दावा

भगवंत मान ने फंड मिलने का जो दावा किया है वो करीब-करीब सरकारी आँकड़ों से मेल खाता है। इस थोड़े से अंतर के साथ ही मान ने ये साबित करने की कोशिश की है कि वो इकलौते ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने ब्याज का हिसाब देने के साथ ही पिछले सांसद की निधि को आगे बढ़ाने का काम किया है।

जबकि हकीकत ये है कि नियमों के मुताबिक, किसी भी सीट पर पूर्व सांसद जो भी राशि का इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो वो नए सांसद को आगे बढ़ाना होता है। ऐसे में सारे ब्याज का भी हिसाब देना होता है।

साभार: MPLADS.gov.in

गौरतलब है कि पंजाब के 15 सांसदों में से 6 सांसदों ने मान की तुलना में कम खर्च किया था। वहीं तीन सांसदों, सुनील कुमार जाखड़ (कॉन्ग्रेस) ने 119.23 फीसदी, विजय सांपला (बीजेपी) ने 100.23% और शेर सिंह घुबाया (कॉन्ग्रेस) ने 100.33 फीसदी की स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किया था।

तीन से अधिक सांसदों ने 100 फीसदी से अधिक राशि का किया इस्तेमाल

नियमानुसार, अगर जरूरत पड़ती है तो सांसद सरकार से अतिरिक्त फंड की माँग कर सकता है। इसके अलावा ब्याज और आगे की राशि प्रत्येक सांसद के लिए ‘ब्याज के साथ उपलब्ध राशि’ में जोड़ी जाती है।

कॉन्ग्रेस के राजस्थान में PFI ने निकाला ‘यूनिटी मार्च’, कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को मंजूरी पर घिरी अशोक गहलोत सरकार

राजस्थान में अशोक-गहलोत सरकार ने कई राज्यों में प्रतिबंधित पीएफआई को राज्य में धरना प्रदर्शन सहित मार्च करने की खुली छूट दे दी है। गुरुवार (17 फरवरी, 2022) को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने अपने वार्षिक ‘पीएफआई दिवस’ के अवसर पर राजस्थान के कोटा में एक ‘एकता मार्च’ का आयोजन किया है।

भाजपा ने एनआईए द्वारा घोषित कट्टरपंथी संगठन को राजस्थान के राजनीतिक परिवेश में प्रवेश की अनुमति देने के लिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। इस मुद्दे पर बोलते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “पीएफआई को लोकप्रिय और वैधता प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राजस्थान सरकार पीएफआई को कोटा में एक मार्च निकालने की अनुमति दे रही है, चरमपंथी समूहों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर के तहत जहाँ उसके हजारों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सड़कों पर मार्च करने की अनुमति दी जाएगी।”

टाइम्स नाउ से बात करते हुए, पूनावाला ने पीएफआई का पर्दाफाश करते हुए लताड़ लगाई, उन्होंने कहा, “एनआईए ने पीएफआई को कट्टरपंथी हेट ग्रुप के रूप में नामित किया है। एक समूह जो चरमपंथी और आतंकी गतिविधियों में लिप्त है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने PFI पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीएए विरोधी दंगों में उनकी भूमिका सर्वविदित है और इसकी जाँच की जा रही है। यहाँ तक ​​कि इन दंगों को अंजाम देने के लिए पीएफआई को मिलने वाला फंड भी ईडी की जाँच के दायरे में रहा है। इतने सारे मामलों और चरमपंथी गतिविधियों की एक लंबी सूची के बावजूद, जिसमें पीएफआई शामिल रहा है, कॉन्ग्रेस पार्टी पीएफआई को संरक्षण और वैधता प्रदान करना जारी रखे हुए है।”

ANI ने PFI के यूनिटी मार्च की तस्वीरें शेयर कीं हैं, जहाँ PFI समर्थकों द्वारा AFSPA और UAPA जैसे कानूनों का विरोध करने वाले पोस्टर लगाए गए थे।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजू वर्मा ने भी ट्वीट किया, “अशोक-गहलोत सरकार द्वारा कट्टरपंथ को वैध बनाने के प्रयास, केवल इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि कॉन्ग्रेस कैसे अपराध का समर्थन करती है।”

विडंबना यह है कि गहलोत की सरकार राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में ‘घूंघट’ व्यवस्था को खत्म करने के लिए अभियान चलाती रही है.

हिजाब विवाद को भड़का रहा पीएफआई

जबकि कर्नाटक राज्य सरकार ने हिजाब विवाद को भड़काने के पीछे कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) – पीएफआई की छात्र शाखा की भूमिका की तरफ साफ़ इशारा किया है, कुछ बुर्का पहने मुस्लिम छात्राओं ने पहले ही स्वीकार किया है कि उन्हें सीएफआई और जमात-ए-इस्लामी द्वारा बुर्का पहनने की सलाह दी गई थी। मुस्कान ज़ैनब के पिता – जिनकी प्रसिद्धि परिसर में “अल्लाह-हू-अकबर” का नारा है, को भी कट्टरपंथी इस्लामी समूह पीएफआई का सदस्य पाया गया। सोशल मीडिया पर, पीएफआई के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने में कॉन्ग्रेस की भागीदारी और भूमिका कई बार उजागर हो चुकी है।

कर्नाटक का सरकारी पीयू कॉलेज जहाँ सबसे पहले हिजाब विवाद शुरू हुआ था, के प्रिंसिपल ने मीडिया को बताया था कि संबंधित छात्राओं ने पहले कभी हिजाब नहीं पहना था, लेकिन सीएफआई के प्रभाव में इसे पहनना शुरू कर दिया है। मुस्लिम छात्राएँ इससे पहले दिसंबर में एक सीएफआई वकील के साथ कॉलेज आई थीं और माँग कर रही थीं कि उन्हें संस्थान के ड्रेस कोड का उल्लंघन करते हुए हिजाब पहनकर कक्षाओं के अंदर बैठने दिया जाए।

बीवी जिद्द करे तो उसके साथ 3 दिन न सोएँ, करें पिटाई: हिजाब वाली महिला मंत्री ने मर्दों को बाँटे टिप्स, औरतों से कहा- शौहर से इजाजत ले बोलें

कर्नाटक में बुर्के पर चल रहे विवाद (Karnataka Hijab Row) के बीच मलेशिया की हिजाब पहनने वाली एक महिला मंत्री के बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। महिला मंत्री ने ​मर्दों को सलाह दी है कि यदि उनकी पत्नी ‘उचित व्यवहार’ न करें तो वे उसकी पिटाई करें। इतना ही नहीं मर्दों को जिद्दी बीवी के साथ तीन दिन तक नहीं सोने की भी सलाह दी है।

मलेशिया (Malaysia) की इस महिला मंत्री का नाम है- सिती जैला मोहम्मद युसॉफ (Siti Zailah Mohd Yusoff)। वे पैन इस्लामिक मलेशियन पार्टी की सांसद हैं। महिला, परिवार और सामुदायिक विकास विभाग की उपमंत्री हैं। जैला मोहम्मद युसॉफ ने इंस्टाग्राम पर दो मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने इसे ‘मदर टिप्स’ का नाम दिया। इस वीडियो में उपमंत्री ने जिद्दी पत्नियों को अनुशासित करने के लिए पतियों को ‘टिप्स’ दिए हैं। इसके बाद उन्होंने महिलाओं को भी पति के साथ रहने के तौर-तरीकों के बारे में ‘सलाह’ दी है।  

वीडियो में वह कहती हैं कि पति पहले अपनी जिद्दी पत्नियों के साथ बात करके उन्हें अनुशासित करें। अगर उनकी पत्नियाँ फिर भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति तीन दिनों तक उनके साथ नहीं सोएँ। सिती जैला ने आगे कहा कि इसके बावजूद अगर पत्नी सलाह लेने से इनकार करती है या अलग सोने के बाद भी अपना व्यवहार नहीं बदलती हैं, तो पति सख्ती दिखाए। वे अपनी पत्नियों की पिटाई करें। उनके इस वीडियो के बाद उन पर घरेलू हिंसा (Domestic Violence) को सामान्य करने का आरोप लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि वह मर्दों को अपनी पत्नियों को पीटने के लिए कहकर घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं।

महिलाओं को दी ये हिदायत

मंत्री सिती जैला ने महिलाओं को सलाह दी कि अगर वे पतियों का दिल जीतना चाहती हैं, तो वे अपने शौहर के कहने पर ही बातचीत करें। सिती ने महिलाओं से कहा कि अपने शौहर से तब बात करें जब वे शांत हों, खाना खा चुके हों, प्रार्थना कर चुके हों और आराम कर रहे हों। उनका कहना था कि जब वह बोलना चाहती हैं, तो पहले अपने शौहर से इजाजत लें। मलेशिया की मंत्री की इन बयानों को लेकर उनकी हर तरफ आलोचना हो रही है और कई संगठनों ने कहा है कि उन्हें अब अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

एक साल में रिपोर्ट हुए 9015 घरेलू हिंसा के मामले

महिला अधिकार समूहों के एक गठबंधन, ज्वाइंट एक्शन ग्रुप फॉर जेंडर इक्वेलिटी ने सिती जैला पर घरेलू हिंसा को सामान्य करने का आरोप लगाया और माँग की कि वह उप महिला मंत्री के पद से इस्तीफा दें। एक संयुक्त बयान में कहा गया कि उप मंत्री को घरेलू हिंसा को सामान्य करने का प्रयास किया, जो कि मलेशिया में एक अपराध है। संगठन ने कहा कि 2020 और 2021 के बीच, घरेलू हिंसा की 9015 पुलिस रिपोर्टें दर्ज की गईं। इसन ने कहा कि हो सकता है कि असल में ये आँकड़े और भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कुछ महिलाएँ अपने साथ हुई ज्यादतियों को रिपोर्ट नहीं करवाती है, जिसकी वजह से वह रिकॉर्ड में नहीं आ पाता है।

बहन की बेटी के साथ लिव इन में था शाहिद, निकाह को कहा तो किया टॉर्चर: दिल्ली में 7 साल की बच्ची के साथ मामू उस्मान ने किया रेप

दिल्ली और ग्वालियर में मामाओं द्वारा अपनी भांजियों के साथ रेप की खबर है। ग्वालियर में शाहिद खान और दिल्ली में खलील उस्मान ने इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने खलील उस्मान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि शाहिद खान को ग्वालियर पुलिस तलाश कर रही है। शाहिद सेना का जवान बताया जा रहा है।

दिल्ली में 7 साल की भांजी से मामा खलील उस्मान ने किया रेप

पहली घटना राजधानी दिल्ली से है। दक्षिण दिल्ली में 7 साल की बच्ची के साथ उसके मामा खलील उस्मान ने घटना को अंजाम दिया। घटना दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुरी बेरी थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने आरोपित को बिहार के किशनगंज से गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची को उसके रिश्ते के मामा ने लालच देकर हवस का शिकार बनाया। दुष्कर्म के बाद आरोपित फरार हो गया था। पीड़िता ने तबियत खराब होने पर अपने परिजनों को इस घटना की जानकारी दी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी थी। SHO फतहेपुर बेरी ने ऑपइंडिया को बताया कि यह घटना 13 फ़रवरी की है।

ग्वालियर में 1 साल तक भांजी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहा मामा शाहिद

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अपनी भांजी के साथ 1 साल तक लिव इन रिलेशनशिप रहने वाले मामा के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि मामा शाहिद खान ने अपनी भांजी से निकाह का वादा किया था, लेकिन बाद में वह मुकर गया। उसने कहीं और सगाई भी कर ली। आरोपित शाहिद खान सेना में है और फ़िलहाल चंदेरी में पोस्टेड है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुरार थाना क्षेत्र के घोसीपुरा की है। पीड़िता का आरोप है कि उसके मामा ने 4 साल तक उसका यौन शोषण किया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया तब उसके साथ मारपीट की गई। पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया है।

बुर्के वाली मुस्कान का एक चेहरा ये भी: पत्रकार के सवाल पर भड़की, फोटो-वीडियो डिलीट कराए; लगाए थे ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे

कर्नाटक में बुर्के को लेकर जारी बहस (Karnataka Burqa/Hijab Controversy) के बीच बुर्का पहनी एक लड़की का वीडियो सामने आया था। नाम था- मुस्कान जैनब (Muskan Zainab)। मुस्कान ने कैम्पस में बुर्का पहनकर ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए थे। इसके बाद से वह सुर्खियों में बनी हुई है। तमाम मीडिया चैनल्स और अखबार उसके घर जाकर इंटरव्यू ले रहे हैं। इस बीच खबर आ रही है कि मुस्कान के घर पर मीडिया से बदसलूकी हुई।

दरअसल हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ का रिपोर्टर मुस्कान का इंटरव्यू करने सादात नगर स्थित उसके घर पर पहुँचा था। इंटरव्यू उस वक्त तक तो ठीक चला, जब तक हिजाब पर बात होती रही। जैसे ही रिपोर्टर ने मुस्कान से पूछा कि ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाकर वह फेमस हो गई है और उसे कई जगह से गिफ्ट मिल रहे हैं, तो मुस्कान ने इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके घरवाले भी रिपोर्टर पर भड़क गए और वहाँ से उसे भगा दिया। परिजनों ने रिपोर्टर को धमकी दी और कई फोटो और वीडियो भी डिलीट भी करा दिए।

पहले रिपोर्टर ने मुस्कान से ‘हिजाब कब से पहन रही हैं, स्कूल में हिजाब पहनकर क्यों गईं’ जैसे सवाल पूछे। मुस्कान ने इसका सामान्य सा जवाब दिया और इसे मुस्लिम होने की पहचान, गर्व और इस्लाम की संस्कृति बताया। साथ ही उसने यह भी कहा कि वह बुर्के के लिए नहीं, हिजाब के लिए खड़ी है। भले ही वह इसे ‘हिजाब’ के नाम पर प्रदर्शन बता रही है, लेकिन मुस्कान के साथ ही अन्य मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा गया है। बता दें कि हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक।

खैर बात आगे बढ़ी और अखबार के रिपोर्टर ने पूछा कि उसको बहुत गिफ्ट भी मिल रहे हैं और मीडिया में वह सुर्खी बन रही है। इस पर मुस्कान ने कहा कि बस इतना काफी है और अभी वह ज्यादा बातचीत नहीं करेगी। मुस्कान ने कहा, “बस थैंक यू, मैं और कोई बात नहीं करूँगी।” इसके बाद मुस्कान ने माइक निकाल दिया और उसके परिजन रिपोर्टर को घर से जाने के लिए कहने लगे और पुलिस बुलाने की धमकी भी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्टर ने मुस्कान के घर में रखे गुलदस्ते और उसे मिले गिफ्ट की फोटो और वीडियो भी लिए थे। मगर भड़के घरवालों ने उन्हें डिलीट करा दिया। मुस्कान के पिता ने अपने बेटे को हिदायत भी दी कि घर में जो भी लोग आ-जा रहे हैं, उन पर वो नजर रखे। मुस्कान के पिता ये भी कहते दिखे कि इंटेलिजेंस विभाग की नजर उनके घर पर है।

बता दें कि मुस्लिम संगठनों ने मुस्कान पर इनामों और उपहारों की बौछार कर रखी है। महाराष्ट्र के मालेगाँव की मेयर ताहिरा शेख ने मालेगाँव में उर्दू घर का नाम मुस्कान खान के नाम पर रखने का ऐलान किया है। वहीं, मुंबई के बांद्रा से कॉन्ग्रेस विधायक ज़ीशान सिद्दीकी ने मुस्कान के घर जाकर मुलाकात की और उसे आईफोन और स्मार्टवॉच गिफ्ट किया। इससे पहले इस्लामिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी मुस्कान खान को पाँच लाख रुपए का ईनाम दिया था।

उल्लेखनीय है कि भड़काऊ मजहब नारे लगाने के बाद मुस्कान को तालिबान और पाकिस्तान से भी समर्थन मिला। उसके पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से भी संबंध सामने आए हैं। उसके अब्बा पीएफआई के नेता हैं। उडुपी के कॉलेज में बुर्के में आने वाली छात्राओं को कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने उकसाया था।

‘हिजाब फर्स्ट’ वालों के दादा पाकिस्तान क्यों नहीं गए: स्वामी ने पूछा, बोलीं तस्लीमा नसरीन- औरतों को सेक्स का सामान बना देता है हिजाब

बुर्के पर जारी विवाद के बीच सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बड़ी बात कही है। स्वामी ने पूछा है कि जो लोग पढ़ाई से पहले हिजाब की बात कर रहे हैं, उनके पुरखे पाकिस्तान क्यों नहीं गए। वहीं नसरीन ने समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए कहा है कि हिजाब, नकाब और बुर्का का एक ही मकसद है, औरतों को सेक्स के सामान के तौर पर बदलना। उन्होंने अपमानजनक बताते हुए इस चलन को बंद करने वकालत की।

सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट में कहा है, “हिजाब विवाद देखने के बाद, जो मुस्लिम छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं और कह रहे हैं, पहले हिजाब फिर पढ़ाई। मैं ये सोच रहा हूँ कि उनके दादाओं ने पाकिस्तान जाने की बजाए भारत में रहना क्यों चुना। वहाँ उन्हें बिना किसी दिक्कत के ‘हिजाब पहले’ मिल जाता।”

वहीं वेबसाइट फर्स्टपोस्ट.कॉम को दिए इंटरव्यू में तस्लीमा नसरीन ने भी इस विवाद से जुड़े हर पहलुओं पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एक सेकुलर देश को शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड को अनिवार्य करने का अधिकार हैं। छात्रों से अपनी मजहबी पहचान घर पर रखने के लिए कहना गलत नहीं है। स्कूलों में मजहबी कट्टरता के लिए जगह नहीं हो सकती। वहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता, लैंगिक समानता, वैज्ञानिक सिद्धांतों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए।

तस्लीमा नसरीन ने इस पूरे विवाद को इस्लाम का मसला मानने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सातवीं सदी के लागू नहीं हो सकते हैं और होने भी नहीं चाहिए। साथ ही यह भी समझना होगा कि बुर्का और हिजाब कभी भी एक महिला की पसंद नहीं हो सकते। उन्हें इसके लिए मजबूर किया जाता है।

गौरतलब है कि इस विवाद पर कर्नाटक हाई कोर्ट की फुल बेंच सुनवाई कर रही है। अंतरिम आदेश आने तक उसने शिक्षण संस्थानों में मजहबी पोशाक के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। इसके खिलाफ 765 वकीलों, कानून के छात्रों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें हिजाब पहनने से रोके जाने को मुस्लिमों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

नोट: भले ही इस विरोध-प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

केरल: अब भाजपा कार्यकर्ता की चाकुओं से गोदकर हत्या, इससे पहले घर में घुस रंजीत श्रीनिवास को मार डाला था

केरल से एक और बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या की खबर सामने आई। मृतक की पहचान सरथ चंद्रन के तौर पर हुई है। अलप्पुझा जिले के हरिपद इलाके 16-17 फरवरी की दरम्यानी रात लगभग 12.30 बजे चाकुओं से उन्हें गोद दिया गया। सरथ कुमारपुरम के करीब स्थित वरयंकोडे के रहने वाले थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरथ पर हमला एक मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बहस के बाद हुआ। पुलिस ने हमलवारों के मुखिया का नाम नंदू प्रकाश बताया है। पुलिस के अनुसार उन्हें पहले से ही माफियाओं द्वारा जिले में गड़बड़ी की की शिकायतें मिली थीं। घटना के पीछे ड्रग्स माफिया का हाथ होना बताया जा रहा है। भाजपा ने भी इसकी आशंका जताई है। कुछ ही दिन पहले इसी जिले में ड्रग्स माफियाओं ने ही 2 अन्य युवाओं की हत्या कर दी थी।

अलप्पुझा जिले में ही बीते 19 दिसंबर BJP ओबीसी मोर्चा की प्रदेश इकाई के सचिव रंजीत श्रीनिवासन की घर में घुसकर हत्या की गई थी। इस मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 5 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पेशे से वकील रंजीत श्रीनिवास की उम्र 40 साल थी। उन्होंने 2016 का केरल विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।

रंजीत के भाई अभिजीत ने बताया था कि उनके भाई के सिर पर हथौड़े से वार किया गया। बीवी, माँ और छोटी बेटी के सामने उनका चेहरा बिगाड़ दिया गया। छोटी बेटी जब भागकर बचाने आगे आई तो हमलावरों ने उसके सामने तलवार निकाल लिया था। माँ को जमीन में गिराकर उन्हें कुर्सी से दबा दिया। उन्होंने बताया था कि गुंडों ने उनके भाई व भाजपा नेता रंजीत के पहले पैर काटे किए ताकि वो भाग न सकें। इसके बाद उनकी बाइक तोड़ी गई।

उससे पहले नवम्बर 2021 में 26 साल के युवा RSS कार्यकर्ता संजीत की हत्या उनकी पत्नी के आगे ही कर दी गई थी। घटनास्थल पलक्कड़ का इल्लापुल्ली था। हमलावर दिनदहाड़े कार से आए थे। घटना के समय लोगों की भीड़ भी मौजूद थी।

कुएँ में एक साथ गिरे 23, 13 महिलाओं की मौत: यूपी के गाँव में शादी से पहले मातम

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कुशीनगर (Kushinagar) जनपद में बुधवार (16 फरवरी 2022) की रात शादी की एक रस्म के दौरान दिल दहलाने वाला हादसा हो गया। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में महिलाएँ और बच्चियाँ शामिल हैं। हादसा रात करीब 8:30 बजे हुआ है।

जानकारी के मुताबिक मटकोड़ की रस्म के लिए नौरंगिया गाँव में एक कुएँ के पास लोग जमा थे। इसी दौरान स्लैब टूटने की वजह से एक साथ कई लोग कुएँ में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने गाँव के लोगों की मदद से सभी को कुएँ से बाहर निकालने का काम शुरू किया।

रात होने की वजह से राहत एवं बचावकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कुएँ में 22-23 लोगों के गिरे होने की बात बताई जा रही। सभी को निकट के अस्पताल भेजा गया। इनमें 13 की हालत गंभीर देख कर जिला अस्पताल भेजा गया। इन सभी को देखने के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि इस हादसे में करीब 10 लोग जख्मी भी हुए हैं। जख्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों के परिजन को चार-चार लाख रुपए की सहायता दी जाएगी

कुशीनगर जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि एक पुराना कुआँ स्लैब से ढँका था। उसके ऊपर कुछ महिलाएँ और बच्चे बैठे थे। शादी का कार्यक्रम था। वजन ज्यादा होने के कारण स्लैब टूट गया। उसके ऊपर जितने लोग बैठे थे, वो उसके अंदर चले गए। सभी को अस्पताल ले जाया गया। इसमें सभी महिलाएँ और बच्चियाँ हैं।

मौके पर एंबुलेंस के न पहुँचने की बात पर उन्होंने कहा कि यह जाँच का विषय है। मामले में जिनकी भी लापरवाही है, जाँच की जाएगी और पीड़ित के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। बता दें कि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस के लिए कई बार फोन किया गया था। दस लोगों ने समय-समय पर एम्बुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन कोई एम्बुलेंस नहीं पहुँची। हादसे के बाद जब मौके पर एम्बुलेंस नहीं पहुँची तो प्राइवेट जीप और पुलिस की गाड़ियों से घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया।

पीएम मोदी ने जताई गहरी संवेदना

पीएम मोदी ने हादसे में जान गँवाने वाले पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ हादसा हृदयविदारक है। इसमें जिन लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। साथ ही घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। स्थानीय प्रशासन हर संभव मदद में जुटा है।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “जनपद कुशीनगर के ग्राम नौरंगिया स्कूल टोला की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में हुई ग्रामवासियों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएँ मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के साथ है। प्रभु श्री राम से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना है।”

वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ट्वीट किया गया, “यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र में कुएँ में गिरने की दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल बचाव और राहत कार्य संचालित कराने तथा घायल लोगों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं।”

…ऐसे लोगों पर हमारा डंडा नहीं चलेगा तो क्या चलेगा, क्या इनकी आरती उतारूँ: अखिलेश राज के करप्शन का जिक्र कर बोले CM योगी

उत्तर प्रदेश के झाँसी में डीडी न्यूज की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव में 16 फरवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड के तमाम मुद्दों के साथ UP के लॉ एन्ड आर्डर और विपक्षी दलों से जुड़े कई सवालों के दो टूक जवाब दिए।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “चुनाव है तो थोड़ी बहुत गर्मी जरूर है, लेकिन 10 मार्च के बाद सब शांत हो जाएगा। डबल इंजन की सरकार फिर से आएगी। यह चुनाव पब्लिक लड़ रही है। पार्टियाँ हट चुकीं हैं। सुरक्षा UP में बड़ा मुद्दा था। हर तीसरे दिन दंगे होते थे। बेटियाँ स्कूल नहीं जा पातीं थीं। माफिया हावी थे। पेशेवर अपराधी सत्ता का संरक्षण पाते थे। व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर कब्जे होते थे। कॉन्ग्रेस की सरकार में ये माफिया पनपे थे। बसपा और सपा ने इन्हे खाद पानी दिया। अब भाजपा ने इन सभी की जड़ों में मट्ठा डाल कर इन्हे सुखा दिया है। अब हम इन जड़ों को काट रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड को पानी की एक-एक बूँद के लिए किसने तरसाया? पलायन होता था। यहाँ डाकुओं के गिरोह हावी थे। इन्ही डाकुओं को सपा-बसपा अपना प्रत्याशी बना कर विधानसभा तक पहुँचाते थे। सुरक्षा के बगैर विकास व्यर्थ है। 5 बजे ही व्यापारी दुकान बंद कर देते थे। अब 12 बजे रात तक बाजारों में चहल-पहल रहती है। अगर कोई गुंडा टैक्स माँगेगा तो अगले दिन किसी थाने के पास उसके गले में तख्ती होगी और वो जान की भीख माँगता दिखाई देगा। हमारी संवेदना किसान, नौजवान, माता, बहनों के प्रति है न कि माफियाओं और अपराधियों के प्रति। अपराधी जिस भाषा में समझना चाहा उसको उसी भाषा में समझाया।”

योगी ने आगे कहा, “चौधरी चरण सिंह के नाम पर उनकी विरासत लेने बहुत लोग पहुँच जाते हैं। लेकिन उनकी भावनाओं को हमने समझ कर उसके अनुरूप कार्य किया। अखिलेश यादव 12 बजे सो कर उठते हैं, मैं तो ब्रह्ममुहूर्त में उठने वाला योगी हूँ। 4 बजे सो कर उठता हूँ। फिर ईश्वर आराधना कर दिन भर राष्ट्र आराधना में लीन रहता हूँ। कोरोना भी हमारी गति को नहीं रोक पाया, जिसने दुनिया की गति रोक दी थी।”

मुख्यमंत्री ने बताया, “पिछले 14 सालों में सपा-बसपा की सरकारों ने युवाओं को जितनी नौकरियाँ नहीं दी उससे ज्यादा हमने 5 साल में दी हैं। पहले की सरकार में डिप्टी कलेक्टर पद के लिए 42 लाख रुपए से 62 लाख रुपए तक दिए गए थे। ऐसे लोग आगे चल कर भ्रष्टाचार करते। CBI जाँच आरोपितों पर चल रही है। ऐसे लोगों पर डंडा न चलाऊँ तो क्या इनकी आरती उतारूँ? अखिलेश यादव बड़े बाप के बेटे हैं। उन्हें बिना मेहनत के सब कुछ मिल गया है। अखिलेश यादव UP में जिलों की संख्या भी नहीं बता सकते। उन्होंने केवल जातिवाद और तुष्टिकरण देखा है। बुलडोजर ने प्रदेश के विकास में योगदान दिया। बाहर से कई लोगों ने निवेश किया। उसके चलते प्रदेश के तमाम युवाओं को नौकरी मिली।”

जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सबसे बड़ा मुद्दा करार दिया दिया। महिलाओं और बेटियों को लेकर उन्होंने कहा था कि आज प्रदेश में बेटियाँ सुरक्षित हैं। सीएम योगी ने दावा किया कि इस चुनाव में भाजपा 300 सीटों से अधिक जीतने वाली है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे अन्य चुनावी राज्यों के साथ 10 मार्च को आएँगे।

‘मस्जिदों में लाउडस्पीकर पर अजान के कारण परेशानी’: डॉक्टर ने गुजरात हाईकोर्ट में दायर की PIL, अदालत ने 10 मार्च तक सरकार से माँगा जवाब

मुस्लिम समुदाय द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज में नमाज (Namaz) पढ़ने के कारण लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में गुजरात हाईकोर्ट (Gujrat High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर पूरे प्रदेश की मस्जिदों में लाउडस्पीकर में अजान को बंद करने की माँग की गई है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जे शास्त्री की पीठ ने की। कोर्ट ने नोटिस में राज्य सरकार से 10 मार्च तक जवाब जवाब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि यह याचिका गाँधीनगर के रहने वाले एक डॉक्टर धर्मेंद्र विष्णुभाई प्रजापति ने दायर की है। खुद का क्लीनिक चलाने वाले प्रजापति का आरोप है कि जिस इलाके में उनकी क्लीनिक है, वहाँ बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय रहता है और ये दिन में कई-कई बार लाउडस्पीकर के जरिए अजान देते हैं। इसके कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मसले पर उन्होंने इससे पहले राज्य के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता अरविंद प्रजापति ने याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई 2020 के उस फैसले का भी जिक्र किया है, जिसमें कहा गया है अजान जरूर इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर या माइक्रोफोन अनिवार्य नहीं है।

धार्मिक अधिकार पर भी डाला प्रकाश

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में धर्म को मानने के संवैधानिक अधिकारों की सीमाओं का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया है, “वास्तव में संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत निहित अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और भारत के संविधान के भाग- III के अधीन हैं, लेकिन लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर लगातार इसका उल्लंघन किया जा रहा है।”

प्रजापति ने ध्वनि प्रदूषण के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) कानून-2000 के नियम 5 के तहत सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त करने के अलावा लाउडस्पीकर या सार्वजनिक संबोधन प्रणाली का उपयोग नहीं किया सकता। लेकिन, मुस्लिम समुदाय बिना अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मस्जिदों में करता है। ऐसे में इस पर कुछ प्रतिबंधों की जरूरत है।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि लाउडस्पीकर की आवाज लोगों के लिए बहुत ही कष्टदायी है। इससे कई तरह की मानसिक बीमारियों के साथ-साथ बच्चों-बूढ़ों को शारीरिक समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। इस तरह से यह लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।

प्रजापति के वकील ने कहा कि अगर आप इस्लाम धर्म में विश्वास नहीं रखते हैं तो उस ध्वनि को दूसरे को सुनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। वकील ने ये भी कहा, “गणपति उत्सव, नवरात्रि के लिए प्रतिबंध है, फिर मस्जिदों की प्रार्थना के लिए क्यों नहीं।”