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शौहर से पहले बेटी को ‘दूध’ पिलाया तो दे दिया ‘तीन तलाक’: अहमदाबाद की घटना, FIR दर्ज; दहेज के लिए भी ससुराल के लोग करते थे मारपीट

मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक हालात और उन्हें इस्लामिक कुरीति ‘तीन तलाक‘ (Triple Talaq) से बचाने के लिए तीन तलाक पर कानून बनाया है, लेकिन कुछ मुस्लिम अभी भी ‘तीन तलाक’ जैसी कुप्रथा का पालन कर रहे हैं। इसका ताजा मामला गुजरात (Gujrat) के अहमदाबाद (Ahemdabad) से आया है, जहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी बीवी को केवल इसलिए ‘तीन तलाक’ दे दिया, क्योंकि उसने अपने शौहर को दूध देने से पहले अपनी बेटी को दूध पिलाने लगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना अहमदाबाद के करंज की है। तीन तलाक देने के मामले में 31 वर्षीय पीड़ित मुस्लिम महिला ने मंगलवार (15 फरवरी 2022) को अपने शौहर समेत ससुराल के लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया। इसके साथ ही पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाया है।

पीड़िता का आरोप है कि 2008 में उसका निकाह हुआ था, जिसके बाद वो अपने शौहर के साथ नादियाड़ शिफ्ट हो गई थी। लेकिन तभी से ससुराल के लोगों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। पीड़िता के मुताबिक, उसका शौहर बेरोजगार है, इसलिए भी दहेज के लिए डिमाँड बढ़ती जा रही थी। इसी को लेकर वो उसके साथ आए दिन मारपीट करता था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के सास-ससुर और शौहर ने दिसंबर 2021 में ही उसे अपने अम्मी-अब्बू से 1 लाख रुपए का दहेज लाने के लिए कहा था। इसके बाद से ही लगातार उसके साथ मारपीट होती रहती थी। इसी तरह से घटना वाले दिन भी पीड़िता के शौहर ने दहेज को लेकर उसके साथ गाली-गलौच और मारपीट की।

इसी दौरान रात के करीब 10 बजे पीड़िता की पाँच साल की बेटी ने उससे दूध औऱ नाश्ता माँगा तो वो उसे दूध और नाश्ता कराने लगी। उसी वक्त शौहर ने भी उससे दूध माँगा, लेकिन पहले बेटी को दूध पिलाने से नाराज शौहर ने पीड़िता को उसके अम्मी-अब्बू और तमाम रिश्तेदारों के सामने ही तलाक-तलाक-तलाक कह दिया। पीड़िता के भाई ने मामले को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इस बीच अहमदाबाद आकर पीड़िता ने केस दर्ज करा दिया।

तीन तलाक कानून

गौरतलब है कि मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से आजादी दिलाने के लिए मोदी सरकार ने जुलाई 2019 में पास हुआ था औऱ इस कानून को अगस्त 2019 में राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी थी। तीन तलाक़ क़ानून के तहत 3 साल की सज़ा और जुर्माने का भी प्रावधान है।

दीप सिद्धू के अंतिम संस्कार में लगे ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ और ‘राज करेगा खालसा’ के नारे: वीडियो वायरल

पंजाब के लुधियाना में बुधवार को जब एक्‍टर दीप सिद्धू (Deep Sidhu) का शव उनके घर पहुँचा तो वहाँ श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संंख्‍या लोग जमा थे। इस भीड़ में कुछ लोगों ने जहाँ दीप सिद्धू जिंदाबाद के नारे लगाए तो वहीं, खालिस्‍तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए भी वीडियो सामने आया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जो बोले सो निहाल, राज करेगा खालसा, खालिस्तान ज़िंदाबाद जैसे कई नारे लगाते हुए उनके समर्थक एम्बुलेंस के साथ भी भारी संख्या में मोटरसाइकिल से चल रहे थे। बता दें कि बुधवार (16 फरवरी, 2022) की शाम को ही दीप का अंतिम संस्‍कार हुआ था।

वहीं इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में भी खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगते हुए सुनाई दे रहे हैं। ये किसान आंदोलन में दीप के साथ रहे उनके साथी बताए जा रहे हैं। जो रात को भारी संख्या में शम्भू बॉर्डर पर इकट्ठे हुए थे। वहीं उनके अंतिम संस्कार में भी खालिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने की बात कही जा रही है। जैसा कि उनके अंतिम संस्कार के वीडियो में सुना जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे वाला वीडियो सामने आने से एक बार फिर माहौल गरमा गया है। यह वीडियो बुधवार का ही बताया जा रहा है जब दीप सिद्धू का शव उनके घर पर लाया गया, तब वहाँ हजारों की संख्‍या में लोग खड़े थे। उनके चाहने वालों ने उन्हें जहाँ नम आँखों से अंतिम विदाई तो वहीं दीप जिंदाबाद, दीप अमर रहें जैसे नारों के साथ खालिस्‍तान ज़िंदाबाद जैसे नारे भी लगते नजर आए।

बता दें कि लाल किले हिंसा में आरोपित एक्‍टर दीप सिद्धू की मंगलवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इस हादसे में उनकी गर्लफ्रेंड रीना राय भी घायल हो गईं थीं, जिनकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं आज रीना राय ने उस हादसे के बारे में एक बयान जारी किया है।

बुधवार को दीप सिद्धू के साथ अपनी तस्वीरें शेयर करते हुए रीना ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मैं टूट चुकी हूँ, मैं अंदर से मर चुकी हूँ। प्लीज अपने सोलमेट के पास वापस आएँ, आपने मुझसे वादा किया था कि आप मुझे किसी भी जीवन में नहीं छोड़ेंगे।” रीना की पोस्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दीप सिद्धू को यह नोट लिखते वक्त वह अस्पताल में थीं।

इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

वहीं दीप के परिजनों ने बताया कि दीप सिद्धू शादीशुदा थे और उनकी एक बेटी भी है जो अपनी माँ के साथ मुंबई में रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, दीप के मौसा साधु सिंह ने बताया कि दीप पहले मुंबई में वकालत करते थे। फिल्‍म स्‍टार सनी देओल के संपर्क में आने के बाद उनका भी रुझान फिल्‍मों की तरफ हो गया था तभी से वे पंजाबी सिनेमा में अभिनय के साथ-साथ फिल्‍म निर्माण से जुड़ गए थे।

गौरतलब है कि कुंडली थाना क्षेत्र के अंतर्गत मंगलवार को एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी, वह अपनी कार खुद चला रहे थे। जब वे दिल्‍ली से बठिंडा जा रहे थे तभी खरखौदा के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। जिससे उनके मौके पर ही मौत हो गई थी।

बता दें कि दीप सिद्धू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में चर्चित चेहरा रहे। 26 जनवरी 2021 को लाल किले हिंसा में भी दीप सिद्धू को आरोपित बनाया गया था। फ़िलहाल, दीप सिद्धू जमानत पर बाहर चल रहे थे और इस बीच कुछ राजनीतिक दलों से उनकी अनबन की खबरें भी आईं थीं। ऐसे में दीप सिद्धू की मौत को उनके कुछ दोस्‍तों ने साजिश करार दिया है, उनका कहना है कि मामले की जाँच होनी चाहिए। इधर पुलिस अधिकारी राहुल शर्मा ने कहा कि अज्ञात ड्राइवर पर केस दर्ज कर, मामले को हादसा मानकर ही जाँच जारी है।

‘यूपी-बिहार के भइये’ पर बँध गई प्रियंका और चन्नी की घिग्घी: सफाई में बोले- बयान घुमा दिया, केजरीवाल के लिए कहा था

उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को अपमानित करने वाले बयान को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सफाई दी है। उनका कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उन्होंने यह बात केजरीवाल जैसे नेताओं के संदर्भ में कही थी। वहीं कॉन्ग्रेस ​महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा का कहना है कि चन्नी के बयान को घुमाकर पेश किया गया। उल्लेखनीय है कि जब चन्नी यूपी-बिहार के लोगों के खिलाफ नफरत फैला रहे थे, तब प्रियंका उनके बगल में खड़ीं थी। वे मुस्कुराते हुए उनकी बात पर ताली बजा रहीं थी।

इस बयान को लेकर चन्नी के खिलाफ बिहार के पटना में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। लेकिन चन्नी ने का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा है की जितने भी प्रवासी पंजाब में आए हैं, उन्होंने अपना खून-पसीना लगाकर पंजाब को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने हमेशा विकास के लिए ही काम किया। हमारा उनसे खून-मांस का रिश्ता है। प्यार है, जो दिल से है और इसे कोई निकाल नहीं सकता। उन्होंने कहा, “मैं फिर से कहता हूँ जो दुर्गेश पाठक, संजय सिंह और केजरीवाल जैसे लोग बाहर से आकर खलल डालने का काम कर रहे हैं। मैंने उनके बारे में बात की थी। लेकिन, यूपी, बिहार और राजस्थान जैसी जगहों से आकर पंजाब में जो काम करते हैं, पंजाब उनका भी उतना ही है जितना हमारा है।”

वहीं प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा है, “चन्नी जी कह रहे थे कि पंजाब की सरकार पंजाबियों से चलनी चाहिए। उन्होंने जिस तरह से बोला उसे बस घुमाया गया है। मुझे नहीं लगता कि यूपी से यहाँ आकर कोई राज करना चाहता है।”

15 फरवरी को चन्नी ने कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) के साथ पंजाब के रोपड़ में एक रैली को संबोधित किया था। चन्नी ने कहा था, “प्रियंका पंजाबियाँ दी बहू है। यूपी दे, बिहार दे, दिल्ली दे भईए आके इते राज नई कर दे। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है।”  बता दें कि पंजाबी में ‘भइये’ एक अपमानजनक शब्द है। यह शब्द यूपी के लोगों के लिए एक गाली की तरह है।  

इसको लेकर चन्नी और प्रियंका की चौतरफा आलोचना हो रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 फरवरी को पंजाब के अबोहर में रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “कॉन्ग्रेस हमेशा से एक क्षेत्र के लोगों को दूसरे से लड़ाती रही है, ताकि उनकी गाड़ी चल जाए। कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री ने जो कल बयान दिया है, उस पर उनके बगल में बैठा ‘दिल्ली का परिवार’ है, जो मालिक है, वह खड़े होकर तालियाँ बजा रहा है। ये पूरे देश ने देखा है। अपने इन बयानों से ये लोग किसका अपमान कर रहे हैं? यहाँ का कोई ऐसा गाँव नहीं होगा, जहाँ पर हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार के भाई-बहन मेहनत ना करते हों।”

‘कुरान की दुल्हन’: पाकिस्तान में प्रचलित मुस्लिमों की एक भयानक प्रथा, संपत्ति से लड़कियों का हिस्सा लेने के लिए बना दी जाती ‘गुलाम’ जैसी

खुद को इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद का वंशज मानने वाले मुस्लिमों की सैयद जाति के बीच एक भयानक प्रथा लोकप्रिय है, जिसका नाम है ‘हक बख्शीश’। इस जाति के परिवारों में घर की लड़की का निकाह अपने धार्मिक पुस्तक कुरान से करते हैं, ताकि उस संपत्ति को अपने पास रखी जा सके जो कानूनी रूप से लड़की की है और निकाह के बाद उसे देना होता है।

इस जाति के लोगों का कहना है कि उनके परिवार के खून की ‘पवित्रता’ को बनाए रखने के लिए उन्हें अपनी जाति से बाहर निकाह करने की मनाही है। परिवार के पुरुष यह आरोप लगाते हुए अपनी लड़कियों की शादी कुरान से ये कहते हुए करते हैं कि उन्हें अपने जाति में उपयुक्त मैच नहीं मिला। उनका आरोप है कि लड़की को ‘निम्न जाति’ के व्यक्ति से शादी करना संभव नहीं है, क्योंकि निचली जाति का कोई भी व्यक्ति उनकी हैसियत की बराबरी नहीं कर सकता है।

लड़की के घरवाले उससे यह नहीं पूछते कि वह कुरान से शादी करना चाहती है या नहीं। यह घर के पुरुष सदस्यों द्वारा तय किया जाता है। लड़कियों को बस इतना बताया जाता है कि वे जीवन भर किसी और से शादी करने के बारे में नहीं सोच सकती। परिवार के बेटों को कुरान से शादी करने वाली लड़कियों की संपत्ति पर अधिकार मिल जाता है।

पाकिस्तानी कानून के अनुसार, हक बख्शीश एक प्रतिबंधित प्रथा है। हालाँकि, क्षेत्र में काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हक बख्शीश के मामलों के बारे में जानना सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि ये मामले परिवार के अंदर ही रखे जाते हैं। अशरक अल-अवसात के 2007 के एक पत्र के अनुसार, सिंध और अन्य क्षेत्रों में, जहाँ यह प्रथा प्रचलित है, कुरान की कम-से-कम 10,000 दुल्हनें थीं।

DW ने हाल ही में मूमल (बदला हुआ नाम) नामक कुरान की दुल्हन की एक वीडियो कहानी प्रकाशित की थी। जिस दिन उसे कुरान की दुल्हन घोषित किया गया था, उस दिन को लेकर मूमल ने DW को बताया, “उस दिन ना बारात आई, ना ढोल बजा। ना मेंहदी लगी, ना मौलवी आया। बस एक बात नई थी कि मुझे नया सूट पहनाया गया था। नया जोड़ा। फिर मेरे अब्बू ने कुरान शरीफ लाकर मेरे हाथ में रख दिया और कहा कि हम तुम्हारी शादी कुरान के साथ करवा रहे हैं। तुम कसम उठाओ कि कभी किसी शख्स और दोबारा शादी के बारे में नहीं सोचोगी। अब आपकी शादी कुरान शरीफ के साथ हो गई है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि मूमल के अब्बू ने उससे उसकी जाति के बाहर शादी नहीं की, लेकिन कथित तौर पर रूढ़िवादी सैयद जनजाति के अंदर भी कोई उपयुक्त लड़का नहीं मिला। मूमल ज्यादातर समय घर पर ही रहती है और घर का काम करती है। उसने कहा, “बाहर मैं कभी नहीं गई, क्योंकि सारा दिन मैं ‘पर्दे’ में होती हूँ। मुझे ये भी नहीं पता कि बाहर क्या होता है और क्या नहीं। बस घर का काम और घर में ही रहती हूँ। कोई महिला आ जाए, फिर भी मैं बाहर नहीं जाती।”

अधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, पाकिस्तानी कानून द्वारा अवैध माने गए इस प्रथा का उपयोग बेटियों और बहनों के बीच संपत्ति और जमीन के बँटवारे को रोकने के लिए किया जाता है। DW को सामाजिक कार्यकर्ता शाजिया जहाँगीर अब्बासी ने बताया, “परिवार के पुरुष सदस्य जानते हैं कि अगर लड़की की शादी होती है तो उन्हें संपत्ति में से उसे हिस्सा देना पड़ेगा। इस प्रकार वे उसे ‘बीबी’ घोषित करते हैं, जिसका अर्थ है कुरान से विवाहित। पिता, भाइयों और परिवार की इज्जत बचाने के लिए लड़की अपने भाग्य को स्वीकार कर लेती है।”

ज्यादातर मामलों में कुरान से निकाही गई वह महिला परिवार की गुलाम बनकर रह जाती है। उसे कैद में रखा जाता है और घर के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके बदले में कुछ मिले बिना वह परिवार की सेवा करती रहती है।

‘द न्यू ह्यूमैनिटेरियन’ ने 2007 में 25 वर्षीय फरीबा की कहानी प्रकाशित की थी, जिसकी कुरान से शादी हुई थी। उसकी तत्कालीन सात वर्षीय बहन जुबैदा ने उसकी कहानी IRIN को सुनाई थी। वह शादी के सभी आयोजनों और मेहमानों को देख रही थी, लेकिन कोई दूल्हा नहीं था। यह देखकर वह भ्रमित थी। अब 33 वर्ष की हो चुकी ज़ुबैदा ने बताया, “यह बेहद अजीब था और दुखद था। फ़रीबा बहुत ही सुंदर लड़की थी और उस समय लगभग 25 वर्ष की थी। उसे दुल्हन की तरह लाल जोड़े में सजाया गया, आभूषण पहनाए गए और हाथों एवं पैरों में ‘मेहंदी’ लगाए गए, लेकिन कुल मिलाकर यह एक घना अंधेरा वाला चादर था। संगीत था और बहुत सारे मेहमान थे, लेकिन कोई दूल्हा नहीं था। ”

इस मामले पर पुरीसरार दुनिया की एक डॉक्यूमेंटरी के अनुसार, कुरान से शादी करने से पहले लड़की से सलाह नहीं ली जाती है और परिवार निर्णय कर लेता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि वह इसे पसंद करती है या नहीं। लड़की के घरवाले कागज पर कुरान की कुछ आयतें लिखकर उसकी कमर पर बाँध देते हैं और बता देते हैं कि अब कुरान ही उसका शौहर है। इसके बाद एक समारोह में संपत्ति में उसके हिस्से को उसके भाइयों को हस्तांतरित कर दिया जाता है।

पाकिस्तान में संपत्ति का उत्तराधिकार परिवार की इस्लामी जाति या जनजाति के वर्गों और उप-वर्गों के आधार पर तय किया जाता है, जैसे कि कच्छी मेमन, खोजा, सुन्नी या शिया। सामान्य तौर पर एक पुरुष का हिस्सा एक परिवार की महिला के हिस्से का दोगुना होता है। हालाँकि, अधिकांश मामलों में ठीक से इसका बँटवारा नहीं किया जाता है। बहुत कम मामलों में महिलाएँ अदालतों का दरवाजा खटखटाती हैं। अगर ऐसा होता भी है तो कानूनी व्यवस्था की कछुआ चाल की वजह से विवाद को सुलझाने में दशकों लग जाते हैं।

‘गैर मुस्लिम से शादी की सजा मौत है, यही तुझे मिलेगी’: मलाला को मिल रही धमकी, चंडीगढ़ के लड़के से की है शादी

अफगानिस्तान की मलाला नाम की युवती को चंडीगढ़ के एक लड़के से शादी करने पर धमकी मिल रही है। रिपोर्टों के अनुसार इस दंपती को तालिबान का डर है। पाकिस्तान, ईरान, इराक और अरब देश से भी इन्हें धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने इन्हें सुरक्षा मुहैया कराई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में मलाला स्कॉलरशिप पर चंडीगढ़ पढ़ने आई थी। यहीं उसकी मुलाकात नीरज मलिक से हुई। साल 2020 में दोनों ने शादी कर ली। उस समय भी मलाला को अपने परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद से उन्हें धमकी मिलनी शुरू हो गई है।

लेकिन अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद सेअब मलाला को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उनके परिवार वाले भी इस शादी का विरोध कर रहे हैं। मलाला के मुताबिक, उसके चाचा पूरे परिवार को भड़का रहे हैं। बता दें कि मलाला की शादी बचपन में ही उसके पिता ने अपने छोटे भाई यानी मलाला के चाचा के बेटे के साथ तय कर दी थी। अब जब मलाला ने शादी कर ली है तो उसके विरोध में दोनों को जान से मारने की धमकी मिल रही हैं। 

मलाला और नीरज को अफगानिस्तान से ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, ईरान, इराक और कई अरब देशों से भी धमकी मिल रही है। फोन पर मलाला से कहा जा रहा है कि गैर मुस्लिम से शादी करने की सजा मौत है, जो तुम्हें मिलेगी। मलाला ने बताया कि अफगानिस्तान का एक शख्स इन दोनों को ढूँढते हुए चंडीगढ़ स्थित उनके घर तक पहुँच गया। इस शख्स ने दोनों को 1 महीने तक दिल्ली में ढूँढा। वहाँ सुराग नहीं मिलने पर वह चंडीगढ़ आ गया। यहाँ रहने वाले अफगानी मूल के लोगों से जानकारी हासिल कर वह मलाला के घर तक पहुँच गया। इसके बाद से दोनों काफी डर हुए हैं।

नीरज ने बताया कि धमकियों के कारण वह घर से निकलने में भी डरते है। मलाला चंडीगढ़ में नौकरी कर रही थी, लेकिन धमकी मिलने के बाद अब घर में रहती है। दोनों का एक बिजनेस भी था जिसे वह डर के कारण चला नहीं पा रहे और अब वह ठप होने कगार पर है। दोनों चंडीगढ़ के जिस इलाके में रहते हैं, वहाँ पर बहुत से अफगानी लोग रहते हैं। इसलिए उन्हें उन लोगों से भी डर लगा रहता है कि कहीं कोई मजहब के नाम पर उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश ना करे।

‘हर शुक्रवार और रमजान में मिले हिजाब पहनने की इजाजत’: कर्नाटक बुर्का विवाद में आज भी नहीं हो सका फैसला, कल फिर होगी HC में सुनवाई

कर्नाटक हिजाब विवाद (Karnataka Hijab Row) को लेकर हाईकोर्ट में आज गुरुवार (17 फरवरी, 2022) को पाँचवे दिन की सुनवाई पूरी हुई। हालाँकि, मौजूदा विवाद को देखते हुए HC द्वारा आज भी कोई निर्णय नहीं दिया गया है। अब कल शुक्रवार (18 फरवरी, 2022) को फिर से सुनवाई होगी।

इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलीलें पेश कीं। सामाजिक कार्यकर्ता आर कोटवाल ने कहा कि लिंग-धर्म के आधार भेदभाव के चलते शिक्षा के अधिकार का हनन हो रहा है। वहीं दूसरे याचिकाकर्ता डॉ. विनोद कुलकर्णी ने माँग की कि हर शुक्रवार और रमजान के महीने में हिजाब पहनने की इजाजत दी जाए।

ऐडवोकेट जनरल ने अपना पक्ष रखने के लिए शुक्रवार तक का वक्त माँगा। इसी के साथ गुरुवार की सुनवाई पूरी हुई। कोर्ट अब शुक्रवार को ढाई बजे फिर से मामले की सुनवाई शुरू करेगी।

वहीं बुधवार को छात्राओं के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपनी कई दलीलें रखीं और माँग की कि सिर्फ जरूरी धार्मिक प्रथा के पैमाने पर इसे न तौलकर, विश्वास को देखना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए। उधर कर्नाटक पुलिस ने हुबली धारवाड़ में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों के 200 मीटर के दायरे में 28 फरवरी तक तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

वहीं कल की सुनवाई में स्कूल-कॉलेजों में बुर्का पर बैन हटाने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता रवि वर्मा कुमार ने कहा कि अकेले हिजाब का ही जिक्र क्यों है जब दुपट्टा, चूड़ियाँ, पगड़ी, क्रॉस और बिंदी जैसे सैकड़ों धार्मिक प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोजाना पहने जाते हैं।

आज की सुनवाई की खास बातें

कर्नाटक हिजाब विवाद में एक और हस्तक्षेप याचिका दाखिल की गई। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “हम हस्तक्षेप याचिका का कॉन्सेप्ट नहीं समझ पा रहे हैं। हम याचिकाकर्ताओं और फिर प्रतिवादियों को सुन रहे थे। हमें किसी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।”

मामले में नई याचिका को स्वीकृति दी गई। ऐडवोकेट आर. कोटवाल का कहना है कि अनुच्छेद 14, 15 और 25 के अलावा, राज्य की कार्रवाई अनुच्छेद 51 (सी) का भी उल्लंघन करती है, अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि दायित्वों के लिए सम्मान।

प्रतिवादियों की कार्रवाई पूरी तरह से धर्म और लिंग के आधार पर मनमाना भेदभाव पैदा कर रही है, वे केवल धार्मिक हेडगियर- हिजाब के आधार पर शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं।

चीफ जस्टिस: आपका क्या विवाद है?

कोटवाल: राज्य की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों के अनुरूप नहीं है।

चीफ जस्टिस: क्या आप कोर्ट की भी सुनेंगे? पहले प्रमाण दीजिए, कौन हैं आप?

कोटवाल: मैं अंतरराष्ट्रीय संधियों को अदालत के संज्ञान में ला रहा हूँ।

चीफ जस्टिस: हमें आपका सहयोग नहीं चाहिए।

चीफ जस्टिस: हम आपको कोर्ट को सुने बिना इस तरह जिरह की इजाजत नहीं दे सकते। आप कौन हैं?

कोटवाल: याचिकाकर्ता एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, आरटीआई ऐक्टिविस्ट हैं, जो माननीय अदालत को कई जनहित याचिकाओं में मदद कर चुके हैं।

चीफ जस्टिस: आपकी याचिका नियमों के मुताबिक नहीं है। बेंच ने पीआईएल खारिज की।

कोटवाल: मैंने कई यचिकाएँ फाइल की हैं लेकिन पहली बार रख-रखाव के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया।

डॉ. विनोद कुलकर्णी ने व्यक्तिगत रूप से दलीलें पेश करनी शुरू कीं।

डॉ. विनोद: हिजाब विवाद मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। संविधान की प्रस्तावना के अनुसार स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है।

चीफ जस्टिस: जनहित याचिका हाई कोर्ट के नियमों के मुताबिक नहीं है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिकाओं में से एक को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह विचारणीय नहीं है। कर्नाटक HC ने सामाजिक कार्यकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता रहमथुल्ला कोटवाल से कहा कि आप इतने महत्वपूर्ण मामले में अदालत का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।

अधिवक्ता विनोद कुलकर्णी, याचिकाकर्ता, जिनकी याचिका विचाराधीन है, कर्नाटक एचसी को बताते हैं कि यह मुद्दा उन्माद पैदा कर रहा है और मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। वह कम से कम शुक्रवार को मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए अंतरिम राहत की माँग करते हैं।

5 छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर वकील एएम डार, कर्नाटक एचसी के समक्ष कहते हैं- हिजाब पर सरकार के आदेश से उन मुस्लिम छात्राओं पर असर पड़ेगा जो हिजाब पहनती हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है। कोर्ट ने डार से अपनी वर्तमान याचिका वापस लेने और उन्हें नई याचिका दायर करने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता मुस्लिम छात्राओं के वकील की दलील

बता दें कि इससे पहले मुस्लिम छात्राओं की ओर से दलील देते हुए वकील रविवर्मा कुमार ने कहा, “मैं केवल समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूँ। सरकार अकेले हिजाब को चुनकर भेदभाव क्यों कर रही है? चूड़ियाँ पहनी जाती हैं? क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं है?” रवि वर्मा ने कहा, “यह केवल उनके धर्म के कारण है कि याचिककर्ता को कक्षा से बाहर भेजा जा रहा है। बिंदी लगाने वाली लड़की को बाहर नहीं भेजा जा रहा, चूड़ी पहने वाली लड़की को भी नहीं। क्रॉस पहनने वाली ईसाइयों को भी नहीं, केवल इन्हें ही क्यों। यह संविधान के आर्टिकल-15 का उल्लंघन है।” उन्होंने कहा कि समाज में विविधता को पहचानने और उन्हें प्रतिबिंबित करने के लिए कक्षाएँ एक जगह होनी चाहिए।

वकील कुमार ने कहा कि विधायक की अध्यक्षता वाली कालेज विकास समिति (सीडीसी) को इस मामले पर फैसला करने का अधिकार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस. दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की पीठ के सामने कुमार ने कहा, “देश में झुमका, क्रास, हिजाब, बुर्का, चूड़ियाँ और पगड़ी पहनी जाती है। महिलाएँ ललाट पर बिंदी भी लगाती हैं। परंतु, सरकार ने इनमें से सिर्फ हिजाब को ही चुना और उस पर पाबंदी लगाई। ऐसा भेदभाव क्यों? क्या चूड़ी धार्मिक प्रतीक नहीं?”

घर में भी गंगूबाई जैसे कर रही थी आलिया भट्ट: रणबीर कपूर ने की कंप्लेन, संजय लीला भंसाली ने बताया- बैग उठाकर भाग गई थी

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (Gangubai Kathiawadi) सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Berlin International Film Festival) में बुधवार (16 फरवरी 2022) को फिल्म का प्रीमियर हुआ। इसके बाद आलिया भट्ट और फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) ने मीडिया से बातचीत की। भंसाली ने खुलासा किया कि इस किरदार को निभाने के बाद आलिया में आए बदलाव को लेकर उनके बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) ने उनसे शिकायत की थी।

फिल्म में आलिया की परफॉर्मेंस के बारे में बात करते हुए भंसाली ने कहा, “मुझे लगता है कि वह असल जिंदगी में भी आलिया भट्ट से ज्यादा गंगूबाई बन गई थी। उसके बॉयफ्रेंड ने मुझसे शिकायत की थी कि वह घर पर भी गंगूबाई की तरह बात करती है। ये बिलकुल अपने किरदार के साथ एक हो जाने जैसा है।” साथ ही उन्होंने ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की स्टोरी पहली बार सुनने के बाद आलिया उनके ऑफिस से अपना बैग लेकर भाग गई थीं। इसके बाद भंसाली ने अपने प्रोडक्शंस की सीईओ प्रेरणा सिंह से कहा था कि उन्हें नई एक्ट्रेस ढूँढनी पड़ेगी।

जूम के साथ इंटरव्यू में भंसाली ने बताया, “पहली बार जब उन्होंने (आलिया भट्ट) फिल्म की कहानी सुना तो वह अपना बैग उठा कर मेरे ऑफिस से भाग गई थीं। वह सोच रही थीं कि यह उनके साथ क्या हो रहा है और मैंने उन्हें कौन सा रोल दे दिया है। वह वहाँ से भाग गईं। मैंने हमारी सीईओ प्रेरणा से कहा, सुनो मुझे लगता है कि हमें दूसरी एक्ट्रेस ढूँढनी पड़ेगी, क्योंकि… वैसे मैं उन्हें ही ये रोल करते देखना चाहता था।”

भंसाली ने आगे बताया कि अगले दिन आलिया भट्ट ने उन्हें कॉल किया था और कहा था कि उनसे मिलना चाहती हैं। भंसाली बोले- “मैंने उन्हें कहा मुझे ना बोलने के लिए आपको मुझसे पर्सनली मिलने की जरूरत नहीं है।” इस पर आलिया बिफर पड़ी और कहा कि वह वही करेंगी जो भंसाली उनसे करवाना चाहते हैं। इसके बाद वह खुशी से कूद पड़े। 

उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक ‘मजबूत योद्धा’ की कहानी प्रस्तुत करती है, जो अपने समय से काफी आगे थी और सेक्स वर्करों के अधिकारों के लिए लड़ी थीं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी महिला की कहानी है जो सेक्स वर्कर के चंगुल में फँस गई थी। इसके बाद उसने अपनी लड़ाई खुद लड़ी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने महिलाओं के सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी, कैसे उन्होंने वेश्यालय की लड़कियों को मुख्यधारा में स्वीकार किए जाने के लिए लड़ाई लड़ी।

गौरतलब है कि इससे पहले गंगूबाई के परिवारवालों ने फिल्म को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट की ओर रुख किया था। उनके वकील का कहना था कि ट्रेलर देख परिवार हैरान है। परिजनों का कहना है कि गंगूबाई को इस फिल्म में सोशल वर्कर से ज्यादा प्रॉस्टिट्यूट दिखाया गया है। गंगूबाई के गोद लिए हुए बेटे बाबू रावजी शाह ने कहा, “मेरी माँ को वेश्या बना दिया गया है। अब लोग बिना वजह मेरी माँ के बारे में बातें कर रहे हैं।”

चित्रा के बालों में उलझा था ‘हिमालय का योगी’, विदेश चलने को करता था मेल: रिपोर्ट में दावा, NSE की पूर्व चीफ के यहाँ IT की रेड

‘हिमालय के योगी’ के साथ गोपनीय सूचनाएँ साझा करने और उसके कहने पर मनमाने ढंग से नियुक्ति एवं वेतन बढ़ोत्तरी करने वाली नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चित्रा रामकृष्ण और उनके सहयोगी आनंद सुब्रह्मण्यम के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। इसके साथ ही ‘हिमालय के योगी’ कहलाने वाले रहस्यमयी व्यक्ति की जाँच की भी तैयारी चल रही है।

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, चित्रा रामकृष्ण के मुंबई और उनके सहयोगी आनंद सुब्रह्मण्य के चेन्नई स्थित ठिकानों पर छापेमारी हुई। इस छापेमारी का नेतृत्व मुंबई आयकर विभाग की टीम ने की। छापेमारी में क्या-क्या बरामद किया गया है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है और ना ही आयकर विभाग का इस पर आधिकारिक बयान आया है।

वहीं, चित्रा ने जिस रहस्यमयी बाबा के साथ गोपनीय सूचनाएँ साझा की है, उसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में NSE की भूमिका की जाँच की भी बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि चित्रा के लैपटॉप और डेस्कटॉप को जाँच के बिना जल्दबाजी में क्यों हटा दिया गया। इसके साथ ही यह कहा गया है कि चित्रा को इस्तीफा देकर सम्मानपूर्वक नौकरी छोड़ने की अनुमति क्यों दी गई और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसकी भी जाँच की जाएगी।

बाजार नियामक संस्था SEBI ने फोरेंसिक जाँच के बाद चित्रा के हवाले से बताया था कि वह इस रहस्यमयी बाबा के संपर्क में 20 साल पहले गंगा के तट पर आई थी। चित्रा ने उस रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान को बताने से इनकार करते हुए कहा था कि वह आध्यात्मिक शक्तियों से परिपूर्ण है और उसका कोई शारीरिक व्यक्तित्व नहीं है। वह अपनी इच्छा से कहीं भी प्रकट हो सकता है।

वहीं, चित्रा की इस कहानी को अधिकारियों ने अविश्वसनीय बताते हुए खारिज कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस अज्ञात शख्स अस्तित्व है और इसका पता लगाने के लिए जाँच का आदेश दिया जाएगा, क्योंकि मामला देश की वित्तीय सुरक्षा से संबंधित है।

SEBI के एक आदेश के अनुसार, यह रहस्यमयी ‘आध्यात्मिक गुरु’ चित्रा के हेयर स्टाइल में बहुत रुचि थी और उससे वह बहुत प्रभावित था। इतना ही नहीं, इन दोनों ने गाने भी एक-दूसरे से साझा किए और साथ में सेशेल्स में छुट्टी मनाने भी गए। यह चित्रा द्वारा SEBI को दिए गए उस बयान के विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके आध्यात्मिक गुरु एक ‘सिद्ध पुरुष’ हैं और वह वह उसे ‘शिरोमणी’ पुकारती थी।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, 18 फरवरी 2015 को चित्रा को किए एक ई-मेल में उस अज्ञात व्यक्ति ने कहा था, “आज आप बहुत बढ़िया दिख रही हैं। आपको अपने बालों को बाँधने के विभिन्न तरीके सीखने चाहिए, जो आपके लुक को दिलचस्प और आकर्षक बना देंगे! बस एक मुफ्त सलाह, मुझे पता है आप इसे मानेंगी। मार्च के मध्य को थोड़ा समय निकाल कर रखिएगा।”

17 फरवरी 2015 को चित्रा को भेजे गए एक अन्य ईमेल में उस ‘सिद्ध संत’ ने लिखा, “बैग तैयार रखिए। मैं अगले महीने सेशेल्स की यात्रा की योजना बना रहा हूँ। अगर आप मेरे साथ आ सकते हैं तो कोशिश करेंगे। अगर आप तैरना जानते हैं तो हम सेशेल्स में समुद्र में नहाने का आनंद ले सकते हैं और समुद्र तट पर आराम कर सकते हैं।”

बता दें कि चित्रा अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक NSE की MD एवं CEO थीं। इसी दौरान उन्होंने कई अनियमितताएँ कीं। चित्रा ने न सिर्फ आनंद सुब्रह्मण्यम को लीक से हटकर नियुक्ति दी, बल्कि NSE के फाइनेंशियल एवं बिजनेस प्लान, डिविडेंड से जुड़ी बातें, फाइनेंशियल रिजल्ट एवं अन्य गोपनीय सूचनाएँ योगी के साथ साझा कीं। एक्सचेंज के कर्मचारियों की वेतन और उनकी अप्रेजल से संबंधित बातें भी योगी से विचार-विमर्श के बाद ही लेती थीं।

‘कोई स्वेच्छा से नहीं पहनती हिजाब, पूरा नहीं होगा गजवा-ए-हिंद का ख्वाब’: बुर्का विवाद पर CM योगी की दो टूक

बुर्का को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर गजवा-ए-हिंद का ख्वाब देखने वालों को चेताया है। उन्होंने कहा है कि देश संविधान से चलेगा, शरीयत से नहीं। इंडिया टुडे के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि हिजाब कोई भी अपनी इच्छा से नहीं पहनता। उन्होंने कहा कि जो लोग तालिबान लाने, दंगा कराने और आधी आबादी को उसके अधिकार से वंचित करना चाहते हैं उन्हें बता दूँ कि गजवा-ए-हिंद का ये सपना कयामत के दिन तक पूरा नहीं होगा।

इंटरव्यू में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “कोई स्वेच्छा से हिजाब नहीं पहनती। क्या तीन तलाक की कुप्रथा को लड़कियाँ अपनी मर्जी से स्वीकार करती थीं। मैंने तो लखनऊ में तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं का सम्मेलन किया था और उनके आँसुओं को देखा है। सार्वजनिक जीवन में सभी को कुछ भी पहनने का अधिकार है। मैं भगवा पहनता हूँ, लेकिन कार्यालय में सभी को यही करने के लिए नहीं कह सकता। अगर कोई संस्था है तो उसका अपना अनुशासन भी होना चाहिए।”

यूनिफॉर्म सिविल कोड के सवाल पर सीएम योगी ने कहा, “यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भारत सरकार पूरी तरह से सक्षम है। जब भी आवश्यकता पड़ेगी समीक्षा कर उसे लागू किया जाएगा। लेकिन मैं मानता हूँ कि हमें भारत के संविधान के प्रति सम्मान रखना चाहिए। इसे शरीयत से चलाने या किसी व्यक्तिगत कानून से नहीं चलाना चाहिए।”

सपा को अपने घर में लाज बचानी भारी पड़ रही

ध्रुवीकरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि चुनाव जनता लड़ रही है और सपा के चेहरे से उड़ी हवा और उनके मंचों पर हो रही मारपीट इस बात का प्रमाण है। उनको तो अपने घर में ही अपनी लाज बचानी मुश्किल हो रही है। इसके साथ ही सीएम योगी ने दावा किया कि सपा की रैलियों में महिलाओं की भीड़ नदारद रहती है, जबकि पीएम मोदी की रैलियों में 20-50 फीसदी तक महिलाओं की संख्या होती है। सीएम योगी ने दोहराया कि ये चुनाव 80:20 का चुनाव हो चुका है।

करहल विधानसभा सीट को लेकर त करते हुए सीएम योगी ने दावा किया कि एसपी सिंह बघेल वहाँ जीतेंगे। शिवपाल यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि चाचा-भतीजा सत्ता की लूट में बराबर के हिस्सेदार थे। लेकिन शिवपाल बेचारे की हालत तो मीडिया ने ही न घर के, न घाट के वाली कर दी है। कहाँ वो प्रदेश के नेता थे और नेताजी के सारे काम सँभालते थे और कहाँ एक सीट पर अटक गए।

अपर्णा यादव (Aparna Yadav) को लेकर बात करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यादव परिवार में वो सबसे योग्य थीं और राष्ट्र की सेवा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई हैं। वे टिकट के लिए बीजेपी में नहीं आईं और बीजेपी ने उन्हें टिकट भी नहीं दिया। वे मोदी के राष्ट्र आराधना के लिए काम करने के लिए आई हैं और काम कर रही हैं।

‘यूपी-बिहार के भइये’ पर PM मोदी ने पूछा- कहाँ पैदा हुए गुरु गोबिंद सिंह और संत रविदास, बोले- पंजाब का एक गाँव न ऐसा, जहाँ ‘भाई’ न हों

पंजाब के सभी 117 विधानसभा सीटों पर 20 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र ने गुरुवार (17 फरवरी) को अबोहर में अपनी अंतिम रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा यूपी-बिहार के लोगों को भइया कहकर उन्हें राज्य में घुसने से रोकने वाले बयान पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर कॉन्ग्रेस ने गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मभूमि बिहार और संत रविदास की जन्मभूमि उत्तर प्रदेश को अपमानित किया है। इस दौरान कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि वहाँ बैठा दिल्ली का एक परिवार इस पर ताली बजा रहा था। 

प्रधानमंत्री ने कहा कहा, “कॉन्ग्रेस हमेशा से एक क्षेत्र के लोगों को दूसरे से लड़ाती रही है, ताकि उनकी गाड़ी चल जाए। कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री ने जो कल बयान दिया है, उस पर उनके बगल में बैठा ‘दिल्ली का परिवार’ है, जो मालिक है, वह खड़े होकर तालियाँ बजा रहा है। ये पूरे देश ने देखा है। अपने इन बयानों से ये लोग किसका अपमान कर रहे हैं? यहाँ का कोई ऐसा गाँव नहीं होगा, जहाँ पर हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार के भाई-बहन मेहनत ना करते हों।”

संत रविदास को याद करते हुए पीएम ने कहा, “कल ही हमने संत रविदास जी की जयंती मनाई है। ये नेता बताएँ कि संत रविदास जी कहाँ पैदा हुए थे। पंजाब में पैदा हुए थे क्या? संत रविदास जी उत्तर प्रदेश के बनारस में पैदा हुए थे और आप कहते हो कि उत्तर प्रदेश के भइयों को घुसने नहीं देंगे। तो क्या आप संत रविदास जी को निकाल दोगे? क्या आप संत रविदास जी के नाम को मिटा दोगे?”

सिखों के गुरु को याद करते हुए पीएम ने आगे कहा, “मैं ये भी पुछना चाहता हूँ कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म कहाँ हुआ था? उनका जन्म पटना साहिब में हुआ था। हमारे गुरु महाराज गुरु गोबिंद सिंह जी जन्म पटना, बिहार में हुआ और तुम कहते हो कि बिहार के लोगों को घुसने नहीं देेंगे? तो क्या तुम गुरु गोबिंद सिंह महाराज का अपमान करोगे? जिस मिट्टी में गुरु गोबिंद सिंह जी ने जन्म लिया, उस मिट्टी का अपमान करोगे? गुरु गोबिंद सिंह जी ने जिस मिट्टी में जन्म लेकर हमारी रक्षा की, वहाँ के लोगों को अपने प्रदेश में घुसने नहीं दोगे, ऐसी भाषा का प्रयोग करोगे क्या?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के विभाजनकारी लोगों को पंजाब में एक पल के लिए राज करने का अधिकार नहीं है। पंजाब सीमावर्ती राज्य है और इसकी सीमा पर हमेशा नापाक नजरें गड़ी रहती हैं। इसलिए यहाँ जो सरकार बनेगी, उसके लिए ‘राष्ट्र प्रथम, नेशन फर्स्ट’ प्रतिबद्ध सरकार होनी चाहिए। ढुलमुल रवैए वाले लोग नहीं होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग भारत को एक राष्ट्र ही नहीं मानते, ऐसे लोगों के हाथ में पंजाब की सुरक्षा और देश की अखंडता सुपुर्द नहीं की जा सकती। पंजाब आज अनेक चुनौतियों का मुकाबला कर रहा है। इन चुनौतियों में राजनीतिक अस्थिरता वाली चुनौती किसी भी हालत में जोड़नी नहीं है, लेकिन कॉन्ग्रेस हमें एक बार फिर अस्थिरता की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है।

सिख दंगों की भयावहता को याद करते हुए पीएम ने कहा, “84 के दंगों के समय नरसंहार चल रहा था और कॉन्ग्रेस के नेता क्या कर रहे थे और कौन कहाँ से आ रहे थे ये आप से बेहतर कौन जान सकता है। उस समय भाजपा के कार्यकर्ता एक भी सिख भाई को तकलीफ नहीं होने दिए। हम पंजाब के लोगों के साथ डटकर खड़े रहे।”