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‘सपा के समाजवाद का असली खेल, प्रत्याशी को या तो जेल या फिर बेल’: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा- दंगाई सपा में जाते हैं

केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) ने कहा कि जो लोग दंगा कराते हैं वो समाजवादी पार्टी में जाते हैं और जो दंगा रोकते हैं, वे भाजपा में आते हैं। यह बात उन्होंने रविवार (16 जनवरी 2022) को लखनऊ में पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण के पार्टी में शामिल होने के दौरान कही। अरुण कानपुर के कमिश्नर रह चुके हैं।

अनुराग ठाकुर ने इस दौरान जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम और नाहिद हसन का खासतौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन जेल में हैं और एक आजम अब्दुल्ला बेल पर हैं। जेल और बेल का खेल ही समाजवादी पार्टी का असली खेल है।

उन्होंने कहा, ‘सपा के समाजवाद का असली खेल, या तो प्रत्याशी को जेल या फिर बेल। अगर आप नाहिद हसन को देखेंगे, जो प्रत्याशी नंबर वन है समाजवादी पार्टी, वो जेल में है। उनका दूसरा एमएलए अब्दुल्ला आजम, वो बेल पर है। एक जेल में एक बेल पर। सूची देखेंगे तो शुरुआत जेल वाले से होती है और अंत सूची का बेल वाले पर होगा।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी में असीम अरुण जैसे ईमानदार छवि के अधिकारी आ रहे हैं और समाजवादी पार्टी में दंगा करने वाले दंगाई और हत्यारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हसन के खिलाफ दंगा करने सहित कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। ये वही नाहिद हसन हैं, जिन्होंने लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर वाले लोगों को संरक्षण दिया।

बता दें कि सपा विधायक नाहिद हसन को दो दिन पहले ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पिछले साल 6 फरवरी को विधायक हसन और उनकी अम्मी एवं पूर्व सांसद तब्बसुम हसन सहित 40 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया था। जमीन के एक मामले में धोखधड़ी का केस चल रहा है। शामिल कोर्ट पहले ही हसन को भगोड़ा घोषित कर चुकी है। कैराना में हुए हिंदुओं के पलायन में भी नाहिद हसन का हाथ माना जाता है।

पिछले साल नाहिद हसन ने पश्चिमी यूपी के मुस्लिमों से अपील की थी वे जाटों का आर्थिक बहिष्कार कर दें। नाहिद ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि मुस्लिम एकजुट होकर जाटों की दुकानों से सामान खरीदना बंद कर दें और मुस्लिम कारोबारियों को आगे बढ़ाएँ। इस पर खूब बवाल हुआ था।

वहीं, अब्दुल्ला आजम शनिवार (15 जनवरी 2022) को 23 महीने बाद जेल से जमानत पर बाहर आए हैं। क्वालिटी बार की जमीन को लेकर आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला पर आईपीसी की धारा 467 व 468 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में धारा 120बी भी लगा दी गई थी। इसी वजह से उनकी रिहाई में विलंब हुआ। 

गिरफ़्तारी के बाद अस्पताल में महंत नरसिंहानंद, नहीं खा रहे खाना; केंद्रीय मंत्री नकवी ने कहा – ‘घृणा फैलाने वाले राष्ट्र की छवि खराब कर रहे’

महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार किए गए महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने अभी भी अपना अनशन जारी रखा है। वहीं वामपंथी लगातार ‘हरिद्वार धर्म संसद’ मामले में उन पर और कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उन्हें उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्हें फ़िलहाल अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ उन्होंने ‘रस आहार’ अनशन जारी रखा है। उन्होंने कहा कि जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (पूर्व में वसीम रिजवी) की रिहाई तक ये अनशन जारी रहेगा।

साथ ही उन्होंने ये माँग भी की है कि इस मामले में संतों पर दर्ज किए गए मुक़दमे वापस किए जाने चाहिए। ज्ञात हो कि शनिवार (15 जनवरी, 2022) की रात गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को गिरफ्तार किया गया। उधर प्रबोधानंद गिरी ने कहा है कि सनातन धर्म और संस्कृति को मानने वालों को इस कार्रवाई का प्रतिकार करना चाहिए। उन्होंने संतों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

उधर अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि उनकी सोच ये है कि घृणा को किसी भी रूप में कहीं भी स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “देश में घृणा फैलाने वाले समाज को विभाजित कर रहे हैं। साथ ही वो दुनिया के सामने राष्ट्र की खराब छवि पेश करने की साजिश रच रहे हैं। ऐसे लोगों पर ये देखे बिना कार्रवाई होनी चाहिए कि वो कौन हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। समाज को विभाजित करने की हर साजिश को तुरंत ध्वस्त करना आवश्यक है।”

राज्यसभा में सदन के उपनेता मुख़्तार अब्बास नकवी ने देश में सांप्रदायिक विभाजन की आलोचना की। उधर प्रबोधानंद गिरी ने ‘धर्म संसद’ के कार्यक्रमों को चालू रखने की बात करते हुए कहा कि सौ करोड़ सनातनियों के हितों की रक्षा की बात करने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में संत इस प्रतिकार सभा में भाग लेने के लिए हरिद्वार पहुँच रहे हैं। ये सर्वानंद घाट पर प्रस्तावित है। उधर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की जमानत याचिका भी नामंजूर हो गई है।

देश के 70% लोगों को लग गए कोरोना के दोनों टीके, 156 करोड़ डोज के साथ वैक्सीनेशन का 1 साल पूरा: 93% वयस्कों को डोज

देश में कोरोना महामारी को मात देने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए विश्व के सबसे बड़े वैक्सीनेशन (Vaccination) अभियान के एक साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार एक साल के आँकड़े शेयर किए हैं। ‘माई गवर्नमेंट ऑफ इंडिया’ हैंडल के मुताबिक, 1.3 बिलियन लोग एक साथ एक लक्ष्य हासिल करने के लिए काम करते हैं तो क्या होता है।

देश में 16 जनवरी 2021 को टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई थी, जो कि दिन ब दिन बढ़ती गई। वैक्सीनेशन अभियान के शुरू होने के एक साल के अंदर ही भारत में 156 करोड़ डोज देकर रिकॉर्ड कायम किया। इसी क्रम में 17 सितंबर 2021 का दिन वो दिन था जब एक दिन में 2.5 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन कर एक नया रिकॉर्ड बनाया गया।

इसके अलावा कोरोना से इस लड़ाई में देश ने कई नए कीर्तिमान भी बनाए जैसे कि देश में कोरोना का पहला केस सामने आने के महज 11 महीने के भीतर ही वैक्सीनेशन की शुरुआत कर दी गई। जबकि, देश में पहली बहार डीएनए बेस्ड वैक्सीन भी बनाई गई। साथ ही Co-WIN ऐप के जरिए देश का सबसे बड़ा डिजिटल वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया गया, जिसमें 99 करोड़ लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया। वहीं अगर इसे महामारियों में भारत सरकार के आँकड़े के तौर पर देखें तो 1994-2014 तक 20 साल में देश के 97 फीसदी लोगों को पोलियो की खुराक दी गई। इसी तरह से 1989 से अब तक 32 साल में 92 फीसदी लोगों को टीबी का टीका लग पाया। लेकिन मोदी सरकार में 2021 में शुरू हुए वैक्सीनेशन अभियान में केवल एक साल के भीतर ही देश के 93 प्रतिशत लोगों को कोरोना के टीके लगाए जा चुके हैं।

12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100% वैक्सीन कवरेज

देश में वैक्सीनेश की आत्मनिर्भरता का ऐसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभर के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 फीसदी पहली डोज का कवरेज कर लिया गया है। जबकि, 26 राज्यों में कोरोना टीके की पहली खुराक को 90 प्रतिशत लोगों तक पहुँचाया जा चुका है। वहीं 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूर्ण टीकाकरण का 95 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। 18 साल से अधिक उम्र के 93 प्रतिशत लोगों ने अभी तक कम से कम पहली डोज लगवा लिया है, जबकि 69 फीसदी ने सेकंड डोज भी लगवा लिया है।

वैक्सीनेशन के स्केल के लिहाज से इसे देखा जाय तो देश हल्के हरे रंग वाले 3 राज्यों में 70-79% लोगों ने वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ली है। हल्के पीले रंग वाले 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80-89 प्रतिशत लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज ली है। जबकि, डार्क ग्रीन रंग वाले वो 14 राज्य हैं, जिनके 90-99 फीसदी लोगों ने कम से कम पहली डोज ले ली है। इसके अलावा नीले रंग वाले 12 राज्य वो है, जिसके 100 फीसदी लोग वैक्सीन की पहली खुराक ले चुके हैं। टीकाकरण के लिहाज से भारत दुनिया में सबसे आगे है। यहाँ देश के 93 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है।

भारत अब तक अपनी 69 फीसदी आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण कर दुनिया में शीर्ष पर है। इस मामले में 66 फीसदी के साथ सउदी अरब दूसरे स्थान पर है। वैक्सीनेशन के मामले में भारत समूचे विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत इस समय 156 देशों का नेतृत्व कर रहा है। भारत अब तक 156 करोड़ लोगों को टीका लगा चुका है।

खास बात ये है कि ये टीकाकरण पूरी तरह से नि:शुल्क है। वहीं भारत वैक्सीन मैत्री अभियान के तहत अब तक 79 देशों को 11.54 करोड़ वैक्सीन की खुराक दे चुका है।

इसके अलावा देश में 15-17 साल के 3.3 करोड़ बच्चों को अब तक वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। ये इस आयुवर्ग का 44 फीसदी है। इसके अलावा 10 जनवरी 2022 से भारत सरकार ने हेल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए बूस्टरडोज की शुरुआत की गई है। इसके तहत केवल 5 दिन में ही 28 लाख से अधिक बूस्टर डोज दिए गए हैं। साथ ही इसी ताऱीख से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त और 60 साल से अधिक उम्र के 9 लाख लोगों को 5 दिन में एहतियात के तौर पर बूस्टर डोज दिए गए।

घर-घर टीकाकरण अभियान से बढ़ा वैक्सीन प्रतिशत

भारत सरकार ने 3 नवंबर 2021 को घर-घर जाकर टीके लगाने का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था, जिसके तहत फर्स्ट डोज लेने वालों का वैक्सीनेशन कवरेज 12 फीसदी बढ़ा था। जबकि, 29 फीसदी लोगों ने सेकंड डोज लगवाई।

वहीं टीकाकरण के दौरान लैंगिग समानता का भी ख्याल रखा गया। इसमें 49 फीसदी महिलाएँ औऱ 51 फीसदी पुरुषों ने टीके लगवाए हैं। वैक्सीन लगवाने वालों में 18-44 आयुवर्ग के 93 करोड़ लोग हैं, 45-60 साल के 37 करोड़, 60+ वाले 23 करोड़ और 15-17 साल के 3 करोड़ लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं।

इसके अलावा वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की क्षमता देखें तो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (कोविशील्ड) एक महीने में 25 करोड़ डोज तैयार कर रही है। इसी तरह से भारत बायोटेक (कोवैक्सिन) 6 करोड़, जायकोव डी (जायडस कैडिला) एक करोड़, कार्बेवैक्स (बायो ई) 6 करोड़, कोवावैक्स (सीरम ) 10 करोड़ और जॉनसन बायो 5 करोड़ डोज तैयार कर रहा है। देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार को इस तरीके से समझा जा सकता है कि पहले 85 दिन में 10 करोड़ लोगों को टीके लगाए गए थे। जबकि अंतिम 14 दिनों में ही 10 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया।

असलम ने ईसाई पत्नी को इस्लामिक सेंटर में रखा कैद, धर्मांतरण का दबाव: अंतरंग पलों को दोस्तों के साथ साझा किया, केरल पुलिस ने किया अरेस्ट

केरल में एक ईसाई महिला ने अपने पति पर इस्लाम कबूल करवाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। महिला ने अपने पति के परिवार वालों को भी इस मामले में साथी बताया है। आरोपित पति का नाम असलम है। असलम पर अपनी पत्नी को जबरन एक इस्लामिक सेंटर में रखने का भी आरोप है। पुलिस ने 7 दिसम्बर 2021 को इस मामले में केस दर्ज किया है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की उम्र 20 साल है, जबकि असलम उस से 13 साल बड़ा (33 साल) है। घटना की शिकायत कोटमंगलम के पोथानीकाड (Pothanikad) थाने में की गई है। शिकायत के मुताबिक, महिला का धर्मांतरण के लिए 40 दिनों तक एक इस्लामिक केंद्र में रखा गया था।

शिकायत में महिला ने कहा, “मुझे जबरन पोन्नानी (Ponnani) ले जाया गया। वहाँ मुझे एक इस्लामिक सेंटर में रखा गया। मुझ पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता रहा। 40 दिनों तक मुझको कहीं निकलने नहीं दिया गया। मुझे किसी से सम्पर्क की भी इजाजत नहीं थी। मैं जैसे-तैसे सेंटर से निकली और अपने पति के पास पहुँची, लेकिन उसने भी मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर किया।”

इस केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए असलम और उसका पूरा परिवार कोर्ट गया था। उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए अग्रिम जमानत की माँग की थी। 10 जनवरी (सोमवार) को अदालत ने परिजनों को जमानत दे दी, लेकिन पति की याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायाधीश जी गिरीश ने अपने फैसले में कहा, “पीड़िता ने अपने पति पर बेडरूम की निजी पलों की तस्वीरों को दोस्तों के साथ साझा करने का आरोप लगाया है। यह कोई भी पत्नी स्वीकार नहीं कर सकती। साथ ही पीड़िता पर अपना धर्म थोपने का प्रयास किया गया है। इससे निश्चित तौर पर शिकायतकर्ता को मानसिक तकलीफ हुई होगी। आरोपित के विरुद्ध महिला के यौन उत्पीड़न के भी रिकॉर्ड पेश किए गए हैं। यह काफी दुखद है।”

पुलिस ने असलम और उसके परिवार वालों पर दहेज उत्पीड़न, गलत तरीके से बंदी बनाने और महिला का शील भंग करने की धाराएँ लगाई हैं। पुलिस के मुताबिक, “इन दोनों ने लव मैरिज की थी। इनकी शादी 11 नवम्बर 2019 को Pothanikkad के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस पर हुई थी। शादी के समय दोनों ने एक-दूसरे को उनके धर्म के पालन की छूट देने का आश्वासन दिया था। इस केस की जाँच चल रही है। आरोपित पक्ष द्वारा अग्रिम जमानत के आवेदन के दौरान पुलिस ने जाँच रिपोर्ट अदालत में जमा की है।”

सपा वाले नाहिद हसन और BJP की मृगांका सिंह… 100 साल पहले एक ही था परिवार, अब कैराना की लड़ाई के दो किरदार

उत्तर प्रदेश के कैराना में दो बड़े राजनीतिक घराने हसन और सिंह कभी एक परिवार का हिस्सा हुआ करते थे। करीब 120 साल पहले की बात है। इनके एक पूर्वज ने इस्लाम मजहब को अपना लिया था, जिसके बाद से इस परिवार में हिंदू बनाम मुसलमान की लड़ाई शुरू हो गई थी। यह राजनीतिक लड़ाई इतने सालों के बाद भी जारी है।

बीजेपी ने शनिवार (15 जनवरी 2022) को यूपी चुनाव के लिए 107 उम्मीदवारों पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें उन्होंने कैराना से अपने उम्मीदवार के रूप में दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को टिकट दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इसी सीट से मौजूदा विधायक निशाद हसन को अपना उम्मीदवार बनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 100 साल पहले सिंह और हसन एक ही परिवार का हिस्सा थे। इनके परिवार के मुखिया बाबा काल्सा थे। कैराना निवासी सुहैब अंसानी के अनुसार, कुछ साल पहले तक हुकुम सिंह को हिंदुओं और नाहिद के पिता मुनव्वर हसन को मुस्लिम विंग का नेता माना जाता था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1990 के दशक से इन परिवारों से लोग विधानसभा और लोकसभा का चुनाव भी लड़े हैं। दोनों परिवारों ने सालों तब लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ी है। अब यह राजनीतिक लड़ाई अगली पीढ़ी तक भी पहुँच गई है। मुनव्वर हसन के बेटे नाहिद ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को हराया था। इसके बाद 2018 के लोकसभा उपचुनाव में मृगांका को मुनव्वर हसन की बीवी तबस्सुम हसन ने हराया था।

बता दें कि शनिवार (15 जनवरी 2022) को उत्तर प्रदेश के कैराना से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नाहिद हसन को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने नाहिद को 14 दिन न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। नाहिद हसन के खिलाफ पुलिस में दो दर्जन से अधिक​ आपराधिक मामले दर्ज हैं। लम्बे समय तक फरार रहने वाले नाहिद हसन ने जनवरी 2020 में अदालत में सरेंडर किया था। लगभग 1 माह से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उसे जमानत मिली थी। फरवरी 2021 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने नाहिद हसन, उसकी माँ पूर्व सांसद तबस्सुम और 38 अन्य लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।

‘ईसाई बनने पर बीमारी होगी ठीक, खाना-पैसा भी मिलेगा’: MP के पुनर्वास कॉलोनी में किताब के सहारे धर्मांतरण का खेल

मध्य प्रदेश के इंदौर के धार जिले से धर्मांतरण का मामला सामने आया है। वहाँ कुक्षी के पास स्थित पुनर्वास कॉलोनी में कैलाश डोडवे नाम का व्यक्ति घर के अंदर कुछ ग्रामीणों को भरके उन्हें तरह-तरह के लालच दे रहा था। कथिततौर पर उसने ग्रामीणों से कहा था कि अगर वह धर्मांतरण करते हैं तो उनकी बीमारियाँ ठीक हो जाएँगी और रुपए भी मिलेंगे। हालाँकि, समय रहते इस संबंध में ‘जनजाति विकास मंच’ को सूचना मिल गई और मंच के लोग उसे पकड़कर कुक्षी थाने ले गए।

बता दें कि इस मामले में पहले आरोपित के फरार होने की खबर आई थी। लेकिन, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश के विरुद्ध इस तरह की शिकायतें पाकर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान कई लोग गाँव में हो रहे धर्मांतरण के विरोध में थाने पहुँचे। पूछताछ में सामने आया कि पुनर्वास कॉलोनी में कैलाश किसी थान सिंह रावत के मकान में किराए के कमरे में रहता था और आसपास के ग्रामीणों को घर्म के नाम पर बरगलाता था।

मालूम हो कि शुक्रवार को दी गई शिकायत में शिकायतकर्ता अशोक सिंह ने पुलिस को बताया कि आरोपित ने अपने पास घर में एक किताब रखी हुई थी और उसी से ग्रामीणों का धर्मांतरण करवा रहा था। ग्रामीणों ने भी बताया कि कैलाश बीमारी ठीक करने के बाद नगद पैसे और अनाज देने की बातें भी करता था। थाने के टीआई दिनेश सिंह चौहान का कहना है कि पुनर्वास में ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर बीमारी ठीक करने के बहाने धर्म परिवर्तन करने की सूचना मिली थी। अब आरोपित के खिलाफ मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2020 की धारा 3 व 5 के तहत केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि कैलाश गरीब लोगों को धर्मांतरण की शिक्षा दे रहा था।

पिछले कुछ महीनों में MP से आए धर्मांतरण के मामले

बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत एक पादरी समेत तीन लोगों को पकड़ा गया था। इन पर आरोप था कि ये लोग आदिवासियों को लालच देकर उनका धर्मांतरण करवा रहे थे। पुलिस ने बताया था कि पकड़े गए सभी लोग झाबुआ जिले के एक गाँव में आदिवासियों को धर्मांतरण के लिए लुभाने में शामिल थे। इस मामले में शिकायतकर्ता ने बताया था कि धर्मांतरण के लिए मुफ्त स्वास्थ्य और शिक्षा ला लालच देते हुए ईसाई धर्म अपनाने को कहा जा रहा था।

इसके अलावा दिसंबर में प्रकाशित इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में डेढ़ माह के अंदर 6 धर्मांतरण के मामले सामने आए थे। बरवानी से संबंधी एक केस में पुलिस ने एक जोड़े को गिरफ्तार किया था। ये लोग भी मुफ्त खाना, शिक्षा, दवाई और अन्य सुविधाओं का लालच देकर आदिवासी महिलाओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करवाने का काम करते थे। इस केस से पूर्व भोपाल में एक ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित एक स्कूल का खुलासा हुआ था जहाँ कथिततौर पर हिंदू बच्चों का धर्मांतरण होता था। फिर, ऐसा ही एक मामला सागर जिले से आया था जहाँ एक पिता ने सेंट फ्रांसिस सेवाधाम पर धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए थे और दावा किया था कि वहाँ बच्चों को गाय का मीट और बाइबल पढ़ने को मजबूर किया जाता है। नवंबर 2021 में रायसन जिले में एक महिला होस्टल से भी पर्दा उठा था जहाँ धर्मांतरण का खेल चल रहा था।

‘हस्तिनापुर से जीत गई कॉन्ग्रेस की बिकनी गर्ल तो अपनी गर्दन कटा लूँगा’: हिन्दू महासभा के नेता का ऐलान, कहा – ये हिन्दुओं का अपमान

उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Assembly Polls-2022) के चुनाव में मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट से बिकनी गर्ल के नाम से मशहूर तमिल एक्ट्रेस अर्चना गौतम (Archana Gautam) को कॉन्ग्रेस (Congress) ने टिकट दिया है। जब से कॉन्ग्रेस ने अर्चना गौतम को इस सीट से टिकट दिया है, तभी से उनका विरोध शुरू हो गया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक अग्रवाल (Abhishek Agrawal) ने कहा है कि अगर अर्चना गौतम जीत जाती हैं तो वे घंटाघर चौराहे पर खड़े होकर अपनी गर्दन कटवा लेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू महासभा ने बिकनी गर्ल अर्चना गौतम को हस्तिनापुर जैसी पवित्र जगह से प्रत्याशी बनाए जाने को कॉन्ग्रेस की ओछी राजनीति और भारतीय संस्कृति का अपमान करार दिया है। महासभा के प्रदेश सचिव अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि महाभारत के काल से हस्तिनापुर का एक विशेष महत्व रहा है। जैन धर्म के लोगों के लिए भी यह स्थान पूजनीय रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रत्याशी को टिकट देकर हिंदू परंपराओं का अपमान किया है। इससे समाज में क्या संदेश जाएगा। अगर अर्चना गौतम जीत जाएंगी तो वे अपनी गर्दन कटवा देगें।

बीजेपी के उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस सस्ती पब्लिसिटी पाना चाहती है, इसीलिए उसने अर्चना गौतम को टिकट दिया है। बीजेपी का मानना है कि बिकनी गर्ल राजनीति में अपरिपक्व हैं। हालाँकि, इस मामले में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कहती हैं कि वो इस क्षेत्र का विकास करना चाहती हैं। उनका कहना है कि वो इस क्षेत्र को स्वर्ग बनाना चाहती हैं।

कौन हैं अर्चना गौतम

26 वर्षीय अर्चना गौतम एक्ट्रेस हैं। उन्होंने बॉलीवुड में भी काम किया है। वो बिकनी गर्ल के रूप में जानी जाती हैं। अर्चना गौतम ने 2018 में मिस बिकनी का खिताब हासिल किया था। उन्होंने 2015 में बॉलीवुड फिल्म ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ में अभिनय से की शुरुआत की थी। इससे पहले उन्होंने कई ब्रांड्स के लिए प्रिंट और टेलीविजन पर विज्ञापनो में मॉडलिंग भी की। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने अर्चना गौतम को पिछले नवंबर में दोबारा कॉन्ग्रेस ज्वॉइन कराई थी। इससे पहले वह पार्टी में सम्मान न मिलने की वजह से नाराज हो गई थी।

रफीका ने बेटे और दोस्त संग मिल 75 वर्षीय बुजुर्ग का गला घोंटकर मार डाला: जेवर लूट हुए फरार, रास्ते में केरल पुलिस ने धर दबोचा

केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में विझिंजम (Vizhinjam) पुलिस ने शनिवार (15 जनवरी 2022) को एक 75 वर्षीय बुजर्ग महिला की हत्या करने और उसके सोने के गहने चोरी करने के आरोप में माँ बेटे समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। मृतका की पहचान मुल्लूर के अलुम्मुडू वीडू की रहने वाली शांता कुमारी के रूप में हुई है।

50 वर्षीय रफीका बीवी, उसका 23 वर्षीय बेटा शफीक और रफीका का 26 वर्षीय दोस्त अल आमीन शांता कुमारी के पड़ोस में ही रहते थे। ये सभी शांता कुमारी के पड़ोसी श्रीकुमार के मकान में किराए पर रह रहे थे। तीनों ने एक दिन शांता कुमारी को अपने घर पर बुलाया और उसके जेवर लूट लिए। बाद में उन्होंने शॉल से उसका गला घोंट दिया और सिर पर हथौड़ा मारकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग के शव को अपने घर में ही छिपा दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने श्रीकुमार के बेटे को बुलाया और उसे बताया कि वे घर खाली कर रहे हैं। बाद में मकान मालिक के बेटे ने जब घर खोला तो उसने देखा कि बरामदे की छत से खून बह रहा है। इस बारे में उन्होंने अपने पड़ोसियों को भी बताया और शांता कुमारी का शव बरामद किया।

पड़ोसियों ने बिना समय गँवाए विझिंजम पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल फोन को ट्रेस कर थायकॉड म्यूजिक कॉलेज के पास उनकी लोकेशन का पता लगाया। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपित कोझीकोड जाने वाली एक निजी बस में सवार हो गए थे। पुलिस ने बस चालक और कंडक्टर को इसके बारे में सूचित कर उससे कझाकूटम थाने के पास बस रोकने को कहा। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर उन तीनों को धर दबोचा।

प्रयागराज के मंदिर की महंत पर मुस्लिम युवक से शादी का आरोप, पुलिस ने सबूत पेश करने को कहा: श्रद्धालुओं का विरोध प्रदर्शन

प्रयागराज के पौराणिक वेणी माधव मंदिर की महिला महंत डॉ वैभव गिरी (विभा त्रिपाठी) पर मुस्लिम होने का आरोप लगा है। यह आरोप पुरुषोत्तम गिरी के शिष्य रघुराज गिरी ने लगाया है। आरोपों के मुताबिक महंत का नाम विभा त्रिपाठी नहीं बल्कि विभा आसिफ़ है। इस बात की जानकारी श्रद्धालुओं को हुई तो उन्होंने मंदिर के आगे हंगामा किया। मौके पर भारी पुलिस बल पहुँच कर हालात को काबू किया। घटना शनिवार (15 जनवरी, 2022) की बताई जा रही है।

आरोप लगाने वाले रघुराज गिरी के मुताबिक वह प्रयागराज के अलोपीबाग मंदिर, थानापति और कोठार मंदिर में सेवक हैं। उनका दावा है, “मेरे पास पास सबूत है कि वर्तमान महंथ विभूति त्रिपाठी इलाहबाद विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं। उनकी शादी एक मुस्लिम युवक से हुई है। उनके पति का नाम मोहम्मद आसिफ है। आसिफ मुंबई ईस्ट के बांद्रा क्षेत्र में रहता है। उस से शादी कर के विभूति त्रिपाठी का नाम विभा आसिफ पड़ा है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित साल्टलेक थाना में स्वयं विभा ने यह जानकारी दर्ज करवाई है।” पत्रकारों के आगे रघुराज गिरी कागजातों को भी दिखाते दिख रहे हैं।”

रघुराज गिरी ने यह भी आरोप लगाया, “महंत विभा का जो बेटा है उसका पिता आसिफ है। वही मंदिर में आरती – पूजा करवाता है। यह सब सनातन धर्म को भ्रस्ट करने की साजिश है। विभा आसिफ, सर्वदा तिवारी और आशुतोष झा ने आस्था के साथ विश्वासघात, धर्म स्थल को अपवित्र करने के साथ फर्जी कागज़ात और सरकारी धन के गबन जैसे अपराध किए हैं। पुलिस इनके विरुद्ध FIR दर्ज कर के एक्शन ले।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में वेणी माधव मंदिर में सम्पर्क किया। मंदिर के प्रबंधक आशुतोष झा ने बताया, “यह सब मंदिर पर कब्ज़ा करने की साजिश है। कुछ लोग मंदिर की महंथ को एक महिला जान कर दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मंदिर में घुस कर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। हम जूना अखाड़े से जुड़े हुए हैं। हंगामे के दौरान हमारे अखाड़े के संत महंत भी आ गए और उन्होंने मंदिर पर कब्ज़े को रोका। यह पुलिस के बस की बात नहीं थी। माता जी (महंत विभा त्रिपाठी) के बारे में फैलाई जा रही बातें अफवाह हैं।”

इस मामले में प्रयागराज पुलिस का कहना है, “2 पक्षों में कब्जेदारी की सूचना पर तत्काल पुलिस एवं प्रशासन की टीमें राजपत्रित अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँची। विवाद की शुरुआत करने वाले पक्ष द्वारा अब तक कोई भी पुष्ट सूचना या तथ्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। इसके लिए उन्हें कुछ समय और दिया गया है। समस्या का समाधान कानून के दायरे में शीघ्र करवाया जाएगा। भ्रम फैलाने वालों, कानून को हाथ में लेने वालों तथा जोर जबरदस्ती कर के कब्ज़े का प्रयास करने वालों पर कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

पार्टी मुख्यालय के बाहर अलीगढ़ के सपा नेता ने की आत्मदाह की कोशिश, कहा – ‘मेहनत मैंने की, टिकट बाहरी को दे दिया’

अलीगढ़ में टिकट से महरूम किए जाने पर आदित्य ठाकुर नामक समाजवादी पार्टी के नेता ने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह की कोशिश की। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वो मीडिया के सामने ही फूट-फूट कर रो पड़े। आदित्य ठाकुर लंबे समय से टिकट के लिए दावा ठोक रहे थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। बता दें कि सपा ने लगभग आधा दर्जन छोटे दलों से गठबंधन किया है, उसकी सत्ता में वापसी की उम्मीद बनी रहे।

ये घटना राजधानी लखनऊ में रविवार (16 जनवरी, 2022) को समाजवादी पार्टी के मुख्यालय के बाहर हुई। दिन के करीब 11 बजे अचानक से इलाके में खलबली मच गई। ठाकुर आदित्य सिंह लोधी अलीगढ़ के छर्रा से टिकट की आशा में प्रयासरत थे। उन्होंने सपा मुख्यालय के बाहर ही खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास किया। आदित्य लोधी ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन और जवानी को इस पार्टी के लिए खपा दिया है। मेडिकल जाँच के लिए उन्हें सिविल अस्पताल भेजा गया है।

उनका कहना है कि वो 5 वर्षों से टिकट की तैयारी में लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि मेहनत करने के बावजूद पार्टी ने किसी और को टिकट दे दिया है। पुलिस इस दौरान मौके पर ही मौजूद थी। ठाकुर आदित्य सिंह लोधी की आँख में भी पेट्रोल चला गया। उन्होंने कहा, “मैं यहाँ अपना जीवन समाप्त करने आया हूँ, चाहे जो भी हो जाए। आप भले मुझे जेल में डाल दो, लेकिन मैं नहीं मानूँगा। मुझे न्याय चाहिए।” उन्होंने सपा पर ‘बाहरियों’ को टिकट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच मुजफ्फरनगर जिले से बसपा नेता अरशद राणा ने टिकट के नाम पर 67 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगाया था। यह आरोप उनकी ही पार्टी के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी शम्सुद्दीन राईन पर लगा था। इसकी शिकायत उन्होंने मुज़फ्फरनगर पुलिस से की थी। उनका फूट-फूट कर रोते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था, “इन्होने मेरा तमाशा बना दिया। मैंने तो कभी इस तरह से सोचा भी नहीं था। मुझे अंदर बिठा कर ये कहते कि हम तेरे जगह किसी और को चुनाव लड़वा रहे हैं। सारे एड होर्डिंग मैं ही कर रहा हूँ।”