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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद से जारी हुए 6 अजीब फतवे

अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वाला दारुल उलूम देवबंद हाल में गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर अपने फतवा के कारण चर्चा में है। ये पहली बार नहीं है कि देश के मुसलमानों को इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित हुआ ये संस्थान विवाद में आया हो, कई बार अपने अजीबोगरीब फतवों की वजह से ये मीडिया सुर्खियों में रहा है और दिलचस्प बात ये है कि संस्थान एक दारुलइफ्ता नाम से साइट चलाता है जहाँ मुसलमानों के सवालों के जवाब दिए जाते हैं और आए दिन नए-नए फतवे जारी होते हैं।

darulifta-deoband.com साइट पर मुस्लिम आते हैं। अपने अजीबोगरीब सवाल रखते हैं। फिर दारुल उलूम देवबंद की ओर से उन्हें ज्ञान दिया जाता है और फतवा जारी कर बताया जाता है कि जो वो कर रहे हैं वो इस्लाम के लिहाज से हलाल है या हराम। हमने इस साइट से चंद सवाल छाँटे हैं जिनपर जारी फतवे यदि आप पढ़ेंगे तो हो सकता है कि कुछ आपको बेहद हास्यास्पद लगें और कुछ ऐसे लगें जो बताते हैं कि आखिर कैसे पिछड़ी सोच के पीछे मजहबी ठेकेदारों को हाथ होता है।

सवाल-जवाब और फतवे

पहला सवाल देखिए- एक व्यक्ति ने पूछा कि वो Paytm में काम करता है और उसका सवाल है कि उसे जो सैलरी मिलती है अगर वो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी को मिले इंटरेस्ट पर मिलती है। तो क्या उसकी सैलरी हराम है या हलाल?

आप सोचेंगे कि ये कैसा सवाल है। लेकिन, दारुल उलूम ने इस पर गंभीर विचार करके जवाब दिया हुआ है। फतवा संख्या 866/864/B=9/1438 के अनुसार कहा गया अगर कंपनी अपने कर्मचारी को आरबीआई से मिले ब्याज में से सैलरी दे रही है तो ये हलाल बिलकुल नहीं है। दारुल उलूम ने सवाल पूछने वाले को कोई अच्छी नौकरी ढूँढकर इस नौकरी को छोड़ने की सलाह दी हुई है।

दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

दूसरा सवाल है कि क्या कोई व्यक्ति कैमरे वाला मोबाइल इस्तेमाल करते हुए उसमें तस्वीरें ले सकता है? उसमें वीडियो बना सकता है? देवबंद की ओर से फतवा नंबर 1157/B=1335/B के तहत इस सवाल के जवाब में कहा गया कि मोबाइल फोन का काम संपर्क करने के लिए है। इसलिए सिर्फ इतना ही इस्तेमाल उसका किया जा सकता है। लेकिन किसी जीवित की तस्वीर लेना, फोटोग्राफी करना इस्लाम में नहीं है, इसलिए इससे तस्वीरें लेना और वीडियो फिल्म बनाना दारुल उलूम के हिसाब से बिलकुल ठीक नहीं है।

दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

तीसरा सवाल: क्या अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए इस्लाम में कंडोम के इस्तेमाल को अनुमति दी गई है? देवबंद द्वारा जारी जवाब में फतवा 517/440/B=1431 जारी कर बताया गया कि बिन किसी कारण के कंडोम का इस्तेमाल जायज नहीं है। ये इस्लामी कानून के विरुद्ध है। हाँ! अगर बीवी कमजोर है और गर्भ नहीं धारण कर सकती है या बीमार रहती है तो फिर कंडोम का इस्तेमाल हो सकता है।

दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

चौथा सवाल: क्या नकल करके पास होना जायज है या नाजायज और किसी भी काम से पैसा कमाना हराम है या हलाल? इस सवाल के जवाब में देवबंद की ओर से जारी फतवा नंबर 490/490=M/1429 के मुताबिक बताया गया कि अगर कोई पास हो जाए नकल करके तो वो नाजायज है मगर इससे उसे जॉब मिले, डिग्री मिले और वो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाए तो ये जायज हो जाएगा। बस उसे नकल के लिए गुनाह लगेगा। इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।

दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

पाँचवा सवाल एक लड़के ने किया कि क्या वो एक ऐसी शेरवानी पहन सकता है जिसपर ब्रोकेड के फेब्रिक का काम हो। इस सवाल पर देवबंद ने फतवा 244/226/SD=3/1439 जारी करते हुए कहा कि अगर शेरवानी सिल्क की है और उसपे कोई चांदी या सोने के धागे का इस्तेमाल नहीं है तो उसे पहना जा सकता है। उसे निकाह समारोह में पहना जा सकता है। लेकिन इस पर फिजूल खर्जी और इसे घमंड के साथ पहनना जायज नहीं है। शरीया के अनुसार इतने कीमती कपड़े पहनना ठीक नहीं है।  अगर शेरवानी में सोने-चांदी के धागे से कारीगरी है तो सवाल दोबारा पूछा जाए।

दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

छठा सवाल फर्जी अटेंडेंस साइन को लेकर है। किसी ने पूछा कि वो रोज कॉलेज में मौजूद नहीं हो पाता है तो क्या अपने दोस्तों से प्रॉक्सी लगवाना सही है या नहीं। इस पर देवबंद ने फतवा नं 793/671/N=7/1439 के जरिए बताया कि इस तरह फर्जी अटेंडेंस लगाना या लगवाना गलत है। ये बहुत गलत है। जो भी ऐसा करता है वो गुनहगार है।

तो, ये वो चंद सवाल-जवाब हैं जो हमें दारुलइफ्ता-देवबंद की साइट पर पढ़ने को मिलते हैं। इनके अलावा इस साइट पर तमाम ऐसे सवाल किए जाते हैं जो किसी सामान्य जन को बेहद बचकाना लगें। लेकिन, यहाँ पूछने वाले के लिए ये गंभीर विषय होता है और दारुल उलूम भी इसका जवाब बेहद संजीदा ढंग से फतवा जारी करके देता है।

‘ईसाई बन जाओ, अमेरिका से पैसे मिलेंगे’: तेलंगाना में सरकारी स्कूल टीचर बच्चों को देता है लालच, कहता है- माँ सरस्वती का चित्र हटाओ

तेलंगाना में एक स्कूल के एक शिक्षक पर धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) के लिए प्रलोभन देने का मामला सामने आया है। मेलवार जिले के विकाराबाद में स्थित ZPHS सरकारी स्कूल के छात्र ने बताया कि उसके गणित के शिक्षक के. रत्नम उसे ईसाई धर्म (Christianity) में कन्वर्ट होने के लिए कह रहे हैं। साथ ही वो अमेरिका से गिफ्ट और पैसे मिलने का प्रलोभन भी दे रहे हैं। Legal Rights Protection Forum ने अपने ट्विटर हैंडल पर यह जानकारी दी है।

इससे पहले कुछ छात्रों ने इस टीचर पर छात्रों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया था। आरोप है कि मामूली बात पर यह टीचर दलित छात्रों को अन्य छात्रों के पैर छूने (माफी माँगने के लिए) के लिए कहता है। इतना ही नहीं, उनसे जातिगत भेदभाव करते हुए उन्हें पीटता है। इससे छात्र अपमानित महसूस करते हैं।

यही नहीं, मैथ का टीचर छात्रों को कक्षा की दीवारों से माँ सरस्वती की तस्वीरों को भी हटाने के लिए भी कहता है। इसके साथ ही वह अभद्र भाषा का भी प्रयोग करता है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 295-ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की अन्य धाराएँ जो इस अपराध से संबंधित हैं, उन्हें एफआईआर में शामिल नहीं किया गया है। इस मामले में नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) से हस्तक्षेप की माँग की गई है।

बेंगलुरु के एक स्कूल में हिन्दू बच्ची को अल्लाह की इबादत करने को कहा

इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दक्षिण भारत के कई राज्यों में इस तरह के मामले ​सामने आ चुके हैं, जब स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों को प्रलोभन देकर, डरा धमकाकर इस्लाम और ईसाई धर्म को मानने के लिए कहा गया। इस महीने की शुरुआत में बेंगलुरु के एक स्कूल में एक बच्ची को सजा देने के लिए उससे इस्लामी ढंग से प्रार्थना करवाई गई थी। कथित तौर पर ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल (Orchid International School) की मैथ टीचर ने छात्रा से एक सवाल हल न होने पर कहा कि वो अल्लाह की इबादत करे और इस बारे में किसी को कुछ न बताए।

‘मैं बाबरी हूँ’ का बैज बाँटता दिखा था एसडीपीआई का कार्यकर्ता

इसके अलावा, ​दिसंबर 2021 में केरल के एक स्कूल में बच्चों को अपनी राजनीति में शामिल करने और उन्हें मजहब के नाम पर गुमराह करने का मामला सामने आया था। कोट्टंगल के चुंगप्पारा सेंट जॉर्ज स्कूल के बच्चों को एसडीपीआई (SDPI) का एक कथित कार्यकर्ता ‘मैं बाबरी हूँ’ का बैज बाँटता दिखा था। सोशल मीडिया पर उसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिसमें कार्यकर्ता बच्चों की शर्ट पर बैज लगाता हुआ भी दिख रहा था।

maths teacher asking to students convert to christianity in telangana

कॉन्ग्रेस से सपा में गए इमरान मसूद को अखिलेश यादव ने दिखाया ठेंगा, नहीं दिया टिकट: अब BSP में जाने की कर रहे हैं तैयारी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता इमरान मसूद (Imran Masood) मुश्किलों में घिर गए हैं। समाजवादी से सहारनपुर जिले की बेहट सीट से टिकट की तलाश कर रहे इमरान मसूद को अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ठेंगा दिखा दिया है। सपा प्रमुख के इस फैसले से इमरान मसूद पूरी तरह से शॉक्ड हैं। उनकी स्थिति ‘न घर के न घाट के’ वाली हो गई है। अब विवादित नेता दूसरी मंजिल की तलाश में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा टिकट न दिए जाने से हैरान मसूद कैंप अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) की तरफ रुख कर रहा है। मीडिया सवालों के जबाव में मसूद ने कहा, “मैं अभी कुछ भी नहीं बोलूँगा। मैं अभी शॉक्ड हूँ। मैं कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हूँ।”

गौरतलब है कि विवादित छवि वाले इमरान मसूद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के करीबी माना जाता है। हाल ही में मसूद ने कहा था कि अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराना है तो समाजवादी पार्टी के साथ आना ही होगा। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को टक्कर दे सकती है। कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद मसूद ने कहा था कि पॉलिटिकल स्थिति कुछ ऐसी बन गई है कि ये फैसला लेना ही पड़ेगा।

हाल ही में इमरान मसूद ने 300 समर्थकों के साथ एक मीटिंग बुलाई थी, जिसके बाद 10 जनवरी 2022 को सहारनपुर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जिले के एसपी सिटी राजेश कुमार ने कहा था कि पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू है। लेकिन, इमरान मसूद ने इसके लिए इजाजत तक नहीं माँगी थी। उन्होंने कोरोना की गाइडलाइंस का भी पालन नहीं किया। इस मामले में इमरान मसूद समेत 10 नामजद किए गए थे और 300 अज्ञातों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

यहीं नहीं इमरान मसूद वही नेता हैं जो साल 2014 में जब मसूद सहारनपुर से कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार थे तब उसने एक सार्वजनिक रैली में घोषणा की थी कि वह ‘नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देगा’।

लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हुआ ‘मुस्लिम फंड’ वाला फैजी, जमा करता था ‘हलाल’ पैसे: घर बेच कर विदेश भागने की अटकलें

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में सैकड़ों मुस्लिमों ने एक प्राइवेट बैंक पर अपने पैसे हड़पने का आरोप लगाया है। मुख्य आरोपित का नाम मोहम्मद फ़ैज़ी है। फ़ैज़ी ‘अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड’ नाम से नगीना इलाके में चिटफंड कम्पनी चला रहा था। वह मुस्लिमों के पैसे शरिया कानून से जमा करने के लिए जाना जाता था।

जानकारी के मुताबिक आरोपित नगीना के मोहल्ला लाल सराय में रहता था। वह इसी क्षेत्र में लगभग 5 वर्ष से मुस्लिम फंड चलाता था। शरिया कानून के मुताबिक ब्याज हराम है। इसी के चलते कई मुस्लिमों ने अपने पैसे फ़ैज़ी के पास जमा कर रखे थे। ज्यादा से ज्यादा पैसे जमा करवाने के लिए आरोपित ने कुछ एजेंट भी नियुक्त किए थे। अनुमान के मुताबिक जमा की गई राशि करोड़ों में हो सकती है।

अब तक लगभग 170 लोगों ने मोहम्मद फ़ैज़ी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फ़ैज़ी ने नगीना स्थित अपने घर को बेच दिया है और विदेश भाग गया। शनिवार (15 जनवरी) को फ़ैज़ी के ऑफिस की तलाशी के दौरान पुलिस को बैंक ऑफ़ बड़ौदा के बैनर बरामद हुए हैं। ऑफिस के बाहर बैंक ऑफ़ बड़ौदा का कस्टमर केयर बोर्ड भी मिला है। कुछ पड़ोसियों का कहना है कि फ़ैज़ी कुछ सालों से बैंक ऑफ़ बड़ौदा का ग्राहक सेवा केंद्र भी चला रहा था। इसी की आड़ में उसने कई लोगों को मुस्लिम फंड में पैसे जमा करने का प्रलोभन दिया था।

घटना के लगभग 6 दिन बीत जाने के बाद पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस ने अदालत से सर्च वारंट ले कर फ़ैज़ी के ऑफिस की तलाशी ली। कुछ जरूरी सामन कब्ज़े में ले कर ऑफिस कर दिया गया है। कुछ मीडिया संस्थानों का दावा है कि दिल्ली पुलिस की एक टीम फ़ैज़ी की तलाश में दिल्ली एयरपोर्ट भी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय थाना प्रभारी नगीना कृष्ण मुरारी ने फ़ैज़ी और एक अन्य पर IPC की धाराओं में केस दर्ज कर के 2 लोगों को हिरासत में रख कर पूछताछ करने की बात कही है।

पूछताछ के लिए बुलाया था एजेंटों को – SHO नगीना

ऑपइंडिया ने नगीना थाना प्रभारी से बात की। उन्होंने बताया, “एजेंटों को फ़ैज़ी के बारे में जानकारी के लिए बुलाया गया था। थाने से ही पूछताछ के बाद पहले ही दिन उन्हें वापस जाने दिया गया था। मुख्य आरोपित फ़ैज़ी है जिसकी तलाश की जा रही है।”

पुलिस टीम नहीं गई थी दिल्ली एयरपोर्ट – DSP नगीना

ऑपइंडिया ने इस खबर की पुष्टि के लिए बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र के डिप्टी SP से बात की। उन्होंने बताया, “कोई भी पुलिस टीम दिल्ली एयरपोर्ट नहीं गई थी। आरोपित के विदेश भागने की आशंका की कोई आधिकारिक इनपुट भी नहीं है। हमने हर पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लिया है। हम आरोपित की तलाश कर रहे हैं। उसके बारे में जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। शायद कुछ मीडिया संस्थानों ने फ़ैज़ी की संस्था में काम करने वाले एजेंटों की गिरफ्तारी की बात कही है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। एजेंट सैलरी पर मात्र कम्पनी के स्टाफ भर थे। उनका इस मामले में ऐसा कोई दोष अभी तक निकल कर सामने नहीं आया है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए।””

DSP सुमित शुक्ला ने ऑपइंडिया को बताया, “आरोपित फ़ैज़ी है, जिसकी तलाश की जा रही है। उसकी संस्था कानपुर के चिटफंड ऑफिस से रजिस्टर्ड थी। वो लगभग 5 साल से नगीना और आसपास के इलाकों में इसे ऑपरेट कर रहा था। अब तक की जाँच में ऐसे कोई बड़े नाम नहीं सामने आए हैं, जिनके पैसे लाखों या करोड़ों में हों। अधिकतर शिकायतकर्ताओं द्वारा उनके द्वारा जमा पैसों के प्रमाण भी नहीं दिए गए हैं। फरार आरोपित फ़ैज़ी के बैंक खातों की भी जाँच में कोई इतना अधिक पैसा नहीं मिला, जितना कि कुछ लोगों ने सनसनी फैलाई। कुछ मीडिया संस्थानों में आरोपित द्वारा घर बेचने की बात लिखी गई। जब हम जाँच करने पहुँचे तो वहाँ कोई खरीदार ही नहीं मिला।”

क्या है मुस्लिम फंड

इस्लामी कानूनों (शरीयत) में जमा-पूँजी पर ब्याज कमाना गैर-इस्लामी करार दिया जाता है। इसी के चलते कई मुस्लिम परिवार बैंकों में पैसा जमा नहीं करते। इन लोगों को ऐसे संस्थानों की तलाश रहती है, जो ब्याज फ्री हों। इसी सुविधा को दिलाने के नाम पर कुछ निजी संस्थाएँ सक्रिय हैं। इन्हें ही मुस्लिम फंड बैंक कहा जाता है।

बिजनौर जिले में मुस्लिम आबादी 43% से भी ज्यादा है। इसके साथ ही आसपास के जिलों में भी मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। आरोप है कि आरोपित मोहम्मद फ़ैज़ी ने अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड नाम की संस्था ने कई लोगों को विश्वास में लिया और उनके पैसे जमा करवाए।

‘सेक्स करो, मार्क्स पाओ’: हसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का ‘सेक्स फॉर ग्रेड’ स्कैंडल, छात्राओं को किया जाता था ब्लैकमेल

अफ्रीका (Africa) के इस्लामी देश मोरक्को (Moracco) के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को छात्राओं को सेक्स के बदले अच्छे ग्रेड (Sex For Grade) के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई है। बुधवार (12 जनवरी, 2022) को अदालत ने आरोपित प्रोफेसर को छात्राओं के खिलाफ अश्लील बर्ताव, यौन शोषण और हिंसा के मामले में दोषी पाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामला मोरक्को के सेटेट (Settat) शहर में स्थित हसन आई विश्वविद्यालय (Hassan I University) का है। इस विश्वविद्यालय के लॉ और अर्थशास्त्र विभाग का प्रोफेसर लंबे समय से छात्राओं को अच्छे नंबर देने के बदले सेक्स करने के लिए ब्लैकमेल कर रहा था। इसमें उसके अलावा 4 अन्य प्रोफेसर भी शामिल हैं।

मोरक्को के लोकल टीवी चैनल 2एम ने गुरुवार (13 जनवरी 2022) को एक रिपोर्ट में बताया कि ‘सेक्स-फॉर-ग्रेड’ स्कैंडल के आऱोपित चार अन्य प्रोफेसरों को 24 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। मोरक्को वर्ल्ड न्यूज के अनुसार, सितंबर 2021 में आरोपित प्रोफेसरों और छात्रों के बीच लीक हुई बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इसमें प्रोफेसरों ने कथित तौर पर ‘अच्छे ग्रेड’ के बदले में छात्राओं को उनके साथ सेक्स करने के लिए कहा था।

इस सेक्स फॉर ग्रेड स्कैंडल के सामने आने के बाद हसन विश्वविद्यालय के कानून और अर्थशास्त्र के संकाय के डीन ने नवंबर 2021 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

हालाँकि, एक शिकायतकर्ता ने 70,000 दिरहम (14,17,661.34 रुपए) के मुआवजे के बाद सभी कानूनी कार्रवाइयों से आरोपित को मुक्त कर दिया था।

इस घटना के सामने आने के बाद देश के कोने-कोने से पीड़ित सामने आए और अपने साथ हुई अमानवीयता के बारे में समाज को बताया। इसी क्रम में उत्तर-पूर्वी शहर औजदा की एक पूर्व छात्रा ने भी अपने साथ हुए स्कैंडल के बारे कहा कि नेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट के एक प्रोफेसर ने उसे ओरल सेक्स नहीं करने पर उसका कैरियर तबाह करने की धमकी दी थी। हंगामे के बाद पिछले महीने सरकार ने जाँच शुरू की थी।

इस्लामिक रुढ़िवादी देश मोरक्को में इस तरह के मामलों में यह पहली बार है जब अदालत ने सजा सुनाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मोरक्को में इस तरह की घटनाओं की एक बड़ी श्रृंखला है, जिनकी वजह से मोरक्को के विश्वविद्यालयों की छवि को खासा नुकसान पहुँचा है।

‘अजमेर दरगाह में वीडियो सजदा का तरीका था, ठेस पहुँचाने के लिए नहीं’: नेशनल लेवल जिमनास्ट ने माँगी माफी, शिकायत वापस ली गई

राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 15 सेकंड की रील बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड करने वाली युवती विवादों में है। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल (Viral Video) होने के बाद दरगाह कमेटी ने युवती के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वीडियो में नजर आ रही लड़की का नाम मिशा है। वह नेशनल लेवल की जिमनास्ट है। वीडियो में वह काले कपड़े पहने बॉलीवुड गाने पर जिमनास्टिक करते हुए दिख रही है। 

इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण देते हुए मिशा (Misha) ने दैनिक भास्कर को बताया कि उन्होंने य​ह स्टंट किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मकसद से नहीं, बल्कि सजदा करने के इरादे से बनाया था। मिशा ने इसके लिए माफी माँग ली है, जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत वापस ले ली गई है।

उन्होंने बताया कि अजमेर दरगाह से उनका बहुत जुड़ाव है। वह अपना हर बड़ा काम करने से पहले अजमेर दरगाह पर जरूर जाती हैं। पिछले साल नवंबर में जब वह दरगाह पर गईं तो उन्हें जिमनास्टिक स्टाइल में दरगाह पर सजदा करने का विचार आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह वीडियो दिसंबर में अपलोड किया था, लेकिन जनवरी में इस वीडियो के वायरल होने के बाद दरगाह के लोगों ने मिशा पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

मिशा ने बताया कि वह अभी तक जयपुर, मुंबई, उत्तराखंड, ऋषिकेश की फेमस लोकेशंस पर समरसॉल्ट, बैकफ्लिप, कार्टवील जैसे स्टंट के वीडियो बना चुकी हैं। वह अपने वीडियो के लिए टूरिस्ट लोकेशन को चुनती हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों से कनेक्ट कर सकें। बता दें कि 22 वर्षीय मिशा ने 12 साल की उम्र में जिमनास्टिक की शुरुआत की थी। वह करीब 10 साल से जिमनास्टिक कर रही हैं।

सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर बैठे CM चन्नी के भाई…सोचा चुनाव लड़ेंगे, कॉन्ग्रेस ने टिकट ही नहीं दिया

साल 2022 में होने जा रहे पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करनी शुरू कर दी है। ऐसे में पंजाब से एक बड़ी खबर आई है। पता चला है कि वहाँ कॉन्ग्रेस ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई डॉ मनोहर सिंह को ही टिकट देने से मना कर दिया। अब वो बस्सी पठाना से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

उल्लेखनीय है कि शनिवार (जनवरी 15, 2022) को कॉन्ग्रेस पार्टी ने 86 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में चन्नी के भाई का नाम नहीं था जबकि पहले कहा जा रहा था कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिहाज से ही कुछ समय पहले सरकारी नौकरी से वीआरएस लिया फिर भी जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्हें धक्का लगा।

कथिततौर पर जिस सीट पर डॉ मनोहर सिंह को टिकट चाहिए थी उस पर नवजोत सिंह सिद्धू का कोई करीबी उतारा गया है। इस फैसले के पीछे वजह बताई गई है कि चन्नी के भाई मनोहर सिंह का टिकट एक परिवार-एक टिकट के नियम के कारण खारिज हुआ। अभी तक स्वयं सीएम चन्नी की इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

हालाँकि मनोहर सिंह ने इस विषय पर कहा है, “मैं अपने भाई से आज सुबह भी मिला। मैंने उनसे कहा कि मुझे जनता के साथ जाना है और वे चाहते हैं कि मैं निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ूँ। परिवार की ओर से कोई दबाव नहीं है; मेरा निर्णय केवल जनता की इच्छा और जनता की सेवा करने की मेरी इच्छा पर आधारित है।”

बता दें कि पंजाब कॉन्ग्रेस में चल रही खींचतान के कारण कई नेता पार्टी से नाराज हैं। इसी क्रम में मोगा सीट से कॉन्ग्रेस विधायक हरजोत कमल भी बीजेपी में शामिल हुए हैं। हरजोत का यह फैसला पंजाब कॉन्ग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी किए जाने के बाद आया है। इसमें पार्टी ने कमल समेत 4 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दी थी। मोगा सीट पर सोनू सूद की बहन मल्विका सूद को उतारा गया है। इस पर कमल ने कहा,  “उनकी क्या योग्यता है? वह केवल सोनू सूद की बहन हैं।”

‘गोद लिए बच्चे वारिस नहीं हो सकते, संपत्ति में भी अधिकार नहीं’: देवबंद का विवादित फतवा, NCPCR ने अधिकारियों से माँगी एक्शन रिपोर्ट

इस्लामिक संगठन दारुल उलूम देवबंद द्वारा गोद लिए गए बच्चों को लेकर आपत्तिजनक फतवा जारी करने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। देवबंद ने अपने फतवे में कहा है कि गोद लिए गए बच्चे को शरिया का पालन करना होगा और उन्हें असली बच्चे जैसे अधिकार नहीं दिए जा सकते।

साथ ही इस आयोग ने इस तरह के फतवे को कानून के खिलाफ बताते हुए सहारनपुर के जिलाधिकारी को भी कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ ही पत्र की प्रति को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी है। आयोग ने पत्र में 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।

एक व्यक्ति द्वारा दी गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग ने इस पर सहारनपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर फतवे का जिक्र किया है। पत्र में फतवे से संबंधित देवबंद की वेबसाइट और उसके 10 लिंक भी दिए गए हैं। इनमें बच्चों से संबंधित तमाम प्रश्नों के उत्तर फतवे के रूप में दिए गए हैं। आयोग ने इस पर कार्रवाई करने के लिए कहा है।

आयोग की ओर से दी गई नोटिस में आगे कहा गया है कि इनमें ऐसे फतवे हैं जो स्कूल, बुक सिलेबस, कॉलेज यूनिफॉर्म, गैर-इस्लामिक माहौल में बच्चों की शिक्षा, लड़कियों की मदरसा शिक्षा, शारीरिक दंड देने आदि से संबंधित हैं। इसकी जाँच करने पर पता चला कि इनमें बच्चों के अधिकारों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। एक फतवे में कहा गया है कि शिक्षकों को बच्चों को पीटने की अनुमति है। हालाँकि, कानूनन स्कूलों में शारीरिक दंड पर रोक है।

एक फतवे में कहा गया है कि गोद लिए गए बच्चे का अधिकार असली बच्चे के समान नहीं होगा। उसे संपत्ति में कोई अधिकार नहीं मिलेगा और ना ही उसे किसी मामले में वारिस बनाया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि सिर्फ गोद ले लेने से वास्तविक बच्चे का अधिकार उस पर लागू नहीं हो जाते। परिपक्व होने के बाद उसे शरिया का पालन करना होगा।

आयोग ने कहा कि इस तरह के फतवे देश के कानून को गुमराह करने वाले हैं और साथ में अवैध भी हैं। उसने कहा कि देश का संविधान बच्चों के मौलिक अधिकारों के साथ-साथ समानता के अधिकार और शिक्षा के अधिकार का प्रावधान करता है। आयोग ने कहा कि इस तरह के फतवे हेग कन्वेंशन का उल्लंघन है, जिसका भारत हस्ताक्षरकर्ता है। हेग कन्वेंशन के अनुसार, जैविक बच्चों और गोद लिए गए बच्चों के समान अधिकार होंगे। इनमें किसी तरह का अंतर नहीं किया जा सकता।

‘आँखों में आँसू लेकर मेरे बगल में बैठे थे…’: टेस्ट कप्तानी से विराट कोहली के इस्तीफे पर बोलीं अनुष्का – मैदान से बाहर थी चुनौतियाँ

विराट कोहली द्वारा भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम की कप्तानी से इस्तीफे के बाद उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर दो तस्वीरें भी शेयर की, जिसमें से एक में विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट की ड्रेस में हँसते हुए दिख रहे हैं, जबकि दूसरे में वो अपने पति को किस कर रही हैं और वो सेल्फी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब भी उन्हें वो दिन याद है, जब विराट कोहली ने बताया था कि एमएस धोनी के रिटायरमेंट के फैसले के बाद उन्हें भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है।

अनुष्का शर्मा ने बताया कि उस दिन जब वो और उनके पति मौजूद थे, तब एमएस धोनी ने मजाक में बोला था कि अब विराट कोहली की दाढ़ी तेजी से सफ़ेद होनी शुरू हो जाएगी। बकौल अनुष्का शर्मा, इस बात पर वो तीनों खूब हँसे थे। अनुष्का शर्मा ने कहा कि उन्होंने उस दिन के बाद से विराट कोहली के भीतर दाढ़ी के सफ़ेद होने से बहुत कुछ ज्यादा देखा है। 2018 में आई फ़िल्में ‘जीरो’, ‘सूई-धागा’ और ‘संजू’ की अभिनेत्री ने कहा कि मैंने उनके भीतर और आसपास विकास देखा है, असीमित विकास।

33 वर्षीय अनुष्का शर्मा ने कहा, “भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में विराट कोहली के विकास और उनके नेतृत्व में टीम की उपलब्धियों पर मुझे गर्व है। लेकिन, उनके अनादर हुए विकास पर मुझे ज्यादा गर्व है। 2014 में हम काफी युवा थे और नौसिखिए थे। हम सोचते थे कि अच्छे इरादे, सकारात्मक सोच और लक्ष्य हमें जीवन में आगे ले जा सकते हैं। हाँ, ऐसा होता तो है लेकिन चुनौतियों के बिना नहीं। इनमें से अधिकतर चुनौतियाँ जिनका विराट कोहली ने सामना किया, वो मैदान से बाहर की थीं।”

अनुष्का शर्मा ने आगे लिखा कि यही तो ज़िंदगी है, जो आपके इम्तिहान वहाँ ज्यादा लेती है जहाँ आपको उम्मीद नहीं हो, लेकिन सबसे ज्यादा ज़रूरत वहीं होती है। उन्होंने विराट कोहली को ‘मेरा प्यार’ कह कर सम्बोधित करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने अच्छे इरादों की राह में सभी बाधाओं को पार किया। उन्होंने कहा कि जीत के लिए विराट कोहली ने अपना सब कुछ दिया और उन्हें याद है कि हार के समय उनकी आँखों में आँसू होते थे और वो सोचते थे कि काश मैं कुछ और कर पाता।

अनुष्का ने लिखा, “दिखावे से तुम्हें नफरत है और यही मुझे और तुम्हारे फैंस को तुम्हारा कायल बनाता है। तुम्हारे इरादे हमेशा स्वच्छ रहे और उनमें चापलूसी नहीं थी। ये मेरा सौभाग्य है कि मैंने तुम में वो सब देखा, जो केवल आँखों से नहीं दिखता है। हाँ, तुम परफेक्ट नहीं हो और कुछ खामियाँ हैं, लेकिन तुमने कभी उन्हें छिपाने की कोशिश नहीं की। तुमने कभी लालच का साथ नहीं दिया। इन 7 वर्षों में तुम्हारे भीतर जो चीजें विकसित हुईं, उनसे हमारी बेटी भी सीखेगी।”

बता दें कि अपने इस्तीफे वाले बयान में

विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद देते हुए कहा था कि इस गाड़ी के इंजन वही लोग थे और उन्हीं के कारण टेस्ट क्रिकेट में भारत और आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि इस सपने को धरातल पर उतारने के लिए इन लोगों ने बड़ा किरदार अदा किया है। विराट कोहली ने अंत में अपने पूर्ववर्ती महेंद्र सिंह धोनी को भी धन्यवाद देते हुए कहा था कि उन्होंने उनमें विश्वास जताया और उन्हें इस लायक समझा, कि वो भारतीय क्रिकेट को आगे लेकर जा सकें।

‘गोरखपुर से भाग रहे हैं योगी’ से लेकर ‘गोरखपुर ही क्यों’ तक: BJP के फैसले के बाद यूँ पलटे अभिसार-आशुतोष, लोगों ने कहा – चित भी मेरी…

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ किस क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरेंगे ये कुछ दिन पहले तक एक बहुत बड़ा सवाल बना हुआ था। कुछ लोग अयोध्या सीट को लेकर कयास लगा रहे थे कि संभव है कि वहाँ बीजेपी ने इतना काम करवाया है तो योगी आदित्यनाथ वहीं से अपनी किस्मत आजमाएँ। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ और कल की घोषणा के साथ ये साफ हो गया कि योगी आदित्यनाथ अपनी पुरानी सीट गोरखपुर से ही चुनावी मैदान में उतरेंगे। 

इस ऐलान के साथ जहाँ गोरखपुर के लोगों में उत्साह देखने को मिला। वहीं लिबरल धड़े की हिपोक्रेसी भी सामने आई। जो लोग कुछ दिन पहले लंबी-लंबी वीडियोज से आपको ये समझा रहे थे कि आखिर क्यों योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाग रहे हैं। वहीं अब उनकी रिपोर्ट हो रही है कि आखिर गोरखपुर से ही योगी आदित्यनाथ क्यों चुनाव लड़ेंगे। इस लिस्ट में अभिसार शर्मा और आशुतोष जैसे पत्रकारों का नाम है। लोग इनकी हिपोक्रेसी देखकर इन्हें ‘द%^ला यूट्यूबर’ कह रहे हैं। इनकी वीडियोज शेयर करके लिखा रहा जा रहा- ‘चित भी मेरी, पट भी मेरी और…’

अभिसार शर्मा जो पहले कह रहे थे कि बीजेपी अयोध्या से योगी को इसलिए चुनाव लड़वा रही है क्योंकि उन्हें लगता है कि जीत का रास्ता सिर्फ कट्टर हिंदुत्तव से ही होकर जाता है। वही अभिसार शर्मा बाद में अपने दर्शकों को ये समझाते नजर आए कि एक तो अयोध्या में समाजवादी पार्टी मजबूत हो रही है इसलिए योगी आदित्यनाथ यहाँ से चुनाव नहीं लड़ रहे और दूसरी बात ये है कि अयोध्या में पिछले दिनों जितने भी कार्यक्रम हुए वहाँ नरेंद्र मोदी ही नजर आ रहे थे इसलिए अब वो नहीं चाहते हैं कि इन कार्यों का श्रेय किसी और को जाए। वह कहते हैं कि अगर सीएम योगी वहाँ से चुनाव लड़ते और जीत जाते तो हो सकता है कि पीएम मोदी को राम मंदिर का सारा श्रेय अपने सीएम के साथ शेयर करना पड़ता।

इसी तरह ‘आशुतोष की बात’ एपिसोड में पहले इस बात पर पैनेलिस्ट बुलाकर चर्चा हुई कि आखिर क्यों योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से क्यों भाग रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या गोरखपुर से चुनाव लड़ने से हिंदुत्व की लहर नहीं खड़ी होगी। क्या सिर्फ अयोध्या से ही इस लहर को कायम किया जा सकेगा। आशुतोष के मुताबिक दो दिन पहले तक लोगों का कहना था कि गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की हार का खतरा है इसलिए वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते। अब यही आशुतोष अपने हालिया एपिसोड में ये समझाते दिखे थे कि आखिर क्यों वो और उनके जैसे लोग ये मान रहे थे कि योगी अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे।

बता दें कि एक ओर जहाँ गोरखपुर सीट पर सीएम योगी के नाम का ऐलान होने के बाद लिबरल मीडिया अपने अपने ढंग से अपने पुराने प्रोपगेंडा को जस्टिफाई करने के लिए विभिन्न तर्क दे रही है, वहीं सपा के अखिलेश यादव भी इस खबर को सुनकर बयानबाजी करने में पीछे नहीं हैं। गोरखपुर सीट से सीएम योगी को टिकट मिलने के ऐलान के बाद उन्होंने कहा, “कभी कहते थे मथुरा से लड़ेंगे, कभी कहते थे अयोध्या से लड़ेंगे… मुझे ख़ुशी है कि BJP ने पहले ही उनको अपने घर भेज दिया। अब लगता है कि उनको गोरखपुर में ही रहना पड़ेगा उनको वहाँ से वापस आने की ज़रूरत नहीं उनको बधाई।”