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टेक्सास में 4 लोगों को बंधक बनाने वाले को पुलिस ने मार गिराया: ‘लेडी अल-कायदा’ आफिया सिद्दीकी की रिहाई की कर रहा था माँग

अमेरिका के टेक्सास (Texas) में यहूदियों के धार्मिक स्थल सिनेगॉग (synagogue) में बंधक (Hostage) बनाए गए चार लोगों को छुड़ा लिया गया है। वहीं, बंधक बनाने वाले को मार गिराया गया है। हालाँकि, उसकी पहचान को उजागर नहीं किया गया है। इन बंधकों में एक रब्बी (यहूदी धर्मगुरू) भी शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंधक बनाने वाले ने पाकिस्तान की आतंकवादी आफिया सिद्दीकी को रिहा करने की माँग की थी। आफिया सिद्दीकी को पाकिस्तान का वैज्ञानिक बताया जा रहा है, जो अमेरिकी सेना के अधिकारी की हत्या के आरोप में अमेरिका की एक जेल में बंद है।

जानकारी के मुताबिक, बंधक बनाने वाला व्यक्ति खुद को आफिया सिद्दीकी का भाई बता रहा है। अमेरिकी प्रेस सचिव जेन साकी ने ट्वीट कर बताया कि राष्ट्रपति जो बिडेन (Joe Biden) को इस संबंध में जानकारी दे दी गई है और उनकी एक टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। FBI और स्वाट टीम घटनास्थल पर मौजूद है। अमेरिकी पुलिस के मुताबिक, सिनेगॉग के अंदर घंटों तक बंधक बनाए गए लोगों में से एक को सही सलामत छोड़ दिया गया है। अन्य बंधकों को रिहा कराने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है, लेकिन यह पता नहीं चल पाया है कि बंधक बनाने वालों के पास किस तरह के हथियार हैं। वहीं, इजरायल भी इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।

इजराइल के प्रवासी मामलों के मंत्री नचमन शाई ने शनिवार (15 जनवरी 2022) को एक ट्वीट में कहा, “इजराइल यहूदी लोगों के बंधक बनाए जाने की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हम उनके सुरक्षित लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं।”

“बंधक बनाने वाला आफिया का भाई नहीं”

आफिया सिद्दीकी के भाई के वकील का कहना है कि बंधक बनाने वाला आफिया का भाई नहीं है, कई मीडिया चैनलों में गलत जानकारी दी जा रही है। वकील ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि उनके मुवक्किल को कानून प्रवर्तन से कॉल आ रहे हैं और वे उन्हें आश्वस्त कर रहे हैं कि वह बंधकों में शामिल नहीं हैं और वह शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी बहन को आजाद कराने की कोशिश कर रहे हैं।

कौन है आफिया सिद्दीकी?

पाकिस्तान की आफिया सिद्दीकी (Aafia Siddiqui) को लेडी अल-कायदा के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2010 में सिद्दीकी को 14 दिनों की जाँच के बाद न्यूयॉर्क सिटी फेडरल कोर्ट ने अमेरिकी सैन्यकर्मियों हत्या का दोषी ठहराया था। वह वर्तमान में टेक्सास के फोर्ट वर्थ में फेडरल मेडिकल सेंटर, कार्सवेल में 86 साल की सजा काट रही है। बताया जाता है कि आफिया सिद्दीकी एक पाकिस्तानी वैज्ञानिक (न्यूरोसाइंटिस्ट) है, जिसने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक और ब्रैंडिस विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।

महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के मामले में नरसिंहानन्द हरिद्वार में गिरफ्तार: जितेंद्र त्यागी (वसीम रिज़वी) की रिहाई के लिए कर रहे थे अनशन

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानन्द गिरि (Yati Narsinhanand Giri) को उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार (Haridwar) में गिरफ्तार कर लिया है। वो सर्वानंद घाट कर जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व वसीम रिज़वी) की गिरफ्तारी के विरोध में अनशन पर थे। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) ने की है। यह गिरफ्तारी 15 जनवरी (शनिवार) को रात लगभग 9 बजे हुई है।

उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, “हरिद्वार धर्म संसद में हेट स्पीच की जाँच SIT द्वारा करवाई जा रही है। इस मामले में 5 लोगों को चिन्हित किया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। कुछ न्यूज़ चैनलों द्वारा 5 लोगों की गिरफ्तारी बताई जा रही है, जो गलत है।”

हरिद्वार पुलिस के प्रवक्ता ने एक स्थानीय मीडिया को बताया, “हाँ उनकी (यति नरसिंहानन्द) गिरफ्तारी की गई है। यति नरसिंहानन्द बार-बार अपराधों को दोहराते जा रहे थे। उन पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की गई है। अभी कुछ दिन पहले उन्होंने एक वीडियो में कुछ विशेष महिलाओं के खिलाफ अभद्र शब्दों का प्रयोग किया था। उसमें भी उनके खिलाफ एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है। मैं हर चीज मीडिया में नहीं बता सकता।”

यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की सूचना पर हरिद्वार कोतवाली शहर के आगे उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। रात में उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। लाठियों को भांजा गया जिससे भीड़ तितर बितर हुई। एक अन्य वीडियो में स्थानीय SHO को यति नरसिंहानन्द के समर्थकों से ये कहते सुना जा सकता है, “लाठी भी बजेगी।”

‘संवैधानिक शासन में इस्लाम को कहाँ रखना है, तय करना होगा’: पाकिस्तान के जस्टिस ने कहा- दीन के प्रति वफादारी सबसे बड़ी बाधा

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद ने प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि देश के विकास में दीन के प्रति वफादारी सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि देश में संवैधानिक व्यवस्था को ढंग से लागू करने और शासन को सुचारू रूप से चलाने के बजाय इस्लाम को ज्यादा जगह देने और उसे स्थापित करने की कोशिश की गई।

इसके अलावा, न्यायमूर्ति आसिफ सइद खोसा ने कहा कि मुल्क को तय करना होगा कि इस्लामी शासन में सरकार की क्या भूमिका थी और वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था और शासन में इस्लाम को कहाँ रखना है। उन्होंने कहा कि मुल्क में सामने आने वाले मुद्दों की पहचान नहीं की गई तो मुल्क में असुरक्षा बनी रहेगी। पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ के अनुसार, उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बाधा विकास की थी, क्योंकि समाज की निष्ठा मुल्क की तुलना में अपने कबीले या जनजाति के प्रति थी। इसी तरह की प्रवृत्ति विधिज्ञ वर्ग सहित विभिन्न संस्थानों में भी बढ़ रही है। 

जस्टिस अहमद ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था और शासन के प्रतिमान के रूप में इस्लाम को स्थापित किए जाने के प्रयासों के कारण अदालत में छोटे-छोटे मुद्दों याचिकाओं की भरमार होती जा रही है, लेकिन नागरिक अधिकारों को लागू करने की क्षमता नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन्हीं सब स्थितियों के कारण मुल्क में गरीब और असहाय लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उन्हें कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुल्क में स्थिति ये हो गई है कि सड़कों की सफाई, कूड़ा उठाने जैसी-जैसी छोटी बातों के लिए अदालत पहुँचा जा रहा है, जबकि ये सरकार के बुनियादी कार्य हैं। किसी भी सरकार की ये पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन इमरान खान की सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

मुख्य न्यायाधीश गुलजार ने कहा कि मुल्क में संविधान को सार्वजनिक जीवन के सभी पहलुओं पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आसपास की स्थिति पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करने का काम दिया गया है कि संविधान को सही मायने में लागू किया गया है नहीं।

‘पैसा और पॉवर जीत गया’: पादरी फ्रेंको मुलक्कल के रेप केस में बरी होने पर महिलाएँ दुःखी, जाँच टीम ने कहा – समझ से परे है फैसला

नन बलात्कार मामले में केरल के रोमन कैथोलिक चर्च के बिशप फ्रेंको मुलक्कल (Roman Catholic Bishop Franco Mulakkal) को कोर्ट से बरी करने के बाद प्रमुख हस्तियों और लोगों को प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। वे कोर्ट के फैसले से खासा आहत हैं। पिछले 3-4 वर्षों से पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटीं अनुपमा कोर्ट के फैसले से बेहद निराश हैं। कुराविलंगड में अपने कॉन्वेंट के बाहर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पैसे और पॉवर की जीत हुई है। कोर्ट के फैसले से हम सबको दुख पहुँचा है। हम इस फैसले पर विश्वास नहीं कर सकते।”

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा (Rekha Sharma) ने भी इस फैसले पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “केरल अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय के फैसले से हैरान हूँ। पीड़िता को उच्च न्यायालय जाना चाहिए। न्याय की इस लड़ाई में एनसीडब्ल्यू उनके साथ है।”

अभिनेत्री रीमा कलिंगल भी कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुराविलंगाडु की ननों की एक तस्वीर हैशटैग ‘अवलकोप्पम’ के साथ साझा की है। वहीं पार्वती थिरुवोथु ने नन की तस्वीर के साथ अपने फेसबुक पेज पर ‘ऑलवेज विद हर’ लिखा है।

जाँच टीम को झटका

यह फैसला अभियोजन पक्ष, जाँच दल और शिकायतकर्ता के लिए चौंकाने वाला है। मीडिया को जवाब देते हुए, स्पेशल पब्लिक प्रोसेक्यूटर जितेश जे बाबू ने कहा कि इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि किस आधार पर कोर्ट ने इस मामले को खारिज किया है।” इस मामले की जाँच कर रहे कोट्टायम (Kottayam) जिले के पूर्व पुलिस प्रमुख हरिशंकर को भी इस फैसले से निराशा हुई है।

उनके (हरिशंकर) अनुसार, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कोर्ट नन से बलात्कार मामले में ऐसा फैसला सुनाएँगे, क्योंकि अभियोजन पक्ष और जाँच टीमों को इस मामले में 100 प्रतिशत यकीन था कि दोषी बिशप को सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला बलात्कार के मामलों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न फैसलों की अनदेखी करता है। निश्चित रूप से, यह फैसला भारतीय न्यायिक प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। हम इस फैसले को चुनौती देंगे, क्योंकि इस फैसले से समाज में गलत संदेश जा रहा है।

बता दें कि नन से दुष्कर्म के मामले में केरल के रोमन कैथोलिक चर्च के बिशप फ्रेंको मुलक्कल (Roman Catholic Bishop Franco Mulakkal) को कोर्ट ने शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को बरी कर दिया था। इसके पीछे कोर्ट ने पीड़िता के बयानों में समानता का नहीं होना और आरोपित पर दोष को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं कराने जैसे कई कारणों का हवाला दिया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी गोपाकुमार द्वारा सुनाए गए 289 पन्नों के फैसले के अधिकांश विवरण बाद में सामने आए थे।

‘मैं बलात्कार के बदले बलात्कार के सिद्धांत में विश्वास रखता था’: गंदी गालियों के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने पर बोले देवदत्त पटनायक

खुद को ‘हिन्दू माइथोलॉजी’ का विशेषज्ञ कहने वाले देवदत्त पटनायक ने सोशल मीडिया पर बकी अपनी गालियों के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने पर अजीबोगरीब तरीके से माफीनामा जारी किया है। उन्होंने कहा कि कई लोग उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स लगातार शेयर कर रहे हैं, जिनमें उन्होंने गंदे और नारी विरोधी शब्दों का प्रयोग किया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ‘निष्ठुर और विषैले ट्रोल्स’ के खिलाफ उन्होंने ये शब्द कहे थे। देवदत्त पटनायक ने कहा कि वो हैरान हैं कि उन्होंने कभी ऐसे शब्द लिखे थे और कई बार इनका बचाव भी किया।

उन्होंने 20वीं सदी के एक भारतीय चिंतक और स्वतंत्रता सेनानी का नाम लेते हुए कहा कि वो उनसे प्रेरित होकर ‘बलात्कार के बदले बलात्कार’ वाली थ्योरी में यकीन कर के चल रहे थे। उन्होंने कहा कि वो तब उक्त चिंतक की पुस्तकें पढ़ रहे थे। साथ ही उन्होंने का कि वो इन चिंतक के सभी नहीं तो कुछ क्षमताओं से खासे प्रेरित हैं, जैसे हिन्दू के नए शब्दों का ईजाद करना। इसके लिए उन्होंने फ़ारसी/उर्दू के ‘शहीद’ की जगह ‘हुतात्मा’ के प्रयोग का उदाहरण दिया।

देवदत्त पटनायक ने कहा कि पुरानी कहावत में हम एक आँख के बदले एक आँख वाली थ्योरी में विश्वास रखते थे। साथ ही उन्होंने कहा कि नई कहावत में जीसस क्राइस्ट ने एक गाल के बाद दूसरा गाल आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गाँधी ने इसी सिद्धांत पर विश्वास किया। बकौल देवदत्त पटनायक, उक्त स्वतंत्रता सेनानी और चिंतक ने पुराने सिद्धांत पर विश्वास किया और बलात्कार को एक ‘राजनीतिक हथियार’ के रूप में देखा।

देवदत्त पटनायक का दावा है कि उक्त चिंतक ने मुस्लिम महिलाओं की इज्जत करने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज तक की निंदा की और कहा कि कहा कि मुस्लिम पुरुषों ने हिन्दू महिलाओं का सम्मान नहीं किया। देवदत्त पटनायक के अनुसार, उक्त राष्ट्रवादी चिंतक ये विश्वास करते थे कि राम की दया भावना और कुलीनता से अच्छा है रावण की बदला लेने वाली दुष्ट भावना। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत घृणास्पद है, लेकिन इसे समझने में समय लगता है।

देवदत्त पटनायक ने लिखा, “कुछ लोग कहते हैं कि उक्त चिंतक ने ऐसा नहीं लिखा है, इसे गलत तरीके से समझा गया है। लेकिन, बाजार में उपलब्ध किताबें स्पष्ट कहती हैं कि उन्होंने बलात्कार को राजनीतिक हथियार के रूप में देखा। मुझे ये कुछ समय के लिए ठीक लगने लगा। शैतानी आत्माएँ? इसीलिए, मैंने अपने दिवंगत माता-पिता को गाली देने वाले और मुझे रेप से जन्मा बच्चा बताने वाले ट्रोल्स को ऐसी गालियाँ दी। इतना भड़काए जाने के बाद बिना सोचे प्रयोग में लाए गए इन शब्दों का मुझे पछतावा है।”

देवदत्त पटनायक ने लिखा कि उन्हें और संयम बरतना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वो उक्त चिंतक को उन दिनों में पढ़ने और उनसे प्रेरित होने पर आज अफ़सोस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसा होता है और हम गलतियाँ करते हैं। उन्होंने कहा कि हम कॉकरोच के गुलाम बन जाते हैं, लेकिन तब सरस्वती का हंस नियंत्रण में आता है और सब ठीक होता है। बकौल पटनायक, हमें आगे बढ़ना चाहिए और वो भी माफ़ी माँगते हैं। उन्होंने कहा कि वो उस चिंतक के कई माफीनामों की तरह कई लोग उनके इस माफीनामे को भी नकार देंगे।

‘उस च#@र औरत को माँद से बाहर निकालो’: जब पागल हो गए थे सपाई गुंडे, मायावती पर हमले कर फाड़े थे कपड़े, एक संघी ने जान पर खेल बचाया

राजनीति वो चीज है, जो दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बना देती है। कभी-कभी ये प्रतिद्वंद्वी को दोस्त, फिर उस दोस्त को दुश्मन, इसके बाद उस दुश्मन को दोस्त और फिर दोस्त को प्रतिद्वंद्वी बना देती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण ‘गेस्ट हाउस कांड’ है है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने कभी मिल कर सरकार बनाई थी और इस कांड के कारण दोनों दुश्मन बन गए। ‘मोदी लहर’ को थमने के लिए ढाई दशक बाद फिर दोस्त बने, लेकिन सफलता न मिलने के कारण वापस अलग हो गए।

ऐसे में आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि ये ‘गेस्ट हाउस कांड’ है क्या। आज इस घटना को भले 27 वर्ष हो गए, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति का ये अध्याय कभी पुराना होने का नाम नहीं लेता। अप्रैल 2019 में लोकसभा चुनावों के लिए पचार-प्रसार जोरों पर था, तब सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती का मैनपुरी में एक मंच पर आकर एक-दूसरे की प्रशंसा करना एक बड़ी खबर बन गई, क्योंकि 90 के दशक के मध्य की वो घटना लोगों के जेहन में अब भी हैं।

2 जून, 1995: क्या है ‘गेस्ट हाउस कांड’ और मायावती के साथ क्या हुआ था

90 के दशक का शुरुआत वो समय था जब राम मंदिर के लिए आंदोलन अपने चरम पर था और उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा ने शीर्ष स्थान बनाया हुआ था। 1993 में भाजपा को रोकने के लिए मुलायम सिंह यादव की सपा और कांशीराम की बसपा ने गठजोड़ किया। तब ‘मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ वाला नारा भी इन दोनों दलों ने उछाला था। उत्तराखंड तब उत्तर प्रदेश से कट कर अलग नहीं हुआ था और सीटों की संख्या 422 हुआ करती थीं।

जहाँ सपा ने 256 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, बसपा ने 164 सीटें अपने हिस्से में पाई। चुनाव में इस गठबंधन की जीत हुई। कहा जाता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए दोनों दलों के बीच ढाई-ढाई साल की सहमति बनी थी। विधानसभा में सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिली थीं, ऐसे में पहले मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। लेकिन, मनमुटाव के कारण 2 जून, 1995 को बसपा ने समर्थन वापसी की घोषणा कर दी, जिससे मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गई।

लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस का कमरा नंबर 1 उस समय मायावती का ठिकाना था। सरकार का अल्पमत में आना सपा वालों को रास नहीं आया और पार्टी के विधायक अपने कार्यकर्ताओं के साथ मायावती जहाँ ठहरी थीं, वहाँ कूच कर गए। कमरे में बैठ कर अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहीं मायावती को घेर लिया गया और उन पर हमला कर दिया गया। दोपहर के तीन बजते-बजते समाजवादी पार्टी के नेताओं ने वहाँ अपना कब्ज़ा जमा लिया था।

समाजवादी पार्टी के नेता चिल्ला-चिल्ला कर मायावती को गालियाँ बक रहे थे। बसपा विधायकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन पर ही लात-घुसे बरसने लगे। 5 बसपा विधयकों को घसीटते हुए गाड़ी से मुख्यमंत्री आवास ले जाया गया। मारपीट कर कइयों से कोरे कागज पर ही हस्ताक्षर करा लिया गया। रात भर उन्हें बंदी बना कर रखा गया। वरिष्ठ बसपा नेता आरके चौधरी के साथ मारपीट हुई। वो किसी तरह कमरे में बंद हुए। कुछेक पुलिसकर्मियों को छोड़ दें तो पूरा पुलिस-प्रशासन सपा के साथ था।

अतिथि गृह की बिजली-पानी की सप्लाई काट दी गई थी और तत्कालीन लखनऊ एसएसपी आराम से सिगरेट फूँक रहे थे। मुख्यमंत्री कार्यालय की धमकी थी कि बल प्रयोग न किया जाए। जिला मजिस्ट्रेट ने इसके खिलाफ विरोध जताया तो आधी रात में उनका तबादला कर दिया गया। यही वो घटना थी, जिसने मायावती और मुलायम सिंह यादव को जानी दुश्मन बना दिया था। भाजपा और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। मायावती और उनके साथी नेता कमरे से बाहर निकले को तैयार नहीं थे, ऐसे में उन्हें बार-बार यकीन दिलाना पड़ा कि अब खतरा टल गया है।

भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी: एक संघी ने जान पर खेल कर दलित महिला को गुंडों से बचाया

आज दलितों की बात करने वाली समाजवादी पार्टी तब एक दलित नेता पर हमले को लेकर चुप रहती है। सपा के गुंडों ने मायावती के साथ मारपीट की और उनके कपड़े तक फाड़ डाले। एक महिला की आबरू से खुलेआम खिलवाड़ किया गया। मायावती को एक कमरे में बंद कर दिया गया था। ऐसे में उस उन्मादी भीड़ के बीच भाजपा के विधायक और RSS से जुड़े रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपने बहादुरी का प्रदर्शन किया और वहाँ पहुँच कर मायावती को गुंडों से बचाया।

दबंग नेता की छवि वाले ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने सपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। इसी घटना के बाद से मायावती उन्हें अपना भाई मानने लगी थीं और उनके खिलाफ कभी बसपा ने अपने उम्मीदवार नहीं खड़ा किए। ब्रह्मदत्त द्विवेदी चूँकि प्रशिक्षित संघी थे, उन्हें लाठी चलाना और लड़ाई की कलाबाजियाँ भी बखूबी आती थीं, जिनका उन्होंने सही समय पर इस्तेमाल किया – अपनी जान पर खेल कर। हमेशा भाजपा के खिलाफ रहीं मायावती ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी के लिए चुनाव प्रचार तक किया

ये भी जानने लायक है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी की 10 फरवरी, 1997 को हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी और सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह का नाम सामने आया था। दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। हालाँकि, निचली अदालतों से चलते-चलते ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मायावती इस हत्याकांड के बाद फूट-फूट कर रोई थीं। 1977 और 1985 में फर्रुखाबाद विधानसभा से जीत दर्ज करने वाले द्विवेदी ने 1991, 1993 और 1996 में वहाँ से हैट्रिक भी लगाई थी।

उस हत्याकांड में उनके अंगरक्षक ब्रजकिशोर तिवारी की भी जान चली गई थी। उनकी हत्या के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी प्रभा द्विवेदी को फर्रुखाबाद से उम्मीदवार बनाया था। तब मायावती ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी को ‘शहीद’ बताते हुए उनके लिए लोगों से वोट डालने की अपील की थी। 2017 में भाजपा ने उनके बेटे मेजर सुनील दत्त त्रिवेदी को टिकट दिया और वो यहाँ से जीत कर विधायक बने। ब्रह्मदत्त राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय थे और 1971 में वार्ड संख्या 6 से सभासद चुने जाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

गेस्ट हाउस कांड के 24 वर्षों बाद फिर एक हो गए थे मायावती और मुलायम सिंह यादव

इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, सपा के वरिष्ठ नेता धनीराम वर्मा, मोहम्मद आजम खान और बेनी प्रसाद वर्मा जैसों के खिलाफ 3 मुक़दमे दर्ज किए गए थे। फोटोग्राफर्स की कई तस्वीरें बतौर सबूत पेश की गईं। CB-CID ने इस मामले की जाँच अपने हाथ में ली। सरकारें बदलती रहीं और ये मुकदमा लम्बा खिंचता रहा। लेकिन, 2019 में ‘मोदी लहर’ को रोकने के लिए जब दोनों नेता साथ आए तो मायावती ने ये मुक़दमे वापस ले लिए थे।

हालाँकि, इसके बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों को अच्छे परिणाम नहीं मिले। हाँ, बसपा ज़रूर 2014 के शून्य से 10 पर पहुँच गई। लेकिन, सपा 5 की 5 पर ही अटकी रह गई। भाजपा ने फिर से फिर से 62 सीटें अपने नाम कर ली। परिणाम ये हुआ कि सपा-बसपा का गठबंधन, जिसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ‘बुआ-बबुआ’ भी कहते हैं, टूट गई। अक्टूबर 2020 में ‘बबुआ’ ने ‘बुआ’ को धोखा देते हुए बसपा के 7 विधायकों को तोड़ कर अपनी पार्टी में मिला लिया।

गेस्ट हाउस कांड में जिस तरह के नारे लग रहे थे, उनमें चर्मकार समाज के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ‘ये पागल हो गए है, हमें उन्हें सबक सिखाना होगा’ जैसे आपत्तिजनक नारे भी थे। बसपा विधायकों के परिवारों को खत्म करने की बातें की जा रही थीं। ‘इस च#@र (जातिसूचक, गाली के सन्दर्भ में) औरत को उसकी माँद से घसीट कर निकालो’ जैसी भद्दी और भड़काऊ बातें की जा रही थीं। इसके बाद भाजपा के समर्थन से मायावती की सरकार बनी। उन्होंने एक समिति बना कर जाँच का जिम्मा सौंपा। 74 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र भी दायर हुए।

‘ये क्या नाटक है? यहाँ कोई राजा-महाराजा जा रहा है?’: खुद के लिए ट्रैफिक रुका देख कर गुस्साए CM सरमा, अधिकारियों को फटकारा

अपने काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। जब उन्होंने लोगों को अपने काफिले के कारण परेशानी में देखा तो उतर कर अधिकारियों से कहा, “अरे DC साहब, ये क्या नाटक है? यहाँ कोई राजा-महाराजा जा रहा है? ऐसा मत करो।” सीएम सरमा का ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया, जिसके बाद लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। सीएम सरमा ने वीआईपी कल्चर को लेकर भी आपत्ति जताई है।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को पहले से ही स्पष्ट निर्देश दे रखा है कि वो जब भी किसी इलाके के दौरे पर जाएँ, तो उस कारण से लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद ट्रैफिक रोक दिया गया था, इसीलिए उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने बताया कि लगभग 15 मिनटों तक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को जाम रखा गया, जिनमें एम्बुलेंस भी शामिल थे। सीएम सरमा ने स्पष्ट किया कि ये वीआईपी कल्चर स्वीकार्य नहीं है।

बता दें कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटा चुके हैं। ताज़ा मामले में जब उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को फटकार लगाई, उसके बाद तुरंत ट्रैफिक को खोल दिया गया और लोगों को जाने दिया गया। वो NH-37 के पास स्थित गुमोथागाँव में एक कार्यक्रम में गए थे। वहाँ उन्हें एक सड़क निर्माण की आधारशिला रखनी थी। इस दौरान उन्होंने नगाँव के डीसी को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकार अगर अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो विरोधियों की संख्या बढ़ेगी।

सीएम सरमा ने ये भी दावा किया कि न सिर्फ भाजपा के, बल्कि सभी दलों के विधायकों के साथ उनके अच्छे सम्बन्ध हैं।

‘फिर शुरू होगा किसान आंदोलन’: लखीमपुर खीरी जाएँगे राकेश टिकैत, इस बार सभी जिलों में प्रदर्शन, फूँका जाएगा सरकार का पुतला

किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर से प्रदर्शन करने का फैसला किया है। किसानों ने ऐलान किया है कि वे 31 जनवरी को वादाखिलाफी दिवस के रूप में मनाएँगे। हरियाणा के सोनीपत में शनिवार (15 जनवरी 2022) को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि हरियाणा को छोड़कर किसी भी राज्य में मुकदमे और मुआवजे को लेकर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है, इसलिए हम 31 जनवरी को वादाखिलाफी दिवस के रूप में मनाएँगे।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की ओर से यह भी कहा गया है कि किसान सरकार के पुतले फूँकेंगे और सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) 1 फरवरी को लखीमपुर जाएँगे। उनका आरोप है कि लखीमपुर खीरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बावजूद केंद्र सरकार गृह राज्य मंत्री टेनी को बचा रही है। उन्होंने (राकेश टिकैत) कहा कि मंत्री को बर्खास्त नहीं किया जा रहा। उल्टे लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में किसानों पर धारा-302 के तहत जेल भेजा जा रहा है। लखीमपुर खीरी में जो घटना हुई थी, हम 21 तारीख से वहाँ पर 3-4 दिन के लिए जाएँगे। पीड़ितों से मुलाकात करेंगे, जो किसान जेल में है हम उनसे भी मिलेंगे।

बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध और अन्य माँगों को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर एक साल से अधिक समय तक किसानों ने प्रदर्शन किया। 11 दिसंबर 2021 को किसान नेताओं के आदेशों के बाद सभी किसान दिल्ली की सीमाओं को छोड़कर अपने घरों को लौट गए थे, लेकिन 9 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि 15 जनवरी को सरकार के साथ हुई बातचीत पर किसान एक बार फिर समीक्षा बैठक करेंगे।

‘जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व में वसीम रिजवी) को अदालत से नहीं मिल पाई जमानत’: महंत नरसिंहानंद ने कहा – व्यवस्था में हमारी औकात यही

13 जनवरी को हरिद्वार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व में वसीम रिज़वी) (Wasim Rizvi alias Jitendra Narayan Tyagi) की जमानत आज जिला न्यायालय से नहीं हो पाई है। उन्हें हरिद्वार में हुई धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने अपने फेसबुक अकाउंट से आज 15 जनवरी, 2022 (शनिवार) को दी है।

यति नरसिंहानन्द

जितेंद्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी के बाद से ही यति नरसिंहानन्द लगातार अनशन पर हैं। उनके साथ कई अन्य साधु संत व हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर धरना दे रहे हैं। यति नरसिंहानन्द गिरी का कहना है कि अनशन तभी समाप्त होगा जब जितेंद्र नारायण की रिहाई होगी। धरनास्थल पर पूजा पथ और हवन भी किया जा रहा है।

धरना देते यति नरसिंहानन्द

ऑपइंडिया ने इस मामले में यति नरसिंहानन्द से बात की। उन्होंने बताया, “आज जितेंद्र नारायण त्यागी को जमानत नहीं मिली। इस पूरे मामले में न्यायालय का आदेश अभी मुझे नहीं मिल पाया है। जितेंद्र नारायण की रिहाई तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” धरनस्थल पर मौजूद यति नरसिंहानन्द के एक अन्य सहयोगी ने कहा कि अब परसों फिर से न्यायालय में प्रयास किया जाएगा।

MS धोनी और रवि शास्त्री का नाम लेकर विराट कोहली ने छोड़ी टेस्ट की कप्तानी, कहा – हमेशा 120% दिया, अब सही समय आ गया है

विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि वो दिल से सही समय पर सही निर्णय ले रहे हैं। इस दौरान दिग्गज बल्लेबाज ने BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को इतने लंबे समय तक कप्तानी का मौका देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उन खिलाड़ियों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनके ही शब्दों में उनकी हर सोच को मैदान पर धरातल पर उतारा और कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने कहा कि इन साथियों ने इस यात्रा को और सुंदर और यादगार बना दिया।

विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस गाड़ी के इंजन वही लोग थे और उन्हीं के कारण टेस्ट क्रिकेट में भारत और आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि इस सपने को धरातल पर उतारने के लिए इन लोगों ने बड़ा किरदार अदा किया है। विराट कोहली ने अंत में अपने पूर्ववर्ती महेंद्र सिंह धोनी को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने उनमें विश्वास जताया और उन्हें इस लायक समझा, कि वो भारतीय क्रिकेट को आगे लेकर जा सकें।

इस्तीफे की घोषणा करते हुए विराट कोहली ने कहा, “ये सात वर्षों की मेहनत, रोज -रोक कड़े परिश्रम और सतत दृढ़ता का परिणाम है कि टीम सही दिशा में जा रही है। मैंने पूरी ईमानदारी के साथ ये कार्य किया है। मैंने कुछ भी छोड़ा नहीं। एक जगह पर आकर सभी चीजों को रुकना पड़ता है और भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान के रूप में मेरे लिए रुकने का यही समय है। इस यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन कभी हमने अपने मेहनत में कमी नहीं की और सोच को पीछे नहीं जाने दिया।”

विराट कोहली ने कहा कि वो हमेशा चीजों में 120% ताकत झोंकने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्हें ऐसा नहीं होता, तब उन्हें लगता है कि ये नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके दिल में पूरी स्पष्टता है और वो अपनी टीम के प्रति कभी बेईमान नहीं हो सकता। बता दें कि हाल ही में विराट कोहली दीवाली के दौरान ‘ज्ञान देने’ पर आलोचना के शिकार हुए थे। T20 विश्व कप के बाद उन्होंने सबसे छोटे फॉर्मेट में भी कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। वहीं वनडे की कप्तानी से उन्हें बोर्ड ने हटा दिया था।