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‘अपनी सरकार आएगी तो बता देंगे’: चालान काटने पर मोहम्मद अशरफ ने पुलिस को धमकाया, बाद में लगा दिया दाढ़ी नोचने का आरोप

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस वालों को धमकी देते हुए एक व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वो पुलिसकर्मी को ‘अपनी सरकार’ आने की धमकी देते हुए देखा जा सकता है। भाजपा नेता संबित पात्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “इन्हीं 20% मानसिकता वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश की 80% जनता की लड़ाई है।” वीडियो में उक्त व्यक्ति कहता दिख रहा है, “जितना हो सके चालान बढ़ाकर काट लेना, सरकार आएगी तो बता देंगे”।

ऑपइंडिया ने इस मामले की पड़ताल की तो घटना 13 जनवरी, 2021 (गुरुवार) के शाम की निकली। वीडियो में धमकी देने वाले युवक का नाम मोहम्मद अशरफ है। वह संभल का ही रहने वाला है। मिली जानकारी के मुताबिक, जिस पुलिस अधिकारी से बदतमीजी दिखाई जा रही है, उनका नाम हरेंद्र सिंह जाट है। हरेंद्र सिंह जाट संभल पुलिस के ट्रैफिक विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं। चंदौसी चौराहे पर चेकिंग के दौरान अशरफ बिना हेलमेट के जा रहा था तब उसे रोका गया। अशरफ़ ने पहले समाजवादी पार्टी के किसी नेता से फोन पर पुलिसकर्मी की बात करवानी चाही। पुलिसकर्मी ने हेलमेट न लगाने पर चालान करने की बात कही तो अशरफ भड़क गया।

इस दौरान सब इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने अशरफ की वीडियो बना ली। वीडियो में अशरफ ने अपने पीछे एक नाबालिग लड़के को भी बिठा रखा है। उसने भी हेलमेट नहीं पहना है। अब संभल पुलिस इस वीडियो का संज्ञान ले कर जाँच कर रही है।

हालाँकि, अशरफ का मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पुलिसकर्मी को धमकाने के बाद अशरफ ने आगे दिन 14 जनवरी (शुक्रवार) को अपनी एक और वीडियो बनाई जिसमें उन्होंने उलटे पुलिस वाले पर ही खुद से साथ मारपीट और दाढ़ी नोचने का आरोप लगा दिया था। इस बाबत उन्होंने मानवाधिकार आयोग को एक पत्र भी लिख डाला था। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘कंगना रनौत के गाल से भी चिकनी सड़कें बनवाऊँगा’: ‘तालिबानी सोच’ वाले कॉन्ग्रेस MLA डॉ इरफ़ान अंसारी की विवादित टिप्पणी

जामताड़ा के कॉन्ग्रेस विधायक डॉक्टर इरफ़ान अंसारी ने अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि फिल्म अदाकारा कंगना रनौत के गाल से भी चिकनी सड़कें वो बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की सड़क पर अब न सिर्फ आदिवासी बच्चे और युवा वर्ग चलेंगे, बलि व्यवसायी भी उपयोग के लिए लाएँगे। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही 14 विश्व स्तरीय सड़कों के निर्माण का कार्य राज्य सरकार शुरू करवाने वाली है।

बता दें झारखंड की गठबंधन सरकार में ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)’ के साथ-साथ कॉन्ग्रेस भी साझीदार है। डॉक्टर इरफ़ान अंसारी ने दावा किया है कि अच्छी सड़कें बन जाएँगी तो जामताड़ा के लोगों को न तो धूल फाँकनी पड़ेंगी और न ही गड्ढों का सामना करना पड़ेगा। विवादित टिप्पणियों के लिए कुख्यात रहे डॉक्टर इरफ़ान अंसारी इससे पहले कोरोना दिशानिर्देशों के खिलाफ लोगों को भड़काते हुए मास्क लगाने के खिलाफ भी विवादित टिप्पणी की थी

नवंबर 2021 में राजस्थान के ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा था कि हेमा मालिनी अब बूढ़ी हो गई हैं, इसीलिए कैटरीना कैफ के गाल जैसे सड़कें बननी चाहिए। दरअसल, झुंझनूं के कॉन्ग्रेस नेता मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गाँव पहुँचे हुए थे, जहाँ उन्होंने ये बयान दिया था। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने तब मंत्रिमंडल फेरबदल किया था, जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया था। गाँव पहुँचे राजेंद्र सिंह गुढ़ा से आम लोगों ने वहाँ की खराब सड़कों को लेकर शिकायत की थी।

सितंबर 2021 में एक और विवादित बयान देते हुए प्रदेश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इरफ़ान अंसारी ने कहा था, “अमेरिकी वहाँ जाकर अफगानिस्तान और तालिबान के साथ ज्यादती कर रहे थे। माँ-बहन, बच्चों तक को तंग कर रहे थे। इसी के खिलाफ यह लड़ाई है। जो कुछ फैलाया जा रहा है, वह गलत है। अगर किसी भी जनता पर जुल्म होगा तो वो उसका समर्थन करेंगे। तालिबान ने अमेरिका को अफगानिस्तान से खदेड़ कर शानदार काम किया है।” भाजपा ने तब इसे ‘तालिबानी सोच’ करार दिया था।

आरिफ खान पर दलित नाबालिग लड़की से कई बार रेप का आरोप, नाम बदल कर की थी दोस्ती: पॉक्सो एक्ट लगाएगी यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के कानपुर में दलित समुदाय की एक नबालिग लड़की ने एक मुस्लिम युवक पर खुद को धमकाने और दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पीड़िता की उम्र 16 साल बताई जा रही है। पीड़िता को बहला फुसला कर नाम व धर्म गलत बताते हुए दिल्ली ले जाने का भी आरोप है। गोविंदनगर थाने में कार्रवाई न होने पर बजरंग दल द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किया गया है। घटना 23 दिसम्बर की बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता 23 दिसम्बर, 2021 को अपने बहनोई के घर से अचानक लापता हो गई थी। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट परिजनों ने गोविन्दनगर थाने में दर्ज करवाई। आरोप है कि पुलिस ने कोई ठोस एक्शन नहीं लिया। 12 जनवरी (बुधवार) को सुबह पीड़िता अपनी बहन के घर खुद पहुँची। वो काफी डरी हुई थी। पता चला कि आरिफ़ खान नाम के आरोपित ने टिल्लू नाम बता उसे शादी का झांसा दिया और बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया था।

दिल्ली में उसके साथ आरिफ ने कई बार दुष्कर्म किया। विरोध करने में धमकी मिलती रही। किसी तरह से वह आरिफ के चंगुल से भागने में सफल रही। पीडि़ता के सफाईकर्मी भाई का आरोप है कि दुबारा पुलिस के पास जाने पर गोविन्द नगर पुलिस ने उन्हें भगा दिया। इस बात की जानकारी होने पर शुक्रवार (14 जनवरी) बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा किया। आख़िरकार पुलिस ने दुबारा तहरीर ली।

ACP गोविन्दनगर विकास कुमार ने इसे प्रेम प्रसंग का मामला बताया है। उनके मुताबिक, “नाबालिग लड़की आरोपित युवक के साथ अपनी मर्जी से गई थी। घटना में ‘लव जिहाद’ जैसा कोई मामला नहीं है। पीड़िता के परिवार वालों की शिकायत पर दुष्कर्म और पॉक्सो आदि की धाराओं में केस दर्ज कर के जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार किया जाएगा।”

थाने में दी गई शिकायत

पीड़िता के भाई द्वारा दिए गए बयान के मुताबिक, “लड़का खुद को हिन्दू बताता था। लेकिन वो मुस्लिम था। मेरी बहन के पास दिमाग कम है। वो उसके बहकावे में आ गई। हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी। हमारी मदद केवल बजरंग दल वालों की।” ऑपइंडिया के पास यह बयान मौजूद है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में शिकायत ले कर थाने गए बजरंग दल के पदाधिकारी दिलीप बजरंगी से बात की। दिलीप बजरंगी ने बताया, “पीड़िता दलित परिवार से है। उसका साथ किसी भी दलित संगठन ने नहीं दिया। वो और उसका परिवार लगभग 4 दिन से प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। उसको भगा दिया जाता रहा। इस बात की जानकारी जब हमें हुई तो हम कई महिलाओं के साथ थाने गए। आज पीड़िता का मेडिकल परीक्षण होगा। पुलिस ने हमें FIR दर्ज कर के कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। आरोपित आरिफ खान पीड़िता के घर से कुछ ही दूर पर चाय की दुकान पर काम करता था। फ़िलहाल वो फरार है।”

पीड़िता के परिजनों के साथ थाने में पुलिस से बहस करते बजरंग दल कार्यकर्ता

गौरतलब है कि साल 2020 में योगी सरकार ने कानपुर जिले में लव जिहाद के मामलों पर जाँच के लिए SIT का गठन किया था। इस पूरे मामले में साजिश और धर्मान्तरण भी आपस में जुड़े पाए गए थे। साजिश का कनेक्शन सोशल मीडिया पर एक्टिव कुछ बाहरी लोगों से भी जुड़ा पाया गया था।

‘अखिलेश यादव ने दलितों को अपमानित किया, उससे गठबंधन नहीं चाहते’: भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया

उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी और भी आर्मी के बीच गठबंधन होने के कयासों पर विराम लग गया है। भीम आर्मी सुप्रीमो चंद्रशेखर आजाद ने शनिवार (15 जनवरी 2022) को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को दलितों की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अकेले चुनाव लड़ेेंगे।

चंद्रशेखर ने कहा, तमाम चर्चाओं के बाद आखिर में मुझे लगा कि अखिलेश यादव इस गठबंधन में दलितों को नहीं चाहते। उन्हें सिर्फ दलित वोट बैंक चाहिए। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों को अपमानित किया। मैंने 1 महीने 3 दिन तक कोशिश की, लेकिन गठबंधन नहीं हो सका।”

चंद्रशेखर ने कहा, “एक आदमी को उतना ही बोलना चाहिए, जितना उसमें हिम्मत हो। मैं भी उतना ही बोलता हूँ, जितना पर टिके रह सकता हूँ। मैं फालतू नहीं बोलता। 20 फीसदी बहुजन समाज को उचित रास्ता दिलाने के लिए हमने अखिलेश जी पर भरोसा किया। छह माह से हमारी बातें हुई, मुलाकात हुई। घोषणा करना अलग है, उस पर टिके रहना अलग बात है।”

इसके पहले चंद्रशेखर ने शुक्रवार (13 जनवरी 2022) को लखनऊ स्थित सपा के कार्यालय जाकर अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इसके पहले गुरुवार (12 जनवरी 2022) को भी सपा के ऑफिस पहुँचे थे। तब चंद्रशेखर ने कहा था कि उनकी पार्टी ने तय किया है कि इस चुनाव में गठबंधन किया जाएगा। चंद्रशेखर ने एकता में बड़ा दम बताया था।

मीडिया में यह बात बहुत जोर-शोर के साथ उठाई जा रही थी कि अखिलेश और चंद्रशेखर के बीच सीट बँटवारे को लेकर बातें लगभग तय हो चुकी हैं और दोनों कभी भी और किसी भी वक्त गठबंधन और सीटों को लेकर ऐलान कर सकते हैं। कुछ ने तो सूत्रों के हवाले से भीम आर्मी को सीटें भी दे दी थीं। हालाँकि, अखिलेश कितना भी दावा करें कि यूपी में छोटे-छोेटे दलों को साथ लेकर वह प्रदेश में भाजपा को रोकने की कोशिश करेंगे, लेकिन चंद्रशेखर के साथ उनका सीट बँटवारे पर विवाद उनके दावे को झूठा साबित करता है।

पंजाब में कॉन्ग्रेस ने 70 उम्मीदवारों की सूची तय की… सिद्धू ने दी हाईकमान को चुनौती, चन्नी-जाखड़ के सीटोंं पर पेंच

पंजाब में विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच खींचातान जारी है। सिद्धू खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करवाने के लिए पार्टी हाईकमान पर दबाव डालते रहे हैं। अब वह पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव और टिकट के बँटवारे में भी अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं।

सिद्धू किसी भी कीमत पर खुद को प्रदेश का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करवाना चाह रह रहे हैंं। इसके लिए वह सार्वजनिक मंचों से अपने बयानों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दबाव की रणनीति के तहत सिद्ध ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “स्वच्छ और स्वच्छ चरित्र, आएगी सिद्धू सरकार, इस बार पंजाब जीतेगा।” इसके पहले वह कह चुके हैं कि बिना दुल्हे का बारात कैस होगी? हाईकमान को सीएम कैंडिटेट का नाम आगे करना चाहिए।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने चन्नी को ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है, लेकिन चन्नी विरोध में शुरू से खड़े सिद्धू को यह बात पच नहीं रही है। वह अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए हाईकमान को सीधी चुनौती दे रहे हैं। कुछ दिन पहले एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस का मुख्यमंत्री हाईकमान नहीं, जनता तय करेगी।

पार्टी सूत्रों के हवाले से न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने कहा कि सिद्धू के बयानों से परेशान कॉन्ग्रेस नेतृत्व चुनावों के कारण चुप है, क्योंकि कार्रवाई के लिए अभी समय नहीं है। पार्टी अभी अपना फोकस चुनावों पर रखना चाहती है। सूत्र का कहना है कि सिद्धू टिकट बँटवारे को लेकर भी खुश नहीं हैं। इसी कारण वह दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, पार्टी नेतृत्व उनसे बात करने के मूड में नहीं है। सिद्धू को पार्टी को एकजुट रखने के लिए काम करने को कहा गया था।

सिद्धू ने यहाँ तक धमकी दे दी थी कि पंजाब का या तो मौजूदा सिस्टम नहीं रहेगा या वो नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा था, “वह उस व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए काम कर रहे हैं जो हमारे गुरु को न्याय नहीं दे सकी और ड्रग गिरोह में शामिल बड़ी मछलियों को दंडित नहीं कर सकी।”

खबर आ रही है कि कॉन्ग्रेस ने पंजाब चुनावों के लिए 70 उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली है। वर्तमान विधायकों और मंत्रियों को अपनी-अपनी सीटों से लड़ने के लिए कहा गया है। वहीं, चन्नी, सिद्धू और बलराम जाखड़ की बीच सीटों को लेकर विवाद जारी है। इन सीटों पर नामों की घोषणा रोक ली गई है। माना जा रहा है कि आज कॉन्ग्रेस किसी भी वक्त इसका ऐलान कर सकती है। हालाँकि, सिद्धू इन नामों से संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। वे टिकट बँटवारे में अपनी मजबूत दखल चाहते थे।

न रेप, न अपहरण… मूक-बधिर पीड़िता मामले में राजस्थान पुलिस: प्रियंका गाँधी के इशारे पर मामले को दबाने का BJP का आरोप

राजस्थान के अलवर में मूक बधिर नाबालिग पीड़िता के साथ हुई दरिंदगी की जाँच के दौरान अलवर पुलिस ने रेप की घटना से इंकार किया है। अलवर पुलिस की SP तेजस्विनी गौतम ने इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया है। IPS तेजस्विनी गौतम ने यह बयान शुक्रवार (14 जनवरी) को दिया।

अपने बयान में अलवर की SP ने कहा, “आज डॉक्टरों के एक एक्सपर्ट पैनल बोर्ड ने, जिन्होंने अस्पताल में बच्ची की सर्जरी भी की है उसमें मेडिकल ज्यूरिस्ट व अन्य एक्सपर्ट हैं, उन्होंने एक रिपोर्ट हमें प्रेषित की। यह रिपोर्ट घावों के प्रकार के बारे में है। हम वह पूरी रिपोर्ट कानूनी आधार पर प्रकाशित नहीं कर सकते। लेकिन उस रिपोर्ट में उन्होंने जो विचार व्यक्त किए हैं, उसमें प्राइवेट पार्ट पर हुए घाव का कारण Penetrative Assault नहीं पाया गया है। तो अभी तक के फैक्ट्स, मेडिकल रिपोर्ट्स और टेक्निकल सबूतों से हमारे पास जो जानकारी है वह ये बताती है कि इसमें दुष्कर्म की संभावना नहीं है।”

अलवर की इन्हीं SP ने घटना के दिन पीड़िता के साथ दुष्कर्म की संभावना जताई थी। अब यही अलवर पुलिस पीड़िता के अपहरण को भी नकार रही है। पुलिस के अनुसार पीड़िता खुद से ही तिजारी ब्रिज पर जाते दिखी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस ऑटो में पीड़िता सवार थी, उसकी भी FSL जाँच में पुलिस को संदेह नज़र नहीं आया। एसपी तेजस्विनी गौतम ने अनुसार, “अंतिम मिला CCTV फुटेज घटना स्थल से 300 मीटर पहले का है। इसमें लड़की लगभग 7:30 बजे चलते दिखाई दे रही।” पुलिस द्वारा जारी एक वीडियो में पीड़िता वारदात वाली जगह से 200 मीटर दूर ओवरब्रिज पर अकेले जाती दिख रही है। फिलहाल पीड़िता का इलाज जयपुर में किया जा रहा है। उनके माता-पिता को मीडिया से दूर रखा गया है।

वहीं राजस्थान भाजपा ने पीड़िता के इंसाफ के लिए 17 और 18 जनवरी को सभी मंडलों में राजस्थान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का एलान किया है। यह घोषणा भाजपा नेता सतीश पुनिया ने की है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक अलवर के बयान को आरोपितों को बचाने की कोशिश करार दिया है। सतीश पुनिया ने लिखा:

“अलवर में मंगलवार की रात को नाबालिग के साथ हुई घटना के संदर्भ में SIT की रिपोर्ट आए बिना पुलिस द्वारा दुष्कर्म जैसी किसी भी घटना से इंकार कर दुर्घटना बताया जाना राजस्थान सरकार की नीयत और नाकामी पर सवाल खड़े करता है। राज्य सरकार अपराधियों को क्यों बचा रही है? क्या पंजाब और यूपी के चुनाव के कारण कॉन्ग्रेस बदनामी से डरकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है? क्या प्रियंका गांधी के जन्मदिन में खलल के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने उनके इशारे पर इस मामले को दबाने की कोशिश की है? एसआईटी की रिपोर्ट से पहले ही पुलिस ने घटना से इनकार क्यों किया?”

भाजपा के सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने इस मामले में राजस्थान सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे घटना की CBI से जाँच करवाने की माँग की है।

गौरतलब है कि 11 जनवरी (मंगलवार) को पीड़िता 12 बजे लोगों को खेत के रास्ते सड़क पर जाती दिखी थी। बाद में उन्हें लहूलुहान हालत में ओवरब्रिज के नीचे पाया गया था। हालत गंभीर होने के चलते पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया।

13 बार रेप, जननांग में अंगुली, झिल्ली का फटना…. कोई नहीं आया काम: पीड़ित नन पर पति के साथ यौन संबंध बन गया बिशप की रिहाई का कारण, पढ़ें डिटेल

नन से दुष्कर्म के मामले में केरल के रोमन कैथोलिक चर्च के बिशप फ्रेंको मुलक्कल (Roman Catholic Bishop Franco Mulakkal) को कोर्ट ने शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को बरी कर दिया। इसके पीछे कोर्ट ने पीड़िता के बयानों में समानता का नहीं होना और आरोपित पर दोष को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा पर्याप्त सबूत नहीं उपलब्ध करने जैसे कई कारणों का हवाला दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी गोपाकुमार द्वारा सुनाए गए 289 पन्नों के फैसले के अधिकांश विवरण बाद में सामने आए।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि पीड़िता का दावा है कि 13 मौके पर उसके साथ बलात्कार किया गया और सिर्फ उसके बयान के आधार पर इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। हालाँकि, कोर्ट ने माना कि मेडिकल जाँच में पीड़िता का हाइमन फटा हुआ पाया गया, लेकिन बचाव पक्ष का कहना है कि पीड़िता ने अपने पति के साथ यौन क्रियाओं में शामिल थी और इसकी शिकायत उसके चचेेरे भाई ने की थी। कोर्ट ने कहा कि केवल इस तथ्य से कि पीड़ित का हाइमन फटा हुआ पाया गया, लिंग प्रवेश या जबरदस्ती यौन शोषण नहीं कहा जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयानों में समरूपता नहीं है। पीड़िता ने अपनी साथी सिस्टर्स को बताया था कि आरोपित मुलक्कल अपनी यौन इच्छाओं को दबाने में असमर्थ रहने के कारण ऐसा कर रहा था, जबकि अदालत में उसने कहा कि आरोपित ने 13 मौकों पर यौन संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर किया, जिसमें पहली बार उसके जननांग में उँगली करना भी शामिल है। इन अलग-अलग बयानों को लेकर अभियोजन पक्ष उचित स्पष्टीकरण देने में विफल रहा है।

पीड़िता ने डॉक्टर को बताया था कि उसने कभी यौन संबंध नहीं बनाया है और इस बयान के आधार पर अदालत ने विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़िता के बयानों में समानता की कमी को देखते हुए उसे स्टर्लिंग विटनेस की श्रेणी में नहीं रखा और उसकी गवाही को पूर्ण विश्वसनीय नहीं माना। इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के आरोप को साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं हैं।

कोर्ट ने कहा, “अनाज को भूसी से अलग करना असंभव है। पीड़िता के बयान में अतिशयोक्ति है और उसने तथ्यों को छिपाने का हर संभव प्रयास किया।” अदालत ने कहा कि पीड़िता अन्य लोगों के प्रभाव में थी, जिनके इस मामले में अपने स्वार्थ निहित थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि ननों की आपसी प्रतिद्वंद्विता और लड़ाई की वजह पद और पावर को लेकर है और पीड़िता और उसकी सहायक ननों द्वारा रखी गई माँगें यदि चर्च स्वीकार कर लेता तो वे इस मामले को निपटाने के लिए तैयार थीं।

अदालत का फैसला सुनने के बाद बिशप मुलक्कल बार-बार अपने समर्थकों और वकीलों को गले लगा रहे थे, वहीं पीड़िता के पक्ष में खड़ा कुराविलांगड कॉन्वेट की नन का समूह अदालत के इस फैसले से हैरान थीं। इस लड़ाई का चेहरा रही सिस्टर अनुपमा ने कहा कि वे इस लड़ाई को जारी रखेंगी और इस फैसले को वह उच्च न्यायालय में चुनौती देेंगी।

बता दें कि मुलक्कल पहले भारतीय बिशप हैं, जिन्हें बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया थे। उन पर लगे रेप के आरोप में मामले में 83 गवाह, 30 से अधिक सबूत और 2,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी।

बिशप आरोप था कि उसने 2014 और 2016 के बीच अपने कॉन्वेंट में एक नन के साथ 13 बार बलात्कार किया किया। उन पर नन को गलत तरीके से कैद करने, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और आपराधिक धमकी देने का आरोप था। बिशप पर पैसा और राजनैतिक संपर्कों की वजह से बचे रहने का भी आरोप लग चुका है।

UP में जिन ‘लड़कियों’ पर कॉन्ग्रेस की राजनीति’, राजस्थान में उन्हीं की अनदेखी : अलवर गैंगरेप पर प्रियंका ने साधी चुप्पी, होटल में मनाया जन्मदिन

राजस्थान के अलवर में मूक-बधिर नाबालिग के साथ हुए गैंगरेप मामले में प्रियंका गाँधी वाड्रा से इंसाफ माँगा जा रहा है। सवाई माधोपुर से एक वीडियो सामने आई है जहाँ पुलिस बल की तैनाती के बावजूद कुछ लड़कियाँ आगे बढ़-बढ़कर पीड़िता के लिए इंसाफ माँगते हुए नारेबाजी कर रही हैं।

इस घटना के अलावा सवाई माधोपुर से भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा के गिरफ्तार होने की भी खबर है। उनके अलावा जयपुर से रणथम्भौर गए भाजपा प्रतिनिधि मंडल के अन्य नेता अलका सिंह, रामलाल शर्मा, जितेंद्र गोठवाल भी अरेस्ट हुए हैं। ये लोग प्रियंका के होटल के बाहर उनसे मिलने गए थे। लेकिन, पुलिस के रोकने पर ये धरना देकर बैठ गए। कथिततौर पर इन बीजेपी नेताओं के साथ कुछ कार्यकर्ता भी मौके पर इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद पुलिस से झड़प की घटना घटी और पुलिस ने इन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल 43 सेकेंड की वीडियो में देख सकते हैं कि एक लड़की पुलिस अधिकारी से बात करते हुए कह रही है कि वो लोग आगे जाने को बोल रहे हैं लेकिन उन्हें गेट पर से धक्का देकर वापस ले आया गया। वीडियो में प्रियंका गाँधी से न्याय की माँग करते हुए प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं। सुना जा सकता है कि वो आरोपितों को फाँसी देने की माँग कर रहे हैं।

बता दें कि जिस होटल के बाहर ये सारा हल्ला हुआ, वो ‘शेर बाग होटल’ सवाई माधोपुर के रणथम्भौर में है, जहाँ प्रियंका गाँधी अपने पति और बच्चों के साथ जन्मदिन मनाने छुट्टियों पर गई हैं। अजीब बात ये है कि जो प्रियंका हाथरस घटना के समय पीड़ित परिजनों से मिलने उनके घर तक चली गई थीं, वो प्रियंका गाँधी होटल के बाहर खड़ी लड़कियों की आवाज सुनने के बाद भी उनसे मिलने नहीं आईं। इस घटना के बाद कई लोग प्रियंका गाँधी की हिपोक्रेसी भी उजागर कर रहे हैं जो यूपी चुनाव में महिलाओं के नाम पर अपनी राजनीति कर रही हैं और अपने प्रदेश में उनकी अनदेखी कर रही हैं।

अलवर गैंगरेप केस

उल्लेखनीय है कि अलवर में मंगलवार (11 जनवरी 2022) रात को 14 साल की एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप करने के बाद तिजारा फाटक पुलिया पर फेंक दिया गया था। बच्ची एक घंटे तक वहीं तड़पती रही। वह कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं थी। हालत गंभीर होने पर दो यूनिट ब्लड देकर उसे जयपुर जेके लॉन अस्पताल में रेफर कर दिया गया। बच्ची का बुधवार (12 जनवरी 2022) दोपहर को तकरीबन तीन घंटे तक ऑपरेशन चला। पीड़िता के शरीर के अंदर के पार्ट्स तक डेमेज हो चुके हैं। ऑपरेशन के बाद बच्ची को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि जब भी वह दर्द से तड़तपी है तो कभी माँ तो कभी ‘पा’ ही उसके मुँह से निकलता है।

जाति वाली बसपा साफ, भ्रष्टाचार वाली सपा भी पीछे… UP चुनाव में CM योगी ही सबसे बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में राजनीतिक पहलवानों और उनकी टोलियों ने ताल ठोकना शुरू कर दिया है। अचानक कुछ पहलवानों को उन अखाड़ों को बदलने की सूझ रही है जिनमें वे पाँच साल से दंड पेल रहे थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पर ट्रेंड, अदलाबदली और शाब्दिक जूतमपैजार का हल्ला जोरों पर है। ये सब हो रहा है प्रदेश के वोटरों को ललचाने, रिझाने या फिर अपने पाले में समेटने के लिए। इस मारामारी से अलग हमने इस लेख में जनता की नब्ज़ जानने और उसका आकलन करने की कोशिश की है।

योगी आदित्यनाथ जब पाँच साल पहले अप्रत्याशित रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो सबके मन में एक ही सवाल था। ‘ये सन्यासी क्या पॉंच साल चल पाएगा?’ सवाल लाजिमी था क्योंकि प्रदेश पर शासन करना हमेशा ही टेढ़ी खीर रहा है। पाकिस्तान से भी अधिक जनसंख्या वाले यूपी को हम उत्तर प्रदेश वाले कई बार मज़ाक में उल्टा प्रदेश भी कह जाते हैं। खाँटी राजनेताओं तक को इस प्रदेश की जनता पानी पिलाती रही है। योगी आदित्यनाथ को तो कोई प्रशासनिक अनुभव भी नहीं था। लोगों का कहना था कि प्रदेश की घुटी हुई नौकरशाही से पार पाना इस नए मुख्यमंत्री के लिए इतना आसान नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश में शिक्षा का स्तर भले ही देश के औसत से कम हो, पर यहाँ राजनीति की घुट्टी हर नागरिक को जन्मते ही मिल जाती है। एक अनपढ़, निर्धन और गँवार सा दिखने वाला एक सामान्य देहाती भी आपको यहाँ वो राजनीतिक ज्ञान दे जाएगा जो दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में अपने लैपटॉप पर बैठे ‘राजनीतिक विश्लेषक’ समझ ही नहीं पाते। इसलिए इन दिनों टीवी पर और सोशल मीडिया पर जो राजनीतिक शोर चल रहा है उस पर मत जाइए, वह बंद कमरों में बैठे ज्ञानियों द्वारा मचाया जा रहा कोलाहल मात्र है। ये शोर कई बार प्रायोजित और बहुधा पूर्व निर्धारित होता है जो दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं के समक्ष तर्क की चाशनी में डुबोकर कर पेश किया जाता है।

यों भी चुनावों से एकदम पहले या उनके दौरान जो गहमागहमी, आवाजाही और बहसा-बहसी होती है उसका मतदाताओं पर आंशिक ही असर पड़ता है। मेरा मानना है कि अगर कोई अप्रत्याशित घटना न हो जाए तो मतदाता कुछेक महीनों पहले ही मोटे तौर पर अपना मन बना लेते हैं कि किसे जिताना है और किसे विदा करना है। चुनाव घोषित हो जाने के बाद टिकट वितरण को देखकर अब जो राजनीतिक चलाचली हो रही है उसका कोई बहुत असर अंतिम परिणामों पर नहीं पड़ने वाला।

एक और बात, चुनाव में किसको कितनी सीटें मिलेंगी ये या तो कोई ज्योतिषी बता सकता है या फिर ऊपरवाला। सीटों की संख्या का अनुमान लगाना उफान पर आए समुद्र की लहरों को गिनने जैसा ही है। ऐसा करने वाले दस में से साढ़े नौ बार औंधे मुँह ही गिरते हैं। कुल मिलाकर ये घनघोर सट्टेबाज़ी जैसा काम हैं जिसमें पड़ना एकदम फालतू की कवायद है। चुनाव कवर करने के अपने कोई साढ़े तीन दशक के मेरे अनुभव का एक ही निचोड़ है कि आप पत्रकार होने के नाते बस एक अंदाजा लगा सकते हैं कि चुनाव में मुख्य मुद्दा क्या है? यानि वोटर के मन में क्या चल रहा है ये अगर मोटे तौर पर भी आप सूँघ पाएँ तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हवा किस ओर बहेगी। बाकी सब या तो खयाली पतंगबाज़ी है या फिर पूर्व नियोजित राजनीतिक पैतरेबाजी।

लोगों के मन में क्या चल रहा है ये जानने के लिए कुछ दिन पहले मेरा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में जाना हुआ। मैं गया भी एक सामान्य यात्री के तौर पर न कि पत्रकार के नाते। पत्रकार बताते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं और आम लोग अपने मन को नहीं खोलते। इस दौरान मैंने सामान्य लोगों की नब्ज़ टटोलने की कोशिश की। इसके बाद मैंने उन कई लोगों से बातचीत भी की जो पत्रकारीय मकसद से उत्तर प्रदेश का दौरा करके आए हैं। मेरे एक पूर्व सहयोगी प्रवीण तिवारी तो एक अखबार के लिए प्रदेश के 271 चुनाव क्षेत्रों का दौरा करके लौटे हैं। उनके मुताबिक उन्होंने पिछले कुछ महीनों में प्रदेश की कोई 6000 किलोमीटर सड़कों की धूल चाटी है। ऐसे ही कई और भी लोगों से बातचीत हुई जो टीवी स्टूडियो या दफ्तरों से बाहर लोगों के बीच लगातार जाकर राजनीतिक मौसम भाँपने की कोशिश करते रहे हैं।

इसके आधार पर एक बात तो साफ़ निकलती है वो है कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा स्वयं मुख्यमंत्री योगी ही हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने जिस तरह राज्य में शासन चलाया है वो लोगों के मन में वोट देने का सबसे बड़ा मानक होने जा रहा है। इसका मतलब ये कतई नहीं है कि अन्य कोई मुद्दे राज्य में नहीं हैं। चुनाव एक जटिल और बहुस्तरीय प्रक्रिया है। इसमें कई चीजों का घालमेल होता है। जब भी कोई चुनाव होता है तो बेरोज़गारी और महँगाई तो ऐसे सदाबहार मुद्दे होते है जैसे बंबईया कटिंग मसाला चाय में चायपत्ती। चाय में पत्ती को तो होना ही है। इसलिए जब चैनल, अखबार और विश्लेषक इनकी चर्चा करें तो इन्हें चुनावी तराज़ू के पासंग जैसा ही मानना चाहिए।

आश्चर्यजनक रूप से इस बार भ्रष्टाचार की चर्चा उस तरह से किसी ने नहीं की जिस तरह पिछली सरकारों के समय उत्तर प्रदेश में होती रही है। बीएसपी की सुश्री मायावती रही हों या फिर सपा के श्री अखिलेश यादव के समय के चुनाव – सरकारी भ्रष्टाचार हमेशा उत्तर प्रदेश में बड़ा मुद्दा रहा है। मौजूदा मुख्यमंत्री पर इस तरह का कोई बड़ा आरोप नहीं लगना और इसकी कोई गंभीर चर्चा न होना एक बड़ा संकेत है। उत्तर प्रदेश का शासन धमक से ही चलता है। योगी आदित्यनाथ ने जिस कड़ाई से नौकरशाही को हाँककर काम करवाया इसकी तारीफ आमतौर से सबने की। इस सिलसिले में लोगों ने घर-घर में बने शौचालयों और स्वच्छता अभियान का जिक्र किया।

योगी का व्यक्तित्व उत्तर प्रदेश में मुख्य मुद्दा है तो अखिलेश उनके सबसे प्रबल प्रतिद्वंदी है, ये बात भी उत्तर प्रदेश के गली नुक्क्ड़ों की गपशप में साफ़ नज़र आई। प्रियंका गाँधी की तमाम कोशिशों के बावजूद काँग्रेस अब भी खेल से बाहर ही दिखाई देती है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मायावती की बीएसपी अब गंभीर प्रतिद्वंदी नहीं रह गई है, ये भी लोग सीधे-सीधे कहते मिले। महत्वपूर्ण है कि समाजवादी पार्टी से सहानुभूति रखने वाले एक मित्र ने कहा, “अखिलेश ने प्रदेश में देर से शुरुआत की है। अगर वे कुछ महीनों पहले सक्रिय हो गए होते तो बहुत अच्छा होता।”

जो लोग ब्राह्मण-ठाकुर, पिछड़ा-अगड़ा और जातिवाद के मुद्दों को सबसे प्रमुख रूप में प्रचारित कर रहे है वे भी आंशिक रूप से ही सही हैं। असलियत तो ये है कि देश का कोई चुनाव ऐसा नहीं है जिसमें जाति की भूमिका नहीं होती। जाति को कुछ लोग तलवार के रूप में तो कुछ ढाल के रूप में इस्तेमाल करते है। जो अपने देश में हमेशा होगा ही। मगर ये प्रदेश के आगामी चुनावों का सबसे बड़ा कारक नहीं होने जा रहा। अगर जातिगत गणित ही मुख्य होता तो मूलतः जातपाँत के खम्बो पर ही टिकी बीएसपी को आज प्रमुख प्रतिद्वंदी के तौर पर होना चाहिए था। पर ऐसा अभी तक तो लगता नहीं है।

चुनाव किस मुद्दे पर लड़ा जा रहा है इसकी बानगी मुझे लखनऊ और अयोध्या में मिली। जब मैं तीन हफ्ते पहले राजधानी लखनऊ शहर की पर्यटन यात्रा पर था तो मेरे चालक और गाइड नूर मोहम्मद ने जो बात कही थी वो प्रदेश के आने वाले चुनावों के प्रमुख मुद्दे को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है। हुसैनाबाद इलाके में घंटाघर के पास अच्छी साफ-सफाई और व्यवस्था पर नूर ने मुझसे कहा था, “ये सब अखिलेश ने करवाया था, उनके जाते ही रुक गया।”

मगर अयोध्या में ये तस्वीर बिल्कुल पलट जाती है। अयोध्या में मेरे साथ चल रहे देवेश वहाँ योगी-मोदी की जोड़ी द्वारा कराए गए कामों के बारे में बताते हुए थकते ही नहीं थे। चाहे फैज़ाबाद में गुप्तार घाट का विस्तार हो; अयोध्या में सरयू की पैड़ी पर जल के लगातार प्रवाह की व्यवस्था हो या दीपदान का कार्यक्रम- उनके मुताबिक जो काम योगी सरकार ने करवाया, वैसा कभी नहीं हुआ। वाराणसी में काशी कॉरिडोर के उद्घाटन और रामजन्मभूमि मंदिर के निर्माण कार्य की भी उन्होंने खूब चर्चा की।

अयोध्या और काशी के कामों की बात उत्तर प्रदेश चुनाव की हर चर्चा में प्रखरता से उठी। कुल मिलाकर मेरा आकलन है कि अयोध्या/काशी के काम और उससे उत्पन्न ध्रुवीकरण इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है। प्रदेश की महिलाएँ, युवा और नए मतदाता भी खूब इस मुद्दे की बात करते मिले। अगर ऐसा है तो फिर तमाम किन्तु परंतुओं के बीच गोरक्ष पीठ के इस औघड़ बाबा के सितारों को बुलंद ही समझना चाहिए।

अखिलेश यादव ने वर्चुअल रैली के नाम पर जुटाई भारी भीड़: यूपी पुलिस ने दर्ज की इन धाराओं में FIR, चुनाव आयोग लेगा एक्शन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय में आयोजित किए गए कार्यक्रम को लेकर लखनऊ पुलिस ने सपा के खिलाफ धारा 144 तोड़ने और महामारी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। दरसअल, आज 14 जनवरी, 2022 को सीएम योगी की कैबिनेट का हिस्‍सा रहे स्‍वामी प्रसाद मौर्य और डॉ धर्म सिंह सैनी समेत कई विधायकों ने अखिलेश यादव की उपस्थिति में सपा में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल सहित सपा के तमाम बड़े नेता भी उपस्थित थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सपा के द्वारा इस रैली को डिजिटल रैली का नाम दिया गया था। जिसके लिए लोगों की भारी भीड़ जुटाने की अनुमति भी नहीं ली गई थी। ऐसे में सपा ने अपने लखनऊ कार्यालय में भारी संख्या में भीड़ जुटाने के साथ ही कोविड नियमों का भी पालन नहीं किया। मामला संज्ञान में आने के बाद निर्वाचन आयोग और लखनऊ प्रशासन ने इसको लेकर सख्ती दिखाते हुए गौतमपल्ली थाने में धारा 144 का उल्लंघन और महामारी एक्ट के तहत करीब 2500 कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे मामले पर लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने कहा कि वीडियो और तस्वीरें खंगाली जा रही हैं। अभी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग इस मामले में जैसा कहेगा वैसा एक्शन लिया जाएगा। जरूरत हुई तो नामज़द सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई हो सकती है।

गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने कोविड को देखते हुए 15 जनवरी तक प्रदेश में किसी भी तरह की रैली करने पर पाबंदी लगाई है। ऐसे में समाजवादी पार्टी की रैली के आयोजन पर लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कहा कि मामले में FIR दर्ज कर पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इसमें नियम कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाए।