Home Blog Page 3072

पति भेजते और एक ही समय में तीन पुरुष करते पत्नी से सेक्स: केरल में चल रहा था पार्टनर एक्सचेंज रैकेट, टेलीग्राम-मैसेंजर ऐप से करते थे कॉन्टैक्ट

केरल में एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है जिसमें शामिल लोग सेक्स के लिए पत्नियों की अदला-बदली (Wife Swapping) करते थे। इस सिलसिले में कोट्टायम के समीप कारुकाचल से सात लोगों को रविवार (9 जनवरी 2022) को गिरफ्तार किया गया। पत्नियों की अदला-बदली के इस नेटवर्क से जुड़े लोग टेलीग्राम और मैसेंजर ऐप के जरिए एक दूसरे से संपर्क करते थे। इस गिरोह के एक हजार से अधिक सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पति उससे जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाता है और अन्य व्यक्ति के साथ भी ऐसे संबंध बनाने के लिए मजबूर कर रहा है। शिकायत करने वाली महिला के साथ 9 लोगों ने यौन उत्पीड़न किया था।

जानकारी के मुताबिक केरल के कोट्टायम जिले में रहने वाली महिला ने करुकाचल पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने कहा था कि उसका पति किसी दूसरे शख्स के साथ यौन सबंध बनाने के लिए उसके ऊपर दबाव डाल रहा है। उसके साथ अप्राकृतिक सेक्स भी किया गया है। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने उसके पति और दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया।

इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस को ‘पार्टनर एक्सचेंज रैकट’ के बारे में पता चला। पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि ‘पार्टनर एक्सचेंज रैकेट’ में एक हजार से भी अधिक कपल शामिल हैं और सेक्स के लिए बड़े स्तर पर महिलाओं की अदला-बदली की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, जहाँ एक तरफ इस मामले में अभी तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं 25 अन्य लोग निगरानी में हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।

पुलिस के मुताबिक, ये पूरा ‘सेक्स एक्सचेंज रैकेट’ टेलीग्राम और दूसरे ऑनलाइन मैसेंजर ऐप के जरिए चलता है। कोट्टायम जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी IANS को बताया, “पहले ये लोग टेलीग्राम और दूसरे मैसेंजर ग्रुप्स में शामिल होते हैं और फिर दो या तीन कपल आपस में मुलाकात करते हैं। इसके बाद महिलाओं की अदला-बदली होती है। इस तरह के मामले भी सामने आए हैं, जहाँ एक महिला के साथ एक ही समय पर तीन अलग-अलग पुरुषों द्वारा यौन सबंध बनाए गए। इस रैकेट में पैसों का भी लेन-देन होता है। कई लोग पैसों के लिए अपनी पत्नियों को सिंगल पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं।”

पुलिस का कहना है कि इस मामले में ये भी देखा जा रहा है कि कहीं इस तरह के और रैकेट तो नहीं चल रहे हैं और इनका आपस में कोई संबंध तो नहीं। फिलहाल जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वो अलफूजा, कोट्टायम और अर्नाकुलम जिले के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, इस तरह के रैकेट में राज्य के हर हिस्से के लोग शामिल हैं और ज्यादातर सदस्य आर्थिक रूप से संपन्न हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले केरल के कायाकुलम में भी साल 2019 में इस तरह का मामला सामने आ चुका है। 2019 में इसी तरह की घटना में कायमकुलम में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों में से एक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसे दो लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। पति उसे और अजनबियों के साथ सोने के लिए कह रहा था। वे शेयरचैट के जरिए कम्युनिकेट कर रहे थे।

पंजाब में PM मोदी की सुरक्षा में चूक कैसे: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमिटी, रिटायर जज को कमान- NIA के IG भी होंगे

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक रिटायर्ड जज के नेतृत्व के समिति बनाने का निर्णय लिया है। सोमवार (10 जनवरी, 2022) को इस मामले की सुनवाई हुई। 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले का रास्ता बठिंडा के एक फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक जाम कर के रखा गया था, जिसके बाद उन्हें वापस एयरपोर्ट लौटना पड़ा। पंजाब सरकार के बयान इस मामले में बदलते रहे और पंजाब पुलिस की किसान प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की लेते हुए तस्वीर वायरल हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा गठित कमिटियों को इस मामले की जाँच को तब तक रोके रखने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। कमिटी के गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज ही बाकी विवरण जारी करेगा। इस कमिटी में चंडीगढ़ के DGP, ‘नेशनल इंवेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA)’ के IG, पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और पंजाब के ADGP (सिक्योरिटी) को शामिल किया जाएगा।

‘लॉयर्स वॉइस’ नाम के एक NGO ने इस मामले के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की माँग की थी। इस सुरक्षा चूक का मामला अदालत में होने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई। सॉलिसिटर जनरल से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब दोषी मान कर अधिकारियों को नोटिस चला ही गया है तो सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का क्या फायदा? पंजाब सरकार ने केंद्र की जाँच पर अविश्वास जताया।

याचिकाकर्ता NGO की तरफ से पेश वकील मनिंदर सिंह ने इस मामले में UAPA की धाराओं के तहत कार्रवाई की माँग की। इस पर CJI ने कहा कि हमें मामले को और पेचीदा नहीं बनाना चाहिए। NGO का कहना है कि पंजाब पुलिस की FIR में IPC की मामूली धाराएँ ही लगाई गई हैं। पंजाब सरकार ने बताया कि उसके 7 अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का नोटिस केंद्र ने जारी किया है। साथ ही इसके पीछे राजनीति की आशंका जताई। पंजाब के एडवोकेट जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार की जाँच की निष्पक्षता पर राज्य सरकार को भरोसा नहीं।

उन्होंने पूछा कि जब सरे रिकार्ड्स रजिस्ट्रार जनरल ने जब्त कर लिए हैं तो फिर इस मामले में सबूत कहाँ से आए? उन्होंने पूछा कि केंद्र की जाँच का निष्कर्ष किस आधार पर है? AG ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि सुरक्षा चूक के जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए, फाँसी भी दे दीजिए, लेकिन निष्पक्ष जाँच के बाद। SG ने बताया कि पीएम मोदी का काफिला प्रदर्शन स्थल से 100 मीटर की दूरी पर खड़ा था। ‘ब्लू बुक’ के हिसाब से राज्य सरकार के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी।

उन्होंने कहा कि सुबह से ही भीड़ जमा थी, लेकिन DGP ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और कोई इनपुट्स नहीं दिए। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल्स के उल्लंघन के साथ-साथ ख़ुफ़िया विफलता भी बताया। उन्होंने बताया कि जाम की स्थिति में 4 किलोमीटर पहले बताया जाना चाहिए था। उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा अधिकारियों को बचाए जाने को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि शेड्यूल के अनुसार ही पीएम मोदी की यात्रा हुई और रिहर्सल भी हुआ था। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिस का मतलब है कि पंजाब के CS और DG को केंद्र ने दोषी मान लिया है।

जबकि पंजाब के AG ने कहा कि कमिटी बना कर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हमें स्पष्ट दोषी ही मान लिया है। याचिका में पंजाब सरकार के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ उन्हें निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की माँग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ पंजाब सरकार को पीएम के रूट के बारे में पता था। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए बताया गया कि न तो पंजाब के मुख्य सचिव (CS) और न ही DGP काफिले के साथ मौजूद थे।

UP का नंबर, मोदी विरोधी नारा, सिख ड्राइवर: केरल की जिस सीट से शशि थरूर सांसद, वहाँ मिली गाड़ी छोड़ गई कई सवाल

केरल के तिरुवनंतपुरम शहर के पट्टम क्षेत्र में एक निजी होटल के बाहर रविवार (9 जनवरी, 2022) को एक कार खड़ी मिली। इस पर मोदी विरोधी नारे लिखे गए थे। बता दें कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर लोकसभा में तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं।

कार पर मोदी मोदी विरोधी लिखे गए कुछ नारे यह थे- “मोदी द्वारा 750 से अधिक किसानों की हत्या की गई’, ‘मोदी जेंटलमैन नहीं है’, ‘आरएसएस एक आतंकवादी समूह है’, ‘भारत के लखीमपुर खीरी में योगी द्वारा 4 लोगों की हत्या की गई।”

जानकारी के मुताबिक, कार उत्तर प्रदेश के ओंकार के नाम पर रजिस्टर्ड थी। दोपहर करीब दो बजे एक पंजाबी व्यक्ति कथित तौर पर कार को पट्टम के एक प्राइवेट होटल ले गया था। कार पर मोदी विरोधी नारे लिखा देख कर सुरक्षा गार्डों ने उससे पूछताछ की।

इसके बाद आरोपित होटल के बार में चला गया, लेकिन उसके अजीबोगरीब व्यवहार को देखकर कर्मचारियों ने उसे शराब सर्व करने से मना कर दिया। इसके बाद पंजाबी व्यक्ति ने सुरक्षा गार्डों को धमकाया और होटल में अफरातफरी की स्थिति पैदा कर दी। फिर वह मोदी विरोधी नारों लिखा कार वहीं पर होटल के बाहर छोड़ कर दूसरी कार में बैठ कर भाग गया

कर्मचारियों ने इसकी सूचना पुुलिस को दी। जिसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने लावारिस कार को जब्त कर लिया। आगे की जाँच के लिए कार को थाने ले जाया गया। पुलिस ने बम स्क्वायड और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया। पुलिस ने गाड़ी के अंदर मिले बैगों से केबल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और पुराने कपड़े बरामद किए। इस घटना ने पुलिस को हैरान कर दिया है कि कैसे इस तरह के नारों से लिखी कार उत्तर प्रदेश से केरल तक यात्रा करने में कामयाब रही। आरोपित की गिरफ्तारी के लिए जाँच शुरू कर दी गई है।

पंजाब में सुरक्षा में सेंध, फ्लाईओवर पर फँसे थे पीएम मोदी

गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब के फिरोजपुर में भी PM मोदी के विरोध में उनके सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आया था। जब पीएम मोदी का काफिला बुधवार (5 जनवरी 2022) को पंजाब में मोगा-फिरोजपुर राजमार्ग पर एक फ्लाई ओवर में फँस गया था। दरअसल, प्रदर्शनकारियों के झुंड ने पीएम का काफिला रोका, हुसैनीवाला से करीब 30 किलोमीटर दूर फ्लाई ओवर पर पीएम मोदी के काफिले को 20 मिनट तक फँसे रहना पड़ा। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि पीएम का काफिला पंजाब में डीजीपी से आवश्यक पुष्टि के बाद ही शुरू हुआ था और यह घटना पंजाब पुलिस की एक बड़ी चूक थी। इसके अलावा यह बात भी सामने आई थी कि एक स्थानीय गुरुद्वारे ने लोगों से राजमार्ग को जाम करने के लिए उकसाया था।

इधर बुल्ली बाई पर रोना, उधर स्टार शटलर सायना नेहवाल पर सेक्सुअल कमेंट: एक्टर सिद्धार्थ को ‘घटिया’ ट्ववीट पर नेटिजन्स ने लगाई लताड़

बॉलीवुड की ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों में नजर आए अभिनेता सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर महिलाओं को ट्रोल करने का नया काम शुरू किया है। उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसे ट्वीट किए जिसमें न केवल वो महिला हस्तियों पर तंज कस रहे हैं बल्कि अपने विरुद्ध बोलने वाली महिलाओं को ब्लॉक भी कर रहे हैं। उन्होंने 2012 में ओलंपिक्स में कास्य पदक, 2015 की वर्ल्ड चैंपियशनशिप में रजत पदक, कॉमनवेल्थ गेम्स (2010, 2018) में गोल्ड जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल पर भी भद्दी टिप्पणी की है।

अपने ट्वीट में उन्होंने न केवल सायना पर सेक्सुअल टिप्पणी करते हुए उनका मजाक उड़ाया बल्कि उनके खेल का भी उपहास उड़ाने का प्रयास किया। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सायना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के बाद अपने ट्विटर पर एक ट्वीट किया और घटना की निंदा की। इसी ट्वीट पर सिद्धार्थ ने उन्हें लिखा, “दुनिया की छोटी कॉक चैंपियन…ईश्वर का शुक्र है हमारे पास भारत के रक्षक हैं।” अब यहाँ मालूम हो कि ‘कॉक’ शब्द का प्रयोग अमूमन लिंग के लिए भी किया जाता है, बावजूद इसके सिद्धार्थ का इस शब्द को इस्तेमाल करना बताता है कि उनकी मंशा बदजबानी ही थी। उन्होंने कॉक शब्द का यूज नेहवाल के साथ उनके खेल का मजाक उड़ाने के लिए प्रयोग किया था।

एक्टर सिद्धार्थ के ऐसे तमाम ट्वीट हैं जिनसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कैसे महिलाओं के प्रति अपनी चिढ़ को व्यक्त करते रहे हैं। उन्होंने टाइम्स नाऊ की नाविका कुमार पर भी कुछ दिन पहले तंज कसा था और अभी जब बुल्ली बाई ऐप मामला खुला तो आरोपित श्वेता सिंह का बैकग्राउंड बताए जाने पर कंवल पर भी तीखी टिप्पणी की थी।

इन सबके अलावा सबसे दिलचस्प बात ये है कि खुद को लिबरल दिखाने वाले सिद्धार्थ एक ओर देश का नाम गौरवान्वित करने वाली महिला पर भद्दे कमेंट करते हैं और दूसरी ओर जब बात बुल्ली बाई ऐप पर आरजे सायमा की राय रीट्वीट करने की होती है तो वो इसमें सबसे आगे रहते हैं। इतना ही नहीं, जब कोई उनके महिला विरोधी ट्वीट को सामने लाकर उनकी आलोचना करता है जैसे कि पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने किया तो वो उन्हें ब्लॉक कर देते हैं। फिलहाल, सायना पर किए गए ट्वीट के कारण सिद्धार्थ की आलोचना हो रही है। लोगों ने उन्हें फ्लॉप एक्टर बताया है और बैडमिंटन चैंपियन पर ऐसी टिप्पणी करने के लिए उन्हें चेताया है।

अभिनंदन जैसी मूँछ पर सिपाही सस्पेंड: कटवाने से किया इनकार, कहा- राजपूत हूँ, यह स्वभिमान की बात

कई जगहों पर पुलिस को मूँछ भत्ता मिलता है। मकसद पुलिसकर्मी रौबदार दिखें। कई बार पुलिसकर्मियों को मूँछ के लिए सम्मानित भी किया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें मूँछ नहीं कटवाने पर सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सिपाही ने खुद को राजपूत और मूँछ को स्वाभिमान का विषय बताते हुए कटवाने से इनकार कर दिया और कहा कि उसे निलंबन कबूल है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस संबंध में विवाद होने के बाद इस पुलिसकर्मी को फिर से बहाल कर दिया गया है। लेकिन, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

मूँछ के चलते सस्पेंड किये गए मध्य प्रदेश पुलिस के सिपाही राकेश राणा हैं। निलंबन के बाद सोशल मीडिया में उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें वे निलंबन स्वीकार करने और मूँछ न कटवाने की बात कह रहे हैं।

वीडियो में सिपाही राकेश राणा को कहते सुना जा सकता है, “सर का कहना था कि मूँछ कटवा लीजिए। मेरा ये मानना है कि मूँछ तो कटवाऊँगा नहीं, क्योंकि मैं राजपूत परिवार से हूँ। यह स्वभिमान वाली बात है। पुलिस विभाग में भी मूँछ रख कर अच्छा लगता है। पुलिस विभाग में कई IPS अधिकारी भी मूँछ रखे हुए हैं। जो आपत्ति मेरे ऊपर उठाई गई है वो कुछ समझ में नहीं आई। मुझे ही क्यों टोका गया मूँछ पर? मैं निलंबन स्वीकार करता हूँ।”

राकेश राणा भोपाल को-ऑपरेटिव फ्रॉड एवं लोक सेवा गारंटी विंग में तैनात थे। वो स्पेशल डीजी के वाहन चालक के पद पर थे। विभाग के अधिकारियों के अनुसार उनके चेहरे पर मूँछ का स्टाइल भद्दा लगता था। इसके चलते उन्हें कई बार मूँछ कटवाने के लिए बोला गया, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। आख़िरकार 7 जनवरी (शुक्रवार) को उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

आदेश

निलंबन आदेश में कहा गया है कि राकेश राणा का टर्नआउट चेक करने पर पाया गया कि उनके बाल बढ़े हुए हैं। मूँछ अजीब डिजाइन में गले पर हैं। उन्हें बाल और मूँछ को ठीक से कटवाने के लिए निर्देशित किया गया। सिपाही ने मूँछ न कटवाने की जिद पकड़ ली। यह यूनिफॉर्म सेवा में अनुशासनहीनता है। इस कृत्य से विभाग के अन्य कर्मचारियों पर भी गलत असर पड़ता है। अतः कांस्टेबल राकेश राणा को सस्पेंड किया जाता है। गौरतलब है कि राकेश राणा की मूँछ भारतीय ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान की तरह दिखती है।

‘दूसरों से पैसे लें, पर वोट AAP को दें’: आचार संहिता को पंजाब में ‘आप’ ने दिखाया ठेंगा, चुनाव आयोग ने थमाया नोटिस

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ने आठ जनवरी को की थी। इसके बाद से ही इन पाँच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके उल्लंघन का पहला मामला सामने आया है जिसको लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) को आयोग ने नोटिस दिया है। आयोग ने रविवार (9 जनवरी, 2022) को AAP को नोटिस जारी किया। पटियाला के जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप हंस ने यह नोटिस समाचार पत्रों में पैम्फलेट बाँटने के लिए जारी किया। कथित तौर पर पैम्फलेट में अन्य पार्टियों से पैसे लेकर AAP को वोट देने की बात कही गई है। 

डीसी ने नोटिस में सोमवार (10 जनवरी 2022) शाम तक पार्टी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “हमने AAP जिलाध्यक्ष मेघ राज को नोटिस जारी किया है। पैम्फलेट बाँटने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पैम्फलेट में पब्लिशर या प्रिंटर का नाम नहीं है।”

इसकी शिकायत भारत के चुनाव आयोग द्वारा लॉन्च किए गए eVigil ऐप का उपयोग करके दर्ज करवाई गई थी। बता दें कि इस ऐप के जरिए नागरिक चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में राजनीतिक नेताओं और पार्टियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पैम्फलेट का कंटेंट

पंजाबी में प्रकाशित पैम्फलेट में मतदाताओं से राजनीतिक पार्टियों द्वारा वोट के बदले दिए जाने वाले पैसे या अन्य सामग्री लेने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है, “इन पार्टियों ने पंजाब को लूटा है। इसलिए, यदि कोई राजनीतिक दल आपको पैसे की पेशकश करता है, तो इसे ले लें। लेकिन वोट आम आदमी पार्टी को ही दें। उन्हें पता नहीं चलेगा कि आपने किसे वोट दिया है।” 

कथित तैर पर AAP द्वारा बाँटा गया पैम्फलेट (साभार: Tribune)

इसमें आगे कहा गया है, “आम आदमी पार्टी पैसे की पेशकश नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास फंड नहीं है। लेकिन अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकार बनाती है, तो यह आपके जीवन को बेहतर बनाएगी। मुफ्त बिजली मिलेगी। आपके घर की हर महिला को 1000 रुपए मिलेंगे। नए स्कूल और अस्पताल खुलेंगे। दिल्ली की तरह ही मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा।”

इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि पार्टियाँ चुनाव से पहले पैसा देती हैं, लेकिन सरकार बनाने के बाद ठीक से काम नहीं करती हैं। कहा गया है, “एक काम करो। चुनाव से पहले और बाद दोनों में लाभ उठाओ। चुनाव से पहले दूसरे दलों से पैसे ले लो। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद, सरकार से लाभ उठाओ। ‘झाड़ू’ (AAP का पार्टी चिन्ह) चुनें।”

दिलचस्प बात यह है कि पैम्फलेट में मतदाताओं से फर्जी शपथ लेने का आग्रह किया गया था। इसमें कहा गया है, “यदि अन्य दल आपसे पैसे के बदले उन्हें वोट देने की शपथ लेने के लिए कहते हैं, तो झूठी शपथ लें। लेकिन अपने दिल में गुरु महाराज या भगवान के नाम पर शपथ लें और कहें, ‘इन चुनावों में, मैं इन पार्टियों से पैसे ले रहा हूँ, लेकिन मैं पंजाब की भलाई के लिए आम आदमी पार्टी को वोट दूँगा’। दूसरी पार्टियों को पता नहीं चलेगा कि आप अपने मन में क्या कह रहे हैं।”

आम आदमी पार्टी के नेता बलबीर सिंह ने द ट्रिब्यून के हवाले से कहा कि AAP ने ऐसा कोई पैम्फलेट जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा, “हमने पैम्फलेट जारी नहीं किया है और इसे सही नहीं ठहराते। जाहिर तौर पर किसी ने हमें बदनाम करने की चाल चली है।”

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी पहले भी इस तरह की टिप्पणी कर चुकी है। यह पहली बार नहीं है जब आप ने मतदाताओं से अन्य पार्टियों से पैसे लेने के लिए कहा है, लेकिन AAP को वोट देने के लिए कहा है। अरविंद केजरीवाल खुद भी इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं।

2015 में, केजरीवाल ने एक रैली को संबोधित करते हुए लोगों से भाजपा और कॉन्ग्रेस से पैसे लेने और AAP को वोट देने के लिए कहा था।

2017 में गोवा चुनाव के दौरान भी उन्होंने यही बात कही थी। तब भी चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन मामले में जवाब माँगा था। 2019 में आम चुनावों से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने AAP उम्मीदवार राघव चड्ढा के रोड शो के दौरान भी इसी तरह की टिप्पणी की थी।

धर्मांतरण कराने वालों पर उदारता, पुजारी-मठ बदहाल: ओडिशा में ईसाई मिशनरियों को ‘सरकारी पैसे’ का VHP ने किया विरोध

ओडिशा में मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित 13 संस्थानों को मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से आर्थिक सहायता दिए जाने का विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विरोध किया है। विहिप ने इसे राज्य सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता का परिचायक बताया है। 4 जनवरी 2022 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित संस्थानों की मदद के लिए राहत कोष से 78.76 लाख रुपए मंजूर किए थे। विहिप का कहना है कि जिन संस्थाओं को मदद प्रदान की गईं है वे राज्य में अवैध धर्मांतरण में लिप्त हैं।

विहिप महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा, “मिशनरीज ऑफ चैरिटी के लिए ओडिशा सरकार द्वारा 78 लाख रुपए मंजूर किए जाने का विहिप कड़ा विरोध करती है। यह करदाताओं का पैसा है। मिशनरीज ऑफ चैरिटी धर्मांतरण में शामिल है। किसी भी मुख्यमंत्री को हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने वाले संगठन को पैसा देने का अधिकार नहीं है।” 

विहिप की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक परांडे ने भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या ईसाइयों के षड्यंत्र का परिणाम थी। अनेक सूत्रों से इसकी पुष्टि होती है। लेकिन इस मामले में राज्य सरकार आज तक न्याय प्रदान करने में विफल रही है। ईसाइयों के प्रति अनुकंपा और तुष्टीकरण ही इसका कारण है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में मिशनरियों द्वारा अबाध रूप से धर्मांतरण चल रहा है। राज्य विधानसभा में पारित धर्मांतरण विरोधी कानून का अनुपालन करने में भी सरकार की कोई रुचि नहीं दिखाई देती। केवल 3 प्रतिशत ईसाइयों के तुष्टीकरण के लिए प्रदेश के 97% हिंदुओं को बार-बार आघात दिया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण मुख्यमंत्री राहत कोष की राशि मिशनरियों को दिया जाना है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय कष्टमय जीवन जी रहे मंदिरों के पुजारियों को सरकार द्वारा किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया जाता। जीर्ण अवस्था के पुराने मठों की राज्य सरकार को कोई चिंता नहीं है। प्रदेश में बालाश्रम, अनाथाश्रम सहित अनेक संस्थाएँ आर्थिक दुर्गति का सामना कर रही हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कभी अपने रिलीफ़ फंड से उन संस्थाओं के प्रति सहयोग का हाथ नहीं बढ़ाया। लेकिन ईसाई मिशनरियों को उदार भाव से अनुदान दिया जा रहा है। सरकार के इस दोहरे मापदंड और हिन्दू विरोधी मानसिकता का विहिप विरोध करती है।

गौरतलब है कि ओडिशा सीएमओ की ओर से कहा गया था कि सीएम ने 8 जिलों में फैले MoC द्वारा संचालित 13 संस्थानों के लिए सहायता स्वीकृत की है। इस निर्णय से राज्य के विभिन्न कुष्ठ (कुष्ठ रोगियों का घर) और अनाथालयों में 900 से अधिक कैदी लाभान्वित होंगे। दरअसल केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इन संस्थानों के FCRA लाइसेंस को रिन्यूवल करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद ओडिशा सरकार ने इन संस्थानों को लाखों रुपए की मदद का ऐलान किया था।

पिछले दिनों नवीन पटनायक ने जिला प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित संगठनों का कोई भी निवासी विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संकट से पीड़ित न हो। मुख्यमंत्री ने कहा था, “जहाँ भी जरूरत हो, मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से धन का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।”

वर्करों के बीच लड़खड़ाते, खाँसते कॉन्ग्रेस अध्यक्ष… कर्नाटक में पदयात्रा से कोरोना को ये कैसा आमंत्रण

जब भारत कोरोना की तीसरी लहर की चपेट में है, संक्रमण पर काबू पाने के लिए सरकारें तरह-तरह की पाबंदियाँ लागू कर रही हैं, कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने एक पदयात्रा शुरू की है। इसकी शुरुआत से पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने चीनी वायरस के अस्तित्व को नकारते हुए बीजेपी पर इसके नाम से डराने का आरोप लगाया था। रविवार (जनवरी 9, 2022) को पदयात्रा शुरू होने के बाद सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें शिवकुमार खाँसते और चलते हुए ‘लड़खड़ाते’ नजर आते हैं। इस दौरान उनके आसपास कॉन्ग्रेस वर्करों को जमावड़ा भी दिख रहा है। यह सब तब हो रहा है जब कुछ दिन पहले ही चुनावी राज्यों में कोरोना का हवाला देकर कॉन्ग्रेस ने आयोजनों पर रोक लगाने की बात कही थी और लिबरलों ने इसे खूब सराहा था।

कर्नाटक में कोविड प्रतिबंधों के बाद भी कॉन्ग्रेस ने वहाँ 11 दिन की पदयात्रा निकालने की शुरुआत रविवार (जनवरी 9, 2022) से कर दी है। ये पदयात्रा कावेरी नदी पर मेकेदातु परियोजना (Mekedatu Project) लागू कराने के लिए निकाली जा रही है। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि पार्टी ने अपने साथ सैंकड़ों लोगों को इस यात्रा मे जोड़ा और बिन किसी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए रामनगर जिले के संगम से इसकी शुरुआत की। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष डीके शिवकुमार और सीएलपी नेता सिद्धारमैया भी पदयात्रा से जुड़े।

बता दें कि कर्नाटक में पदयात्रा का आयोजन उस समय शुरू हुआ जब वहाँ 12 हजार कोरोना केस दर्ज किए गए और पॉजिटिविटी दर 6.3 फीसद पहुँच गई। ऐसे हालातों में एक तो पार्टी ने पदयात्रा की शुरुआत करके कोरोना के समय आई गाइडलाइंस की धज्जियाँ उड़ाई। दूसरा प्रदेश अध्यक्ष ने शिवकुमार ने बयान दिया कि कर्नाटक में कोई कोरोना है ही नही। वह आरोप लगाते हैं कि देश में कोराना नाम की चीज ही नहीं है, ये सब भाजपा का किया धरा है। पूरे मामले पर खुद मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि इसमें कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा अन्य राज्यों में कैंसिल की जा रही जनसभाओं पर शिवकुमार कहते हैं कि वो रैलियाँ पॉलिटिकल थीं इसलिए निरस्त हुई, लेकिन ये पदयात्रा पानी पीने से संबंधी है और गैर राजनीतिक है इसलिए वह लोगों से अपील कर रहे हैं कि सब प्रदर्शन में आएँ। हैरानी की बात ये है कि राज्य में पार्टी अध्यक्ष होने के बाद भी डीके शिवकुमार का लगातार गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखा रहे हैं। उनकी एक वीडियो सामने आई है जिसमें वह पदयात्रा में शामिल हैं और लड़खड़ाते-खाँसते दिख रहे हैं, बाकी पार्टी कार्यकर्ता उन्हें संभाल रहे हैं। लोगों का कहना है कि ज्यादा ‘पी लेने’ के कारण शिवकुमार डगमगा कर चल रहे हैं।

इसके अलावा डीके शिवकुमार ने पदयात्रा में शामिल होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों से कोविड टेस्ट कराने से भी मना कर दिया है। पत्रकार दीपक बोपन्ना के अनुसार उन्होंने कहा है कि वो जेल चले जाएँगे लेकिन कोरोना टेस्ट के लिए स्वैब सैंपल नहीं देंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप मढ़ा है कि उनकी पदयात्रा से सत्ताधारी पार्टी की नाकामी उजागर होगी इसलिए कोविड केसों के नाम पर जनता को डराने और पदयात्रा को रोकने का काम हो रहा है। वह कहते हैं कि बीजेपी कर्फ्यू लगाकर राजनीति खेल रही है।

‘गलती हो गई, मूर्खता थी’: PM मोदी की ‘हत्या’ दिखाने वाले यूट्यूबर ने माँगी माफ़ी, कहा – परिवार को मिल रही जान से मार डालने की धमकी

पंजाब के रहने वाले 20 साल के YouTuber मनप्रीत सिंह ने एक GTA वीडियो गेम में ग्राफिक्स के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बेरहम हत्या’ को दिखाया था। अब वो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यूट्यूबर ने माफी माँगी है। उसने कहा कि वीडियो गेम के जरिए उसने केवल मजाक किया था, लेकिन कई लोगों ने उसे गंभीरता से लिया। इस विवादित गेम वीडियो को उसने अपने यूट्यूब चैनल ‘हैप्पी गोल्डस्मिथ’ पर अपलोड किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अपने यूट्यूब चैनल पर मनप्रीत सिंह ने तीन मिनट का माफीनामा जारी किया और कहा कि उसे अब ये समझ आ गया है कि वीडियो बनाना उसकी गलती थी। वीडियो में सिंह ने कहा, “चार महीने पुराने वीडियो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है। उस वीडियो के कारण मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग मुझे मैसेज कर रहे हैं और कॉल कर रहे हैं, गाली दे रहे हैं और मुझे धमका रहे हैं। मुझे पता है कि मैंने गलती की है।”

मनप्रीत ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि जब से उसका ये वीडियो वायरल हुआ, तभी से उसने वीडियो को प्राइवेट सेट कर दिया था और इसके लिए इंस्टाग्राम अकाउंट पर माफी भी माँगी थी। उसने आगे कहा, “लेकिन उसके बाद, मुझे बहुत नफरत का सामना करना पड़ रहा है। लोग गेमिंग वीडियो के एक कैरेक्टर को रियल लाइफ से जोड़ रहे हैं। मैं आपको बताना चाहूँगा कि यह एक गेमिंग वीडियो था। मैं समझता हूँ कि यह एक गलती थी।”

मनप्रीत का कहना है कि उसने अभी कुछ समय पहले ही गेमिंग वीडियो बनाना शुरू किया था और अभी भी इसे सीख रहा है। उसने आगे कहा, “इस तरह का वीडियो बनाना मेरी मूर्खता थी और मैं उसकी वजह से पीड़ित हूँ। मैं सजा भुगतने के लिए तैयार हूँ, लेकिन यह सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाई गई थी। यह एक मजाक था। मुझे नहीं पता था कि लोग इसे गंभीरता से लेंगे। यह एक पुराना वीडियो था और इसे मौजूदा हालात से जोड़ना सही नहीं है। मैंने वीडियो डिलीट कर दिया है।”

यूट्यूबर ने यह भी दावा किया कि नेटिजन्स वीडियो के कंटेंट को हास्यास्पद बनाने के लिए काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। उसने कहा, “मैं माफी माँगता हूँ और इसके लिए सजा भुगतने के लिए भी तैयार हूँ।”

वीडियो से पहले मनप्रीत ने ट्विटर के जरिए भी इसके लिए माफी माँगी थी।

क्या सच में वह मजाकिया वीडियो था?

पंजाब के बाघा के रहने वाले मनप्रीत सिंह ने चार महीने पहले विवादित वीडियो गेम अपलोड किया था। उसके यूट्यूब चैनल को करीब तीन लाख सब्सक्राइबर्स हैं। वो अपने चैनल पर अक्सर GTA5, वेलोरेंट और फार्मर सिम्युलेटर से संबंधित स्ट्रीमिंग वीडियो अपलोड करते हैं। अपने वीडियो में वो पंजाबी भाषा में कमेंट्री करते हैं।

जिस वीडियो को मनप्रीत ने डिलीट कर दिया है। इस वीडियो में उसने कहा था कि मोदी को सुरक्षा देने वाली पुलिस आज हमारे साथ काम करेगी, ‘उसे’ लगता है कि पुलिस उसकी रक्षा करेगी, लेकिन वह गलत है। इसके बाद वीडियो में वो दिखाता है कि कैसे उसके साथी प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी जिस रास्ते से गुजर रहे होते हैं उसे बंद कर दिया। वीडियो में मनप्रीत बताता है कि कैसे वह उनका रास्ता अवरुद्ध करने और ‘उसे सबक सिखाने’ की योजना बना रहे थे।

वीडियो में दिखाया जाता है कि जब पीएम मोदी का के रोल वाला व्यक्ति कार में सवार होकर चला गया तो प्रदर्शनकारियों ने उनका पीछा कर गाड़ी को ऑफ-रोड कर दिया। फिर उन्होंने पीएम की कार को अपने ट्रैक्टर से जंजीर से बाँध दिया और वापस उस स्थान पर खींच कर ले गए जहाँ सभी प्रदर्शनकारी थे। इसके बाद मनप्रीत सिंह का कैरेक्टर काँच पर गोली चलाता है। वो आगे कहता है, “मैं उन्हें गोली नहीं मारूँगा, क्योंकि पुलिस ने हमें उन्हें गोली मारने के लिए नहीं कहा है।” उसने काँच को तोड़ने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया और फिर हथियार को बेसबॉल के बल्ला बना दिया।

इसके बाद वो वीडियो में कहता है, “उसे बाहर आने दो। मैं इससे उसे सबक सिखाऊँगा।” इसी के साथ सिंह अपने बल्ले को हवा में लहराता है। इस बीच पीएम मोदी का कैरेक्टर कार से उतर कर भागने लगता है और सिख पगड़ी पहने हुए मनप्रीत सिंह के कैरेक्टर ने पीएम मोदी का पीछा किया और उन्हें बेसबाल के बल्ले से मारा। इसके बाद पीएम मोदी का कैरेक्टर खून से लथपथ सड़क पर गिर पड़ा। आश्चर्य वाली यह है कि इस वीडियो में हास्य वाली बात कहीं नहीं थी। जैसा कि मनप्रीत अपनी माफी में कहता है। बल्कि, वीडियो में जब पीएम मोदी के कैरेक्टर को कई बार मारा गया तो उसने कहा, “उसने हमें बहुत परेशान किया है।”

विवादित वीडियो पर मनप्रीत सिंह हुआ था खुश

अभी जिस विवादित स्ट्रीम को मनप्रीत सिंह ने हटा लिया है, इससे पहले उसने अपने सोशल मीडिया पोस्ट को चेक किया था और उस पर उसने अट्टहास किया था कि किस तरह से उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके साथ ही उसने दावा किया था कि विवाद के बावजूद वो अपने वीडियो को नहीं हटाएगा। मोदी समर्थकों के लिए अपशब्द का प्रयोग करते हुए उसने ये भी कहा था कि ‘यह एक गेम था’ और कहा ‘ब्लडी मोदी भक्त आ गए हैं’।

गौरतलब है कि यू-ट्यूब पर दर्जनों गेमिंग वीडियो उपलब्ध हैं, जहाँ पीएम मोदी के कैरेक्टर पर विभिन्न तरीकों से हमला करते और उसकी हत्या करते हुए दिखाया गया है।

सना खान ने ‘हरम’ में जाकर ‘काबातुल्लाह’ को अपनी आँखों से देखा, सलाम भी पेश किया: छठी बार ‘उमराह’ से लौटीं

पूर्व अभिनेत्री और मुफ़्ती अनस सैयद की बीवी सना खान ने ‘उमराह’ (मक्के की यात्रा) को लेकर अपने अनुभव इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए साझा किए हैं। उन्होंने ‘अस्सलाम वालेकुम’ से अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा कि जब से वो ‘उमराह’ में थीं तो उस दौरान कई लोगों ने उनसे काफी सवाल किए थे और कोविड-19 की तीसरी लहर भी चल रही है, इसीलिए उन्होंने वीडियो बना कर सब साफ़ करने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वो ‘खालिद टूर’ के साथ चौथी बार ‘उमराह’ करने गई थीं।

सना खान ने इस ट्रेवल एजेंसी की तारीफ करते हुए कहा कि वो उनके साथ यात्रा में काफी सहज महसूस करती हैं और वो हर छोटी-बड़ी बातों का ख्याल रखते हैं। उन्होंने बताया कि 2 दिन पहले ‘उमराह’ की योजना बनी और फिर सरे प्रबंध हुए उन्होंने कहा कि इस्लामी मुल्क सऊदी अरब के नियम-कानून हाल ही में काफी बदले हैं और लोगों से तरह-तरह की बातें सुनने को मिल रही थीं, ऐसे में उन्हें वहाँ जाने की उत्सुकता थी। उन्होंने बताया कि उनका हमेशा से सपना था कि सुबह उठते सबसे पहले ‘काबातुल्लाह’ देखूँ और छठी बार में एक पसंदीदा होटल में रुकने के कारण उनका ये सपना पूरा हुआ।

सना खान ने कहा कि ‘हरम (मक्का का पवित्र स्थल)’ जाना सबसे अच्छा मौका है और ‘काबातुल्लाह’ को अपनी आँखों से देखने का एक अलग ही अनुभव है। उन्होंने कहा कि ये किसे पता था कि अल्लाह दो साल के लिए अपना घर बंद कर देंगे। उन्होंने इसे हाजियों के लिए भी एक दुःख भरी बात बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वहाँ लैंड करते ही दो एप के जरिए अपॉइंटमेंट बुक की जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वो तुरंत मदीना में रोजे मुबारक पेश करने के लिए भी तुरंत अपॉइंटमेंट बुक कर लें।

सना खान ने कहा, “नबी के मस्जिद में जाकर आप नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए भी अंदर जाकर सलाम पेश करने का मौका एक ही बार आता है। आप वहाँ जाकर बजट के अनुसार किसी होटल में रुक सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण है वहाँ जाना। अल्लाह सबको वहाँ लेकर जाए। आप वहाँ किंगडम और कोरोना नियमों का पालन करें। अभी जा रहे हैं तो ठंड का कपड़े ले जाएँ। खालिद भाई हाजियों का काफी ख्याल रखते हैं। आप उनसे बात कर के यात्रा का प्रबंध करवा सकते हैं।”