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‘मोदीजी अपनी माँ का सर्टिफिकेट दो… कहाँ पैदा हुई थी’: सपा के अबू आजमी ने PM मोदी की 100 साल की माँ को भी चुनावी रण में घसीटा

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) में विधानसभा चुनाव (Assembly polls) जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं की बदजुबानी बढ़ती जा रही है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी (Abu Azmi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सौ साल की बुजुर्ग माँ हीराबेन मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। मंगलवार (4 जनवरी 2021) को उन्नाव में एक चुनावी रैली के दौरान आजमी ने कहा, “मोदीजी अपनी माँ का सर्टिफिकेट तो दो… कहाँ पैदा हुई थीं?”

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के महाराष्ट्र प्रमुख अबू आजमी उन्नाव के गंज मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी की नेता जूही सिंह (Juhi Singh) के साथ प्रचार कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया। आजमी का यह आपत्तिजनक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं।

इस दौरान CAA और NRC के मुद्दे पर बात करते हुए आजमी ने कहा, “अगर हम यह मान भी लें कि भारत के सभी मुस्लिम एक हो जाएँ तो आप (मुस्लिम) सिर्फ 15 फीसदी होंगे और वे (हिन्दू) 85% हैं! BJP के लोग हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।” सपा नेता ने दावा किया, “मैं यहाँ आपको यह बताने आया हूँ कि अगर आप सभी एकजुट होकर ब्लॉक के रूप में वोट देंगे तो वे 25 सीटें भी नहीं जीत पाएँगे।”

जनसभा के दौरान अबू आजमी मुस्लिमों को बरगलाने की कोशिश करते देखे गए। गलत तथ्यों के आधार पर लोगों को भड़काते हुए उन्होंने कहा कि CAA और NRC भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा, “500 सीटें जीतकर मोदी फिर से शासन करना चाहते हैं, जिसके लिए वो NRC जैसे बिल लाएँगे और आपसे पूछेंगे कि आपके पूर्वज कहाँ पैदा हुए थे… मोदीजी, अपनी माँ का सर्टिफिकेट दिखाओ, वो कहाँ पैदा हुई थी?”

कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले आजमी महिलाओं को लेकर विवादास्पद बयानबाजी करने के लिए कुख्यात हैं। आजमी ने दिसंबर 2021 में मुस्लिम लड़कियों की जल्द शादी की वकालत करते हुए कहा था, “अगर मेरी बेटी, मेरी बहन घर में अकेली है, तब भी मुझे ये बताया गया है कि अकेली बेटी के साथ मत रहो, शैतान कभी भी सवार हो सकता है। हम देख रहे हैं आज कि कजन ब्रदर, भाई, बाप के रेप के केस सामने आ रहे हैं। ये प्रिकॉशन हमारे पुरखों ने लिया है।”

एप्पल से आगे अब दुनिया में 4 ही देश, कंपनियों से भी बनता है राष्ट्र: वामपंथी-समाजवादी चोचले और फ्री की बिजली-पानी है कोढ़

तकनीक की दुनिया में अपनी कामयाबी से आए दिन नए-नए कीर्तिमान बनाने वाली एप्पल कंपनी ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया। ताजा आँकड़ों के अनुसार एप्पल की मार्केट वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 225 लाख करोड़ रुपए) पार कर गई है। ये रिकॉर्ड इतना बड़ा है कि इसके कारण सिर्फ एक कंपनी से 186 देश पीछे रह गए हैं। अब यदि कोई इस कंपनी से आगे है तो वो 4 देश हैं। इन देशों के नाम अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी है। भारत की बात करें तो हमारे देश की जीडीपी 2.62 ट्रिलियन डॉलर है।

कंपनियों की बात करें तो अगर बोइंग, कोका-कोला, डिज़नी, एक्सॉन-मोबिल, मैकडॉनल्ड्स, नेटफ्लिक्स और वॉलमार्ट की वैल्यू जोड़ दी जाए तो भी एप्पल अकेले इन सबसे ज्यादा मूल्यवान है। वहीं इसके आसपास जो कंपनियाँ हैं, वो माइक्रोसॉफ्ट जिसकी मार्केट वैल्यू 2.51 ट्रिलियन डॉलर है, गूगल की एल्फाबेट इंक- 1.92 ट्रिलियन डॉलर, सउदी अरामको- 1.9 ट्रिलियन डॉलर और अमेजन – 1.73 ट्रिलियन डॉलर है।

एप्पल कंपनी ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए जानकारी दी की एप्पल ने 1 ट्रिलियन डॉलर का आँकड़ा 2018 में पार किया था और 2 ट्रिलियन का आँकड़ा 2020 में…। मात्र 1 साल के बाद एप्पल के लिए ये दोबारा जश्न मनाने का क्षण है। कंपनी के सह-संस्थापक ने इस मुकाम पर पहुँचने के बाद जानकारी दी कि उन्हें पहले ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने के लिए 38 साल इंतजार करना पड़ा। फिर दूसरे ट्रिलियन डॉलर के लिए 24 महीने और तीसरे का रिकॉर्ड मात्र 16 माह में पूरा गया।

यहाँ बता दें कि एप्पल दुनिया की पहली सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है जो इस मुकाम तक पहुँची है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के शेयर सोमवार को 182.01 डॉलर पर ट्रेड कर रहे थे। आज इस कंपनी की कामयाबी देखने के बाद आने वाले समय में कई लोग इसकी सक्सेस स्टोरी को मोटिवेशन कोट्स में शामिल करके ये दिखाने का प्रयास करेंगे कि कैसे 45 साल पहले खोली गई एक कंपनी ने सैंकड़ों देशों को पछाड़ दिया है। हालाँकि, इस कंपनी के खुलने और इसके बाजार में बने रहने के पीछे कैसा संघर्ष और स्थिति रही होगी इसपर कोई बात नहीं करेगा।

कई वामपंथी बुद्धिजीवी तो हमारे ही देश में मौजूद हैं जो एप्पल की इस कामयाबी के पीछे प्रधानमंत्री मोदी को कोसना शुरू कर दिए हैं। उदाहरण के लिए नेहरू मिथक और सत्य के लेखक पीयूष बबेले ने क्या लिखा है इसे पढ़िए। ये कहते हैं- “प्रधानमंत्री मोदी हमें पट्टी पढ़ाते रहे कि भारत 2022 में ट्रिलियन डॉलर इकोनामी बन जाएगा। उधर अमेरिका की कंपनी एप्पल की नेटवर्थ आज 3 ट्रिलियन डॉलर हो गई। तपस्या में कहाँ कमी रह गई सरकार?”

आप सोचिए कि जिस कंपनी के कीर्तिमान पर अपने देश की सरकार को कोसने का काम शुरू हुआ है वही सरकार अपको टेक-फ्रेंडली बनाने के लिए और देश में औद्योगिक विकास के लिए 2014 से ही मेहनत कर रही है। जिस जम्मू-कश्मीर से वामपंथी, कट्टरपंथी आर्टिकल 370 के हटने के कारण अब भी मोदी सरकार को कोसने में जुटे हैं वहाँ ये सरकार केवल औद्योगिक विकास के लिए नई स्कीमें लेकर गई है। साल 2018 में सैमसंग जैसी कंपनी का भारत में सबसे बड़ा प्लांट लगना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह देश को औद्योगिक दृष्टि से परिपक्व करने की मेहनत की जा रही है।

जब हम अमेरिका, चीन, जर्मनी जैसे देशों की जीडीपी की तुलना करके भारत को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे होते, उस समय हम इस पक्ष को भूल जाते है कि ये देश और इनकी आर्थिक मजबूती वहाँ की सरकारों के कारण नहीं है। अमेरिका में चलने वाली एप्पल की कंपनी, टेसला की आमदनी, फेकबुक-मेटा की लोकप्रियता उसे अन्य देशों से आगे बढ़ाती हैं।

सबसे खास बात ये है कि इन कंपनियो को चलाने वाले लोग कोई बड़े अमाउंट के साथ बाजार में नहीं आए थे। लेकिन आज इनकी मेहनत काबिलियत ने इन्हें इस लायक बनाया है कि 186 देशों की जीडीपी मजबूर है इनकी मार्केट वैल्यू के आगे खुद कम दिखाने में। सर्वेश्रेष्ठ जीडीपी वाले देशों में चलने वाली अधिकांश कंपनियाँ 25 से 30 पहले शुरू हुई थीं जिन्होंने आज देश की काया पलट कर रख दी है। ये 25-30 साल यदि भारत के संदर्भ में पीछे जाएँ तो पता चलता है कि यहाँ तो खुली अर्थव्यवस्था ही 1991 में आधिकारिक रूप से आई थी जबकि हालात आज भी ऐसे हैं कि यदि सरकार आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजना ले आए तो कहा जाता है कि रोजगार की कमी के कारण ये पैंतरे अपनाए जा रहे हैं

आज हम आलोचना कर सकते हैं कि जो ट्रिलियन्स के वादे सरकार ने किए वो पूरे नहीं हुए। मगर हम न तो कोरोना जैसी आपदा और उससे गहराए संकट को नजर अंदाज कर सकते हैं, न ही वर्तमान सरकार के उन प्रयासों को जो हमें टेक सेवी बनाने के लिए नित प्रयत्न कर रही हैं और न ही देश में पसरी समाजवादी नीति को जो बढ़ते देश की कामयाबी के बीच में फ्री बिजली, पानी के खेल को घुसाती हैं और संभावनाएँ तलाश करने की बजाए सत्ता को कैसे फिक्स रखा जाए इसके गुण सिखाती है।

ज्यादा पीछे न जाएँ तो 2018 की ही बात है। भारत के नाम एक नई उपलब्धि लिखी गई थी जब नोएडा में सैमसंग ने प्लांट की शुरूआत की थी। हालाँकि, उस समय विपक्षी पार्टियों के लिए मुद्दा ये नहीं था कि सैमसंग जैसी और कंपनियों को देश में प्लांट लगाने के लिए आकर्षित किया जाना चाहिए। होड़ इस बात की थी कि मोदी सरकार इसका क्रेडिट ले रही है। आज की ही बात करें तो देख लीजिए कि 5 राज्यों में चुनाव होने हैं कहाँ और कौन सी पार्टी आपको फ्री का लालच देकर अपनी ओर नहीं आकर्षित कर रही? किसके मेनिफेस्टों में देश को मजबूत करने का बिंदु है।

ये हमारे देश की  विडंबना है कि यहाँ के राजनेता अपने फायदे के लिए आए दिन उद्योगपतियों को निशाना बनाते हैं और इसे मजबूत करने की जगह जनता को फ्री का और आरक्षण का लालच दिया जाता है। विस्तार की संभावनाएँ खोजने की बजाय वोट प्रतिशत पर फोकस किया जाता है। मगर, ये बात सच है कि जैसे देश, राष्ट्र के नागरिकों से निर्मित होता है, वैसे ही उसकी अर्थव्यवस्था के उतरने-चढ़ने में बड़े-बड़े उद्योग खासी भूमिका निभाते हैं। अगर आज भारत भी एप्पल जैसी कंपनियों के लिए देश में जगह बनाता है तो यहाँ न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि अर्थव्यव्था की सूरत भी बदल जाएगी।

‘ये कुदरती था’: पंजाब में PM मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक पर बोले CM चन्नी – 70000 कुर्सी लगी थी, लेकिन 700 ही रैली में आए

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक वाली बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने पंजाब सरकार से कहा है कि वो इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय करे और कार्रवाई करे। जबकि CM चन्नी का कहना है कि शुरुआत में पीएम मोदी को हवाई यात्रा करनी थी, लेकिन अंतिम क्षण में यात्रा की योजना बदल दी गई। उन्होंने योजना में बदलाव को ही सुरक्षा में चूक के लिए दोषी ठहरा दिया।

पंजाब में कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया ने कहा कि भाजपा राजनीतिक कारणों से उनकी सरकार पर आरोप लगा रही है। उन्होंने दावा किया कि वो खुद देर रात तक पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा योजना पर निगरानी रखे हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी के रोड शो का अंतिम समय में प्लान बना था और रैली के लिए 70,000 कुर्सियों के इंतजाम के बावजूद मात्र 700 लोग ही पहुँचे। फिरोजपुर की रैली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की कि कुछ कारणों से पीएम मोदी नहीं आ पाएँगे।

वहीं ‘CNN न्यूज़ 18’ से बात करते हुए पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने मुद्दे को लेकर कहा, “ये कुदरती था।” सरकारी सूत्रों के हवाले से चैनल ने बताया है कि इस तरह का हैरान कर देने वाले दृश्य फ्लाईओवर पर इसीलिए देखने को मिला, क्योंकि पंजाब पुलिस और प्रदर्शनकारियों में सहमति बनी थी। क्योंकि केवल पंजाब पुलिस को ही पीएम मोदी की यात्रा का रूट पता था। इस तरह का पुलिस का व्यवहार पहले कभी देखने को नहीं मिला। कहा जा रहा है कि हालिया वर्षों में किसी भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में ये सबसे बड़ी चूक है।

कॉन्ग्रेस के ‘डिजिटल कम्युनिकेशन एंड सोशल मीडिया’ सेल के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर गौरव पांधी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पंजाब का पॉवर! कल से ही पंजाब की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को रोक कर रखा हुआ था। पीएम मोदी को अपनी रैली रद्द कर के दिल्ली लौटना पड़ा। पंजाब विरोधी मोदी, वापस जाओ।” कई अन्य कॉन्ग्रेस नेता भी रैली रद्द होने का जश्न मनाते हुए दिखे। लिबरल पत्रकार भी इसमें शामिल हुए।

पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक: अब तक क्या-क्या हुआ

पंजाब में सुरक्षा में बड़ी चूक के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भटिंडा से वापस लौटना पड़ा। साथ ही फिरोजपुर में प्रस्तावित उनकी रैली को भी रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में पंजाब की सरकार से जवाब माँगा है। ANI की खबर के अनुसार, भटिंडा एयरपोर्ट से वापस लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ के अधिकारियों से कहा, “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना, कि मैं भटिंडा एयरपोर्ट तक ज़िंदा पहुँच गया।” इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए उड़ान भरी।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अपनी निकृष्ट सोच और ओछी हरकतों से पंजाब की कॉन्रेस सरकार ने दिखा दिया है कि वह विकास विरोधी है और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए भी उनके दिल में कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह घटना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी चूक थी, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसा करने में इस बात की भी परवाह नहीं की कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के महान सपूत सरदार भगत सिंह और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि देनी थी और राज्य में प्रमुख विकास कार्यों की आधारशिला रखनी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जारी किया बयान। MHA ने अपने बयान में कहा है कि बुधवार (5 जनवरी, 2022) को पीएम मोदी का विमान भठिंडा में लैंड हुआ, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध बताया जा रहा है। बता दें कि सड़क मार्ग से ये यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) का बयान

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और उनके कार्यक्रमों के विवरण से अवगत करा दिया गया था। MHA ने भी इसकी पुष्टि की है। MHA के अनुसार, ये पंजाब के पुलिस-प्रशासन का काम था कि वो प्रबंधन के लिए ज़रूरी संसाधन की माँग करें और किसी आकस्मिक स्थिति के विषय में योजना तैयार करें। MHA ने बताया है कि सड़क मार्ग पर सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने ज़रूरी प्रबंध नहीं किए, अतिरिक्त बल तैनात नहीं किया।

MHA ने कहा, “सुरक्षा में इस चूक के बाद निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला वापस भठिंडा एयरपोर्ट पर जाएगा। सुरक्षा में इस गंभीर चूक के बाद पंजाब की राज्य सरकार से भी डिटेल में रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही राज्य सरकार को कहा गया है कि वो इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करे।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि हजारों करोड़ रुपयों की विकास परियोजनाओं की सौगात देने पंजाब पहुँचे पीएम मोदी के कार्यक्रम में बाधा पैदा किया जाना व्यथित करने वाला है।

जेपी नड्डा ने कहा कि इस तरह की ओछी मानसिकता को पंजाब के विकास के आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के विकास के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दे दिया गया था कि वो लोगों को रैली में हिस्सा लेने से रोके। पुलिस के कारण बड़ी संख्या में बसें अटकी रहीं और प्रदर्शनकारियों के साथ वो मौन सहमति में थे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फोन उठाने या फिर मामले का समाधान करने से इनकार कर दिया। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार के इन हथकंडों से लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वालों को ठेस पहुँचेगी।”

पहाड़ी, रेलवे लाइन, घने बादल… कैसे क्रैश हुआ CDS रावत का हेलिकॉप्टर: रक्षा मंत्री के हवाले जाँच रिपोर्ट, दावा- दुर्घटना तकनीकी कारणों से नहीं

देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) की हेलिकॉप्टर क्रैश मामले की जाँच रिपोर्ट बुधवार (5 जनवरी 2022) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) को सौंप दी गई। पिछले महीने हुए इस हादसे में सीडीएस जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत कुल 14 सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो गई थी। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह भी जीवन-मौत से जूझते हुए एक हफ्ते बाद दुनिया से विदा हो गए थे।

हादसे की जाँच के लिए त्रि-सेवा कमिटी के प्रमुख एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने वायुसेना प्रमुख विवेक राम (वीआर) चौधरी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से करीब 45 मिनट तक मुलाकात की। इस दौरान रक्षा सचिव भी मौजूद रहे। चीफ एयर चीफ मार्शल ने रक्षामंत्री को यह रिपोर्ट सौंपी। इस त्रिस्तरीय जाँच रिपोर्ट में भविष्य में VIPs के हेलिकॉप्टर संचालन के लिए कुछ सिफारिशें भी की गई हैं। बता दें कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए तीनों सेनाओं के अधिकारियों की जाँच समिति बनाई गई थी, जो कि अब पूरी हो चुकी है।

जाँच टीम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को विस्तार से जानकारी दी और बताया कि आखिर किन हालात में ये हादसा हुआ था। इस पर फिलहाल आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि भारतीय वायु सेना का Mi-17V5 हेलिकॉप्टर किसी तकनीकी त्रुटि के कारण हादसे का शिकार नहीं हुआ था। इसमें बताया गया कि जब विमान पहाड़ियों से गुजरते समय एक रेलवे लाइन के पास उड़ रहा था, तभी अचानक घने बादल में घुस गया। बताया गया कि हेलिकॉप्टर कम ऊँचाई पर उड़ रहा था। बावजूद इसके चालक दल ने विमान उतारने का फैसला नहीं किया। ऐसे में विमान एक चट्टान से टकरा गया।

बताया जा रहा है कि चूँकि पूरा चालक दल ‘मास्टर ग्रीन’ श्रेणी का था, तो ऐसा लगता है कि उन्हें भरोसा था कि वे स्थिति से बाहर निकलने में सक्षम होंगे, क्योंकि आपात स्थिति का सुझाव देने के लिए ग्राउंड स्टेशनों पर कोई कॉल नहीं किया गया। जानकारी के मुताबिक, तीन बलों के परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर बेड़े में सर्वश्रेष्ठ पायलटों को ‘मास्टर ग्रीन’ श्रेणी दी जाती है। इन पायलटों को कम दृश्यता में भी विमान उड़ाने और उतारने में महारत हासिल होती है।

इसके अलावा, जाँच समिति द्वारा की गई सिफारिशों में कहा गया है कि भविष्य में चालक दल में मास्टर ग्रीन और अन्य श्रेणी के पायलट होने चाहिए, ताकि यदि आवश्यक हो तो वे जमीन पर स्टेशन से मदद ले सकें। एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता वाली जाँच समिति ने कई अन्य सिफारिशें भी की हैं।

उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर को हुए हादसे में जनरल रावत समेत 14 सैन्य अधिकारियों की मृत्यु हो गई थी। मृतकों में रावत के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह भी शामिल थे।

‘अपने सीएम (चन्नी) को थैंक्स कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया’: पंजाब में अधिकारियों से बोले PM मोदी

पंजाब में सुरक्षा में बड़ी चूक के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भटिंडा से वापस लौटना पड़ा। साथ ही फिरोजपुर में प्रस्तावित उनकी रैली को भी रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में पंजाब की सरकार से जवाब माँगा है। ANI की खबर के अनुसार, भटिंडा एयरपोर्ट से वापस लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ के अधिकारियों से कहा, “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना, कि मैं भटिंडा एयरपोर्ट तक ज़िंदा पहुँच गया।” इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए उड़ान भरी।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अपनी निकृष्ट सोच और ओछी हरकतों से पंजाब की कॉन्रेस सरकार ने दिखा दिया है कि वह विकास विरोधी है और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए भी उनके दिल में कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह घटना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी चूक थी, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसा करने में इस बात की भी परवाह नहीं की कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के महान सपूत सरदार भगत सिंह और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि देनी थी और राज्य में प्रमुख विकास कार्यों की आधारशिला रखनी थी।

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जारी किया बयान। MHA ने अपने बयान में कहा है कि बुधवार (5 जनवरी, 2022) को पीएम मोदी का विमान भठिंडा में लैंड हुआ, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध बताया जा रहा है। बता दें कि सड़क मार्ग से ये यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और उनके कार्यक्रमों के विवरण से अवगत करा दिया गया था। MHA ने भी इसकी पुष्टि की है। MHA के अनुसार, ये पंजाब के पुलिस-प्रशासन का काम था कि वो प्रबंधन के लिए ज़रूरी संसाधन की माँग करें और किसी आकस्मिक स्थिति के विषय में योजना तैयार करें। MHA ने बताया है कि सड़क मार्ग पर सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने ज़रूरी प्रबंध नहीं किए, अतिरिक्त बल तैनात नहीं किया।

MHA ने कहा, “सुरक्षा में इस चूक के बाद निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला वापस भठिंडा एयरपोर्ट पर जाएगा। सुरक्षा में इस गंभीर चूक के बाद पंजाब की राज्य सरकार से भी डिटेल में रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही राज्य सरकार को कहा गया है कि वो इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करे।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि हजारों करोड़ रुपयों की विकास परियोजनाओं की सौगात देने पंजाब पहुँचे पीएम मोदी के कार्यक्रम में बाधा पैदा किया जाना व्यथित करने वाला है।

जेपी नड्डा ने कहा कि इस तरह की ओछी मानसिकता को पंजाब के विकास के आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के विकास के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दे दिया गया था कि वो लोगों को रैली में हिस्सा लेने से रोके। पुलिस के कारण बड़ी संख्या में बसें अटकी रहीं और प्रदर्शनकारियों के साथ वो मौन सहमति में थे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फोन उठाने या फिर मामले का समाधान करने से इनकार कर दिया। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार के इन हथकंडों से लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वालों को ठेस पहुँचेगी।”

झारखंड में नक्सलियों के हमले में बाल-बाल बचे बीजेपी नेता गुरुचरण नायक: दो बॉडीगार्ड की गला रेत हत्या, AK-47 और इंसास राइफलें लूटीं

झारखंड (Jharkhand) से बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व विधायक गुरुचरण नायक (Gurucharan Nayak) पर नक्सलियों द्वारा हमला (Naxal attack) करने का मामला सामने आया है। हालाँकि, इस हमले में नायक बाल-बाल बचे हैं, लेकिन उनके दो बॉडीगार्ड- शंकर नायक और ठाकुर हेम्ब्रम की नक्सलियों ने गला रेतकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि लगभग 100 नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया, लेकिन वे भीड़ में छिपकर किसी भागने में कामयाब रहे।

नायक का तीसरा बॉडीगार्ड टुडू नायक भी नक्सलियों से अपनी जान बचाकर भागने में कामयाब रहा। पूर्व विधायक ने भीड़ छिपकर अपनी जान बचाई। नक्सलियों ने तीनों बॉडीगार्ड से एक एके 47 और दो इंसास राइफलें भी लूट ली हैं। घटना के ढाई घंटे बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची और एक बॉडीगार्ड का शव बरामद किया। हालाँकि, दूसरे शव को लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं सामने आई है। इस घटना को लेकर चक्रधरपुर उप-मंडल के डीएसपी दिलीप जाल्क्सो ने ऑपइंडिया को बताया, “हम इस मामले में अपडेट लेने की कोशिश कर रहें हैं कि दूसरे पुलिस वाले का शव बरामद किया गया है या नहीं।”

गौरतलब है कि बीजेपी नेता गुरुचरण नायक गोइलकेरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत झिलौरा गाँव के प्रोजेक्ट हाईस्कूल में दो दिवसीय फुटबॉल मैच के पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होने के लिए गए थे। इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े नक्सल कमांडर मोच्चू के ग्रुप के करीब 100 नक्सली भीड़ में शामिल हो गए। शाम करीब 5:15 बजे कार्यक्रम खत्म होने के बाद BJP नेता जैसे ही अपनी कार के पास पहुँचे, नक्सलियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। दो बॉडीगार्ड नक्सलियों के अंबुश में फँस गए और उनकी हत्या कर दी गई।

पुरस्कार वितरण समारोह में उपस्थित बीजेपी नेता गुरुचरण नायक (बाएँ से दूसरे)

भाजपा नेता वहाँ से सीधे तूनिया गाँव स्थित अपने घर पहुँचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी। जिस जगह पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ था, वहाँ से उनका घर केवल डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाद में बीजेपी नेता ने मीडिया को बताया, “हर साल की तरह हम खेल के मैदान में गए थे। पुरस्कार बँटने के बाद मैं शाम 5:15 बजे अपनी गाड़ी में बैठने जा रहा था, तभी 20-30 माओवादियों ने हम पर हमला कर दिया। माओवादी हंगामे में मुझे ढूँढ नहीं पाए, इसलिए मैं भागने में सफल रहा। नक्सलियों ने एक एके-47 और दो इंसास राइफलें भी लूट लीं।”

पुलिस ने कहा- हमें नहीं बताया

पूर्व विधायक के दौरे पर पश्चिमी सिंहभूम के SSP अजय लिंडा ने कहा है कि नायक बिना किसी को बताए नक्सल प्रभावित इलाके में गए थे। इसी तरह से चक्रधरपुर के DSP ज़ाल्क्सो ने कहा, “पुलिस को पूर्व विधायक के यहाँ किसी कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।”

चार-पाँच दिन पहले भी CPI (M) के नक्सलियों ने गोइलकेरा थाना क्षेत्र के दो नागरिकों को पुलिस का मुखबिर बता हत्या कर दी थी। इसके अलावा नक्सलियों ने बोयाराम लोमगा नामक वन विभाग के एक कर्मचारी की भी हत्या कर दी थी।

नायक नक्सलियों की हिटलिस्ट में

हालाँकि, ऐसा एक दशक में दूसरी बार हुआ, जब नायक पर नक्सलियों ने हमले किए हैं। इससे पहले 9 जनवरी 2012 को आनंदपुर थाना क्षेत्र के हरता और खटंगबेरा में नक्सलियों ने उन पर जानलेवा हमला किया था। उस दौरान भी वे अपनी जान बचाने में सफल रहे थे।

नक्सलियों को रोकने में विफल हेमंत सोरेन सरकार (Hemant soren Government)

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babu Lal Marandi) ने झारखंड में नक्सली घटनाओं के बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इन घटनाओं को रोकने में विफल रही है। मरांडी पूर्व विधायक से मिलने चक्रधरपुर जाने वाले हैं। बीजेपी ने इस घटना का विरोध करने का निर्णय लिया है। पूर्व सीएम मरांडी ने कहा, “झारखंड में हालात चिंताजनक हैं और लोग चिंतित हैं। राज्य सरकार झारखंड में वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए अनिच्छुक दिख रही है।”

आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया।

इससे पहले भी हुए हैं ऐसे हमले

इससे पहले 16 जनवरी 2005 को गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र के दुर्ग ढाबैया गाँव में तीन तीन नक्सलियों ने वरिष्ठ नेता व भाकपा-माले (लिबरेशन) के विधायक महेंद्र प्रसाद सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नक्सलियों ने उनका गला काट दिया था।

इसी तरह से 4 मार्च 2007 को जमशेदपुर के घाटशिला थाना क्षेत्र के बगुरिया में एक फुटबॉल मैच पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के दौरान भाकपा (माओवादी) ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद सुनील महतो की हत्या कर दी। इस मामले की जाँच सीबीआई कर रही है।

9 जुलाई 2008 CPIM से जुड़े नक्सली कुंदन पाहन के नेतृत्व नक्सलियों ने रांची के बुंडू के एक स्कूल में एक समारोह के दौरान रमेश सिंह मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हमले में रमेश सिंह मुंडा के दो बॉडीगार्ड और एक छात्र की मौत हो गई थी। वह तामार से जद(यू) के मौजूदा विधायक थे। इस घटना की जाँच एनआईए कर रही है।

पश्चिम बंगाल में अपने नेता किशनजी की हत्या का बदला लेने के लिए 3 दिसंबर 2011 को भाकपा (माओवादी) ने लातेहार जिले के लाडू मोड़ में झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और चतरा से मौजूदा सांसद इंदर सिंह नामधारी के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस घटना में 8 पुलिसकर्मियों समेत 10 लोगों की मौत हुई थी।

सपा के संपर्क में आते ही दूध बेचने वाला बना 5000 करोड़ का मालिक: जानिए कौन हैं अखिलेश यादव के करीबी ACE ग्रुप के मालिक अजय चौधरी

आयकर विभाग ने मंगलवार (4 जनवरी, 2022) की सुबह देश के मशहूर बिल्डर और ACE रिएल एस्टेट ग्रुप के मालिक अजय चौधरी (Ajay Choudhary) के दिल्ली, आगरा और नोएडा समेत कई ठिकानों पर छापेमारी (Raid) की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिल्डर अजय चौधरी को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का करीबी बताया जा रहा है।

आयकर विभाग ACE ग्रुप के 30 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है, क्योंकि ग्रुप के कई प्रोजेक्ट नोएडा और एनसीआर में चल रहे हैं। नोएडा के सेक्टर 126 स्थित दफ्तर में कल सुबह करीब 8 बजे से छापेमारी चल रही है। आइए आपको बताते हैं कि कभी अपने गाँव में दूध बेचने वाला अजय चौधरी कैसे देश के बड़े बिल्डरों में शामिल हुए।

अजय चौधरी उर्फ संजू राठी अभी नोएडा में रहते हैं, लेकिन एक समय में अजय कभी अपने बागपत अंतर्गत गाँव महरमपुर से दूध बेचने के लिए ट्रेन से दिल्ली जाया करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक, 20 साल पहले अजय की गाँव में ही दूध की डेयरी हुआ करती थी। बाद में वह साइकिल से खेकड़ा, फिर वहाँ से ट्रेन द्वारा दिल्ली के यमुना विहार जाकर दूध बेचने लगे। उनके बारे में बताया जाता है कि लंबी दूरी तय करने के लिए वह एक समय बाइक का इस्तेमाल भी किया करते थे।

उन्होंने नोएडा में कुछ समय प्राइवेट नौकरी भी की। इसी दौरान वह सपा नेताओं के संपर्क में आए। सपा नेताओं ने अजय चौधरी की मुलाकात सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से कराई। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की वर्ष 2010 से 2017 (योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले) के दौरान अजय चौधरी पर ऐसी कृपा बरसी कि वह कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गए और देश के नामी बिल्डरों में शुमार हो गए।

यही नहीं अजय के गाँव में उनका छोटा सा मकान देखते ही देखते 40 बीघे के फार्म हाउस में बदल गया। आज पाँच बीघे में बना उनका तीन मंजिला मकान किसी राजमहल से कम नहीं है। यहाँ उनके परिवार वाले शान से रहते हैं। अजय के परिवार में बड़े भाई प्रताप उर्फ सतीश, माँ सफेदी, पत्नी कृष्णा व एक बेटी है। चाचा राजेंद्र गाँव के पूर्व प्रधान हैं।

आईटी की रेड में पता चला है कि उसकी 25 कंपनियों का टर्नओवर 5000 करोड़ तक का है। इससे पहले भी सपा के कई करीबी आईटी रेड में पकड़े गए हैं। दिसंबर 2021 में, आगरा में मनोज यादव, लखनऊ में नीतू यादव उर्फ जैनेंद्र यादव जैसे कई सपा नेताओं और सहयोगियों के परिसरों पर आईटी अधिकारियों ने छापा मारा था।

इससे पहले आयकर विभाग ने पूर्वी यूपी में स्थित मऊ जिले के सहदतपुरा इलाके में राजीव राय के आवास पर छापेमारी की थी। राजीव राय समाजवादी पार्टी के सचिव और प्रवक्ता हैं। हाल ही में इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के यहाँ भी छापेमारी हुई थी। इत्र कारोबारी के आवास पर छापेमारी में 284 करोड़ रुपए से अधिक का कैश, 26 किलोग्राम सोना और 600 किलोग्राम चंदन की लकड़ी बरामद हुई थी। जैन भी समाजवादी पार्टी के करीबी हैं। बाद में सपा के एमएलसी पुष्पराज जैन पर भी छापा मारा गया था।

पंजाब दौरे पर PM मोदी की सुरक्षा में बड़ी सेंध, प्रदर्शनकारियों के कारण वापस लौटे: CM चन्नी ने फोन तक नहीं उठाया, MHA ने जारी किया बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जारी किया बयान। MHA ने अपने बयान में कहा है कि बुधवार (5 जनवरी, 2022) को पीएम मोदी का विमान भठिंडा में लैंड हुआ, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध बताया जा रहा है। बता दें कि सड़क मार्ग से ये यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बयान

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और उनके कार्यक्रमों के विवरण से अवगत करा दिया गया था। MHA ने भी इसकी पुष्टि की है। MHA के अनुसार, ये पंजाब के पुलिस-प्रशासन का काम था कि वो प्रबंधन के लिए ज़रूरी संसाधन की माँग करें और किसी आकस्मिक स्थिति के विषय में योजना तैयार करें। MHA ने बताया है कि सड़क मार्ग पर सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने ज़रूरी प्रबंध नहीं किए, अतिरिक्त बल तैनात नहीं किया।

MHA ने कहा, “सुरक्षा में इस चूक के बाद निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला वापस भठिंडा एयरपोर्ट पर जाएगा। सुरक्षा में इस गंभीर चूक के बाद पंजाब की राज्य सरकार से भी डिटेल में रिपोर्ट तलब की गई है। साथ ही राज्य सरकार को कहा गया है कि वो इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करे।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि हजारों करोड़ रुपयों की विकास परियोजनाओं की सौगात देने पंजाब पहुँचे पीएम मोदी के कार्यक्रम में बाधा पैदा किया जाना व्यथित करने वाला है।

जेपी नड्डा ने कहा कि इस तरह की ओछी मानसिकता को पंजाब के विकास के आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के विकास के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दे दिया गया था कि वो लोगों को रैली में हिस्सा लेने से रोके। पुलिस के कारण बड़ी संख्या में बसें अटकी रहीं और प्रदर्शनकारियों के साथ वो मौन सहमति में थे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फोन उठाने या फिर मामले का समाधान करने से इनकार कर दिया। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार के इन हथकंडों से लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वालों को ठेस पहुँचेगी।”

‘हिंदू लड़कियों को पसंद है मुस्लिमों का…’ से लेकर ‘हिंदू रखैल… मुस्लिम मर्द की दीवानी’: सोशल मीडिया पर धर्म को निशाना बना अश्लीलता, जुड़े हैं हजारों

सोशल मीडिया पर महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है, वो भी धर्म के आधार पर। कई ऐसे कंटेंट्स सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि हिन्दू महिलाओं की प्राइवेसी भंग कर के उन्हें बदनाम किया जा रहा है। मुस्लिम पुरुषों के साथ उनके नाम जोड़ कर उन्हें सरेआम ‘वेश्या’ कहा जा रहा है। धर्म के आधार पर महिलाओं की ऑनलाइन ‘बिक्री’ और उनके अश्लील कंटेंट्स बनाए जाने और मुस्लिम पुरुषों की ‘श्रेष्ठता’ साबित करने के लिए उनके इस्तेमाल के पीछे कौन लोग हैं, ये पता लगाना प्रशासन का काम है।

लेकिन, इस मामले में लोगों की चुप्पी ध्यान देने लायक है। आखिर अब हिन्दू महिलाएँ ‘वोट बैंक’ तो हैं नहीं, इसीलिए उनकी भावनाओं की कोई कदर नहीं है नेताओं के लिए। सोशल मीडिया पर कई एक्टिविस्ट्स ने इस तरह सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है और मोदी सरकार के मंत्रियों ने इसका संज्ञान भी किया है। क्या इसके पीछे इस्लामी कट्टरवादी हैं, जो हिन्दू महिलाओं का अश्लील चित्रण कर के और उनके चरित्र के हनन का प्रयास कर के अपनी ‘आतंरिक संतुष्टि’ प्राप्त करते हैं।

सबसे पहले एक फेसबुक पेज की बात करते हैं, जिसका नाम है ‘संस्कारी हिन्दू बीवी मुस्लिम मर्द की दीवानी’। साथ ही इसकी प्रोफ़ाइल तस्वीर में एक ऐसा चित्र लगाया गया है, जिसमें एक मुस्लिम महिला एक हिन्दू लड़की को पकड़े हुआ है। इसकी कवर पिक में एक पेंटिंग है। पेंटिंग में एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति को दिखाया गया है और उसके साथ उसकी टाई पकड़े हुए साड़ी में एक महिला है, स्पष्ट है जिसे हिन्दू दिखाया गया है। मुस्लिम बुजुर्ग की इस्लामी टोपी पर चाँद-तारा बना हुआ है।

एक और फेसबुक ग्रुप है, जिसका नाम ‘मुस्लिम मर्द औरत का प्यासा’, जिसमें 872 लोग जुड़े हुए हैं। इसकी मुख्य तस्वीर में एक महिला और एक पुरुष एक-दूसरे को किस कर रहे हैं। स्पष्ट है, पुरुष को मुस्लिम और महिला को हिन्दू के रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें ‘हन्नी जान’ नाम के एक यूजर पूछ भी रहा होता है कि क्या कोई हिन्दू महिला ऑनलाइन है? क्या इस तरह के ग्रुप्स बना कर और उसमें हजारों लोगों को जोड़ कर हिन्दू महिलाओं को लेकर फैलाई जा रही अश्लीलता पर कोई आवाज़ उठाएगा?

“कोई हिंदू औरत ऑनलाइन है” – ऐसे ग्रुप की बातें

इसी तरह के एक और इंस्टाग्राम पेज को देखिए, जिसका यूजरनेम है – ‘ज़ालिम मुस्लिम कसाई’ और इसका नाम ‘असलम खान’ लिखा हुआ है। इतना ही नहीं, 4239 लोग इसे फॉलो भी करते हैं। इसमें भी साड़ी में एक हिन्दू महिला के साथ एक मुस्लिम बुजुर्ग को चित्रित किया गया है। ऐसे पेजेज के जरिए ये बताने की कोशिश की जा रही है कि हिन्दू महिलाएँ ‘निचली श्रेणी’ में आती हैं और मुस्लिम पुरुष ‘श्रेष्ठ’ होते हैं, जो उनके साथ अंतरंग होते रहते हैं और ये आम बात है।

मुस्लिम बुजुर्गों के साथ दिखाई जा रहीं हिन्दू महिलाएँ

एक और इंस्टाग्राम पेज को देखिए, जिसे ‘बैड बॉय’ और ‘ज़ालिम बॉय’ के नाम से बनाया गया है। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को बिना कपड़ों के एक हिन्दू महिला के साथ दिखाया गया है। कुल 23 तस्वीरें इससे अब तक जारी की जा चुकी हैं, जिनमें सारी की सारी अश्लील हैं। 1818 फॉलोवर्स भी हैं। कटे हुए फलों का अश्लील चित्रण कर के और हिन्दू महिलाओं की कई तस्वीरें पोस्ट कर के उन्हें बदनाम किया गया है। टीका या सिंदूर लगाई हुईं हिन्दू लड़कियाँ, साथ में इस्लामी टोपी लगाए मुस्लिम युवक – यही इस पेज का मुख्य लक्ष्य है दिखाना।

इंस्टाग्राम पेज पर कटे हुए फलों के चित्र शेयर कर के हिन्दू महिलाओं का अश्लील चित्रण

एक अन्य इंस्टाग्राम पेज पर हिन्दू देवी-देवताओं का भी अश्लील चित्रण है। इसका नाम ‘ज़ालिम मर्द’ है, जिसमें भगवान श्रीराम का चित्र भी बनाया गया है और उन्हें लेकर अश्लीलता फैलाई गई हैं। सोचिए, जब सैकड़ों वर्षों से एक खास मजहब के पैगम्बरों की आलोचना तो दूर, नाम भर ले लेने से ‘काफिरों’ का नरसंहार किया जाता है, हिन्दू देवी-देवता खुलेआम इस तरह दिखाए जाते हैं। ‘ॐ’ शब्द का अपमान भी इसमें किया गया है। क्या ये हिन्दू धर्म के प्रति घोर ‘बेअदबी’ नहीं?

इंस्टाग्राम पर हिन्दू धर्म के कारण महिलाओं को निशाना बना रहे पेज

आइए, आगे बढ़ते हैं। इसी तरह का एक और इंस्टाग्राम पेज है, जिसमें बिना कपड़ों के एक दाढ़ी वाले मुस्लिम व्यक्ति को साड़ी पहनी हुई हिन्दू महिला के साथ चित्रण किया गया है। पेज का नाम ‘ज़ालिम मुस्लिम लं$’ रखा गया है, जो बेहद ही अश्लील है। हालाँकि, ऐसा लगता है जैसे इस इंस्टाग्राम पेज के पोस्ट्स डिलीट भी किए गए हैं। इस पेज के 945 फॉलोवर्स हैं। खास बात ये है कि ऐसे पेज चलाने वाले आज से नहीं बल्कि कई दिनों से ऐसे ही सक्रिय हैं और इनके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई जाती है।

हिन्दू महिलाओं के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल

अब एक ‘ज़ालिम मर्द’ नाम के इंस्टाग्राम हैंडल को देखिए, जिसमें हिन्दू महिलाओं के लिए ‘रखैल’ और इससे भी घटिया शब्दावली का जिक्र किया गया है। प्राइवेसी के कारण हम इन तस्वीरों को हूबहू आपके सामने पेश भी नहीं कर सकते, क्योंकि ये सही नहीं होगा। लेकिन, इनके बारे में जानना आपके लिए ज़रूरी है, ताकि आप सावधान रहें। मुस्लिम पुरुषों के साथ एक से अधिक महिलाओं को आपत्तिजनक अवस्था में दिखा कर कट्टरवादी क्या प्राप्त करना चाहते हैं, ये सोचने लायक है।

एक मुस्लिम पुरुष के साथ दो हिन्दू महिलाएँ दिखा कर क्या सन्देश से रहे कट्टरवादी?

एक इंस्टाग्राम हैंडल है ‘ज़ालिम अनवर पठान’ नाम का, जिसके 1152 फॉलोवर्स हैं और इससे 17 तस्वीरें पोस्ट की गई हैं। इसकी ताज़ा 5 तस्वीरों में इस्लामी टोपी पहने एक मुस्लिम पुरुषों को हिन्दू महिलाओं के साथ दिखाया गया है। एक तस्वीर में अरब के तीन शेखों के साथ एक हिन्दू महिला को दिखाया गया है। एक तरह से हिन्दू महिलाओं का इस्तेमाल कर के ‘पोर्न कंटेंट्स’ बनाए जा रहे हैं। अन्य तस्वीरों में हिन्दू महिलाओं को अश्लील अवस्था में दिखाया गया है।

हिन्दू महिलाओं का ‘पोर्न कंटेंट’ के रूप में आपत्तिजनक चित्रण

एक और इंस्टाग्राम हैंडल को देखिए, जिसमें हिन्दू महिलाओं के साथ-साथ देवी माँ का भी अपमान किया गया है। इस पेज का नाम है ‘दुर्गा पंडित’ और इसमें एक हिन्दू महिला की तस्वीर डीपी के रूप में लगाया गया है। परिचय पश्चिम बंगाल की एक ‘बम’ के रूप में दिया गया है, जिसकी उम्र 26 वर्ष बताई गई है। इसमें हिन्दू अभिनेत्रियों/महिलाओं की तस्वीरें आपत्तिजनक और अश्लील बातें लिख कर पोस्ट की गई हैं। याद है आपको, जब ‘सेक्सी दुर्गा’ नाम की एक फिल्म के जरिए ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का बहाना मारा जा रहा था? ये भी उसी क्रम का ही एक हिस्सा है।

कभी ‘सेक्स दुर्गा’ नाम की फिल्म, कभी ‘दुर्गा पंडित’ नाम से अश्लील पेज

एक पेज का तो नाम ही खुलेआम ‘हिन्दू रं%$याँ’ रख दिया गया है। इसके अलावा अंशुल सक्सेना ने भी सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार का ध्यान इस तरह आकृष्ट कराया है। हाँ, इतना ज़रूर निश्चित है कि इस पर मेनस्ट्रीम मीडिया रिपोर्टिंग नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय मीडिया हिन्दू महिलाओं की इस प्रताड़ना पर एक लाइन की भी खबर नहीं बनाएगा। ‘http://www.interfaithxxx.com’ नाम की एक वेबसाइट के जरिए किस किस्म की बातें की जाती हैं, वो देखिए।

इसके एक लेख में लिखा है, “हिन्दू महिलाओं की इच्छाओं को संतुष्ट करने के लिए मुस्लिम मर्द बेहतर होते हैं, ऐसा एक महिला हिन्दू एक्टिविस्ट का कहना है। उनका कहना है कि मुस्लिम मर्द ज्यादा आनंद देते हैं। मुस्लिम मर्दों के फौलादी ___ के लिए हिन्दू लड़कियाँ पागलों की तरह प्यार करती हैं।” एक लेख का नाम है, “मेरी हिन्दू माँ का नया शौहर”। एक वीडियो डाल कर लिखा है, “मुस्लिम बॉयफ्रेंड के लिए लड़तीं हिन्दू लड़कियाँ”। एक अन्य लेख का शीर्षक है, “टिकटॉक बनाने वाले मुस्लिम हिन्दू लड़की की ‘Pu%&y’ का आनंद ले रहा है।”

इसके अलावा अंशुल सक्सेना ने एक टेलीग्राम चैनल के बारे में भी बताया, जिसका नाम ‘हिन्दू रं%$याँ’ है। इसमें 219 लोग जुड़े हुए थे। मीरा मोहंती नाम की ट्विटर यूजर ने जब केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग किया, तो उन्होंने इसका तुरंत संज्ञान लिया। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि इस टेलीग्राम चैनल को ब्लॉक कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई के लिए भारत सरकार राज्यों के पुलिस-प्रशासन के साथ समन्वय बना कर काम कर रही है।

अंशुल सक्सेना ने फेसबुक पर कई अन्य पेजेज के लिंक्स और उनके नाम शेयर कर के हिन्दू महिलाओं की प्रताड़ना को सामने रखा। इन पेजेज के नाम हैं, “संस्कारी हिन्दू बीवी मुस्लिम मर्द की दीवानी”, “मुस्लिम मर्द की दीवानी हिन्दू औरतें” और ‘मुस्लिम मर्द की दीवानी’। इस तरह के कई पेजेज हैं, जिनसे सैकड़ों से हजारों लोग तक जुड़े हुए हैं। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बताया है कि MeiTY टीम को फेसबुक की पैरेंट कंपनी ‘मेटा’ से बात कर के इन्हें हटाने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘Amazon’ पर भी ऐसी कई पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिनमें हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार को बढ़ावा दिया गया है। मुस्लिम प्रेमी के साथ हिन्दू लड़की की कहानी जैसी बातें कर के ‘रेप फंतासी’ को आगे बढ़ाया जा रहा है। किंडल पर उपलब्ध इन पुस्तकों में से कुछ के कवर पेज पर इस्लामी टोपी में पुरुष और बिंदी लगाए महिला को दिखाया गया है। ‘पड़ोसी के साथ सेक्स करती भारतीय महिला’ जैसे शीर्षक के साथ कई पुस्तकें उपलब्ध हैं।

समाज को बचाने और महिलाओं के लिए हमें खुद आगे आना होगा और सोशल मीडिया के जरिए ऐसे कंटेंट्स की पोल खोलते हुए पुलिस-प्रशासन और सरकारों का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराना होगा, क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अलावा तथाकथित एक्टिविस्ट्स इस मामले में कुछ नहीं बोलेंगे। धर्म के कारण महिलाओं को बदनाम कर के अश्लीलता फैलाना कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों का पेशा बन गया लगता है। ऐसे कंटेंट्स को तुरंत रिपोर्ट करें और ब्लॉक करवाएँ।

बुल्ली बाई में अब उत्तराखंड से एक युवक भी गिरफ्तार, इंजीनियरिंग स्टूडेंट और मास्टरमाइंड महिला पहले से ही गिरफ्त में

मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर ‘बुल्ली बाई ऐप’ पर नीलाम किए जाने का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ऐप के हैंडलर्स 21 साल के इंजिनियरिंग स्टूडेंट विशाल झा और 18 वर्षीय श्वेता सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बुधवार (5 जनवरी 2021) को समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “बुल्ली बाई ऐप मामले में उत्तराखंड के रुद्रपुर से गिरफ्तार की गई युवती गरीब परिवार से है। उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसा लगता है कि वह पैसे के लिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल हुई।” उन्होंने उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले की निवासी श्वेता सिंह को इस मामले का मास्टरमाइंड बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्वेता के पिता कि पिछले साल COVID-19 के कारण मृत्यु हो चुकी है, जबकि पहले श्वेता ने अपनी माँ को कैंसर से खो दिया था। उसकी एक बड़ी बहन भी है, जिसने कॉमर्स में ग्रेजुएशन की है। इसके अलावा उसकी एक छोटी बहन और भाई भी है, जो स्कूल में पढ़ते हैं। श्वेता खुद इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

मंगलवार (4 जनवरी 2021) को मुंबई पुलिस ने बताया कि युवती ‘बुल्ली बाई’ से जुड़े तीन अकॉउंट हैंडल कर रही थी, जबकि विशाल कुमार खालसा चरमपंथी के नाम से अकॉउंट चला रहा था। 31 दिसंबर को उसने अपने बाकी अकॉउंट को भी सिख नामों से मिलता-जुलता रख लिया था और फर्जी खालसा अकॉउंट होल्डर्स को दिखाया था।

बता दें कि पिछले साल हुए सुल्ली डील्स ऐप केस के बाद इस वर्ष की शुरुआत में बुल्ली बाई ऐप सामने आया है, जो गिटहब एपीआई पर बनाया गया था। गिटहब ऐप पर बुल्ली बाई (Bulli Bai app on GitHub) नाम से बनाए गए ऐप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों को अपलोड कर उनको नीलाम किया जा रहा था। इसका खुलासा होने के बाद इसके ट्विटर हैंडल को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके बायो में लिखा था, “बुल्ली बाई खालसा सिख फोर्स (केएसएफ) के एक समुदाय द्वारा संचालित ओपन-सोर्स ऐप है।” वहीं इसके ट्विटर लोकेशन स्टेटस से पता चला कि यह अकॉउंट यूएस से संचालित किया जा रहा था।