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उन्हें ठेस लगी तो मैं खुश हूँ, मक्खन लगाना मेरा काम नहीं: अश्विन पर बोले रवि शास्त्री, कहा- विराट मामले में गांगुली दें स्पष्टीकरण

भारत के दिग्गज गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में चौंकाने वाले खुलासे किए थे। बताया था कि कैसे वे संन्यास के बारे में सोचने लगे थे और उन्हें कोई सपोर्ट नहीं कर रहा था। यह भी बताया था कि तत्कालीन कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ने जिस तरीके से कुलदीप यादव को प्रमोट किया था, उसने भी उन्हें तोड़ दिया था। अब इस पर शास्त्री की प्रतिक्रिया आई है।

शास्त्री ने कहा है, “अश्विन सिडनी टेस्ट नहीं खेल पाए और तब कुलदीप ने अच्छी गेंदबाजी की। इसलिए यह उचित था कि मैं कुलदीप को मौका दूँ। अगर इससे अश्विन को ठेस पहुँची या उन्हें बुरा लगा तो मैं इससे बहुत खुश हूँ। इसने उन्हें कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया। मेरा काम हर किसी के टोस्ट पर मक्खन लगाना नहीं है। मेरा काम बिना एजेंडे के तथ्यों को बताना है।”

रवि शास्त्री ने कहा, “यदि आपका कोच आपको चुनौती देता है, तो आप क्या करेंगे? रोते हुए घर जाओ और कहो कि मैं वापस नहीं आऊँगा। मैं कोच को गलत साबित करने के लिए एक खिलाड़ी के रूप में इसे एक चैलेंज समझूँगा। अगर कुलदीप पर मेरे बयान से अश्विन को ठेस पहुँची है, तो मुझे खुशी है कि मैंने यह बयान दिया। इसने उन्हें कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि तब के अश्विन और आज के अश्विन में जमीन-आसमान का अंतर है।” 

उल्लेखनीय है कि इंटरव्यू के दौरान अश्विन से पूछा गया था कि जब कुलदीप यादव ने सिडनी में पाँच विकेट झटके थे, उस समय रवि शास्त्री ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें भारत का नंबर 1 विदेशी स्पिनर बताया था। इसको लेकर आप पर कोई प्रभाव पड़ा? इस सवाल के जवाब में अश्चिन ने कहा था, “हर किसी का समय आता है। उस समय मुझे यही लगा कि किसी और का समय आ गया और मेरा चला गया।” उन्होंने कहा, “मैं रवि भाई का बहुत सम्मान करता हूँ। हम सब करते हैं। मैं समझता हूँ कि वह हमें कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन उस समय मुझे बहुत दुख पहुँचा। मैं बेहद छोटा महसूस कर रहा था। आप मुझे कुछ भी कह सकते हैं या आप मुझे बाहर निकाल सकते हैं, जो की ठीक है, लेकिन आप मेरे इरादे या मेरे संघर्ष पर संदेह नहीं कर सकते हैं। यह सब मेरे लिए पीड़ादायक था। हम सभी के लिए अपने साथियों की सफलता मायने रखती है। मैं कुलदीप के लिए बहुत खुश था, क्योंकि मैं पाँच विकेट हासिल नहीं कर पाया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उसका पाँच विकेट लेना काफी शानदार था। मैं अच्छी गेंदबाजी के बावजूद 5 विकेट झटकने में नाकामयाब रहा। इसलिए मैं वास्तव में उसके लिए खुश था।”

शास्त्री ने विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बीच कप्तानी को लेकर हुए विवाद पर भी नाखुशी जताई है। शास्त्री ने गुरुवार (23 दिसंबर 2021) को कहा कि बीसीसीआई और विराट कोहली के बीच बातचीत से कप्तानी में पूरे बदलाव को बेहतर तरीके से सँभाला जा सकता था। उन्होंने कप्तानी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस मामले पर एक बेहतर बातचीत की आवश्यकता थी। इंडियन एक्सप्रेस ई-अड्डा में शास्त्री ने कहा, “मैं कई सालों से बोर्ड का हिस्सा रहा हूँ। पिछले सात सालों से इस टीम का हिस्सा था। इस मामले को सार्वजनिक होने से पहले बेहतर बातचीत के साथ सँभाला जा सकता था।”

उन्होंने कहा, “विराट ने मामले में अपना पक्ष रखा है। अब बोर्ड अध्यक्ष (सौरव गांगुली) सामने आए और मामले का अपना पक्ष रखें। जो कुछ भी हुआ है उस पर स्पष्टीकरण दें। बस इतना ही काफी है।” शास्त्री ने कहा कि वे इस बारे में बात नहीं कर रहे हैं कि कोहली झूठ बोल रहे हैं या गांगुली। उन्होंने कहा, “यह सवाल नहीं है कि यहाँ कौन झूठ बोल रहा है। सवाल यह है कि सच्चाई क्या है? आप सच्चाई जानना चाहते हैं और यह केवल बातचीत से ही सामने आ सकता है।”

गुलबहार खान की शिकायत पर हरिद्वार में FIR, जितेंद्र त्यागी (वसीम रिजवी) ने बताया कट्टरपंथी मुल्लाओं की बौखलाहट; कहा- सत्य हेट स्पीच नहीं

हरिद्वार की धर्मसंसद में आपत्तिजनक भाषण देने के आरोप में जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व वसीम रिज़वी) पर FIR दर्ज कर ली गई है। यह धर्मसंसद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद द्वारा आयोजित की गई थी। इसी आयोजन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस FIR में शिकायतकर्ता का नाम हरिद्वार निवासी गुलबहार खान है।

शिकायत में मुताबिक, “वसीम रिज़वी जो अब जितेंद्र नारायण त्यागी के नाम से जाने जाते हैं, ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिल कर पैगम्बर मोहम्मद और उनके अनुयायियों के खिलाफ गलत बयानी की है। यह एक सोची-समझी साजिश है। आरोपितों ने इन बयानों को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।”

FIR

यह धर्मसंसद उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में 17 से 19 दिसम्बर तक चली थी। इसमें देश भर के तमाम संतों और हिन्दू संगठनों के लोगों ने हिस्सा लिया था। पुलिस ने धारा 153 A के तहत केस दर्ज किया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर जितेंद्र नारायण ने ऑपइंडिया को अपना वीडियो बयान भेज कर अपना पक्ष रखा है। इस बयान में उन्होंने कहा है, “मेरे विरुद्ध हरिद्वार में जो मुकदमा दर्ज करवाया गया है, इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में भी मुकदमा दर्ज करवाया था। भारत के विभिन्न थानों में हेट स्पीच बता कर मेरे विरुद्ध जो मुकदमे दर्ज करवाए जा रहे हैं ये कट्टरपंथी मुल्लाओं की, मुस्लिम समाज के आतंकी लोगों की बौखलाहट है। क्योंकि वो समझ रहे हैं कि उनकी पोल खुल चुकी है। सच्चाई कहना हेट स्पीच नहीं है।”

जितेंद्र नारायण त्यागी ने आगे कहा, “हिन्दू संगठित हो रहा है। इससे मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाली सियासी पार्टियाँ घबराई हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए जो हिन्दुओं में फूट डाली जाती है, उनको लग रहा है कि यह फूट अगर नहीं पड़ पाई तो उनका राजनीति से नामोनिशान मिट जाएगा। भारतीय जनता पार्टी को कमजोर करने के लिए हिदुत्व को कमजोर किया जा रहा है।”

उदासीन अखाड़े के महंत बजरंग मुनि उदासीन ने इस बयान को शेयर करते हुए लिखा है, “किसी भगवाधारी को हाथ लगाने से पहले उत्तराखंड पुलिस को ओवैसी, बुखारी, तौकीर और बरकाती जैसे तमाम नफरत के पुतलों को जेल भेजना होगा।”

तब तुम्हें कौन बचाने आएगा जब योगी मठ और मोदी हिमालय जाएँगे… फिर भी ओवैसी आजाद, ‘धर्म संसद’ के भाषण पर FIR

हरिद्वार की धर्मसंसद के वायरल वीडियो के बाद उत्तराखंड पुलिस ने जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व नाम वसीम रिज़वी) के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। यह वीडियो हरिद्वार की धर्मसंसद का बताया जा रहा है। बता दें कि धर्मसंसद का आयोजन जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने 17 से 19 दिसम्बर के बीच आयोजित करवाया था।

यह कार्रवाई कहा जा रहा है वीडियो देखकर भड़के वामपंथी और लिबरल्स समूहों के आक्रोश के कारण हुआ है। सोशल मीडिया सहित कई जगहों पर इन समूहों ने दावा किया है कि जितेंद्र नारायण त्यागी के इन बयानों में मुस्लिमों के नरसंहार की बात कही गई है। वहीं उत्तराखंड पुलिस ने भी जितेंद्र नारायण के बयानों को आपत्तिजनक माना है।

उत्तराखंड पुलिस के DGP IPS अशोक कुमार के मुताबिक, “पुलिस को शिकायत मिली थी। इस शिकायत के आधार पर सेक्शन 153 A के तहत केस दर्ज किया गया है।” FIR के बाद उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा, “हरिद्वार की धर्मसंसद में जो कुछ भी हुआ वो गलत था। पुलिस को इस मामले में आरोपित सभी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

इसी के साथ AIMIM पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष नय्यर काज़मी ने शिकायत दर्ज करवाई है। इस शिकायत को असदुद्दीन ओवैसी ने शेयर करते हुए लिखा है कि अगर कार्यक्रम में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो उनकी पार्टी प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेगी।

धर्म संसद में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करने वाले असदुद्दीन का एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ओवैसी हिन्दुओं और पुलिस को सीधे तौर पर धमकी देते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि ओवैसी के इसी वीडियो के बचाव में वामपंथी और कट्टरपंथी हिन्दुओं को धर्म संसद के वीडियो के बहाने निशाना बना रहे हैं।

वायरल वीडियो में ओवैसी को कहते सुना जा सकता है, “मैं पुलिस वालों को बता देना चाहता हूँ कि वो याद रखें कि न तो योगी हमेशा मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और न ही मोदी हमेशा प्रधानमंत्री। हम मुस्लिम समय को देख कर चुप हैं। पर ध्यान रहे कि हम कुछ भूलने वाले नहीं हैं। हमें तुम्हारा अन्याय याद रहेगा। अल्लाह अपनी ताकत से तुम्हे बर्बाद करेगा। इंशाल्लाह हम याद रखेंगे और समय भी बदलेगा। तब तुम्हे बचाने कौन आएगा जब योगी अपने मठ और मोदी हिमालय में चले जाएँगे? याद रहे, हम नहीं भूलने वाले।”

ओवैसी का यह आपत्तिजनक बयान 12 दिसंबर को कानपुर की एक सभा में दिया गया बताया जा रहा है। इस बयान पर अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अपने इसी बयान को छिपाने के लिए ओवैसी खुद शिकायतकर्ता बन कर विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं।

उद्धव सरकार लागू करे मुस्लिम कोटा: कॉन्ग्रेस नेता का पत्र, पूछा- महाराष्ट्र में नौकरी और शिक्षा में 5% रिजर्वेशन कब

महाराष्ट्र में मुस्लिम कोटा लागू करने को लेकर मुंबई कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नसीम खान ने पत्र लिखा है। पत्र में मुस्लिमों को नौकरी और शिक्षा में पाँच प्रतिशत आरक्षण देने तथा अल्पसंख्यक समुदाय के योजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने की माँग की गई है। उन्होंने बुधवार (22 दिसंबर 2021) को कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता और उद्धव सरकार में राजस्व मंत्री बालासाहब थोराट को यह पत्र लिखा है

नसीम खान ने पत्र में लिखा है कि महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में मुस्लिम समाज को पाँच प्रतिशत आरक्षण अब तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब कॉन्ग्रेस-राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (Congress-NCP) गठबंधन सत्ता में थी, तब उन्होंने मुस्लिम समुदाय को पाँच फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया था। इस निर्णय को बम्बई उच्च न्यायालय ने भी अपनी मंजूरी दे दी थी। लेकिन उसके बाद राज्य में सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी सरकार ने मुस्लिम आरक्षण को लागू नहीं किया। उल्लेखनीय है कि नसीम खान कॉन्ग्रेस-एनसीपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

खान ने कॉन्ग्रेस नेता से अपील की है कि महाविकास अघाड़ी की सरकार मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण और फंड सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। उन्होंने कहा है कि महाविकास अघाड़ी सरकार को बने दो साल हो गए हैं, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। साथ ही याद दिलाया है कि महाविकास अघाड़ी सरकार कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (CMP) के तहत बनी है।

बता दें कि नसीम खान वही नेता हैं, जिनके ऊपर पिछले दिनों महिला के साथ छेड़खानी का मामला दर्ज किया गया था। नसीम खान के साथ चार और लोगों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। मुंबई के अंधेरी पुलिस स्टेशन में पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर आईपीसी की धारा 354, 509, 506, 323, 504 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था। 

इधर गुरुवार (23 दिसंबर, 2021) को समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक अबू आसिम आजमी और रईस शेख ने मुस्लिम आरक्षण को लेकर मुंबई के विधान भवन की सीढ़ियों पर धरना दिया। बाद में मीडिया से बात करते हुए शेख ने कहा कि उन्होंने इसे लेकर सदन के अंदर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और एनसीपी दोनों ने पहले मुस्लिम आरक्षण की बात की थी और अब उनका कहना है कि वे ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। दो हफ्ते पहले AIMIM ने मुसलमानों के लिए आरक्षण की माँग को लेकर तिरंगा रैली निकाली थी।

500 के इतने बंडल की आँखें चौंधिया जाए, गिनती करने में मशीन भी हाँफ गए: जानिए, समाजवादी इत्र से क्या है पीयूष जैन का रिश्ता

आपने अजय देवगन की फिल्म ‘रेड’ देखी है? फिल्म में एक नेता के घर छापे के बाद नोटों की बरसात देखी है? इस बार ऐसा ही कुछ असल जिंदगी में हुआ है। हालाँकि जिससे यह खबर जुड़ी है वह खुद तो कारोबारी हैं पर सियासत से भी उनका नाता है। रिपोर्टों के अनुसार आयकर विभाग (IT रेड) ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर वाले घर पर दबिश दी तो 500 रुपए के नोटों की गडि्डयों से भरे आलमारी मिले।

रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि जैन के घर से करीब 150 करोड़ रुपए मिले हैं। बताया जाता है कि आयकर विभाग की टीम के पास नोट गिनने की 4 मशीन थी। इससे काम नहीं बना तो और मशीनें लाई गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से स्टाफ बुलाए गए। बताया जा रहा है कि इन्हीं पीयूष जैन की उपज समाजवादी इत्र है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लॉन्च किया था। इनकम टैक्स विभाग की यह दबिश गुरुवार (23 दिसम्बर) को पड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जैन का घर कानपुर के आनंदपुरी क्षेत्र में हैं। छापे के दौरान बरामद अधिकतर बंडलों में 500 रुपए के नोट हैं। बरामद रकम इतनी ज्यादा थी IT टीम जो 4 मशीन लेकर पहुँची थी वह कम पद गई। इसके बाद नोटों की गिनती के लिए कुछ अन्य मशीनें और SBI के प्रशिक्षित स्टाफ बुलाए गए।

पीयूष जैन, समाजवादी पार्टी के MLC पुष्पराज जैन पम्मी के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। हमने इस संबंध में पम्मी जैन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया। पीयूष जैन मूल रूप से पीयूष जैन कन्नौज के रहने वाले हैं। इत्र के अलावा उनके कई और कारोबार बताए जा रहे। इनकी 2 कम्पनियाँ मिडिल ईस्ट में भी है। इसलिए इनकम टैक्स ने इनसे जुड़े कानपुर, मुंबई और कन्नौज के तमाम ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।

इस छापेमारी से एक दिन पहले बुधवार को शिखर पान मसाला के मालिक के घर इनकम टैक्स की छापेमारी हुई थी। यहाँ पर फर्जी फर्म के नाम पर फर्जी बिल पाए गए थे। फैक्ट्री के स्टॉक में कच्चे माल और तैयार माल में भी अंतर मिला था। बताया जा रहा है कि वहीं से जैन और केके अग्रवाल के सुराग मिले थे। इससे पहले आयकर विभाग ने समाजवादी पार्टी के नेताओं से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें 68 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ था।

‘UP में चुनाव स्थगित करने पर विचार करें’: PM मोदी और ECI से इलाहाबाद हाई कोर्ट, कहा- जान है तो जहान है

उत्तर प्रदेश (UP) सहित 5 राज्यों में नए साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने हैं। उससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी चुनाव स्थगित करने और राजनीतिक रैलियों पर रोक के विकल्प पर विचार का अनुरोध किया है। चुनाव आयोग (ECI) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विकल्प पर गौर करने को कहा है। कोर्ट ने यह अपील गुरुवार (23 दिसंबर 2021) कोरोना वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए की। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव की एकल पीठ ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों से कहा जाए कि वह चुनाव प्रचार टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से करें। प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि वह पार्टियों की चुनावी सभाएँ व रैलियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएँ। 

इस दौरान जस्टिस यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, “हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में ‘मुफ्त कोरोना टीकाकरण’ का अभियान चलाया है, जो काबिलेतारीफ है। कोर्ट उनकी प्रशंसा करता है और माननीय प्रधानमंत्री से अनुरोध करता है कि इसको देखते हुए मजबूत कदम उठाएँ। इस भयानक महामारी की स्थिति और रैलियों, बैठकों और आगामी चुनावों को रोकने व स्थगित करने की संभावना तलाशने पर विचार करें, क्योंकि जब तक जीवन नहीं है, दुनिया का कोई मतलब नहीं है।”

कोर्ट ने कहा कि अगर संभव हो तो फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव को एक या दो महीने के लिए टाल दिया जाए, क्योंकि जान रहेगी तभी चुनावी रैलियाँ होंगी। न्यायमूर्ति यादव ने कहा, “अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से भी बदतर होंगे। रैलियों में भीड़ ज्यादा होने से कोरोना का संक्रमण भयानक रूप धारण कर सकता है।” 

आगे कोर्ट ने कहा कि देश भर में बीते 24 घंटे में छह हजार नए मामले मिले हैं और 318 लोगों की मौत हुई है। साथ ही यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इस भयावह महामारी को देखते हुए चीन, नीदरलैंड, आयरलैंड, जर्मनी, स्कॉटलैंड जैसे देशों ने पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगा दिया है। ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से आग्रह है कि वह इस विकट स्थिति से निपटने के लिए नियम बनाएँ।

यह टिप्पणी जस्टिस शेखर कुमार यादव ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद कानून के तहत जेल में बंद संजय यादव की जमानत को मंजूर करते हुए की। बता दें कि संजय यादव के खिलाफ इलाहाबाद के थाना कैंट एरिया में मुकदमा दर्ज है। हाई कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि आज इस न्यायालय के समक्ष लगभग चार सौ मुकदमे सूचीबद्व है। इसी तरह न्यायालय के समक्ष हर दिन मुकदमे सूचीबद्व होते हैं, जिसके कारण अधिक संख्या में वकील उपस्थित होते हैं और उनके बीच किसी भी प्रकार की सोशल डिस्टेंस नहीं होती है। वकील आपस में नजदीक खडे़ होते हैं, जबकि कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के मरीज बढ़ते जा रहे हैं और तीसरी लहर आने की आशंका है।

घर लौट रहे जतिन और पंकज पर पत्थरों से हमला, पटक-पटक कर मारा, एक की मौत: रमजान अली गिरफ्तार, दिल्ली की घटना

दिल्ली के संगम विहार इलाके में घर लौट रहे दो युवकों पर 7-8 लोगों के समूह ने जानलेवा हमला किया। इसमें 24 वर्षीय जतिन की मौत हो गई। उसके साथी पंकज को भी चोटें आई। घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने रमजान अली को गिरफ्तार किया है। उसके साथियों की तलाश की जा रही है। घटना 19 दिसम्बर 2021 (रविवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जतिन और पंकज पर पत्थरों से हमला किया गया। जमीन पर पटक कर तब तक मारा गया जब तक दोनों बेहोश नहीं हो गए। इनके पास से 3 हजार रुपए भी लूट लिए। बाद में दोनों पीड़ितों को नाले में फेंक आरोपित फरार हो गए। आसपास से गुजरने वालों ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने दोनों घायलों को ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया। इलाज के दौरान 22 दिसम्बर को जतिन की मौत हो गई। जतिन बेरोजगार था जो अपने परिवार के साथ संगम विहार की F ब्लॉक कॉलोनी में रहता था। घटना के दिन वह अपने दोस्त सचिन के भाई की जन्मदिन पार्टी से लौट रहा था। रात करीब दो बजे जब वह पैदल ही पंकज के साथ जा रहा था तो गली नंबर 3 में रमजान और उसके साथियों ने हमला कर दिया।

मामले की पुष्टि करते हुए ADCP हर्षवर्धन ने कहा है कि लूट और हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया था। जतिन की मौत के बाद अब इसमें दफ़ा 302 IPC बढ़ाई जा रही है। रमज़ान अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी फरार आरोपितों की लताश की जा रही है और उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

सरकार को शापित करने वाली महिला नेता भी नहीं कर पाती अपने नेताओं का मुखर विरोध: पढ़ें क्यों स्त्री अपमान हो गया है सामान्य

महाभारत आदर्श समाज की परिकल्पना नहीं है, अपितु एक धर्मच्युत समाज के ध्वस्त होने और उसके पुनर्निर्माण की कथा है।

विगत दिनों कर्नाटक विधानसभामें घटना को देखकर यह भाव उठता है की उस युग से लेकर आज तक स्त्री के अपमान से लेकर स्त्रियों के प्रति अपराध को सामाजिक संवाद बना कर उसका सामान्यीकरण करना, उसपर परिहास के ओट में रस लेने वाली प्रवृत्ति की पुनरावृत्ति होती रहती है।

कुछ दिन पूर्व कर्नाटक विधानसभा में समाज के झंडाबरदारो के मध्य कॉन्ग्रेसी विधायक का कथन और उस पर नितांत निर्लज्जता के साथ हँसते नेताओं ने समाज में विकास के अवधारणा की कलई खोल दी है।। हमारी नैतिकता के साथ यह समस्या है कि वह पक्ष-विपक्ष के ऐसे राजनैतिक बंधनों में उलझी है कि फटी जींस पर रोने वाले, स्त्री सम्मान की सार्वजनिक धज्जियाँ उड़ने पर बस इसलिए मूक हैं क्योंकि वह सत्ता के समीकरणों में ठीक नहीं बैठती।

एक समय सपा सांसद आजम खान ने उस समय स्पीकर पद पर बैठी रमादेवी के लिए अपने संवाद को इतना असहज कर दिया कि सभी महिला सांसदों ने अपने विचार धाराओं से अलग उसका एकसाथ कड़ा विरोध किया। तथ्य है कि राजनेताओं की अपनी विवशताएँ होती हैं, इसी कारण आज संसद में सरकार को शापित करने वाली प्रखर महिलावादी नेता ने अपने ही दल के उस नेता का विरोध कभी खुल कर नहीं किया जो उन्हीं की समकालीन अभिनेत्री के अंतर्वस्त्र का आँकलन सामाजिक सभा में कर रहे थे। अपनी थाली में होने वाले छेदों के विषय में वे तब भी सावधान रही थीं जब बहुजन समाज पार्टी की महिला मुखिया पर आक्रमण किया गया था।

जयललिता से मायावती से जयाप्रदा से स्मृति ईरानी – प्रत्येक स्त्री को जिस व्यवस्था में अपमान से गुजरना पड़ रहा है और जैसे उस अपमान का सामान्यीकरण होता जा रहा है, मन स्वयं से यही पूछ बैठता है कि क्या हम अपने अतीत से कुछ सीखते हैं या इतिहास का प्रत्येक पतन हमारे लिए उस नैतिक नाश को स्वीकार्य बनाता जा रहा है।

एक शक्तिशाली साम्राज्य और सम्पन्न समाज का विनाश कैसे प्रारम्भ होता है, उसका दृष्टांत काशी नरेश की पुत्रियों के अपहरण पर मृत्युंजय भीष्म की पराजित मृत्यु है। स्त्री के तिरस्कार की जो कथा सत्यवती और अम्बिका-अम्बालिका से प्रारम्भ होती है, उसकी परिणति द्रौपदी के वस्त्र हरण के साथ होती है। अर्जुन जब कुरुक्षेत्र मे शस्त्र डाल देते हैं, तब कृष्ण उन्हें अपनी पीड़ा की परिधि को बड़ा करने को कह समझाते हैं कि ये युद्ध केवल तुम्हारे राज्य को वापस लाने का साधन नहीं है अपितु यह उस वाणी की प्रतिध्वनि है जो विश्व में अन्याय के स्वाभाविक होने तथा स्वीकार्य होने का विरोध करता है। यह युद्ध केवल एक नहीं अपितु उन सारी द्रौपदीयों के लिए है जिन का अपमान अब सामान्य हो गया है क्योंकि जब दिव्य जन्मा कुरु राज्य वधू द्रौपदी ऐसी विभीषिका से गुजर सकती हैं तो सामान्य कन्याओं का क्या हश्र होता होगा।

उस समय भी सांसद महिला अपमान को क्रीड़ा और उपहास का रूप देकर सामान्य दृश्यमान के रूप में स्थापित कर रही थी जिसमें हम शक्तिशाली महिलाओं का अपमान सत्ता के केंद्र बिंदु में देखते हैं, यह समाज की सामान्य स्त्रियों की दशा ,और आज भी संसद, में वही दृश्य , वैसे ही दिख रहा है जिसे यदि जयललिता तथा मायावती के साथ बदतमीजी और गेस्ट हाउस वाले घटना के साथ जोड़ लें तो सभ्यता का परिणाम भयानक दिखता है। संस्कृति आज भी उसी मार्ग का गमन करती दिख रही है जिस मार्ग से वह हर युग से चलती रही है – स्त्री अपमान का मार्ग।

इस घटनाक्रम में साफ तो कोई दल नहीं निकलेगा और न ही हमारा समाज। क्योंकि ऐसे बयानों के बाद भी जब वही राजनेता फिर जन प्रतिनिधि बनकर संसद आ जाते हैं तो निराशा जनता से भी होती है! शराब सेवन, छिनरई आदि जिन विशेषणों पर हम सदैव से पुरुषों की आलोचना करते आए हैं उन्हीं आदतों को आजकल स्त्रियों ने अपने लिए बराबरी का पैमाना बनाया हुआ है ।

10 साल पहले ‘माँ’ तक पहुँचने पर युद्ध की संभावना और परस्पर आजीवन संबंधों का विच्छेद होता था। अब अब इन शब्दों का उच्चारण ना केवल सामान्य है बल्कि इनका कलात्मक प्रयोग कर लोग कलाकार श्रेणी में अपनी जगह सुनिश्चित कर रहे है।

माँ, बहन की गालियों को इतना स्वाभाविक कर दिया गया है कि लोग इसे मजे में ,प्यार में प्रयोग करते है। निराशा तब होती है जब ‘कन्यादान’ का विरोध करने वाली महिलाएँ गालियों के वाक्य अलंकारों के उटपटांग फैशन को प्रोत्साहन देती हैं जिसमें उनका अपमान ही नहीं उनके अस्तित्व पर भी प्रश्न है ।

चौराहे और चौबारे का फर्क समाज और नेतृत्व दोनों भूलता जा रहा है। वैसे स्त्रियों की गलती गिनाने से बलात्कारी मानसिकता को नहीं बदला जा सकता जो बल के प्रभाव और मानवीयता के अभाव में उपजता है। पशुओं में मादा की स्वीकृति या नर एवं मादा के सम्बन्ध का अर्थ नहीं होता, शक्ति और सुरक्षा के माध्यम से सम्बन्ध परिभाषित होते हैं। अपशब्दों में हम मानवीय सम्बन्धों का पाशवीकरण के सामानयीकरण को स्वीकार कर रहे हैं। तब सोचना आवश्यक है की क्या हम जंगल से शहरों की ओर बढ़ रहे हैं या जंगलों को शहरों में बो रहे हैं।

हमारे नेताओं को, हमारे आदर्शों को समाज के लिए ऊँचे मानदंड बनाने होंगे क्योंकि उनसे एक बड़ा वर्ग अपनी नैतिकता के मानदंड के मानक खींचता है। संघर्ष और क़ानून एक सीमा तक ही काम आ सकते हैं यदि मनुष्य के मस्तिष्क से सही ग़लत के भेद मिट जाए तो न्याय भी असहाय हो जाता है। हमारे समाज के आदर्श पुरुषों और महिलाओं को इस पर सोचने की आवश्यकता है।

कभी-कभी इन कथित नेताओं की बातें सुनती हूँ तो लगता है कि चलो माना इनके संदर्भ समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, पर इनका उत्तरदायित्व सामाजिक, चारित्रिक और शाब्दिक संवाद को बेहतर करना और रखना भी है क्योंकि समाज तो सदैव प्रेरणा पर चलता रहा चाहे वो राम का युग हो या कृष्ण का युग है। जब शब्द टूटते हैं तो सामाजिक नैतिकता के मानक बिखरते हैं, और वहीं से समाज के विघटन की त्रुटि रेखाएँ लिखी जाती हैं।

इस लेख को लिखा है श्रद्धा सुमन राय (Shraddha Suman Rai) ने।

TMC नेताओं ने शेयर की ‘मोदी और योगी को गाली’ जैसे नारे वाली फर्जी वीडियो: ट्विटर ने लगाया ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध नफरत देख तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता रिजू दत्ता और जवाहर सरकार इतने उत्साहित हो गए कि उन्होंने एक एडिटिड (फर्जी दावे वाली) वीडियो को शेयर करके अपनी खुशी ट्विटर पर जाहिर कर दी। इन लोगों ने काशी विश्वनाथ दौरे के समय रिकॉर्ड की गई पीएम मोदी और सीएम योगी की एक वीडियो को शेयर किया और दावा किया कि लोग कैसे दोनों नेताओं का विरोध कर रहे हैं लेकिन गोदी मीडिया इसे नहीं दिखाएगा।

अपने ट्वीट में रिजू दत्ता ने बताया कि काशी परिक्रमा के समय लोगों ने ‘मोदी हाय-हाय और योगी चोर है’ के नारे बुलंद किए थे। मगर दुर्भाग्यवश गोदी मीडिया ये सच्चाई नहीं दिखाएगा। टीएमसी के दूसरे नेता जवाहर सरकार ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए लिखा, “वाह। मोदी की काशी परिक्रमा के दौरान प्रदर्शन। हिम्मत है। गोदी मीडिया इसे नहीं दिखाएगी।”

टीएमसी नेताओं द्वारा शेयर वीडियो में देख सकते हैं कि मोदी योगी के पीछे भीड़ तेज-तेज चिल्ला रही है। दृश्य ऐसा है कि कोई भी देखकर समझ ले कि जो टीएमसी नेता ने बताया है वही सच है।

हालाँकि, वास्तविकता क्या है इसका भंडाफोड़ ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने घटना की असली वीडियो शेयर करके किया। ये वीडियो तब की है जब 13 दिसंबर को कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद पीएम देर रात परिक्रमा पर निकले। वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी दोनों चल रहे हैं और भीड़ लगातार उनका अभिवादन कर रही है। इसी अभिवादन को म्यूट करके ‘मोदी हाय-हाय’ और ‘योगी चोर’ का ऑडियो वीडियो के साथ जोड़ा गया, जिसे शेयर करके टीएमसी नेता गोदी मीडिया को कोस रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है ट्विटर ने भी इस ट्वीट को अब मैनिपुलेटेड मीडिया की श्रेणी में रख दिया है। ये टैग जवाहर सरकार के ट्वीट के साथ नजर आ रहा है। ये जवाहर सरकार वहीं शख्स हैं जिन्हें नरेंद्र मोदी से पहले से दिक्कत रही है। साल 2014 में जब चुनाव होने थे तो सरकार प्रसार भारती के सीईओ थे। इन्होंने कॉन्ग्रेस को खुश करने के लिए पीएम मोदी के इंटरव्यू से कई हिस्सों को कटवा दिया था। बाद में इनका विरोध हुआ था और वीडियो के क्लिप काटने की बात स्वीकारी गई थी।

कपूरथला गुरुद्वारे में लिंचिंग के शिकार युवक की गर्दन, सिर और छाती पर मिले तलवार के 30 घाव: अटॉप्सी रिपोर्ट से खुलासा

पंजाब (Punjab) के कपूरथला गुरुद्वारे में एक विक्षिप्त व्यक्ति की लिंचिंग (kapurthla Mob lynching) के मामले में ऑटोप्सी रिपोर्ट (Atopsi report) आ गई है। इसमें खुलासा किया गया है कि मृतक के शरीर पर 30 गहरे घाव थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस बात का पता चलता है कि उसके शरीर पर नुकीले गहरे घाव थे, जो कि संभवत: तलवार के वार से हुए थे। इसकी पुष्टि करते हुए सीनियर मेडिकल ऑफिसर नरिंदर सिंह ने मीडिया को बताया कि स्थानीय सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के पाँच सदस्यीय बोर्ड ने शव का परीक्षण किया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि मृतक की गर्दन, सिर, छाती और शरीर के दाहिने कूल्हे पर गहरे घाव थे। ऐसी संभावना है कि गर्दन पर कट लगने के कारण उसका सांस फूल गई होगी। पाँच सदस्यीय बोर्ड ने यह जानने के लिए कि कहीं उसने कोई नशीला पदार्थ तो नहीं लिया था, उसके ब्लड की केमिकल टेस्टिंग भी की थी। डॉक्टरों ने उसके डीएनए परीक्षण के लिए उसके बाल, दाँत और खून के नमूने लिए।

अस्पताल में मौजूद रहे शहर के DSP सुरिंदर ने बताया कि हमने मृतक की पहचान करने की कोशिश की थी, लेकिन 72 घंटे बीतने के बाद भी किसी ने भी शव के लिए दावा नहीं किया। चूँकि, शव के लिए किसी ने दावा नहीं किया तो पुलिस उसे लेकर श्मशान घाट गई और अंतिम संस्कार के लिए शव को नगर निगम के हवाले कर दिया।

वहीं आईजी ढिल्लन के मुताबिक, गुरुद्वारा के प्रबंधक अमरजीत सिंह के बयान पर धारा 295A के तहत मृतक के ही खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

जबकि अटॉप्सी रिपोर्ट आने के बाद भी व्यक्ति की हत्या के मामले में पुलिस ने अभी तक आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की है।

खालिस्तान समर्थक है गुरुद्वारे का सेवादार (Khalistan)

खास बात ये है कि ऑपइंडिया ने 22 दिसंबर 2021 को ही बताया था कि जिस कपूरथला गुरुद्वारे के सेवादार अमरजीत सिंह की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। वो खुद भी एक खालिस्तानी समर्थक रहा है। वो बार-बार पाकिस्तान जाता रहा है। इसके बाद वो ‘CAT’ में शामिल हो गया। ये खालिस्तानी चरमपंथी थे, जो बाद में पुलिस के मुखबिर बन गए थे। इसके अलावा जिस विक्षिप्त की मॉब लिंचिंग की गई, वो भूखा था और खाने की उम्मीद में गुरुद्वारा गया था।