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पाकिस्तान से जुड़ी 2 वेबसाइटों, 20 YouTube चैनलों को मोदी सरकार ने किया ब्लॉक, जमकर हो रहा था भारत विरोधी दुष्प्रचार

भारत सरकार ने 2 वेबसाईट और 20 यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर दिया है। भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 21 दिसंबर को जारी एक प्रेस रिलीज में इसकी जानकारी दी है। प्रेस रिलीज में उन्होंने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को फैलने से रोकने के लिए पाकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले इन वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक किया गया है। इसके लिए दो आदेश जारी किए गए। पहले आदेश में 2 वेबसाइटों के ब्लॉक करने की बात कही गई और दूसरे वेबसाइट में 20 यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने की।

प्रेस रिलीज के अनुसार, इन चैनलों और वेबसाइटों को भारत से संबंधित संवेदनशील विषयों पर फर्जी खबरें फैलाने के लिए पाकिस्तान और उसके दुष्प्रचार नेटवर्क से लिंक किया गया था। इसमें लिखा था, “चैनलों का इस्तेमाल कश्मीर, भारतीय सेना, भारत में अल्पसंख्यक समुदायों, राम मंदिर, जनरल बिपिन रावत आदि विषयों पर समन्वित तरीके से विभाजनकारी सामग्री पोस्ट करने के लिए किया गया था।”

प्रेस रिलीज में विशेष रूप से द नया पाकिस्तान ग्रुप (NPG) का उल्लेख किया गया है जिसे पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा है। नेटवर्क का YouTube चैनल है, जिनका लगभग 35 लाख सब्सक्राइबर और 55 करोड़ से अधिक व्यूज है। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ चैनल पाकिस्तानी समाचार चैनलों के समाचार एंकरों द्वारा संचालित किए गए थे।

इन चैनलों ने भारत से जुड़े कई मुद्दों पर कई कंटेंट पब्लिश की है, जैसे कि किसानों का विरोध, सीएए-एनआरसी विरोध और भी बहुत कुछ। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि ये चैनल अल्पसंख्यकों को भारत सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे थे। इसमें लिखा है, “यह भी आशंका थी कि इन YouTube चैनलों का उपयोग पाँच राज्यों में आगामी चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए कंटेंट पोस्ट करने के लिए किया जाएगा।”

भारत में इनफॉर्मेशन स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 16 के तहत पोर्टल और चैनलों को ब्लॉक कर दिया गया है। प्रेस रिलीज में कहा गया है, “मंत्रालय ने पाया कि अधिकांश कंटेंट राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील विषयों से संबंधित है और तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह मुख्य रूप से भारत के खिलाफ एक समन्वित दुष्प्रचार नेटवर्क के रूप में पाकिस्तान से पोस्ट किया जा रहा है। इसलिए इसे इमरजेंसी केस मानकर कंटेंट को ब्लॉक करने के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए इसे उपयुक्त समझा।”

ब्लॉक किए गए चैनलों की लिस्ट

चार YouTube चैनल विशेष रूप से कश्मीर से संबंधित सामग्री पर केंद्रित थे। ये चैनल थे- द पंच लाइन, द नेकेड ट्रुथ, 48 न्यूज और कवर स्टोरी। दो चैनलों ने खालिस्तान से संबंधित प्रोपेगेंडा पर वीडियो बनाया था। इनका नाम इंटरनेशनल वेब न्यूज और खालसा टीवी था। दो चैनल- न्यूज 24 और पंजाब वायरल, दोनों खालिस्तानी और कश्मीर से संबंधित सामग्री प्रकाशित कर रहे थे।

पाँच YouTube चैनल सामान्य भारत विरोधी सामग्री प्रकाशित कर रहे थे। इन चैनलों का नाम था- फिक्शनल, हिस्टॉरिकल फैक्ट्स, नया पाकिस्तान ग्लोबल, गो ग्लोबल और ईकॉमर्स। आठ YouTube चैनल पाकिस्तान के समाचार चैनल के पत्रकारों और एंकरों से जुड़े थे। इन चैनलों का नाम जुनैल हलीम ऑफिशियल, तैयब हनीफ, जैन अली ऑफिशियल, मोहसिन राजपूत ऑफिशियल, कनीज फातिमा, सदफ दुर्रानी, ​​मियाँ इमरान अहमद और नजम उल हसन बाजवा था। द नेकेड ट्रुथ, हिस्टॉरिकल फैक्ट्स, नया पाकिस्तान ग्लोबल और जैल अली ऑफिशियल जैसे चैनल करोड़ों में व्यूज वाले टॉप व्यूज चैनलों में से थे। नया पाकिस्तान ग्लोबल को जहाँ नौ करोड़ से अधिक व्यूज हैं, वहीं नजम उल हसन बाजवा को 11 करोड़ से अधिक व्यूज हैं।

कोलकाता की 144 में से 134 सीटों पर TMC का कब्ज़ा, धाँधली के आरोपों के बीच KMC की मतगणना पूरी: BJP दूसरे नंबर पर

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने मंगलवार (21 दिसंबर 2021) को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनावों में 144 में से 134 वार्ड जीतकर एक बार फिर प्रचंड जीत ​हासिल की है। 144 वार्डों में से भाजपा को 3, कॉन्ग्रेस को 2, लेफ्ट को 2 और निर्दलीय को 3 सीटें मिली हैं। वहीं, वर्ष 2015 में टीएमसी ने 114 सीटों पर कब्जा कर यह चुनाव जीता था। उस वक्त बीजेपी के पास 7, वाम दलों के पास 15, जबकि कॉन्ग्रेस और अन्य के पास क्रमशः 5 और 3 सीटें थीं। बीजेपी ने इस चुनाव में वकील और प्रोफेसर जैसे युवा व शिक्षित उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। वहीं टीएमसी ने मंत्रियों के रिश्तेदारों को टिकट बॉंटे थे।

शुरुआती रुझानों में टीएमसी की प्रचंड जीत को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “यह एक राष्ट्रीय जनादेश है, क्योंकि वाम और भाजपा के साथ अन्य राष्ट्रीय दलों ने भी चुनाव लड़ा और हम जीत गए, लोगों ने स्पष्ट जनादेश दिया, मतदान उत्सव के माहौल में हुआ और हम लोगों के ऋणी हैं।”

कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, देबाशीष कुमार, तारक सिंह और माला रॉय जैसे कई टीएमसी उम्मीदवारों ने इस चुनाव में जीत दर्ज की है। चुनाव रविवार (18 दिसंबर) को हुए थे, जिसके दौरान कुल मतदाताओं में से केवल 63% ने अपना वोट डाला था। अपनी जीत के बारे में बोलते हुए हकीम ने कहा, “हमने पहले कभी इतनी बड़ी जीत हासिल नहीं की। यहाँ तक कि विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी हमारा वोट प्रतिशत बढ़ा है। हम लोगों का समर्थन और आशीर्वाद पाकर खुश हैं। हम उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।” वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के कुछ वीडियो भी साझा किए हैं, जिसमें वह कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते और सीएम के आवास के बाहर जश्न मनाते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें कि वार्ड संख्या 22 से भाजपा के लिए राहत की खबर आई है, जहाँ मीणा देवी पुरोहित को लगातार छठी बार पार्षद चुना गया। उन्होंने इस पर ख़ुशी जताते हुए इसे जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जीत उसी की होगी, जो जनता के लिए कार्य करेंगे।

संसद में बहस के दौरान मर्यादा भूले TMC सांसद डेरेक ओब्रायन, सभापति पर फेंका रूल बुक: राज्यसभा से निलंबित किए गए

चुनावों में फर्जी मतदान को रोकने के लिए चुनाव कानून संशोधन विधेयक-2021 (Election Laws (Amendment) Bill, 2021) लेकर आई है। जिसको लेकर राज्यसभा (Rajya Sabha) में चर्चा के दौरान मंगलवार (21 दिसंबर 2021) को तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओब्रायन (Derek O’brien) ने रूल बुक को सभापति की ओर फेंक दिया। उनके इस दुर्व्यवहार के बाद कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। वो शीतकालीन सत्र की कार्रवाई से निलंबित किए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा से वॉकआउट करने से पहले डेरेक ओब्रायन ने बिल पर दो मिनट तक भाषण भी दिया। कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की माँग कर रहा था, लेकिन इसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक वोटर की निजता का हनन करता है।

वहीं डेरेक ओब्रायन के दुर्व्यवहार पर बात करते हुए राज्यसभा के पीठासीन अध्यक्ष डॉ सस्मित पात्रा ने आज सदन में निर्वाचन कानून (संशोधन) विधेयक 2021 के खिलाफ उनके बयान पर कहा डेरेक ओब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया था। जिस पर उप सभापति ने व्यवस्था दी थी। पात्रा के मुताबिक, रूल बुक आसन, महासचिव को या किसी को भी लग सकती थी। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Pyush Goyal) ने इसे देश का अपमान बताया है। बहरहाल इस विधेयक को राज्यसभा से भी पारित करा लिया गया है।

इस मामले में डेरेक ओब्रायन ने कहा, “पिछली बार मुझे राज्यसभा से निलंबित किया गया था, जब सरकार कृषि कानूनों को पारित करा रही थी। हम सभी जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। आज बीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए निलंबित कर दिया गया। आज मुझे सस्पेंड किया गया है कि जब बीजेपी लोकतंत्र का मजाक बना रही है और चुनाव सुधार कानून को जबरन पारित करवा रही है। उम्मीद है कि यह विधेयक भी जल्द ही निरस्त हो जाएगा।”

क्या है कानून

‘चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक-2021’ ( Election Laws (Amendment) Bill, 2021) सोमवार (20 दिसंबर, 2021) को लोकसभा (Lok Sabha) में पास करा लिया। इस बिल के कानून का शक्ल लेने के बाद वोटर आईडी और लिस्ट को आधार कार्ड (Aadhaar card) से लिंक कर दिया जाएगा, जिससे फर्जी मतदान (Bogus voting) की समस्या से निजात पाया जा सकेगा।

पंजाब में मॉब लिंचिंग पर सवाल से बिफरे राहुल गाँधी, पत्रकार को कहा- ‘सरकार की दलाली मत कीजिए’

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने संसद (Parliament) में विपक्ष के व्यवधान पर पत्रकार पर बिफरने के बाद एक दिन बाद ही एक बार फिर से पंजाब में मॉब लिंचिंग (Mob lynching) की घटनाओं पर भी आपत्तिजनक बयान (Derogatory statement) दिया है। बेअदबी की घटनाओं पर टफ सवाल सामने आते ही उन्होंने पत्रकार को सरकार की दलाली नहीं करने की सलाह दे डाली।

दरअसल, बीते दिनों पंजाब में बेअदबी का आरोप लगाकर दो लोगों की हत्या कर दी थी और पंजाब में वर्तमान में कॉन्ग्रेस की सरकार है और चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjeet singh channi) वहाँ के मुख्यमंत्री हैं।

पत्रकार के लिए दलाली शब्द का इस्तेमाल करने से पहले राहुल ने मंगलवार (21 दिसंबर 2021) को एक ट्वीट पोस्ट करते हुए कहा कि 2014 से पहले लिंचिंग शब्द सुनने में भी नहीं आता था। बाद में जब उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने राहुल गाँधी से उनके उस ट्वीट को लेकर सवाल करते हुए हाल ही लिंचिंग की घटनाओं के बारे में सवाल कर लिया तो राहुल गाँधी गुस्से से आग बबूला हो उठे। उन्होंने पत्रकार पर केंद्र सरकार की भाषा में बात करने का आरोप लगाते हुए कठिन सवालों से बचने की कोशिश की। हाल ही में पंजाब में हुई लिंचिंग की घटनाओं पर राज्य सरकार की निष्क्रियता के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा, “सरकार की दलाली मत कीजिए, इस मुद्दे को भटकाओ मत।”

राहुल का गैर जिम्मेदाराना रवैया

राहुल गाँधी का गैर जिम्मेदाराना बयान इतना ही नहीं है। इससे पहले सोमवार (20 दिसंबर 2021) को कॉन्ग्रेस ने लखीमपुर खीरी के मुद्दे पर संसद में गतिरोध उत्पन्न किया। इसी को लेकर जब पत्रकारों ने राहुल गाँधी से सवाल किया गया था, तो उन्होंने पत्रकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या वे सरकार के लिए काम करते हैं। उनका यह बयान ट्विटर पर खूब शेयर किया जा रहा है, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता संसद के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए एक पत्रकार को कहा, “क्या आप सरकार के लिए काम करते हैं?”

उन्हें पत्रकार को यह कहते हुए भी सुना जाता है कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है न कि विपक्षी दलों की।

पंजाब में तेजी से बढ़ी हैं लिंचिंग की घटनाएँ

उल्लेखनीय है कि पंजाब में हाल के दिनों में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ काफी तेजी से बढ़ी हैं। हाल ही में बेअदबी के आरोप में उन्मादी भीड़ ने दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जिससे राज्य में बिगड़ी कानून व्यवस्था को समझा जा सकता है।

राज्य में बेअदबी मामले में की गई मॉब लिंचिंग की पहली घटना शनिवार शाम दरबार साहिब के गर्भगृह के अंदर हुई। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि गर्भगृह में जहाँ पर गुरु ग्रंथ साहिब को रखा गया था, वहाँ चला गया। उसने वहाँ रखे कृपाण को उठा लिया। इस बीच सिख संगतों ने उसे पकड़ लिया और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। संगतों का आरोप था कि उक्त व्यक्ति ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने की कोशिश की थी। व्यक्ति की हत्या करके उसे गुरुद्वारा परिसर के बाहर फेंक दिया गया।

इस घटना के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि कपूरथला के निजामपुर गाँव में स्थित एक गुरुद्वारे में एक व्यक्ति की बेअदबी के आरोप में हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस गुरुद्वारे में युवक को पकड़ा गया था वहाँ पर भीड़ ने पुलिस को आरोपित को हिरासत तक में नहीं लेने दिया था, लेकिन बाद बताया गया कि भीड़ ने युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

खास बात ये है कि पंजाब में बेअदबी के मामले पर काफी चर्चा होती है, लेकिन दो लोगों की मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर कोई भी एक शब्द नहीं बोला। सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुप्पी साधे रखी। पुलिस ने भी पहले ये कहा कि गुरुद्वारे में बेअदबी के कोई सबूत नहीं मिले, लेकिन बाद पुलिस ने अमृतसर और कपूरथला में मारे गए दोनों लोगों पर ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने’ (आईपीसी 295) का आरोप लगाया। वहीं इन हत्याओं के आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पंजाब में अब गीता का अपमान, इससे पहले तोड़ा था शिवलिंग, हिन्दू महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी: इस ‘बेअदबी’ पर थप्पड़ तक नहीं

पंजाब में श्रीमद्भगवद्गीता के अपमान का मामला सामने आया है। पिछले दिनों अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और कपूरथला के निजामपुर गुरुद्वारे में बेअदबी के आरोप में सिख भीड़ ने दो युवकों की मॉब लिंचिंग कर दी। जहाँ दरबार साहिब में हुई घटना में हत्या की निंदा करने की बजाए सारे नेता केवल ‘बेअदबी’ की ही निंदा कर रहे हैं। किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि मॉब लिंचिंग की निंदा कर सके। वहीं कपूरथला में तो बेचारा मानसिक रूप से विक्षिप युवक भूखा था तो रोटी के लिए गया था, लेकिन उस पर ‘निशान साहिब’ की बेअदबी का आरोप लगा कर मार डाला गया।

लेकिन, श्रीमद्भगवद्गीता के अपमान की खबर के बाद इस तरह की कोई घटना नहीं है। ऐसा नहीं है कि पंजाब में हिन्दू नहीं रहते हैं या हिन्दू संगठन सक्रिय नहीं हैं, लेकिन हिन्दू समाज सहिष्णु है। ताज़ा घटना लुधियाना की है, जहाँ मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को पुलिस कमिश्नर कार्यालय के समक्ष हिन्दू हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ कटी-फटी अवस्था में मिले। ‘शिव सेना पंजाब’ के कार्यकर्ताओं ने इसे पुलिस को सौंपा और साथ ही इस मामले में जाँच की माँग की।

पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने एक ‘शिव ढाबा’ है, जहाँ पर एक शिव मंदिर भी है। वहीं एक पीपल के पेड़ के नीचे श्रीमद्भगवद्गीता और गरुड़ पुराण की पुस्तकें पड़ी हुई थीं। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इन्हें उठा कर पुलिस को सौंपा। इससे पहले फोकल पॉइंट क्षेत्र में गोहत्या की बात भी सामने आई थी। हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद पुलिस किसी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। हाँ, मॉब लिंचिंग क्या इसी को चाँटा तक मारने का आरोप हिन्दुओं पर नहीं लगा।

हिन्दू संगठनों ने ऐलान किया है कि पुलिस अगर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होती है तो वो इसके लिए संघर्ष करेंगे। अब हिन्दू ग्रंथों के अपमान के मामले में सीसीटीवी फुटेज चेक कर के कार्रवाई की जाएगी। सिख भीड़ की मॉब लिंचिंग को जायज ठहरा रहे लोग पूरे भारत और हिन्दू समाज को असहिष्णु बताने लगते और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में लेख आने लगते, अगर हिन्दुओं ने गुस्से में आकर किसी को एक थप्पड़ भी लगा दिया होता। लोगों को भारत में रहने और हिन्दू समाज में जन्म होने पर शर्म आने लगती।

ये हाल में इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है। इसी तरह जुलाई 2021 में अहमदगढ़ के सरौंद के मालेरकोटला मार्ग पर शिवलिंग के साथ छेड़छाड़ किए जाने की खबर सामने आई थी। हिन्दुओं ने बस आक्रोश भर जताया। पुलिस ने घटनास्थल का दौरा कर के इतिश्री कर ली। अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, बस। हिन्दू भी भूख हड़ताल कर के संघर्ष करते रहे। कोई मॉब लिंचिंग नहीं हुई। शिवलिंग के साथ तोड़फोड़ हुई, लेकिन हिन्दुओं ने किसी को छुआ तक नहीं। क्योंकि हिन्दू सहिष्णु होते हैं।

पंजाब के कॉन्ग्रेस पार्षद सुखराज औलख ने अगस्त 2021 में यज्ञ, व जाप के अलावा ब्राह्मण समाज व महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। हिन्दुओं की भीड़ ने मॉब लिंचिंग नहीं, सड़कों पर कीर्तन कर के अपना विरोध जताया। उनके बॉयकॉट की माँग की गई। कॉन्ग्रेस पार्टी का विरोध हुआ। सब कुछ लोकतांत्रिक तरीके से। हिन्दुओं को पता है कि जब झूठे मामले बना कर उन्हें सांप्रदायिक रंग देकर दुनिया भर में उन्हें रोज बदनाम किया जाता है, तो फिर किसी दिन कोई गलती हो भी गई तो नैरेटिव बनाने वाला गिरोह क्या कर सकता है।

हालाँकि, सिख भीड़ ने इसकी परवाह न तो ‘किसान आंदोलन’ के दौरान दलित लखबीर सिंह के शरीर के टुकड़े करने में की, न ही स्वर्ण मंदिर में घुसे युवक की उँगलियाँ तोड़ कर उसकी हत्या करने में और न ही एक बीमार युवक पर झूठा आरोप लगा कर कपूरथला में उसके मॉब लिंचिंग के दौरान। इन सब में कॉमन ये है कि ऐसा करने वालों को पछतावा नहीं और वो कहते हैं कि ‘बेअदबी’ होगी तो फिर ऐसा करेंगे। उन्हें गिरोह विशेष का भय नहीं। नैरेटिव बनाने वाला गिरोह सिख भीड़ के साथ है।

लोकसभा में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने वाले बिल का विपक्षी दलों ने किया विरोध, ओवैसी ने कहा- ’18 साल सहमति से सेक्स की उम्र’

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच मंगलवार (21 दिसंबर 2021) को लोकसभा में बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक, 2021 पेश किया। इसमें सभी धर्मों की लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर पुरुषों के बराबर 21 साल करने का प्रस्ताव है।

इसे पेश किए जाने का कॉन्ग्रेस, तृणमूल कॉन्ग्रेस, राकांपा, द्रमुक, एआईएमआईएम, शिवसेना, आरएसपी, बीजद जैसे दलों ने विरोध किया। विधेयक को व्यापक विचार विमर्श के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विधेयक इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन 1937, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, हिंदू मैरिज एक्ट 1955, फोरेन मैरिज एक्ट 1969 (The Foreign Marriage Act) के प्रावधानों में संशोधन करेगा।

कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने बिना किसी उचित परामर्श के जल्दबाजी में इस विधेयक को पेश किया। उन्होंने माँग की कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाए। टीएमसी सांसद सौगत रॉय और आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने भी इसको लेकर आपत्ति जताई। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा कि यह विधेयक, “इच्छा के विरुद्ध, असंवैधानिक और अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है।” उन्होंने कहा कि विधेयक पर्सनल लॉ पर हमला है।

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है। अगर कोई 18 साल की उम्र में मतदान कर सकता है, तो कोई व्यक्ति शादी क्यों नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत 18 साल की उम्र सहमति से सेक्स की उम्र है। शादी की उम्र बढ़ाना अनुचित है।

बता दें कि स्मृति ईरानी ने इस विधेयक को लड़कियों एवं महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि जो लोग सदन में उनकी सीट के आगे शोर-शराबा कर रहे हैं, वे एक तरह से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं।

स्वर्ण मंदिर लिंचिंग से 2 दिन पहले SFJ ने पाकिस्तान से माँगी थी मदद: खालिस्तान जनमत संग्रह और ‘दिल्ली के पतन’ का जिक्र

हाल ही में पंजाब के अमृतसर स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (Guru granth sahib sacrileg) के आरोप में सिख संगत ने एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना के दो दिन पहले खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपरवंत सिंह पन्नू ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को पत्र लिखकर जनमत संग्रह और ‘दिल्ली के पतन’ में उनका समर्थन माँगा था। यह पत्र 16 दिसंबर, 2021 को बांग्लादेश की 50वीं वर्षगाँठ पर लिखा गया था।

पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने के लिए एसएफजे का समर्थन करने के लिए पत्र लिखा था। 16 दिसंबर को खान को लिखे गए पत्र में आतंकवादी संगठन एसएफजे ने खुद को ‘human rights advocacy group’ का हिस्सा बताया था। पन्नू ने पत्र में लिखा था, “एसएफजे पहली बार अपना वैश्विक गैर-सरकारी खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित कर रहा है। हम पाकिस्तान सरकार और अन्य लोगों से आग्रह करते हैं कि भारतीय कब्जे से पंजाब की मुक्ति के लिए सिख लोगों के जनमत संग्रह के अधिकार का अंतरराष्ट्रीय मंचों से समर्थन दें।”

पन्नू का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र।

पन्नू ने आगे कहा, “लंदन, ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह में 30,000 सिख पहले ही भाग ले चुके हैं। हाल ही में 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस पर खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए स्विटजरलैंड में मतदान हुआ था, जिसमें 6,000 से अधिक सिखों ने भाग लिया था। उन्होंने भारतीय कब्जे से पंजाब की स्वतंत्रता के लिए मतदान किया।” उन्होंने यह भी कहा, “जहाँ ढाका के पतन का अतीत है। वहीं ‘दिल्ली का पतन’ भी जरूरी है।”

दिलचस्प बात यह है कि पन्नू ने पाकिस्तान से समर्थन माँगा है, जहाँ सिख अल्पसंख्यक हैं और आए दिन बहुसंख्यक आबादी के अत्याचारों का सामना कर रहे हैं। जब पन्नू ने खालिस्तान का प्रस्तावित नक्शा जारी किया, तो उसने पंजाब के उन हिस्सों को नहीं जोड़ा, जो पाकिस्तान में हैं और जहाँ कई प्रमुख गुरुद्वारे स्थित हैं।

20 दिसंबर को खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उसने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में कथित बेअदबी के मामले में अपना बयान जारी किया था। आतंकवादी पन्नू ने अपने बयान में कहा कि अकाली दल के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के समय से ही बेअदबी की घटनाएँ होती रही हैं। आज वे फिर से वोट के लिए राजनीति कर रहे हैं। यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि वह व्यक्ति कौन था, जिसने स्वर्ण मंदिर में बेअदबी की थी। उसे किसने भेजा और इस तरह के कृत्य के पीछे क्या उद्देश्य था। उसने आगे कहा कि बादल 1984 में स्वर्ण मंदिर में सेना के अभियान में शामिल थे। जब भी सिख पीठ में छुरा घोंपते हैं, बादल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसमें शामिल होते हैं।

आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के वीडियो का स्क्रीनशॉट। साभार: यूट्यूब।

उसने यह भी कहा, “बादल हो, नवजोत हो, ‘आप’ हो या चन्नी। ये सब वोट के लिए राजनीति कर रहे हैं। वे आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए मुक्ति ही एकमात्र रास्ता है। 1984 में स्वर्ण मंदिर पर हमला होने से सिख समुदाय आहत हुआ था। एक लाख सिखों ने खालिस्तान के लिए अपनी जान दे दी थी, लेकिन कैप्टन, आप, चन्नी ये लोग जो तिरंगे के वफादार हैं, ये सभी राजनीति कर रहे हैं, पंजाब को आजादी से दूर ले जा रहे हैं।”

पन्नू ने कहा कि पंजाब में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह 2022 होगा। पंजाब में नई सरकार बनने से पहले हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पंजाब का हर घर जनमत संग्रह के बारे में जाने। इसका एक ही रास्ता है, आजाद पंजाब।” बता दें कि पन्नू पंजाब के युवाओं को खालिस्तान आंदोलन में शामिल होने के लिए भड़काऊ बयान देता रहा है। वह ब्रिटेन और अन्य देशों में जनमत संग्रह के लिए मतदान का आयोजन भी करता रहा है।

‘छत्तीसगढ़ के कारण राजस्थान में बिजली की समस्या’: अशोक गहलोत ने सोनिया गाँधी से की भूपेश बघेल की शिकायत, लिखा पत्र

कोयला ब्लॉक में खनन को लेकर कॉन्ग्रेस शासित दो राज्य आमने-सामने आ गए हैं। मामला इस कदर बढ़ गया है कि अब हाईकमान के सामने हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) से छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) की शिकायत की है। सीएम गहलोत ने छत्तीसगढ़ में अपनी बिजली परियोजनाओं को आवंटित ब्लॉकों से कोयला उत्पादन के लिए मँजूरी में तेजी लाने के लिए सोनिया गाँधी के हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने सोनिया गाँधी को पत्र भी लिखा है।

यह है राजस्थान का तर्क

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वहाँ स्थित परसा कोयला ब्लॉक के खनन के लिए मंजूरी में देरी करने से राजस्थान में बिजली की समस्या पैदा हो रही है और राज्य में 4 हजार 340 मेगावॉट उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। इसी महीने की शुरुआत में राजस्थान को ईंधन की कमी के कारण अपने बिजली स्टेशनों के ठप हो जाने से ब्लैक आउट का सामना करना पड़ा था।

यह है मामला

राजस्थान के कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में परसा, परसा पूर्व, कांता बसन और कांटे एक्सटेंशन में हैं। परसा कोल ब्लॉक से खनन की मंजूरी केंद्रीय कोयला और वन मंत्रालय ने तो दी है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले को लटका दिया है।

यह है छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क

परसा कोल ब्लॉक के लिए राजस्थान सरकार ने अडानी कंपनी के साथ अनुबंध किया है। इसके लिए केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद हाल ही में हसदेव क्षेत्र के आदिवासियों ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक पदयात्रा कर राज्यपाल को केंद्र के नाम ज्ञापन सौंपकर खनन की अनुमति देने का विरोध किया था। तब छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासियों को आश्वस्त किया था कि राज्य सरकार द्वारा उनके हितों की रक्षा की जाएगी। बता दें कि इस संबंध में केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार दोनों से क्लियरेंस मिलने के बाद खनन शुरू हो सकेगा।

यदि यूज करते हैं डेबिट और क्रेडिट कार्ड तो यह खबर आपके लिए है, 1 जनवरी 2022 से बदल रहे नियम: टोकन लेने के बाद हो पाएगी शॉपिंग

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान साइबर फ्रॉड की घटनाएँ न हो इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने नए नियम बनाए हैं। अभी तक आप जब भी कुछ डिजिटल खरीददारी करते थे तो आपको अपने क्रेडिट/डेबिट कार्ड की डिटेल किसी साइट पर देनी पड़ती थी, इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी के केस दिन पर दिन बढ़ रहे थे। इनकी रोकथाम के लिए और यूजर की निजता का ख्याल करते हुए रिजर्व बैंक ‘इन्क्रिप्टिड’ टोकन सिस्टम लेकर आया है। बैंक ने सभी मर्चेंट (व्यापारियों) और पेमेंट गेटवे को ग्राहकों के संवेदनशील डाटा को हटाने के लिए निर्देश दिए हैं। ये नए नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एचडीएफसी बैंक जैसे बैंकों ने पिछले हफ्ते मैसेज भेजकर अपने उपभोक्ताओं को ये जानकारी दी है कि 1 जनवरी 2022 के बाद आप जब भी भुगतान करेंगे तो नए नियमों के तहत आपको दो ऑप्शन दिए जाएँगे। एक कार्ड विवरण का और दूसरा टोकन का। कार्डधारक को निर्णय लेना है कि वो कार्ड की पूरी डिटेल देगा या फिर टोकन के जरिए पेमेंट करेगा। अगर उसे टोकन से भुगतान करना हुआ इसके लिए टोकन जारी किया जाएगा।

एचडीएफसी द्वारा भेजे गए मैसेज में लिखा है, “नए नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होंगे। आरबीआई के आदेशानुसार, कार्ड (डेबिट/क्रेडिट) की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मर्चेंट वेबसाइट/ऐप पर संभाले गए आपके एचडीएफसी बैंक कार्ड की जानकारी को डिलीट कर दिया जाएगा। पेमेंट करने के लिए, हर बार कार्ड की पूरी जानकारी डालें या टोकनाइजेशन का विकल्प चुनें।”

बता दें कि नियमों में बदलाव का फैसला कोई हाल-फिलहाल में नहीं लिया गया। इस पर विमर्श पहले से हो रहा था और आरबीआई ने भी सितंबर में नोटिस जारी करके नए नियम के बारे में बताया था। सितंबर 2021 में जारी किए गए नए दिशा-निर्देश के मुताबिक, कंपनियों को साल के आखिर तक नियमों का पालन करने और उन्हें टोकन का विकल्प उपलब्ध करवाने के लिए समय दिया गया था।

टोकनाइजेशन (Tokenisation) क्या है?

अभी तक जिस डिजिटल लेन-देन के लोग आदी हैं उसके लिए वह डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। फिर उसपर लिखी जानकारी और वन टाइम पासवर्ड के आधार पर ट्रांजेक्शन होता है। अब टोकनाइजेशन (Tokenisation) इससे थोड़ा अलग है। ये आपके कार्ड की जानकारी को एक यूनिक वैकल्पिक कोड में बदलेगा जिसके इस्तेमाल से ट्रांजेक्शन संभव होगी। इस प्रक्रिया में आपको अपने कार्ड के सीवीवी (तीन डिजिट वाला नंबर) और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा आपको अतिरिक्ट ऑथेन्टिकेशन के लिए भी अपनी सहमति देनी होगी।

टोकन कैसे प्राप्त होगा?

खरीददारी के दौरान जब आप टोकन का विकल्प चुनेंगे तब मर्चेंट कार्ड का टोकनाइजेशन शुरू करेगा। आपकी सहमति लेकर टोकनाइजेशन के लिए कार्ड नेटवर्क को अनुरोध भेजा जाएगा। यहाँ ये कार्ड नेटवर्क आपके कार्ड नंबर (16 डिजिट का नंबर जो कार्ड पर अंकित होता है) की बजाय आपको एक टोकन देगा। अब मर्चेंट वो टोकन आपको देगा और आप इस तरह अपनी लेन-देन बिन कार्ड की जानकारी साझा किए कर पाएँगे। हर बार आपको लेन-देन के लिए आपके सीवीवी और ओटीपी की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन 16 डिजिट वाले नंबर की नहीं।

टोकनाइजेशन कितना सुरक्षित?

अभी तक आप जब किसी मर्चेंट से लेन-देन करते थे तो कई बार मजबूर किया जाता था कि वो आपकी कार्ड डिटेल सेव कर लें। इस तरह डेटा चोरी होने का खतरा काफी बढ़ जाता था। हालाँकि नए सिस्टम में कार्ड का विवरण इन्क्रिप्टिड ढंग से सेव किया जाएगा यानी जो डेटा लीक का खतरा पहले होता था वो इस प्रक्रिया में कम हो जाएगा।

‘जब कोरोना से लड़ रहा था देश, धर्मांतरण में लगे थे मुल्ला-मौलवी और ईसाई मिशनरी’: VHP का शंखनाद, शुरू किया देशव्यापी अभियान

देशभर में हो रहे धर्मान्तरण (Conversion) के खिलाफ जन जागरुकता फैलाने और अवैध धर्मान्तरण के खिलाफ कड़े कानून की माँग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (Vishwa hindu parishad) ने सोमवार (20 दिसंबर 2021) से 11 दिवसीय अभियान की शुरुआत की है। इसको लेकर वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार (Alok kumar) ने कहा है कि अब समय आ गया है कि लालच, भय या धोखे से धर्मान्तरण करवाने वालों के खिलाफ कठोर कानून की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने ये बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। कुमार के मुताबिक, देश में मुल्ला-मौलवी और ईसाई मिशनरी धर्मान्तरण का षड्यंत्र चला रहे हैं। इसकी भीषणता को देखते हुए हमने फैसला किया है कि अभियान चलाकर मुल्ला-मौलवियों और ईसाइयों के षणयंत्रों को उजागर करेंगे। इसके तहत जनसभाएँ, सोशल मीडिया साहित्य बाँटकर जनजागरण किया जाएगा। ताकि इन लोगों के हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी कृत्यों को समझकर इस पर रोक लगाई जा सके। वीएचपी नेता ने कहा, “कोरोना के समय जब पूरा देश कोरोना से जूझ रहा था और अधिकतर सामाजिक-धार्मिक संगठन सेवा के कार्यों में लगे थे, उस दौरान मौलवी और पादरी आक्रामक तरीके से धर्मान्तरण का काम कर रहे थे।”

आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि ‘चंगाई सभा’ के नाम पर चर्च खुले आम धर्मान्तरण करवा रहे हैं। ये लोग भोले-भाले वनवासियों को ग्रामीणों और पिछड़े लोगों को टार्गेट कर रहे हैं। कुमार का कहना है कि मिशनरी खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि कोरोना काल में जितने चर्च खोले गए, उतने तो बीते 25 सालों में भी नहीं खोले जा सके। लव जिहाद से पीड़ित हिंदू महिलाओं की प्रताड़ना, हत्या जैसी खबरें हर दिन सामने आती हैं। अवैध धर्मान्तरण के कारण भारत का विभाजन और उसके बाद करोड़ों हिंदुओं का नरसंहार, दंगे और आतंकवाद की पीड़ा से दो चार हो चुका हिंदू अब इन सारी चीजों को स्वीकार नहीं करेगा।

साभार: विश्व हिंदू परिषद

संवैधानिक चूक का फायदा उठा रहे मिशनरी

आलोक कुमार ने ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों के धर्मान्तरण कराए जाने के षड्यंत्र का खुलासा किया और कहा कि संविधान के मुताबिक, अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्मान्तरण करता है तो उसे मिलने वाला विशेषाधिकार समाप्त हो जाता है। जबकि इसके उलट अनुसूचित जनजाति वालों के अधिकार धर्मान्तरण के बाद भी बने रहते हैं। इसी संवैधानिक गलतियों का फायदा ईसाई मिशनरी उठाते हैं। हालाँकि, जनजातियों का अपने धर्म के प्रति अटूट विश्वास ही है जो ढाई सौ सालों में हजारों करोड़ डॉलर खर्च करने के बाद भी अभी तक केवल 18% वनवासियों का धर्मान्तरण कराया जा सका है।

भारत में बल-छल और लालच से हुआ मतांतरण

विहिप के कार्याध्यक्ष के मुताबिक, भारत में ज्यादातर धर्मान्तरण, बलपूर्वक, धोखे से या फिर लालच देकर करवाया गया है। यही वजह रही है देवल ऋषि, स्वामी विद्यारण्य, रामानुजाचार्य, रामानंद, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद जैसे महापुरुषों धर्मान्तरण रोकने के सतत प्रयास किए हैं।

साभार: विश्व हिंदू परिषद

गौरतलब है कि विश्व हिंदू परिषद ने 6 दिसंबर 2021 को देश में धर्मान्तरण के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ने के अभियान को शुरू करने का ऐलान किया था।