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पीएम मोदी को भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान: भारत की बिना शर्त दोस्ती और समर्थन के लिए जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रवार, 17 दिसंबर, 2021 को, भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान नगदग पेल जी खोरलो (Ngadag Pel gi Khorlo Award) पुरस्कार से नवाजा गया। भूटान राज्य के प्रमुख जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक (Jigme Khesar Namgyel Wangchuck) ने बहुप्रतीक्षित नागरिक सम्मान के लिए PM मोदी के नाम की घोषणा की।

वांगचुक ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, विशेष रूप से कोरोना वायरस (कोविड -19) महामारी के दौरान भारत की ‘बिना शर्त दोस्ती’ और भूटान के लिए समर्थन की सराहना की।

भूटान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने फेसबुक पर यह सूचना देते हुए लिखा, “महामहिम द्वारा सर्वोच्च नागरिक अलंकरण नगदग पेल जी खोरलो के लिए महामहिम नरेंद्र मोदी के नाम का उच्चारण सुनकर बहुत खुशी हुई। भूटान के लोगों की ओर से बधाई! जिस तरह से पीएमओ इंडिया, गृह मंत्रालय ने बिना शर्त वर्षों से दोस्ती और विशेष रूप से महामारी के दौरान मोदी जी द्वारा दिए गए समर्थन पर प्रकाश डालते हुए उनके तारीफ की। उन्होंने महामहिम मोदी को एक महान, आध्यात्मिक इंसान के रूप में मोस्ट डिजर्विंग बताते हुए कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से आपके सम्मान का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हूँ।”

यहाँ यह उल्लेख करना प्रासंगिक हो जाता है कि जब से कोविड-19 महामारी ने दुनिया को त्रस्त किया है, तब से भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, विभिन्न अन्य देशों को सहायता प्रदान करने में दृढ़ता से खड़ा रहा है। भूटान भारत द्वारा COVID-19 टीकों का उपहार प्राप्त करने वाला पहला देश बन गया था, जबकि भारत में टीकाकरण अभी शुरू ही हुआ था। 20 जनवरी को, भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान ने सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशील्ड टीकों की 150,000 खुराक की पहली खेप भूटान को दी थी।

जब भूटान ने भारत से भेजा गया टीकों का वह उपहार प्राप्त किया तब पीएम शेरिंग ने भारत को धन्यवाद देते हुए कहा था कि टीके एक ‘विश्वसनीय मित्र’ का एक उपहार है जो दशकों से भूटान के साथ रहा है। उन्होंने यह भी कहा, “जैसा कि यहाँ पर महामारी को हराने के अपनी लड़ाई में एक नए मील के पत्थर के रूप में वैक्सीन के आगमन का जश्न मना रहे हैं, हम भारत के इस कदम की सराहना करते हैं जो मानवता की भलाई के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वहाँ के लोगों की करुणा और उदारता का प्रतीक है।”

‘1920 में अदालत ने माना था- जमीन हिंदुओं की, ईदगाह मस्जिद में कभी नहीं हुई नमाज’: मथुरा कोर्ट में याचिका, नमाज पर रोक की माँग

उत्तर प्रदेश के मथुरा की अदालत में विवादित शाही ईदगाह मस्जिद में होने वाली नमाज के विरोध में याचिका दाखिल करते हुए उस पर लगाने की माँग की गई गई है। ईदगाह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के परिसर में स्थित है। इसके साथ ही ईदगाह मस्जिद के बगल से जाने वाली सड़क पर भी नमाज पढ़ने से रोकने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह हैं, जो कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष भी हैं।

इस याचिका के मुताबिक, “कुरान में भी विवादित भूमि पर नमाज़ पढ़ने से मनाही है। यहाँ 5 बार की नमाज़ पिछले कुछ समय से ही शुरू हुई, जो कि गैर-कानूनी है। पहले ईदगाह मस्जिद में नमाज नहीं होती थी। विरोधी पक्ष अब सड़क पर भी नमाज़ अदा कर रहा है। यह सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की साजिश है।” याचिका में वर्ष 1920 में चले एक मुकदमे का हवाला भी दिया गया है, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट रूप से इस भूमि को हिन्दुओं की बताई गई है।

दायर याचिका

याचिका में इतिहास का भी जिक्र किया गया है। अर्जी के मुताबिक, “अभी भी ईदगाह मस्जिद की दिवारों पर ॐ, शेषनाग, स्वास्तिक जैसे हिंदुओं के धार्मिक चिह्न मौजूद हैं। साल 1669 में इसे क्रूर आक्रांता औरंगजेब ने उक्त संपत्ति पर बने मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाया था। जिस स्थान पर मस्जिद बनाई गई थी, वह स्थल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मूल स्थल है जो कि गर्भगृह के नाम से जाना जाता है।” लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने याचिका में आगे कहा है, “हमने मथुरा की अदालत में विवादित भूमि पर नमाज पढ़ने से मना करने की अर्जी दी है। पहले यही माँग हम जिलाधिकारी से भी कर चुके हैं।”

जानकारी के मुताबिक़, अदालत इस पर 5 जनवरी 2022 को सुनवाई कर सकती है। इससे पहले इसी वर्ष जून में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति ने इस मामले का शांतिपूर्ण हल निकालने का प्रयास किया था। इस समाधान के फॉर्मूले में वर्तमान विवादित स्थल से बड़ा स्थान उन्हें कहीं और देने की पेशकश की गई थी। यह फॉर्मूला अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद के समाधान से मिलता-जुलता था। इस फॉर्मूले की शर्त यह भी थी कि मुस्लिम पक्ष को विवादित ढाँचा खुद से गिराना होगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था कि अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है और अब मथुरा की तैयारी है। ट्विटर पर उन्होंने इसके साथ ही ‘जय श्रीराम’, ‘जय शिव शम्भू’ और ‘जय श्री राधे-कृष्ण’ का टैग भी लगाया था।

‘तबलीगी जमात और निजामुद्दीन का मरकज इस्लामी कट्टरपंथ की फैक्ट्री’: VHP ने कहा- पूरी तरह से बैन करो, सऊदी अरब के फैसले का समर्थन

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने केंद्र सरकार से तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) पर भारत में बैन लगाने की माँग की है। साथ ही इन्हें समर्थन और बढ़ावा देने वाले दारूल उलूम देवबंद और पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) पर भी कार्रवाई की माँग की है। विहिप की ओर से गुरुवार 16 दिसंबर को जारी किए गए प्रेसनोट में तबलीगियों, तबलीगी जमात और इज्तिमा पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की गई है।

तबलीगी जमात पर सऊदी अरब के प्रतिबंध का भी विहिप का केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्वागत किया है। साथ ही कहा है कि तबलीगी जमात और निजामुद्दीन का मरकज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए संकट है। इन्हें इस्लामी कट्टरपंथ की फैक्ट्री और आतंकवाद का पोषक बताते हुए भारत में भी इन पर पूरी तरह से प्रतिबंध की माँग की है।

प्रेस नोट में तबलीगी जमात से जुड़े तमाम आर्थिक स्रोतों की जाँच करते हुए उनके बैंक खातों और ऑफिसों को सील करने की माँग उठाई गई है। साथ ही कहा गया है, “रूस ने भी तबलीगी जमात की हरकतों के चलते प्रतिबंध लगा रखा है। दारूल उलूम देवबंद को तबलीगी जमात का जन्मदाता है। तबलीगी जमात 1926 में निजामुद्दीन से शुरू हो मेवात क्षेत्र में व्यापक स्तर पर धर्मान्तरण करवाने में सफल रही। वर्तमान में यह 100 देशों और करोड़ों लोगों को संक्रमित कर चुकी है। भारत के तमाम हिस्सों में मस्जिदों और मदरसों में मिले हथियार और आतंकी कहीं न कहीं तबलीगी जमात की फैलाई सोच का परिणाम हैं।”

विहिप ने कहा है, “निजामुद्दीन मरकज़ वहाबी विचारधारा की ट्रेनिंग देता है। यहाँ से निकलकर तमाम लोग दुनिया भर में कट्टरता फैलाते हैं। ये सभाएँ इज्तिमा, मस्जिदों और मदरसों में की जाती हैं। दुनिया के तमाम आतंकी दलों को शुरू भी तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने किया है। भारत में स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या, गोधरा ट्रेन जलाने की घटना से लेकर अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले का रिश्ता मरकज़ निजामुद्दीन से है।”

बीजेपी-SAD सरकार ने 2011 में रखी थी जिस ‘अटल अपार्टमेंट्स’ की नींव, पंजाब के CM चन्नी ने 2021 में फिर से उसकी रखी आधारशिला

पंजाब में नए साल में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले कॉन्ग्रेस सरकार ऐसी योजनाओं की भी आधारशिला फिर से रख रही है, जिसे वह पूर्व में रद्द कर चुकी है। ऐसी ही एक योजना है ‘अटल अपार्टमेंट्स’। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लुधियाना के पक्खोवाल रोड स्थित शहीद करनैल सिंह नगर इलाके में बनने वाली इस योजना की गुरुवार (16 दिसंबर 2021) को आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट लुधियाना इम्परूवमेंट ट्रस्ट (LIT) द्वारा ‘100 प्रतिशत सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम’ के अंतर्गत बनाया जा रहा है और इसमें 12 मंजि़ला 336 HIG और 240 MIG फ्लैट होंगे।

उन्होंने कहा कि यहाँ के निवासियों को किफायती आवास मुहैया करवाना कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत LIT द्वारा शहीद करनैल सिंह नगर, पक्खोवाल रोड, लुधियाना के नज़दीक 8.80 एकड़ में इन फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री चन्नी ने बताया कि प्रस्तावित फ्लैटों के लिए अपेक्षित ज़मीन लुधियाना इम्परूवमेंट ट्रस्ट के पास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इच्छुक व्यक्ति इस योजना के लिए 18 दिसंबर, 2021 तक आवेदन कर सकते हैं और 24 दिसंबर, 2021 को अलॉटमेंट संबंधी ड्रॉ निकाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फ्लैटों में भूकंप प्रतिरोधी संरचना, HIG और MIG और क्लब के लिए अलग ग्रीन पार्क, इनडोर स्विमिंग पूल सहित अलग क्लब, मल्टीपर्पज़ हॉल, जिमनेजिय़म, टेबल टैनिस रूम, अलग समर्पित टॉवर पार्किंग, हरेक फ्लैट में वीडियो डोर फ़ोन और 24 घंटे सुरक्षा के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे, 24 घंटे बेकअप के साथ हरेक ब्लॉक में 13 व्यक्तियों की क्षमता वाली 2 लिफ़्टें, बाहरी ऐलीवेशन पर लाल टाईलों के साथ वाश्ड ग्रिट फिनिश, सभी कमरों में बड़ी बालकनी, ड्रॉइंग रूम और रसोई, नवीनतम तकनीकों के साथ रेन वॉटर हारवैस्टिंग सिस्टम, यार्ड हाईड्रेंट और वैट राइजर के साथ सेंटरलाईजड़ फायर हाईड्रेंट सिस्टम, लिफ़्टों के लिए 24 घंटे पावर बेकअप के प्रबंधन के अलावा कई अन्य सुविधाएँ शामिल होंगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा, कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु, विधायक कुलदीप सिंह वैद, एलआईटी चेयरमैन रमन बालासुब्रमण्यम, पीएसआईडीसी चेयरमैन केके बावा, नरेश धीगान, नगर निगम आयुक्त प्रदीप कुमार सभरवाल उपस्थित थे। इस दौरान LIT के चेयरमैन और कॉन्ग्रेस नेता रमन बालासुब्रमण्यम ने बताया कि शुरुआती प्रोजेक्ट्स में बहुत सारे लूपहोल्स थे। उसे ठीक कर दिया गया है और अब योजना लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

उन्होंने कहा, “हमने साहिर लुधियानवी के नाम पर इसका नाम बदलने की योजना को छोड़ दिया क्योंकि तब हमें सभी दस्तावेजों और मँजूरी में संशोधन करना पड़ा था। साथ ही हमारा उद्देश्य साहिर लुधियानवी को श्रद्धांजलि देना था न कि अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान करना। वह पार्टी लाइनों से परे एक राजनीतिक दिग्गज थे। हमें जिस राजनीतिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा, वह अनावश्यक थी। अब हम साहिर को श्रद्धांजलि के रूप में एक नई परियोजना लेकर आ रहे हैं और एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज में 25 एकड़ में एक सभागार, स्मारक और पुस्तकालय बनेगा।” बता दें कि जब अटल बिहारी वाजपेयी के नाम वाली इस आवासीय परियोजना का नाम बदलकर साहिर लुधियानवी के नाम पर रखने का फैसला किया तो उसका राजनीतिक हलकों में जबर्दस्त विरोध हुआ था।

गौरतलब है कि इस आवासीय परियोजना की शुरुआत 2011 में की गई थी। तब राज्य में शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सरकार थी। बीजेपी भी इसमें साझेदार थी। लेकिन लॉन्चिंग के बाद यह परियोजना दो बार रद्द कर दी गई। पहली बार दिसंबर 2017 में। वजह बताई गई खरीदारों का उम्मीद से कम आवेदन मिलना। इसके बाद जनवरी 2019 में एलआईटी ने 636 फ्लैटों के लिए नया सर्वे किया। नए सिरे से आवेदन माँगे। करीब 800 लोगों ने फ्लैट खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हुए 10000 रुपए जमा किए। भी कर दिए। लेकिन जनवरी 2020 में फिर से इसे रद्द कर दिया गया। आवेदकों को आज भी पैसा वापस मिलने का इंतजार है।

‘हिंदुओं में दहशत पैदा करना था मकसद’: दिल्ली दंगों में कोर्ट ने 10 पर आरोप तय किए, नाम- ताहिर, शाहनवाज, शोएब, शाहरुख…

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में 10 के खिलाफ आरोप तय किए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि इनका मुख्य मकसद हिंदू समुदाय के मन में डर और दहशत पैदा करना था। हिंदुओं को देश छोड़ने की धमकी देना और उनकी संपत्तियों को लूटना तथा जलाना था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपितों की पहचान मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद शोएब, शाहरुख, राशिद, आजाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैजल, राशिद उर्फ मोनू और मोहम्मद ताहिर के तौर पर हुई है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 436, 452, 454, 392, 427 और 149 के तहत आरोप तय किए गए हैं। यह गैरकानूनी जमावड़ा 25 फरवरी 2020 को हुआ था। आरोप है कि इनलोगों ने हिंसा की और हिंदुओं के घरों में लूटपाट कर उनकी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया।

गवाहों के बयानों को विश्वसनीय पाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा, “गैरकानूनी सभा में शामिल दंगाइयों के बयानों से, जैसा कि इन गवाहों ने अपने बयानों में उल्लेख किया है, यह स्पष्ट है कि इसका मकसद हिंदू समुदाय के लोगों के मन में भय और दहशत पैदा करना, उन्हें देश छोड़ने और लूटने के साथ-साथ उनकी संपत्ति जलाना था।”

जगदीश प्रसाद ने FIR में कहा था कि कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने उनके बेटे की दुकान पर पेट्रोल बम फेंके थे, जिससे पूरी दुकान जलकर खाक हो गई थी। उन्होंने कहा था कि वह और उनके दो भाई किसी तरह पीछे के गेट से भागे और अपनी जान बचाई। शिकायतकर्ता, उनका बेटा, भतीजा और तीन पुलिस अधिकारी इस मामले में चश्मदीद गवाह हैं। इन्होंने अपनी गवाही में 10 आरोपितों का नाम स्पष्ट तौर पर लिया। गवाहों ने अदालत के समक्ष अपनी गवाही में कहा कि आरोपित 2020 हिंदू विरोधी दंगे में भीड़ में शामिल थे। उन्होंने लूटपाट की, संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया और शिकायतकर्ता की दुकान को आग के हवाले कर दिया।

कोर्ट का प्रथम दृष्टया यह मानना ​​था कि गवाहों के बयान पर अविश्वास करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा, “उन्होंने केवल तीन आरोपितों के नाम लिए हैं जिन्हें वे पहले से जानते थे और उन्हें भीड़ में देखा था। अगर उनका इस मामले में किसी व्यक्ति को झूठा फँसाने का कोई इरादा होता तो वे तीनों आरोपितों का ही नहीं, बल्कि सभी आरोपितों का नाम लेते। यह उनके बयानों की सच्चाई को दिखाता है और उनके बयानों को विश्वसनीय बनाता है।”

कोर्ट ने शाहरुख पठान के खिलाफ आरोप तय किए

उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपित शाहरुख पठान के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। उस पर दंगों के दौरान हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर रिवॉल्वर तानने का आरोप है। अदालत ने पठान के अलावा कलीम अहमद, इश्तियाक मलिक उर्फ ​​गुड्डू, शमीम और अब्दुल शहजाद पर भी आरोप तय किए थे। इसे गैरकानूनी कृत्य करने का सामान्य मामला नहीं बताते हुए अदालत ने कहा कि ‘ये दंगे ऐसी प्रकृति के हैं जो 1984 के सिख दंगों के बाद से नहीं देखे गए।’

‘जब रेप होना ही है तो लेटो और मजे लो’: कॉन्ग्रेस MLA रमेश कुमार, कभी कहा था- मैं मर्दों के साथ नहीं सोता

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के एक विधायक हैं। नाम है केआर रमेश कुमार। 6 बार के विधायक हैं। विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रमेश कुमार अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। इस बार भी उनके एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है। उनका कहना है कि ‘जब रेप होना ही है तो लेटो और मजे लो’। उन्होंने यह बात गुरुवार को (16 दिसंबर 2021) को सदन में कही जब कई विधायक बारिश और बाढ़ की वजह से बिगड़े हालात को लेकर अपनी बात रखना चाहते थे।

असल में विधायक अपनी बात रखने के लिए सदन की कार्यवाही आगे बढ़वाना चाह रहे थे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े इसे समय से खत्म करना चाहते थे। लगातार उठती माँग को लेकर स्पीकर ने कहा, “यदि सबको समय दिया गया तो चलेगा कैसे। आप विधायकों का निर्णय मुझे स्वीकार होगा। जैसे चल रहा उसे चलने दीजिए। इस स्थिति का आनंद उठाएँ। मेरी चिंता सदन को लेकर है। इसे मैं करता रहूँगा। बाकी व्यवस्था को मैं कंट्रोल नहीं कर सकता।”

इसी बीच कोलार जिले की श्रीनिवासपुर से विधायक रमेश कुमार ने कहा, “देखिए एक कहावत है- जब रेप होना ही है तो लेट जाइए और मजे लीजिए। आपकी इस वक्त वही स्थिति है।” इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद कई विधायकों ने ठहाके भी लगाए।

इस बयान को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक पर कार्रवाई की माँग करते हुए केंद्रीय कृषि राजयमंत्री शोभा करंदलाजे (Shobha Karandlaje) ने कहा है, “ये 6 बार के विधायक की सोच और मानसिकता है। कॉन्ग्रेस विधायक ने रेप को महत्वहीन बताने की कोशिश की है। केआर रमेश कुमार को सुवर्ण सौधा (विधानसभा) में घुसने भी नहीं देना चाहिए। उन्हें विधानसभा और कॉन्ग्रेस दोनों से बाहर किया जाए।”

गौरतलब है कि रमेश कुमार पूर्व में भी इस तरह के बयान दे चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अपनी तुलना बलात्कार पीड़िता से की थी। इसको लेकर भी काफी विवाद हुआ था। इसी तरह एक बार अपनी ही पार्टी के साथी रहे केएच मुनियप्पा के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, “मैं मर्दों के साथ सोना पसंद नहीं करता। मेरे पास अपनी पत्नी है। हो सकता है कि उनकी मुझमें दिलचस्पी हो लेकिन मुझे उनमें दिलचस्पी नहीं है। मेरा किसी के साथ एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर नहीं हैं।”

NYT ने ‘हार्वर्ड कांड’ का ठीकरा ‘हिंदुत्ववादियों’ पर फोड़ा: जहाँ धोखाधड़ी से बचीं BJP प्रवक्ता निखत अब्बास वहीं फँस गई थीं NDTV की निधि राजदान

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान द्वारा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी की पेशकश और फिर धोखाधड़ी का खुलासा करने के एक साल बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘हार्वर्ड की वो नौकरी? इट्स नॉट रियल’ नाम से प्रकाशित रिपोर्ट में इस धोखाधड़ी के लिए हिंदू राष्ट्रवादियों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। रिपोर्ट में उसने कहा कि भारत में कई महिलाओं को इस घोटाले में निशाना बनाया गया, लेकिन अमेरिका जाने के लिए एनडीटीवी से इस्तीफा देने वाली निधि राजदान इसमें फँस गईं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि धोखाधड़ी करने वाले कौन हैं, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन भारत के हिंदू राष्ट्रवादी अभियान का ऑनलाइन समर्थन किसी व्यक्ति द्वारा किया गया है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं किया है कि धोखाधड़ी करने वालों ने हिंदू राष्ट्रवादियों का कहाँ समर्थन किया। लेख में मोदी सरकार और भाजपा का जिक्र करते हुए बार-बार हिंदू राष्ट्रवादी शब्द का प्रयोग किया गया है। इसके जरिए दोषियों के राजनीतिक झुकाव को दर्शाने की बार-बार कोशिश की गई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस स्कैम का निशाना सिर्फ निधि राजदान नहीं थीं, बल्कि कई लोगों को निशाना बनाया गया था, लेकिन राजदान को छोड़कर बाकी लोगों ने महसूस किया कि हार्वर्ड के इस ऑफर में कुछ गड़बड़ जरूर है और उन्होंने जॉब ऑफर के लिए संपर्क करने वालों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। पहला निशाना द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह को बनाया गया था। रोहिणी सिंह को तौसीफ अहमद ने संपर्क किया था और खुद को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की बताया था। तौसीफ और एलेक्स हिर्शमैन ने उन्हें मीडिया सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए संपर्क किया था और कहा था कि उनके सभी खर्चे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा वहन किया जाएगा। ये दोनों जीमेल अकाउंट से संवाद कर रहे थे और उनके फोन नंबर भी अमेरिका के नहीं थे तो रोहिणी सिंह को कुछ आशंका हुई। जब दोनों ने उनके पासपोर्ट का नंबर और तस्वीरें माँगी तो रोहिणी ने उनसे बातचीत करना बंद कर दिया।

NYT के अनुसार, उनका अगला निशाना द प्रिंट की स्तंभकार ज़ैनब सिकंदर थीं, जिन्हें तौसीफ़ और एलेक्स से कुछ इसी तरह के प्रस्ताव मिले थे। सिकंदर ने पाया कि दोनों बॉस्टन क्षेत्र से होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनका मोबाइल नंबर संयुक्त अरब अमीरात का था। वह व्यक्ति बातचीत से भी पाकिस्तानी लग रहा था। आधिकारिक निमंत्रण के लिए बार-बार कहने के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर रोहिणी सिंह की तरह इन्हें संदेह हुआ और इन्होंने बातचीत बंद कर दी।

NYT की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक प्रमुख भारतीय प्रकाशन में काम करने वाली एक अन्य महिला पत्रकार को भी निशाना बनाया गया, लेकिन पत्रकार ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। उसने यूएई के फोन नंबर देखने के बाद संपर्क भी खत्म कर दिया।

घोटाले की सबसे दिलचस्प शिकार भाजपा प्रवक्ता निखत अब्बास थीं, क्योंकि वह न केवल भाजपा की एक नेता हैं, बल्कि इस धोखाधड़ी को लेकर उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को सचेत भी किया था। घोटाले के निशाने पर वे सभी पत्रकार थीं, जो भाजपा की कटु आलोचक मानी जाती हैं। इसलिए निखत अब्बास थोड़ी अलग हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक अब्बास को निशाना बनाया गया, तब तक घोटालेबाजों ने अपनी तकनीक में सुधार कर लिया था। उन्होंने हार्वर्ड के वास्तविक कर्मचारियों के हस्ताक्षरों की प्रतिलिपि बनाई थी और विश्वविद्यालय की वेबसाइट से आधिकारिक लेटरहेड प्राप्त किया था। वे अब Gmail के बजाय harward.edu ईमेल पतों का भी उपयोग कर रहे थे। हालाँकि, जब अब्बास से उनके पासपोर्ट का विवरण सहित अन्य जानकारियाँ माँगी गईँ तो उन्होंने इसकी पुष्टि करने की सोची। हार्वर्ड के अधिकारी ने अब्बास को बताया कि उन्हें भेजा गया निमंत्रण नकली है।

हालाँकि, NYT का कहना है कि यह ज्ञात नहीं है कि हार्वर्ड ने इस पर कोई कार्रवाई की थी या नहीं। विश्वविद्यालय ने इस पर भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि उन्होंने भाजपा प्रवक्ता द्वारा दी गई जानकारी का क्या किया। दरअसल, अब्बास ने 29 नवंबर 2019 को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें तौसीफ अहमद द्वारा किए जा रहे घोटाले के बारे में बताया गया था। उन्होंने कहा था कि तौसीफ एक स्कैम मास्टर या यहाँ तक कि आतंकवादी भी हो सकता है।

अब्बास की इस चेतावनी के बावजूद निधि राजदान अपना पर्सनल डिटेल देने वाली पहली शिकार बनीं। उन्हें अब्बास द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से ठीक दो हफ्ते पहले ईमेल प्राप्त हुआ था। एनवाईटी की रिपोर्ट के अनुसार, स्कैमस्टर्स ने हार्वर्डकैरियर डॉट कॉम नामक एक वेबसाइट खरीदी थी और इसका इस्तेमाल एक ईमेल सर्वर स्थापित करने के लिए किया था, ताकि उनके द्वारा भेजे गए ईमेल में हार्वर्ड स्टैंप हो।

NYT

NYT के लेख में निधि राजदान को अधिक लापरवाह बताया गया है, क्योंकि वह एक घोटाले के स्पष्ट संकेतों की अनदेखी करती रहीं। यहाँ तक ​​​​कि जब उनसे कहा गया कि हार्वर्ड में एक डीन के साथ उनकी निर्धारित एक वीडियो कॉल रद्द हो गई, तब भी उन्हें इसका अंदाजा नहीं हुआ। हालाँकि, बाद में हार्वर्ड ने बताया कि विश्वविद्यालय ने उन्हें नौकरी की कभी पेशकश नहीं की थी।

निधि राजदान के लैपटॉप और उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण करने वाले सुरक्षा विशेषज्ञ जितेन जैन ने कहा कि राजदान के कंप्यूटर में एक संदिग्ध फ़ाइल में एक आईपी पता था, जो वास्तव में पाकिस्तानी खुफिया विभाग से जुड़ा है। यह उल्लेखनीय है कि घोटालेबाजों ने निधि राजदान को अपने कंप्यूटर पर टीम व्यूअर स्थापित करने के लिए कहा था, जिसके जरिए दूसरे कंप्यूटर को कंट्रोल किया जा सकता है और मैलवयेर स्थापित किया जा सकता है।

इसके बावजूद, न्यूयॉर्क टाइम्स का मानना ​​है कि इस घोटाले के पीछे हिंदू राष्ट्रवादी हो सकते हैं। उसका दावा है, “शायद महिलाओं को एक व्यक्ति द्वारा लक्षित किया गया था, जो वैचारिक रूप से भारत में हिंदू राष्ट्रवादी सत्तारूढ़ दल के साथ गठबंधन किया था और कश्मीर में सरकार के हस्तक्षेप के आलोचकों और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन के खिलाफ बोलने वालों को अपमानित करने के लिए बहुत कुछ करने को तैयार था”।

NYT का यह भी दावा है कि घोटालेबाजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अकाउंट्स में से एक सीमा सिंह नाम के ट्विटर अकाउंट से अक्सर इन मुद्दों के बारे में पोस्ट किया जाता है और इसलिए घोटाले के पीछे हिंदू राष्ट्रवादी हो सकते हैं।

केवल हिंदू ही नहीं, मुस्लिम हों या ईसाई सभी के मैरिज एक्ट में संशोधन करेगी मोदी सरकार, ’21 वर्ष की उम्र’ का करना होगा पालन : सूत्र

केंद्र की मोदी सरकार ने लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से 21 साल किए जाने वाले प्रस्ताव को आज (दिसंबर 16, 2021) पारित कर दिया। साल 2020 में 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान इस बाबत संकेट दिए थे। अब सरकार ने इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन का रास्ता साफ किया है।

सरकार द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद लग रहा था कि शायद इस फैसले के अंतर्गत मुस्लिम पर्सनल लॉ न आए या नया संशोधन इस लॉ पर प्रभावी न हो। लेकिन ऑपइंडिया को सूत्रों ने बताया कि हर पर्सनल लॉ पर ये संशोधन प्रभावी होगा और हर समुदाय की लड़कियों की शादी के लिए 21 साल की उम्र अनिवार्य होगी।

मालूम हो कि बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए)’ में संशोधन का प्रस्ताव करता है ताकि पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए विवाह की उम्र 21 वर्ष के बराबर की जा सके जो वर्तमान में पुरुषों के लिए 21 वर्ष है और महिलाओं के लिए 18 वर्ष। विवाह की आयु से संबंधित यही बदलाव संबंधित कानूनों में भी होगा। ये कानून ‘भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872’ ; ‘पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936’ ; ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937’ ; ‘विशेष विवाह अधिनियम, 1954’ ; ‘हिंदू विवाह अधिनियम, 1955’; और ‘विदेशी विवाह अधिनियम, 1969’ हैं। इनके अलावा ‘हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956’; और ‘हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956’ भी इस संदर्भ में आते हैं।

बता दें कि कैबिनेट द्वारा बुधवार को दी गई मँजूरी दिसंबर 2020 में जया जेटली की अध्यक्षता वाली केंद्र की टास्क फोर्स द्वारा नीति आयोग को सौंपी गई सिफारिशों पर आधारित है। इसका गठन मातृत्व की उम्र से संबंधित मामलों, मातृ मृत्यु दर को कम करने की आवश्यकता, पोषण में सुधार से संबंधित मामलों के लिए किया गया था।

क्यों मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर उठ रहे थे सवाल?

वैसे तो बाल विवाह को लेकर बनाया गया कानून हर समुदाय पर लागू होता है लेकिन मुस्लिम पर्सनरल लॉ को लेकर इसकी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं रही है। ल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में एक 15 साल की लड़की की अपनी मर्जी से शादी को वैलिड मानते हुए कहा था कि इस्लामिक कानून के मुताबिक लड़की मासिक धर्म शुरू होने के बाद अपनी इच्छा के मुताबिक शादी कर सकती है

वहीं गुजरात हाई कोर्ट ने 2015 में कहा था कि बाल विवाह निषेध कानून 2006 के दायरे में समुदाय विशेष वाले भी आते हैं। अक्टूबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता ने समुदाय विशेष के अलग विवाह कानून को पीसीएमए के साथ मजाक बताया था। सितंबर 2018 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि समुदाय विशेष पर यह कानून लागू नहीं होता। अदालत का कहना था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ स्पेशल एक्ट है, जबकि पीसीएमए एक सामान्य एक्ट है।

गुरुग्राम में खुले में नमाज का विरोध करने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, राज्य के मुख्य सचिव और DGP पर अवमानना के तहत कार्रवाई की माँग

हरियाणा (Haryana) में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज (Namaz in Public Places) पढ़ने का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध करने से उत्पन्न अब विवाद सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा- BSP) के पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका देकर राज्य के मुख्य सचिव संजीव कौशल और डीजीपी पीके अग्रवाल के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों ने मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोकने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई न कर ‘तहसीन एस पूनावाला बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए कहा था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने नमाज पढ़ने वालों का विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। प्रशासन नमाज को बार-बार रोककर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी विफल रहा। याचिका में कहा गया कि हाल के कुछ महीनों में कुछ उपद्रवियों के इशारे पर जुमे की नमाज होने वाले स्थानों के इर्द-गिर्द प्रदर्शन करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ये लोग धर्म के नाम पर एक समुदाय के खिलाफ नफरत और पूर्वाग्रह का माहौल बनाना चाहते हैं।

वकील फ़ुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दाखिल याचिका में बताया गया है कि मई 2018 से मुस्लिम प्रशासन द्वारा स्वीकृत 37 स्थानों पर नमाज़ पढ़ते थे, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध कर इसमें बाधा डाल रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि गुरुग्राम एक औद्योगिक शहर है, जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। शहर की टाउन प्लानिंग में धार्मिक स्थलों के लिए पर्याप्त जगह ना देने के कारण मुसलमानों को जुमे (शुक्रवार) की नमाज पढ़ने में समस्या आती थी, जिसको देखते हुए प्रशासन ने कुछ खुली जगहों को जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी।

याचिका में आगे कहा गया है, “काफी संख्या में पुलिस बल मौजूद होने और घटना के वीडियो सामने आने के बावजूद ऐसे व्यक्तियों (नमाज का विरोध करने वालों) को कानून का कोई डर नहीं दिखा। पुलिस ने कथित तौर पर भीड़ से कुछ लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन उसी दिन उन्हें छोड़ दिया गया।”

याचिकाकर्ता ने बताया है कि पिछले कुछ महीनों से नमाज के दौरान लाउडस्पीकर पर नारे लगाकर, मंत्रोच्चारण कर बाधा डाली जा रही है। बार-बार पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन उचित कार्रवाई न होने के चलते उपद्रवियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। लगातार मुस्लिमों के खिलाफ द्वेष फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है।”

दरअसल, गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने को लेकर स्थानीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं। हिंदू संगठनों और स्थानीय निवासियों ने एक आवासीय परिसर के पास खुले मैदान में नमाज अदा करने पर आपत्ति जताई थी। उसके बाद गुरुग्राम सहित कई स्थानों पर विरोध की खबरें लगातार आती रहती हैं।

विक्की कौशल के ‘सैम बहादुर’ में इंदिरा गाँधी बनेंगी फातिमा सना शेख, आमिर खान के साथ ‘रिलेशन’ बटोर चुकी है सुर्खियाँ

फिल्म इंडस्ट्री की दंगल गर्ल ‘फातिमा सना शेख’ अब बॉलीवुड की नई इंदिरा गाँधी होंगी। ताजा खबरों के अनुसार विक्की कौशल की फिल्म ‘सैम बहादुर’ में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का रोल निभाने का अवसर मिला है। उनके साथ सान्या मल्होत्रा की भी इस फिल्म में एंट्री हुई है। प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी ने निर्देशक मेघना गुलजार के जन्मदिन के मौके पर दोनों एक्ट्रेस की एंट्री का ऐलान किया। फातिमा से पहले बॉलीवुड में लारा दत्ता, सुचित्रा सेना जैसी अभिनेत्रियों ने इस किरदार को निभाया है।

फातिमा ने कहा, “मैं सैम बहादुर परिवार के साथ जुड़ने और भारतीय इतिहास की सबसे ज्यादा प्रभावशाली चर्चित महिलाओं की भूमिका निभाने की चुनौती को लेकर बहुत खुश हूँ। जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा उत्साहित किया वह वो जुनून है जिसके साथ निर्माता इस फिल्म के माध्यम से उनकी स्मृति और विरासत का सम्मान करने की उम्मीद कर रहे हैं।”

बता दें कि विक्की कौशल की फिल्म सैम बहादुर में इंदिरा गाँधी का रोल पाकर अपनी खुशी जाहिर करने वाली फातिमा शेख हाल में आमिर खान के साथ ‘रिलेशन’ पर खूब चर्चा बटोर चुकी हैं। किरण राव के साथ आमिर खान ने जब तलाक लिया, तभी से दोनों के रिश्ते की बातें मीडिया में उछलीं और फिर खबर आई कि फिल्म लाल सिंह चड्ढा के रिलीज के बाद दोनों निकाह करेंगे।

दोनों की शादी पर ‘द ज्ञान टीवी’ ने बताया था कि आमिर खान अपनी तीसरी शादी की घोषणा जल्द ही करेंगे। इस खबर में दावा किया गया था कि जिसे आमिर खान ‘बेटी’ बोल चुके हैं, उसके साथ ही वो अब शादी करने जा रहे हैं। खबर में ये भी लिखा था कि मुस्लिम होने के कारण दोनों का निकाह होगा। चूँकि ‘दंगल’ में फातिमा सना शेख ने आमिर खान की बेटी का किरदार अदा किया था, इसलिए खबर को पढ़ने के बाद फातिमा-आमिर के रिश्ते की अफवाह को बल मिला। बाद में एक्ट्रेस ने कहा भी था कि कुछ अपरिचित लोग हैं जिनसे वो कभी नहीं मिली और वही लोग उनके बारे में अनाप-शनाप लिख रहे हैं।