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पीरियड आते ही निकाह… क्या मुस्लिम लड़कियों पर भी लागू होगा शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल करने वाला बदलाव?

केंद्र की मोदी सरकार ने कानूनों में बदलाव के उस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है जिससे लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 साल हो जाएगी। 2020 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने इस दिशा में बदलाव के संकेत दिए थे। अब इस दिशा में सरकार बढ़ती दिख रही है। कैबिनेट की मँजूरी के बाद बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। फिलहान कानून लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल अनिवार्य है

हर समुदाय पर लागू होगा कानून?

हिंदू मैरिज एक्ट जिसमें बदलाव की बात का जिक्र हो रहा है उसके तहत हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध समुदाय के लोगों की शादियाँ आती हैं। जाहिर है कि जब कानून में बदलाव होगा तो ये सारे समुदायों पर काम करेगा लेकिन फिर सवाल आता है कि क्या ये मुस्लिमों पर भी लागू होगा, जिनमें निकाह के लिए इस्लाम पर्सनल लॉ काम करता है और जो सामान्य कानून से थोड़ा अलग है?

जवाब है कि सरकार द्वारा बनाया गया हर कानून देश के हर समुदाय के लिए होता है बशर्ते वो उसे मानें। इस्लाम लॉ तो लड़कियों की बालिग होने की उम्र 18 भी नहीं मानता… इसके मुताबिक, पीरियड आने के बाद लड़कियाँ निकाह के लिए योग्य हो जाती हैं। फिर चाहे वो उम्र 12-13 की हो या फिर 15 की।

मेडकली माना जाता है कि लड़किया प्यूबर्टी की स्टेज को 15 साल की उम्र में छूती हैं। हालाँकि, ये भी सच है कि कई लड़कियों को माहवारी कम उम्र में ही शुरू हो जाती है और इस्लाम के अनुसार वो उसी उम्र में निकाह के लायक बन जाती हैं। आँकड़ों की बात करें तो यूनिसेफ के नंबर बताते हैं कि भारत में 27 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल और 7 फीसदी की 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है। इसमें एक बड़ा हिस्सा समुदाय विशेष का क्यों होता है, इसका जवाब मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधान हैं।

बाल विवाह निषेध कानून कर पाएगा कुछ मदद?

विभिन्न समुदाय वाले भारत में बाल विवाह निषेध कानून वो कानून है जो हर समुदाय पर लागू होता है। हालाँकि, इसमें भी विडंबना ये है कि इस कानून में इस्लाम को लेकर स्थिति स्पष्ट हीं है क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में एक 15 साल की लड़की की अपनी मर्जी से शादी को वैलिड मानते हुए कहा था कि इस्लामिक कानून के मुताबिक लड़की मासिक धर्म शुरू होने के बाद अपनी इच्छा के मुताबिक शादी कर सकती है। 

वहीं गुजरात हाई कोर्ट ने 2015 में कहा था कि बाल विवाह निषेध कानून 2006 के दायरे में समुदाय विशेष वाले भी आते हैं। अक्टूबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता ने समुदाय विशेष के अलग विवाह कानून को पीसीएमए के साथ मजाक बताया था। सितंबर 2018 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि समुदाय विशेष पर यह कानून लागू नहीं होता। अदालत का कहना था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ स्पेशल एक्ट है, जबकि पीसीएमए एक सामान्य एक्ट है।

सरकार का प्रस्ताव और समुदाय विशेष का विरोध शुरू?

मोदी कैबिनेट में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने को लेकर अभी प्रस्ताव पारित ही हुआ है कि इस्लाम के ठेकेदारों ने इस पर गुरेज करना पहले शुरू कर दिया। जी न्यूज पर बात करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य पूछती हैं कि आखिर नए-नए बिल लाकर सरकार क्या कर लेगी?

वहीं लखनऊ के मौलाना इश्तियाक कादरी कहते हैं लड़कियों की शादी की उम्र 18 ही रहने दी जानी चाहिए। सरकार ने नए बिल को लाकर नौजवानों की आजादी छीन ली है। मुस्लिम संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के सचिव गुलजार आजमी ने कहा कि वे इसे नहीं मानेंगे। इससे लड़किया गलत राह पर जाएँगी। उनके अनुसार यह बिलकुल गलत है। उनके मजहब में लड़का-लड़की 14-15 साल में ही बालिग हो जाते हैं।

अब यहाँ बता दें कि सरकार की कोशिश लड़कियों को अच्छा जीवन देने की है। इन्हीं प्रयासों के तहत ये कदम उठाया गया है। सोचिए, 18 की उम्र तक एक सामान्य लड़की सिर्फ 12वीं तक पढ़ पाती है लेकिन थोड़ा समय मिले तो स्नातक करना, अच्छे नौकरी के लिए खुद को योग्य बनाना, कोई मुश्किल काम नहीं होता। सरकार का यह फैसला बेशक उन लड़कियों को अपने लिए सोचने का मौका देगा जिन्हें शादी की धमकियाँ देकर घर में बैठा दिया जाता था या जिनपर ऐसे मजहबी ठेकेदार हावी होते हैं। लेकिन, अगर विरोध यही आलम रहा तो बताइए कि कौन सी सरकार या कौन सा कानून कट्टरपंथ की बेड़ियों से मुस्लिम लड़कियों को आजाद करवा पाएगी।

शादी की उम्र और बहस पुरानी

आज कट्टरपंथी चाहे कुछ भी कहें, शादी की न्यूनतम उम्र कितनी हो इस पर भारत में अरसे से बहस हुई है। अंग्रेजी राज में इस संबंध में पहली बार कानून बना। बाद में कई बार बदलाव हुए। लेकिन, समुदाय विशेष के लोग बदलाव से अछूते रहे। 1860 के इंडियन पीनल कोड में शादी की उम्र का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन 10 साल से कम उम्र की लड़की के साथ शारीरिक संबंध को गैरकानूनी बताया गया था। फिर धर्म के आधार पर शादी की उम्र को लेकर कानून आए। इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 में लड़के की न्यूनतम उम्र 16 साल और लड़की की न्यूनतम उम्र 13 साल तय की गई। 1875 में आए मेजोरिटी एक्ट में पहली बार बालिग होने की उम्र 18 साल तय की गई। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र का तो कोई जिक्र नहीं था, लेकिन लड़के और लड़की दोनों के बालिग होने की उम्र 18 साल मानी गई।

RuPay डेबिट कार्ड और BHIM UPI से लेन-देन पर मिलेगी छूट, मोदी सरकार लेकर आई ₹1300 करोड़ की स्कीम

जल्द ही रुपे कार्ड और भीम ऐप से लेनदेन पर आपको मोदी सरकार बड़ा फायदा देने जा रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (15 दिसंबर 2021) को कैबिनेट ने रुपे डेबिट कार्ड (Rupay Debit Card) और भीम यूपीआई (BHIM UPI) से डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की योजना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने 15 दिसंबर को प्रेस वार्ता करते हुए बताया कि इस योजना पर लगभग 1,300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बोर्ड उत्पादन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को भी मंजूरी दी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने योजना के बारे में बात करते हुए कहा कि रुपे और यूपीआई भुगतान प्रणाली को और विकसित करने के लिए भारत सरकार लेनदेन के व्यक्ति-से-व्यापारी ( person-to-merchant) हिस्से में एमडीआर (व्यापारी छूट दर) की प्रतिपूर्ति करेगी। उन्होंने आगे बताया कि यह प्रोत्साहन डिजिटल भुगतान के लिए एक निवेश की तरह होगा। सरकार 1300 करोड़ रुपए का निवेश करेगी ताकि अधिक से अधिक लोग डिजिटल भुगतान को अपना सकें।

ठाकुर ने कहा कि इस योजना में अगले पाँच से छह वर्षों में सेमीकंडक्टर उत्पादन में 76,000 करोड़ रुपए निवेश की जाएगी। दूरसंचार और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि निर्णय से माइक्रोचिप्स के डिजाइन, निर्माण, पैकिंग और परीक्षण में मदद मिलेगी और एक पूरा इकोसिस्टम विकसित होगा।

जारी किए गए बयान के मुताबिक, यह योजना एक्वायरिंग बैंकों को मजबूत डिजिटल भुगतान इको-सिस्टम्स के निर्माण में मदद करेगी। साथ ही रूपे डेबिट कार्ड व BHIM-UPI डिजिटल लेन-देन को सभी क्षेत्रों और आबादी के सभी खंडों में बढ़ावा देने और देश में डिजिटल भुगतान को और मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगी। 

यह योजना बैंक सुविधा से वंचित एवं हाशिए पर रहने वाली उस आबादी के लिए भी डिजिटल पेमेंट मोड्स को सुलभ बनाने में मदद करेगी, जो औपचारिक बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से बाहर हैं। यह योजना फिनटेक स्पेस में अनुसंधान, विकास और इनोवेशन को और अधिक बढ़ावा देगी। साथ ही सरकार को देश के विभिन्न भागों में डिजिटल भुगतान को और अधिक मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगी। 

रॉयटर्स द्वारा एक्सेस किए गए आंतरिक अमेरिकी सरकार के मेमो के अनुसार, वीजा अधिकारियों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कैथरीन ताई के साथ बैठक में मोदी सरकार द्वारा RuPay को बढ़ावा देने की शिकायत की थी। मेमो में कहा गया था, “वीजा भारत की अनौपचारिक और औपचारिक नीतियों के बारे में चिंतित है जो अन्य घरेलू और विदेशी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान कंपनियों के मुकाबले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के कारोबार के पक्ष में हैं।”

बता दें कि इससे पहले, मास्टरकार्ड ने भी भारत के घरेलू भुगतान नेटवर्क के संबंध में इसी तरह की चिंता व्यक्त की थी। 2018 में, कंपनी ने यूएसटीआर में विरोध दर्ज कराया था कि मोदी सरकार प्रतिद्वंद्वी भुगतान नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का उपयोग कर रही है।

VHP नेता की हत्या के बाद राँची में प्रदर्शन, धरने पर BJP विधायक: SHO फरीद आलम की बर्खास्तगी की डिमांड

झारखंड की राजधानी राँची के खलारी में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) कार्यकर्ता मुकेश सोनी की हत्या के बाद हिन्दू संगठनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों द्वारा व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस दौरान हाट-बाजार पूरी तरह बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी के साथ-साथ खलारी थाना के SHO फरीद आलम को तुरंत बर्खास्त करने की माँग की है। इसके अलावा, मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की गई है।

अपराधियों की गिरफ्तारी में देरी होने के चलते काँके से भाजपा विधायक समरी लाल ने विधानसभा के आगे धरना दिया। उन्होंने हाथों में अपनी माँगों का पोस्टर ले रखा था। यह जानकारी उन्होंने अपने फेसबुक एकाउंट पर भी दी है।

विधायक समरी लाल

मृतक मुकेश के भाई ने मीडिया से बताया, “गोली लगने की जानकारी होने पर मैं मौके पर गया। मैंने अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ मुकेश ने दम तोड़ दिया। पुलिस मुझे बाद में घटनास्थल पर ले गई थी। मौके से तीन खोखे मिले हैं। पुलिस निष्पक्ष जाँच नहीं करती है। इनकी जाँच एकतरफा होती है। पुलिस पर भरोसा नहीं है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है। मामले की जाँच 2 DSP के नेतृत्व में 4 थानों की पुलिस कर रही है। पुलिस अधीक्षक देहात नौशाद आलम के मुताबिक, अभी तक आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है और ना ही इस संबंध में परिवार वाले कुछ बता पा रहे हैं। आलम का कहना है कि ऐसी स्थिति में तकनीकी टीम से सहायता ली जा रही है। SSP सुरेंद्र कुमार झा ने ग्रामीण एसपी नौशाद आलम को खुद मामले की मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं।

hindu outfits protest in ranchi jharkhand after murder of vhp worker mukesh soni

मजदूरों के लिए ₹4000 करोड़, 24 घंटे बिजली के लिए ₹1000 करोड़: योगी सरकार का ₹8479 करोड़ का अनुपूरक बजट, जानिए मुख्य बातें

यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन गुरुवार (16 दिसंबर 2021) को योगी सरकार ने सदन में 4879.53 करोड़ रुपए का अपना दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट में योगी सरकार ने किसानों, वृद्धों, दिव्यांगों, नेत्रहीनों को खास तोहफा दिया है। इसमें योगी सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भत्ता देने की व्यवस्था करते हुए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही सरकार ने प्रदेश के लोगों के लिए 24 घंटे बिजली सुनिश्चित किया है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इसके लिए पावर कॉरपोरेशन को 10 अरब (1,000 करोड़ रुपए) आवंटित किए गए हैं।

सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2021-22 का दूसरा अनुपूरक बजट और वर्ष 2022-23 के पहले चार महीने (अप्रैल से जुलाई) के लिए 1,68,903.23 करोड़ रुपये का लेखानुदान प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि 2022-2023 में 5,44,836.56 करोड़ रुपए की प्राप्तियाँ होंगी, जिनमें 4,53,097.56 करोड़ रुपए राजस्व और 91,739 करोड़ रुपए की पूँजी लेखा प्राप्ती होंगी। राजस्व प्राप्ति में 4,53,097.56 करोड़ रुपए की कर राजस्व प्राप्ति हैं। वहीं, 89,174 करोड़ रुपए की लोक ऋणों से प्राप्तियाँ और 2,565 करोड़ रुपए की ऋणों और अग्रिमों की वसूली से होने वाली प्राप्तियाँ हैं।

क्या है अनुपूरक बजट में

अनुपूरक बजट में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति के लिए पावर कॉरपोरेशन को 10 अरब रुपए आवंटित करने के साथ-साथ हर घर बिजली योजना के लिए अलग से 185 करोड़ रुपए आवंटित की गई हैं। खेल विभाग को 10 करोड़ रुपए, काशी विश्वनाथ दर्शन के लिए 10 करोड़ रुपए, किसान और वृद्घावस्था पेंशन के लिए 670 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं, सूचना विभाग के लिए 150 करोड़ रुपए और यूपी गौरव सम्मान के लिए 10 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

क्यों लाया जाता है अनुपूरक बजट?

प्रत्येक वर्ष सरकार अपना बजट पेश करती है, किन्तु बीच में ही सरकार को फंड की कमी पड़ने लगती है तो अनुपूरक बजट पेश किया जाता है। आम बजट की भाँति ही अनुपूरक बजट को भी सदन में पेश कराना होता है। यूपी में अगले कुछ माहों में ही विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में योजनाओं को पूरा करने तथा परियोजनाओं के कामों में तेजी लाने के लिए सरकार को फंड की आवश्यकता है। इसीलिए यह अनुपूरक बजट लाया है। योगी सरकार का इस वर्ष का ये दूसरा अनुपूरक बजट है। इससे पूर्व अगस्त में ही सरकार ने 7,300 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया था।

सदन की कार्यवाही से पहले विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

सदन के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी पार्टी ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। महँगाई व केंद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की माँग को लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए मार्च निकाला। वहीं, सपा ने विधानसभा के अंदर प्रदर्शन किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई थी।

यूट्यूबर मारिदास के पीछे पड़ी तमिलनाडु सरकार: हाई कोर्ट ने FIR रद्द की तो ‘कोरोना-मुस्लिम’ वाले Video को लेकर की गिरफ्तारी

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा विवादास्पद यू ट्यूबर मारिदास (Maridhas) के खिलाफ एक FIR रद्द करने के कुछ दिनों बाद ही, उन्हें एक बार फिर से गिरफ्तार किया गया है, इस बार वजह बनी है 2020 का एक वीडियो, जहाँ उन्होंने COVID-19 के तेजी से प्रसार के लिए मुस्लिम समुदाय की भूमिका पर सवाल उठाया था। यह एक के बाद तीसरा मामला है जिसमें तमिलनाडु में मारिदास को गिरफ्तार किया गया है।

दो दिन पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने एक ट्वीट की वजह से गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तमिलनाडु ‘डीएमके शासन के तहत एक और कश्मीर में बदल रहा है।’ जबकि दूसरी गिरफ्तारी न्यूज 18 मीडिया समूह द्वारा दायर एक मामले में हुई थी जिसमें मारिदास पर एक फेक ईमेल के जरिए मीडिया हाउस को जिम्मेदार ठहराने का आरोप है।

बता दें कि इस बार तबलीगी मामले में एक एफआईआर दर्ज होने के एक साल बाद मारिदास की गिरफ्तारी हुई है। अप्रैल 2020 में, मारिदास को तिरुनेलवेली पुलिस ने कोरोनोवायरस के फैलाव को लेकर तबलीगी मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहराने वाले उनके वीडियो के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर सांप्रदायिक भावना को भड़काने के आरोप में केस दर्ज किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस वीडियो में मारिदास ने दावा किया था, “कोरोनावायरस जानबूझकर आतंकवादियों (मुस्लिम) द्वारा दुनिया भर में निर्दोष लोगों की हत्या के लिए फैलाया जा रहा है।” वहीं तमिलनाडु पुलिस के अनुसार, मारिदास जिसे चेन्नई के पुझल सेंट्रल जेल रखा गया है, को गुरुवार 16 दिसंबर को तिरुनेलवेली जिला अदालत में पेश किया गया है।

बता दें कि इस खबर के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत को लेकर भी मारिदास ने अपने एक ट्वीट में डीएमके सरकार पर सवाल खड़े किए तब भी उनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। जिसमें यूट्यूबर मारिदास ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश को लेकर राज्य की डीएमके सरकार पर सवाल उठाया था।

मारिदास ने अपने उस ट्वीट में हादसे में साजिश की आशंका जताते हुए अलगाववादी ताकतों को रोकने के लिए देश के लोगों से साथ आने की अपील की थी। उन्होंने एक अलग ट्वीट में लिखा था कि सीडीएस रावत की मौत का डीएमके और डीके समर्थकों ने मजाक उड़ाया था। पुलिस ने मारिदास पर आईपीसी की कई धाराओं के अंतर्गत उन पर मुकदमा दर्ज किया और पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था। इसी मामले में दो दिन पहले ही मद्रास हाईकोर्ट ने मामला रद्द करते हुए उन्हें राहत प्रदान की थी।

कॉन्ग्रेस नेता नूरी खान ने पूछा- यूनुस मुल्ला की गिरफ्तारी क्यों?: अभिषेक दुबे बन महाकाल मंदिर में घुसा था, भस्म आरती में सबसे आगे बैठा था

मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) स्थित महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) की भस्म आरती में बुधवार (15 दिसंबर 2021) को फर्जी आईडी (Fake ID) के सहारे घुसे यूनुस मुल्ला को जेल भेज दिया गया है। यूनुस मुल्ला की हिन्दू प्रेमिका खुशबू ने अपने भाई के आईडी पर उसे मंदिर में घुसने में मदद की थी। अभिषेक दुबे नाम से मौजूद मुल्ला पर शक तब हुआ, जब उसे मंत्र पढ़ने में समस्या होते लोगों ने देखा। इसके बाद उसका चेहरा उसके पहचान पत्र से मिलान करवाया गया। तब आखिरकार उसका भेद खुल ही गया। वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष नूरी खान ने इस पर राजनीति शुरू कर दी।

नूरी खान ने मुल्ला की गिरफ्तारी पर हैरानी जताते हुए ट्वीट किया है, साथ ही उज्जैन पुलिस से सवाल भी किया है। नूरी खान ने ट्वीट में कहा, “मंदिर प्रशासन के ऐसे कोई भी नियम नहीं हैं कि मुस्लिम मंदिर में प्रवेश ना कर सके। उसके बावजूद यूसुफ़ मुल्ला की गिरफ़्तारी हैरत की बात है। @UjjainPolice जवाब दे कि किस आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है!”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरती के दौरान यूनुस ठीक से हिन्दू विधि विधान के अनुसार हरकत नहीं कर रहा था। वह मंत्र भी नहीं पढ़ पा रहा था। ऐसे में उन दोनों को पकड़ कर मंदिर परिसर में बनी पुलिस चौकी को सौंप दिया गया था। पूछताछ में उसने सब कुछ सच-सच उगल दिया। इस मामले में ठीक से सुरक्षा जाँच न कर पाने वाले मंदिर के 3 गार्डों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। गार्डों पर बिना रसीद के कुछ लोगों को VIP गेट से इंट्री करवाने का भी आरोप है। इसी के साथ अनुमति बनाने वाले पुजारी गणेश नारायण शर्मा को भी नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे का समय दिया गया है। यदि मंदिर प्रशासन उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो उनकी भी सेवा समाप्त की जा सकती है।

FIR Copy

आरोपित पर धारा 419, 420 IPC के साथ मध्यप्रदेश श्रीमहाकालेश्वर मंदिर अधिनियम 1982 की धारा 37(छ) के तहत कार्रवाई की गई है। इस केस की विवेचना सब इंस्पेक्टर राजेंद्र जाधव कर रहे हैं। गौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस मुल्ला मूल रूप से कर्नाटक का निवासी है। आरोपित औ उसकी प्रेमिका मुंबई में रहते हैं। खुशबू और यूनुस मुल्ला मंदिर के पास एक होटल में गए थे। वहाँ दोनों ने अपना-अपना आईडी दिया, जिसके बाद लव जिहाद के आशंका में होटल वालों ने पुलिस को खबर कर दी। हालाँकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। खुद को फैशन डिजायनर बताते हुए खुशबू ने यूनुस को अपना वर्कर बताया है। खुशबू ने यूनुस की इंट्री अपना भाई अभिषेक दुबे बता कर करवाई थी। इस बीच उज्जैन पुलिस ने खुशबू के माता पिता को बुला कर उनकी बेटी को उनके सुपुर्द कर दिया है। CSP पल्लवी शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है।

‘हिंदू राष्ट्र माँगने वालों से इसकी दोस्ती’: कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पल्लवी शर्मा ने ‘वामपंथी’ को भेजा लीगल नोटिस, क्लबहाउस का झमेला

वॉयस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्लबहाउस पर सक्रिय कॉन्ग्रेस की एक प्रवक्ता ने एक तथाकथित ‘वामपंथ’ को कानूनी नोटिस भेजा है क्योंकि विकिपीडिया में लिखा है कि वामपंथी हिंदुत्व के खिलाफ होते हैं और जिस पर निशाना साधा गया है वो ऐप पर हिंदुत्ववादियों के साथ ‘हैंगआउट’ कर रही थी। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पल्लवी शर्मा ने यह भी दावा किया था कि अंजलि (बदला हुआ नाम) ने उनकी बदनामी की और इसलिए उन्हें उनसे और उनके सभी दोस्तों से माफी माँगनी पड़ेगी। इतना ही नहीं शर्मा ने ‘मानहानिकारक कार्रवाई’ के लिए 3,00,000 रुपए, मानसिक आघात के लिए 2,00,000 रुपए और कानूनी नोटिस के लिए 15,000 रुपए की माँग भी की है।

पल्लवी शर्मा ने अंजलि को बिना शर्त माफी माँगने में विफल रहने पर दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की भी धमकी दी है। दिलचस्प बात यह है कि शर्मा ने नोटिस जारी होने के दो सप्ताह के भीतर माफी माँगने की माँग की है, हालाँकि नोटिस में किसी तारीख का उल्लेख नहीं है।

कानूनी नोटिस में, पल्लवी शर्मा ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि वह अंजलि को क्लब हाउस और व्हाट्सएप पर छोड़कर नहीं जानती हैं। उनके अनुसार, “आपने बार-बार खुद को JNU की एक वामपंथी और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके बाद, हमें यह पता चला कि यह क्लब हाउस पर उग्र दक्षिणपंथी चरमपंथियों के खिलाफ लोगों का विश्वास जीतने के लिए आपके द्वारा परोसा गया झूठ था।”

लीगल नोटिस का एक हिस्सा

कानूनी नोटिस में वैसे तमाम बातें उल्लेखित हैं लेकिन एक बात ने हमारा भी सिर चकरा दिया। नोटिस में पल्लवी शर्मा का कहना है कि यह जानने में आया है कि अंजलि का जुड़ाव दक्षिणपंथियों से है, तभी वह उससे दोस्ती करने से पीछे हट गई कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए।

वह अपने कानूनी नोटिस में यह भी कहती है कि चूँकि दक्षिणपंथी अंजलि को ‘भगवा योद्धा’ कहते हुए उसके लिए क्लबहाउस पर रूम क्रिएट करते हैं और इसलिए, यह स्पष्ट है कि वह वास्तव में वामपंथी नहीं है। दूसरी ओर, अंजलि ने ऑपइंडिया से बात करते हुए दावा किया कि यह पल्लवी ही थी जिसने उसे अपने दक्षिणपंथी दोस्त को डाँटने को न सिर्फ कहा था बल्कि धमकी दी थी लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि इस नोटिसबाजी से पहले ऐसे कई अन्य पुरुष क्लबहाउस यूजर जो दक्षिणपंथी हैं, उन्हें बार-बार बड़ी बेशर्मी से और सार्वजनिक रूप से न सिर्फ परेशान किया गया बल्कि उन्हें गाली देते हुए बदनाम भी किया गया।

हालाँकि, इसी बीच एक यह तथ्य भी निकलकर सामने आया कि पल्लवी शर्मा यह भी स्वीकार करती हैं कि उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर है, एक ऐसा तथ्य जिससे अंजलि जाहिर तौर पर उत्साहित थीं।

अपना दायित्व मानते हुए, पल्लवी शर्मा लीगल नोटिस में कहती हैं, “कि आप कानून का उल्लंघन कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर हाशिए पर जाने और बहिष्कार से बचने के लिए हमारे मुवक्किल को बदनाम करने और अपनी विजिबिलिटी बढ़ाने से अवैध रूप से लाभ कमाने का प्रयास कर रहे हैं। आपके बाकी मकसद आपको सबसे अच्छे से पता हैं।”, इस प्रकार अंजलि से कुल 5,15,000 रुपए के मुआवजे की माँग की गई है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, अंजलि ने इस बात की पुष्टि की कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद, उसने अपने ‘दक्षिणपंथी’ दोस्त को डाँटने से इनकार कर दिया और इसलिए, पल्लवी शर्मा उससे नाराज थी। दिलचस्प बात यह है कि शर्मा ने आरोप लगाया कि यह अंजलि ही थी जिसने उनकी निजी जानकारी को सार्वजनिक किया था। हालाँकि, तथ्य यह है कि वह कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता है और ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी है।

कौन हैं पल्लवी शर्मा

क्लब हाउस में सक्रिय कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पल्लवी शर्मा को, क्लब हाउस पर अपने हिंदू विरोधी विचारों के लिए जाना जाता है। वह पहले भी एक पार्टी जुड़ी रही हैं जिसने केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत में प्रार्थना के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि यह देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का उल्लंघन करता है। इस बारे में उन्हें खुद कई रिपोर्टों में बयान देते देखा जा सकता है।

नोट- यह पूरी रिपोर्ट आप विस्तार में यहाँ पढ़ें

जिंदा है शीना बोरा? 2012 के बाद जिसे किसी ने देखा नहीं, जंगल से मिली थी अधजली लाश; उसके कश्मीर में होने का दावा

अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में बंद इन्द्राणी मुखर्जी ने CBI डायरेक्टर को चिट्ठी लिखकर बेटी के जिन्दा होने का सनसनीखेज दावा किया है। इस पत्र में इन्द्राणी ने कहा है कि शीना अभी कश्मीर में है और उसकी तलाश की जाए। इंद्राणी की इस चिट्ठी को 28 दिसंबर को CBI की विशेष अदालत में रखा जाएगा। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन्द्राणी मुखर्जी ने पत्र में लिखा है कि इस बारे में उसे जेल में मिली एक महिला कैदी ने बताया है। उस महिला ने कश्मीर में शीना से मिलने की बात कही है। इसी के साथ इन्द्राणी मुखर्जी ने एक प्रार्थना पत्र CBI की विशेष अदालत को भी भेजा है। उन्होंने इस मामले में जाँच की माँग की है।

इंद्राणी को अगस्त 2015 में शीना बोरा की हत्या केस में गिरफ्तार किया गया था। तब से वो मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। पिछले महीने उनकी जमानत अर्जी मुंबई हाईकोर्ट ख़ारिज कर चुका है। इसके पहले इंद्राणी की जमानत याचिका अलग-अलग कारणों से 6 बार खारिज हो चुकी है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट से जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद उनकी वकील सना खान सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं।

इन्द्राणी मुखर्जी के पति पीटर मुखर्जी स्टार इंडिया के पूर्व CEO हैं। इनकी शादी साल 2002 में हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी। इंद्राणी की पहली शादी से हुई संतान थी शीना बोरा। इंद्राणी शीना को अपनी छोटी बहन बताती थी। इसके बाद अप्रैल 2012 में शीना अचानक गायब हो गई। इन्द्राणी ने इसकी रिपोर्ट पुलिस में नहीं की।

जाँच के दौरान पुलिस ने इन्द्राणी के ड्राइवर श्याम मनोहर राय को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया कि शीना की हत्या गला दबाकर की गई थी। लाश को एक अन्य आदमी की मदद से रायगढ़ के जंगलों में फेंक दिया गया था। तीसरे आरोपित इन्द्राणी के पहले पति संजीव खन्ना बताए गए थे, जिन्हें पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार किया था। ड्राइवर ने पुलिस को बताया था कि उसने अपनी मालकिन इन्द्राणी के कहने पर ये हत्या की थी। हत्या की वजह शीना का अपने सौतेले भाई राहुल से अफेयर बताया जा रहा है। राहुल पीटर मुखर्जी की पहली पत्नी का बेटा है। इन्द्राणी को यह रिश्ता पसंद नहीं था।

इस दौरान इन्द्राणी और संजीव पर उनके बेटे मिखाइल बोरा ने आरोप लगाया था कि जिस दिन शीना की हत्या हुई उसी दिन उन्हें भी मारने की कोशिश हुई थी। इसके लिए इंद्राणी ने उन्हें पीने के लिए नशीला पेय दिया था। पीटर और इन्द्राणी के मीडिया जगत से जुड़े होने के चलते यह मामला हाईप्रोफ़ाइल बन गया था। कुछ समय बाद इस मामले की CBI को सौंप दी गई। इस मामले में इन्द्राणी के दूसरे पति पीटर मुखर्जी को भी नवंबर 2015 को गिरफ्तार किया गया था। आरोपित इंद्राणी ने सीबीआई कोर्ट में पीटर पर ‘लालच और दुर्भावना’ से अपनी बेटी को गायब करवाने की संभावना जताई थी। वहीं, इस मामले में पीटर को 2020 में जमानत मिल गई। बता दें कि ट्रायल के दौरान ही पीटर और इंद्राणी ने तलाक ले लिया था।

‘पार्किंग में सेक्स, गंदे कंमेट, छेड़छाड़’: एलन मस्क की टेस्ला यौन शोषण का भी अड्डा, 6 महिला कर्मचारियों ने ठोका केस

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल एलन मस्क की कंपनियों में यौन उत्पीड़न की घटनाएँ अब लगातार बढ़ रही हैं। कुछ समय पहले टेस्ला की महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि वहाँ पुरुष कर्मचारी उनके स्तनों को घूरते हैं, उन पर कमेंट करते हैं। अब इसी कंपनी की 6 कर्मचारियों ने कैलिफोर्निया में अपनी शिकायत दी है। वहीं स्पेस एक्स कंपनी की पूर्व कर्मचारी ने भी बताया है कि कैसे उसके साथ नौकरी के दौरान अभद्रता की जाती थी।

स्पेस एक्स कंपनी की एक पूर्व कर्मचारी ने मंगलवार (दिसंबर 14, 2021) को ऑनलाइन पोस्ट के जरिए कंपनी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एशले कोसाक नामक इंजीनियर ने बताया कि कैसे कंपनी में कई बार यौन शोषण की कई घटनाएँ हुईं, लेकिन आरोपितों को दंडित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।

अपने आर्टिकल में कोसाक ने लिखा, “मुझे मेरे रास्ते, एक अपमानजनक परविरश के बाद मिले, मैंने अपना घर बहुत छोटी उम्र में छोड़ दिया था, बेघर होने के बाद और कॉलेज में यौन उत्पीड़न झेलने के बाद मुझे मेरे रास्ते मिले और लीडिंग इंजिनियरिंग कंपनी में मैंने नौकरी पाई। … लेकिन मुझे स्पेस एक्स में स्थिति को संभालने का कोई तरीका नहीं मिला।”

वह लिखती हैं कि उनके पास कंपनी को छोड़ने के अलावा कोई और उपाय नहीं था। कोसाक का आरोप है कि कंपनी में यौन उत्पीड़न कई स्तर पर होता है। एक वाकया साझा करते हुए वह कहती हैं कि एक बार जब वह इन्टर्न थी तो एक अन्य सहकर्मी ने लिविंग क्वार्टर में उनके नितंबों को पकड़ लिया। इसके बाद एक बॉन्डिंग इवेंट में एक अन्य पुरुष सहकर्मी ने उनकी शर्ट पर हाथ फेरते हुए उनकी कमर के नीचे और छाती को छुआ।

इन घटनाओं की सूचना कंपनी के एचआर को दी गई लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। वो सहकर्मी फिर भी टीम में थे। वह कहती हैं कि हर वाकये की शिकायत एचआर से किए जाने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया जाता था। इसके बदले उनसे कहा जाता था कि ये मामले बेहद निजी है कि इसपर आरोपितों से बात हो। पीड़िता के मुताबिक उसने कई बार इस मामले में शिकायतें दी लेकिन कोई समाधान होने की बजाय उन्हें अनसुना कर दिया गया।

कोसाक कहती हैं कि स्पेस एक्स में काम करने वाले कई पुरुष महिलाओं की इच्छा के विरुद्ध, उन्हें काम करते हुए घूरते हैं और हर सोशल इवेंट को अपने लिए एक अवसर की तरह देखते हैं जहाँ वह महिलाओं को डेट कर सकें। जानकारी के मुताबिक कोसाक ने स्पेस एक्स में दो साल से ज्यादा काम किया है। वह अब एप्पल में ऑपरेशन प्रोग्राम मैनेजर हैं। वह कहती हैं कि कुछ समय पहले उन्हें पता चला था कि न्यू स्पेस एक्स इंटर्न को इस बात की ट्रेनिंग दी गई थी कि वो कैसे शोषण के बारे में रिपोर्ट करें। वह कहती हैं कि एक ओर ऐसी ट्रेनिंग दी जाती हैं और दूसरी ओर आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं होती।

गौरतलब है कि एलन मस्क की स्पेस एक्स के अलावा टेस्ला कंपनी से भी यौन उत्पीड़न के जो मामले आए हैं, उसके संबंध में मंगलवार को ही 6 महिला कर्मचारियों ने अपनी शिकायत की और कैलिफोर्निया के एक कोर्ट में अलग-अलग मुकदमे दायर किए। इनमें पाँच महिला कर्मचारी टेस्ला की फ्रीमोंट फैक्ट्री में कार्यरत हैं या वहाँ काम कर चुकी हैं, वहीं 1 महिला साउथ कैलिफोर्निया में कंपनी के सर्विस सेंटर्स की कर्मचारी रह चुकी हैं। इन महिलाओं की शिकायत भी यही है कि इनके सहकर्मी इन पर बुरी नजर रखते हैं और जोर जबरदस्ती करने की कोशिश करते हैं।

मिशैल कुर्रान नामक महिला का आरोप है कि उनका कंपनी में 2 माह उत्पीड़न हुआ जिसके बाद उन्होंने नौकरी को छोड़ दिया। वह कहती हैं कि प्लांट की पार्किंग में सेक्स किया जाता है। उनके अलावा अलीसा ब्लिकमैन, एलिज ब्राउन, समीरा शेफर्ड, जेसिका ब्रूक्स, एडेन मेडेरोस ने भी अपनी शिकायत दी है। कुछ ने मस्क पर सीधे तौर पर इल्जाम लगाए। एक महिला कर्मचारी ने कहा कि मस्क के ट्वीट सेक्स और ड्रग्स से प्रेरित रहते हैं। कुछ का कहना है कि जब उन्होंने इन घटनाओं की शिकायत की तो उन्हें कंपनी की ओर से जो फायदें मिलते थे उस पर रोक लग गई।

बता दें कि यौन उत्पीड़न के अलावा टेस्ला कंपनी पर नस्लीय उत्पीड़न के भी आरोप लगे हैं। इसके चलते कंपनी को कोर्ट ने अक्टूबर में एक ब्लैक कर्मचारी को 137 मिलियन डॉलर का भुगतान (1042 करोड़ रुपया) करने का आदेश दिया था।

‘कृषि से जुड़े अपने प्राचीन ज्ञान को फिर से सीखने की जरूरत है’: PM मोदी ने कहा- किसान प्राकृतिक खेती अपनाएँ, इसमें लागत कम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (16 दिसंबर 2021) को कहा कि किसानों के हित में और उनकी आय को बढ़ाने के लिए सरकार ने पिछले सात वर्षों में कई कदम उठाए हैं। आय में वृद्धि के लिए पीएम मोदी ने किसानों से प्राकृतिक कृषि अपनाने का सुझाव दिया और कहा कि इससे लागत में कमी है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने के लिए राज्य सरकारों से भी आग्रह किया।

पीएम मोदी ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि फर्टिलाइजर ने हरित क्रांति को जन्म दिया, लेकिन यह भी सच है कि हमें विकल्पों पर काम करते रहना होगा। इसका मुख्य कारण यह है कि हमें दूसरे देशों से फर्टिलाइजर आयात करना पड़ता है, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है। इसलिए, (प्राकृतिक खेती के बारे में) जागरूक होने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि खेती को केमिस्ट्री लैब से निकालकर प्रकृति के लैब से जोड़ा जाना चाहिए। उर्वरक के पास जो भी शक्ति है, वह प्रकृति में भी पाई जा सकती है। हमें बस इसका पता लगाना है। पीएम ने कहा, “नैचुरल फार्मिंग से जिन्हें सबसे अधिक फायदा होगा, वो हैं देश के 80 प्रतिशत किसान। इनमें से अधिकांश किसानों का काफी खर्च, केमिकल फर्टिलाइजर पर होता है। अगर वो प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ेंगे तो उनकी स्थिति और बेहतर होगी।”

उन्होंने कहा, “एक भ्रम ये भी पैदा हो गया है कि बिना केमिकल के फसल अच्छी नहीं होगी, जबकि सच्चाई इसके बिलकुल उलट है। पहले केमिकल नहीं होते थे, लेकिन फसल अच्छी होती थी। मानवता के विकास का इतिहास साक्षी है।”

इसके साथ ही पीएम ने कहा, “कृषि से जुड़े हमारे प्राचीन ज्ञान को हमें न सिर्फ फिर से सीखने की जरूरत है, बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब में तराशने की भी जरूरत है। इस दिशा में हमें नए सिरे से शोध करने होंगे, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक फ्रेम में डालना होगा।”