उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बाद केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री संजीव बालियान ने मथुरा में मंदिर निर्माण की तैयारी का दावा किया है। संजीव बालियान ने बुधवार (15 दिसंंबर 2021) को मथुरा के छाता इलाके में जनता को संबोधित करते हुए कहा, “जल्द ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान के भव्य निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा की बारी है।” इस दौरान बालियान ने दावा किया कि मथुरा में भव्य कृष्ण मंदिर का निर्माण ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीति की दिशा तय करेगा।”
अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की माँग भी जोर पकड़ने लगी है। संजीव बालियान आज छाता के गाँव सचोली में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरब के हिस्से में राम मंदिर का भव्य निर्माण चल रहा है। बाबा विश्वनाथ की कृपा से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण कर दिया है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद ने 1 दिसंबर 2021 को ट्वीट किया था, “अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण का काम जारी है, मथुरा की तैयारी है।” इसका पुरजोर समर्थन करते हुए बालियान ने आगे कहा, “अब पश्चिम का जो हिस्सा बचा हुआ है, वह भी श्रीकृष्ण की कृपा से जल्द ही हम लोगों को समर्पित होगा। राधा रानी का आशीर्वाद मिला तो श्रीकृष्ण जन्मस्थान का भव्य निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा।”
बता दें कि इस दौरान बालियान ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसने को उनकी हताशा बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में उनके लिए कुछ भी नहीं बचा है।
जामिया वालों ने दिसंबर 2019 को क्या किया था? बसें जलाई थीं। पत्थरबाजी की थी। विरोध के नाम पर कानून को हाथ में लेकर ला इलाहा इल्लल्लाह के नारे लगाए थे। ‘अल्लाह को मानते हैं, लोकतंत्र को नहीं’ का ऐलान भी इन्हीं जामिया वालों ने किया था।
पुलिस ने क्या किया था? इन पर कानून के तहत कार्रवाई की थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाठियाँ भी चलाई थीं। गिरफ्तारियाँ भी की थीं। कई FIR भी हुए हैं, केस चल रहे हैं। दिल्ली पुलिस को इन सब के लिए दल्ली पुलिस (DALLI POLICE) का नाम जामिया वालों ने दिया था।
2 साल बाद यही जामिया वाले अब क्या कर रहे हैं? लोकतंत्र को बचाने निकले हैं। उस लोकतंत्र को, जिसे ये मानते ही नहीं थे, अल्लाह को मानते थे। आश्चर्य यह कि जिस पुलिस को ये लोग दल्ली पुलिस घोषित किए थे, उन्हीं की सुरक्षा में दिल्ली के प्रेस क्लब में जमा हुए – लोकतंत्र बचाने को।
STATE REPRESSION, WITCH-HUNT & RESISTANCE (सत्ता का दमन, चुन-चुन कर शिकार और प्रतिरोध) – इतने भारी-भरकम शब्दों के साथ जामिया के लोग दिल्ली के प्रेस क्लब में जमा हुए। 15 दिसंबर 2021 को दोपहर 2 बजे का समय दिया गया था। तीन-सवा तीन बजे तक कुल 70-80 लोग जब जमा हुए, तब कार्यक्रम शुरू किया गया। पहचान छुपा कर मैं भी वहाँ शामिल था। वहाँ जो सुना-देखा, वो मजेदार है। पढ़िए और समझिए इनकी मानसिकता को।
सबसे पहले जानिए कौन-कौन लोग वहाँ बोलने गए थे।
प्रेस क्लब में गए जामिया वालों के सोशल मीडिया वॉल से साभार
इन लोगों में जो रो (क्या हुआ, पुलिस ने कितना मारा… आदि-इत्यादि) रहे थे, उनके बारे में या उनके बोले गए शब्दों को लिख कर खुद का और आपका समय बर्बाद करने का मतलब नहीं है। यह सारी बातें दिसंबर 2019 की हमारी रिपोर्टों में दर्ज है, मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी काफी कवरेज की थी। उल्लेख सिर्फ उनके बोले का करूँगा, जिन्होंने बहकते-बहकते ही सही, अपने दिल की बात कह दी। इसमें सबसे पहले नंबर आता है अख्तरिस्ता अंसारी का।
शरजील इमाम हीरो, किसान आंदोलन को जीत की राह दिखाने वाला
अख्तरिस्ता अंसारी पहले जामिया की छात्रा थीं, अब जेएनयू में पढ़ रही हैं। इनके अनुसार देश की दूसरी यूनिवर्सिटियों में भी विरोध होता है, लेकिन जामिया के विरोध को इसलिए दबाया गया क्योंकि वहाँ मुस्लिम पढ़ते हैं। हालाँकि बड़ी चालाकि से इन्होंने यह छुपा लिया कि विरोध करने के नाम पर बसों को जलाना, पुलिस पर छात्र के रूप से अलग मजहबी भीड़ बन कर हमला करना शायद ही किसी यूनिवर्सिटी (एएमयू भी इसका अपवाद है, उसकी भी चर्चा एक वक्ता ने की लेकिन रोने के ही अंदाज में) में होता है।
खैर, अख्तरिस्ता अंसारी के उस हिस्से को पढ़िए, जहाँ वो शरजील इमाम को हीरो की तरह पेश करती हैं, उसे किसान आंदोलन को जीत का रास्ता दिखाने वाला बताती हैं।
“बहुत जरूरी है ऐसे लोगों को याद करना, जो हमारे लिए, इस देश को बचाने के लिए लड़ रहे थे, लड़ते हुए जेलों में बंद हैं। बहुत जरूरी है आज शरजील इमाम को याद करना, जो उस चक्का जाम की बात कर रहे थे, जिसके मॉडल पर चल कर आज किसान आंदोलन ने उसी तरीके से प्रोटेस्ट किया और सरकार झुकने पर मजबूर हो गई। बहुत जरूरी है आज उमर खालिद को याद करना, जो गाँधी की बात करते थे, जो संविधान को हाथ में लेकर जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करते थे लेकिन आज जेल में बंद हैं।”
अख्तरिस्ता अंसारी के बाद अब आते हैं अरुंधति राय पर। अरुंधति गेस्ट ऑफ ऑनर थीं, लिहाजा सबसे ज्यादा बोलीं। बोलीं क्या, CAA/NRC का राग अलापीं। एकदम नपे-तुले शब्दों में, लेकिन वही जिसे पिछले 2 सालों से वामपंथी बोलते आ रहे हैं – कागज नहीं दिखाएँगे, नागरिकता खत्म हो जाएगी… सत्ता मुस्लिमों से उनका हक हड़प लेगी। यह तानाशाही सरकार है, हिंदू सरकार है… आदि-इत्यादि। जैसा मैंने कहा था, रोने वाली बातों को लिखने-पढ़ने का क्या फायदा… इसलिए मुद्दे पर आते हैं।
PM सिर्फ 5 साल के लिए बने, फिर अगला 5 साल कोई और
लोकतंत्र बचाने आईं अरुंधति राय ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई वर्तमान सरकार को मुस्लिमों, दलितों, गरीबों, आदिवासियों, वामपंथियों आदि का दुश्मन बता गईं। ध्यान दीजिए कि शुरुआती लाइन में यह लेखिका मोदी सरकार को सिर्फ मुस्लिमों का विरोधी बता रही थीं। शायद कुछ नोट्स बना कर लाई थीं, जिनको पढ़ कर और भी समूहों को बाद में जोड़ गईं। सरकार के अलावे इन्होंने आरएसएस को भी घृणा करने वाला बता दिया।
घृणा से आगे बढ़ते हुए अरुंधति राय ने चुनाव की बात कर दी। अडानी-अंबानी की बात कर दीं। चुनाव में सिर्फ भाजपा ही जीतती है, यह भी बोल गईं। इसके बाद जो बोलीं, उसे उनके शब्दों में ही पढ़िए, मजा आएगा।
“जैसे इन्होंने कृषि कानून को वापस लिया, वैसे ही इनको CAA/NRC वापस लेना होगा। इसके अलावा सिर्फ 2 चीज और कहना चाहती हूँ – एक तो यह कि इनको (मोदी सरकार को) सत्ता से हटाना पड़ेगा। जो भी पार्टी विपक्ष में है, आपस में लड़ते हैं, वो इनके (भाजपा) साथ हैं। यूपी में हम चाहते हैं कि पूरा विपक्ष जो तानाशाही के खिलाफ है, वो एकसाथ होकर लड़ें। अगर वो साथ नहीं होते हैं, इसका मतलब है, वो इनके (भाजपा के) साथ हैं। दूसरी बात है – यह बड़ी सी बात है… हमें एक माँग उठानी होगी कि हमारे देश में प्रधानमंत्री आप एक ही बार के लिए बन सकते हैं… एक ही टर्म के लिए, उसके बाद कोई और आएगा, उसके बाद कोई और… यही हमारी एक लोकतांत्रिक माँग होनी चाहिए।”
इसके अलावा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई देश की सरकार को सबने मुस्लिमों को मार देने वाला, इस्लामोफोबिक वगैरह-वगैरह शब्दों से नवाजा। यही इन लोगों का जामिया विरोध का मॉडल 2019 में भी था, आज भी है।
एक बात जो मजेदार रही, वो जानना जरूरी है। पूरी भीड़ में से किसी ने भी ला इलाहा इल्लल्लाह का नारा नहीं लगाया। प्रेस क्लब के बाहर पुलिस अच्छी खासी थी, शायद यह वजह रही होगी। वरना ये लोग अपने प्रिय शशि थरूर तक को इसके लिए गरिया चुके हैं, अपने खेमे से बाहर का बता चुके हैं।
AIMIM पार्टी के UP अलीगढ़ जिलाध्यक्ष और ओवैसी के करीबी गुफरान नूर का एक बयान विवादित सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बयान में वो जनसंख्या नियंत्रण की बात करने वालों का विरोध करते हुए अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने की वकालत करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में गुफरान नूर को ये भी कहते सुना जा सकता है कि अगर हम ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करेंगे तो हम लोग कैसे राज करेंगे।
— Saurabh Bhadouria ( सौरभ सिंह ) (@Bhadourialive) December 15, 2021
वायरल हो रहे वीडियो में गुफरान नूर को कहते सुना जा सकता है कि, ‘हमारे मुखिया ओवैसी साहब सिर्फ अल्लाह से डराते हैं। जब सपा, बसपा, कॉन्ग्रेस वालों की स्पीच शुरू होती है तब ये भाजपा से डराते हैं। इंसानों से। पहले तो यहीं फर्क कर लीजिए। मुस्लिम कौम ईमान से भी नीचे चली गई है और हर तरीके से भी। लोगों ने कहा कि बच्चे पैदा मत करो। 1 बच्चा, 2 बच्चे। अरे जब तक बच्चे नहीं होंगे तब कैसे हम लोग राज करेंगे। कैसे हमारे ओवैसी साहब प्रधानमंत्री बनेंगे। कैसे हमारे शौकत साहब मुख्यमंत्री बनेंगें ? वोट नहीं होगा। दलितों को डराया जा रहा कि बच्चे बंद करो। मुसलमानों को डराया जा रहा है कि बच्चे बंद करो। क्यों करें बच्चे बंद? भाई ये हमारी शरीयत के खिलाफ है। हमारी महिलाओं और औरतों को पर्दा करना चाहिए।
गुफरान नूर
यह वीडियो एक दिन पहले 14 दिसंबर (मंगलवार) का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे स्थान और लोगों की एक तस्वीर खुद गुफरान नूर ने अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर शेयर किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि, ‘AIMIM अलीगढ़ टीम ने ग्राम अध्यक्ष ब्लॉक अध्यक्ष जा कर नियुक्त किए। ‘
ऑपइंडिया ने इस मामले में गुफरान नूर को सम्पर्क किया। गुफरान नूर ने बताया कि कल हम अलीगढ़ के ही जगह एक कमरे में बैठ कर आपस में दीन की चर्चा कर कर रहे थे। तभी न जाने किस ने ये वीडियो बना कर वायरल कर दिया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि वीडियो को काट – छाँट कर एडिट किया गया है।
गौरतलब है कि AIMIM से पहले गुफरान नूर की नजदीकी आम आदमी पार्टी के नेताओं से रही है। पहले वो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी रह चुके हैं। उनके आप पार्टी के कई बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें भी हैं।
कोलकाता की विश्च प्रसिद्ध दुर्गा पूजा को यूनेस्को (UNESCO) ने बुधवार (15 दिसंबर 2021) को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Heritage) के रूप में मान्यता दी। शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के निकाय यूनेस्को ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इसको लेकर संदेश भी जारी किया है। उन्होंने लिखा, “कोलकाता की दुर्गा पूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है। भारत को बधाई।”
? BREAKING
Durga Puja in Kolkata has just been inscribed on the #IntangibleHeritage list.
— UNESCO ?️ #Education #Sciences #Culture ??? (@UNESCO) December 15, 2021
जानकारी के अनुसार, 13 से 18 दिसंबर 2021 तक फ्रांस के पेरिस में आयोजित होने वाली Intergovernmental Committee के 16वें सत्र के दौरान कोलकाता दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची (UNESCO’s Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनेस्को के कोलकाता की दुर्गा पूजा को हेरिटेज सूची में शामिल करने की घोषणा के बाद खुशी व्यक्त की है। उन्होंने ट्वीट किया, “यह हर भारतीय के लिए बड़े ही गर्व और खुशी की बात है। दुर्गा पूजा हमारी सर्वश्रेष्ठ परंपराओं और मूल्यों को प्रदर्शित करती है। हर व्यक्ति को कोलकाता की दुर्गा पूजा का आनंद उठाना चाहिए।”
A matter of great pride and joy for every Indian!
Durga Puja highlights the best of our traditions and ethos. And, Kolkata’s Durga Puja is an experience everyone must have. https://t.co/DdRBcTGGs9
बता दें कि कोलकाता के साथ देश के विभिन्न राज्यों में दुर्गा पूजा उत्सव मनाया जाता है। बंगाल के हर जिले में दुर्गा पूजा (Durga Puja) के पंडाल (Pandal) बनाए जाते हैं। ये पंडाल अलग-अलग थीम पर बनाए जाते हैं।
Overjoyed that ‘Durga Puja in Kolkata’ joins the @UNESCO Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity. Many congratulations! It is a confluence of the rich heritage and culture of the county’s art, crafts, rituals and practices. Jai Maa Durga! #AmritMahotsavpic.twitter.com/I7yB5pCVfd
इस्लाम त्याग कर हिन्दू धर्म में शामिल होने वाले जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व में वसीम रिज़वी) 15 दिसम्बर, 2021 (बुधवार) को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मंच से ‘भारत माता की जय’ और ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष किया। उन्होंने महादेव के नाम को शक्ति देने वाला बताया है। इसी के साथ उन्होंने हिन्दू धर्म को सबसे महान कहा है। जितेंद्र नारायण त्यागी ने कहा, “हमने जिंदगी में पहली बार किसी धर्म स्वीकार किया है। इस्लाम का पूरा अध्ययन करने के बाद हमने इस्लाम को कभी धर्म माना ही नहीं। जो इंसान को इंसान से काटने की बात करता हो वो धर्म नहीं हो सकता। हिन्दू समाज द्वारा स्वीकार किए जाने और उनसे मिल रहे प्रेम के हम आभारी हैं।”
पूर्व में वसीम रिज़वी व वर्तमान में जितेंद्र नारायण त्यागी का यह कार्यक्रम सीतापुर के खैराबाद में था। यहाँ हिन्दू समाज के एक प्राचीन मंदिर बड़ी संगत भुईयां ताली में उन्होंने एक जनसभा को सम्बोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबरी और रामजन्मभूमि केस में उन्होंने पहले ही जन्मभूमि को हिन्दुओं को सौंप देने की अपील की थी। उन्होंने बताया, “जब मैंने ऐसा कहा तो मेरा भरी सभा में विरोध होने लगा। वहाँ मौजूद तमाम मुस्लिम प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो हमें कई और जगहों को भी हिन्दुओं को देना पड़ेगा। उनकी हालत चोर की दाढ़ी में तिनका जैसी थी। वो सब खुद जानते हैं कि उन्होंने हिन्दुओं के कई धर्मस्थल तोड़ कर अपनी इमारतें बनाई हैं।”
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वसीम रिज़वी ने आगे कहा, “1400 साल पहले अरब की जमीन पर एक दानवीय ताकत ने जन्म लिया। आज वही संसार भर में आतंक का केंद्र बना हुआ है। उसे जो मानता है वह भी आज परेशान है। मैंने उस सोच को बदलने की बहुत कोशिश की लेकिन दानव की मानसिकता वही की वही रहेगी। अब मुझे अपने हिंदुस्तान और सनातन की रक्षा करनी होगी। मुझे ख़ुशी है कि अब मैं एक हिन्दू हूँ। मुझे आतंकी गुट में शामिल होने जैसी घुटन महसूस हो रही थी। हर मस्जिद और मदरसे में ISIS की सोच का प्रचार किया जा रहा है।
ऑपइंडिया ने इस मामले में कार्यक्रम के आयोजक और बड़ी संगत मंदिर के महंत बजरंग मुनि उदासीन से सम्पर्क किया। उन्होंने बताया, “यह इलाका मुस्लिम बहुल है। प्रशासन के अधिकारी भी चाह रहे थे कि जितेंद्र नारायण त्यागी का आयोजन टल जाए। सूचना मिली है कि इस कार्यक्रम के विरोध में मस्जिदों में सभाएँ की गई हैं जो आज भी जारी रह सकती हैं। फिर भी सत्य सनातन को स्वीकार करने वाले वसीम रिज़वी से जितेंद्र नारायण त्यागी बने समाज सुधारक का भव्य स्वागत मेरे और मेरे शिष्यों द्वारा किया गया। जो भी इस प्रकार से असत्य से सत्य की राह पर चलेगा हम उसका ऐसे ही सम्मान करेंगे। हम जितेंद्र नारायण त्यागी के साथ पूरी ताकत और मजबूती से खड़े हैं। चरमपंथी समाज अब जान ले कि उनकी पोल पट्टी दुनिया के आगे सबूतों के साथ खुल रही है।”
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को लेकर सवालों के घेरे में आए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को आज दिल्ली तलब किया गया है। बुधवार (15 दिसंबर 2021) शाम चार बजे वो लखनऊ एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इसी बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। यहाँ वह पत्रकारों पर नाराजगी जाहिर करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में एक समाचार चैनल के पत्रकार ने मंत्री से जब बेटे आशीष को लेकर सवाल पूछा तो वह बुरी तरह से नाराज हो गए।
जब कोई अहंकार की अट्टालिका बैठ जाता है,गुरूर का गुबार माथे से टकराता है।तो नेता, सांसद,मंत्री से होते हुए व्यक्ति अजय मिश्रा टेनी बन जाता है।
लखीमपुर SIT जांच पर @ABPNews के रिपोर्टर ने सवाल किया। कहते हैं
अजय मिश्रा पत्रकार से बोले कि क्या बात है? पत्रकार ने जब फिर सवाल दोहराया तो गुस्साते हुए बोले, “बेवकूफी के सवाल मत करो, दिमाग खराब है क्या बे।” लोगों ने उनको समझाने की कोशिश की तो वह पास में एक खड़े एक और पत्रकार का मोबाइल पकड़कर गुस्साते हुए बोले, “बंद करो इसे।” टेनी लखीमपुर के ओयल में मदर चाइल्ड केयर के ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन करने पहुँचे थे।
ये हमारे देश के गृह राज्य मंत्री टेनी हैं. पत्रकारों को चोर, साला बता रहे हैं. मारने को झपट्टा मार रहे.
अभी गोदी मीडिया के एंकर/एंकरायें डिफेंड करने आ जाएंगे. कहेंगे- ‘चाचा ऐसे नहीं हैं. स्थानीय पत्रकारों की गलती है.’ pic.twitter.com/LpXgCO7Pvq
वीडियो में वह मीडिया पर नाराजगी जताते हुए कह रहे हैं, “सब पत्रकार चोर हैं। तुम ही मीडिया वालों के चलते आज एक निर्दोष आदमी जेल में बंद है। तुम चोरों ने एक निर्दोष को फँसा दिया है। शर्म नहीं आती है? कितने गंदे लोग हैं! क्या जानना चाहते हो? एसआईटी से नहीं पूछे?”
बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा की जाँच कर रही यूपी पुलिस की एसआईटी ने कोर्ट से कहा है कि 4 किसानों और एक पत्रकार की हत्या की घटना एक ‘सोची-समझी साजिश’ थी। इसके साथ ही उन्होंने मामले में अधिक गंभीर आरोपों को शामिल किए जाने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा का पुत्र आशीष मिश्रा इस मामले के 13 आरोपितों में शामिल है। एसआईटी के आवेदन पर दलीलों को सुनने के बाद लखीमपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) चिंता राम ने 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में तिकोनिया क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले की पड़ताल कर रही SIT को मुकदमे में हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की मंगलवार (14 दिसंबर 2021) को इजाजत दे दी।
मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में स्थित महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) की भस्म आरती में बुधवार (15 दिसंबर 2021) सुबह फर्जी आईडी (Fake ID) दिखाकर एक मुस्लिम शख्स अंदर घुस गया। उसके साथ उसकी हिंदू प्रेमिका भी थी, जिसने उसे मंदिर में प्रवेश करवाने में मदद की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने मंदिर समिति की शिकायत के आधार पर उस शख्स से पूछताछ करने के बाद उसे आईपीसी की धारा 420 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार शख्स की पहचान कर्नाटक के मोहम्मद यूनुस मुल्ला के रूप में हुई है। वह अपनी प्रेमिका खुशबू यादव के साथ उज्जैन से आज सुबह महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए आया था। मुल्ला ने अभिषेक दुबे नाम के फर्जी आधार कार्ड से बुकिंग कराई थी। दोनों मंदिर में वीआईपी गेट नंबर 6 से दाखिल हुए और वीआईपीज के लिए रिजर्व जगह पर बैठ गए। इस दौरान मंदिर के कर्मचारियों को उन पर संदेह हुआ और उन्होंने युवक से पूछताछ की। फिर उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
साभार: वन इंडिया
इस मामले की जाँच सीएसपी पल्लवी शुक्ला कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यूनुस के साथ आई उसकी प्रेमिका के भाई का नाम अभिषेक दुबे है। यूनुस उसी के आधार कार्ड के जरिए भस्म आरती में शामिल हुआ था। लड़की ने यूनुस को अपना भाई बताकर एंट्री दिलाई थी। दोनों महाकाल मंदिर के पास एक होटल में रुके हुए थे। वहाँ दोनों ने अपना सही आधार कार्ड दिखाया था। जब होटल कर्मचारियों को उन दोनों पर शंका हुईं, उन्होंने पुलिस को मामले की सूचना दी। इसके बाद मंदिर समिति से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मुल्ला को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले पर जाँच शुरू कर दी गई है। बता दें कि अखाड़ा परिषद के पूर्व महामंत्री अवधेशपुरी महाराज ने इस मामले को गंभीर बताते हुए इससे जुड़े सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
झारखंड के साहिबगंज में पुलिस ने मानव तस्करी से जुड़े नसीम और मोमिन को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मोमिन के चंगुल से 2 नाबालिग बच्चियों को भी छुड़वाया है। आरोपित इन्हें दिल्ली ले जा रहा था। यह घटना 11 दिसंबर (शनिवार) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक थाना तीनपहाड़ थाना ने मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक इन बच्चियों से नौकर के रूप में काम करवाया जाना था। सूचना सही पाई गई। शनिवार शाम 7 बजे बस स्टैंड के पास आरोपित 2 बच्चियों के साथ दिखा। पुलिस को देखते ही मोमिन भागने लगा। लेकिन पुलिस के जवानों ने उसको दौड़ा कर पकड़ लिया।
पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने अपने अब्बा का नाम नौशाद मोमिन बताया। वह बोरियो थाना अंतर्गत मोती पहाड़ी का रहने वाला है। आरोपित पर बाल श्रम एवं विनियम अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। राजमहल एसडीपीओ अरविंद कुमार सिंह ने अनुमंडल पुलिस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में चल रहे तीन दिवसीय ‘हिन्दू एकता महाकुंभ’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार (15 दिसंबर 2021) को हिन्दू धर्म छोड़ने वालों की घर वापसी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं प्रतिज्ञा लेता हूँ कि सर्व समाज में अपने पवित्र हिंदू धर्म, संस्कृति, समाज के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए आजीवन कार्य करूँगा। किसी भी हिंदू भाई को धर्म से विमुख नहीं होने दूँगा, जो हिंदू धर्म छोड़कर गए हैं उनकी घर वापसी का काम कराएँगे। उन्हें अपने परिवार का फिर से हिस्सा बनाएँगे। हिंदू बहनों की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। जाति, वर्ग और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर हिंदू समाज को सशक्त बनाने के लिए शक्ति का प्रयोग करेंगे।”
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आगे कहा, “यह बात तो सारी दुनिया मानती है और अपना भी अनुभव है। एक तरह से यह शाश्वत सत्य भी है। मजबूरी में लोग एक साथ हो जाते हैं, लेकिन मजबूरी समाप्त होते ही एकता भी समाप्त हो जाती है।”
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि हिंदू एकता के लिए अहंकार को तोड़ना होगा। अहंकार और स्वार्थ का विचार खत्म करने से ही कार्य बेहतर होंगे। लगातार प्रयास करने से ही सफलता मिलेगी, क्योंकि इस बार अधर्म की लड़ाई धर्म से है। धर्म को अपनी जीत के लिए धर्म का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। इस खास मौके पर उन्होंने महाकुंभ में शामिल हो रहे लोगों को इसका संकल्प भी दिलाया।
बता दें कि देश के विघटित हिंदुओं को एक सूत्र में पिरोने के लिए चित्रकूट में हिंदू एकता महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। महाकुंभ में संघ प्रमुख मोहन भागवत बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर संत समाज से हिंदू हित के कई मुद्दों पर चर्चा की। भागवत आज सुबह सवा छह बजे उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से चित्रकूट पहुँचे थे।
मेरठ में एनएच 58 पर अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के साथ राकेश टिकैत की तस्वीर वाले पोस्टर पर मचे बवाल के बाद इसे हटा दिया गया है। दरअसल, यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हर राजनीतिक दल अपने-अपने हथकंडे आजमा रहा है। इस बीच मेरठ में अखिलेश-जयंत के साथ तिरंगा लहराते राकेश टिकैत की फोटो पोस्टर पर दिखी।
राकेश टिकैत की तिरंगा लहराने वाली फोटो के साथ इस पोस्टर पर लिखा था, “हार गया अभिमान, जीत गया किसान। सब याद रखा जाएगा।” पोस्टर पर एक तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ रालोद नेता जयंत चौधरी दिख रहे हैं तो बीच में तिरंगा लिए राकेश टिकैत दिखाई दे रहे हैं। भाकियू ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है। नेताओं ने कहा है कि इस पोस्टर से उनके संगठन का कुछ भी लेना-देना नहीं है। भाकियू ने स्पष्ट किया है कि उनका संगठन पूरी तरह अराजनीतिक है। किसी भी पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं इसीलिए उनके नेता के चेहरे का चुनावी इस्तेमाल किसी को नहीं करना चाहिए।
भकियू कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने पोस्टर नहीं देखें हैं। लेकिन अगर ऐसे पोस्टर लगे हैं तो ये राजनीतिक स्टंट है। इनसे भकियू का कोई लेना देना नहीं है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ किसान हित में काम करते हैं। अगर कोई वोट के लिए राकेश टिकैत का फोटो लगा रहा है तो ये अनुचित है क्योंकि उनका यूनियन अराजनैतिक है। वैसे इस विवाद पर अखिलेश यादव या फिर जयंत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राकेश टिकैत ने भी आगे आकर कोई बयान नहीं दिया है।
जानकारी के अनुसार कृषि कानूनों की वापसी के बाद यूपी गेट बार्डर पर एक साल से ज्यादा समय तक चला किसान आंदोलन खत्म हो गया है। वहीं, किसान नेता भी अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरान आंदोलन के मुख्य चेहरा रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी आज गाजीपुर बॉर्डर छोड़ दिया है। गाजीपुर बॉर्डर से जब राकेश टिकैत रवाना हुए, तो उन्होंने सभी का धन्यवाद अदा किया। इस बीच उन पर फूलों की बारिश की गई। किसान गाजीपुर बॉर्डर को खाली करने में जुटे हुए हैं। अभी भी बॉर्डर खाली होने में करीब 1 दिन का वक्त लग सकता है। क्योंकि काफी किसानों के टेंट अभी भी मौके से नहीं हटे हैं।