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‘मदरसे पैदा करते हैं आतंकी, मौका मिला तो बैन करूँगा’: यूपी के मंत्री रघुराज सिंह ने कहा- राज्य में 250 से 22000 हो गए मदरसे

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री (MoS) ठाकुर रघुराज सिंह ने मदरसों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि देश भर में जितने भी मदरसे चल रहे हैं, वहीं से आतंकवाद पनप रहा है। इसलिए सभी मदरसों को बंद कर देना चाहिए। उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में मंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मदरसे आतंकी गतिविधियों के केंद्र बने हुए हैं और सभी आतंकवादी मदरसों से ही पढ़कर निकले हैं। मंत्री ने कहा कि अगर भगवान ने उन्हें मौका दिया तो वे देश भर में चल रहे सभी मदरसों को बंद कर देंगे। उन्होंने ये भी कहा कि जैसे सर्प का फन कुचल दिया जाता है, वैसे ही आतंकवाद का सिर कुचलना है।

मंत्री का बयान

राज्यमंत्री ठाकुर रघुराज सिंह ने कहा है कि मदरसों से केवल और केवल आतंकवादी पैदा होते हैं। ये जितने भी मजहबी स्कूल हैं, ये इस्लामिक कट्टरपंथ और चरमपंथ को बढ़ावा देते हैं। मदरसों में इन आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश से आतंकवाद को खत्म करने के लिए पहले सभी मदरसों को बंद करना होगा। मंत्री ने कहा, “हमें देश से आतंकवाद को खत्म करना है। भगवान मुझे देश भर में चल रहे सभी मदरसों को बंद करने का मौका दें।”

मंत्री रघुराज सिंह ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में मदरसों की संख्या बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। राज्य में मदरसों की संख्या कभी 250 थी, लेकिन ये आज बढ़कर 22,000 हो गई हैं। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से इन मदरसों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया।

मंत्री से जब पूछा गया कि वो ऐसे कैसे कह सकते हैं कि मदरसे से केवल आतंकवादी ही निकलते हैं तो उन्होंने हिजबुल मुजाहिदीन के मारे गए आतंकवादी मन्नान वानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पास आउट वानी ने जम्मू-कश्मीर के एक मदरसे में पढ़ाई की थी। सच्चाई ये है कि ISI एजेंट किसी न किसी मदरसे से ही निकलते हैं।

इतना ही नहीं, योगी के मंत्री ने केरल में फैल रहे इस्लामिक कट्टरपंथ का भी हवाला देते हुए कहा कि केरल में कट्टरपंथी इस्लामवादी राज्य में महिलाओं का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कम्युनिस्ट सरकार में केरल ISIS का केंद्र बन गया है।

गौरतलब है कि केरल से ‘लव जिहाद’ की कई घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। इन महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने के बाद उनका ब्रेनवॉश कर ISIS में शामिल कराया जाता है। ऐसे मामलों की कुल संख्या राज्य में 92 से अधिक बताई जा रही हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए एनआईए पहले ही लव जिहाद के 32 मामलों की जाँच कर रही है। केरल के लव जिहाद के अधिकतर मामलों का किसी न किसी तरह से आतंकी संगठन ISIS से जुड़ाव रहा है।

मदरसों से इस्लामिक आंतक के कई मामले सामने आए

मदरसों में इस्लामिक आतंक के पनपने के मंत्री के बयान को इस बात से बल मिलता है कि इससे पहले भी ऐसी कई रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिनमें कहा गया है कि आतंकवादी संगठनों द्वारा मदरसों का बड़े पैमाने पर कट्टरपंथ विचारधारा को फैलाने और आतंकी भर्ती गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है।

पिछले साल ही केरल और पश्चिम बंगाल में फैले अल-कायदा के टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए NIA ने मदरसा शिक्षक अब्दुल मोमिन मंडल को गिरफ्तार किया था। आरोपित के पास से जाँच एजेंसी ने कई डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, जिहादी साहित्य, धारदार हथियार, देसी हथियार, स्थानीय स्तर पर बनाए गए बॉडी आर्मर और घर विस्फोटक बनाने संबंधी साहित्य समेत कई आपत्तिजनक सामग्री जब्त किए थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद NIA ने खुलासा किया था कि मॉड्यूल से जुड़े नौ आतंकवादियों को पकड़ने के बाद सितंबर 2020 के बाद यह 11वीं गिरफ्तारी है।

खुद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साल 2019 में आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) द्वारा पश्चिम बंगाल के बर्दवान और मुर्शिदाबाद में कट्टरपंथ और भर्ती गतिविधियों को चलाने के लिए मदरसों के इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि की थी। आतंकी इन इलाकों को न सिर्फ ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में भर्तियाँ भी कर रहे थे। ये भर्तियाँ मदरसों और मस्जिदों के जरिए की जाती हैं। आतंकियों का यह नेटवर्क पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा और नदिया जिलों और असम में मुस्लिम बहुल जिलों के कुछ हिस्सों में सक्रिय है।

शक्ति मिल गैंगरेप केस में दोषी सलीम, कासिम व विजय को दी गई फाँसी की सजा रद्द, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा सेशन कोर्ट का फैसला

22 अगस्त 2013 को मुंबई के शक्ति मिल कंपाउंड में महिला फ़ोटो जर्नलिस्ट के साथ हुए गैंगरेप में मुंबई हाईकोर्ट ने तीन आरोपितों की फाँसी की सज़ा उम्रकैद में बदल दी है। पूर्व में सेशन कोर्ट ने तीन आरोपितों को फाँसी और एक अन्य को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। तीनों आरोपितों के सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इस केस में मोहम्मद सलीम, मोहम्मद कासिम हाफ़िज़ शेख उर्फ़ कासिम बंगाली व विजय मोहन जाधव को फाँसी की सज़ा मिली थी। इसी अपराध में सिराज रहमान खान को उम्रकैद हुई थी। एक अन्य आरोपित चाँद बाबू अपराध के समय नाबालिग था।

यह फैसला 25 नवम्बर 2021 (गुरुवार) को सुनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने फैसला देते हुए पश्चाताप की भावना का जिक्र किया। अदालत के अनुसार ‘मृत्युदंड प्रयाश्चित की भावना को खत्म कर देता है। आरोपित जीवन भर पश्चाताप के लायक हैं। वो दुबारा समाज में ऐसा अपराध भी नहीं कर पाएँगे। इसलिए दोषियों को उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए।

साल 2013 में हुए उसी शक्ति मिल गैंगरेप में गैंगरेप के 2 मामले हुए थे। पहला फोटोग्राफर जॉर्नलिस्ट के साथ और दूसरा फोन ऑपरेटर के साथ। दोनों ही केसों में मुकदमा साथ ही चल रहा था। 2013 में हुए शक्ति मिल गैंगरेप के 2 मामले थे, एक फोटोग्राफर जॉर्नलिस्ट केस और दूसरा फोन ऑपरेटर केस. इन दोनों ही वारदातों का मुकदमा एक साथ चला था। टेलीफोन ऑपरेटर केस में मोहम्मद अशफाक शेख और जाधव जे जे भी शामिल था। मोहम्मद अशफाक शेख को उम्र कैद की सज़ा मिली थी जबकि जाधव जे जे उस समय नाबालिग था। इस केस में भी मोहम्मद सलीम, मोहम्मद कासिम और विजय मोहन जाधव शामिल थे।

गौरतबल है कि एक मैगज़ीन की महिला फोटो जर्नलिस्ट के साथ 22 अगस्त 2013 को शक्ति मिल कंपाउंड में शाम लगभग 6 बजकर 45 मिनट पर गैंगरेप हुआ था। शक्ति मिल कम्पाउंड महालक्ष्मी क्षेत्र में है। घटना के दिन शाम 6 बजे महिला पत्रकार और उसके साथी को शक्ति मिल परिसर में मौजूद आरोपितों ने रोक लिया था। उन्होंने खुद को पुलिस को बताया और फोटो से पहले अंदर आ कर अधिकारी से इजाजत लेने की बात कही। दोनों को अंदर ले जाने के बाद उन्होंने महिला पत्रकार के साथी पर हमला कर के उसे वहीं बाँध दिया था। दो घंटे तक गैंगरेप के बाद वे दोनों अपनी जान बचाकर अस्पताल पहुँचे थे।

इस मामले की जाँच के दौरान 3 दिन के अंदर सभी आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए थे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पीड़िता ने 4 सितंबर 2013 को आरोपितों की पहचान की। इस बीच 3 सितंबर 2013 को एक और पीड़िता सामने आई। तब 19 वर्षीया टेलीफोन ऑपरेटर ने 31 जुलाई 2013 को अपने साथ उसी शक्ति मिल परिसर में 5 आरोपितों द्वारा गैंगरेप होना बताया था। इन पाँचों में से तीन को पुलिस पहले ही महिला जर्नलिस्ट के साथ हुए गैंगरेप केस में गिरफ्तार कर चुकी थी। इन मामलों की जाँच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रान्च यूनिट को सौंपी गई थी।

19 सितंबर 2013 को मुंबई क्राइम ब्रांच ने अदालत में आरोपितों के विरुद्ध लगभग 600 पन्ने की चार्जशीट दाखिल की। इस केस का ट्रायल 14 अक्टूबर 2013 को शुरू हुआ। इस दौरान पीड़िता और गवाह ने आरोपितों को अदालत में पहचाना था। 4 अप्रैल 2014 को मुंबई सत्र न्यायालय ने तीन आरोपितों को फाँसी और बाकियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। फाँसी की सज़ा उन्ही तीन आरोपितों को दी थी जो महिला फोटो जर्नलिस्ट और टेलीफोन ऑपरेटर दोनों गैंगरेप में शामिल रहे थे।

‘आप मंत्री हैं, आपको ये शोभा देता है?’: कोर्ट ने नवाब मलिक को लताड़ा, वानखेड़े के खिलाफ 9 दिसंबर तक टिप्पणी पर लगाई रोक

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ बार-बार अपमानजनक बयान देने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक को कड़ी फटकार लगाई है। इसके बाद नवाब मलिक ने कहा है कि अब वे 9 दिसंबर तक समीर वानखेड़े के खिलाफ कोई भी सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेंगे।

दरअसल, समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव ने नवाब मलिक के खिलाफ इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले पर सुनवाई कर रही बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शाहरुख कथावाला और मिलिंद जाधव की खंडपीठ के समक्ष मलिक के वकील कार्ल तांबोले ने कहा, “हमें निर्देश मिल चुका है और अब वह 9 दिसंबर तक कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे।”

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस कथावाला ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “वह प्रतिदिन किस तरह की मीडिया पब्लिसिटी चाहते हैं, खासकर उनके दामाद के गिरफ्तार होने के बाद… वो एक मंत्री हैं। क्या उन्हें इस तरह के कार्य शोभा देते हैं?” कोर्ट में वानखेड़े की पैरवी वकील बीरेंद्र सराफ ने की। उन्होंने कहा, “अदालत ने माना है कि यह द्वेष और दुश्मनी से प्रेरित है। इससे एक व्यक्ति की इमेज को अपूरणीय रूप से क्षति हुई है।”

जज ने सोमवार ये देखा कि नवाब मलिक ने अधिकारी के खिलाफ ईर्ष्या और शत्रुता के कारण अपमानजनक बयान दिए थे, जबकि मलिक को वानखेड़े के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करना चाहिए। दीवाली से पहले जस्टिस जामदार ने वानखेड़े के मामले की सुनवाई की थी, लेकिन कोर्ट ने मलिक को आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने से नहीं रोका था।

कोर्ट में जिरह के दौरान मलिक के वकील तंबोले ने आरोप लगाया कि वानखेड़े ने सिविल सर्विस ज्वाइन करने के लिए फर्जी कास्ट सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया था। इस पर जस्टिस कथावाला ने पूछा, ”क्या नवाब मलिक ने अपनी शिकायत जाति जाँच समिति को दे दी है? उन्होंने ऐसा नहीं किया? फिर वो चाहते क्या हैं? मीडिया के सामने जाने से पहले उन्हें ऐसा करना चाहिए।”

जस्टिस माधव ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “एक मंत्री होने के नाते, वीआईपी ट्रीटमेंट के साथ, आपको सभी दस्तावेज मिलते हैं, लेकिन शिकायत नहीं किया।”

गौरतलब है कि जब से समीर वानखेड़े शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के खिलाफ ड्रग्स केस की जाँच शुरू की, तभी से नवाब मलिक उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। हाल ही में नवाब मलिक ने एक तस्वीर जारी कर समीर वानखेड़े के मुस्लिम होने का दावा किया था।

‘टॉर्चर, अश्लील कॉल, गालियाँ और झूठे केस’: जिस केस में संजय राउत पर आरोप उसकी होगी जाँच, कोर्ट में मुंबई पुलिस की रिपोर्ट खारिज

शिवसेना सांसद संजय राउत के ख़िलाफ़ प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत मामले में सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जाँच को खारिज कर दिया है। स्वप्ना पाटकर नामक फिल्म निर्माता की शिकायत से जुड़े इस मामले पर कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि वो आगे भी मामले की जाँच करें।

मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार मजिस्ट्रेट एस बी भाजीपाले ने 18 नवंबर को पुलिस की रिपोर्ट ‘अ-समरी’ में कमियाँ निकालते हुए उसको खारिज कर दिया था और अब बुधवार को इस मामले में विस्तृत आदेश उपलब्ध कराया है। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि जाँच अधिकारी इस बात को ध्यान में रखने में बुरी तरह विफल रहे कि 29 जून, 2013 को कथित घटना से पहले 16 मई, 2013 को भी शिकायतकर्ता पर हमला किया गया था।

आदेश में इस बात का भी उल्लेख है कि 39 वर्षीय शिकायतकर्ता ने खुद अपनी शिकायत में संदिग्धों के नाम दिए थे लेकिन जाँच अधिकारी ने कभी उनसे पूछताछ नहीं की। अदालत ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि FIR जानकारी का भंडार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि एक सतर्क जाँच अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता का अलग से बयान लिया गया और उसकी सत्यता जाँची गई। जबकि मौजूदा जाँच अधिकारी द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया। इस मामले में महिला की शिकायत को देखते हुए आगे जाँच हो सकती है।

बता दें कि पाटकर का आरोप रहा है कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाटकर को तब से तंग किया जा रहा है जब उन्होंने शिवसेना मुखपत्र सामना के लिए कॉलम लिखने का काम शुरू किया था। हालाँकि इस बीच स्वप्ना और राउत के बीच क्या घटित हुआ ये तो नहीं पता लेकिन इसके बाद पाटकर तंग रहने लगीं।

इससे पहले राउत पर प्रताड़ना और पीछा करवाने का आरोप लगा चुकीं स्वप्ना पाटकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने खुद को एक शिक्षित और सबल भारतीय महिला बताते हुए पत्र में लिखा था कि उन्हें सहानुभूति नहीं, इंसाफ चाहिए। उनका कहना था कि राज्यसभा सांसद संजय राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते। इस मामले में मालूम हो कि संजय राउत ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।

UP पुलिस का सिपाही जहीन सप्लाई करता था कारतूस, मेरठ पुलिस ने सदरुद्दीन के घर से पकड़ा हथियारों का जखीरा

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के गाँव रुहासा में पुलिस की छापेमारी के दौरान हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है। ये हथियार गाँव के पूर्व उप-प्रधान सदरुद्दीन के घर से बरामद किए गए हैं। हथियारों को बिस्तर के नीचे छुपा कर रखा गया था। इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस का एक कॉन्स्टेबल भी शामिल पाया गया, जिसका नाम जहीन है। उस पर पुलिस के कारतूसों को आरोपितों को बेचने का आरोप है। यह छापेमारी 24 नवम्बर 2021 (बुधवार) को की गई है।

इस मामले में मेरठ के SSP प्रभाकर चौधरी ने बताया कि उनके पास व्हॉट्सएप पर हथियारों की सूचना मिली थी। एसपी सिटी विनीत भटनागर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की, जिसमें भारी संख्या में हथियार बरामद किए गए। बरामद हथियारों में एक फैक्ट्री मेड राइफल, 1 देशी बंदूक, 2 तमंचा, 236 ज़िंदा कारतूस, 156 खोखे बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, गोलियाँ बनाने के छर्रे, हथौड़ी, पेचकस, प्लास और रेती बरामद की गई हैं। इन औजारों का उपयोग हथियारों को बनाने में किया जाता था। एसपी सिटी का कहना है कि इस मामले को गाँव में वर्चस्व, आगामी विधानसभा चुनाव और हथियारों की सप्लाई से घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। 

प्रेसनोट मेरठ पुलिस

पुलिस ने मौके से शवी अख्तर और रज़ी अख्तर नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सदरुद्दीन के बेटे शवी और रजी गाँव में अक्सर हथियारों की नुमाइश कर के अपना दबदबा बनाने के प्रयास में रहते थे। एक आरोपित शवी अख्तर पहले भी डबल मर्डर में जेल काट चुका है और 3 मुकदमों में नामज़द है, जबकि उसके भाई रज़ी अख्तर पर पहले से 1 केस दर्ज है। गिरफ्तार शवी ने MA और रज़ी कक्षा 10 तक पढ़ाई की है।

इस मामले में दो फरार सगे भाइयों शमी और वशी को पुलिस तलाश कर रही है। इनमें से तीन आरोपितों की पत्नियाँ शबनम, रुबीना और शादाब भी फरार हैं। इसी केस में प्रकाश में आए कॉन्स्टेबल जहीन के साथ मिनाज और शमीम भी फरार हैं। इन सभी की तलाश पुलिस कर रही है। एसपी सिटी भटनागर के मुताबिक, पुलिस हर बिंदु पर जाँच कर रही है। फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। गौरतबल है कि इस परिवार से दुश्मनी रखने वाले अफ़ज़ाल के घर पर भी पुलिस ने पहले छापा मारा था, तब सबने पुलिस पर हमला कर दिया था।

बस नाम में शीत, गरमी भरपूर: संसद के इस सत्र में पश्मीना शॉल के अलावा और क्या-क्या होगा, सब कुछ एक साथ

सर्दी का मौसम अन्य चीजों के अलावा संसद का शीतकालीन सत्र भी लेकर आता है। सेमिनार, टीवी के पैनल डिस्कशन और सामाजिक जमावड़े में अच्छी-अच्छी बातें करके बोर हो गए सांसदों के लिए शीतकालीन सत्र कुछ कठोर बोल बोलने के मौके लेकर आता है। साथ ही कुछ सांसदों को मौका मिलता है संसद की कार्रवाई में बाधा डालते हुए अपने पराक्रम दिखाने का। कुछ संसद सदस्य कड़ी मेहनत के नए-नए तरीके निकालते हैं ताकि संसद की कार्रवाई में बाधा उत्पन्न कर लोकतंत्र की रक्षा की जा सके। लोकसभा अध्यक्ष को भी सदन की कार्रवाई को चलाते रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और कई बार वे सफल भी होते हैं। इसके अलावा शीतकालीन सत्र अच्छे कपड़े और सुन्दर पश्मीना शॉल की नई डिजाइनों की नुमाइश का भी कारण बनता है।

इस वर्ष शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से आरंभ होकर 23 दिसंबर तक चलेगा। संसद के हर सत्र से पहले ‘सत्र के हंगामेदार होने की उम्मीद की जा रही है’ जैसी भविष्यवाणी पिछले लगभग ढाई दशकों में भारतीय राजनीति के विशेषज्ञों और मीडिया का सबसे बासी क्लीशे है। ऐसे में आगामी शीतकालीन सत्र कैसा रहेगा?

क्रिप्टोकरेंसी के नियमन पर बिल

जहाँ तक सरकार की बात है, सरकार इस सत्र में देश में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए बिल पेश करने की घोषणा कर चुकी है। द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिसियल डिजिटल करेंसी एक्ट 2021 के रूप में सरकार संसद में बिल पेश करेगी। बिल का उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तावित आधिकारिक डिजिटल करेंसी के चलन से संबंधी नियम बनाना और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के चलन, उनमें निवेश या ट्रेडिंग पर बैन लगाना या उन्हें रेगुलेट करना होगा।

सरकार द्वारा प्रस्तावित इस बिल का स्वागत होना चाहिए। लंबे समय से देश में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और ट्रेडिंग पर सरकार के आधिकारिक दृष्टिकोण को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। ऐसे में आवश्यक था कि सरकार जल्द ही कोई कानून लाकर इस विषय पर अपना पक्ष स्पष्ट करें। एक अनुमान के अनुसार भारत में क्रिप्टोकरेंसी में 1.5 करोड़ से लेकर 2 करोड़ तक निवेशक हैं और उनके 40 हजार करोड़ रुपए तक लगे हुए हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण यह है कि पिछले डेढ़ वर्षों से अधिक समय तक कोरोना महामारी से परेशान अर्थव्यवस्था जब पटरी आ रही है तब उसे कोई नया धक्का न लगे।

कृषि कानूनों की वापसी और पॉवर सेक्टर

क्रिप्टोकरेंसी पर प्रस्तावित बिल के पेश किए जाने के अलावा सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए आवश्यक संसदीय कार्रवाई सरकार के एजेंडा पर है। कृषि कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष के बीच गरमागरम बहस होने की उम्मीद है। कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की प्रक्रिया सरकार को भी यह मौका देगी कि वह अपना पक्ष देश के सामने रखे।

इसके अलावा सरकार द्वारा इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2021 पेश किए जाने की उम्मीद है। जानकारों के अनुसार यह बिल पॉवर सेक्टर में अभी तक किया गया सबसे बड़ा सुधार होगा। यह बिल में ऊर्जा वितरण में सुधार के अलावा निजी कंपनियों और सरकारी कंपनियों के बीच न केवल कम्पटीशन को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि बिजली के आम ग्राहकों को यह सुविधा भी देगा कि वे जिस कंपनी से चाहें उससे बिजली खरीद सकेंगे।

कोरोना वैक्सीनेशन की सफलता

इसके अलावा सत्र में सरकार कोरोना महामारी से लड़ने में अपनी सफलता को पेश करने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा है। ऐसे में सौ करोड़ से अधिक टीके के डोज की उपलब्धि को सरकार संसद में पेश करना चाहेगी, क्योंकि संसद में होने वाली बहस के दौरान दिया गया भाषण एक तरह से देश के साथ सीधे संवाद का मौका देता है।

संसदीय कार्रवाई के दौरान दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पहले भी यह साबित करते रहे हैं कि पिछले कई वर्षों में वे सरकार की ओर से सबसे प्रभावी वक्ता साबित हुए हैं और वे संसदीय मंच को इस बार भी देश से सीधे संवाद के लिए इस्तेमाल करेंगे। उनके समर्थक भी यह चाहेंगे कि वे कृषि कानूनों को रद्द किए जाने के फैसले और टीकाकरण तथा महामारी से लड़ने की सरकार की उपलब्धि पर न केवल अपना पक्ष रखें, बल्कि इस प्रक्रिया में विपक्ष की ऐसी-तैसी कर दें।

विपक्ष से क्या रखें उम्मीद?

विपक्ष से इस सत्र में क्या उम्मीद है? विपक्ष से विरोध की उम्मीद है। विपक्षी दलों में से एक भारतीय किसान यूनियन ने संसद की ओर ट्रैक्टर मार्च का ऐलान पहले ही कर रखा है। इसके अलावा शीतकालीन सत्र के आरंभ से पहले सरकार की विपक्षी दलों के साथ प्रस्तावित बैठक में प्रधानमंत्री मोदी चाहें जो कहें या विपक्ष चाहे जो माने, सत्र के दौरान विपक्ष विरोध ही करेगा और चाहेगा कि सामूहिक प्रयास करके किसी न किसी बहाने संसद की कार्यवाही रोकी जाए। ऐसा बढ़ती महँगाई को आगे रख कर किया जाए, पेगासस के मामले में सर्वोंच्च न्यायालय के फैसले को लेकर किया जाए या फिर कृषि कानूनों को रद्द किए जाने को लेकर, विपक्ष का प्रयास रहेगा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर संसद का यह सत्र भी चलने न दे। लखीमपुर खीरी में जो कुछ हुआ उसे लेकर गृह राज्य मंत्री के इस्तीफे की माँग कर विपक्ष शीतकालीन सत्र को न चलने देने की पूरी कोशिश करेगा।

बीएसएफ और सहकारिता

सामूहिक प्रयासों के अलावा तृणमूल कॉन्ग्रेस केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ को दिए गए नए अधिकारों को लेकर हंगामा कर सकती है। इसके अतिरिक्त पार्टी द्वारा त्रिपुरा की घटनाओं को आगे रखकर भी संसद में भरपूर विरोध करने के आसार हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद जो कुछ हुआ उसे पीछे फेंक कर पार्टी देश को बताना चाहेगी कि भाजपा की राज्य सरकार ने त्रिपुरा में लोकतंत्र की हत्या कर दी। महाविकास अगाड़ी में शामिल दल केंद्र सरकार द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय का विरोध करते हुए बरामद हो सकते हैं। शरद पवार की पार्टी यह जरूर बताना चाहेगी कि कैसे ऐसा मंत्रालय गठित करने का अधिकार केवल राज्य सरकारों का है और केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती। ऐसा करते हुए वे महाराष्ट्र से संबंधित बाकी मुद्दों को पीछे फेंकने की कोशिश करेंगे क्योंकि उनके पूर्व मंत्रियों और पुलिस अफसरों की भूमिका पर चर्चा होने का भय रहेगा।

राहुल गाँधी का ‘राजनीतिक दर्शन’

जहाँ तक सांसदों की बात है, लोग देखना चाहेंगे कि विदेश में लंबी छुट्टियाँ बिताने के बाद लौटे फ्रेश राहुल गाँधी संसद में कौन सा नया राजनीतिक दर्शन प्रस्तुत करते हैं? डॉक्टर शशि थरूर से आशा रहेगी कि वे अंग्रेजी के कुछ ऐसे शब्द और मुहावरे प्रस्तुत करें जो पहले न सुने गए हों। डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी से आशा रहेगी कि वे ममता बनर्जी को वर्तमान भारतीय राजनीति का सर्वश्रेष्ठ लीडर बताएँ और साथ ही उन्हें सबसे ईमानदार, लोकतंत्र की रक्षा में सदा तत्पर और जनता की समझ रखने वाली सर्वश्रेष्ठ नेत्री बताएँगे। इसके एवज़ में हम डेरेक ओ’ ब्रायन द्वारा डॉक्टर स्वामी को धन्यवाद देते हुए देख सकते हैं। कई लोगों को रामदास अठावले से उनकी नई कविता प्रस्तुत करने की उम्मीद रहेगी। हो सकता है कोई भाजपा सांसद इलाहबाद उच्च न्यायलय द्वारा समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र सरकार को दी गई सलाह की चर्चा करते हुए सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व को बोको हराम और ISIS जैसा बताने की चर्चा भी करे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यदि संसद को चलने दिया गया तो हम बढ़िया शीतकालीन सत्र देख सकते हैं।

‘श्रीकृष्ण मंदिर पर बने ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने पर लगे रोक, मंदिर के चिह्नों को मिटा रहे मुस्लिम’: DM को हिंदू पक्ष ने लिखी चिट्ठी

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने विवादित शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए इस पर रोक लगाने की माँग की गई है। हिंदुओं का कहना है कि ईदगाह में पहले कभी नमाज नहीं पढ़ी गई, लेकिन पिछले कुछ समय से इस विवादित मस्जिद में पाँचों वक्त की नमाज पढ़ी जाने लगी है। इस संबंध में श्रीकृष्ण मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी के नाम एक प्रार्थना पत्र एडीएम को सौंपा है।

एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद भगवान श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह पर बनी हुई है। इसकी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, जो न्यायालय में है। उन्होंने कहा कि विवाद के बावजूद पिछले कुछ दिनों से ईदगाह मस्जिद में पाँच वक्त नमाज पढ़ी जाने लगी है। इसके पहले इस मस्जिद में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने तर्क दिया कि इस हरकत से सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने का खतरा बन गया है।

महेंद्र प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र में तर्क दिया कि ईदगाह मस्जिद भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर एक हिस्से को तोड़कर बनाया गया है। क्रूर मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। उन्होंने कहा कि मस्जिद के दीवारों पर आज भी मंदिर के अवशेष के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इसके दीवारों पर शंख, चक्र आदि स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मुस्लिम पक्ष जान-बूझकर इन चिह्नों को मिटाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए ईदगाह में नमाज पढ़ने से रोकना बहुत जरूरी है।

वहीं, अखिल भारत हिंदू महासभा ने 6 दिसंबर को ईदगाह पर ठाकुर जी का अभिषेक करने का निर्णय लिया गया। महासभा ने एक स्वर में कहा कि ईदगाह पर ठाकुर जी का अभिषेक बिना किसी तोड़फोड़ के शांति से संपन्न किया जाएगा।

इधर श्रीकृष्ण विराजमान प्रकरण मेें बुधवार (24 नवंबर) को भी जिला जज की अदालत में मुस्लिम पक्ष ने दावे की कमियाँ गिनाईं। अदालत ने बहस पूरी होने के लिए दो दिसंबर की तारीख नियत की है। उधर, जिला जज ने अभी तक इस संबंध में दायर सभी दावों की सूची माँग ली है। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा पेश किए गए श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन के दावे की स्वीकारोक्ति संबंधी न्यायिक प्रक्रिया बुधवार को जारी रही।

सुब्रमण्यम स्वामी के TMC में जाने की अटकलों से BJP समर्थक खुश, वाजपेयी सरकार गिराने से लेकर भिंडरावाले की तारीफ तक का हो रहा जिक्र

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के टीएमसी में शामिल होने की अटकलों के बीच भाजपा समर्थक फिर से एकजुट हो गए हैं। दरअसल, बीते कई महीनों से केंद्र सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे स्वामी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में 6 महीने पहले हुई भीषण हिंसा को दरकिनार करते हुए ममता की तारीफ में कसीदे पढ़े। उन्होंने अपने प्रशंसकों के एक ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसमें प्रशंसकों ने ममता बनर्जी के साथ हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामले को उठाने के लिए उनकी तारीफ की थी। स्वामी ने ऐलान किया कि वो पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के तथ्यों की जाँच करने को लेकर अधिकारियों से मिलेंगे। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद राज्य में हुई हिंसा में कई बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या और बलात्कार किए गए थे।

ममता से मुलाकात पर स्वामी की मंशा पर सवाल उठाए जा रहे थे। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया, “दिसंबर के मध्य में मैं वीएचएस टीम के साथ राज्य के कुछ हिस्सों में हाल के दिनों में उपजे कुछ हालातों का आकलन करने के लिए जाऊँगा। मैं सही तथ्यों की जाँच के लिए अधिकारियों से भी बात करूँगा। मुझे याद कि तीन वर्ष पहले जब मैंने सीएम ममता से तारकेश्वर मंदिर को मुक्त कराने के लिए बात की थी तो उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।”

सुब्रमण्यम स्वामी के फैंस का आरोप था कि स्वामी के ममता से मुलाकात के बाद बीजेपी वालों को बरनोल की जरूरत पड़ने वाली है, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली। भाजपा कार्यकर्ता तो स्वामी के टीएमसी में शामिल होने की अटकलों से खुश हैं। कॉलमनिस्ट अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के समर्थकों का मूड जानने के लिए ट्विटर पर उनसे सवाल भी किया कि क्या वे स्वामी के टीएमसी ज्वॉइन करने की संभावना पर खुश हैं। उनके इस सवाल पर कई यूजर्स ने पॉजिटिव कमेंट किए।

एक सोशल मीडिया यूजर ने केवल दो शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दीष उसने लिखा, “गुड रिडांस”।

अन्य यूजर्स ने इसे मनोरंजक करार देते हुए कहा, “बुरा नहीं है। कुछ मनोरंजन ही होगा, दिल भी बहलेगा।”

वहीं एक अन्य यूजर ने अपनी खुशी व्यक्त करते एक बच्चे का जिफ शेयर किया।

ऐश दुबे नाम के नेटिज़न ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दरकिनार किए गए नेताओं की लिस्ट बनाते हुए कहा कि पीएम के पास लोगों की पहचान करने का 100% रिकॉर्ड है।

सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने इस बात की भी उम्मीद जताई कि ममता बनर्जी स्वामी को यह कहकर टीएमसी में शामिल कराएँगी कि राजनीतिक रूप से दोनों एक-दूसरे के लिए एकदम फिट होंगे।

स्वामी के टीएमसी में शामिल होने की अटकलों के बीच बीजेपी के सपोर्टर काफी खुश दिखे। वहीं, कुछ लोगों ने स्वामी को दल-बदलू करार दिया और कहा कि हकीकत में वो कभी भी वैचारिक रूप से पार्टी के प्रति समर्पित नहीं थे। उदाहरण के तौर पर एक नेटिजन ने खालिस्तान आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के साथ स्वामी की तस्वीर को ट्वीट किया। खास बात यह कि भाजपा नेता कई मौकों पर भिंडरावाले की प्रशंसा कर चुके हैं।

बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि सुब्रमण्यम स्वामी दलबदलू हैं, जो सरकार विशेष में विचारधारा की तुलना में पद पाने की अधिक परवाह करते हैं। इतिहास में ऐसे कई मौके सामने आ चुके हैं, जब स्वामी के इरादों पर सवाल उठे थे। स्वामी ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने अटल बिहारी की सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं, हिंदू आतंकवाद के सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए वह आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की भी माँग कर चुके हैं। ये स्वामी ही थे, जिन्होंने ने केवल भिंडरावाले की तारीफ की थी, बल्कि राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया और वाजपेयी के खिलाफ निंदनीय आरोप लगाए थे। कई बार तो वे चीन का भी बचाव करते दिखे और उन नेताओं का बचाव करने की कोशिश की, जो कि हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे थे।

हालाँकि, भाजपा नेता द्वारा ममनता बनर्जी की तारीफ करने पर आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पहले भी वो ऐसा कर चुके हैं। पिछले साल 2020 में स्वामी ने उनकी राजनीति की आलोचना करने वाले एक ट्वीट का जवाब देते हुए कहा था, “मेरे अनुसार ममता बनर्जी एक पक्की हिंदू और दुर्गाभक्त हैं। वह हर मामले पर कार्रवाई करेंगी। उनकी राजनीति अलग है। हम मैदान में लड़ेंगे।”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, टीएमसी में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर स्वामी ने सधे अंदाज में रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही उनके (ममता) साथ था। मुझे पार्टी में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है।”

NCPCR का CM योगी को पत्र, कहा- हाई कोर्ट के ‘ओरल सेक्स’ वाले फैसले पर करें अपील: बच्चे के मुँह में लिंग डालने को नहीं माना था ‘गंभीर’

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को पत्र लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले के खिलाफ ‘तत्काल अपील’ दायर करने के लिए कहा, जिसमें एक 10 वर्षीय नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी की सजा को 10 साल से घटा कर 7 साल कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 साल के नाबालिग लड़के के साथ ओरल सेक्स करने के दोषी POCSO अपराधी की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि लिंग को मुँह में डालना ‘गंभीर यौन हमला’ या ‘एग्रेटेड यौन हमले’ की श्रेणी में नहीं आता है बल्कि यह पेनेट्रेटिव यौन हमले की श्रेणी में आता है जो POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है।

बता दें कि NCPCR को किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 109 और बच्चों को बाल अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) कानून 2012 की धारा 44 के तहत कानूनों के कार्यान्वयन की निगरानी का अधिकार है। आयोग ने एक पत्र में कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सोनू कुशवाहा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में तत्काल अपील किए जाने की आवश्यकता है।

साभार-NCPCR

पत्र के अनुसार आयोग को लगता है कि इस मामले में सजा कम करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा किए गए कमेंट्स पॉक्सो कानून की भावना के अनुरूप प्रतीत नहीं होते हैं। वहीं आयोग ने मुख्य सचिव से नाबालिग का ब्योरा देने का भी आग्रह किया है ताकि उसे कानूनी सहायता जैसी मदद मुहैया कराई जा सके।

पत्र में आगे कहा गया है कि मामले में दोषी की सजा को कम करना इस मामले में पीड़ित को दिए गए न्याय के प्रतिकूल है और इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, आयोग को लगता है कि मामले में इसके खिलाफ तत्काल अपील दायर करने का निर्णय राज्य द्वारा लिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि बच्चे के साथ ओरल सेक्स के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुँह में लिंग डालने को ‘गंभीर यौन हमला’ मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने इसे POCSO एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय माना। कहा कि यह हरकत एग्रेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट या गंभीर यौन हमला नहीं है। लिहाजा ऐसे मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत सजा नहीं सुनाई जा सकती।

हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषी की सजा घटाकर 10 से 7 साल कर दी। साथ ही उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। सोनू कुशवाहा ने सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 नवंबर, 2021 को दिए निर्णय में स्पष्ट किया कि एक बच्चे के मुँह में लिंग डालना ‘पेनेट्रेटिव यौन हमले’ की श्रेणी में आता है, जो यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है और अधिनियम की धारा 6 के तहत नहीं। इसलिए, न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा की पीठ ने निचली अदालत द्वारा अपीलकर्ता सोनू कुशवाहा को दी गई सजा को 10 साल से घटाकर 7 साल कर दिया।

बता दें कि सोनू कुशवाहा ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो अधिनियम, झाँसी द्वारा पारित निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी, जिसके तहत कुशवाहा को दोषी ठहराया गया था।

दरअसल, अपीलकर्ता के खिलाफ मामला यह था कि वह शिकायतकर्ता के घर आया और उसके 10 साल के बेटे को साथ ले गया। उसे ₹20 देते हुए दिए अपना लिंग मुँह में लेने को कहा था। बच्चे से यह पूछने पर कि उसे यह पैसे कहाँ से मिले, उसने पूरी कहानी बताई और कहा कि सोनू कुशवाहा ने उसे धमकी दी थी कि वह इसे किसी को न बताए। रिपोर्ट के अनुसार विशेष सत्र न्यायालय ने सोनू कुशवाहा को आईपीसी की धारा 377 और 506 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था।

बंद केबिन में हिंदू युवती के साथ कॉफी पी रहा था मोहम्मद मदनी, युवती के मौत के बाद हुआ फरार: पिता का आरोप- महेश नाम बताकर किया था दोस्ती

गुजरात के सूरत शहर के वेशु क्षेत्र के कॉफी हाऊस में 22 साल की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस मामले में छात्रा के परिजनों ने मोहम्मद मदनी नाम के शख्स पर जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। मोहम्मद मदनी घटना के बाद से फरार है। पीड़ित परिवार के आग्रह के बाद इस मामले की जाँच क्राइम ब्रान्च को सौंपी गई है। इस मामले में पुलिस ने एक्सिडेंटल मृत्यु का मामला दर्ज किया है। लड़की के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है। यह घटना 22 नवम्बर 2021 (सोमवार) की है।

मृतका का नाम मधुस्मिता था। वह मूल रूप से ओडिशा की रहने वाले थी। मधुस्मिता अपने माता-पिता के साथ सूरत के डिंडोली स्थित रुक्मिणी सोसाइटी में रहती थी। लड़की की माँ अध्यापिका और पिता रिटायर्ड कर्मचारी हैं। मृत छात्रा सूरत के महावीर कॉलेज से बीएड कर रही थी। सोमवार को वह कॉलेज के पास स्थित कॉफी कैसल नाम के एक कॉफी हाऊस में एक लड़के के साथ गई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, युवक ने कैफ़े में अपना नाम मोहम्मद मदनी लिखवाया है। कैफे के कर्मचारी ने कुछ देर बाद जाकर चेक किया तो दोनों की हालत ठीक नहीं थी।

जानकारी के मुताबिक, मधुस्मिता और युवक बंद केबिन में कॉफी पी रहे थे। लगभग दो घंटे बीतने के बाद मैनेजर ने दरवाजा खुलवाया। उसके बाद दोनों को बेहोश पाया गया। वहाँ से दोनों को अस्पताल ले गया। अस्पताल में इलाज के दौरान मधुस्मिता की मौत हो गई। छात्रा की मौत की बात सुनकर युवक अस्पताल से भाग गया। तब से उसका फोन भी बंद आ रहा है। खटोदरा पुलिस ने मौके पर पहुँच कर केस दर्ज कर के आवश्यक कार्रवाई की।

मृतका के पिता का कहना है कि उनकी बेटी पढ़ने में बहुत तेज थी। वो आत्महत्या नहीं कर सकती। उसके साथ वाले युवक को गिरफ्तार किया जाए। इसी के साथ मृतका के ममेरे भाई परीक्षित ने बताया कि मधुस्मिता कॉलेज से घर जाने के लिए निकली थी। इस बीच उसका फोन लगभग 3 घंटे बंद रहा। उसके साथ गए युवक के फरार होने के चलते उस पर सभी को शक है। इसी के साथ मृतका के परिजनों ने शव भी लेने से मना कर दिया। जब पुलिस कमिश्नर ने मामले की जाँच क्राइम ब्रान्च से करवाने का भरोसा दिया, तब परिजनों ने मधुस्मिता का शव लिया।

छात्रा के पिता का आरोप है कि युवक ने मदनी ने अपना नाम महेश बताकर उनकी बेटी से दोस्ती की थी। छात्रा के परिजनों को 3 साल पहले जब इस दोस्ती के बारे में पता चला था, तब उन्होंने मदनी को डाँटा भी था और इस बारे में कॉलेज प्रशासन को सूचित भी किया था।

मृतका का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कहना है कि जहर या अन्य चीज खाने से मौत की जाँच के लिए नमूने फारेंसिक लैब में भेजे गए हैं। साथ ही इसकी भी जाँच करवाई जा रही है कि लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे या नहीं। लड़की के शरीर पर जोर-जबरदस्ती के कोई निशान नहीं पाए गए हैं। पुलिस ने मृतका के साथियों से पूछताछ शुरू कर दी है। मोहम्मद मदनी मधुस्मिता का सहपाठी बताया जा रहा है। पुलिस ने कैफे की CCTV फुटेज भी निकलवा ली है।