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वामपंथी बाप ने छीना, वामपंथी सरकार में फरियाद रही अनसुनी, फिर भी लड़ती रही केरल की अनुपमा: 13 महीने बाद मिला बच्चा

केरल की अनुपमा एस चंद्रन को आखिरकार वो बच्चा मिल ही गया जिसे उसने जन्म दिया था। 19 अक्टूबर 2020 को जन्म लेने वाले इस बच्चे की अनुपमा किलकारी भी नहीं सुन पाई थी, क्योंकि उसके वामपंथी पिता जयचंद्रन को उसका अजीत के साथ रिश्ता पसंद नहीं था। जयचंद्रन ने जन्म के बाद इस बच्चे को अनुपमा से छीन लिया था।

डीएनए टेस्ट में यह साबित होने के बाद कि बच्चा अनुपमा और अजीत का ही है, एक फैमिली कोर्ट ने बुधवार (24 नवंबर 2021) को उसे अनुपमा को सौंपने का निर्देश दिया। इस बच्चे को हासिल करने के लिए उसे लंबा संघर्ष करना पड़ा। अनुपमा के पिता जयचंद्रन सीपीआई (एम) के पेरूकाडा स्थानीय कमेटी का सदस्य हैं। तिरुवनंतपुरम सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन के जनरल सेक्रेट्री भी। लिहाजा वामपंथी शासन वाले केरल के शासन-प्रशासन ने अनुपमा-अजीत की फरियाद नहीं सुनी। लेफ्ट पार्टी के नेता यहाँ तक कि मुख्यमंत्री एम विजयन ने भी संज्ञान में होने के बावजूद मामले में हस्तक्षेप नहीं किया।

इसके बावजूद अनुपमा नहीं टूटी। हर वो दरवाजा खटखटाया जहाँ से उसे अपना बच्चा वापस पाने में मदद मिल सकती थी। बुधवार को जब चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने फैमिली कोर्ट को बताया कि डीएनए टेस्ट से स्पष्ट हो चुका है कि अनुपमा और अजीत ही बच्चे ऐदान अनु अजीत के जैविक माता-पिता हैं, वह भावुक हो गई।

क्या है मामला?

अनुपमा और दलित समुदाय से आने वाले अजीत एक-दूसरे से प्यार करते थे। पिछले साल अनुपमा प्रेग्नेंट हो गई, जिसकी जानकारी उसके परिवार को नहीं थी। वह जानती थी कि घर वाले यह रिश्ता नहीं कबूल करेंगे। इस बीच एक दिन अजीत हिम्मत कर अनुपमा को अपने साथ ले गया। बाद में अनुपमा के घरवालों ने बहन की शादी, ‘घर की इज्जत’ के नाम पर उसे वापस बुलाया और गर्भपात की कोशिशों में जुट गए।

लेकिन अनुपमा के कोरोना पॉजिटिव होने के कारण ऐसा हो नहीं पाया। बच्चे को जन्म देने के तीन बाद घरवाले उसे बरगलाकर अस्पताल से ले गए। बीच रास्ते में बच्चा छीन कर कहा कि बहन की शादी के बाद वह उसे लौटा दिया जाएगा। जब बच्चा वापस नहीं मिला तो अनुपमा मार्च 2021 में किसी तरह घर से भागी और उसकी तलाश में जुटी। पता चला कि जयचंद्रन ने बच्चे को अनाथ बताकर ‘अम्मा थोट्टिल’ नामक संस्था को सौंप दिया था। प्रशासन से मदद नहीं मिलने पर अनुपमा ने हाई कोर्ट में याचिका दी। बाद में केरल बाल कल्याण परिषद ने बच्चे का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट का निर्देश दिया था।

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की PM मोदी ने रखी नींव, कहा- बेहतर कनेक्टिविटी के साथ दिल्ली-NCR और यूपी के करोड़ों लोगों को होगा फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानि 25 नवंबर 2021 को उत्तर प्रदेश को एक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात दी। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के जेवर में भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट की आधारशिला रखी। इस अवसर पर PM मोदी के साथ CM योगी और यूपी सरकार के दूसरे मंत्री भी मौजूद रहे।

इस अवसर पीएम मोदी ने विशाल जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा, “आज हम 85 फीसदी विमानों को एमआरओ सेवा के लिए विदेश भेजते हैं और इस काम के पीछे हर साल 15 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। 30 हजार करोड़ में ये प्रोजेक्ट बनने वाला है। हजारों करोड़ रुपए खर्च होते हैं, जिसका ज्यादातर हिस्सा दूसरे देशों को जाता है। अब ये एयरपोर्ट इस स्थिति को भी बदलने में मदद करेगा। इसके माध्यम से पहली बार देश में एंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की कल्पना भी साकार हो रही है। इससे इस पूरे क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी। एक नई उड़ान मिलेगी।”

बता दें कि इस एयरपोर्ट के शुरू हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश पाँच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

गौरतलब है कि 2012 से पहले प्रदेश में लखनऊ और वाराणसी दो ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट थे। पिछले महीने ही PM मोदी ने कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था। वहीं राम नगरी अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम भी तेजी से चल रहा है। जिसे अगले साल की शुरुआत तक लोगों के लिए खोल दिए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी के मिशन गति शक्ति को धरातल पर उतारने के लिए योगी सरकार संकल्पबद्ध है। यही वजह है कि सड़क से लेकर हवाई यात्रा तक का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में होने वाले एयरपोर्ट के शिलान्यास का पहला चरण 2023-24 में पूरा होगा। इस अवसर पर CM योगी ने भी जनता को सम्बोधित किया।

शिलान्यास के पूरे कार्यक्रम को आप यहाँ देख सकते हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने अपने संबोधन में कहा कि यहाँ के युवाओं की आँखों में उनका सपना पूरा होने की चमक दिखाई दे रही है। उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी ने यहाँ के उत्‍थान का जो संकल्‍प लिया था वो आज पूरा हो रहा है। जो जिम्‍मेदारी यूपी के सीएम और केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को दी गई थी वो भी आज पूरी होने जा रही है।

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सीईओ किरण जैन ने कहा है कि हवाई अड्डे का डिजाइन यात्रियों की सुविधा के आधार पर तैयार किया गया है। हवाई अड्डे पर प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जाएगा। सितंबर / अक्टूबर 2024 तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य है।

बता दें कि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में आठ एयरपोर्ट्स संचालित हो रहे हैं, जबकि 13 एयरपोर्ट्स और सात एयर स्ट्रिप्स निर्माणाधीन हैं। जिन एयरपोर्ट्स से कमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भर रही हैं उनमें लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर, गोरखपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद का हिंडन शामिल है।

बताया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट की परियोजना का पहला चरण वर्ष 2024 तक 10,050 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित लागत से पूरा किया जाना है। 1300 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर फैली यह परियोजना प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को अपनी सेवा देगी। पीएमओ ने कहा कि पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का काम पूरा कर लिया गया है।

साभार-इंडिया टीवी

जेवर एयरपोर्ट का टर्मिनल व परिसर को भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत होकर डिजाइन किया गया है। इसमें वाराणसी व हरिद्वार में कलकल करती गंगा किनारे के घाट का अनुभव होगा। नोडल अफसर, नियाल शैलेंद्र भाटिया ने मीडिया को बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल प्रांगण को वाराणसी के गंगा घाट की तर्ज पर डिजायन किया गया है। जबकि, टर्मिनल बिल्डिंग की छत को गंगा में उठती लहरों की तर्ज पर डिजायन किया गया है। एयरपोर्ट को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए डिजाइन किया गया है। सफेद रंग की छत से सूर्य की रोशनी दिन भर टर्मिनल बिल्डिंग को रोशन रखेगी। मिनरल बिल्डिंग का मध्य भाग पुरानी हवेलियों के आँगन की झलक देगा।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा में बन रहा एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा और इससे इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दबाव कम होगा। रणनीतिक दृष्टि से नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का अलग महत्व होगा और इससे दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के अलावा अलीगढ़, आगरा, फरीदाबाद और पड़ोसी क्षेत्र के लोगों की जरूरतें पूरी होंगी।

सुब्रमण्यम स्वामी के लिए ममता बनर्जी हुईं ‘हिंदूवादी नेता’, बंगाल में हिंदुओं के साथ 6 महीने पहले हुई हिंसा का अब करेंगे ‘फैक्टचेक’

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मुलाकात के बाद उनकी प्रशंसा कर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर कहा कि भी ममता बनर्जी में बड़े नेताओं वाले गुण हैं। उन्होंने ममता बनर्जी की तुलना जयप्रकाश नारायण (जेपी), मोरारजी देसाई, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव से की।

स्वामी ने पश्चिम बंगाल में “हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार” के “मुद्दे को उठाने” के लिए अपनी प्रशंसा करने वाले ट्वीट्स को रीट्वीट किया। इसमें कहा गया है कि इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की ओर से कुछ नहीं किया गया, लेकिन ममता बनर्जी के साथ अत्याचार के मुद्दों को उठाने के लिए स्वामी बंगाल में थे। ध्यान देने वाली बात है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में आतंक का शासन शुरू हो गया था, जहाँ टीएमसी के गुंडों और मुस्लिम भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या और महिलाओं के साथ बलात्कार किया था।

एक तरफ स्वामी ममता बनर्जी की प्रशंसा कर रहे थे और प्रशंसकों द्वारा अपनी प्रशंसा सुनकर अघा रहे थे, वहीं उनके कुछ ट्वीट एक अलग ही कहानी कह रहे थे। स्वामी ने ट्विटर पर घोषणा की कि वह बंगाल में पुलिस अधिकारियों से मिलेंगे और चुनाव के बाद शुरू हुई हिंसा से संबंधित “तथ्यों की जाँच”, हिंसा के 6 महीना बीत जाने के बाद अब करेंगे। यह ट्वीट 25 नवंबर को किया गया था, जबकि उन्होंने एक दिन पहले ममता बनर्जी के साथ बंगाल में ‘हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार’ का मुद्दा उठाने के लिए खुद की प्रशंसा करने वाले ट्वीट को रीट्वीट किया था।

इसको लेकर जब स्वामी के मंशा पर सवाल उठाए गए, तब उन्होंने ट्वीट किया, “दिसंबर के मध्य में मैं वीएचपी की टीम के साथ राज्य के कुछ हिस्सों में उत्पन्न हुई स्थितियों का आकलन करने के लिए बंगाल जाऊँगा। तथ्यों की जाँच करने के लिए मैं अधिकारियों से बात करूँगा। मुझे याद है कि तीन साल पहले जब मैं तारकेश्वर मंदिर को मुक्त कराने के लिए कहा था, तब उन्होंने (ममता बनर्जी ने) अनुकूल प्रतिक्रिया दी थी।”

इन ट्वीट्स के दो हिस्से हैं, जिन्हें स्वामी ने चालाकी से लिखा है। स्वामी ने पहले कहा कि “तथ्यों की जाँचके लिए” वे अधिकारियों से बात करेंगे। तथ्य जाँच का यही मतलब है कि स्वामी को संदेह है कि चुनाव के बाद वास्तव में हिंसा हुई थी। ममता को बचाने के लिए “तथ्यों की जाँच” एक बहाना है। ट्वीट का दूसरा हिस्सा और भी दिलचस्प था। चुनाव के बाद की हिंसा के मामले में ममता को क्लीन चिट देने के प्रयास के तहत स्वामी ने यह कहकर कि उन्होंने तारकेश्वर मंदिर को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का समर्थन किया था, ममता को एक “अच्छे हिंदू नेता” के रूप में चित्रित करना शुरू कर दिया।

ममता बनर्जी से मिलने और उनकी प्रशंसा करने के बाद कई लोगों ने ‘विराट हिंदू’ पसंद करने वाले भाजपा नेता स्वामी से पूछा कि जब ममता बनर्जी के शासन में हिंदुओं की बेरहमी से हत्या की गई, फिर भी वे उनसे क्यों मिले। इन सवालों के जवाब में स्वामी ने लोगों पर हमला करते हुए कहा किया कि उन्हें यह सवाल केंद्र सरकार से पूछना चाहिए, उनसे नहीं। जब कहा गया कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है तो स्वामी ने कश्मीर में सुरक्षाबलों का उदाहरण देते हुए लताड़ लगाई।

आलोचना से खुद को बचाने के प्रयास में स्वामी ने बंगाल और कश्मीर की स्थितियों की तुलना करके अपने पाठकों को गुमराह किया। कश्मीर एक केंद्रशासित प्रदेश है और AFSPA के अंतर्गत आता है। एक “अशांत क्षेत्र” होने के नाते सशस्त्र बलों और यहाँ तक कि अर्धसैनिक बलों को भी राष्ट्र की शांति और संप्रभुता बनाए रखने के लिए वहाँ होना आवश्यक है। बंगाल हिंसा पर चुप्पी के लिए केंद्र सरकार और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाना जायज है, लेकिन यहाँ स्वामी ममता बनर्जी पर से सारा दोष हटाने का प्रयास करते दिख रहे हैं।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मई में ही गृह मंत्रालय ने ममता बनर्जी सरकार से चुनाव बाद की हिंसा और उसे नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर रिपोर्ट माँगा था। कई बार रिमांइडर भेजने के बाद भी राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजने से इनकार कर दिया था। अगस्त में केंद्र सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को बताया था कि एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ ​​चुनाव बाद की हिंसा की जाँच करने और राज्य पुलिस की सहायता करने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, अदालत ने यह कहते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया था कि राज्य पुलिस से लेकर मामलों को केंद्रीय एजेंसियों को स्थानांतरित करने के लिए यह समय उपयुक्त समय नहीं है। इससे पहले अदालत ने एनएचआरसी को एक समिति गठित करने और हिंसा के मामलों की जाँच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। इस रिपोर्ट में राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की क्रूर हिंसा को उजागर किया था। ममता बनर्जी ने एनएचआरसी की रिपोर्ट को “पक्षपातपूर्ण” और एक निर्वाचित राज्य सरकार पर हमला बताया था।

ऐसा लगता है कि स्वामी ने ममता बनर्जी को क्लीन चिट देने के लिए इन घटनाओं को भूला दिया है। यह पहली बार नहीं है जब स्वामी ने ममता की प्रशंसा की है और उनके आतंक के शासन को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। साल 2020 में स्वामी ने ममता की राजनीति की आलोचना करने वाले एक ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “मेरे अनुसार ममता बनर्जी एक पक्की हिंदू और दुर्गाभक्त हैं। वह हर एक मामले पर कार्रवाई करेंगी। उनकी राजनीति अलग है।” इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, स्वामी के टीएमसी में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही उनके (ममता) साथ हूँ। मुझे पार्टी में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है।”

जिस फोन पर कसाब को पाकिस्तान से मिल रहे थे ऑर्डर, उसे परमबीर सिंह ने छिपा दिया था: 26/11 की बरसी से पहले रिटायर्ड ACP का बड़ा दावा

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को मुंबई कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद आज (नवंबर 25, 2021) उन्हें कांदीवली में क्राइम ब्रांच यूनिट 11 में देखा गया। 231 दिन तक मुंबई से गायब रहने वाले सिंह आज गोरेगाँव वसूली केस में चल रही जाँच में शामिल होने पहुँचे थे।

ये पहली बार नहीं है जब संकट आने पर सिंह को इस तरह छिपते देखा गया। 26/11 के वक्त भी उन पर आतंकियों का मुकाबला करने से इनकार करने का आरोप लगा था। अब 2008 में हुए उसी हमले को लेकर महाराष्ट्र के रिटायर्ड एसीपी शमशेर खान पठान ने भी सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा है कि 26/11 के बाद कसाब के पास से मिले फोन को परमबीर सिंह ने अपने पास रख लिया था, जिसे उन्होंने कभी जाँच अधिकारियों को नहीं दिया। इस फोन से पाकिस्तान और हिंदुस्तान के हैंडलर्स का पता चल सकता था। कथित तौर पर इसी फ़ोन पर कसाब को उसके आका पाकिस्तान से ऑर्डर दे रहे थे।

पठान ने बताया हमले वाले दिन वो पाईधूनी पुलिस स्टेशन में थे और उनके बैचमेट एनआर माली बतौर सीनियर इंस्पेक्टर डीबी मार्ग पुलिस थाने में कार्यरत थे। उन्होंने लिखा कि 26/11 के दिन अजमल आमिर कसाब को गिरगाँव चौपाटी इलाके में पकड़ा गया था। ऐसे में उन्होंने अपने साथी एनआर माली से फोन पर बात की। इस दौरान उन्हें पता चला कि कसाब के पास एक फोन मिला है, जो पहले कॉन्स्टेबल कांबले के पास था और बाद में उससे परमबीर सिंह ने ले लिया।

पूर्व एसीपी के मुताबिक, इस मामले में उनकी माली से बातचीत आगे भी होती रही। तभी उन्हें पता चला कि परमबीर सिंह ने मामले के जाँच अधिकारी को फोन नहीं दिया है। माली ने शमशेर को ये भी बताया था कि उन्होंने दक्षिण क्षेत्र के आयुक्त वेंकटेशम से मुलाकात की थी और उस फोन के बारे में बताया था। लेकिन बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब परमबीर के पास माली गए तो वे उन पर चिल्लाए और कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि शमशेर खान पठान से पहले परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ तत्कालीन पुलिस आयुक्त हसन गफूर ने भी आरोप मढ़े थे। उनका कहना था कि 26/11 आतंकवादी हमले के समय परमबीर सिंह सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आतंकवादियों से मुकाबला करने से इनकार कर दिया था। गफूर ने कहा था कि कानून-व्यवस्था के संयुक्त आयुक्त केएल प्रसाद, अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त देवेन भारती, दक्षिणी क्षेत्र के अतिरिक्त आयुक्त के वेंकटेशम और आतंकवाद-रोधी दस्ते के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे थे।

‘खालिस्तानी’ कमेंट पर कंगना रनौत को दिल्ली विधानसभा की समिति ने भेजा समन, 6 दिसम्बर को हाजिर होने का आदेश

केजरीवाल सरकार के विधायक राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने अभिनेत्री कंगना रनौत को समन भेजा है। कंगना को 6 दिसंबर, 2021 को दोपहर 12:00 बजे समिति ने पेश होने के लिए कहा है। मामला मोदी सरकार के कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद कंगना के किसान आंदोलन की तुलना खालिस्तानी आंदोलन से करने से जुड़ा। कंगना की टिप्पणी के बाद देश के अलग-अलग स्थानों पर उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई है। 

गौरतलब है कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने कंगना रनौत द्वारा इंस्टाग्राम पर सिख समुदाय के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में कंगना को सिख समुदाय पर सोशल मीडिया के जरिए गलत अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के बयान के अनुसार, “सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने के लिए जानबूझकर वह पोस्ट तैयार किया गया और आपराधिक मंशा से उसे सोशल मीडिया में फैलाया गया है।”

बता दें कि कंगना रनौत ने कृषि कानूनों के वापसी ऐलान के बाद अपने फेसबुक अकाउंट से एक विवादित पोस्ट में लिखा था, “खालिस्तानी आतंकवादी आज भले ही सरकार का हाथ मरोड़ रही हो, लेकिन उस महिला (इंदिरा गाँधी) को नहीं भूलना चाहिए, जिसने अपनी जूती के नीचे इन्हें कुचल दिया था, अपनी जान की कीमत पर उन्हें मच्छरों की तरह कुचल दिया, मगर देश के टुकड़े नहीं होने दिए, उनकी मृत्यु के दशक के बाद भी, आज भी उसके नाम से काँपते हैं ये, इनको वैसा ही गुरु चाहिए।”

वहीं राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा जारी बयान के अनुसार, रनौत के खिलाफ यह शिकायत मंदिर मार्ग थाने के साइबर ऑफिस में दर्ज कराई गई है। समिति का कहना है कि सोशल मीडिया पर हाल में किए गए अपने पोस्ट में कंगना रनौत ने ‘जानबूझकर’ किसानों के प्रदर्शन को ‘खालिस्तानी आंदोलन’ बताया है। बयान में कहा गया है कि अभिनेत्री ने सिख समुदाय के खिलाफ ‘आपत्तिजनक और अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल किया।

जानकारी के लिए बता दें कि ट्विटर अकाउंट सस्पेंड होने के बाद कंगना इंस्टाग्राम पर सक्रिय हैं और राष्ट्र और मानवता से जुड़े लगभग हर मुद्दे पर अपने विचार साझा करती रहती हैं। वहीं कंगना के हालिया टिप्पणियों को देखते हुए लगता है कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले से निराश हैं। कंगना ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा था, “दुखद, शर्मनाक और सरासर गलत… अगर संसद में बैठी सरकार के बजाय गलियों में बैठे लोग कानून बनाना शुरू कर दें तो यह भी एक जिहादी देश है… उन सभी को बधाई जो ऐसा चाहते हैं।”

‘हराम हैं शॉपिंग मॉल, क्योंकि औरतें जाती हैं ब्यूटी पॉर्लर, मर्दों के साथ घूमती हैं’: केरल के इस्लामी स्कॉलर का ‘ज्ञान’

केरल के इस्लामी स्कॉलर हुसैन सलाफ़ी ने मुस्लिमों के लिए शॉपिंग मॉल को हराम बताया है। हुसैन के मुताबिक अल्लाह को शॉपिंग मॉल पसंद नहीं है। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा है कि मॉल में मर्द और औरत एक साथ घूमते-टहलते हैं जो कि अल्लाह को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता। उन्होंने मुस्लिमों से मॉल का बहिष्कार करने की अपील की है।

जनम TV (Janam TV) की रिपोर्ट के अनुसार हुसैन सलाफी ने कहा है कि मॉल में औरतें ब्यूटी पार्लर में भी जाती हैं। वहाँ वो तरह-तरह के कपड़ों में आए अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों को देखती हैं। वे सब ‘शैतान के बच्चे’ हैं। मॉल में जाने वाले मुस्लिम पूरी कौम की इज्जत खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अल्लाह का सबसे पसंदीदा स्थान मस्जिद है।

सलाफी का कहना है कि मॉल में घूमने वाली औरतों की नजर दूसरे मर्दों पर पड़ती है। दूसरे मर्दों को देखने वाली औरतें इस्लाम की छवि धूमिल करती हैं। इस वजह से मुस्लिमों को मॉल से दूर रहना चाहिए।

इससे पहले एक अन्य इस्लामिक स्कॉलर सिराजुल इस्लाम ने इत्र (सेंट) का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को व्यभिचारी कहा था। उनके अनुसार परफ्यूम दूसरों को आकर्षित करने के लिए लगाया जाता है। हाल में केरल के मौलाना ईपी अबूबकर कासमी का बयान भी बहुत वायरल हुआ था। इसमें मौलाना ने कहा था कि जन्नत में ‘बड़े-बड़े स्तनों वाली महिलाएँ’ मिलती हैं। मौलाना के मुताबिक हूरों को पेशाब-शौच नहीं लगती। साथ ही कहा था कि जन्नत में अल्लाह ने शराब की एक नदी बना रखी है, जिसमें वहाँ रहने वालों को तैरने की पूरी अनुमति है। वहाँ पर शराब पीने पर कोई रोकटोक नहीं है।

पाकिस्तान के Zoo में ‘कुत्ते’ जैसा ‘शेर’ का हाल, एक भूख से तड़प-तड़प कर मर गया: Video देख भड़के नेटिजन्स

पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित चिड़ियाघर में जानवरों की भूख से तड़प-तड़प कर मौत हो रही है। सोशल मीडिया पर एक शेर की वीडियो और तस्वीर भी सामने आई है, इसे देख सोशल मीडिया यूजर्स में काफी गुस्सा है। फोटो में नजर आने वाला शेर बेहद कमजोर दिख रहा है और जमीन पर बेजान पड़ा है। देख सकते हैंं कि उसके शरीर के बाल भी झड़ गए हैं और उसकी हड्डियाँ दिख रही है।

कराची मेट्रोपॉलिटियन कॉर्पोरेशन के प्रवक्ता ने शेर की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि शेर टीबी से पीड़ित था और पिछले 13 दिनों से बीमार था। प्रवक्ता ने कहा, “शेर का इलाज डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा था लेकिन वो ठीक नहीं हो पाया। बुधवार को सुबह 11 बजे उसकी मौत हो गई।” प्रवक्ता ने बताया कि शेर 14-15 साल का था और 2012 में अफ्रीका से कराची जू में लाया गया।

प्रवक्ता ने ये भी बताया कि शेर के शव की ऑटोप्सी हुई थी और पता चला कि उसे निमोनिया था और फेफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया था। कराची के प्रशासक बैरिस्टर मुर्तजा वहाब ने शेर की मौत पर रिपोर्ट माँगी है। घटना पर दुख व्यक्त करते हुए, वहाब ने बताया कि सफेद शेर एक दुर्लभ नस्ल था, और शेर की मौत का कारण सामने आने के बाद अगर कोई लापरवाही पाई जाती है तो चिड़ियाघर प्रबंधन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस फोटो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स में काफी गुस्सा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इमरान सरकार के पास इतने भी पैसे नहीं है कि वो चिड़ियाघर में रखे गए जानवरों का पेट भर सके। इसी लिस्ट में पाकिस्तानी हस्तियों के भी नाम है। जैसे एहसान खान, अरीबा हबीब, शनेरा अकरम और फातिमा भुट्टो- इन सब लोगों ने शेर की तस्वीर देख कर अपना गुस्सा जाहिर किया है। सोशल मीडिया का दावा है कि फंड न मिलने के कारण कॉन्ट्रैक्टर ने जानवरों को खाना देने से मना कर दिया था।

किसी ने इस फोटो को देख पूछा कि आखिर धरती पर हो क्या है तो किसी ने कहा कि ये सब कितना भयंकर है। एहसान खान ने लिखा, “हदीस कहता है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था ‘एक जानवर के साथ किया गया एक अच्छा काम एक इंसान के लिए किए गए अच्छे काम के समान है, जबकि एक जानवर के साथ क्रूरता का कार्य उतना ही बुरा है जितना कि एक इंसान के साथ किया गया’।”

फातिमा भुट्टो ने इसे बेहद क्रूर और अपमानजनक कहा है। उन्होंने लिखा कि ये लोग भी जीव हैं। वह पूछती हैं कि आखिर जानवरों को खाना देने का कॉन्ट्रैक्ट किसे दिया गया था। भुट्टो ने तो जू चिड़ियाघर के साथ अपने बुरे अनुभव भी बताए हैं। उन्होंने कहा कि कम बजट और कम समर्थन मिलने के कारण जू के ऐसे हाल हैं। ये सब बहुत क्रूर है।

इमाम जलालुद्दीन ने ‘मॉडल’ से कर ली निकाह, अब कहती है- पहले दाढ़ी कटवाओ, फिर मेरे पास आओ; पान मसाला खाकर मारती भी है

उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ में एक मस्जिद के इमाम ने अपनी बीवी पर दाढ़ी कटवाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इमाम के अनुसार उसकी पत्नी उसे मॉर्डन लड़कों की तरह रहने के लिए कहती है। वह खुद को मॉडल बताती है। पान मसाला खाने से मना करने पर मारपीट करती है। इमाम की शिकायत पर पुलिस जाँच कर रही है। इमाम का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मामला अलीगढ़ के अकराबाद थानाक्षेत्र का है। इमाम का नाम जलालुद्दीन है। वह मोहल्ला भूखा पिलखना मस्जिद में पेश इमाम है। पेश इमाम के मुताबिक उसका निकाह 1 साल पहले गाँव सत्तारपुर की वीणा के साथ हुआ था। निकाह के बाद से वह उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर रही है। वह खुद को मॉडल बताते हुए इमाम पर मॉर्डन लड़कों जैसे रहने का दबाव डालती है। बकौल इमाम, “मैं उसे मज़हब का वास्ता दे कर समझाने की कोशिश करता हूँ तो वह मुझे धमकाती है।”

इमाम जलालुद्दीन के अनुसार बीवी उससे अम्मी-अब्बू से अलग रहने को भी कहती है। वह घर का कोई काम नहीं करती। पान मसाला खाती है और मना करने पर गाली-गलौज कर मारपीट करती है। उनका कहना है कि बीवी 17 अक्टूबर 2021 को गहने और नकदी ले कर मायके चली गई। जब उसे लेने वे गए तो बीवी और उसके परिवार ने बदतमीजी की। थाना छर्रा में तीन तलाक और दहेज़ का झूठा केस करने का आरोप भी लगाया है। इमाम का कहना है कि इसके कारन उसका पूरा परिवार सदमे में है।

इमाम की शिकायत पर अलीगढ़ पुलिस ने संज्ञान लिया है। SP सिटी कुलदीप गुनावत ने मामले की जाँच कर कार्रवाई की बात कही है। थाना अकराबाद SHO को जाँच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अरुणाचल से आया, मध्य प्रदेश के एक गाँव में 22 को बना दिया ईसाई: सबकी करवाई गई ‘घर वापसी’, 2 गिरफ्तार-1 फरार

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के एक गाँव का वीडियो हाल में सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इस गाँव में जिन 22 लोगों को धर्मांतरित कर ईसाई बना दिया गया था, उनकी घर वापसी हो गई है। पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। एक अन्य फरार। फरार आरोपित मारसन लाय अरुणाचल प्रदेश का रहने वाला है।

धर्मान्तरण का वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में स्थानीय भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने कार्रवाई की माँग की थी। इस संबंध में खरगोन के एसपी को लिखा गया उनका पत्र आप नीचे पढ़ सकते हैं। खरगोन पुलिस ने 24 नवम्बर 2021 (बुधवार) को इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है।

खरगोन के सांसद पटेल ने ऑप इंडिया को बताया कि जनजातीय ग्रामीणों का धर्मांतरण करवाया गया था। उन्होंने DGP और SP से कार्रवाई की माँग की थी। इस मामले में अब तक धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

पुलिस को सांसद का पत्र

धर्मान्तरण की यह घटना 3 नवम्बर 2021 की बताई जा रही है। थाना ऊन पुलिस को रुखड़िया द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक उसके गाँव रसगाँव मालपुरा में ग्रामीण विजय बडोले, उसकी बुआ मंजुला बडोले के सहयोग से अरुणाचल प्रदेश से आए ईसाई मिशनरी के मारसन लाय ने लोगों का धर्मांतरण करवाया। वे बच्चों की फ्री पढाई आदि का लालच दे रहे थे। लोगों पर पानी छिड़ककर क्रॉस पहनाया।

खरगोन के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि दो आरोपितों विजय बडोले और उसकी बुआ मंजुला को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीसरे आरोपित मारसन लाय की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। वायरल हुए वीडियो की SP ने भी पुष्टि की है। उनके अनुसार इसमें एक व्यक्ति गाँव के 22 लोगों को बपतिस्मा कराते दिखा है। केरल में रह कर पढ़ने वाली उसी गाँव की एक महिला की भी बात उन्होंने बताई। मारसन लाय से वही जुड़ी हुई थी। लाय इससे पहले भी तीन बार इस गाँव में आ चुका था। वीडियो में मारसन लाय, ‘अरुणाचल के लोगों, रसगाँव के लिए प्रार्थना करो’ बोलता दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मारसन लाय द्वारा धर्मान्तरित किए गए सभी लोगों की फिर से हिन्दू धर्म में घर वापसी करवा दी गई है। बुधवार (24 नवम्बर 2021) को शिवसेना पदाधिकारियों ने पैर धुलवाकर इन लोगों को हिंदू धर्म में लौटाया।

‘मैं तब केवल 13 साल की थी… 150 ने किया रेप, 1 दिन में 10-11 लोग करते सेक्स’: ऐसे बचपन छीनता है ब्रिटेन का ‘ग्रूमिंग गैंग’

ब्रिटेन के हल शहर में ग्रूमिंग गैंग के कारण छोटी बच्चियों का जीवन खतरे में है। स्काई न्यूज से बात करते हुए एक पीड़िता ने इस बात का खुलासा किया। रिपोर्ट से पता चलता है कि बच्चों का यौन शोषण करने वाली गैंग बड़ी तादाद में मौजूद है, जो न केवल लड़कियों का खुद रेप करते हैं बल्कि उन्हें सेक्स के धंधे में धकेल देते हैं और अगर कोई इन चीजों का विरोध करता है तो उसे मारने और जलाने तक की धमकियाँ मिलती हैं।

रिपोर्ट में सारा नामक (बदला नाम) पीड़िता की आपबीती है। इसमें वह बताती है, “मुझे दो आदमियों ने पहले तैयार किया (खाना-पीना-कपड़ा दिया) लेकिन 2 माह बाद वो मुझे चूमने आए। मैंने उन्हें हटाया तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हारे लिए अब उस हर चीज की कीमत चुकाने का समय है जो हमने तुम्हें दी है। वह मेरे ऊपर आए और रेप किया। मैं तब सिर्फ 13 साल की ही थी। इसके बाद वो मुझे फ्लैट पर ले गए और मुझे किसी और से मिलवाया, उससे पैसे लिए। मुझे बाद में समझ आया कि मैं सेक्स व्यापार में बेची गई हूँ। उस फ्लैट ने मुझसे मेरा बचपन ले लिया।”

बकौल पीड़िता, “मुझे लगता है कि 3 साल के समय में मेरा 150 लोगों ने रेप किया होगा। कई बार 1 दिन में 10 और 11 लोग भी मेरा रेप करते थे।” सारा ने बातचीत में गैंग से जुड़े 11 लोगों की पहचान भी उजागर की है। इसमें उसके खरीददार, गैंग सदस्य उनके ग्राहक सब शामिल हैं।

वह कहती है, “मैं गोरी थी। मेरे बू*स भी नहीं थे। मेरा विकास भी नहीं हुआ था। मैं बस जवान दिखती थी और यही उन्हें पसंद था, जितनी जवान उतना अच्छा।” सारा के अनुसार, इस गैंग ने कई अन्य लड़कियों को भी शिकार बनाया था जिनमें से एक ने सारा को संपर्क भी किया था। वह कहती है कि एक बार उसने 8-9 साल की लड़की को फ्लैट पर बैठे देखा था जिसने प्राइमरी स्कूल की यूनिफॉर्म पहनी थी। वह अपनी बहन के साथ बैठी थी और बाद में उसकी आवाजें बेडरूम से आई थीं।

सारा की मानें तो एक बार उसे हथकड़ियाँ लगा दी गई थी और कई बार उसके साथ होने वाली घटना रिकॉर्ड की जाती थी और लिखा जाता था कि 13, 14, 15 साल की लड़की का रेप। वह बताती है, “ मैंने इन फिल्मों को देखा था। वो लोग मुझे दिखाते थे। एक में लिखा था, ‘अंग्रेजी लड़की की इच्छा के ख़िलाफ %$&*’… मैं सिर्फ इनके लिए फायदा का सौदा थी।”

पीड़िता को भेजे गए संदेश का स्क्रीनशॉट…..साभार: स्काई न्यूज

पीड़िता बताती है कि जब वो फ्लैट में आने से मना करती थी तो उसे लगातार जिंदा जलाकर मारने की धमकियाँ दी जाती थीं। उसने आरोप साबित करने के लिए 2018 के मैसेज दिखाए हैं। इसमें वह उसे ‘रं$*’ कह रहे हैं और लड़की को बता रहे हैं- वो नहीं आई इसलिए उन्हें पैसे नहीं मिले। कई लोग जिन्होंने उसके साथ सेक्स किया था वो उसे %&*# चाहते हैं। 

बता दें कि एक ओर जहाँ सारा जैसी पीड़ितों पर उनके आरोपितों के विरुद्ध सबूत तक हैं। वहीं हंबरसाइड पुलिस का कहना था कि उन्हें इतने सबूत नहीं मिले कि वो मामले को कोर्ट ले जाएँ। पुलिस के मुताबिक उन्होंने 34 संदिग्धों को पकड़ा था और 150 जगह छापे मारे थे। लेकिन उन्हें ऐसे प्रमाण नहीं मिले। मालूम हो कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत का खुलासा पहली बार नहीं हुआ इससे पहले एक खबर आई थी जिसमें बताया गया था कि 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिमों से समुदाय विशेष के लोगों ने रेप किया है।