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धर्मांतरण, रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों का पुनर्वास, CAA प्रोटेस्ट… सभी के लिए फेफड़ावाला ने की फंडिंग; भरूच मामले से भी जुड़ा है तार

गुजरात के भरूच जिले के कांकरिया गाँव में 15 नवंबर 2021 को 37 आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराने की खबर सामने आई थी। इस मामले में धर्म परिवर्तन के लिए पैसा, रोजगार, शादी समेत अन्य प्रलोभन देकर हिंदुओं को इस्लाम कबूल करवाने के आरोप में नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ऑपइंडिया ने जब इस मामले की पड़ताल की तो पाया इनमें से एक आरोपित यूके में रह रहा है। उसकी पहचान फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला के रूप में हुई है। इससे पहले इसका नाम उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा उजागर किए गए सामूहिक धर्म परिवर्तन रैकेट में भी सामने आया था।

कौन है फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला/अब्दुल

कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला, फेफड़ावाला अब्दुल और अब्दुल फेफड़ावाला बताया गया है। यह भरूच के नबीपुर का मूल निवासी है और पिछले कुछ वर्षों से यूके में रह रहा है। बताया जा रहा है कि वह ब्रिटेन के एक ट्रस्ट मजलिस-ए-अल्फला से जुड़ा है।

इस साल अक्टूबर में सामने आई रिपोर्ट्स में खुलासा किया गया कि वर्ष 2019 में उसने वडोदरा में एक भड़काऊ भाषण दिया था और 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र किया था, जो गोधरा में एक ट्रेन को जलाने के बाद हुए थे। इस ट्रेन में अयोध्या से लौट रहे कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया था। एसीपी (क्राइम) डीएस चौहान के अनुसार, फेफड़ावाला ने 2002 के दंगों के बारे में बात की थी और दावा किया था कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया गया और उन्हें मार दिया गया। उसने यह भी कहा था कि गुजरात दंगों के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और बच्चों की हत्या की गई। जब मैंने ये सब सुना तो इसके बारे में कुछ करने का फैसला किया।

फेफड़ावाला ने कहा कि साल 2003 में उसने यूके में एक ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसके लिए उसने लगभग 125 दानदाताओं से संपर्क किया और विदेश से धन एकत्र करके भारत को भेजना शुरू किया। फेफड़ावाला ने कहा था कि यह पैसा समुदाय को मजबूत करने के लिए एकत्र किया गया था, ताकि वह ‘अन्य धर्मों के हमलों के खिलाफ खुद का बचाव’ कर सके। फेफड़ावाला एक घंटे तक गुजरात में अल्पसंख्यक समुदाय को मजबूत करने की बात करता रहा।

इस कार्यक्रम में सलाहुद्दीन शेख और उमर गौतम भी मौजूद थे, जिन्हें हाल ही में हवाला और धर्म परिवर्तन मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसा माना जाता है कि फेफड़ावाला ने पिछले 18 वर्षों में भारत में 150 करोड़ रुपए से अधिक का धन भेजा है।

अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन (AFMI) चैरिटेबल ट्रस्ट

इस साल अक्टूबर में वडोदरा पुलिस की विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने पाया कि शहर स्थित अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन (AFMI) ने गाजियाबाद के पास अवैध रूप से बसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के लिए 400 फ्लैटों के निर्माण सहित अन्य गतिविधियों के लिए हवाला फंड भेजा था। उस पर भारत-नेपाल सीमा के पास मौलवियों को फंडिंग करने का भी आरोप है। सलाहुद्दीन शेख इस ट्रस्ट के ट्रस्टियों में से एक है और फेफड़ावाला सबसे बड़े लाभार्थियों में से है। कुछ साल पहले मुंबई में इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रभावित होकर शेख ने इस ट्रस्ट की शुरुआत की थी।

फेफड़ावाला ने 2017 में शेख को उमर गौतम से मिलवाया था। इसके बाद वे वडोदरा में कई बार फिर से मिले और सीएए के विरोध पर चर्चा की। यूपी एटीएस मामले के एक अन्य आरोपित कलीम सिद्दीकी ने भी फेफड़ावाला और उमर गौतम से मुलाकात की। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) क्राइम, डीएस चौहान के अनुसार, जब सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे, उस दौरान फेफड़ावाला ने मुंबई और दुबई में कारोबारियों की मदद से हवाला के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए घर बनाने के लिए पैसा दिया था।

शेख ने फेफड़ावाला और एक अन्य मौलवी जकारिया को भी धन देने की बात स्वीकार की थी। वह कश्मीर में शब्बीर नाम के एक व्यक्ति से भी मिला था, जो फेफड़ावाला का परिचित था। गौतम और शेख ने शब्बीर को ‘गरीब लोगों की मदद’ करने के लिए 5 लाख रुपए भेजने की बात स्वीकार की थी, लेकिन पुलिस को संदेह है कि यह टेरर फंडिंग का हिस्सा था। इसके अलावा, हवाला के माध्यम से प्राप्त धन भारत में मालेगाँव, मालदा, असम, बिहार, केरल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और यहाँ तक कि नेपाल जैसे स्थानों पर भी भेजा गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14 विदेशी ट्रस्टों ने 2017 से AFMI चैरिटेबल ट्रस्ट में लगभग 19 करोड़ रुपए जमा किए थे। गुजराती मुस्लिम एसोसिएशन ने 7.44 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे, जबकि फेफड़ावाला के मजलिस-ए-अल्फला ट्रस्ट ने 2.06 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस ने दुबई के एक कारोबारी मुस्तफा थानावाला को भी समन जारी किया है, जिस पर हवाला के जरिए शेख की मदद करने का आरोप है।

दुकान पर सामान लेने गई युवती से राशिद-फिरोज ने की छेड़छाड़, विरोध करने पर फेंका एसिड; दी हत्या की धमकी: केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के हापुड़ से दिल को दहला देने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ मजदूरी का काम करने वाली युवती से फिरोज और राशिद नाम के आरोपितों ने छेड़छाड़ की, लेकिन जब युवती ने इसका विरोध किया तो उन्होंने काँच में तेजाब भरी बोतल उस पर फेंक दी। हालाँकि, यह पीड़िता की खुशकिश्मती थी कि एसिड उस पर पड़ा ही नहीं। इतना ही नहीं दोनों ने उसे हत्या की भी धमकी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, देहात क्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली पीड़िता मजदूरी कर अपना भरण-पोषण करती है। इसी के सिलसिले में कुछ समय पहले वह सुल्तानपुर गाँव में एक किसान के खेत पर काम करने के लिए गई थी। वहीं पर दोनों आरोपितों ने उसे पहली बार देखा। इसके बाद सोमवार को शाम के समय पीड़िता कुछ सामान खरीदने के लिए दुकान पर जा रही थी। उसी दौरान आरोपितों ने उसका रास्ता रोक लिया। उन्होंने उसके साथ अश्लीलता और छेड़छाड़ की। घटना के वक्त फिरोज और राशिद के साथ एक और व्यक्ति भी था।

इस बीच गंदी हरकतों का जब पीड़िता ने पुरजोर विरोध किया तो उन्होंने उसपर एसिड अटैक कर दिया। हालाँकि, वो बाल-बाल बच गई। उसने खुद को बचाने के लिए शोर मचाया, जिससे घबराए आरोपित उसे धमकी देते हुए वहाँ से फरार हो गए। पीड़िता ने घर में इसकी जानकारी दी, लेकिन डरे सहमे लोगों ने पुलिस से शिकायत नहीं की। इसका असर यह हुआ कि आरोपितों की हिम्मत बढ़ गई और वो लगातार पीड़िता को धमकाने लगे। इससे आजिज होकर मंगलवार को पीड़िता के परिजन उसे लेकर देहात थाने गए और वहाँ उन्होंने पुलिस में आरोपितों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई।

इस मामले पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है, लेकिन आरोपित अभी भी उसकी पहुँच से बाहर हैं। देहात थाने के एसएचओ मिथिलेश उपाध्याय ने जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी की बात कही है।

वीर दास जैसों की भारत घृणा ‘अभिव्यक्ति की आजादी’, कंगना की अभिव्यक्ति ‘घृणा’: कुंठा की ये नंगई नहीं चलेगी लिबरलों

कई वर्षों से वीर दास को एक ‘कॉमेडियन’ के तौर पर जाना जाता है। वे भी खुद को ‘कॉमेडियन’ ही बताते हैं। यह बताते समय इस बात को हाइलाइट करना नहीं भूलते कि वे अराजनीतिक हैं। अर्थात हर तरह से लिबरल गुण संपन्न। खुद को अराजनीतिक बताना हर लिबरल का ऐसा हथियार है, जिसे कहीं भी किसी भी मौके पर चलाया जा सकता है।

यही कारण है कि आए दिन सोशल मीडिया पर इनका दोमुँहापन बार-बार दिखाई देता है। प्रश्न किए जाने पर ये ‘कॉमेडियन’ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रजाई ओढ़ लेता है। प्रश्नों के उत्तर नहीं देता क्योंकि उसका ऐसा मानना है कि अधिकतर भारतीय उससे प्रश्न करने लायक नहीं हैं। इस बात में बड़ी गंभीरता से विश्वास करता है कि वो प्रश्नों से ऊपर है।

कॉमेडी के नाम पर भारत की धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के बारे में यह ‘कॉमेडियन’ जो कुछ कहता है, उसके अनुसार एक निर्णय है। ऐसा निर्णय जिसके विरुद्ध न तो अपील की जा सकती है और न ही उस पर प्रश्न उठाया जा सकता है। इस ‘कॉमेडियन’ का आचरण बार-बार यह साबित करता रहा है कि ये लोकतांत्रिक बहस को फिजूल मानता है। अपनी किसी थ्योरी या विचार का पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में सामान्यीकरण कर देना इसकी तथाकथित कॉमेडी का मूल तत्व है।

वीर दास का एक स्टैंडअप कॉमेडी का वीडियो वायरल है और सोशल मीडिया पर बहस का विषय भी। वाशिंगटन में अपने शो की शुरुआत करते हुए वे बताते हैं कि ‘वी आर सोल्ड आउट’। अब इसे उनके विरोधी और आलोचक चाहे जैसे देखें पर उनकी ऑडियंस इस पर ताली बजाती है। वे आगे बताते हैं कि वे भारत से आते हैं जहाँ दिन में महिलाओं की पूजा की जाती है और रात में उनका सामूहिक बलात्कार किया जाता है।

इतने बड़े देश को देखने का यह तरीका सामान्य नहीं है। पर इस तरीके का सहारा लेकर भारत के प्रति इस तरह के दृष्टिकोण को सामान्य बनाने का प्रयास साफ़ दिखाई देता है। वैसे भी ऐसे प्रयास कोई पहली बार नहीं हो रहे हैं कि इसके पीछे का उद्देश्य लोगों की समझ में न आए।

जाहिर है, इससे अधिकतर भारतीयों में मन में प्रश्न उठेगा कि ये ‘कॉमेडियन’ किस भारत की बात कर रहा है? यह भारत कहाँ है जिसमें महिलाओं के साथ ऐसा हो रहा है? यदि इस कॉमेडियन का अनुभव ऐसे किसी भारत में रहने का है तो हमारे भारत को अपनी थ्योरी और उससे बनी तथाकथित कॉमेडी में क्यों घसीट रहा है?

पर ऐसे प्रश्न इस ‘कॉमेडियन’ के लिए महत्वहीन हैं। ये ऐसे प्रश्न करने वालों को संघी, भाजपाई या आईटी सेल वाला कहकर इन पर गोली दाग कर इन्हें खारिज कर देता है या प्रश्न के विरोध में गौमूत्र की बात करके इस प्रश्न को ख़त्म करने की कोशिश करता है। अपने एक्ट पर प्रश्न उठाया जाना उसे मँजूर नहीं है। दुनिया भर को अपनी आलोचना का शिकार बनाने वाला खुद को हर आलोचना से ऊपर समझता है।

वो ऐसा कर सकता है क्योंकि उसके बचाव में बुद्धिजीवी, पत्रकारों, संपादकों और भारत में लोकतंत्र की रक्षा के लिए लगातार युद्ध करने का दावा करने वालों की एक पूरी फौज खड़ी हो जाती है जो मूल प्रश्न को अनदेखा कर केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बचाव में शोर मचाती है।

ये वही फौज है जिसके लिए केवल तथाकथित लिबरल के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही असली स्वतंत्रता है। ये वही फौज है जो बार-बार लेफ्ट-लिबरल पत्रकारों के फेक न्यूज की घटनाओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कंबल ओढ़ाते हुए बरामद होती है। जो कंगना रनौत की बातों के विरोध में किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है, पर वीर दास की हर बात के समर्थन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हथियार चलाने से बाज नहीं आती। ये फौज हर वीर दास की रक्षा कवच है।

अपने वीडियो के विरोध में खड़े किए गए प्रश्नों के जवाब में ‘कॉमेडियन’ वीर दास ने एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें उसने कुतर्क और दर्शन की लगभग ढाई सेर जलेबी काढ़ी है। यह हर लेफ्ट-लिबरल का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर। हर लेफ्ट-लिबरल कानून की बात पर नैतिकता की चाशनी में सना कुतर्क ठेलता है और नैतिकता की बात पर कानून की धाराएँ कोट करता है। स्पेसिफिक प्रश्नों के उत्तर देने की बात पर दर्शन ठेलता है और प्रश्न करने वालों को संघी बताकर ढिठाई के ऐसे तीर छोड़ता है कि देखकर सामान्य व्यक्ति बिलबिलाने लगे। ‘कॉमेडियन’ वीर दास अपने वक्तव्य में इसी पुराने फॉर्मूले के बिल में घुसा नज़र आता है। यही कारण है कि अपने जिस ऐक्ट में वीर दास एक देश के रूप में भारत के प्रति असम्मान दर्शाता है, उसी असम्मान पर उठाए गए प्रश्न पर जारी अपने वक्तव्य में वह भारत की गरिमा के पीछे छिपने की कोशिश करता है।

वीर दास ने जो कहा या किया वो न तो पहली बार किया है और न ही आखिरी बार। वो भविष्य में भी ऐसा करता हुआ बरामद होगा। ऐसे लोगों के लिए 2014 के बाद का भारत सामाजिक रूप से असहिष्णु और धार्मिक रूप असह्य है। इस भारत में उसका दम घुटता है।

अपने विचार को पूरे देश के लिए निर्णय के रूप में प्रस्तुत करने वाले दर्जनों वीर दास शायद इस भारत के लिए तैयार नहीं थे और यही कारण है कि वे असहज महसूस करते हैं। इस असहजता को भारत के विरुद्ध सार्वजनिक मंचों पर परोस कर वीर दास जैसे लोग अपनी-अपनी कुंठा को मारने का प्रयास करते नज़र आएँगे। आवश्यकता है इनके ऐसे हर प्रयास के विरोध किए जाने की क्योंकि अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए, कुंठा के सार्वजनिक प्रदर्शन की नहीं।

ट्रक बैन, कंस्ट्रक्शन पर रोक सहित कई उपाय: दिल्ली में वायु प्रदूषण पर SC सख्त, सुनवाई में केजरीवाल सरकार और केंद्र ने दी दलील

दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्‍ली और एनसीआर के राज्‍यों के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। इस पर केंद्र का रुख यह है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम (WFH) की जगह कार पुलिंग करें, ताकि सड़क पर केंद्र सरकार के वाहनों की संख्या कम हो। 

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि आयोग ने ट्रक बैन के साथ ही सभी एनसीआर राज्यों को सभी स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने और अगले आदेश तक ऑनलाइन कक्षाएँ आयोजित करने का निर्देश दिया। SG ने SC को बताया कि आयोग ने सुझाव दिया कि NCR राज्य 21 नवंबर तक कम से कम 50% कर्मचारियों के लिए WFH की अनुमति दें। 

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चार छूट वाली श्रेणियों (रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधित प्रोजेक्ट) को छोड़कर सभी निर्माण गतिविधियों को 21 नवंबर तक रोकना होगा। आयोग ने कमजोर हॉटस्पॉट्स में दिन में कम से कम तीन बार स्मॉग टॉवर, स्प्रिंकलर और डस्ट सप्रेसेंट के उपयोग का भी निर्देश दिया। आयोग ने एनसीआर राज्यों को आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जेनरेटर सेट के उपयोग पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। वाहनों के प्रदूषण पर एसजी ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि आयोग ने (राज्य) अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर पराली जलाने की दर 3-4% है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह एक कारण है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी से कहा कि वो प्रदूषण के मुद्दे से न भटकें। उन्‍होंने जो मुद्दा उठाया है वो प्रासंगिक नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा कि उन्‍होंने अपने आदेश में किसानों से दो सप्‍ताह के लिए पराली न जलाने का अनुरोध करने के लिए कहा है।

इससे पहले सोमवार (15 नवंबर 2021) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने को कहा था। इसके बाद मंगलवार (16 नवंबर 2021) को कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की वर्चुअल बैठक हुई। इस बैठक में भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के सेक्रेटरी आरपी गुप्ता, कमीशन के चेयरमैन एमएम कुट्टी, हरियाणा के मुख्य सचिव, डीजीपी प्रशांत अग्रवाल, राजस्थान के मुख्य सचिव, यूपी के मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी, यूडी, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के अधिकारी मौजूद रहे।

पत्रकार अजीत भारती को जेल भेजना चाहती है कॉन्ग्रेस, नेहरू-गाँधी की आलोचना नहीं पचा पा रही पार्टी

कृपया ध्यान दें: अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है, आपने “गैंग्स ऑफ वासेपुर” नाम की फिल्म नहीं देखी है… तो कृपया कोई और लेख पढ़ लें। यह रिपोर्ट जिस मुद्दे पर है, उसकी भाषा आम बोलचाल (कहीं-कहीं गाली भी) वाली है।

पत्रकार अजीत भारती को जेल भेजना चाहती है कॉन्ग्रेस पार्टी। कारण है एक वीडियो। वीडियो जिसमें नेहरू से लेकर गाँधी और कॉन्ग्रेसी सिस्टम पर चोट की गई है।

इन सब की शुरुआत होती है इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी (श्रीनिवास भद्रावती वेंकट, Srinivas BV) के एक ट्वीट से। 16 नवंबर को श्रीनिवास बीवी ने 45 सेकंड का एक वीडियो ट्वीट किया। वीडियो में पत्रकार अजीत भारती को बोलते सुना जा सकता है:

“…इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि देश से बापू और चाचा अपना सारा राष्ट्रवाद और स्वाभिमान अंग्रेजों के अंडकोषों का वजन नापने में खपा रहे थे। ऐसे राष्ट्रपिता घोड़े की पीठ पर चार चवन्नी रख कर कविता पाठ के लिए बने हैं।… सारी प्रक्रिया स्वतंत्रता के बाद भी वही रखे हुए हैं, जो एक मालिक ने गुलामों को साधने के लिए लिखा। इतिहास किसी खानदान की रखैल नहीं है। भले ही रखैलें रखने और रखैल बनने का उनका इतिहास पुराना हो… इसलिए जब कंगना कहती है कि आजादी…”

यह वीडियो एक प्रोमो है। मतलब काट-काट कर बढ़िया वाला हिस्सा एक साथ जोड़ा हुआ। इसे खुद पत्रकार अजीत भारती ने अपने यूट्यूब वीडियो की शुरुआत में लगाया हुआ है। लेकिन इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने न तो पूरा वीडियो देखा और न ही इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के नेशनल लीगल सेल ने। शिकायत दर्ज करवा कर जेल भेजने की धमकी ट्वीट कर दी गई।

पत्रकार अजीत भारती का पूरा वीडियो देखिए। समय कम हो तो 5:09 से 7:20 तक देख सकते हैं। जो कॉन्ग्रेसियों ने शेयर किया है, उसके उलट अपनी बात उन्होंने तर्क के साथ रखी है। हाँ यह जरूर है कि तर्कों के साथ-साथ अंडकोष, चार चवन्नी घोड़े पे… जैसे आम आदमी की बोलचाल वाली भाषा भी प्रयोग की गई।

गुस्सा होना जायज है लेकिन सिर्फ आम आदमी की बोलचाल वाली भाषा (कुछ लोग इसे असंसदीय भी कह सकते हैं) के लिए किसी पत्रकार या अजीत भारती को क्या जेल भेजने की धमकी दी जानी चाहिए? फिर अपनी ही सरकार के द्वारा संसद में पारित ऑर्डिनेंस को फाड़ने वाले राहुल गाँधी के साथ इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी क्या करेंगे?

मजेदार बात यह है कि जेल भेजने या शिकायत दर्ज कराने की कॉन्ग्रेसी धमकी का जवाब पत्रकार अजीत भारती ने आम बोलचाल की भाषा में ही दिया है।

न्यूज डिबेट ‘खाने में थूकने’ पर, दावा- भारत में सिर्फ मुस्लिमों को किया जा रहा गिरफ्तार, इस्लामिक देशों में RSS छेड़ रहा युद्ध

आए दिन रोटियों पर थूकने का वीडियो वायरल हो रहा है। 16 नवंबर, 2021 को न्यूज 18 हिंदी ने भोजन पर थूकते हुए पकड़े जाने के मुद्दे पर “रिवाज़-ए-थूक, ये कैसी भूख” जैसे कैप्शन के साथ बहस की। चर्चा के दौरान जहाँ मौलाना अलीमुद्दीन असादी ने खाने पर थूकने की हरकतों का बचाव करने की कोशिश की, वहीं राजनीतिक विश्लेषक मसूद हाशमी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी और सीएम योगी के शासन में ‘केवल मुसलमानों को पकड़ा और परेशान किया जा रहा है।’

वीडियो का स्क्रीनशॉट जिसे न्यूज़ 18 ने अब यू-ट्यूब से हटा लिया है।

बता दें कि पिछले कुछ महीनों में खाना बनाते समय थूकने के कई वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। संयोग से, गिरफ्तार किए गए सभी लोग मुस्लिम समुदाय के हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनमें कोई ऐसी बात है जो उन्हें इस तरह के कृत्यों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा है। न्यूज-18 की इस बहस में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत रागी, मौलाना अलीमुद्दीन असादी, सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय, हम हिंदू के संस्थापक अजय गौतम और राजनीतिक विश्लेषक मसूद हाशमी पैनलिस्ट थे।

बहस के दौरान मौलाना अलीमुद्दीन असादी ने स्क्रीन पर दिखाए जा रहे एक खास वीडियो की तरफ इशारा किया जिसमें मुस्लिमों का एक समूह बचे हुए खाने के सामान को साफ करने के लिए प्लेट चाटता नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आस्था के बारे में है और यह कोई अपराध नहीं है। इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए कि बहस के दौरान दिखाए गए अन्य वीडियो में स्पष्ट रूप से कई रसोइयों को खाना बनाते समय थूकते हुए दिखाया गया था या लोगों को फल, रोटी, घरों के बाहर आदि जगहों पर थूकते हुए दिखाया गया था। उल्टा असादी उन लोगों की प्रशंसा करते रहे जो बर्तन चाट रहे थे।

असादी ने कहा, “हम अपने बड़ों और मौलानाओं का सम्मान करते हैं और थाली से बचा हुआ खाना खुशी-खुशी खाते हैं। यह विश्वास के बारे में है, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ये लोग बोहरा समुदाय से हैं। हमारा मज़हब हमें खाना बर्बाद करना नहीं सिखाता है।”

जब एंकर अमन चोपड़ा ने उनसे शेष वीडियो के बारे में सवाल किया और बताया कि वह कैसे कह सकते हैं कि यह विश्वास के बारे में था, असादी ने आरोप लगाया कि चोपड़ा उनके बयान को मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बहस के दौरान एक बिंदु ऐसा भी आया जहाँ उन्होंने इनकार करने की कोशिश की कि फल विक्रेता उस फल पर थूक या उसे चाट रहा था जिसे वह बेचने वाला था। उन्होंने दावा किया, “वह फल को साफ कर रहा है, चाट नहीं रहा है।”

असादी ने सड़क किनारे के उन वेंडरों के बारे में बात की जो दही भल्ले में पेशाब करते हुए कैमरे में कैद हुए थे। उन्होंने सवाल किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। असादी सड़क किनारे एक विक्रेता के वायरल वीडियो की ओर इशारा कर रहे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था, जहाँ वह पानीपुरी के पानी में पेशाब डालते हुए नजर आ रहा था। हालाँकि, 60 वर्षीय अक्रुल साहिनी के रूप में पहचाने जाने वाले विक्रेता को भरलुमुख पुलिस ने इस अपराध के लिए गिरफ्तार किया था।

विशेष रूप से, इसी तरह की एक घटना 2017 में गुजरात में भी कैमरे में कैद हुई थी, जहाँ एक चेतन नानजी मारवाड़ी को पानीपुरी के पानी में मूत्र डालते हुए देखा गया था। जिसके लिए उन्हें छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। इन घटनाओं से पता चलता है कि एक विशेष समुदाय को बदनाम करने के आरोप झूठे हैं और यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के बारे में है, न कि सांप्रदायिक घृणा के बारे में।

वास्तव में, इसे तब सांप्रदायिक बनाया जा रहा है, जब कुछ लोग उन्हें आस्था से जुड़े कृत्यों का नाम देकर बचाव करने की कोशिश करते हैं। असादी ने आगे आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि यूपी चुनाव आ रहे हैं। जब चोपड़ा ने पूछा कि क्या लोगों को यूपी चुनाव के दौरान ‘सद्भाव’ बनाए रखने के लिए विक्रेताओं द्वारा थूका गया खाना खाना चाहिए, तो असादी ने स्वर बदले से नजर आए।

राजनीतिक विश्लेषक मसूद हाशमी का इस पर बिल्कुल अलग बचाव था कि केवल मुस्लिमों को भोजन पर थूकते हुए क्यों पकड़ा जा रहा है। चोपड़ा ने हाशमी से पूछा कि क्या कारण हो सकता है कि पिछले नौ महीनों में नौ लोगों को भोजन पर थूकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, और वे सभी मुस्लिम थे। राजनीतिक विश्लेषक होने के नाते हाशमी ने इस मामले में राजनीति की और आरोप लगाया कि पीएम मोदी और सीएम योगी सरकारों के तहत केवल मुस्लिमों को गिरफ्तार किया जाता है और परेशान किया जाता है।

इन मामलों में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें नौशाद, अनवर, खालिद, शाहरुख, इरशाद, चाँद मोहम्मद, मोहम्मद और अब्दुल सलाम हैं। हाशमी ने आगे दावा किया कि इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। चोपड़ा ने उनसे पूछा कि क्या नाम बताते समय कुछ कॉमन था, लेकिन हाशमी कहते रहे कि उन मामलों में कुछ भी कॉमन नहीं था।

अश्विनी उपाध्याय ने हाशमी से सवाल किया कि ईरान, सीरिया और अन्य जैसे देश क्यों जल रहे हैं? हाशमी ने मुस्लिम राष्ट्रों में अशांति के लिए इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘मोसाद, सीआईए और आरएसएस जैसी एजेंसियों की वजह से ही दुनिया जल रही है।” उन्होंने आगे कहा, ‘महाभारत और रामायण देखने वाले इस्लाम पर सवाल उठा रहे हैं। जिनके हाथों में अनगिनत हथियार हैं, वे खुदा पर इस्लाम पर सवाल उठा रहे हैं। पहले खुद को देखो, फिर हमसे सवाल करो।”

बता दें कि ऑल्ट न्यूज़ जैसे कुछ फैक्ट चेकरों ने भी थूकने वाले वीडियो का बचाव करते हुए इसे ‘फातिहा जलाना’ कहकर बचाव किया है। जिस पर लोगों ने मुँहतोड़ जवाब दिया था। इसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं- ‘वो तो फातिहा जला रहा था, अल्लाह देते हैं बरकत’: AltNews के जुबैर ने खाने में थूक वाले वीडियो को दी क्लीन चिट, कहा – हवा फूँक रहे।

अहमदाबाद: झील गार्डेन में नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल, VHP ने किया शुद्धिकरण अनुष्ठान-हनुमान चालीसा का पाठ

हरियाणा के गुरुग्राम के बाद अब गुजरात के अहमदाबाद से भी सार्वजनिक जगह पर नमाज का वीडियो सामने आया है। अहमदाबाद के वस्त्रपुर क्षेत्र में झील के बगीचे में मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं द्वारा नमाज अदा करने का यह वीडियो वायरल हो रहा है। करीब डेढ़ मिनट के वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ बुर्का पहने महिलाएँ और पुरुषों का एक समूह पार्क में नमाज पढ़ रहे हैं।

मुस्लिमों द्वारा सार्वजनिक स्थान पर नमाज किए जाने की खबर सामने आने के बाद सोमवार (15 नवंबर 2021) की शाम को विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दर्जनभर से अधिक सदस्य वहाँ पहुँच गए और उन्होंने पार्क का शुद्धिकरण अनुष्ठान किया। उन्होंने बगीचे में गंगा जल का छिड़काव कर हनुमान चालीसा का पाठ किया।

झील पार्क में विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने किया शुद्धिकरण अनुष्ठान

इसकी पुष्टि करते हुए विश्व हिंदू परिषद के गुजरात सचिव ने बताया कि अहमदाबाद के झील पार्क का शुद्धिकरण वीएचपी के सदस्यों द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जागरुकता पैदा करने के लिए ऐसा किया गया था। वीएचपी ने कहा कि यह देखा गया है कि मुस्लिम अक्सर आकस्मिक नमाज के बाद जमीन विशेष के टुकड़े पर दावा करने लगते हैं।

वस्त्रपुर थाने के पुलिस इंस्पेक्टर संदीप खंभला ने कहा कि इस मामले में न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई है और न ही वीएचपी के सदस्यों द्वारा पार्क के शुद्धिकरण के मामले में उनसे किसी तरह का कोई संपर्क किया गया है। बहरहाल अब तक उन लोगों के समूह की पुष्टि नहीं हो सकी है, जिन लोगों ने वहाँ नमाज पढ़ी थी। उसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है जिसने इसका वीडियो रिकॉर्ड किया था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संभावना जताई गई है कि झील के पास स्थित प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किसी मरीज के परिजन ने ऐसा किया हो।

‘मेरे सामने तलवार से वार किया…’: केरल में गोद दिए गए RSS वर्कर की पत्नी ने बयाँ की बर्बरता, TOI ने कहीं बताई ‘हत्या’ तो कहीं ‘हादसा’

केरल के पलक्कड़ में 15 नवंबर 2021 को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता ए संजीत की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या का इल्जाम एसडीपीआई के बदमाशों पर लगा। खबरें आईं कि जिस समय यह घटना हुई उस समय वह अपनी पत्नी के साथ बाइक पर उन्हें छोड़ने दफ्तर जा रहे थे। लेकिन तभी गुंडों ने उन्हें पकड़ा और उनपर धारदार हथियार से हमला कर दिया। अब संजीत की हत्या के पूरे मामले में उनकी पत्नी अरक्षिका का बयान सामने आया है, जिन्होंने अपनी नम आँखों से उस दिन की बर्बरता को बताया।

रिपब्लिक वर्ल्ड के पत्रकार अश्विन नंद कुमार से बातचीत में उन्होंने कहा कि संजीत को उनकी आँखों के सामने जानबूझकर मारा गया। वो लोग चाहते थे अरक्षिका इस हत्या को देखें। वह कहती हैं, “उन लोगों ने मुझे पकड़ा और पीछे ले गए। इसके बाद मेरे सामने उन्होंने उन पर तलवार से वार किया। उस समय बहुत सारे लोग वहाँ थे। कई कार, कई स्कूटर और स्कूल बस भी वहाँ थी। उन पाँचों का मुँह भी नहीं ढका था।”

एक पुराने विवाद को लेकर संजीत की पत्नी कहती हैं कि जो बातें मीडिया में कही जा रही है वो बिलकुल झूठ हैं। संजीत 3 माह पहले उनके घर थे और पूरे मामले में बेगुनाह थे।

इस मामले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। उन्होंने कहा कि राज्य में इस तरह की घटनाएँ होने में पुलिस और राज्य सरकार की विफलता जिम्मेदार है। वह बोले कि सीपीएम सरकार एसडीपीआई के लोगों को बचा रही है। दोनों के बीच एक गठबंधन सा है। एसडीपीआई ने पिछले 10 दिन में 2 लोगों को मौत के घाट उतारा है।

बता दें कि 27 वर्षीय संजीत की निर्मम हत्या को केरल पुलिस ने पॉलिटिकल मर्डर बता दिया है। उनके मुताबिक इलाके में पहले कई बार राजनीति राजनीतिक झड़पे हुई थीं और संभव है कि हत्या इसी से जुड़ी हो। पुलिस इलाके के सीसीटीवी निकालकर अपनी जाँच कर रही है। लेकिन, इस बीच टाइम्स ऑफ इंडिया की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिनमें इस निर्मम हत्या के मामले को केरल के एडिशन में हत्या कहा गया है, लेकिन अन्य राज्यों के संस्करण जैसे तमिलनाडु और मुंबई एडिशन में इस पूरी वारदात को एक एक्सिडेंट दिखाने का प्रयास हुआ है।

अब लोग TOI की ऐसी रिपोर्ट्स का विरोध कर रहे हैं। लोग ढूँढ-ढूँढ कर अलर संस्करण शेयर करते हुए बता रहे हैं कि संजीत के शरीर पर 36 हमले (30 बॉडी पर और 6 सिर पर) के निशान थे। बता दें कि ये पहली दफा नहीं था जब संजीत को मारने के लिए एसडीपीआई ने हमला किया। 2020 के जून में सबीर अली, अनवर सादिक नाम के दो एसडीपीआई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

जिस होटल में भारत के बैडमिंटन खिलाड़ी उससे 100 मीटर दूर 2 आत्मघाती हमले, ISIS ने ली यूगांडा ब्लास्ट की जिम्मेदारी

यूगांडा (Uganda) की राजधानी कम्पाला में मंगलवार (16 नवंबर 2021) को दो आत्मघाती धमाके हुए। इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने ली है। रिपोर्टों के अनुसार हमलों में दो नागरिकों और एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। तीन हमलावर भी मारे गए। धमाके उस होटल से करीब 100 मीटर दूर हुए जहाँ भारत के बैडमिंटन खिलाड़ी ठहरे हुए हैं। भारतीय टीम सुरक्षित है।

5 मिनट के भीतर हुए दो बड़े बम धमाकों से शहर में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने बताया है कि सीसीटीवी फुटेज में एक हमलावर सेंट्रल पुलिस स्टेशन के पास खुद को उड़ाते दिखा। धमाके के तीन मिनट बाद ही मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने खुद को पार्लियामेंट एवेन्यू के पास उड़ा लिया। धमाकों में घायल हुए 33 लोगों में से पाँच की स्थिति गंभीर है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय पैरा बैडमिंटन टीम इस समय यूगांडा की राजधानी कंपाला में है। अंतरराष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप खेलने के लिए भारत से 54 शटलर गए हुए हैं। इनके साथ पाँच सदस्यीय टीम भी है। इस टीम में टोक्यो पैरालम्पिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले प्रमोद भगत, मनोज सरकार समेत कई जाने माने खिलाड़ी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 15 खिलाड़ी और दो कोच होटल अफ्रीकाना में ठहरे हुए हैं। वहीं शेष खिलाड़ी हॉलीडे एक्सप्रेस में रुके हुए हैं। हॉलीडे एक्सप्रेस से वह जगह करीब ही है जहाँ ब्लास्ट हुए। होटल अफ्रीकाना में ठहरी शटलर पलक कोहली ने बताया कि पहला धमाका उस वक्त हुआ जब टीम बस में चढ़ रही थी। हमले के बाद वापस सभी को होटल ले जाया गया। विस्फोट के बाद चारों ओर अफरातफरी मच गई थी। टीम के साथ मुख्य कोच गौरव खन्ना भी हैं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी सदमे में हैं और उन्हें काउंसलिंग की आवश्यकता है। उन्होंने ये भी बताया कि वे लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में बने हुए हैं।

बुरा आदमी बनना, बैंक लूटना चाहता है तैमूर: सैफ अली खान ने अपने बेटे के बारे में YouTube पर किया खुलासा

बॉलीवुड में काम करने वाले सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और उनकी दूसरी बीवी करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) के पहले बेटे का नाम है तैमूर अली खान (Taimur Ali Khan)। उम्र कम है लेकिन आगे की प्लानिंग है उसकी बैंक लूटने की। वो चाहता है कि वो बुरा आदमी बने और बैंक लूट कर सभी के पैसे भी चुराना चाहता है।

यह लीक हुई खबर नहीं है बल्कि खुद सैफ अली खान ने पूरी दुनिया को यह बात बताई है। रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) के साथ बातचीत के दौरान सैफ ने यह पूरी कहानी बताई। सैफ के अनुसार तैमूर अली खान नकली तलवार लेकर हिंसक रूप से लोगों के पीछे भागता है, उन्हें दौड़ाता है।

यश राज फिल्म्स (Yash Raj Films, YRF) का अपना यूट्यूब चैनल है। इसी चैनल पर सैफ अली खान और रानी मुखर्जी बातचीत कर रहे थे। यह बातचीत इन दोनों की आने वाली फिल्म बंटी और बबली 2 (Bunty Aur Babli 2) पर चर्चा के दौरान हुई।

रानी मुखर्जी ने आने वाली फिल्म बंटी और बबली 2 पर बातचीत के अलावा अपनी बेटी आदिरा के बारे में एक कहानी सुनाई। इसी पर बात आगे बढ़ी तो सैफ अली खान ने तैमूर के बारे में, उसकी आदतों के बारे में जिक्र किया। सैफ ने कहा:

“…मुझे नहीं पता कि हम क्या कर रहे हैं। बस अच्छे की उम्मीद कर रहे हैं। मैं उससे (तैमूर से) कहता रहता हूँ कि यह अच्छा आदमी है… लेकिन वह कहता है कि उसे बुरा आदमी बनना है… बैंक लूटना चाहता है, सभी के पैसे चुराना चाहता है।”

आपको बता दें कि सैफ अली खान और रानी मुखर्जी एक साथ बंटी और बबली 2 में दिखाई देंगे। इस फिल्म को वरुण वी शर्मा ने निर्देशित किया है। 19 नवंबर 2021 को रिलीज होने वाली फिल्म “बंटी और बबली 2” से पहले “बंटी और बबली” 2005 की हिट फिल्म रही थी। उसमें अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन के साथ रानी मुखर्जी ने अभिनय किया था।

सैफ अली खान और रानी मुखर्जी करीब 12 साल बाद एक साथ किसी बॉलीवुड फिल्म में दिखेंगे। इससे पहले इन दोनों को “थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक” में एक साथ देखा गया था। उसे भी यश राज फिल्म्स बैनर के तहत ही बनाया गया था।