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मसरूर ने डॉ. अमित बनकर छात्रा को प्रेमजाल में फँसाया, शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म किया, इसके बाद धर्मांतरण करा दिया

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला पीलीभीत के सुनगढ़ी इलाके का है। यहाँ मशरूर नाम के डॉक्टर ने खुद को अमित बताकर एक छात्रा को दवाई देने के बहाने पहले अपने प्रेमजाल में फँसाया फिर उसके बाद उसका धर्मांतरण करा दिया। इस काम में आरोपित के परिवार वालों ने भी उसका साथ दिया। उन्होंने मिलकर किशोरी को बालिग दिखाने के लिए आधार कार्ड में उसका नाम और जन्मतिथि बदलवा दी।

पुलिस ने किशोरी की माँ की शिकायत पर थाना सुनगढ़ी में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर अमित (असली नाम डॉ. मसरूर) ने इलाज करने के बहाने उनकी बेटी को फँसाया और फिर दुष्कर्म करने के बाद उसका धर्मांतरण करा दिया।

सुनगढ़ी पुलिस को किशोरी की माँ ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी 16 साल की बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। खुद को अमित बताने वाला मसरूर उसकी बेटी से कॉलेज के गेट पर मिला था। उसने बताया था कि वह जिला अस्पताल में डॉक्टर कहता है। पीड़िता की माँ ने बताया कि आरोपी ने उसकी बेटी का इलाज करने और उसे दवा देने के बहाने अपने कमरे पर बुलाया। आरोपी ने इस तरह पीड़िता को कई बार कमरे पर बुलाया। ऐसा करके आरोपित ने बेटी को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया और शादी का झाँसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।

माँ ने अपनी शिकायत में आगे कहा कि जब इससे भी आरोपित का मन नहीं भरा तो उसने दुष्कर्म का वीडियो बना लिया। आरोपित ने अपने परिवार के साथ मिलकर बेटी का धर्मांतरण कराकर नया आधार कार्ड भी बना दिया। पीड़िता की माँ ने बताया कि 25 अक्टूबर की दोपहर को सूचना मिली की उसकी बेटी आरोपित के कमरे पर है। जब परिजनों को लेकर वह आरोपी के कमरे पर पहुँची तो वहाँ पीड़िता बेहोशी की हालात में मिली। जब पीड़िता को होश आया तो उसने पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया।

इसके बाद आरोपित ने बताया कि उसकी बेटी ने धर्मांतरण कर लिया है। साथ ही उसने धमकी दी कि अगर इसकी शिकायत पुलिस में की तो वह जान से मार देगा। धमकी देने के बाद आरोपी भाग गया। छात्रा की माँ के अनुसार, बेटी के आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 2 मई 2005 लिखी थी, लेकिन कथित डॉक्टर ने आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि बदलवाकर 2 मई 2003 करा दी थी। पुलिस ने डॉ. मसरूर, मूबीना बेगम उर्फ बीना बेगम मतलूफ, डॉक्टर का भाई और तीन अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट कर जाँच शुरू कर दी है।

आरोपी डॉक्टर मूल रूप से गजरौला थाना क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस ने जब उसके घर दबिश दी, उसके पहले ही वह फरार हो गया। आरोपियों की तलाश में पुलिस उसके रिश्तेदारों के यहाँ दबिश दे रही है। एसपी दिनेश कुमार ने बताया कि किशोरी की माँ की तहरीर पर थाना सुनगढ़ी में चार नामजद समेत सात के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

समीर वानखेड़े करते रहेंगे आर्यन खान ड्रग्स मामले की जाँच: 4 घंटे की पूछताछ के बाद NCB का ऐलान, जमा किए दस्तावेज

आर्यन खान ड्रग्स केस का मामला दबाने के लिए 25 करोड़ की डील के आरोप को लेकर आज NCB की पाँच सदस्यों वाली विजिलेंस टीम ने समीर वानखेड़े से पूछताछ की। चार से साढ़े चार घंटे तक चली इस पूछताछ के बाद समीर वानखेड़े मीडिया से बात किए बिना अपनी गाड़ी में बैठ कर चले गए। एनसीबी की इस टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी डायरेक्टर जनरल ज्ञानेश्वर सिंह ने इसके बाद मीडिया से बात की।

ज्ञानेश्वर सिंह ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया, “समीर वानखेड़े से आज पूछताछ की गई। उन्होंने मामले से संबंधित दस्तावेज जमा किए जो माँगे गए थे। जरूरत पड़ी तो उनसे और पूछताछ की जाएगी। जब तक उनके खिलाफ पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती तब तक वह क्रूज पर ड्रग्स के मामले में जाँच अधिकारी बने रहेंगे।”

ज्ञानेश्वर सिंह ने 25 करोड़ की इस डील का आरोप लगाने वाले प्रभाकर सैल से कल या परसों (गुरुवार-शुक्रवार) एनसीबी ऑफिस में आकर अपनी बात कहने और केस से संबंधित तथ्यों को रखने का अनुरोध किया। उन्होंने इस मामले में केपी गोसावी से भी अनुरोध किया कि वे आएँ और जाँच में शामिल हों। 

ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, “प्रभाकर सैल और किरण गोसावी तक हमारा नोटिस नहीं पहुँचा है। मीडिया के माध्यम से हम उन दोनों से यह अनुरोध करना चाहते हैं कि वे आएँ जाँच में शामिल हों और सबूत दें। हमने उपलब्ध पते पर संपर्क करने की कोशिश की। एक का घर बंद था। दूसरा अपने घर पर उपलब्ध नहीं था।” ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा इस केस से जुड़े सभी लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

बता दें कि आर्यन खान ड्रग्स मामले में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब इस केस के प्राइम विटनेस केपी गोसावी के बॉडीगार्ड ने बड़ा खुलासा किया। बॉडीगार्ड प्रभाकर सैल ने अपने हलफनामे में बताया कि एनसीबी के दफ्तर में पंचनामा पेपर बताकर खाली कागज में जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे। इतना ही नहीं केपी गोसावी व एक अन्य के साथ इस मामले में 25 करोड़ की रिश्वत की भी माँग की गई थी। बाद में यह सौदा 18 करोड़ में तय हुआ था, जिसमें आठ करोड़ रुपए समीर वानखेड़े को देने की बात हो रही थी। 

‘नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते तो बिखर जाता देश’: अमित शाह ने दो दशक की उपलब्धियों की दिलाई याद

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को दिल्ली में नरेंद्र मोदी को देश का सबसे सफल प्रधानमंत्री करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं बनते तो भारत आज बिखर गया होता। शाह ने यह बयान रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख के रूप में ‘डिलीवरिंग डेमोक्रेसी: नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में दो दशकों की समीक्षा’ विषय पर बात करते हुए दी।

अमित शाह ने कहा कि जब भारत का संविधान लिखा गया था, तब यह तय हुआ था कि भारत एक बहुदलीय लोकतंत्र होगा। लेकिन साल 2014 तक लोगों को चिंता सताने लगी थी कि देश में बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था फेल हो गई है और देश में राम-राज के सपने चकनाचूर हो गए हैं। शाह ने कहा, “1960 के दशक के बाद और 2014 तक लोगों को संदेह था कि क्या बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था सफल हो सकती है। लोग इस बात को लेकर आशंकित थे क्या सिस्टम फेल हो गया था। क्योंकि इससे फलदायी परिणाम नहीं मिले। बड़े धैर्य के साथ उन्होंने निर्णय लिया और पूर्ण बहुमत से पीएम मोदी को सत्ता दी।”

उन्होंने कहा कि मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने हैं जब पिछली सरकार में हर कैबिनेट मंत्री मनमोहन सिंह के पीएम होने के बावजूद खुद को पीएम मानते थे। उन्होंने कहा कि देश के लिए कोई नीति नहीं थी। किसी ने देश की सुरक्षा की बात नहीं की। हर दिन एक नया घोटाला सामने आया।

शाह ने कहा कि यूपीए की सरकार के दौरान नीतियों को पैरालिसिस हो गया था। ऐसा प्रतीत होता था कि किसी भी वक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था ढह जाएगी। उन्होंने 2014 से पहले नरेंद्र मोदी के पीएम उम्मीदवार चुने जाने के दौरान की बात करते हुए कहा, “12 लाख करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ था। शायद भारत के लिए सम्मान अपने सबसे निचले स्तर पर था। आंतरिक सुरक्षा पर सवाल थे। ऐसा लग रहा था कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था कभी भी ध्वस्त हो जाएगी। उस समय बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम को अपना पीएम उम्मीदवार बनाने का फैसला किया था।”

जब पहली बार गुजरात के सीएम बने मोदी

मोदी के पहली बार गुजरात के सीएम बनने के बारे में बात करते हुए शाह ने कहा कि जब बीजेपी ने 2001 में फैसला किया था कि नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम होंगे तो वह एक दुर्लभ क्षण था। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें तब तक प्रशासन चलाने का कोई वास्तविक अनुभव नहीं था। राज्य कच्छ भूकंप के परिणामों सहित विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने विकास और पारदर्शिता से काम करते हुए बहुत सारे बदलाव किए।

गुजरात में 24 घंटे बिजली के मुद्दे पर बात करते हुए अमित शाह ने तब के सीएम मोदी का उदाहरण दिया। शाह ने बताया कि राज्य में 24 घंटे बिजली भी दी जा सकती है, लोग इसे असंभव समझ रहे थे, लेकिन कृषि के लिए फीडर लाइनों को घरेलू बिजली कनेक्शन और अन्य सुधारों से अलग करके गुजरात ने 24 घंटे बिजली की उपलब्धता हासिल कर ली थी, जिससे राज्य में व्यवसायों का विकास हुआ था।

इसी तरह राज्य में 67% स्कूल नामांकन थे और ड्रॉपआउट दर 37% थी। मोदी ने राज्य में लिंगानुपात और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम शुरू किया, जिससे अंततः 100% नामांकन दर हासिल की जा सकी। इससे ड्रॉपआउट दर को लगभग शून्य करने के लिए कदम उठाए गए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से गुजरात भारत का पहला राज्य था, जिसने यह सुनिश्चित किया कि आदिवासियों के लिए बजट आवंटन उनकी जनसंख्या के आकार के अनुसार हो। वनबंधु कल्याण योजना के तहत आदिवासियों के लिए ऐसा आनुपातिक बजट आवंटन किया गया था।

नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए सुधारों के बारे में बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि पहले कॉन्ग्रेस के पीएम राजीव गाँधी ने खुद कहा था कि लोक कल्याण पर खर्च किए गए प्रत्येक रुपये में से केवल 15 पैसे लाभार्थियों तक पहुँचे और बाकी 85 पैसे भ्रष्टाचार में चले गए। लेकिन पीएम मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) का उपयोग करके सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को समाप्त किया।

इसी तरह सरकार द्वारा खरीद की प्रक्रिया को GEM पोर्टल के माध्यम से भ्रष्टाचार मुक्त बनाया गया है। शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने परियोजनाओं के पैमाने और आकार को भी बदल दिया। उदाहरण के लिए पहले भी तय हुआ था कि 10,000 लोगों को पक्के घर दिए जाएँगे। पीएम मोदी ने फैसला किया कि 2022 तक सभी को पक्के घर दिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि 2 करोड़ लोगों को घर दिया गया है और 15 अगस्त 2022 तक देश के हर गरीब को घर दिया जाएगा।

इसके अलावा भी शाह ने मोदी सरकार द्वारा हर गाँव में बिजली, हर घर में शौचालय आदि परियोजनाओं का भी जिक्र किया।

₹30+ लाख में नाबालिग बेटी का सौदा, माँ ने ही बार-बार बेचा: नशे की सुई देकर रोज 30-40 बार रेप, राजस्थान का मामला

राजस्थान से एक ऐसा मामला आया है, जिसको सुनकर रिश्ते पर से विश्वास उठ जाएगा। दरअसल, एक माँ ने अपनी ही बेटी का सौदा कर दिया। इस कलयुगी माँ ने 7 साल की अवधि में अपनी बेटी का जिस्म के सौदागरों के हाथों तीन बार सौदा कर 30 लाख रुपये में बेच दिया। यह मामला तब खुला, जब गुमशुदा बेटी ने पुलिस को आपबीती सुनाई।

अब 16 साल की हो चुकी पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि जब वह 9 साल की थी, तब पहली बार उसकी माँ ने बेचा था। उस दौरान उसकी माँ ने मुंबई के एक ब्रोकर के हाथों 20 लाख रुपये में सौदा कर दिया था। इसके बाद वह ब्रोकर उसे जिस्मफरोशी कराने लगा। उसे नशे का इंजेक्शन देकर एक दिन में 30 से 40 लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

दूसरी बार उसे 10 लाख रुपये में एक डांस बार में बेचा गया। वहाँ भी लड़की के साथ यौन शोषण होता था। वहाँ से किसी तरह भागकर लड़की अपनी माँ के पास पहुँची। इसके बाद उसकी माँ ने तीसरी बार उसे नागपुर में एक साड़ी की दुकान चलाने वाली एक महिला के हाथों 10 हजार रुपये में बेच दिया। किशोरी वहाँ से एक ग्राहक की मदद से भाग निकली और उसी के साथ रहने लगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि अगस्त में बूँदी जिले के डबलाना थाने में लड़की की मौसी ने अपनी 16 वर्षीय भाँजी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उसके बाद पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से लड़की को नागपुर के लकड़गंज से ढूँढ़ निकाला। सीडब्ल्यूसी के आदेश पर 8 सितंबर से 14 सितंबर तक उसे बालिका सुधार गृह में भेज दिया गया था।

25 सितंबर को लड़की को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति के समक्ष पेश करने के बाद उसे माँ के हवाले कर दिया गया। बाल कल्याण समिति द्वारा बालिका को सँभालने के साथ मांडलगढ़ थाने में प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए भी उसकी माँ को पाबंद किया गया था।

इस दौरान लड़की को लगा कि उसकी माँ विवाह के नाम पर फिर से उसे बेचने की कोशिश कर रही है। उसके बाद बालिका अपनी दादी की मदद से वह 4 साल के अपने भाई को लेकर घर से भाग गई। पुलिस ने जाँच शुरू की, लेकिन लड़की खुद महाराष्ट्र के लकड़गंज थाने पहुँच गई और पुलिस अपनी आपबीती सुनाई। नाबालिग का कहना है कि उसकी माँ उसके छोटे भाई के साथ भी मारपीट करती थी। सारा मामला सुनने के बाद इस घटना से पर्दा उठा। इसके बाद लड़की को सीडब्ल्यूसी बूंदी के सुधार गृह में रखा गया है।

नागपुर पुलिस ने बाल कल्याण समिति के साथ मिलकर बच्ची के पक्ष में गहन विचार-विमर्श किया। उसके बाद आरोपियों पर धारा 370, 372, 373, 376, 344 उप धारा 6, 8, 12 पॉक्सो 3, 4, 5, 6, 7 के तहत मामला दर्ज किया। वहीँं, 11 लोगों की टीम ने सीडब्ल्यूसी के साथ उसकी माँ सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र पुलिस बूँदी और भीलवाड़ा जिलों में छापेमारी कर बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।

पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने वालों के खिलाफ एक्शन में योगी की पुलिस: 7 के खिलाफ दर्ज हुई FIR, चलेगा देशद्रोह का मामला

उत्तर प्रदेश पुलिस ने टी20 विश्व कप मैच में रविवार (24 अक्टूबर, 2021) को भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान से हारने के बाद पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में बुधवार (27 अक्टूबर, 2021) को 5 जिलों में 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। प्रशासन की तरफ से इस तरह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ देशद्रोह (रासुका) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश भेज दिए गए हैं।

आगरा में 3, बरेली में 3 और लखनऊ में 1 लोगों पर मामला दर्ज है। भारत के पाकिस्तान से हारने और भारत विरोधी नारे लगाने के बाद पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में आगरा में 3 को गिरफ्तार किया गया है। बरेली में एक पर अपने व्हाट्सएप पर पाकिस्तान समर्थक स्टेटस डालने और अपमानजनक व्यवहार करने और धमकी देने का आरोप है।

बरेली के एक अन्य पर भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने और अपने व्हाट्सएप स्टेटस में पाकिस्तान टीम की तारीफ करने का आरोप है। बरेली के तीसरे व्यक्ति पर आरोप है कि उसने अपनी फेसबुक कवर तस्वीर के रूप में पाकिस्तान का झंडा लगाया और सोशल मीडिया दिग्गज पर पाकिस्तान समर्थक अन्य संदेश पोस्ट किए। व्हाट्सएप पर पाकिस्तान समर्थक स्टेटस डालने के आरोप में लखनऊ से एक गिरफ्तार हुआ।

बता दें, टी20 वर्ल्ड कप में विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम इंडिया को पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा था। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में 29 साल में पहली बार भारत को पाकिस्तान के खिलाफ हार मिली है, जिससे भारतीय टीम की आलोचना हुई। वहीं, कई जगहों से जश्न की खबरें भी सामने आईं। ऐसे लोगों पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। उदयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका नफीसा अटारी ने पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाया था। उन्होंने अपने स्टेटर पर इसे शेयर भी किया था। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। अब उनकी गिरफ्तारी हो गई है।

त्रिपुरा में भड़की हिंसा: मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घरों, दुकानों और वाहनों पर किया हमला, सांप्रदायिक तनाव का माहौल

उत्तरी त्रिपुरा जिले के धर्मनगर सब-डिवीजन और त्रिपुरा के उनोकोटी जिले के कैलाशहर सब-डिवीजन में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं के बाद धारा 144 लागू की गई है। धर्मनगर सब-डिवीजन के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि क्षेत्र में शांति भंग होने की प्रबल आशंका है, जिसकी वजह से सार्वजनिक समारोहों, जुलूसों, नारेबाजी, रैली, सार्वजनिक भाषणों आदि पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पड़ी है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर सांप्रदायिक हमलों के बाद हिंदू और मुस्लिम समूहों की बड़ी सभा के बाद प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए गए हैं। मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को दोनों पक्षों की ओर से क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर छिटपुट हिंसा हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटनाओं का सिलसिला धर्मनगर जिले के पानीसागर सब-डिवीजन के रोवा में शुरू हुआ, जहाँ विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में एक विरोध रैली में शामिल कुछ लोगों ने एक मस्जिद पर हमला कर दिया। विहिप नेता पूर्ण चंद्र मंडल के नेतृत्व में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा की माँग वाली रैली उस समय हिंसक हो गई थी जब जुलूस रोवा गाँव पहुँचा और उन्हें वहाँ एक मस्जिद दिखाई दी।

इसके बाद भीड़ ने रोवा बाजार में मुस्लिमों की कई दुकानों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मस्जिद में भी तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की, लेकिन वहाँ इकट्ठे हुए स्थानीय मुस्लिमों ने उन्हें रोक दिया।

हिंदुओं द्वारा विरोध रैली में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए कदमतला इलाके में करीब एक हजार मुस्लिम सड़क पर उतर आए। इस बार मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घरों, दुकानों और वाहनों पर हमला किया। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में, मुस्लिम भीड़ हाथों में लाठी लेकर सड़कों पर मार्च कर रही है। सोशल मीडिया के दावों के मुताबिक, हिंदुओं ने कदमतला बाजार मस्जिद पर हमला करने की भी कोशिश की, लेकिन मस्जिद की सुरक्षा के लिए करीब 5000 मुस्लिम जमा हो गए थे। कथित तौर पर, बाद में लगभग 11 बजे, हिंदुओं द्वारा कथित हमलों के विरोध में हजारों मुस्लिम सामने आए।

कदमतला में मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर किए गए हमले के बाद, हिंदुओं ने पास के चुरैबाड़ी इलाके में जवाबी हमला किया। हिंसा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात में असम से आ रहे कई वाहनों पर हमला किया गया।

दूसरी ओर, रोवा में एक मस्जिद पर हमले की खबरें राज्य में फैलीं और अधिकतर जगहों पर मुस्लिमों द्वारा विरोध प्रदर्शन की सूचना मिली। त्रिपुरा में मुस्लिमों की सुरक्षा की माँग को लेकर मंगलवार देर रात बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने कैलाशहर के ईरानी थाने का घेराव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं के एक वर्ग द्वारा मुस्लिमों पर हमलों के बावजूद हिंदुओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मामले को संवेदनशील होता देख त्रिपुरा सरकार ने संबंधित क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी है। सरकार ने शांति बनाए रखने के लिए इस मामले को असम सरकार के संज्ञान में भी लाया है।

पहली बार 11 खिलाड़ियों को मिलेगा ‘खेल रत्न’, नीरज चोपड़ा समेत ये हैं अन्य नाम: 35 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड भी

भारत सरकार ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। टोक्यो ओलंपिक में ‘भाला फेंक’ में देश को स्वर्ण पदक जिताने वाले नीरज चोपड़ा को ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज और फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छत्री को भी सर्वोच्च खेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब एक साथ 11 खिलाड़ियों को ‘खेल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

ये खिलाड़ी हैं –  नीरज चोपड़ा, मिताली राज, सुनील छेत्री के अलावा पहलवान रवि दहिया, बॉक्स लवलीना बोरगोहेन, हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश, बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत, भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल, निशानेबाज अवनी लेखरा, बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर और निशानेबाज एम नारवाल। वहीं 35 खिलाड़ियों को ‘अर्जुन पुरस्कार’ के लिए चुना गया है, जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन भी शामिल हैं। ओलंपिक और पैरालम्पिक खेलों के कारण इस साल राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में देरी हुई है।

इस बार ओलंपिक और पैरालम्बीक खिलाड़ियों को ही मुख्यतः शानदार प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है। टोक्यो ओलंपिक के 4 पदक विजेताओं और पैरालम्पिक के 5 पदक विजेताओं को इस साल सम्मान मिलेगा। बता दें कि रवि दहिया ने पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती के 57 किलो भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था। मैरी कॉम के बाद ओलिंपिक मेडल जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने वाली लवलीना बोरगोहेन ने रजत पदक जीता था।

“तुम असभ्य हो… ज्यादा स्मार्ट बनना है तो यहाँ से जा सकते हो”- शोएब अख्तर को पाकिस्तानी TV चैनल ने LIVE प्रोग्राम से निकाला

रावलपिंडी एक्सप्रेस कहे जाने वाले पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर बीच में लाइव शो छोड़ने के कारण विवादों में घिर गए हैं। दरअसल, हाल ही में उन्होंने एक LIVE टीवी शो को बीच में छोड़कर क्रिकेट विश्लेषक के अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालाँकि, मामला तूल पकड़ने के बाद उन्होंने इस पर अपना स्पष्टीकरण दिया है।

पूर्व गेंदबाज अख्तर ने बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को ट्वीट किया, “सोशल मीडिया पर कई वीडियो आ रहे हैं, इसलिए मैंने सोचा कि मुझे अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। नोमान ने असभ्यता दिखाई और उन्होंने मुझे कार्यक्रम छोड़ने के लिए कहा।” अख्तर ने कहा, ‘‘यह काफी शर्मसार करने वाला था, क्योंकि मेरे साथ सर विवियन रिचर्ड्स, डेविड गॉवर जैसे दिग्गज और मेरे कुछ समकालीन वरिष्ठ लोग भी सेट पर बैठे थे और लाखों लोग इसे देख रहे थे।’’

मीडिया रिपोर्ट्स के ​मुताबिक, मंगलवार को पाकिस्तान की टी-20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड पर 5 विकेट से जीत के बाद कार्यक्रम के मेजबान ने शोएब के साथ बुरा बर्ताव किया और उनका अपमान किया था। बताया जा रहा है कि PTV चैनल के शो ‘गेम ऑन है’ में ऑन एयर उन्हें विदेशी मेहमानों के बीच अपमान झेलना पड़ा। ये सभी इस शो में मैच का विश्लेषण कर रहे थे। उसी दौरान चैनल के होस्ट ने उन्हें बाहर जाने को कहा।

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के स्टार गेंदबाज रहे शोएब अख्तर ने बताया कि कि नोमान नियाज इस शो को होस्ट कर रहे थे। नोमान इसी दौरान शोएब पर भड़क गए। उसने शो में उन्हें झिड़कते हुए कहा, ”तुम थोड़े असभ्य हो और मैं ये कहना नहीं चाहता, लेकिन ज्यादा स्मार्ट बनना है तो तुम यहाँ से जा सकते हो।” इसके कुछ देर बाद अख्तर ने अन्य विशेषज्ञों से माफी माँगी और फिर घोषणा की कि वह पीटीवी स्पोर्ट्स से इस्तीफा दे रहे हैं। अख्तर के कार्यक्रम छोड़कर चले जाने वाला वीडियो क्लिप देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

अख्तर और नियाज के बीच बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लोगों ने नियाज से माफी माँगने को कहा है। वीडियो में कहा गया है कि शोएब अख्तर की दुनिया में इज्जत है, लेकिन इन लोगों ने विदेशी मेहमानों के सामने ही उन्हें लाइव शो से बाहर जाने को कह दिया।

कार्यक्रम के अन्य मेहमान सर विवियन रिचर्ड्स, डेविड गॉवर, राशिद लतीफ, उमर गुल, आकिब जावेद और पाकिस्तानी महिला टीम की कैप्टन सना मीर यह वाकया देखकर बेहद हैरान थे।

अनीता आनंद बनीं कनाडा की पहली हिन्दू मंत्री, ‘खालिस्तान समर्थक’ हरजीत सज्जन से छीना गया रक्षा मंत्रालय

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने मंगलवार (26 अक्टूबर, 2021) को अपने मंत्रिमंडल का कायापलट किया। भारतीय मूल की अनीता आनंद को जस्टिन ट्रुडो मंत्रिमंडल में जगह मिली है, जो कनाडा की पहली हिन्दू रक्षा मंत्री होंगी। इससे पहले ‘वैंकूवर पुलिस विभाग’ में जासूस रह चुके 51 वर्षीय सिख हरजीत सज्जन कनाडा के रक्षा मंत्री थे, जिन्हें अब ‘इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी’ मंत्रालय सौंपा गया है। 54 वर्षीय अनीता आनंद ओकविल से लगातार दूसरी बार सांसद बनी हैं।

हरजीत सज्जन ने सेना में यौन शोषण मामलों को जिस तरह से हैंडल किया था, उसे लेकर उनकी खासी आलोचना हो रही थी। उन्हें ‘खालिस्तान समर्थक’ बताते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था। जस्टिन ट्रुडो के नए मंत्रिमंडल में ‘जेंडर बैलेंस’ का ध्यान रखने का दावा किया गया है और इसमें कुल 38 सदस्य हैं। एक महीने पहले ही ‘लिबरल पार्टी’ दोबारा सत्ता में लौटी है। कनाडा की सेना पर अभी खासा दबाव है कि वो अपनी संस्कृति को बदले और यौन शोषण के अपराधों के मामले में न्याय के लिए बेहतर वातावरण व व्यवस्था विकसित करे।

पेशे से कॉर्पोरेट अधिवक्ता रहीं अनीता आनंद का ‘कॉर्पोरेट गवर्नेंस’ में गहरा अनुभव है। व्यापार और ऑपरेशन्स के प्रबंधन के लिए जिन नियम-कानूनों की आवश्यकता होती है, उसका उन्हें पूरा ज्ञान है। अनीता आनंद, हरजीत सज्जन और बर्दिश चग्गर तीन भारतीय मूल के मंत्री थे, जिन्होंने सितंबर में हुए चुनावों में जीत दर्ज की। नवंबर 2019 में उन्हें ‘पब्लिक सर्विसेज एंड प्रोक्योरमेंट’ मंत्री नियुक्त किया गया था। वो ओकविल से ताज़ा चुनाव में 46% वोट शेयर से जीत कर आई हैं।

उन्हें पिछली बार के 30,265 के मुकाबले इस बार 28,137 वोट मिले और वो 3707 वोटों से जीतने में कामयाब रहीं। कोरोना काल में उन्हें वैक्सीन विभाग की जिम्मेदारी दी गई और जस्टिन ट्रुडो के साथ कई चुनावी रैलियों में भी वो साथ दिखीं। इस दौरान उन्होंने महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी भूमिका निभाई। 90 के दशक में किम कैम्पबेल के बाद कनाडा की पहली महिला रक्षा मंत्री हैं। साथ ही वो भारतीय मूल की पहली हिन्दू हैं, जिन्हें कनाडा के फ़ेडरल मिनिस्ट्री में जगह मिली।

तमिल-पंजाबी मूल की अनीता आनंद ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो’ के कानूनी विभाग में प्रोफेसर भी रह चुकी हैं। उन्होंने ‘एयर इंडिया’ के साथ उस जाँच टीम का भी सहयोग किया, जिसे 23 जून, 1985 को ‘कनिष्क’ फ्लाइट 182 में हुए बम विस्फोट की जाँच के लिए बनाया गया था। खालिस्तानियों द्वारा उस फ्लाइट में बम रखा गया था, जिससे उसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि वो सेना में कनाडा की जनता का विश्वास फिर से दृढ करेंगी।

उन्होंने कहा, “मैं सावधान हूँ। मैं प्रतिबद्ध हूँ। मैं दृढ हूँ। मैं परिणाम प्राप्त करने में यकीन रखती हूँ।” कनाडा के विशेषज्ञों ने कहा है कि महामारी के समय अच्छा प्रदर्शन करने के कारण रक्षा मंत्री के लिए अनीता आनंद एक सही चुनाव हैं। एक महिला को रक्षा मंत्रालय देकर कनाडा की सेना में यौन शोषण के पीड़ितों और उनके परिवारों को एक सन्देश दिया गया है कि सरकार सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने उन्हें ‘वर्ल्ड क्लास प्रशासक’ बताया है।

मुस्लिमों की ‘सांस्कृतिक पहचान’ मिटा रहा चीन: मस्जिदों से हटाए जा रहे गुंबद व मीनारें, हो रहा है चीनीकरण

चीन के खतरनाक इरादों से जहाँ दुनिया परेशान है, वहीं चीन की मुस्लिमों के प्रति सख्त कार्रवाई जारी है। अब चीन ने मुस्लिमों की सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने के लिए मस्जिदों से गुंबद और मीनारें हटाकर उनका ‘चीनीकरण’ करना शुरू कर दिया है। चीन ने मुस्लिमों की सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है और मस्जिदों से गुंबद और मीनारों को खत्म कर रहा है। 

चीन के उत्तर-पश्चिमी शहर जिनिंग में स्थित डोंगुआन मस्जिद चीन की कम्युनिस्ट सरकार की ताजा शिकार हुई है। लगभग 700 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक मस्जिद के हरे गुंबदों को नष्ट कर दिया गया है। एनपीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि डोंगगुआन मस्जिद के बाहर अनार बेचने वाले मुस्लिम किसान अली ने कहा कि चीन सरकार के अधिकारी कहते हैं कि वे इस जगह को बीजिंग के तियानमेन चौक की तरह खूबसूरत बनाना चाहते हैं। दरअसल उनकी इच्छा इन मस्जिदों का चीनीकरण करने की है। 

किसान अली ने यह भी कहा कि एनपीआर सिर्फ उनके पहले नाम का ही इस्तेमाल करें क्योंकि यहाँ लोगों को आदेश है कि वे गुंबद को हटाने के बारे में किसी को न बताएँ। चीन देश भर में हजारों मस्जिदों से गुंबद और मीनारें हटा रहा है ताकि मुस्लिमों की धार्मिक पहचान खत्म हो सके। चीनी अधिकारी मानते हैं कि ये गुंबद और मीनारें विदेशी धार्मिक प्रभाव का प्रतीक हैं और ये देश के चीनीकरण में सबसे बड़ी बाधा है।

शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के साथ चीन सरकार एक सुनियोजित रणनीति के तहत उनकी धार्मिक पहचान मिटाने की दिशा में काम कर रही है। करीब दो साल पहले यहाँ पर चीनी अधिकारियों ने मस्जिदों के आगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगाकर उन्हें ढँकने की कोशिश की। अब वह गुंबदों को गिराने की कार्रवाई कर रहा है।

एनपीआर के मुताबिक, चीन में अपनाई जाने वाली जातीय नीति, सोवियत दृष्टिकोण पर आधारित है जिसमें नागरिकों को 55 अलग-अलग जातीय अल्पसंख्यक समूहों में वर्गीकृत किया गया था। इनमें से प्रत्येक को उनके क्षेत्र में सीमित सांस्कृतिक स्वतंत्रता दी जाती थी। चीन भी इसी तर्ज पर काम कर रहा है।

अमेरिकी यूनिवर्सिटी में चीनी मूल के इतिहास विशेषज्ञ मा हैयून बताते हैं कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग अब सांस्कृतिक रूप से भी चीन पर शासन करना चाहते हैं। इसके तहत वे देश में सिर्फ मंदारिन भाषा का प्रसार चाहते हैं। चीन में हजारों मस्जिदों से गुंबद और मीनारें हटाने का यह अभियान एक नई नीति के तहत 2016 में छेड़ा गया था। इसके तहत आतुश के सुंगाग गाँव में भी एक मस्जिद को गिरा दिया गया था और वहाँ पर शौचालय का निर्माण कराया गया था।