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अमेरिकी ‘सैनिक’ का शव पीछे पड़ा था, आगे बेटी करवा रही थी सेक्सी फोटोशूट

अमेरिका से एक बेहद अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। वहाँ एक लड़की ने अपने पिता के मरने के बाद उन्हीं के शव के साथ रिवीलिंग ड्रेस में सेक्सी फोटोशूट कराया है। अब यूजर्स उसे बेहूदा और घटिया कह रहे हैं।

तस्वीर में देख सकते हैं कि लड़की काले रंग की ड्रेस में है और पोज दे रही है। वहीं पिता का शव पीछे खुले कॉफिन में पड़ा है। अगली फोटो में उसने हाथ जोड़कर पोज दिया है लेकिन चेहरे पर उसके हँसी साफ दिख रही है।

साभार: डेलीमेल

सबसे घटिया बात तो यह है कि उसने अपने पोस्ट में RIP लिखा है और साथ में #papi #dadless #veteran #ptsd #funeral #neverforgotten जैसे हैशटैग डाले। तस्वीर देख कर साफ पता चल रहा है कि लड़की को अपने पिता की मौत का दुख नहीं हैं बल्कि उसने तो इस मौके पर भी अपने सोशल मीडिया के लिए फोटो खिंचवा ली।

साभार: डेलीमेल

लड़की के चेहरे पर पूरा मेकअप हो रखा है। शरीर पर डिजाइनर ब्लेजर है और पीछे ताबूत जिसमें पिता का शव है और उस पर अमेरिकी झंडा लगा है। यूजर्स इस फोटो को देख फौरन समझ गए कि जिस व्यक्ति की मौत पर उसकी बेटी ऐसी घिनौनी हरकत कर रही है वो देश का कोई पुराना सिपाही है।

साभार: डेलीमेल

ऐसे में यूजर्स का गुस्सा उस पर फूट पड़ा। यूजर्स ने कहा, “ये कु$^& अपने पिता की इज्जत नहीं कर सकती जो देश के लिए लड़ा। ये केवल बेहूदगी नहीं, अपमानजनक भी है।”

कुछ लोगों ने ऐसी हरकत को क्लिक करने वाले पर अपना गुस्सा उतारा। लोगों ने पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति में फोटो खींचने के लिए कोई तैयार हुआ भी कैसे। वहीं कुछ ने उसके कपड़ों को घटिया कहा और कुछ ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता कि कोई अपना मरे और इस तरह के कपड़े पहने जाएँ।

मालूम हो कि लड़की की पहचान नहीं हो सकी है। लेकिन डेलीमेल ने रिपोर्ट करते हुए बताया कि लड़की ने सारी फोटोज अपने सोशल मीडिया पर डाली थी। इसमें वह अपने बालों का स्टाइल, रंगे हुए नाखून, हाफ ब्लेजर दिखा रही है।

अफगान महिला ने रोटी के लिए नवजात बच्ची को ₹37000 में बेचा, तालिबान राज में 2.28 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार

लाचारी क्या होती है, इसे मौजूदा वक्त में अफगानिस्तान के लोगों से बेहतर शायद ही कोई समझ सकता है, जहाँ अपना पेट भरने के लिए माँओं को अपनी संतानों तक का सौदा करना पड़ रहा है। अफगानिस्तान में जब से तालिबान का शासन स्थापित हुआ है, वहाँ के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। वहाँ के हालात कितने बुरे हैं, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि काबुल की एक महिला को अपनी दुधमुँही बेटी को केवल 500 डॉलर (करीब 37,517 रुपए) में बेचना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बेबस माँ को अपने दूसरे बच्चों और अपना पेट पालने के लिए नवजात को बेचना पड़ा है। नवजात के खरीददार ने परिवार को पहली किश्त के तौर पर 250 डॉलर दिए। बाकी की रकम जब वह बच्ची को ले जाएगा तब देगा। खरीददार का कहना है कि वह अपने बेटे से शादी करने के लिए लड़की की परवरिश करना चाहता है। हालाँकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। महिला का कहना है कि जो 250 डॉलर मिले हैं, इससे कुछ महीनों तक उसके परिवार का खर्चा चल जाएगा।

लाचार माँ ने बताया, “मेरे दूसरे बच्चे मर रहे थे, इसलिए हमें अपनी बेटी को बेचना पड़ा। मैं काफी दुखी हूँ। काश मुझे अपनी बेटी को बेचना नहीं पड़ता। बच्ची के पिता कूड़ा उठाने का काम करते हैं, लेकिन इससे वो कुछ भी नहीं कमा पाते हैं। हमारे पास न आटा है, न तेल। मेरी बेटी को यह नहीं पता कि उसका क्या भविष्य होगा। मुझे बिल्कुल भी नहीं पता कि वो बड़ी होने पर इसके बारे में क्या सोचेगी, लेकिन मुझे ये करना पड़ेगा।”

1 मिलियन लोगों के मरने का खतरा

अफगानिस्तान के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार और अराजकता से तबाह देश 40 फीसदी विदेशी सहायता पर निर्भर है, लेकिन तालिबान के कब्जे के साथ ही विदेशी फंडिंग भी रूक गई है। इससे वहाँ के हालात और खराब हो गए हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान की आधी से अधिक आबादी यानी लगभग 2.28 करोड़ लोग, आने वाले महीनों में तीव्र कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में 10 लाख बच्चों को अगर तत्काल इलाज नहीं मिला तो उनके मरने का खतरा होगा।

डब्ल्यूएफपी के मुताबिक, अफगानिस्तान में बदतर होते हालात को सँभालने के लिए लाखों डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन तालिबान की वजह से विदेशी सरकारें दान नहीं दे रही हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि हर किसी को खिलाने के लिए 220 मिलियन डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। वैश्विक नेताओं ने अफगानिस्तान के लिए लगभग 1 अरब डॉलर की सहायता देने का वादा किया है, लेकिन ये लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि कैसे इस फंड को तालिबान के हाथ लगने से बचाया जाए।

UP में बाराबंकी एसपी ऑफिस में धार्मिक पोस्टर क्यों, वहीं की पुलिस ने क्यों लिया संज्ञान? सोशल मीडिया पर बवाल की हकीकत

उत्तर प्रदेश में एक जिला है बाराबंकी। यहाँ के पुलिस अधीक्षक (मतलब एसपी) हैं अनुराग वत्स। हाल ही में इन्होंने पदभार संभाला। इसी दौरान मीडिया से बीतचीत भी की।

बाराबंकी के एसपी अनुराग वत्स जब मीडिया से बात करे थे, तो उनकी कुर्सी के पीछे वाली दीवार पर एक पोस्टर लगा दिखा। सोशल मीडिया पर इसको लेकर अब बवाल हो गया है। इस बवाल के बाद अब बाराबंकी पुलिस ने ही इस पर संज्ञान ले लिया है।

बाराबंकी एसपी, धार्मिक पोस्टर और सोशल मीडिया

सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि पुलिस अधिकारी के ऑफिस में आखिर धार्मिक पोस्टर क्यों है?

कुछ तो यहाँ तक लिख रहे हैं कि यदि इसी दीवार पर भगवान राम की फोटो होती तो अब तक सेकुलर और वामपंथी गैंग एसपी महोदय को #SameerWakhende की तरह किसी अन्य हैशटैग से निशाना बना चुकी होती।

अब जानते हैं कि आखिर बाराबंकी के एसपी अनुराग वत्स की कुर्सी के पीछे वाली दीवार पर जो तस्वीर लगी है, आखिर वो है कहाँ की और वो लगाई क्यों गई?

बाराबंकी का देवा शरीफ, पारिजात वृक्ष और लोधेश्वर मंदिर

लखनऊ से 42 किलोमीटर दूर और बाराबंकी से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है देवा शरीफ। यह हाजी वारिस अली शाह का जन्म स्थान है। 7 अप्रैल 1905 को इनका निधन हुआ था और इसी जगह पर एक इमारत बनवाई गई। बाराबंकी एसपी अनुराग वत्स की कुर्सी के पीछे वाली दीवार पर जो तस्वीर लगी है, उसके दाहिने साइड का हिस्सा इसी इमारत का है।

फोटो साभार: INDIAN OPINION TV

सोशल मीडिया पर जिन लोगों ने इस तस्वीर को लेकर बवाल किया, उन्होंने शायद पूरी वीडियो नहीं देखी होगी। वीडियो की शुरुआत में आपको पोस्टर के बाएँ साइड का भी हिस्सा दिखेगा। इस हिस्से में आपको एक पेड़ दिखाई देगा। दरअसल यह कोई आम पेड़ नहीं है। पारिजात वृक्ष है यह।

बाराबंकी से 38 किलोमीटर दूर एक गाँव है – किंतूर। गाँव का नाम पांडवों की माँ कुंती के नाम पर है। यहाँ कई प्राचीन मंदिर और खंडहर आपको दिखेंगे। इन्हीं मंदिरों में से एक का निर्माण कुंती ने करवाया था। इसी मंदिर के पास है यह पारिजात वृक्ष।

वीडियो की शुरुआत में इस वृक्ष से बाएँ आपको एक लाल-सफेद एक दूसरी आकृति भी दिखेगी। यह बाराबंकी के ही रामनगर तहसील में स्थित पौराणिक शिव मंदिर लोधेश्वर मंदिर की है। माना जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल से भी पहले की है।

यह सारी जानकारी बाराबंकी जिला की वेबसाइट पर उपलब्ध है – पर्यटन वाले सेक्शन में। मतलब जिले के आला पुलिस अधिकारी (एसपी अनुराग वत्स) के पीछे जो पोस्टर लगी है, उसका मकसद धार्मिक न होकर पर्यटन को बढ़ावा देना है। सोशल मीडिया पर लोग इतना खोजते-पढ़ते नहीं हैं। अफसोस कि बाराबंकी पुलिस विभाग ने भी बिना जाँच-पड़ताल के अपने ही विभाग अध्यक्ष की फोटो पर संज्ञान ले लिया।

भारत की हार पर जिसने लिखा- हम जीत गए, वह नफीसा गिरफ्तार: उदयपुर के स्कूल ने पहले ही नौकरी से निकाल दिया था

नफीसा अटारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। T-20 विश्व कप क्रिकेट में भारत की हार के बाद उसने लिखा था, ‘हम जीत गए’। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उसने बताया है कि उसका इरादा पाकिस्तान का समर्थन या देश का विरोध करना नहीं था। उसने मजाक में यह पोस्ट किया था, जिसके लिए वह सार्वजनिक तौर पर माफी माँग चुकी है।

नीरजा मोदी स्कूल में टीचर रही नफीसा पर उदयपुर के अंबामाता थाना में मामला दर्ज किया गया था। उसे 153 बी (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ भाषण या ऐसा कार्य करना) के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद उसे स्कूल से भी निकाल दिया गया था।

बता दें कि नफीसा ने नौकरी से निकाले जाने के बाद कहा था कि उसके परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी भारत के खिलाफ टी 20 विश्व कप में पाकिस्तान की टीम का समर्थन कर रहे थे। उसने बताया था कि भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान उनका परिवार दो टीमों में बँट गया था और अपनी-अपनी टीम का समर्थन किया। उनके अनुसार उनकी टीम पाकिस्तान का समर्थन कर रही थी, इसलिए उन्होंने जीत के बाद व्हाट्सएप पर स्टेटस पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि वे वास्तव में पाकिस्तान की टीम का समर्थन नहीं करती हैं। नफीसा ने अपने बयान में कहा, “हमारे परिवार के सदस्य 2 समूहों में विभाजित थे और उन्होंने अपनी टीमों का समर्थन किया। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं पाक का समर्थन करती हूँ।”

मैच के बाद उसने अपने वाट्सएप स्टेटस पर पाकिस्तान के खिलाड़ियों के फोटो के साथ “जीत गए, हम जीत गए (Jeeeet gayeeee… We wonnn)” लगाया था। जिसको लेकर स्कूल के एक अभिभावक ने पूछा था कि क्या वह पाकिस्तान को सपोर्ट करती हैं तो उसने जबाव में भी ‘हाँ’ लिखा था। जिसको लेकर लोगों ने शिक्षिका के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कराए जाने को लेकर प्रदर्शन भी किया। इस घटनाक्रम के बाद स्कूल के प्रबंधन ने शिक्षिका नफीसा अटारी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करते हुए उनकी सेवाएँ समाप्त कर दी।

विरोध के आगे झुकी केजरीवाल सरकार, दिल्ली में छठ पर लगा प्रतिबंध वापस लिया: सिसोदिया ने कहा – सख्त होंगे प्रोटोकॉल्स

भाजपा के लगातार विरोध प्रदर्शन और पूर्वांचल वासियों के प्रतिरोध के आगे AAP सरकार को झुकना पड़ा है। दिल्ली सरकार ने छठ महापर्व मनाने की अनुमति दे दी है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ‘दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA)’ की बैठक के बाद कहा कि त्योहारों का मौसम आ रहा है और खास कर छठ पूजा को लेकर लोगों की संवेदनाएँ थीं, इसीलिए निर्णय लिया गया है कि छठ पूजा कराने की अनुमति दिल्ली में दी जाएगी।

हालाँकि, उन्होंने इस दौरान ये भी कहा कि काफी कड़े दिशानिर्देशों के साथ दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई पूर्व-निर्धारित जगहों पर सीमित संख्या में ही लोगों को शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान मास्क सहित कोरोना के सभी दिशानिर्देशों का पालन कराया जाएगा। उन्होंने दिल्ली वासियों से बहुत अच्छे से और सावधानी से छठ मनाने की अपील करते हुए कहा,”छठी मैया सबका कल्याण करें।” दिल्ली के डिप्टी सीएम ने इसे एक महत्वपूर्ण त्योहार बताया।

याद दिला दें कि हाल ही में भाजपा ने छठ के आयोजन पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए दिल्ली की AAP सरकार के विरुद्ध तगड़ा विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को गहरी चोटें आई थीं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। भाजपा ने छठ के आयोजन पर प्रतिबंधों का विरोध करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। दिल्ली सरकार ने इसका ठीकरा केंद्र के सिर फोड़ दिया था, जिसके बाद सवाल पूछे गए थे कि क्या ईद पर छूट देने के लिए केंद्र की सलाह ली गई?

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सिसोदिया के केंद्र को भेजे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “मनीष सिसोदिया जी, जी ईद पर बाजार मनसुख भाई से पूछ के खोला था? नाटक मत करो, आपके चेहरे नंगे हो चुके है।” वहीं दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा था, “बकरीद और ईद पर जब दिल्ली सरकार ने छूट दी थी तब केंद्र सरकार को क्यों नहीं लिखा केजरीवाल जी? केजरीवाल और सिसोदिया, दोनों ने हजारों बच्चों को स्टेडियम में बुलाकर मेंटोर प्रोग्राम लॉन्च किया, तब क्यों ना लिए दिशानिर्देश केंद्र से?”

बता दें कि 30 सितंबर, 2021 को जारी किए गए एक आदेश में DDMA ने कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए हुए नदी के किनारे, घाटों और मंदिरों सहित सभी सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा के आयोजनों पर रोक लगा दी थी। वहीं केंद्र सरकार द्वारा राजधानी दिल्ली में छठ पूजा में हिस्सा लेने वाले 10,000 लोगों के लिए मंगलवार से एक स्पेशल कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू करने की घोषणा की गई है, जिसकी शुरुआत केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी बुराड़ी के पास स्थित कादीपुर में करेंगे।

नगर निगम का टैक्स इंस्पेक्टर फरहान अहमद, शादी का झाँसा दे किया रेप; फिर धर्म परिवर्तन का डालने लगा दबाव

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से शादी का झाँसा दे एक युवती से संबंध बनाने और फिर उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का मामला सामने आया है। आरोपित नगर निगम का टैक्स फरहान अहमद है। युवती की शिकायत पर रामगढ़ताल पुलिस ने रेप और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का केस दर्ज किया है।

युवती का आरोप है कि टैक्स इंस्पेक्टर उस पर धर्म बदलने का दबाव बना रहा था। ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी भी दे रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज कर पुलिस छानबीन कर रही है।

रामगढ़ताल इलाके की रहने वाली युवती ने पुलिस को दी शिकायत में लिखा है कि जनवरी 2021 में फेसबुक पर उसकी दोस्ती नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर फरहान अहमद से हुई थी। जान-पहचान बढ़ने पर उससे मुलाकात होने लगी। फरहान के दोस्त शुभम गुप्ता का तारामंडल के वसुंधरा में फ्लैट है। घुमाने के बहाने फरहान उसे कई बार वहाँ ले गया।

युवती का आरोप है कि शादी करने का झाँसा देकर उसके साथ रेप किया गया। जब उसने फरहान से शादी के लिए कहा तो वह धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर जान से मारने की धमकी देने लगा। तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर रामगढ़ताल पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि मामले की पड़ताल की जा रही है। तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र में एक युवक ने मजहब छिपाकर हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसाया था। बात जब शादी की आई तो अपनी असली पहचान के साथ सामने आया और निकाह का दबाव बनाने लगा। धोखे का एहसास होने पर युवती ने युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कराया। जिसके बाद आरोपित हसन रजा को गिरफ्तार कर लिया गया।

NCB अफसर का निकाहनामा लाए नवाब मलिक, काजी भी आए: फैमिली ने फिर दोहराया- हिंदू हैं वानखेड़े

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खाने के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स केस में गिरफ्तार करने वाले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को इन दिनों उनके धर्म को लेकर टारगेट किया जा रहा है। एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक उनके खिलाफ एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। नवाब मलिक ने बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को समीर वानखेड़े पर एक नया आरोप लगाते हुए उनका कथित ‘निकाहनामा’ शेयर किया है।

नवाब मलिक ने लिखा है, ”साल 2006 में 7 दिसंबर, गुरुवार को रात 8 बजे समीर दाऊद वानखेड़े और शबाना कुरैशी का निकाह हुआ था। यह निकाह मुंबई के अंधेरी (वेस्ट) के लोखंडवाला कॉम्पलेक्स में हुआ था।”

नवाब मलिक द्वारा ट्वीट किया गया निकाहनामा

महाराष्ट्र के मंत्री ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ”निकाह में 33 हजार रुपए मेहर के रूप में अदा की गई थी। इसमें गवाह नंबर 2 अजीज खान थे। वह यासमीन दाऊद वानखेड़े के पति हैं जो कि समीर दाऊद वानखेड़े की बहन हैं।”

समीर वानखेड़े के निकाह से जुड़े नवाब मलिक के दावे के बाद अब मुजम्मिल अहमद नाम के एक काजी सामने आए हैं। काजी ने दावा किया है कि उन्होंने ही समीर वानखेड़े और शबाना नाम की लड़की का निकाह कराया था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने जो निकाहनामा शेयर किया है वह असली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काजी मुजम्मिल अहमद ने कहा, ”मैंने निकाह पढ़ाया था, निकाहनामा बिल्कुल सही है। उस वक्त समीर, शबाना (समीर की पहली पत्नी), उनके पिता सब मुसलमान थे। काजी बोले, “अगर समीर हिंदू होते तो निकाह ही नहीं होता, क्योंकि शरियत के हिसाब से ऐसा नहीं हो सकता। शरियत के खिलाफ जाकर काजी निकाह नहीं पढ़ाता। आज वह कुछ भी कहें, उस वक्त समीर मुसलमान थे।”

काजी ने मीडिया को यह भी बताया कि साल 2006 में बड़ी सी जगह पर यह शादी हुई थी। इसमें करीब 2 हजार लोग शामिल हुए थे। इनमें कई हाई प्रोफाइल लोग शामिल थे। काजी ने कहा कि 15 मिनट के अंदर निकाह पढ़वा दिया गया था। समीर वानखेड़े का निकाह पूरी तरह से इस्लामी तौर-तरीके से हुआ था।

इस विवाद पर समीर वानखेड़े के पिता और पत्नी ने कहा कि उन्होंने सच से कभी इनकार नहीं किया है। समीर की पत्नी क्रांति ने कहा, “जो झूठ है और उसे हमारे मत्थे जो मढ़ रहे हैं उस चीज को हमलोग सहन नहीं कर सकते। समीर वानखेड़े को यह पता था कि वे हिंदू हैं, इसके लिए उनको स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत शादी करनी है, वो उन्होंने की। उसके लीगल डॉक्युमेंट्स हमारे पास हैं। दोनों बालिग हैं और दोनों से अपने साइन किये हैं। तो फर्जीवाड़ा कहाँ है? समीर वानखेड़े ने किसी को फँसाया? साफ-साफ लिखा है यहाँ पर कि वो हिंदू हैं। समीर वानखेड़े ना ही अपने रीलिजन और ना ही अपने जात के बारे में कभी झूठ बोला है। वो आदमी सच्चा है। उसके ऊपर दाग लगाने की कोशिश करोगे, वो हीरे जैसा निखर कर आएगा।”

ड्रग्स मामले में ऐसे सामने आया बड़ा ट्विस्ट

आर्यन खान ड्रग्स मामले में बड़ा ट्विस्ट तब सामने आया जब इस केस के प्राइम विटनेस केपी गोसावी के बॉडीगार्ड ने बड़ा खुलासा किया। बॉडीगार्ड प्रभाकर सैल ने अपने हलफनामे में बताया था कि एनसीबी के दफ्तर में पंचनामा पेपर बताकर खाली कागज में जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे। इतना ही नहीं केपी गोसावी व एक अन्य के साथ इस मामले में 25 करोड़ की रिश्वत की भी माँग की गई थी। बाद में यह सौदा 18 करोड़ में तय हुआ था, जिसमें आठ करोड़ रुपए समीर वानखेड़े को देने की बात हो रही थी। गवाह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप के बाद एनसीबी के जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े 25 अक्टूबर को स्पेशल NDPS कोर्ट के सामने पेश हुए और एफिडेविट दाखिल किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, NDPS कोर्ट में एक एफिडेविट समीर वानखेड़े की तरफ से दाखिल किया गया और दूसरा एनसीबी की तरफ से है। समीर वानखेड़े ने एफिडेविट में कहा था कि उन्हें धमकी दी जा रही है और जाँच को प्रभावित किया जा रहा है।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने ट्विटर पर एक पत्र साझा किया था

महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने ट्विटर पर एक पत्र साझा कर वानखेड़े पर कई आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि यह पत्र उन्हें एनसीबी के एक अनाम अधिकारी से मिला है। चार पन्नों के पत्र में वानखेड़े पर बॉलीवुड स्टारों से वसूली करने के आरोप लगाए गए हैं। मलिक ने अपने ट्वीट में बताया कि यह पत्र वानखेड़े के खिलाफ एनसीबी की जाँच का हिस्सा होना चाहिए। पत्र में अनाम अधिकारी ने कहा है कि वह बीते दो साल से एनसीबी के मुंबई कार्यालय में तैनात है। इसके अलावा मलिक ने दावा किया है कि ये समीर वानखेड़े मुस्लिम हैं। उन्होंने एक सर्टिफिकेट जारी किया था, जिसमें उनके पिता का नाम ‘दाऊद’ लिखा हुआ था।

समीर वानखेड़े के पिता ने कहा- मेरा नाम दाऊद नहीं, ज्ञानदेव वानखेड़े है

इन आरोपों को निराधार बताते हुए समीर वानखेड़े के पिता ने इंडिया टीवी न्यूज चैनल को बताया था, ”मेरा नाम दाऊद नहीं, ज्ञानदेव वानखेड़े है। मेरे पास सारे सबूत हैं। एसएसई, बीए, पोस्ट ग्रेजुएशन, एलएलबी के सर्टिफिकेट हैं मेरे पास। इन सबमें मेरा नाम ज्ञानदेव वानखेड़े है। मुझे समझ नहीं आ रहा है दाऊद नाम कहाँ से आया।” उन्होंने कहा कि जिस तरह से आरोप लगाने वाला बोल रहा है, उससे तो यही लगता है कि यह उसी का कोई फर्जीवाड़ा है। ज्ञानदेव वानखेड़े से जब पूछा गया कि नवाब मलिक ऐसा क्यों करेंगे, इस पर समीर के पिता ने कहा, “मेरे बेटे ने नवाब मलिक के दामाद को गिरफ्तार किया था। वो 8 से 10 महीना जेल में बंद था। इससे पहले वो कुछ नहीं बोला, लेकिन अब वो जल रहा है। इसलिए ऐसा कर रहा है।”

मलिक को वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडेकर ने दिया जवाब

समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडेकर ने कहा था कि इस तरह के पत्र का कोई मतलब नहीं है। मेरे पति गलत नहीं हैं और इसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने इस मसले पर कोर्ट जाने से इनकार करते हुए कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं उनको अदालत जाना चाहिए। क्रांति ने कहा था, “हम करोड़पति नहीं हैं। हम साधारण लोग हैं। समीर एक ईमानदार अधिकारी हैं। कई लोग हैं जो चाहते हैं कि उनको हटा दिया जाए।”

कोई चाहता है ‘गजवा-ए-हिन्द’ तो किसी को धरती पर एक भी गैर-मुस्लिम बर्दाश्त नहीं: Pak खिलाड़ियों का ‘क्रिकेट जिहाद’

T20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हरा दिया, जिसके बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटरों की तरफ से भड़काऊ बयानबाजी का दौर चालू हो गया। पूर्व तेज़ गेंदबाज वकार यूनुस ने तो यहाँ तक कह दिया कि सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान का ‘हिन्दुओं के बीच’ ग्राउंड पर नमाज पढ़ने उनके लिए बहुत-बहुत स्पेशल है। 90 के दशक के दूसरे हाफ में भारतीय तेज़ गेंदबाजी का स्तंभ रहे वेंकटेश प्रसाद ने इसे ‘जिहादी मानसिकता’ करार देते हुए वकार यूनुस को ‘बेशर्म’ बताया।

वैसे, ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों की तरफ से इस तरह के बयान दिए जा रहे हों। पाकिस्तान के अधिकतर खिलाड़ी इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए इस तरह हिन्दू धर्म को नीचा दिखाते रहे हैं और इस्लामी धर्मांतरण के लिए प्रयास करते रहे हैं। ये ‘जिहादी सोच’ आज की नहीं है। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कह चुके हैं कि जब भी वो भारत के खिलाफ खेलते थे, वो कश्मीर के बारे में सोचते थे और इसे ‘जिहाद’ की तरह लेते थे।

बता दें कि 90 के दशक में इमरान खान पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान हुआ करते थे। पाकिस्तान के एक आया क्रिकेटर सोहैल तनवीर ने ‘मुँह में राम, बगल में छुरी’ कहावत की बात करते हुए ‘हिन्दुओं की मानसिकता’ की बुराई की थी। क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज़ गेंद फेंकने का रिकॉर्ड बनाने वाले शोएब अख्तर ने चर्चा की थी कि कैसे इस्लाम की पुस्तकों में ‘गजवा-ए-हिन्द’ के बारे में लिखा है और अटैक की नदी दो बार खून से लाल होगी। उन्होंने कहा था कि हमारी फ़ौज कश्मीर फतह कर के आगे बढ़ेगी।

इसी तरह पाकिस्तानी टीम के कप्तान रहे इंजमाम उल हक़ ने एक वाकया सुनाया था, जो कराची में वेस्टइंडीज के साथ टेस्ट मैच का था। उन्होंने बताया था कि बल्लेबाज मोहममद युसूफ ने ब्रायन लारा को को भोजन पर निमंत्रित कर के इस्लाम में धर्मांतरण की दावत दी और अल्लाह के बारे में बताया। उन्होंने कहा था कि इस्लाम में सारे तौर-तरीकों का वर्णन सुन कर ब्रायन लारा खामोश हो गए। उन्होंने बताया था कि जब वो इंग्लैंड में एक क्लब की तरफ से खेलते थे, तब उन्होंने और सकलैन मुश्ताक ने नॉन-मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने की दावत दी थी।

वो यहाँ तक धमका चुके हैं कि अगर मुस्लिम अपनी ‘मुसलमानियत’ पर आ जाए तो दुनिया में कोई गैर-मुस्लिम बचेगा ही नहीं। इसी तरह पाकिस्तान के एक अन्य पूर्व बल्लेबाज सईद अनवर ने कहा था कि दुनिया के 600 करोड़ गैर-मुस्लिमों को जहन्नुम की आग से बचाने के लिए उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करना होगा और नमाज पढ़ने के लिए कहना होगा। इसी तरह मोहम्मद युसूफ ने कहा था कि पाकिस्तान के सारे मुस्लिम इस्लाम अच्छे से मानने लगे तो मुल्क में कोई गैर-मुस्लिम नहीं बचेगा।

इसी तरह सक़लैन मुश्ताक ने भी मोहम्मद युसूफ द्वारा रिकार्ड्स तोड़े जाने के पीछे ईसाई से इस्लाम में उनके धर्मांतरण और कुरान-हदीथ की पढ़ाई को श्रेय दिया था। उन्होंने बताया था कि इसीलिए मोहम्मद युसूफ की औसत 40 से 52 के पार पहुँच गई और उन्होंने खुद बताया था कि अल्लाह की मर्जी से ये हुआ। इसी तरह पाकिस्तान के जेवलिन प्लेयर अरशद नदीम का कहना था कि वो मुस्लिमों और इस्लामी मुल्कों के लिए जीतना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक न जीत पाने का उन्हें अफ़सोस हुआ, क्योंकि सारे मुस्लिमों और मुस्लिम मुल्कों से उन्हें प्रोत्साहन मिल रहा था।

इसी तरह पाकिस्तानी टीम के एक अन्य पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी भी तालिबान के फैन हैं। उनका कहना है कि तालिबान सकारात्मक मानसिकता के साथ आए हैं और क्रिकेट को समर्थन के साथ-साथ वो महिलाओं को काम की इजाजत दे रहे हैं। इंजमाम उल हक़ ने तो यहाँ तक बताया था कि भारत के साथ सीरीज के दौरान इरफ़ान पठान, मोहम्मद कैफ और ज़हीर खान को वो नमाज के वक्त मौलवी तर्क जमील का भाषण सुनने के लिए बुलाते थे। उन्होंने बताया था कि कुछ और भारतीय खिलाड़ी भी साथ आते थे और मौलाना को सुनते थे।

उन्होंने बताया था, “हरभजन सिंह ने मुझसे कहा – ये आदमी (मौलाना) जो कहता है, मेरा दिल कहता है कि उसकी हर बात मान लूँ। मैंने पूछा कि मान ले, दिक्कत क्या है? उन्होंने कहा कि मैं तुमसे देख कर रुक जाता हूँ, क्योंकि तुम्हारी ज़िंदगी ऐसी नहीं है। इसीलिए, दीन से दूरी मत रखो।” इंजमाम पूरी दुनिया को इस्लाम में धर्मांतरित करने और उनमें दीन फैलाने की बातें करते हैं। उन्होंने दावा किया था कि मुश्ताक अहमद जब इंग्लैंड के बॉलिंग कोच थे, तब गोरे (इंग्लैंड के प्लेयर्स) ने मस्जिद जाना शुरू कर दिया था और वो कुरान पढ़ते थे।

मोहम्मद युसूफ भी कहते हैं कि गैर-मुस्लिमों के लिए जन्नत में प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। हाल ही में शोएब अख्तर ने स्पष्ट कहा कि वो ‘टू नेशन थ्योरी’ में यकीन रखते हैं और हरभजन सिंह उनके सामने ‘अमन की आशा’ जैसी बातें करते रह गए। इसका सीधा अर्थ है कि पाकिस्तान के क्रिकेटर क्रिकेट में कितने ही झंडे गाड़ ले, उनका उद्देश्य होता है इस्लामी धर्मांतरण। वो अपनी सफलता इसी में मापते हैं कि कितनों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया, कुरान पढ़ाया और मुल्ले-मौलवियों के पास भेजा।

मुस्लिम है मोहम्मद शमी, इसलिए गाली: पाकिस्तानी हैंडल्स का प्रोपेगेंडा, भारत के ‘लेफ्ट-लिबरल’ ने दी हवा; ये रहे फैक्ट

भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को आईसीसी टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करने के बाद ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। इसके बाद शमी के समर्थन में सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग समेत कई बड़े खिलाड़ी आगे आए। 

इनके समर्थन ने इस नैरेटिव को और भी पुख्ता कर दिया कि भारत में असहिष्णुता है। हालाँकि, शमी के खिलाफ शुरू में किए गए भद्दे कमेंट्स करने वाले हैंडल को करीब से देखने पर ट्रोलिंग का असली चेहरा दिखाई देता है। शमी को निशाना बनाने वाले ज्यादातर ट्वीट्स पाकिस्तान के थे। ऐसा सामने आया है कि ये पाकिस्तान की सोशल मीडिया हैंडलों द्वारा रची गई साजिश थी। यह भारत को नीचा दिखाने की उनकी एक चाल थी। 

मशहूर खिलाड़ियों ने शमी के समर्थन में किया ट्वीट (साभार: ट्विटर)

जिस समय पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने के लिए सोशल मीडिया पर भारत विरोधी तत्वों पर निशाना साधा जा रहा था, उसी समय कई ट्वीट ऐसे भी थे जिसमें कहा गया कि कुछ भारतीयों द्वारा मोहम्मद शमी को गाली दी जा रही है। हालाँकि, इसमें चौकाने वाली बात ये थी कि शमी की आलोचना करने वाले ट्वीट्स उतने विजिबल नहीं थे और दूसरों की तरह चुनिंदा पेजों तक ही सीमित थे लेकिन शमी की आलोचना पर हमला करने वाले चुनिंदा ट्वीट्स की ज्यादा विजिबिलिटी थी। यह अभी भी कई लोगों के लिए एक रहस्य है क्योंकि कहीं भी शमी विरोधी ट्वीट या सोशल मीडिया पोस्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। मतलब, कुछ ही हैंडल थे, जो शमी के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों में लिप्त थे।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने तो यहाँ तक इशारा किया कि उन्होंने शमी को अपशब्द कहते हुए एक भी पोस्ट नहीं देखा लेकिन सैकड़ों पोस्ट में गाली की निंदा करते देखा है।

साभार: ट्विटर

रिपोर्ट्स और ऑपइंडिया की अपनी पड़ताल में चौंकाने वाले विवरण सामने आए कि कैसे हमले को पड़ोसी देश पाकिस्तान से डिजाइन और अंजाम दिया गया था। रिपब्लिक न्यूज ने बताया कि एक ट्विटर यूजर Alitaza45896998 ने ट्विटर पर शमी के खिलाफ 28 अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट कीं।

शमी को निशाना बनाने वाला पाकिस्तानी अकाउंट (साभार: रिपब्लिक टीवी)

जाँच से पता चलता है कि यह अकाउंट 15 लोगों को फॉलो करता है जिनमें से सभी पाकिस्तानी हैं। इनमें से कुछ निजी अकाउंट थे जो पूरी तरह से ‘भारत असहिष्णु है’ का प्रचार फैलाने के उद्देश्य से बनाए गए थे। अपना काम होने के तुरंत बाद उन्हें डीएक्टिवेट कर दिया गया।

शमी पर हमला करने के मकसद से इंस्टाग्राम और ट्विटर पर कई अकाउंट बनाए गए। एक बार जब प्रोपेगेंडा को इस हद तक फैला दिया गया कि लोग सपोर्ट में आने लगे, तो ये अकाउंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गायब हो गए। पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों आदि ने इसमें एक अवसर देखा और अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि भारतीय ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ एक मुस्लिम खिलाड़ी शमी को गाली दे रहे हैं, और उन्हें भारत की हार के लिए दोषी ठहरा रहे हैं।

NDTV के ब्यूरो चीफ सौरभ गुप्ता ने कहा, “सांप्रदायिक व्यवहार तब होता है जब टीम के हारने पर एक खिलाड़ी को गालियाँ दी जाती हैं। मोहम्मद शमी एक परफॉर्मिंग क्रिकेटर हैं और हार के लिए टीम के किसी अन्य सदस्य की तरह ही जिम्मेदार हैं। लेकिन उनके मजहब के कारण उन्हें गालियाँ नहीं दी जानी चाहिए।”

सौरभ गुप्ता का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

सीईडीए अशोक के संपादक अंकुर भारद्वाज ने कहा, ‘शायद अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी शमी के साथ एकजुटता से घुटने टेकेंगे।

अंकुर भारद्वाज का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

लेखक हरनीत सिंह ने क्रिकेटर विराट कोहली को टैग करते हुए कहा, ‘चलो विराट कोहली। अपने साथी मोहम्मद शमी के साथ खड़े हो। कृपया उनके लिए समर्थन का बयान दें और इस कट्टरता को समाप्त करें। आप हमारे कप्तान हैं। लीडर बनने का समय आ गया है।”

हरमीत सिंह का ट्वीट (साभार:ट्विटर)

पत्रकार पूर्वा चिटनिस और राणा अयूब भी इस होड़ में शामिल हो गई।

पूर्वा चिटनिस का ट्वीट (साभार: ट्विटर)
राणा अयूब का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

द प्रिंट के निखिल रामपाल ने लिखा, “नीरज चोपड़ा ने तो पाकिस्तान के खिलाड़ी का पक्ष रखते हुए 2 मिनट का वीडियो बनाया था। स्पोर्ट्स में भाईचारे का संदेश भी दिया था। शमी तो फिर भी अपने हैं। घुटने टेकने वाले पाखंड से क्या साबित किया जा रहा है?”

निखिल रामपाल का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

मोजो की बरखा दत्त ने लिखा, “क्या भारतीय क्रिकेट टीम ब्लैक लाइव्स मैटर के लिए घुटने टेकने जा रही है, जो भारतीय वास्तविकता से पूरी तरह से अलग है, लेकिन मोहम्मद शमी के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑनलाइन हमलों पर चुप रहें? हम बेहतर की उम्मीद करते हैं।”

बरखा दत्त का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

शमी को गाली देने वाली टिप्पणियाँ एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी?

एक ट्विटर यूजर काउंटर-प्रोपेगैंडा डिवीजन ने इस पर विस्तृत शोध किया कि कैसे भारत के खिलाफ पाकिस्तान के प्रचार को समन्वित सोशल मीडिया पोस्ट द्वारा शमी को गाली देने वाला पोस्ट वायरल किया गया। इसने कहा कि “शमी को गाली दी जा रही है” प्रोपेगेंडा उस समय शुरू हुआ जब एक ट्विटर यूजर ‘vaikivannavan’ ने शमी को कथित रूप से गाली देने वाले लोगों के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए। अकाउंट अब मौजूद नहीं है।

ग्रुप ने आगे बताया कि अल जज़ीरा की होस्ट सना सईद ने सोशल मीडिया पर ‘शमी शर्मसार हो रहा है’ को लेकर क्रोनोलॉजी पर डिस्कशन किया था।

अलजजीरा की सना सईद ने ट्वीट में कहा, “मोहम्मद शमी एक भारतीय क्रिकेटर हैं; एक गेंदबाज। ये अभी उनके IG पर की गई टिप्पणियाँ हैं, लोगों ने दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तान से पैसे लिए कि वह पाकिस्तान के लिए खेल रहे थे और भारत को हारने में मदद की क्योंकि वह एक मुस्लिम हैं।”

अलजजीरा होस्ट द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड (साभार: ट्विटर)

यह दिलचस्प है कि कैसे पाकिस्तानी ट्विटर यूजर्स द्वारा एक ट्वीट को बड़े पैमाने पर प्रमोट किया गया।

प्रोपेगेंडा फैलाने में मीडिया की भी भूमिका रही। स्क्रॉल, डॉन, टेलीग्राफ और कई अन्य मीडिया हाउसों ने शमी को शर्मसार करने के बारे में कई रिपोर्टें प्रकाशित कीं।

हकीकत यह है कि शमी सबसे पसंदीदा भारतीय क्रिकेटरों में से एक हैं और उनके प्रशंसक उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें प्यार करते रहेंगे। अधिकांश भारतीय, जो क्रिकेट के फैंस हैं, वह अच्छी तरह से जानते हैं कि यह टीम की विफलता थी और इसके लिए एक गेंदबाज को दोष देना बेमानी है।

ड्रग तस्कर को पकड़ने गए समीर वानखेड़े पर 60 लोगों का हमला, सोशल मीडिया पर खबर वायरल: फैक्ट चेक

ड्रग केस में आर्यन खान की गिरफ्तारी के कारण एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के परिवार को लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर खबर चल रही है कि उनके ऊपर गोरेगाँव में 60 लोगों द्वारा हमला किया गया।

वायरल होते पोस्ट में दावा है कि वानखेड़े की टीम ड्रग पेडलर को पकड़ने गोरेगाँव गई थी, मगर जैसे ही वह ड्रग पेडलर को गाड़ी में डालने लगे तो वहाँ भीड़ इकट्ठा हुई और उन पर हमला किया गया। इसके बाद हीरो वाले अंदाज में उन्होंने पेडलर की कनपटी पर बंदूक तानी और भीड़ को पीछे हटने को कहा। फिर वह ड्रग तस्कर को गिरफ्तार करके ले गए। वहीं मुंबई पुलिस ने बाद में आकर सारी स्थिति को संभाला। वायरल होते पोस्ट में मीडिया को कोसा जा रहा है कि उन्होंने इस घटना को कवर नहीं किया।

सोशल मीडिया पर वायरल होता पोस्ट

इसके अलावा सवाल मुंबई पुलिस और उद्धव सरकार से भी किया जा रहा है। पोस्ट में पूछा जा रहा है कि इतना खतरनाक ड्रग्स कारोबार मुंबई पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था लेकिन पुलिस और उद्धव सरकार में से किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी।

अब किसी के लिए वाकई ये बात हैरान करने वाली है कि समीर वानखेड़े इन दिनों सबसे चर्चित नामों में से एक हैं। अगर उनके ऊपर वाकई ऐसा हमला हुआ तो इसकी कवरेज मीडिया में क्यों नहीं हुई, लेकिन जब ऑपइंडिया ने इस दावे की पड़ताल करनी शुरू की तो पता चला कि हमले की बात सही है लेकिन इसका आजकल से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी कोई घटना समीर वानखेड़े के साथ हाल-फिलहाल में नहीं घटी।

हमने एनसीबी पर गोरेगाँव में हुए हमले को लेकर गूगल सर्च किया और पाया कि वायरल दावा एक साल पुरानी घटना पर है। नीचे देख सकते हैं कि पोस्ट के दावे और खबरों से मिले तथ्य एक जैसे हैं।

कीवर्ड्स डालने के बाद सामने आए रिजल्ट्स

दरअसल, वानखेड़े की टीम पर ऐसा हमला हुआ है लेकिन वो मामला 22 नवंबर 2020 का है। जहाँ 6 एनसीबी अधिकारियों पर भीड़ ने हमला किया था। वानखेड़े इस पूरे अभियान को लीड कर रहे थे। जैसे ही टीम ने ड्रग तस्कर को हिरासत में लिया। कई लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और हमला कर दिया। घटना में दो एनसीबी अधिकारी घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला था और ड्रग तस्कर गिरफ्तार हुआ था। वहीं हमलावरों में से भी कुछ लोग पकड़े गए थे। हाल फिलहाल में एनसीबी पर हुए हमले की बात करें तो ये अगस्त में हुआ था। तब एनसीबी ने मुंबई के मानखुर्द से 1 कोरड़ की ड्रग बरामद की थी और नाइजीरियन गैंग ने उन पर हमला किया था।