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टिकरी बॉर्डर गैंगरेप: ‘किसान नेता’ अंकुर सांगवान ने किया सरेंडर, प्रदर्शनकारियों के टेंट में बंगाल की युवती का हुआ था शोषण

दिल्ली के टिकरी बॉर्डर गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपितों में एक किसान सोशल आर्मी के अंकुर सांगवान ने बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को बहादुरगढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उसके सिर पर 25,000 रुपए का इनाम था। पुलिस की अर्जी पर कोर्ट ने उसे रिमांड पर भेज दिया है। अंकुर दादरी के चरखी के मंदोला का रहने वाला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना की जाँच के लिए बनाई गई एसआईटी के चीफ और बहादुरगढ़ डीएसपी पवन कुमार ने कहा है कि मई 2021 में बहादुरगढ़ पुलिस स्टेशन में बलात्कार का मामला दर्ज किया था। रेप के बाद पीड़िता कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई थी और बाद में उसकी मौत हो गई थी। पीड़िता के पिता ने एसआईटी को बताया था कि उनकी बेटी अनूप सिंह चनोट और अनिल मलिक के साथ किसान सोशल आर्मी के एक टेंट में रहती थी। इसी टेंट में पहले उसके साथ छेड़छाड़ हुई और फिर उसका रेप किया गया। चनोट आम आदमी पार्टी (AAP) का नेता है। वह और अंकुर सांगवान किसान सोशल आर्मी के भी प्रमुख नेता हैं। इसी साल 30 अप्रैल को पीड़िता की बहादुरगढ़ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी।

इस केस की जाँच में शामिल सभी लोगों ने ये स्वीकार किया है कि अनिल मलिक, आप नेता अनूप सिंह चनोट और दूसरे लोगों ने मृतका के साथ छेड़छाड़ और रेप किया था। बता दें कि अनिल मलिक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि एक और आरोपी जगदीश अभी भी फरार है। अंकुर ने कोर्ट में सरेंडर करने के बाद कहा कि वह नवंबर 2020 में टिकरी बॉर्डर पर पहुँचा था, जहाँ उसने अपने साथियों के साथ मिलकर ‘किसान सोशल आर्मी’ की शुरुआत की। न्यूजलॉन्ड्री जैसे मीडिया आउटलेट्स ने बलात्कार की घटना से पहले चनोट सहित किसान सोशल आर्मी के नेताओं का इंटरव्यू लिया था। इन्हीं मीडिया आउटलेट्स ने इन लोगों को ‘किसान आंदोलन की सही तस्वीर नहीं दिखाने’ और ‘गोदी मीडिया’ को गाली देने के लिए प्लेटफॉर्म दिया था।

दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अंकुर सांगवान राज्य के दौरे पर गया था। वहाँ वह पीड़िता से किसान सोशल आर्मी के नेता के तौर पर मिला। इसके बाद ही पीड़िता दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुई। पीड़िता 12 अप्रैल को ट्रेन से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल से आई थी। लेकिन दिल्ली में उसका यौन शोषण किया गया। बाद में कोविड-19 वायरस से संक्रमित हुई पीड़िता की 30 अप्रैल को बहादुरगढ़ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई।

गौरतलब है कि आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव ने भी 10 मई 2021 को इस बात को स्वीकार किया था कि वो युवती के साथ हुई घटना से वाकिफ थे। मृतका के पिता ने भी बताया था कि यादव 24 अप्रैल से उनकी बेटी के संपर्क में थे और उसकी मृत्यु से पहले के हालातों के बारे में वो अच्छी तरह से जानते थे। बावजूद इसके पुलिस को जानकारी देने के बजाय योगेंद्र यादव इस घटना को दबाने में लगे थे।

परमबीर सिंह पर कसा शिकंजा: महाराष्ट्र सरकार ने सैलरी पर रोक लगाई, वारंट हासिल करने कोर्ट पहुँची क्राइम ब्रांच

लापता बताए जा रहे मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की सैलरी पर महाराष्ट्र सरकार ने रोक लगा दी है। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने के लिए मुंबई पुलिस ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। इससे पहले 20 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि उनके लोकेशन के बारे में पता नहीं चल पाया है।

रिपोर्ट के अनुसार सिंह को महाराष्ट्र सरकार ने भगोड़ा मान लिया है। इसी के साथ सरकार ने कार्रवाई करते हुए आईपीएस अधिकारी की सैलरी रोक दी है। अब राज्य सरकार निलंबन की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने के लिए मुबंई क्राइम ब्रांच ने सत्र अदालत में याचिका दायर की है। इस पर 29 अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी। क्राइम ब्रांच परमबीर सिंह के खिलाफ रंगदारी के आरोप की जाँच कर रही है। इससे पहले मुबंई पुलिस ने पूछताछ के लिए 9 अक्टूबर को उन्हें समन जारी किया था। लेकिन वह न तो हाजिर हुए और न ही मालाबार स्थित अपने घर पर मिले।

यह नोटिस मीडिया में आई उन रिपोर्ट के बाद जारी की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि परमबीर सिंह देश छोड़कर रूस भाग गए हैं। सिंह के खिलाफ कम से कम पाँच आपराधिक मामले चल रहे हैं। एक मामला बिल्डर और होटल व्यवसायी बिमल अग्रवाल की शिकायत पर गोरेगाँव थाने में दर्ज है। अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि परमबीर सिंह ने दो बार और रेस्तरां पर छापेमारी नहीं करने के लिए उनसे 9 लाख रुपए की जबरन वसूली की। इसके अलावा 2.92 लाख रुपए के दो स्मार्टफोन खरीदने के लिए भी मजबूर किया था। दावा किया गया है कि यह जनवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच हुई। इस शिकायत में परमबीर सिंह के अलावा बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, सुमित सिंह उर्फ ​​चिंटू, अल्पेश पटेल, विनय सिंह उर्फ ​​बबलू और गैंगस्टर छोटा शकील के गुर्गे रियाज भाटी को आरोपित बनाया गया है।

गौरतलब है कि परमबीर सिंह ने ही मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सचिन वाजे को मुंबई के होटलों और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दिया था।

मुख्तार अंसारी के शूटर रहे अली शेर को यूपी STF ने मार गिराया, BJP के दलित नेता को चौराहे पर गोलियों से कर दिया था छलनी

मुख्तार अंसारी का शॉर्प शूटर रहा अली शेर मारा गया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को लखनऊ के मड़ियांव इलाके में एक मुठभेड़ में उसे मार गिराया। उसका साथी कामरान भी इस दौरान ढेर कर दिया गया। अली शेर पर 1 लाख और कामरान पर 25 हजार रुपए का इनाम था। इनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुठभेड़ लखनऊ IIM रोड पर धैला के पास हुई है। अली शेर और कामरान को पुलिस ने घेर कर सरेंडर करने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोलियॉं चलाईं। कई राउंड गोलीबारी के बाद दोनों मार गिराए गए।

STF के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह के अनुसार मारे गए बदमाशों के पास से एक कार्बाइन, दो पिस्टल, एक देसी तमंचा, एक बाइक और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस को इन दोनों द्वारा पुराने लखनऊ में किसी बड़े व्यापारी की हत्या करने की प्लानिंग की सूचना मिली थी। पुलिस ने इनकी लोकेशन मड़ियांव के पास पाई। दोनों को सरेंडर का मौक़ा दिया गया पर दोनों ने गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों अपराधियों को गोलियाँ लगी। पुलिस ने ही दोनों को अस्पताल पहुंचाया जहाँ डॉक्टरों ने इन्हे मृत घोषित कर दिया।

झारखंड के राँची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) दलित मोर्चे के जिलाध्यक्ष जीतराम मुंडा की हत्या में भी अली शेर आरोपित था। मुंडा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास के करीबी नेताओं में से थे। इसी हमले में एक अन्य भाजपा नेता राजकिशोर साहू घायल हो गए थे। यह हत्या 22 सितम्बर 2021 (बुधवार) को हुई थी। मुंडा को चौराहे पर गोलियों से छलनी कर दिया गया था।

बताया जा रहा है कि कामरान और अलीशेर फिलहाल अमन गिरोह के साथ काम कर रहे थे। जेल से ही अपराध का नेटवर्क चलाने वाला अमन फिलहाल राँची जेल में बंद है। अलीशेर को डॉक्टर और कामरान को बन्नू के नाम से भी जाना जाता था। ये दोनों उत्तर प्रदेश के जिला आज़मगढ़ के रहने वाले थे।

STF के एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि मारे गए बदमाश अलीशेर पर 40 से अधिक केस दर्ज थे। इनमें हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे मुकदमे शामिल हैं। उसके साथी कामरान पर भी 8 से अधिक केस दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, हत्या व रंगदारी के मुकदमे हैं। अलीशेर के लिए कामरान रेकी किया करता था।

आर्यन खान के साथ सेल्फी, क्रूज ड्रग्स केस में गवाह; किरण गोसावी को पुलिस ने पुणे से 3 साल पुराने मामले में पकड़ा

किरण गोसावी को पुणे से पुलिस ने हिरासत में लिया है। वह शाहरुख खान के बेटे आर्यन से जुड़े क्रूज ड्रग्स मामले में गवाह है। आर्यन के साथ उसकी सेल्फी भी सामने आई थी। क्राइम ब्रांच ने उसे तीन साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में पकड़ा है।

कई दिनों से फरार चल रहे गोसावी के खिलाफ पुणे में धोखाधड़ी का केस दर्ज है। उस पर विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर झाँसा देकर लोगों को ठगने का आरोप है। इसके अलावा प्रभाकर सैल ने 25 करोड़ की डील का जो आरोप लगाया था उसमें भी उसका नाम आया था।

उसे गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को पुणे से क्राइम ब्रांच की टीम ने हिरासत में लिया। इससे पहले तक इस बात की चर्चा थी कि उसने सरेंडर किया है, लेकिन पुणे पुलिस ने इससे इनकार किया है। इस बात की जानकारी पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने दी है। एनसीबी के गवाह गोसावी ने गिरफ्तारी से पहले प्रभाकर सैल द्वारा लगाए आरोपों को निराधार बताया। उसने सैल पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए अपनी सीडीआर और चैट रिपोर्ट जारी करने की माँग की। गोसावी का दावा है कि इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

किरण गोसावी को 2018 धोखाधड़ी मामले में हिरासत में लिया गया है। इस मामले में वह फरार था। 2019 में पुणे सिटी पुलिस ने उसे वॉन्टेड घोषित किया था। तभी से वह लापता था और उसे एनसीबी गवाह के रूप में क्रूज रेड के दौरान देखा गया था। 14 अक्टूबर को पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। उसे शिवाजीनगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि किरण गोसावी का नाम क्रूज ड्रग्स केस में सबसे पहले उस वक्त सामने आया था जब उसने आर्यन खान के साथ अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर अपलोड की थी। हाल ही में खुद को गोसावी का बॉडीगार्ड बताने वाले प्रभाकर सैल ने दावा किया था कि क्रूज पर ड्रग्स पार्टी के दौरान वह भी वहीं पर था और उसने गोसावी को सैम नाम के व्यक्ति से फोन पर बात करते हुए सुना था। उसने 25 करोड़ की डील 18 करोड़ पर फाइनल होने का दावा किया था। साथ ही ये भी दावा किया था कि उसमें से 8 करोड़ रुपए समीर वानखेड़े के देने की बात की गई थी।

पानीसागर मस्जिद में नहीं हुई आगजनी, त्रिपुरा पुलिस ने बताया- शेयर तस्वीरें/वीडियो फर्जी: VHP रैली के दौरान निशाना बनाने का था दावा

त्रिपुरा पुलिस ने राज्य के पानीसागर में मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के दावों को झूठा करार दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में सोशल मीडिया में शेयर की जा रही तस्वीरों और वीडियो का राज्य में हुई घटना से कोई संबंध नहीं है। यहाँ बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हालिया हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने रैली निकाली थी। इसके बाद से मस्जिद को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा था।

त्रिपुरा पुलिस ने पानीसागर में मस्जिद पर हमले, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अफवाह बताया है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर फेक वीडियो डालने वालों पर FIR भी दर्ज की गई है। यह जानकारी त्रिपुरा पुलिस के IGP (लॉ एन्ड आर्डर) सौरभ त्रिपाठी ने 28 अक्टूबर 2021 (गुरुवार) को दी।

आईजीपी त्रिपाठी ने कहा है, “पानीसागर में कल की घटना के संबंध में फर्जी खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। किसी भी मस्जिद में आग की कोई घटना नहीं हुई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल फर्जी पोस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।” उन्होंने बतया कि असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्वों ने भ्रामक और निराधार खबरें फैलाई। ऐसे सोशल मीडिया हैंडलों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। वायरल की जा रही भ्रामक खबरों और वास्तविकता का कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। त्रिपुरा पुलिस ने वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए कहा है कि हालत काबू में है। साथ ही झूठी अफवाह उड़ाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

गौरतलब है कि VHP ने बंगलादेश में हिन्दुओं पर हुए हमलों के विरोध में पानीसागर में रैली रखी थी। इसी रैली में मस्जिद पर हमले का दावा किया गया था। पानीसागर उत्तर त्रिपुरा जिले के अंतर्गत आता है। सोशल मीडिया पर मस्जिद पर कथित हमले का वीडियो वायरल होने के बाद त्रिपुरा के कई क्षेत्रों में तनाव फ़ैल गया था। कुछ क्षेत्रों में छिटपुट हिंसक गतिविधियाँ भी हुईं थी। हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी थी। धर्मस्थलों की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया था।

साम्प्रदायिक तनाव उत्तरी त्रिपुरा जिले के धर्मनगर सब-डिवीजन और त्रिपुरा के उनोकोटी जिले के कैलाशहर सब-डिवीजन में भी फ़ैल गया था। इसके चलते सार्वजनिक समारोहों, जुलूसों, नारेबाजी, रैली, सार्वजनिक भाषणों आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

अफवाहों के चलते कदमतला इलाके में करीब एक हजार मुस्लिम सड़क पर उतर आए थे। उन्होंने हिन्दुओं के घरों, दुकानों और वाहनों पर हमला कर दिया था। इस घटना के भी वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए। वीडियो में मुस्लिमों की भीड़ हाथों में लाठी ले कर सड़कों पर घूमती दिखाई दे रही थी।

भारत ने किया अग्नि-5 का सफल परीक्षण: 5000 किमी तक निशाना, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल की रेंज में पूरा चीन

भारत ने बुधवार को उच्च सटीकता के साथ 5,000 किलोमीटर तक का लक्ष्य भेदने में सक्षम अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्तान के साथ-साथ चीन के लगभग सारे शहर आ जाएँगे। सीमा पर चीन के साथ जारी विवाद के बीच अग्नि-5 का सफल परीक्षण भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस सफल परीक्षण के साथ ही अग्नि-5 मिसाइल को अब सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। यह मिसाइल तीन चरणीय ठोस ईंधन का उपयोग करती है और पारंपरिक विस्फोटकों के साथ-साथ यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है।

अग्नि-5 मिसाइल 1,500 किलोग्राम तक के परमाणु हथियार अपने साथ ले जा सकती है और दुश्मन के किसी भी शहर को नेस्तनाबूद कर सकती है। 50 टन वजन वाली अग्नि-5 मिसाइल 17.5 मीटर लंबी है और इसका व्यास 2 मीटर यानी 6.7 फीट है। यह मिसाइल एक सेकेंड में 8.16 किलोमीटर की दूरी तय करती है। अग्नि-5 भारत की इकलौती मिसाइल होगी, जिसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल या आईसीबीएम की कैटिगरी में रखा जा सकता है। इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल वो मिसाइल होती है, जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक मार कर सके।

अग्नि-5 की MIRV तकनीक भी बेहद खास है, जिसकी वजह से इसके वॉरहेड पर एक की जगह कई हथियार लगाए जा सकते हैं। ऐसे में मिसाइल एक बार में कई टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि इस मिसाइल के जरिये पूरे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों को निशाना बनाया जा सकता है। भारत की इस शक्तिशाली मिसाइल का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने मिलकर किया है। 

गौरतलब है कि अग्नि-2, 3 और 4 मिसाइलें भारतीय सेना में पहले से ही कमीशन हो चुकी हैं और अब अग्नि-5 की बारी है। इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत उन 8 चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हैं। इस मिसाइल के सेना में शामिल होने से भारत को इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल की ताकत हासिल हो जाएगी, जो अब तक अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस जैसे कुछ गिने-चुने देशों के पास ही हैं।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से इस मिसाइल का परीक्षण किए जाने की अटकलें चल रही थीं। इन अटकलों पर चीन भड़क गया था और आरोप लगाया था कि भारत एशिया में शांति का माहौल खराब करना चाहता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने बयान दिया था कि दक्षिण एशिया के सभी देशों को क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।

‘मुझे अंडरवर्ल्ड की धमकी दे रहे राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी’: मानहानि का नोटिस मिलने के बाद बोलीं शर्लिन चोपड़ा

बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने एक बार फिर शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्ट्रेस ने कहा, “वह अपने रसूखदार होने का फायदा उठा रहे हैं। इसका इस्तेमाल वो एक हथियार के रूप में कर रहे हैं, ताकि मेरी आवाज को दबा सकें। शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा ने मुझे अंडरवर्ल्ड की धमकी दी है।” न्यूज एजेंसी एएनआई से शर्लिन ने कहा, ”उन्होंने मुझे मानहानि का नोटिस भेजा, लेकिन मैं डरूँगी नहीं। मैं पुलिस से मेरा बयान दर्ज करने का अनुरोध करती हूँ, ताकि मेरी शिकायत पर संज्ञान लिया जा सके। मानसिक प्रताड़ना के लिए 75 करोड़ रुपए माँगने का जवाब नोटिस भेज चुकी हूँ।”

हाल ही में शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने शर्लिन चोपड़ा पर मानहानि का केस दर्ज कराया था। इस कपल ने एक्ट्रेस से 50 करोड़ का हर्जाना भी माँगा था। इससे पहले शिल्पा और राज के वकील ने कहा था, “शर्लिन चोपड़ा मीडिया में जो भी बयान दे रही हैं, वह कानूनी दायरे में होना चाहिए। मेरे मुवक्किल के खिलाफ प्रेस वार्ता करना, उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। शर्लिन चोपड़ा द्वारा कही गई बात का कोर्ट में उनके खिलाफ उपयोग किया जाएगा।”

शर्लिन ने अपने ट्विटर हैंडल पर राज और शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के मानहानि नोटिस के संदर्भ में भेजे गए जवाब के दस्तावेजों को भी साझा किया था। उन्होंने लिखा, ”यहाँ मेरी कानूनी टीम द्वारा 23 अक्टूबर, 2021 को रिपु सूडान उर्फ राज कुंद्रा को भेजे गए मेरे जवाब की प्रति का पहला और अंतिम पृष्ठ है।”

शर्लिन चोपड़ा ने पिछले दिनों राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करवाई थी। एक्ट्रेस ने अपने स्टेटमेंट में कहा था, “मैंने राज कुंद्रा के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दर्ज की है।” उन्होंने ट्विटर पर 14 अक्टूबर 2021 को एक वीडियो शेयर किया था, साथ ही कैप्शन लिखा, “आज मैं अपनी कानूनी टीम के साथ जुहू पुलिस स्टेशन गई थी, राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने।”

गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने राज और शिल्पा पर तंज कसते हुए एक इंटरव्यू में कहा था,”फिल्में कब तक करें। मैं चाहती हूँ कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए कुछ करूँ। मंच पर बैठकर साष्टांग करना बहुत आसान होता है, मंच पर बैठकर रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बातें करना आसान होता है, लेकिन आप फील्ड में जाकर पीड़ित महिलाओं के लिए कुछ कीजिए। अपने बंगले से बाहर निकलकर, पोर्न से बाहर निकलकर कुछ कीजिए। सारी दुनिया आपको साष्टांग दंडवत प्रणाम करेगी।”

‘एक देश, एक कानून’: मुस्लिम विरोधी बौद्ध भिक्षु को श्रीलंका सरकार ने दी बड़ी जिम्मेदारी, बनाया समिति का अध्यक्ष, 2013 दंगों के आरोप

श्रीलंका में ‘वन कंट्री, वन लॉ’ के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी गलागोदाथ ज्ञानसारा को दी गई है। राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने उनकी नियुक्ति की है। इससे पहले उन पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। मुस्लिमों के विरुद्ध हिंसा भड़काने के आरोप में उन पर कई मामले भी दर्ज किए गए थे। अब वो पूरे श्रीलंका में सबके लिए समा कानून के लिए बनी कमिटी के मुखिया नियुक्त किए गए हैं। वो सिंहला समुदाय से आते हैं।

उनके संगठन पर 2013 में श्रीलंका में मुस्लिमों के विरुद्ध हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे। गलागोदाथ ज्ञानसारा को 13 सदस्यीय समिति का मुखिया बनाया गया है। ये समिति ‘वन कंट्री, वन लॉ’ के लिए ड्राफ्ट तैयार करेंगे। इसी ड्राफ्ट के आधार पर श्रीलंका की सरकार इस मामले में आगे बढ़ेगी। ये वही नारा है, जिसके आधार और 2019 में गोटाभाया राजपक्षे ने चुनाव लड़ा था और उन्हें बड़ी संख्या में बौद्ध नागरिकों का समर्थन प्राप्त हुआ था। एक गैजेट के जरिए इस समिति के गठन की घोषणा की गई है।

इस टास्क फ़ोर्स में मुस्लिम समुदाय के 4 प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है, लेकिन अल्पसंख्यक तमिल समुदाय का कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल नहीं है। ये अधिसूचना मंगलवार (26 अक्टूबर, 2021) को जारी की गई। समिति हर महीने राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे को रिपोर्ट सौंपेगी। 28 फरवरी, 2022 तक समिति अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। इस्लामी कट्टरता को कम करने के लिए ही ‘वन कंट्री, वन लॉ’ की परिकल्पना की गई है। इससे वहाँ की सत्ताधारी पार्टी सिंहला बहुसंख्यकों का विश्वास भी जीतेगी।

2019 के ईस्टर बम ब्लास्ट के बाद श्रीलंका में मुस्लिम कट्टरवाद के खिलाफ भावनाएँ और तेज़ हो गईं। इस बम ब्लास्ट में 270 लोग मारे गए थे। 21 अप्रैल, 2019 को हुई इस घटना में घायलों की संख्या भी 500 से अधिक थी। कट्टर बौद्ध भिक्षु गलागोदाथ ज्ञानसारा बोदु बाला सेना (BBS) नाम का संगठन चलाते हैं। हिंदी में इसे ‘बौद्ध शक्ति बल’ कहा जा सकता है। उन पर कई बार भड़काऊ बयान देने के आरोप भी लग चुके हैं। आपराधिक धमकी के एक मामले में उन्हें जेल भी हुई थी।

फ्रांस ने ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ और ‘जिहाद’ को बढ़ावा देने पर एलोन्स मस्जिद को किया बंद, 7 अन्य पर भी गिरेगी गाज

फ्रांस सरकार ने ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ को पनाह देने और ‘आतंकवादी हमलों को वैध ठहराने’ के लिए ले मैंस के पास एलोनेस में एक मस्जिद को बंद करने का आदेश दिया है। गृहमंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने कहा कि मस्जिद को छह महीने के लिए बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही मस्जिद के प्रशासकों के बैंक अकाउंट भी जब्त कर लिए गए हैं।

मस्जिद पर लगे आरोपों में फ्रांस, पश्चिमी देशों, ईसाइयों और यहूदियों के प्रति नफरत भड़काना शामिल है। डारमैनिन ने बंद का सपोर्ट करते हुए ट्विटर पर लिखा, “इस मस्जिद में फ़्रांस के प्रति घृणा पैदा करने वाले संदेशों के जरिए भड़काया गया।” प्रशासन ने कहा कि नफरत और भेदभाव के अलावा, मस्जिद ने फ्रांस में ‘शरिया की स्थापना’ को भी बढ़ावा दिया।

मस्जिद के साथ-साथ उसके द्वारा आयोजित इस्लामिक स्कूल को भी यह कहते हुए बंद कर दिया गया है कि स्कूल में ‘सशस्त्र जिहाद’ को बढ़ावा दिया गया था। बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को स्कूल के दरवाजे पर एक नोटिस चिपका हुआ था, जिसमें लिखा गया था कि कक्षाओं को ‘अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है।’

फ्रांस के आंतरिक मंत्री ने यह भी कहा कि साल के अंत तक सात और एसोसिएशन या मजहबी भवनों को बंद करने की योजना पर काम चल रहा है। मंत्री ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के एलिसी पैलेस में पदभार सँभालने के बाद से 13 मजहबी एसोसिएशन को बंद करने की भी जानकारी दी। डारमैनिन ने यह भी कहा कि सितंबर 2020 से, ‘जनता के लिए खतरा’ के कारण 36,000 विदेशियों के निवास परमिट रद्द कर दिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक मुस्लिमों और उनके पूजा स्थलों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच, फ्रांस ने नवंबर 2020 से 89 निरीक्षण की गई मस्जिदों में से एक-तिहाई को बंद कर दिया है। इससे पहले खबर आई थी कि फ्रांसीसी सरकार ने एक साल से भी कम समय में लगभग 30 मस्जिदों को बंद कर दिया था।

सार्थे गवर्नरेट ने 25 अक्टूबर को एक बयान जारी कर कहा कि एलोन्स में 300 लोगों की क्षमता वाली मस्जिद को इस आधार पर छह महीने के लिए बंद कर दिया गया था कि यह ‘कट्टरपंथी इस्लाम का बचाव करती है।’ यह एक अभियान का हिस्सा था जिसकी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के साथ-साथ वैश्विक नेताओं, विशेष रूप से मुस्लिम-बहुल देशों में दुनिया भर में आलोचना की गई थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए अपनी नई योजना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुस्लिम देशों के निशाने पर आ गए थे। मैक्रों ने देश के मुस्लिम नेताओं से ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ पर सहमति देने के लिए कहा है। इसी को लेकर विवाद है।

चार्टर के मुताबिक, इस्लाम एक मजहब है और इससे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन को जोड़ा नहीं जा सकता है। चार्टर के तहत, फ्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया गया। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों से धार्मिक आधार पर किसी तरह की बहस करने वालों के खिलाफ भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया। 

जिस अशोक वाटिका में रही थीं माँ सीता, अयोध्या पहुँचे वहाँ के पत्थर: लेकर आए श्रीलंका के 2 मंत्री और राजदूत

श्रीलंका के राजदूत, उप राजदूत और श्रीलंका के दो मंत्री गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को अशोक वाटिका की शिलाएँ लेकर अयोध्या पहुँचें। उन्होंने श्रीलंका में जिस स्थल पर माता सीता को रावण ने रखा था, उस अशोक वाटिका की शिलाएँ रामलला को समर्पित की। इसके बाद राजदूत, उप राजदूत और श्रीलंका सरकार के दोनों मंत्रियों ने रामलला के दर्शन किए।

बाद में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्विटर अकॉउंट से ट्वीट कर बताया गया, “श्रीलंका स्थित अशोक वाटिका में स्थापित श्री सीता मन्दिर की एक शिला आज श्रीलंका के माननीय उच्चायुक्त एवं मंत्री महोदय ने अयोध्या आकर भगवान श्री रामलला जी के सम्मुख सन्त-महापुरुषों को भेंट की।”

बता दें कि, अभी तक ट्रस्ट ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि शिलाओं का इस्तेमाल कहाँ होगा, लेकिन श्रीलंका से अयोध्या का आध्यात्मिक जुड़ाव जरूर होगा, क्योंकि माता सीता का अपहरण करने के बाद रावण ने उन्हें जिस अशोक वाटिका में रखा था, उसी अशोक वाटिका के पत्थरों को लेकर श्रीलंका के राजदूत अयोध्या पहुँचें हैं।।

इससे पहले, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया था, ”श्रीलंका के राजदूत, उप राजदूत और श्रीलंका सरकार के दो मंत्री माता सीता की निशानी लेकर अयोध्या आ रहे हैं। श्रीलंका स्थित अशोक वाटिका में जहाँ माता सीता रही थी, वे वहाँ की शिलाएँ लेकर आ रहे हैं। यह शिलाएँ श्रीलंका के समाज का प्रतिनिधित्व करेंगी। लंका के समाज की भावनाओं का प्रस्तुतीकरण होगा। सभी मेहमान 28 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचेंगे और 11:00 बजे राम जन्मभूमि जाएँगे।”

उन्होंने बताया था कि दोपहर 12:00 बजे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के आवास पर राजदूत और श्रीलंका सरकार के दोनों मंत्री भोजन करेंगे तथा यहीं पर पत्रकार वार्ता भी करेंगे। इसके बाद 1:30 बजे राजदूत, उप राजदूत और श्रीलंका सरकार के दोनों मंत्री लखनऊ के लिए रवाना हो जाएँगे।