पूरे बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों में हिन्दू हमले का शिकार हो रहे हैं। मुस्लिम भीड़ ने पहले दुर्गा पूजा के पंडालों को ध्वस्त किया। मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। अब हिन्दुओं के घरों को जलाया जा रहा है। कई बेघर हुए हैं। हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ है। एक दर्जन हिन्दुओं की हत्या कर दी गई है। ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन (WHF)’ के बांग्लादेश चैप्टर द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 33 जिलों में 335 मंदिरों पर हमले हुए हैं।
ये पहले 4 दिन, ये 13-17 अक्टूबर, 2021 तक के ही आँकड़े हैं। ऐसी घटनाएँ अब भी बदस्तूर जारी हैं। मंदिरों से सभी चीजें न सिर्फ लूट ली गईं, बल्कि प्रतिमाओं को भी खंडित कर दिया गया। WHF ने बताया है कि कुल 1800 हिन्दुओं की दुकानों अथवा प्रतिष्ठानों को आग के हवाले किया गया है। कॉमिला, चाँदपुर, नोआखली, चटगाँव, कोष बाजार, फेनी, चपई, नवाबगंज और रंगपुर में मामला सबसे ज्यादा हिंसक हो गया।
जिन एक दर्जन हिन्दुओं की हत्या हुई है, उनमें 7 पुजारी थे। 23 महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार की बात कही जा रही है। WHF का कहना है कि एक परिवार में तो एक साथ तीन महिलाओं का बलात्कार हुआ। अकेले रंगपुर के पीरगंज में 300 हिन्दुओं के घरों में लूटपाट हुई व कइयों को जलाया गया। ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन’ ने कहा है कि वो उन पीड़ित हिन्दुओं के साथ खड़ा है, जिन्हें तुरंत मदद की जरूरत है।
इन पीड़ितों को रहने के लिए छत चाहिए, भोजन चाहिए और सुरक्षा चाहिए। बांग्लादेश का पुलिस-प्रशासन उनके लिए गंभीर नहीं है। आइए में आप उन हिन्दुओं की मदद कर सकते हैं, जिसका बड़ा असर होगा। बैंक और BKash (ऑनलाइन मोबाइल मनी) के जरिए आप ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन’ को डोनेट कर सकते हैं। जल्द ही डोनेशन/पेमेंट पोर्टल आएगा, लेकिन तब तक आप यहाँ जाकर दान कर सकते हैं:
बैंक का नाम: Dutch Bangla Bank Limited (Dhanmondi Branch, Dhaka, Bangladesh)
अकाउंट नेम: Dipan Mitra
अकाउंट नंबर: 1101510120712
रूटिंग नंबर: 090261183
स्विफ्ट कोड: DBBLBDDH
BKash नंबर: +8801912174793
नीचे ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन (WHF)’ के बांग्लादेश चैप्टर का बयान है, जिसमें अकाउंट डिटेल्स भी दिए गए हैं:
‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन’ के जरिए बांग्लादेश के हिन्दुओं की मदद कर सकते हैं आप
वहीं मंदिरों पर हमले व हिन्दुओं पर अत्याचार के खिलाफ पूरी दुनिया में विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है। इस्कॉन के मंदिर पर हमले व आगजनी के बाद दुनिया भर में इस्कॉन के भक्त बांग्लादेश की सरकार से न्याय की माँग कर रहे हैं। इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास के नेतृत्व में कोलकाता में प्रदर्शन हुआ। उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर को 150 देशों में सभी इस्कॉन सेंटरों सहित अलग-अलग जगहों पर प्रार्थना सभाएँ व विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएँगे।
इस बार अपने विज्ञापन से हिंदुओं को उकसाने की जिम्मेदारी फैब इंडिया ने ले ली। कंपनी ने कपड़ों के एक कलेक्शन के विज्ञापन में दीपावली को जश्न-ए-रिवाज बताया। अब दीपावली को जश्न-ए-रिवाज क्यों कहा गया यह तो विज्ञापन बनाने वाले ही जानें पर इसका परिणाम यह हुआ कि सोशल मीडिया पर लोगों ने हर बार की तरह इस हिंदू विरोधी विज्ञापन पर भी अलग-अलग तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। जैसा पहले के विज्ञापनों के साथ हुआ, वैसा ही इस बार भी हुआ और फैबइंडिया ने विरोध को देखते हुए विज्ञापन हटा लिया पर यह आचरण फेक न्यूज़ फैलाने वाले उन पत्रकारों और संपादकों के आचरण जैसा है जो सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाकर बड़े आराम से अपने ट्वीट डिलीट कर लेते हैं।
इसके पहले तनिष्क ने अपने विवादास्पद विज्ञापन से हिंदुओं को चिढ़ाने का काम किया था। मिंत्रा ने अपने एक विज्ञापन में द्रौपदी चीरहरण दिखाते हुए भगवान श्रीकृष्ण को एक्स्ट्रा लांग साड़ी खरीदते हुए दिखाया था। जावेद हबीब के सैलून चेन ने 2017 के दुर्गापूजा के समय जारी किये गए अपने एक विज्ञापन में माँ दुर्गा, गणेश, कार्तिक और सरस्वती को सैलून और स्पा में दिखाया था। अभी चल रहे सीएट टायर के आमिर खान वाले विज्ञापनों की मानें तो सड़कों का गलत इस्तेमाल केवल हिंदू करते हैं, वह चाहे बारात निकाल कर हो या मूर्तियों के साथ जुलूस निकाल कर। घरेलू हिंसा को लेकर जागरूकता की आड़ में हिंदुओं की देवियों को घरेलू हिंसा का शिकार दिखाने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रेन ने भी यही किया था। इन सारे विज्ञापनों के विरुद्ध हिंदुओं ने अपना विरोध दर्ज कराया।
ऐसे विज्ञापनों या कैंपेन का हिंदुओं द्वारा विरोध किया जाता है तब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से लेकर क्रिएटिव फ्रीडम तक, सारे संभावित कुतर्क दिए जाते हैं। एक महा कुतर्क यह दिया जाता है कि विरोध करने वालों को क्रिएटिविटी की समझ नहीं है। प्रश्न यह है कि; यदि ऐसे विज्ञापन बनाने वालों को हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं की समझ नहीं है तो हिंदुओं को उनकी तथाकथित क्रिएटिविटी की समझ होनी आवश्यक क्यों है? प्रश्न यह भी है कि क्रिएटिविटी के चक्कर में बार-बार धार्मिक भावनाएँ भड़काना आवश्यक क्यों है? सारी क्रिएटिविटी क्या हिंदू देवी-देवताओं के चित्रण में ही है? विज्ञापन बनाने वाले लोग इतने मूढ़ तो नहीं हैं जो समझते नहीं कि उनके बनाए ऐसे विज्ञापनों का क्या असर हो सकता है।
प्रश्न यह उठता है कि इन ‘क्रिएटिव’ लोगों द्वारा कितने दिनों तक ऐसे विज्ञापनों का विरोध करने वाले हिंदुओं को क्रिएटिविटी के प्रति नासमझ बताकर काम चलाया जाएगा? कितने दिनों तक हिंदुओं के इस प्रश्न को नजरअंदाज किया जाएगा कि; ये क्रिएटिव लोग और धर्मों के देवी देवताओं को लेकर अपनी क्रिएटिविटी का प्रदर्शन क्यों नहीं करते?
विरोध करने वाले हिंदुओं को लेकर एक बात बार-बार कही जाती है कि; राजनीतिक कारणों से हिंदू असहिष्णु होता जा रहा है। अभी तक ऐसा हुआ नहीं है पर यह भी सच है कि हजारों वर्षों से सहिष्णुता को एक सिद्धांत मानने वाला हिंदू यदि अपने इस सिद्धांत पर पुनर्विचार करता भी है तो इस बात से किसी को शिकायत क्यों होनी चाहिए? हर व्यक्ति, समूह या संस्था को यह अधिकार है कि वो अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए समय-समय पर आवश्यकतानुसार अपनी रणनीति बदले। जब तक यह रणनीति आधुनिक वैश्विक परिवेश के किसी कानून का उलंघन नहीं करती, उसके विरुद्ध शिकायत कहाँ तक जायज है? जहाँ तक राजनीतिक कारणों की बात है, यह बहस का विषय है।
आज हिंदुओं द्वारा उठाए जाने वाले जिन प्रश्नों को असहिष्णुता का नाम दिया जा रहा है, दरअसल वह दशकों से हिंदुओं के विरुद्ध सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक नैरेटिव से उपजे खीज का नतीजा है। दशकों तक ख़ास हाथों के नियंत्रण में रहने वाला नैरेटिव आज उन्हीं हाथों से फिसल रहा है तो उसे हिंदुओं की असहिष्णुता का नाम दिया जा रहा है।
पिछले लगभग एक दशक से हिंदुओं पर असहिष्णु होने के आरोप लगते रहे हैं। आरोप लगाने वालों में ऐसे लोग और समूह भी हैं जो हजारों वर्षों से स्वीकृत लिंगभेद तक को कुछ भी करके नष्ट करने पर उतारू हैं क्योंकि उन्हें या तो सभी स्थापित मान्यताओं का नाश करना है या फिर अपने अस्तित्व पर खतरा दिखाई देता है। ऐसे में यदि अपने अस्तित्व को लेकर हिंदू जागरूक हो रहा है तो उसमें आश्चर्य कैसा? वैसे भी हिंदुओं का विरोध मौखिक या लिखित है। सारी असहिष्णुता दिखाने का आरोपित हिंदू भारी भीड़ जुटाने, आगजनी या किसी का गला काटने का काम नहीं करता। अपने विरुद्ध किए जाने वाले प्रोपेगंडा और चलाए जाने वाले एजेंडा के विरुद्ध आज भी उसका सबसे बड़ा हथियार आर्थिक विरोध है और इसके लिए उनका आभार प्रकट किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान में ऑनर किलिंग से जुड़ा एक दिलदहाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहाँ एक बेटी ने अपने अब्बू की मर्जी के खिलाफ जाकर निकाह कर लिया था। इससे आगबबूला होकर पाकिस्तानी शख्स मंजूर हुसैन ने अपनी दो बेटियों और चार पोते-पोतियों समेत अपने परिवार के सात सदस्यों को जिंदा जला दिया। हुसैन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुजफ्फरगढ़ जिले का रहने वाला है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मंजूर के घर में उसकी बेटियाँ फौजिया, बीबी और खुर्शीद अपने परिवार के साथ रह रही थीं। आग में जलने से बीबी, उसके नवजात बेटे समेत उसके चार नाबालिग बच्चों की मौत हो गई।
बीबी के पति महबूब अहमद जो इस हादसे से बाल-बाल बचे थे, उन्होंने अपने ससुर मंजूर हुसैन और उसके बेटे साबिर हुसैन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महबूब ने पुलिस को बताया, ”मैं व्यापार के लिए मुल्तान गया था। जब वापस लौटा तो देखा कि घर से आग की लपटें निकल रही थीं। वहाँ से मैंने दो लोगों, मंजूर हुसैन और उसके बेटे साबिर हुसैन को भागते हुए देखा था। पुलिस अधिकारी अब्दुल मजीद ने रॉयटर्स को बताया, “प्रेम विवाह के चलते दोनों परिवारों के बीच रंजिश थी, इसी के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया है।”
बता दें कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को दिए अपने बयान में, महबूब अहमद ने कहा कि उसने और बीबी ने साल 2020 में मंजूर हुसैन की मर्जी के खिलाफ निकाह किया था। इसको लेकर मंजूर काफी गुस्से में रहता था। उसे यह निकाह पसंद नहीं था। इसके चलते उसने घर के सात सदस्यों को मौत के घाट उतारने की योजना बनाई थी। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, पाकिस्तान में हर साल ऑनर किलिंग के लगभग 1000 मामले दर्ज किए जाते हैं।
रेस्टॉरेंट एग्रीगेटर और फ़ूड डिलीवरी कंपनी Zomato के CEO दीपिंदर गोयल ने उस कर्मचारी को फिर से बहाल कर दिया है, जिसे कंपनी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बताने पर निकाल दिया था। दीपिंदर गोयल ने कहा कि एक कंपनी के सपोर्ट टीम द्वारा अनभिज्ञता से हुई गलती राष्ट्रीय मुद्दा बन गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि हमारे देश में सहिष्णुता और शांति का स्तर आज जितना है, इससे कहीं बहुत ज्यादा ऊँचा होना चाहिए।
दीपिंदर गोयल ने अपने बयान में कहा, “हम फिर से उस कस्टमर केयर एजेंट को बहाल कर रहे हैं क्योंकि ये अकेला ऐसा कारण नहीं होना चाहिए, जिसके आधार पर किसी को कंपनी से निकाल दिया जाए। इस घटना से वो आसानी से कुछ सीख सकती हैं और आगे अच्छा कर सकती हैं। हुए याद रखिए, हमारे कॉल सेंटर एजेंट्स युवा लोग हैं, जो अपने करियर के शुरुआती हुए संवेदनशील दौर में हैं।”
दीपिंदर गोयल ने कहा कि हम सभी को एक-दूसरे की खामियों के प्रति सहिष्णुता दिखानी चाहिए। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि हमें एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति से जुड़ी भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने ट्विटर के जरिए लिखा, “तमिलनाडु, हम आपसे प्यार करते हैं। उतना ही, जितना हम बाकी के देश से करते हैं। ना ज्यादा, ना कम। हम सब समान ही तो हैं, चाहे कितने ही अलग क्यों न हों।”
Zomato के CEO दीपिंदर गोयल ने जारी किया बयान
Zomato, हिंदी और कस्टमर केयर कर्मचारी: जानिए क्या है पूरा मामला
बता दें कि
रेस्टॉरेंट एग्रीगेटर और फ़ूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने अपने एक कस्टमर केयर कर्मचारी को फायर कर दिया था, क्योंकि उसने कहा था कि थोड़ी-बहुत हिंदी सभी को आनी चाहिए। विकास नाम के यूजर ने ट्विटर के माध्यम से कंपनी से शिकायत की थी। इसके बाद Zomato ने बयान जारी कर के सफाई दी थी। उक्त ग्राहक ने Zomato से रिफंड की माँग की थी, क्योंकि भोजन के मेनू में उसने जो ऑर्डर किया था, वो उसे नहीं मिला था।
इसीलिए, उसने कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बात की। कर्मचारी ने कहा था कि वो रेस्टॉरेंट से बात करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भाषा की बाधा के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा है। इस पर ग्राहक विकास ने कहा था कि अगर Zomato तमिलनाडु में काम कर रहा है तो उसे ऐसे लोगों को हायर करना चाहिए, जो तमिल जानते हों। उसने किसी अन्य कर्मचारी को ट्रांसफर कर के अपने रिफंड की माँग की थी।
इस पर कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने लिखा था, “आपको बता दें कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और सभी को इसकी थोड़ी-बहुत जानकारी होनी चाहिए।” इसके बाद उक्त कर्मचारी ने ग्राहक के साथ हुई गलती के लिए माफ़ी भी माँगी और इसे एक दुर्भाग्यशाली घटना बतया। विकास ने ट्विटर पर इस चैट का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया और लिखा कि उक्त कर्मचारी तमिल नहीं जानता, इसीलिए मुझे झूठा बोल रहा है।
Vanakkam Vikash, we apologise for our customer care agent's behaviour. Here's our official statement on this incident. We hope you give us a chance to serve you better next time.
इसके बाद Zomato ने इस सम्बन्ध में बयान जारी कर के कहा था कि वो अपने कस्टमर एजेंट के व्यवहार के लिए क्षमा माँगता है। उसने अपने बयान में कहा था, “हमारी विविधता भरी संस्कृति को नजरअंदाज करने के लिए हमने उक्त कर्मचारी को हटा दिया है। हम अपने एजेंट्स को जिन संवेदनशीलता के लिए प्रशिक्षित करते हैं, ये व्यवहार इसके विपरीत था। ये हमारे प्रोटोकॉल्स के विरुद्ध था, इसीलिए हमने ये कार्रवाई की।”
अंग्रेजी और तमिल में जारी किए गए बयान में Zomato ने कहा था, “हमारे कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने जो भी कहा, भाषा और विविधता के प्रति वो कंपनी की राय को नहीं दर्शाता। हम अपने एप का एक तमिल वर्जन भी बना रहे हैं। अनिरुद्ध रविचंद्र को हमने अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। हम अपना मार्केटंग कम्युनिकेशन यहाँ तमिल में ही कर रहे हैं। कोयम्बटूर में हम अपना लोकल कॉल सेंटर भी बना रहे हैं। हम जानते हैं कि भोजन और भाषा किसी भी स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसीलिए हम दोनों को गंभीरता से लेते हैं।” अब उक्त कर्मचारी को CEO दीपिंदर गोयल ने पुनः बहाल कर दिया है।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘आलसी’ और ‘अनपढ़’ बताने वाला अपमानजनक ट्वीट करने के बाद सोमवार को कर्नाटक कॉन्ग्रेस को शर्मिंदा होना पड़ा। कर्नाटक कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट में कन्नड़ में कहा, “कॉन्ग्रेस ने स्कूल बनाए, लेकिन मोदी कभी पढ़ने नहीं गए। कॉन्ग्रेस ने वयस्कों को सीखने के लिए योजनाएँ बनाईं, लेकिन मोदी ने वहाँ भी नहीं सीखा। भले ही भीख माँगना प्रतिबंधित है, लेकिन आलसी लोगों ने देश की जनता को भिखारी बना दिया है। #angoothachhaapmodi की वजह से देश भुगत रहा है।”
कर्नाटक कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया अपमानजनक ट्वीट
कर्नाटक में 30 अक्टूबर को सिंदगी और हनागला निर्वाचन क्षेत्रों के लिए होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का शर्मनाक ट्वीट आया। इस ट्वीट के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कथित तौर पर अपनी टीम से इस सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने के लिए कहा है। इसके साथ ही शिवकुमार ने इस ट्वीट के लिए ‘नौसिखिए सोशल मीडिया हैंडलर’ को दोष दिया है।
I have always believed that civil and parliamentary language is a non-negotiable pre-requisite for political discourse. An uncivil tweet made by a novice social media manager through the Karnataka Congress official Twitter handle is regretted and stands withdrawn.
शिवकुमार ने ट्वीट किया, “मैंने हमेशा माना है कि राजनीतिक डिस्कोर्स के लिए लोक और संसदीय भाषा एक आवश्यकता है। कर्नाटक कॉनग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के माध्यम से एक नौसिखिए सोशल मीडिया मैनेजर द्वारा किया गया एक असभ्य ट्वीट खेदजनक है और इसे हटा लिया गया है।”
एक तरफ कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ट्वीट के बारे में अफसोस जता रहे थे, जबकि पार्टी प्रवक्ता लावण्या बल्लाल ने इस मामले में माफी माँगने से इनकार कर दिया है। एनडीटीवी से बातचीत में ट्वीट का बचाव करते हुए लावण्या ने कहा कि कर्नाटक भाजपा ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व का अपमान करने वाले और अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए इससे बदतर ट्वीट किए हैं।
“The tweet was tongue-in-cheek but it is not as disgusting as some of the tweets that have come out of #Karnataka BJP in the last one week”: @LavanyaBallal, Congress Spokesperson pic.twitter.com/falrsw4wNf
जब एंकर ने लावण्या से पूछा कि क्या कॉन्ग्रेस का यह ट्वीट ‘जैसे को तैसा’ था, तब उन्होंने कहा, “क्या आपने कभी बीजेपी से उनके आचरण के लिए सवाल किया है?” हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब कॉन्ग्रेस ने भारत के प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है।
पिछले महीने टाइम्स नाउ नवभारत पर एक चर्चा में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता मुदित अग्रवाल ने कहा था कि पीएम मोदी ‘अपनी मां को टीवी पर बेचते हैं’। पीएम मोदी की पृष्ठभूमि के बारे में बात करते हुए कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “उन्होंने कभी चाय नहीं बेची। वह झूठ बोल रहे थे। वह उस तरह के व्यक्ति हैं, जो टेलीविजन पर अपनी मां को बेचते हैं।”
नवंबर 2018 में कॉन्ग्रेस नेता राज बब्बर ने यह कहकर पीएम मोदी की माँ का मजाक उड़ाया था कि रुपये का इतना अवमूल्यन हो रहा है कि वह उनकी माँ की उम्र (97/98) तक पहुँच गया है। इससे पहले, कॉन्ग्रेस के एक नेता और सांसद उम्मीदवार ने पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की चाची, माँ और बहन की तुलना आवारा मवेशियों से की थी।
खुद पीएम मोदी ने 2019 में एक रैली को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस द्वारा उन्हें बोले गए अपशब्दों की चर्चा की थी। उन्होंने कहा था, “कॉन्ग्रेस के एक नेता ने मुझे ‘गंदी नाली का कीड़ा’ कहा, एक नेता ने मुझे पागल कुत्ता कहा, दूसरे ने मुझे भस्मासुर कहा। एक और कांग्रेसी नेता, जो विदेश मंत्री थे, ने मुझे बंदर कहा जबकि एक अन्य मंत्री ने मेरी तुलना दाऊद इब्राहिम से की।” पीएम ने आगे कहा था, “उन्होंने मेरी माँ को भी गालियाँ दीं और यहाँ तक पूछा कि मेरे पिता कौन हैं। याद रखें कि यह सब मेरे प्रधानमंत्री बनने के बाद कहा गया था।”
कर्नाटक में एक मुस्लिम महिला के साथ ऑटो में जाने पर एक हिंदू युवक की पिटाई कर दी गई। मामले में ऑटो ड्राइवर समेत 25 लोगों को नामजद किया गया है। संकेश्वर की रहने वाली महिला ने मालामारुती पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि यह घटना उस समय हुई जब वह रायबाग के चिंचली के एक दोस्त से पैसे उधार लेने शहर आई थी।
मुस्लिम महिला ने शिकायत में आरोप लगाया, “हमने लोन पर चर्चा करने के लिए पार्क तक पहुँचने के लिए एक ऑटो रिक्शा किराए पर लिया। ऑटो ड्राइवर ने उसके दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ होने पर आपत्ति जताई। वह हमें अमननगर में एक सुनसान जगह पर ले गया। रास्ते में चार अन्य लोग ऑटो में सवार हो गए। कुछ देर बाद 10 से 15 लोग बाइक पर पहुँचे। उन्होंने मेरे दोस्त पर लकड़ी के लट्ठों और धारदार हथियारों से हमला किया। उन्होंने उसका मोबाइल फोन, 50,000 रुपए नकद, आधार और एटीएम कार्ड भी छीन लिए।”
सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर आरोपित ऑटो ड्राइवर हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। डीसीपी विक्रम आमटे ने डेक्कन हेराल्ड को बताया कि अपराध में शामिल सभी लोगों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि इस तरह की हाल में कई घटनाएँ सामने आई है। इससे पहले तेलंगाना के निजामाबाद में इसी तरह के मामले में भीड़ ने दलित युवक की पिटाई की थी। उसके बाद बेंगलुरू से एक वीडियो सामने आया था जिसमें मुस्लिम भीड़ ने बाइक सवार हिंदू युवक को रोककर धमकाया, क्योंकि वह एक मुस्लिम महिला के साथ घूम रहा था।
निजामाबाद में मुस्लिम लड़की के साथ सरकारी अस्पताल जा रहे दलित को कुछ कट्टरपंथी मानसिकता वाले मुस्लिमों ने रोक लिया था। उसे बेरहमी से पीटने के बाद उसका अपहरण कर लिया था। कई घंटों के बाद जब आरएसएस के स्थानीय नेताओं ने इस मामले में हस्तक्षेप किया तो उसे छोड़ा गया। बाद में लड़की के भाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए बताया कि उसी ने अपनी बहन को व्यक्ति के साथ डॉक्यूमेंट लेने के लिए भेजा था।
वहीं दक्षिण बेंगलुरू की घटना में हिंदू व्यक्ति मुस्लिम लड़की को बाइक पर बिठाकर जा रहा था तो मुस्लिम भीड़ ने उसे पीट दिया था। भीड़ में शामिल लोग हिंदू व्यक्ति को धमकी देते हुए उसे किसी भी मुस्लिम महिला के साथ यात्रा नहीं करने को कह रहे थे। वहीं हिंदू व्यक्ति के साथ यात्रा करने के मामले में मुस्लिम महिला का मजाक भी बनाया गया। यहीं नहीं उसे उसके परिवार का फोन नंबर देने के लिए मजबूर किया गया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बताया था कि मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ चल रहे नरसंहार पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखने के कुछ दिनों बाद, अब सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने हमलों को अंजाम देने वाले कट्टरपंथी मुस्लिमों की भूमिका को नजरअंदाज करते हुए पूरे मामले में ही लीपापोती करने उतर आए हैं।
प्रशांत भूषण बांग्लादेश में मुस्लिमों द्वारा किए गए जघन्य अपराधों को गायब करते हुए उन्हें मसीहा साबित करने के लिए ‘द लाइव टीवी’ नाम के एक प्रोपेगेंडा चैनल का बड़ी म्हणत से खोजकर एक ऐसा वीडियो साझा किया, जिसमें यह झूठा दावा किया गया, “बांग्लादेश के लाखों बहुसंख्यक मुसलमान हिंदुओं की रक्षा में सड़कों पर उतर आए।”
प्रशांत भूषण के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
मंगलवार (19 अक्टूबर, 2021) सुबह एक ट्वीट हुए प्रशांत भूषण ने जोर देते हुए कहा, “देखना चाहिए। कुछ असामाजिक तत्वों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमला किया। लेकिन, लाखों बहुसंख्यक मुसलमान हिंदुओं का समर्थन करने के लिए उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए।”
यहाँ यह ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है कि प्रशांत भूषण ने अपने फॉलोवर्स को यह बताने से परहेज किया कि मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा कथित ‘कुरान के अपमान’ की अफवाहों पर हिन्दुओं पर ये हमले किए गए थे, लेकिन ‘मुस्लिम’ शब्द का उल्लेख उन लोगों के लिए किया था जो कथित तौर पर हिंदुओं के समर्थन में सामने आए थे। अधिवक्ता ने अपने दावों की पुष्टि के लिए बाकायदा ‘द लाइव टीवी’ का एक वीडियो भी साझा किया था।
जरूर देखिए। बांग्लादेश में कुछ अराजक तत्यौं ने अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमला किया। लेकिन उन हमलावरों के खिलाफ बांग्लादेश के लाखों बहुसंख्यक मुसलमान हिंदुओं की रक्षा में, सड़कों पर उतर आए।https://t.co/1WQeMS6qLO
प्रशांत भूषण ने कट्टर मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ क्रूर हमलों को ‘असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए हमले’ के रूप में बताया, लेकिन यह दावा करने में कोई भूल नहीं कि सभी प्रदर्शनकारी मुस्लिम थे जो ‘हिंदुओं की रक्षा’ के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रज्वल गौतम द्वारा प्रस्तुत 10 मिनट के लंबे वीडियो में, उन्होंने यही दावा किया कि लक्षित हमलों के बाद लाखों मुसलमानों ने हिंदू समुदाय के समर्थन में प्रदर्शन किया। बता दें कि यह सोमवार (18 अक्टूबर) को अपलोड किया गया था।
(वीडियो साभार- Youtube/The Live TV)
उसी दिन, लोकप्रिय ट्विटर यूजर अक्षय सिंह ने उसी वीडियो को इस कैप्शन के साथ साझा किया था, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं द्वारा भारी विरोध’। उन्होंने बताया कि यह अकेले हिंदू समुदाय द्वारा एक प्रदर्शन था। रैली में कोई मुस्लिम नेता नजर नहीं आया।
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी इसी तरह का एक वीडियो साझा करते हुए इसे ‘हिंदुओं और गैर-सांप्रदायिक प्रगतिशील लोगों द्वारा प्रदर्शन’ कहा था। उन्होंने भी लाखों मुसलमानों की मौजूदगी का कोई जिक्र नहीं किया।
Hindus and non-communal progressive people took to the street in Chitagong, Bangladesh to protest the atrocities against Hindus/ crime against humanity. pic.twitter.com/ZXhmAzR2eY
हालाँकि, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि विरोध के दौरान कोई मुस्लिम मौजूद नहीं था, हाँ इसकी बहुत कम संभावना है कि लाखों मुसलमान जुलूस का हिस्सा थे। लोकप्रिय ट्विटर यूजर (@BefittingFacts) ने यह भी बताया कि पारंपरिक स्कल टोपी और दाढ़ी में कोई भी मुस्लिम व्यक्ति नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए जुलूस में बहुतायत हिन्दुओं की है।
The cover image you’re showing is from Lahore, Pakistan.
प्रशांत भूषण के बढ़ा-चढ़ा कर किए दावों के अलावा, यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि वीडियो का थंबनेल कश्मीर क्षेत्र में एक विरोध प्रदर्शन की एक तस्वीर है। जिसमें प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के झंडे पकड़े नजर आ रहे हैं।
‘द लाइव टीवी’ द्वारा पोस्ट किए गए दावे और थंबनेल कम से कम कहने के लिए भ्रामक हैं और मुस्लिमों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले और सताए गए हिंदुओं के साथ मुसलमानों की कथित एकजुटता दिखाकर, सब कुछ पाक-साफ और एक झूठी मिसाल देकर उनकी क्रूरता और इस घटना की भयावहता को कम करने की कोशिश की गई है।
स्क्रीनशॉट
लाइव टीवी, जिसके यूट्यूब पर 5.94 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जो लगातार हिंदुओं के प्रति नफरत, आपत्तिजनक दावों के साथ राष्ट्रवादी पत्रकारों को निशाना बनाने और मौजूदा भाजपा सरकार की छवि खराब करने के लिए भ्रामक और फेक कंटेंट पोस्ट करने के लिए बदनाम है।
Live TV का स्क्रीनशॉट
बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा
बांग्लादेश के नोआखली जिले में क्रूर हमलों, बर्बरता, लूटपाट और आगजनी से वहाँ के हिन्दू बेहाल हैं। यह सिलसिला पिछले कई दिनों से जारी है। बुधवार (13 अक्टूबर) को ही हिंसक झड़प में करीब 150 घरों पर मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया था और कम से कम तीन लोग मारे गए थे।
एक दिन बाद फिर, कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक उन्मादी भीड़ ने बांग्लादेश के चटगाँव डिवीजन में नोआखली जिले में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) मंदिर पर हमला किया। इस्कॉन की बांग्लादेश इकाई ने खेद व्यक्त किया कि मंदिर में आगजनी के दौरान इसके संस्थापक एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की मूर्ति को भी जला दिया गया था।
बता दें कि एक दुर्गा पूजा पंडाल में ‘कुरान का अपमान’ करने का दावा करने वाली एक फेसबुक अफवाह के वायरल होने के बाद हिंसा और तोड़फोड़ शुरू हुई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जहाँ मुस्लिमों की भीड़ को बांग्लादेश के चाँदपुर इलाके में पथराव और अस्थायी दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ करते और हिंदू परिवारों पर हमला करते देखा गया।
बांग्लादेश के एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि मुस्लिमों की भीड़ एक स्थानीय इस्कॉन मंदिर को जलाने के लिए उकसा रही थी। बांग्लादेशी सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया था कि हमलों की आड़ में बड़े पैमाने पर लूटपाट और महिलाओं से छेड़छाड़ भी हुई है। चाँदपुर क्षेत्र में 2 व्यक्ति मृत पाए गए हैं।
उसके बाद के दिनों में भी, हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न जारी था क्योंकि रंगपुर में हिंदुओं के कई घरों को जला दिया गया था।
इस घटना के बाद, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सांप्रदायिक हमलों और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले अपराधियों की पहचान करने और उन्हें दंडित करने का आदेश दिया। इस बीच, नई दिल्ली में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह उच्चायोग के अधिकारियों के संपर्क में है और बांग्लादेश सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
वहीं बताया जा रहा है घटना के बाद से, बांग्लादेश पुलिस ने 100 से अधिक गिरफ्तारियाँ की हैं और मामले की जाँच अभी भी जारी है।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को एनआरआई के बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाले 12 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एचडीएफसी बैंक के 3 कर्मचारी भी शामिल हैं। सभी पर अत्यधिक धनराशि वाले NRI बैंक खाते से अनधिकृत निकासी के प्रयासों में शामिल होने का आरोप है। इनके पास से बड़ी संख्या में पासबुक भी बरामद हुई हैं। बताया जा रहा है कि इन शातिर लोगों ने कई खातों से अनधिकृत ऑनलाइन लेन-देन का 66 बार प्रयास किया।
डीसीपी (साइबर सेल) केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि आरोपितों ने फर्जी तरीके से चेक बुक हासिल कर ली थी, जिसे बरामद कर लिया गया है। इतना ही नहीं इन जालसाजों ने खाताधारक के यूएस स्थित फोन नंबर के जैसा मोबाइल फोन नंबर भी हासिल कर लिया था।
Delhi | 12 people, incl 3 HDFC Bank employees, arrested for their involvement in attempts to make unauthorized withdrawal from a very high value NRI account. 66 attempts of unauthorized online transactions made by this group on the high value account: DCP(Cyber Cell) KPS Malhotra
उन्होंने बताया, “तकनीकी सबूतों, पैरों के निशान और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर कई भौगोलिक स्थानों की पहचान की गई। कुल मिलाकर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 20 स्थानों पर छापे मारे गए।”
पुलिस की गिरफ्त में आए 12 आरोपितों में से तीन एचडीएफसी बैंक के कर्मचारी हैं, जो चेक बुक जारी करने, मोबाइल फोन नंबर अपडेट करने और खाते से जुड़े विभिन्न कार्यों में शामिल थे। यह मामला प्रकाश में तब आया जब एचडीएफसी बैंक ने एक एनआरआई खाते से निकासी के कई अनधिकृत प्रयासों का आरोप लगाते हुए साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
एचडीएफसी बैंक ने अपनी शिकायत में कहा, “एक एनआरआई बैंक खाते में कई बार अनधिकृत रूप से इंटरनेट बैंकिंग का प्रयास करते हुए देखा गया। इसके अलावा, धोखाधड़ी से प्राप्त चेक बुक का इस्तेमाल कर उसी खाते से नकदी निकालने का प्रयास किया गया। केवाईसी में अपडेट मोबाइल फोन नंबर प्राप्त करने का भी प्रयास किया गया था।” एचडीएफसी बैंक की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि पहले से रजिस्टर्ड यूएस मोबाइल फोन नंबर के समान भारतीय मोबाइल फोन नंबर को उसी बैंक खाते से जोड़ दिया गया था।
पुलिस ने बताया कि इससे पहले भी खाते से पैसे निकालने के प्रयास किए गए थे, जिसको लेकर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और पंजाब के मोहाली में दो मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस आरोपितों से इस मामले में पूछताछ कर आगे की जाँच कर रही है। साथ ही यह भी जानने का प्रयास कर रही है यह गैंग इस तरह से अब तक कितनी रकम निकाल चुका है।
रेस्टॉरेंट एग्रीगेटर और फ़ूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने अपने एक कस्टमर केयर कर्मचारी को फायर कर दिया, क्योंकि उसने कहा था कि थोड़ी-बहुत हिंदी सभी को आनी चाहिए। विकास नाम के यूजर ने ट्विटर के माध्यम से कंपनी से शिकायत की थी। इसके बाद Zomato ने बयान जारी कर के सफाई दी। उक्त ग्राहक ने Zomato से रिफंड की माँग की थी, क्योंकि भोजन के मेनू में उसने जो ऑर्डर किया था, वो उसे नहीं मिला था।
इसीलिए, उसने कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बात की। कर्मचारी ने कहा कि वो रेस्टॉरेंट से बात करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भाषा की बाधा के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा है। इस पर ग्राहक विकास ने कहा कि अगर Zomato तमिलनाडु में काम कर रहा है तो उसे ऐसे लोगों को हायर करना चाहिए, जो तमिल जानते हों। उसने किसी अन्य कर्मचारी को ट्रांसफर कर के अपने रिफंड की माँग की।
इस पर कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने लिखा, “आपको बता दें कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और सभी को इसकी थोड़ी-बहुत जानकारी होनी चाहिए।” इसके बाद उक्त कर्मचारी ने ग्राहक के साथ हुई गलती के लिए माफ़ी भी माँगी और इसे एक दुर्भाग्यशाली घटना बतया। विकास ने ट्विटर पर इस चैट का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया और लिखा कि उक्त कर्मचारी तमिल नहीं जानता, इसीलिए मुझे झूठा बोल रहा है।
इसके बाद Zomato ने इस सम्बन्ध में बयान जारी कर के कहा कि वो अपने कस्टमर एजेंट के व्यवहार के लिए क्षमा माँगता है। उसने अपने बयान में कहा, “हमारी विविधता भरी संस्कृति को नजरअंदाज करने के लिए हमने उक्त कर्मचारी को हटा दिया है। हम अपने एजेंट्स को जिन संवेदनशीलता के लिए प्रशिक्षित करते हैं, ये व्यवहार इसके विपरीत था। ये हमारे प्रोटोकॉल्स के विरुद्ध था, इसीलिए हमने ये कार्रवाई की।”
Vanakkam Vikash, we apologise for our customer care agent's behaviour. Here's our official statement on this incident. We hope you give us a chance to serve you better next time.
अंग्रेजी और तमिल में जारी किए गए बयान में Zomato ने कहा, “हमारे कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने जो भी कहा, भाषा और विविधता के प्रति वो कंपनी की राय को नहीं दर्शाता। हम अपने एप का एक तमिल वर्जन भी बना रहे हैं। अनिरुद्ध रविचंद्र को हमने अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। हम अपना मार्केटंग कम्युनिकेशन यहाँ तमिल में ही कर रहे हैं। कोयम्बटूर में हम अपना लोकल कॉल सेंटर भी बना रहे हैं। हम जानते हैं कि भोजन और भाषा किसी भी स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसीलिए हम दोनों को गंभीरता से लेते हैं।”
पाकिस्तान की शह पर आतंकी संगठनों द्वारा जम्मू-कश्मीर के घाटी में गैर-मुस्लिमों और प्रवासी मजदूरों के खिलाफ जारी हिंसा को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गंभीर हो गई है। एक तरफ सुरक्षाबलों ने आतंकियों के सफाये के लिए अपने ऑपरेशन को तेज करते हुए 6 आतंकियों को मार गिराया है तो दूसरी तरफ सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने नियंत्रण रेखा का दौरा किया है। इसके अलावा, घाटी में टारगेट किलिंग की तह में जाने के लिए मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा कराने का निर्णय लिया गया है।
भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने व्हाइट नाइट कोर के अग्रिम इलाकों का दौरा किया और नियंत्रण रेखा पर स्थिति का आकलन किया। नरवणे ने कमांडरों से वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान इलाके में चल रहे घुसपैठ विरोधी अभियानों के बारे में उन्हें जानकारी दी गई।
Army Chief General MM Naravane visited forward areas of White Knight Corps & undertook a first-hand assessment of the situation along the Line of Control. He was briefed by commanders on the ground about the present situation & ongoing counter-infiltration operations: Indian Army pic.twitter.com/PsrheZgnfP
संबंधित सूत्रों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया है कि घाटी में हुए 11 टारगेट किलिंग में से 6 मामलों की जाँच एनआईए करेगी। इन हत्याओं की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी। हालाँकि, टारगेट किलिंग को लेकर एनआईए पहले ही मामले की जाँच कर रही है और इस संबंध में उसने 9 लोगों को गिरफ्तार करते हुए टीआरएफ से संबंधित दो दर्जन से अधिक जगहों पर छापेमारी की है।
इस दौरान यह बात सामने आई है कि घाटी में विस्थापित कश्मीरियों को फिर से बसाने और औद्योगीकरण के सरकारी प्रयास में बाधा पहुँचाने के लिए पाकिस्तान ने सुनियोजित साजिश रची है, जिसमें आतंकी संगठनों के माध्यम से इसे अंजाम दिया जा रहा है। एजेंसी को ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ स्थानीय लोग इन हत्याओं में भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले समय में एनआईए कई और जगहों पर छापेमारी के साथ-साथ कुछ और लोगों की गिरफ्तारी कर सकती है।
दूसरी तरफ सेना ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी के घने जंगलों में छिपे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकियों को मार गिराया है। इन जंगलों में अभी भी तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की सूचना है। इलाके में मुठभेड़ अभी जारी है।
साउथ ब्लॉक के अनुसार, पिछले दो से तीन महीनों में लश्कर के 9-10 आतंकवादी पाकिस्तान से सीमांत जिले राजौरी-पुंछ जिले के जंगलों की ओर घुसपैठ कर चुके हैं। वहीं, नियंत्रण रेखा और बाड़ वाले क्षेत्र से घुसपैठ की कई कोशिशों को नाकाम कर दिया गया था। दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है।
इसके पहले 16 अक्टूबर को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ विपिन रावत ने इलाके का दौरा किया था। उन्होंने सेना के स्थानीय कमांडरों के साथ मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया था और इलाके में जारी आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के बारे में जानकारी ली थी।
गौरतलब है कि लश्कर का छद्म संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएलएफ) ने रविवार को हुई राजा और जोगिंदर देव की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। उसने इसे प्रतिशोध बताते हुए प्रवासी मजदूरों को इलाका छोड़ने छोड़ने की धमकी दी थी। इसके पहले बिहार के ही बांका निवासी अरविंद कुमार साह की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कश्मीर में इस महीने मारे गए 11 नागरिकों में 5 प्रवासी श्रमिक थे।