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बाप कम्युनिस्ट हो, सत्ता में वामपंथी हों तो प्यार न करें, प्यार हो जाए तो माँ न बने: अपने ही बच्चे के लिए भटक रहे अनुपमा-अजीत

अनुपमा और अजीत का बेटा आज 19 अक्टूबर को 1 साल का हो गया। पिछले साल 2020 में इसी दिन उसकी किलकारी गूँजी थी। कायदे से देखें तो ये उस बच्चे का पहला जन्मदिन है। लेकिन पीड़ादायक बात ये है कि जो बच्चा ठीक एक साल पहले जन्मा था, उसका पता न उसकी माँ को है और न पिता को। दोनों दर-दर भटककर उसे ढूँढ रहे हैं।

वो कहाँ हैं कैसा है…ये सवाल सिर्फ एक व्यक्ति जानता है और वो है कम्युनिस्ट नेता जयचंद्रन। जयचंद्रन ने ही 3 दिन के मासूम को उसकी माँ से अलग कर न जाने किसे सौंपा कि उसका पता अब तक किसी को नहीं है। रिश्ते में यह कम्युनिस्ट नेता अनुपमा का पिता है और वह अजीत के साथ अपनी बेटी के रिश्ते के ख़िलाफ़ था।

दोनों में प्रेम था और इसी बीच अनुपमा 2020 में गर्भवती हुई। वो जानती थी कि उसके परिजन ये रिश्ता नहीं स्वीकारेंगे इसलिए उसने घर में रहते हुए किसी को अपनी प्रेगनेंसी की बात नहीं बताई। एक दिन अजीत आया और हिम्मत करके अनुपमा को अपने साथ ले गया। बाद में अनुपमा के घरवालों ने बहन की शादी, ‘घर की इज्जत’ के नाम पर उसे वापस बुलाया और गर्भपात की कोशिशों में जुट गए।

जब एबॉर्शन के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया तो वहाँ वह कोरोना पॉजिटिव थी। नतीजन बच्चा एबॉर्ट होने से रुक गया। थोड़े दिन बाद अजीत को पता चला तो वो अनुपमा को साथ ले गया और घर नहीं भेजा। लेकिन डिलीवरी के समय जब वह दोबारा अस्पताल में भर्ती हुई तो बच्चा होने के 3 दिन बाद उसके घरवाले उसे बरगलाकर अपने साथ ले गए और बीच रास्ते में बच्चा छीन कर कहा कि बहन की शादी के बाद वह उसे लौटा दिया जाएगा।

द न्यूज मिनट के अनुसार, शादी हुई लेकिन बच्चा नहीं मिला। अनुपमा रोती रही लेकिन घरवालों ने उसे किसी से न बात करने दी और न घर से निकलने दिया। बड़ी मुश्किल से वह मार्च 2021 में घर से भागी और अजीत को सारी बातों के बारे में बताया। दोनों ने मिलकर कई जगह शिकायत की, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।

जयचंद्रन, सीपीआई (एम) के पेरूकाडा में स्थानीय कमेटी का सदस्य हैं और तिरुवनंतपुरम सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन में जनरल सेक्रेट्री भी। शायद इसीलिए पार्टी नेताओं से लेकर अधिकारी और सीएम पिनराई विजयन तक ने इस मामले में अब तक हस्तक्षेप नहीं किया है। उलटा अनुपमा को मानसिक तौर पर अस्थिर कहकर समझाया जा रहा है कि बच्चे को गोद दिया गया लेकिन अनुपमा की सहमति से… क्योंकि वो बच्चा पालने की हालत में नहीं थीं।

दूसरी ओर अनुपमा है जो पूछती हैं, “मेरा बेटा कहाँ? मैं उसे दूध तक नहीं पिला पाई। कोई मेरी मदद करना नहीं चाहता। प्रशासन भी इच्छुक नहीं है।” बता दें कि अब बच्चे के माता-पिता उसे वापस पाने के लिए कोर्ट जाने को तैयार हैं। उनका तर्क है कि अनुपमा ने अपने बच्चे के लिए कोई ऐसी सहमति नहीं दी जिससे वो दूर हो। लेकिन अगर सीपीआई (एम) नेता अपनी बेटी को मानसिक रोगी कह भी रहे हैं तो क्या अजीत का बच्चे पर कोई हक नहीं था जो उनसे बिन पूछे बच्चा किसी को गोद दे दिया गया।

नाम में खान इसलिए शाहरुख का बेटा निशाना: रिया चक्रवर्ती के लिए ‘महिला कार्ड’ खेलने वाली मीडिया का अब ‘मुस्लिम’ प्रलाप

मीडिया में एक नैरेटिव चलाया जा रहा है कि शाहरुख़ खान के नाम में ‘खान’ है, अर्थात वो मुस्लिम हैं इसीलिए उनके बेटे को ड्रग्स मामले में ‘फँसाया’ गया है। ‘मिड डे’ में एजाज अशरफ ने एक लेख लिख कर कहा है कि भाजपा के हिंदुत्व विचारधारा की वजह से सब हो रहा है। कॉन्ग्रेस नेता उदित राज और PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने भी कहा कि शाहरुख़ मुस्लिम हैं, इसीलिए NCB ने ये कार्रवाई की है। सोशल मीडिया में ऐसा ट्रेंड भी चला। अरब का ‘गल्फ न्यूज़’ भी शाहरुख़ खान का प्यार बना हुआ है।

‘मैं खान हूँ तो फँसाया जाऊँगा’ शीर्षक वाले इस लेख में लिखा है कि शाहरुख़ खान ने भाजपा नेताओं के साथ सेल्फी नहीं डाली और जन्मदिन की शुभकामनाएँ नहीं दी, इसीलिए उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई हुई है। ये तो आमिर खान ने भी नहीं किया है। सलमान खान भी भाजपा नेताओं के साथ सेल्फी नहीं डालते। रिया चक्रवर्ती कौन सी मुस्लिम थीं? तब तो कोई और कार्ड खेला गया था। लिखा है कि अमिताभ बच्चन को छूने की कोशिश कौन करेगा? अरे भाई, वो तो कॉन्ग्रेस के नेता रहे हैं और उनकी पत्नी सपा सांसद हैं।

क्या ड्रग्स मामले में आर्यन खान को अकेले गिरफ्तार किया गया है? कुल 8 लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी, जिनमें एक मुनमुन धामेचा भी हैं। उनके लिए तो किसी ने ये दावा नहीं किया कि उन्हें हिन्दू होने की वजह से परेशान किया जा रहा है। जब भी कोई अपराधी या आरोपित मुस्लिम निकलता है, लिबरल गिरोह का पूरा ध्यान उसके अपराधों से हट कर उसकी मजहबी पहचान पर केंद्रित हो जाता है और इसे ही मुद्दा बनाया जाता है।

इसके बाद ‘मुस्लिम कार्ड’ निकाल कर उसे पीड़ित बनाने की कोशिश चल पड़ती है। हालाँकि, अगर किसी हिन्दू को झूठे मामलों में भी फँसाया जाए तो लिबरल गिरोह उसे पहले ही अपराधी साबित कर देता है, भले ही न्यायपालिका ने उसे बरी ही क्यों न कर दिया हो। ये भी ध्यान रखिए कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग और लिबरल-सेक्युलर गिरोह ऐसे मामलों में खुद को ही जाँच एजेंसी और सुप्रीम कोर्ट समझने लगता है।

कोई हिन्दू हो तो कहा जाता है कि ये मोदी सरकार की विचारधारा का समर्थक है और अपराधी है, जबकि कोई मुस्लिम हो तो उसे ‘हिन्दुओं के अत्याचार’ का पीड़ित बता दिया जाता है। इसी तरह हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ा कर रुपए कमाने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के मामले में भी किया गया था। उसके साथ गिरफ्तार हुए शो के आयोजन हिन्दू ही थे, फिर भी कार्ड मुस्लिम पहचान का ही खेला गया।

यही गिरोह विशेष तो नरेंद्र मोदी के पीछे तब से पड़ा है, जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 2002 में गुजरात में दंगे हुए। जनता की अदालत से लेकर न्यायपालिका तक, हर जगह उन्हें कोई दोषी साबित नहीं कर पाया। लेकिन, गिरोह विशेष की नजर में वो दोषी हैं। आखिर इसी हिन्दू बहुमत वाले देश ने शाहरुख़ खान को सुपरस्टार बनाया न? हिन्दुओं ने कभी बॉलीवुड सेलेब्स और क्रिकेटरों को मजहब की नजर से नहीं देखा लेकिन सारे के सारे खुद बिल से बाहर आ रहे हैं।

असली बात तो ये है कि यही लिबरल गिरोह शाहरुख़ खान से घृणा करता रहा है कि वो क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना नहीं करते हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर उनके पूरे परिवार को गाली दी गई थी, क्योंकि वो इस पर्व को मनाते हैं। 2015 में उनके असहिष्णुता वाले बयान को लेकर हंगामा मचाया गया था और तब से उन्होंने कई मुद्दों पर चुप्पी ही बनाई रखी है। यही बात लिबरल गिरोह को खाए जाती है।

लखीमपुर खीरी हिंसा: उत्तर प्रदेश पुलिस ने 4 और को पकड़ा, अब तक 10 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 18 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चार और लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों की पहचान सुमित जायसवाल, शिशि पाल, सत्य प्रकाश त्रिपाठी उर्फ ​​सत्यम और नंदन सिंह बिष्ट के रूप में हुई है। अब मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 10 हो गई है।

यूपी पुलिस ने एक बयान में कहा, “सोमवार को लखीमपुर खीरी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने SWAT टीम के साथ मिल कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था। SIT जाँचकर्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी आरोपित से पूछताछ कर रहे हैं और आगे की जाँच जारी है।” त्रिपाठी के पास से SWAT टीम ने एक रिवॉल्वर और जिंदा कारतूस भी बरामद किया है।

अंकित दास, शेखर भारती (दास का ड्राइवर) और लतीफ (दास का सुरक्षा गार्ड) से पूछताछ में सत्यम तिवारी का नाम सामने आया था। इंडियन एक्सप्रेस ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा है, “आरोपित शेखर भारती ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन कौशांबी के सत्यम तिवारी SUV चला रहे थे।” एक अन्य अधिकारी के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा है, “आरोपितों से घटना और इसमें उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की जाएगी। अगर वे पूछताछ में सहयोग नहीं करते हैं तो हम उनके रिमांड के लिए आवेदन करेंगे।” इससे पहले पुलिस ने मामले में आशीष मिश्रा, लवकुश पांडे, आशीष पांडे, शेखर भारती, लतीफ और अंकित दास समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया था।

लखीमपुर हिंसा मामला

3 अक्टूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ की एक भीड़ ने भाजपा के काफिले पर पत्थर और लाठियों से हमला किया। इसके बाद हुए हंगामे के बीच प्रदर्शनकारियों के ऊपर एक वाहन दौड़ता देखा गया। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया। लोगों को वाहन के अंदर से घसीटा और पीट-पीटकर मार डाला।

हिंसा में कुल आठ लोगों की जान चली गई थी। मामले में अब तक दस गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतक के परिजन को 45 लाख रुपए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। मामले की जाँच के लिए एक सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है।

गुजरात सरकार ने ईद-ए-मिलाद जुलूस में 400 लोगों को शामिल होने की दी अनुमति, तीन मुस्लिम विधायकों ने CM को लिखा था पत्र

गुजरात सरकार ने सोमवार को ईद-ए-मिलाद जुलूस के लिए 400 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी है। हालाँकि, यह जुलूस उस इलाके, कॉलोनी या गली में आयोजित हो, लेकिन क्षेत्र से बाहर न जाए। कॉन्ग्रेस के तीन मुस्लिम विधायकों- ग्यासुद्दीन शेख, इमरान खेड़ावाला और मोहम्मद जाविद पीरजादा द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य सरकार से जुलूस में भाग लेने वाले लोगों की संख्या सीमा बढ़ाने का आग्रह किया था, इसके बाद यह अनुमति दी गई है।

इसके पहले सरकार ने जुलूस में एक वाहन और 15 लोगों से अधिक लोगों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया था। राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से नाखुश शेख और दो अन्य मुस्लिम विधायकों ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा था।

कॉन्ग्रेस के तीन मुस्लिम विधायकों द्वारा लिखा गया पत्र

फेसबुक पेज पर साझा किए गए अपने पत्र में कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने बताया था कि राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में ईद के जुलूस को 15 लोगों तक सीमित रखा गया था, जबकि राजनीतिक रैलियों और अन्य धर्मों के त्योहारों के उत्सव में यह सीमा 400 तक बढ़ाई गई। पत्र में कहा गया है, “ईद-ए-मिलाद के जुलूस पर लगाई गई पाबंदियों को देखकर हमें अन्याय का अहसास होता है। एक तरफ मुख्यमंत्री समेत तमाम पार्टियों के नेता और बीजेपी के दूसरे नेता हजारों लोगों के साथ अपनी राजनीतिक रैलियाँ कर रहे हैं। राज्य सरकार ने वर्तमान दिशा-निर्देशों के तहत अन्य धर्मों के त्योहारों को मनाने के लिए 400 लोगों की सीमा रखी गई है। उसी तर्ज पर हमने भी अनुमति माँगी थी, लेकिन सरकार ने हमें केवल एक कार और 15 लोगों को जुलूस में इस्तेमाल करने की अनुमति दी। यह भेदभाव और मजाक जैसा लगता है। हम इस पर हैरान हैं।”

इसके बाद, राज्य सरकार ने सोमवार को एक ‘स्पष्टीकरण’ जारी करते हुए कहा कि एक जुलूस में 400 तक लोग शामिल हो सकते हैं। नए दिशा-निर्देश में कहा गया है कि अगर जुलूस सीमित क्षेत्र से बाहर निकलता है तो केवल 15 लोगों को ही भाग लेने की अनुमति होगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने कहा है कि जुलूस केवल दिन में ही निकाला जा सकता है और कम-से-कम समय में पूरा किया जाना चाहिए। वर्तमान में, राज्य ने गुजरात के आठ प्रमुख शहरों में रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक रात का कर्फ्यू लगा रखा है।

इसके बाद मुस्लिम विधायकों ने जुलूस में शामिल होने वाले मुसलमानों की संख्या बढ़ाए जाने पर राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। इन विधायकों ने एक पत्र लिखकर राज्य सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया आश्वस्त किया कि कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जुलूस निकाला जाएगा।


राज्य में कोरोना संक्रमण के नियंत्रित मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने गुजरात में गणेश चतुर्थी और नवरात्रि के उत्सवों में ढील दी थी। नवरात्रि के दौरान रिहायशी इलाकों में आयोजित गरबा कार्यक्रम में 400 लोगों तक शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसी तरह, सितंबर में आयोजित गणेश चतुर्थी के दौरान बाहरी उत्सव के लिए 400 लोग और इनडोर उत्सव के लिए 200 लोगों की सीमा तय की गई थी।

इधर आतंकी गोली मार रहे, उधर कश्मीरी ईंट-भट्टा मालिक मजदूरों के पैसे खा रहे: टारगेट किलिंग के बाद गैर-मुस्लिम बेबस

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कश्मीर घाटी में गैर-कश्मीरियों को टारगेट कर हत्या करने के बाद दूसरे प्रदेशों से आए श्रमिक अब वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में 12 गैर-स्थानीय लोगों की हत्या के बाद इन प्रवासी मजदूरों में डर का माहौल है और वे जल्द से जल्द अपने गाँव वापस लौट जाना चाहते हैं। प्रवासियों का कहना है कि जिस तरह से आतंकी चुन-चुन कर बाहरी लोगों को निशाना बना रहे हैं, उससे उनके परिजन चिंतित हैं और उन्हें वापस लौटने के लिए दबाव दे रहे हैं।

पलायन को मजबूर मजदूरों ने आजतक से कहा कि वे लौटकर दोबारा कभी कश्मीर नहीं आएँगे, क्योंकि यहाँ आतंकी बाहरी लोगों को धमकी दे रहे हैं और चुन-चुनकर हत्या कर रहे हैं। इन मजदूरों का कहना है कि उनके पास कोई जमा-पूँजी नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस ईंट-भट्टे में वे काम कर रहे थे, वहाँ के मालिकों ने उनके बकाया पैसे भी नहीं दिए।

घाटी में गोल-गप्पे बेचने वाले बिहार निवासी विकास चौधरी अंग्रेजी दैनिक न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहते हैं, “गोल-गप्पे बेचने वाले दो लोगों की हत्या हो चुकी है। मैं भी गोल-गप्पे बेचता हूँ। हम डरे हुए हैं। इन एक गोल-गप्पा विक्रेता अरविंद कुमार साहू, जिसे आतंकियों ने ईदगाह मैदान के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी, हमारे बगल के गाँव के रहने वाला था। अब मुझे अपनी चिंता हो रही है, इसलिए अपने गाँव लौट रहा हूँ।”

घाटी में मजदूरी करने वाले आशीष कहते हैं कि अपनी जिंदगी को दाँव पर लगाने से अच्छा है कि गाँव लौट जाएँ। उनका कहना है कि परिवार और उनकी जान की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है, इसलिए वह परिवार को लेकर घाटी छोड़ रहे हैं।

वभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के भागलपुर निवासी 60 वर्षीय दिनेश मंडल पिछले 40 साल से कश्मीर में आइसक्रीम बेच रहे थे, लेकिन अब उन्होंने अपने गाँव लौटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “हालात खराब हैं। गैर-कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। हम इन परिस्थितियों में कश्मीर में और नहीं रह सकते।”

एक अन्य आइसक्रीम विक्रेता सतीश कुमार कहते हैं, “हर कोई डरा हुआ है। पहले वेंडरों को सड़कों पर निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब उनके कमरों पर हमला किया जा रहा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि रूक जाओ, लेकिन हमने अब कश्मीर छोड़ने का फैसला किया है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों के साथ-साथ घाटी के हिंदुओं और सिखों को टारगेट कर उनकी हत्या की गई थी। आतंकियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद सेना ने अपना अभियान तेज कर दिया है। इसके अलावा, आतंकियों ने सेना पर भी हमला किया था।

घाटी में इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी पर आतंकवादियों पर कड़ा प्रहार करने की माँग तेज हो गई है। घाटी में सेना ने आतंकवादियों को जबरदस्त चोट भी दी है। सेना ने घेर-घेर कर आतंकियों को मौत की नींद सुलाने का अभियान चला रखा है।

सोमू पादरी ने धर्मांतरण का लालच दे विश्वनाथ को प्रेयर के लिए बुलाया, भजन पर दी गाली: विरोध में उसी चर्च में हिंदुओं का श्रीराम जय राम…

कर्नाटक के हुबली में 17 अक्टूबर को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने एक चर्च में चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए वहीं के परिसर में बैठकर भजन गाया। NDTV द्वारा शेयर की गई एक वीडियो में देख सकते हैं कि कई पुरुष और महिलाएँ हुबली के बैरीदेवरकोप्पा चर्च (Bairidevarkoppa Church) के अंदर हाथ जोड़कर भजन गा रहे हैं। 

इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और बीजेपी नेताओं ने पादरी सोमू अवराधी ( Somu Avaradhi) की गिरफ्तारी की भी माँग की। बजरंग दल के राज्य संयोजक रघु सकलेशपोरा ने बताया, “विश्वनाथ नामक एक व्यक्ति को धर्मांतरण के लिए वहाँ (चर्च) ले जाया गया था। लेकिन, वह चर्च से पुलिस स्टेशन गया और पादरी सोमू और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बाद में, हमारे सदस्य चर्च के अंदर जमा हो गए और विरोध करने के लिए हिंदू भजन गाने लगे।”

चर्च में गूँजा श्रीराम-जय राम-जय जय राम।

बता दें कि चर्च में भजन गाने के अलावा बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा विधायक अरविंद बेल्लाड ने नवनगर पुलिस थाने में रविवार को अपना विरोध प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप था कि पुलिस जबरन धर्मांतरण मामले में आरोपित पादरी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। इससे पहले, कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह ने हुबली-धारवाड़ की प्रमुख सड़क और हुबली-धारवाड़ बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को समर्पित कॉरिडोर को डेढ़ घंटे जाम किया हुआ था। 

जानकारी के मुताबिक विश्वनाथ, एपीएमसी यार्ड में एक सब्जी विक्रेता हैं जिन्होंने  धर्मांतरण के आरोप में पादरी और अन्य लोगों पर शिकायत की थी। उन्होंने ये भी कहा था कि चर्च में उनके साथ बदसलूकी हुई क्योंकि उन्होंने ईसाइयों की प्रार्थना गाने की बजाय हिंदुओं की प्रार्थना गाई थी।

रिपोर्टरों से बात करते हुए विश्वनाथ ने कहा कि सोमू ने तीन माह पहले उनसे बात करनी शुरू की थी। लेकिन, 6 दिन पहले सोमू घर पर आया और कहा कि अगर विश्वनाथ ईसाई धर्म का अनुसरण करता है तो उसका जीवन बदल जाएगा। विश्वनाथ कहते हैं, “सोमू ने मुझसे और मेरे परिवार से रविवार की प्रेयर, चर्च में अटेंड करने को कहा। लेकिन वहाँ जब मैंने हिंदू प्रार्थना गानी शुरू की, तो हॉल में मौजूद अन्य लोगों के साथ उन्होंने मुझे गाली देना शुरू कर दिया।”

बता दें कि चर्च और थाने में हिंदू संगठनों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद कहा जा रहा है कि पादरी की गिरफ्तारी हो गई है। वहाँ के पुलिस आयुक्त ने कहा कि इस मामले में जाँच चल रही है। सिर्फ सोमू को गिरफ्तार किया गया है। अब तक चर्च की ओर से कोई शिकायत नहीं आई है।

उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण तबाही, अब तक 8 लोगों की मौत, केदारनाथ से लौट रहे 22 श्रद्धालुओं को SDRF ने बचाया

बारिश के कारण उत्तराखंड में जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं और लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार (18 अक्टूबर) को एसडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस ने 22 श्रद्धालुओं को जंगल चट्टी से निकाला है। ये श्रद्धालु केदारनाथ से लौटते वक्त भारी बारिश के बीच फँस गए थे। इन श्रद्धालुओं को गौरी कुंड भेजा गया है। वहीं, चलने में परेशानी महसूस कर रहे 55 वर्षीय एक श्रद्धालु को स्ट्रेचर के के जरिये शिफ्ट किया गया।

दरअसल, उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण जगह-जगह भू-स्खलन भी हो रहे हैं। मौसम विभाग ने बारिश को लेकर राज्य में मंगलवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, हालात की गंभीरता को देखते हुए चार धाम यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। आज स्कूलों को बंद रखा गया है। इस आपदा में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं, रामनगर में कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई रिसॉर्ट्स में पानी घुस चुका है। नैनीताल के रामगढ़ का एक हिस्सा जल में डूब चुका है और लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। अल्मोड़ा में एक मकान के गिरने से कुछ लोगों के मलबों में दबे होने की आशंका है, लेकिन बदतर हालात के कारण रेस्क्यू टीम मौके तक नहीं पहुँच पा रही है।

वहीं, पौड़ी के लैंसडाउन में भूस्खलन के कारण एक नेपाली परिवार के 3 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि चंपावत जिले में दो और रुद्रप्रयाग जिले में कानपुर के एक पर्यटक की मौत हो गई है। भूस्खलन और भारी बारिश के चलते जगह जगह रास्ते बंद हो गए हैं।

स्काईमेट वेदर के मुताबित, अगले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, असम, मेघालय में बारिश की चेतावनी दी है। वहीं, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, ओडिशा के तटीय क्षेत्रों, झारखंड के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की संभावना है।

कश्मीर को बना दिया विवादित क्षेत्र, सुपरमैन और वंडर वुमेन ने सैन्य शस्त्र तोड़े: एनिमेटेड मूवी ‘इनजस्टिस’ में भारत विरोधी प्रोपेगेंडा

डीसी की एनिमेटिड फिल्म ‘इनजस्टिस (Injustice)’ के रिलीज से पहले उसकी एक छोटी सी क्लिप ने इंटरनेट पर बवाल खड़ा कर दिया है। इस क्लिप में सुपरमैन और वंडर वुमेन कश्मीर में हर सैन्य शस्त्र को तोड़ते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं और सब तहस-नहस करके उसे हथियार मुक्त जोन घोषित किया जा रहा है।

अब कई सोशल मीडिया यूजर्स इस क्लिप को शेयर कर रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे कश्मीर का चित्रण डीसी की इस एनिमेटिड मूवी में हुआ है और कैसे उन्होंने भारत को बुरा दिखाया है।

एक यूजर ने इस क्लिप को शेयर करते हुए बताया कि भारतीय वायु सेना का F/A-18D ‘हॉर्नेट्स’, AIM-9L ‘साइडविंदर’ इन्फ्रारेड (IR) क्लोज कॉम्बैट मिसाइलों (CCMs) से लैस है, जिसे जस्टिस लीग आइकन सुपरमैन नष्ट कर रहा है।

एक यूजर कहता है, “डीसी कॉमिक्स और डीसी कॉमिक्स ऑन फिल्म ने खुद ही बाजार में भारतीय लोगों और उनके प्राइड भारतीय सेना के ख़िलाफ जाकर अपनी छवि बिगाड़ ली है। डीसी एनिमेटिड मूवी इनजस्टिस में कश्मीर को विवादित दिखाया गया है, इसमें सुपरमैन और वंडरवुमेन भारतीय सैन्य शस्त्र को नष्ट कर रहे हैं।”

बता दें कि डीसी की एनिमेटिड फिल्म ‘इनजस्टिस’ एक वीडियो गेम आधारित है, जिसकी रिलीज डेट 19 अक्टूबर है। हालाँकि, इंटरनेट पर यह पहले ही लीक हो गई और सोशल मीडिया यूजर इसकी क्लिप निकाल कर ये बताने लगे कि कैसे इस एनिमेटिड फिल्म में पाकिस्तानी प्रोपगेंडे का प्रसार हुआ है। कैसे कश्मीर को एक विवादित जगह करार दी गई है और कैसे सैन्य शस्त्रों को नष्ट किए जाने के बाद सुपरमैन और वंडरवुमेन उसे हथियार मुक्त जोन घोषित कर गर्व महसूस करते हैं।

दलितों के खिलाफ टिप्पणी मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री युविका चौधरी गिरफ्तार, तीन घंटे तक पूछताछ के बाद पुलिस ने दी जमानत

दलित समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री और बिग बॉस की प्रतिभागी रह चुकी युविका चौधरी को पुलिस ने सोमवार (18 अक्टूबर) को गिरफ्तार किया, जहाँ उनसे पूछताछ के बाद पुलिस ने जमानत दे दी। हरियाणा के हाँसी थाना में डीएसपी ऑफिस में युविका से तीन घंटे तक पूछताछ की गई।

युविका पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति पर अपमानजनक टिप्पणी की है। युविका ने यह टिप्पणी इस साल 25 मई को अपने ब्लॉग पर एक वीडियो में की थी, जिसके बाद बवाल हो गया था। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अनुसूचित जाति के लोगों ने युविका चौधरी के खिलाफ हाँसी थाने के पास प्रदर्शन किया था। इसके बाद पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर बॉलीवुड अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

युविका चौधरी के खिलाफ दलितों के लिए काम करने वाले रजत कलसन ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद युविका चौधरी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस केस को रद्द करने की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद युविका ने अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया था। हालाँकि, बाद में कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि अभिनेत्री के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था। युविका चौधरी इससे पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने पति प्रिंस नरुला के साथ जाँच में सहयोग के लिए हाँसी पुलिस जाँच के लिए पहुँची थीं। गौरतलब है कि कलसन क्रिकेटर युवराज सिंह और ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ मुनमुन दत्ता के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा चुके हैं।

‘बांग्लादेश का नया नाम जिहादिस्तान, हिन्दुओं के दो गाँव जल गए… बाँसुरी बजा रहीं शेख हसीना’: तस्लीमा नसरीन ने साधा निशाना

बाग्लादेशी मूल की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने वहाँ हिंदुओं, मंदिरों और उनके दफ्तरों को कट्टरपंथी इस्लामिस्टों द्वारा निशाना बनाए जाने और उस पर बांग्लादेश सरकार की चुप्पी पर शेख हसीना वाजेद पर निशाना साधा है। दुर्गा पूजा से हिंदुओं के खिलाफ शुरू हुए कट्टरपंथियों के हमलों पर लेखिका लगातार ट्विटर पर सक्रिय हैं। वह लगातार शेख हसीना वाजेद की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली सरकार का विरोध कर रही हैं।

लेखिका ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे टारगेटेड अटैक के मामले में पीएम शेख हसीना वाजेद पर निशाना साधा और ट्वीट किया, “जब बांग्लादेश में हजारों बेघर हो चुके हैं, क्योंकि उनके घरों को जला दिया गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री अपने भाई शेख रसेल का जन्म दिन मना रही हैं।”

तस्लीमा नसरीन ने पीएम शेख हसीना वाजेद पर लापरवाह और मुस्लिम तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा, “बांग्लादेश के दो गाँवों पीरगंज और रंगपुर को जिहादियों ने जला दिया और हसीना बाँसुरी बजा रही हैं।”

बाग्लादेश को बताया ‘जिहादिस्तान’

तस्लीमा नसरीन ने बाग्लादेश में बढ़ती जिहादी ताकतों और हिंदुओं को लगातार निशाना बनाए जाने के बाद उसे ‘जिहादिस्तान’ नाम दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, “बांग्लादेश का नया नाम ‘जिहादिस्तान’ है। पूरे देश में जिहादियों द्वारा हिंदू पूजा पंडालों, मूर्तियों, मंदिरों, घरों, दुकानों में तोड़फोड़ की गई है। मीडिया को पीएम हसीना द्वारा हिंदू उत्पीड़न के बारे में चुप रहने के लिए कहा गया था। वह जिहादियों की माँ और जिहादिस्तान की रानी रह चुकी हैं।”

इससे पहले रविवार को तस्लीमा नसरीन ने कहा था कि पैगंबर मुहम्मद के फॉलोवर उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। लेखिका ने ट्वीट किया, “पैगम्बर मुहम्मद ने काबा में पेगन समुदाय की 360 मूर्तियों को खंडित कर दिया था। उनका अनुसरण करने वाले उनके ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में बांग्लादेश के कॉमिला जिले ननुआ दिघी में दुर्गा पूजा के पंडाल में मुस्लिम भीड़ द्वारा जम कर तोड़फोड़ मचाई गई। आरोप लगाया गया कि कुरान का अपमान किया गया था। इसके बाद से कट्टरपंथी इस्लामियों की भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने इस्कॉन मंदिर में तोड़फोड़ की।