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‘कॉन्ग्रेस का महिलाओं को 40% टिकट देने का ऐलान चुनावी नाटकबाजी’: मायावती ने प्रियंका को याद दिलाया पुराना रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को कॉन्ग्रेस की बड़ी घोषणा पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कॉन्ग्रेस की महिलाओं को 40 प्रशित टिकट देने की घोषणा को कोरी चुनावी नाटकबाजी बताया है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट की घोषणा पर ट्वीट किया है। मायावती ने कहा कि कॉन्ग्रेस जब सत्ता में होती है व इनके अच्छे दिन होते हैं तो इनको दलित, पिछड़े व महिलाएँ आदि याद नहीं आती है। अब जब इनके बुरे दिन नहीं हट रहे हैं तो पंजाब में दलित की तरह उत्तर प्रदेश में इनको महिलाएँ याद आई हैं। उन्हें 40 प्रतिशत टिकट देने की घोषणा इनकी कोरी चुनावी नाटकबाजी है।

बसपा प्रमुख मायावती का ट्वीट

मायावती ने कहा है कि महिलाओं के प्रति कॉन्ग्रेस की चिन्ता पहले इतनी ही वाजिब व ईमानदार नहीं थी। मायावती ने कहा कि महिलाओं के प्रति कॉन्ग्रेस की चिन्ता पहले अगर इतनी वाजिब तथा ईमानदार होती तो केन्द्र में इनकी सरकार ने संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून क्यों नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का स्वाभाव है ‘कहना कुछ व करना कुछ।’ जो इनकी नीयत व नीति पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि यूपी व देश में महिलाओं की आधी आबादी है तथा इनका हित व कल्याण ही नहीं बल्कि इनकी सुरक्षा, आदर-सम्मान के प्रति ठोस व ईमानदार प्रयास की सतत प्रक्रिया, जिसके प्रति मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है, जो कॉन्ग्रेस व भाजपा आदि में देखने को नहीं मिलती है। बीएसपी ने ऐसा करके दिखा दिया है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने यूपी विधानसभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी अपने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देगी। महिला सशक्तिकरण के लिए यह फैसला लिया गया है। यह निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो बदलाव और प्रदेश को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि इसके लिए उन्होंने आवेदन पत्र माँगे हुए हैं। अगले महीने की 15 तारीख तक आवेदन खुला रहेगा। प्रियंका ने कहा कि उनका बस चलता तो वो 50 प्रतिशत टिकट दे देती। यूपी में आरक्षण बढ़ेगा तो देश भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का नारा है, “लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ।”

उन्होंने कहा कि 40 फीसदी टिकट का फैसला उन्नाव की उस लड़की के लिए यह निर्णय है, जिसको जलाकर मारा गया। यह निर्णय हाथरस की उस लड़की के लिए है, जिसे न्याय नहीं मिला। लखीमपुर में एक लड़की मिली उसने बोला प्रधानमंत्री बनना चाहती है, उसके लिए है ये निर्णय। यह निर्णय सोनभद्र में उस महिला के लिए है जिसका नाम किस्मत है, जिसने अपने लोगों के लिए आवाज उठाई। ये यूपी की हर एक महिला के लिए है जो यूपी को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

पाकिस्तान हारे भी न और टीम इंडिया गँवा दे 2 अंक: खुद को ‘देशभक्त’ साबित करने में लगे नेता, भूले यह विश्व कप है-द्विपक्षीय सीरीज नहीं

अभी T-20 विश्व कप चल रहा है। इसके तहत रविवार (24 अक्टूबर, 2021) को शाम साढ़े 7 बजे भारत और पाकिस्तान के बीच भी मैच होना है। ये मैच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। लेकिन, इधर इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान की पैरोकारी करने वाले लोग ही कह रहे हैं कि भारत को पाकिस्तान से मैच नहीं खेलना चाहिए। क्रिकेट मैच के नाम पर विपक्षी नेता अपनी देशभक्ति निभाने में लगे हैं।

BCCI खुद को मानती है एक प्राइवेट संस्था, ये सरकारी यहीं

सबसे पहले तो बता दें कि भारत में क्रिकेट के प्रशासन व प्रबंधन का काम देखने वाली संस्था ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)’ एक प्राइवेट बॉडी है और स्वतंत्र है। इसे अक्सर केंद्र सरकार के अंतर्गत लाने और RTI के तहत लाने की कोशिश होती रही है। खैर, ये कानूनी मसला है। 2004 में ये अदालत को बता चुका है कि वो किसी भी राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं करता है। ये सरकारी संस्था नहीं है।

लेकिन हां, BCCI के तहत खेलने वाली क्रिकेट टीम ‘टीम इंडिया’ कहलाती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की महिला एवं पुरुष, दोनों टीमें खेलती हैं। BCCI ‘नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF)’ के अंतर्गत नहीं आता है, लेकिन ये सरकारी अवॉर्ड्स के लिए अपने खिलाड़ियों को नामित कर सकता है। संस्था का कहना है कि ये सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं है। लेकिन हाँ, जमीन और टैक्स के मामले में इसे छूट मिलती आई है।

पहला सवाल तो यहाँ यही उठ जाता है कि अगर कोई प्राइवेट संस्था अपनी टीम को पाकिस्तान के साथ खिला रही है तो इसमें सरकार की क्या गलती है? खुद BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल भी कह चुके हैं कि बोर्ड की कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ हैं, जिन्हें पूरा करना पड़ेगा। जम्मू कश्मीर में ताज़ा हत्याओं के बाद ये माँग उठ रही है। ऐसा माँग करने वालों में AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी (AAP) शामिल है।

असदुद्दीन ओवैसी और आतिशी मर्लेना: AIMIM और AAP की नई-नई ‘देशभक्ति’

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में हमारे 9 लोग मारे गए हैं और भारत अब पाकिस्तान से T-20 मैच खेलने जा रहा है। AAP की तरफ से विधायक आतिशी मर्लेना ने कहा, “कश्मीर में लोगों पर आतंकी हमले हो रहे हैं। अभी पाकिस्तान से क्रिकेट मैच नहीं होने चाहिए। इससे भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी भी सहमत होंगे। विपक्ष में रहते हुए, वे जब मुख्यमंत्री थे तब भी उनका स्टैंड यही था कि ऐसे माहौल में पाकिस्तान के साथ मैच नहीं होना चाहिए। जब तक भारत की जमीन पर इस तरह के हमले बंद नहीं होते हैं, तब तक इस तरह से मैच खेलना सही नहीं है।”

याद कीजिए, AAP वही पार्टी है जिसके मुखिया ने भारतीय सेना द्वारा जांबाजी से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगा था। कार्रवाई ऐसी होती है। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक जैसी। कार्रवाई केवल कड़ी निंदा और मैच रद्द कर देना नहीं होती। जब असली कार्रवाई होती है तो यही नेता बिलबिला उठते हैं। कश्मीर में हो रही घटनाओं को रोकना और पाकिस्तान को प्रत्युत्तर देना सरकार का मसला है, लेकिन क्रिकेट मैच रद्द कराना जैसी छोटी चीजें नहीं।

भारत और पकिस्तान कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल रहा है। अगर दोनों के बीच कोई इस तरह की सीरीज हो रही होती, तब विरोध जायज था। भारत ने पाकिस्तान का दौरा भी नहीं किया है। उलटा इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीमों ने अपना पाकिस्तान दौरा रद्द किया तो वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसका दोष भी भारत पर ही मढ़ा। खुद पाकिस्तान कहता है कि ICC में भारत की ही मर्जी चलती है।

क्यों इन नेताओं की बातों में नहीं है दम

अब देखिए, भारत और पाकिस्तान का मैच अगर नहीं हो तो घाटा क्या है। भारत अगर पीछे हटता है तो ICC के नियमों के हिसाब से पाकिस्तान को मुफ्त के 2 पॉइंट्स मिल जाएँगे और वो अंक तालिका में ऊपर हो जाएगा। ऊपर से भारत ये दो अंक गँवा देगा। आज तक किसी भी विश्व कप के मैच में पाकिस्तान भारत को हरा नहीं सका है। ऐसे में ये कहना सुरक्षित होगा कि जीत इस बार भी भारतीय टीम की ही होगी।

पाकिस्तान की स्थिति ये है कि भारत से मैच हारने पर वहाँ टीवी तक फोड़ डाले जाते हैं। ऐसे में क्या पाकिस्तान के पैरोकार मैच रद्द कराने की बात कर के इस्लामी मुल्क की तरफदारी नहीं कर रहे? हाँ, केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने भी यही माँग रखी है, लेकिन उनका ये आकलन हो सकता है कि मैच रद्द करने से पाकिस्तान का घाटा होगा।

ओवैसी जैसे लोग जब इस तरह की बात कहें, तब ये शोभा नहीं देता। फरवरी 2020 में इन्हीं असदुद्दीन ओवैसी के मंच से एक महिला ने खुलेआम ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाए थे। वो बार-बार ये कह कर अपने ‘एहसान’ की याद दिलाते रहते हैं कि उनके पूर्वजों ने पाकिस्तान की जगह भारत को चुना। उनके भाई अकबरुद्दीन 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की बात करते हैं। मंशा यही है कि भारत भी पाकिस्तान बन जाए।

और AAP तो अब तक एक तरह से वही करती आई है, जो पाकिस्तान चाहता है। पुलवामा हमले के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तरह-तरह की ‘कॉन्सपिरेसी थ्योरीज’ को जन्म दिया था। अरविंद केजरीवाल ने यहाँ तक भ्रम फैलाया था कि मोदी सरकार के कहने पर पाकिस्तान ने हमला करवाया। पाकिस्तान की एक सुर में जो लोग आलोचना तक नहीं कर पाते, वो मैच के पीछे क्यों पड़े हैं?

यूपीए के काल में होती है ‘क्रिकेट डिप्लोमेसी’, मोदी सरकार Pak पर सख्त

आज यही लोग पाकिस्तान से मैच रद्द करने की बात कर के अपनी ‘बहादुरी’ और ‘देशभक्ति’ दिखा रहे हैं। ‘क्रिकेट डिप्लोमेसी’ तो पहले होती थी। याद है 30 मार्च, 2011? उसी दिन पाकिस्तान को हरा कर भारत क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुँचा और जीता भी। सचिन तेंदुलकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ रहे थे। लेकिन, उस मैच में कुछ और भी खास था। यूपीए-2 की ‘क्रिकेट डिप्लोमेसी’ का ये हिस्सा था।

तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के तब प्रधानमंत्री रहे युसूफ रजा गिलानी ने पंजाब के मोहाली स्टेडियम में साथ बैठ कर मैच देखा था। वहीं उन दोनों की वार्ता भी हुई थी और एक-दूसरे देश के क्रिकेटरों से उन्होंने मुलाकात भी की थी। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी, तत्कालीन लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और केंद्रीय राज्यमंत्री रहे सचिन पायलट भी उस दिन हुई हाई-प्रोफ़ाइल डिनर का हिस्सा रहे थे।

जम्मू कश्मीर में जब सेना कड़ी कार्रवाई करती है और आतंकियों को मार गिराती है, तब यही लोग भारत में मुस्लिमों की प्रताड़ना वाला नैरेटिव लेकर आते हैं। इनका मानना है कि आतंकियों को न मारा जाए, लेकिन क्रिकेट मैच न होने की बात कह ये अपनी देशभक्ति दिखाएँ। अगर ये सचमुच पाकिस्तान के खिलाफ हैं तो जम्मू कश्मीर में सेना का उत्साहवर्धन करें और आतंकियों के मारे जाने पर सेना को बधाई दें।

मोदी सरकार तो पाकिस्तान को लेकर हमेशा से सख्त रही है, तभी उसे आज उसी की भाषा में जवाब दिया जाता है। दोनों स्ट्राइक्स भी इसीलिए हुए। फरवरी 2019 में भारत सरकार ने पाकिस्तान को व्यापार में दिया हुआ ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा छीन लिया। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर हमेशा पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाता है। सिंधु नदी के पानी के भरपूर उपयोग की योजना भी बन रही है। तभी सीमवर्ती राज्यों को छोड़ कर देश में कहीं पहले की तरह अब बम विस्फोट नहीं होते।

शर्लिन चोपड़ा ने की थी यौन उत्पीड़न की FIR, शिल्पा और राज कुंद्रा ने ठोक दिया मानहानि का केस: माँगा ₹50 करोड़ का हर्जाना

शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने शर्लिन चोपड़ा पर मानहानि का केस दर्ज कराया है। इस कपल ने एक्ट्रेस से 50 करोड़ का हर्जाना भी माँगा है। शिल्पा और राज ने यह एक्शन कई बार चेतावनी देने के बाद लिया है। इससे पहले शिल्पा और राज के वकील ने कहा था, “शर्लिन चोपड़ा मीडिया में जो भी बयान दे रही हैं, वह कानूनी दायरे में होना चाहिए। मेरे मुवक्किल के खिलाफ प्रेस वार्ता करना, उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। शर्लिन चोपड़ा द्वारा कही गई बात का कोर्ट में उनके खिलाफ उपयोग किया जाएगा।”

कपल ने एक बयान में कहा, “शर्लिन चोपड़ा द्वारा राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप मनगढ़ंत, झूठे, तुच्छ, निराधार और बिना किसी सबूत के हैं। यह सब शर्लिन चोपड़ा ने राज और शिल्पा की छवि को बदनाम करने के लिए और पैसे वसूली करने के लिए किया है।”

इसके अलावा, नोटिस में यह भी कहा गया है कि शिल्पा शेट्टी जेएल स्ट्रीम ऐप के कामकाज के मामलों में शामिल नहीं हैं। नोटिस में लिखा गया है, “शर्लिन द्वारा अवांछित विवाद पैदा करने और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए बेवजह शिल्पा शेट्टी का नाम खींचने की कोशिश हो रही है। शर्लिन चोपड़ा ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 499, 550, 389 और 195 (ए) के तहत अपराध किए हैं। हमें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हम शर्लिन चोपड़ा के खिलाफ 50 करोड़ की मानहानि का केस करते हैं।”

इससे पहले चोपड़ा ने कुंद्रा पर अश्लील फिल्म बनाने के लिए उन्हें बरगलाने का आरोप लगाया था। उसने यह भी दावा किया था कि कुंद्रा ने उसे बताया था कि शिल्पा शेट्टी ने कहा था कि वह चोपड़ा के काम से प्यार करती है। चोपड़ा ने कहा था, “राज कुंद्रा मेरे गुरु थे। उन्होंने मुझे यह आश्वासन देकर गुमराह किया कि मैं जो कुछ भी कर रही हूँ वह ग्लैमर के लिए है। उन्होंने मुझे यहाँ तक बताया कि शिल्पा शेट्टी को मेरे वीडियो और फोटो बहुत पसंद हैं। राज कुंद्रा ने मुझे विश्वास दिलाया कि आज के समय में सेमी न्यूड और पोर्न कोई बड़ी बात नहीं है, यह कैजुअल हर कोई करता है और मुझे भी ऐसा ही करना चाहिए।” बता दें कि राज कुंद्रा को पोर्नोग्राफी मामले में इसी साल जुलाई में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं।

शर्लिन चोपड़ा ने पिछले दिनों राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करवाई थी। एक्ट्रेस ने अपने स्टेटमेंट में कहा था, “मैंने राज कुंद्रा के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दर्ज की है।” उन्होंने ट्विटर पर 14 अक्टूबर 2021 को एक वीडियो शेयर किया था, साथ ही कैप्शन लिखा, “आज मैं अपनी कानूनी टीम के साथ जुहू पुलिस स्टेशन गई थी, राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने।”

‘होमटाउन चा चा चा’ फेम किम सियोन-हो का बड़ा स्कैंडल, दक्षिण कोरिया के डॉमिनोज सहित कई विज्ञापनों से हुए बाहर: जानें क्या है मामला

दक्षिण कोरियाई अभिनेता किम सियोन-हो अपनी दमदार अदाकारी से दुनिया भर के लोगों का दिल जीत रहे हैं। हाल ही में रिलीज हुई ड्रामा सीरीज ‘होमटाउन चा चा चा’ के लिए उनके फैंस ने उनकी सराहना की और उन्हें ढेर सारा प्यार दिया। अभिनेता के साथ उनकी कोस्टार शिन मिन-ए भी खासा सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर दोनों को दुनिया भर के फैंस फॉलो करते हैं।

वहीं हाल ही में मशहूर अभिनेता किम पर एक महिला ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसको लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अपने देश में।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में शेयर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में ‘ए’ नाम की एक अनजान महिला ने दावा किया था कि वह ‘एक्टर के’ की एक्स-गर्लफ्रेंड है और उसके धोखे की वजह से उसे बहुत कुछ सहना पड़ा है। महिला ने मशहूर अभिनेता पर आरोप लगाया कि वह दोहरा चरित्र अपनाने वाला बेशर्म किस्म का इंसान है। पोस्ट में उसने यह भी कहा कि इस ‘अभिनेता के’ ने उसे गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया था।

Kbizoom.com पर इस पोस्ट के बारे में लिखा गया है। इसमें वह महिला आगे कहती है, “उन्होंने मुझसे एकतरफा त्याग की माँग की। उन्होंने उस समय बहाना बनाया था कि वह अपने फिल्मों के बिजी शेड्यूल के कारण बेहद परेशान हैं। हालाँकि, अब वह एक बड़े स्टार बन गए हैं। उसने मुझे शादी का झाँसा देकर बेवकूफ बनाया और मुझसे मेरा बच्चा छीन लिया। उसने मुझे मजबूर किया मैं अपना गर्भपात कराऊँ।”

उस पोस्ट में ए ने साझा किया कि उसने 2020 की शुरुआत में अभिनेता ‘के’ को डेट करना शुरू कर दिया था और जुलाई 2020 में वह गर्भवती हो गई थी। उसने कहा कि अभिनेता के ने यह कहते हुए गर्भपात कराने के लिए कहा था कि इससे उसे आर्थिक रूप से नुकसान पहुँच सकता है और उसका करियर प्रभावित हो सकता है। ए ने मशहूर अभिनेता पर आरोप लगाया कि अभिनेता के ने उसे यह विश्वास दिलाकर गर्भपात के लिए राजी किया था कि वह जल्द ही उससे शादी करेगा।

रिपोर्टों के अनुसार, पोस्ट में अभिनेता ‘के’ के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। फैंस व अन्य लोगों को जल्द ही पता चल गया कि पोस्ट में अभिनेता के कोई और नहीं बल्कि किम सियोन-हो ही थे। आपको जानकार शायद हैरानी हो, लेकिन जिस दिन पोस्ट को साझा किया गया था, उसी दिन यानी 17 अक्टूबर को ‘होमटाउन चा चा चा’ की सीरीज को रिलीज किया गया था।

पोस्ट के अंत में उस महिला ने कहा कि भले ही अभिनेता के ने उससे शादी का वादा करके उसे गर्भपात कराने के लिए राजी किया था, लेकिन इसके बाद जल्द ही अभिनेता ने उससे सभी संबंध तोड़ लिए, जिससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही थी।

कोरियाई मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को पत्रकार और मशहूर यूट्यूबर ली जिन-हो ने अभिनेता के की पहचान किम सियोन-हो के रूप में की। इससे यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। हालाँकि, अभिनेता की एजेंसी साल्ट एंटरटेनमेंट और अभिनेता ने इस मामले पर अभी तक चुप्पी साधी हुई है।

जैसे-जैसे अभिनेता को लेकर लोगों में नकारात्मकता बढ़ती गई, जल्द ही किम सियोन-हो को सभी विज्ञापनों से हटाया जाने लगा। कोरिया हेराल्ड ने बताया है कि डोमिनोज पिज्जा कोरिया ने अभिनेता को अपने विज्ञापनों से हटा दिया है। इसके अलावा देश में डोमिनोज पिज्जा के आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों से भी किम सियोन-हो की तस्वीरें भी हटा दी गई हैं।

ईद-ए-मिलाद के दौरान देश के कई हिस्सों में बवाल: MP के धार में बैरिकेड तोड़ा, कानपुर में लाउडस्पीकर लगाने को लेकर पुलिस से झड़प

इस्लाम के अनुयायी पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद के रूप में मनाते हैं। पैगंबर के जन्मदिन को मनाने के दौरान देश के विभिन्न जगहों पर बवाल की खबरें आ रही हैं। मध्य प्रदेश के धार में प्रतिबंधित क्षेत्र से जुलूस निकालने से रोकने पर हुए बवाल में पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कानपुर में जुलूस निकालने की अनुमति नहीं मिलने और बरेली में लाउडस्पीकर लगाने से रोकने पर मुस्लिमों ने बवाल कर दिया है। इसके अलावा, गुजरात के अहमदाबाद में जुलूस को लेकर मुस्लिम समुदाय के दो गुटों के बीच झड़प की भी खबर है।

मध्य प्रदेश के धार में मंगलवार को ईद-ए-मिलाद के मौके पर सुबह 9 बजे कुछ लोग जुलूस निकालने के लिए गुलमोहर कॉलोनी में करीब 2000 लोग जुटे थे। उसके बाद यह भीड़ बस स्टैंड होते हुए पंजारवाड़ी पहुँचा। पुलिस ने इस क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर बैरिकेड लगा रखा रखा था। इसके बावजूद जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की और जब पुलिस ने रोका तो उनके साथ धक्का-मुक्की करने लगे। भीड़ जवानों पर पत्थरबाजी करने लगी। इसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।

धार के कलेक्टर डॉ. पंकज जैन ने बताया कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है और जुलूस खत्म होने के बाद जिन लोगों ने नियमों को तोड़ा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। झड़प में अभी तक किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

वहीं, उत्तर प्रदेश के कानपुर में जुलूस निकालने की अनुमति नहीं मिलने पर जमकर हंगामा किया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ परेड चौराहे पर पहुँचकर प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगी। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ दिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान मची भगदड़ में कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है। दैनिक जागरण के अनुसार, इस बात को लेकर इलाके में तनाव का माहौल है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस को तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के तहत जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी जुलूस नहीं निकालने की बात कही थी। इसके बावजूद लोग सुबह से ही जुलूस के लिए दबाव बनाते रहे और चौराहे पर जुटकर नारेबाजी करने लगे। दोपहर होते-होते स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

वहीं, उत्तर प्रदेश के बरेली में जुलूस में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर पुलिस और लोगों के बीच नोकझोंक हो गई। इसके बाद भीड़ ने पुलिस का घेराव किया। हालाँकि, पुलिस के दबाव में लाउडस्पीकर उतारना पड़ा। दरअसल, शीशगढ़ में लोगों ने जुलूस निकालने की तैयारी करने के बाद लाउडस्पीकर लगे जुलूस को गौड़ी मुहल्ला से लेकर जाने लगे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली और पुलिस बल मौके पर पहुँचकर लाउडस्पीकर को बंद करा दिया। इसके बाद भीड़ पुलिस से उलझ गई। पुलिस का कहना था कि अब तक जैसे जुलूस निकलते रहा है, वैसे ही निकलना चाहिए। पहले जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जाता था।

इसके अलावा, गुजरात के अहमदाबाद में एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच ईद-ए-मिलाद के दौरान ड्रम बजाने को लेकर झड़प हो गया, जिसमें चार लोग घायल हो गए हैं। सोमवार की रात हुई इस घटना में तीन लोगों को पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के 11 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 337 और 294(बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

‘सभी बच्चे पीते हैं’: थाने में कॉन्ग्रेस की महिला MLA का पति के साथ हंगामा, शराब पी गाड़ी चलाने पर रिश्तेदार का कट गया था चालान

राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाडा थाने में कॉन्ग्रेस विधायक मीना कंवर और उनके पति ने शराब पीकर गाड़ी चलाने का बचाव करते हुए जमकर हंगामा किया। इनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस स्टेशन में धरना देते दोनों को देखा जा सकता है। समाचार न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में पुलिस ने एक शख्स को पकड़ा था। वह कॉन्ग्रेस विधायक मीना कंवर का रिश्तेदार बताया जा रहा है। उसे बचाने के लिए दोनों पति-पत्नी थाने पहुँच गए और वहाँ धरने पर बैठ गए। इस दौरान वे दोनों पुलिस को धमकाते भी नजर आए। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘सभी बच्चे शराब पीते हैं’।

दरअसल, मीना कंवर का रिश्तेदार शरीब पीकर गाड़ी चला रहा था, इसलिए मोटर व्हीकल (MVI) एक्ट के तहत पुलिस ने रविवार (17 अक्टूबर) रात 10.30 बजे एयर फोर्स इलाके में उसका चालान काटा। चालान काटने के बाद गाड़ी को सीज किया गया। इसके बाद युवक ने अपनी रिश्तेदार शेरगढ़ विधायक मीना कंवर के पति उम्मेद सिंह राठौर को फोन लगाया। उम्मेद सिंह की पुलिस से बात भी करवाई, लेकिन पुलिस के जवान ने उन्हें कहा कि उन्होंने चालान बना दिया है और अब गाड़ी सीज हो चुकी है। वह गाड़ी छोड़ने में असमर्थ है। इस पर विधायक और उनके पति थाने पहुँच गए। उन्होंने पुलिस से कहा कि क्या हो गया शराब पी ली तो, सभी बच्चे पीते हैं। इधर, विधायक के पति पुलिसकर्मी को विधायक के सामने कुर्सी पर बैठने पर भी चिल्लाते और धमकाते नजर आए।

मीना कंवर ने कहा, ”मैंने पुलिस से अपने रिश्तेदार के बेटे और उनके साथ रहने वालों को रिहा करने का अनुरोध किया था, लेकिन वे नहीं माने। पुलिस ने मेरे और मेरे पति के साथ दुर्व्यवहार किया। मैं संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करती हूँ। एसपी ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।”

इसको लेकर बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के मंत्री संजय राय ने कॉन्ग्रेस विधायक का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “शराब पीना, भ्रष्टाचार करना और गलत कार्य करना कॉन्ग्रेसियों का जन्मसिद्ध अधिकार है… बच्चे ने थोड़ी सी पी ली तो क्या हुआ? यह कहना है राजस्थान से कॉन्ग्रेस की विधायक मीना कंवर और उनके पति का। ये लोग शराबी रिश्तेदार को थाने से छुड़वाने पुलिस को धमकाने थाने पहुँच गए और धरना देने लगे।”

कुछ यूजर ने राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लिखा, “ये हैं शेरगढ़ की कॉन्ग्रेसी विधायक मीना कंवर जी और साथ हैं उनके पति एवं पूर्व विधायक उम्मेद सिंह जी। इन्हें थाने में अपने रिश्तेदार को छुड़ाने के लिए धरना देना पड़ रहा है। वो अलग बात है कि इनके रिश्तेदार ने शराब पी रखी थी। ये हाल है राजस्थान की क़ानून व्यवस्था का।”

पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने लिखा, “राजस्थान में दलितों को लिंच करके मारा जा रहा है, थानों में बलात्कार हुए, दलित बच्चियों से सबसे ज़्यादा बलात्कार पर क्या किसी विधायक को थाने में धरना देते देखा? नहीं न। पर कॉन्ग्रेस विधायक मीना कंवर थाने में धरने पर बैठ गईं, जब भतीजे को पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पकड़ लिया।”

बताया जा रहा है कि पकड़ा गया शख्स विधायक मीना कंवर का भतीजा है। घटना का वीडियो सोमवार (18 अक्टूबर) देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

यूपी पुलिस की SIT ने 50 ‘किसानों’ को भेजा नोटिस, 11 से पूछताछ: लखीमपुर खीरी में BJP कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मारने का मामला

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या मामले में 50 किसानों को यूपी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगिशन टीम (SIT) ने समन किया है। इसी केस की पड़ताल में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा से जुड़े 4 लोग भी गिरफ्तार हुए हैं। इनमें सुमित जायसवाल भी हैं जिन्होंने घटना के बाद किसानों पर क्रॉस एफआईआर करवाई थी। उन्होंने मीडिया में भी बयान दिया था कि कैसे उन पर हमला हुआ और बाद में गाड़ी ने अपना कंट्रोल खोया।

याद दिला दें कि घटना की एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चली थी। जहाँ जायसवाल गाड़ी छोड़कर भागते दिख रहे थे। उन्हें देख कई लोगों ने कयास लगाए कि वो सांसद के बेटे आशीष मिश्रा हैं। लेकिन बाद में पता चला कि वो सुमित जायसवाल हैं।

पुलिस द्वारा पकड़े गए अन्य तीन आरोपितों की पहचान शिशुपाल (तीसरी एसयूवी चलाने वाले), नंदन सिंह बिष्ट और सत्य प्रकाश त्रिपाठी के तौर पर हुई है। कौशांबी जिले में स्थिति त्रिपाठी के आवास से 3 बुलेट और लाइसेंसी पिस्तौल बरामद हुई है। वह घटना वाले दिन दूसरी फॉर्च्युनर में थे।

बता दें कि जायसवाल जहाँ भाजपा कार्यकर्ता हैं और लखीमपुर के वार्ड मेंबर हैं वहीं नंदन सिंह बिष्ट अंकित दास का अकॉउंटेंट है। जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। एसआईटी अधिकारियों ने कहा कि 4 को उनके आवास से पकड़ा गया है। जो उस दिन घटनास्थल पर थे।

विशेष अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि चारों आरोपितों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। टीम अपनी पूछताछ कर रही है। हो सकता है अगर जरूरत पड़ी तो इनकी रिमांड कस्टडी माँगी जाए।

इस बीच 15 किसान भी एसआईटी के सामने पेश हुए थे। उनके बयान रिकॉर्ड किए गए थे। जाँच टीम के एक अधिकारी ने कहा कि वो लोग दोनों एफआईआर पर जाँच कर रहे हैं। किसानों को बुलाकर पूछताछ हुई थी और फिर उन्हें वापस भेज दिया गया था। हर किसान से उनके वकील मोहम्मद अमान की मौजूदगी में 15 मिनट बात की गई। 

वहीं भारतीय सिख संगठन के अध्यक्ष जसबीर सिंह वर्क ने कहा 15 किसानों में से सिर्फ 11 ने अपना बयान दर्ज कराया। उनसे टीम ने घटना से जुड़े सवाल किए और वही बयान दोनों एफआईआर के लिए रिकॉर्ड किए। उनसे पूछा गया कि उन्हें कैसे पता चला कि वो खतरें में हैं। उन्होंने क्या किया जब किसानों पर गाड़ी चढ़ी आदि।

उल्लेखनीय है कि 3 अक्टूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ की एक भीड़ ने भाजपा के काफिले पर पत्थर और लाठियों से हमला किया। इसके बाद हुए हंगामे के बीच प्रदर्शनकारियों के ऊपर एक वाहन दौड़ता देखा गया। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया। लोगों को वाहन के अंदर से घसीटा और पीट-पीटकर मार डाला गया।

मंगलुरु के मंदिर में तोड़फोड़, नंदी और नागा की मूर्तियों को पहुँचाया नुकसान: भक्तों ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

कर्नाटक के मंगलुरु में शनिवार (16 अक्टूबर 2021) की देर रात बदमाशों ने बैकमपाडी करकेरा मूलस्थान जरांडाय दैवस्थान और नागा ब्रह्म पीठ (Baikampady Karkera Moolasthana Jarandaya Daivastana and Naga Brahma Peeta) में तोड़फोड़ की। Daijiworld ने इसकी जानकारी दी।

जानकारी के मुताबिक मामला तब सामने आया जब भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुँचे। Daijiworld ने बताया कि आरोपितों ने नागा की मूर्ति और नंदी की पत्थर की मूर्ति को नुकसान पहुँचाया था। साथ ही बदमाशों ने अलमारी तोड़ दी और देवस्थान का सारा सामान फेंक दिया। मंदिर के द्वार को भी तोड़ दिया।

भक्तों ने मंदिर के प्रशासनिक समिति को सतर्क किया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को बुलाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू की। मंदिर में तोड़फोड़ के बाद स्थानीय लोगों ने धार्मिक स्थल की सुरक्षा की माँग की है। पुलिस को आशंका है कि यह लूट के प्रयास का मामला है। हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है।

रहीम और तौफीक ने मंदिर की हुंडी में कंडोम लगाकर पेशाब करने की बात कबूली

इससे पहले, इस साल अप्रैल में, मंगुलुरु में एक मंदिर के हुंडी (दान पेटी) में एक कंडोम मिलने की घटना के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मंदिर स्थानीय मंगुलुरु देवता भगवान कोरागज्जा का था, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। गिरफ्तार लोगों की पहचान मैंगलोर के जोकट्टे इलाके से रहीम (32) और तौफीक (35) के रूप में हुई है।

पुलिस आयुक्त एन शशि कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया था कि इस साल जनवरी से मार्च के बीच, उल्लाल, कादरी और पांडेश्वर पुलिस थानों में पाँच मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें बदमाशों ने कोरागज्जा कट्टे मंदिर के प्रसाद बॉक्स में एक कंडोम सहित आपत्तिजनक सामान डाला था। हालाँकि, पुलिस मंदिरों को अपवित्र करने के पीछे के दोषियों का पता नहीं लगा पाई थी।

हालाँकि कुछ समय बाद अचानक रहीम और तौफीक दोनों पुजारियों से माफी माँगने के लिए मंदिर पहुँचे। शुरू में, पुजारियों को लगा कि दोनों मजाक कर रहे हैं, लेकिन आखिरकार, उन्होंने मंदिर में अपना जघन्य अपराध कबूल कर लिया और खुद को वहाँ के लोगों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिन्होंने बाद में उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

धर्मांतरण कराने आए ईसाई समूह को ग्रामीणों ने बंधक बनाया, छत्तीसगढ़ की गवर्नर का CM को पत्र- जबरन धर्म परिवर्तन पर हो एक्शन

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ग्रामीणों ने ईसाई समुदाय के 45 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। रिपोर्ट के अनुसार इस समूह में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि यह समूह रविवार (17 अक्टूबर 2021) देर रात लालच देकर धर्मांतरण के इरादे से धमधा ब्लॉक के ओटेबंद गाँव पहुँचा था। इस बीच राज्यपाल अनुसुइया उइके ने धर्मांतरण को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है। इसमें जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने को कहा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार ओटेबंद गाँव में ईसाई समूह के पहुँचने के बाद तनाव की स्थिति पैदा हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने इन्हें बंधक बना लिया। घटना की खबर मिलने पर नंदिनी पुलिस मौके पर पहुँची और बंधक बनाए गए लोगों को साथ ले गई। पुलिस ने इनके पास से धार्मिक किताबों सहित अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं।

जानकारी के मुताबिक रायपुर समेत कई जगहों से पहुँचे पुरुष, महिलाओं और बच्चों ने गाँव के भाटपारा इलाके में स्पेशल प्रेयर मीट का आयोजन किया था। जैसे ही ग्रामीणों को ये बात पता चली वे तुरंत इकट्ठा हो गए। जब गाँव के लोगों ने उनसे आने की वजह पूछी तो वे इधर-उधर की बातें करने लगे। उन्होंने खास प्रार्थना सभा की बात बताई। उनकी बातों से जब गाँव के लोग संतुष्ट नहीं हुए तो सभी को कम्युनिटी हॉल में बंद कर दिया।

इस बीच बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में पहुँच गए। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर धर्मांतरण के लिए पहुँचे लोगों को हिरासत में ले लिया। 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं वहाँ मौजूद बीजेपी, वीएचपी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विधायक का पुतला जलाया। नंदिनी टीआई लक्ष्मण कुमेटी ने बताया कि सभी के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। मामले की जाँच की जा रही है। वहीं अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सांवलाराम डहरे का आरोप है कि कॉन्ग्रेस सरकार के संरक्षण में अनुसूचित जातियों वाले इलाकों में धर्मांतरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोले-भाले गरीबों को लालच लेकर धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दूसरी तरफ राज्यपाल अनुसूईया उइके ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिख कर जबरन धर्मांतरण करवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। राज्यपाल ने मीडिया से बात करते हुए इस बात की जानकारी दी। 

उन्होंने कहा, “धर्मांतरण का तो अपने आप में कानून बना है और धर्मांतरण किया हुआ व्यक्ति किसी को भी जबरन धर्मांतरित नहीं करा सकता। ये कानूनन अपराध है। अगर कोई इस तरह की शिकायत आती है, कोई लालच, प्रलोभन देकर जबरन धर्मांतरण करवा रहा है तो निश्चित रूप से उसके ऊपर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। समय-समय पर सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मिले और मुझसे कार्रवाई की माँग की। मैंने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है कि ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर उचित कदम उठाएँ। इस मामले में मैंने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।”

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से राज्य में जबरन धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। दिन-प्रतिदिन यह समस्या गंभीर होती जा रही है। ईसाई मिशनरी राज्य के आदिवासी क्षेत्रों समेत शहरों में भी बड़े पैमाने पर लोभ-लालच से धर्मांतरण करा रही हैं। हर रविवार को प्रार्थना सभा और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर किसी न किसी जिले में मारपीट अथवा तनाव होता ही है।

पिछले दिनों राजधानी रायपुर में पुलिस ने पादरी हरीश साहू को भटगाँव इलाके में जबरन धर्म परिवर्तन कराने की शिकायत मिलने के बाद हिरासत में लिया था। मामले सामने आने के बाद कुछ दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोग भी थाने पहुँच गए। इसके बाद थाने में हंगामा हुआ और जो देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। कथित तौर पर नाराज लोगों ने पादरी की जूतों से पिटाई कर दी।

वहीं राज्य के कबीरधाम जिले के एक गाँव में धर्मांतरण कराने को लेकर 100 से अधिक लोगों की भीड़ ने पादरी के घर में घुसकर कथित तौर पर उसे और उसके परिवार को पीटा। इस दौरान भीड़ ने आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के खिलाफ नारे भी लगाए थे।

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रदेश में धर्मांतरण के मामले में राज्यपाल अनुसुइया उइके को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में कहा गया था, “राजधानी से दूर-दराज के इलाकों में धर्मांतरण गतिविधियों की सूचना दी जा रही थी और बघेल सरकार कार्रवाई करने के बजाय, उनमें शामिल लोगों की रक्षा कर रही थी।”

वहीं छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने सभी थाना प्रभारियों को आदिवासी इलाकों में ईसाई मिशनरियों और धर्मांतरित आदिवासियों की गतिविधियों पर नजर रखने के सख्त निर्देश दिए थे। 

सूरत में मंदिरों-घर की छत पर लाउडस्पीकर, सुबह-शाम हनुमान चालीसा; शनिवार को सत्संग भी: धर्म के लिए हिंदू हुए लामबंद

सूरत के मंदिरों में हनुमान चालीसा को लाउडस्पीकरों पर बजाते हुए 8 महीने हो गए हैं। इसकी शुरुआत सूरत के सोनी फलिया से हुई थी जहाँ देसाई नी पॉल स्थित है। वहाँ श्री साईनाथ युवक मंडल नामक एक युवा संगठन ने हनुमान चालीसा का पाठ दिन में दो बार लाउडस्पीकर पर करने का निर्णय लिया था। बाद में इससे एक पवित्र और धार्मिक माहौल इलाके में बनता गया।

यहाँ ये जरूरी नहीं है कि सिर्फ मंदिरों पर ही लाउडस्पीकर हो। कुछ स्थानीयों ने अपने घर की छतों पर भी हनुमान चालीसा बजाने के लिए लाउडस्पीकरों को जगह दी है। समय निर्धारित है- सुबह और शाम। रोज आरती के समय हनुमान चालीसा बजती है।

कुछ दृश्य हैं जो सूरत के आजाद नगर से हैं जहाँ चालीसा पाठ हुआ। वीडियो में स्पष्ट तौर पर हनुमानाष्टक का पाठ होते सुना जा सकता है।

स्थानीयों का कहना कि अन्य मजहब के लोग अपने प्रार्थना समय में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हैं और किसी भी उठने वाली आपत्ति का मजाक बनाकर उसे नीचा दिखाया जाता है। वहीं हिंदू मुश्किल से अपनी धार्मिक पहचान का प्रदर्शन करते हैं क्योंकि भारत में उनको सिखाया जाता है कि इसे छिपाएँ ताकि तथाकथित सेकुलरिज्म जिंदा रहे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल संयोजक ने और सूरत निवासी यग्नेश पटेल ने कहा, “हिंदुओं पर प्रतिबंध है जबकि दूसरे मजहब में लाउडस्पीकर इस्तेमाल होता है।”

पटेल कहते हैं, “एक निश्चित समुदाय के लोग तो हर शुक्रवार इकट्ठा होते हैं और अपनी मजहबी पहचान का प्रदर्शन सार्वजनिक जगहों पर करते हैं। सूरत में हमारे यहाँ 15 जगहों पर साप्ताहिक सत्संग होता है। लोग आते हैं और हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। इस तरह हम धर्म के प्रति जागरूकता और माहौल में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा रहे हैं। यही हमारा उद्देश्य है। ”

सूरत के सत्संग में श्रद्धालु

पटेल कहते हैं, “हम रोड ब्लॉक नहीं करते और लोगों को परेशानी नहीं देते। हम मंदिर के परिसर में बैठते हैं और कुछ समय तक के लिए हर शनिवार सत्संग करते हैं। इससे हर कोई खुद को अपने धर्म के नजदीक पाता है।”

समय के साथ लोग इन प्रयासों को सराहते हैं और ज्यादा से ज्यादा लोग प्रार्थना और सत्संग में भाग लेते हैं। ये सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं है। गुजरात के अन्य जगहों में भी हनुमान चालीसा के पाठ को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिंदूवादी संगठन श्री साईनाथ युवक मंडल, दुर्गा वाहिनी का महिला समूह और मातृ शक्ति भी इस सत्संग में भाग लेते हैं।

हिंदुओं का प्रतिकार

पूरे भारत भर में नमाज दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर पर होती है। एक तरफ जहाँ इस्लामी देशों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को मना किया जाता है और सिर्फ इंटरनल स्पीकरों को इस्तेमाल करने को कहा जाता है। वहीं अगर भारत में ऐसी कोई टिप्पणी कर दे तो इंसान को कट्टर और इस्लामोफोबिया से ग्रस्त कह दिया जाता है और ये खासकर खुद को लिबरल और सेकुलर कहने वाले लोग ज्यादा बोलते हैं।

भारत के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को संरक्षित करने के लिए भारत में किसी भी अदालत या सरकार ने इसके खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं की। पुलिस भी कई बार ऐसे में मामलों में लाउडस्पीकर चलाने वालों से ज्यादा उसके ख़िलाफ़ शिकायत करने वालों पर एक्शन लेती है। जब कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले और सबके हितों की रक्षा करने वाले ही इस तरह एक तय समुदाय के प्रति इतकी नरमी रखेंगे ताकि उन्हें दुख ना हो तो इस पक्षपात पर सबका ध्यान जाएगा ही। लोग इस तरह सेकुलरिज्म के नाम पर किए जा रहे बदलावों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

जब हिंदुओं ने लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया तो इस प्रतीकात्मक प्रतिकार का संदेश कहीं गहरा हुआ। वे कानून को अपने हाथ में नहीं ले रहे, मस्जिदों की बिजली नहीं काट रहे, लाउडस्पीकर नहीं हटवा रहे। वे बस न्याय और समानता के लिए नई शुरुआत कर रहे हैं। ऐसा ही प्रतिकार गुरुग्राम में भी देखने को मिला था, जब नमाज के नाम पर हुए अवैध कब्जे से कम्युनिटी ग्राउंड को आजाद करने के लिए स्थानीय लोगों ने सड़क पर बैठकर भजन किया था।

जो चीज पॉल के लिए अच्छी है, वो परवेज के लिए होनी चाहिए और जो परवेज के लिए अच्छी है वो प्रफुल्ल के लिए होनी चाहिए।

मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई निरवा मेहता की रिपोर्ट पर आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।