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रुद्राक्ष पहनने और चंदन लगाने की सज़ा: सरकार पोषित स्कूल में ईसाई शिक्षक ने छात्रों को पीटा, माता-पिता ने CM स्टालिन से लगाई गुहार

तमिलनाडु के कांचीपुरम में ईसाई शिक्षक को छात्रों का रुद्राक्ष पहनना और विभूति लगाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। इसकी वजह से उसने छात्रों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें पीटा भी। छात्रों के माता-पिता ने सीएम के स्पेशल सेल को पत्र लिखकर स्कूल और शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

तमिल भाषा में लिखा गया यह पत्र सोशल मीडिया वायरल हो गया है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले लड़कों किरुबाकरण और किरुबानंदन के माता-पिता ने सीएम के स्पेशल सेल को यह पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने जॉयसन नाम के ईसाई शिक्षक पर आरोप लगाया है कि उसने पवित्र रुद्राक्ष पहनने और विभूति लगाने के कारण उनके बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें पीटा। दोनों लड़के कांचीपुरम के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल एंडरसन हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते हैं।

बताया जा रहा है कि शिक्षक जॉयसन ने कथित तौर पर पवित्र राख (विभूति) और रुद्राक्ष पहनने पर लड़कों को यह कहते हुए अपमानित किया था कि केवल उपद्रवी और मिसफिट (misfits) लोग ही इसे पहनते हैं। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि जो लोग शिव भगवान के प्रतीकों को पहनते हैं वे अनैतिक हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉयसन ने न केवल लड़कों को कक्षा में प्रवेश करने से रोका, बल्कि रुद्राक्ष पहनने पर उन्हें पीटा और उनके सहपाठियों के सामने उन्हें अपमानित किया। लड़कों के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि ईसाई शिक्षक ने उनके बच्चों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें गाली दी। इतने से भी जब उसका मन नहीं भरा तब उसने उनकी कक्षा में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के सामने उन्हें अपमानित किया। लड़के अब स्कूल जाने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से अपने बच्चों को बेवजह परेशान करने वाले स्कूल और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

शिक्षक जॉयसन इससे पहले भी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार कर चुका है। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह पढ़ाने में भी सक्षम नहीं है। साल 2017 में भी उसने इसी तरह से आठवीं कक्षा के छात्र को अपमानित कर पीटा था। सजा के कारण छात्र के बीमार पड़ने के बाद जॉयसन को गिरफ्तार कर लिया गया था। जब बच्चे के माता-पिता अन्य शिक्षकों के व्यवहार के बारे में पूछताछ करने के लिए स्कूल गए तो उन्हें वहाँ उन्हें उचित जवाब नहीं दिया गया।

बता दें कि दक्षिण भारत के चर्च द्वारा संचालित यह स्कूल 150 वर्ष से अधिक पुराना है और सरकार द्वारा इसे संरक्षण दिया जा रहा है। कांचीपुरम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के वर्तमान सांसद, सेल्वम एक DMK नेता और इस स्कूल के पूर्व छात्र हैं। हाल ही में सीएम एमके स्टालिन ने चर्च ऑफ साउथ इंडिया की 75 वीं वर्षगाँठ में भाग लिया था। सीएसआई (Church of South India) राज्य भर में हजारों संस्थान चलाता है और यह पहली बार नहीं है, जब इन स्कूलों में हिंदू छात्रों को परेशान किया जा रहा है।

बंगाल के ISKCON वालों ने मंदिर के अंदर रमजान में करवाया था इफ्तार, बांग्लादेश के ISKCON मंदिर में मुस्लिम भीड़ कर रही हत्या-रेप

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने सैकड़ों (500) की भीड़ में जमा होकर इस्कॉन मंदिर में हमला बोला और वहाँ लगे दुर्गा पंडाल को नष्ट करते हुए दो साधुओं की हत्या कर दी। इस दौरान कई श्रद्धालुओं पर भी हमला हुआ और काफी तोड़फोड़ मची। पीड़ादायक बात ये है कि भारत के अंदर पश्चिम बंगाल का इस्कॉन मंदिर ने रमजान के दौरान मुस्लिमों को इफ्तार करवाया था और आज बांग्लादेश में उसी इस्कॉन मंदिर पर वहाँ के मुस्लिम हमला बोल रहे हैं।

5 साल पहले की मीडिया रिपोर्ट्स यदि देखें तो पता चलता है कि कितने आदर के साथ इन मुस्लिमों को पश्चिम बंगाल के इस्कॉन मंदिर में इफ्तार कराया गया था। करीब 165 मुस्लिम बाइज्जत कुर्सी पर बैठे थे और खुद हिंदु कार्यकर्ताओं ने उनके लिए टेबल सजाई थी।

मेज में रखी प्लेटों में फल, फ्रूट, स्नैक, मिठाई, जूस के ग्लास, शरबत सब सजे थे। आवभगत के बाद उन्हें चंद्रोदय मंदिर, मायापुर जो कि उत्तरी कोलकाता से 130 किमी दूर है, वहाँ परिसर में ही नमाज पढ़ने को भी जगह दी गई थी। मुस्लिम नेता सैफुल इस्लाम ने इतना आदर सम्मान पाकर कहा था कि ‘हरे कृष्णा समूह’ द्वारा इतनी इज्जत पाकर स्थानीय मुस्लिम हैरान हैं और इस चीज ने उनके दिलों में घर कर लिया है।

उस समय की रिपोर्टों के अनुसार सैफुल ने कहा था, “हमने कभी ऐसे इफ्तार के बारे में नहीं सुना था जिसे गैर मुस्लिमों द्वारा आयोजित किया गया हो। आस पड़ोस के मुस्लिमों की प्रतिक्रिया बहुत भावपूर्ण थी कि 160 मुस्लिम मंदिर में आए जबकि मंदिर को लग रहा था कि बस 75 लोग ही वहाँ आएँगे।”

मुस्लिम व्यापारी रेजुल शेख ने भी कहा था कि ये बर्ताव उल्लेखनीय है क्योंकि पूर्वी भारत के धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ था। कई बार कुछ गैर मुस्लिम इफ्तारी को अपने मुस्लिम दोस्तों, पड़ोसियों और मस्जिदों में भेजते थे लेकिन ऐसा आयोजन कभी नहीं किया जाता था जैसे इस्कॉन ने किया।

शेख ने यह जानकारी भी दी थी कि इस्कॉन मंदिर के बीच परिसर में यह आयोजन हुआ था। वहीं इस्कॉन के तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी ने कहा था कि उनके द्वारा यह आयोजन इस्कॉन की 50वीं सालगिरह पर आयोजित हुआ। दास ने इस दौरान अपने मंदिर को अन्य हिंदू मंदिरों से अलग दिखाते हुए कहा था कि जहाँ कई हिंदू मंदिरों में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित होता है वहीं इस्कॉन में उन्हें फ्री एक्सेस है।

दास ने बताया था कि कई मुस्लिम मंदिर की दैनिक गतिविधियों में पार्ट लेते हैं और जरूरी सामान पहुँचाते हैं। उनमें कई को निर्माण के लिए काम दिया जाता है और बाकियों को वो काम दिए जाते हैं जिसमें वो निपुण होते हैं। साल 2016 की इस रिपोर्ट में अधिकारी ने कहा था, “हम अपनी 50वीं सालगिरह पर मुस्लिमों के लिए अच्छा व्यवहार चाहते हैं। इसके लिए इफ्तार आयोजन से बेहतर कुछ नहीं होता।” यूसीए न्यूज के मुताबिक कई लोगों ने इस आयोजन की सराहना की थी। सरयूकुंड रामजानकी मंदिर के पुरोहित ने भी इस कदम की तारीफ की थी और आशा जताई थी कि इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ेगा।

हालाँकि, आज 5 साल बाद स्थिति अपेक्षाओं के बिलकुल विपरीत है बंगाल के इस्कॉन में जहाँ इफ्तार करके हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का उदाहरण पेश किया गया था। आज उसी इस्कॉन के एक मंदिर में कट्टरपंथियों ने लूटपाट मचाकर वहाँ के साधुओं को मौत के घाट उतार दिया। हालात ये है कि इस्कॉन के उपाध्यक्षभारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो इस मामले में आवाज उठाएँ। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण भी इस घटना को 1946 के नोआखली दंगों से जोड़ रहे हैं।

हालाँकि, आज 5 साल बाद स्थिति अपेक्षाओं के बिलकुल विपरीत है। पश्चिम बंगाल के इस्कॉन में इफ्तार करके हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का उदाहरण पेश किया गया था। लेकिन बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर में कट्टरपंथियों ने लूटपाट मचाकर वहाँ के साधुओं को मौत के घाट उतार दिया। हालात ये है कि इस्कॉन के उपाध्यक्ष भारत सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो इस मामले में आवाज उठाएँ। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण भी इस घटना को 1946 के नोआखली दंगों से जोड़ रहे हैं।

J&K में ऑपरेशन क्लीन: गैर-मुस्लिमों की हत्याओं के बाद 11 आतंकी ढेर, जैश और लश्कर के टॉप कमांडर को भी मार गिराया

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा कानून व्यवस्था की हालत बिगाड़ने के लिए आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद अब सेना ने आतंकियों के सफाए के लिए ‘ऑपरेशन क्लीन’ अभियान छेड़ दिया है। इसी क्रम में शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को पुलवामा को पंपोर में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चल रही है और खबर है कि लश्कर ए तैयबा के टॉप कमांडर उमर मुश्ताक खांडे समेत 2 आतंकियों को मार कर ढेर कर दिया गया है।

मुश्ताक खांडे ने इसी साल 2 पुलिसवालों की बेरहमी से हत्या की थी और वो पुलिस की हिटलिस्ट में शामिल था। वहीं दूसरे आतंकी की पहचान अभी होनी बाँकी है। दरअसल पुलिस को आतंकियों की मौजूदगी के खुफिया इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर जब पुलिस और सेना की ज्वाइंट टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया तो पकड़े जाने के डर से आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ में दो को ढेर कर दिया गया।

ऑपरेशन क्लीन में सेना ने झोंकी ताकत

जम्मू-कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) विजय कुमार ने इस मामले में बयान दिया है कि ऑपरेशन क्लीन को अंजाम देने के लिए सेना ने पूरी ताकत झोंक दी है। अक्टूबर महीने में अब तक 11 आतंकियों का खात्मा किया गया है। इनमें से एक जैश ए मोहम्मद का टॉप कमांडर भी था। आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में एक जेसीओ सहित 7 जवानों ने अपना बलिदान दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) को जम्मू-कश्मीर में एक दिन तीन अलग-अलग जगहों पर सुरक्षाबलों और आतंकियों की बीच मुठभेड़ हुई थी। इसी क्रम में पुलवामा के वाहिबुघ में टीआरएफ के आतंकी शाहीद को भी खत्म कर दिया गया था। वहीं बेमिना में तंजील को ढेर किया गया था। आईजीपी विजय कुमार ने कहा है कि यही दोनों आतंकी केमिस्ट बिंदरू और दो शिक्षकों की हत्या में शामिल थे।

‘उन्हें चाहिए होती थी सिर्फ वर्जिन लड़कियाँ, जिन्होंने किस तक न किया हो’: महिमा चौधरी ने शेयर किए बॉलीवुड को लेकर अपने अनुभव

बॉलीवुड में ‘परदेस गर्ल’ के नाम से मशहूर एक्ट्रेस महिमा चौधरी इन दिनों एक इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं। लंबे समय से ऑनस्क्रीन से दूरी बनाने वाली महिमा चौधरी ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई अहम राज खोले हैं। उन्होंने पहले और अब की फिल्म इंडस्ट्री में तुलना करते हुए बॉलीवुड में फीमेल एक्टर्स के प्रति हो रहे बदलाव पर अपनी राय रखी है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पहले के समय में एक्ट्रेसेज के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता था।

सुभाष घई के निर्देशन में बनने वाली फिल्म ‘परदेस’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने वाली महिमा को इसमें शाहरुख खान के अपोजिट कास्ट किया गया था। पहली ही फिल्म से लोगों को अपनी अदाकारी का दीवाना बनाने वाली अभिनेत्री कुछ सालों के बाद बड़े पर्दे से नदारद हो थी। हालाँकि, अब उन्होंने अपने साथ होने वाले हर उस पल के बारे में बात की है, जिससे आज से पहले हर कोई अंजान था।

‘कुरुक्षेत्र’ फिल्म की एक्ट्रेस ने कहा, ”मुझे ऐसा लगता है कि पहले के मुकाबले अब एक्ट्रेसेस को अच्छे रोल और मौके मिल रहे हैं। उन्हें अच्छी भूमिका मिल रही है, अच्छा पैसा मिल रहा है, अच्छे ब्रांड्स मिल रहे हैं और वे पहले से ज्यादा ताकतवर पोजिशन्स पर हैं। इसके साथ ही अब वे पहले से अधिक लंबे वक्त तक काम कर सकती हैं।”

उन्होंने उस समय एक्ट्रेसेस के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर कहा, ”आज लोग फीमेल एक्टर्स को अलग-अलग रोल्स में स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उनके समय में उन्हें अपनी निजी जिंदगी को कर‍ियर की खात‍िर छुपाकर रखना पड़ता था।” 

‘दिल क्या करे’ फिल्म की एक्ट्रेस ने आगे कहा, ”उस समय पर अगर आप किसी को डेट कर रहे हैं, तो लोग आपको अपनी फिल्म से बाहर रख देते थे, क्योंकि उन्हें सिर्फ वर्ज‍िन लड़क‍ियाँ चाह‍िए होती थीं, जिन्होंने कभी किस तक नहीं किया हो।”

सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाली महिमा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन चीजों के बारे में भी खुलासा किया, जिनके बारे में शायद ही बॉलीवुड से बाहर के लोग जानते होंगे। उन्होंने बताया, ”उस दौर में अगर आप किसी को डेट कर रहे हैं तो वे कहेंगे ‘Oh! She is dating!’ अगर आपकी शादी हो गई है, आपका कर‍ियर खत्म की समझो। वहीं, अगर आपका बच्चा हो गया तो समझो आपका पूरा करियर ही चौपट हो गया।”

अभिनेत्री ने बातचीत में बताया कि मौजूद वक्त में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आज मह‍िलाओं को लोग हर तरह के किरदार में अपनाते हैं, यहाँ तक क‍ि माँ या पत्नी बनने के बाद उनके रोमांट‍िक रोल्स भी स्वीकार किए जाते हैं। उनकी पर्सनल लाइफ को भी सेलिब्रेट किया जाता है।

बता दें कि महिमा ने साल 2006 में बॉबी मुखर्जी से शादी की थी, लेकिन 2013 में दोनों अलग हो गए थे। अभी महिमा सिंगल मदर है, उनकी एक बेटी है।

बांग्लादेश में 10 साल की हिंदू बच्ची की मौत और मौसी-नानी से गैंगरेप की खबरों को पुलिस ने नकारा, बताया- अफवाह

नोट: यह रिपोर्ट नई सूचनाओं के आधार पर अपडेट की गई है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा में इस्लामी कट्टरपंथियों का शिकार एक 10 साल की हिंदू लड़की हुई है। उसके साथ जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों की भीड़ ने रेप किया था। अब खबर आ रही है कि ज्यादा खून बह जाने से उसकी जान चली गई। हालाँकि बांग्लादेश पुलिस के हवाले से वहाँ की रिपोर्ट में इस घटना से इनकार करते हुए इसे अफवाह बताया जा रहा है।

वहीं बांग्लादेश के एक्टिविस्ट आजम खान ने इस संबंध में पोस्ट कर जानकारी दी। उन्होंने बताया,

“10 साल की लड़की जिसे कट्टरपंथी मुस्लिमों ने रेप किया, वो  अधिक खून बह जाने के कारण मर गई है। किसी को नहीं मालूम कि कितनों ने उसके साथ रेप किया। उसकी मौसी और नानी का भी साथ में गैंगरेप हुआ था, दोनों पुलिस कस्टडी में हैं। उन्हें न पत्रकारों से, न कार्यकर्ताओं से और न ही रिश्तेदारों से बात करने की अनुमति दी जा रही हा। आखिरकार अगर उन्हें बात करनी दी जाएगी तो इससे उनके महान देश की साख को नुकसान पहुँचेगा और मजहब भी बदनाम होगा और उसका अनुसरण करने वाले भी…मैं डिमांड करता हूँ कि उन्हें पत्रकारों और कार्यकर्ताओं से बात करने दी जाए।”

इससे पहले भी इस घटना की जानकारी आजम खान ने ही अपने पोस्ट में दी थी। उन्होंने लिखा था,

“हाजीगंज के चांदपुर में अब तक का सबसे गंदा रेप केस। मु्स्लिम चरमपंथियों ने पूरे हिंदू परिवार का रेप किया। उन्होंने माँ का रेप किया, बेटी का रेप किया और भतीजी का रेप किया जो सिर्फ 10  साल की थी। ये मतलब ही नहीं है कि मीडिया को कितना भी ब्लैकआउट और सेंसर किया जाए। हम ऐसे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाएँगे ताकि लोगों को पता चल सके। मैं शर्म करता हूँ कि मैं मुस्लिम समुदाय में पैदा हुआ और मेरी परवरिश इसमें हुई।”

हालाँकि बांग्लादेश के एक रिपोर्ट के हवाले से इस पूरी घटना से इनकार किया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाजीगंज उपजिला को लेकर फिर से अफवाहें फैल रही हैं। शनिवार सुबह से ही देश-विदेश में कई सोशल मीडिया के जरिए हिंदू समुदाय के एक माँ-बहन और दस साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की खबर फैलाई जा रही है। बच्ची मर चुकी है। जबकि हाजीगंज उपजिला में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

फैक्टवॉच ने चाँदपुर के स्थानीय अख़बार ‘popularbd.news’ के रिपोर्ट के हवाले से पाया कि हाजीगंज में हिंदू समुदाय के खिलाफ बलात्कार की पूरी घटना को अफवाह बताया गया था। पॉपुलरबीडीन्यूज की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाजीगंज थाना प्रभारी हरुनूर राशिद और बांग्लादेश पूजा उदयपन परिषद हाजीगंज उपजिला के अध्यक्ष बाबू रूहिदास बानिक ने भी इस जानकारी की पुष्टि की।

गौरतलब है कि इन ट्वीट्स को रश्मि सामंत ने भी शेयर किया है जिन्हें कुछ समय पहले वामपंथी और हिंदू विरोधी प्रोपगेंडाबाजों ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद पर जीत के बाद उन्हें घेरना शुरू किया था और उनसे इस्तीफा लिया गया था। रश्मि घटना पर लिखती हैं, “बांग्लादेशी हिंदुओं को आजाद करो। उन्हें उन देशों में त्वरित शरण दी जानी चाहिए जहाँ 21वीं सदी में हिंदुओं को प्रताड़ित नहीं किया जाता।”

बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि बांग्लादेश के नोआखाली इलाके में जुमे की नमाज के बाद 200 कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के इस्कॉन मंदिर पर हमला कर इस्कॉन श्रद्धालु पार्थ दास की बर्बरता से हत्या कर दी। इस्कॉन ने अपने बयान में बताया था कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब में तैरता मिला। वहीं इस्‍कॉन से जुड़े राधारमण दास ने ट्वीट कर बताया कि पार्थ को बुरी तरह से पीटा गया था कि जब उनका शव मिला तो शरीर के अंदर के हिस्से गायब थे। 

राजस्थान में प्रिंसिपल ने किया 7वीं की छात्रा से रेप, शिक्षिकाओं पर मदद के आरोप: कई लड़कियों के साथ कर चुका है गलत हरकत

राजस्थान के झुंझनू जिले में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसपिल पर सातवीं क्लास की छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। आरोपित प्रधानाचार्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित का नाम केशव यादव बताया जा रहा है। आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि थाना सिंघाना जिला झुंझनू पुलिस ने की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़िता के परिजनों ने बताया कि आरोपित प्रधानाचार्य बहुत पहले से पीड़िता को अश्लील मैसेज भेज रहा था। पीड़िता की उम्र लगभग 11 वर्ष बताई जा रही है। कई बार उसने छेड़छाड़ की भी कोशिश की। जब इसकी जानकारी पीड़िता ने स्कूल की 2 महिला टीचरों को दी तो उन्होंने मदद के बजाय उल्टे छात्रा को ही धमकाया।

आरोप है कि दोनों शिक्षिकाओं ने पीड़िता का मोबाईल ले कर प्रिंसपिल द्वारा भेजे गए आपत्तिजनक मैसेज भी डिलीट कर दिए। पीड़ित छात्रा को चुप रहने और किसी से कुछ भी न बताने के लिए दबाव बनाया गया। स्थानीय थाना प्रभारी का कहना है कि गिरफ्तार प्राध्यापक केशव यादव पर इस से पहले भी अन्य लड़कियों के साथ गलत हरकत करने के आरोप लग चुके हैं।

पीड़िता के अनुसार 5 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) को प्रिंसिपल ने उसे स्कूल थोड़ा पहले आने को कहा। जब वो स्कूल पहुँची तो प्रिंसपिल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी के साथ बाहर कहीं भी मुँह न खोलने की धमकी भी दी। जब पीड़िता अपने घर पहुँची तो इस घटना के बारे में अपने परिवार वालों से बताया।

पीड़िता के परिजनों ने 13 अक्टूबर 2021 (बुधवार) को इसकी शिकायत चाइल्ड हेल्पलाइन पर की। पीड़ित छात्रा को चाइल्ड हेल्पलाइन का नंबर (1098) सरकारी स्कूल की सिलेबस की किताब में मिला था। इस शिकायत पर बाल कल्याण समिति के सदस्य सक्रिय हुए। फ़ौरन ही झुंझनू जिले के पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी से शिकायत की गई। शिकायत मिलते ही पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय थाने को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।

पीड़िता से पूछताछ के बाद आरोपित प्रधानाचार्य को 14 अक्टूबर 2021 (गुरुवार) को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित पर सबूत मिटाने की भी धाराएँ लगाई गई हैं। आरोपित केशव यादव मूल रूप से क़रीरीवास थाना खुशखेड़ा जिला अलवर राजस्थान का रहने वाला है। फ़िलहाल वो उसी गाँव में किराए का मकान ले कर रह रहा था जिस गाँव में स्कूल है।

मिल रही जानकारी के अनुसार आरोपित प्रिंसपिल को वर्ष 2020 में ही नौकरी मिली थी। आरोपित की पिछले ही वर्ष शादी भी हुई थी। प्रिंसपिल की पत्नी भी शिक्षिका हैं और दूसरे जिले में कार्यरत हैं। साथ ही इनके पिता भी शिक्षक थे जो फिलहाल रिटायर हो चुके हैं।

पुलिस द्वारा दर्ज रिपोर्ट में पीड़िता को धमकाने और चुप रहने का दबाव बनाने वाली दो शिक्षिकाएँ भी आरोपित हैं। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक मनोज कुमार ढाका ने आरोपित केशव यादव को सस्पेंड कर दिया है। आगे की विभागीय कार्रवाई के लिए संयुक्त निदेशक चूरू से निर्देश मांगा है। साथ ही दोनों आरोपित शिक्षिकाओं की भी भूमिका की जाँच करवाई जा रही है।

इस घटना पर बात करते हुए बाल अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशिका प्रिया चौधरी ने कहा कि पीड़िता और उसके परिजन डरे हुए थे। वो पुलिस के पास शिकायत करने नहीं जाना चाहते थे। पीड़िता ने सबसे पहली शिकायत 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) में की थी। इसी शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई करवाई गई। बच्ची की काउंसिल भी करवाई गई है।

गहलोत सरकार में मदरसों की बल्ले-बल्ले, मिलेगा 25-25 लाख रुपए का ‘दीवाली बोनस’, BJP का तंज – ‘जनता के टैक्स का सदुपयोग’

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार का मुस्लिम तुष्टिकरण का चेहरा एक बार फिर से उजागर हो गया है। इस बार इस सरकार ने राज्य में मदरसों के विकास के लिए 25,00,000 तक की मदद का ऐलान किया है। गहलोत सरकार द्वारा की जा रही इस फंडिंग को बीजेपी ने इसे मुस्लिमों के लिए दीवाली का बोनस करार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिमों को यह फंडिंग मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत की जा रही है। इस मामले में राजस्थान मदरसा बोर्ड ने प्रेस रिलीज जारी की है। प्रेस रिलीज में राजस्थान मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड A कैटेगरी के मदरसों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य की योजना के तहत प्राथमिक मदरसों के विकास के लिए 15 लाख रुपए और हायर लेवल मदरसों के लिए 25 लाख रुपए देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तारीख 20 अक्टूबर रखी गई है। उल्लेखनीय है कि इस योजना में 90 फीसदी खर्च राज्य और 10 फीसदी मदरसे उठाएँगे।

गहलोत सरकार के मुस्लिम तुष्टिकरण वाले इस फैसले पर कटाक्ष करते हुए बीजेपी के मीडिया सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने इसे दीवाली का बोनस और जनता के टैक्स का बेहतरीन उपयोग बताया। उन्होंने ट्वीट किया, “महिला उत्पीड़न और दलितों पर बढ़ते अपराध के मामलों के बीच, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार की अद्भुत साम्प्रदायिक पहल…। मदरसों को मिलेगा सरकार की तरफ से दीपावली बोनस। 15-25 लाख रुपए प्रति मदरसा! राजस्थान की जनता के टैक्स का बेहतरीन सदुपयोग।”

दरअसल, लखीमपुर खीरी मामले में केंद्र और योगी सरकार को घरेने वाली अशोक गहलोत सरकार में हाल ही में हनुमानगढ़ की पीलीबंगा में दलित को बेरहमी से पीटा गया था। इसके अलावा जालोर, अलवर, झालावाड़ और नागौर में भी इसी तरह की घटनाएँ हुई हैं। इसी को लेकर मालवीय ने राजस्थान की कॉन्ग्रेसी सरकार को घेरा है।

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार की गहलोत सरकार के तुष्टिकरण का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हिंदू त्योहार विजयदशमी के मौके पर गहलोत सरकार ने आरएसएस को कोरोना का हवाला दे पथ संचलन से रोक दिया था, लेकिन इसी गहलोत सरकार में कोरोना के ही दौरान जनाजे में भीड़ जायज लगी थी। उस दौरान कोरोना नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ था।

₹200 करोड़ का वसूली केस: तीसरी बार ED के सामने नहीं पेश हुईं जैकलीन फर्नांडिस, माँगी अगले महीने तक की मोहलत

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस कई करोड़ के वसूली रैकेट मामले की पड़ताल में प्रवर्तन निदेशालय का सहयोग नहीं कर रहीं। खबर है कि लगातार तीसरी बार ईडी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बावजूद वह एजेंसी कार्यालय नहीं पहुँचीं। ईडी ने जैकलीन को सुकेश चंद्रशेखर के ख़िलाफ़ चल रही धनशोधन मामले की जाँच में पूछताछ के लिए बुलाया था।

जानकारी के अनुसार जैकलीन फर्नांडिस ने ईडी अधिकारियों को बताया कि वे पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस नहीं पहुँच पाएँगी। अभिनेत्री को ईडी के तरफ से तीसरा समन गया था, बावजूद इसके वह पेश नहीं हुईं। अब आगे उन्हें अधिकारियों के समक्ष सोमवार (18 अक्टूबर) को पेश होने को कहा गया है। शुक्रवार को अभिनेत्री ने अधिकारियों से कहा कि उनसे पूछताछ अगले माह के पहले हफ्ते तक टाली जाए, लेकिन अधिकारी उनसे तत्काल पूछताछ चाहते हैं। 

बता दें कि सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जैकलीन फर्नांडिस और नोरा फतेही को गुरुवार को समन किया गया था। जाँच एजेंसी इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या कोई आर्थिक ट्रांजैक्शन सुकेश और जैकलीन-नोरा के बीच हुआ था।

इससे पहले ईडी ने जैकलीन का कई अवसरों पर बयान रिकॉर्ड किया था। अपने पहले के बयानों में उन्होंने दावा किया था वो खुद सुकेश के वसूली रैकेट की विक्टिम हैं और उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। मालूम हो कि इस मामले में सुकेश चंद्रशेखर, उनकी पत्नी लीना और 6 अन्य ईडी की कस्टडी में हैं।

सुकेश कथित तौर पर तिहाड़ जेल से जैकलीन फर्नांडिस को स्पूफ कॉल करता था। वह उससे एक बड़ी हस्ती होने का दिखावा करता था और जब उन्होंने उस पर विश्वास कर लिया तो उसने उसे कथित तौर पर उसे चॉकलेट और फूल उपहार के रूप में भेजना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच एजेंसी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 50 के तहत अभिनेत्री से पूछताछ कर रही थी।

पूरा मामला:

सुकेश चंद्रशेखर को पुलिस ने इसी साल गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने जेल के अंदर बंद रहते हुए 200 करोड़ रुपए वसूली का रैकेट चलाया था। उसने एक बड़े बिजनेसमैन की पत्नी से 50 करोड़ रुपए की एक्सटॉर्शन मनी माँगी थी। इसी मामले को लेकर जब पुलिस ने जेल में ही रेड की तो वहाँ से उसके पास से 2 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। इसके अलावा भी उसने साल 2013 में केनरा बैंक में फ्रॉड किया था।

ईडी के अधिकारियों के पास सुकेश के दो दर्जन से अधिक कॉल रिकॉर्ड हैं, जिसके आधार पर वे जैकलीन के साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में पता लगाने में सफल रहे। हालाँकि, जाँच एजेंसी ने सुरक्षा कारणों से यह खुलासा नहीं किया है कि सुकेश खुद को क्या बताकर एक्ट्रेस से बातचीत करता था।

‘कलाकारों के घर जाते हैं, करते हैं शोषण’: शर्लिन ने राज कुंद्रा पर ठोकी यौन उत्पीड़न की FIR, कहा – ‘माँ दुर्गा का आशीर्वाद लेकर आई हूँ’

बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा अपने बोल्ड स्टेटमेंट और बिंदास अंदाज के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। पोर्नोग्राफी केस में राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी कुंद्रा पर लगातार हमलावर रही शर्लिन ने अब पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। एक्ट्रेस ने अपने स्टेटमेंट में कहा, ”मैंने राज कुंद्रा के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के लिए FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दर्ज की है।”

शर्लिन ने अपने शिकायत दर्ज करवाने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी है। उन्होंने अपने ट्विटर पर गुरुवार (14 अक्टूबर 2021) को एक वीडियो शेयर किया था। साथ ही कैप्शन लिखा, ”आज मैं अपनी कानूनी टीम के साथ जुहू पुलिस स्टेशन पर गई थी, राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने।”

शर्लिन चोपड़ा ने राज कुंद्रा पर आरोप लगाते हुए कहा, ”लड़कियों से जिस्म की नुमाइश करवाकर आप उनकी पेमेंट क्लियर क्यों नहीं करते? आप उनको चूना क्यों लगाते हैं? आप उनको टोपी क्यों पहनाते हैं? क्या ये होता है एथिकल बिजनेस।”

उन्होंने आगे कहा, “आपको बिजनेसमैन बनना है तो जाइए सीखिए टाटा कैसे बिजनेस करते हैं? वो एथिक्स के साथ करते हैं, जो वादे करते हैं उन्हें निभाते भी हैं। आप क्या करते हैं? आप केवल आर्टिस्ट के घर जाकर उनका यौन शोषण करते हैं। आप उसके घर जाकर अंडरवर्ल्ड की धमकी देते हैं कि वो अपना केस वापस ले, वरना तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। जो एक दो फिल्में तेरे हाथ में हैं वो भी छूट जाएँगी। मैं आपसे और आपकी पावर से नहीं डरूँगी। मैं दुर्गा माँ का आशीर्वाद लेकर आई हूँ। इसके बाद वह रोने लगती हैं।”

इससे पहले एक्ट्रेस ने सितंबर 2021 में राज कुंद्रा और​ शिल्पा शेट्टी पर हमला करते हुए कहा था, ”फिल्में कब तक करें। मैं चाहती हूँ कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए कुछ करूँ। मंच पर बैठकर साष्टांग करना बहुत आसान होता है, मंच पर बैठकर रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बातें करना आसान होता है, लेकिन आप फील्ड में जाकर पीड़ित महिलाओं के लिए कुछ कीजिए। अपने बंगले से बाहर निकलकर, पोर्न से बाहर निकलकर कुछ कीजिए। सारी दुनिया आपको साष्टांग दंडवत प्रणाम करेगी।” बता दें कि शर्लिन ने अप्रैल 2021 में राज कुंद्रा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी।

‘योग के साथ ज़हर उगलते हैं…’: सड़क पर नमाज का हुआ विरोध तो हिन्दुओं पर भड़के NDTV वाले मोहम्मद ग़ज़ाली, विजेता सिंह

‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने पिछले एक वर्ष से दिल्ली को बंधक बनाए हुआ है। सड़क पर जगह-जगह पीर बाबाओं की मजारें उग आती हैं। नमाज पढ़ने वाली मुस्लिम भीड़ देश-विदेश में सड़क अपर ट्रैफिक जाम करवाती है। दंगों के दौरान यही मुस्लिम भीड़ पेट्रोल बम और पत्थर लेकर टूट पड़ती है। लेकिन, NDTV पत्रकार मोहम्मद ग़ज़ाली और विजेता सिंह को समस्या इस बात से है कि हिन्दू शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात क्यों रख रहे हैं?

दरअसल, मामला कुछ यूँ है कि गुरुग्राम के सेक्टर-47 में कुछ हिन्दू प्रबुद्धजनों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं। जिस तरह से वहाँ खुले में नमाज के कारण आमजनों को दिक्कतें आ रही हैं, ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन उसी के खिलाफ था। उन्होंने आशंका जताई कि बाहरी लोग यहाँ आकर ऐसा कर के अशांति फैलाना चाहते हैं, इसीलिए पुलिस को उनके आईडी कार्ड्स चेक करने चाहिए।

इस दौरान ‘खुले में नमाज बंद करो’ और ‘नमाज मस्जिद में अदा करो’ जैसे पोस्टर्स भी उन्होंने दिखाए। बस इतनी सी बात पर पत्रकार विजेता सिंह भड़क गईं और उन्होंने असली समस्या की बात करने की बजाए हिन्दुओं पर हमले शुरू कर दिए। उन्होंने लिखा, “व्हाट्सएप्प वाले अंकल और आंटीज। साक्षात।” यानी, उन्होंने समस्या की बात करने की बजाए समस्या के समाधान की माँग कर रहे पीड़ित हिन्दुओं को भी भला-बुरा कहा।

बस, फिर क्या था। NDTV के पत्रकार मोहम्मद ग़ज़ाली ने इस मौके का इस्तेमाल योग का मजाक उड़ाने के लिए भी कर लिया। उन्होंने लिखा, “ये वाला समूह सुबह में अनुलोम-विलोम के साथ-साथ ज़हर भी खूब उगलते हैं।” मतलब, NDTV के पत्रकार मोहम्मद ग़ज़ाली के लिए हजारों लोगों का सड़क पर नमाज पढ़ कर घंटों ट्रैफिक जाम करना ठीक है, लेकिन उसके खिलाफ कुछ हिन्दू शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर दें तो दिक्कत है।

मोहम्मद ग़ज़ाली और विजेता सिंह को हिन्दुओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से दिक्कत

बता दें कि हरियाणा के गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा करने के खिलाफ पिछले महीने (सितंबर 2021) से विरोध प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को गुरुग्राम सेक्टर-47 में स्थानीय हिंदू लोगों ने लगातार चौथे सप्ताह भजन-कीर्तन कर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुँचे पुलिस बल और अधिकारियों ने विरोध करने वालों को समझाने का प्रयास किया। इसको लेकर स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने आरोप लगाया कि हमसे वादा किया गया था कि दस दिन में इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं किया गया।