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‘ये मोदी सरकार के उकसाने से हुआ है’: ‘किसान आंदोलन’ में दलित की हत्या पर बोले टिकैत – हजारों करोड़ देकर हमें बदनाम करने की कोशिश

हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) को लखबीर सिंह नाम के व्यक्ति की निहंगों द्वारा बर्बर हत्या किए जाने के मामले में राजनीति शुरू हो गई है। इस मामले में राकेश टिकैत ने पहले से अपेक्षित तरीके से बयान दिया है। टिकैत ने इस हत्याकांड का ठीकरा केंद्र सरकार के सिर पर फोड़ा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के लोगों ने उकसाकर ये हत्या करवाई है। संयुक्त किसान मोर्चा पहले ही इससे पल्ला झाड़ चुका है।

एबीपी से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा, “किसान संगठनों का इस हत्या से कोई लेना-देना नहीं है, ये हत्या किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंनें कहा कि सरकार ने प्रशासन को आंदोलन को बदनाम करने के लिए हजारों-करोड़ों रुपए दिए है। सिंघू बॉर्डर पर हुई घटना सरकार के उकसावे के कारण हुई है।”

वहीं लखीमपुर खीरी हिंसा का ठीकरा टिकैत ने बीजेपी पर फोड़ा और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि अगर कोई कत्ल करेगा तो उसके खिलाफ तो फ्रंट बनेगा ही। उन्होंने आगे कहा कि देश में बोलने की आजादी है और हम बोलेंगे। टिकैत ने ये कहा कि अजय मिश्रा के इस्तीफे तक आंदोलन चलता रहेगा। साथ ही जल्द ही वो लखीमपुर में जिन पाँच लोगों की जानें गई थीं, उनके परिवार से भी मिलने जाएँगे। टिकैत का मानना है कि वो परिवार डरा-सहमा है और पहले वहाँ काफी भीड़ भी थी, लेकिन अब ठीक समय है।

आशीष मिश्रा के मामले में राकेश टिकैत ने यूपी पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस आशीष मिश्रा से पूछताछ नहीं कर रही है। अगर पूछताछ करनी है तो वो उसे गेस्ट हाउस से थाने ले जाए।

लखनऊ में पंचायत बुलाने की स्थिति में परमीशन लेने के सवाल पर राकेश टिकैत ने साफ कहा कि वो अगर कोई पंचायत बुलाएँगे तो इसके लिए कोई अनुमति नहीं लेगें। टिकैत ने मुजफ्फरनगर में पंचायत बुलाए जाने के दौरान प्रशासनिक अनुमति नहीं लेने की बात स्वीकार की और कहा कि 30-35 साल से ऐसे कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं ले रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि जो कुछ भी हुआ वह गलत है। किसी ने उसे मार डाला और बाद में पुलिस ने हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया। मामला जाँच के अधीन है। इससे हमारा विरोध को प्रभावित नहीं करेगा।

‘थोड़ी-थोड़ी पी कर सो जाया करो’: कॉन्ग्रेसी मंत्री भेड़िया की लोगों को सलाह, चुनाव से पहले खाई थी शराबबंदी की कसम

छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर जहाँ शराबबंदी की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर भूपेश बघेल सरकार की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया लोगों को एक-एक पेग लगाने सलाह दे रही हैं। दरअसल, सिंघोला गाँव में गुरुवार (14 अक्टूबर, 2021) को लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री अनिला ने महिलाओं से कहा, ”तनाव से दूर रहने के लिए सोने जाने से पहले एक पेग पी लिया करो।” उन्होंने कहा कि महिलाएँ घर और परिवार की देखभाल करती हैं और वह मानसिक रूप से तनाव महसूस करती हैं। ऐसे में थोड़ी-थोड़ी पी लिया करो और सो जाया करो। मंत्री के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की मंत्री द्वारा दिए गए विवादित बयान को लेकर उनकी जमकर आलोचना हो रही है। एक ट्विटर यूजर ने लाफिंग इमोजी के साथ भेड़िया पर निशाने साधते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार में महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया महिलाओं को शराब पीने की सलाह दे रही है।” बता दें कि भाजपा लगातार ये आरोप लगाती रही है कि चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने राज्य में शराबबंदी की कसम खाई थी।

वहीं, बीजेपी जशपुर ने भी उनके बयान की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया, “सत्ता के नशे में चूर छत्तीसगढ़ की सरकार में मंत्री ​अनिला भेड़िया प्रदेश की महिलाओं को शराब पीने की नसीहत दे रही हैं, जिनके ऊपर महिलाओं एवं बच्चों की उत्थान की जिम्मेदारी है। शर्मनाक।”

हालाँकि, इस पर विवाद होने के बाद मंत्री ने कहा कि उनके बयान को घुमाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि उनके बयान के साथ किसी ने राजनीतिक छेड़छाड़ की है। मेरे बयान का मतलब था कि शराब के आदि पुरुषों को कम पीनी चाहिए। शराब एक बुरी लत है और इससे छुटकारा पाना चाहिए। अगर पुरुष घर में शराब पीता है तो उस कारण पत्नी और बच्चों पर मानसिक दबाव रहता है।

Apple ने अपने स्टोर से कुरान एप हटाया, चीन के कहने पर की कार्रवाई: दुनिया भर में 3.5 करोड़ यूजर

चीन ने अपने देश में एप्पल (Apple) कम्पनी के स्टोर से कुरान एप हटवा दिया है। एप्पल ने यह एक्शन चीन सरकार द्वारा किए गए निवेदन के बाद लिया। कुरान एप (Quran apps) दुनिया भर के मुस्लिमों में चर्चित है। वर्तमान में इस एप पर लगभग डेढ़ लाख रिव्यू हैं। हटाए जाने के समय इस ऐप के चीन में 1 मिलियन से अधिक यूजर हो चुके थे।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारी के अनुसार कुरान एप पर यह एक्शन अवैध धार्मिक सामग्री के चलते लिया गया है। एक आँकड़े के अनुसार, चीन में हटाए गए ऐप कुरान मजीद के वर्तमान समय में दुनिया भर में लगभग 35 मिलियन यूजर हैं। इस कार्रवाई की जानकारी सबसे पहले एप्पल सेंसरशिप नाम की वेबसाइट ने दी थी। यह वेबसाइट ऐप स्टोर में मौजूद ऐप की निगरानी करती है और उनकी गतिविधियों के बारे में अपडेट साझा करती है।

एप्पल के इस कदम का मुस्लिम जगत में विरोध भी शुरु हो गया है। मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ़ ब्रिटेन (MAB) ने इस कदम को इस्लामोफोबिया का नाम दे दिया है।

इसी क्रम में मुस्लिम प्रवक्ता और फ़िल्मकार फिदेल सोलीमेन (Fadel Soliman) ने एप्पल के इस कदम को शर्मनाक बताया है।

चीन में रहने वाले मुस्लिमों के मानवाधिकार हनन की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। इसी वर्ष शिनजियांग प्रान्त में उईगर इमामों पर चीनी सरकार के अत्याचारों की खबर सुर्खियाँ बनी थीं। इतना ही नहीं, वहाँ मुस्लिमों के नरसंहार और उन्हें जेल में डालने जैसी घटनाओं पर पहले भी कई देश आपत्ति जता चुके हैं।

कभी जिंदा जलाया तो कभी हाथ पर मारी तलवार: दलित लखबीर की निर्मम हत्या से पहले भी उजागर हुआ है किसान प्रदर्शन का चेहरा

हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली बॉर्डर पर दलित लखबीर सिंह की निर्मम हत्या ने एक बार फिर किसानों के प्रदर्शन पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह लखबीर को मारा गया वो साफ दर्शाता है कि कितनी हिंसक प्रवृत्ति के लोग इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं जो गाहे-बगाहे आमजन पर अपनी क्रूरता दिखाते रहते हैं। बात चाहे 26 जनवरी पर हुए उपद्रव की हो या फिर किसी सामान्य दिन में व्यक्ति को जिंदा जला डालने की… ऐसा कुछ नहीं है जो पिछले एक साल से चल रहे इस प्रदर्शन से न निकला हो।

कल (15 अक्टूबर) जैसे ही लखबीर की हत्या की खबर मीडिया में आई, चारों ओर सनसनी फैल गई। ऐसे में किसान प्रदर्शन को समर्थन देने वालों ने मौन साधे रखा और दूसरी ओर राकेश टिकैत जैसे किसान नेताओं ने इस घटना से पूरी तरह अपना हाथ खींच लिया। शाम को जाकर एक निहंग सिख सरबजीत की गिरफ्तारी हुई। वो भी आस-पास ऐसे नारे लगाए गए जैसे किसी क्रांतिकारी के लिए लगते हैं। 

बात चाहे घटना के समय जारी की गई वीडियो की हो…या फिर घटना के बाद रिकॉर्ड की गई वीडियो की…हर जगह निहंग सिखों में सिर्फ और सिर्फ लखबीर को काटकर मार डालने का गर्व है और उसकी खुशी है कि उन्होंने मौके पर ही अपराधी को अंजाम दे दिया। इनकी क्रूरता का अंदाजा लखबीर की आखिरी क्षणों की वीडियो से भी लगता है जिसमें वो निहंगों से दो मिनट उतार देने की अपील कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जवाब दिया जाता है- तू तड़प-तड़प के मर बस।

किसान प्रदर्शनस्थल पर हुए हमलों और विवादों की लिस्ट

मालूम हो कि किसान प्रदर्शनस्थल के आसपास ये पहली बर्बर घटना नहीं है जहाँ निहंगों ने तलवार का इस्तेमाल आम जन के ऊपर किया हो। इसी साल अप्रैल में एक और व्यक्ति का हाथ काटा गया था। वो घटना भी हरियाणा के सोनीपत के कुंडली बॉर्डर की थी।

शेखर नामक युवक की गलती बस इतनी थी कि वो प्याऊ मनियारी के कट से एचएसआईआईडीसी की तरफ जा रहा था। मगर, जब वह किसानों के टेंटों के साथ से निकलने लगा तो उसका एक निहंग सिख के साथ झगड़ हो गया। इसके बाद निहंग ने युवक के हाथ पर हमला कर दिया।

17 जून 2021 की तड़के 3 बजे किसानों के प्रदर्शनस्थल टिकरी बॉर्डर पर मुकेश कसार को जिंदा जलाकर मार डाला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश को पहले शराब पिलाई गई थी। उसे शहीद बताकर पेट्रोल छिड़क कर उस पर आग लगाई गई थी

21 जनवरी को निहंगों की हिंसक प्रवृत्ति नजर आई थी। अलीपुर में प्रदर्शन के दौरान निहंगों के साथ रहने वाले युवक रंजीत सिंह ने एसएचओ प्रदीप पालीवाल पर तलवार से हमला किया था, अधिकारी की गर्दन बाल-बाल बची थी। लेकिन हाथ चोटिल हो गया था।

16 फरवरी को सिंघु बॉर्डर के पास अलीपुर में निहंग सिख हरप्रीत सिंह ने पुलिस की कार छीनकर भागने की कोशिश की थी। 7 किमी दूर जाकर उसे पकड़ा गया था। जहाँ उसने आशीष दुबे पर तलवार चला दी थी। उस समय आशीष की गर्दन में चोट आई थी।

मालूम हो कि ये केवल चुनिंदा घटनाएँ है। ऐसे तमाम मामले हैं जब किसानों का प्रदर्शन न केवल दागदार हुआ बल्कि इसकी मंशा पर भी सवाल उठे। मई माह में ही एक बंगाल की युवती के साथ रेप के खुलासे ने तमाम किसान प्रदर्शनकारियों पर सवाल खड़े कर दिए थे।

26 जनवरी पर हुई हिंसा तो शायद ही किसी के जहन से निकलें, जहाँ सैंकड़ों किसान प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़क पर उपद्रव मचाया था और निहंग सिख खुली तलवार लेकर घूमते दिखाई पड़े थे। इसके बाद मई के माह में एक बंगाल की लड़की से रेप की घटना ने सबको झकझोर दिया था। उससे पूर्व महिला पत्रकारों से हुई बदसलूकी ने इस प्रदर्शन में मौजूद तत्वों की पुष्टि की थी। इन सबके साथ इस प्रदर्शन की सबसे विवादस्पद चीजों में देश विरोधी नारे और शरजील इमाम और उमर खालिद के पोस्ट का प्रदर्शन भी शामिल है।

राम-राम कह रामलीला के मंच पर ही ‘दशरथ’ ने त्याग दिए प्राण… बेटे ‘राम’ के वनवास का चल रहा था भावुक सीन

20 वर्षों से रामलीला में दशरथ का रोल पूरी सजीवता से निभाने वाले बिजनौर के गाँव हसनपुर निवासी राजेंद्र ने रामलीला के मंच पर ही प्राण त्याग दिए हैं। घटना 14 अक्टूबर 2021 (गुरुवार) रात की बताई जा रही है। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। दिवंगत राजेंद्र के सम्मान में रामलीला का मंचन रोक दिया गया।

अमर उजाला के अनुसार बिजनौर के अफजलगढ़ क्षेत्र हसनपुर गाँव में हुई इस घटना में दशरथ बने राजेंद्र के साथी कलाकार पहले इसे दशरथ का अभिनय समझते रहे। चल रही रामलीला में जब राजा दशरथ ने अपने महामंत्री सुमंत को वनवास के लिए गए राम के बिना वापस आते देखा तब वो भावुक हो उठे। उन्होंने 2 बार राम-राम कहा और जमीन पर गिर पड़े।

रामलीला देख रहे तमाम श्रद्धालु और अन्य कलाकार भी इस जीवंत मंचन से भावुक हो गए थे। इसी के साथ अगले दृश्य के लिए पर्दा गिरा दिया गया। साथी कलाकार जब राजेंद्र सिंह को उठाने पहुँचे तब उन सबको लगा कि कि वो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी हालत देख कर एक स्थानीय डॉक्टर को बुलाया गया पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दिवंगत राजेंद्र सिंह की आयु लगभग 62 वर्ष थी। वो बचपन से ही धार्मिक अभिनयों में हिस्सा लेते रहे थे। उनकी मृत्यु का कारण हृदयगति रुकना बताया जा रहा है। दिवंगत राजेंद्र के भतीजे और उसी गाँव हसनपुर के रहने वाले आदेश के मुताबिक हर साल उनके गांव में 4 दिन की रामलीला आयोजित होती है। रामलीला के विशेष दृश्यों का यह मंचन सप्तमी से दशहरा तक चलता है।

इसमें अभिनय करने वाले कलाकार स्थानीय होते हैं। आदेश ने आगे बताया कि उनके चाचा मृत राजेंद्र सिंह गाँव के पूर्व प्रधान भी रह चुके थे। इस साल की भी रामलीला मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को शुरु हुई थी। गुरुवार (14 अक्टूबर 2021) को राम वनवास का मंचन था। इसी मंचन के दौरान दशरथ बने राजेंद्र सिंह की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई।

इसी मामले पर और जानकारी देते हुए रामलीला समिति से जुड़े सदस्य गजराज सिंह ने बताया कि राजेंद्र सिंह पूरे जीवन अभिनय को समर्पित रहे। राजेंद्र सिंह के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे और 2 बेटियाँ हैं। उनका एक बेटा सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कार्यरत है।

निहंगों ने की दलित युवक की हत्या, शव और हाथ काट कर लटका दिए: ‘द टेलीग्राफ’ सहित कई अंग्रेजी अख़बारों के लिए ये ‘सामान्य घटना’

दिल्ली से सटे सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को दिलदहला देने वाली घटना को अंजाम दिया गया, जिसने मानवता के साथ-साथ पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। निहंगों द्वारा 35 वर्षीय दलित युवक लखबीर सिंह को 15 अक्टूबर तड़ता तड़पाकर मार डाला गया। इतना ही नहीं उन्होंने (निहंगों) ने दलित युवक की नृशंस हत्या करने के बाद उसके शव, कटे हुए दाहिने हाथ को किसानों के मंच से थोड़ी ही दूर पुलिस बैरिकेट पर लटका दिया था। कई समाचार पत्रों ने इस खबर को शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

वहीं, इनमें से कुछ ऐसे भी अंग्रेजी के समाचार पत्र हैं, जो इस दर्दनाक घटना को सामान्य घटना मान रहे हैं। इसमें अंग्रेजी समाचार पत्र द टेलीग्राफ और हिंदुस्तान टाइम्स शामिल हैं, जिन्होंने दशहरा उत्सव के दौरान देश को झकझोर देने वाली घटना को पहले पेज पर प्रकाशित करना जरूरी नहीं समझा। उलटा RSS से जुड़ी खबर को नकारात्मक बना पर केश किया गया।


द टेलीग्राफ का स्क्रीनशॉट

जी हाँ, यह वही टेलीग्राफ है, जो अपनी कथित क्रिएटिव हेडलाइन और बड़े मुद्दों को निर्भीक होकर समाज के सामने लाने का दंभ भरता है, उसे यह घटना बेहद सामान्य लगी, तभी तो उसने इसे पहले की जगह तीसरे पेज पर जगह दी है। अगर यह घटना किसी ऐसी पार्टी विशेष से जुड़ी होती, जिसकी नीतियाँ समाचार पत्र के एजेंडे के खिलाफ होती तो शायद इसे पहले पेज पर स्थान मिल सकता था।

इसके अलावा अंग्रेजी समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ इंडिया‘ और ‘द हिंदू’ ने सिंघु बॉर्डर की घटना को प्रथम पेज पर स्थान देते हुए इसे लीड स्टोरी प्रकाशित किया है। बात करें दक्षिण भारतीय लीडिंग समाचार पत्र की तो Deccan chronicle ने भी इस दर्दनाक घटना को पहले पेज पर स्थान दिया है। भले ही उसने इसे सिंगल कॉलम में समेटने का प्रयास किया हो।

द हिंदू की खबर का स्क्रीनशॉट

वहीं, हिंदी के लीडिंग समाचार पत्रों में अमर उजाला, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर ने इसे कवर स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया है।

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट

हिंदी समाचार पत्र अमर उजाला ने सिंघु बॉर्डर की घटना का पहले पेज पर स्थान दिया है।

अमर उजाला की खबर का स्क्रीनशॉट

सिंघु बॉर्डर पर शख्स की हत्या करने का आरोप निहंग सिखों पर लगा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी उन पर ही आरोप लगाए हैं। निहंग ग्रुप ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली है। निहंगों का कहना है कि शख्स ने सरबलोह ग्रंथ के संबंध में बेअदबी करने का प्रयास किया था। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

हरियाणा के सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर लखबीर सिंह की निर्मम हत्या के बाद एक ऑडियो भी सामने आया था। जी न्यूज द्वारा शेयर की गए इस ऑडियो में दावा किया गया है कि ये ऑडियो लखबीर के आखिरी क्षणों का है, जहाँ वो मरते-मरते निहंग सिखों से दया की भीख माँग रहा था।

बता दें कि लखबीर के साथ हुई यह घटना शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) सुबह की है। हत्या को आंदोलन के मुख्य मंच से 100 मीटर की दूरी पर अंजाम दिया गया था। इस घटना के बाद पुलिस में दर्ज हुई एफआईआर को ऑपइंडिया ने एक्सेस किया था। इसमें इस बात का उल्लेख है कि लटके मिले व्यक्ति के सुबह 5 बजे के करीब हाथ पाँव काटे गए। जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो लखबीर का शव बैरिकेड से लटका मिला। उसके शरीर पर बस अंडरगार्मेंट थे। स्थानीय लोगों ने जानकारी दी कि ये करतूत निहंगों की है, जिन्होंने बाद में पुलिस की जाँच में सहयोग नहीं किया और शव को बैरिकेड से उतारने से भी मना कर दिया।

मुस्लिम भीड़ ने पार्थ दास के शरीर से नोचे अंग, नमाज के बाद बांग्लादेश में इस्लामी आतंक

नोट: यह रिपोर्ट नई सूचनाओं के आधार पर अपडेट की गई है।

बांग्लादेश के नोआखाली इलाके में जुमे की नमाज के बाद 200 कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के इस्कॉन मंदिर पर हमला कर इस्कॉन श्रद्धालु पार्थ दास की बर्बरता से हत्या कर दी। इस्कॉन ने अपने बयान में बताया कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब में तैरता मिला। वहीं इस्‍कॉन से जुड़े राधारमण दास ने ट्वीट कर बताया कि पार्थ को बुरी तरह से पीटा गया था कि जब उनका शव मिला तो शरीर के अंदर के हिस्से गायब थे। 

रामधरण दास के अनुसार, पार्थ केवल 25 साल के थे और कल से गायब थे। आज कुछ समय पहले उनका शव मंदिर के पास तालाब में मिला। उनके शरीर से अंग निकाल लिए गए थे। इससे पहले भीड़ द्वारा दो साधुओं की हत्या की बात सामने आई थी। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आश्वासन दिया था कि वो उपद्रवियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई करेंगे। हालाँकि जानकारी के मुताबिक, देश के विभिन्न इलाकों में हिंसा अब भी जारी है। कट्टरपंथी कुरान के अपमान का आरोप लगाकर हिंदुओं को मार रहे हैं, उनके धार्मिक स्थलों पर, देवी-देवताओं की मूर्ति पर हमले हो रहे है और घरों को आग के हवाले किया जा रहा है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर फैली जानकारी के अनुसार, कोमिला शहर में नानुआर दिघी झील के पास एक दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान को कथित तौर पर अपवित्र किया गया था। इसी के बाद कट्टरपंथियों की भीड़ ने चांदपुर के हाजीगंज, चट्टोग्राम के बंशखली और कॉक्स बाजार के पेकुआ में हिंदू मंदिरों और पांडालों पर हमला किया था। कुछ जगह ये बात भी कही जा रही है कि कुरान का अपमान नहीं हुआ, कट्टरपंथी सिर्फ हिंदुओं को मारने के लिए कहानी गढ़ रहे हैं।

सिर्फ इस्कॉन मंदिर की बात करें तो वहाँ 500 के करीब दंगाइयों ने इकट्ठा होकर मंदिर में तोड़फोड़ की। शुरुआत में आई सूचना के आधार पर श्रद्धालुओं के साथ भी मारपीट हुई और रेप जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया गया। इस्कॉन बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को ट्वीट कर एक रेप की जानकारी दी, जो चांदपुर के हाजीगंज का मामला है। वहाँ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पूरे हिंदू परिवार का बलात्कार किया। पहले कट्टरपंथियों ने माँ का रेप किया, फिर उसकी बेटी का और फिर भतीजी का जो कि केवल 10 साल की थी। हालाँकि बाद में यह सूचना एक अफवाह के तौर पर सामने आई।

बांग्लादेश के एक रिपोर्ट के हवाले से इस पूरी घटना से इनकार किया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाजीगंज उपजिला को लेकर फिर से अफवाहें फैल रही हैं। शनिवार सुबह से ही देश-विदेश में कई सोशल मीडिया के जरिए हिंदू समुदाय के एक माँ-बहन और दस साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की खबर फैलाई जा रही है। बच्ची मर चुकी है। जबकि हाजीगंज उपजिला में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

फैक्टवॉच ने चाँदपुर के स्थानीय अख़बार ‘popularbd.news‘ के रिपोर्ट के हवाले से पाया कि हाजीगंज में हिंदू समुदाय के खिलाफ बलात्कार की पूरी घटना को अफवाह बताया गया था। पॉपुलरबीडीन्यूज की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाजीगंज थाना प्रभारी हरुनूर राशिद और बांग्लादेश पूजा उदयपन परिषद हाजीगंज उपजिला के अध्यक्ष बाबू रूहिदास बानिक ने भी इस जानकारी की पुष्टि की।

ज्ञात हो कि इससे पहले दुर्गा पूजा के पंडालों पर हमले की खबरें बांग्लादेश से लगातार आ रही थीं। 10 अक्टूबर 2021 को बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक मंदिर पर हमला कर उसमें तोड़फोड़ की थी। इस्लामी चरमपंथियों ने श्री श्मशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया था। बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने घटना की जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “हमला सड़क पर उस समय हुआ जब चटगाँव के कोतवाली में पूजा मंडप में माँ दुर्गा की मूर्ति को प्रवेश कराया जा रहा था। पुलिस ने एक को गिरफ्तार किया है। चटगाँव में कोतवाली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।” 

हमीद अंसारी की परचून की दुकान… बेचता था चरस… UP की शाहजहाँपुर पुलिस ने ₹1 करोड़ 80 लाख की ड्रग्स के साथ दबोचा

नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान में UP की शाहजहाँपुर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। थाना तिलहर पुलिस ने अन्तरराष्ट्रीय बाजार में 1 करोड़ 80 लाख कीमत की चरस को बरामद किया है। पुलिस ने इसके तस्कर हमीद अंसारी को भी गिरफ्तार कर के जेल भेजा है।

शाहजहाँपुर पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार यह गिरफ्तारी 15 अक्टूबर 2021 को सुबह के समय की गई है। जिले में मादक पदार्थों की रोकथाम व मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध चल रहे अभियान में तिलहर पुलिस को मुखबिर द्वारा आरोपित हमीद की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी करते हुए हमीद को 900 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार हमीद के पास से बरामद हुई चरस ‘फाइन क्वालिटी’ की बताई जा रही है। हमीद को FIR संख्या 810/2021 के तहत 8/17 NDPS एक्ट के अंतर्गत जेल भेजा गया। आरोपित हमीद अंसारी के पिता का नाम इतवारी है, जो मोहल्ला नजरपुर, थाना तिलहर जिला शाहजहाँपुर का रहने वाला है।

पुलिस पूछताछ में आरोपित हमीद अंसारी ने बताया कि चरस की तस्करी नेपाल से की जाती है। उसने खुद UP के पीलीभीत स्थित बीसलपुर से चरस खरीदने की बात स्वीकारी है। गिरफ्तारी के समय वह वहीं से चरस खरीद कर ला रहा था। हमीद ने बताया कि वो अपनी परचून की दुकान की आड़ में चरस की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर महँगे दामों पर बेचता था।

पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी गहनता से जाँच कर रही है। हमीद के पूरे नेटवर्क को खँगाला जा रहा है। इस गिरफ्तारी पर SP शाहजहाँपुर का बयान आप ऊपर के ट्वीट में है।

खुले में सड़क पर नमाज पढ़ने से परेशान हिंदू, गुरुग्राम में लगातार चौथे सप्ताह भजन-कीर्तन कर किया विरोध प्रदर्शन

हरियाणा के गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा करने के खिलाफ पिछले महीने (सितंबर 2021) से विरोध प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार (15 अक्टूबर, 2021) को गुरुग्राम सेक्टर-47 में स्थानीय हिंदू लोगों ने लगातार चौथे सप्ताह भजन-कीर्तन कर प्रदर्शन किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौके पर पहुँचे पुलिस बल और अधिकारियों ने विरोध करने वालों को समझाने का प्रयास किया। इसको लेकर स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने आरोप लगाया कि हमसे वादा किया गया था कि दस दिन में इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं किया गया।

लोगों का कहना है कि यह सब प्रशासन की रजामंदी से हो रहा है, नहीं तो इसका समाधान अभी तक हो चुका होता। साथ ही उन्होंंने यह भी कहा कि जब तक खुले में नमाज पढ़ने पर रोक नहीं लगाई जाती, तब तक यह विरोध जारी रहेगा। वहीं, इस मामले को लेकर एसीपी अमन यादव का कहना है कि नमाज के लिए वैकल्पिक जगह तलाशने समेत समाधान के प्रयास जारी हैं।

बताया जा रहा है कि सेक्टर-47 के आरडब्ल्यूए प्रधान सुनील यादव ने खुले में नमाज पढ़ने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा करने से माहौल खराब हो रहा है। इसके लिए मस्जिद बनी हुई हैं, वहाँ जाने में क्या दिक्कत है? इसके साथ ही उन्होंंने प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे नहीं चाहते कि ये सब रुके। खुले में नमाज को रोका जा सकता है, लेकिन इसे इतने दिनों बाद भी नहीं रोका गया। इससे लोगों में काफी आक्रोश है। स्थानीय लोग हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में हिंदू महिलाएँ भी शामिल हैं। उन्होंने नवरात्री में माता के भजन गाकर और कीर्तन करके इसका विरोध जताया।

खाली जमीन का मतलब ये नहीं कि कोई भी कब्जा कर ले

9 अक्टूबर को गुरुग्राम सेक्टर-47 की हिंदू महिलाओं ने नमाज का विरोध करते हुए भजन-कीर्तन और आरती की थी। इसके बावजूद वहाँ जमा हुए मुस्लिमों ने नमाज अदा की। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। सेक्टर-47 की एक महिला ने कहा था, ”जब तक यहाँ खुले में हर शुक्रवार को नमाज अदा करना बंद नहीं होता है तब तक वह भजन और आरती करना जारी रखेंगी।” उन्होंने आगे कहा, ”खाली जमीन का मतलब यह नहीं है कि कुछ लोग उस पर कब्जा कर सकते हैं। क्या वे हमें इस जमीन पर कुछ भी निर्माण करने देंगे? जवाब है- नहीं।” विरोध में शामिल हुई एक अन्य महिला ने कहा था कि वह किसी मजहब का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगह पर नमाज का विरोध करने के लिए आई है।

‘सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दें क्या?’

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स में भी काफी आक्रोश देखा गया था। गुरुग्राम पुलिस द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने को जायज ठहराता देख यूजर भड़क गए और पूछने लगे कि आखिर लोगों के विरोध को वो कैसे नकार सकते हैं और कैसे चलती सड़क पर नमाज पढ़ने को जायज कहा जा सकता है। एक यूजर ने कहा, “इस्लामी देशों में भी सार्वजनिक संपत्ति पर नमाज पढ़ना हराम है।” यूजर बोला, “नमाज पढ़ना आस्था की बात है, जिसे मस्जिद जैसी जगह पर अदा किया जाना चाहिए। इसलिए इन लोगों को समझाएँ कि वे एक पवित्र अभ्यास को अपवित्र न करें।”

वहीं, स्थानीय लोगों ने कहा कि क्यों नमाज को मस्जिद में बैठ कर नहीं पढ़ा जा सकता। उनका सवाल है कि क्या आपसी सहमति से पब्लिक प्लेस पर अतिक्रमण करना सही है? और अगर इस केस में प्रशासन इतना ही ढिलाई दे रहा है तो क्या वो भी सड़कों पर बैठकर हनुमान चालीसा पढ़ें और पूजा-अर्चना करना शुरू कर दें।

‘सड़क पर नमाज हिंदू-मुस्लिम की सहमति से…’

हालाँकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने अपने बचाव में ट्वीट किया, जिसके बाद वह खुद ही फँस गई। दरअसल, पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा था, ”पब्लिक प्लेस पर नमाज हो रही है, दोनों पक्ष (हिंदू-मुस्लिम) सहमत हैं।” लेकिन सार्वजनिक जगह के मामले में पक्षों की सहमति वाला तर्क कानूनन होता तो गुरुग्राम पुलिस को अपना ट्वीट डिलीट नहीं करना पड़ता।

गुरुग्राम पुलिस का ट्वीट, जिसे उसने डिलीट कर दिया था

गुरुग्राम में नमाज को लेकर शुरू हुआ विवाद

गौरतलब है कि पिछले म​हीने 26 सितंबर को गुरुग्राम के सेक्टर-47 में रहने वाले लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में दिखाया गया था कि स्थानीय लोग अपने पड़ोस में मुस्लिमों द्वारा खुले में सड़कों पर नमाज अदा करने से बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने इस दौरान नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हुए मुस्लिमों का विरोध भी किया और उन पर कानून-व्यवस्था तोड़ने का आरोप लगाया था।

सार्वजनिक स्थल पर नमाज का विरोध करने वाले स्थानीय निवासियों में से एक ने कहा था, “जिस तरह से मेरठ की लड़की को मारा गया और फरीदाबाद की लड़की को मौत के घाट उतार दिया गया, कहीं ये सब भविष्य में हमारी बेटियों का साथ भी ना हो जाए।” उन्होंने कहा, “पुलिस कुछ नहीं कर रही है, क्योंकि उनके पास हमारे खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश है।”

इंग्लैंड के सांसद डेविड एमेस की बार-बार चाकू घोंप कर हत्या, इस्लामी आतंकी ने चर्च में घुस कर किया हमला

इंग्लैंड में सांसद डेविड एमेस (David Amess) की चाकू घोंप कर निर्दयता से हत्या कर दी गई है। 69 वर्षीय डेविड एमेस कंजर्वेटिव पार्टी के साउथएंड वेस्ट से 1997 से लगातार सांसद रहे हैं। मृत सांसद इंग्लैंड के वर्तमान प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के करीबियों में गिने जाते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना शुक्रवार देर रात (15 अक्टूबर 2021) की बताई जा रही है। डेविड एमेस की हत्या लेह-ऑन-सी के एक चर्च में कई बार चाकू घोंप कर की गई। स्थानीय पुलिस ने इस घटना को आंतकी कृत्य बताया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया 25 वर्षीय हमलावर इस्लामी चरमपंथ से संबंधित है।

इस घटना की जांच काउंटर टेररिज़्म कमांड कर रहा है। हमलावर ब्रिटेन का ही नागरिक बताया जा रहा है। जाँच एजेंसियां लंदन में 2 अलग-अलग ठिकानों की तलाशी ले रही हैं।

इस घटना पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दुःख जताया है। बोरिस जॉनसन ने ट्वीट कर के लिखा है – “सर डेविड एमेस के निधन से हम सभी दुःखी और सदमे में हैं। वो राजनीति में सबसे दयालु और सबसे सज्जन लोगों में से एक थे।”

इसी घटना पर लेबर पार्टी के नेता कीर स्टॉर्मर ने भी दुःख जताया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है – “यह भयानक और बेहद चौंकाने वाली खबर है। मैं सर डेविड, उनके परिवार और उनके कर्मचारियों के बारे में सोच रहा हूँ।”

इसी घटना पर इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव नेता डेविड कैमरून ने भी दुःख जताया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है – “ले-ऑन-सी से बहुत ही चिंताजनक और भयभीत करने वाला समाचार आ रहा है। मेरी संवेदना सर डेविड एमेस और उनके परिवार के साथ है।”

ब्रिटेन के सांसदों को पुलिस सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन डेविड एमेस को ऐसी कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं थी। वो अपनी बैठकों के साथ आने वाले सम्मेलनों की भी जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया करते थे। इस जानकारी में उनके कार्यक्रमों के दिन और समय आदि का पूरा विवरण होता था।