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‘देश में पर्याप्त कोयला भंडार, बिजली संकट की बातें भ्रामक’: भारत सरकार ने बताया, सिसोदिया ने कहा था – काटनी पड़ेगी बिजली

देश के विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी और उसको ले कर आने वाले ऊर्जा संकट की वायरल होती खबरों को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह और केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आधारहीन बताते हुए कहा है कि कोयले का स्टॉक पर्याप्त है और विद्युत सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी।

भ्रामक खबरों के खंडन के रूप में कोयला मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार है जो बिजली संयंत्रों की मांग पूरी करने के लिये काफी है। इसी के साथ कोयला मंत्रालय ने कहा कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की कोई भी खबर पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है जिस पर ध्यान न देने की अपील भी की गई।

कोयला मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार इस वर्ष कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा बिजली सेक्टर को 255 मीट्रिक टन से अधिक कोयले की आपूर्ति हुई है। इसी के साथ अन्य स्रोतों से कुल कोयला आपूर्ति में से बिजली सेक्टर को मौजूदा आपूर्ति 14 लाख टन प्रतिदिन से अधिक है जिसकी आपूर्ति इस माह के अंत तक बढ़ा कर कोल इंडिया लिमिटेड 16 लाख टन प्रतिदिन से अधिक कर देगा।

इसी क्रम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने आधिकारिक बैठक के बाद कहा कि इस तरह की खबरें निराधार हैं क्योंकि ना तो ऐसा संकट कभी था और न ही आगे होगा. उन्होंने कहा कि विद्युत संयंत्रों के पास वर्तमान में चार दिन से ज़्यादा का कोयले का औसतन स्टॉक है और यह स्टॉक हमारे पास प्रतिदिन आता है।

इस पूरे मामले को तूल तब मिला था जब दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि दिल्ली में अगर 24 घंटे का स्टॉक बचा तो हमें भी पावर कट प्लान करना पड़ेगा। इसी के साथ सिसोदिया ने कहा था कि भाजपा से देश नहीं चल पा रहा है और वो इस संकट से भी निकल कर भागने का रास्ता खोज रही है।

मनीष सिसोदिया के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा कि दिल्ली की आवश्यकता के अनुसार बिजली सप्लाई की जा रही है। उनके अनुसार ये अफवाह इसलिए फैली क्योंकि गेल ने दिल्ली के डिस्कॉम को एक मैसेज भेज दिया कि वो बवाना के गैस स्टेशन को गैस देने की कार्रवाई एक या दो दिन बाद बंद करेगा।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के अनुसार इस मैसेज को इसलिए भेजा गया था क्योंकि गेल का अनुबंध खत्म हो रहा था। इस बैठक में गेल के भी सीएमडी भी आए हुए थे जिनसे अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में भी गैस स्टेशन को जरूरत के मुताबिक गैस देते रहने के लिए कहा गया है।

इस मामले में हो रही राजनीति को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि दुर्भाग्य से कांग्रेस पार्टी के पास विचार खत्म हो गए हैं। उनके पास वोट खत्म हो रहे हैं और इसलिए उनके पास विचार भी खत्म हो रहे हैं।

प्रार्थना की आड़ में 5 साल से चल रहा था ईसाई धर्मांतरण का खेल, पादरी अब्राहम समेत 50 हिरासत में: गरीबों को बनाया निशाना

उत्तर प्रदेश के मऊ में रविवार (10 अक्टूबर 2021) को अवैध धर्मांतरण मामले में 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया। ईसाई मिशनरी पर प्रार्थना की आड़ में लोगों को बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन करने के आरोप लगाए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मऊ के सहादतपुरा मोहल्ले में रोडवेज के पीछे एक घर में पिछले 5 वर्षों से प्रार्थना सभा के नाम पर धर्मांतरण की साजिश रच रहे लोगों को आज हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों ने बेनकाब कर दिया। मौके पर पहुँची पुलिस ने प्रार्थना सभा में शामिल पादरी अब्राहम सहित मकान मालिक और लगभग 50 महिलाओं-पुरुषों को हिरासत में ले लिया। सभी को कोतवाली परिसर में लाकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमें सूचना मिली है कि एक व्यक्ति ने अपने घर में ईसाई धर्म के लोगों को बुलाकर उन्हें दूसरा धर्म अपनाने के लिए कहा। इस मामले में FIR दर्ज़ करेंगे। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।”

बताया जा रहा है कि सहादतपुरा स्थित विजेंद्र राजभर के मकान में पादरी अब्राहम करीब 5 सालों से प्रार्थना सभा आयोजित कर रहा था। धीरे-धीरे यहाँ लोगों की संख्या बढ़ने लगी। इसकी सूचना जब हिंदू संगठनों तक पहुँची, तो उन्होंने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। हिंदू जागरण मंच के जिला प्रभारी भानु प्रताप सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों का आरोप है कि यहाँ लोगों की बीमारियाँ दूर करने के लिए न केवल प्रार्थना, बल्कि धर्मांतरण की साजिश रची जा रही थी।

उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे यहाँ आसपास के गाँवों और कस्बे से लोग आने लगे थे। ये ज्यादा पढ़े-लिखे लोग नहीं थे, जिसकी वजह से ईसाई मिशनरी के झाँसे में आ गए। ईसाई धर्म से जुड़े लोग इन्हें आस्था एवं विश्वास के नाम पर गुमराह करते थे।

सीओ धनंजय मिश्र ने बताया कि धर्म परिवर्तन कराने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। धर्मांतरण की पुष्टि होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पादरी अब्राहम का कहना है कि वहाँ किसी को जबरन नहीं बुलाया जाता था। लोग अपनी मर्जी से आते थे। यहाँ उनकी बीमारी दूर करने के लिए प्रार्थना की जाती थी।

‘उसने सिर हिलाया…मेरे पूरे चेहरे पर चुम्मा लिया’ : रेहाना पंडित के साथ लिपलॉक शेयर करने के बाद जीशान खान का खुलासा

बिग बॉस ओटीटी का हिस्सा रहे जीशान खान ने हाल में अपने से उम्र में 11 साल बड़ी एक्ट्रेस रेहाना पंडित के साथ अपने रिश्ते को ऑफिशियल किया था। लिपलॉक की तस्वीर शेयर कर जीशान ने बताया था कि उनकी और रेहाना पंडित की प्रेम कहानी फेयरीटेल्स जैसी है। अब इसी रिश्ते से जुड़ी कहानी मीडिया के सामने रखते हुए उन्होंने बताया कि आखिर पहली बार क्या हुआ था जब उन्होंने रेहाना से अपने प्रेम का इजहार किया था।

अंग्रेजी वेबसाइट जूम डिजीटल के बाय इनवाइट ओनली में जीशान ने बताया कि रेहाना पंडित ने पहली बार में उन्हें उनके प्रपोजल का जवाब नहीं दिया था। लेकिन अगले ही दिन उनके घर पहुँचकर उनके पूरे मुँह को चूमते हुए ‘आई लव यू’ कहा था।

जीशान के अनुसार, वो और रेहाना पहले अच्छे दोस्त थे, इसलिए उन्हें डर था कि प्रपोज करने के कारण बात बिगड़ सकती है और जो समय साथ बिताया है उसकी यादें और सारी खुशियाँ भी खत्म हो जाएगी। उनके मुताबिक वो खुद को रोकना चाहते थे लेकिन एक दिन फिल्म देखने के दौरान उन्होंने अपने प्यार का इजहार कर दिया। 

उन्होंने रेहाना की ओर देख बोला, “तुम्हें पता है क्या? मैं तुमसे प्यार करता हूँ। और वह मुझे देखती है और वह थोड़ा सिर हिलाती है।” जीशान के अनुसार, इसके बाद उन्होंने खुद को मन ही मन बेवकूफ कहा और सोचा कि उन्हें दिल की नहीं सुननी चाहिए थी। एक्टर के अनुसार, रेहाना ने उस समय उन्हें नजरअंदाज किया लेकिन अगले ही दिन आकर पूरे मुँह पर चुम्मा लेने लगीं।

वह कहते हैं, “अगले दिन, मैं सुबह उठा और कोई घंटी बजा रहा था। मैं दरवाजा खोला और उस समय रेहाना थी। मैंने उससे कहा कि अंदर आओ। मैं अभी उठा, तुमने मुझे फोन क्यों नहीं किया? और वह बस अंदर आती है और मेरे पूरे चेहरे पर चुम्मा लेने लगती है और कहती है आई लव यू।”

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह जीशान ने रेहाना के साथ अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। अपनी तस्वीर के साथ जीशान ने पोस्ट भी डाला था जिसमें उन्होंने खुशी जाहिर की थी कि वो रेहाना को पाकर कितने खुश हैं और चाहते हैं कि हर कोई उनके प्यार को महसूस करें।

बता दें कि जीशान ने जूम डिजीटल के बाय इनवाइट ओनली में कास्टिंग काउच के अनुभव का भी खुलासा किया और बताया कि कैसे एक नामी प्रोडक्शन हाउस के डायरेक्टर ने उन्हें मीटिंग के लिए बुलाकर कपड़े उतारने को कहा था। लेकिन जीशान इस चीज को समझ गए थे और उन्होंने कहा था कि वो ऑडिशन देकर काम करना पसंद करेंगे। इसके बाद डायरेक्टर ने उनके सामने कई नाम लिए और समझाया कि कैसे उन सबकी सफलता के पीछे वो जिम्मेदार थे लेकिन जीशान ने समझौता करने से मना कर दिया।

‘हिंदू साहित्य में महिलाओं से भेदभाव, मैंने 80 साल के दादाजी को बताया: ‘यूथ की आवाज’ ने रामायण के अपमान पर माँगी माफी

मीडिया पोर्टल ‘यूथ की आवाज़ (Youth Ki Awaaz)’ ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें रामायण व अन्य हिन्दू साहित्य में महिलाओं के साथ भेदभाव किए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद ‘हिन्दू आईटी सेल (Hindu IT Cell)’ ने उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। लेकिन, अब YKA ने न सिर्फ अपनी करतूतों के लिए माफ़ी माँगी है, बल्कि उस लेख को भी हटा दिया है।

जिस लेख को लेकर ये बवाल हो रहा है, उसे ‘यूथ की आवाज’ ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर भी डाला था। सका शीर्षक था, “मैंने अपने 80 साल के दादा को हिंदू साहित्य में लिंगभेद (Sexism) दिखाया।” इस लेख को मृत्तिका मलिक ने लिखा था। साथ ही इसमें रामानंद सागर की धारावाहिक ‘रामायण’ के राम-सीता की तस्वीर भी लगाई गई थी। लेकिन, अब साइट और सोशल मीडिया से इसे हटा दिया गया है।

‘हिंदू आईटी सेल’ ने अपने बयान में कहा है कि चूँकि अब YKA ने माफी माँग ली है, इसीलिए उनके खिलाफ कानूनी रास्ता नहीं अपनाया जाएगा। संगठन ने कहा कि हमारा संदेश स्पष्ट है – हम ऐसी किसी भी एक्टिविज्म को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता हो या फिर हमारे धर्म का मजाक उड़ाता हो। ‘हिंदू आईटी सेल’ ने इसे हटाने के लिए YKA को 5 घंटे का समय दिया था।

‘यूथ की आवाज़’ ने इस पर सफाई देते हुए कहा, “आईटी एक्ट का अनुच्छेद-79 के तहत ‘यूथ की आवाज’ सिर्फ एक माध्यम के रूप में कार्य करता है। ये एक ओपन प्लेटफॉर्म है, जहाँ लोग खुद ही अपना कंटेन्ट प्रकाशित करते हैं। हम समझ रहे हैं कि इस पोस्ट से आपकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। हम इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल्स से इसे वापस लेते हैं। धन्यवाद।” इसके बाद ये पोस्ट डिलीट कर दी गई।

‘यूथ की आवाज’ द्वारा माफी माँगने के बाद ‘हिंदू आईटी सेल’ के संस्थापक सदस्य अक्षित सिंह ने कहा कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का चोला ओढ़ कर किए जाने वाले इस तरह के एक्टिविज्म को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन के संस्थापक रमेश सोलंकी और विकास पांडेय ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारी भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।

‘इस्लाम में बुतपरस्ती गुनाह तो गरबा में क्यों आते हैं?’: रतलाम में VHP ने गरबा पांडालों में ‘गैर-हिंदू का प्रवेश वर्जित’ के पोस्टर लगाए

हिंदुओं का पवित्र त्योहार नवरात्रि चल रहा है। इस दौरान देश के कई हिस्सों में गरबा का आयोजन किया जाता है। हालाँकि, पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें दूसरे समुदाय के लोगों इन कार्यक्रमों में घुस जाते हैं और वहाँ हिंदू लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और लव जिहाद को अंजाम देते हैं। इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के रतलाम में इस बार नवरात्रि के मौके पर गरबा पांडालों में गैर-हिंदुओं को घुसने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ये कहना है विश्व हिंदू परिषद के जिलामंत्री चंदन शर्मा का।

दरअसल, रतलाम जिले के दुर्गा पांडालों में विश्व हिंदू परिषद ने ‘गैर-हिंदू का प्रवेश वर्जित’ वाले पोस्टर चिपका रखे हैं। इसको लेकर विहिप के धर्म प्रसार आयाम के कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि गैर-हिंदू लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं में हिंदू रिवाजों को शामिल नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें गरबा पांडालों में आने का हक नहीं है।

विहिप धर्म प्रसार के जिलामंत्री चंदन शर्मा ने कहा, “जैसा कि आप सभी को पता है कि धर्म विशेष में बुतपरस्ती गुनाह है। अगर बुतपरस्ती उनके धर्म में गुनाह है तो वे गरबा में वो क्यों आते हैं? इतिहास में झाँक कर देखें तो हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया है। इसलिए अगर उन्हें सच में गरबा और मूर्ति पूजा से प्रेम है तो अपने घर की बहन-बेटियों को इन कार्यक्रमों में क्यों नहीं भेजते?”

विहिप नेता ने आगे कहा कि रतलाम की हर वो जगह, जहाँ गरबा हो रहा है, वहाँ इस तरह के पोस्ट लगाए गए हैं। इसके अलावा, ये पोस्टर ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगाए जाएँगे। यह पूछे जाने पर कि कैसे गैर-हिंदुओं की पहचान की जाएगी तो इस पर उन्होंने बताया कि जैसे कश्मीर में हिंदू शिक्षकों को आइडी देखकर मारा गया था, उसी तरह हम आईडी देखकर उनकी पहचान करेंगे और इसकी जानकारी प्रशासन को देंगे। इसमें कोई दो राय नहीं कि ऐसे लोग अपनी पहचान को छुपाकर आते हैं, लेकिन हम लोग पूरी कोशिश करेंगें उन्हें रोकने की। विहिप नेता के मुताबिक, इस तरह की घटनाओं के कारण लव जिहाद की घटनाएँ बढ़ीं हैं।

प्रशासन अलर्ट

गौरतलब है कि बीते कुछ सालों में नवरात्रि के दौरान इस तरह की घटनाओं में इजाफा देखने को मिला है। इसलिए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। खुफिया विभाग भी नजर बनाए हुए है।

अजाबुल ने राजेश बनकर विधवा सबिता से निकाह किया, बच्चों सहित महिला का धर्मांतरण कराने के बाद छोड़कर भागा

झारखंड के गोड्डा से धर्मांतरण का मामला सामने आया है। ए​क विधवा महिला ने आरोप लगाया है कि अजाबुल नाम के एक मुस्लिम शख्स ने राजेश साह बनकर पहले उसे अपने प्‍यार के जाल में फँसाया फिर उससे निकाह कर लिया। मुस्लिम होने का खुलासा होने के बाद अजाबुल बच्चों सहित महिला का धर्मांतरण करा दिया। महिला ने बताया कि इसके बाद से अजाबुल उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है और न्‍याय की गुहार लगाई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधवा की पहचान सबिता के रूप में हुई है, जो मूलत: बिहार की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि पंजाब में रह रही 2 बच्चों की माँ सबिता को गोड्डा के ठाकुरगंगटी के इटावा गाँव के शादीशुदा अजाबुल ने राजेश बनकर अपने प्यार के जाल में फँसाया था। निकाह के बाद उसे पता चला कि जिससे वह प्यार करती है, वह राजेश नहीं बल्कि अजाबुल है।

हालाँकि, इसके बावजूद उसने उसे नहीं छोड़ा और अपने बच्चों की खातिर इस्लाम उसे अपना लिया, ताकि उसके दोनों बच्‍चों को बाप का नाम मिल सके। इसके चलते सबिता अपना और अपने बच्चों का धर्म परिवर्तन करा कर मुस्लिम बन गई। अब उनका नया नाम अफसाना ​है।

सबिता उर्फ अफसाना ने बताया कि अजाबुल को उससे नहीं, बल्कि उसके बैंक अकाउंट में रखे 5 लाख रुपए से प्यार था। इसे हासिल करने के लिए वह साल 2008 से लगा हुआ था। सबिता ने आरोप लगाया कि पैसा खत्म होने के साथ ही अजाबुल का प्यार भी खत्म हो गया। इसके बाद उसने मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। आरोप है कि अजाबुल दिल्ली में सबिता उर्फ अफसाना को छोड़ कर अपने घर भाग आया। सबिता ने पुलिस से न्‍याय की गुहार लगाई, उसके बाद पुलिस ने मामले में त्‍वरित कार्रवाई करते हुए अजाबुल को जेल भेज दिया है।

धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार मौलाना कलीम ने नोएडा सहित कई शहरों में खरीदी जमीनें, जो देखता था पूरा धंधा, उसे तलाश रही ATS

उत्तर प्रदेश के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) द्वारा लोगों का इस्लाम में धर्मान्तरण कराने के मामले में गिरफ्तार किए गए मौलाना कलीम सिद्दीकी की एक और करतूत सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्दीकी ने नोएडा, मुजफ्फरनगर समेत कई जगहों पर जमीन खरीदा था। बाद में उसे कम दाम में अपने ही करीबियों को बेच दिया। इस जमीन को उसने ट्रस्ट के नाम पर खरीदा था।

दरअसल, धर्मान्तरण रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए मौलाना कलीम सिद्दीकी की संपत्तियों की जाँच भी एटीएस कर रही है। जैसे-जैसे एटीएस की जाँच का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे खुलासे हो रहे हैं। इसी तरह से मुजफ्फरनगर में कलीम सिद्दीकी ने साल 2019 में ट्रस्ट के नाम पर साढ़े 9 लाख रुपए की जमीन खरीदा था। इस जमीन को उसने इसी साल अप्रैल में 2 लाख में अपने बेटे को बेच दिया था। शेष राशि का का भुगतान किस्तों में 2024 तक करना है। इसके अलावा उसने दिल्ली, मेरठ और नोएडा में भी जमीनें खरीद रखी हैं।

इस बीच एटीएस को पता चला है कि सिद्दीकी ने नोएडा में भी एकड़ में जमीन खरीदा था। फिलहाल, उसके लेनदेन और ट्रस्ट की छानबीन शुरू कर दी गई है। मौलाना कलीम सिद्दीकी का एक और सक्रिय साथी है, जो उसके फाइनैंशियल लेनदेन का हिसाब रखता था। एटीएस लगातार उसे भी तलाश रही है। कलीम के करीबी उसको ट्रस्ट का प्रबंधक सरफराज अली ने पूछताछ में उसके बारे में खुलासा किया है। ऐसे में जाँच एजेंसी सरफराज को नए सिरे से इंटेरोगेट करना चाहती है। शुक्रवार (8 अक्टूबर 2021) को स्पेशल कोर्ट ने उसकी 6 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की थी।

गौरतलब है कि सिद्दीकी के करीबी सहयोगी माने जा रहे सरफराज अली जाफरी को इस्लामी धर्मान्तरण मामले में ATS ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को गिरफ्तार किया था। उसे अमरोहा जिले से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी पर ATS के आईजी जीके गोस्वामी ने खुलासा किया था कि मौलाना सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान सरफराज अली जाफरी के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा था, “मौलाना कलीम सिद्दीकी के ग्लोबल पीस सेंटर में जाफरी काम करता था। वह रिवर्ट, रिहैब और दावा व्हाट्सएप ग्रुप का भी मेंबर था। इसी के जरिए उसके गिरोह के लोगों ने धार्मिक नफरत फैलाने के साथ ही लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया।”

वहीं मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने 22 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया था कि मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड देता है। इसके लिए उसे विदेशों से भारी फंडिंग मिलती है।

किसानों के साथ मिल गए अब पंजाब रेजिमेंट के सैनिक, कर रहे सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन (वीडियो भी वायरल) – Fact Check

कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन करने वाले कथित किसान अपने आंदोलन का प्रचार करने के चक्कर में भारतीय सैनिकों के नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें कई जवान एक जगह इकट्ठा होकर नारेबाजी कर रहे थे। इस वीडियो को टिकरी अपडेट्स ने शेयर किया और कहा कि भारतीय सेना किसानों के साथ है। शांति प्रदर्शन के नारे भारतीय सेना अधिकारियों ने भी लगाए।

अब जिस वीडियो को लेकर टिकरी अपडेट्स ने ये दावा किया है। उसमें बहुत सारे सिख जवान व अन्य आर्मी अधिकारी खड़े हैं और सभी वाहे गुरु जी दा खालसा वाहे गुरु जी दी फतह बोल रहे हैं। इसके बाद किसान मजदूर एकता जिंदाबाद कहा जाता है। फिर सभी मौजूद लोग एक दूसरे को देख मुस्कुराते भी हैं। वीडियो को देख पता लगता है कि ये कोई आंदोलन वाला माहौल नहीं है। लेकिन फिर भी कई लोग इसे ये कहकर शेयर करते हैं कि सेना ने किसान प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि टिकरी अपडेट्स द्वारा शेयर की गई वीडियो पर मेजर मणिक एम जॉली ने रिप्लाई दिया है। उन्होंने इस वीडियो के पीछे बुनी गई कहानी को झूठा करार देते हुए बताया कि वीडियो उस समय की है जब बटालियन लद्दाख से अपने नए पीस लोकेशन पर आ रही थी। तब यूनिट मनाली से रोपड़ जा रही थी जहाँ वह अपने पुराने सैनिकों से मिलने के लिए रुकी थी। इसका किसान आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। कृपया करके राजनैतिक लाभ के लिए सेना को न बदनाम करें।

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी भारतीय सेना अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर ये कहकर शेयर हो रही है कि उसमें भारतीय सेना के जवान किसान प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं, वो गलत है।

प्रियंका गाँधी के लिए मोदी-टाटा जिगरी दोस्त: कॉन्ग्रेसी सरकार ने दिया था जहाज वाला ऑर्डर, प्रियंका घेर रहीं PM मोदी को

कॉन्ग्रेस की नजर में अब मुकेश अंबानी और गौतम अडानी के अलावा देश के एक अन्य शीर्ष उद्योगपति रतन टाटा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दोस्त’ हो गए हैं। प्रियंका गाँधी ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ‘किसान न्याय’ रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अपने लिए 16,000 करोड़ रुपए में दो एयरक्राफ्टस खरीदे थे, जबकि उन्होंने देश की ‘एयर इंडिया’ को मात्र 18,000 करोड़ रुपए में अपने ‘अरबपति दोस्तों’ को बेच दिया।

अब सबसे पहले आते हैं प्रियंका गाँधी के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अपने लिए’ एयरक्राफ्टस खरीदे, वो भी दो-दो। फरवरी 2020 के बजट भाषण में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बताया था कि ‘स्पेशल एक्स्ट्रा सेक्शन फ्लाइट (SESF)’ के लिए कुल 810.23 करोड़ रुपए अलॉट किए गए हैं, जिसके तहत दो नए एयरक्राफ्टस खरीदे जा रहे हैं। इससे पिछले वित्त वर्षों (2018-19, 17-18) में भी 4,741.85 इसके लिए अलॉट किए गए थे।

ये नए एयरक्राफ्टस ‘Boeing 777-300ER’ मॉडल के हैं, जिन्होंने 25 साल पुराने ‘Boeing 747’ को रिप्लेस किया। पहले इसी विमान का इस्तेमाल ‘एयर इंडिया’ द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए किया जाता था। ऐसे विमानों पर AI-1 या AIC001 अंकित किया जाता है, जो बताता है कि इसमें राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री हैं। नए विमानों का कुल खर्च आधिकारिक रूप से तो सामने नहीं आया, लेकिन इनमें 8458 करोड़ रुपए का खर्च आँका गया था।

अब आपको बताते हैं सबसे बड़ी बात। पहली बात तो ये कि इस विमान पर नरेंद्र मोदी के बाद बनने वाले प्रधानमंत्री भी चढ़ेंगे और रामनाथ कोविंद के बाद बनने वाले राष्ट्रपति भी, क्योंकि ये किसी व्यक्ति विशेष का विमान नहीं है बल्कि सरकारी है। दूसरी बात, इन विमानों के लिए करार UPA-1 के काल में हुआ था, जब कॉन्ग्रेस के मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। बोइंग को तब ‘एयर इंडिया’ ने 68 विमानों का ऑर्डर दिया था, जिसका ये हिस्सा था।

‘छुआछूत के कारण ही हिंदू धर्म का अस्तित्व है’: जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की प्रोफेसर श्रुति पांडेय ने इस्लाम की तारीफ की

मानवाधिकार एडवोकेट और जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की निदेशक श्रुति पांडे द्वारा शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को किए गए दावे ने विवाद खड़ा कर दिया है। श्रुति पांडेय ने कहा था कि सभी हिन्दू अस्पृश्यता (छुआछूत) का पालन करते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में श्रुति पांडे ने कहा, “लॉ स्कूल में पढ़ाने वाले मेरे प्रोफेसर उपेंद्र बख्शी कहते थे कि हर हिंदू छुआछूत का पालन करता है … जब उन्होंने शुरू में ऐसा कहा तो मैंने सोचा कि ऐसा नहीं है .. लेकिन दोस्तों यह सच है। अपने आप को ही देखिए, आप कैसे शांत और अदृश्य तरीकों से अस्पृश्यता का पालन करते हैं, जिसे हम समझ भी नहीं पाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह लिंग (जेंडर) की तरह आंतरिक है। इसलिए मेरे अनुसार हर हिंदू अस्पृश्यता का पालन करता है”। अपने प्रोफेसर का हवाला देते हुए श्रुति पांडे ने कहा कि अस्पृश्यता के कारण ही हिंदू धर्म अस्तित्व में है। जाति और हिंदुत्व के मुद्दे पर उन्होंने किसी और दिन चर्चा करने को कहा।

अपने इसी बयान में श्रुति पांडेय ने इस्लाम की तारीफ करते हुए उसके विधवा पुनर्विवाह नियमों को हिन्दू धर्म के मुकाबले सरल और सराहनीय बताया। इसी के साथ श्रुति पांडेय ने इस्लाम को गलत बताने वालों पर भी अफ़सोस जाहिर किया और कहा कि उन लोगों को इस्लाम की अच्छाइयों के बारे में जानकारी ही नहीं है।

निष्कर्ष के रूप में उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम में विधवाओं का पुनर्विवाह सामान्य सामाजिक संरचना का एक अंग है और इस्लाम ये नहीं मानता कि विधवा महिलाओं को दोबारा शादी करने का अधिकार नहीं है।

श्रुति पांडेय का वायरल होता ये वीडियो कब का है ये फिलहाल निश्चित नहीं हो पाया है। इस वीडियो को LLB के छात्र मयूरनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी के कुलपति नवीन जिंदल से लेखिका शेफाली वैद्य ने सवाल किया है कि क्या वो भी छुआछूत का पालन करते हैं और श्रुति पांडेय के विचारों से सहमत हैं ?

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर श्रुति पांडेय के बायो में लिखा गया है कि “प्रो. श्रुति पांडे जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में लीगल प्रैक्टिस की एसोसिएट प्रोफेसर और सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की निदेशक हैं। वह एक इंसान रही हैं…” ..। हालाँकि, अब वह वेबपेज हटा दिया गया है।

प्रोफेसर श्रुति पांडेय की लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफ़ाइल के अनुसार, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन करने के बाद लंदन विश्वविद्यालय से LLM की पढ़ाई की। लंदन विश्वविद्यालय से ही उन्होंने मानवाधिकार कानूनों में डिप्लोमा हासिल किया। इस से पहले वह फोर्ड फाउंडेशन में प्रोग्राम ऑफिसर रह चुकी हैं।