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12 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किए गए आशीष मिश्रा: सबूत के रूप में पुलिस को सौंपी पेन ड्राइव, पूछे गए 40 सवाल

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मोनू को गिरफ्तार कर लिया गया है 12 घंटे तक चली लंबी पूछताछ के बाद उन्हें यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। निघासन विधानसभा क्षेत्र में खासे सक्रिय रहे आशीष मिश्रा ‘मोनू’ विधानसभा टिकट के लिए भी दावेदारी ठोक रहे थे। क्राइम ब्रांच के दफ्तर में उनसे पूछताछ की गई थी।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि आशीष मिश्रा के सामने 40 सवाल रखे गए, जिनके जवाबों से पुलिस संतुष्ट नहीं है। उनके ड्राइवर अंकित दास को भी हिरासत में लिया गया है। हालाँकि, मिश्रा ने भी पेन ड्राइव में लाकर कई वीडियो पुलिस को सौंपे हैं। इसके माध्यम से उन्होंने दावा किया है कि घटना के समय वो घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। उधर लखीमपुर खीरी में स्थिति सुधरने पर इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी गई हैं।

इस दौरान लखीमपुर खीरी में स्थित भाजपा दफ्तर के बाहर कार्यकर्ता भी नाराज दिखे, जो आशीष मिश्रा से पूछताछ से आक्रोश में थे। आशीष मिश्रा का फोन भी जब्त कर लिया गया है। वहीं उनके पुलिस के समक्ष पेश होने के बाद नवजोंत सिंह सिद्धू ने भी अपना अनशन तोड़ दिया। लखीमपुर खीरी में हुई ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की हिंसा में 8 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद से ही विपक्षी दल भाजपा के विरुद्ध मुखर हैं।

बता दें कि इससे पहले मीडिया का एक वर्ग लगातार ये अफवाह फैलाने में लगा था कि आशीष मिश्रा नेपाल भाग गए हैं। पत्रकार अजीत अंजुम ने भी ट्वीट कर के लिखा था, “सुना है कि लखीमपुर खीरी का विलेन मंत्री पुत्र नेपाल भाग गया है। मोदी है तो मुमकिन है।” प्रोपेगंडा पत्रकार राना अयूब ने भी दावा किया था कि आशीष मिश्रा नेपाल भाग गए हैं। साथ ही उन्होंने धृतराष्ट्र की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो कह रहे हैं, “ये क्या हो रहा है दुर्योधन।”

बंगाल हिंसा मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई: 11 लोगों को किया गिरफ्तार, NHRC ने कहा था-‘राज्य में कानून का राज नहीं’

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर टीएमसी के गुंडों द्वारा की गई हिंसा के मामले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपितों को पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले से गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के मामले में सीबीआई ने नंदीग्राम और सीतलकुची में दो मामले दर्ज किए थे। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसी ने अलग-अलग थानों में करीब 30 से अधिक केस दर्ज की है। वहीं सीबीआई की कार्रवाई पर पूर्व अपेक्षित तरीके से राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसी पर ही आरो लगा रही हैं। उनका कहना है कि चुनाव बाद हिंसा के मामले में सीबीआई भाजपा के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्हें लगता है कि सीबीआई केवल टीएमसी के कार्यकर्ताओं को ही निशाना बना रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। साथ ही कोर्ट ने राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। इतना नहीं कम गंभीर अपराधों की जाँच के लिए कोलकाता हाई कोर्ट में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित करने का आदेश दिया था, जिसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे।

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सात सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जुलाई में 50 पेज की रिपोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट को सौंपी थी। अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आयोग ने कहा था कि राज्य में ‘कानून का शासन’ नहीं बल्कि ‘शासक का कानून’ है। इसके साथ ही राज्य प्रशासन ने जनता के बीच अपना विश्वास खो दिया है। गौरतलब है कि इसी साल 2 मई को पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएँ हुई थीं। इसके बाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के हालात जानने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की 4 सदस्यीय टीम पश्चिम बंगाल गई थी।

राजस्थान में गौ तस्करों ने पुलिस पर की फायरिंग: दो पुलिसकर्मी घायल, चार कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के भरतपुर जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में गौ तस्करों ने गुरुवार और शुक्रवार को पुलिस टीमों पर गोलियाँ चलाईं और पथराव किया। इन घटनाओं में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

भरतपुर के एसपी देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने ऑपइंडिया को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों घटनाएँ दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत हुई है। ये थाना क्षेत्र हैं- सेवार और भरतपुर टाउन पुलिस स्टेशन। एसपी बिश्नोई ने बताया, “मवेशियों के अवैध परिवहन के साथ-साथ सीकरी से नगर क्षेत्र में अंतर-राज्यीय अपराधियों की आवाजाही की सूचना मिली थी। आगे की जाँच चल रही है।”

दोनों घटनाओं में पुलिस ने चार गौ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके कब्जे से एक पिकअप वैन और बाइक (एक-एक), तीन देशी पिस्तौल, 13 जिंदा कारतूस और 10 लीटर शराब बरामद किया गया। इसके साथ ही पुलिस ने इनके कब्जे से चार गायों को मुक्त भी कराया है।

सीवर थाना मामले में शुक्रवार की रात गश्त के दौरान गाँधी नगर कॉलोनी में एक पुलिस दल पर गौ तस्करों द्वारा की गई फायरिंग और पथराव में दो आरक्षक संजय कुमार और राहुल कटारा घायल हो गए। संजय कुमार को एक गोली लगी, जबकि राहुल कटारा को पथराव में चोट लगी। दोनों खतरे से बाहर है।

इस मामले में पुलिस ने हरियाणा के उथवाड़ के रहने वाले इरशाद (36) नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अंधेरे का फायदा उठाकर चार अन्य गौ तस्कर भागने में सफल रहे। वहीं, तस्करी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पिकअप वैन से चार गायों को छुड़ा लिया गया।

सेवर थाने के प्रभारी अधिकारी अरुण चौधरी ने मीडिया को बताया कि गश्त के दौरान पुलिस की एक टीम ने गाय लदी एक पिकअप वैन को देखा। टीम ने गौ तस्करों को रोकने के लिए कहा तो उन्होंने फायरिंग कर दी। उसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को भी फायरिंग करनी पड़ी।

गुरुवार की शाम हुई दूसरी घटना में तीन गौ तस्करों ने पुलिस टीम पर 25 राउंड फायरिंग की। इसके जवाब में पुलिस ने भी सात राउंड गोलियाँ चलाईं। करीब एक घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान आम लोगों को मुठभेड़ स्थल से दूर रखना एक बड़ी चुनौती थी।

दरअसल, भरतपुर पुलिस को गौ तस्करी में शामिल कुछ अपराधियों की आवाजाही की सूचना मिली थी। डीग मेन रोड स्थित अनार देवी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सामने पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान अपराधियों की गाड़ी को आता देख पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन वे बैरिकेडिंग तोड़ दी और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एक घंटे तक चले मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अपराधियों का पीछा कर पकड़ लिया। उनमें से एक ने बचने के लिए तालाब में छलांग लगा दी, लेकिन पुलिस ने उसे भी पकड़ लिया।

इनके पास से देशी पिस्टल, शराब, जिंदा कारतूस और एक बाइक बरामद हुई है। गिरफ्तार तीनों शख्स- तौफीक, सहून और रिशाल खूंखार अपराधी हैं। इन पर राजस्थान के भरतपुर और अलवर के 15 थानों और हरियाणा के 3 थानों में दर्ज गौ तस्करी के एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं और ये इन मामलों में वांछित हैं।

भरतपुर मेवात क्षेत्र का हिस्सा है, जो राजस्थान और हरियाणा को मिलाकर बना है। मेवात क्षेत्र एक संवेदनशील क्षेत्र है, जो संगठित अपराध, मवेशी तस्करी, अवैध रोहिंग्या और पुलिस के खिलाफ हिंसा को लेकर कुख्यात है।

फरवरी 2020 में गौ तस्करों ने एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को गोली मार दी थी। घायल सब-इंस्पेक्टर गुप्त सूचना के आधार पर गौ तस्करों के खिलाफ कर्रवाई करने के लिए पहुँचे थे। इस साल अगस्त में गौ तस्करों ने फिर पुलिस पर फायरिंग की थी।

‘मेरा नाम कैप्टन तेज प्रताप यादव, उड़ाता था हवाई जहाज, वायुसेना में भी चुना गया था’: लालू के 12वीं पास बेटे का दावा

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू यादव और रबड़ी देवी के बेटे तेज प्रताप अपने बयानों और वेशभूषा के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने एक और बड़ा दावा किया है, जो उनकी शैक्षिक योग्यता से मेल नहीं खाता। हसनपुर के विधायक ने ‘छात्र जनशक्ति परिषद’ की बैठक में दावा कर दिया कि वो हवाई जहाज उड़ाया करते थे और उन्हें ‘कैप्टन’ कि पदवी भी मिली हुई थी। उन्होंने कह डाला कि उनका नाम ‘कैप्टन तेज प्रताप यादव’ है, लेकिन वो ‘कैप्टन’ लगाते नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें छोटे-छोटे हवाई जहाज उड़ाने का अनुभव है। बकौल तेज प्रताप यादव, उन्होंने भारतीय वायुसेना का न सिर्फ फॉर्म भरा था, बल्कि उन्हें चुन भी लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि ‘बिहार फ्लाइंग इंस्टीट्यूट’ में दो साल और तीन साल के अलग-अलग प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिसमें से उन्होंने दो साल वाली ट्रेनिंग ली है। बकौल तेज प्रताप, उन्होंने छोटे जहाज उड़ाए हैं। उनके इस भाषण पर समर्थकों ने तालियाँ भी बजाई।

उन्होंने बताया कि उन्हें ‘Cessna 172’ नामक हवाई जहाज उड़ाने का अनुभव है और कैप्टन शिवप्रकाश उनके इंस्ट्रक्टर थे। उन्होंने ये भी बताया कि राजनीति में आने से पहले उनकी इच्छा सेना में ही जाने की थी। NBT की खबर के अनुसार, तेज प्रताप यादव महज 12वीं पास हैं और उन्होंने कॉलेज में आगे दाखिल तो लिया था, लेकिन फेल होने के कारण आगे नहीं पढ़ पाए। फिर उन्होंने पढ़ाई ही छोड़ दी थी।

बताते चलें कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप यादव महुआ विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधायक बने थे। फिर 2015 में सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में स्वास्थ्य, जल संसाधन, पर्यावरण मंत्री बनाया गया था। हालाँकि, लगभग दो साल बाद ही ये सरकार गिर गई जब नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में वो हसनपुर सीट विधायक चुने गए।

फिलहाल तेज प्रताप यादव अपनी ही पार्टी राजद से बगावत पर उतारू हैं और उनके भाई तेजस्वी यादव से उनकी ठनी हुई है। राजद के वरिष्ठ नेता और पार्टी उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा है कि तेज प्रताप यादव पार्टी में नहीं हैं। उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न लालटेन का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं है। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप को पार्टी से निष्कासित करने का क्या सवाल है, वह तो खुद निष्कासित हो चुके हैं।

सुशांत सिंह राजपूत मामले के बाद बेनकाब हुआ बॉलीवुड का ड्रग्स कनेक्शन: नशे में डूबे फिल्म जगत का कुछ ऐसा है इतिहास

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अभी कुछ दिन पहले मुंबई की एक रेव पार्टी में ड्रग्स के इस्तेमाल का भंडाफोड़ किया है, जिसमें बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान भी शामिल थे। बॉलीवुड और ड्रग्स के बीच बहुत पुराना रिश्ता है। समय-समय पर ये रिश्ते सामने आते रहे हैं और मीडिया में सुर्खियाँ बनते रहे हैं। आर्यन खान और उनके साथियों की ड्रग्स मामले में गिरफ्तारी से पहले ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मृत्यु ने बॉलीवुड की काफी किरकिरी करवाई थी। इसी मामले के बाद बॉलीवुड में नशे के फैले जाल की कड़ियाँ एक दूसरे से जुड़ती चली गईं।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून 2020 में असामयिक मृत्यु के मामले में शुरुआती जाँच करने वाली बिहार पुलिस के तत्कालीन DGP गुप्तेश्वर पांडेय ने मुंबई पुलिस द्वारा सहयोग न मिलने का आरोप लगाया था। इसी उठापटक के बाद इस चर्चित मामले की जाँच CBI को सौंप दी गई थी। सीबीआई के साथ इस जाँच में NCB भी सहयोगी की भूमिका में है। जाँच की शुरुआत में सुशांत के पूर्व नौकर नीरज ने सुशांत सिंह को कभी-कभी गाँजा आदि का सेवन करने वाला बताया था।

बाद में सुशांत सिंह राजपूत के साथी सिद्धार्थ पिठानी को गिरफ्तार किया गया था। सिद्धार्थ पिठानी पर आरोप है कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स खरीदने में मदद की। इस मामले में सुशांत की प्रेमिका बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को भी आरोपी बनाया गया था। NCB ने कुछ व्हाट्सएप चैट के आधार पर जाँच की शुरुआत की थी। इस मामले में रिया चक्रवर्ती का भाई शोविक भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने सितम्बर 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट में रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती की जमानत का विरोध करते हुए दाखिल एफिडेविट में कहा था कि वो ड्रग सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य हैं। एनसीबी ने अपने आरोपों के समर्थन में पक्के सबूत होने की बात भी कही थी, जिसके अनुसार रिया चक्रवर्ती ने ड्रग तस्करों को पैसे पहुँचाए थे। वॉट्सऐप चैट के अलावा मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड डिस्क रिकॉर्ड का हवाला देते हुए NCB ने दावा किया था कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ना केवल ड्रग्स का सौदा करती रही थी, बल्कि इस अवैध कारोबार को फाइनेंस भी करती रही हैं।

इसी बीच नवम्बर 2020 में NCB ने ड्रग्स पैडलर्स से मिली ख़ुफ़िया जानकारी के बाद छापेमारी कर के कॉमेडियन भारती सिंह के अंधेरी, लोखंडवाला और वर्सोवा स्थित घरों में छापेमारी कर के 86.5 ग्राम गाँजा बरामद किया था। इसके बाद NCB ने भारती और उनके पति हर्ष को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले एनसीबी ने 9 नवंबर को अभिनेता अर्जुन रामपाल के भी घर छापेमारी की थी और प्रतिबंधित दवाएं बरामद की थी। इसी बरामदगी के सिलसिले में अभिनेता अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रेंड ग्रैबिएला को एनसीबी ने समन भेजा था। इस से पहले एनसीबी ने गैब्रिएला के भाई अगिसियालोस को उनके घर ड्रग्स मिलने के बाद गिरफ्तार किया था। इस प्रकरण में अभी तक अर्जुन रामपाल को क्लीन चिट नहीं मिल पाई है।

सितम्बर 2020 में NCB द्वारा गिरफ्तार ड्रग्स पैडलर करमजीत (KJ) ने स्वीकार किया था कि उसने अभिनेत्री सारा अली खान के घर दो बार कूरियर के जरिए ड्रग्स पहुँचाया था, जबकि एक अन्य अभिनेत्री श्रद्धा कपूर ने 4 बार अपनी गाड़ी में ही करमजीत से ड्रग्स लिया था। इस खुलासे के बाद एनसीबी ने सारा और श्रद्धा को समन जारी किया था। बॉलीवुड के कलाकारों तक ड्रग्स पहुँचाने वाले करमजीत को पकड़ना इतना आसान नहीं था। उस तक पहुँचने से क्रमशः करण अरोड़ा, अब्बास लखानी, जैद विलात्रा, बासित परिहार, शौविक च्रकवर्ती, दीपेश सावंत, सैमुअल मिरांडा, सूर्यदीप, दीपेश, कैजान इब्राहिम को पकड़ा गया और इस प्रकार NCB की टीम करमजीत सिंह आनंद तक पहुँच पाई, जिसने बाद में अनुज केशवानी, अंकुर अरेंजा, ड्वैन और क्रिस कोस्टा के नामों का खुलासा किया।

मुंबई को भारत की रिटेल ड्रग्स कैपिटल भी कहा जाने लगा है, क्योंकि साल 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुमान के अनुसार मुंबई और उसके आसपास हर माह लगभग 500 किलोग्राम मारिजुआना की खपत होती है। इस कारण ड्रग माफिया लगभग 500 करोड़ रुपये प्रतिमाह का कारोबार करते हैं। ड्रग्स की खरीद अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों से होती है और सप्लाई सड़क मार्ग से भारत के विभिन्न हिस्सों में।

बॉलीवुड में ड्रग्स कोई नई समस्या नहीं है। इस से पहले ड्रग्स से संबंधित मामलों में संजय दत्त, कंगना रनौत, फरदीन खान, प्रतीक बब्बर आदि के भी नाम आ चुके हैं। अभिनेता संजय दत्त को ड्रग्स रखने के केस में 1982 में 5 महीनों की जेल हुई थी। ड्रग्स की लत से उनकी हालत खराब हो गई थी और उनके पिता सुनील दत्त ने अमेरिका के रिहैब सेंटर में उनका स्पेशल ट्रीटमेंट करवाया था। वहीं, रणबीर कपूर ने खुद माना था कि उन्हें “गाँजा” पीने की आदत हो गयी थी। रियल लुक लाने के लिए उन्होंने इसका प्रयोग अपनी फिल्म रॉकस्टार के लिए भी किया था।

बॉलीवुड के एक अन्य कलाकार फरदीन खान वर्ष 2001 में कोकीन रखने के अपराध में NCB द्वारा हिरासत में लिए गए थे। उस समय उनके पिता फ़िरोज़ खान ने भी माना था कि फरदीन अपने दोस्तों के साथ कभी कभार ड्रग्स ले लेता है। फरदीन खान की कार से 9 ग्राम कोकीन बरामद किया गया था। बाद में 10 मई 2012 को फरदीन खान 20,000 रुपये के बेल बॉन्ड पर छोड़े गए थे। इसके अलावा अभिनेत्री मनीषा कोईराला, सुजैन खान का भी नाम बॉलीवुड से जुड़े ड्रग्स की लत वालों में से आता रहा।

‘समाज को बाँटो मत’: इंटरव्यू में हिन्दू-मुस्लिम कर रहे राजदीप सरदेसाई को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दिखाया आईना

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई को शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने करारा जवाब दिया। खान ने बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक के सवाल पर अपनी अस्वीकृति जाहिर करते हुए कहा कि जब भारत की बात आती है, तो इसके सभी नागरिकों को उनके धर्म की परवाह किए बिना ‘समान अधिकार’ दिए जाते हैं।

इंडिया टुडे पर इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने खान से पूछा कि वह एक भारतीय मुस्लिम के तौर पर अपनी पहचान को कैसे देखते हैं? उनके इस सवाल ने राज्यपाल को व्यथित कर दिया। फिर भी उन्होंने इसका जवाब दिया, “हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हमारी आजादी मुफ्त में नहीं आई। इसके साथ देश का विभाजन, देश का खूनी विभाजन हुआ। तब समुदायों के बीच बहुत हिंसा हुई थी … मुझे लगता है कि विभाजन इस काल्पनिक मुस्लिम प्रश्न के कारण हुआ। बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक हिंसा का कारण बना।”

राज्यपाल ने समुदाय और धर्म के आधार समाज को बाँटने की मीडिया की कोशिशों पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि भारत की आजादी के 75 साल बाद भी यह दुखद है कि मीडिया सबका साथ, सबका विकास सबका विश्वास पर चर्चा करने के बजाय विभाजनकारी भाषण दे रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “अंग्रेजों ने कभी भी भारत को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी। वे इसे हमेशा समुदायों का समूह मानते थे। लेकिन, यह संविधान नागरिकों को भारत की इकाई मानता था। अब समुदायों का सवाल कहाँ है? मेरे गाँव में आओ और एक मुस्लिम से पूछो कि यह मुस्लिम सवाल क्या है। वह भ्रमित हो जाएगा। क्योंकि उन्हें भी उन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनका सामना दूसरे समुदायों के किसानों को करना पड़ता है। सिर्फ इसलिए कि हैदराबाद में किसी ने कहा कि एक मुस्लिम सवाल है, हमने इसे गंभीरता से लिया है।”

केरल के राज्यपाल ने यह बातें दिल्ली में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दौरान ‘बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक: द बैटल ऑफ बिलॉन्गिंग’ विषय पर बोलते हुए कही। खान ने कहा कि भारतीय सभ्यता और ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत’ में किसी के धर्म के आधार पर भेदभाव की कोई अवधारणा नहीं है।

उन्होंने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए कुछ श्लोकों का हवाला देते हुए कहा, “भारतीय सभ्यता को कभी भी धर्म द्वारा परिभाषित नहीं किया गया है, अन्य सभी सभ्यताओं को या तो धर्म द्वारा परिभाषित किया गया है, ज्यादातर को धर्म द्वारा और उससे पहले भी नस्ल और भाषा द्वारा पिरभाषित किया गया।”

यह पूछे जाने पर कि क्या पिछले कुछ दशकों में भारतीय राजनीति अल्पसंख्यक तुष्टिकरण से बहुसंख्यकवाद की ओर बढ़ी है, खान ने कहा कि यह भारत का संविधान है, इसकी हजारों साल पुरानी परंपराएँ हैं, जिन्होंने कभी विभाजन और अलगाव की विचारधारा का समर्थन नहीं किया।

खान ने आगे कहा, “यह न केवल हमारा संविधान है जो लोगों को समान अधिकार देता है, बल्कि इससे भी अधिक हमारी सांस्कृतिक विरासत, भारतीय सभ्यता में धर्म के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं है। इसलिए दोनों को जोड़ना मुझे यह बेतुका लगता है।”

सैनिटेरी पैड्स में ड्रग्स छिपा कर ले गई थी मुनमुन धामेचा, सामने आया वीडियो: भाई ने कहा – सब झूठ है, वो आर्यन को नहीं जानती

‘नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)’ ने क्रूज पर चल रही रेव पार्टी से बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे के अलावा उनके दोस्त अर्बज मर्चेन्ट और मुनमुन धामेचा को भी गिरफ्तार किया था। ये भी सामने आया था कि किस तरह मुनमुन धामेचा ने अपनी सैनिटेरी पैड्स में ड्रग्स को छिपा कर रख लिया था। अब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इसे NCB ने जारी किया है।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह सैनिटेरी पैड्स में से ड्रग्स की पुड़िया निकल रही है। मुनमुन धामेचा ही नहीं, बल्कि अन्य आरोपितों ने भी ड्रग्स छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए थे। ‘कॉर्डेलिया द इम्प्रेस’ क्रूज से पकड़ी गईं मुनमुन के सैनिटेरी पैड्स से ड्रग्स पिल्स भी बरामद हुए। NCB के अनुसार, ये वीडियो तब का है जब मुनमुन धामेचा के कमरे में तलाशी ली जा रही थी

NCB ने मुनमुन के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8(c), 20(b), 27 और 35 के तहत मामला दर्ज किया है। उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में रखा गया हैं। कई पार्टियों का हिस्सा रहीं मुनमुन पेशे से मॉडल हैं। गुरु रंधावा, सुयश राय और अर्जुन रामपाल जैसी हस्तियों के साथ उन्हें देखा गया है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली मुनमुन की पढ़ाई भोपाल में हुई और 2014 से वो अपने भाई के साथ दिल्ली में रहती हैं।

उनके भाई एक प्राइवेट कंपनी में बड़े पोस्ट पर कार्यरत हैं। सागर में उनके घर पर ताला जड़ा हुआ है। इंस्टाग्राम पर उनके 29 हजार फॉलोवर्स हैं और वो अक्सर अपने शूट के विडीयोज शेयर करती रहती थीं। NCB ने पाया है कि रेव पार्टी में पैंट की सिलाई में, महिलाओं के पर्स के हैंडल में, अंडरवियर के सिलाई वाले हिस्से में और कॉलर की सिलाई में ड्रग्स छिपा-छिपा कर ले जाया गया था। ये मामला अदालत में चल रहा है।

इस वीडियो पर मुनमुन के भाई सिद्धार्थ ने ‘टाइम्स नाउ’ से कहा की ये सब झूठ है और सारे आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि मुनमुन न तो आर्यन खान को जानती हैं और न ही अरबाज मर्चेन्ट को। उन्होंने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी गिरोह के शामिल होने के आरोपों को भी झूठ करार देते हुए कहा कि ड्रग्स जमीन पर पड़ी हुई मिली, तो वो मुनमुन की नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनकी बहन के समान से कोई ड्रग्स नहीं मिला।

उधर NCP नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने छापेमारी को फर्जी करार देते हुए कहा है कि एनसीबी के अधिकारी समीर वानखेड़े और बीजेपी के बीच कुछ डील हुई है। उन्होंने वानखेड़े की कॉल डिटेल्स की जाँच की माँग की है। मलिक का आरोप है कि एनसीबी ने ऋषभ सचदेवा, प्रदीप गाबा और आमिर फर्नीचरवाला को इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उनके लिए स्थानीय और दिल्ली के बीजेपी नेताओं ने एजेंसी को कॉल किया था।

शाह फैसल नहीं बनेंगे जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल के सलाहकार, सरकारी सूत्रों ने की पुष्टि

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि नौकरशाह से राजनेता बने शाह फैसल जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के सलाहकार बनाए जा सकते हैं। मोदी सरकार के सबसे बड़े आलोचकों में से एक रहे शाह फैसल की यह प्रस्तावित नियुक्ति नरेंद्र मोदी के शासन के प्रबल समर्थक के रूप में परिवर्तित होने के बाद की गई है। हालाँकि, अब सरकारी सूत्रों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस खबर को नकार दिया है।

आईएएस टॉप करने के बाद नौकरी छोड़कर राजनेता बने शाह फैसल ने 2020 में जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस राजनीतिक पार्टी की स्थापना फैसल ने वामपंथी कॉमरेड शेहला राशिद के साथ की थी, तभी से उनके भविष्य को लेकर कई प्रकार की अटकलें लग रही थीं। कई लोगों का मानना ​​​​है कि वह प्रशासनिक सेवाओं में वापस आ सकते हैं।

अभी हाल ही में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की तारीफ की थी, जिसके बाद इस्लामवादियों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया था। जनवरी में प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की सराहना करते हुए शाह फैसल ने कहा था, “यह रविवार की सुबह एक परिवार के रूप में 1.3 बिलियन लोगों के एक साथ आने जैसा है और हर एक इंसान को सुना और उससे बात किया जाता है, हर किसी की भावनाओं को शामिल किया जाता है।” उन्होंने आगे कहा, “इस कार्यक्रम से मैंने यह समझा है कि संचार एकजुटता का निर्माण कर सकता है और एक राष्ट्र को एक परिवार की तरह बना सकता है।”

एक हफ्ते पहले शाह फैसल ने प्रधानमंत्री की वैक्सीन डिप्लोमेसी की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था, “यह सिर्फ एक टीकाकरण कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है। यह सुशासन + मानव पूँजी निर्माण + राष्ट्र-निर्माण + जगतगुरु के रूप में भारत के ओर बढ़ना है।”

हालाँकि, उनके ये बयान कट्टरपंथी इस्लामवादियों को अच्छे नहीं लगे। उन्होंने उन पर कश्मीरियों की पीठ में छुरा घोंपने और ‘बूटलिक’ करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं इस्लामियों ने पैसल को ‘संघी’ भी कहा था। इसके अलावा कई और भी अपशब्द उन्हें कहे गए।

‘तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं’: ITBP जवानों के फुरसत के क्षण का वीडियो देखा क्या? लद्दाख से अरुणाचल तक देते हैं पहरा

सोशल मीडिया पर ‘इंडियन तिब्बत सीमा बल (ITBP)’ ने अपने जवानों का ‘तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी’ गाना गाते हुए एक वीडियो डाला है, जो काफी प्यारा है। ITBP ने लिखा कि फुर्सत के पलों में जवान गाना गा रहे हैं। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि जहाँ एक ITBP अधिकारी गाना गा रहे हैं, वहीं बाकी वाद्य यंत्रों को बजा रहे हैं। गाने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है और लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं।

ऊपर वीडियो में माइक थामे गाना गाते हुए जो आपको दिख रहे हैं, वो ITBP के कॉन्स्टेबल लवली सिंह हैं। बता दें कि ‘तुझसे नाराज नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं’ गाना ‘मासूम’ फिल्म का है, जो 1983 में आई थी। एक बच्चे के इर्दगिर्द घूमती इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी मुख्य भूमिकाओं में थे। इस गाने के बोल गुलजार ने लिखे थे, जिन्हें इसके लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।

इस गाने के मेल वर्जन को अनूप घोषल और फेमल वर्जन को लता मंगेशकर ने गाया था। बता दें कि उत्तराखंड में ‘ ITBP (भारतीय-तिब्बत सीमा बल)’ के जवानों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत-चीन बॉर्डर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। वहीं लद्दाख में भी आईटीबीपी के जवानों ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर पैंगोंग त्सो के तट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। ऐसा हर साल होता है। देश के इन ऊँचे इलाकों में ITBP गजब की चुस्ती से सुरक्षा का दायित्व संभालती है।

‘JNU के बाद अब DU को हथियाने की तैयारी’: प्रोफेसर ने किया ‘मार्क्स जिहाद’ का खुलासा, केरल के छात्रों को 100% नंबर

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की जारी प्रवेश की प्रक्रिया में केरल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के छात्रों का दबदबा देखने को मिल रहा है। इसको लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राकेश कुमार पांडेय ने सवाल उठाते हुए इसे ‘मार्क्स जिहाद‘ करार दिया है।

किरोड़ीमल कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि पिछले कुछ सालों से वामपंथी-जिहादी साजिश के तहत केरल के छात्रों की डीयू में घुसपैठ करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केरल बोर्ड अपने छात्रों को 100 प्रतिशत नंबर देता है, जिससे डीयू में प्रवेश आसान हो जाता है। 5 अक्टूबर को की गई एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “एक कॉलेज को केवल 20 सीटों वाले पाठ्यक्रम में 26 विद्यार्थियों को प्रवेश देना पड़ता, क्योंकि उन सभी को केरल बोर्ड से 100 प्रतिशत अंक मिले थे। पिछले कुछ सालों से केरल बोर्ड #Marksjihad लागू कर रहा है।”

राष्ट्रीय जनतांत्रिक शिक्षक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यह प्रमुख विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की तरह हो जाएगा। उन्होंने जेएनयू पर कब्जा कर ही लिया है अब वे डीयू पर भी कब्जा करेंगे। पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “वामपंथी अपने वॉलेंटियर से एक विश्वविद्यालय को पूरी तरह पैक करने के लिए प्रवेश प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जेएनयू में दशकों तक सफलतापूर्वक ऐसा किया है।”

पांडेय ने अपनी ‘मार्क्स जिहाद’ टिप्पणी के जरिए लेफ्ट-लिबरल गैंग पर अपना गुस्सा निकाला है। वह जोर देकर कहते हैं कि इस तरह के संगठित मिशनरी जिहादी और वामपंथी एजेंडे का फैलाव डीयू को बर्बाद कर देगा। इस बीच केरल के मानव संसाधन विकास मंत्री वी शिवनकुट्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है और वामपंथी छात्र संगठन उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस बीच कूदते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मार्किंग सिस्टम को तर्कसंगत बनाने की माँग की है।

केरल के छात्रों का बढ़ रहा दबदबा

प्रोफेसर ने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से इस ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं और ये देखा जा रहा है कि केरल के छात्रों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और केरल बोर्ड से 100 प्रतिशत प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बोर्ड प्रवेश प्रक्रिया पर हावी होना चाहता है तो शत-प्रतिशत अंक देकर आसानी से किया जा सकता है। प्रोफेसर ने कहा, “मुझे लगता है कि इसके पीछे एक मकसद है। कुछ लोग हैं जो अपने वॉलेंटियर को डीयू में भेजना चाहते हैं।”

राकेश पांडेय का अपनी टिप्पणी को वापस लेने या माफी माँगने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका इशारा सिर्फ अनुचित पेपर मूल्याँकन की ओर है और मार्क्स जिहाद संदर्भित है। उन्होंने कहा कि जिस तरह धर्म को फैलाने के इरादे से किया गया प्यार लव जिहाद है, उसी तरह वामपंथी विचारधारा फैलाने के लिए दिए जाने नंबर ‘मार्क्स जिहाद’ हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के अंकों में अकथनीय वृद्धि और केरल बोर्ड से आवेदनों की संख्या में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि के पीछे की साजिश वैचारिक है, न कि धर्म से प्रेरित।

प्रोफेसर पांडेय के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वामपंथी हानिकारक और बड़ा खतरा हैं। केरल के ‘राइसबैग’ छात्र डीयू के परिसरों में जहरीली विचारधारा और जिहाद का इंजेक्शन लगाएँगे। पांडेय को डीयू में वामपंथियों के आने से बार-बार होने वाली हड़तालों और परिसर में हिंसा का डर है। वह इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि 100 फीसदी साक्षर और हार्वर्ड को पीछे छोड़ने वाली शिक्षा के बाद भी केरल के छात्र यहाँ आ रहे हैं।

पांडेय ने आगे कहा, “या फिर उन्हें (वामपंथियों को) महसूस हुआ है कि उन्होंने केरल को भी वामपंथी शासन के बाद एक मनहूस राज्य में बदल चुके बंगाल की तरह बना दिया है।” उन्होंने दावा किया कि डीयू में पढ़ाई का माध्यम अँग्रेजी और हिंदी है और केरल के इन छात्रों में से अधिकांश अंग्रेजी और हिंदी, दोनों में कमजोर हैं।

समाचार वेबसाइट tfipost ने डीयू में केरल स्टेट बोर्ड के छात्रों के अधिक संख्या में प्रवेश का संकेत देने वाले कुछ डेटा का विश्लेष्ण किया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि इस साल कुछ कोर्स में 100 प्रतिशत कट-ऑफ होने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया में केरल के छात्रों का दबदबा है। 100 प्रतिशत कट-ऑफ वाले 10 पाठ्यक्रमों में से 3 ने 6 अक्टूबर 2021 को ही अपनी प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी। अनारक्षित श्रेणी के तहत भर्ती हुए 206 छात्रों में से 95 प्रतिशत से अधिक छात्र केरल स्टेट बोर्ड के स्टूडेंट हैं। टीएफआई की रिपोर्ट में इस बात पर शक जताया गया है कि 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से अगर केरल प्रवेश में 95 प्रतिशत सीटों पर कब्जा कर लेता है तो इसका अर्थ यह है कि राज्य में या तो सबसे बेहतर प्रणाली है या फिर कुछ गड़बड़ है।

केरल बोर्ड अपने छात्रों का फाइनल रिजल्ट घोषित करने से पहले कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं दोनों के औसत अंकों का उपयोग करता है, जबकि डीयू केवल 12वीं के कट-ऑफ मार्क्स के आधार पर एडमिशन देता है। इसके अलावा, केरल के मानव संसाधन विकास मंत्री वी शिवनकुट्टी को अच्छी तरह पता है कि केरल बोर्ड 12वीं कक्षा में नंबर देने में काफी लिबरल है।

मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि डीयू के अधिकारियों को भी केरल के आवेदकों के कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं के अंकों में गड़बड़ियाँ मिली हैं।