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जिन महाराजा सुहेलदेव ने आक्रांता सालार मसूद को पहुँचाया ‘जहन्नुम’, उनकी 40 फीट की मूर्ति का CM योगी ने किया अनावरण: शौर्य मेले में भी लिया हिस्सा, बहराइच को दी ₹1200 करोड़+ की योजनाएँ

सीएम योगी आदित्यानाथ ने यूपी को 1243 करोड़ की 384 परियोजनाओं की सौगात दी है। 10 जून 2025 को बहराइच में आयोजित भव्य समारोह में उन्होने कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत के मठों और मंदिरों को लूटने वाले और भारतीय संस्कृति को नेस्तनाबूद करने का मंसूबा लेकर आने वाले सैयद सालार मसूद गाजी को महाराजा सुहेलदेव ने अपनी कूटनीति और युद्धनीति का करिश्मा दिखाया और जहन्नुम में पहुँचा दिया।

बीएसपी, एसपी और कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति , राष्ट्र की रक्षा करने वाले महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम को भुला कर विदेशी आक्रांताओं का महिलामंडन किया गया

उन्होंने कहा, “बहराइच का मुख्य आयोजन महाराजा सुहेलदेव जी के नाम पर होगा। बालार्क ऋषि या आदिशक्ति माँ पाटेश्वरी देवी के नाम पर होगा। महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम को भुलाकर विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन कर हर वर्ष उनका विवाह कराते थे। ये सब मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति की वजह से हो रहा था। पीएम मोदी के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी तो देशी रियासतों को मिलानेवाले सरदार पटेल का सम्मान किया गया। अयोध्या में राम दरबार भी सज गया और काशी, अयोध्या के बाद मथुरा में कॉरिडोर का काम शुरू हो रहा है।”

महाराजा सुहेलदेव पर शोध करने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करने की योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव विजयोत्सव में दशकों से अपनी भूमिका निभाने वाले दिवंगत पंडित हनुमान शर्मा, पंडित गुलाब चंद शुक्ल,विहिप के पूर्व अध्यक्ष संतराम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सीएम योगी ने चित्तौरा झील के तट पर निर्मित महाराजा सुहेलदेव स्मारक का लोकार्पण किया। करीब ₹39.49 करोड़ की लागत से इसका निर्माण कराया गया है। महाराजा सुहेलदेव की 40 फीट ऊँची प्रतिमा है जिसके हाथ में भाला और कंधे पर धनुष है और वह घोड़े पर सवार हैं।

इस मौके पर 5 बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया गया। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा ने इस मौके पर शौर्य मेले का आयोजन किया। राजभर ने ही कार्यक्रम को आयोजित करने का ऐलान किया था।

G-7 से पहले साइप्रस जाएँगे PM मोदी, तुर्की से है 36 का आँकड़ा: ‘उम्माह’ के नाम पर पाकिस्तान को दिए थे वो ड्रोन, जो भारत पर दागे गए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी दिनों में साइप्रस और क्रोएशिया के दौरे पर जाएँगे। यह दौरा उनकी कनाडा में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन यात्रा से पहले होगा। वह कनाडा के रास्ते में ही इन दोनों देशों का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री का यह साइप्रस दौरा भारत का तुर्की को जवाब माना जा रहा है।

साइप्रस अगले साल (2026) यूरोपीय संघ परिषद का अध्यक्ष भी बनने वाला है, जिससे यह दौरा और भी खास हो जाता है। पीएम मोदी का यह साइप्रस दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तुर्की ने बीते दिनों पाकिस्तान को खुला समर्थन दिया है। प्रधानमंत्री मोदी से पहले अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गाँधी ही साइप्रस का दौरा करने गए हैं।

क्यों साइप्रस जा रहे प्रधानमंत्री मोदी?

पीएम मोदी के साइप्रस दौरे के कई कारण हैं। भारत यूरोप में अपनी पहचान और रिश्ते बढ़ाना चाहता है। साइप्रस यूरोपियन यूनियन का सदस्य है। ऐसे में उसके साथ रिश्ते भारत के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा भारत तुर्की को साफ़ सन्देश देना चाहता है। तुर्की की साइप्रस से बिलकुल नहीं बनती।

इसके अलावा साइप्रस ने हमेशा कश्मीर और पाकिस्तान से होने वाले सीमा-पार आतंकवाद पर भारत का समर्थन किया है। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट, न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) की सदस्यता और 1998 के परमाणु परीक्षणों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी भारत का साथ दिया है।

साइप्रस ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की थी और यूरोपीय संघ में पाकिस्तान से होने वाले सीमा-पार आतंकवाद का मुद्दा उठाने का संकेत दिया था। साइप्रस को एक महत्वपूर्ण निवेशक के तौर पर भी देखा जा रहा है।

साइप्रस से तुर्की की है लड़ाई

तुर्की और साइप्रस के बीच कई दशकों से गहरा विवाद है। यह विवाद 1974 में और बढ़ गया, जब तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर हमला कर दिया और उस पर कब्ज़ा कर लिया। तुर्की इस हिस्से को ‘टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस’ के रूप में मान्यता देता है। हालाँकि, इसे और किसी देश ने नहीं माना है।

इसके अलावा, पूर्वी भूमध्य सागर में गैस की खोज के अधिकारों को लेकर भी दोनों देशों में लगातार तनाव बना रहता है। भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार साइप्रस समस्या के समाधान का समर्थन किया है। उसने पाकिस्तान को ड्रोन समेत तमाम हथियार दिए थे, जो भारत पर दागे गए।

तुर्की के लिए साइप्रस एक दुखती रग की तरह है, ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री का साइप्रस दौरा उसे एकदम अच्छा नहीं लगेगा। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था, और खुद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोआन ने भी इस समर्थन को सार्वजनिक किया था।

2024-25 में मारे गए 500+ नक्सली, माओवादी पार्टी की टूटी कमर… पोलित ब्यूरो-सेंट्रल कमिटी में नहीं बचे लोग: CRPF के IG बोले- सरेंडर करो या फिर मौत ऑप्शन

कभी छत्तीसगढ़ के जंगलों से लेकर झारखंड के अलग-अलग इलाकों में नक्सली खुले तौर पर घूमा करते थे। हजारों नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगलों में डेरा डाले रहते थे। लेकिन सुरक्षाबलों की लगातर कार्रवाई के चलते अब नक्सलियों की संख्या सिमटने लगी है।

नक्सलियों का संगठन तार-तार हो चुका है। भारत में नक्सलियों का सबसे बड़ा समूह कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अब अंतिम दिन गिन रहा है। इसका संगठन भी टूट चुका है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मात्र 300 नक्सली ही इस संगठन में बचे हैं।

समस्या सिर्फ लड़ने वाले नक्सलियों की ही नहीं है बल्कि नेतृत्व का क्राइसिस भी इस संगठन में है। रिपोर्ट बताती है कि अब नक्सलियों के पास नेता भी नहीं बचे हैं। जहाँ उसकी शीर्ष संस्था पोलित ब्यूरो में मात्र 4 लोग बचे हैं तो वहीं सेंट्रल कमेटी में मात्र 14 लोग ही बचे हैं।

नक्सलियों के पास नहीं बचा नेतृत्व

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2005 से अब तक (2025) पोलित ब्यूरो (PB) के 14 नक्सली या तो पकड़े गए हैं या मार दिए गए हैं। इसके चलते अब पोलित ब्यूरो में सिर्फ 4 एक्टिव मेंबर बचे हैं। पोलित ब्यूरो में अब मुप्पल्ला लक्ष्मण राव उर्फ ​​​​गणपति, मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ ​​​​अभय, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​​​देवजी और मिसिर बेसरा बचे हैं।

आशंका है कि गणपति की भी मौत हो चुकी है। हालाँकि, यह भी स्पष्ट नहीं है। वहीं, सेंट्रल कमेटी (CC) के मेंबर भी तेजी से कम हुए हैं। 2007 से अब तक 26 सेंट्रल कमिटी सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं या मार दिए गए हैं। कुछ ने आत्मसमर्पण किया है। अब CC में सिर्फ 14 एक्टिव मेंबर बचे हैं, जिसमें चार PB नेता भी शामिल हैं।

बस्तर के CRPF IG पी सुंदरराज ने बताया है कि नक्सलियों का कमांड ढाँचा अब पूरी तरह से बिखर चुका है। लगातार खुफिया जानकारी और आत्मसमर्पण से संगठन पूरी तरह से टूट गया है। IG ने कहा, “कुल 300 हथियारबंद लोग दंडकारण्य और कुछ दूसरे इलाकों में छिप कर बैठे हैं, उनके पास अब सिर्फ 2 रास्ते हैं या तो आत्मसमर्पण करें या मारे जाएँ।”

एक-एक कर मारे जा रहे नक्सली कमांडर

नक्सलियों के संगठन को कमजोर करने के लिए सुरक्षाबलों ने कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं। इन ऑपरेशनों में उनके कई बड़े नेता मारे गए हैं। हाल ही में बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़े ऑपरेशन में टॉप नक्सली कमांडर भास्कर को मार गिराया। भास्कर पर ₹45 लाख का इनाम था और वह इस इलाके में बचे कुछ बड़े नक्सली नेताओं में से एक था।

इससे पहले मई 2025 में नक्सलियों के सबसे बड़े नेता नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। 30 साल से भी ज़्यादा समय में यह पहली बार हुआ है जब नक्सलियों का इतना बड़ा नेता मारा गया है। यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल यूनिट DRG ने किया था।

इसके अलावा, 6 जून 2025 को इसी जिले में एक और सीनियर नक्सली नेता नरसिम्हा चालम उर्फ सुधाकर को भी मार गिराया। सुधाकर पर 40 लाख का इनाम था और वह बसवराजू के बाद आंदोलन का एक अहम नेता माना जाता था। वह पहले आयुर्वेद का छात्र था और बाद में नक्सलियों में शामिल हो गया था।

2024-25 में टूटी कमर

नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में वर्ष 2024 के बाद तेजी आई है। लगातार CRPF, पुलिस और DRG बड़े ऑपरेशन कर नक्सलियों का सफाया कर रही है। कई ऑपरेशन में 30 से अधिक नक्सली मारे गए हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में 290 नक्सलियों को मार गिराया गया था। इस दौरान 1,090 को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया था। यह कार्रवाई 2025 में दोगुनी तेजी पकड़ चुकी है।

वर्ष 2025 में 226 नक्सली मार गिराए जा चुके हैं। इसके अलावा 418 को गिरफ्तार भी किया गया है। मारे जाने के डर से 896 ने आत्मसमर्पण कर दिया है। कर्रेगुट्टा पहाड़ जैसे नक्सलियों के गढ़ भी अब खाली करवा लिए गए हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने की डेडलाइन रखी है। नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने का मौका भी दिया जा रहा है, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें सुरक्षाबलों की गोली का सामना करना पड़ेगा।

मदरसे से निकले, अब ‘दीन’ बचाने के नाम पर ‘हैदरी दल’ के गुंडे मुस्लिम लड़कियों को कर रहे परेशान: जानिए कौन था वो हैदर, जिसके नाम पर चल रहा ये ‘तालिबान’ स्टाइल गिरोह

यूपी के बरेली में हैदरी दल एक ऐसा ग्रुप है जो गैर मुस्लिम लड़कों और मुस्लिम लड़कियों के ‘रिश्ते’ पर गिद्ध नजर रखता है। हाल के वर्षों में मुस्लिम युवकों द्वारा मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम पुरुषों को एक साथ देखकर परेशान करने की घटनाएँ बढ़ी हैं।

हैदरी दल नाम का ये ग्रुप अगर बुर्काधारी महिलाओं को गैर-मुस्लिम लड़कों के साथ देखते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है। इस्लाम की रक्षा और ‘बुर्का’ की पवित्रता के नाम पर ऐसे जोड़ों को हर तरह से परेशान किया जाता है।

हैदरी दल से जुड़े मुस्लिम लड़के हिंदू या गैर-मुस्लिम लड़कों के साथ घूमनेवाली मुस्लिम लड़कियों को परेशान करने के लिए वीडियो बनाते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर भी डालते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ मुस्लिम युवक आते हैं और बुर्का पहनी लड़कियों से सवाल करते हैं। लड़कियों का नाम, पता, माता-पिता का नाम और अन्य पहचान भी उजागर कर दिया जाता है।

ऐसा ही एक वीडियो में हैदरी दल के कुछ लोग कह रहे हैं कि घर पर कोई नहीं है तो अय्याशी करोगी, मेरी बहन बात सुनो कहते हुए लड़की के साथ बदसलूकी कर रहा है। बरेली के गाँधी उद्यान का एक दूसरा वीडियो सामने आया है जिसमें एक मुस्लिम युवक कहता है कि ” बहन सुनो, तुम्हारा नाम क्या है? तुम कहाँ रहती हो? तुम्हारे पिता और भाई का नाम क्या है? क्या तुम्हारे घर पर कोई नहीं है? इतना ही नहीं वो व्यक्ति महिला के साथ मौजूद लड़के की भी सारी जानकारी लेता है।

हिन्दू संगठनों ने इस मुद्दे पर अपना विरोध जताया है। संगठन के नेता हिमांशु पटेल ने सोशल मीडिया एक्स पर शिकायत की थी। इस मुद्दे पर कोतवाली इंस्पेक्टर नितिन राणा ने हैदरी दल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें कई लोगों की पहचान की गई है। इसमें से अधिकतर युवक कस्बों और गाँवों के रहनेवाले हैं। उनमें से ज्यादातर मदरसों में शिक्षा ली है और शहर की मस्जिदों में मौलाना के रूप में रहते हैं

भगवा लव ट्रैप की विवादित और मनगढंत थ्योरी

‘भगवा लव ट्रैप’ हिंदू संगठनों पर लगाया गया एक निराधार थ्योरी है। इसमें कथित तौर पर हिंदू युवाओं को मुस्लिम महिलाओं को लुभाने, फँसाने और उन्हें गैर-मुस्लिम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। सज्जाद नोमानी नाम के एक मौलवी ने 2021 से इसका दावा किया था।

‘भगवा लव ट्रैप’ सोशल मीडिया हैशटैग का रूप ले लिया है। इसका इस्तेमाल हिजाब पहने मुस्लिम महिलाओं और उनके पुरुष हिंदू मित्रों के वीडियो शेयर करने के लिए कट्टरपंथियों द्वारा किया जा रहा है। पोस्ट अक्सर भावनात्मक संदेशों के साथ होते हैं और जोड़ों की पहचान करने में जनता की मदद माँगते हैं। सोशल मीडिया पर हिंदू-मुस्लिम जोड़ों पर जानलेवा हमला करने वाले इस्लामी भीड़ के वीडियो की भरमार हो गई।

हिंदू लड़कों पर हमला और यहां तक ​​कि मुस्लिम महिलाओं से छेड़छाड़ भी होती है। ऐसे जोड़ों को सड़कों, रेस्तरां, खाने-पीने की जगहों और यहां तक ​​कि होटलों में भी निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे कई उदाहरण हैं जब मुस्लिम हैदर ग्रुप ने हिन्दू लड़कों और मुस्लिम लड़कियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मुस्लिम महिलाओं के हिजाब या नकाब जबरन उतार दिए और पीड़ितों का वीडियो बनाया।

उनके वीडियो को इस्लामी धार्मिक संगीत और हैशटैग #BhagwaLoveTrap के साथ प्रसारित किया, यह सब ‘दीन’ (इस्लाम) को बचाने के नाम पर किया गया। वे मुस्लिम महिलाओं की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं और कहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं को उनके क्षेत्रों में हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम पुरुषों से बातचीत करने से रोकें।

दिलचस्प बात यह है कि जो लोग अक्सर ‘लव जिहाद’ को नकारते हैं, जिसमें मुस्लिम पुरुष हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम महिलाओं को अपने प्रेम जाल में फँसाते हैं, उनका यौन शोषण करते हैं और उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करते हैं। वे ही लोग हैं जो किसी मुस्लिम लड़की को हिंदू या किसी गैर-मुस्लिम युवक के साथ देखते ही ‘भगवा प्रेम जाल’ का नारा लगाते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में, ऑपइंडिया ने अनगिनत मामलों की रिपोर्ट की है जिसमें मुस्लिम युवक या तो व्यक्तिगत रूप से या ग्रूमिंग गिरोह के हिस्से के रूप में हिंदू लड़कियों को यौन शोषण करने और उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करने के लिए मजबूर करने के लिए निशाना बना रहे हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जबकि भारतीय इस्लामवादी और उनके वामपंथी-उदारवादी चीयरलीडर्स लव जिहाद/ग्रूमिंग जिहाद को ‘धोखा’, ‘हिंदुत्व षड्यंत्र सिद्धांत’ और न जाने क्या-क्या कहकर आसानी से खारिज कर देते हैं।

सोशल मीडिया पर हैदरी दल के ‘सदस्यों’ ने ऐसे कई वीडियो अपलोड किए हैं, जिनमें वे हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम लड़कियों की शादी मुस्लिम युवकों से करवा रहे हैं। वहीं मुस्लिम लड़कियों द्वारा हिंदू पुरुषों के साथ डेट करने या उनके साथ घूमने-फिरने पर ‘भगवा लव ट्रैप’ का आरोप लगाते हैं। इस्लामवादियों के लिए महिलाएँ अपने धार्मिक वर्चस्व को स्थापित करने का एक वस्तु मात्र हैं।

उनके लिए हिंदू महिलाओं को फँसाना और उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करना काफिरों पर ‘धार्मिक जीत’ की तौर पर देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं का हिंदू पुरुषों से शादी करना या उनके साथ डेटिंग करना इस्लाम का अपमान है और किसी हार से कम नहीं है।

यह विकृत मानसिकता इस्लामवादियों को गैर-मुस्लिम महिलाओं को फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित करती है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करती है कि मुस्लिम लड़कियाँ हिंदू पुरुषों से बातचीत भी न करें, डेटिंग या उनसे शादी करना तो दूर की बात है।

जिहादी मानसिकता और षड्यंत्र के सिद्धांतों से प्रेरित उनकी अवैध हरकतें व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरे में डालती हैं और मुस्लिम महिलाओं और उनके हिंदू दोस्तों या भागीदारों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं और साथ ही सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

हैदरी दल का नेतृत्व कौन करता है? ये सामने नहीं आया है। लेकिन अब उत्तर भारत के कई शहरों में इसने अपना जाल बिछा दिया है। हालाँकि बरेली पुलिस ने हैदरी दल (बरेली) की गतिविधियों की जाँच शुरू कर दी है। इससे कुछ राज खुलने के आसार हैं।

हैदरी दल बुर्का पहने मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम पुरुषों को परेशान करने वाला एक समूह है जो देश के कई शहरों में काम कर रहा है। ये दल मुस्लिम पुरुषों का एक अनौपचारिक इस्लामी निगरानी समूह है। ये मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम पुरुषों से जुड़े अंतर-धार्मिक जोड़ों के खिलाफ हिंसा पर आमादा है।

हैदरी दल के कई शहरवार पेज भी मिले, जिनमें ‘हैदरी दल पीलीभीत’ भी शामिल है। ये पेज इस्लामवादी प्रचार करते हैं और हिंदू पुरुषों को बदनाम करने और मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाने के लिए भगवा लव ट्रैप के झूठ को परोसते हैं। इसी तरह की नफरत भरी सामग्री ‘हैदरी दल मुंबई’ नाम के इंस्टाग्राम पेज पर भी मिली।

हालाँकि ये तय नहीं है कि ये पेज मिले हुए हैं या नहीं। इसके प्रशासक मूलतः हैदरी दल के सदस्य हैं, लेकिन इनके पोस्ट मुख्यतः हिंदू विरोधी विषयों पर केंद्रित हैं तथा इनमें भगवा प्रेम जाल षड्यंत्र सिद्धांत को बढ़ावा देने वाली सामग्री भरी पड़ी है।
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हैदरी दल के कई ‘फैन पेज’ हैं, जो लगातार बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं और उनके हिंदू दोस्तों या बॉयफ्रेंड के वीडियो पोस्ट करते रहते हैं। हैदरी दल के नाम से बने ऐसे कई पेज कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेखौफ सक्रिय हैं और ऐसे जोड़ों का जीवन खतरे में डाल रहे हैं।

कौन चला रहा है हैदरी दल और किसने नाम पर पड़ा इसका नाम?

हालाँकि, हैदरी दल की उत्पत्ति के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इस समूह का नाम ‘अली इब्न अबी तालिब’ के नाम पर रखा गया है। अली इब्र को ही इमाम अली और हैदर भी कहा जाता है, जो पैगंबर मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे। इमाम अली को 629 ई. में खैबर की लड़ाई में खैबर के यहूदी कबीलों के खिलाफ मुस्लिम सेना को जीत दिलाने में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है।

इस्लामी ग्रंथों में महिमामंडित उल्लेखों के अलावा, इमाम अली को समर्पित कई लोकगीत और कविताएँ भी हैं जहाँ हैदर का जिक्र है। ऐसा ही एक लोकप्रिय गीत है ‘हैदर की तलवार’ जो काफ़िरों (गैर-मुसलमानों) को मारने के लिए इमाम अली का महिमामंडन करता है और जिसके बोल हैं ‘इलाका हिल रहा था वेहदत के नारों से, ज़रा सी देर में मैदान भरा था काफ़िर की लाशों से, जब चली हैदर की तलवार।’

इस्लामवादी निगरानी समूह का नाम हैदरी दल रखने से पता चलता है कि जिस तरह हैदर ने काफिरों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, उसी तरह ये इस्लामी कट्टरपंथी ‘भगवा प्रेम जाल’ के झूठ को फैला कर इस्लाम के नाम पर गैर-मुसलमानों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।

बिहार के सरकारी स्कूल में 4 महीने से चल रहा था फर्जी थाना, 300 लोगों से बहाली के नाम पर नकली थानेदार ने ठग लिए ₹50 लाख: पोल खुलने पर हुआ फरार

बिहार के पूर्णिया में एक ठग ने खुद को थानेदार बताकर कई लोगों को ग्राम रक्षा दल और होमगार्ड में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी की है। कस्बा थाना इलाके के मोहिनी पंचायत के बतौना गाँव में राहुल कुमार साह नाम के शख्स ने बाकायदा एक फर्जी कैंप खोल रखा था, जहाँ वह पुलिस की वर्दी पहनकर बैठता था और लोगों को झांसा देता था।

कैसे दिया झाँसा?

जानकारी के मुताबिक, फर्जी थानेदार राहुल NCC का कोर कैडर था और उसके गिरोह में ज्यादातर एनसीसी कैंडेट थे। राहुल साह ने लोगों को विश्वास दिलाने के लिए हर हथकंडा अपनाया। राहुल ने सरकारी स्कूल में ‘बिहार राज्य दलपति एवं ग्राम रक्षा दल महासंघ’ का फर्जी कार्यालय खोला।

लोगों को 10,000 से 15,000 रुपए तक लेकर नौकरी दिलाने का वादा किया, फर्जी नियुक्ति पत्र बांटे, वर्दी सिलवाई, आई-कार्ड भी बनवाए, और तो और कुछ लोगों से मेला और अन्य जगहों पर ड्यूटी भी करवाई।

लोगों को इस बात का जरा भी शक नहीं हुआ, क्योंकि राहुल पुलिस की वर्दी में रहता था और असली पुलिसवालों के साथ फेसबुक पर तस्वीरें भी डालता था। उसने मोहिनी पंचायत के मुखिया से अपने फर्जी कैंप का उद्घाटन भी करवा लिया था।

करीब 2 महीने तक नौकरी करने के बाद जब लोगों को वेतन नहीं मिला, तो उन्हें शक हुआ। सच्चाई सामने आने पर पता चला कि वे ठगी का शिकार हो गए हैं। इसके बाद भारी तादाद में पीड़ित राहुल साह के घर पहुँच गए और हंगामा करने लगे।

पुलिस की कार्रवाई

पीड़ितों ने कस्बा थाने में राहुल कुमार साह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, लेकिन आरोपित राहुल साह फिलहाल फरार है। पुलिस ने बताया कि राहुल ने 300 लोगों से 50 लाख की ठगी की है। राहुल युवाओं को पुलिस की वर्दी, लाठी और फर्जी पहचान पत्र देकर वाहन जाँच और शराब तस्करों से अवैध वसूली करवाई थी।

जानकारी के अनुसार राहुल ने युवाओं से 400 रुपये तक के चालान कटवाए, जिसमें से आधा कमीशन के रूप में दिया जाता था। राहुल शराब तस्करों से रिश्वत भी लेता था। फिलहाल पुलिस आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है और उसके परिजनों ने जल्द सरेंडर करवाने का आश्वासन दिया है।

चीन की जिस लैब से निकला कोरोना, वहीं की रिसर्चर अमेरिका लेकर पहुँची पैरासाइट… FBI ने किया गिरफ्तार: मिले राउंडवर्म से भरे पैकेट, पहले भी जहरीले बीज सहित पकड़े गए थे दो चाइनीज

अमेरिका में जैविक सामग्री की तस्करी में एक और चीनी नागरिक गिरफ्तार किया गया है। चेंगक्सुआन हान नाम का ये छात्र वुहान के HUST के पीएचडी कर रहा है। वुहान वो जगह है जहाँ की लैब से कोरोना वायरस के उत्पन्न होने और दुनियाभर में फैलने की आशंका जताई जाती है। हालाँकि चीन हमेशा से वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की थ्योरी को नकारता रहा है। दावा तो यहाँ तक किया जाता है कि कोरोना वायरस न केवल चीन की लैब से लीक हुआ बल्कि शायद चीन ने जानबूझकर जैव हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया।

अब एक और चीनी नागरिक की गिरफ्तारी से इस आशंका को बल मिलता है। चीनी शोधकर्ता परजीवी राउडवॉम की चार पैकेट की तस्करी कर अमेरिका लेकर आया था। इससे पहले पिछले हफ्ते मिशिगन विश्वविद्यालय की ही शोधकर्ता युनकिंग जियान और उनके बॉयफ्रेंड ज़ुनयोंग लियू पर अमेरिका में एक खतरनाक फसल को नष्ट करने वाले फंगस की तस्करी करने का आरोप लगा था। इसको FBI ने “अमेरिका की खाद्य आपूर्ति पर हमला” बताया था।

शिकायत के अनुसार, हान चीन का नागरिक है जो वर्तमान में वुहान, पीआरसी में हुआजोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (HUST) में कॉलेज ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहा है। 2024 और 2025 में हान ने जैविक पदार्थों परजीवी राउंडवॉम वाले चार पैकेज चीन से संयुक्त राज्य अमेरिका को भेजे। ये पैकेज मिशिगन विश्वविद्यालय में एक प्रयोगशाला से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर थे। 8 जून, 2025 को, हान जे1 वीजा पर डेट्रॉइट मेट्रोपॉलिटन एयरपोर्ट पहुंचा। सुरक्षा अधिकारियों ने हान से जब पूछा तो हान ने पैकेजों और जैविक सामग्रियों के बारे में गलत बयान दिए।

एफबीआई काश पटेल ने सोशल मीडिया एक्स पर चीनी नागरिक की गिरफ्तारी को शेयर करते हुए कहा है कि चीन लगातार अमेरिका के खिलाफ साजिश कर रहा है। उन्होने कहा, “चीनी पीएचडी स्टूडेंट चेंगक्सुआन हान को जैविक सामग्री की तस्करी के आरोप में डेट्रॉयट में गिरफ्तार किया गया है। उसे परजीवी राउंडवॉम से जुड़ी गलत जानकारी पुलिस को देने का आरोप है।”

वुहान में हुआजोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता चेंगक्सुआन हान को 8 जून को डेट्रोइट मेट्रोपॉलिटन एयरपोर्ट पर पहुंचने पर FBI ने हिरासत में ले लिया। हान पर अमेरिका में जैविक सामग्री की तस्करी करने और झूठे बयान देने के आरोप हैं। अमेरिका में ये दोनों ही गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।

हान चीन से जुड़ा तीसरा व्यक्ति है जिसपर हाल के दिनों में इसी तरह के आरोप लगे हैं। हान पर आरोप है कि उसने चीन से अमेरिका को चार पैकेज भेजे थे, जिनमें परजीवी राउंडवॉम से संबंधित जैविक पदार्थ थे। ये मिशिगन विश्वविद्यालय की एक प्रयोगशाला से संबोधित थे।

हान पर झूठ बोलने और प्रवेश से पहले डिवाइस मिटाने का आरोप

डेट्रॉयट में उतरने पर हान ने पैकेजों के बारे में जानकारी से इनकार कर दिया था यहाँ तक कि उसके अंदर क्या है? ये भी नहीं बताया था। एफबीआई ने यह भी खुलासा किया कि हान ने डेट्रॉयट आने से पहले अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा मिटा दिया था। हान के इस कदम को जाँच में बाधा पहुँचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

एफबीआई हेड काश पटेल के मुताबिक, “8 जून को हान ने डेट्रोइट मेट्रोपॉलिटन एयरपोर्ट पर अमेरिकी अधिकारियों को उन पैकेजों के बारे में गलत बयान दिए, जिन्हें उसने पहले मेल किया था और कुछ दिन पहले ही उसने अपना इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिटा दिया था। FBI और ICE HSI एजेंटों का कहना है कि हान पैकेज भेजने और उनकी सामग्री के बारे में झूठ बोलने की बात स्वीकार की। एफबीआई के मुताबिक अमेरिका के शोध संस्थानों को कमजोर करने में चीन लगा हुआ है।”

सर्वे की आड़ में बहराइच में बिछाया जा रहा था विस्फोटक, CM योगी के दौरे से पहले 500 किलो का जखीरा मिला; बंगाल के 70 लोग गिरफ्तार: मजार को बुलडोजर से किया समतल

बहराइच में हाल ही में दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ 500 किलो विस्फोटक पकड़ा गया है, तो दूसरी तरफ 700 साल पुरानी मजार पर बुलडोजर चला है। ये ऐसे समय विस्फोटक मिला है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 जून 2025 को बहराइच के दौरे पर है।

सर्वे के नाम पर बिछाया विस्फोटक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहराइच जाने वाले हैं, लेकिन उनके दौरे से ठीक पहले ही जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने करीब 500 किलो विस्फोटक पकड़ा है और इस मामले में पश्चिम बंगाल के 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह सब तब शुरू हुआ जब हरदी इलाके के सिकंदरपुर गाँव के पास करीब 200 लोग तीन गाड़ियों में आए। पकड़े गए लोगों ने खुद को एक तेल कंपनी का सर्वे करने वाला बताया। जब गाँव वालों ने उनसे पूछा कि वे क्या कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वे भेड़िए ढूँढने आए हैं।

इसके बाद उन्होंने करीब 20 किलोमीटर के इलाके में जमीन में छेद करके अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक बिछाना शुरू कर दिया। ये विस्फोटक बालासराय, लखनापुर, सधुवापुर, सिकंदरपुर और औराही जैसे कई गाँवों में बिछाए गए थे।

ग्रामीणों की शिकायत से मचा हड़कंप

रविवार (8 जून 2025) को जब गाँव वालों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत महसी के विधायक सुरेश्वर सिंह को बताया। विधायक तुरंत मौके पर पहुँचे और अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन शुरुआत में कोई नहीं आया।

जब इसकी जानकारी बड़े अधिकारियों तक पहुँची, तो हड़कंप मच गया। तुरंत एसडीएम, एसपी और अन्य बड़े अधिकारी मौके पर पहुँचे। वहाँ गाड़ियों में भारी मात्रा में विस्फोटक लदा हुआ मिला। विधायक सुरेश्वर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इतना विस्फोटक मिलने के बाद भी स्थानीय पुलिस अधिकारी गाँव वालों पर गाड़ियों को छोड़ने का दबाव डाल रहे थे।

सीएम के दौरे से पहले विस्फोटक मिलना एक साजिश?

विधायक सुरेश्वर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक एक दिन पहले इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। वहीं, बहराइच के ग्रामीण एएसपी डीपी तिवारी ने बताया कि अब तक 70 लोगों को पकड़ा गया है और इनमें से ज़्यादातर पश्चिम बंगाल के हैं।

वहीं सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी दी थी कि 37 लोग नेपाल की सीमा से होते हुए बहराइच में घुसपैठ कर सकते हैं। इनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या भी हो सकते थे।

700 साल पुरानी मजार पर चला बुलडोजर

बहराइच में सिर्फ विस्फोटक ही नहीं, बल्कि 700 साल पुरानी लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर भी बुलडोजर चला है। इसके अलावा चमन शाह, भंवर शाह और शहंशाह बाबा की मजारें भी हटा दी गई हैं। यह दावा किया जा रहा है कि मजार 700 साल पुरानी है।

वन विभाग ने मजार कमेटी को पहले ही बता दिया था कि उन्हें ये मजारें हटानी होंगी, क्योंकि उनके पास जमीन के कोई कानूनी कागज़ात नहीं थे। यह कार्रवाई कतर्नियाघाट जंगल में हुई है। मजार को चलाने वाले लोग कह रहे थे कि यह जमीन वक्फ की है (जो धार्मिक कामों के लिए दी जाती है), लेकिन वे इसका कोई सबूत नहीं दिखा पाए।

लक्कड़ शाह मजार चलाने वाली कमेटी के अध्यक्ष रईस अहमद ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक थी और यहाँ ज़्यादातर हिंदू लोग आते थे।

सरकार का क्या कहना है?

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी ज़मीन से कब्ज़ा हटाने के अभियान का हिस्सा है। वे बता रहे हैं कि यह बिना किसी भेदभाव के किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी ज़मीनों से अवैध कब्ज़े हटाने पर ज़ोर दे रही है।

विदेशों से हथियार खरीदने वाला भारत विश्व को बेच रहा ब्रह्मोस-पिनाका, 11 साल में डिफेन्स सेक्टर में मोदी सरकार ने किया आत्मनिर्भर: कॉन्ग्रेस राज में व्याप्त था भ्रष्टाचार-पॉलिसी पैरालिसिस

देश की सैन्य आत्मनिर्भरता ना केवल देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है बल्कि बाह्य सुरक्षा की नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। किसी भी देश का खुद के हथियार बनाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। भारत हथियारों के मामले में दुनिया के आत्मनिर्भर देशों में शामिल हो गया है।

यह परिवर्तन 2014 के बाद सामने आया है। 2014 से पहले भारत का रक्षा निर्यात काफी बदहाली के दौर से गुजर रहा था और हम आयात पर निर्भर थे। लेकिन इस निर्भरता को आत्मनिर्भरता में बदलने का काम 2014 के बाद आई मोदी सरकार ने किया।

सैन्य आयात पर निर्भर था भारत

स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, 2009 से 2013 तक भारत पूरे दुनिया केहथियारों का 13% आयात किया करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य क्षमताओं वाला देश हथियारों की आपूर्ति के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर होता चला गया।

विदेशी सप्लायर भारत के घरेलू उत्पादन उद्योग को कमजोर करते चले गए। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2004-2005 से 2013-14 तक रक्षा निर्यात की कुल राशि ₹4,312 करोड़ थी जो अब बढ़ कर ₹23,622 करोड़ हो गई है।

सेना के पूर्व अफसर ने खोली कॉन्ग्रेस की पोल पट्टी

रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि किस तरह कॉन्ग्रेस ने देश की सुरक्षा को हाशिये पर रख दिया। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में उत्तरी सेवा के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस पनाग ने इस रिपोर्ट में बताया है कि 2013-14 तक हमारा निर्यात मात्र 110 मिलियन डॉलर था।

उन्होने बताया कि हमारे देश की रक्षा निर्यात का कोई अस्तित्व ही नहीं था। उनके अनुसार, पहले की सरकार में रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेने के बाद व्यापार करने की व्यवस्था थी, उस वक्त भी सरकार ने रक्षा निर्यात पर गंभीरता से विचार नहीं किया। यही कारण है कि 2014 के बाद भी एनडीए सरकार के गंभीर प्रयासों के बावजूद रक्षा निर्यात इतना कम है।

कॉन्ग्रेस सरकार में DRDO की भी टूट चुकी थी कमर

DRDO जो भारत की रक्षा प्रणाली को सशक्त करने के लिए जानी जाती है, उसकी हालत कॉन्ग्रेस सरकार में बद से बदतर हो चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार 6000 वैज्ञानिकों में केवल 3% वैज्ञानिक ही ऐसे थे जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रखी थी।

यह बात खुद इस रिपोर्ट में विज्ञान और प्रद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने कही है। अन्य कई देश अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए अपने देश में उत्पादन और नौकरी को बढ़ावा दे रहे थे। उसी वक्त भारत एक खरीदार के रूप में फंसा हुआ था और आयात पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा था।

बोफोर्स जैसे घोटालों से कमजोर होता गया देश

रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में 2014 से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार में हुए लूट और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 1980 का बोफोर्स घोटाला में 64 करोड़ की रिश्वत का मामला सीधे राजीव गाँधी से जाकर जुड़ता है।

इसका खुलासा खुद स्वीडिश रेडियो कार्यक्रम में किया गया जिसमें खुद बोफोर्स के कर्मचारियों ने कहा कि इसके लिए रिश्वत दी गई थी। बयान के अनुसार उस वक्त कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ सदस्यों और राजनेताओं को 8.2 बिलियन की रिश्वत दी गई थी।

इसके अलावा अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में शामिल टाट्रा ट्रक और बाराक मिसाइल स्कैम ने भी कांग्रेस की बकिय उधेर कर रख दी है। उस वक्त कॉन्ग्रेस के द्वारा किए गए इस सुरक्षा खिलवाड़ के नतीजे ने भारत की सैन्य ताकत को भीतर से कमजोर कर दिया था।

2014 के बाद रक्षा जगत में आया सकारात्मक परिवर्तन

रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार 2014 के बाद भारत सरकार ने आयात निर्भरता में लगातार कमी लाई। भारतीय कंपनियों को निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया गया।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू ‘मेक इन इंडिया’ ने भारत में निर्मित डिजाइन को विकसित करने में काफी मदद पहुंचाई। इसके अलावा DAP(रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया) के तहत खरीदी में भी बदलाव किया गया। 500 से अधिक हथियारों के आयात पर रोक दी लगा दी गई जिसमें टैंक, आर्टिलरी मशीन और रडार भी शामिल है।

देश के रक्षा उत्पादन का मूल्य 174% की वृद्धि के साथ ₹1,27,434 करोड़ तक पहुँच गया जो 2014-15 में 46,429 करोड़ था। सरकार के द्वारा सैन्य प्लेटफार्म का विकास किया गया। नौसेना को सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बी और फास्ट अटैक क्राफ्ट आदि के निर्माण पर जोड़ दिया गया। यह सब मेक इन इंडिया की पहल के सकारात्मक परिणाम का स्वरूप है।

निजी कंपनियों को भी सरकार द्वारा दिया गया प्रोत्साहन

कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में हाशिये पर पहुँच चुकी निजी कंपनियां को मोदी सरकार में बल मिला। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव के अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कॉन्ग्रेस की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण प्राइवेट कंपनियों को रक्षा तकनीक के उत्पादन से दूर रखा गया था।

लेकिन अब ऐसा नहीं है। सैन्य सुरक्षा के विकास को देखते हुए सरकार ने निजी कंपनियों से सहयोग लिया ताकि देश की रक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। सरकार के इस निर्णायक बदलाव के फलस्वरूप रक्षा क्षेत्र के जगत में कई बड़ी कंपनियों का प्रवेश हुआ।

टाटा, एलएनटी डिफेंस, भारत फोर्ज, कल्याणी ग्रुप और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियां आर्टिलरी सिस्टम, बख्तर बंद वाहन, रडार सिस्टम, पनडुब्बी विमान के पुर्जे और ड्रोन सहित कई रक्षा सामग्रियों का निर्माण कर रही हैं।

इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2024-25 में निजी क्षेत्र में ₹15,233 करोड़ का रक्षा निर्यात किया जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कहा जाना गलत नहीं है।

लड़ाकू विमान तेजस बना घरेलू क्षमता का प्रतीक

देश के रक्षा उत्पादन और तकनीक का सार्थक उदाहरण, स्व-निर्मित लड़ाकू विमान तेजस भारत की शान बना। विश्व के कई देशों से इसकी माँग और तेज हो गई। दरअसल तेजस एक भारतीय फाइटर जेट है जो सिंगल इंजन, डेल्टा विंग और मल्टी रोल लाइट फाइटर जेट है।

सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में सबसे यह छोटा और हल्का है। इसकी मारक क्षमता को देखते हुए विश्व के कई देश इसे खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

100+ देशों को हथियार निर्यात करने वाला देश बना भारत

भारतीय रक्षा प्रणाली और सैनिक उपकरणों का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। यही कारण है कि आज भारत 100 से ज्यादा देशों को हथियार निर्यात करता है। इसी के साथ भारत विश्व के रक्षा निर्यातक देशों में 25वें स्थान पर पहुँच चुका है।

रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का दूसरा बेंच फिलिपींस को भेजा। इसके अलावा आर्मेनिया, ब्राजील और इंडोनेशिया भी भारत के साथ रक्षा सौदा कर रहे हैं।

म्यांमार गोला-बारूद, इसराइल ड्रोन और आर्मेनिया आर्टिलरी सिस्टम हमसे खरीद रहा है। भारत में आर्मेनिया को 6 एडवांस्ड आर्टिलरी गन सिस्टम निर्यात किए हैं। रिपोर्ट से यह साफ है कि भारत का कद रक्षा निर्यातकों में विश्व के जाने-माने देशों तक बढ़ चुका है।

ऑपरेशन सिंदूर ने भी भारतीय हथियारों की बढ़ाई माँग

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को और ज्यादा मजबूती दी है। भारत की लगभग 100 कंपनियां रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। मोदी सरकार 2019 तक रक्षा निर्यात को दुगना करके 6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार ने साल 2024-25 के रक्षा बजट के लिए ₹6.21 लाख करोड़ आवंटित किए हैं। यह पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित ₹5.94 लाख करोड़ रुपये से 4.3% अधिक है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पिनाका, तेजस और ब्रह्मोस मिसाइल की माँग में काफी तेजी आई है।

भारत अपने रक्षा उत्पादों का विस्तार अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका तक करने की तैयारी में है। यह मोदी सरकार की सफलता ही है कि विश्व गुरु बनने की राह में भारत अब वैश्विक हथियार के बाजार में भी एक भरोसेमंद निर्यातक बनकर उभरा है।

हड़प्पा से भी 5000 साल पहले बस चुका था कच्छ, रहने वाले समुद्र से जुटाते थे खाना: शंख-सीप पर हुई नई रिसर्च से आया सामने

गुजरात के कच्छ में भारतीय पुरातत्व के लिए एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। इससे भारत के मानव इतिहास की समय रेखा को और भी पीछे धकेल दिया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर (IITGN) के नेतृत्व में किए गए इस शोध में यह पाया गया कि इस क्षेत्र में इंसानों की मौजूदगी हड़प्पा सभ्यता से लगभग 5,000 साल पहले भी थी।

यह जानकारी खोज में मिले शैल मिडेंस (सीपों के ढेर), पत्थर के औजारों और अन्य सांस्कृतिक अवशेषों की जाँच सामने आई है।

इस अध्ययन में IIT कानपुर, PRL अहमदाबाद और IUAC दिल्ली जैसे संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया है। इस शोध से पता चला है कि उस समय के शिकार और भोजन जुटाने वाले समुदय तटीय संसाधनों पर निर्भर थे और अपने पर्यावरण के अनुसार जीवनशैली अपनाए हुए थे।

यह शोध कच्छ के सांस्कृतिक विकास को समझने और भारत की प्राचीन सभ्यताओं के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

ऐतिहासिक खोज: क्या मिला और क्यों है खास

शोधकर्ताओं ने कच्छ के खादिर द्वीप और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गहराई से खुदाई करके कई अद्भुत चीजें खोजीं। जिनमें सबसे अहम सीपों के ढेर और पत्थर के औजार है। इन दोनों चीजों यह जानकारी मिलती हैं कि यहाँ कोई इंसानी आबादी बहुत पहले रह रही थी, जो समुद्र से मिलने वाले जीव-जंतुओं को खाकर जीवन यापन करती थी।

ये असल में शंख, सीप, गैस्ट्रोपोड जैसे समुद्री जीवों के खोलों के ढेर होते हैं जिन्हें इंसान खाकर फेंक देता है। इस बात का अंदाजा तब लगा जब खुदाई में खुरचने, काटने और चीरने जैसे रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मिले।

शोध में बताया गया है कि इन औजारों के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अंदाजन खादिर द्वीप से लाया गया होगा, जो बाद में हड़प्पा शहर धोलावीरा के लिए प्रसिद्ध हुआ। इस खोज से यह भी पता लगता है कि यह वस्तुएं संभवतः हड़प्पा काल से भी 5,000 साल पहले के समय की है।

पहले यह माना जाता था कि कच्छ क्षेत्र में मानव बस्तियाँ मुख्य रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के प्रभाव से आईं, लेकिन यह खोज बताती है कि यहाँ का विकास स्थानीय स्तर पर और बहुत पहले शुरू हो चुका था।  शोधकर्ताओं ने कितनी पुरानी हैं ये वस्तुएँ, इसका वैज्ञानिक प्रमाण मिला है।

जिसके लिए उन्होंने एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) तकनीक का इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों की भूमिका की बात करें तो PRL अहमदाबाद के प्रो रवि भूषण और IUAC दिल्ली के डॉ. पंकज कुमार जैसे विशेषज्ञों ने इसकी जाँच पड़ताल में सहयोग किया। इन वैज्ञानिकों ने इस बात का ध्यान रखा की जो भी परिणाम है, वो विश्वसनीय और सटीक है।

इस पूरी तकनीक से न सिर्फ खोज की उम्र का पता लगता है, बल्कि यह भी पता चलता है की भारत में वैज्ञानिक पुरातत्व का स्तर किस हद तक आगे बढ़ चुका है।

कैसे रहते थे उस वक्त के लोग

शोध में यह भी सामने आया कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग प्राचीन शिकारी और भोजन जुटाने वाले समुदाय से थे। ये लोग मैंग्रोव वनों से घिरे इलाकों में रहते थे और समुद्र से मिलने वाले जीवों जैसे सीप और शंख पर निर्भर थे। इससे पता चलता है कि उन्होंने अपने वातावरण के अनुसार अपने जीवनशैली को विकसित कर लिया था।

जिससे इस समुदाय के लोग स्थायी खेती करने वाले नहीं थे, बल्कि ये लोग तटीय संसाधनों को इकट्ठा करके अपने जीवन को जिया करते थे। उन्होंने शायद मौसमी रूप से विभिन्न क्षेत्रों में जाकर शिकार करना और भोजन को इकट्ठा करना सीख लिया हो।

इन लोगों ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर के पत्थर के औजार भी बनाए जिनका इस्तेमाल किया जो सामग्री इस्तेमाल हुई, वह भी स्थानीय थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उस समय के लोग न सिर्फ संसाधनों का उपयोग कर रहे थे, बल्कि उनके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी भी रखते थे।

डॉ शिखा राय ने बताया कि इस अध्ययन ने हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जब उस दौर में तकनीक नाम मात्र की थी, तब भी लोग जलवायु और परिस्थिति के अनुसार जीवन जीने में सफल थे।

शोध टीम अब गुजरात में प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के सांस्कृतिक विकास का अध्ययन करना चाहती है, ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ मानव जीवन कैसे बदला।

इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्षों को 2025 में आयोजित होने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें हार्टविक कॉलेज और शिकागो विश्वविद्यालय की वार्षिक कार्यशाला, सोरबोन विश्वविद्यालय (पेरिस) की सेमिनार श्रृंखला और आईएसपीक्यूएस (रायपुर) का 50वां वार्षिक सम्मेलन शामिल हैं।

50 का बनाया टारगेट, 23 लड़कियों को फँसाया… इमरान ने वीडियो भी वायरल किए: हिन्दू नाम रख बनाता था निशाना, पुलिस ने किया गिरफ्तार

“कुछ लोगों की उतनी उम्र नहीं, उतनी मेरी गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं। 23 गर्लफ्रेंड, वो भी मैंने 2 साल में बनाई हैं, वैसे तो मुझे 50 गर्लफ्रेंड पटानी थीं”… यह शब्द हैं मथुरा के एक ऑटो ड्राइवर इमरान के। वैसे तो उसका पेशा सवारी छोड़ना है, लेकिन उसने अपने जीवन का टारगेट बनाया हिंदू लड़कियों को फँसाना।

इमरान खुद को हिंदू बताकर कॉलेज की लड़कियों से दोस्ती करता था, फिर प्रेम-जाल में फँसाता था। इमरान अपने ऑटो में बैठने वाली हर लड़की पर डोरे डालता था। वह खासकर कॉलेज की लड़कियों को निशाना बनाता था।

इमरान छात्राओं को मुफ्त में ऑटो में बिठाता था और उनको अपने जाल में फँसाता। वह फिर शादी का झाँसा देकर अश्लील वीडियो बनाता था। उसने इन वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर दिया है।

इमरान द्वारा किया गया पोस्ट (साभार: VHP)

यह पूरा मामला मामला तब सामने आया जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने शुरू हो गए। इनमें इमरान हिंदू लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालात में दिख रहा है। जब यह वीडियो हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं तक पहुँची तब उन्होंने कार्रवाई की माँग की। कार्यकर्ताओं ने इमरान की गिरफ्तारी की माँग उठाई।

इमरान ने बकरीद पर किया विवादित पोस्ट

इमरान पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले पोस्ट करने के भी आरोप हैं। बकरीद पर भी इमरान ने एक पोस्ट किया। इसमें लिखा, “तुमने (हिंदू) भी तो कहा था होली पर बाहर मत निकलो, तुम्हें भी ईद पर बाहर नहीं जाना चाहिए। यही ‘भाईचारा’ है। अगर किसी को खून और कुर्बानी से परेशानी है, तो बाहर मत जाओ। बाहर खून की नदियाँ बहेंगी।”

बकरीद पर इमरान द्वारा किया गया पोस्ट (साभार: VHP)

इस पोस्ट के साथ इमरान ने दो वीडियो भी शेयर किए थे। इनमें एक वीडियो में एक औरत मीट काटते दिख रही है। वहीं, दूसरी वीडियो में गलियों की सड़कों पर खून बह रहा है।

हिंदू संगठनों ने मामले में की शिकायत

इमरान के आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हिंदू संगठन ने संज्ञान लिया। राष्ट्र स्वयं सेवक संघ (RSS) के संगठन धर्म जागरण संघ, बजरंग दल, धर्म जागरण समन्वय और बाँके बिहारी गौ सेना संस्थान ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस चौकी के बाहर इमरान की गिरफ्तारी की माँग की गई।

संगठन के नेताओं ने कहा, “इमरान खुद को हिंदू नाम से परिचित कराता था। हिंदू लड़कियों से नजदीकियाँ बढ़ाता। भरोसा जीतने के बाद वह उनके साथ आपत्तिजनक वीडियो बनाता और फिर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता।”

धर्म जागरण संघ के विष्णु चौहान ने ऑपइंडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा, “हमने इमरान के फोन पर कई पीड़ितों के वीडियो और फोटो देखे। हालाँकि, जब हम उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करने दोबारा गए तो पुलिस ने कहा कि डेटा मिटा दिया गया है। अब पुलिस कह रही है कि डेटा रिकवर करने के लिए उसका फोन फोरेंसिक को भेजा जाएगा।”

विष्णु चौहान ने पुलिस से लिखित में शिकायत कर दी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी है। इसमें लिखा गया है कि इमरान आए दिन धार्मिक भावना आहत करने वाली पोस्ट डालता है। इसी के साथ हिंदू समाज की लड़कियों के खिलाफ अश्लील टिप्पणी भी करता है। इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं।

कार्यकर्ता विष्णु चौहान द्वारा दर्ज की गई शिकायत (साभार: VHP)

पुलिस ने शिकायत के आधार पर इमरान के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाने में FIR दर्ज की है। इमरान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और 299 लगाकर केस दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की भी कॉपी है।

इमरान के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी (साभार: VHP)

पूरे मामले को लेकर सीओ भूषण कुमार ने बयान भी जारी किया है। उन्होंने बताया कि इमरान को भरतपुर गेट से रविवार (08 जून 2025) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस सीज किए हैं। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही उससे जुड़े नेटवर्क की खोज में जाँच की जा रही है।